शगुन और संजय की गैर हाजिरी मैं सोनू और संध्या का दिन अच्छे से गुजर रहा था संध्या ने आज तक इस तरह के बेहद कामोत्तेजना से भरे हुए पल नहीं गुजारे थे,,, सोनू के साथ उसे मजा आ रहा था सोनू के साथ संभोग सुख प्राप्त करने के बाद उसे लगने लगा था कि उसके पति मे सोनू जैसी ताकत नहीं थी हालांकि संजय ने उसे आज तक कभी भी निराश नहीं किया हर बार उसे पूरी तरह से संतुष्टि का अहसास कराता था लेकिन संध्या की बुर अब दुसरे लंड की आदी बन चुकी थी,,,, संध्या कभी सपने में नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी इस तरह से मोड़ लेगी लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसने संध्या को अपना ही फायदा नजर आ रहा था भले ही वह अपने अपने बेटे के बीच की मर्यादा की दीवार को पूरी तरह से ध्वस्त कर चुकी थी लेकिन ऐसा करने के बाद उसे जीवन का असली सुख प्राप्त हो रहा था जिसके बारे में वह कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, उसके बेटे ने संभोग को सही मायने में एक नई ऊंचाई तक ले गया था,,,, जहां पहुंचकर दोनों मां बेटों को किसी भी प्रकार का बंधन नजर नहीं आता था सिर्फ और सिर्फ दो लोगों के बीच किसी भी प्रकार का रिश्ता नहीं बल्कि केवल मर्द और औरत का ही रिश्ता नजर आता है,,,,,,
संध्या बिस्तर से उठ चुकी थी लेकिन सोनू 10:00 बजने के बावजूद भी बिस्तर में ही लेटा हुआ था वह पूरी तरह से आराम करना चाहता था क्योंकि रात भर बिस्तर पर पसीना जो बहाया था,,, संध्या बिस्तर से उठी तो बिल्कुल नंगी ही थी और रूम से अटैच बाथरूम में जाकर नहाने लगी नहाते नहाते वह अपने बेटे के बारे में सोच रही थी,,,। वह अपने मन में यह सोच रही थी कि देखते ही देखते उसका बेटा इतना बड़ा हो गया था कि उसके बदन की प्यास बुझाने लगा था,,,, वह पूरी तरह से अपने बेटे की दीवानी हो गई थी खासकर के उसके मुसल की संध्या अपने बेटे के लंड़ की तुलना अपने पति से करने लगी थी जो कि किसी भी मायने में उसे अपने बेटे का लंड अपने पति से कम नजर नहीं आ रहा था बल्कि 20 ही नजर आ रहा था,,,,,,उसकी लंबाई उसकी चौड़ाई मोटाई उसकी ताकत को अपनी बुर की गहराई में महसूस कर चुकी थी जिसके हर एक धक्के पर उसकी आहह निकल जाती थी,,,,, अपने बेटे की चोदने की ताकत का वह पहले ही लोहा मान चुकी थी,,, उसका बेटा जिस तरह से बिस्तर में अपनी ताकत दिखाता था उसकी वह पूरी तरह से कायल हो चुकी थी,,,, नहाते समय भी अपने बेटे को याद करके सावर से बरस रहे पानी में भी उसकी बुर गीली हो जा रही थी,,,
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जैसे तैसे करके नहा कर वह बाथरूम से बाहर निकल गई उसके बदन पर केवल तो लिया था वैसे तो इस समय उसे तोड़िए की भी बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी लेकिन फिर भी गीले बदन को पोछने के लिए तौलिया की जरूरत थी इसलिए वह अपने बदन से लपेट ली थी,,,,, बाथरूम से बाहर निकल कर वह बिस्तर पर नजर दौड़ाई तो देखी कि उसका बेटा सोनू जाग चुका था,,, उसे देखते ही संध्या मुस्कुरा कर बोली,,,।
गुड मॉर्निंग,,,,,
क्या मम्मी इस तरह से गुड मॉर्निंग,,,,(सोनू के मन में शरारत सुझ रही थी,,,)
तो किस तरह से तुझे गुड मॉर्निंग बोलु,,,,(संध्या आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)
अब तो अपना अंदाज बदलो गुड मॉर्निंग बोलने का अब हम दोनों के बीच मां बेटी का रिश्ता है बिल्कुल भी नहीं रह गया है,,,
तो किस तरह का रिश्ता रह गया है,,,(संध्या शरारती अंदाज में मुस्कुराते हुए बोली और वैसे भी बाथरुम से निकलने के बाद वह बेहद खूबसूरत लग रही थी उसके बदन पर एक नरम नरम तोलिया लिपटा हुआ था जो कि उसके बदन को बिल्कुल भी ढंक नहीं रहा था,,,, आधी से ज्यादा चुचियां टावल के नीचे दबी होने के बावजूद भी नजर आ रही थी,,, और नीचे से मोटी मोटी चिकनी जांघ और जांघों के जोड़ के बीच में हल्की सी पतली दरार भी नजर आ रही थी,,,)
अब हम दोनों के बीच केवल मर्द और औरत पर इस तरह के और मर्द और औरत के बीच क्या होता है यह तो हम दोनों कर ही चुके हैं,,,,।
(अपने बेटे की बातें सुनकर संध्या हंसने लगी,,क्योंकि इसकी बातों से संध्या को लगने लगा था उसका बेटा तन के साथ-साथ दिमाग और मन से भी बड़ा होता जा रहा है,,,, अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर सोनू बोला,,)
मुस्कुराते हुए तुम बहुत खूबसूरत लगती हो मम्मी,,, और नहाने के बाद तो तुम ऐसा लगता है कि जैसे आसमान से उतरी हुई कोई अप्सरा हो,,,,
क्या सच में तुझे ऐसा लगता है,,,,।
लगता क्या है यही सच है,,,, तुम्हारा अंग अंग ऐसा लगता है कि जैसे भगवान ने अपने हाथों से तराशा हो,,,, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां तुम्हारी गोल-गोल तरबूज जैसी गांड,,,,, और सबसे ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी मोटी मोटी चिकनी जांघों के बीच रस से भरी हुई तुम्हारी बुर,,,,,,, जिसके बारे में सोचते ही,,,(अपने उपर से चादर को हटाते हुए,,) मेरा ये लंड खड़ा हो जाता है,,(अपने हाथ से लंड को पकड़ कर हिलाते हुए,,, जिस पर नजर पड़ते ही संध्या की बुर कुलबुलाने लगी,,,और उसके होठों पर मुस्कान तेरने लगी,,,। सुबह-सुबह अपनी मां की खूबसूरत बदन को देख कर सोनू उत्तेजित हो रहा था और वह उसी तरह से अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,,।)
सच सच बताना मम्मी,,,, सुबह सुबह पापा तुमको गुड मॉर्निंग कैसे बोलते हैं,,,।
(सोनू की बात सुनते ही कुछ सोच कर संध्या की आंखों में चमक आ गई थी उसके मन में भी शरारत करने को सुझने लगी,,,,)
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नहीं नहीं जाने दे तु क्या करेगा जानकर,,,(अपनी गीले बालों को एक तरफ करते हुए बोली)
ऐसे कैसे जाने दूं,,,,अब मुझे हर वह चीज जाने का अधिकार है जो तुम्हारी सबसे ज्यादा पर्सनल है,,,, आखिरकार तुम्हारा और मेरा रिश्ता जो,,,(अपने एक हाथ के अंगूठे और अंगुली को कॉल करके दूसरे हाथ की उंगली को उसने अंदर बाहर करते हुए चोदने का इशारा करते हुए) बन चुका है,,,,
(संधया अपने बेटे की बात और इस हरकत से पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो गई और अपने मुंह पर हाथ रखते हो बोली,,)
बाप रे कितना शैतान हो गया है तू,,,,
हां हो गया हूं इसलिए तो पूछ रहा हूं बता दो पापा कैसे तुम्हें गुड मॉर्निंग कहते हैं,,,।
जा नहीं बताती,,,, तुझे आता है गुड मॉर्निंग करने तो खुद कर क्यों नहीं लेता,,,।
मुझे तो अच्छी तरह से आता है गुड मॉर्निंग कहना,,,
तो कहना,,,,
इधर आओ मेरे पास आओ,,,,
जा मैं नहीं आती,,, गुड मॉर्निंग तुझे कहना है तो तू ही आ,,,
यह बात है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर से नीचे उतर कर खड़ा हो गया उसका झूलता हुआ लंड संध्या की आंखों में उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था,,, उसे घूर कर देखते ही जा रही थी और सोनू अपने कदम आगे बढ़ाते हुए अपनी मां की तरफ बढ़ रहा था अपनी मां के करीब पहुंचकर बोला,,,)
बताऊं कैसे गुड मॉर्निंग करता हूं,,,।
बता,,,,,( संध्या मुस्कुराते हुए बोली,,)
(इतना सुनते ही सोनू बिना कुछ बोले अपनी मां के रस भरे होठों पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया,,,, वह पागलों की तरह अपनी मां के होठों को चूस रहा था,,, संध्या भी उत्तेजित होने लगी उसे अपने बेटे का यह अंदाज बहुत अच्छा लग रहा था,,,,, थोड़ी देर बाद जब वह अलग हुआ तो दोनों हांफ रहे थे,,,, संध्या हाफ्ते हुए मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
बस इस तरह से गुड मॉर्निंग बोलता है,,,,, मैं तो समझी कि तू चांद तोड़ कर ले आएगा,,,,,,(संध्या सोनू को टोन मारते हुए बोलीसोनू अपनी मां के पास समझ गया था वह समझ गया था कि उसकी मां को इससे ज्यादा की उम्मीद थी इसलिए वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की टावर को पकड़कर एक झटके से खींचकर उसके बदन से टावल को अलग करके उसे नंगी करते हुए बोला,,,)
चांद तोड़ कर तो नहीं ला सकता लेकिन चांद पर जरूर ले जा सकता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही सोनु अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां की मोटी मोटी जांघो चूमने लगा संध्या के बदन में सरसराहट दौड़ने लगी और देखते ही देखते सोनु अपनी मां की बुर के ऊपर अपने होंठ रख कर उसे चाटना शुरू कर दिया पल भर में ही संध्या की हालत खराब होने लगे उसके मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,,।
सहहहह आहहहहहह ,,आहहहहह सोनु यह कैसा गुड मॉर्निंग है रे,,,,(तभी सोनू अपने हाथों से अपनी मां की बुर की पिलाती पत्ते को दबा दिया जिससे संध्या की आह निकल गई) आहहहह सोनू क्या कर रहा है,,,,,,आहहहहहह
(संध्या अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसकी आंखों में नशा छाने लगा था तन बदन में अजीब सी हलचल सी दौड़ने लगी थी,,,वह पागलों की तरह अपने बेटे के सर को पकड़ कर अपनी बुर पर रगड़ रही थी,,। सोनू भी जितना हो सकता था उतना अपना जीभ बुर के अंदर डालकर उसकी मलाई चाट रहा था,,,,, संध्या मदहोशी के आलम में अपनी टांग उठा कर बिस्तर पर रख दी जिससे सोनू अपनी मां के दोनों टांगों के बीच के हर हिस्से में आसानी से पहुंच रहा था सोनू को अपनी मां की गांड का छेद बड़े साफ नजर आ रहा था,,, उस छेद को देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था और सोनू से रहा नहीं गया और वह अपनी जीभ के पोर से अपनी मां की गांड चाटना शुरू कर दिया संध्या को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सोनू इस तरह की हरकत करेगा लेकिन उसकी जीभ को अपनी गांड के छेद पर महसूस करते हुए उसकी बुर से पानी निकलना शुरू हो गया,,,
आहहहहह,,, सोनू मेरे राजा इस तरह से तेरे पापा ने भी कभी मुझे गुड मॉर्निंग नहीं कहा था,,,,आहहहहह बहुत मजा आ रहा है रे ऐसे ही मेरी गांड चाट,,,
, सोनू भी अपनी मां की बात सुनकर उसकी रसीली बुर को छोड़कर उसकी गांड चाट रहा था,,,,उसे अपनी मां की गांड चाटना बहुत मजा आ रहा था वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और संध्या अपने मन में सोच रही थी कि अगर गांड चाटते चाटते उसका बेटा अपना लंड उसकी गांड में डाल देता तो आज वह अपने बेटे से अपनी गांड मरवा लेती,,,,,, अब संध्या का मन अपने बेटे से अपनी गांड मरवाने को करने लगा था वह अपनी गांड के छेद में अपने बेटे की जीभ की जगह उसके मोटे तगड़े लंड का अनुभव करना चाहती थी,,,। लेकिन वह अपने मुंह से अपनी गांड मर आने के बाद कहने में शर्म महसूस कर रही थी इसलिए कुछ बोल नहीं पाए और सोनू की हालत खराब होती जा रही थी जो अपनी मां को चोदना चाहता था इसलिए तुरंत खड़ा हुआ और उसे बिस्तर पर झुका दिया और पीछे से अपनी मां की बुर में अपना लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया,,, यह सब इतनी तेजी से हुआ था कि संध्या को बताने या बोलने का समय नहीं मिला और वह चुदाई का असीम आनंद लूटने लगी,,,, दोनों इतना अधिक उत्तेजना से घर गए थे कि 10 मिनट में ही दोनों का पानी निकल गया इसके बाद संध्या फिर से बाथरूम में नहाने के लिए कुछ गई और साथ में सोनू भी,,,,
दूसरी तरफ तैयार होकर संजय और सगुण दोनों कॉलेज पहुंच चुके थे और शगुन एग्जाम देने के लिए अपने क्लास रूम में चली गई थी,,, इस दौरान रास्ते भर दोनों एक दूसरे से नजर मिलाने से कतराते रहे दोनों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत भी नहीं हुई,,,,। संजय रात को जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर परेशान भी था और उत्तेजित भी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रात को जो कुछ भी हुआ वह सही था या गलत,,,, वासना जब सर पर चढ़ती है तो यही होता है सही गलत का फैसला इंसान नहीं कर पाता और यही संजय के साथ भी हो रहा था लेकिन वह अपने मन में सोचने लगा कि रात को जो कुछ भी हुआ उसे यहीं खत्म कर देगा और आधे इस तरह की गलती बिल्कुल भी नहीं करेगा और अपनी बेटी को भी समझाएगा,,,।