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Adultery रिश्तों की मर्यादा से परे मोना के चूत की भूख....... 💋💋💋💋💋💋💦💦💦💦💦💋💋💋💋

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Nidhi.agrawal
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Update - 5



Writer - Nidhi Agrawal



कहानी में आगे ..........










आपने मेरी पिछली कहानी में तो देखा ही था की कैसे मैं और सलमा हम दोनों पूरी तरह से शेरसिंह की बीवी बन गयी थी , लेकिन फिर मेरे पति ६ महीनो के लिए दूसरे शहर चले गए तो शेरसिंह भी उनके साथ चला गया , अब मैं और सलमा फिर से प्यासी हो गयी थी , फिर एक दिन अचानक से सलमा की माँ की तबियत ख़राब हो गयी तो वो भी छुट्टी लेकर गाँव चली गयी - अब तो मैं बिलकुल अकेली रह गयी थी ।





मैं दिन रात लंड के लिए तड़पती रहती थी और शेरसिंह से फोन पर बात करके अपना दिल बहलाने की कोशिश करती थी ।



अब सलमा तो थी नहीं तो घर का सारा काम मुझे और मेरी सास को मिलकर ही करना पड़ता था , दोस्तों कहानी आगे बढ़ाने से पहले मैं आप लोगो को अपनी सास के बारे में बता देती हूँ ।





मेरी सास का नाम शकुंतला है और वो भी दिखने में मेरी तरह ही बहुत खूबसूरत है , उनकी शादी काफी कम उम्र में ही हो गयी थी - वो ४५ साल की है लेकिन देखने में वो ३५ साल से ज्यादा की नहीं लगती है ।




मम्मी जी ने इस उम्र में भी अपने शरीर को काफी मेन्टेन करके रखा हुआ है ।




दोस्तों पहले तो घर का सारा राशन पानी और सब्जी तरकारी सलमा ले आती थी लेकिन अब तो सारा सामान लेने मुझे और मम्मी जी को ही जाना पड़ता था ।



ऐसे ही एक दिन शाम के समय मैं और मम्मी जी सब्जी तरकारी लेने बाजार चली गयी - आज बाजार में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी हर तरफ से धक्के लग रहे थे , एक दम सट सट कर चलना पड़ रहा था और ना जाने कितने ही हाथ मेरे और मम्मी जी के चूतड़ों को छू रहे थे ।




अब मम्मी जी मुझे एक सब्जी वाले के पास ले आयी और फिर वो नीचे बैठकर आलू और टमाटर छाँटने लगी , मम्मी जी आलू और टमाटर छाँट छाँट कर टोकरी में डाल रही थी और मैं थोड़ी आगे की तरफ झुक कर उनकी मदद कर रही थी जिसकी वजह से मेरी मोटी गांड बहार की तरफ निकली हुई थी ।




वहाँ पर काफी भीड़ थी जिसकी वजह से सब एक के ऊपर एक चढ़ने को हो रहे थे , तभी मुझे अपनी कमर पर किसी का हाथ महसूस हुआ - पहले तो मुझे लगा शायद किसी ने भीड़ की वजह से गलती से अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया होगा तो मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया ।


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काफी देर तक वो हाथ मेरी कमर से नहीं हटा तो मै तिरछी निगाहो से पीछे मुड़ कर देखने की कोशिश करने लगी , मैंने देखा मेरे पीछे एक अधेड़ उम्र का आदमी खड़ा हुआ था देखने में वो बहुत ही बदसूरत लग रहा था ।


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वो करीब 45 -50 साल के आस पास का होगा लेकिन वो काफी हट्टा कट्टा दिखाई दे रहा था ।


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अब मैं थोड़ी आगे की तरफ हो गयी और तभी वो भीड़ का फायदा उठाकर अपने हाथ को मेरी कमर से सरकाते हुए मेरे चूतड़ों तक ले आया , अब वो मेरी गांड को धीरे धीरे दबाने लगा - मैं बार बार आगे होने की कोशिश कर रही थी लेकिन वहाँ इतनी भीड़ थी कि मैं हिल भी नहीं पा रही थी ।


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तभी उसने मेरी गांड पर एक चिकोटी काट दी जिससे मैं उछल पड़ी ।



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फिर मम्मी जी बोली क्या हुआ मोना तो मैंने उन्हें कहा मम्मी जी लगता है चींटी थी , मम्मी जी बोली मोना तुम ये आलू और टमाटर थैले में डालो तब तक मैं कद्दू देखती हूँ ।


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मैं मन ही मन बोलने लगी मम्मी जी यहाँ एक गैर मर्द आपकी बहु की कद्दू जैसी गांड के पीछे पड़ा हुआ है और आपको कद्दू की पड़ी हुई है ।




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अब मैं आलू और टमाटर थैले में डालने लगी लेकिन वो आदमी तो जैसे हाथ धो कर मेरी गांड के पीछे पड़ गया था ।



वो बार बार मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को बुरी तरह मसल रहा था , अब मैं अपना हाथ पीछे की तरफ लेजाकर उसे अपने से दूऱ करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी लुंगी के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया ।

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अब मैंने झट से अपना हाथ आगे कर लिया - दोस्तों अब तो मैं चाह कर भी उसे कुछ नहीं बोल पा रही थी और वो मेरे चूतड़ों के साथ खिलवाड़ सा कर रहा था ।


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मुझे उसका लंड अपने चूतड़ों की दरार के बीच साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था , लेकिन अब मुझे कुछ कुछ होने लगा था - मेरा शरीर ना चाहते हुए भी उसका साथ देने लगा था ।


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मेरी चूत अब गीली होने लगी थी , तभी वो मेरे कान में धीरे से फुसफुसाते हुए बोला मज़ा आ रहा है ना जानेमन , अगर पूरा मज़ा लेना चाहती है तो मेरे साथ साइड में चल ।




तभी मम्मी जी बोली मोना यहाँ कद्दू अच्छे नहीं है चलो और कही देख लेते है , अब मैं और मम्मी जी दूसरी तरफ आने लगी - तभी मैंने मम्मी जी को कहा मम्मी जी मैं यहाँ से बैंगन वगैरा खरीदती हूँ तब तक आप आगे कद्दू देखिये ।



अब मम्मी जी आगे चली गयी - दोस्तों उस आदमी ने मेरे अंदर की वासना जगा दी थी - मेरी चूत अब लंड लेने के लिए बुरी तरह मचलने लगी थी ।




मैं बहुत टाइम से नही चुदी थी - मैं मन ही मन बोल रही थी क्या सोच रही है मोना तू इतने टाइम से लंड के लिए तड़प रही थी - उस आदमी से चुदवा ले - वो आदमी अच्छे से तेरी चूत की आग ठंडी कर देगा ।



दोस्तों एक तरफ तो मेरा उस आदमी से चुदने का बहुत मन कर रहा था और दूसरी तरफ मुझे डर भी बहुत लग रहा था , मैं सोच रही थी की मैं ऐसे एक अंजान मर्द से कैसे चुदवा सकती हूँ अगर किसी ने मुझे देख लिया तो मेरी और मेरे परिवार की कितनी बदनामी होगी।



लेकिन दोस्तों धीरे धीरे करके मेरी चूत की आग मेरे दिमाग पर हावी होती जा रही थी अब मैंने फैसला कर लिया था की मैं उस आदमी से चुदवा ही लेती हूँ जो होगा वो देखा जाएगा ।




इतने में वो आदमी मेरे पास आ गया और वो मुझसे बोला सोच क्या रही है - मुझे पता है तू बहुत प्यासी है , चल आजा मेरे साथ कसम से तुझे बहुत मज़ा दूंगा , मैं चुप चाप खड़ी थी मेरी तो कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी तभी वो आदमी मेरा हाथ पकड़ते हुए बोला सोच क्या रही है - नहीं चलना क्या ।



तभी मैंने उसे कहा मेरी सास मेरे साथ में है मैं अभी नही आ सकती - वो बोला अपनी सास को बहाने से घर भेज दे - मैं तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ , मैं बोली किसी को कुछ पता तो नहीं चलेगा ना - वो बोली तू चिंता क्यों कर रही है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा ।



अब मैंने उसे कहा ठीक है मैं अपनी सास को घर भेज कर आती हूँ ।




उस आदमी से बात करते वक़्त मुझे उसके मुँह से काफी गन्दी बदबू आ रही थी शायद वो गुटका खा रहा था , फिर मैं अपनी मोटी गांड हिलाते हुए मम्मी जी के पास जाने लगी - दोस्तों मुझे बहुत डर लग रहा था - मैं सोच रही थी की मैं मम्मी जी से झूठ कैसे बोलूं कही उन्हें मेरे ऊपर शक हो गया तो ।




फिर मैं हिम्मत करके मम्मी जी के पास गयी और मैंने उन्हें कहा मम्मी जी और कुछ भी लेना है क्या , मम्मी जी बोली नहीं बहु चलो घर चलते है , फिर मैंने उन्हें कहा मम्मी जी आप चलिए मुझे थोड़ा घर का सामान लेना है , मम्मी जी बोली मोना मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ फिर हम साथ में ही घर चलेंगे , मैंने उन्हें कहा मम्मी जी आप घर जाकर रात के खाने की तयारियाँ करिये - मैं बस थोड़ी देर में आजाऊंगी ।




वैसे भी बाबू जी आपका इंतज़ार कर रहे होंगे , मम्मी जी बोली हाँ मोना तुम ठीक कह रही हो - मैं घर जाकर खाने की तयारियाँ करती हूँ तुम तो तुम्हारे बाबूजी को जानती ही हो , अगर खाना बनने में थोड़ी भी देर हो गयी तो वो आफत मचा देंगे , अब मैंने मम्मी जी को रिक्क्षा में बैठाकर घर भेज दिया और अब मैं उस आदमी को देखने लगी ।




तभी मैंने देखा वो आदमी मुझे अपने पीछे आने का इशारा कर रहा था , अब मैंने इधर उधर देखा और फिर मैं छुपते छुपाते उसके पीछे जाने लगी , दोस्तों मेरी चूत की आग मेरे ऊपर इतनी हावी हो चुकी थी की मुझे कुछ होश ही नहीं था की मैं क्या करने जा रही हूँ ।




अब वो आदमी मुझे कुछ छोटी छोटी गलियों के बीच में से एक बहुत ही तंग और सुनसान गली में ले आया , मैंने देखा वहाँ काफी अँधेरा था - वो गली दोनों तरफ से खुली हुई थी और वहाँ काफी कूड़ा भी पड़ा हुआ था जिसकी वजह से मुझे बहुत बदबू आ रही थी , मुझे डर तो बहुत लग रहा था लेकिन मेरे पूरे बदन में गर्मी इस तरह चढ़ी हुई थी की मैं कही पर भी चुदने के लिए तयार थी ।



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अब उस आदमी ने मुझे एक कोने में लेजाकर वहाँ की दीवार से मुझे सटा दिया , उसके बाद उसने अपने मुँह से अपना गुटका थूका और फिर वो बड़ी ही बेरहमी से मेरे होंठो को चूसने लगा ।


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मेरे होंठो को चूसने के साथ साथ वो मेरा पूरा बदन भी रगड़ रहा था , अब वो मुझसे कहने लगा आह साली आह क्या गरम माल है तू , मैं तो तुझे देखते ही समझ गया था की तू बहुत प्यासी है - साली बहन की लौड़ी मेरा मन तो कर रहा था की वही सबके सामने तेरी साड़ी खोल कर तेरी चूत में अपना लंड फँसा दूँ ।



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दोस्तों मुझे बहुत दिनों के बाद एक मर्द का स्पर्श मिला था तो मैं पूरी तरह गर्म हो गयी थी और मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी , अब उसने धीरे धीरे करके मेरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए और उसके बाद उसने मेरी ब्रा खोले बिना ही मेरे दोनों चूचे मेरी ब्रा से बहार निकाल लिए ।


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अब वो मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी चूत मसलते हुए बारी बारी मेरी दोनों चूचियों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा , वो मेरी चूचियों को चूसने के साथ साथ हल्के हल्के मेरी चूचियों को काट भी रहा था जिससे मैं बहुत बुरी तरह सिसकारियाँ ले रही थी ।


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अब उसने मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट धीरे धीरे ऊपर करना शुरू कर दिया , जैसे ही वो मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट ऊपर लेकर आया तो उसे मेरी गुलाबी रंग की कच्छी और मेरी सेक्सी मांसल जाँघे साफ़ साफ़ दिखाई देने लगी , वो तो जैसे मेरी माँसल जांघो को देख कर पागल ही हो गया था ।



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अब वो अपने सक्त हाथो से मेरी जांघो को सहलाने लगा और फिर उसने पीछे से अपने हाथ मेरी कच्छी में घुसा दिए ।



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वो बहुत जोर जोर से मेरी गांड दबाते हुए बोल रहा था आह साली क्या मस्त मोटे और मुलायम चूतड़ है तेरे लगता है तू बहुत गांड मरवाती है ।




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मैं उसको बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह धीरे करो आह दर्द हो रहा है , अब उसने मेरी कच्छी मेरे घुटनो तक कर दी और फिर वो मेरी चूत पर हाथ लगाते हुए बोला साली तेरी चूत तो बहुत पानी छोड़ रही है ।


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इतना बोलते हुए उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में घुसा दी और वो अपनी उंगलियों से मेरी चूत चोदने लगा , मैं बहुत बुरी तरह सिसकारियाँ लेते हुए बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह उफ्फ्फ आह धीरे करो आह उफ्फ्फ आह ममममम , अब उसने मुझे नीचे बैठाकर अपनी लुंगी खोल दी - उसने अंडरवियर नहीं पहना हुआ था तो एक दम से उसका लंड मेरी आँखों के सामने आ गया ।



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उसके लंड को देखकर तो मैं डर ही गयी - उसका लंड तो शेरसिंह के लंड से भी लम्बा और मोटा था , उसका लंड एक दम काला था और उसके लंड पर काफी बड़ी बड़ी झाँटे थी ।



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फिर वो मेरे होंठो पर अपना काला लंड रगड़ने लगा - मुझे उसके लंड से बहुत बदबू आ रही थी लेकिन फिर भी मैंने उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और मैं मज़े से उसका लंड चूसने लगी , शेरसिंह का लंड चूस चूसकर मैं लंड चूसने की माहिर खिलाडी बन चुकी थी तो उस आदमी को मुझसे अपना लंड चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था ।


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वो मुझे बोल रहा था आह बहन की लौड़ी चूस आह बहुत मज़ा आ रहा हैं आह उफ्फ्फ क्या मस्त लंड चूसती है तू आह उफ्फ्फ आह साली ऐसे ही चूस , अब उसने मेरे हाथ ऊपर करके मेरा ब्लाउज और मेरी ब्रा मेरे जिस्म से अलग कर दी ।


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मैं अब ऊपर से पूरी नंगी हो गयी थी और मेरी चूचियाँ तन कर पूरी तरह खड़ी हो गयी थी , मैं तो उस आदमी का लंड चूसने में इतनी मस्त हो गयी थी की मुझे तो कुछ होश ही नहीं था मेरे साथ क्या हो रहा है ।


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काफी देर तक वो आदमी मुझे अपना लंड चुसवाता रहा , फिर उसने मुझे खड़ी किया और वो मेरी साड़ी उतारने लगा , मैंने उसको कहा मेरी साड़ी क्यों उतार रहे हो ऐसे ही कर लो ना , वो बोला जानेमन तुझे नंगी करे बिना तेरी चुदाई करने में मज़ा नहीं आएगा ।



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मैंने उसे कहा नही मुझे शर्म आती है - वो बोला अब मुझसे किस बात की शर्म - तू मेरे सामने आधी से ज्यादा नंगी तो हो ही चुकी है फिर पूरी नंगी होने में क्यों शर्मा रही है ।



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दोस्तों मेरी चूत में लंड लेने की इतनी आग लगी हुई थी की मैं कुछ भी करने के लिए तयार थी , फिर मैंने उसे कहा ठीक है जो करना है जल्दी कर लो , अब उसने पहले मेरी साड़ी उतारी और उसके बाद उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोलकर मेरा पेटीकोट भी मेरे जिस्म से अलग कर दिया ।





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फिर मेरी कच्छी जो मेरे घुटनो तक थी - मैंने उसे खुद ही उतार दिया।


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अब रात हो गयी थी और आसमान में तारे टिमटिमाने लगे थे और इस चांदनी रात में मैं पूरी नंगी खुले आसमान के नीचे एक आदमी के साथ पूरी नंगी खड़ी थी ।




मेरे पैरो में मेरी हाई हील की सैंडिल के आलावा मेरे बदन पर कुछ भी नहीं था - मुझे बहुत शर्म आ रही थी और मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी , तभी वो आदमी भी अपनी शर्ट उतार कर पूरा नंगा हो गया और उसके बाद वो अपने घुटनो पर बैठकर मेरी चूत चाटने लगा ।


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दोस्तों वो आदमी बहुत ही गंदे तरीके से मेरी चूत चाट रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था - कभी शेरसिंह ने भी इस तरह मेरी चूत नहीं चाटी थी ।



अब उसने मुझे घुमाया और वो फिर वो मेरी गांड भी चाटने लगा , वो मेरी गांड की लकीर से होते हुए मेरी चूत तक अपनी जीभ फिरा रहा था , मैं अपने हाथो से अपने चूचे मसलते हुए बोल रही थी आह उफ्फ्फ आह मुझे और मत तड़पाओ आह अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो ।





फिर उसने मुझे सीधी किया और उसके बाद वो मेरी एक टांग उठाकर अपने हाथ पर रखते हुए मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा , तभी मैं थोड़ी आगे को हुई जिससे उसके लंड का टोपा मेरी चूत में चला गया और फिर उसने एक जोरदार धक्का लगाकर अपना पूरा का पूरा लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया ।




उसका लंड चूत में जाते ही मुझे एक अलग ही सुकून मिला - एक पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में पहुँच गयी हो , अब वो आदमी जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चूत मारने लगा ।





वो मेरी चूत मारते हुए कभी मेरे होंठो को चूम रहा था कभी वो मेरी चूचियां दबा रहा था तो कभी वो मेरी गांड दबा रहा था ।





मैं उसका साथ देते हुए बोल रही थी आह चोदो मुझे आह मैं बहुत टाइम से नहीं चुदी हूँ आह उफ्फ्फ आह मममम आह बहुत मज़ा आ रहा है , वो आदमी मेरी चूत में जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोल रहा था ले बहन की लौड़ी ले - साली रांड बहुत आग है ना तेरी चूत में आह साली रंडी , कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मेरी चूत में लंड डाले डाले ही मुझे अपनी गोद में उठा लिया।




मैंने उसके गले में हाथ डालकर उसकी कमर को अपने पैरो से जकड़ रखा था , उसने मुझे मेरे बड़े बड़े चूतड़ों से पकड़ा हुआ था और वो मुझे अपने लंड पर उछाल उछाल कर मेरी चूत मार रहा था ।





अब हम दोनों की सिसकारियाँ तेज होने लगी और हम दोनों एक साथ झड़ गए , अब उसने मुझे अपनी गोद से उतारा और उसके बाद वो मेरे होंठो पर किस करने लगा , वो मेरे होंठो पर किस करते हुए बोल रहा था आह मज़ा आ गया आह ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं मिला ।




अब मैंने अपनी कच्छी से अपनी चूत साफ़ की और फिर मैं अपने कपड़े उठाने लगी तो वो बोला कपड़े क्यों पहन रही है , मैंने कहा अब क्या बाकी रह गया है - तुमने मुझे चोद तो लिया - इससे पहले कोई यहाँ आ जाए हमे यहाँ से चलना चाहिए ।





वो बोला जानेमन अभी तो मुझे तेरी गांड भी मारनी है - मैंने उसे कहा देखो मैं बहुत थक गयी हूँ और मुझे घर जाने में काफी देर भी हो रही है , तुम किसी और दिन मेरी गांड मार लेना मैं तुमसे वादा करती हूँ की मैं तुमसे गांड मरवाने जरूर आउंगी ।




वो बोला मुझे तो अभी तेरी गांड मारनी है - अगर तू नहीं मानेगी तो मुझे तेरे साथ जबरदस्ती करनी पड़ेगी , मैंने उसे कहा ये तुम क्या बोल रहे हो तभी वो बोला मान जा ना इतने नखरे क्यों दिखा रही है , बस थोड़ी देर की ही तो बात है , मैं समझ गयी थी की ये कमीना बिना मेरी गांड मारे मुझे यहाँ से नहीं जाने देगा ।




अब मैं अपने घुटनो पर बैठ गयी और उसका लंड चूसने लगी , अभी कुछ देर पहले ही उसका लंड झड़ा था तो उसका लंड बिलकुल मुरझाया हुआ था , फिर मैं उसका लंड चूस चूस कर फिर से खड़ा करने लगी ।




अब मैं उसका लंड अपने बड़े बड़े मम्मो के बीच रगड़ते हुए चूस रही थी जिससे कुछ ही देर में उसका लंड फिर से तन गया , अब मैं एक दीवार से सट कर अपनी गांड बहार की तरफ निकालके अपनी टाँगे चौड़ी करके खड़ी हो गयी , फिर वो मेरी गांड को चाटने लगा - काफी देर तक वो मेरी गांड को चाटता रहा ।




उसने मेरी गांड चाट चाट कर पूरी गीली कर दी थी - उसने मेरी गांड के छेद को अपने थूक से पूरा भर दिया था , अब उसने अपने लंड को मेरी गांड से सटाया और उसके बाद उसने मेरी गांड में अपना लंड डालकर मेरी गांड मारनी शुरू कर दी ।





मैं बहुत टाइम बाद अपनी गांड मरवा रही थी तो मेरी गांड का छेद बहुत टाइट हो गया था इसलिए मुझे मीठा मीठा दर्द हो रहा था , वो लगातार मेरी गांड में धक्के लगा रहा था और मैं उसका भरपूर साथ दे रही थी , मेरी गांड मारते हुए वो कभी मेरी गांड पर थप्पड़ लगा रहा था तो कभी वो मेरी गांड को जोर जोर से दबा रहा था ।




फिर वो मेरे होंठो को चूसते हुए मेरे मम्मे और मेरी चूत भी सहलाने लगा , वो मेरी गांड में जोरदार धक्के लगाते हुए मेरी चूत को अपनी उंगलियों से चोद रहा था ।




तभी मैं उसका हाथ अपनी चूत से दूऱ करते हुए उसको कहने लगी आह छोड़ो मुझे आह मुझे पेशाब आ रहा है लेकिन उसने मेरी चूत से अपना हाथ नहीं हटाया , वो लगातार अपनी उंगलियों से मेरी चूत चोदता रहा , तभी मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मेरा पेशाब निकलने लगा ।




मेरे पेशाब के साथ साथ मेरी चूत भी झड़ गयी और मैं बहुत तेज चिल्लाते हुए आह उफ्फ्फ आह ममम आह ममममम आह ऊऊफफफ आह की आवाज़े निकालने लगी ।



अब मैं थक कर अपने घुटनो पर आ गयी तो उसने मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड मारनी चालु रखी , फिर कुछ देर तक मेरी गांड मारते मारते उसने अपने लंड का पानी मेरी गांड में ही निकाल दिया और अब वो मुझसे अपना लंड चटवा चटवा कर साफ़ करवाने लगा ,अब उसने झट से अपनी लुंगी और टी शर्ट पहन ली और अब मैं भी अपने कपड़े समेटने लगी ।




तभी उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और फिर वो मुझसे मेरा फ़ोन नंबर माँगने लगा , मैंने उसे अपना नाम तो बता दिया लेकिन मुझे पता था की अगर मैंने इसे अपना फ़ोन नंबर दे दिया तो ये मुझे हररोज़ परेशान करेगा इसलिए मैंने उसे गलत नंबर दे दिया ।





अब मैं भी उससे उसका नाम पता पूछने वाली थी की हमे उस गली के बहार से कुछ लोगो की आवाज़ सुनाई दी , शायद कुछ लोग गली के बहार से बात करते हुए जा रहे थे , अब वो आदमी मुझे वैसी ही नंगी हालत में छोड़ कर वहाँ से निकल गया ।


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मैंने उसे कहा रुको कहाँ जा रहे हो मैं भी चल रही हूँ लेकिन वो मेरी एक भी बात सुने बिना ही वहाँ से निकल गया ।



दोस्तों अब मैं एक साइड में छुप गयी और एक और बार मेरा पेशाब निकल गया , पहले चुदने की वजह से मेरा पेशाब निकला था लेकिन अब डर की वजह से मेरा पेशाब निकल रहा था ।



मुझे बहुत डर लग रहा था की कही कोई मुझे यहाँ इस हालत में ना देख ले , फिर मैंने जल्दी से बिना ब्रा कच्छी और पेटीकोट के ही अपना ब्लाउज और अपनी साड़ी पहनी , उसके बाद मैं चुप चाप अपने घर आ गयी ।



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दोस्तों आज अपनी वासना के चलते मैंने एक ऐसे आदमी से अपनी जवानी लुटवाई थी जिसका मैं नाम तक नहीं जानती थी ।




दोस्तों क्या सच में किसी ने मुझे उस अनजान मर्द से चुदते हुए नहीं देखा था या फिर देख लिया था ।




कही मैंने थोड़े से मज़े के चक्कर में कोई नयी मुसीबत तो मोल नहीं ले ली थी , ये सब आपको इस कहानी के अगले भाग में पता चलेगा तब तक के लिए बने रहिये हमारे साथ।





CONTINUE...........



NEXT UPDATE SOON.........
 

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Update - 6



Writer - Nidhi Agrawal



कहानी में आगे ..........











आपने मेरी पिछली कहानी में तो देखा ही था की कैसे जब मैं मम्मी जी के साथ बाजार में सब्जी लेने गयी थी तो वहाँ एक अधेड़ उम्र के आदमी ने मुझे छेड़ना शुरू कर दिया था , फिर मैंने मम्मी जी को घर भेज दिया और उसके बाद मैं उस आदमी के साथ एक सुनसान सी गली में चली गयी , वहाँ उस आदमी ने मुझे पूरी नंगी करके मेरी खूब अच्छे से चुदाई की , पहले उसने मेरी चूत चोदी और फिर उसने मेरी गांड की भी जमकर चुदाई की , उसने इतने जबरदस्त तरीके से मेरी गांड मारी की उससे गांड मरवाते वक़त मेरा पेशाब भी निकल गया था , वो आदमी मुझे चोद कर चला गया - फिर मैं भी बिना ब्रा कच्छी और पेटीकोट के ही अपनी साड़ी और अपना ब्लाउज पहन कर अपनी गांड हिलाते हुए अपने घर आ गयी ।






जैसे ही मैं घर आयी तो मम्मी जी बोली अरे बहु तुमने तो आने में बहुत देर लगा दी - फिर वो मेरे खाली हाथ देखते हुए बोली क्या हुआ सामान नहीं मिला क्या ।




मैंने कहा नहीं मम्मी जी वो कुछ पसंद ही नहीं आया , मम्मी जी बोली कोई बात नहीं फिर किसी दिन ले आना , अब तुम खाना खा लो - मैंने खाना बना दिया है , मैंने उनसे पूछा मम्मी जी बाबू जी ने खाना खा लिया क्या , वो बोली हाँ उन्होंने तो कब का खाना खा लिया , अब वो अपने कमरे में आराम कर रहे है ।





फिर मैंने भी खाना खाया और फिर मैं अपने कमरे में चली गयी , दोस्तों आज बहुत दिनों बाद मुझे लंड मिला था तो मेरे चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी थी , मुझे ऐसे एक सुनसान गली में एक अनजान आदमी से चुदने में डर तो बहुत लगा था लेकिन मुझे मज़ा भी बहुत आया था ।




अब मैं बाथरूम में जाकर नहायी और उसके बाद मैं नंगी ही उस आदमी के बारे में सोचते हुए बिस्तर पर लेट गयी ।




दोस्तों मुझे बहुत शर्म आ रही थी - मैं मन ही मन खुद को बोल रही थी मोना कितनी कमीनी है तू - तुझे कोई शर्म है या नहीं , कमीनी तू अपनी चूत की प्यास मिटाने के चक्कर में एक राह चलते अनजान आदमी से चुद गयी ।



साली अगर वहाँ कोई तुझे देख लेता तो , बस यही सब सोचते हुए मुझे नींद आ गयी ।




दोस्तों अब इस बात को करीब एक हफ्ता बीत गया था लेकिन जब भी मैं उस रात के बारे में सोचती थी तो मेरी कच्छी गीली हो जाती थी।




फिर एक बार की बात है जब दोपहर के वक़्त मैं अपनी एक सहेली के घर से अपने घर आ रही थी - उस समय रोड काफी सुनसान थे , तभी एक अनजान आदमी मेरे पास आया और वो बीच सड़क पर ही मेरी गांड दबाते हुए मुझसे कहने लगा कैसी है मोना ।



अब मैं डर गयी और उसके बाद मैंने उसे अपने से दूऱ करते हुए कहा छोड़ो मुझे - कौन हो तुम और तुम मेरा नाम कैसे जानते हो , मैंने देखा वो एक लम्बा चौड़ा आदमी था - लेकिन उसकी उम्र काफी ज्यादा थी - वो देखने में करीब ५० -५५ साल के आस पास का लग रहा था ।



वो बोला मोना तू घबरा क्यों रही है - तुझे मुझसे डरने की कोई जरुरत नहीं है , मेरा नाम बब्बन है और यही पास में ही मेरी पंचर की दुकान है , इतना बोलते हुए वो मेरा हाथ पकड़ने लगा तो मैंने उसे कहा छोड़ो मेरा हाथ नहीं तो मैं शोर मचा दूंगी ।



अब उसने अपना फ़ोन निकाला और उसके बाद वो अपने फ़ोन में मुझे कोई वीडियो दिखाने लगा ।



उस वीडियो को देखते ही तो मेरी गांड फट गयी और मुझे ऐसा लगा जैसे अभी मेरा पेशाब निकल जाएगा ।



दोस्तों ये उसी दिन की वीडियो थी जब मैं उस सुनसान गली में पूरी नंगी होकर उस अनजान आदमी से चुद रही थी ।




मतलब उस दिन जब मैं चुद रही थी तो ये आदमी वही मौजूद था , फिर भी मैंने उसको कहा आपके पास ये वीडियो कहाँ से आयी ये मैं नहीं हूँ - ये मेरे जैसी दिखने वाली कोई और औरत है ।





वो बोला अच्छा तो ये तू नहीं है - फिर तो मैं ये वीडियो सबको दिखा देता हूँ ।



अब मैं डर गयी और उसको कहने लगी प्लीज ऐसा मत करना - बोलो तुम्हे क्या चाहिए - तुम्हे जितने पैसे चाहिए मैं उतने पैसे दे दूंगी लेकिन प्लीज ये वीडियो डिलीट कर दो ।



वो आदमी बोला साली जब उस दिन तू चुद रही थी तब मैं वही पर था - मैंने सब देखा था तू कैसे उस आदमी के लंड पर उछल उछल कर उसे खूब मज़े दे रही थी - साली बहुत आग है ना तेरी चूत में ।



अब मैंने उसे कहा अगर आप बोलोगे तो मैं आपको भी खूब मज़े दूंगी लेकिन प्लीज मेरी ये वीडियो डिलीट कर दो ।



अगर किसी ने मेरी ये वीडियो देख ली तो मैं किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहूंगी , अब वो मुझे अपनी बाहो में लेकर मेरे होंठो को चूमते हुए बोला मोना तेरे मज़े तो मैं ले ही लूंगा लेकिन मैं तेरी सास की चुदाई करना चाहता हूँ ।




मैं तेरी सास से बहुत प्यार करता हूँ - मैं काफी सालो से उसे चाहता हूँ - अब तू अपनी सास को पटवाने में मेरी मदद करेगी ।



मैंने उसे कहा बब्बन जी ये आप क्या बोल रहे है - मम्मी जी बहुत शरिफ और संस्कारी औरत है - वो आपसे चुदने के लिए कभी भी राज़ी नहीं होंगी ।




आप मुझे चोद लीजिये - आप मुझे जब कहोगे जहाँ कहोगे मैं आपसे चुदवाने के लिए आ जाऊँगी ।




तभी वो बोला तेरी तो चुदाई मैं करूँगा ही लेकिन तेरी सास ने मुझे अपने जिस्म का दीवाना बना रखा है - कसम से बहुत सालो से उसे पटाने की कोशिश में लगा हुआ हूँ - अब मैं तेरे ज़रिये तेरी सास की चुदाई करूँगा ।



इतना बोलते हुए वो मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी चूत मसलने लगा , मैंने उसे कहाँ प्लीज यहाँ ये सब मत करो कोई देख लेगा तो मेरी बहुत बदनामी होगी ।



फिर बब्बन बोला बता मोना अपनी सास को चुदवाने में मेरी मदद करेगी ना - मैंने उसे कहा देखो ज़िद मत करो वो नहीं मानेगी ।



फिर बब्बन बोला वो नहीं मानेगी तो मैं तेरी ये वीडियो सबको दिखा देता हूँ , फिर दुनिया वाले एक रंडी बहु की सास को खुद मा खुद रंडी बना देंगे ।




मैंने कहा नहीं ऐसा मत करना मैं मम्मी जी को आपसे चुदवाने की पूरी कोशिश करुँगी , फिर बब्बन बोला ये हुई ना बात चल अब मेरी दुकान पर चल मुझे अभी तेरी चूत मारनी है ।




मैंने कहा प्लीज अभी नहीं - अभी मम्मी जी और बाबूजी घर पर मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे , मैं शाम को आ जाऊँगी , बब्बन बोला देख चूत तो मैं तेरी शाम को मार लूंगा लेकिन मेरा लंड पूरा तना खड़ा है एक बार इसे चूस कर इसका पानी तो निकाल दे ।



मैंने सोचा ये मुझे अपना लंड चुसवाये बिना नहीं मानेगा तो जल्दी से इसका लंड चूस कर इसके लंड का पानी निकाल ही देती हूँ ,अब मैंने बब्बन को हाँ कह दिया और फिर वो मुझे एक बड़े से पेड़ के पीछे ले गया , वहाँ ले जाकर उसने अपना पजामा खोलकर अपना लंड बहार निकाला तो मैंने देखा उसका लंड भी शेरसिंह के लंड की तरह काफी मोटा और लम्बा था ।



अब मैं सोचने लगी सभी मर्दो के लंड कितने मोटे और लम्बे है बस एक मेरे पति का लंड ही छोटा और पतला सा है ।



फिर बब्बन बोला मोना सोच क्या रही है चल जल्दी से मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर , अब मैंने उसका लंड अपने होंठो पर रगड़ते हुए अपने मुँह में डाल लिया और फिर मैं उसके लंड को अपने मुँह में भरकर चूसने लगी ।



मैं उसके लंड को अपने मुँह में पूरा अंदर बहार कर रही थी और बीच बीच में मैं उसके लंड के टोपे पर अपनी जीभ भी फिरा रही थी जिससे उसे बहुत मज़ा मिल रहा था ।




बब्बन मुझे अपना लंड चुसवाते हुए बोल रहा था आह साली चूस आह उफ्फ्फ आह साली क्या मस्त लंड चूसती है तू आह उफ्फ्फ्फ़ आह बहुत मज़ा आ रहा है , ऐसे ही करीब २० मिनट तक मैं उसका लंड चूसती रही - फिर उसने अपने लंड का पानी मेरे मुँह में ही गिरा दिया जिसे मैं पूरा पी गयी ।




अब मैं खड़ी हुई और फिर वो अपने पजामे का नाड़ा बंद करते हुए बोला सुन मोना ये ले मेरी दुकान का कार्ड अगर तू शाम को ५ बजे तक मेरी दुकान पर नहीं आयी तो मैं सीधा तेरे घर पहुँच जाऊँगा ।



मैंने कहा नहीं नहीं बब्बन जी ऐसा मत करना मैं ५ बजे से पहले ही आपकी दुकान आ जाऊँगी , अब मैं अपने घर आने लगी और घर आते वक़त मैं बस यही सोच रही थी मोना ये तू कहाँ फँस गयी - क्या अब तुझे एक पंचर बनाने वाले से भी चुदना पड़ेगा ।



मैं अपने आप को गाली देते हुए बोल रही थी बहन की लौड़ी मोना कहाँ कहाँ अपना मुँह काला करवाएगी तू , फिर मैं घर आयी तो मैंने देखा उसी वक़्त मम्मी जी नहा कर बहार निकली थी ।



उस टाइम मम्मी जी ने ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था - मैंने देखा मम्मी जी का पेटीकोट उनके बड़े बड़े चूतड़ों की दरार में बुरी तरह फँसा हुआ था , मतलब मम्मी जी ने कच्छी नहीं पहनी हुई थी - मम्मी जी के दोनों चूतड़ बहुत तेज तेज ऊपर नीचे हिल रहे थे ।




मम्मी जी का शरीर पूरा गीला था कसम से वो स्वर्ग से उतरी हुयी अप्सरा लग रही थी , मुझे देखते ही मम्मी जी बोली अरे मोना आ गयी तुम - मैंने कहा हाँ मम्मी जी , अब मैं ऊपर अपने कमरे में आ गयी लेकिन बार बार मैं मम्मी जी के बारे में ही सोच रही थी ।





मैं सोच रही थी की मम्मी जी अभी भी कितनी जवान है और कितना सैक्सी जिस्म है उनका , अब मेरी आँख लग गयी और फिर मेरी आँख खुली और मैंने घडी में टाइम देखा तो साढ़े चार बज रहे थे , तभी मुझे याद आया की मुझे उस पंचर वाले के पास भी तो जाना है , अगर मैं टाइम पर उसके पास नहीं पहुंची तो कही वो यहाँ ना आ जाए , तभी मैं नहा कर तयार होने लगी - दोस्तों आज फिर एक गैर मर्द से मेरी चुदाई होने वाली थी , मैंने नहा कर एक सैक्सी सी ट्रांसपरेंट साड़ी और एक स्लीवलेस ब्लाउज पहन लिया ।



अब मैंने थोड़ा मेकअप वगेरा किया और उसके बाद मैं नीचे आ गयी ।



तभी मम्मी जी मुझे देखते हुए बोली मोना बहु तुम कही जा रही हो क्या , तभी मैंने कहा हाँ मम्मी जी वो मैं अपनी कुछ सहेलियों के साथ शॉपिंग पर जा रही हूँ - दो तीन घंटे तक आ जाउंगी ।



मम्मी जी बोली ठीक है बहु लेकिन आराम से जाना और अपना ख्याल रखना , अब मैं बब्बन के बताये हुए पते पर जाने लगी - मैं किसी तरह पूछते पाछते बब्बन की दुकान पर पहुंच गयी , मैंने देखा वहाँ बब्बन एक टायर में पंचर लगा रहा था , मुझे देखते ही उसके मुँह में पानी आ गया और फिर उसने मुझे दुकान के पीछे जाने का इशारा किया , अब मैं उसकी दुकान के पीछे चली गयी , मैंने देखा उसकी दुकान के पीछे एक छोटा सा कमरा था शायद वो वही रहता था , वहाँ पर एक चार पाई बिछी हुई थी - मैं उस चार पाई पर अपनी मोटी गांड टिका कर बैठ गयी ।




फिर थोड़ी देर बाद बब्बन भी वहाँ आ गया , मैंने उसे देखते ही नमस्ते कहा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी बाहो में ले लिया और फिर वो मुझसे बोला मोना मैं तेरा ही इंतज़ार कर रहा था , साली आज तो तू बहुत सैक्सी लग रही है और तेरी सास शकुंतला कैसी है ।



मैंने कहा बब्बन जी बिलकुल ठीक है , अब बब्बन मेरे होंठो को चूसने लगा , उसने मेरे होंठो को चूसते हुए मेरी साड़ी और मेरा पेटीकोट मेरे चूतड़ों तक उठा दिया , फिर वो मेरी कच्छी के ऊपर से ही मेरी मोटी गांड मसलते हुए कहने लगा आह मोना आह साली क्या मस्त गांड है तेरी ।



अब वो मुझे अपने ऊपर लेकर चार पाई पर लेट गया और उसके बाद वो मेरे मुँह और मेरी गर्दन को चूमते हुए मेरे पुरे जिस्म को सहलाने लगा , मैं भी पूरी तरह गर्म हो गयी थी तो मैं भी उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी ।



अब उसने मुझे खड़ी किया और फिर वो मेरे कपड़े उतारने लगा , उसने मेरा एक एक कपड़ा उतार कर मुझे पूरी नंगी कर दिया और उसके बाद वो खुद भी पूरा नंगा हो गया ।




अब उसने मुझे चार पाई पर लिटाया और उसके बाद वो मेरी टाँगे चौड़ी करके मेरी चूत चाटने लगा , बब्बन मेरी चूत चाट रहा था और मैं अपने हाथो से अपने मम्मे मसलते हुए बोल रही थी आह बब्बन जी आह चाटो आह मेरी चूत चाटो आह बहुत मज़ा आ रहा है आह उफ्फ्फ आह उफ्फ्फ आह ममम आह ।




अच्छे से मेरी चूत चाटने के बाद बब्बन ने मेरी दोनों टाँगे उठाकर अपने कंधो पर रखी और उसके बाद उसने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा का पूरा लंड एक ही बार में मेरी चूत में घुसा दिया ।





फिर बब्बन बोहत तेज तेज धक्के लगाते हुए मेरी चूत मारने लगा , वो मेरी चूत मारते हुए बार बार मम्मी जी का नाम ले रहा था - वो बोल रहा था आह शकुंतला आह उफ्फ्फ आह मेरी बीवी आह उफ्फ्फ आह बहुत मज़ा आ रहा है उफ्फ्फ आह ।




करीब २० मिनट तक मेरी चूत मारने के बाद उसने मेरी चूत से अपना लंड बाहर निकाला और फिर वो मुझे अपना लंड चुसवाने लगा ।




मैं अपने घुटनो पर बैठकर मस्ती में उसका लंड चूस रही थी और वो मुझे गालियां देते हुए बोल रहा था चूस साली रंडी अच्छे से मेरा लंड चूस तेरी सास को भी मैं ऐसे ही अपना लंड चुसवाऊँगा - चूस बहन की लौड़ी चूस , मुझे अच्छे से अपना लंड चुसवाने के बाद बब्बन ने मुझे कुतिया बनाकर अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया और फिर वो मेरी गांड मारने लगा ।



ऐसे ही बब्बन कभी मेरी गांड मार रहा था - कभी वो मेरी चूत मार रहा था तो कभी वो मुझे अपना लंड चुसवा रहा था , ऐसे ही करीब दो घण्टे तक उसने अच्छे से और खूब जमकर मेरी चुदाई की , इन दो घंटो में बब्बन ने मुझे ५ बार झड़वा दिया था और वो खुद सिर्फ दो बार ही झड़ा था ।




सच में बब्बन ने मुझे चोद चोद कर मेरे शरीर का पुर्ज़ा पुर्ज़ा ढीला कर दिया था - मैं और वो पूरा पसीना पसीना हो गए थे ।



मैं उसके साथ चारपाई पर पूरी नंगी लेटी हुई थी और वो मेरे होंठो को चूमते हुए बार बार मेरे चूचों को मसल रहा था , फिर वो मुझसे बोला मोना बहुत मज़ा आया - कसम से बहुत मज़ा दिया तूने , तेरा पति तो चूतिया है जो तेरी जैसी इतनी माल बीवी को अकेली छोड़ कर कई कई महीने तक दूसरे शहरों में घूमता रहता है ।




मैंने कहा मेरे पति को मेरी कोई परवाह नहीं है इसीलिए तो मुझे अपनी चूत की आग शांत करने के लिए गैर मर्दो का सहारा लेना पड़ता है ।



फिर मैंने उससे पूछा बब्बन जी आप मेरे परिवार के बारे में सब जानते है क्या - बब्बन बोला हाँ मोना मैं सब जानता हूँ , उसके बाद बब्बन बोला मोना तू ये सब छोड़ तू तो बस इतना बता तू अपनी सास की चूत कब दिलवा रही है ।




मैंने कहा बब्बन जी मैं कैसे दिलवाऊंगी - मुझे इन सब में नहीं पड़ना - वैसे भी मुझे घर जाने में देरी हो रही है , इतना बोलते हुए मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी , तभी बब्बन मेरा हाथ पकड़ कर मुझे फिर से अपने साथ लिटाते हुए बोला देख मोना जब तक तू मुझे अपनी सास की चूत दिलवाने का वादा नहीं करेगी तब तक मैं तुझे यहाँ से नहीं जाने दूंगा , मैंने उसे कहा आप ज़िद क्यों कर रहे हो - मैं ये सब नहीं कर सकती , फिर बब्बन बोला देख मोना मुझे वो सब नहीं पता , अगर तू मुझे अपनी सास की चूत नहीं दिलवाएगी तो मैं तेरी सास को तेरी वो वीडियो दिखा कर उसे ब्लैकमेल करूँगा और फिर मैं जमकर उसकी चुदाई करूँगा ।




बब्बन की ये बात सुनकर मैं डर गयी और मैंने उसको कहा नहीं नहीं ऐसा मत करना - मैं कोशिश करुँगी , अब बब्बन खुश होते हुए बोला ये हुई ना बात और इतना बोलते हुए वो मेरे होंठो को किस करने लगा , तभी मैंने उसको कहा देखो बब्बन जी मैं पूरी पूरी कोशिश करुँगी लेकिन इन सब में मेरा नाम नहीं आना चाहिए ।




बब्बन बोला तू चिंता क्यों कर रही है मेरी जान तेरा नाम कही नहीं आएगा , अब मैं खड़ी हुई और अपने कपड़े पहनने लगी , अपने कपड़े पहन कर मैं अपने घर आ गयी लेकिन पुरे रास्ते मैं बस यही सोच रही थी की मेरी चुदाई तक तो ठीक था लेकिन मैं उस कमीने को मम्मी जी की चूत कैसे दिलवाऊंगी ।



कही कुछ गड़बड़ हो गयी तो - मैं उसे मना भी नहीं कर सकती थी क्युकी मेरी चुदाई की वीडियो उसके पास थी , इसी तरह के ख्याल बार बार मेरे मन में आये जा रहे थे , मैं घर आयी तो मम्मी जी मुझसे बोली बहु कैसी रही तुम्हारी शॉपिंग , मैंने कहा मम्मी जी मुझे तो कुछ पसंद ही नहीं आया - सब चीज़ो के रेट कितने बढ़े हुए है , मम्मी जी बोली हाँ मोना महंगाई तो काफी बढ़ी हुई है लेकिन तुम्हे जो कुछ भी खरीदना हो तुम खरीद लेना - तुम पैसो की बिलकुल भी चिंता मत करना , इतना बोलते हुए मम्मी जी ने तिजोरी की चाबी मेरे हाथ में दे दी , अब मैंने उन्हें कहा मम्मी जी इसकी कोई जरुरत नहीं है - इन चाबियों पर तो आपका ही हक़ है ।




मुझे जब भी पैसो की ज़रूरत होगी मैं आपसे माँग लुंगी , फिर मम्मी जी बोली मोना तुम मुझसे पैसे माँगने में बिलकुल भी मत शर्माना - तुम मेरी बहु नहीं बल्कि मेरी बेटी जैसी हो , अब बाबूजी मम्मी जी को आवाज़ देते हुए बुलाने लगे तो मम्मी जी बोली मोना तुम्हारे बाबूजी मुझे बुला रहे है - मैंने खाना बना दिया है तुम खा लेना , इतना बोलकर मम्मी जी अपने कमरे में चली गयी , अब मैं खाना खाने लगी लेकिन खाना खाते वक़्त मैं बस यही सोच रही थी की मम्मी जी कितनी अच्छी है - वो मेरा कितना ख्याल रखती है - वो मुझे अपनी बहु नहीं बल्कि अपनी बेटी समझती है ।




मैं उन्हें एक गैर मर्द से कैसे चुदवा सकती हूँ , खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गयी और सोने की कोशिश करने लगी लेकिन बार बार मम्मी जी का मासूम चहरा मेरी आँखों के सामने आ रहा था ।



दोस्तों अब तो मैं अकसर ही बब्बन से उसकी दुकान पर चुदवाने जाने लगी थी - मैं कोई ना कोई झूठा बहाना बनाकर बब्बन की दुकान पर जाती थी और उससे खूब चुदवाती थी - बब्बन मम्मी जी का नाम लेते हुए मुझे पूरे जोश में चोदता था , लेकिन वो बार बार मुझे मम्मी जी को चुदवाने के लिए बोलता रहता था तो मैंने उसकी दुकान पर जाना बंद कर दिया - अब मैं उसका फ़ोन भी नहीं उठाती थी ।



फिर एक दिन की बात है जब मैं बाज़ार से कुछ सामान लेकर आ रही थी तो उसने मुझे मेरे घर के पास ही एक साइड में दबोच लिया , अब वो गुस्से में बोला साली बहन की लौड़ी रांड बहुत भाव बढ़ गए है तेरे - साली एक तो तू इतने दिनों से मुझसे चुदने नहीं आयी और ऊपर से मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रही है , मैंने उसे कहा आह ये क्या कर रहे हो आह छोड़ो मुझे - आह कोई देख लेगा , तभी वो मेरी साड़ी खींचते हुए बोला साली अभी तेरे सारे कपड़े उतार कर तुझे यही पूरी नंगी करता हूँ - जब तू पूरी नंगी अपने घर जायेगी तबं तुझे अपनी औकात का पता चलेगा ।





अब मैंने उसे रोकते हुए कहा प्लीज बब्बन जी ऐसा मत करिये - वो मैं घर के कामो में थोड़ी बिज़ी थी इसलिए आपका फ़ोन नहीं उठा पायी - प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये , मैं आज शाम को आपसे चुदवाने आ जाऊँगी लेकिन अभी मुझे जाने दीजिये - किसी ने मुझे यहाँ आपके साथ ऐसे देख लिया तो मुसीबत हो जायेगी ।



फिर बब्बन बोला साली तुझे तो मैं बहुत चोद चूका - तू ये बता तूने शकुंतला को मुझसे चुदवाने का कुछ इंतज़ाम किया या नहीं , मैंने कहा मैं बस कर ही रही हूँ लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा की मैं मम्मी जी को आपसे कैसे चुदवाऊं ।




अब बब्बन गुस्से में बोला साली रांड बहुत नखरे हो गए तेरे - मैं तुझे एक हफ्ता दे रहा हूँ अगर तूने शकुंतला को मुझसे चुदवाने का कोई इंतजाम नहीं किया तो मैं सरेआम सबके सामने तुझे पूरी नंगी कर दूंगा , फिर तू और तेरा पूरा परिवार किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहेगा ।




इतना बोलकर बब्बन वहाँ से चला गया और फिर मैं भी अपनी साड़ी ठीक करके अपने घर वापस आ गयी ।







दोस्तो अब क्या होगा क्या मैं उस कमीने बब्बन से मम्मी जी को चुदवा पाऊंगी , कही मम्मी जी को कुछ पता तो नही चल जाएगा ये सब आपको इस कहानी के अगले भाग में पता चलेगा।




CONTINUE...........



NEXT UPDATE SOON.........





 
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