“लेकिन जब मैं अपना लंड इस चूत के अंदर डालूंगा तो सिर्फ 10-15 दिन में ही तुम जवान हो जाओगी... महक जैसी मोटी चूचियों वाली, भरी-भरी गांड वाली और रसीली चूत वाली।” पिताजी ने बेटी की चूत को उँगलियों से खोलते हुए कहा।
सलोनी की चूत अब जल रही थी। उसने अधीर होकर कहा, “फिर पूछ क्या रहे हैं बाबूजी! लौड़ा पेलिए, उंगली पेलिए या चाटिए... जो करना है जल्दी कीजिए। मेरी चूत बहुत गरम हो रही है... बहुत खुजली हो रही है। मुझे अब कुछ हो रहा है। समज में नहीं आ रहा है की कुछ हो रहा है या रहा नहीं जा रहा!”
पिताजी ने बेटी को अपनी गोद से उठाया और उसे मास्टर बेडरूम के बड़े बिस्तर पर लिटा दिया - उसी बिस्तर पर जहाँ वे अपनी पत्नी प्रभा को सालों से जोर-जोर से चोदते आए थे।
“लौड़ा देखेगी? चूत में लेगी?” पिताजी ने पूछा।
"बेटी, तुमने कभी लंड को देखा है?" पिताजी ने उसकी कमर को सहलाते हुए पूछा।
सलौनी को बड़ा झटका लगा। अब इस का क्या जवाब दूँ! ऐसा तो कह नहीं सकती की देखा क्या मेरी चूत दो लंडो को चबा चुकी है। पर बिना देरी किये उसके मगज के तरंगो ने जवाब दे दिया।
"आपने कभी ऐसा मौक़ा ही नहीं दिया पापा।"
"फिर भी कभी कुछ तो देखा होगा?" पिताजी ने उत्सुकता से पूछा। " आजकल की लोंडिया कही ना कही लंड को देख तो लेती ही है।"
"हाँ वैसे पिताजी आपका लंड देखा है लेकिन पूरा नहीं, जब आप नहाके आते थे और कभी कभी मम्मी से मस्ती करते थे तब कुछ हद तक आपका ही तो लंड देखा है लेकिन ज्यादा और करीबी से नहीं। नाही मैंने लम्बाई देखि है ना मोटाई बस आगे का सुपारा देखा है। जो की मुझे आकर्षित करता था।" सलौनी ने मादकता बढाई।
"कोई बात नहीं बेटी अब लंड को देखोगी?" पिताजी सलौनी के जवाब से खुश होते हुए बोले। बेटी ने सिर्फ मेरा सुपारा ही देखा है मतलब लंड को वे बड़े आराम से दिखा सकते है।
“हाँ...जो दिखाओगे देखूंगी भी और चूत में लुंगी भी। आप जल्दी कीजिये।” सलोनी ने साँसें फुलाते हुए कहा।
पिताजी खड़े हो गए और अपने सारे कपड़े उतार दिए। उनका मोटा, 7 इंच से ज्यादा लंबा और अच्छी मोटाई वाला लंड पूरी तरह खड़ा होकर तना हुआ था। सुपारा चमक रहा था। लेकिन मुनीमजी से कही कम था। फनलव रचित कहानी।
सलोनी ने पिता का लंड देखा तो उसकी आँखें फैल गईं। उसे उम्मीद थी कि पापा का लंड परम और मुनीमजी (जिसने कल रात महक को चोदा था) जितना बड़ा और मोटा नहीं होगा, लेकिन यह काफी मोटा और लंबा था। लेकिन जैसे की उसे उम्मीद थी पिताजी का लंड मुनीमजी जैसा तो बिलकुल भी नहीं था। लेकिन कुछ हद तक चले ऐसा था। मानो की अगर कोई लड़की पहली बार चुदवाती है तो उसे यह लंड अच्छा, बड़ा और मोटा लगेगा लेकिन जो लड़की मुनीमजी के निचे से गुजरी है उसे यह लंड उतना बड़ा नहीं लगेगा। अब यह तो स्वाभाविक था।
उसने आगे बढ़कर पिता के लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया और सहलाने लगी। “बाप रे... इतना मोटा और लंबा... ये मेरी चूत में कैसे जाएगा?” उसने ऐसा सोचा की ऐसे बोलने से पिताजी ज्यादा उत्साहित होंगे और वह उसकी सूजी हुई चूत के बारे में ज्यादा सवाल नहीं करेंगे।
उसने कुछ बार मुठ मारते हुए बोली, “माँ कैसे इसे रोज लेती है...?” फनलव रचित कहानी।
पिताजी ने मुस्कुराते हुए बेटी के क्लिटोरिस पर चुटकी काटते हुए कहा, “इससे भी मोटा और लंबा लंड तेरी चूत में जाएगा बेटी।”
फिर उन्होंने सलोनी की चूत को उँगलियों से फैलाते हुए कहा, “लगता है तू बिल्कुल कुंवारी है... किसी ने इसे अब तक नहीं चोदा है, है ना?”
सलोनी ने सीधे पिता की आँखों में देखकर ऐलान किया, “चोदा है बाबूजी...” रचयिता फनलव है।
ये सुनकर पिताजी का चेहरा उतर गया। वे दुखी हो गए। भारी मन से उन्होंने पूछा, “किसने चोदा? और कब?”
“अरे बाबूजी... कल रात पूनम और महक रात भर मेरी चूत में उंगलियाँ घुसा-घुसाकर मुझे चोदती रहीं...” सलोनी ने कहा।
पिताजी का चेहरा तुरंत चमक उठा। “मेरी जान, वो चुदाई नहीं होती बेटी...” वह खुश थी की वह अपने पापा को चुतिया बनाने में सफल हुई थी।
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बने रहिये दोस्तों............