चैप्टर -2 कामवती का पुनः जन्म अपडेट -23
घुड़वती और नागकुमार एक दूसरे मे खोये थे, वातावरण ही मदहोश कर देने वाली गंध से भरा पड़ा था ऊपर से दोनों ही नौ नये जवान जिस्म... दोनों ही एक दूसरे के कामुक अंगों को देख उत्तेजना महसूस कर रहे थे.
नागकुमार :- हे सुंदरी नाम क्या है तुम्हारा? कहाँ से आई हो?
घुड़वती :- हम घुड़पुर कि राजकुमारी घुड़वती है. ऐसा कह शरारत और मदहोशी मे वो अपने स्तन ढके हाँथ हटा देती है.
धम्म... से दो मदमस्त गोरे बड़े स्तन छलक जाते है.
और आप महाशय कौन है?
थोड़ा मुस्कुरा देती है
नाग कुमार को काटो तो खून नहीं. इतनी पास से ऐसी हसीन स्त्री पहली बार देख रहा था.
नागकुमार :- मै मै मममम..... मै कौन हूँ?
घुड़वती हस पड़ती है, उसे नागकुमार कि ऐसी हालत अच्छी लग रही थी.
"बोलिये बोलिये शर्माइये मत " अपने स्तन थोड़े हिला देती है.
ये नजारा देख के तो नागकुमार पानी मे ही गिर पड़ता है
आह्हः.... घुड़वती.
पानी मे गिरने से नागकुमार का निचला वस्त्र हट जाता है.
अभी चोकने की बारी घुड़वती की थी.
घुड़वती स्तंभ खड़ी रह जाती है उसने जीवन में पहली बार लंड देखा था, लंड के बाहर आ जाने से वही मादक खुशबू चारों दिशा में फैल जाती है घुड़वती जैसे ही खुशबू सूंघती है बहुत बेचैन होने लगती है क्या खुशबू है
घुड़वती :- अच्छा तो यह खुशबू तुम्हारे पास से आ रही है, ऐसा बोल घुड़वती भी पानी में उतर जाती है नाग कुमार घुड़वती को अपने पास देख कर चौक जाता है उसके लिए सब सपने जैसा था गोरे बड़े उछलते स्तन सपाट पेट गहरी नाभि नाग कुमार का लंड झटके मारने लगा झटकता लंड देखकर कर घुड़वती भी उत्तेजना महसूस करने लगी
दोनों ही जवान जिस्म एक ही आग में सुलग रहे थे
चढ़ती जवानी क्या ना करा दे दोनों के साथ वही हो रहा था
घुड़वती :- बताइए ना आप कौन हैं? उसकी आवाज़ मे अब कामुकता थी मदकता से भरे शब्द थे.
नाग कुमार. मैं मैं मैं मैं विषरूप का राजकुमार नागकुमार हूँ, एक ही झटके में सारी बात कह जाता है
घुड़वती :- अच्छा तो आप का शौक है छुप के नहाती स्त्री को देखना
वैसे यह नीचे क्या छुपा रखा है?
नाग कुमार:- कुछ भी तो नहीं, वो वो वो..तो बस ऐसे ही आपको देख के.
घुड़वती अब मदहोश हो रही थी लंड कि गंध पा कर, उसे पकड़ के देखना था महसूस करना था इस अनोखी चीज को जो उसके जवान जिस्म को बहका रही थी.
पानी मे नीचे गिरे नागकुमार के बिल्कुल पास आ के बैठ जाती है.
बताइये ना ये क्या है? लंड कि तरफ इशारा कर के पूछती है.
नागकुमार भी घुड़वती कि बात सुन सहज़ महसूस करता है लेकिन पहली बार स्त्री को इतनी पास पाकर थोड़ा घबरा रहा था थोड़ी उत्तेजना महसूस कर रहा था.
नागकुमार :- आप पकड़ के ही देख लीजिये ना घुड़वती, हिम्मत कर के बोल ही जाता है नागकुमार
घुड़वती भी समझ जाती है कि नागकुमार से कोई खतरा नहीं है, वो उसकी तरफ आकर्षित हो रही थी सुन्दर चेहरा गोरा बदन ऊपर से सुन्दर लिंग जो कि उसे मदहोश कर रहा था.
घुड़वती धीरे से अपना हाथ नागकुमार के लिंग पे रख देती है,
नागकुमार :- आअह्ह्ह.... घुड़वती ये क्या कर रही है आप? मुझे कुछ हो रहा है.
अर्ध नग्न घुड़वती कुछ सुनने सुनाने कि फिराक मे नहीं थी अपितु उसे सुनाई ही नहीं दे रहा था बस दिख रहा था ये खूबसूरत लंड.
बिना कुछ बोले वो अपनी नाक लिंग के पास ले जाती है और जोर कि सांस लेटी है.
शनिफ़्फ़्फ़.... आअह्ह्ह..... उसके मुँह से सिसकारी निकाल पड़ती है और नीचे चुत से पानी कि धार.
लंड कि गंध सीधा दिमाग मे चढ़ जाती है घुड़वती के.
नागकुमार को तो अभी भी ये समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है.
घुड़वती :- आपके इस से कोई गंध आ रही है हे नागकुमार.
नागकुमार :- मुझे तो नहीं आ रही कोई गंध, मुझे तो आपके पास से गंध आ रही है जिस वजह से मेरा लिंग खड़ा हुआ है.
आह्हः.... आपके हाथ रखने से मुझे कुछ हो रहा है राजकुमारी
दोनों जवान जिस्म आज जिंदगी का नया पाठ पड़ रहे थे, दोनों मिल के जिस्म का खजाना खोज रहे थे.
वो खजाना जो हर किसी के भाग्य मे नहीं होता.
तभी अचानक नागकुमार अपना एक हाथ बड़ा के घुड़वती के स्तन पे रख देता है..
घुड़वती चौक जाती है... आअह्ह्ह.... नागकुमार अच्छा लग रहा है.
सिर्फ मर्दाना छुवन भर से घुड़वती सिसक उठती है.
ऐसी उत्तेजना ऐसा आंनद तो कभी नहीं आया... दो कच्चे खिलाडी खेल के मैदान मे पक्के हो रहे थे.
खेल का आनंद उठा रहे थे.
घुड़वती मजे और उत्तेजना मे अपना स्तन और आगे को कर देती है ताकि नागकुमार के हाथ पुरे महसूस कर सके.
वो अभी भी एक हाथ से नागकुमार का लंड पकडे हुए थी.
नागकुमार अपने पुरे हाथ से घुड़वती के स्तन पकड़ने कि नाकामयाब कोशिश करता है स्तन इतने बड़े थे कि पुरे हाथ मे आ ही नहीं पा रहे थे.
नागकुमार स्तन मसलने लगता है,
स्तन रगड़ाई से चिंगारी छूट छूट के सीधा घुड़वती कि चुत तक पहुंच रही थी,
छोटी सी चुत लगातार पानी छोड़ रही थी.
दोनों जिस्मो मे समझौता हो चूका था आनन्द का समझौता, मादक सुख का समझौता.
अब घुड़वती के हाथ भी नागकुमार के लंड पे चलने लगे थे, उसे लंड को सहलाना अच्छा लग रहा था जैसे जीवन का अनमोल खजाना मिला हो.
नागकुमार उठ के बैठ जाता है उस से रहा नहीं जा रहा था वो स्तन रुपी फल को चख लेना चाहता था.
घुड़वती आप अतुल्य है बहुत सुन्दर है, ऐसा बोल दूसरा हाथ भी स्तन पे रख देता है.
घुड़वती के लिए ये दोहरी मार थी उसका हाथ नागकुमार के लंड पे कस जाता है.
आअह्ह्ह... नागकुमार के लंड मे ऐसा दर्द ऐसी उत्तेजना उठी कि वो झटके मार रहा था जैसे घुड़वती ने कोई मछली पकड़ी हो.
अच्छा लग रहा है घुड़वती... ये अहसास नया है..
ऐसा कह वो अपना मुँह स्तन के बिल्कुल नजदीक ले आता है, और अपनी लम्बी जबान से स्तन पे छोटे से बिंदु रुपी निप्पल को चाट लेता है.
आअह्ह्ह.... के चित्कार उठती है घुड़वतीगरम गीली जीभ, ऊपर से झरने का गिरता ठंडा पानी उसकी जान लेने पे उतारू था,जवानी का फूल खिल रहा था उसकी चुत लगातार पानी छोड़ रही थी.
नागकुमार बारी बारी स्तन चाटे जा रहा था वो पागल हो चूका था ऐसा अनमोल तोहफा पा के.
चुत से निकलती कुंवारी गंध जंगल मे दूर दूर तक फ़ैल रही थी.
ये गंध कही दूर किसी और के नाक तक भी पहुंच रही थी..
उस शख्श के भी होश उड़ जाते है वो गंध कि दिशा मे सरसरा जाता है...
इधर नागकुमार एक हाथ से स्तन मसल रहा था दूसरा स्तन उसके मुँह और जीभ के हवाले था जिसे चाट चाट के चूस चूस के निप्पल बाहर निकाल चूका था.
घुड़वती लगातार हंफे जा रही थी सिसकारी रुक ही नहीं रही थी, सुनसान वातावरण उसकी कामुक सिसकारी से गूंज रहा था.
आआआहहहह.... आआआहहहह.... नागकुमार उसके हाथ नागकुमार के लंड पे जोर जोर से चल रहे थे.
तभी नागकुमार उसकी निप्पल को दाँत मे रख के दबा देता है. घुड़वती इतनी उत्तेजित थी कि उसकी चुत भल भला के झड़ने लगती है
आअह्ह्ह..... नागकुमार मैम.. मै ममममम... गई.
मात्र स्तन चुसाई सेघुड़वती कि जवानी जवाब दे जाती है उसका यौवन चुत के रास्ते छलक उठता है. वो पीछे कि तरफ चट्टान पे लुढ़क जाती है उसके शरीर मे जान नहीं बची थी
आखिरकार उसके जीवन का पहला स्सखलन था ये.
कथा जारी है...
आज रात ही अगला अपडेट मिलेगा