If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.
जेठालाल जुनून और अंजलि भाभी के गोरे जिस्म को आपस में बांटने की बात सुनकर गोडाउन में अजीब सी खामोशी छा गई। सभी मर्दों के दिमाग की बत्तियां जल चुकी थीं। अब सवाल यह था कि अंजलि भाभी जैसी संस्कारी और पतिव्रता औरत को इस कामुक जाल में फंसाया कैसे जाए? सब अपनी-अपनी मूंछों पर हाथ फिराते हुए गहरे सोच में डूब गए।
तभी भिड़े थोड़ा हिचकिचाते हुए, अपनी उंगलियों को आपस में मरोड़ते हुए बोला, "देखो भाइयों... मेरे दिमाग में एक तरकीब आ रही है। लेकिन..."
भिड़े को इस तरह अटकते देख जेठालाल से रहा नहीं गया। वह खुशी के मारे सोफे से उछल पड़ा और जोर से बोला, "अरे भिड़े भाई! अब इस बंद गोडाउन में इतना शर्मा क्यों रहे हो यार? साफ-साफ बोलो ना! अंजलि भाभी के उस मादक बदन का मजा हम सबको लेना है, उन्हें चोदना है, तभी तो हम सब इस अंधेरे में यहां बैठे हैं। और यह बात सिर्फ और सिर्फ हम पांचों के बीच ही रहेगी। क्यों दोस्तों, मैं सही कह रहा हूँ ना?"
"हाँ, बिल्कुल सही!" सोढ़ी, पोपटलाल और अय्यर ने एक सुर में अपनी लालसा से भरी सहमति दी। सबकी आंखों में अंजलि के उस सुडौल बदन को नंगा देखने की भूख साफ झलक रही थी।
सबका साथ पाकर भिड़े का हौसला बढ़ा। उसने चश्मा नाक पर टिकाया और अपनी योजना खोलते हुए कहा, "देखो भाइयों, हम सब एक साथ अंजलि भाभी पर डोरे नहीं डाल सकते। वैसे तो सबने अपनी-अपनी कोशिश की, लेकिन सच तो यही है कि अंजलि भाभी पूरी सोसाइटी में सबसे ज्यादा करीब जेठालाल तुम्हारे ही हैं। तुम उनके घर चाहे जब चले जाते हो, वो तुम्हें अपना बड़ा भाई मानती हैं और तुम्हारा उनके यहाँ दिन-रात का आना-जाना है। तो मेरा मशवरा यह है कि पहले जेठालाल तुम ही उन्हें अपने जाल में फंसाओ। एक बार वो तुम्हारे बिस्तर पर आ गईं, तो फिर भाभी कहीं भागी थोड़े ही जा रही हैं! उसके बाद एक-एक करके हम सब उनके उस रसीले और गोरे जिस्म का जी भरकर मजा लेंगे।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भिड़े ने अपनी शातिर आंखें मटकाईं और एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक देते हुए बोला, "और सुनो, उन्हें पटाने का रास्ता भी मैं बताता हूँ। याद है कुछ दिन पहले पोपटलाल ने एक सीक्रेट मिशन का नाटक किया था, जिसमें अंजलि भाभी उसकी नकली बीवी बनी थीं? वो प्लान सबसे धांसू था! तो मेरा आइडिया यह है कि हम वैसा ही एक नकली मिशन फिर से तैयार करेंगे। लेकिन इस बार, उस फेक मिशन में अंजलि भाभी का नकली पति पोपटलाल नहीं... बल्कि जेठालाल, तुम बनोगे!"
यह सुनते ही जेठालाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसकी आंखों के सामने अंजलि भाभी का वह भारी और कसा हुआ बदन नाचने लगा। उसने आव देखा न ताव, तुरंत आगे बढ़कर भिड़े को कसकर गले से लगा लिया और बोला, "वाह भिड़े भाई वाह! तुम्हारे इस मास्टरमाइंड दिमाग की दाद देनी पड़ेगी! मान गए भाई तुम्हें!"
जेठालाल ने भिड़े की पीठ थपथपाते हुए सभी मर्दों की तरफ देखा और बेहद कामुक लहजे में कहा, "भिड़े का आइडिया एकदम कड़क है यार! इस बार उस नकली पति-पत्नी वाले खेल में अंजलि भाभी का पति यह जेठालाल बनेगा। देखना, इस बार अंजलि भाभी पक्का पिघलेंगी। हम सब मिलकर इस छठे दिन कुछ ऐसा चक्रव्यूह रचेंगे, ऐसा तगड़ा जाल बिछाएंगे कि अंजलि भाभी के पास बचने का कोई रास्ता ही नहीं बचेगा। वो खुद तड़पकर, अपनी मर्जी से अपना यह गोरा और रसीला जिस्म मेरे हाथों में सौंप देंगी और मुझे अपने हुस्न के साथ खेलने देंगी!"
भिड़े का यह लाजवाब आइडिया सुनकर गोडाउन में बैठे सभी मर्दों के चेहरे खिल उठे। सोढ़ी ने हवा में मुक्का मारा, अय्यर मंद-मंद मुस्कुराने लगा और पोपटलाल अपनी छतरी हिलाते हुए खुशी से झूम उठा। अंजलि भाभी के पवित्र बदन को अपनी हवस का शिकार बनाने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो चुका था।
गोडाउन की उस गरमा-गरम मीटिंग के बाद, शाम ढलते ही गोकुलधाम सोसाइटी की रंगत बदल चुकी थी। रात के नौ बजते ही अब्दुल की सोडा शॉप पर सारे मर्द इकट्ठा हो गए। भिड़े, सोढ़ी, पोपटलाल और अय्यर ने तारक मेहता के आने से पहले ही आपस में पूरा डिटेल प्लान फाइनल कर लिया था। भिड़े ने सबको समझा दिया था कि जेठालाल सीधे मेहता साहब के घर जाकर अपनी दुकान की मुसीबत का नाटक करेगा और अंजलि भाभी को अपनी नकली पत्नी बनाने की बात रखेगा।
तभी दूर से तारक मेहता आते हुए दिखे। उन्हें देखते ही जेठालाल ने बाकी मर्दों को आँखों ही आँखों में इशारा किया। सबने मिलकर योजना के मुताबिक तारक के सामने सीधे-सीधे कुछ न बोलकर, अंजलि भाभी के हुस्न और उनकी गजब की समझदारी की जमकर तारीफ करनी शुरू कर दी। वे तारक के सामने एक-एक करके नए-नए तर्क दे रहे थे कि क्यों अंजलि भाभी पूरी गोकुलधाम सोसाइटी की सबसे बेस्ट बीवी हैं।
सोढ़ी ने सोडे का बड़ा घूंट लेते हुए कहा, "ओए मेहता भाई! सच कहूं तो तुम दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान हो जी। भाभी जैसी खूबसूरत, मॉडर्न और संस्कारी बीवी किस्मत वालों को ही मिलती है। पूरे गोकुलधाम में उनके जैसा सुघड़ और ख्याल रखने वाला कोई नहीं है।" भिड़े ने अपने चश्मे को नाक पर ठीक करते हुए नया तर्क जोड़ा, "बिल्कुल सही सोढ़ी भाई। अंजलि भाभी जैसी पढ़ी-लिखी और सलीकेदार औरत अगर किसी महफिल में मर्द के साथ खड़ी हो जाए, तो बाकी सारे मर्दों की नजरें सिर्फ उन्हीं पर टिक जाती हैं। वे न सिर्फ घर संभालती हैं, बल्कि तारक भाई के डाइट से लेकर उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का जो ध्यान रखती हैं, वो कमाल है। गोकुलधाम की बेस्ट बीवी का खिताब तो सिर्फ उन्हीं को जाना चाहिए।"
अय्यर और पोपटलाल ने भी हाँ में हाँ मिलाई। तारक इन बातों को सुनकर अंदर ही अंदर बहुत गर्व महसूस करने लगे। उनके दिमाग में अनजाने ही अपनी अंजलि का वो सुडौल और कड़क बदन तैरने लगा, जिसे पूरी सोसाइटी इतनी हसरत और सम्मान से देखती थी।
सोडा पीने के बाद, जेठालाल बेहद सहज अंदाज में तारक मेहता के साथ उनके घर आ गया। घर के अंदर अंजलि भाभी रात के ढीले-ढाले, हल्के गुलाबी रंग के पोल्का डॉट वाले नाइट सूट में मौजूद थीं। उस पतले और रेशमी नाइट सूट के नीचे से उनके भारी मम्मों का उभार और उनकी कसी हुई पीठ की बनावट साफ नजर आ रही थी। जेठालाल को देखते ही अंजलि के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आई, जिससे उनके गालों पर हल्के गड्ढे पड़ गए।
जेठालाल सोफे पर थोड़ा मायूस होकर बैठ गया और गहरी सांस लेते हुए बोला, "क्या बताएं मेहता साहब... दुकान के लिए एक बहुत बड़ी डील मिल सकती है, जिससे मेरी किस्मत बदल जाएगी। लेकिन अंदर से बहुत डर लग रहा है। डर इस बात का है कि कहीं दया वहां आकर सब कुछ बिगाड़ न दे। काश... काश मेरी दया भी अंजलि भाभी जैसी पढ़ी-लिखी और समझदार होती!"
अंजलि भाभी ने अपनी सुडौल गर्दन को थोड़ा तिरछा किया, अपने काले घने बालों को पीछे संभालते हुए मुस्कुराकर बोलीं, "अरे जेठा भाई! दया भाभी भी बहुत समझदार हैं। आप उनके बारे में ऐसा मत कहिए, इतनी फिक्र मत कीजिए।"
"अरे नहीं भाभी!" जेठालाल ने सीधे अंजलि के उस रेशमी नाइट सूट में छिपे भरे-पूरे जिस्म को अपनी भूखी और कामुक आँखों से निहारना शुरू किया। उसकी नजरें अंजलि के चेहरे से फिसलती हुई उनके गले के पास खुले नाइट सूट के कॉलर पर गईं, जहाँ से उनकी गोरी त्वचा साफ झलक रही थी। फिर जेठालाल की नजरें उनके भारी मम्मों के उस कड़क उभार पर टिक गईं जो सांस लेने के साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहे थे। जेठालाल ने अपनी जीभ होठों पर फेरते हुए कहा, "भाभी, दया मुझे जान से प्यारी है, लेकिन आपको भी तो पता है ना उसकी हरकतें? उसे कहाँ, कैसे पेश आना है, किससे क्या बात करनी है, कुछ समझ ही नहीं आता। आप जैसी सलीकेदार और खूबसूरत बीवी तो सिर्फ मेहता साहब जैसी किस्मत वाले को ही मिलती है। और भाभी, आप तो कितनी फटाकेदार इंग्लिश भी बोल लेती हो! सच कहूं भाभी... अगर आज आप मेरी बीवी होतीं ना, तो वो क्लाइंट आपके इस रूप और अंग्रेजी को देख कर ही तुरंत डील फाइनल कर देता!"
जेठालाल के मुंह से अपने जिस्म की ऐसी तीखी और सीधी तारीफ सुनकर अंजलि भाभी शर्म से पानी-पानी हो गईं। उनका गोरा चेहरा एकदम टमाटर की तरह लाल हो गया। उनके जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई, जिससे उनके नाइट सूट के नीचे छिपे उरोज और कड़क हो गए। अपनी इस लाज और घबराहट को छुपाने के लिए वो सोफे पर तारक मेहता से एकदम सटकर बैठ गईं, जिससे उनके नितंबों का भारी और गद्देदार हिस्सा तारक की जांघ से पूरी तरह रगड़ खा गया।
अंजलि को जेठालाल की नजरों से इस तरह शर्माते देख, तारक मेहता के पाजामे के अंदर उनका लंड अचानक से पूरी तरह कड़क हो गया! जेठालाल के उन कामुक शब्दों और अंजलि के बदन के इस स्पर्श ने तारक के दिमाग में आग लगा दी थी। अपनी बीवी को किसी दूसरे मर्द की नजरों से चढ़ते देखना और सोडा शॉप पर हुई वो बातें... इन सबने मिलकर तारक को भीतर से एकदम गर्म कर दिया था। हालांकि वो खुद को इन गंदे विचारों से रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी कामुक उत्तेजना उनके बस में नहीं थी।
लेकिन तारक मेहता इस वक्त कामुकता के वश में होकर नहीं, बल्कि अपने सबसे अजीज दोस्त जेठालाल की मदद करने की सच्ची भावना से सोच रहे थे। उन्हें सचमुच अपने ऑफिस में बॉस की तरफ से बहुत ज्यादा काम मिला हुआ था, जिसकी वजह से वे खुद नहीं जा सकते थे। अपने दोस्त के अच्छे भविष्य के लिए वे बोले, "अरे जेठालाल! इसमें इतना सोचने की क्या बात है? तुम अंजलि को ले जाओ ना अपने साथ! ये बहुत समझदार है, वहां क्लाइंट के सामने तुम्हारी नकली बीवी बनकर सब कुछ संभाल लेगी।"
यह सुनते ही अंजलि भाभी के होश उड़ गए! उन्होंने झटके से, गुस्से और हैरानी में आकर तारक के हाथ को अपनी उंगलियों से कसकर पकड़ लिया, मानो वो कह रही हों—'आप पागल हो गए हैं क्या? अपनी सगी बीवी को दूसरे मर्द के साथ भेज रहे हैं?' लेकिन जेठालाल के सामने अपनी गोकुलधाम की मर्यादा रखने के लिए वो बाहर से मुस्कुराने का झूठा नाटक भी कर रही थीं। उनके चेहरे पर मुस्कान थी, पर उनकी आँखों में अपने पति के लिए गुस्सा साफ था।
तारक ने अपनी पत्नी की उस घबराहट को शांत करने के लिए, उन्हें बड़े प्यार से बाहों में भर लिया और उनके भीगे कंधों को सहलाते हुए कहा, "अंजलि, अरे डरो मत। बस कुछ घंटों की ही तो बात है। जेठालाल की इतनी बड़ी डील फाइनल हो जाएगी, उसकी मदद हो जाएगी। अब ऐसे मुसीबत के समय में ही तो पड़ोसी और दोस्त काम आते हैं ना? तुम्हें तो जाना ही चाहिए।"
जेठालाल ने अपनी चाल को और गहरा करते हुए कहा, "अरे नहीं मेहता साहब... बात कुछ घंटों की नहीं है। उस क्लाइंट के साथ हमें पूरे दो दिन और दो रातें रुकना पड़ेगा। भाभी, आप रहने दीजिए, आप क्यों खामखां परेशान होंगी। यह तो होता रहता है, मुझे कोई और डील मिल जाएगी, आप तकलीफ मत पाइए।"
अंजलि भाभी अब पूरी तरह से असमंजस में थीं। जेठालाल की बेबसी देखकर उनका संस्कारी दिल पिघलने लगा। उन्होंने तारक की तरफ देखा और फिर जेठालाल से बोलीं, "नहीं जेठा भाई, ऐसी कोई बात नहीं है। मैं जरूर आऊंगी आपके साथ। आप तो मेरे बड़े भाई जैसे हो ना! तारक, आप भी हमारे साथ चलिए, इसी बहाने हम चारों घूम भी लेंगे और डील भी हो जाएगी।"
"अरे नहीं अंजलि!" तारक ने तुरंत अपनी मजबूरी दोहराई, क्योंकि उन्हें सच में ऑफिस का जरूरी काम था। "मुझे बॉस ने ऑफिस का बहुत ज्यादा काम दे रखा है, मैं अचानक ऐसे छुट्टी नहीं ले सकता। तुम जेठालाल और दया भाभी के साथ चली जाओ।"
अब जेठालाल ने अपना आखिरी और सबसे शातिर पत्ता फेंका। उसने अपना सिर खुजलाते हुए कहा, "वो... वो मेहता साहब, असल में बात यह है कि मैं दया को इस बारे में कुछ नहीं बता सकता। अगर दया को पता चला कि मैं उसकी पीठ पीछे अंजलि भाभी को अपनी नकली बीवी बनाकर किसी आलीशान रिसॉर्ट में ले जा रहा हूँ, तो वो तो मुझे जान से ही मार डालेगी! और वैसे भी, हमें वहां एक शादीशुदा जोड़े की तरह रुकना होगा, तो दया के सामने मैं अंजलि भाभी को अपनी पत्नी कैसे साबित कर पाऊंगा?"
"बोल देंगे कुछ भी जेठा भाई, दया भाभी मान जाएंगी..." अंजलि ने घबराते हुए कहा। उनका गला सूख रहा था।
"लेकिन भाभी, दया यह कभी बर्दाश्त नहीं करेगी!" जेठालाल ने अंजलि के हिलते हुए होठों और धड़कती छाती को देखते हुए कहा। "उसके होते हुए मैं किसी और औरत के गले में हाथ डालूं, उसे अपनी पत्नी कहूं... वो एक औरत है भाभी, आपकी मजबूरी समझ सकती है, पर दया को यह समझाना नामुमकिन है।"
तभी तारक मेहता बोले, "अरे अंजलि! सोचो मत ज्यादा, सिर्फ दो दिन की ही तो बात है। जेठालाल की दुकान का सवाल है। तुम दोनों भाई-बहन की तरह घूम आओ, मेरी फिक्र मत करो। वैसे भी तुम्हें कितने दिनों से गोवा या किसी अच्छे रिसॉर्ट जाना था ना? समझो तुम्हारा वैकेशन हो गया!"
अब अंजलि भाभी पूरी तरह से जेठालाल के बुने हुए इस कामुक चक्रव्यूह और अपने पति की ईमानदारी के बीच फंस चुकी थीं। जब खुद उनका पति ही उन्हें अपने दोस्त की मदद के लिए दो रातें बिताने के लिए भेज रहा था, तो वो भला मना भी कैसे करतीं? उन्होंने हार मानते हुए, एक गहरी सांस ली, जिससे उनका भारी सीना और ऊपर को उठ गया, और जेठालाल की तरफ देखकर आखिरकार हामी भर दी।
छठे दिन की सुबह अभी गहरे अंधकार की चादर में लिपटी हुई थी। गोकुलधाम सोसाइटी के शांत और ठंडे माहौल में, योजना के मुताबिक जेठालाल सुबह-सुबह ही अंधेरे का फायदा उठाकर सोसाइटी के गेट से बाहर निकल गया। वह काफी दूर जाकर सड़क के किनारे पहले से खड़ी एक पुरानी काली-पीली टैक्सी के पास रुक गया। कुछ ही देर बाद, तारक मेहता अंजलि भाभी को विदा करने और गाड़ी तक छोड़ने के लिए साथ आए।
सुबह के इस ठंडे सफर के लिए अंजलि भाभी ने चटक पीले रंग का बेहद खूबसूरत और कसा हुआ पंजाबी सूट पहना हुआ था। उस टाइट कुर्ते में से उनकी छरहरी कमर और उनके भारी उरोजों का उभार इतनी कयामत ढा रहा था कि जेठालाल की आंखें उन्हें देखते ही खुली की खुली रह गईं। कुर्ते के गोल गले के पास लगी हरी पाइपिंग उनकी गोरी त्वचा को और चमका रही थी, और कलाइयों में खनकती हुई रंग-बिरंगी चूड़ियां उनके हुस्न में चार चांद लगा रही थीं। उनका पूरा बदन सुबह की ताजी खुशबू से महक रहा था। तारक मेहता ने जेठालाल की पीठ थपथपाई, उन्हें डील के लिए शुभकामनाएं दीं और अंजलि को अपना ध्यान रखने को कहकर वापस सोसाइटी की तरफ लौट गए।
जेठालाल और अंजलि भाभी टैक्सी की पिछली सीट पर बैठ गए। अंजलि अभी भी एक अजीब सी हिचकिचाहट और संकोच में थीं, इसलिए वे जेठालाल से काफी दूरी बनाकर खिड़की की तरफ सटकर बैठ गईं और बाहर के अंधेरे को निहारने लगीं।
टैक्सी अभी कुछ ही दूर आगे बढ़ी थी कि आगे की सीट पर बैठे हुए ड्राईवर ने रियर-व्यू मिरर में उन दोनों को देखा। उसने अपनी नजरें अंजलि के खूबसूरत चेहरे पर टिकाईं और सीधे पूछा, "अरे साहब... यह मैडम आपकी बीवी हैं क्या?"
ड्राइवर की यह बेबाक बात सुनकर अंजलि भाभी का दिल धक से रह गया। उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। लेकिन जेठालाल ने तुरंत अपनी मूंछों को ताव दिया और कड़ककर बोला, "अरे भाई! तुझे क्या पंचायत है? तू चुपचाप गाड़ी चला ना! मेरे साथ बैठी हैं, तो मेरी बीवी ही होंगी ना!"
जेठालाल का यह रौबदार जवाब सुनकर अंजलि भाभी एकदम गहरी सोच में डूब गईं। उनके मन में आया कि जेठा भाई ने तो अभी से उन्हें अपनी बीवी मान लिया है और उसी लहजे में बात भी कर रहे हैं। हालांकि उनके अंदर थोड़ी घबराहट हुई, लेकिन उन्होंने अपने होठों को भींच लिया और ज्यादा कुछ नहीं कहा। वे अपनी नजरें बचाकर चुपचाप खिड़की से बाहर देखने लगीं। उन्होंने मन ही मन खुद को समझाया कि शायद जेठा भाई अभी से ही अपने किरदार की तैयारी शुरू कर रहे हैं, ताकि वहां क्लाइंट टोनी भाई के सामने जाकर कोई गड़बड़ न हो और नाटक एकदम सच लगे।
टैक्सी वाला इतने पर भी शांत नहीं हुआ। उसने हंसते हुए फिर शीशे में देखा और अपनी आवाज बदलते हुए बोला, "नहीं साहब, वो क्या है ना कि आप दोनों बहुत दूर-दूर बैठे हैं। और मैडम का चेहरा देखकर लग रहा है कि शायद इन्हें नींद आ रही है... ऐसा लगता है कि भाभी जी आपसे नाराज हैं!"
जेठालाल ने तुरंत अपनी आवाज को एक शादीशुदा मर्द की तरह ढालते हुए कहा, "अरे, ऐसी कोई बात नहीं है! क्या पति-पत्नी सारा दिन एक-दूसरे से चिपकते ही रहें क्या? अब तुम्हें क्या सबूत दें हम कि हम मियां-बीवी हैं?!"
"अरे नहीं साहब, गुस्सा मत हो!" ड्राइवर ने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा, "भाभी जी काफी खूबसूरत हैं। ऐसी रूपवती, कयामत ढाती बीवी को तो आपको अपनी बांहों में ही कसकर रखना चाहिए जी! दूर बिठाकर क्यों इनका अपमान कर रहे हो?"
अंजलि भाभी ने जैसे ही यह बात सुनी, वे शर्म से पूरी तरह पानी-पानी हो गईं। उनका गोरा और गुलाबी चेहरा लाज के मारे और गहरा लाल हो गया। उन्होंने शर्माकर अपनी पलकें झुका लीं और अपनी उंगलियों के पोरों को आपस में भींचने लगीं। उन्हें क्या पता था कि आगे की सीट पर मफलर लपेटे, मूंछें लगाए और अजीब सा चश्मा पहने यह ड्राइवर और कोई नहीं, बल्कि गोकुलधाम का रोशन सिंह सोढ़ी था! वह भेष बदलकर इस सीक्रेट प्लान को कामयाब बनाने के लिए खुद जेठालाल की टैक्सी चला रहा था।
सोढ़ी ने अपनी चाल को और आगे बढ़ाते हुए कहा, "और साहब, मुझे लगता है भाभी को नींद का झोंका आ रहा है। आप उन्हें थोड़ा सहारा दीजिए, कहीं गाड़ी के हिलने से उन्हें चोट न लग जाए। कैसे मर्द हो साहब आप? अपनी ही बीवी को प्यार करने में भी शरमा रहे हो! आपसे अच्छे तो आजकल के बच्चे हैं, जो यहीं पीछे की सीट पर सारा काम निपटा लेते हैं!"
सोढ़ी की यह बात सुनते ही जेठालाल को मनमांगा मौका मिल गया। वह फटाक से सीट पर खिसककर अंजलि भाभी के एकदम करीब आकर सट गया। दोनों के जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह टच हो गए। जेठालाल के बदन की गर्मी अंजलि को महसूस होने लगी। जेठालाल ने अंजलि के कान के पास झुककर बेहद धीमी और फुसफुसाती आवाज में कहा, "भाभी... देखिए, यह एक मामूली टैक्सी वाला हमारी दूरी देखकर समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। अगर हम ऐसे ही दूर-दूर रहे, तो वहां उस बड़े क्लाइंट टोनी भाई को कैसे यकीन दिलाएंगे? हमें थोड़ा करीब तो आना ही पड़ेगा।"
जेठालाल की सांसों की कड़क और गर्म छुअन अपने गालों पर महसूस करते ही अंजलि भाभी के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। उनके उरोज कुर्ते के अंदर और कड़क हो गए। लेकिन उन्होंने तुरंत अपने संस्कारी रूप को संभाला। अब उन्हें एक अच्छी पत्नी का नाटक शुरू करना ही था, इसलिए उन्होंने जेठालाल की आंखों में आंखें डालीं और जेठा भाई न कहकर, सीधे एक सच्ची और संस्कारी बीवी की तरह उन्हें डांटते हुए ऊंचे स्वर में बोलीं:
"अरे... अजी सुनिए! आप क्या इस पागल ड्राइवर की बातों में आ रहे हैं? आपको जरा भी शर्म नहीं आती इसकी हां में हां मिलाते हुए?! चुपचाप बैठिए और मुझे परेशान मत कीजिए!"
अंजलि ने यह डांट बिल्कुल एक सगी पत्नी के लहजे में जेठालाल को चुप कराने और ड्राइवर को दिखाने के लिए लगाई थी। जेठालाल को उनकी इस डांट का बुरा तो बिल्कुल नहीं लगा, बल्कि 'अजी सुनिए' और पत्नी वाले इस कड़क अधिकार को अपने ऊपर देखकर वह अंदर ही अंदर खुशी से पूरी तरह पागल हो गया! उसके पाजामे के अंदर उसका लिंग इस कल्पनावश पूरी तरह कड़क हो गया। हालांकि उसने बड़ी मुश्किल से अपने चेहरे पर उस कामुक खुशी को रोका और बाहर से एक गंभीर पति बनने का नाटक करने लगा। अंजलि का वो पीला टाइट कुर्ता अब जेठालाल के कुर्ते से पूरी तरह रगड़ खा रहा था, और सफर की शुरुआत बेहद मादक हो चुकी थी।
जेठालाल जुनून और अंजलि भाभी के गोरे जिस्म को आपस में बांटने की बात सुनकर गोडाउन में अजीब सी खामोशी छा गई। सभी मर्दों के दिमाग की बत्तियां जल चुकी थीं। अब सवाल यह था कि अंजलि भाभी जैसी संस्कारी और पतिव्रता औरत को इस कामुक जाल में फंसाया कैसे जाए? सब अपनी-अपनी मूंछों पर हाथ फिराते हुए गहरे सोच में डूब गए।
तभी भिड़े थोड़ा हिचकिचाते हुए, अपनी उंगलियों को आपस में मरोड़ते हुए बोला, "देखो भाइयों... मेरे दिमाग में एक तरकीब आ रही है। लेकिन..."
भिड़े को इस तरह अटकते देख जेठालाल से रहा नहीं गया। वह खुशी के मारे सोफे से उछल पड़ा और जोर से बोला, "अरे भिड़े भाई! अब इस बंद गोडाउन में इतना शर्मा क्यों रहे हो यार? साफ-साफ बोलो ना! अंजलि भाभी के उस मादक बदन का मजा हम सबको लेना है, उन्हें चोदना है, तभी तो हम सब इस अंधेरे में यहां बैठे हैं। और यह बात सिर्फ और सिर्फ हम पांचों के बीच ही रहेगी। क्यों दोस्तों, मैं सही कह रहा हूँ ना?"
"हाँ, बिल्कुल सही!" सोढ़ी, पोपटलाल और अय्यर ने एक सुर में अपनी लालसा से भरी सहमति दी। सबकी आंखों में अंजलि के उस सुडौल बदन को नंगा देखने की भूख साफ झलक रही थी।
सबका साथ पाकर भिड़े का हौसला बढ़ा। उसने चश्मा नाक पर टिकाया और अपनी योजना खोलते हुए कहा, "देखो भाइयों, हम सब एक साथ अंजलि भाभी पर डोरे नहीं डाल सकते। वैसे तो सबने अपनी-अपनी कोशिश की, लेकिन सच तो यही है कि अंजलि भाभी पूरी सोसाइटी में सबसे ज्यादा करीब जेठालाल तुम्हारे ही हैं। तुम उनके घर चाहे जब चले जाते हो, वो तुम्हें अपना बड़ा भाई मानती हैं और तुम्हारा उनके यहाँ दिन-रात का आना-जाना है। तो मेरा मशवरा यह है कि पहले जेठालाल तुम ही उन्हें अपने जाल में फंसाओ। एक बार वो तुम्हारे बिस्तर पर आ गईं, तो फिर भाभी कहीं भागी थोड़े ही जा रही हैं! उसके बाद एक-एक करके हम सब उनके उस रसीले और गोरे जिस्म का जी भरकर मजा लेंगे।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भिड़े ने अपनी शातिर आंखें मटकाईं और एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक देते हुए बोला, "और सुनो, उन्हें पटाने का रास्ता भी मैं बताता हूँ। याद है कुछ दिन पहले पोपटलाल ने एक सीक्रेट मिशन का नाटक किया था, जिसमें अंजलि भाभी उसकी नकली बीवी बनी थीं? वो प्लान सबसे धांसू था! तो मेरा आइडिया यह है कि हम वैसा ही एक नकली मिशन फिर से तैयार करेंगे। लेकिन इस बार, उस फेक मिशन में अंजलि भाभी का नकली पति पोपटलाल नहीं... बल्कि जेठालाल, तुम बनोगे!"
यह सुनते ही जेठालाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसकी आंखों के सामने अंजलि भाभी का वह भारी और कसा हुआ बदन नाचने लगा। उसने आव देखा न ताव, तुरंत आगे बढ़कर भिड़े को कसकर गले से लगा लिया और बोला, "वाह भिड़े भाई वाह! तुम्हारे इस मास्टरमाइंड दिमाग की दाद देनी पड़ेगी! मान गए भाई तुम्हें!"
जेठालाल ने भिड़े की पीठ थपथपाते हुए सभी मर्दों की तरफ देखा और बेहद कामुक लहजे में कहा, "भिड़े का आइडिया एकदम कड़क है यार! इस बार उस नकली पति-पत्नी वाले खेल में अंजलि भाभी का पति यह जेठालाल बनेगा। देखना, इस बार अंजलि भाभी पक्का पिघलेंगी। हम सब मिलकर इस छठे दिन कुछ ऐसा चक्रव्यूह रचेंगे, ऐसा तगड़ा जाल बिछाएंगे कि अंजलि भाभी के पास बचने का कोई रास्ता ही नहीं बचेगा। वो खुद तड़पकर, अपनी मर्जी से अपना यह गोरा और रसीला जिस्म मेरे हाथों में सौंप देंगी और मुझे अपने हुस्न के साथ खेलने देंगी!"
भिड़े का यह लाजवाब आइडिया सुनकर गोडाउन में बैठे सभी मर्दों के चेहरे खिल उठे। सोढ़ी ने हवा में मुक्का मारा, अय्यर मंद-मंद मुस्कुराने लगा और पोपटलाल अपनी छतरी हिलाते हुए खुशी से झूम उठा। अंजलि भाभी के पवित्र बदन को अपनी हवस का शिकार बनाने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो चुका था।
गोडाउन की उस गरमा-गरम मीटिंग के बाद, शाम ढलते ही गोकुलधाम सोसाइटी की रंगत बदल चुकी थी। रात के नौ बजते ही अब्दुल की सोडा शॉप पर सारे मर्द इकट्ठा हो गए। भिड़े, सोढ़ी, पोपटलाल और अय्यर ने तारक मेहता के आने से पहले ही आपस में पूरा डिटेल प्लान फाइनल कर लिया था। भिड़े ने सबको समझा दिया था कि जेठालाल सीधे मेहता साहब के घर जाकर अपनी दुकान की मुसीबत का नाटक करेगा और अंजलि भाभी को अपनी नकली पत्नी बनाने की बात रखेगा।
तभी दूर से तारक मेहता आते हुए दिखे। उन्हें देखते ही जेठालाल ने बाकी मर्दों को आँखों ही आँखों में इशारा किया। सबने मिलकर योजना के मुताबिक तारक के सामने सीधे-सीधे कुछ न बोलकर, अंजलि भाभी के हुस्न और उनकी गजब की समझदारी की जमकर तारीफ करनी शुरू कर दी। वे तारक के सामने एक-एक करके नए-नए तर्क दे रहे थे कि क्यों अंजलि भाभी पूरी गोकुलधाम सोसाइटी की सबसे बेस्ट बीवी हैं।
सोढ़ी ने सोडे का बड़ा घूंट लेते हुए कहा, "ओए मेहता भाई! सच कहूं तो तुम दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान हो जी। भाभी जैसी खूबसूरत, मॉडर्न और संस्कारी बीवी किस्मत वालों को ही मिलती है। पूरे गोकुलधाम में उनके जैसा सुघड़ और ख्याल रखने वाला कोई नहीं है।" भिड़े ने अपने चश्मे को नाक पर ठीक करते हुए नया तर्क जोड़ा, "बिल्कुल सही सोढ़ी भाई। अंजलि भाभी जैसी पढ़ी-लिखी और सलीकेदार औरत अगर किसी महफिल में मर्द के साथ खड़ी हो जाए, तो बाकी सारे मर्दों की नजरें सिर्फ उन्हीं पर टिक जाती हैं। वे न सिर्फ घर संभालती हैं, बल्कि तारक भाई के डाइट से लेकर उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का जो ध्यान रखती हैं, वो कमाल है। गोकुलधाम की बेस्ट बीवी का खिताब तो सिर्फ उन्हीं को जाना चाहिए।"
अय्यर और पोपटलाल ने भी हाँ में हाँ मिलाई। तारक इन बातों को सुनकर अंदर ही अंदर बहुत गर्व महसूस करने लगे। उनके दिमाग में अनजाने ही अपनी अंजलि का वो सुडौल और कड़क बदन तैरने लगा, जिसे पूरी सोसाइटी इतनी हसरत और सम्मान से देखती थी।
सोडा पीने के बाद, जेठालाल बेहद सहज अंदाज में तारक मेहता के साथ उनके घर आ गया। घर के अंदर अंजलि भाभी रात के ढीले-ढाले, हल्के गुलाबी रंग के पोल्का डॉट वाले नाइट सूट में मौजूद थीं। उस पतले और रेशमी नाइट सूट के नीचे से उनके भारी मम्मों का उभार और उनकी कसी हुई पीठ की बनावट साफ नजर आ रही थी। जेठालाल को देखते ही अंजलि के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आई, जिससे उनके गालों पर हल्के गड्ढे पड़ गए।
जेठालाल सोफे पर थोड़ा मायूस होकर बैठ गया और गहरी सांस लेते हुए बोला, "क्या बताएं मेहता साहब... दुकान के लिए एक बहुत बड़ी डील मिल सकती है, जिससे मेरी किस्मत बदल जाएगी। लेकिन अंदर से बहुत डर लग रहा है। डर इस बात का है कि कहीं दया वहां आकर सब कुछ बिगाड़ न दे। काश... काश मेरी दया भी अंजलि भाभी जैसी पढ़ी-लिखी और समझदार होती!"
अंजलि भाभी ने अपनी सुडौल गर्दन को थोड़ा तिरछा किया, अपने काले घने बालों को पीछे संभालते हुए मुस्कुराकर बोलीं, "अरे जेठा भाई! दया भाभी भी बहुत समझदार हैं। आप उनके बारे में ऐसा मत कहिए, इतनी फिक्र मत कीजिए।"
"अरे नहीं भाभी!" जेठालाल ने सीधे अंजलि के उस रेशमी नाइट सूट में छिपे भरे-पूरे जिस्म को अपनी भूखी और कामुक आँखों से निहारना शुरू किया। उसकी नजरें अंजलि के चेहरे से फिसलती हुई उनके गले के पास खुले नाइट सूट के कॉलर पर गईं, जहाँ से उनकी गोरी त्वचा साफ झलक रही थी। फिर जेठालाल की नजरें उनके भारी मम्मों के उस कड़क उभार पर टिक गईं जो सांस लेने के साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहे थे। जेठालाल ने अपनी जीभ होठों पर फेरते हुए कहा, "भाभी, दया मुझे जान से प्यारी है, लेकिन आपको भी तो पता है ना उसकी हरकतें? उसे कहाँ, कैसे पेश आना है, किससे क्या बात करनी है, कुछ समझ ही नहीं आता। आप जैसी सलीकेदार और खूबसूरत बीवी तो सिर्फ मेहता साहब जैसी किस्मत वाले को ही मिलती है। और भाभी, आप तो कितनी फटाकेदार इंग्लिश भी बोल लेती हो! सच कहूं भाभी... अगर आज आप मेरी बीवी होतीं ना, तो वो क्लाइंट आपके इस रूप और अंग्रेजी को देख कर ही तुरंत डील फाइनल कर देता!"
जेठालाल के मुंह से अपने जिस्म की ऐसी तीखी और सीधी तारीफ सुनकर अंजलि भाभी शर्म से पानी-पानी हो गईं। उनका गोरा चेहरा एकदम टमाटर की तरह लाल हो गया। उनके जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई, जिससे उनके नाइट सूट के नीचे छिपे उरोज और कड़क हो गए। अपनी इस लाज और घबराहट को छुपाने के लिए वो सोफे पर तारक मेहता से एकदम सटकर बैठ गईं, जिससे उनके नितंबों का भारी और गद्देदार हिस्सा तारक की जांघ से पूरी तरह रगड़ खा गया।
अंजलि को जेठालाल की नजरों से इस तरह शर्माते देख, तारक मेहता के पाजामे के अंदर उनका लंड अचानक से पूरी तरह कड़क हो गया! जेठालाल के उन कामुक शब्दों और अंजलि के बदन के इस स्पर्श ने तारक के दिमाग में आग लगा दी थी। अपनी बीवी को किसी दूसरे मर्द की नजरों से चढ़ते देखना और सोडा शॉप पर हुई वो बातें... इन सबने मिलकर तारक को भीतर से एकदम गर्म कर दिया था। हालांकि वो खुद को इन गंदे विचारों से रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी कामुक उत्तेजना उनके बस में नहीं थी।
लेकिन तारक मेहता इस वक्त कामुकता के वश में होकर नहीं, बल्कि अपने सबसे अजीज दोस्त जेठालाल की मदद करने की सच्ची भावना से सोच रहे थे। उन्हें सचमुच अपने ऑफिस में बॉस की तरफ से बहुत ज्यादा काम मिला हुआ था, जिसकी वजह से वे खुद नहीं जा सकते थे। अपने दोस्त के अच्छे भविष्य के लिए वे बोले, "अरे जेठालाल! इसमें इतना सोचने की क्या बात है? तुम अंजलि को ले जाओ ना अपने साथ! ये बहुत समझदार है, वहां क्लाइंट के सामने तुम्हारी नकली बीवी बनकर सब कुछ संभाल लेगी।"
यह सुनते ही अंजलि भाभी के होश उड़ गए! उन्होंने झटके से, गुस्से और हैरानी में आकर तारक के हाथ को अपनी उंगलियों से कसकर पकड़ लिया, मानो वो कह रही हों—'आप पागल हो गए हैं क्या? अपनी सगी बीवी को दूसरे मर्द के साथ भेज रहे हैं?' लेकिन जेठालाल के सामने अपनी गोकुलधाम की मर्यादा रखने के लिए वो बाहर से मुस्कुराने का झूठा नाटक भी कर रही थीं। उनके चेहरे पर मुस्कान थी, पर उनकी आँखों में अपने पति के लिए गुस्सा साफ था।
तारक ने अपनी पत्नी की उस घबराहट को शांत करने के लिए, उन्हें बड़े प्यार से बाहों में भर लिया और उनके भीगे कंधों को सहलाते हुए कहा, "अंजलि, अरे डरो मत। बस कुछ घंटों की ही तो बात है। जेठालाल की इतनी बड़ी डील फाइनल हो जाएगी, उसकी मदद हो जाएगी। अब ऐसे मुसीबत के समय में ही तो पड़ोसी और दोस्त काम आते हैं ना? तुम्हें तो जाना ही चाहिए।"
जेठालाल ने अपनी चाल को और गहरा करते हुए कहा, "अरे नहीं मेहता साहब... बात कुछ घंटों की नहीं है। उस क्लाइंट के साथ हमें पूरे दो दिन और दो रातें रुकना पड़ेगा। भाभी, आप रहने दीजिए, आप क्यों खामखां परेशान होंगी। यह तो होता रहता है, मुझे कोई और डील मिल जाएगी, आप तकलीफ मत पाइए।"
अंजलि भाभी अब पूरी तरह से असमंजस में थीं। जेठालाल की बेबसी देखकर उनका संस्कारी दिल पिघलने लगा। उन्होंने तारक की तरफ देखा और फिर जेठालाल से बोलीं, "नहीं जेठा भाई, ऐसी कोई बात नहीं है। मैं जरूर आऊंगी आपके साथ। आप तो मेरे बड़े भाई जैसे हो ना! तारक, आप भी हमारे साथ चलिए, इसी बहाने हम चारों घूम भी लेंगे और डील भी हो जाएगी।"
"अरे नहीं अंजलि!" तारक ने तुरंत अपनी मजबूरी दोहराई, क्योंकि उन्हें सच में ऑफिस का जरूरी काम था। "मुझे बॉस ने ऑफिस का बहुत ज्यादा काम दे रखा है, मैं अचानक ऐसे छुट्टी नहीं ले सकता। तुम जेठालाल और दया भाभी के साथ चली जाओ।"
अब जेठालाल ने अपना आखिरी और सबसे शातिर पत्ता फेंका। उसने अपना सिर खुजलाते हुए कहा, "वो... वो मेहता साहब, असल में बात यह है कि मैं दया को इस बारे में कुछ नहीं बता सकता। अगर दया को पता चला कि मैं उसकी पीठ पीछे अंजलि भाभी को अपनी नकली बीवी बनाकर किसी आलीशान रिसॉर्ट में ले जा रहा हूँ, तो वो तो मुझे जान से ही मार डालेगी! और वैसे भी, हमें वहां एक शादीशुदा जोड़े की तरह रुकना होगा, तो दया के सामने मैं अंजलि भाभी को अपनी पत्नी कैसे साबित कर पाऊंगा?"
"बोल देंगे कुछ भी जेठा भाई, दया भाभी मान जाएंगी..." अंजलि ने घबराते हुए कहा। उनका गला सूख रहा था।
"लेकिन भाभी, दया यह कभी बर्दाश्त नहीं करेगी!" जेठालाल ने अंजलि के हिलते हुए होठों और धड़कती छाती को देखते हुए कहा। "उसके होते हुए मैं किसी और औरत के गले में हाथ डालूं, उसे अपनी पत्नी कहूं... वो एक औरत है भाभी, आपकी मजबूरी समझ सकती है, पर दया को यह समझाना नामुमकिन है।"
तभी तारक मेहता बोले, "अरे अंजलि! सोचो मत ज्यादा, सिर्फ दो दिन की ही तो बात है। जेठालाल की दुकान का सवाल है। तुम दोनों भाई-बहन की तरह घूम आओ, मेरी फिक्र मत करो। वैसे भी तुम्हें कितने दिनों से गोवा या किसी अच्छे रिसॉर्ट जाना था ना? समझो तुम्हारा वैकेशन हो गया!"
अब अंजलि भाभी पूरी तरह से जेठालाल के बुने हुए इस कामुक चक्रव्यूह और अपने पति की ईमानदारी के बीच फंस चुकी थीं। जब खुद उनका पति ही उन्हें अपने दोस्त की मदद के लिए दो रातें बिताने के लिए भेज रहा था, तो वो भला मना भी कैसे करतीं? उन्होंने हार मानते हुए, एक गहरी सांस ली, जिससे उनका भारी सीना और ऊपर को उठ गया, और जेठालाल की तरफ देखकर आखिरकार हामी भर दी।
छठे दिन की सुबह अभी गहरे अंधकार की चादर में लिपटी हुई थी। गोकुलधाम सोसाइटी के शांत और ठंडे माहौल में, योजना के मुताबिक जेठालाल सुबह-सुबह ही अंधेरे का फायदा उठाकर सोसाइटी के गेट से बाहर निकल गया। वह काफी दूर जाकर सड़क के किनारे पहले से खड़ी एक पुरानी काली-पीली टैक्सी के पास रुक गया। कुछ ही देर बाद, तारक मेहता अंजलि भाभी को विदा करने और गाड़ी तक छोड़ने के लिए साथ आए।
सुबह के इस ठंडे सफर के लिए अंजलि भाभी ने चटक पीले रंग का बेहद खूबसूरत और कसा हुआ पंजाबी सूट पहना हुआ था। उस टाइट कुर्ते में से उनकी छरहरी कमर और उनके भारी उरोजों का उभार इतनी कयामत ढा रहा था कि जेठालाल की आंखें उन्हें देखते ही खुली की खुली रह गईं। कुर्ते के गोल गले के पास लगी हरी पाइपिंग उनकी गोरी त्वचा को और चमका रही थी, और कलाइयों में खनकती हुई रंग-बिरंगी चूड़ियां उनके हुस्न में चार चांद लगा रही थीं। उनका पूरा बदन सुबह की ताजी खुशबू से महक रहा था। तारक मेहता ने जेठालाल की पीठ थपथपाई, उन्हें डील के लिए शुभकामनाएं दीं और अंजलि को अपना ध्यान रखने को कहकर वापस सोसाइटी की तरफ लौट गए।
जेठालाल और अंजलि भाभी टैक्सी की पिछली सीट पर बैठ गए। अंजलि अभी भी एक अजीब सी हिचकिचाहट और संकोच में थीं, इसलिए वे जेठालाल से काफी दूरी बनाकर खिड़की की तरफ सटकर बैठ गईं और बाहर के अंधेरे को निहारने लगीं।
टैक्सी अभी कुछ ही दूर आगे बढ़ी थी कि आगे की सीट पर बैठे हुए ड्राईवर ने रियर-व्यू मिरर में उन दोनों को देखा। उसने अपनी नजरें अंजलि के खूबसूरत चेहरे पर टिकाईं और सीधे पूछा, "अरे साहब... यह मैडम आपकी बीवी हैं क्या?"
ड्राइवर की यह बेबाक बात सुनकर अंजलि भाभी का दिल धक से रह गया। उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। लेकिन जेठालाल ने तुरंत अपनी मूंछों को ताव दिया और कड़ककर बोला, "अरे भाई! तुझे क्या पंचायत है? तू चुपचाप गाड़ी चला ना! मेरे साथ बैठी हैं, तो मेरी बीवी ही होंगी ना!"
जेठालाल का यह रौबदार जवाब सुनकर अंजलि भाभी एकदम गहरी सोच में डूब गईं। उनके मन में आया कि जेठा भाई ने तो अभी से उन्हें अपनी बीवी मान लिया है और उसी लहजे में बात भी कर रहे हैं। हालांकि उनके अंदर थोड़ी घबराहट हुई, लेकिन उन्होंने अपने होठों को भींच लिया और ज्यादा कुछ नहीं कहा। वे अपनी नजरें बचाकर चुपचाप खिड़की से बाहर देखने लगीं। उन्होंने मन ही मन खुद को समझाया कि शायद जेठा भाई अभी से ही अपने किरदार की तैयारी शुरू कर रहे हैं, ताकि वहां क्लाइंट टोनी भाई के सामने जाकर कोई गड़बड़ न हो और नाटक एकदम सच लगे।
टैक्सी वाला इतने पर भी शांत नहीं हुआ। उसने हंसते हुए फिर शीशे में देखा और अपनी आवाज बदलते हुए बोला, "नहीं साहब, वो क्या है ना कि आप दोनों बहुत दूर-दूर बैठे हैं। और मैडम का चेहरा देखकर लग रहा है कि शायद इन्हें नींद आ रही है... ऐसा लगता है कि भाभी जी आपसे नाराज हैं!"
जेठालाल ने तुरंत अपनी आवाज को एक शादीशुदा मर्द की तरह ढालते हुए कहा, "अरे, ऐसी कोई बात नहीं है! क्या पति-पत्नी सारा दिन एक-दूसरे से चिपकते ही रहें क्या? अब तुम्हें क्या सबूत दें हम कि हम मियां-बीवी हैं?!"
"अरे नहीं साहब, गुस्सा मत हो!" ड्राइवर ने थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा, "भाभी जी काफी खूबसूरत हैं। ऐसी रूपवती, कयामत ढाती बीवी को तो आपको अपनी बांहों में ही कसकर रखना चाहिए जी! दूर बिठाकर क्यों इनका अपमान कर रहे हो?"
अंजलि भाभी ने जैसे ही यह बात सुनी, वे शर्म से पूरी तरह पानी-पानी हो गईं। उनका गोरा और गुलाबी चेहरा लाज के मारे और गहरा लाल हो गया। उन्होंने शर्माकर अपनी पलकें झुका लीं और अपनी उंगलियों के पोरों को आपस में भींचने लगीं। उन्हें क्या पता था कि आगे की सीट पर मफलर लपेटे, मूंछें लगाए और अजीब सा चश्मा पहने यह ड्राइवर और कोई नहीं, बल्कि गोकुलधाम का रोशन सिंह सोढ़ी था! वह भेष बदलकर इस सीक्रेट प्लान को कामयाब बनाने के लिए खुद जेठालाल की टैक्सी चला रहा था।
सोढ़ी ने अपनी चाल को और आगे बढ़ाते हुए कहा, "और साहब, मुझे लगता है भाभी को नींद का झोंका आ रहा है। आप उन्हें थोड़ा सहारा दीजिए, कहीं गाड़ी के हिलने से उन्हें चोट न लग जाए। कैसे मर्द हो साहब आप? अपनी ही बीवी को प्यार करने में भी शरमा रहे हो! आपसे अच्छे तो आजकल के बच्चे हैं, जो यहीं पीछे की सीट पर सारा काम निपटा लेते हैं!"
सोढ़ी की यह बात सुनते ही जेठालाल को मनमांगा मौका मिल गया। वह फटाक से सीट पर खिसककर अंजलि भाभी के एकदम करीब आकर सट गया। दोनों के जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह टच हो गए। जेठालाल के बदन की गर्मी अंजलि को महसूस होने लगी। जेठालाल ने अंजलि के कान के पास झुककर बेहद धीमी और फुसफुसाती आवाज में कहा, "भाभी... देखिए, यह एक मामूली टैक्सी वाला हमारी दूरी देखकर समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। अगर हम ऐसे ही दूर-दूर रहे, तो वहां उस बड़े क्लाइंट टोनी भाई को कैसे यकीन दिलाएंगे? हमें थोड़ा करीब तो आना ही पड़ेगा।"
जेठालाल की सांसों की कड़क और गर्म छुअन अपने गालों पर महसूस करते ही अंजलि भाभी के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। उनके उरोज कुर्ते के अंदर और कड़क हो गए। लेकिन उन्होंने तुरंत अपने संस्कारी रूप को संभाला। अब उन्हें एक अच्छी पत्नी का नाटक शुरू करना ही था, इसलिए उन्होंने जेठालाल की आंखों में आंखें डालीं और जेठा भाई न कहकर, सीधे एक सच्ची और संस्कारी बीवी की तरह उन्हें डांटते हुए ऊंचे स्वर में बोलीं:
"अरे... अजी सुनिए! आप क्या इस पागल ड्राइवर की बातों में आ रहे हैं? आपको जरा भी शर्म नहीं आती इसकी हां में हां मिलाते हुए?! चुपचाप बैठिए और मुझे परेशान मत कीजिए!"
अंजलि ने यह डांट बिल्कुल एक सगी पत्नी के लहजे में जेठालाल को चुप कराने और ड्राइवर को दिखाने के लिए लगाई थी। जेठालाल को उनकी इस डांट का बुरा तो बिल्कुल नहीं लगा, बल्कि 'अजी सुनिए' और पत्नी वाले इस कड़क अधिकार को अपने ऊपर देखकर वह अंदर ही अंदर खुशी से पूरी तरह पागल हो गया! उसके पाजामे के अंदर उसका लिंग इस कल्पनावश पूरी तरह कड़क हो गया। हालांकि उसने बड़ी मुश्किल से अपने चेहरे पर उस कामुक खुशी को रोका और बाहर से एक गंभीर पति बनने का नाटक करने लगा। अंजलि का वो पीला टाइट कुर्ता अब जेठालाल के कुर्ते से पूरी तरह रगड़ खा रहा था, और सफर की शुरुआत बेहद मादक हो चुकी थी।