Akhir chor mangus ka raaj khul hi gaya.Interesting update andypndy bhai.Intzaar rahega next update ka......EAGERLY
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाचैप्टर -2 नागवंश और घुड़वंश कि दुश्मनी अपडेट -28
घुड़वती को इस शर्म और लज्जत मे अलग ही मजा आ रहा था हवस क साथ साथ उसके बदन मे बेइज़्ज़त होने कि उमंग उठ रही थी, बेइज़्ज़त हो के सम्भोग कला मे जो मजा है आज घुड़वती को यही सीखना था.
घुड़वती सर्पटा को गर्दन हिलाके ना कह देती है, हालांकि उसे लंड कि गंध आकर्षित कर रही थी.
सर्पटा अनुभवी था उसे कोई जल्दी नहीं थी,उसे कोई जबरजस्ती नहीं करनी थी.
वो अपने शिकार से खेल रहा था और दोनों सेवक इस खेल का आनद उठा रहे थे वो दोनों दूर खड़े मालिक के अगले आदेश का इंतज़ार कर रहे थे.
सर्पटा का भी सब्र अब जवाब देने लगा था उसे घुड़वती का कामुक खजाना देखने कि तालाब मच रही थी जिसे घुड़वती ने अपनी हथेली से ढका हुआ था.
सर्पटा वापस से घुड़वती के पैरो कि तरफ बढ़ चलता है उसकी ऊँगली ऊपर होंठ से छुती नाभी तक आ चुकी थी.
सर्पटा घुड़वती के पैरो के पास बैठ जाता है और धीरे से उसके पैर के अंगूठे को मुँह मे ले के चुभला देता है.
आअह्ह्ह.... घुड़वती सिहर उठती है उसे मदकता कि असहनीय आनंद होता है रोम रोम कामुकता मे डूबने लगता है.
सर्पटा अपनी लम्बी जबान को चलाता हुआ जाँघ तक पहुंच जाता है, पूरा पैर अंगूठे से ले के जाँघ तक गिला और चिपचिपा हो गया था सर्पटा के मुँह से लगातार लार निकली जा रही थी ऐसा गरम और चिकना बदन जो चाट रहा था.
घुड़वती तो मरे सिरहन के अपना सर इधर उधर पटक रही थी उसने अपनी चुत को जोर से भींच लिया था जैसे उसमे से कुछ निकलना चाह रहा हो और वो उसे दबाने कि कोशिश कर रही है, पूरी हथेली चिपचिपे पानी से सन गई थी, चुत मादक गंध छोड़ रही थी ऐसी मादक गंध जो सर्पटा को बेचैन कर रही थी.
सर्पटा जाँघ पे अपनी लम्बी जबान को चुत कि तरफ घुमा रहा था चुत गांड से निकलती गर्मी साफ सर्पटा के चेहरे मे महसूस हो रही थी,
गर्मी और कामुक गंध से सर्पटा का हाल बुरा था नीचे उसका लंड पूरा खड़ा हो के भयानक चूका था उसके अंदर का वहसी जानवर बाहर आना चाहता था.
इसी उपक्रम मे सर्पटा घुड़वती के जाँघ पे काट लेता है दर्द सीधा चुत से टकराता है.
घुड़वती के लिए अब असहनीय होता जा रहा था ये खेल वो अपना मुँह खोले जबान बाहर निकाले अपनी जबान चाट रही थी.
बस बोल नहीं पा रही थी कि चोदो मुझे.
सर्पटा :- अरे सुप्तनाग गुप्तनाग खड़े क्यों हो देखो बेचारी कैसे तड़प रही है अपनी जबान चला रही है.
दोनों ये आदेश सुन के ख़ुश हो जाते है तुरंत घुड़वती के सिरहाने पहुंच जाते है अपने नंगे खड़े लंड लिए हुए.
दोनों के लंड घुड़वती के मुँह और नाक के करीब लहरा रहे थे लंड से निकलती गांड उसे मदहोश कर रही थी बेचैनी पैदा कर रही थी,
वो लंड मुँह मे भर लेना चाहती थी लेकिन अभी भी थोड़ा विरोध बाकि था उसमे, वो मुँह बंद कर लेती है परन्तु दो दो मोटे काले लंड उसके मुँह के करीब थे. अपनी आँखों के इतना करीब वो पहली बार देख रही थी.
सुप्तनाग अपना लंड उसके होंठो से छुवा देता है, घुड़वती अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लेती है,
दूसरी तरफ गुप्तनाग अपना लंड लिए खड़ा है, घुड़वती के होंठ गुप्तनाग के लंड से छुवा जाते है.
ऐसे ही दोनों अपने लंड घुड़वती के होंठो पे मारने लगते है कभी रागढ़ते है.
नीचे सर्पटा लगातार जाँघ को चुत तक चाट रहा था, कभी चुत ढकी हथेली पे लगे चुतरस को चाट लेता.
नीचे ऊपर होते हमलोग से घुड़वती कि हालात ख़राब हो चली थी वो अपना मुँह खोल देती है आखिर कब तक सह पाती उअके जवान बदन को यही पसंद आ रहा था.
मुँह खुलते ही सुप्तनाग का मोटा टोपा घुड़वती के गिके गरम मुँह मे समा जाता है,
घुटी हुई सी सिसक निकाल जाती है.
मुँह मे लंड लिए घुड़वती अंदर ही अंदर सुपडे पे अपनी जीभ चलाने लगती है.
सुप्तनाग आनंद से अपनी आंखे बंद कर लेती है ना जाने कहाँ से घुड़वती मे ये कला आ गई थी.
सर्पटा :- सुंदरी हमें भी तो अपनी प्यारी चुत के दर्शन कराओ ऐसा बोल के वो अपना हाथ चुत ढकी हथेली पे रख देता है.
घुड़वती कि तो जान ही निकाल जाती है वही तो उसका आखिरी खजाना था जिसे वो अब तक छुपाये रखी थी.
परन्तु मुँह मे घुसा लंड कुछ अलग ही जादू चला रहा था धीरे धीरे सुप्तनाग अपने लंड को आगे पीछे करने लगा था.
सर्पटा हल्का सा जोर लगा के हथेली हटाता है इस बार कोई विरोध नहीं था घुड़वती का चिपचिपा हाथ हटता चला जाता है.
और जो नजारा सामने आता है उसे देख तीनो चकित रह जाते है एक बार तो भूल ही जाते है कि वो क्या करने आये है यहाँ.
एकटक तीनो घुड़वती कि चुत को घूरते रह जाते है.
एक दम गोरी चिकनी चुत बाल का एक कतरा भी नहीं कामरस से पूरी भीगी हुई.
चुत के नाम पे सिर्फ एक लकीर थी उसके नीचे बारीक़ सा गांड का छेद.
आअह्ह्हह्ह्ह्ह.... हे नागदेव
सर्पटा कि आह निकाल गई थी उसे अपने देवता याद आ गये थे ये नजारा देख के.
ऐसी चुत तो उसने कभी पुरे जीवनकल मे ही नहीं देखि थी.
यही हाल सुप्तनाग और गुप्तनाग का भी था.
इनसब से अनजान घुड़वती आंख बंद किये सुप्तनाग के लंड पे मुँह चला रही थी.
उसे पता ही नहीं पड़ा कि कब सुप्तनाग ने धक्के लगाना बंद किया और वो खुद अपने होंठो मे लंड दबाये आगे पीछे कर रही थी.
हवस सर पे चढ़ चुकी थी उसको कोई होश नहीं था उसे मजा आ रहा था सिर्फ मादक मजा
उसका बदन भट्टी कि तरह जल रहा था
सर्पटा कि लापलापति लम्बी जीभ चुत कि लकीर को छू जाती है.
आअह्ह्ह.... कि चीख सुप्तनाग के मुँह से निकलती है, घुड़वती ने मारे लज्जत और हवस से सुप्तनाग का लंड अपने दांतो तले भींच लिया था, जैसे किसी ने उसकी आत्मा पे जलती सालाख रख दि हो ऐसा अहसास हुआ था घुड़वती को अपनी चुत पे.
सर्पटा लप लप करता चुत से निकलते झरने को अपने मुँह ने समेटता जा रहा था,लेकिन घुड़वती कि लकीर नुमा चुत से कामरस का समुन्द्र निकाल रहा था जिसको मुँह मे भर पाना किसी के बसमे नहीं था सर्पटा के मुँह से थूक और कामरस निकल निकल के गांड के छेद को भिगो रहा था.
अब घुड़वती किसी भी वक़्त अपने चरम पे पहुंच सकती थी.
अचानक तीनो अपनी जगह से उठ खड़े होते है...
ये क्या फिर क्या हुआ अब नहीं इस बार नहीं....
घुड़वती आंखे खोल देती है उसकी आंख मे सिर्फ हवस थी सच्ची हवस
बस उसे कोई स्सखालित कर दे कोई अच्छा बुरा नहीं था बस लंड दिख रहा था उसे.
इस बार चिल्ला उठती है
घुड़वती :- ऐसा मत करो मै मर जाउंगी
सर्पटा :- तो बोल ना क्या चाहिए?
घुड़वती :- वो... उसके लंड कि तरफ इशारा कर देती है.
सर्पटा :- मुँह से बोल छिनाल क्या चाहिए?
घुड़वती चीखती हुई लंड चाहिए मुझे लंड दो....
मै मार जाउंगी.
पागलो कितरह अपने बाल खींचने लगती है.
सर्पटा उसकी हरकत देख के ठहका लगा देता है, हाहाहाहाहा.... " सोच ले फिर एक बार मै शुरू हुआ तो रुकूंगा नहीं "
बेचारी घुड़वती सम्भोग से अनजान रही उसे क्या पता कि इतना बड़ा लंड लेने से क्या हो सकता है.
वो फिर चिल्ला देती है.
घुड़वती :- मुझे कुछ नहींपता, कुछ करो मेरे साथ मेरा बदन जल रहा है,
स्तन दर्द कर रहे है मै सहन नहीं कर सकती
मै हाथ जोड़ती हूँ तुम लोगो के आगे कुछ करो.
घडवती कि आवाज़ मे हवस थी लाचारी थी वो चुदने कि भीख मांग रही थी.
इसी मे तो सर्पटा को मजा आता था.
सर्पटा अपना लंड ले के चल पड़ता है घुड़वती कि और एक ही बार मे टांग पकड़ के दोनों दिशाओ मे फैला देता है अब सर्पटा नामक जानवर कि बारी थी बेवकूफ घुड़वती उसने राक्षस कोआमंत्रित कर दिया था.
सर्पटा अपना भरी भरकम लंड घुड़वती कि कैसी हुई बंद चुत पे रख देता है. और धक्का लगाता है लंड फिसलता हुआ ऊपर को नाभी पे जा लगता है.
आअह्ह्ह.... सिसकारी मार के रह जाती है घुड़वती
सर्पटा फिर कोशिश करता है अंजाम वही.
घुड़वती लंड कि छुवन पा के भीफर उठी थी उसने होना धड ऊपर उठा लिया था तनिक भी नहीं सोचा कि इतना बड़ा मोटा लंड छोटी सी चुत मे जायेगा कैसे.
सर्पटा घुड़वती कि चुत ोे अपने लंड को अच्छे से रगड़ के गिला करता है ढेर सारा थूक गिरा देता है...
इस बार धक्का मरता है,
एक ही बार मे जोरदार.... धाकककककक..... से
पच करता लंड का टोपा अंदर समा जाता है, चुत के किनारे एक दूसरे का साथ छोड़ने लगते है, उनके बीच से खून कि एक पतली धार पाचक से निकल सर्पटा के टट्टो पे पड़ती है.
घडवती का सीना ऊपर आसमान को तन जाता है उसकी सांस अटक जाती है आंख पथरा जाती है.
उसके मुँह से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी...
एक धक्का और आधा लंड अंदर कोई रहम नहीं कोई दया नहीं.
लेकिन इस बार आअह्ह्हह्म......उह्म्म्मम्म ..... बाहर निकालो
चीख से जंगल गरज उठा था.
घुड़वती ने अंजाम सोचा ही नहीं था सारी हवस सारी उत्तेजन चुत मे ही दफ़न हो गई थी.
सर्पटा हस रहा था. हाहाहाहा..... सुंदरी ये तो शुरुआत है मैंने पहले ही आगाह किया था
घुड़वती चीख रही थी उसकी आँखों मे आँसू थे.
सर्पटा इशारा करता है...
गुप्तनाग तुरंत घुड़वती का मुँह पकड़ लंड ठूस देता है उसकी चीख हलक मे दब जाती है.
हलक और चुत दोनों सुख चुके थे घुड़वती के.
सर्पटा लंड बाहर को खिंचता है.
घुड़वती को लगता है जैसे चुत बाहर को आ के पलट जाएगी, चुत के बाहरी मुख ने लंड पे कब्ज़ा कर लिया था जैसे अपने प्रेमी से मिली प्रेमिका हो जो बरसो बाद मिली है छोड़ना ही नहीं चाहती.
सर्पटा थोड़ा सा लंड बाहर खींच वापस ठेल देता है....
घुटी से चीख घुड़वती के गले मे दबी रह गई, उसकी बेबसी, लाचारी, दर्द सिर्फ उसके आँसू ही बता रहे थे, उसमे तो इतनी भी जान नहीं थी कि वो अपने हाथ पैर हिला पाती.
सुप्तनाग भी घुड़वती के सिरहाने पहुंच अपना लंड उसके मुँह पे मारने लगता है इरादा मुँह मे घुसा देने का था परन्तु जगह नहीं थी गुप्तनाग का लंड पहले ही गले तक घुसा हुआ था,
तो क्या हुआ जगह तो बनाने से बनती है यहाँ भी बनेगी.
घुड़वती अपने एक हाथ से लंड पकड़े हुई थी
नीचे सर्पटा एक के बाद एक भयंकर बेरहमी के साथ लंड ठेले जा रहा था, खून से गोरी चुत लाल हो चुकी थी अभी तो आधा लंड ही घुसा था.
आधे लंड को ही आगे पीछे कर रहा था या यु कहो कि घुड़वती कि चुत मे जगह ही नहीं थी लंड जाने कि, सर्पटा सब्र से काम ले रहा था.
परन्तु ऊपर सुप्तनाग का सब्र जवाब दे गया था,गुप्तनाग के लंड निकलते ही जैसे ही घुड़वती चिल्लाने को हुई सुप्तनाग ने अपना लंड एक ही बार मे गले तक ठूस दिया,
चीख सिर्फ घुटन बन के रह गई, घुड़वती का गला और मुँह दर्द करने लगा था परन्तु चिंता किसे थे यहाँ तो तीनो जानवर थे.
एक लंड निकलता दो दूसरा लंड ठेल देता, दूसरा निकालता तो पहका गले तक उतार देता.
नीचे लगातार धक्के पड़ रहे थे धच धच धच.....
अब घुड़वती को भी दर्द के साथ थोड़ा मजा आने लगा था उसकी उमंग लौट आई थी.
लगातर होते घरषण से चुत पानी छोड़ने लगी थी, खून बंद हो गया था
, मुँह मे पड़ते लंड आनद दे रहे थे.
परन्तु सर्पटा को घुड़वती का यु आनंद लेना पसंद नहीं आया, वो अपना पूरा लंड बाहर को निकाल लेता है और दोनों टांगो को पकड़ के स्तन से घुटने लगा देता है.
घुड़वती कुछ समझ पाती उस से पहले ही गांड के छोटे से छेद को भेदता हुआ लंड अंदर समा जाता है पूरा का पूरा
उसके टट्टे गांड मे धच से धंस जाते है.
घुड़वती कि आंखे उलट जाती है, उसकी जान जैसे निकल गई हो ना कोई चीख ना कोई हरकत लंड मुँह से निकल चुके थे सर पीछे को झुक गया था.
गुप्तनाग :- मालिक लगता है झेल नहीं पाई बड़ी जल्दी ही मर गई.
सर्पटा :- अभी कहाँ मरी, घोड़ी है जवान घोड़ी इतनी जल्दी ना मरने कि.
बोल के सर्पटा पूरा लंड बाहर निकाल देता है उसका लंड खून से सना हुआ लाल चत बाहर आया, गांड बाहर को खींची चली आई थी घुड़वती कि.... धापपाक एक बेतहाशा बेदर्द धक्का और पूरा लंड वापस गांड के जड़तक.
आआहहहह..... आहहहह...... घुड़वती होश मे आ जाती है इस हमले से जैसे बेजान शरीर मे प्राण लौट आये हो.
उसे समझ आ गया था कि उसने हाँ कह के बहुत बड़ी गलती कर दि, उसकी हवस आज उसकी जान लेने पे आमदा थी.
जोरदार चीख पुरे जंगल मे गूंज उठी थी..... चीख इतनी दूर गई कि जंगल मे प्रवेश करते एक शख्स के कानो मे भी पहुंची...
नाग कुमार जल्दी काम ख़त्म कर के जंगल के मुहने आ चूका था, उसे अपनी प्रेमिका, होने वाली राजकुमारी से मिलना था...
उसके कान मे एक तीखी चीख सुनाई पड़ती है....
नागकुमार :- ये कैसी चीख है जंगल के अंदर से ही आ रही है.
नागकुमार चीख कि दिशा मे बढ़ जाता है.
दूसरी तरफ घुड़पुर मे आज सुबह ही घुड़पुर का राजकुमार वीरा वापस महल आया हुआ है,
आज रक्षाबंधन जो था परन्तु सुबह से ही घुड़वती को महल मे ना पा के वो बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहा है.
घुड़वती हवस मे ऐसी डूबी थी कि उसे ये भी ध्यान नहीं रहा कि आज उसका भाई वीरा आएगा रखी बंधवाने.
वो मदमस्त घोड़ी तो नाहकुमार से मिलने चल पड़ी थी.
परन्तु शाम होने को आई घुड़वती वापस नहीं आई, उसकी किसी सखी सहेली को भी नहीं बता के गई.
बेचैनी और चिंतावश वीरा घुड़वती को ढूढ़ने महल से बाहर निकल पड़ता है.
क्या घुड़वती जिन्दा बचेगी?
या उसकी हवस उसके प्राण हर लेगी?
कथा जारी है...
बहुत ही सुंदर और लाजवाब अपडेट है भाईचैप्टर -2 नागवंश और घुड़वंश कि दुश्मनी अपडेट -29
सर्पटा लगातार गांड कि जड़ मे धक्के मारे जा रहा था, फच फच फच... कि आवाज़ से जंगल हिल रहा था.
सर्पटा जानवर बन चूका था उसे घुड़वती कि चीख से कोई लेना देना नहीं था.
वापस से एक झटके मे लंड बाहर खिंचता है और इस बार पूरा का पूरा लंड चुत मे जोरदार धक्के के साथ पेल देता है.
लंड चिकना हो चूका था बेकाबू सर्पटा इतनी जोर से लंड घुसाता है कि लंड चुत चिरता हुआ बच्चेदानी को भेद देता है.
घुड़वती अपनी जिन्दगी कि आखिरी चीख निकालती है फिर वही पत्थर पे लुढ़क पड़ती है.
ये आखिरी चीख नागकुमार के कान मे पहुँचती है वो झरने के पास आ चूका था, सर्पटा कि पीठ नागकुमार कि और थी.
उसने साफ घुड़वती को चीखते सुना था.
नागकुमार वही पत्थर बन के रह गया.
सर्पटा अभी भी खून से सनी चुत मे धक्के मरे जा रहा था धच धच धच.....
सुप्तनाग :- मालिक मालिक..... वो मर गई है जाने दे अब
सर्पटा धच धच धच.... आआहहहह..... करता अपना सारा वीर्य चुत मे भर देता है.
स्सखालित होते ही उसे होश आता है वो घुड़वती कि तरफ देखता है वो निढाल हो चुकी थी सांसे थम है थी..
सर्पटा पक से अपना लंड बाहर निकलता है घुड़वती कि लकीर नुमा चुत और गांड पूरी गुफा जैसी हो चुकी थी जिसमे से खून और वीर्य निकल रहा था.
हवस का दर्दनाक अंत हो चूका था.
सर्पटा :- साली घोड़ी हो के भी लंड झेल ना पाई....
हाहाहाहा....
तभी एक तलवार का वार होता है सर्पटा का सर धड से अलग, महान सम्राट, भयानक सर्पटा नागो का राजा सिर्फ एक वार मे मरा पड़ा था.
उसके ठीक पीछे लहू से सनी तलवार लिए अपने रोन्द्र रूप मे नागकुमार खड़ा था, सुप्तनाग, गुप्तनाग उसका ऐसा रूप पहली बार देख रहे थे कोमल सा, मासूमसा दिखने वाला नागकुमार अपने रोन्द्र रूप मे था.
एक वार और सुप्तनाग गुप्तनाग भी गिर पड़ते है.
प्रेम पूरा ना जो तो विनाश कि ताकत स्वमः पनप जाती है वही नागकुमार बन चूका था
वो घुड़वती के करीब पहुँचता है घुड़वती कि हालात देख उसका दिल जार जार रो रहा था.
वो अपना रोन्द्र रूप त्याग चूका था बिल्कुल बेबस निढाल बेचारा नागकुमार घुड़वती के ऊपर झुकता चला जाता है.
तभी तिगाड़ तिगाड़... टप टप टप..... कि आवाज़ के साथ एक भयंकर गर्जना उठती है
"दूर रह नीच पापी मेरी बहन से "
वीरा घुड़वती को ढूंढता जंगल आ चूका था,
नागकुमार जैसे ही वीरा को देखता है चकित रह जाता है वीरा अपने अर्ध घुड़रूप मे तलवार लिए आँखों से अँगारे बरसा रहा था.
नागकुमार के हटते ही वीरा कि नजर घुड़वती पे पड़ती है वो बदहावस सा आगे बढ़ता है अनहोनी कि शंका उसके दिल मे घर करने लगी, करीब पहुंच के देखता है घुड़वती बिल्कुल नंगी, जननअंगों से खून और वीर्य निकाल रहा था, सांस नहीं चल रही थी.
वीरा गुस्से से हिनहिनाने लगता है उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था..
गुस्से से भरा वो नागकुमार कि और पलटता है.
नागकुमार :- मेरी बात सुनो घुड़ राजकुमार....
वीरा :- नहीईईईई......तलवार का एक जबरजस्त वार और गर्दन अलग हो के दूर गिर पड़ती है.
वार इतना जबरजस्त रहा कि तलवार धड मे लग के वही चट्टान मे धस जाती है,
वीरा रुनदन कर उठता है,"मेरी बहन देख आज रक्षाबंधन है और मे तेरी रक्षा नहीं कर पाया "
जार जार रोता वीरा घुड़वती को गोद मे लिए घुड़पुर कि ओर दौड़ा चला जा रहा था.
आँखों मे अँगारे थे ये अँगारे विनाश के थे.
पीछे बची थी सिर्फ लाश नागवंश कि लाश...
चैप्टर -2 नाग वंश और घुड़वंश कि दुश्मनी
समाप्त
चैप्टर -3 नागमणि कि खोज
आरम्भ
कथा वापस से वर्तमान मे जारी है....
गांड बन्दुक सीना संन्दुकबहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
घुडवती की गांड बंदुक और सिना संदूक हो गया
चुत की तो पुछो ही मत
सर्पटा का लंड जो खा गया