बहुत ही मस्त और शानदार अपडेट है भाई मजा आ गयाफिर एक दिन मेरी मां की कुछ सहेलियां घर पर आई हुई थी। मेरी मां और उनकी चार पांच सहेलियों का एक ग्रुप था। यह सभी लगभग एक ही उम्र की थी और उन में से कई तो मेरी माँ की तरह विधवा थी, जो शादीशुदा भी थी वो भी लगता है की सेक्स की भूखी ही थी या उनका अपने पति से सेक्स का कोटा पूरा नहीं होता था. यह लोग हर कुछ दिन में एक-दूसरे के घर पर मिलती थी। यह उस टाइम पर मिलती थी जब उनके पति घर पर नहीं आते। तांकि खुल कर बात कर सके। मैंने सोचा की चलो आज इनकी बातें सुनी जाये। देखे ये कैसी बातें करते हैं।
शुरुआत में तो वे फालतू बातें कर रही थी अपने घर परिवार की, जो सब औरतें करती है। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे उनकी बातो में खुलापन आने लगा। धीरे-धीरे वो अपनी पर्सनल बातें करने लगे। इन सब औरतों की बातो में एक बात तो समान थी कि यह सब उनके पति से खुश नहीं हो पा रही थी,
इनकी बात-चीत में इन लोगों ने यह बात पर भी चर्चा की कि अगर हम बाहर भी चुदाई करा ले, तो अपने आप को तो ठंडा कर सकते हैं। लेकिन इन लोगों ने उस विचार को ही खत्म कर दिया क्यूंकि यह सब बदनामी से डरती थी।
इसी बातचीत में मेरी मां ने एक बात बोली। जिसको सुनने के बाद मुझे लगा कि मेरा काम बन जायेगा।
अगर तुम में से कोई यह सोच रहा है कि मेरी मां ने कहा चलो अपने बेटों से चुदवा लेते हैं, तो ऐसा उसने कुछ नहीं कहा। मेरी मां ने जो बात कही थी, वह यह थी कि,
“आज-कल तो लड़के-लड़कियां 18-19 की उम्र में चोदने लगे हैं,
अगर हम भी आज के ज़माने में पैदा हुई होती, तो चुदाई का पूरा मजा लेती। पर क्या करें हम पुराने जमाने की औरतें है, अब मेरी ही उदाहरण लो। मेरे पति को मरे हुए १० साल हो चुके है. पर मैं तो जिन्दा हूँ. पर क्या करूँ. मेरी चूत का कोई इलाज नहीं है. मेरा भी मन करता है की कोई मुझे जोर जोर से अपने बड़े और मोटे से लण्ड से चोदे, पर मैं क्या करूं.
मैं तड़प के रह जाती हूँ. मैं बाहर भी किसी से चुदवा नहीं सकती क्योंकि बाद में वो आदमी मेरे को ब्लैकमेल कर सकता है और फिर मुझे रंडी की तरह हर रोज खुद या अपने दोस्तों से भी चुदवाने को कहेगा. और अगर वो बात किसी को पता चल गयी तो मैं तो बहुत बदनाम हो जाउंगी. मेरा एक ही बेटा है. वैसे भी उस बेचारे की शादी नहीं हो रही और अगर मेरी ऐसी बदनामी हो गयी तो उसकी भी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी. इसलिए मैं मन को मार कर रह जाती हूँ.
बस अब तो खीरे या मूली का ही सहारा है या अपनी उँगलियों से काम चलाना पड़ता है. पर उस में वो मजा कहाँ जो टांगे चौड़ी करके लेट जाने में है.
बस नंगी होकर लेट जाओ और आदमी खुद ही लण्ड अंदर डाल कर कस कस कर चोदता है.
आराम से पूरे लौड़े के अंदर बाहर होने के एहसास का मजा लो। अब खीरा मूली में तो खुद ही अपने ही हाथ से अंदर बाहर करना पड़ता है. ”।
माँ की सहेलियों ने भी उनकी बात का समर्थन किया और कहा की उनकी भी ऐसे ही स्थिति है.
Friend.Disgusting![]()
Just pics buddy.its not about storyFriend.
What is disgusting ?
Do you not like the story?
Pl suggest the changes you want or better to write yourself better.
It is very easy to condemn something but very difficult to do something yourself.