एक सौ इकतालीसवां अपडेट
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दो दिन बाद
अपने क्वार्टर में शीशे के सामने खुशी से सिटी मारते हुए रोणा अपना खास खाकी शूट निकालता है और पहनने लगता है l खाकी टाई गले में बाँधता है l अपने कंधे के फीते पर चमकते हुए तीन सितारों वाली स्ट्रिप लगाता है l सितारों पर हाथ फेरते हुए सिटी बजाना बंद कर देता है, उसे तभी अदालत में एडवोकेट जयंत राउत के पूछे सवाल याद आता है
"कितने स्टार्स हैं आपके कंधे पर"
रोणा - तीन स्टार्स हैं... बुड्ढे... तीन स्टार्स... राजगड़ आदर्श थाने का आदर्श थानेदार हूँ... दो बार आदर्श थाने की प्रभारी के रुप में पुरस्कार जीत चुका हूँ... जिंदगी में कभी हारा नहीं था... पर पहली बार... तुने अदालत में मेरी इज़्ज़त उतारी... और छह महीने के लिए... सस्पेंड भी करवा दिया... पर तु... परलोक सिधार गया... और पीछे उस नासूर विश्वा को छोड़ गया... जो किसी बिच्छु की तरह... मुझे कानूनी और गैर कानूनी डंक जब चाहे तब मार कर चला जाता है... पर अब नहीं... (अपना कैप सिर पर पहनते हुए) एक वकालत की डिग्री क्या हासिल कर ली... डैनी की जुते चाट चाट कर... थोड़ी मार पीट क्या सीख ली... मेरे साथ गेम खेल रहा है... साले हरामी के पिल्ले... हर कुत्ते का दिन आता है... आज मेरा दिन है... आज तुझे और तेरे उस डाकिए को एक साथ पकुड़ुंगा... और राजा साहब के हवाले करूंगा... उस डाकिए को भले ही मगरमच्छ का निवाला बना दें राजा साहब... पर तुझे मैं जिंदा रखूँगा... क्यूँकी मुझे आज रंग महल मिल जाएगा... उस महल में तेरी छमीया की जब जब फाड़ुंगा... तब तब तु अपना जीभ लह लहाते हुए... मेरा तलवे चाटेगा... ही हा हा हा हा... हा हा हा हा हा...
कह कहा लगाते हुए हँसने लगता है l फिर वह अपनी हँसी को रोक कर फिर से अपनी टाई को कसने लगता है l फिर अपने क्वार्टर से बाहर निकलता है l बाहर उसे गाड़ी के पास उदय मिलता है l उदय उसे सैल्यूट मारता है l पहले उसे इग्नोर करते हुए रोणा अपने गाड़ी में बैठता है, फिर कुछ सोच कर गाड़ी से उतरता है और उदय के पास पहुँचता है l
रोणा - ओ उदय उदय उदय... आज मैं बड़ा खुश हूँ... बहुत ही खुश... बस तु दुआ कर... मैं जिस काम के लिये निकला हूँ... वह कामयाब हो जाए.... अगर ऐसा हो गया... तो... (रुक जाता है)
उदय - (हाथ जोड़ कर बड़ी जिज्ञासा भरी नजर से देखता है)
रोणा - तो मैं... स्पेशल सिफारिश कर... तुझे ग्राम रखी से... कांस्टेबल बना दूँगा...
उदय - (बहुत खुश होते हुए) जी ज़रूर... जी ज़रूर... मैं आपका यह उपकार जनम जनम तक नहीं भुलाऊंगा...
रोणा - (उदय के कंधे को थपथपाते हुए) शाबाश...
कह कर रोणा अपनी जीप में बैठ जाता है और गाड़ी स्टार्ट कर अपने थाने की ओर चल देता है l थाने के आगे अपनी जीप लगा कर बड़े एटीट्यूड के साथ उतरता है और मोबाइल निकाल कर फाइल फ़ोल्डर में नंदिनी और विश्व की तस्वीर निकाल कर देखने लगता l नंदिनी की फोटो को एनलार्ज कर स्क्रीन से विश्व को गायब कर देता है l एक कमिनी मुस्कराहट उसके चेहरे पर उभर आती है l रोणा का ध्यान टूटता है जब एक हवलदार उसके पास आकर सैल्यूट मारता है l रोणा थोड़ा सकपका जाता है और फिर मोबाइल को बंद कर अपनी जेब में रख देता है l
रोणा - क्या खबर है...
हवलदार - सर... दस बंदे आए हैं... देवगड़ से.... आपसे मिलना चाहते हैं...
रोणा - ह्म्म्म्म... चलो मिलते हैं...
दोनों थाने में आते हैं l दस बंदे जो बैठे हुए थे वह लोग खड़े होकर रोणा को सैल्यूट करते हैं l सब के सब एक सफेद टी शर्ट, खाकी पेंट और पुलिसिया लाल जुते पहने हुए थे l उनमें से एक बंदा आगे आकर रोणा के हाथ में एक लिफ़ाफ़ा देता है l रोणा लिफ़ाफ़ा खोल कर उसमें से एक चिट्ठी निकाल कर देखता है और उनसे कहता है
रोणा - ठीक है... जाओ अपनी गाड़ी में बैठो... मैं अभी दस मिनट में आता हूँ... (सभी मूड कर जाने को होते हैं कि) रुको सब... (सभी रुक जाते हैं) यह क्या... हम कोई पिटी करने नहीं जा रहे हैं... किसी खास को... आम लोगों के बीच गार्ड करने जा रहे हैं... जाओ सभी यह PT कपड़े उतार कर आम डेली यूज कपड़े पहन लो... ताकि भीड़ में किसी को भी यह ना लगे कि तुम सब पुलिस वाले हो...
सभी - जी सर...
सारे बंदे रोणा को सैल्यूट मार कर बाहर चले जाते हैं l सबके जाने के बाद रोणा अपने चेंबर में जाता है और कमरे में एक आलमारी खोलता है l घर से पहन कर आया अपना शूट निकाल कर आलमारी में रख देता है और साधारण सी शर्ट और पैंट निकाल कर पहन लेता है l जब अपने चेंबर से बाहर निकलता है तो, पाता है सारे स्टाफ उसे आँख और मुहँ फाड़े देख रहे हैं l
रोणा - क्या देख रहे हो...
हावलदार - सर... क्या कोई स्पेशल मिशन है...
रोणा - हाँ बैकुंठ... बहुत ही स्पेशल मिशन है...
बैकुंठ - सर... यह लोग क्या बाहर से इसीलिए आए हैं...
रोणा - हाँ...
बैकुंठ - सर... यह वह विश्व वाला मैटर ही है ना...
रोणा - हाँ बिल्कुल...
बैकुंठ - तो हमें क्यूँ सामिल नहीं किया आपने...
रोणा - (एक कमिनी मुस्कान दिखाते हुए) बैकुंठ... क्या करूँ मैं... बोलो... कैसे करूँ बोलो... विश्वा ने कोर्ट में एफिडेविट किया है... उसे राजगड़ थाने में से... किसी पर भी विश्वास नहीं है... इसीलिए तो दो कांस्टेबल डेपुटेशन में... वह भी बाहर से लाकर उसकी रखवाली किया जा रहा है... अब वह एडवोकेट विश्व प्रताप राजगड़ से निकल कर यशपुर जा रहे हैं... अब उनकी रखवाली तो करनी पड़ेगी ना... इसीलिए... हमने यह दस पैरा कमांडोज को डेपुटेशन में देवगड़ से बुलाया है.... ताकि विश्व प्रताप जहां भी जाएं... जिससे भी मिले आराम से मिले... और उन्हें कुछ तकलीफ ना हो... समझे...
बैकुंठ - जी सर...
रोणा मुस्कराते हुए बाहर चला जाता है l अपनी जेब से जीप की चाबी निकाल कर एक बंदे को देता है l वह बंदा रोणा की जीप स्टार्ट करता है l उस जीप में रोणा और ड्राइवर के साथ और दो बंदे बैठते हैं, और बाकी सात बंदे एक वैन में बैठ जाते हैं l दोनों गाड़ियां थाने से निकल कर गाँव में से होते हुए दुसरी तरफ आखिरी छोर यानी उमाकांत सर जी के घर के बाहर रुकती है l घर के बाहर बैठे जगन्नाथ और हरिश्चंद्र दोनों रोणा को देख कर सैल्यूट मारते हैं l रोणा उनके सैल्यूट को नजरअंदाज कर आँखों के इशारे से विश्व के बारे में पूछता है l जगन्नाथ भी उसे इशारे में विश्व अंदर होने की बात कह देता है l रोणा गाड़ी से उतर कर घर की अंदर जाने लगता है कि विश्व तभी टीलु के साथ बन ढंन के बाहर आ रहा था l
रोणा - हैलो... एडवोकेट महोदय... (रोणा को यूँ अपने सामने अचानक देख कर विश्व चौंकता है) किधर चल दिये... यूँ बन ढंन कर...
विश्व - (हैरानी भरे लहजे में) इंस्पेक्टर साहब आप... यहाँ... इस वक़्त...
रोणा - क्या करें एडवोकेट बाबु... क्या करें... हम तो चैन से जिए जा रहे थे... आपने ही... यह एफिडेविट वाला कांड करके... हमारा जीना हराम कर दिया...
विश्व - क्यूँ क्या हुआ... आपने तो अपनी ड्यूटी खूब निभाई है... मेरे यहाँ दो कांस्टेबलों की तैनाती कर...
रोणा - पर यह तैनाती सिर्फ राजगड़ के लिए ही है... अब आप यशपुर निकलेंगे तो स्पेशल ड्यूटी बजानी पड़ेगी ना...
विश्व - (चुप रहता है)
रोणा - क्यूँ क्या हुआ... लगता है... आप हमसे नाराज हो गए...
विश्व - इंस्पेक्टर साहब... मैं सिर्फ अकेला हूँ... जब कि आप पुरे फोर्स के साथ आए हैं...
रोणा - क्या करें आपकी जान ही इतनी क़ीमती है... घबराईए नहीं... आप यशपुर ही क्यूँ... जहां भी जाना चाहें जाएं... यह हमारे सारे बंदे... आपके इर्द-गिर्द रहेंगे... पब्लिक में घुल कर...
विश्व - नहीं... ऐसा नहीं हो सकता....
रोणा - क्यूँ.. क्यूँ नहीं हो सकता...
आप इनकी और मेरी निगरानी में ही... आप जहां चाहें जाएं... जिससे चाहें मिलें... क्यूँ के... आज के दिन यह लोग... और मैं आपके साथ ही रहेंगे...
विश्व - आपको कैसे मालुम हुआ... मैं आज यशपुर जा रहा हूँ...
रोणा - वह सोलै वाला डायलॉग है ना... हमारे जासूस चारों और फैले हुए हैं...
विश्व - मत भूलिए... वह डायलॉग असरानी ने कहा था..
रोणा - हाँ पर यहाँ गब्बर सिंह कह रहा है...
विश्व - तो फिर मेरा प्रोग्राम कैंसिल...
विश्व इतना कह कर अंदर चला जाता है l पर टीलु वहीँ खड़ा रह जाता है l थोड़ी देर के लिए रोणा का चेहरा उतर जाता है l विश्व के ना जाने से उसका प्लान चौपट हो सकता है l उसे लगने लगता है शायद उसने थोड़ी ओवर स्मार्टनेस दिखा दी l विश्व को किसी भी तरह आज के आज राजगड़ से बाहर ले जाना होगा l तभी उसका प्लान कामयाब हो पाएगा l इसलिए वह विश्व से बात करने अंदर जाता है l अंदर विश्व एक चेयर पर बैठा हुआ था l
रोणा - क्या हुआ... तुम ने अपना प्लान कैंसिल क्यूँ किया... कोई ई-लीगल काम था क्या... जो पुलिस वालों के होते हुए... तुम कर नहीं सकते...
विश्व - मुझे आपके या आपके थाने के पुलिस वालों पर भरोसा नहीं है...
रोणा - जानता हूँ... तभी तो मेरे साथ जो बंदे आए हैं... वे लोग देवगड़ डिविजन के... ओडिशा स्पेशल आर्म्ड पुलिस के पैरा कमांडोज हैं...
विश्व - (हैरानी भरे लहजे में) मुझ जैसे... एक आम आदमी के लिए... पैरा कमांडोज... यह बात कुछ हजम नहीं हो रही है...
रोणा - भई... एफिडेविट तुमने करा है... तुम कोई गैर मामूली तो हो नहीं... न्यूज पेपर हो या टीवी... हर जगह तुम ही तुम छाए हुए हो... आरटीआई एक्टिविस्ट... एडवोकेट और ना जाने क्या क्या...
विश्व - ठीक है फिर... अगर बात ऐसी है... तो मेरे साथ आप अकेले चलिए... आप उन लोगों को वापस भेज दीजिए...
रोणा - ना... ऐसा तो नहीं हो सकता... सरकारी ऑर्डर तुमने निकलवाई है... और हम ठहरे... सरकारी मुलाजिम... (लहजा थोड़ा कड़क कर) अब तुम चाहो या ना चाहो... यह लोग आज तुम्हारे साथ रहेंगे... आफ्टर ऑल हम पब्लिक सर्वेंट जो ठहरे... ऑफ द पीपुल.. बाय द पीपुल.. फॉर द पीपुल..
विश्व - यह डेमोक्रेसी में गवर्नमेंट के लिए कहा जाता है...
रोणा - हाँ मालुम है... और हम पार्ट ऑफ द... गवर्नमेंट हैं... और हाँ आज कोई चालाकी नहीं करना... क्यूँकी आज के लिए.. मैंने स्पेशल ऑर्डर निकलवाया है... अगर इस वक़्त तुम मेरे कहे मुताबिक नहीं चले... तो ऐसी रिपोर्ट बनाऊँगा की... तुम कुछ दिनों के लिए ही सही... मेरे थाने में मेहमान बन कर रहोगे...
विश्व - (कुछ सोचने लगता है, कुछ देर के बाद) ठीक है... मुझे उन पैरा कमांडोज साथ... इंट्रोड्युस करायीये...
रोणा - अभी कराए देते हैं...
रोणा बाहर जाकर सभी पैरा कमांडोज को अंदर बुलाता है l सभी रोणा के साथ अंदर आते हैं l विश्व अपनी जगह से खड़ा होता है, रोणा एक एक कर के सबका विश्व से परिचय करवाता है l
रोणा - तो... क्या फैसला किया तुमने... (विश्व कुछ सोचने लगता है) देखो नवा नवा वकील... तुम हमारे साथ चलो... गाँव में कोई सीन ना करो... तो तुम्हारे लिए अच्छा ही रहेगा... और हाँ... अपने ज़ज्बात... हाथ पैर पर काबु बनाए रखो... यह लोग... सरकारी मिशन पर हैं... तुम्हारा एक भी गलत कदम... तुम्हारे खिलाफ जा सकता है...
विश्व - ह्म्म्म्म... बहुत तैयारी के साथ आए हो... इंस्पेक्टर अनिकेत रोणा....
रोणा - (एक कुटिल मुस्कराहट के साथ) कोई शक़...
विश्व - (सरेंडर करने के अंदाज में) बात मेरी समझ में आ गई... मैं चाहे जाऊँ या ना जाऊँ... तुम लोग आज मेरे साथ चिपके रहोगे... चूंकि सरकारी फरमान है... मैं कम से कम आज के दिन... मैं तुम लोगों के खिलाफ... जा नहीं सकता....
रोणा - वाकई... बहुत समझदार हो गए हो... (लहजा कड़क करते हुए) चलें...
विश्व चुप चाप उनके साथ बाहर जाने लगता है l घर के बरामदे से उतरते वक़्त टीलु पायदान उतरने लगता है तो रोणा उसे रोक कर गाने के अंदाज में
रोणा - विश्व के साथ यशपुर में तुम्हारा क्या काम है...
पैरा कमांडोज है साथ तो तु क्यूँ परेशान है...
विश्व उसे सिर हिला कर अपना सहमती देता है l पहले वाले जीप में विश्व के साथ रोणा ड्राइवर और दो कमांडोज बैठ जाते हैं l पिछले गाड़ी में बाकी सात कमांडोज l गाड़ी राजगड़ से निकल कर यशपुर के रास्ते पर धुल उड़ाते हुए दौड़ने लगती है l एक किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अचानक रोणा के कान में पीछे वाली गाड़ी की हॉर्न सुनाई देती है l रोणा अपनी गाड़ी को रुकवाता है l
अपनी गाड़ी से उतर कर पीछे वाली गाड़ी के पास आता है, देखता है उनकी गाड़ी के इंजन में कोई प्रॉब्लम आई थी शायद l स्टार्ट ही नहीं हो रही थी l रोणा चिढ़ कर उस वैन के ड्राइवर से पूछता है
- और कितना वक़्त लगेगा...
ड्राइवर - पता नहीं सर... ज्यादा से ज्यादा... एक घंटा...
रोणा - ठीक है... मैं तुम लोगों का... सर्कल आउट हाउस में इंतजार कर रहा हूँ... अगर एक घंटे में नहीं आए... तो हम चारों ही विश्व को लेकर निकल जाएंगे...
ड्राइवर - कोई मसला नहीं है सर... हम एक घंटे से पहले ही... सर्कल आउट हाउस में पहुँच जाएंगे...
रोणा अपनी गाड़ी में वापस आकर बैठता है और ड्राइवर से सर्कल आउट हॉउस चलने को कहता है l ड्राइवर गाड़ी को ड्राइव करते हुए बीस मिनट बाद यशपुर के सर्कल ऑउट हॉउस में दाखिल होता है l विश्व उस ऑउट हॉउस को अच्छी तरह से मुआयना करता है l
रोणा - आओ एडवोकेट साहब... जब तक दुसरी टीम नहीं पहुँचती... तब तक क्यूँ ना अंदर कुछ गुफ़्तगू करें..
विश्व - जगह अच्छी चुनी है इंस्पेक्टर साहब... यह वह जगह है ना... जहां... सरकारी किडनैपिंग के बाद छुपा कर रखा जाता है... अरेस्ट नहीं दिखाया जाता...
रोणा - (आस्तीन से रिवॉलवर निकाल कर) जानता हूँ... तु बहुत तेज हो गया है... दिमाग से भी... और शरीर से भी... पर यहाँ कोई होशियारी मत करना... सीधे अंदर चल... आज मेरा दिन है विश्वा... इसलिए चुप चाप अंदर चल... वर्ना यकीन मान... मुझे गोली मारते हुए... कोई हिचक नहीं होगी...
कमांडोज में से एक भागते हुए उस हॉउस का दरवाजा खोलता है l विश्व देखता है अंदर एक कमरे में आमने सामने दो ही कुर्सी पड़े हैं l रोणा विश्व की पीठ पर रिवॉलवर की नाल लगा कर धकेलते हुए एक कुर्सी पर बिठा देता है और खुद विश्व की सामने वाली कुर्सी पर बैठ जाता है l इतने में वह तीन कमांडोज रोणा के पीछे आकर खड़े होते हैं और अपनी अपनी जेब से रिवॉलवर निकाल कर विश्व की ओर तान देते हैं l अब रोणा शरारती मुस्कान मुस्कराते हुए अपनी रिवॉलवर को आस्तीन में रखता है l
रोणा - आखिर... तु आया ना मेरे कब्जे में... (अचानक रोणा का चेहरा और आँख लाल हो जाता है) साले हरामजादे... आज एक एक का हिसाब लूँगा... माँ कसम एक एक का हिसाब लूँगा... जब से जैल से छुटा है... साले हरामी... मेरी लिए जा रहा है... बजाये जा रहा है... आज तुझे पुरे सुध के साथ लौटाऊँगा...
विश्व - यह अचानक तुम स्प्लीट पर्सनालिटी के शिकार कैसे हो गए... भूल गए... तुम मुझे यशपुर क्यूँ लेकर आए हो...
रोणा - नहीं भुला हूँ... सब याद है मुझे... तेरे साथ साथ... उस हरामी अज्ञात को भी धर दबोचना है... इसीलिए तो... तु अब तक जिंदा है... नहीं तो...
विश्व - नहीं तो तु मेरा झांट की बाल उखाड़ना तो दुर... मोड़ भी नहीं पाता... ना अभी पाएगा...
रोणा - अच्छा... हा हा हा हा...
हँसने लगता है, उसके साथ आए वह तीन बंदे भी हँसने लगते हैं l हँस लेने के बाद बड़े अदब से विश्व के सामने अपना पैर मोड़ कर घुटने पर रखता है l
रोणा - (खिल्ली उड़ाते हुए) तुझे क्या लगा... डैनी का चेला है... बड़ा लड़ाकू है... तो हमको यहाँ निपटा कर चला जाएगा... (अचानक गुस्से वाले लहजे में) गोली से तो तेज तु हो नहीं सकता... और मत भुल... तेरा एनकाउंटर भी हो सकता है...
विश्व - (हल्का सा मुस्कान लाते हुए) रोणा... गोली से कोई तेज नहीं हो सकता... माना... पर गोली चलाने के लिए जिगर चाहिए...
रोणा - ओ... तो तु इन लोगों का जिगर देखना चाहता है...
विश्व - हा हा हा हा...
अब विश्व हँसने लगता है l विश्व को हँसते देख कर रोणा हैरानी से विश्व की ओर देखने लगता है फिर मुड़ कर अपने बंदों को देखने लगता है l अंदर ही अंदर रोणा को डर लगने लगता है l वह धीरे से अपना कुर्सी पीछे की ओर थोड़ा सा खिसकाता है l विश्व हँसते हुए ही पूछता है
विश्व - इनकी नहीं बे... भुतनी के तेरी... (उसी मुस्कुराहट के साथ) भुवनेश्वर में तो तेरे से गोली चली नहीं... तो इन छपरीओं को लेकर आया है... मेरी एनकाउंटर करने... वह भी... स्मगल्ड चाइनीज माउजर के साथ...
रोणा - (आँखे फैल जाता है) मतलब तु समझ गया... यह लोग पुलिस वाले नहीं है...
विश्व - हाँ बे ढक्कन... (एक बंदे की ओर इशारा करते हुए) यह... यह देवगड़ रेड लाइट एरिया का गुंडा... हफ्ता वसुली करता है... नाम है... गुल्लू... (और एक बंदे की ओर इशारा कर) यह देवगड़ इंडस्ट्रीयल एरिया में मटका चलाने वाला... कांगालु... (आखिरी बंदे की ओर इशारा कर) यह देवगड़ का मशहूर जेब कतरा बाबुनी...
रोणा - (अपनी कुर्सी से हैरानी से उठ कर खड़े होते हुए) तु इन सब के बारे में कैसे जानता है...
विश्व - मैं इन्हें इसलिए जानता हूँ... के मैं तेरी जात और और औकात... अच्छी तरह से जानता हूँ.... तु मेरा एनकाउंटर कर ही नहीं सकता... क्यूँकी उसके लिए... तुझे सरकारी बंदूक इस्तेमाल करना पड़ता... और सरकारी गोली खर्चने पड़ते... इसीलिए... तु यह प्लान किया है... किसी तरह... मुझसे इनकी पुरानी दुश्मनी एस्टाब्लीश कर... मुझे मरवाने की सोच रखा है...
रोणा अपनी हलक से थूक निगलता है l वह तीन बंदे अब पुरी तरह से विश्व की ओर ऋण निशाना लगाए खड़े थे, तभी बाहर एक वैन आकर रुकती है l कुछ लोगों की अंदर आने की आहट होती है l बिना पीछे मुड़े रोणा पूछता है
रोणा - दलाई... तुम लोग आ गए...
बाहर से आवाज आती है - हाँ सर... हम आ गए...
रोणा -(विश्व से) हाँ... हरामजादे हाँ... तु सही समझा... पर तुझे मारना... मेरा प्लान बी है... प्लान ए नहीं... प्लान ए के तहत तुझे अपने पिंजरे में रखने के लिए... तुझे कुत्ते की तरह अपने तलवे चटवाने के लिए... तु क्या समझता है... तेरी सुरक्षा के लिए जो दो कांस्टेबल क्यूँ लगाए थे... उन्हीं के हाथों से मैंने रिपोर्ट बनाया है... के तुझे आज किसी से मिलने जाना है... इसी बहाने तुझे मैंने एक ऑफिशियल ऑर्डर बना कर यहाँ यशपुर लेकर आया हूँ... यहीं थोड़ी देर बाद तेरा गुमशुदगी का रिपोर्ट... थाने में दर्ज होगी... पर तु रहेगा मेरे कब्जे में... मेरे पिंजरे में... फिर कुछ दिनों बाद तेरी लाश सरकार को मिलेगी... पर तुझे मैं मारूंगा नहीं... बल्कि तु खुद अपनी जिंदगी को कोसते हुए... अपनी मर्दानगी पर थूकते हुए... खुदकुशी करेगा... समझा...
विश्व - ह्म्म्म्म प्लान तो बहुत बढ़िया है... तो तु इन छपरीओं के दम पर... मुझे काबु करेगा...
रोणा - बेहतरी इस में है के तु कोई हरकत ना करे... वर्ना... प्लान बी ऐक्टिव हो सकता है... क्यूँकी तु अब मेरे आदमियों से घिरा हुआ है... और उनके हाथों में.. चीनी कट्टे हैं... सोच ले...
विश्व - सोच लिया...
रोणा - (मुस्कराते हुए) क्या सोचा है तुने... मरेगा या... मेरे जुते चाटेगा...
विश्व - तु अपनी जुते इन छपरीयों से चटवा ले... मैं शेर हूँ... तेरे खुन का प्यासा हूँ... तेरा खुन ही पीयूंगा...
रोणा - मेरे दस बंदों के बीच तु घिरा हुआ है... वह भी हतीयार बंद... पर अकड़ ऐसी... जैसे तु हमारी लेने वाला है...
विश्व - हूँ तो... देख ना... अड्डा तेरा... आदमी तेरे... फिर भी मैं बैठा हुआ हूँ... और तुम सब खड़े हुए हो...
रोणा कुछ कह नहीं पाता, गुस्से में उसका जिस्म थर्राने लगती है l साँसे इतनी जोर से लेने लगता है कि नथुने उपर नीचे होने लगते हैं l अपने आदमियों को हुकुम देता है
रोणा - मार दो हरामजादे को... (कोई हरकत नहीं होती, पीछे मुड़ कर) अरे खड़े खड़े देख क्या रहे हो मार दो... इस... (रुक जाता है)
रोणा देखता है उसके तीनों बंदों के कनपटी पर पीछे से तीन नकाबपोश लोग माउजर लगा रखे हैं, यह देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है, उसे कुछ सूझता नहीं है तो अपने आस्तीन से रिवाल्वर निकाल कर विश्व पर तान देता है l पर यह क्या पलक झपकने भर की देरी थी अब रिवाल्वर विश्व के हाथ में थी l रोणा को यकीन ही नहीं हो रहा था l कुछ सेकेंड पहले जो रिवाल्वर उसके हाथ में थी अब विश्व के हाथ में थी l
विश्व - तु अभी भी नहीं समझा... रास्ते में वैन ख़राब नहीं हुई थी... उसे खराब मेरे बंदों ने किया था... उसमें जितने भी छपरी थे... उन सबको बड़े हिफाज़त से यहाँ लेकर आ गए हैं... अब मैं तुम लोगों के कब्जे में नहीं हूँ... तुम सब अब... मेरे कब्जे में हो... और रोणा... तु तो जानता है ना... रिपोर्ट अब मैं बना सकता हूँ... और अदालत में पेश कर सकता हूँ...
विश्व रोणा की कलर पकड़ कर रोणा को अपनी जगह बिठा देता है और इशारे से रोणा के आदमियों को रोणा के पीछे खड़े होने के लिए कहता है l वह सारे लोग वही करते हैं l
विश्व - तुझे कहा था... औरत तु है नहीं... मर्द तु रहा नहीं और... हिजड़ों में तेरी भर्ती होगी नहीं... फिर साले... तु किस बात रौब झाड़ रहा है बे...
रोणा - देख विश्वा....
विश्व - श्श्श्श्... अब मैं कहता हूँ तु सुन... राजगड़ में तु अपने चेलों के जरिए नजर रख रहा था... आज के दिन अगर मैं छुप के भी निकलता... तो तेरे जासूस मुझे ढूंढने निकल जाते... जिसके वज़ह से... मेरे उस मोहसिन की जान और पहचान दोनों खतरे में पड़ सकती थी... इसीलिये... तेरे उन दो कांस्टेबलों के जरिए... मुझे ऑफिशियली राजगड़ से निकलने के लिए... तेरे पास आधी अधुरी खबर भिजवाया था... (यह सुन कर रोणा सकते में आ जाता है) तुने भी पिछली बार की तरह... अंगुल ट्रेनिंग स्कुल की तरह एक ऑर्डर निकलवाई... पर उसके साथ साथ एक फेक ऑर्डर भी बनाया... ताकि एसकॅट के बहाने... इन छपरीयों के जरिए... मुझे काबु में लेने के लिए... पर तेरी चालाकी तुझ पर ही भारी पड़ गई ना... (विश्व अपने एक बंदे से पूछता है) एजेंट वन..
वन - येस बॉस...
विश्व - इस घर का मुआयना किया...
वन - जी हो गया है...
विश्व - कोई काम की चीज़...
वन - कुछ नहीं बॉस... एक फ्रिज और एक वाशिंग मशीन है...
विश्व - इतनी बड़ी चीज़ है... और तुम कह रहे हो... कोई काम की चीज़ नहीं है... (रोणा के पीछे खड़े बंदों से) अब तुम सब बिना देरी किए... अपने अपने कपड़े उतरो... जल्दी...
वह लोग एक दूसरे को देखने लगते हैं l विश्व के आदमी सब उन पर रिवाल्वर तान देते हैं, उस पर भी जब वह लोग अपने कपड़े नहीं उतार रहे थे तब एजेंट वन जाकर उनमें से एक को जोरदार थप्पड़ मार देता है l उस झन्नाटेदार थप्पड़ के गूंज से ही सभी रोणा के बंदे अपने अपने कपड़े उतार कर जांघीये में खड़े रहते हैं l
एजेंट वन - अबे ढक्कनों... सारे कपड़े उतारने को बोला बॉस ने... उतारो नहीं तो... तुम लोगों के नो एंट्री पॉइंट में... गोली एंटर कर दूँगा...
गुल्लू - पर नंगे...
एजेंट वन - कौनसा फेशन परेड में जा रहे हो... सब के सब.. लौड़े वाले हो... शर्माना किससे बे... अब ज्यादा बकैती नहीं... या तो चड्डी उतारो... या फिर पर लोक सिधारो...
सब के सब फटाफट अपनी अपनी जांघीया उतार फेंक देते हैं l विश्व इशारा करता है तो विश्व का एक एजेंट जाकर उन सबके कपड़े इकट्ठा करने लगता है l विश्व रोणा की ओर देखता है तो एजेंट वन विश्व से पूछता है l
एजेंट वन - इसे ऐसे क्या देख रहे हो बॉस...
विश्व - सोच रहा हूँ... इन नंगों के बारात में... यह कपड़े वाला दूल्हा क्यूँ...
रोणा - ऐ... खबर दार... ऐसा सोचना भी मत...
एजेंट वन - सोचना भी मत... क्या सोचना भी मत... अरे बॉस ने ऑल रेडी सोच लिया है... चल कपड़े उतार...
रोणा - मर जाऊँगा... मगर...
एजेंट वन - तेरी मर्जी पूछा ही कौन...
रोणा - हाथ तो लगा के देख...
एजेंट वन रोणा की ओर बढ़ रहा था कि विश्व उसे रोक लेता है और रोणा के जो बंदे अपने अपने कपड़े उतार कर नंगे खड़े थे उनकी ओर देख कर
विश्व - (सारे नंगों को) अगर तुम लोग कपड़ों में अपने गाँव जाना चाहते हो... तो तुम लोग इसके कपड़े उतारो... फाड़ के उतारोगे या खोल के... यह तुम्हारी मर्जी...
सभी नंगे पहले एक दुसरे को देखते हैं और फिर सभी रोणा की ओर देखने लगते हैं l रोणा गुस्से से विश्व से
रोणा - ऐ... यह क्या ड्रामा है... हमें कब्जे में ले रखा है... हम से तुमको कोई खतरा भी नहीं है... फिर...
विश्व - फिर भी तु जहरीला है... बीच बीच में जहर उगलता रहता है... तेरे सारे जहरीले दांत आज उखाड़ फेंकना है... (रोणा के बंदों से) देरी क्यूँ हो रही है... अपने गाँव जाना नहीं है क्या...
उन लोगों में से बाबुनी आगे आ कर रोणा के कंधे पर हाथ रखता है l रोणा पलट कर एक थप्पड़ लगा देता है l
रोणा - अबे हराम के जने... तेरी इतनी हिम्मत... मत भूल आज तुम लोग जो भी हो... वह मेरी मेहरबानी के वज़ह से... जिस काम के लिए तुम लोगों को लाया था... वह तो तुमसे हुआ नहीं... किया नहीं... मादरचोदों मेरे कंधे पर हाथ रखने की जुर्रत कर रहे हो...
इतने में कांगालु आकर रोणा के गाल पर एक झन्नाटेदार तमाचा मार देता है l थप्पड़ इतना जोरदार था कि पूरा का पूरा कमरा गूँज उठा l रोणा हैरानी से उन सबकी और देखने लगता है l
रोणा - मेरे टुकड़ों पर पलने वाले कुत्तों... आज मुझे ही काटने चले हो... खबरदार अगर किसीने कोई गुस्ताखी की... तो कहे देता हूँ... तुम में से कोई जिंदा वापस नहीं जाएगा...
तभी रोणा के पीछे से गुल्लू आकर पकड़ लेता है l रोणा गुल्लू के हाथ छुड़ाने की कोशिश करता है पर उस पर सभी नंगे एक साथ टूट पड़ते हैं l रोणा बहुत हाथ पैर चलाने लगता है पर फायदा कुछ नहीं होता l सभी मिलकर रोणा के बदन से कपड़े छोटे छोटे टुकड़ों में फाड़ फाड़ कर उसे नंगा कर देते हैं l रोणा के लिए यह एक बहुत बड़ा शॉक था l वह रेंगते हुए एक कोने में खुद में सिमटे हुए दुबक कर बैठा हुआ था l
विश्व - (सभी नंगों को) तुम लोग अब एक किनारे हो जाओ... (वे लोग सभी वही करते हैं) (विश्व एक कुर्सी लेकर रोणा के पास बैठता है) अनिकेत रोणा... सोचा था.. तेरी इलाज हिजड़ों ने अच्छी तरह से कर दी है... पर तु है कि मानता ही नहीं... तु भूल कैसे गया... अभी भी तेरी वीडियो का मीडिया वालों को इंतजार है... मैंने तुझे कहा था... एक को मारने की सोच रखा था... तु दुसरा मत बन... पर... तु है की मानता ही नहीं... कपड़ा चाहे किसी की उतरे... मर्जी के खिलाफ... वह बलात्कार से कम नहीं होता है... तुने ना जाने कितने बेबसों की कपड़े उतारे होंगे... यह उसीका सिला है... वह कहते हैं ना... कर्मा द बिच... (अपनी कुर्सी से उठता है) तु तब भी बेवक़ूफ़ था... आज भी है... मेरे खिलाफ तेरे अंदर की जहर ने... आज तुझे आखिर फंसा ही दिया... रोणा आज तुने अपनी आखिरी लाइफ लाइन मिटा दी है... अब तेरे पास कोई लाइफ लाइन नहीं बची है.... यह मेरा अंतिम चेतावनी है... या तो तु एसआईटी ऑफिसर श्रीधर परीड़ा की तरह खुद को गायब कर दे... या फिर नौकरी छोड़ कर चला जा... क्यूँ की तेरी मेरे खिलाफ अगली हरकत... जानलेवा होगा... तु ऐसी मौत मरेगा... जिसकी तुने सोचा भी ना होगा...
विश्व कमरे की दरवाजे के पास आता है आपने एजेंटों को कुछ फुसफुसा कर कहता है l उनमें से एक एजेंट सभी उतरे हुए कपड़ों को बाहर ले जाता है l थोड़ी देर बाद वाशिंग मशीन चलने की आवाज आती है l और कुछ एजेंट पानी के कुछ बॉटल लाकर वहीँ रख देते हैं l
विश्व - अभी तुम लोग मेरा काम ख़तम होने तक.. यहाँ नजर बंद हो... तब तक प्यास लगे तो पानी पियो... पेशाब या संढास जाना हो तो इसी कमरे में बिंदास करो... चार घंटे बाद तुम लोगों को कपड़े मिल जाएंगे... वह भी धुले हुए...
गुल्लू - विश्वा भाई... (रोणा को दिखाते हुए) इंस्पेक्टर साहब के कपड़े...
विश्व - फाड़े तो तुम लोगों ने ही है ना... जिसे इस इंस्पेक्टर को अपना दामाद बनाना हो... वह अपना कपड़ा इसे दहेज में दे सकता है...
यह सुन कर गुल्लू चुप हो जाता है l विश्व के एजेंट कमरे का दरवाजा बंद कर देते हैं l सभी अब बाहर आ चुके थे l तब तक सबके चेहरे से नकाब उतर चुका था l विश्व मुड़ कर देखता है सीलु मीलु जिलु और टीलु से बारी बारी गले मिलता है l बाकी सभी से वह पहले हाथ मिलाता है फिर गले से लगा लेता है l
विश्व - (सब से हाथ जोड़ कर) आप सबका शुक्रिया... काम मुश्किल था... पर आप लोगों ने इसे बखुबी अंजाम दिया...
उनमें से एक - क्या विश्वा भाई... आप तो शर्मिंदा कर रहे हो... हम सभी किसी ना किसी तरह से आप से बहुत कुछ पाया है... हक अदा करने का वक़्त आया तो पीछे कैसे रह सकते थे... आपके साथ तो भगवान भी है... तभी तो... बिना किसी एरर के प्लान कामयाब हो गया... वैसे विश्वा भाई अभी के लिए क्या काम है...
विश्वा - कोई काम नहीं... अभी तुम लोग अलग अलग हो कर यशपुर से निकल जाओ... आधे घंटे में धीरे धीरे यहाँ से खिसक लो...
टीलु - यह लोग तो चले जाएंगे.. तो फिर हम अभी क्या करें...
विश्व - वाशिंग मशीन को चलने दो... आधे घंटे बाद शायद बंद हो जाएगा... उससे पहले तुम लोग भी अपने अपने ठिकाने पर लौट जाओ...
मीलु - और तुम...
विश्व - मुझे मिलना है... उस आदमी से... जो मुझे केस के बारे में... बहुत कुछ इंफॉर्मेशन देना चाहता है... इसलिए हम शाम को सीलु के घर में मिलते हैं...
जिलु - तब तक क्या यह लोग...
विश्व - दिन के उजाले में... यह लोग बाहर नहीं निकलेंगे... इसलिए... घबराओ मत...
फिर विश्व उनसे आगे क्या करना है समझाने लगता है, विश्व के सब कुछ समझाने के बाद सभी विदा ले कर चले जाते हैं l विश्व भी ऑउट हाऊस से बाहर निकल कर यशपुर के यशवर्धन लाइब्रेरी की ओर जाने लगता है l क्यूंकि जो संदेशा उसे न्यूज पेपर से मिला था उसके अनुसार उसे लाइब्रेरी में एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिलने वाली थी l विश्व लाइब्रेरी में आता है l देखता है लाइब्रेरी एक कमरे वाला है l वहाँ पर एक लाइब्रेरियन बैठा हुआ था, बाकी पुरा का पुरा लाइब्रेरी खाली ही था l विश्व उसके पास जाता है और मिले संदेशा के तहत आज की नभवाणी साप्ताहिक पत्रिका माँगता है l
लाइब्रेरियन विश्व को पहले उपर से नीचे तक देखता है फिर ड्रॉयर से पत्रिका निकाल कर देता है l विश्व एक टेबल पर बैठ जाता है और पत्रिका खोलता है l पत्रिका के ऊपर उसे पेंसिल में लिखे नंबर दिखता है l विश्व उन्हें डिकोड करने लगता है l डिकोड में उसे एक और संदेश मिलता है l
“ लाइब्रेरियन से राजगड़ रियासत की गौरव गाथा नाम की किताब माँगो., उस किताब की अंतिम पृष्ठा में एक जेब होगी l"
बस इतना ही संदेश था l विश्व लाइब्रेरियन के पास जाकर वही किताब माँगता है l
लाइब्रेरियन - यहीं पढ़ना है... या कहीं लेकर जाना है...
विश्व - यहीं पढ़ना है..
लाइब्रेरियन - सी रैक के तीसरे रो में होगा... जाकर लेलो...
विश्व जाता है और वहां से किताब निकाल कर उसके आखिरी पन्ने में पाकेट को टटोलता है l उस पाकेट में उसे एक चाट मिलता है, उस चाट में सारे टेबल खाली थे l इसका मतलब यह हुआ कि इस किताब को किसीने अपने साथ नहीं लेकर गए थे l विश्व चाट को पलटता है, उस में एक छोटी पॉली पैक चिपकी हुई थी l विश्व उस पॉली पैक खोल कर देखता है, जिसमें यशपुर बैंक की रसीद और एक चाबी मिलता है जो शायद एक लॉकर की चाबी था l उस रसीद के साथ एक और काग़ज़ मिलता है जिसमें लिखा था
"सौवें पेज पर जो है उसे ले जाओ, और बाकी के लिए बैंक जाओ"
विश्व सौवें पन्ने को खोलता है, एक थ्री डी होलोग्राम वाला फोटो का चौकर में कटी हुई चौथा हिस्सा मिलता है l विश्व उस फोटो को गौर से देखता है पर उसे समझ में कुछ नहीं आता l फिर विश्व वह बैंक रसीद और चाबी को जेब में रख कर वह फोटो अपने शर्ट के अंदर डालता है l किताब को उसी रैक में रख कर लाइब्रेरियन के पर आकर गेस्ट लॉग बुक में साइन कर बाहर निकल जाता है l
बाहर आकर एक ऑटो लेता है और यशपुर बैंक पहुँचता है l बैंक में बैंक मैनेजर से मिलकर लॉकर खोलने की बात कहता है l बैंक मैनेजर पहले विश्व को घूर कर देखता है और फिर अपनी जगह से उठ कर विश्व के साथ लॉकर रुम में आता है l बैंक मैनेजर अपने तरफ से चाबी लगा कर लॉकर की एक लॉक खोलता है और उसके बाद लॉकर रुम से बाहर चला जाता है l विश्व अपना चाबी निकाल कर उस लॉकर में चाबी डाल कर खोलता है l लॉकर में फिर से वही थ्री डी फोटो का एक और हिस्सा मिलता है, साथ साथ तीन दिन पहले रिजर्वेशन किया गया सोनपुर जाने वाली एक बस का टिकट था l तारीख आज की थी l विश्व कुछ समझ नहीं पाता उसे क्या करना चाहिए l क्यूंकि बस के यशपुर छोड़ने का समय आज दो पहर साढ़े बारह बजे का था l विश्व घड़ी देखता है टाइम में और आधा घंटा बचा था l विश्व लॉकर में चाबी डाल कर वह फोटो और बस का टिकट लेकर बैंक से जल्दी निकल जाता है l एक ऑटो लेकर बस स्टैंड में पहुँचता है l बस छोड़ने ही वाली थी l विश्व भागते हुए बस चढ़ जाता है l कंडक्टर को टिकट दिखा कर सीट में बैठ जाता है l वह विंडो वाली सीट थी, बगल में एक आदमी बैठा हुआ था l बस में ज्यादा भीड़ थी नहीं, बसस्टैंड से निकल कर बस राजमार्ग पर आ जाता है l ठीक डेढ़ बजे रास्ते पर एक ढाबा में गाड़ी रुकती है l सभी यात्री गाड़ी से उतर कर ढाबे में खाने के लिए चले जाते हैं l विश्व भी उतर कर ढाबे के पास एक दुकान से पानी की बोतल लेकर पानी पीने लगता है l वह आँखे मूँद कर समझने की कोशिश करता है कि वह जो आदमी उसे कुछ संदेश देना चाहता है या उससे खेल खेल रहा है l दो फोटो मिले हैं, साफ था कि वे दो फोटो किसी एक बड़े फोटो के हिस्से थे l उसे जो जरूरत है क्या उन फोटो के टुकड़ों में है l वह आदमी विश्व से सीधे मिलने से कतरा क्यूँ रहा है l ऐसे सोच में खोया हुआ था कि बस हॉर्न देता है, विश्व वापस अपनी सीट पर बैठ जाता है l उसका को पैसेंजर अभी तक नहीं आया था l पर विश्व के सीट पर एक किताब पड़ा हुआ था l उस के कवर पेज पर लिखा हुआ था
"तुम्हारे लिए संदेश"
विश्व अपने सिर पर हाथ दे मारता है l इसका मतलब यह हुआ कि वही पैसेंजर उसे संदेश दे रहा था l टेंशन के मारे विश्व उस को पैसेंजर पर नजर नहीं डाल पाया था l विश्व वह किताब उठाता है, पन्ने पलटने लगता है, किताब के बीचों-बीच उसे एक और फोटो मिलता है, उस फोटो में सोनपुर रेल्वे स्टेशन के क्लॉक रूम की एक रसीद चिपकी हुई थी l
बस सोनपुर में पहुँचता है l विश्व स्टेशन के लिए ऑटो पकड़ता है l क्लॉक रुम जाकर रसीद दिखाता है l क्लॉकरुम का आदमी सौ रुपये के बदले विश्व को एक ब्रीफ केस देता है l विश्व वह ब्रीफ केस ले लेता है और खोलने की कोशिश करता है पर लॉक्ड था l विश्व के पास अब प्रॉब्लम यह थी कि उसके पास ब्रीफकेस की चाबी नहीं थी l विश्व और कोई कोशिश नहीं करता, ब्रीफकेस को लेकर वहाँ से निकलता है l बस स्टैंड में आकर वापस यशपुर का बस पकड़ता है l बस में बैठ कर ब्रीफकेस को दुबारा चेक करता है, उसे फॉर नंबर लॉकींग सिस्टम दिखता है l अब विश्व हैरान था, अब खोले तो खोले कैसे l वह सोचने लगा, कहीं वह बेवक़ूफ़ तो नहीं बन गया l वह आँखे बंद कर सोचने लगता है l इस बीच उसे कहीं ना कहीं हींट मिला होगा l वह उन पैटर्न्स को याद करने लगा जिस पैटर्न के जरिए उसे मैसेज मिलता रहा l पहले लाइब्रेरी, फिर बैंक, फिर बस अंत में क्लॉक रुम l कुछ सोचने के बाद लाइब्रेरी के लिए सात, बैंक के लिए चार, बस स्टैंड के लिए आठ और क्लॉक रुम के लिए नौ नंबर डालता है l लॉक खुल जाता है l ब्रीफकेस के अंदर उसे फिर से एक होलोग्राम वाला फोटो मिलता है l विश्व समझ जाता है कि चारो फोटो एक फोटो के चार हिस्से हैं और हो ना हो इन्हीं फोटो में कोई ना कोई इन्फॉर्मेशन है l
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रात के दस बजे
रोणा के क्वार्टर में अंधेरा था l बल्लभ स्विच टटोलने लगता है और ऑन करता है l उसे कमरे के बीचों-बीच रोणा नंगा बैठा हुआ था l रोणा को इस हालत में देख कर बल्लभ चौंक जाता है l
बल्लभ - पुरा दिन भर तु गायब रहा... पता किया तो... तु विश्व को लेकर अपने टीम के साथ यशपुर गया हुआ था... पर यह क्या... तु इस हालत में...
रोणा कोई जवाब नहीं देता, बस एक पत्थर की बुत की तरह बिना हिले डुले वैसे ही बैठा रहा l ना पलकें झपका रहा था ना ही कहीं किसी और देख रहा था l बल्लभ थोड़ा डर जाता है l डरते डरते पुकारता है
बल्लभ - अनिकेत... (इस बार रोणा बल्लभ की ओर देखता है) यह... क्या हाल बना रखा है... (रोणा की आँखे अंगारों की तरह दहकने लगता है)
बल्लभ - र.. रोणा...
रोणा - (बहुत ही गम्भीर आवाज में) तु इस वक़्त यहाँ क्यूँ आया है...
बल्लभ - क्या... क्या हुआ है आज...
रोणा - (उठ खड़ा होता है, पास से एक टवैल उठा कर अपने कमर पर बाँध कर, टेबल पर पड़े एक लिफ़ाफ़ा उठाता है और बल्लभ के पास आकर) यह मेरी लिव एप्लिकेशन है... जाकर हेड ऑफिस में पहुँचा देना...
बल्लभ - क्या हुआ है बता क्यूँ नहीं रहा...
रोणा - (आवाज को थोड़ी ऊँची कर) क्या सुनना चाहता है... विश्व ने मेरी गांड बिना मारे छोड़ दिया... वर्ना उसका प्रोग्राम कुछ ऐसा ही था... यही सुनना चाहता है ना...
बल्लभ - मतलब... विश्व ने तुझे और और तेरी टीम को...
रोणा - अबे काहे का टीम... (फिर रोणा सारी बातेँ बताने लगता है) देवगड़, झारसुगड़ा में जिन हराम खोरों पर एहसान किया था... उन्हें लाया था... विश्व को काबु करने... (दर्द भरी आवाज में) साले हराम के जने... (और कुछ कह नहीं पाता) विश्व और उसके गुर्गों हमें कमरे में बंद कर चले गए... वाशिंग मशीन बंद होने के लगभग आधे घंटे के बाद तक जब बाहर से कोई शोर शराबा सुनाई नहीं दिया तब मालुम हुआ... विश्व और उसके पट्ठे हमें वहीँ पर अकेला छोड़ कर चले गए थे... मेरे साथ के सारे बंदे दरवाजा तोड़ कर बाहर जाकर अपने अपने कपड़े पहन कर चले गए... हरामी साले... कोई पीछे मुड़ कर देखा भी नहीं... मैं निकल नहीं सकता था... नंगा जो था... जब अंधेरा हुआ तब बाहर आकर देखा... मेरी गाड़ी थी... सीट पर चाबी और मेरी मोबाइल रखी हुई थी... अंधेरा थोड़ी गहरी होने के बाद... मैं अपने क्वार्टर पर वापस आ गया...
बल्लभ - बोला था... सौ बार बोला था... तुझे तेरी उतावले पन ने... ऐसी गत बनाई है... तुझे अगर विश्व को दबोचना ही था... तो असली टीम लेकर जाता...
रोणा - श्श्श्श्... अब तुझे सब पता चल गया... अब तु जा यहाँ से...
बल्लभ - ठीक है... समझ सकता हूँ... तेरा मुड़ अभी ठीक नहीं है...(लिफ़ाफ़ा दिखाते हुए) पर यह छुट्टी..
रोणा - एक बात मेरी समझ में आ गई... मेरे इर्द गिर्द... विश्व ने अपना आदमी छोड़ रखा है... या यूँ कहें... मेरा कोई आदमी विश्व से मिला हुआ है...
बल्लभ - हाँ... ऐसा हो सकता है... तुझे क्या लगता है... कौन हो सकता है...
रोणा - मुझे सब पर शक़ हो रहा है... (कहते हुए बल्लभ को घूरते हुए देखने लगता है)
बल्लभ - व्हाट... तु मुझे घूर कर देख रहा है... कहीं..
रोणा - क्या करूँ... अभी तो मैं अपने साये पर भी शक़ कर रहा था... इसीलिए अंधेरे में बैठा हुआ था... तुने ही आकर लाइट जलाई...
बल्लभ - हैइ हैइ... तु पागल हो गया है...
रोणा - इसीलिए तो छुट्टी लिया है... ताकि यह पागलपन ठीक हो जाए...
बल्लभ - ओह गॉड...
इतना कह कर बल्लभ अपना माथा पीटते हुए वहाँ से चला जाता है l उसके जाते ही रोणा दरवाजा बंद कर देता है l फिर एक टेबल के पास आकर एक आधर कार्ड और एक वोटर आईडी कार्ड निकालता है l अपना मोबाइल निकाल कर फोटो उठाता है फिर व्हाट्सआप में टोनी नाम निकाल कर भेज देता है, फिर सोफ़े पर आकर छत की ओर घूरते हुए बैठ जाता है l कुछ देर बाद उसका फोन बजने लगता है, देखता है टोनी का कॉल था l
रोणा - देखा..
टोनी - जी... क्या यह मेरा नया आईडी है...
रोणा - हाँ... तेरा डॉक्यूमेंट सारे रेडी हैं... अब तु बता वह मेरा काम कहाँ तक पहुँची है...
टोनी - कुछ ही दिनों में... वह लड़की नंदिनी विश्व को सरप्राइज़ देने राजगड़ जाएगी... बीच रास्ते में ही... मैं उसे उठा लूँगा... और आप तक पहुँचा दूँगा...
रोणा - ह्म्म्म्म... पर यह लेन देन की प्रक्रिया... यशपुर के Xxxx गोदाम में होगी...
टोनी - यशपुर क्यूँ...
रोणा - तुझसे मतलब...
टोनी - सॉरी... पर मैं डेलीवरी करने के तुरंत बाद... वहाँ से निकल जाऊँगा...
रोणा - हाँ भोषड़ी के... तुझे कौनसा मेरा दामाद बनाना है...
कह कर रोणा फोन काट देता है और टी पोए की ओर देखने लगता है l टी पोए पर विश्व की फोटो लगी हुई थी l उसे देखते हुए रोणा बड़बड़ाने लगता है
रोणा - बहुत गलत किया तुने आज... मुझे जिंदा नहीं छोड़ना था... पर तुने छोड़ दिया... जैसे तुझे जिंदा छोड़ कर आज तक पछता रहा हूँ... वैसे ही तु पछताएगा... बहुत पछताएगा... अब मैं राजगड़ में नहीं रहूँगा... उसी गोदाम में... तेरी बंदी की चुत फाड़ कार्यक्रम पुरा करूँगा... फिर तुझे उसीके हाथों बुलवाऊंगा... तु तेरी औकात से बाहर जाकर मुझसे पंगे लिए हैं... वादा रहा... तेरी औकात तुझे दिखाऊंगा... तुझे तेरी बंदी की दल्ला बनाऊँगा... तेरे ही हाथों... उसकी नीलामी करवाऊंगा... बहुत गलत किया रे... आज तुने बहुत गलत किया... भुवनेश्वर की ज़िल्लत भुला सकता था... पर आज तुने उन राहों में नंगा गुजरने को मजबूर कर दिया... जिन राहों में.. मैं शेर की तरह आया जाया करता था... तुझे एक सबक भी सिखाऊंगा... किसी को इतना जलील नहीं करना... के उसकी जलालत... उसका जुनून बन जाए... तेरे किए हर जलालत का हिसाब मैं करूँगा... एक एक का हिसाब करूँगा...
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यशपुर की एक बस्ती की एक झोपड़ी l भले ही वह बाहर से एक झोपड़ी है पर अंदर से आराम दायक घर है l असल में यह तीन आपस में सटे हुए झोपड़ियों के एक कॉमन रुम था जिसे बाहर से कोई भी जान नहीं सकता था l उस कमरे में पांचों दोस्त एक टेबल के इर्द-गिर्द बैठे हुए हैं l विश्व के हाथ में एक चिट्टी था और पांचों के सामने टेबल पर विश्व के लाए चारों फोटो के टुकड़े पड़े हुए थे l सभी के सभी उन फ़ोटो को देख कर समझने की कोशिश कर रहे थे l क्यूंकि वह चार होलोग्राम वाले फोटो एक ही बड़े फोटो के चार बराबर टुकड़े थे l अब चारों टुकड़ों को ठीक से जोड़ देने पर कोर्ट में रखे न्याय की देवी की फोटो बन गई थी l आँखों में पट्टी, हाथ में न्याय की भार दंड और एक हाथ में तलवार l
टीलु - पिछले आधे घंटे से यही देखे जा रहे हैं... मेरे पल्ले में कुछ नहीं पड़ा...
जिलु - हाँ विश्वा भाई... क्या आपको अभी भी लगता है.. इन फोटो में कहीं छुपा हुआ संदेशा है...
मीलु - हाँ है... मुझे तो लगता है... है...
सीलु - हूँम्म... मुझे लगता है... या तो तुझे चश्मा लगा लेनी चाहिए... या फिर हमें... (विश्व को छोड़ कर सभी खि खि कर हँसने लगते हैं)
मीलु - देखा नहीं... यह फोटो थ्री डी इमेज वाला होलोग्राम वाला फोटो है... थोड़ा नजर सीधा और ध्यान से देखने पर... अंदर भगवत गीता उपदेश समय के... कृष्ण विश्वरुप छुपा हुआ था...
टीलु - हाँ तो... उसमें ऐसा क्या संदेशा है... (फिर अचानक वह कुछ समझते हुए पूछता है) अच्छा विश्वा भाई... कहीं वह भगवत गीता में छिपे किसी संदेश के बारे में तो नहीं कह रहा है...
सीलु - हाँ साले... अभी तेरा बल्ब जला लगता है... गीता में ही संदेश होगा... चूँकि विश्वा भाई को... महाभारत जो लड़ना है...
मीलु - हाँ तो विश्वा भाई की लड़ाई महाभारत से कौनसा कम है...
विश्व - तुम लोग क्या थोड़ी देर के लिए चुप रहोगे...
सभी चुप हो जाते हैं, विश्व चिट्ठी को पटक देता है और अपना माथा पकड़ कर आँखे बंद कर बैठ जाता है l कुछ देर बाद अपनी साँसे दुरुस्त करने के बाद अपने दोनों हाथों से चारों फोटो को उठा कर बल्ब की ओर ले जा कर देखने लगता है l तभी सीलु की नजर फोटो के पीछे पड़ता है l वह विश्व से पूछता है
सीलु - विश्वा भाई... इन फोटो के पीछे निचले कोने में... यह क्या है...
विश्व चारों फोटो को पलट देता है l देखता है चारों फोटो के नीचे कोने में कुछ निशान बने हुए हैं l वह अब उन फोटों के कोनों बने निशानों को जोड़ कर देखता है l अचानक विश्व की आँखों में एक चमक आ जाती है l
विश्व - अरे यह तो एक क्युआर कोड है... तुम लोगों के किसीके मोबाइल में क्युआर स्कैनर है क्या...
मीलु - हाँ है... मेरे मोबाइल पर है...
विश्व - लाओ दो जरा...
मीलु अपना मोबाइल विश्व को देता है l विश्व स्कैनर ऑन कर उस क्युआर कोड को स्कैन करता है l स्कैन होते ही एक लिंक डिस्प्ले होता है l उस लिंक पर क्लिक करने पर एक जीप फाइल दिखती है विश्व उस फाइल को डाउनलोड करता है l ब्रीफकेस में फोटो के साथ उसे एक काग़ज़ भी मिला था जिस पर एक नंबर लिखा हुआ था l विश्व उस जीप फाइल को खोलने के लिए उसी नंबर को पासवर्ड में ईस्तेमाल करता है l फाइल खुल जाता है l फाइल एक वॉयस रेकार्ड का था l विश्व उस वॉयस रेकार्ड को ऑन करता है l
"श्रद्धेय विश्व प्रताप,
अगर तुम मेरी यह वॉयस रेकार्ड सुन रहे हो तो बेशक तुम सही आदमी हो l तुम सोच रहे होगे मैं तुमसे सीधा बात करने के बजाय ऐसे अप्रत्यक्ष रुप से क्यूँ संदेश भेज रहा हूँ, तो ज़वाब यह है कि हम सब अभी नैपथ्य में हैं l जैसे जैसे तुम्हारा युद्ध आगे बढ़ता जाएगा, हम धीरे धीरे समक्ष आते जाएंगे l तुम इसे हमारा डर भी कह सकते हो l तुम उसी दिन से हमारे नजर में आ चुके थे, जब से तुमने अपनी वकालत की डिग्री हासिल कर ली थी l तब से हमें मालूम था, राजा साहब से कोई खुल्ला दुश्मनी ले सकता है तो वह केवल तुम ही हो l इसीलिए मैंने अपने दिल की तसल्ली के लिए इस तरह से खबर पहुँचाता रहा l खैर अब मुद्दे पर आते हैं 'रुप फाउंडेशन' याद तो होगा l हाँ क्यूँ नहीं आखिर तुम्हारे दिल का नासूर जो ठहरा, पर अगर तुम यह सोच रहे हो कि इस केस को दोबारा उछाल कर राजा साहब का कुछ बिगाड़ सकते हो तो तुम गलत हो l हाँ सर्कार ने नई एसआईटी का गठन कर दिया है पर फिलहाल के लिए अभी उनके हाथ कुछ नहीं लगेगा और केस वहीँ घूमता ही रहेगा l वज़ह, जयंत सर के अनुसार जितने भी गवाह थे या हो सकते थे, सभी के सभी या तो पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं या फिर सरकारी डॉक्टर के द्वारा पागल घोषित हो चुके हैं, जिनकी गवाही अदालत में मान्य नहीं होती l इतना तो कानून तुम जानते ही होगे l
जो जिन्हें तुम गवाह बना सकते हो या बना सकते थे यानी एक था पूर्व एसआईटी की अधिकारी श्रीधर परीड़ा, जैसे ही सर्कार ने उसे एसआईटी से हटाया उसने खुद को अंडरग्राउंड कर लिया है ताकि वह किसी भी तरह से राजा साहब के हत्थे ना चढ़ जाए l बाकी बचा इंस्पेक्टर रोणा और खुद राजा साहब, रोणा की गवाही को प्रतिपक्ष के वकील अदालत में नकार सकता है क्यूंकि उसे जयंत सर ने झूठा साबित कर दिया था बचे खुद राजा साहब इन सात सालों में अच्छी तरह से खुद को केस से अलग कर चुके हैं झूठे सबूतों के सहारे l तो अब किया क्या जाए l
विश्व जुर्म की राह पर चलने वाला, उस पर पलने वाला कभी जुर्म छोड़ नहीं सकता l वह नए नए राह तलाशते रहता है जुर्म करने के लिए l जाहिर है अभी भी जुर्म वैसे हो रहे हैं l खिलाड़ी वही है, बस प्यादें बदल गए हैं l पैसों की लुट मची हुई है बस तरकीबें बदल गई हैं l
रुप फाउंडेशन के द्वारा मनरेगा की पैसे, टेंडर के पैसे मुर्दों के आधार कार्ड के जरिए हुआ था l पर अबकी बार जो फ्रॉड हो रहा है कोई सोच भी नहीं सकता है l इसलिए इस बाबत मैं तुमको सारी इन्फॉर्मेशन देने जा रहा हूँ l तुम्हें इसका भंडाफोड़ करना है l कैसे करना है यह मैं तुम पर छोड़ता हूँ l इस राह में तुम खुद को अकेला मत समझना l वह एक पुराना शेर है
'मैं चला था जानीवे मंजिल को
लोग मिलते गए कारवाँ बनता गया'
तुम्हें आगे चलते हुए हर एक मोड़ पर एक राहगीर एक हमसफ़र मिलता जाएगा l अब विस्तृत से सुनो राजा साहब और उनके सपोलों के जरिए क्या गोरखधंधा चल रहा है l
तुम्हें याद होगा राजा साहब और ओंकार चेट्टी की दोस्ती तब हुई थी जब तुम पर मुक़दमा चल रहा था l तुम्हारी सजा मुकर्रर होने के बाद भी यश वर्धन ने यहीं राजगड़ में एक बहुत बड़ी ज़मीन ली ताकि वह उस पर अपनी निरोग हस्पताल का ब्रांच खोलने के साथ साथ निरोग फार्मास्यूटिकल्स फैक्ट्री खोल सके l इसके लिए सब्सिडी पर बहुत ही सस्ते में डेढ़ सौ एकड़ जमीन उन्हें मिली l अब हस्पताल और फैक्ट्री के लिए मार्केट से लोन उठाया गया, जाहिर है वह लोन यश वर्धन ने ही उठाया था पर उन्हीं दिनों में किसी कारण वश चेट्टी परिवार और क्षेत्रपाल परिवार के बीच दूरियां आ गई और चेट्टी परिवार खुद को इस प्रोजेक्ट से दुर कर लिए l ऐसे में राजा साहब यह डेढ़ सौ एकड़ जमीन यूँ जाने नहीं दे सकता था l इसीलिए उसने कुछ सरकारी अधिकारियों से मिलकर राजगड़ मल्टिपरपॉज को ऑपरेटिव सोसाईटी का पंजीकरण किया जिसे सर्कार ने सहसा पास भी कर दिया l उसने चालाकी से राजगड़ और आसपास के तकरीबन पच्चीस गाँव के लोगों को इस सोसाइटी में मेंबर बनाया और खुद को प्रेसिडेंट l यश वर्धन के लोन को चुकाने के लिए उसने सारे गाँव वालों की जमीनों को बैंक में मड़गैज कर दिया l हाँ तुम हैरान हो सकते हो जब राजगड़ के सारे जमीनों का मालिक क्षेत्रपाल है फिर गाँव वालों के पास जमीनें आई कहाँ से, तो इसमें भी बड़ा झोल है l आजादी के बाद सर्कार ने यह कानून बनाया था कि कोई भी निजी जमीन को दस एकड़ से ज्यादा नहीं रख सकता l उस दौरान तत्कालीन राजा ने सारी जमीनें किसानों को बांट देने की घोषणा कर वह सारी कागजातों को अपने पास रख लिया था l इसीलिए राजगड़ और उसके आसपास के लोगों को यह नहीं मालुम के जिस जमीन पर अपना खुन निचोड़ कर पसीना बना कर खेती कर रहे हैं, असल में उन्हीं जमीनों की वे स्वयं मालिक हैं l पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी ही जमीन पर खेती कर राजा साहब की तिजोरी भर रहे हैं l तो इस तरह से अब ज़मीन राजा साहब के हाथ आई और वह लोन का पैसा भी l अब सोसाइटी की बिल्डिंग खड़ा करने के लिए फिर से एक लोन उठाया गया l उसके लिए गाँव वालों के घरों को मड़गैज किया गया l गाँव वालों ने दस्तावेजों पर दस्तखत भी कर दिया बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे l वह लोन पैसा भी राजा साहब ने गटक लिया l
अब बात यह है कि वह बिल्डिंग कहाँ है l कोई बिल्डिंग नहीं है l फिर वह लोन का पैसा कैसे चुकाया जा रहा है l तो विश्व प्रताप, चूँकि यह मल्टीपल कोऑपरेटिव सोसाइटी है और जाहिर है इसे सरकारी सहायता मिल सकती है, इस लिए बिल्डिंग बनाने से लेकर रास्ता बनाने तक हर एक काम को मनरेगा के आधीन सर्कार द्वारा अनुमोदित करके एक साल में तीन सौ दिन की रोजगार स्कीम में लोगों से अपने फैक्ट्री में काम करवाता रहा है l और जो पैसे सर्कार से लोगों को मिलता रहा है उन्हें लोन की इंस्टॉलमेंट चुकाने के लिए डाइवर्ट किया जा रहा है l यानी लोगों के खाते में मनरेगा का पैसा आ रहा है, पर ईसीएस के जरिए वही पैसे उस लोन की इंस्टॉलमेंट में चला जा रहा है, जो उन्होंने किया ही नहीं l और राजा भैरव सिंह को बैठे बिठाए मजदूर मिल गए जिन्हें वह कोई मजदूरी नहीं दे रहा है और उसे पैसों पर पैसा फायदा हो रहा है l विडंबना देखो जो जमीन राजा साहब ने कब्जा कर बैठा है उस पर कोई बिल्डिंग भी नहीं है l इससे बैंक वालों को कोई परेशानी नहीं है, क्यूंकि उनके लोन पर उन्हें इंस्टॉलमेंट मिल जा रहा है l
अब आते हैं और एक ब्लंडर पर l बैंक में गाँव वालों के जमीन और घर की कोई भी मड़गैज पेपर नहीं है l वज़ह, कुछ महीने पहले सर्कार ने कोऑपरेटिव सोसाइटी की सारे लोन वाइभ आउट की घोषणा कर दी, उसके बावजूद कुछ सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत से केवल कागजात पर गाँव वालों को डिफॉल्टर बना दिया गया और वह सारी ज़मीन जायदाद की काग़ज़ भैरव सिंह ने अपने कब्जे में ले लिया है, और यह दिखाया जा रहा है गाँव वालों के तरफ से भैरव सिंह यह लोन चुका रहा है l पर असलियत में सरकारी लोन सर्कार ही चुका रहा है और लोन अमाउंट से लेकर सारी जमीन जायदाद पर भैरव सिंह सांप की तरह कुंडली मार रखा है l
अब तुम सवाल करोगे इतना जानने के बाद भी हम लोग क्यूँ कुछ नहीं कर पा रहे हैं l तो विश्व भैरव सिंह की यह दुनिया एक खूबसूरत मकड़ समान है l एक बार घुसे तो सिवाय फंसने के दूसरा कोई रास्ता नहीं है l इसलिए अब तुम पर ही दारोमदार है, मैं तुम्हें बस इतना कह सकता हूँ, भैरव सिंह की इस तिलिस्म को खुद सर्कार भी उखाड़ फेंकना चाहती है, पर कुछ मजबूरियों के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है l पर यह भी सच है तुम जैसे जैसे आगे बढ़ोगे वैसे वैसे तुम्हें अनुरूप सहायता सर्कार से मिलती जाएगी l"
Wah
Kala Nag Bhai,
Kya dhamakedar update diya he.........Rona ka randi-rona khatam hi nahi ho raha he.......do baar jivandan mil chuka tha usko fir bhi iski pichwade me sulemani kida shant nahi ho paya..........abki baar iska ant nishchint he...........
Bhairav singh ka makadjaal sach me kisi tilism se kam nahi he...............koi itna bhi shatir ho sakta he.........sarkar inki jeb me he..........jaise man me aaya vaise loot rahe he...........
Gazab ki update he bhai.........simply awesome