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Update - 5
Writer - Nidhi Agrawal
कहानी में आगे ..........
आपने मेरी पिछली कहानी में तो देखा ही था की कैसे मैं और सलमा हम दोनों पूरी तरह से शेरसिंह की बीवी बन गयी थी , लेकिन फिर मेरे पति ६ महीनो के लिए दूसरे शहर चले गए तो शेरसिंह भी उनके साथ चला गया , अब मैं और सलमा फिर से प्यासी हो गयी थी , फिर एक दिन अचानक से सलमा की माँ की तबियत ख़राब हो गयी तो वो भी छुट्टी लेकर गाँव चली गयी - अब तो मैं बिलकुल अकेली रह गयी थी ।
मैं दिन रात लंड के लिए तड़पती रहती थी और शेरसिंह से फोन पर बात करके अपना दिल बहलाने की कोशिश करती थी ।
अब सलमा तो थी नहीं तो घर का सारा काम मुझे और मेरी सास को मिलकर ही करना पड़ता था , दोस्तों कहानी आगे बढ़ाने से पहले मैं आप लोगो को अपनी सास के बारे में बता देती हूँ ।
मेरी सास का नाम शकुंतला है और वो भी दिखने में मेरी तरह ही बहुत खूबसूरत है , उनकी शादी काफी कम उम्र में ही हो गयी थी - वो ४५ साल की है लेकिन देखने में वो ३५ साल से ज्यादा की नहीं लगती है ।
मम्मी जी ने इस उम्र में भी अपने शरीर को काफी मेन्टेन करके रखा हुआ है ।
दोस्तों पहले तो घर का सारा राशन पानी और सब्जी तरकारी सलमा ले आती थी लेकिन अब तो सारा सामान लेने मुझे और मम्मी जी को ही जाना पड़ता था ।
ऐसे ही एक दिन शाम के समय मैं और मम्मी जी सब्जी तरकारी लेने बाजार चली गयी - आज बाजार में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी हर तरफ से धक्के लग रहे थे , एक दम सट सट कर चलना पड़ रहा था और ना जाने कितने ही हाथ मेरे और मम्मी जी के चूतड़ों को छू रहे थे ।
अब मम्मी जी मुझे एक सब्जी वाले के पास ले आयी और फिर वो नीचे बैठकर आलू और टमाटर छाँटने लगी , मम्मी जी आलू और टमाटर छाँट छाँट कर टोकरी में डाल रही थी और मैं थोड़ी आगे की तरफ झुक कर उनकी मदद कर रही थी जिसकी वजह से मेरी मोटी गांड बहार की तरफ निकली हुई थी ।
वहाँ पर काफी भीड़ थी जिसकी वजह से सब एक के ऊपर एक चढ़ने को हो रहे थे , तभी मुझे अपनी कमर पर किसी का हाथ महसूस हुआ - पहले तो मुझे लगा शायद किसी ने भीड़ की वजह से गलती से अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया होगा तो मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया ।

काफी देर तक वो हाथ मेरी कमर से नहीं हटा तो मै तिरछी निगाहो से पीछे मुड़ कर देखने की कोशिश करने लगी , मैंने देखा मेरे पीछे एक अधेड़ उम्र का आदमी खड़ा हुआ था देखने में वो बहुत ही बदसूरत लग रहा था ।

वो करीब 45 -50 साल के आस पास का होगा लेकिन वो काफी हट्टा कट्टा दिखाई दे रहा था ।

अब मैं थोड़ी आगे की तरफ हो गयी और तभी वो भीड़ का फायदा उठाकर अपने हाथ को मेरी कमर से सरकाते हुए मेरे चूतड़ों तक ले आया , अब वो मेरी गांड को धीरे धीरे दबाने लगा - मैं बार बार आगे होने की कोशिश कर रही थी लेकिन वहाँ इतनी भीड़ थी कि मैं हिल भी नहीं पा रही थी ।

तभी उसने मेरी गांड पर एक चिकोटी काट दी जिससे मैं उछल पड़ी ।

फिर मम्मी जी बोली क्या हुआ मोना तो मैंने उन्हें कहा मम्मी जी लगता है चींटी थी , मम्मी जी बोली मोना तुम ये आलू और टमाटर थैले में डालो तब तक मैं कद्दू देखती हूँ ।

मैं मन ही मन बोलने लगी मम्मी जी यहाँ एक गैर मर्द आपकी बहु की कद्दू जैसी गांड के पीछे पड़ा हुआ है और आपको कद्दू की पड़ी हुई है ।

अब मैं आलू और टमाटर थैले में डालने लगी लेकिन वो आदमी तो जैसे हाथ धो कर मेरी गांड के पीछे पड़ गया था ।
वो बार बार मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को बुरी तरह मसल रहा था , अब मैं अपना हाथ पीछे की तरफ लेजाकर उसे अपने से दूऱ करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी लुंगी के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया ।

अब मैंने झट से अपना हाथ आगे कर लिया - दोस्तों अब तो मैं चाह कर भी उसे कुछ नहीं बोल पा रही थी और वो मेरे चूतड़ों के साथ खिलवाड़ सा कर रहा था ।

मुझे उसका लंड अपने चूतड़ों की दरार के बीच साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था , लेकिन अब मुझे कुछ कुछ होने लगा था - मेरा शरीर ना चाहते हुए भी उसका साथ देने लगा था ।

मेरी चूत अब गीली होने लगी थी , तभी वो मेरे कान में धीरे से फुसफुसाते हुए बोला मज़ा आ रहा है ना जानेमन , अगर पूरा मज़ा लेना चाहती है तो मेरे साथ साइड में चल ।
तभी मम्मी जी बोली मोना यहाँ कद्दू अच्छे नहीं है चलो और कही देख लेते है , अब मैं और मम्मी जी दूसरी तरफ आने लगी - तभी मैंने मम्मी जी को कहा मम्मी जी मैं यहाँ से बैंगन वगैरा खरीदती हूँ तब तक आप आगे कद्दू देखिये ।
अब मम्मी जी आगे चली गयी - दोस्तों उस आदमी ने मेरे अंदर की वासना जगा दी थी - मेरी चूत अब लंड लेने के लिए बुरी तरह मचलने लगी थी ।
मैं बहुत टाइम से नही चुदी थी - मैं मन ही मन बोल रही थी क्या सोच रही है मोना तू इतने टाइम से लंड के लिए तड़प रही थी - उस आदमी से चुदवा ले - वो आदमी अच्छे से तेरी चूत की आग ठंडी कर देगा ।
दोस्तों एक तरफ तो मेरा उस आदमी से चुदने का बहुत मन कर रहा था और दूसरी तरफ मुझे डर भी बहुत लग रहा था , मैं सोच रही थी की मैं ऐसे एक अंजान मर्द से कैसे चुदवा सकती हूँ अगर किसी ने मुझे देख लिया तो मेरी और मेरे परिवार की कितनी बदनामी होगी।
लेकिन दोस्तों धीरे धीरे करके मेरी चूत की आग मेरे दिमाग पर हावी होती जा रही थी अब मैंने फैसला कर लिया था की मैं उस आदमी से चुदवा ही लेती हूँ जो होगा वो देखा जाएगा ।
इतने में वो आदमी मेरे पास आ गया और वो मुझसे बोला सोच क्या रही है - मुझे पता है तू बहुत प्यासी है , चल आजा मेरे साथ कसम से तुझे बहुत मज़ा दूंगा , मैं चुप चाप खड़ी थी मेरी तो कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी तभी वो आदमी मेरा हाथ पकड़ते हुए बोला सोच क्या रही है - नहीं चलना क्या ।
तभी मैंने उसे कहा मेरी सास मेरे साथ में है मैं अभी नही आ सकती - वो बोला अपनी सास को बहाने से घर भेज दे - मैं तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ , मैं बोली किसी को कुछ पता तो नहीं चलेगा ना - वो बोली तू चिंता क्यों कर रही है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा ।
अब मैंने उसे कहा ठीक है मैं अपनी सास को घर भेज कर आती हूँ ।
उस आदमी से बात करते वक़्त मुझे उसके मुँह से काफी गन्दी बदबू आ रही थी शायद वो गुटका खा रहा था , फिर मैं अपनी मोटी गांड हिलाते हुए मम्मी जी के पास जाने लगी - दोस्तों मुझे बहुत डर लग रहा था - मैं सोच रही थी की मैं मम्मी जी से झूठ कैसे बोलूं कही उन्हें मेरे ऊपर शक हो गया तो ।
फिर मैं हिम्मत करके मम्मी जी के पास गयी और मैंने उन्हें कहा मम्मी जी और कुछ भी लेना है क्या , मम्मी जी बोली नहीं बहु चलो घर चलते है , फिर मैंने उन्हें कहा मम्मी जी आप चलिए मुझे थोड़ा घर का सामान लेना है , मम्मी जी बोली मोना मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ फिर हम साथ में ही घर चलेंगे , मैंने उन्हें कहा मम्मी जी आप घर जाकर रात के खाने की तयारियाँ करिये - मैं बस थोड़ी देर में आजाऊंगी ।
वैसे भी बाबू जी आपका इंतज़ार कर रहे होंगे , मम्मी जी बोली हाँ मोना तुम ठीक कह रही हो - मैं घर जाकर खाने की तयारियाँ करती हूँ तुम तो तुम्हारे बाबूजी को जानती ही हो , अगर खाना बनने में थोड़ी भी देर हो गयी तो वो आफत मचा देंगे , अब मैंने मम्मी जी को रिक्क्षा में बैठाकर घर भेज दिया और अब मैं उस आदमी को देखने लगी ।
तभी मैंने देखा वो आदमी मुझे अपने पीछे आने का इशारा कर रहा था , अब मैंने इधर उधर देखा और फिर मैं छुपते छुपाते उसके पीछे जाने लगी , दोस्तों मेरी चूत की आग मेरे ऊपर इतनी हावी हो चुकी थी की मुझे कुछ होश ही नहीं था की मैं क्या करने जा रही हूँ ।
अब वो आदमी मुझे कुछ छोटी छोटी गलियों के बीच में से एक बहुत ही तंग और सुनसान गली में ले आया , मैंने देखा वहाँ काफी अँधेरा था - वो गली दोनों तरफ से खुली हुई थी और वहाँ काफी कूड़ा भी पड़ा हुआ था जिसकी वजह से मुझे बहुत बदबू आ रही थी , मुझे डर तो बहुत लग रहा था लेकिन मेरे पूरे बदन में गर्मी इस तरह चढ़ी हुई थी की मैं कही पर भी चुदने के लिए तयार थी ।

अब उस आदमी ने मुझे एक कोने में लेजाकर वहाँ की दीवार से मुझे सटा दिया , उसके बाद उसने अपने मुँह से अपना गुटका थूका और फिर वो बड़ी ही बेरहमी से मेरे होंठो को चूसने लगा ।

मेरे होंठो को चूसने के साथ साथ वो मेरा पूरा बदन भी रगड़ रहा था , अब वो मुझसे कहने लगा आह साली आह क्या गरम माल है तू , मैं तो तुझे देखते ही समझ गया था की तू बहुत प्यासी है - साली बहन की लौड़ी मेरा मन तो कर रहा था की वही सबके सामने तेरी साड़ी खोल कर तेरी चूत में अपना लंड फँसा दूँ ।

दोस्तों मुझे बहुत दिनों के बाद एक मर्द का स्पर्श मिला था तो मैं पूरी तरह गर्म हो गयी थी और मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी , अब उसने धीरे धीरे करके मेरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए और उसके बाद उसने मेरी ब्रा खोले बिना ही मेरे दोनों चूचे मेरी ब्रा से बहार निकाल लिए ।

अब वो मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी चूत मसलते हुए बारी बारी मेरी दोनों चूचियों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा , वो मेरी चूचियों को चूसने के साथ साथ हल्के हल्के मेरी चूचियों को काट भी रहा था जिससे मैं बहुत बुरी तरह सिसकारियाँ ले रही थी ।

अब उसने मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट धीरे धीरे ऊपर करना शुरू कर दिया , जैसे ही वो मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट ऊपर लेकर आया तो उसे मेरी गुलाबी रंग की कच्छी और मेरी सेक्सी मांसल जाँघे साफ़ साफ़ दिखाई देने लगी , वो तो जैसे मेरी माँसल जांघो को देख कर पागल ही हो गया था ।

अब वो अपने सक्त हाथो से मेरी जांघो को सहलाने लगा और फिर उसने पीछे से अपने हाथ मेरी कच्छी में घुसा दिए ।

वो बहुत जोर जोर से मेरी गांड दबाते हुए बोल रहा था आह साली क्या मस्त मोटे और मुलायम चूतड़ है तेरे लगता है तू बहुत गांड मरवाती है ।

मैं उसको बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह धीरे करो आह दर्द हो रहा है , अब उसने मेरी कच्छी मेरे घुटनो तक कर दी और फिर वो मेरी चूत पर हाथ लगाते हुए बोला साली तेरी चूत तो बहुत पानी छोड़ रही है ।

इतना बोलते हुए उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में घुसा दी और वो अपनी उंगलियों से मेरी चूत चोदने लगा , मैं बहुत बुरी तरह सिसकारियाँ लेते हुए बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह उफ्फ्फ आह धीरे करो आह उफ्फ्फ आह ममममम , अब उसने मुझे नीचे बैठाकर अपनी लुंगी खोल दी - उसने अंडरवियर नहीं पहना हुआ था तो एक दम से उसका लंड मेरी आँखों के सामने आ गया ।

उसके लंड को देखकर तो मैं डर ही गयी - उसका लंड तो शेरसिंह के लंड से भी लम्बा और मोटा था , उसका लंड एक दम काला था और उसके लंड पर काफी बड़ी बड़ी झाँटे थी ।

फिर वो मेरे होंठो पर अपना काला लंड रगड़ने लगा - मुझे उसके लंड से बहुत बदबू आ रही थी लेकिन फिर भी मैंने उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और मैं मज़े से उसका लंड चूसने लगी , शेरसिंह का लंड चूस चूसकर मैं लंड चूसने की माहिर खिलाडी बन चुकी थी तो उस आदमी को मुझसे अपना लंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था ।

वो मुझे बोल रहा था आह बहन की लौड़ी चूस आह बहुत मज़ा आ रहा हैं आह उफ्फ्फ क्या मस्त लंड चूसती है तू आह उफ्फ्फ आह साली ऐसे ही चूस , अब उसने मेरे हाथ ऊपर करके मेरा ब्लाउज और मेरी ब्रा मेरे जिस्म से अलग कर दी ।

मैं अब ऊपर से पूरी नंगी हो गयी थी और मेरी चूचियाँ तन कर पूरी तरह खड़ी हो गयी थी , मैं तो उस आदमी का लंड चूसने में इतनी मस्त हो गयी थी की मुझे तो कुछ होश ही नहीं था मेरे साथ क्या हो रहा है ।

काफी देर तक वो आदमी मुझे अपना लंड चुसवाता रहा , फिर उसने मुझे खड़ी किया और वो मेरी साड़ी उतारने लगा , मैंने उसको कहा मेरी साड़ी क्यों उतार रहे हो ऐसे ही कर लो ना , वो बोला जानेमन तुझे नंगी करे बिना तेरी चुदाई करने में मज़ा नहीं आएगा ।

मैंने उसे कहा नही मुझे शर्म आती है - वो बोला अब मुझसे किस बात की शर्म - तू मेरे सामने आधी से ज्यादा नंगी तो हो ही चुकी है फिर पूरी नंगी होने में क्यों शर्मा रही है ।

दोस्तों मेरी चूत में लंड लेने की इतनी आग लगी हुई थी की मैं कुछ भी करने के लिए तयार थी , फिर मैंने उसे कहा ठीक है जो करना है जल्दी कर लो , अब उसने पहले मेरी साड़ी उतारी और उसके बाद उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोलकर मेरा पेटीकोट भी मेरे जिस्म से अलग कर दिया ।

फिर मेरी कच्छी जो मेरे घुटनो तक थी - मैंने उसे खुद ही उतार दिया।

अब रात हो गयी थी और आसमान में तारे टिमटिमाने लगे थे और इस चांदनी रात में मैं पूरी नंगी खुले आसमान के नीचे एक आदमी के साथ पूरी नंगी खड़ी थी ।
मेरे पैरो में मेरी हाई हील की सैंडिल के आलावा मेरे बदन पर कुछ भी नहीं था - मुझे बहुत शर्म आ रही थी और मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी , तभी वो आदमी भी अपनी शर्ट उतार कर पूरा नंगा हो गया और उसके बाद वो अपने घुटनो पर बैठकर मेरी चूत चाटने लगा ।

दोस्तों वो आदमी बहुत ही गंदे तरीके से मेरी चूत चाट रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था - कभी शेरसिंह ने भी इस तरह मेरी चूत नहीं चाटी थी ।
अब उसने मुझे घुमाया और वो फिर वो मेरी गांड भी चाटने लगा , वो मेरी गांड की लकीर से होते हुए मेरी चूत तक अपनी जीभ फिरा रहा था , मैं अपने हाथो से अपने चूचे मसलते हुए बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह मुझे और मत तड़पाओ आह अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो ।
फिर उसने मुझे सीधी किया और उसके बाद वो मेरी एक टांग उठाकर अपने हाथ पर रखते हुए मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा , तभी मैं थोड़ी आगे को हुई जिससे उसके लंड का टोपा मेरी चूत में चला गया और फिर उसने एक जोरदार धक्का लगाकर अपना पूरा का पूरा लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया ।
उसका लंड चूत में जाते ही मुझे एक अलग ही सुकून मिला - एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में पहुँच गयी हो , अब वो आदमी जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चूत मारने लगा ।
वो मेरी चूत मारते हुए कभी मेरे होंठो को चूम रहा था कभी वो मेरी चूचियां दबा रहा था तो कभी वो मेरी गांड दबा रहा था ।
मैं उसका साथ देते हुए बोल रही थी आह चोदो मुझे आह मैं बहुत टाइम से नहीं चुदी हूँ आह उफ्फ्फ आह मममम आह बहुत मज़ा आ रहा है , वो आदमी मेरी चूत में जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोल रहा था ले बहन की लौड़ी ले - साली रांड बहुत आग है ना तेरी चूत में आह साली रंडी , कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मेरी चूत में लंड डाले डाले ही मुझे अपनी गोद में उठा लिया।
मैंने उसके गले में हाथ डालकर उसकी कमर को अपने पैरो से जकड़ रखा था , उसने मुझे मेरे बड़े बड़े चूतड़ों से पकड़ा हुआ था और वो मुझे अपने लंड पर उछाल उछाल कर मेरी चूत मार रहा था ।
अब हम दोनों की सिसकारियाँ तेज होने लगी और हम दोनों एक साथ झड़ गए , अब उसने मुझे अपनी गोद से उतारा और उसके बाद वो मेरे होंठो पर किस करने लगा , वो मेरे होंठो पर किस करते हुए बोल रहा था आह मज़ा आ गया आह ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं मिला ।
अब मैंने अपनी कच्छी से अपनी चूत साफ़ की और फिर मैं अपने कपड़े उठाने लगी तो वो बोला कपड़े क्यों पहन रही है , मैंने कहा अब क्या बाकी रह गया है - तुमने मुझे चोद तो लिया - इससे पहले कोई यहाँ आ जाए हमे यहाँ से चलना चाहिए ।
वो बोला जानेमन अभी तो मुझे तेरी गांड भी मारनी है - मैंने उसे कहा देखो मैं बहुत थक गयी हूँ और मुझे घर जाने में काफी देर भी हो रही है , तुम किसी और दिन मेरी गांड मार लेना मैं तुमसे वादा करती हूँ की मैं तुमसे गांड मरवाने जरूर आउंगी ।
वो बोला मुझे तो अभी तेरी गांड मारनी है - अगर तू नहीं मानेगी तो मुझे तेरे साथ जबरदस्ती करनी पड़ेगी , मैंने उसे कहा ये तुम क्या बोल रहे हो तभी वो बोला मान जा ना इतने नखरे क्यों दिखा रही है , बस थोड़ी देर की ही तो बात है , मैं समझ गयी थी की ये कमीना बिना मेरी गांड मारे मुझे यहाँ से नहीं जाने देगा ।
अब मैं अपने घुटनो पर बैठ गयी और उसका लंड चूसने लगी , अभी कुछ देर पहले ही उसका लंड झड़ा था तो उसका लंड बिलकुल मुरझाया हुआ था , फिर मैं उसका लंड चूस चूस कर फिर से खड़ा करने लगी ।
अब मैं उसका लंड अपने बड़े बड़े मम्मो के बीच रगड़ते हुए चूस रही थी जिससे कुछ ही देर में उसका लंड फिर से तन गया , अब मैं एक दीवार से सट कर अपनी गांड बहार की तरफ निकालके अपनी टाँगे चौड़ी करके खड़ी हो गयी , फिर वो मेरी गांड को चाटने लगा - काफी देर तक वो मेरी गांड को चाटता रहा ।
उसने मेरी गांड चाट चाट कर पूरी गीली कर दी थी - उसने मेरी गांड के छेद को अपने थूक से पूरा भर दिया था , अब उसने अपने लंड को मेरी गांड से सटाया और उसके बाद उसने मेरी गांड में अपना लंड डालकर मेरी गांड मारनी शुरू कर दी ।
मैं बहुत टाइम बाद अपनी गांड मरवा रही थी तो मेरी गांड का छेद बहुत टाइट हो गया था इसलिए मुझे मीठा मीठा दर्द हो रहा था , वो लगातार मेरी गांड में धक्के लगा रहा था और मैं उसका भरपूर साथ दे रही थी , मेरी गांड मारते हुए वो कभी मेरी गांड पर थप्पड़ लगा रहा था तो कभी वो मेरी गांड को जोर जोर से दबा रहा था ।
फिर वो मेरे होंठो को चूसते हुए मेरे मम्मे और मेरी चूत भी सहलाने लगा , वो मेरी गांड में जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चूत को अपनी उंगलियों से चोद रहा था ।
तभी मैं उसका हाथ अपनी चूत से दूऱ करते हुए उसको कहने लगी आह छोड़ो मुझे आह मुझे पेशाब आ रहा है लेकिन उसने मेरी चूत से अपना हाथ नहीं हटाया , वो लगातार अपनी उंगलियों से मेरी चूत चोदता रहा , तभी मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मेरा पेशाब निकलने लगा ।
मेरे पेशाब के साथ साथ मेरी चूत भी झड़ गयी और मैं बहुत तेज चिल्लाते हुए आह उफ्फ्फ आह ममम आह ममममम आह ऊऊफफफ आह की आवाज़े निकालने लगी ।
अब मैं थक कर अपने घुटनो पर आ गयी तो उसने मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड मारनी चालु रखी , फिर कुछ देर तक मेरी गांड मारते मारते उसने अपने लंड का पानी मेरी गांड में ही निकाल दिया और अब वो मुझसे अपना लंड चटवा चटवा कर साफ़ करवाने लगा ,अब उसने झट से अपनी लुंगी और टी शर्ट पहन ली और अब मैं भी अपने कपड़े समेटने लगी ।
तभी उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और फिर वो मुझसे मेरा फ़ोन नंबर माँगने लगा , मैंने उसे अपना नाम तो बता दिया लेकिन मुझे पता था की अगर मैंने इसे अपना फ़ोन नंबर दे दिया तो ये मुझे हररोज़ परेशान करेगा इसलिए मैंने उसे गलत नंबर दे दिया ।
अब मैं भी उससे उसका नाम पता पूछने वाली थी की हमे उस गली के बहार से कुछ लोगो की आवाज़ सुनाई दी , शायद कुछ लोग गली के बहार से बात करते हुए जा रहे थे , अब वो आदमी मुझे वैसी ही नंगी हालत में छोड़ कर वहाँ से निकल गया ।

मैंने उसे कहा रुको कहाँ जा रहे हो मैं भी चल रही हूँ लेकिन वो मेरी एक भी बात सुने बिना ही वहाँ से निकल गया ।
दोस्तों अब मैं एक साइड में छुप गयी और एक और बार मेरा पेशाब निकल गया , पहले चुदने की वजह से मेरा पेशाब निकला था लेकिन अब डर की वजह से मेरा पेशाब निकल रहा था ।
मुझे बहुत डर लग रहा था की कही कोई मुझे यहाँ इस हालत में ना देख ले , फिर मैंने जल्दी से बिना ब्रा कच्छी और पेटीकोट के ही अपना ब्लाउज और अपनी साड़ी पहनी , उसके बाद मैं चुप चाप अपने घर आ गयी ।

दोस्तों आज अपनी वासना के चलते मैंने एक ऐसे आदमी से अपनी जवानी लुटवाई थी जिसका मैं नाम तक नहीं जानती थी ।
दोस्तों क्या सच में किसी ने मुझे उस अनजान मर्द से चुदते हुए नहीं देखा था या फिर देख लिया था ।
कही मैंने थोड़े से मज़े के चक्कर में कोई नयी मुसीबत तो मोल नहीं ले ली थी , ये सब आपको इस कहानी के अगले भाग में पता चलेगा तब तक के लिए बने रहिये हमारे साथ।
CONTINUE...........
NEXT UPDATE SOON.........
Writer - Nidhi Agrawal
कहानी में आगे ..........
आपने मेरी पिछली कहानी में तो देखा ही था की कैसे मैं और सलमा हम दोनों पूरी तरह से शेरसिंह की बीवी बन गयी थी , लेकिन फिर मेरे पति ६ महीनो के लिए दूसरे शहर चले गए तो शेरसिंह भी उनके साथ चला गया , अब मैं और सलमा फिर से प्यासी हो गयी थी , फिर एक दिन अचानक से सलमा की माँ की तबियत ख़राब हो गयी तो वो भी छुट्टी लेकर गाँव चली गयी - अब तो मैं बिलकुल अकेली रह गयी थी ।
मैं दिन रात लंड के लिए तड़पती रहती थी और शेरसिंह से फोन पर बात करके अपना दिल बहलाने की कोशिश करती थी ।
अब सलमा तो थी नहीं तो घर का सारा काम मुझे और मेरी सास को मिलकर ही करना पड़ता था , दोस्तों कहानी आगे बढ़ाने से पहले मैं आप लोगो को अपनी सास के बारे में बता देती हूँ ।
मेरी सास का नाम शकुंतला है और वो भी दिखने में मेरी तरह ही बहुत खूबसूरत है , उनकी शादी काफी कम उम्र में ही हो गयी थी - वो ४५ साल की है लेकिन देखने में वो ३५ साल से ज्यादा की नहीं लगती है ।
मम्मी जी ने इस उम्र में भी अपने शरीर को काफी मेन्टेन करके रखा हुआ है ।
दोस्तों पहले तो घर का सारा राशन पानी और सब्जी तरकारी सलमा ले आती थी लेकिन अब तो सारा सामान लेने मुझे और मम्मी जी को ही जाना पड़ता था ।
ऐसे ही एक दिन शाम के समय मैं और मम्मी जी सब्जी तरकारी लेने बाजार चली गयी - आज बाजार में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी हर तरफ से धक्के लग रहे थे , एक दम सट सट कर चलना पड़ रहा था और ना जाने कितने ही हाथ मेरे और मम्मी जी के चूतड़ों को छू रहे थे ।
अब मम्मी जी मुझे एक सब्जी वाले के पास ले आयी और फिर वो नीचे बैठकर आलू और टमाटर छाँटने लगी , मम्मी जी आलू और टमाटर छाँट छाँट कर टोकरी में डाल रही थी और मैं थोड़ी आगे की तरफ झुक कर उनकी मदद कर रही थी जिसकी वजह से मेरी मोटी गांड बहार की तरफ निकली हुई थी ।
वहाँ पर काफी भीड़ थी जिसकी वजह से सब एक के ऊपर एक चढ़ने को हो रहे थे , तभी मुझे अपनी कमर पर किसी का हाथ महसूस हुआ - पहले तो मुझे लगा शायद किसी ने भीड़ की वजह से गलती से अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया होगा तो मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया ।

काफी देर तक वो हाथ मेरी कमर से नहीं हटा तो मै तिरछी निगाहो से पीछे मुड़ कर देखने की कोशिश करने लगी , मैंने देखा मेरे पीछे एक अधेड़ उम्र का आदमी खड़ा हुआ था देखने में वो बहुत ही बदसूरत लग रहा था ।

वो करीब 45 -50 साल के आस पास का होगा लेकिन वो काफी हट्टा कट्टा दिखाई दे रहा था ।

अब मैं थोड़ी आगे की तरफ हो गयी और तभी वो भीड़ का फायदा उठाकर अपने हाथ को मेरी कमर से सरकाते हुए मेरे चूतड़ों तक ले आया , अब वो मेरी गांड को धीरे धीरे दबाने लगा - मैं बार बार आगे होने की कोशिश कर रही थी लेकिन वहाँ इतनी भीड़ थी कि मैं हिल भी नहीं पा रही थी ।

तभी उसने मेरी गांड पर एक चिकोटी काट दी जिससे मैं उछल पड़ी ।

फिर मम्मी जी बोली क्या हुआ मोना तो मैंने उन्हें कहा मम्मी जी लगता है चींटी थी , मम्मी जी बोली मोना तुम ये आलू और टमाटर थैले में डालो तब तक मैं कद्दू देखती हूँ ।

मैं मन ही मन बोलने लगी मम्मी जी यहाँ एक गैर मर्द आपकी बहु की कद्दू जैसी गांड के पीछे पड़ा हुआ है और आपको कद्दू की पड़ी हुई है ।

अब मैं आलू और टमाटर थैले में डालने लगी लेकिन वो आदमी तो जैसे हाथ धो कर मेरी गांड के पीछे पड़ गया था ।
वो बार बार मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को बुरी तरह मसल रहा था , अब मैं अपना हाथ पीछे की तरफ लेजाकर उसे अपने से दूऱ करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी लुंगी के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया ।

अब मैंने झट से अपना हाथ आगे कर लिया - दोस्तों अब तो मैं चाह कर भी उसे कुछ नहीं बोल पा रही थी और वो मेरे चूतड़ों के साथ खिलवाड़ सा कर रहा था ।

मुझे उसका लंड अपने चूतड़ों की दरार के बीच साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था , लेकिन अब मुझे कुछ कुछ होने लगा था - मेरा शरीर ना चाहते हुए भी उसका साथ देने लगा था ।

मेरी चूत अब गीली होने लगी थी , तभी वो मेरे कान में धीरे से फुसफुसाते हुए बोला मज़ा आ रहा है ना जानेमन , अगर पूरा मज़ा लेना चाहती है तो मेरे साथ साइड में चल ।
तभी मम्मी जी बोली मोना यहाँ कद्दू अच्छे नहीं है चलो और कही देख लेते है , अब मैं और मम्मी जी दूसरी तरफ आने लगी - तभी मैंने मम्मी जी को कहा मम्मी जी मैं यहाँ से बैंगन वगैरा खरीदती हूँ तब तक आप आगे कद्दू देखिये ।
अब मम्मी जी आगे चली गयी - दोस्तों उस आदमी ने मेरे अंदर की वासना जगा दी थी - मेरी चूत अब लंड लेने के लिए बुरी तरह मचलने लगी थी ।
मैं बहुत टाइम से नही चुदी थी - मैं मन ही मन बोल रही थी क्या सोच रही है मोना तू इतने टाइम से लंड के लिए तड़प रही थी - उस आदमी से चुदवा ले - वो आदमी अच्छे से तेरी चूत की आग ठंडी कर देगा ।
दोस्तों एक तरफ तो मेरा उस आदमी से चुदने का बहुत मन कर रहा था और दूसरी तरफ मुझे डर भी बहुत लग रहा था , मैं सोच रही थी की मैं ऐसे एक अंजान मर्द से कैसे चुदवा सकती हूँ अगर किसी ने मुझे देख लिया तो मेरी और मेरे परिवार की कितनी बदनामी होगी।
लेकिन दोस्तों धीरे धीरे करके मेरी चूत की आग मेरे दिमाग पर हावी होती जा रही थी अब मैंने फैसला कर लिया था की मैं उस आदमी से चुदवा ही लेती हूँ जो होगा वो देखा जाएगा ।
इतने में वो आदमी मेरे पास आ गया और वो मुझसे बोला सोच क्या रही है - मुझे पता है तू बहुत प्यासी है , चल आजा मेरे साथ कसम से तुझे बहुत मज़ा दूंगा , मैं चुप चाप खड़ी थी मेरी तो कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी तभी वो आदमी मेरा हाथ पकड़ते हुए बोला सोच क्या रही है - नहीं चलना क्या ।
तभी मैंने उसे कहा मेरी सास मेरे साथ में है मैं अभी नही आ सकती - वो बोला अपनी सास को बहाने से घर भेज दे - मैं तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ , मैं बोली किसी को कुछ पता तो नहीं चलेगा ना - वो बोली तू चिंता क्यों कर रही है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा ।
अब मैंने उसे कहा ठीक है मैं अपनी सास को घर भेज कर आती हूँ ।
उस आदमी से बात करते वक़्त मुझे उसके मुँह से काफी गन्दी बदबू आ रही थी शायद वो गुटका खा रहा था , फिर मैं अपनी मोटी गांड हिलाते हुए मम्मी जी के पास जाने लगी - दोस्तों मुझे बहुत डर लग रहा था - मैं सोच रही थी की मैं मम्मी जी से झूठ कैसे बोलूं कही उन्हें मेरे ऊपर शक हो गया तो ।
फिर मैं हिम्मत करके मम्मी जी के पास गयी और मैंने उन्हें कहा मम्मी जी और कुछ भी लेना है क्या , मम्मी जी बोली नहीं बहु चलो घर चलते है , फिर मैंने उन्हें कहा मम्मी जी आप चलिए मुझे थोड़ा घर का सामान लेना है , मम्मी जी बोली मोना मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ फिर हम साथ में ही घर चलेंगे , मैंने उन्हें कहा मम्मी जी आप घर जाकर रात के खाने की तयारियाँ करिये - मैं बस थोड़ी देर में आजाऊंगी ।
वैसे भी बाबू जी आपका इंतज़ार कर रहे होंगे , मम्मी जी बोली हाँ मोना तुम ठीक कह रही हो - मैं घर जाकर खाने की तयारियाँ करती हूँ तुम तो तुम्हारे बाबूजी को जानती ही हो , अगर खाना बनने में थोड़ी भी देर हो गयी तो वो आफत मचा देंगे , अब मैंने मम्मी जी को रिक्क्षा में बैठाकर घर भेज दिया और अब मैं उस आदमी को देखने लगी ।
तभी मैंने देखा वो आदमी मुझे अपने पीछे आने का इशारा कर रहा था , अब मैंने इधर उधर देखा और फिर मैं छुपते छुपाते उसके पीछे जाने लगी , दोस्तों मेरी चूत की आग मेरे ऊपर इतनी हावी हो चुकी थी की मुझे कुछ होश ही नहीं था की मैं क्या करने जा रही हूँ ।
अब वो आदमी मुझे कुछ छोटी छोटी गलियों के बीच में से एक बहुत ही तंग और सुनसान गली में ले आया , मैंने देखा वहाँ काफी अँधेरा था - वो गली दोनों तरफ से खुली हुई थी और वहाँ काफी कूड़ा भी पड़ा हुआ था जिसकी वजह से मुझे बहुत बदबू आ रही थी , मुझे डर तो बहुत लग रहा था लेकिन मेरे पूरे बदन में गर्मी इस तरह चढ़ी हुई थी की मैं कही पर भी चुदने के लिए तयार थी ।

अब उस आदमी ने मुझे एक कोने में लेजाकर वहाँ की दीवार से मुझे सटा दिया , उसके बाद उसने अपने मुँह से अपना गुटका थूका और फिर वो बड़ी ही बेरहमी से मेरे होंठो को चूसने लगा ।

मेरे होंठो को चूसने के साथ साथ वो मेरा पूरा बदन भी रगड़ रहा था , अब वो मुझसे कहने लगा आह साली आह क्या गरम माल है तू , मैं तो तुझे देखते ही समझ गया था की तू बहुत प्यासी है - साली बहन की लौड़ी मेरा मन तो कर रहा था की वही सबके सामने तेरी साड़ी खोल कर तेरी चूत में अपना लंड फँसा दूँ ।

दोस्तों मुझे बहुत दिनों के बाद एक मर्द का स्पर्श मिला था तो मैं पूरी तरह गर्म हो गयी थी और मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी , अब उसने धीरे धीरे करके मेरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए और उसके बाद उसने मेरी ब्रा खोले बिना ही मेरे दोनों चूचे मेरी ब्रा से बहार निकाल लिए ।

अब वो मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी चूत मसलते हुए बारी बारी मेरी दोनों चूचियों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा , वो मेरी चूचियों को चूसने के साथ साथ हल्के हल्के मेरी चूचियों को काट भी रहा था जिससे मैं बहुत बुरी तरह सिसकारियाँ ले रही थी ।

अब उसने मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट धीरे धीरे ऊपर करना शुरू कर दिया , जैसे ही वो मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट ऊपर लेकर आया तो उसे मेरी गुलाबी रंग की कच्छी और मेरी सेक्सी मांसल जाँघे साफ़ साफ़ दिखाई देने लगी , वो तो जैसे मेरी माँसल जांघो को देख कर पागल ही हो गया था ।

अब वो अपने सक्त हाथो से मेरी जांघो को सहलाने लगा और फिर उसने पीछे से अपने हाथ मेरी कच्छी में घुसा दिए ।

वो बहुत जोर जोर से मेरी गांड दबाते हुए बोल रहा था आह साली क्या मस्त मोटे और मुलायम चूतड़ है तेरे लगता है तू बहुत गांड मरवाती है ।

मैं उसको बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह धीरे करो आह दर्द हो रहा है , अब उसने मेरी कच्छी मेरे घुटनो तक कर दी और फिर वो मेरी चूत पर हाथ लगाते हुए बोला साली तेरी चूत तो बहुत पानी छोड़ रही है ।

इतना बोलते हुए उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में घुसा दी और वो अपनी उंगलियों से मेरी चूत चोदने लगा , मैं बहुत बुरी तरह सिसकारियाँ लेते हुए बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह उफ्फ्फ आह धीरे करो आह उफ्फ्फ आह ममममम , अब उसने मुझे नीचे बैठाकर अपनी लुंगी खोल दी - उसने अंडरवियर नहीं पहना हुआ था तो एक दम से उसका लंड मेरी आँखों के सामने आ गया ।

उसके लंड को देखकर तो मैं डर ही गयी - उसका लंड तो शेरसिंह के लंड से भी लम्बा और मोटा था , उसका लंड एक दम काला था और उसके लंड पर काफी बड़ी बड़ी झाँटे थी ।

फिर वो मेरे होंठो पर अपना काला लंड रगड़ने लगा - मुझे उसके लंड से बहुत बदबू आ रही थी लेकिन फिर भी मैंने उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और मैं मज़े से उसका लंड चूसने लगी , शेरसिंह का लंड चूस चूसकर मैं लंड चूसने की माहिर खिलाडी बन चुकी थी तो उस आदमी को मुझसे अपना लंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था ।

वो मुझे बोल रहा था आह बहन की लौड़ी चूस आह बहुत मज़ा आ रहा हैं आह उफ्फ्फ क्या मस्त लंड चूसती है तू आह उफ्फ्फ आह साली ऐसे ही चूस , अब उसने मेरे हाथ ऊपर करके मेरा ब्लाउज और मेरी ब्रा मेरे जिस्म से अलग कर दी ।

मैं अब ऊपर से पूरी नंगी हो गयी थी और मेरी चूचियाँ तन कर पूरी तरह खड़ी हो गयी थी , मैं तो उस आदमी का लंड चूसने में इतनी मस्त हो गयी थी की मुझे तो कुछ होश ही नहीं था मेरे साथ क्या हो रहा है ।

काफी देर तक वो आदमी मुझे अपना लंड चुसवाता रहा , फिर उसने मुझे खड़ी किया और वो मेरी साड़ी उतारने लगा , मैंने उसको कहा मेरी साड़ी क्यों उतार रहे हो ऐसे ही कर लो ना , वो बोला जानेमन तुझे नंगी करे बिना तेरी चुदाई करने में मज़ा नहीं आएगा ।

मैंने उसे कहा नही मुझे शर्म आती है - वो बोला अब मुझसे किस बात की शर्म - तू मेरे सामने आधी से ज्यादा नंगी तो हो ही चुकी है फिर पूरी नंगी होने में क्यों शर्मा रही है ।

दोस्तों मेरी चूत में लंड लेने की इतनी आग लगी हुई थी की मैं कुछ भी करने के लिए तयार थी , फिर मैंने उसे कहा ठीक है जो करना है जल्दी कर लो , अब उसने पहले मेरी साड़ी उतारी और उसके बाद उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोलकर मेरा पेटीकोट भी मेरे जिस्म से अलग कर दिया ।

फिर मेरी कच्छी जो मेरे घुटनो तक थी - मैंने उसे खुद ही उतार दिया।

अब रात हो गयी थी और आसमान में तारे टिमटिमाने लगे थे और इस चांदनी रात में मैं पूरी नंगी खुले आसमान के नीचे एक आदमी के साथ पूरी नंगी खड़ी थी ।
मेरे पैरो में मेरी हाई हील की सैंडिल के आलावा मेरे बदन पर कुछ भी नहीं था - मुझे बहुत शर्म आ रही थी और मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी , तभी वो आदमी भी अपनी शर्ट उतार कर पूरा नंगा हो गया और उसके बाद वो अपने घुटनो पर बैठकर मेरी चूत चाटने लगा ।

दोस्तों वो आदमी बहुत ही गंदे तरीके से मेरी चूत चाट रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था - कभी शेरसिंह ने भी इस तरह मेरी चूत नहीं चाटी थी ।
अब उसने मुझे घुमाया और वो फिर वो मेरी गांड भी चाटने लगा , वो मेरी गांड की लकीर से होते हुए मेरी चूत तक अपनी जीभ फिरा रहा था , मैं अपने हाथो से अपने चूचे मसलते हुए बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह मुझे और मत तड़पाओ आह अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो ।
फिर उसने मुझे सीधी किया और उसके बाद वो मेरी एक टांग उठाकर अपने हाथ पर रखते हुए मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा , तभी मैं थोड़ी आगे को हुई जिससे उसके लंड का टोपा मेरी चूत में चला गया और फिर उसने एक जोरदार धक्का लगाकर अपना पूरा का पूरा लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया ।
उसका लंड चूत में जाते ही मुझे एक अलग ही सुकून मिला - एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में पहुँच गयी हो , अब वो आदमी जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चूत मारने लगा ।
वो मेरी चूत मारते हुए कभी मेरे होंठो को चूम रहा था कभी वो मेरी चूचियां दबा रहा था तो कभी वो मेरी गांड दबा रहा था ।
मैं उसका साथ देते हुए बोल रही थी आह चोदो मुझे आह मैं बहुत टाइम से नहीं चुदी हूँ आह उफ्फ्फ आह मममम आह बहुत मज़ा आ रहा है , वो आदमी मेरी चूत में जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोल रहा था ले बहन की लौड़ी ले - साली रांड बहुत आग है ना तेरी चूत में आह साली रंडी , कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मेरी चूत में लंड डाले डाले ही मुझे अपनी गोद में उठा लिया।
मैंने उसके गले में हाथ डालकर उसकी कमर को अपने पैरो से जकड़ रखा था , उसने मुझे मेरे बड़े बड़े चूतड़ों से पकड़ा हुआ था और वो मुझे अपने लंड पर उछाल उछाल कर मेरी चूत मार रहा था ।
अब हम दोनों की सिसकारियाँ तेज होने लगी और हम दोनों एक साथ झड़ गए , अब उसने मुझे अपनी गोद से उतारा और उसके बाद वो मेरे होंठो पर किस करने लगा , वो मेरे होंठो पर किस करते हुए बोल रहा था आह मज़ा आ गया आह ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं मिला ।
अब मैंने अपनी कच्छी से अपनी चूत साफ़ की और फिर मैं अपने कपड़े उठाने लगी तो वो बोला कपड़े क्यों पहन रही है , मैंने कहा अब क्या बाकी रह गया है - तुमने मुझे चोद तो लिया - इससे पहले कोई यहाँ आ जाए हमे यहाँ से चलना चाहिए ।
वो बोला जानेमन अभी तो मुझे तेरी गांड भी मारनी है - मैंने उसे कहा देखो मैं बहुत थक गयी हूँ और मुझे घर जाने में काफी देर भी हो रही है , तुम किसी और दिन मेरी गांड मार लेना मैं तुमसे वादा करती हूँ की मैं तुमसे गांड मरवाने जरूर आउंगी ।
वो बोला मुझे तो अभी तेरी गांड मारनी है - अगर तू नहीं मानेगी तो मुझे तेरे साथ जबरदस्ती करनी पड़ेगी , मैंने उसे कहा ये तुम क्या बोल रहे हो तभी वो बोला मान जा ना इतने नखरे क्यों दिखा रही है , बस थोड़ी देर की ही तो बात है , मैं समझ गयी थी की ये कमीना बिना मेरी गांड मारे मुझे यहाँ से नहीं जाने देगा ।
अब मैं अपने घुटनो पर बैठ गयी और उसका लंड चूसने लगी , अभी कुछ देर पहले ही उसका लंड झड़ा था तो उसका लंड बिलकुल मुरझाया हुआ था , फिर मैं उसका लंड चूस चूस कर फिर से खड़ा करने लगी ।
अब मैं उसका लंड अपने बड़े बड़े मम्मो के बीच रगड़ते हुए चूस रही थी जिससे कुछ ही देर में उसका लंड फिर से तन गया , अब मैं एक दीवार से सट कर अपनी गांड बहार की तरफ निकालके अपनी टाँगे चौड़ी करके खड़ी हो गयी , फिर वो मेरी गांड को चाटने लगा - काफी देर तक वो मेरी गांड को चाटता रहा ।
उसने मेरी गांड चाट चाट कर पूरी गीली कर दी थी - उसने मेरी गांड के छेद को अपने थूक से पूरा भर दिया था , अब उसने अपने लंड को मेरी गांड से सटाया और उसके बाद उसने मेरी गांड में अपना लंड डालकर मेरी गांड मारनी शुरू कर दी ।
मैं बहुत टाइम बाद अपनी गांड मरवा रही थी तो मेरी गांड का छेद बहुत टाइट हो गया था इसलिए मुझे मीठा मीठा दर्द हो रहा था , वो लगातार मेरी गांड में धक्के लगा रहा था और मैं उसका भरपूर साथ दे रही थी , मेरी गांड मारते हुए वो कभी मेरी गांड पर थप्पड़ लगा रहा था तो कभी वो मेरी गांड को जोर जोर से दबा रहा था ।
फिर वो मेरे होंठो को चूसते हुए मेरे मम्मे और मेरी चूत भी सहलाने लगा , वो मेरी गांड में जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चूत को अपनी उंगलियों से चोद रहा था ।
तभी मैं उसका हाथ अपनी चूत से दूऱ करते हुए उसको कहने लगी आह छोड़ो मुझे आह मुझे पेशाब आ रहा है लेकिन उसने मेरी चूत से अपना हाथ नहीं हटाया , वो लगातार अपनी उंगलियों से मेरी चूत चोदता रहा , तभी मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मेरा पेशाब निकलने लगा ।
मेरे पेशाब के साथ साथ मेरी चूत भी झड़ गयी और मैं बहुत तेज चिल्लाते हुए आह उफ्फ्फ आह ममम आह ममममम आह ऊऊफफफ आह की आवाज़े निकालने लगी ।
अब मैं थक कर अपने घुटनो पर आ गयी तो उसने मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड मारनी चालु रखी , फिर कुछ देर तक मेरी गांड मारते मारते उसने अपने लंड का पानी मेरी गांड में ही निकाल दिया और अब वो मुझसे अपना लंड चटवा चटवा कर साफ़ करवाने लगा ,अब उसने झट से अपनी लुंगी और टी शर्ट पहन ली और अब मैं भी अपने कपड़े समेटने लगी ।
तभी उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और फिर वो मुझसे मेरा फ़ोन नंबर माँगने लगा , मैंने उसे अपना नाम तो बता दिया लेकिन मुझे पता था की अगर मैंने इसे अपना फ़ोन नंबर दे दिया तो ये मुझे हररोज़ परेशान करेगा इसलिए मैंने उसे गलत नंबर दे दिया ।
अब मैं भी उससे उसका नाम पता पूछने वाली थी की हमे उस गली के बहार से कुछ लोगो की आवाज़ सुनाई दी , शायद कुछ लोग गली के बहार से बात करते हुए जा रहे थे , अब वो आदमी मुझे वैसी ही नंगी हालत में छोड़ कर वहाँ से निकल गया ।

मैंने उसे कहा रुको कहाँ जा रहे हो मैं भी चल रही हूँ लेकिन वो मेरी एक भी बात सुने बिना ही वहाँ से निकल गया ।
दोस्तों अब मैं एक साइड में छुप गयी और एक और बार मेरा पेशाब निकल गया , पहले चुदने की वजह से मेरा पेशाब निकला था लेकिन अब डर की वजह से मेरा पेशाब निकल रहा था ।
मुझे बहुत डर लग रहा था की कही कोई मुझे यहाँ इस हालत में ना देख ले , फिर मैंने जल्दी से बिना ब्रा कच्छी और पेटीकोट के ही अपना ब्लाउज और अपनी साड़ी पहनी , उसके बाद मैं चुप चाप अपने घर आ गयी ।

दोस्तों आज अपनी वासना के चलते मैंने एक ऐसे आदमी से अपनी जवानी लुटवाई थी जिसका मैं नाम तक नहीं जानती थी ।
दोस्तों क्या सच में किसी ने मुझे उस अनजान मर्द से चुदते हुए नहीं देखा था या फिर देख लिया था ।
कही मैंने थोड़े से मज़े के चक्कर में कोई नयी मुसीबत तो मोल नहीं ले ली थी , ये सब आपको इस कहानी के अगले भाग में पता चलेगा तब तक के लिए बने रहिये हमारे साथ।
CONTINUE...........
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