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Rajan ko sabse jyada kiske sath dekhna chahte ho?

  • Radha

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Sanju@

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Update 15

राजन बाहर आकर अंगड़ाई ले ने गया था की उसकी नज़र बुढ़िया पर पड़ी जो बाहर राजन को ही देखे जा रही थी.....

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राजन थोड़ा सकपका गया की इतनी सुबह सुबह बुढ़िया उसकी कुटिया के बाहर क्यूँ खड़ी थी.... तभी राजन को लगा की शायद उसने पायल और रूपाली की चुदाई के बारे में पता लग चूका है....

बुढ़िया मुस्कुराते हुए कुतिये के पीछे नदी की तरफ जाने लगी तो राजन में भी बुढ़िया का पीछा किया.....

नदी किनारे पहुंचकर बुढ़िया ने अपनी ओढ़नी निकाल दी और एक चट्टान पर रख दी....

राजन थोड़ा पीछे खड़ा होकर बुढ़िया को देखे जा रहा था.... राजन गौर से बुढ़िया को देखने लगा... उसे यक़ीन नहीं हो रहा था की बुढ़िया का बदन इतना गठिला और लचक़दार है.... बुढ़िया को राजन की मोज़ूदगी का अहसास था लेकिन वो उसे बिना कुछ बोले अपना ब्लाउज खोने की तयारी में थी की राजन पीछे से बोला....

राजन - कहो मैं कुछ मदद कर दू ब्लाउज खोलने में....

बुढ़िया - अच्छा..... जैसे कुटिया में उन लड़कियों की कर रहे थे.....

राजन बुढ़िया की बात सुनकर बुढ़िया के करीब आ गया और बोला - अगर हाँ करोगी तो वैसे भी कर सकता हूँ.....

बुढ़िया मुस्कुराते हुए बोली - धत.... अपनी उम्र तो देख..... कैसे हंसी ठिठोली कर रहा है मुझ बूढी औरत के साथ.....

राजन को किसीका डर नहीं था वो अब बुढ़िया को करीब से देख रहा था.... बुढ़िया का बदन पायल और रूपाली से कहीं ज्यादा आकर्षक था जो उसने अब तक अपनी ओढ़नी से छुपा रखा था लेकिन अब वो राजन को आधा जिस्म दिखा कर नाहने की तयारी में थी.....

राजन ने शर्म छोड़ दी थी वो अपना लोडा बाहर निकालकर लहराते हुए बुढ़िया से बोला - नाम क्या है तेरा?

बुढ़िया राजन का लंड देखकर शर्मा गई और धीरे से बोली - कस्तूरी.....


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राजन ने बुढ़िया को पीछे से पकड़ लिया और अपने दोनों हाथों को बुढ़िया के बोबो पर रखकर बोला - इतनी जवानी किसके लिए बचा के रखी है तूने कस्तूरी ?

बुढ़िया दिखने में एक 50-55 साल के करीब की औरत लगती थी और एक 30-35 साल के लड़के ने उसे अपनी बाहों में कस रखा था.... उसकी हालत ऐसी थी जैसे किसी हिरणी को भेड़िये ने अपनी पकड़ में ले लिया हो.... कस्तूरी एक लड़के अपना अपना नाम सुनकर सरमाए जा रही थी उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं थे.....


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इतने में राजन ने कस्तूरी का ब्लाउज फाड़ डाला और उसके दोनों चूचियों को हवा में लहरा दिया.....

कस्तूरी को कुछ समझ नहीं आया की ये उसके साथ क्या हुआ था.....

राजन ने कस्तूरी के हिलते बोबे अपने हाथ में पकड़ लिए और बोला - कब तक छुपा के रखेगी उस ख़ज़ाने को बुढ़िया....

कस्तूरी गुस्से बोली - छोड़ दे बेशम..... क्या कर रहा है..... जरा सा हंस के मज़ाक़ क्या कर लिया तू तो गले ही पड़ रहा है..... उम्र तो देख... तेरी माँ की उम्र की हूँ मैं....

राजन अपना एक हाथ कस्तूरी के घाघरे में डाल देता है और उसकी चुत अपनी मुठी में पकड़ कर बोलता है - अरे माई.... तेरी जबान कुछ कहती है और तेरी भोसड़ी कुछ और..... बता किसकी बात मानु?

कस्तूरी - aahh बेटा.... छोड़ दे.... तेरा लंड लेने लायक़ नहीं है मेरी चुत..... मैं तो बस मज़ाक़ कर रही थी.....

राजन कस्तूरी को वही नदी किनारे घास पर लिटा देता है और उसका घाघरा ऊपर करके अपना लीडर उसकी चुत में घुसाने की कोशिश करता हुआ बोलता है - अरे माई..... ठीक से टांग चौड़ी कर ना.... लगता है बुड्ढे में बिलकुल दम नहीं है....

कस्तूरी - छोड़ दे बेटा इस बुढ़िया को.... तुझे तेरी सगी माँ का वास्ता बेटा.....

राजन एक जोर का चाँटा बुढ़िया के गाल पर रख देता है और चिल्लाता हुआ बोलता है - चुप कर.... बहन की लोड़ी..... बदन देख अपना.... कहा से बुढ़िया लगती है तू साली..... लंड खड़ा करके कहती है मज़ाक़ कर रही थी छोड़ दे..... साली रंडी.....

कस्तूरी थप्पड़ खाकर बिलकुल चुप हो जाती है और धीरे धीरे रोने लागती है.....

राजन अबतक कस्तूरी की चुत पर अपना लोडा टिका चूका था.... राजन ने जोर जैसे ही बुढ़िया की चुत में अपना लोडा अंदर डाला बुढ़िया की चुत से खून निकल गया और बुढ़िया की हालत ख़राब हो गई.....

कस्तूरी जोर से - अरे..... मर गई रे..... मईया..... Aahhh बचा ले रे..... Aahh..... मार.... डाला.... रे.....

कस्तूरी की आवाज़ बहुत जोर से गुंजी थी लेकिन उससे किसीको कुछ सुनाई नहीं दिया..... बुढ़िया का पति रात थक्कर सोया था सो गहरी नींद में था... कमल को भी गहरी नींद आ रही थी.... पायल और रूपाली रातभर की चुदाई के बाद अब सो रही थी....

राजन का आधा लोडा बुढ़िया की चुत में था और बुढ़िया पागल की तरह चिल्ला रही थी.... राजन बुढ़िया की हालत देखकर मज़े ले रहा था..... कुछ देर बाद जैसे ही बुढ़िया थोड़ी संभली.... राजन ने एक जोर का झटका मारते हुए अपना लोडा बुढ़िया की चुत में फ़ीट कर दिया जिससे बुढ़िया वापस गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाने लगी और अपने हाथों से राजन को मारने लगी.... राजन को बुढ़िया की मार खाकर मज़ा आ रहा था वो अब अपना पूरा लोडा बुढ़िया की चुत में उतार चूका था...... जिससे बुढ़िया की चुत पूरी खुल चुकी थी और चुत से खून की धार भी बह निकली थी.......

15 मिनट इसी तरह राजन बुढ़िया की चुत में लोडा डालकर पड़ा रहा और सिर्फ बुढ़िया को देखता रहा... बुढ़िया रोते हुए राजन को गन्दी गन्दी गालिया दे रही थी जो राजन को अपनी तारीफ जैसी लग रही थी और अपने हाथों से राजन को रह रह कर थप्पड़ मारे जा रही थी...... राजन को इनसब में बहुत आनंद आ रहा था.......

कुछ देर और बीत गई.... अब बुढ़िया बिना कुछ किये बस राजन के नीचे पड़ी थी और अपनी आँखे बंद कर रखी थी.....

राजन किसी हवश के पुजारी की तरह बुढ़िया के होंठ चूसने लगा जिसमे कस्तूरी उसका बिलकुल साथ नहीं दे रही थी और कोई विरोध भी नहीं कर रही थी....

राजन ने अब धीरे धीरे अपने लंड का चमत्कार दिखाना चालू कर दिया था और बुढ़िया को धीरे धीरे चोदने लगा था.....

राजन की चुदाई में बुढ़िया के बोबे तेज़ी से ऊपर नीचे हील रहे थे और अब बुढ़िया भी अपनी चुदाई का आनंद लेने लगी थी.....

राजन बुढ़िया को धीरे धीरे चोदते हुए - मज़ा आ रहा है ना माई...?

कस्तूरी कुछ नहीं बोली.....

राजन बुढ़िया का बोबा पकड़कर - बहुत मस्त बूब्स है तेरे.... मोटे ताजे उठे हुए बिलकुल टाइट.... लगता कभी खुला नहीं छोड़ा इनको तूने.....

कस्तूरी नकली गुस्सा दिखाते हुए - शर्म कर मदरचोद..... थोड़ी तो शर्म कर.....

राजन बुढ़िया की दोनों टाँगे कंधो पर ले लेटा है और झटके मारते हुए बोलता - अगर शर्म करूंगा तो हाथो से हिलाना पड़ेगा..... कस्तूरी अब पूरी तरह राजन के वश में थी......

कस्तूरी - नाम ती बता दे अपना...... कैसे सांड की जैसे चोद रहा है....

राजन - नाम जानने के लिए लोडा चूसना पड़ेगा माई.....

राजन अपना लोडा चुत से निकलकर बुढ़िया के मुँह की तरफ बढ़ा देता है और एक चट्टान का सहारा लेकर खड़ा हो जाता है.....

बुढ़िया भी मुस्कुराते हुए घुटनो पर आ जाती है और राजन की आँखों में देखकर लोडा चूसने लगती है....

राजन बुढ़िया से कहता है - एक बात बता माई कितने साल की है तू?

कस्तूरी - ये 62वा बरस चल रहा है बेटा......


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राजन- अब तक बच्चा नहीं हुआ तेरे.....

कस्तूरी - नहीं..... बेटा... भगवान चाहते ही नहीं की बच्चा हो.... वरना अब तक बहुत कोशिश की है मैंने.....

राजन दोनों हाथो से बुढ़िया का सर पकड़ लेता है और उसे लोडा चूसाते हुए बोलता - मुझे ही अपना बेटा मान ले माई.... जब भी तुझे जरुरत पड़ेगी में आ जाऊंगा....

कस्तूरी राजन का लोडा चूसना छोड़कर एकटक बस राजन को ही निहारने लगती है.... राजन सिगरेट का कश लेते हुए बुढ़िया को खड़ा करके चट्टान पर लिटा देता है अपना लोडा वापस बुढ़िया की चुत में डालकर चोदने लगता है....

कस्तूरी झटके खाते हुए - तू मुझे अपनी माँ मानेगा....

राजन - अपनी माँ समझकर ही चोद रहा हूँ तुझे.....

कस्तूरी चुदवाते हुए - हे राम.... कैसी औलाद दी है तूने....... अपनी माँ की बची कुची जवानी चूस रहा है.... ये कहते हुए बुढ़िया ने राजन का पूरा साथ देने की घोषणा कर दी.....

राजन - अभी तो बहुत रस बचा है तुझमे माई.....

कस्तूरी हुए - तू आदमी है या घोड़ा.... बेटा.... कितनी बार झाडेगा मुझे..... खुद तो अबतक एक बार भी नहीं झड़ा....

राजन - अरे माई इतनी भी क्या जल्दी है....

कस्तूरी - खड्डे को खाई बना दी अब क्या करना चाहता है बेटा.....

राजन बुढ़िया को गोद में उठा लेटा है और और जोर जोर से चोदने लगता है.... नदी किनारे दोनों किसी कामदेव की कामना से सुसज्जित लग रहे थे..... सूरज की पहली किरण निकलने वाली थी...... दोनों की आवाज़ से पूरा वातावरण चुदाईमय हो चूका था....

कस्तूरी अब खुलकर आनंद लेने लगी थी.... राजन पिछले डेढ़ घंटे से उसकी इज़्ज़त पर डाका डाल रह था......

राजन कस्तूरी को उछाल उछाल जर चोद रहा था और अब वो भी कस्तूरी की चुत में झड़ने वाला था.....

राजन - aahh माई..... ले मेरा प्रसाद तेरी भोसड़ी में डाल रहा हूँ..... ये कहते हुए राजन ने पूरा वीर्य कसूरी की चुत में भर दिया..... दोनों अब जमीन पर नंगे लेते थे और एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे....

कस्तूरी - चल अब नहा लेने दे.... वरना बहुत देर हो जायेगी

राजन - तो रोका किसने ने है तुझे माई.... कहे तो में नहला दू....

कस्तूरी - चल बदमाश कैसी बात कर रहा है....

राजन कस्तूरी को इतहाकर नदी में लेजाता है और दोनों नंगे ही एकदूसरे के साथ अटखेलिया करते हुए नाहने लगते है....

राजन - अपने बेटे को दूध नहीं पीलायेगी?

कस्तूरी राजन के बाल पकड़कर उसके मुँह में अपना बोबा ठूस देती है और कहती है -पी ले साले..... चुत का सत्यनाश कर दिया अब चूची भी ढीली कर दे अपनी माँ की..... भगवान ने औलाद भी दी तो मदरचोद......

राजन - क्यूँ रंडी रोना कर रही है साली.... शुक्र कर जो मैंने रेरी जवानी चख ली वरना ऐसे बेकार चली जाती......

कस्तूरी - हाँ..... मेरी हालत तो देख.... ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही हूँ.... लड़ता है लड़की का सहारा लेना पड़ेगा कुछ दिन.....

राजन और कस्तूरी नहाकर बाहर आते है और राजन कस्तूरी को गोद में उठा लेटा है और कुटिया की तरफ चलता है.....

राजन बुढ़िया को देखते हुए - राजन नाम है मेरा....

बुढ़िया मुस्कराते हुए कुछ नहीं कहती......

सुबह के करीब साढ़े छः बज चुके थे और अब तक सब घोड़े बेचकर सो रहे थे.....

कस्तूरी अंदर से त्यार होकर एक पूजा की थाली लेकर आती है और राजन कमल के बदल में लेट जाता है....

राजन कस्तूरी को देखता था है तो एकदम देखता ही रह जाता है अब वो सुबह की लालिमा में और भी ज्यादा आकर्षक लग रही थी..... कस्तूरी लंगड़ाती हुई मंदिर की तरफ चली गई और राजन अपना दिल मसोस कर रह गया......


सुबह के 10 बज चुके थे और सब अब उठकर चुके थे.... कमल और बुढ़िया का पति दोनों एक साथ खाट पर बैठे थे.... राजन थोड़ा दूर पेशाब कर रहा था.... पायल और रूपाली दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़े लंगड़ाते हुए बाहर आई... कमल और उसके पास बैठे बूढ़े ने उनको देखकर हैरानी से एक दूसरे की तरह देखते है.... इतने में वहा ठकुराइन आ जाती है जिसे राजन ने बुलाया था.... कमल ठकुराइन को देखकर घबरा जाता है और छुपने की कोशिश करता है लेकिन राजन ठकुराइन से मिलते हुए पायल और रूपाली को उनके साथ जाने को बोल देता है.....

इतने में बुढ़िया भी लंगढ़ते हुए आती है जिसे देखकर वापस कमल और बुढ़िया का पति एकदूसरे की तरफ देखने लगते है.....

पायल और रूपाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन राजन के कहे अनुसार वो दोनों ठकुराइन के साथ वापस चली जाती और कमल भी कुछ दिनों के लिए कहीं छिपने का ठिकाना ढूंढ़ते हुए वहा से निकल जाता है.....

बुढ़िया का पति रोज़ की तरह जंगल में लकड़ी काटने चला जाता है.....

राजन और बुढ़िया ही अब वहा बचे थे.....

राजन भी निकलने लगता है तो कस्तूरी कहती है - अरे बेटा.... कुछ खा पी के तो जा..... न जाने कब वापस आएगा फिर......

राजन खाट पर बैठी बुढ़िया के पास जाता है और अपना सर उसकी गोद में रखकर बोलता - तू तो सिर्फ दूध पीला दे माई.....

कस्तूरी उसका इशारा समझते हुए अपना एक बोबा राजन के मुँह में दे देती है और कहती है - पी ले मेरे लाडले..... जितना मन हो उतना पी ले.....

राजन बुढ़िया का ब्लाउज निकल देता है और कमर से ऊपर उसे पूरी नंगी कर देता है..... राजन उसे खाट पर लेटा देता है और किसी कुत्ते की तरह उसे बूब्स चूसने चाटने लगता है जिसमे कस्तूरी उसका पूरा साथ निभाती है..... कस्तूरी अपने घाघरे का नाड़ा खोलकर पूरी नंगी हो जाती है और राजन अब उसके बदन को चूमने लगता है.....

कस्तूरी अपनी कुटिया के बाहर नीम के पेड़ के नीचे एक खाट पर राजन के नीचे नंगी पड़ी थी.....

राजन अब बुढ़िया की चुत में लोडा डाल कर झटके मार रहा था जिससे बुढ़िया को मज़ा और सजा एक साथ मिल रहा वही खाट चररर चररर कर रही थी.....

राजन बुढ़िया को फिर एक बार अपनी मर्दानगी साबित करने में सफल हो जाता है और बुढ़िया को चोद चोद के ढीला कर देता है......

बुढ़िया की चुत से राजन का माल बह रहा था जिसे राजन आस पास कपड़ा नहीं मिलने पर अपनी जेब से दो दो हज़ार के कई नोट निकाल कर साफ करता है.... और पैसे कस्तूरी के सर पर वार कर उछाल देता है..... कस्तूरी ये देखकर हैरानी से हसने लगती है और पैसे उठाकर अपने पास रख लेती है....



❤️❤️❤️❤️❤️
Bahut hi kamuk aur utejnapurn update hai buddhi bhi chud gayi
 
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Sanju@

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Update 16

राजन शराब से चांदनी को गाँव ले आया था और आज उसने मुनिया और विजय कि शादी करवा दी थी.... विजय मुनिया को लेकर अपने घर चला गया था और सभी और ख़ुशी का माहौल था.....

राजन ने अब तक राधा से कोई खास बातचीत नहीं कि थी और ना ही उसका राधा कि तरफ कोई ध्यान था.... राधा उस बात से बहुत चिंतित थी और अब उसका आकर्षण अपने बेटे के प्रति बढ़ता जा रहा था..... राजन चाहता था कि राधा खुद आकर उससे लंड कि भीख मांगे जो अब तक राधा करने के लिए त्यार नहीं हुई थी......

राधा को राजन और चांदनी के रिश्ते के बारे में भी भनक लग चुकी थी लेकिन उसने इसके बारे में कुछ भी बोलने या करने से खुद को रोक रखा था.....

आज रात मुनिया कि सुहागरात थी और विजय का घर दुल्हन कि तरह सज चूका था.....

अंदर मुनिया सजधाज के बिस्तर पर बैठी थी और साइड में एक ग्लास में हल्दी वाला दूध रखा था.....

विजय राजन के पास था और उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसके साथ ये सब सच में हो रहा है.... वो राजन का शुक्रिया किये जा रहा था....

(राजन विजय कि नज़र बचा के उसकी ड्रिंक में कुछ डाल देता है)

राजन ने विजय को शराब का एक ग्लास डेते हुए कहा - विज्जु आज एक बाद तू भी घर घ्रहस्थी में व्यस्त हो जाएगा और मिल नहीं पायेगा.....

विजय शराब का गिलास लेते हुए- राजन तुझसे मिलने जे लिए तो मैं हमेशा खाली ही रखूँगा दोस्त.....

राजन हसते हुए - सब बदल जाते है विजय.... देखते है तू कितना पहले जैसा रह पाता है.....

विजय हसते हुए शराब का ग्लास खत्म कर देता है और कहता है - देखते है....

दोनों घर के अंदर जाते है जहाँ विजय शराब के नशे में बहकता हुआ एक सोफे पर बैठ जाता है और जल्दी ही कुम्भकरन कि नींद लेने लगता है....

राजन ये देखकर बाहर का दरवाजा बंद जर देता है और विजय को एक चादर ओढकर सुला देता है राजन ने विजय को नींद कि गोली खिला दी थी जिससे अब राजन को अगले दिन शाम तक कोई नहीं उठा सकता था......

राजन अंदर कमरे में जाता है जहाँ मुनिया बिस्तर पर दुल्हन के लिबाज़ में सजी बैठी थी....

राजन कमरे का दरवाजा लगता है और आकर बिस्तर बैठ जाता है.....

राजन पास पड़े दूध के गिलास को उठाकर पिने लगता है और अपनी शर्ट उतार देता है.....

आधा गिलास खाली होने पर राजन मुनिया कि तरफ बड़ा देता है और उसे पिने को कहता है मुनिया.... हिलास लेते हुए पिने लगती है और ख़त्म करके जैसे ही नज़र उठती है वो राजन को देखकर हैरान हो जाती है.....

राजन एक एक करके मुनिया कपडे और गहने उतरने लगता है और कहता है - ज्या हुआ मेरी बहना को.... ऐसे क्यूँ देख रही है.....


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मुनिया - भईया जी.... वो कहा है और आप यहाँ....?

राजन छेड़ते हुए - वो कौन?

मुनिया - भईया जिनसे शादी हुई है.....

राजन - वो तो बाहर सो गए.....और अब वो सो गए तो मैंने सोचा मैं ही अपनी प्यारी बहन के साथ सुहागरात मना लेता हूँ......

मुनिया शरमाते हुए - भईया जी मैं आप भी ना.....

राजन अपने जेब से कंडोम निकलकर - बता कोनसा पसंद है.....

मुनिया - क्या भईया जी.... अपने तो मुझे रंडी समझ लिया.... मेरे साथ भी आप कंडोम लगाकर करोगे?

राजन मुनिया कि इस बार से कामुक हो जाता है और उसका लोडा फनफनाने लगता है....

राजन मुनिया को जोरदार चुम्मा देके अपना लोडा निकल लेता है जिसे मुनिया झपटा मार अपने मुँह में भरकर चूसने लगती है और दोनों के बीच फिर से चुदाई का खेल शुरू हो जाता है.....

राजन मुनिया को एक बच्ची कि तरह उठा उठा कर चाहे जैसे चोद रहा था और मुनिया भी राजन कि चुदाई का मज़ा ले रही थी..... सुबह तक राजन ने मुनिया कि चुत और बच्चेदानी को अपने वीर्य से कई बार अच्छी तरह भर दिया था......

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राजन सुबह होते ही मुनिया को सोता छोड़कर वहा से चला गया और घर आ पहुंचा....


घर पहुँचते ही उसे धनीराम मिलता है.....

धनीराम -राजन सुना तूने...... जमींदार के बारे में....

राजन - क्या.......

धनीराम - अरे वो.... जमींदार और उसके बेटे को किसीने गोली मार दी.....

राजन - तुझे किसने कहा.......

धनीराम - अरे सबको पता है..... एक लड़ने ने दोनों को तलब के पीछे वाले रास्ते पर रोककर गोली मार दी और भाग निकला...... हवेली में अब मातम पसरा हुआ है.....

राजन - चलो अच्छा हुआ..... जमींदार कि तो हर किसीसे दुश्मनी थी.... किसीने निकल ली होगी अपनी दुश्मनी......

धनीराम - राजन सुना है हवेली में से ही किसीने मरवाया है दोनों को...... मुझे तो ठकुराइन पर शक है...... वैसे भी बड़ी बदजात औरत है.... अपने आगे किसीको कुछ नहीं समझती..... वैसे भी महेन्द्र कोनसा उसकी सगी औलाद है....

राजन - पायल और रूपाली.....

धनीराम - वो बेचारी हवेली के किसी कोने में पड़ी होगी.....

राजन धनिराम कि बात सुनकर घर से निकल जाता है और फ़ोन करके ठकुराइन को जंगल वाले खंडर पर मिलने के लिए बुलाता है......


खंडर पर पहुंचकर राजन गुस्से में ठकुराइन से - पायल और रूपाली कहा है ठकुराइन......?? कहीं जमींदार के साथ तूने उनको भी तो.....


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ठकुराइन राजन कि बात काटते हुए - कैसी बात कर रहे हो बेटा...... जमींदार को मैंने नहीं बल्कि उन दोनों ने ही मरवाया है......

राजन ठकुराइन का गला पकड़ कर - क्या बक रही है साली...... सच सच बता...... वरना तू भी नहीं बचेगी.....

ठकुराइन अपना गला छुड़ाने कि कोशिश जरते हुए - बेटा..... सच कहा रही हूँ..... छोड़ मुझे......

राजन ठकुराइन का गला छोड़कर किसी रंडी कि तरह उसके बाल पकड़ लेता है और घटनो पर बैठा कर बोलता है - मुझे सब सच सच बता ठकुराइन...... अगर झूठ बोलेगी तो याद रखना........ मुझसे ज्यादा बुरा इंसान कोई नहीं है......

ठकुराइन रोते हुए - मैंने तो तुम्हे अपना बेटा माना है..... मैं भला कैसे तुमसे झूठ बोल सकती हूँ....

राजन चिल्लाते हुए - चुप कर रंडी..... मैं अच्छी तरह जानता हूँ तेरी जैसी घमंडी औरत को..... मेरे साथ यव माँ बेटे वाला खेल मत खेल.....

ठकुराइन - बेटा..... मैं भगवान कसम ख़ाकर कहती हूँ...... उस रात को जब तूने मेरे दूध पिया था तब से मैंने तुझे अपने बेटे कि तरह ही देखा है...... तू चाहे तो मेरी जान लेले लेकिन मुझपर ये लांछन मत लगा.....

राजन गुस्से में ठकुराइन के 2-3 थप्पड़ मारकर कहता है - ज्यादा नाटक मत चोद रांड..... तू कभी किसी कि माँ नहीं बन सकती और हां..... चुपचाप मुझे जमींदार और उसके बेटे कि मौत का सच बता दे वरना अच्छा नहीं होगा.....

ठकुराइन रोते हुए - बेटा..... सच कहा रही हूँ..... अगर तुझे मेरी बात पर यकीन नहीं आता तो मैं तुझे सबूत दिखा दूंगी......

राजन ये बात सुनकर के बाल छोड़ देता है और कहता है - पूरी बात बता ठकुराइन..... मुझसे कुछ मत छुपाना......

ठकुराइन रोते हुए अपने बाल सही करती है और उठकर राजन के करीब जाकर प्यार से उसके गले लगकर कहती है - बेटा.... तू तो मुझे अपनी माँ मानता था ना..... कोई ऐसे मारपीट करता है अपनी माँ के साथ......

राजन को ठकुराइन कि बात सुन कर और गुस्सा चढ़ जाता है और राजन ठकुराइन कि चूची पकड़कर जोर से मसलते हुए उसे खंडर कि दिवार से चिपका देता है और सारी उपर करके ठकुराइन कि चड्डी नीचे करते हुए अपने लोडा एक बार में उसकी चुत में डाल देता है जिससे ठकुराइन कि जान हलक में आ जाती है और ठकुराइन कराहती हुई जोर जोर से चिल्लाती है लेकिन राजन बिना कोई रहम के जोर जोर से झटके मारने लगता है......


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ठकुराइन - aahhh बेटा..... छोड़ दे.....

राजन जोर जोर से चोदते हुए - अरे मम्मी ये मेरा प्यार है.... तूने ही कहा था ना मारपीट अच्छी नहीं लगती तो सोचा थोड़ा प्यार कर लूँ अपनी मम्मी से.....

ठकुराइन रोते हुए राजन को पकड़कर - बेटा..... कोनसी बात का बदला ले रहा है मुझसे..... छोड़ दे..... कोई अपनी माँ से इस तरह प्यार करता है क्या....?

(राजन बिना कोई थूक या तेल के अपना लोडा ठकुराइन कि चुत में डाल दिया था और ठकुराइन ने उस रात के बाद कभी किसी का लोडा नहीं लिया था जिससे उसकी चुत सिकुड़ गई थी..... राजन का मोटा तगड़ा लोडा इतने दिन जब वापस से ठकुराइन कि चुत में गया तो ठकुराइन को किसी कवारी लड़की कि तरह दर्द होने लगा और वो दर्द में चिल्लाने लगी लेकि राजन को ठकुराइन को दर्द देने में मज़ा आ रहा था)

राजन - अरे मम्मी.. अपने बेटे का प्यार नहीं झेल पा रही तू...... गुस्सा कैसे झेल पाएगी.....

ठकुराइन - बेटा..... भगवान के बास्ते मुझ पर रहम खा.... मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है जो इस तरह मेरे साथ....


राजन लगातार चोदते हुए - अच्छा..... गाँव कि कितनी औरत का बिगाड़ा है बताऊ तुझे मम्मी..... बहुत घमंड है ना तुझे.... आज तेरा सारा घमंड उतार दूंगा.....


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ठकुराइन हर झटके पर उछलते हुए - बेटा.... अह्ह्ह वो तो तू कब का उतार चूका है.... Ummm यकीन नहीं आता तो किसी से भी पूछ ले अब मैं वो पहले वाली ठकुराइन नहीं रही.... बेटा छोड़ दे अब....

(राजन ठकुराइन को उठाकर खंडर के अंदर बने घास के ढेर पर पटक देता है और उसके ऊपर चढ़कर वापस चुदाई शुरू कर देता है मगर इस बार धीरे धीरे वो ठकुराइन कि बुर पेलता है जिससे ठकुराइन को भी मज़ा आने लगता है.....)

राजन ठकुराइन को धीरे धीरे चोदते और होंठ चूमते हुए - बता मम्मी.... क्या हुआ है जमींदार के साथ....

ठकुराइन - बेटा.... वो लड़का जो जंगल में रुपाली और पायल के साथ था......

राजन ठकुराइन के मुँह में थूककर - हम्म्म उसका क्या....?

ठकुराइन राजन के थूक को निगलकार - उसीने पायल और रूपाली के कहने पर जमींदार को उसके बेटे के साथ मार डाला.....

राजन ठकुराइन के निप्पल काटते हुए - और वो जमींदार को मारकर भाग गया.....

ठकुराइन राजन का मुँह अपने बोबे में ठूसते हुए - नहीं बेटा...... बड़ी हरामी लड़किया है दोनों.....

राजन - कौन पायल.....

ठकुराइन - हाँ पायल और रूपाली ने जमींदार और उसके बेटे के मरवाने के बाद हवेली के एक नौकर से उस लड़को भी मरवा दिया......

(राजन ये सुनकर ठकुराइन को देखने लगा.....

राजन का लोडा अभी भी ठकुराइन कि चुत में था लेकिन राजन को ठकुराइन कि बात पर इतना गुस्सा आया कि वो फिर से एक जोरदार तमाचा ठकुराइन के गाल पर जड़ दिया और उसकी चुत में जोरदार झटके मारने लगा...... )

राजन - मम्मी..... झूठ मर बोल...... रूपाली का आशिक है वो.... रुपाली उसे कैसे मरवा सकती है....

ठकुराइन वापस रोने लगती है और हर झटके पर aahh भरती हुई कहती है - बेटा..... तुझे विश्वास नहीं होता तो ये देख......

(ठकुराइन अपने फ़ोन पर एक वीडियो दिखाती है जिसमे रुपाली और पायल धोके से एक नोकर कि मदद से कमल को मरवा देते है और हवेली के अंदर ही उसकी लाश गाड देते है)

ठकुराइन - बहुत शातिर लड़किया है साली..... पैसो कि लालच में जमींदार और उसके बेटे को मौत के घाट उतार दिया और नोकरी कि मदद से उस लड़के को भी मरवा दिया.....

(राजन का दिमाग अब नहीं चल रहा था वो ठकुराइन को चोदना बंद करके ठकुराइन कि बगल में लेट गया और कुछ सोचने लगा.... अब ठकुराइन ने राजन का लोडा पकड़कर धीरे धीरे चूसना चालू कर दिया था....)

राजन कुछ देर सोचने के बाद ठकुराइन से - मगर वो दोनों तो जमींदार और उसके बेटे से तंग आकर हवेली से भागने कि भी कोशिश कर चुकी थी......

ठकुराइन लंड चूसते हुए - बेटा...... दोनो बेग में पैसे भरके भागी थी..... और उस लड़के का इस्तेमाल किया था हवेली से भागने में......... दोनों एक नम्बर कि बदचलन है कई बार तो हवेली के नोकरो के साथ मुँह काला कर चुकी है..... अब तो उनमे पूरी जमींदारी हड़पने का लालच आ गया है.....

ये कहते हुए ठकुराइन राजन का लंड चूसना छोड़कर उसके लोडे को अपनी चुत में डालकर बैठ जाती है और धीरे धीरे ऊपर नीचे होती है.....

ठकुराइन राजन के लोडे पर उछलते हुए अपने पर्स से बड़ी एडवांस सिगरेट निकलकर लाइटर से जलाते हुए एक लम्बा कश लेकर सिगरेट राजन कि तरफ बढ़ा देती है और कहती है - बेटा.... बहुत शातिर है दोनों...... मुझे लगता है कुछ दिनों में दोनों इस गाँव पर राज़ करेंगी.....


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राजन सिगरेट का कश लेते हुए - एक बात पुछु?

ठकुराइन राजन के लोडे पर उछलते हुए - पूछ ना...... बेटा....... कुछ भी.....

राजन सिगरेट का एक कश और लेता और और सिगरेट ठकुराइन को देते हुए पूछता है - सच में मुझे बेटा मानती है.....???

ठकुराइन सिगरेट का कश लेते हुए - अगर अपनी माँ को आज़माना चाहता है तो आज़मा ले......

(ये कहते हुए ठकुराइन जोर जोर से राजन के लोडे पर उछलने लगती है..... राजन और ठकुराइन दोनों कुछ देर के बाद एकसाथ झड़ जाते है और ठकुराइन राजन के सीने पर गिरती हुई राजन के होंठों को अपने होंठों में क़ैद करके चूमने लगती है.....)

राजन और ठकुराइन के चुम्बन टूटने पर राजन प्यार से ठकुराइन कि आँखों में देखकर बोलता है -साली.... बेटाचोद माँ.....

ठकुराइन राजन कि बात का पलटकर जवाब देते हुए - साला मदरचोद बेटा.....

दोनों हँसने लगते है......


Comment guys
Payal aur rupaali ko kya sajja du??

❤️❤️❤️❤️❤️
Superb update
ये क्या पायल और रूपाली के कमल का खून कर दिया क्या ये राजन के कहने पे किया है या दोनो बहनों ने सच में राजन और कमल को सिर्फ इस्तेमाल किया है जैसे पैसों के लिए राजन को छोड़ दिया था वैसे पैसों के लिए ये भी कर सकती हैं
 
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Update 17

राजन ठकुराइन कि चुत और जरुरी जानकारी लेकर खंडर से बाहर आ जाता है और ठकुराइन को हवेली के पिछवाड़े छोड़कर घर आ जाता है.......

राजन जब घर आता तो देखता है कि जहाँ राधा पड़ोस में किसी काम से गई हुई है और चांदनी घर में अकेली है.....

चांदनी कि आँखे राजन को देखकर गुस्से से लाल हो जाती है और वो सीढ़ियों से ऊपर छत पर चली जाती है.....

राजन चांदनी के पीछे पीछे छत पर आ जाता है तो चांदनी छत पर बने एक छोटे से कमरे जहा एक खाट और लकड़ी वगेरा रखी हुई थी में आ जाती है और दरवाजा लगाने लगती है......

राजन जल्दी से चांदनी को दरवाजा लगाने से रोककर कमरे के अंदर घुस जाता है और दरवाजे को हल्का सा बंद जर देता है......

चांदनी राजन को गुस्से से देखने लगती है और राजन प्यार से चांदनी को अपनी बाहों में भरने कि कोशिश करता है लेकिन चांदनी राजन के हाथो को झटका देती है और एक जोरदार थप्पड़ राजन को जड़ देती है.....

राजन थप्पड़ खाकर सुन्न हो जाता है और खड़ा रहता है.... कुछ देर बाद चांदनी के बाद जाकर प्यार से उससे पूछता है.....

राजन - कुछ बात है चांदनी......

चांदनी राजन को एक थप्पड़ और मारकर बोलती है - मेरी चुत में कोई कमी थी जो तूम मुनिया की लेने लगे हो?

राजन जबरदस्ती प्यार से चांदनी को अपनी बाहों में भर लेता है और उसके गाल चूमते हुए कहता है - तुझसे किसने कहा..... मुनिया को तो मैं बहन की मानता हूँ.....

चांदनी गुस्से से - तुमसे बड़ा बहनचोद मैंने कभी नहीं देखा....... माँ ने मुझे सब बता दिया है तुमने क्या क्या गुल खिलाये है मेरे पीछे.....

राजन हैरानी से - मतलब......

चांदनी - मतलब माँ हमारे बारे में सब जानती है और उसने मुझे तुम्हारे बारे में सब बता दिया है..... छोडो मुझे..... चांदनी राजन की बाहों से आजाद होते हुए.... जाओ जाकर अब मुनिया से बात करो हमरे पास आने कोई जरुरत नहीं है.....

राजन - मगर उसको हमारे बारे में किसने बताया....

चांदनी शरमाते हुए - आधी रात को जब घर में खाट के चररर चररर करने की आवाज़ आएगी तो किसको नहीं पता लगेगा तुम्हारी करतूतो का..... कितना मना किया था मैंने लेकिन तुम्ही नहीं माने..... माँ ने हमें देख लिया..... और मैंने भी उनको सब सच सच बता दिया........

राजन - साली..... राधा रंडी..... हर वक़्त जासूसी करती है......

चांदनी राजन का मुँह पकड़कर - क्या बोला तुमने.....

राजन मुस्कुराते हुए - कुछ नहीं......

राजन चांदनी को बाहो में भरकर चूमने लगता है लेकिन चांदनी उसे रोककर कहती है - क्या तुमने माँ के साथ भी......

राजन बात काटते हुए - अभी तक तो कुछ भी नहीं किया....... ये कहकर वो चांदनी को चूमने लगता है............

चांदनी चुम्बन तोड़ते हुए - और मुनिया के पास वापस जाओगे?

राजन - तेरे होते हुए मुझे किसीके पास जाने की क्या जरुरत है मेरी जान......

ये कहते हुए राजन चांदनी को उठाकर खाट पर पटक देता है और उसके उपर आकर चांदनी को चूमने लगता है...... चांदनी भी राजन का साथ निभाने लगती है.....

शाम हो चुकी थी धीमी धीमी बरसात बरसने लगी थी........ मौसम ने अपनी खूबसूरती जाहिर करने का फैसला कर लिया था और यहां राजन और चाँदनी दोनों एक दूसरे में इस तरह खोये हुए थे की उन्हें किसी और चीज का होश ही नहीं था.....

एक बार फिर खाट चररर चररर की आवाज करने लगी थी.......

चांदनी किसी अबला की तरह राजन के नीचे लेटी हुई थी और राजन बार अपने लोडे से उस अबला का तबला बजा रहा था.....

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पूरा माहौल चुदाईमय था..... चांदनी अब तक झड़ चुकी थी और चांदनी अपनी गांड उठाकर राजन का पूरा पूरा साथ निभा रही थी ताकि वो भी झड़ जाए और कुछ देर में राजन भी चांदनी की चुत में झड़ गया... दोनों भाई बहन अब इस खेल में पारंगत थे और एकदूसरे को अच्छे से समझते थे......

इतने में चांदनी ने किसीके आने की आहट सुनी.....

चांदनी राजन से अलग होते हुए - कोई आ रहा है.....

राजन - धनीराम होगा..... मैंने शराब मंगाई थी....

चांदनी - पापा.....

राजन - पापा नहीं चांदनी धनीराम कुत्ता है मेरा.... जो कहता हूँ करता है.....

चांदनी - लेकिन राजन..... तुमने कैसे.....

राजन - तुझे बहुत बुरा भला कहता था ना.... मदरचोद को कुत्ता बनाके रखा है.... रोज़ एक हड्डी फेकता हूँ साले को.... जो बोलता हूँ करता है.....

चांदनी- अच्छा.....???

राजन - शक है तुझे?

चांदनी - अभी पता चल जाएगा.....

इतने धनीराम कमरे के अंदर आजाता है जहाँ राजन और चांदनी जनमजात नंगे थे.......

राजन - ले आया बोतल धनीराम.... ला देदे....

धनीराम चुपचाप बोतल राजन को देकर कमरे से बाहर जाने लगता है इतने में चांदनी उठकर टेबल पर बड़ी एक बड़ी गोल्डफ्लेग सिगरेट जलाती है कश लेते हुए कहती है - क्या हाल है धनीराम.....

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धनीराम रुक जाता है चांदनी को देखने लगता है लेकिन उसके मुँह से कुछ नहीं निकलता.....

चांदनी एक हाथ से सिगरेट का कश लेकर दूसरे हाथ से अपनी बुर के होंठ खोलते हुए धनीराम से कहती है- धनीराम...... चोदगा अपनी मनहूस बेटी की चुत को?

राजन चांदनी की बेबाकी देखकर दंग रह जाता है और अपना लोडा मसलते हुए खड़ा होकर चांदनी को देखता रहता है.....

चांदनी खाट पर लेट जाती है और सिगरेट का कश लेते हुए धनीराम से वापस बोलती है - देख क्या रहा है धनीराम..... आजा..... चांदनी धनीराम को इशारा भी करती है लेकिन धनीराम बूत बनकर खड़ा देखता रहता है......

राजन शराब की बोतल खोलकर तेज़ी से एक पेग पी लेता है और खाट पर आकर चांदनी से सिगरेट लेकर उसको अपना लोडा चूसाने लगता है....

राजन सिगरेट का धुआँ हवा में उड़ाते हुए - अच्छे से चूस मेरी प्यारी बहना..... अपने बाप के सामने शर्माने का नाटक मत करना....


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चांदनी किसी कुत्तिया की तरह राजन का लोडा गले तक लेकर चूसे जा रही थी जिससे राजन के लोडे को बड़ा आराम मिल रहा था.....

धनीराम अपनी आखों के सामने ये सब होता देखकर हैरान रह जाता है और अपना पव्वा निकालकर उसमे से दारू की घूंट मारने लगता है.....

अब तक खाट की चररर चरर शुरू हो चुकी थी और धनीराम अपनी आखों के सामने अपने बेटे से अपनी बेटी को चुदते देख रह था.....

राजन - बस लड़की पैदा की है तूने धनीराम..... साली को चोदने में मज़ा आ जाता है.....

चांदनी राजन से - लड़का भी तो बड़ा बाहनचोद पैदा किया है धनीराम ने..... साला जब देखो अपनी बहन की चुत में आकर घुस जाता है.....

धनीराम से अब रहा नही जाता वो पीछे मूड जाता है और दिवार की तरफ मुँह करके अपना लोडा मुठियाने लगता है.....

ये देखकर राजन और चांदनी एक दूसरे को देखकर हँसने लगते है और खुलकर चुदाई का मज़ा लेने लगते है......

कुछ देर में धनीराम अपना पानी दिवार पर छोड़कर कमरे से बाहर निकल जाता है..... यहाँ राजन अब भी चांदनी की चुत चोद रहा होता है.....


सांझ ढल चुकी थी और रात ने अपने पैर पैसार लिए थी..... चांदनी किसी रंडी की तरह खाट पर चुदवा कर नंगी पड़ी थी और राजन शराब के जाम लेते हुए खिड़की से बाहर हो रही बरसात को देख रखा था..... राधा बरसात के कारण अब भी घर से बाहर थी और जब तक बरसात नबी थमती उसके आने का कोई सवाल नहीं था.....


चांदनी उठकर राजन के पास जाती है और उसके हाथो से शराब का ग्लास लेकर खुद पिने लगती है.....

राजन - चढ़ जायेगी तो मुझे मत कहना.....

चांदनी - अगर चढ़ गई तो तुम मुझे कुछ कहने दोगे?

राजन - अच्छा.....

चांदनी और 2 पेग पीकर राजन से - तुम मुझे पसंद तो करते हो ना.....

राजन प्यार से चांदनी के गाल सहलाते हुए - तुझे अब तक नहीं पता.....

चांदनी - बड़ी बहन हूँ तुम्हारी मगर आज भी लगता है तुम्हे अच्छे से नहीं जानती.....

राजन चांदनी के होंठों पर सिगरेट लगा कर जलाते हुए - अच्छा तो मेरी बड़ी बहन कोअपने इस छोटे भाई जे बारे में क्या जानना है?

चांदनी सिगरेट का कश लेते हुए - ये बताओ कितना प्यार करते हो मुझसे?

राजन चांदनी को बार बार चूमते हुए - इतना इतना और इतना.....

चांदनी राजन का सर पकड़कर अपने बूब्स को उसके मुँह में ठूस देती है और सिगरेट का कश लेते हुए कहती है - जल्दी से इनमे दूध आ जाए..... फिर अच्छे से चूसाउंगी मेरे राजा भईया को.....

राजन चांदनी से सिगरेट लेकर कश मारता हुआ उसकी एक टांग उठा कर पास की कुर्सी पर रख देता है और खिड़की की तरफ झुका कर उसकी गांड मार मारने लगता है....

राजन चांदनी को खिड़की की तरफ खड़ा करके उसकी गांड मारने लगता है जिससे चांदनी कमर से ऊपर आधी नंगी खिड़की से नज़र आ रही होती है और धनीराम नीचे से उसे चुदते देखने लगता है और अपना लोडा वापस मुठियाने लगता है.......


रात गहरी हो चली थी अब बरसात भी थम गई थी और राधा भी घर वापस आ गई थी..... राजन चैन से सो चूका था और चांदनी हलके नशे में घर का काम करने में व्यस्त हो गई थी..... धनीराम भी बरसात के रुकते ही बाहर चला गया था.....


kesi lag rhi hai story guys❤️❤️



बहुत ही जबरदस्त और लाज़वाब अपडेट है
 
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Update 18



राजन पायल और रूपाली को सबक सीखना चाहता था जिससे उनको उनके किये की सजा मिल सके....
रूपाली ने पहले तो झूठ बोलकर कमल को अपने प्रेमजाल में फंसाया था..... फिर पायल ने उसे मनगढंत कहानी सुनाकर अपनी मदद को राज़ी किया था...... उसके बाद दोनों ने कमल के हाँथो जमींदार और उसके बेटे महेंद को मरवाकर कमल को भी एक नोकर के हाथो ठिकाने लगा दिया था.....

पायल और रूपाली का पूरी हवेली में एकछत्र राज़ स्तापित हो चूका था.......

ठकुराइन की हैसियत हवेली में पायल और रूपाली के सामने कुछ नहीं थी.... दोनों ने कई बार ठकुराइन की बेज्जती की थी और चुपचाप किसी कोने में पड़े रहने को कहा था.....

ठकुराइन ने कई बार इसकी शिकायत राजन से की थी लेकिन राजन सही मोके की तलाश में था.....

राजन को एक ऐसे आदमी की तलाश थी जो उसके कहने पर हर काम कर सके.....

खालिद रुखसाना को लेकर कश्मीर गया था और वो लोग अभी भी वही थे.......

पायल और रूपाली ने अब ठकुराइन के साथ साथ गाँव के लोगों को भी परेशान करना शुरू कर दिया था......

दोनों इतनी चालबाज़ थी की एक के बाद एक कई लोगों को ठिकाने लगा चुकी थी जिनसे उन दोनों की जमींदारी और वर्चस्व को खतरा था.....

अब तक हवेली का कोई वारिस नहीं बचा था सिवाए ठकुराइन के जो जमींदारी और हवेली पर अपना हक़ जमा सकती थी.....

पायल और रूपाली ठकुराइन को भी अपने रास्ते से हटाने की फिराक में थी और एक बार उन दोनों ठकुराइन के खाने में जहर मिलाकर उसको जान से मारने की कोशिश भी की थी लेकिन ठकुराइन की होशियारी और समझदारी ने उसे मरने बचा लिया था....

पायल और रूपाली को अब किसीका खौफ नहीं था और वो दोनों खुलकर अपना रंग दिखाने लगी थी.....

राजन पायल और रूपाली की हरकतो से तो वाकिफ था लेकिन दोनों इतने गिर जाएंगी ये उसे पता नहीं था....

राजन ने जब ठकुराइन को ज़हर देने की बात सुनी तो उसको दिमाग हिल गया और अब उसने मन बना लिया था की पायल और रूपाली को उनकी असली औकात दिखानी पड़ेगी.....

इतवार की शाम थी और मौसम में थोड़ी नमी थी मौसम सुहाना था.....

राजन ठेके पर बैठकर ग़ज़ल सुनते हुए शराब की घूंटो का आनंद ले रहा था तभी धनीराम आकर राजन के सामने बैठ जाता है.....

धनीराम राजन के शराब की बोतल से पैग बनाकर पीते हुए - राजन पता है आज उन दोनों बिगड़ैल चुड़ैलों ने क्या कारनामा किया है......

राजन - कोनसी चुड़ैल धनीराम.....? किसकी बात कर रहा है तू.....

धनीराम शराब पीते हुए - वही.... जमनादास की लौंडिया पायल और रूपाली...... जमींदार की बहुएँ....

राजन ठहरते हुए बोला -क्या किया उन दोनों रंडियो ने?

धनीराम - अरे वो अपना चम्पक है ना..... उसने कुछ पैसे उधर लिए थे जमीनदार से.... जो जमींदार के खाते में बाकी थे..... बेचारे ने आधे चूका दिए आधे बाकी थे..... और फसल में सही दाम नहीं मिलने पर उसके पैसे नहीं थे.... जमींदार की दोनों बहुये आज चम्पक से खेत में आई थी....

राजन - क्या कहाँ दोनों ने.....

धनीराम -1 एक हफ्ते का टाइम दिया है चम्पक को... उसके बाद बोल रही थी की चम्पक के घर और खेत को कब्ज़े में कर लेगी और नीलाम करके वसूली करेगी..... चम्पक का इतना बड़ा परिवार है फसल के दाम नहीं मिलने से पहले परेशान है.... जैसे तैसे अपने बचे पाल रहा है ऊपर से उन दोनो की ये धमकी.....

राजन - तू क्यूँ दुखी हो रहा है धनीराम......

धनीराम शराब पीते हुए - मैं क्यूँ दुखी होने लगा.... मैं तो दोनों बहनो की करतूत बता रहा हूँ..... ठकुराइन को भी दोनों ने अपनी कटपुतली बना रखा है.... जैसे चाहे नचाती है....

राजन ठकुराइन का नाम आते ही सोच में पड़ गया और शराब खाने से निकलकर बाहर आ गया......


राजन खालिद को फ़ोन करके - कहा है तू....?

खालिद - तूने ही तो कहा कहीं घूमने चला जा रुखसाना को लेकर...... पहले हिमाचल में था अब कश्मीर मैं हूँ.....

राजन - काम है तुझसे.....कब आएगा?

खालिद -भाई मेरा अभी आने का कोई इरादा नहीं है..... तेरी बहन रक्कू के साथ वादियों में चुदाई का अलग ही मज़ा है.....

राजन - भोस्डिके..... कुछ काम था जरुरी तुझसे...

खालिद - किसी और से करवा ले.... राहुल है ना....

राजन - राहुल तो फट्टू है..... बहुत जोखिम है काम है...... मुझे एक साथी चाहिए..... तेरे अलावा कोई नहीं कर सकता......

खालिद हसते हुए - किसी को मरवाना है क्या....

राजन - हाँ कुछ ऐसा ही है......

खालिद - मैं तुझे उस्मान चाचा के नंबर भेज रहा हूँ.... जैसा भी काम हो वो कर देगा बस पैसे लेगा.....

राजन - भरोसे का आदमी तो है ना..... धोखा थोड़ी दे देगा......

खालिद - अरे बिलकुल भरोसे का आदमी है भाई..... एक बार काम हाथ में ले लिया तो पूरा करके ही छोड़ता है......

राजन - ठीक है नंबर दे.... मैं बात करता हूँ उससे....

खालिद - अभी भेजता हूँ भाई..... (कॉल कट हो जाता है )


राजन खालिद के दिए हुए नंबर पर कई कॉल करता है लेकिन कोई जवाब नहीं आता....

इधर शहर के बीच बसी एक कच्ची बस्ती के घर में बार बार फ़ोन बजे जा रहा था.... और पड़ोस में किसी का निकाह होने की ख़ुशी में DJ जोर जोर बज रहा था जिससे किसीको एक दूसरे की आवाज़ बमुश्किल सुनाई दे रही थी......

फोन बार बार बज रहा था लेकिन फ़ोन के मालिक का उस पर ध्यान नहीं था..... ये उस्मान का फ़ोन था....

(उस्मान एक 37 साल का सांड आदमी था जिसकी कदकाठी लम्बी चौड़ी थी.... लंड भी लम्बा और मोटा था..... उस्मान की बीवी का इंतेक़ाल हो चूका था और वो अपनी एकलौती बेटी रजिया के साथ इसी घर में रहता था..... रज़िया एक मासूम कमसिन कली थी जिसने अभी जवानी का पानी नहीं चखा था..... दिखाने में बिलकुल बच्ची..... आधे पके दूध...... चुत पर अब तक एक भी बाल न आना..... हलकी सी बाहर निकली गांड और पतली सी कमर रज़िया को कच्ची कली होने प्रमाण देते थे...... )


कमरे की हालत कुछ अजीब थी......

जगह जगह सामान बिखरा पड़ा था, एक पंखा जो धीरे धीरे आवाज़ करता हुआ चल रहा था..... कई खाली शराब की बोतल फर्श पर थी एक बोतल बिस्तर के सिरहने पर रखी थी जिसके पास ही सिगरेट और कंडोम के कई पैकेट थे, इसके बाजू में vigra की गोलीया और शिलाजीत की शीशी भी पड़ी थी जिसको देखकर पता चलता था की उस्मान किसीको बुरी तरह चोदने की फिराक में था ... उस्मान अपना लोडा का टोपा एक कच्ची चुत के अंदर किये हुए था......


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ये चुत उस्मान की बेटी रज़िया की थी जो अब तक किसीसे नहीं चुदी थी.......
रज़िया किसी बिन पानी मछली की तरह छटपटा रही थी और रोती हुई उस्मान से छोड़ने की गुहार लगा रही थी.....

रज़िया - अब्बू छोड़ दो......

उस्मान रज़िया के निम्बू चूसता हुआ - बहुत दिनों से तड़पा रही है तू बेटी..... आज तो तुझे नहीं जाने दूंगा.... बहुत अब्बू अब्बू बोलकर चिपकती है ना..... आज ऐसे चिपकाऊंगा सारी जिंदगी याद रखेगी तू..... मेरी बेटी....

रज़िया रोते हुए - अब्बू.... दर्द हो रहा है.....

उस्मान अपना लोडा रज़िया की चुत में दबाकर घुसाते हुए - थोड़ा सा दर्द बर्दास्त कर ले मेरी बेटी..... अपने अब्बू की खातिर.....

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रज़िया - अब्बू..... छोड़ दो मुझे......

उस्मान के सर में sex चढ़ा हुआ था वो रज़िया की बात और उसको दर्द नज़रअंदाज़ करते हुए अपने लोडे पर थोड़ा जोर डालता है जिससे उसका लोडा रज़िया की चुत चिरता हुआ आधे से कम अंदर चला जाता है जिससे रज़िया की कच्ची चुत से खून की धार निकल जाती और बिस्तर की सफ़ेद चादर को हलकी सी लाल कर देती है ......

रज़िया रोते हुए जोर से - अब्बू...... छोडो...... मैं मर गई...... निकालो अब्बू....... अब्बू...... अल्लाह का वास्ता आपको अब्बू......

उस्मान के लोडे के नीचे रज़िया बेचारी नंगी रोते हुए पड़ी थी...... जैसे किसी शेर के नीचे कोई हिरणी हो....

रज़िया की चीखे और आवाजे DJ के कारण दब गई थी और सिर्फ उस्मान ही उन आवाजो को सुनके मज़े ले सकता था..... थोड़ी देर शोर मचाने के बाद राज़ीये जैसे ही कुछ सम्भली उस्मान ने फिर से एक झटका मार दिया और अपना लोडा आधे से कुछ ज्यादा रज़िया की कच्ची चुत में घुसा दिया.....

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इस बार रज़िया और ज्यादा मचलती हुई उस्मान से बचने की कोशिश करने लगी लेकिन.... नन्ही जान उस्मान जैसे सांड के आगे क्या कर पाती.....

रज़िया बेसुध ही होने लगी तो उस्मान ने रज़िया पर पानी डाल कर उसे फिर से होश में ला दिया.....

रज़िया दर्द में करहते हुए रोने लगी और उस्मान ने रज़िया के मुलायम होंठों को अपने होंठों में बंद करके चूमना शुरू कर दिया और उसके निम्बू मसलने लगा......

करीब 15-20 मिनट उसी तरह रहने के बाद रज़िया का रोना धोना कम हुआ तो उस्मान ने अब अपना लोडा बिलकुल धीरे धीरे आगे - पीछे करना शुरू कर दिया....

रज़िया गिड़गिड़ाते हुए - अब्बू...... नहीं...... अह्ह्ह..... मर गई..... अम्मी...... अह्ह्ह अल्लाह...... हाय....... मर गई...... अब्बू....... छोड़...... अह्ह्ह.... दो........

उस्मान अपनी बेटी रज़िया को बिलकुल आहिस्ता आहिस्ता चोद रहा था जिससे रज़िया को अब ज्यादा तकलीफ न हो.... लेकिन रज़िया अब भी बहुत दर्द में थी और उसके लिए अपने अब्बू उस्मान का लोडा सहन कर पाना मुश्किल हो रहा था....

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इतने में उस्मान ने बार बार बज रहे अपने फ़ोन की तरफ देखा..... तो उसमे राजन का फ़ोन आ रहा था और उसके बहुत से मिस्ड कॉल थे....

उस्मान फ़ोन उठाते हुए गुस्से में - कौन है....

राजन - खालिद ने नंबर दिए थे तुम्हारे..... एक काम था तुम्हारे लिए.......

रज़िया - अब्बू..... आह्ह..... अब्बू...... छोड़ दो ना...... दर्द हो रहा है...... मर जाउंगी..... अह्ह्ह अब्बू....... (राजन ये रज़िया की बात फोन पर सुन लेता है)

उस्मान रज़िया के मुँह पर हाथ रख कर अपने चोदने की रफ़्तार को थोड़ा बढ़ा देता है और फ़ोन पर राजन से कहता है- केसा काम....?

राजन - खालिद ने कहा था तुम कोई भी काम कर सकते हो.......

उस्मान - हाँ..... बस कीमत अच्छी मिल जाए.... मैं कुछ भी कर सकता हूँ......

राजन- कीमत तुम्हारी सोच से ज्यादा अच्छी मिलेगी.... मैं सुबह कॉल करूंगा...... ये कहकर राजन फ़ोन रख देता है.....

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उस्मान अपनी बेटी रज़िया की टाँगे और चौड़ी करते हुए उसे अब थोड़ा तेज़ तेज़ चोदने लगता है जिससे रज़िया की हालत ख़राब हो रही थी और उसकी चिंखे पुरे कमरे में गूंज रही थी.....

Comment guys❤️❤️❤️❤️

Koi suggestion do aage ke liye❤️❤️❤️
बहुत ही शानदार अपडेट है
 
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Update 19


रात को देर तक चांदनी को चोदने ने बाद राजन घोड़े बेच कर सोया था जिससे उसकी आँख आज सूरज सर पर चढने के बाद भी नहीं खुली थी....

सुबह के दोपहर के 2 बज रहे थे और चांदनी या राधा में से किसीने भी राजन को जगाने की कोशिश नहीं की थी....

चांदनी घर का छोटा मोटा काम करने में व्यस्त थी और राधा आज कल राजन और चांदनी से बात किये बिना ही अपनेआप में गुमसुम हो चली थी..... शायद उसे राजन से जो चाहिए था वो राजन उसे नहीं दे पा रहा था यही कारण था की राधा अक्सर घर से नदारद रहकर दिन गुजरती थी और चांदनी वक़्त बेवक़्त चुदाई में खोये रहते थे.....

राजन की जैसे ही आँख खुली तो उसने जल्दी से अपना मुँह धोकर फ़ोन देखा जिसमे शाम के 4 बजे का समय हो चला था.......

राजन घर से बाहर आकर गाँव के तालाब के किनारे बैठ गया था जहाँ उसने धनीराम को भी बुला लिया था..... दोनों बाप बेटे साथ में शराब के जाम टकरा रहे थे और धनीराम राजन को गाँववालो की राज की बातें बता रहा था......

दोनों बाप बेटे नशे में चूर हो चुके थे और शाम ढल चुकी थी..... राजन को इतने में याद आया की उसे सुबह उस्मान को फ़ोन करना था जो वो अभी तक नहीं कर पाया था..... राजन झट से उठकर खेत के अंदर जाकार मूतते हुए उस्मान को फ़ोन करने लगता है लेकिन कई बार फ़ोन करने बाद भी उस्मान फ़ोन नहीं उठाता........

आखिरी बार जब राजन का फ़ोन कटने वाला होता है उस्मान फ़ोन उठा लेता है.....

उस्मान हाफ्ते हुए - कौन....??

राजन - मैं खालिद का दोस्त राजन... कल बात हुई थी तुमसे..... सुबह मैं फ़ोन नहीं कर पाया....

उस्मान लम्बी लम्बी सांस लेते हुए - जल्दी बोलो..... क्या काम है

(रजिया - अह्ह्ह अब्बू...... छोड़ दो...... अब तो रहम करो...... )

राजन - काम के लिए तुम्हे मेरे गाँव आना पड़ेगा..... मैं सुबह तुम्हे फ़ोन करके सब बता दूंगा कहा आना है और क्या काम है...... तुम्हारे आने पर आधा पैसा एडवांस भी मिल जायेगा....

उस्मान अपनी बेटी रज़िया की चुत में झटके मारते हुए - ठीक है.... (फ़ोन कट जाता है....)

उस्मान के कमरे की हालत कल से ज्यादा खराब थी जिसमे जगह जगह इस्तेमाल किये हुए कंडोम और vigra की गोली का खाली पत्ता.... उस्मान और रज़िया के कपडे बिखरे थे..... जिसे देखकर कोई भी बता सकता था की उस्मान ने अपनी बेटी रज़िया को कल रात से सोने नहीं दिया था और बार बार चोदा था.....

अब भी उस्मान जैसा सांड अपनी फूल. सी बच्ची को दिवार से चिपका कर उसे गोद में उठाये बड़े बेरहमी से चोद रहा था.....

रज़िया अब कल की तरह रो नहीं रही थी लेकिन अब भी उसे उस्मान के मोटे लंड से चुदवाने में परेशानी आ रही थी और दर्द हो रहा था.....

उस्मान ने अपनी बेटी की कुंवारी चुत अब पूरी तरह से खोल दी थी जिससे उसकी चुत के होंठ अब अलग हो चुके थे....


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उस्मान - बेटी मज़ा आ रहा है अब्बू का लोडा लेके.... बोल..... बेटी......

रज़िया - अब्बू..... आहहहह..... पूरा बदन दर्द कर रहा है.... अब तो छोड़ दो......

उस्मान - बेटी अपने अब्बू को रोज़ अपनी चुत देगी ना.... बोल.....

रज़िया - आहहहहह..... अब्बू.... छोड़ दो...... दर्द हो रहा है..... अब्बू...

उस्मान वापस रज़िया की चुत में झड़ते हुए - ले बेटी..... अह्ह्ह...... आह्ह.....

उस्मान रज़िया को चोदकर छोड़ देता है और बिस्तर पर पीठ के बल लेट जाता है....

रज़िया चुदाई के कारण चल नहीं पा रही थी.... वो रंगती हुई बिस्तर पर आकर उस्मान के बगल में लेट जाती है और बिस्तर पर पड़ते ही उसकी आँख लग जाती है.....

उस्मान अपनी बेटी के चमकते बदन को देखने लगता है जिसका खज़ाना उसने कल रात से लेकर अब तक कई बार लुटा था....

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उस्मान भी काफी थक चूका था.... उसकी भी जल्दी आँख लग गई और वो भी अपनी बेटी रजिया के पास सो गया.....



सुबह कुछ गिरने की आवाज़ सुनकर उस्मान की आँख खुली.... सुबह के 5 बज रहे थे और उस्मान अपने पास रज़िया को नहीं पाकर इधर उधर देखने लगता है....

उस्मान को बाथरूम से किसीके कराहने की आवाज़ आती है वो सीधा उठकर बाथरूम की तरफ भागता है.....

उस्मान बाथरूम की फर्श पर रज़िया को गिरा हुआ देखकर उसे गोद में उठा लेता है.... रज़िया की आँखों में आंसू थे..... रज़िया की चाल ढाल और हाल सब कुछ बदल चूका था.....

उस्मान - क्या हुआ मेरी प्यारी गुड़िया को......

रज़िया रोते हुए - अब्बू...... आपने क्या हालत कर दी.... ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जाता मुझसे....
रज़िया की चुत खुल चुकी थी और देखने से सूजकर डबल रोती जैसी प्रतीत हो रही थी......

उस्मान - तो क्या हुआ मैं हूँ ना.... बता कहाँ जाना मैं ले चलता हूँ अपनी प्यारी गुड़िया को....... ये कहते हुए उस्मान रजिया के गाल पर चुम्मा दे देता है

रज़िया - मुझे सुसु करना अब्बू..... आप जाओ यहां से.....

उस्मान रज़िया को गोद में ही पकड़कर उसकी दोनों टाँगे चौड़ी करते हुए घुटनो पर बैठकर अपनी बेटी रज़िया के कान में कहता है- तो कर ले ना.... बेटी..... मैंने कब रोका है.......

रज़िया की नंगी पीठ उस्मान के सीने पर थी और उस्मान ने रज़िया की दोनों टांगो को अपने हाथ पकड़ रखा था.....

रज़िया शरमाते हुए मूतने लगती है.... रज़िया को इस बार अपनी मूत की धार कुछ मोटी महसूस होती है शायद उसे ये चुदने के बाद बदलाव लगता है......

उस्मान अपनी बेटी की चुत से निकलते पानी देखकर फिर से कामुक हो उठता है और धीरे धीरे रज़िया की गर्दन पर अपने होंठ रखने लगता है......

रज़िया जैसे ही मूतना बंद जरती है उस्मान रज़िया को लाकर बिस्तर पर पटक देता है और पास में पड़ी vigra की गोली मुँह में डालकर शराब से उसे निगलते हुए थोड़ी शराब पी लेता है.....


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रज़िया ये देखकर कुछ समझ नहीं पाती लेकिन जब अपने अब्बू को कंडोम फाड़कर अपने लोडे को पहनाते देखती है तो बहुत डर जाती है और जल्दी से बिस्तर से उतार कर बाहर भागने की कोशिश करती है लेकिन 3-4 कदम लड़खड़ाकर चलने के बाद झट से नीचे गिर जाती है और रेंगती हुई कमरे से बाहर आ जाती है.....

उस्मान भी अपने हाथो में अपना लोडा लेकर चलता हुआ बाहर आ जाता है रज़िया के सामने खड़ा हो जाता है......

उस्मान - मेरी रानी बिटिया कहा जा रही है अपने अब्बू को अकेला छोड़कर.... हम्म्म्म....... अभी तो अब्बू को जीभर के प्यार करना है अपनी प्यारी बेटी से.....

रज़िया रोते हुए - अब्बू...... अल्लाह के बास्ते बस करो....... मेरे बदन में दर्द हो रहा है..... मैं मर जाउंगी.....

उस्मान रज़िया को गोद में उठाकर - अब्बू अपनी बेटी को मरने थोड़ी देंगे..... अब्बू तो मज़ा देंगे... और लेंगे भी..... ये कहते हुए उस्मान अपनी बेटी को वापस बिस्तर पर लाकर पटक देते है पीठ के बल लेता कर चढ़ाई शुरू कर देते है......

उस्मान अपनी बेटी की कच्ची चुत को अब अपने लंड से ऐसे पिट रहा था जैसे लुहार लोहा पीटता है.....

पूरा कमरा थप थप की आवाज़ से गूंज रहा था और अब आसानी से उस्मान का लंड रज़िया की चुत में अंदर बाहर हो रहा था.....

उस्मान अपनी कमसिन और फूल सी बेटी की बुर में झटके पर झटका दिए जा रहा था और रज़िया आँख बंद करके अपने अब्बू का हर धक्का बर्दास्त करते हुए सिस्कारिया भर रही थी जीसे देखकर उस्मान और ज्यादा कामुक हो रहा था......

सुबह के लगभग ग्यारह बजे थे और उस्मान अब भी अपनी बेटी की नन्ही चुत में खोया हुआ था.....
सुबह से उस्मान 4 कंडोम फाड़ चूका था और अब भी वो रज़िया को लोडे ओर बैठाकर उछाल रहा था....

रज़िया भी कहीं न कहीं अब इस खेल का मज़ा लेने लगी थी और अपने अब्बू की बाते को चुपचाप मानकर उसके कहे अनुसार ही काम करने लगी थी.....

इधर उस्मान रज़िया को घोड़ी बनाकर चोद रहा था

उधर राजन खंडर में घास पर ठकुराइन को अपने लोडे के नीचे लेकर चोद रहा था......

उस्मान के फ़ोन की घंटी बजी......

उस्मान फ़ोन उठाकर - हैल्लो

राजन - राजन बोल रहा हूँ....... अड्रेस massage कर दिया है..... जितना जल्दी हो सके आ जाओ......

उस्मान जोर जीरो से रज़िया को चोदते हुए - 5-7 दिन का टाइम लगेगा...... एक बहुत जरुरी काम कर रहा हूँ....... उसके बाद पहुंच जाऊंगा.....

(रज़िया चिल्लाते हुए अब्बू..... आराम से....)

राजन रज़िया की चीख सुन लेटा है और जोश में आकर ठकुराइन की चुत में जोर का झटका मारते हुए - ठीक है...... आते ही फ़ोन करना....

ठकुराइन राजन के झटके को बर्दास्त नहीं कर पाती है चीखती हुई बोलती है - बेटा... आराम से मार डालेगा क्या अपनी माँ को.....

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उस्मान ठकुराइन की चिंख सुन लेता है और समझ जाता है की राजन एक मदरचोद आदमी है..... और फ़ोन काटकर जोश में आता हुआ रज़िया को चोदने लगता है.... इधर राजन भी ठकुराइन की चुत को और गहरा बनाने ले लग जाता है.....


ठकुराइन खंडर में नंगी होकर राजन से लिपटी हुई थी शाम का समय हो चला था..... राजन ने दिनभर ठकुराइन की ठुकाई करके उसे अपना मुरीद बना लिया था....

राजन किसी बच्चे की तरह ठकुराइन के बोबे चूस रहा होता है और ठकुराइन राजन के सर पर हाथ फेरते हुए उसके मुँह में अपना बोबा दे रही होती है जिसे राजन निप्पल को काटते हुए चूस रहा था......

ठकुराइन बार बार कामुक अंदाज़ में राजन से बोल रही थी - बेटा आराम से...... तेरे लिए ही तो है ये...... खा जाएगा क्या अपने माँ के बूब्स को....

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ठकुराइन बड़ी एडवांस सिगरेट जलाकर कश लेते हुए प्यार से राजन को देखे जा रही थी और राजन भी बार बार ठकुराइन के बूब्स को चूसता हुआ ठकुराइन के होंठों पर चुम्मा दे देता है जिसे ठकुराइन स्वीकारते हुए बदले में लम्बा चुम्मा दे देती है.....

कुछ देर बाद दोनों कपडे पहनकर खुदको ठीक करते है तभी राजन का फ़ोन बजता है....

चांदनी - कहाँ हो तुम सुबह से.....

राजन - दोस्तों के साथ था यार.....

ठकुराइन इन सब से अनजान बाल सही करते हुए - अब चले क्या....

चांदनी - ये किसकी आवाज़ है....? किसी लड़की के साथ हो ना तुम......

राजन ठकुराइन के मुँह ओर हाथ लगाते हुए- नहीं नहीं.... किसी दोस्त के घर हूँ तो उसने कहा की चले.....

चांदनी - पक्का ना जान......

राजन - अरे सच्ची... कहो तो बत कराऊँ तेरी.....

चांदनी - मुझे नहीं करनी...... तुम बस जल्दी घर आ जाओ आज बहुत याद आ रही है तुम्हारी.....

राजन - बस आ गया समझो....

राजन ठकुराइन के मुँह से हाथ हटाकर उसके गाल पर एक जोर का थप्पड़ दार देता है जिससे ठकुराइन चौंकते हुए अपने गाल पर एक हाथ रखकर रुँआसी होते हुए राजन की तरफ देखती हुई कहती - बेटा..... कम से कम आज तो प्यार से रहता........ बताया था मेरा जन्मदिन है......

राजन ठकुराइन के चहेरे को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर जिस गाल पर थप्पड़ मारा उसे चूमते हुए - तू देख लिया कर माँ...... किसी से बाते करते वक़्त बीच में मत बोला कर......

ये कहते हुए राजन ठकुराइन के होंठों पर टूट पड़ता है और ठकुराइन भी राजन का पूरा साथ देती है.....

कुछ देर जे बाद दोनों खंडर से बाहर आ जाते है और राजन ठकुराइन को हवेली के पिछवाड़े ले आता जहा ठकुराइन राजन को प्यार से देखते हुए अलविदा करके अंदर जाने को मुड़ती है तो राजन एक जोरदार लात उसकी गांड मारता है जिससे ठकुराइन अपनी गांड पकड़कर खड़ी हो जाती है और राजन को गुस्से से देखने लगती है लेकिन राजन अपने दोनों कान पकड़कर ठकुराइन को देखता हुआ आँख मारकर कहता है - माफ़ कर दो मम्मी.....

ठकुराइन राजन को ऐसा करते देख मुस्कुराते हुए अंदर चली जाती है.....

और राजन भी घर की तरफ चल देता है.... घर पहुंचते ही राजन और चांदनी की रासलीला शुरू हो जाती है.....



कहानी कैसी लग रही और आगे क्या क्या होना चाहिए comments करके बताओ दोस्तों.... ❤️❤️❤️❤️
Very nice update 👌👌👌👌
 
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Update 20

आज शनिवार था..... राजन और उस्मान की बात हुए आज 30 दिन से ज्यादा हो चुके थे....
राजन चांदनी और ठकुराइन की चुत में ऐसा खो चूका था की उसे याद ही नहीं रहा था की उसने उस्मान को बुलाया था लेकिन अब तक उस्मान नहीं आया था.....
राजन दिन में ठकुराइन और रात में चांदनी की चुतो में खोया हुआ था.... उसे राधा का तो जैसे ध्यान ही नहीं था की उसकी सगी माँ की क्या दशा है.....

सुबह का समय था राजन ठकुराइन की चुत मारने खंडर की तरफ जा रहा था तभी रास्ते में उसे धनीराम मिल गया जो राजन से शराब के लिए पैसे मांग रहा था..... राजन धनीराम के साथ कुछ देर ठेके पर बैठ जाता और शराब पिने लगता है.....
धनीराम - इन दोनों रंडियो के तो दिन ब दिन कारनामें ख़त्म ही नहीं हो रहे.....
राजन - अब क्या हुआ धनीराम..... क्या कर दिया दोनों ने.....
धनीराम - अरे सालीयों ने पहले तो चम्पक से खेर और घर हड़प लिया अभी बबलू और पपिया के पीछे पड़ी है..... उनका भी कुछ उधर आता है जमींदार की तरफ......
राजन - गंभीर होते हुए..... चम्पक कहा है....
धनीराम - गया होगा अपनी बहनिया के पास अपने परिवार को लेके.... बहुत बुरा किया चम्पक के साथ....
राजन - कुछ दिन की बात है उन दोनों हाल सुनकर लोग काँपगे.........
ये कहते हुए राजन ठेके से उठ जाता है और खंडर की तरफ चल पड़ता है..... रास्ते में राजन उस्मान को फ़ोन लगता है.....


(रज़िया जोर जोर से अपने अब्बू उस्मान के लोडे पर उछले जा रही थी और उस्मान अपनी बेटी अमरुद मसलते हुए उसको देख रहा था जिसे उसने पीछे कुछ दिनों में कली से खिलाकर पूरा गुलाब बना दिया था..... अब रज़िया की कच्ची चुत को लोडा लेने से कोई परेशानी नहीं थी और रज़िया की छोटी सी बुर में उस्मान का पूरा लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा था.... उस्मान बहला फुसला कर और कभी जोर जबरदस्ती करके रज़िया की गांड भी मार चूका था जिससे रज़िया के चुत्तड़ थोड़े भारी हो चुके थे....
कमरे की काफी दिनों से सफाई नहीं हुई थी और कमरे में जगह जगह used condoms पड़े हुए थे... पिछले कुछ दिनों में उस्मान ने अपने बेटी के नाम पर 200 से ज्यादा कंडोम फाड़ दिए थे.... उस्मान के लंड ने अपनी बेटी रज़िया की चुत को बुरी तरह से हरा के नसतोनाबूद कर दिया था..... अब तक बाप बेटी के लंड और चुत में सैकड़ो लड़ाईया लड़ी जा चुकी थी जिसमे हमेशा बाप के लोडे ने बेटी चुत को पछाड़ दिया था.....
रज़िया अब सिर्फ दिखने में ही छोटी बच्ची थी.... रज़िया की छाती पर निम्बू की जगह अब आम लग चुके थे.... ये उस्मान के हाथो का कमाल था जिसने एक महीने में निम्बू को आम में बदल दिया था और चुत्तड़ तो उस्मान ने अपने लंड से मार मार की बाहर निकाल दिए थे.... उस्मान ने अपनी बेटी को लोडा हिलाने से लेकर चूसना और चुत चटवाने से लेकर चुदवा सब सीखा दिखा था.....उस्मान गन्दी गन्दी गाली देकर रज़िया की चूत मारता था और लोडा चुसवाते हुए उसके मुँह में मूत दिया करता था..... )

रज़िया अपने अब्बू का लोडा चाट रही थी और उस्मान अपनी बेटी के सर पर हाथ रखकर उसके बाल सहलाते हुए मज़े ले रहा था तभी उसका फ़ोन बजा....

उस्मान फ़ोन उठाते हुए - हेलो.....
राजन - काम नहीं करना तो मना कर दे उस्मान...... मैं और किसीको देख लूंगा.....
उस्मान को भी अपनी बाते याद आ जाती है की उसने 5-7 बोला था लेकिन 30 दिन से ज्यादा का वक़्त बीत चूका था और वो अब तक अपनी बेटी की चुत में घूम था....
उस्मान - मैं आज शाम ही वहा आने के लिए निकल जाऊंगा राजन..... तू बस पैसा का ध्यान रखना....
(इतने में रज़िया अपने बाप उस्मान से बोली - अब्बू चूस चूस कर पूरा खड़ा कर दिया..... अब कंडोम पहना दू....?)
राजन रज़िया की बात सुनकर समझ गया की उस्मान एक बेटीचोद है.... राजन रज़िया की आवाज़ से कामुक हो गया था.....
राजन - ठीक है उस्मान..... जल्दी आना.....

ये कहकर राजन ने फ़ोन काट दिया और खंडर जाकर ठकुराइन को अपने आगे घोड़ी बनाकर उसके बाल पकड़कर चोदने लगा.....
ठकुराइन - आह्ह बेटा...... आराम से...... दर्द हो रहा है..... आज किस बात का बदला ले रहा है अपनी माँ से......
राजन - मेरी रांड मम्मी..... आज तो तेरी चुत अच्छे से फाड़ने का इरादा है तेरे बेटे का......
ठकुराइन - आहहहह बेटा..... मेरी चुत ने तेरा क्या बिगाड़ा है.....
राजन झटके मारता हुआ - तेरी चिकनी चुत मेरा क्या बिगाड़ेगी माँ.... आज तो मेरे लोडे में ही खलबली मची हुई है.....
ठकुराइन - आहहहह बेटा...... अपनी माँ को इतना दर्द देना अच्छी बात नहीं है...... हाय राम...... Aahhh
राजन - बहन की लोडी....साली..... दर्द में ही तो सुकून है......
ये कहकर राजन ठकुराइन को बेरहमी से चोदने लगता है.....
ठकुराइन को आज चुदवाने में बहुत दर्द हो रहा था और राजन को ठकुराइन के दर्द में ख़ुशी मिल रही थी..... ठकुराइन राजन के हर झटके पर ऊपर से नीचे तक हिल जाती और गिड़गिड़ाते हुए राजन से आहिस्ता चोदने की गुहार लगाती.....
आज राजन ठकुराइन की बाते मानने वाला नहीं था..... और किसी सडक चाप रंडियो की तरह उसे चोद रहा था जिससे ठकुराइन को बहुत तकलीफ हो रही थी.....
जब ठकुराइन को ज्यादा दर्द होने लगा तो वो राजन के नीचे से निकलकर खड़ी हो गई और अपना घाघरा पहनते हुए बोली- बेटा..... और नहीं चुद पाऊँगी..... बहुत दर्द हो रहा है..... आज तुमने बिलकुल रागडकर रख दिया है अपनी माँ को..... भला ऐसे भी कोई चोदता है....
राजन गुस्से से चिल्लाते हुए - तेरी माँ चोद दूंगा साली अगर तूने घाघरे का नाड़ा बंधा तो......
ठकुराइन राजन की गाली सुनकर सकपका गई और बूत की तरह अपने हाथ में अपने घाघरे का नाड़ा लेकर खड़ी रही और राजन घाँस पर पीठ के बल लेट गया.....
राजन थोड़ा शांत होते हुए प्यार से - चुपचाप आकर अपने बेटे के लंड पर बैठ जा माँ .....
ठकुराइन - पहले वादा कर प्यार से करेगा.....
राजन - ठीक है मेरी माँ.... अब आजा..... ऐसे खड़े लंड पर चोट मत कर.......
ठकुराइन घाघरा गिरा देती है और आकर राजन के लोडे पर बैठ जाती है..... ठकुराइन प्यार से राजन के लोडे पर उछलने लगती है.....
ठकुराइन प्यार से - हवेली में वो दोनों चुड़ैले परेशान करती है और यहा तू..... मेरा चोदू बेटा....
राजन - बहुत जल्दी उन दोनों रंडियो को ठिकाने लगा दूंगा माँ...... हवेली और जमींदार सिर्फ तू संभालेगी.... और तुझे मेरा लंड संभालेगा......
ठकुराइन - हाय..... सच्ची..... बेटा.....
राजन - मुच्ची..... माँ.....
ठकुराइन - अगले मंगलवार पूजा है हवेली में..... जैसे हर साल होती है..... खानदानी पंडित भी अपने परिवार के साथ आएंगे..... तुम भी आना.... पूरी रात अपने घाघरे में घुसा के प्यार करूंगी अपने बेटे को.....
राजन करवट लेकर ठकुराइन को घास पर पटक देता है और झटके मारते हुए बोलता है - अगर माँ इतनी खूबसूरत होगी तो बेटा जरूर आएगा अपनी माँ का घाघरा खोलने....
ठकुराइन ये कहकर राजन को चुम लेती है और अपनी जीभ से राजन की जीभ को लड़ाने लगती है.....

इधर राधा की दशा किसी दासी से ज्यादा अलग नहीं थी जिसे किसीने सुहाने सावन के ख्याब दिखकर जेठ की तपती ज़मीन पर छोड़ दिया हो.....
राधा पहले तो राजन से सिर्फ नाराज़ थी लेकिन अब वो उसकी अनदेखी और नज़रअंदाजी से दुखी भी रहने लगी थी.....
जब से उसे राजन और चांदनी के बारे में पता चला था वो कभी दोनों के बीच में नहीं आई थी और अब खुद की सभी इच्छाओ को मन में दबाकर दफन करने लगी थी.....
राधा अब हर दिन गाँव की बाकी महिलाओ के साथ गुजारने लगी थी जहाँ वो लोग भजन कीर्तन करके समय गुजरति थी...... राधा उम्र और काया अभी इन सब चीज़ो की नहीं थी लेकिन फिर वो सब कुछ भूलकर इन कामो में लग गई थी.....
किसी संस्कारी की तरह ही सुबह शाम पूजा पाठ करना और दिनभर गाँव की बाकि महिलओ के साथ भजन करना यही राधा की दिनचर्या बन चुकी थी......
राजन भी अब पूरी तरह से राधा को औरत के रूप में देखना भूल चूका था..... उसे चाँदनी और ठकुराइन ने इतना खुश रख रखा था की उसकी नियत अपनी माँ पर नहीं बिगड़ी.........


शाम हो चुकी थी और उस्मान एक बेग में जरुरी सामान भरकर राजन के गाँव निकलने की तेयारी में था......
उस्मान ने पहले तो अपनी बेटी रज़िया को अपनी बहन फातिमा के पास छोड़कर जाने का फैसला किया लेकिन जब रज़िया की गांड पर नज़र पड़ी तो उसके लंड में अकड़न पैदा हो गई और अब उस्मान ने अपनी बेटी रज़िया को भी साथ में लेकर चलने का फैसला किया........
उस्मान के पास एक पुरानी स्प्लेंडर बाइक थी जो उसने स्टार्ट की और रज़िया को पीछे बैठाकर सफर की शुरआत की..... शहर से गाँव का सफर लम्बा था..... उस्मान ने शहर की भीड़भाड़ को पार कर लिया था अब सामने सुनसान सड़के थे..... उस्मान ने बाइक रोकी और पेशाब करने के लिए उतार गया..... उस्मान जैसे ही पेशाब करके आया उसने रज़िया को सरकाकर आगे कर दिया और खुद उसके पीछे बैठ गया..... उस्मान ने बाइक स्टार्ट की और आगे के सफर की शुरूआत की......
रज़िया अब बाइक पर उस्मान के लोडे पर बैठी थी और उस्मान बाइक चलते हुए रज़िया की बुर और बूब्स मसल रहा था..... रज़िया को भी अपने अब्बू की इस हरकत का पूरा मज़ा आ रहा था.... उस्मान ने एक ढाबे पर बाइक रोक दी और रज़िया के साथ खाना खाया फिर से आगे की तरह निकल पड़ा.....देखते ही देखते रात के 11 बज चुके थे और अभी तक आधा ही सफर तय हुआ था......... बाइक चला कर उस्मान की हालत ख़राब थी और अपने आगे बैठी रज़िया की छुअन से अब उसका लंड अकड़ने लगा था..... अब उस्मान अपनी बेटी रज़िया को चोदना और थोड़ा सोना चाहता था......

.रात के ग्यारह बजे थे.... चांदनी राजन के साथ बिना कुछ कपडे पहने लिपटकर लेटी थी..... चांदनी की चुत से राजन का पानी टपक रहा था..... राजन ने अभी अभी अपनी बड़ी बहन की अच्छी खासी चुदाई की थी जिससे थक्कर दोनों एक ही खाट पर लिपटकार लेटे थे......
चांदनी राजन के ऊपर आकर - आज कल सारा सारा दिन कहाँ गायब रहने लगे हो आप?
राजन चांदनी के मुँह से तुम की जगह आप सुनकर राजन उसकी जुल्फे संवारता हुआ कहता है - पहले ये बताओ..... तुम से आप कब हुआ मैं??? तुम्हारा छोटा भाई हूँ जानती हो ना....?
चांदनी राजन को चूमकर - 2 साल ही तो छोटे हो..... और बाते ऐसे करते हो जैसे 10-15 साल बड़ी हूँ मैं..... और हाँ.... सब कहते है अपने पति को इज़्ज़त देनी चाहिए इसलिए आज से तुम नहीं आप ही कहूँगी.....
राजन चांदनी की चुत ऊँगली ड़ालते हुए - अरे मेरी प्यारी बहना...... रोज़ अपनी सलवार उतारकर इज़्ज़त दे तो रही है मुझे.... और कितनी इज़्ज़त देगी......
चांदनी - अह्ह्ह..... जान........
राजन - काश तू मुझे बहुत पहले अपनी चुत का पानी चखा देती चांदनी..... मैं पायल जैसी लालची रंडी के पीछे इतने साल ना बिगाड़ता......
चांदनी करवट बदलकर राजन को अपने ऊपर ले लेती है और राजन का मुँह अपनी छाती में घुसाकार कहती है - मैं तो कब टांग फैला कर बैठी थी..... आपने ही कभी मेरी तरफ नहीं देखा....
ये कहते हुए दोनों भाई बहन फिर से कामक्रीड़ा में लीन हो जाते है......


इधर उस्मान को कोई जगह नहीं मिल रही थी जहाँ वो अपनी बेटी रज़िया को घोड़ी बना अपनी हवस बुझा सके.......
उस्मान की कामुकता अब बढ़ने लगी थी.....
इसी बीच उस्मान को याद आता है की 15 किलोमीटर आगे मलिया क़स्बा है जहाँ उसका मोसेरा भाई रहमान रहता है जिससे मिले उसे बहुत साल हो चुके है.........
(रहमान लड़की के मामले में एक रंडीबाज़ और गिरा हुआ आदमी था..... रहमान ने उस्मान के साथ बहुत सारी रंडिया, ऑन्टीया और अपने रिश्तेदारी में खाला फूफी, मामी, चाची के अलावा उनकी बेटियां को भी साथ में चोदा था........ रहमान एक दर्जी का काम करता था..... घर के नीचे ही उसकी दूकान थी....... परिवार में पत्नी और 2 बेटियां थी लेकिन अभी उसकी पत्नी बेटियों को लेकर मायके गई हुई थी....... )
उस्मान रहमान को फ़ोन करता है.....
उस्मान - हेलो..... रहमान....
रहमान - हेलो..... सलाम भाईजान..... आज इतने सालों बाद इतनी रात को कैसे याद आ गई......
उस्मान - सलाम...... मैं अभी तेरे घर आ रहा हूँ..... रातभर के लिए रुकूंगा.....
रहमान - कैसी बाते कर रहे हो भाईजान...... आपका घर कब्बी भी आओ......
उस्मान ये कहकर फ़ोन कट कर देता है और रज़िया को लेकर रहमान के घर चल देता है.....
थोड़ी ही देर में उस्मान रज़िया को लेकर रहमान के घर आ जाता है.....
रहमान दरवाजा खोलते हुए - अरे आओ भाईजान.... कैसे हो...
उस्मान - मैं ठीक हूँ रहमान तुम्हारे क्या हाल है......
रहमान - मस्त कट रहो है भाईजान..... (रहमान रज़िया को देखते हुए ) अरे..... गुड़िया रानी भी आई है.... कैसी है बेटी.... क्या खाओगी चॉकलेट या आइसक्रीम.....
रज़िया सलाम करते हुए - जी..... कुछ नहीं चच्चाजान....
रहमान उस्मान और रज़िया को लेकर घर के अंदर आ जाता है और रज़िया को एक कमरे भेजकर उस्मान से बात करने लगता है...
रहमान - किसकी ले रहा है आज कल भाई......
उस्मान अपनी शर्ट उतरता हुआ- तू पहले जाकर कहीं से 2-3 पैकेट कंडोम ला दे.....
रहमान हैरानी से - क्यूँ...? यहा तू किसकी लेगा..... कोई है तो नहीं चोदने के लिए.....
उस्मान - जितना बोल रहा हूँ उतना कर ना.....
रहमान रुकते हुए - भाई तू कहीं..... रजिया बेटी की तो.....
उस्मान मुस्कुराते हुए - समझ गया तो जा ना जल्दी.....
रहमान हैरानी से - भाई अभी से तू लेने लग गया रज़िया की...... कुछ तो शर्म कर...... कितना घटिया आदमी है तू मरवाएगा किसी दिन........
उस्मान - भाई मैं भी क्या करता.... बार बार आकर चिपकती थी..... 1 महीने पहले मैंने भी अपना लॉलीपॉप चिपका दिया......
रहमान हसते हुए - कंडोम के साथ vigra की गोली भी ले आता हूँ काम आएगी.....
उस्मान - लंड में आग तो तेरे भी लगी है साले..... अब जल्दी जा.....
रहमान अपनी बाइक लेकर घर से निकल जाता है.... रज़िया अपने अब्बू की बाते सुन रही होती है और उसे पता चल जाता है की आज रात उसकी चुत का सामना एक नहीं बल्कि दो लंड से होगा.....
उस्मान रहमान के आने तक फ्रीज में से शराब निकल कर पिने लगता है.... कुछ देर में रहमान कंडोम और vigra की गोलिया लेकर वापस घर आ जाता है....

उस्मान और रहमान दोनों vigra की गोली खाकर कमरे में अंदर आते है और 10 मिनट बाद ही रज़िया की चीखे कमरे से बाहर आने लगती है जिसे सुनकर कोई भी उसकी घनघोर चुदाई का अनुमान लगा सकता था.....

एक महीने पहले तक जो लड़की अपनी चुत में ऊँगली नहीं ले सकती थी आज वो एकसाथ अपनी चुत और गांड में अपने अब्बू और अंकल का लोडा ले रही थी.....

सुबह तक दोनों ने मिलकर रज़िया को अच्छे से रगड़ दिया था..... सुबह के 6 बजे थे और और अबतक उस्मान और रहमान ने रज़िया को कई बार अपनी हवस का शिकार बनाया था और अब चैन से सो रहे थे.... रज़िया का बुरा हाल था....





❤️❤️❤️❤️❤️
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है
 
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Update 21

उस्मान रज़िया को लेकर राजन के गाँव पहुंच चूका था और राजन ने उस्मान को उसकी बेटी से साथ अपने दोस्त विजय के किसी जान पहचान वाले के खाली पड़े मकान में ठहराने की व्यवस्था कर दी थी..... राजन ने जब रज़िया को देखा तो उसे विश्वास नहीं हो रहा था की ये वही लड़की है जिसकी आवाज़ फ़ोन पर उसने सुनी थी..... रज़िया की सूरत एक प्यारी सी फूल जैसी बच्ची की थी जिसे देखकर राजन अचरज में पड़ गया था.....

रज़िया भी राजन के देखते ही उस पर फ़िदा हो गई थी राजन की सुंदरता, शारीरिक बनावट और बोलचाल का तरीका उसे भा गया था..... हलाकि राजन उम्र और शरीर में रज़िया से लगभग दुगुना लगता था लेकिन फिर भी रज़िया उसको देखते ही पसंद कर चुकी थी..... शायद ये रज़िया की बाली उम्र वाला आकर्षण ही था.....

राजन इस बाते से पूरी तरफ अनजान था और उसने उस्मान को पूरी बात समझा दी थी और 50 हज़ार रुपए भी दे दिए थे.... राजन जब उस्मान को पैसे दे रहा तब रज़िया ने उसे देख लिया और राजन को कोई बड़ा पैसे वाला आदमी समझने लगी थी और वो खुद भी राजन से पैसे ऐंठने का सोच रही थी....

राजन में उस्मान को हवेली में पूजा वाले दिन अपने काम को अंजाम देने का प्लान बनाया था जिसमें अभी 1 दिन बाकी था.... राजन तो उस्मान और उसकी बेटी को मकान में छोड़ के आ गया लेकिन रज़िया अब तक उसे सिर्फ अपनी आँखों से ओझल कर सकी थी जहन में अभी भी राजन ही था.....

अगली सुबह राजन फिर से उस्मान को अपना प्लान समझाने चला गया था लेकिन आज उस्मान गाँव और हवेली की रेकी करने के लिए निकल चूका था उसे आने में शाम होने वाली थी.....

राजन दरवाजा बजाता है सामने से रज़िया दरवाजा खोलती है....

राजन - बेटा..... तुम्हारे अब्बू है अंदर....
रज़िया प्यार से राजन को देखते हुए - वो तो बाहर गए है.... आप अंदर आओ ना........ मैं चाय लेकर आती हूँ....
राजन - नहीं... नहीं... रहने दे गुड़िया.... तू परेशान मत हो..... मैं बाद में आकर मिल लूगा....
रज़िया - आप आओ ना..... परेशान होने वाली क्या बाते है इसमें........ मुझे घर का सब काम अच्छे से आता है....
राजन रज़िया के कहने पर अंदर आकर एक कुर्सी पर बैठ जाता है ल....
राजन रज़िया को देखते हुए - ठीक है.... वैसे तुम्हे इतनी सी उम्र में इतना सब कैसे आता है.... तुम्हारी अम्मी ने सिखाया....?
रज़िया - नहीं..... वो तो कब अल्लाह को प्यारी हो गई.... मैंने खुद सीखा है.....
राजन - हम्म्म्म....... और तुम्हे यहां कोई तकलीफ तो नहीं है ना..... तू मुझे खुलकर बता सकती है.... कुछ चाहिए तो में ला सकता हूँ....
रज़िया हसते हुए - सब अच्छा है..... मुझे किसी चीज की जरुरत नहीं है.....

राजन की नज़र रज़िया से बाते करते करते उसके चुत्तड़ पर चली जाती है जो उसकी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व हो चुके थे...... रज़िया को भी राजन की नज़र का अंदाजा था और रज़िया जानबूझकर अपनी गांड मटकाने लेगी थी........
रजिया राजन का ध्यान अपने चुत्तड़ से खिंचते हुए - चाय...... ले लीजिये......
राजन चाय लेते हुए - तुम्हारे अब्बू बहुत ख़ुशक़िस्मत है.....
रज़िया - वो कैसे?
राजन - तुम जैसी इतनी खूबसूरत और मेहनती बेटी मिली है उसको.... इसलिए.....
ये सुनकर रज़िया हसने लगी और बोली - आप और कुछ लेंगे.....
रज़िया ने काले कलर की एक कुर्ती पहनी थी जिसमे से उसके छोटे छोटे आम और उसपर खड़े निप्पल्स साफ नज़र आ रहे थे और राजन की नज़र रज़िया के आम पर ही आ टिकी थी.....
राजन फिर से रज़िया के चुत्तड़ देखना चाहता था लेकिन रज़िया उसके सामने बैठी हुई थी.....
राजन अपनी जेब से सिगरेट निकलते हुए - गुड़िया लाइटर है.... मैं अपनी गाडी में भूल गया हूँ.....
रज़िया मुस्कुराते हुए - अभी लाइ........
ये कहते हुए रज़िया अंदर जाकर अपने अब्बू का लाइटर ले आई और जलाते हुए राजन के आगे खड़ी हो गई.....
राजन रज़िया के चुत्तड़ देखने एक बार फिर कामयाद हो गया था और कामुक भी होने लगा था....
रज़िया - लाइये मैं आपकी सिगरेट जला दू....
राजन ने रज़िया की इतनी बेबाकी की उम्मीद नहीं की थी...... राजन समझ चूका था की रज़िया अबबच्ची नहीं रही और उसे आसानी से पहली अपने लंड पर झूलाया जा सकता है.....
राजन सिगरेट जलाकर कश लेते हुए - गुड़िया.... तुम भी सिगरेट पी लो...?
रज़िया मुस्कुराते हुए - जी... नहीं.... मैं नहीं पीती....
राजन - क्यूँ..... अब्बू रोकते है?
रज़िया - नहीं वो मुझे पीना नहीं आती.....
राजन को जिस मोके की तलाश थी वो उसे मिल चूका था....
राजन रज़िया का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचता हुआ गोद में बैठा लेता है और कहता है.....
राजन - चिंता मत करो गुड़िया...... मैं सीखा दूंगा.... ये कहते हुए राजन ने सिगरेट रज़िया के होंठों पर लगा दी और उसे सिगरेट पीना सिखाने लगा.....
राजन अपने लोडे पर रज़िया की गांड का पूरा अहसास ले रहा था....
रज़िया देखने में मुनिया से कच्ची थी लेकिन अब वो त्यार थी......
राजन एक हाथ से रज़िया को स्मोकिंग सीखा रहा था वही उसका दूसरा हाथ अपने आप राज़ीये के छोटे छोटे आमो पर चला गया जहा उंगलियों से वो रज़िया के निप्पल छेड़े जा रहे थे.....
रज़िया स्मोकिंग सिखने में इतनी मगन थी और राजन की गोद में बैठकर उसकी बातों में ऐसी खोई हुई थी की उसे इस बात का तब तक ज़रा भी इल्म नहीं था की राजन उसके छोटे छोटे बूब्स मसल रहा था जब तक राजन में जोर से रज़िया के निप्पलस पकड़ कर मसल नहीं दिए........


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रज़िया दर्द में - आहहह.... अल्लाह.... क्या कर रहे हो.....
राजन - ओह्ह्ह.... Sorry गुड़िया... वो गलती से हाथ चला गया.....
रजिया - अह्ह्ह.... बहुत दर्द हो रहा है.....
राजन - ला गुड़िया में थोड़ी मदद कर देता हूँ..... ये बोलकर राजन रजिया का चूची जिसे उसने जोर से मसला था कुर्ती के ऊपर से ही चूसने लगता है.....
रज़िया - aahhh..... छोड़ो कोई देख लेगा..... आप बहुत गंदे हो.... अह्ह्ह्ह..... छोडो....
(राजन जानता था की रज़िया अपने अब्बू से चुदी हुई है..... तो कुछ नहीं करेगी और सिर्फ नाटक का दिखावा करेगी इसलिए उसने रज़िया को नहीं छोड़ा और उसे गोद में उठाकर चूची चुसते हुए बेडरूम में बिस्तर पर ले गया.....)
रज़िया - भाईजान...... छोडो वरना मैं चिल्लाऊंगी.....
राजन रज़िया की बाते को अनसुना करके दोनों हाथो से रज़िया की कुर्ती फाड़ देता है जिससे वो कमर से ऊपर नंगी हो जाती है....... राजन के सामने रज़िया के छोटे छोटे आम थे जिसे वो पूरा मुँह में भरकर चूसने लगता है....
रज़िया - खा जाओगे क्या...... भाईजान...... छोडो ना.... में चिल्लाऊंगी वरना.... सबसे जाकर कह दूंगी आप मेरा बलात्कार कर रहे हो.... छोडो मुझे...... बच्ची हूँ में अभी....... आपको शर्म नहीं आती मेरे साथ ये करते हुए.....
राजन रज़िया के जोरदार थप्पड़ मारकर सलवार उतार देता है और कहता है - साली मदरचोद रंडी... मैं जानता हूँ तू बस देखने में छोटी बच्ची है....... ज्यादा भोलेपन नाटक मत कर...... चाहिए तो पैसे लेले पर अपने अब्बू की तरह मुझे भी खुश कर दे.....
रज़िया राजन की आँखों में देखते हुए - पैसे वाली बात पहले बोले देते भाईजान..... अपने हाथो से सिगरेट पिलाकर चूची चुसवाती आपको.....
राजन मुस्कुराते हुए 500 का नोट निकल कर रज़िया को दे देता जिसे रज़िया ले लेती है राजन से कहती है - ये सिर्फ मेरी कुर्ती फाड़ने के है......
राजन वापस एक 500 का नोट निकलकर देता है जिसे लेकर रज़िया कहती है - ये तो मेरे आम चूसने के है और थप्पड़ मारने के?....
राजन - पक्की रण्डी बनेगी तू एक दिन..... ये कहते हुए राजन रज़िया को 2000 के 2 नोट निकलकर दे देता है और रज़िया अपनी टांग खोल लेती है.....
राजन रज़िया की चुत पर अपना लोडा टेक देता है जिसे देखकर रज़िया कहती है....
रज़िया - हाय अल्लाह..... ये तो अब्बू से भी बहुत बड़ा है....
राजन मुस्कुराते हुए - तू ले तो लेगी ना छिनाल मेरा लंड..... कहीं रोने तो नहीं लगेगी....
रज़िया मुस्कुराते हुए- भाईजान अगर नहीं ले पाई तो पैसे वापस कर दूंगी....
ये कहते हुए रज़िया राजन का लंड पकड़ लेटी है और बैठकर उसे अपने मुँह में भरकर चूसने लगती है........
रज़िया राजन का बस आधा लंड ही मुँह में ले पा रही थी..... लेकिन फिर भी रज़िया बड़े चाव से उसे चूस रही थी..... राजन के लोडे को रज़िया के मुँह की गर्माहट से सुकून मिल रहा था.....


इधर उस्मान हवेली और गाँव की रेकी में लगा हुआ था जहाँ एक कार हवेली में आकर रुकती है और उसमे से कुछ लोग निकलते है......
एक आदमी जो देखने से पंडित लग रहा था एक लड़का जो 20-22 के करीब था और एक औरत जिसे देखते ही उस्मान पहचान गया था और उसका लंड टाइट हो गया था......
ये औरत और कोई नहीं बल्कि सविता थी.... जो पंडित विद्याधर की धर्मपत्नी और राजन के दोस्त राहुल की माँ थी....
सविता को राजन और खालिद कई बार चोद चुके थे और खालिद ने सविता को कई लोगों से चुदवाया था जिसमे उस्मान भी था.......

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Savita....


पंडित विद्याधर जमींदार के खानदानी पंडित थे जो हवेली में होने वाली हर पूजा और हवन को सम्पन करवाते थे......
उस्मान ने सविता को सिर्फ एक बार चोदा था और खालिद से बार बार सविता चोदने की बात कही थी लेकिन खालिद ने सविता को फिर उस्मान से कभी नहीं चुदवाया था..... सविता जैसी संस्कारी और शादीशुदा औरत देखकर उस्मान के लंड में भूचाल आ गया था.....


उस्मान अभी सविता से नहीं मिल सकता था लेकिन उसने मन बना लिया था एक बार वो सविता को चोद कर ही इस गाँव से जाएगा....

उस्मान को अब चुत चाहिए थी उसे रज़िया याद आई लेकिन मकान पर पहुँचने में उसे काफी वक़्त लग जाता इसलिए उसने कोई खाली जगह देखकर सविता के नाम पर हस्तमैथुन करने का फैसला किया और जगह तलाशने लगा......

उस्मान को एक खेत दिखा जहा थोड़ा आगे जाके एक सरकारी स्कूल थी जिसमे लोग कक्षा दस तक की पढ़ाई किया करते थे..... दोपहर के 2 बज चुके थे और स्कूल की छुटी हो चुकी थी....... इलाका सुनसान लग रहा था..... उस्मान ने स्कूल के पीछे जाकर मुठ मारने का फैसला किया और आगे बढ़ने लगा..... उस्मान जैसे ही स्कूल के पिछवाड़े पंहुचा उसे किसी के चुदने की आवाज़ आई.......

उसने खिड़की से अंदर झाँक कर देखा था एक 50 साल के करीब का आदमी एक सावली सी लड़की जिसने स्कूल की पोशाक पहनी हुई थी उस पर चढ़ा हुआ उसे चोद रहा था..... लड़की देखने में शकल सूरत से ठीकठाक थी मगर उसका बदन भरा हुआ था.... जिससे उसके आगे पीछे का सामान आकर्षक था
लड़की चुदवाते हुए बोल रही थी - मास्टर जी...... इस साल हम पास तो हो जाएंगे ना......
मास्टर जी - अरे चमेली बिटिया...... पास क्या पहले दर्जे से पास होगी तू.....

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चमेली - आहहह.... मास्टर जी...... हमको भी बसंती की तरफ इनाम मिलेगा ना.....
मास्टर जी - हाँ.... हाँ..... इस साल इनाम तुमको ही मिलेगा चमेली बिटिया......
उस्मान ये देखकर स्कूल से थोड़ा दूर आ गया और कुछ सोचने लगा तभी कुछ मिनट में वो आदमी स्कूल से बाहर आ गया और अपनी साईकिल उठाकर चला गया लेकिन वो लड़की अभी तक स्कूल से बाहर नहीं आई थी........
उस्मान ने वापस स्कूल के पिछवाड़े जाकर देखता तो वो लड़की अपनी चुत साफ करते हुए उसे पानी से धो रही थी.....
उस्मान को तभी लगा की इस लड़की को आसानी से चोदा जा सकता है तो वो चुपचाप अंदर जाकर चमेली को पीछे से पकड़कर वापस लेता देता है और उसके मुँह पर हाथ रखकर अपना लोडा चमेली की चुत में डाल देता है.... चमेली चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती तो और उस्मान के नीचे पड़ी पड़ी बस थोड़ा झटपटाने लगती है...... चमेली रज़िया की तरह ही थी बस उसकी चुत भी रज़िया जैसी थी जिससे उस्मान को उसे चोदने में बहुत आसानी हो रही थी और चमेली तो अचानक से मिले इस लंड का स्वाद भी लेने में असफल थी.......
चमेली को कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी उस्मान ने चमेली के मुँह से हाथ हटाकर कहा- बेटी..... मास्टर जी ने भेजा है मुझे......
चमेली चुदते हुए - आहहह अंकल...... मुँह क्यूँ बंद कर रहे हो.... मास्टर जी ने और किसीको भी भेजा है क्या?
उस्मान झटके मारते हुए - नहीं बिटिया बस में ही हूँ.....
चमेली - आहहह अंकल..... थोड़ा जल्दी करो मुझे घर जाना है..... बापू इंतज़ार कर रहे होंगे.....
उस्मान - ठीक है बिटिया..... ये कहते हुए उस्मान चमेली को उठाकर अपने लोडे पर बैठा लेता और हवा में ही चोदने लगता है......


बिलकुल यही हाल राजन और रज़िया का था.... राजन रज़िया को किसी खिलोने की तरह गोद में उठाकर चोद रहा था और रज़िया भी उसका पूरा मज़ा ले रही थी..... राजन का लोडा रज़िया की चुत आते जाते हुए फच फच की आवाज़ कर रहा था जिसकी आवाज़ से पूरा कमरा गूंज रहा था.....
राजन - साली..... देखने में बिलकुल बच्ची लगती पर लंड पूरा ले गई रंडी तू अपनी इस टाइट चुत में......
रज़िया - अह्ह्ह भाईजान..... आपने भी तो गुड़िया गुड़िया बोलकर जोर जोर से मेरी फुद्दी मार ली..... ज़रा भी रहम नहीं खाते मुझे पर.....
राजन - तेरा जैसा कच्चा बादाम मिले तो चुदाई में तरस नहीं खाता मैं..... मेरी गुड़िया.....
रज़िया - आहहह....भाईजान.....ऐसे मत चोदो मेरी चुत आपकी गुलाम बन जायेगी..... अह्ह्ह ummmm ओह्ह्ह्ह.....
अबतक राजन रज़िया को एक बार चोद चूका था और ये दूसरी बार था जब वो रज़िया को अपने लंड पर विराजमान किये हुए था..... रज़िया राजन की कायल हो चुकी थी और उसका पूरा पूरा साथ निभा रही थी.... राजन रज़िया पर रहम न खाते हुए अच्छे से उसकी चुत और गांड का मज़ा लूट रहा था.... हऔर राजन ने वापस रज़िया के मुँह में अपने वीर्य की धार छोड़ दी थी....
रज़िया राजन के वीर्य को रंडी की तरह पी जाती है और कपडे पहनने लगती है तभी राजन उसे वापस अपनी गोद में बैठा लेता है और उसकी चूची चूसने लगता है....
रज़िया - छोड़िये ना...... खा जाओगे क्या..... कितना सुज्जा दिया आपने चूस चूस कर.... अब्बू पूछेंगे तो क्या जवाब दूंगी.....

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राजन रज़िया का मुँह पकड़ कर - बोल देना राजन भाई को दूदू पीना था और घर में दूध ख़त्म हो गया था इसलिए मैंने अपना पीला दिया........
रज़िया हसने लगती है और राजन को अपनी चूचियाँ चूसाते हुए सिगरेट जला कर पिने लगती है.....
राजन - साली.... तू इतनी सी उम्र में सिगरेट पीती है और तुझे तो सिगरेट पीना नहीं आता था ना....
रज़िया सिगरेट का कश लेते हुए - मैं तो शराब भी पी लेटी हूँ...... अगली बार पीला के देखना.....
राजन ये सुनकर हसते हुए किसी बच्चे की तरह रज़िया की आधी पक्की हुई चूची चूसकर दबाने लगता है जैसे वो कई दिनों का प्यासा हो......

उधर उस्मान चमेली की चुत को निचोड़कर तृप्त हो चूका था.... उसका लंड अब शांत था और चमेली भी उस्मान की चुदाई से खुश होकर चुदवाने के बाद खिलखिलाकर हसते हुए अपने घर को चली गई थी......
इधर राजन ने भी रज़िया की चुत और गांड को तहस नहस करके छोड़ दिया था.... रज़िया बिस्तर पर नंगी किसी रंडी की तरह पड़ी हुई मुस्कुराते हुए राजन को देखे जा रही थी..... शाम का समय हो चूका था और अब राजन भी अपने घर की तरफ निकल पड़ा था वही उस्मान भी अपने घर चल पड़ा था....


❤️❤️❤️❤️❤️ review do guys.... Kesi lag rhi hai story aur kyakay improve hona chahiye❤️❤️❤️❤️





राजन ने राजिया की जमकर चुदाई करके उसे ऐसा सुख दिया है कि वह भी राजन की दीवानी हो गई है बेटी किसी और से चूदवा रही है वही बाप किसी और को चोद कर अपनी गर्मी शांत कर रहा है
 
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Update 22

सुबह की भोर... मुर्दा पड़े इस गाँव को नई आत्मा देने का काम कर रही थी....
धीरे धीरे लोग अपनी नींद से उठने लगे थे और अपने काम धंधे में लगने लगे थे.....
आज हवेली भी महकते फुलो की खुशबू से सजधज कर दुल्हन की तरह त्यार हो चुकी थी.....
सूर्य देवता ने अपनी पहली किरण का प्रकाश धरती माता पर बिखेरा तो धरती माता का स्वरुप निखरकार लालिमामय हो चला था.....
पंछीयों ने अपनी चेचाहट और नदी में बहते पानी की धार से उपजे स्वर ने हवा में संगीत भर दिया था.....
हर सुबह से ये सुबह अलग प्रतीत हो रही थी....

इस सुबह में कुछ ऐसा था तो जो हर किसीके मन को मोहने का काम कर रहा था......

हवेली में चहल पहल थी....

नौकर चाकर अपने काम में व्यस्त थे और इधर उधर भगादौड़ी कर रहे थे....

कोई बगीचाँ सजा रहा था तो कोई हवेली को खुशबूदार फूलो की मलाओ से सजाने में लगा हुआ था.... कोई हवेली के आँगन में रंगोली बनाने का काम करने में जूटी थी.......



पायल और रूपाल अब तक उठ चुके थे और नहाधोकर सुन्दर कपडो और महंगे आभूषनों से सुसज्जित होकर अपने रोब जमाते हुए हवेली में सभी नौकरो को ठीक से काम करने और जल्दी जल्दी काम निपटाने का हुकुम दे रही थी..... और कोई भी गलती होने पर चमड़ी उधेड़ देने की धमकिया भी दोनों के मुँह से निकल रही थी...... जब उन दोनों को कोई काम पसंद नहीं आता तो उस काम को करने वाले नोकर को थप्पड़ जड़ देती.....


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बड़ी अजीब बात थी लेकिन सत्य थी की जैसे भीड़ से भरी बस में जब कोई चढ़ने लगता है तो अंदर मोज़ूद लोग उसे चढने से रोकने की हर संभव कोशिश करते है लेकिन एक बार जब वह चढ़ जाता है तो उसी भीड़ का हिस्सा बनकर किसी नए आदमी को बस में चढने से रोकता है...... वैसे ही पायल और रूपाली थे.... बहुत पहले उन दोनों को भी जमींदार और उसके हावभाव, तौर तरीके, बनावटीपन और क्रूरता नापसंद थी लेकिन आज उन्हें देखकर घर के सभी नोकरो चाकरो को लगता था की पायल और रूपाली की तुलना में जमींदार कुछ कम ज़ालिम था.....



पंडित जी भी सुबह सुबह उठकर त्यार हो चुके थे और हवेली के आँगन में पूजा की त्यारियों में लग चुके थे.....

पायल और रूपाली पंडित विधाधर जी के पास जाकर......

पायल और रूपाली - प्रणाम पंडित जी.......

पंडित - जीती रहो बिटिया.........

पायल - सभी त्यारिया हो गई पंडित जी....?

पंडित - हां बिटिया..... लगभग लगभग हो ही गई है.... कुछ चीज़े बाकी है जो जल्दी ही हो जायेगी..... सुबह की आरती के बाद पूजा शुरू होगी और दोपहर तक खत्म भी हो जायेगी.....

रुपाली - पंडित जी.... पंडिताइन कहीं नज़र नहीं आ रहो है..... त्यार हो रही है?

पंडित - बहुरानी उसको अपने बेटे की तरह इन सब चीज़ो में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है..... वो लोग मेरे काम से अलग ही रहते है.....

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पायल - ये तो बड़ा हैरान कर देने वाली बाते है..... आप जैसे इतने विद्वान पंडित के काम में उनको कोई रूचि ही नहीं है......

पंडित - सब प्रभु की लीला है बिटिया.....

रूपाली - पंडित जी...... जमींदार और महेंद जी तो रहे नहीं..... अब पूजा में बैठेगा कौन?

पंडित - अरे बिटिया..... ठकुराइन है ना..... उसके हाथों से पूजा सकुशल संपन्न हो जायेगी......

पायल और रूपाली ठकुराइन का नाम सुनकर एक दूसरे को देखने लगती और तभी रूपाली कहती है...

रुपाली - पंडित जी.... वो ठकुराइन जी की तो आज तबियत बहुत खराब है.... हकीम ने उन्हें कुछ आराम करने को कहा है........

पंडित - कोई बाते नहीं बिटिया..... तूम दोनों भी तो इसी हवेली की बहु हो..... तुम दोनों मिलकर भी इस पूजा को सफल कर सकती हो.....

रूपाली - सच पंडित जी.....???

पंडित - हां बहु रानी...... और आज बहुत शुभ मुहूर्त है.... जिसके भी हाथों से हवन में आखिरी आहुति गिरेगी वो आजीवन इस हवेली पर राज करेगा.....

पायल खुश होकर - आप सच बोल रहे है पंडित जी....? सच में जो पूजा संपन्न करवाएगा उसका जीवनभर इस हवेली पर राज़ रहेगा.....

पंडित - हाँ बहुरानी..... कई दशकों में सिर्फ एक बार बनता है ऐसा संजोग.....

रूपाली - पंडित जी..... आरती का समय होने वाला है...... आप तयारी कीजिये हम आते है.....

पायल - हां पंडित जी..... आप यही रुकिए हम हवेली का थोड़ा काम निपटा के आते है....


ठकुराइन सुबह सुबह राजन के सपनो में खोई बिस्तर में पेट के बल लेटी हुई थी..... उसका एक हाथ अपनी साडी के अंदर घुसा हुआ था जो उसकी चुत को सहला रहा था और दूसरे से ठकुराइन ने ब्लाउज के ऊपर से अपनी एक चूची पकड़ी हुई थी जिसे मसलकर ठकुराइन राजन को याद करते हुए अपनी जुबान से राजन का नाम ले रही थी......

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ठकुराइन वैसे तो बचपन से ही बड़े घर में पलकर बड़ी हुई थी और उसने विलासता को बहुत करीब से देखा था मगर ये बाते सच थी की उसने कभी वो शारीरिक सुख नहीं भोगा था जो उसे राजन से मिल रहा था....

ठकुराइन सिर्फ नाम से राजन को बेटा कहके बुलाती थी और राजन सिर्फ नाम से ठकुराइन को मम्मी कहकर बुलाता था...... असल में दोनों का सम्बन्ध समझा उन दोनों के लिए भी मुश्किल था.....

राजन तो ठकुराइन को सिर्फ एक ऊंचे घर की बेगड़ेल घोड़ी समझता था जिसे दुसरो के दुखदर्द से कोई वास्ता नहीं था.... लेकिन ठकुराइन राजन को अब अपने प्रेमी और बेटे के रूप में देखने लगी थी... ठकुराइन को राजन का अच्छा बुरा हर तरह का बर्ताव और वहशीपन उसके प्यार में साथ अब पसंद आने लगा था और वो राजन की हर बात ऐसे मानने लगी थी जैसे गुलाम अपने मालिक की मानता है......

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ठकुराइन राजन की यादो में खोई हुई थी की दरवाजे पर दस्तक हुई और रुपाली और पायल बिना ठकुराइन की इज़ाज़त लिए उसके कमरे में दाखिल हो गए जिससे ठकुराइन सकपका गई और जल्दी से खुदको संभालती हुई खड़ी हो गई.........

पायल - क्या बाते है सासु मा..... बड़ी खोई खोई सी लग रही हो? रातभर नींद नहीं आई लगता है....

रूपाली - नींद आएगी भी कैसे सासु जी को.... सारा दिन तो इसी कमरे में बंद रहती है..... ना कोई काम ना धाम.....

पायल रुपाली को रोकते हुए - ना कोई ठकुराइन वाली जिम्मेदारी......

दोनों ठकुराइन को देखकर जोर जोर से हसने लगती है.....

ठकुराइन गुस्से - क्यूँ आई हो तुम दोनों यहां...?

पायल - अरे सासु जी.... इतना गुस्सा अच्छा नहीं है आपकी साँसों के लिए..... बार बार किस्मत साथ नहीं देती.....

रूपाली - हाँ सासु जी.... क्या पता इस बार कोई और तरीका काम आ गए...... और लोगों कहे की ठकुराइन तो गई......

दोनों फिर से हँसने लगते है इस बार ठकुराइन बोल पडती है......

ठकुराइन - मैंने कल पंडित जी को अपना हाथ दिखाया था...... वो बता रहे थे मेरे जाने में अभी बहुत समय है..... एक बार तुम दोनों भी दिखा लो.... क्या मालूम कोनसी अनहोनी कब हो जाए......

इस बार ठकुराइन के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी और पायल और रूपाली के चेहरे पर बैर और द्वेष के भाव.....

पायल - हमें अपना हाथ दिखाने की जरुरत नहीं है.... हम लकीरो से ज्यादा अपनेआप पर विश्वास करते है....

रूपाली -हम बस इतना बताने आये थे कि पूजा पूरी होने तक अपने इस कमरे से बाहर आने कि जरुरत नहीं करना.... वरना अन्होने जब होगी तब.... हादसा कभी भी हो सकता है.....

पायल - रूपाली लगता है सासु मा समझ गई......

ठकुराइन दोनों कि बात का कोई जवाब नहीं देती और चुपचाप खड़ी रहती है और पायल और रूपाली ठकुराइन के कमरे से बाहर निकल जाते है......

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पायल और रूपाली के जाने के बाद ठकुराइन आईने में खुदको देखकर बलखाती हुए बिस्तर पर आकर तकिया अपनी छाती से चिपका लेती और तकिये को चूमकर कहती है - मेरा गन्दा बेटा..... और फिर से राजन कि यादो में कहीं खो जाती है....



राजन अपनी बड़ी बहन चांदनी को अपनी बाहों में समेटे खाट पर ऐसे सो रहा थे जैसे बेघर इंसान फुटपाथ पर अपना कीमती सामान अपने सीने से लगाकर सोता है.... दोनों इतना इत्मीनान से सो रहे थे कि दुनिया से कोई लेना देना ही ना हो..... राजन और चांदनी के चेहरे, गले और सीने पर बने निशान रात में उनके बीच हुए रंगारंग कार्यक्रम की अपार सफलता का उद्घोष कर रहे थे.....

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आज राजन की आँख बहुत जल्दी खुल गई थी.... शायद उसे याद था की आज हवेली में पूजा है और आज ही वो पायल और रूपाली को उसके किये की सजा भी देने वाला था.....

राजन धीरे धीरे चांदनी की पकड़ से खुदको छुड़ाता हुआ उसे चादर ओढ़ाकार खड़ा हो जाता है..... राजन सोती हुई चांदनी का सर चूमकर दबे पाव नीचे आ जाता है और हाथ मुँह धोने लगता है..... हलका सा उजाला चारो और फ़ैल चूका था जिसमे राजन अपना मुँह धोते हुए कुल्हा कर रहा था.......


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राधा अबतक नहा चुकी थी और एक लाल रंग की घाघरा चोली पहनकर कमरे से बाहर आकर राजन को अनदेखा करते हुए एक थैले में कुछ सामान लिए बाहर जाने को थी तभी राजन बोल पड़ा......

राजन - इतना सुबह कहा जाना है.....?

राधा राजन को वापस अनदेखा करते हुए जाने लगती है तभी राजन....

राजन राधा का हाथ पकड़कर - बताओ तो...... मैं छोड़ दिए देता हूँ.....

राधा अब कुछ बोली - मैं चली जाउंगी.....

राजन - पर जा कहा रही हो?

राधा - पडोस में किसी से भी पूछ लेना पता चल जाएगा........

राजन आगे बढकर राधा के सामने खड़ा हो जाता है और प्यार से मुस्कुराते हुए कहता है - इतनी नाराज़गी है अपने बेटे से.... कि सीधे मुँह बाते भी नहीं कर सकती......

राधा राजन को देखते हुए -बाबा जी के आश्रम जा रही हूँ.... आज वही सब गाँव कि महिलाये भजन करेगी.....

राजन - मैं छोड़ता हूँ....

राधा - में खुद चली जाउंगी......

राजन अकड़कर - मैं पूछ नहीं रहा बल्कि बता रहा हूँ.... कि में छोडूंगा.....

राधा -चुपचाप खड़ी रही.....

राजन अपनी गाडी निकल कर राधा के पास वाली सीट पर बैठा लेता है और गाडी चल पडती है.....

रास्ता ख़राब होने के कारण गाडी में झटके लग रहे थे और उससे राधा के बोबे बार बार ऊपर नीचे हिले जा रहे थे..... राजन अपनी माँ कि चोली में हिलते चुचे देखकर मचल उठा था......

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राजन ने अपना एक हाथ राधा कि जांघ पर रख दिया और सहलाने लगा जिसे राधा ने तुरंत हटा दिया.. राधा राजन कि तरफ देख भी नहीं रही थी... राजन अपनी माँ ऐसा बर्ताव देखकर हैरान होने के साथ उत्तेजित भी हो उठा था..... राजन ने सडक के एक तरफ गाडी लगाई और अपनी माँ राधा को देखते हुए बोला.....

राजन - तूने पैदा किया है मुझे..... मुझपर पहला हक़ तेरा है और तू ही ऐसे नज़र रहेगी तो मैं तो मर जाऊँगा......

राधा राजन का मुँह पकड़ते हुए - दुबारा मरने वाली बात कि तो मुँह तोड़ दूंगी तेरा........

राजन राधा का हाथ चूमते हुए - इतना प्यार करती हो मुजसे.....?

राधा कीच नहीं बोली और चुपचाप अपनी सीट पर बैठी रही तभी राजन आगे बढ़कर अपनी के गुलाबी होंठों को चूमने कि कोशिश करता है जिसे राधा नाकाम करते हुए राजन से कहती है - मुझे क्या समझ रखा है तुमने.....? हा..... जब चाहा मुँह से लगाया जब चाहा पैरों कि धूल समझकर झाड़ दिया.....

राजन - राधा कि बाते सुनकर अनसुना कर देता और अपनी माँ के होंठों को जबरदस्ती अपने होंटो में क़ैद करके चूमने लहता है जिसमे राधा उसका विरोध करती है पर राजन के आगे उसकी एक नहीं चलती.....

राधा चुम्बन तोड़कर राजन को पीछे धकेलते हुए - हट पीछे बेशर्म.... थोड़ी भी शर्म नहीं आती ना तुम्हे अपनी माँ के साथ जोर जबरदस्ती करते हुए.....?

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राजन अपना तना हुआ लोडा बाहर निकालकर राधा के सामने रख देता है और बोलता है - मैं क्या करू माँ..... सारा कसूर तो इसका है......

राधा ने बहुत दिनों के बाद राजन का लंड देखा था और देखते हुए वो बहकने लगी थी.....

राधा लंड को तिरछी नज़र से देखते हुए - रातभर तेरी रांड बहन अपने घाघरे में रखकर भी ठंडा नहीं कर पाई क्या इसे.......

राजन राधा का मुँह पकड़कर - माँ.... चांदनी के बारे कुछ मत कहना..... मैं शादी कर चूका हूँ उससे और कुछ दिनों बाद उसे लेकर हमेशा के लिए शहर चला जाऊंगा और वही रहूँगा..... तू अगर नहीं चाहती तो ठीक है अब से तुझे कभी तंग नहीं करूंगा.....

राजन अपने लंड राजा को वापस पेंट में डाल लेता है और ये कहते हुए राजन गाडी स्टार्ट कर लेता और चलाने लगता है....

राधा राजन को देखते हुए - मैंने कब कहा कि तुम मुझे तंग करते हो? मैंने तो मन ही मन तुम्हे अपना सब मान लिया है लेकिन तुम हो कि कभी मेरी कद्र ही नहीं करते...... तुम दोनों मुझे अकेला यहां छोड़ जाओगे...? मैं अकेली कैसे रहूंगी कभी सोचा है तुमने...?

राजन फिर से गाडी रोक कर अपनी माँ के होंठों को अपने होंठों में बंद कर लेता है और उसकी जीभ के साथ अपनी जीभ कि लड़ाई शुरू कर देता है.... राजन का एक हाथ खुद ब खुद राधा कि चोली के अंदर चला जाता है और राधा कि एक चूची को प्यार से सहलाते हुए उसके निप्पल्स को छेड़ने लगता है......

राधा इस बार राजन का विरोध नहीं कर रही थी बल्कि

खुद अपने दोनों हाथों को राजन के गले में डाल कर अपने लबों कि शराब अपने बेटे को पीला रही थी..... राधा राजन के होंठों को चूमते हुए बार बार राजन के होंठों को अपने दांतो से काट रही थी.... राजन अपनी माँ को इस तरह से खुद पर प्यार लुटाते देख मदमस्त होने लगा था..... राधा के होंठों कि लाली राजन ने अपने होंठों से उतार दी थी और अब भी अपनी माँ के होंठों का पीछा नहीं छोड़ा था..... दोनों माँ बेटे चुम्बन प्रगाड़ था और और पिछले 15 मिनट से चलता आ रहा था.....

तभी किसी कि आवाज़ से राधा ने न चाहते हुए भी चुम्बन तोड़ दिया और बाहर झाँकने को हुई.... राजन ने भी अपना हाथ और मुँह सँभालते हुए बाहर देखा.... सुनसान सडक पर एक बुड्ढा फ़कीर हाथ में एक छोटी थाली सा बर्तन लिए खड़ा था और गाडी के सीसे पर आवाज़ कर रहा था..... कार के शीशे पर परत के कारण फ़कीर को अंदर जो हो रहा था वो तो नहीं दिखा लेकिन राजन के शीशा नीचे करने पर राजन राधा का चेहरा देखते ही उसे सब इल्म हो चूका था कि बंद कार में क्या गुल खिलाये जा रहे थे.....

फ़कीर - बेटा..... कुछ खाने के लिए मिलेगा..... 2 दिन से भूखा हूँ..... पीर बाबा कि मज़ार पर जाने के लिए निकला हूँ.....

राजन अपनी जेब से 100 का नोट निकलकर देते हुए - खाने को तो अभी कुछ नहीं है.... ये रख लो.... रास्ते में कुछ लेकर खा लेना.....

फ़कीर - बहुत बहुत शुक्रिया बेटा..... तुमने इस गरीब कि मदद कि है अल्लाह तुम दोनों कि जोड़ी हमेशा बनाये रखे...... ये कहते हुए फ़क़ीर चल पड़ता है और राजन और राधा एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगते है........

राजन अपनी माँ को देखकर मुस्कुराते हुए अपना लंड बाहर निकल लेता है और राजन का इशारा पाकर राधा लंड को पकड़कर सहलाते हुए उसे अपने मुँह में भरकर प्यार करने लगती है......

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राजन प्यार से अपनी माँ कि जुल्फे संवारते हुए अपने लंड पर राधा के मुँह कि गर्माहट महसूस करते हुए आनंदित हो उठता है और सिगरेट के कश लेते हुए अपनी माँ से मुखमेथुन का सुख भोगने लगता है......

राधा अपने पतले गुलाबी होंठों को अपने बेटे के मोटे तगड़े भीमकाय लंड पर आगे पीछे करती हुई वेक्यूम कि तरह चूसे जा रही थी तभी राजन के फ़ोन कि घंटी बजी....

ये खालिद का फ़ोन था....

राजन अपने चरम आनंद के शिखर पर जागते हुए - हेलो.....

खालिद -भाई में तेरे गाँव आ ग़या हूँ रुखसाना को लेकर.....

राजन जैसे नींद से जागते हुए - उस्मान भी तेरे साथ है...?

खालिद - हां उस्मान चाचा मेरे साथ है..... हम दोनों हवेली के लिए निकल रहे है.....

राजन - ठीक है मैं भी अभी पहुँचता हूँ.....

ये कहते हुए राजन ने फोन काट दिया.....

राधा अपने बेटे कि बातों से अनजान उसके लोडे को चूसने में व्यस्त थी.....

राजन अपनी माँ के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए - माँ.... बस कर.... अब्बी कहीं जाना है.... बाद में तसल्ली से प्यार कर लेना इसे..... अब तो तेरा ही है....

राधा अपने बेटे कि बात सुनकर उसका लंड अपने मुँह से निकल देरी और अपनी जीभ को होंठों पर फेरते हुए कहती है - इस तरह बीच में ही अपनी माँ को प्यासा छोड़ कर जाओगे तो पाप लगेगा तुम्हे....

राजन अपनी माँ कि बात सुनकर धीरे से राधा के बाल पकड़ कर उसे अपने लंड पर झुका लेता और अपना लोडा उसके मुँह में देकर बोलता है - जीभर के चूस ले माँ.... आज रात में तुझे अपनी दुल्हन बना लूंगा.....

राधा राजन कि बात सुनते हुए उसके लंड पर टूट पडती है और किसी सस्ती रंडी कि तरह गले तक लेकर राजन का लंड चूसने लगती है.....

करीब 15-20 मिनट बाद राजन राधा के मुँह में अपना गाड़ा वीर्य छोड़ देता है जिसे राधा अपने बेटे का प्रसाद मानकर राजन कि आँखों देखते हुए पी जाती है.....

कुछ देर में राजन राधा को आश्रम छोड़कर हवेली चल पड़ता है....



Kahani kesi lag rhi hai comment kro guys and please like kro.... Bahut time lagta hai kahani likhne me so please response kro.... ❤️❤️❤️❤️
बहुत ही शानदार और मजेदार अपडेट है ठकुराइन राजन के सपने देख रही है वही उसे राजन पे विश्वास है कि वह रूपाली और पायल को सबक सिखायेगा
आखिर राधा अपने दिल में दबी बात राजन को बता देती है कि वह उसे सब कुछ मानती हैं राधा और राजन में आज रात सुहागरात होने वाली है देखते हैं अब उस्मान और खालिद क्या करते हैं
 
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