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Thriller "विश्वरूप" ( completed )

Kala Nag

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Akhil bharatiya

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👉एक सौ इकतालीसवां अपडेट
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दो दिन बाद

अपने क्वार्टर में शीशे के सामने खुशी से सिटी मारते हुए रोणा अपना खास खाकी शूट निकालता है और पहनने लगता है l खाकी टाई गले में बाँधता है l अपने कंधे के फीते पर चमकते हुए तीन सितारों वाली स्ट्रिप लगाता है l सितारों पर हाथ फेरते हुए सिटी बजाना बंद कर देता है, उसे तभी अदालत में एडवोकेट जयंत राउत के पूछे सवाल याद आता है
"कितने स्टार्स हैं आपके कंधे पर"

रोणा - तीन स्टार्स हैं... बुड्ढे... तीन स्टार्स... राजगड़ आदर्श थाने का आदर्श थानेदार हूँ... दो बार आदर्श थाने की प्रभारी के रुप में पुरस्कार जीत चुका हूँ... जिंदगी में कभी हारा नहीं था... पर पहली बार... तुने अदालत में मेरी इज़्ज़त उतारी... और छह महीने के लिए... सस्पेंड भी करवा दिया... पर तु... परलोक सिधार गया... और पीछे उस नासूर विश्वा को छोड़ गया... जो किसी बिच्छु की तरह... मुझे कानूनी और गैर कानूनी डंक जब चाहे तब मार कर चला जाता है... पर अब नहीं... (अपना कैप सिर पर पहनते हुए) एक वकालत की डिग्री क्या हासिल कर ली... डैनी की जुते चाट चाट कर... थोड़ी मार पीट क्या सीख ली... मेरे साथ गेम खेल रहा है... साले हरामी के पिल्ले... हर कुत्ते का दिन आता है... आज मेरा दिन है... आज तुझे और तेरे उस डाकिए को एक साथ पकुड़ुंगा... और राजा साहब के हवाले करूंगा... उस डाकिए को भले ही मगरमच्छ का निवाला बना दें राजा साहब... पर तुझे मैं जिंदा रखूँगा... क्यूँकी मुझे आज रंग महल मिल जाएगा... उस महल में तेरी छमीया की जब जब फाड़ुंगा... तब तब तु अपना जीभ लह लहाते हुए... मेरा तलवे चाटेगा... ही हा हा हा हा... हा हा हा हा हा...

कह कहा लगाते हुए हँसने लगता है l फिर वह अपनी हँसी को रोक कर फिर से अपनी टाई को कसने लगता है l फिर अपने क्वार्टर से बाहर निकलता है l बाहर उसे गाड़ी के पास उदय मिलता है l उदय उसे सैल्यूट मारता है l पहले उसे इग्नोर करते हुए रोणा अपने गाड़ी में बैठता है, फिर कुछ सोच कर गाड़ी से उतरता है और उदय के पास पहुँचता है l

रोणा - ओ उदय उदय उदय... आज मैं बड़ा खुश हूँ... बहुत ही खुश... बस तु दुआ कर... मैं जिस काम के लिये निकला हूँ... वह कामयाब हो जाए.... अगर ऐसा हो गया... तो... (रुक जाता है)
उदय - (हाथ जोड़ कर बड़ी जिज्ञासा भरी नजर से देखता है)
रोणा - तो मैं... स्पेशल सिफारिश कर... तुझे ग्राम रखी से... कांस्टेबल बना दूँगा...
उदय - (बहुत खुश होते हुए) जी ज़रूर... जी ज़रूर... मैं आपका यह उपकार जनम जनम तक नहीं भुलाऊंगा...
रोणा - (उदय के कंधे को थपथपाते हुए) शाबाश...

कह कर रोणा अपनी जीप में बैठ जाता है और गाड़ी स्टार्ट कर अपने थाने की ओर चल देता है l थाने के आगे अपनी जीप लगा कर बड़े एटीट्यूड के साथ उतरता है और मोबाइल निकाल कर फाइल फ़ोल्डर में नंदिनी और विश्व की तस्वीर निकाल कर देखने लगता l नंदिनी की फोटो को एनलार्ज कर स्क्रीन से विश्व को गायब कर देता है l एक कमिनी मुस्कराहट उसके चेहरे पर उभर आती है l रोणा का ध्यान टूटता है जब एक हवलदार उसके पास आकर सैल्यूट मारता है l रोणा थोड़ा सकपका जाता है और फिर मोबाइल को बंद कर अपनी जेब में रख देता है l

रोणा - क्या खबर है...
हवलदार - सर... दस बंदे आए हैं... देवगड़ से.... आपसे मिलना चाहते हैं...
रोणा - ह्म्म्म्म... चलो मिलते हैं...

दोनों थाने में आते हैं l दस बंदे जो बैठे हुए थे वह लोग खड़े होकर रोणा को सैल्यूट करते हैं l सब के सब एक सफेद टी शर्ट, खाकी पेंट और पुलिसिया लाल जुते पहने हुए थे l उनमें से एक बंदा आगे आकर रोणा के हाथ में एक लिफ़ाफ़ा देता है l रोणा लिफ़ाफ़ा खोल कर उसमें से एक चिट्ठी निकाल कर देखता है और उनसे कहता है

रोणा - ठीक है... जाओ अपनी गाड़ी में बैठो... मैं अभी दस मिनट में आता हूँ... (सभी मूड कर जाने को होते हैं कि) रुको सब... (सभी रुक जाते हैं) यह क्या... हम कोई पिटी करने नहीं जा रहे हैं... किसी खास को... आम लोगों के बीच गार्ड करने जा रहे हैं... जाओ सभी यह PT कपड़े उतार कर आम डेली यूज कपड़े पहन लो... ताकि भीड़ में किसी को भी यह ना लगे कि तुम सब पुलिस वाले हो...
सभी - जी सर...

सारे बंदे रोणा को सैल्यूट मार कर बाहर चले जाते हैं l सबके जाने के बाद रोणा अपने चेंबर में जाता है और कमरे में एक आलमारी खोलता है l घर से पहन कर आया अपना शूट निकाल कर आलमारी में रख देता है और साधारण सी शर्ट और पैंट निकाल कर पहन लेता है l जब अपने चेंबर से बाहर निकलता है तो, पाता है सारे स्टाफ उसे आँख और मुहँ फाड़े देख रहे हैं l

रोणा - क्या देख रहे हो...
हावलदार - सर... क्या कोई स्पेशल मिशन है...
रोणा - हाँ बैकुंठ... बहुत ही स्पेशल मिशन है...
बैकुंठ - सर... यह लोग क्या बाहर से इसीलिए आए हैं...
रोणा - हाँ...
बैकुंठ - सर... यह वह विश्व वाला मैटर ही है ना...
रोणा - हाँ बिल्कुल...
बैकुंठ - तो हमें क्यूँ सामिल नहीं किया आपने...
रोणा - (एक कमिनी मुस्कान दिखाते हुए) बैकुंठ... क्या करूँ मैं... बोलो... कैसे करूँ बोलो... विश्वा ने कोर्ट में एफिडेविट किया है... उसे राजगड़ थाने में से... किसी पर भी विश्वास नहीं है... इसीलिए तो दो कांस्टेबल डेपुटेशन में... वह भी बाहर से लाकर उसकी रखवाली किया जा रहा है... अब वह एडवोकेट विश्व प्रताप राजगड़ से निकल कर यशपुर जा रहे हैं... अब उनकी रखवाली तो करनी पड़ेगी ना... इसीलिए... हमने यह दस पैरा कमांडोज को डेपुटेशन में देवगड़ से बुलाया है.... ताकि विश्व प्रताप जहां भी जाएं... जिससे भी मिले आराम से मिले... और उन्हें कुछ तकलीफ ना हो... समझे...
बैकुंठ - जी सर...

रोणा मुस्कराते हुए बाहर चला जाता है l अपनी जेब से जीप की चाबी निकाल कर एक बंदे को देता है l वह बंदा रोणा की जीप स्टार्ट करता है l उस जीप में रोणा और ड्राइवर के साथ और दो बंदे बैठते हैं, और बाकी सात बंदे एक वैन में बैठ जाते हैं l दोनों गाड़ियां थाने से निकल कर गाँव में से होते हुए दुसरी तरफ आखिरी छोर यानी उमाकांत सर जी के घर के बाहर रुकती है l घर के बाहर बैठे जगन्नाथ और हरिश्चंद्र दोनों रोणा को देख कर सैल्यूट मारते हैं l रोणा उनके सैल्यूट को नजरअंदाज कर आँखों के इशारे से विश्व के बारे में पूछता है l जगन्नाथ भी उसे इशारे में विश्व अंदर होने की बात कह देता है l रोणा गाड़ी से उतर कर घर की अंदर जाने लगता है कि विश्व तभी टीलु के साथ बन ढंन के बाहर आ रहा था l


रोणा - हैलो... एडवोकेट महोदय... (रोणा को यूँ अपने सामने अचानक देख कर विश्व चौंकता है) किधर चल दिये... यूँ बन ढंन कर...
विश्व - (हैरानी भरे लहजे में) इंस्पेक्टर साहब आप... यहाँ... इस वक़्त...
रोणा - क्या करें एडवोकेट बाबु... क्या करें... हम तो चैन से जिए जा रहे थे... आपने ही... यह एफिडेविट वाला कांड करके... हमारा जीना हराम कर दिया...
विश्व - क्यूँ क्या हुआ... आपने तो अपनी ड्यूटी खूब निभाई है... मेरे यहाँ दो कांस्टेबलों की तैनाती कर...
रोणा - पर यह तैनाती सिर्फ राजगड़ के लिए ही है... अब आप यशपुर निकलेंगे तो स्पेशल ड्यूटी बजानी पड़ेगी ना...
विश्व - (चुप रहता है)
रोणा - क्यूँ क्या हुआ... लगता है... आप हमसे नाराज हो गए...
विश्व - इंस्पेक्टर साहब... मैं सिर्फ अकेला हूँ... जब कि आप पुरे फोर्स के साथ आए हैं...
रोणा - क्या करें आपकी जान ही इतनी क़ीमती है... घबराईए नहीं... आप यशपुर ही क्यूँ... जहां भी जाना चाहें जाएं... यह हमारे सारे बंदे... आपके इर्द-गिर्द रहेंगे... पब्लिक में घुल कर...
विश्व - नहीं... ऐसा नहीं हो सकता....
रोणा - क्यूँ.. क्यूँ नहीं हो सकता...
आप इनकी और मेरी निगरानी में ही... आप जहां चाहें जाएं... जिससे चाहें मिलें... क्यूँ के... आज के दिन यह लोग... और मैं आपके साथ ही रहेंगे...
विश्व - आपको कैसे मालुम हुआ... मैं आज यशपुर जा रहा हूँ...
रोणा - वह सोलै वाला डायलॉग है ना... हमारे जासूस चारों और फैले हुए हैं...
विश्व - मत भूलिए... वह डायलॉग असरानी ने कहा था..
रोणा - हाँ पर यहाँ गब्बर सिंह कह रहा है...
विश्व - तो फिर मेरा प्रोग्राम कैंसिल...

विश्व इतना कह कर अंदर चला जाता है l पर टीलु वहीँ खड़ा रह जाता है l थोड़ी देर के लिए रोणा का चेहरा उतर जाता है l विश्व के ना जाने से उसका प्लान चौपट हो सकता है l उसे लगने लगता है शायद उसने थोड़ी ओवर स्मार्टनेस दिखा दी l विश्व को किसी भी तरह आज के आज राजगड़ से बाहर ले जाना होगा l तभी उसका प्लान कामयाब हो पाएगा l इसलिए वह विश्व से बात करने अंदर जाता है l अंदर विश्व एक चेयर पर बैठा हुआ था l

रोणा - क्या हुआ... तुम ने अपना प्लान कैंसिल क्यूँ किया... कोई ई-लीगल काम था क्या... जो पुलिस वालों के होते हुए... तुम कर नहीं सकते...
विश्व - मुझे आपके या आपके थाने के पुलिस वालों पर भरोसा नहीं है...
रोणा - जानता हूँ... तभी तो मेरे साथ जो बंदे आए हैं... वे लोग देवगड़ डिविजन के... ओडिशा स्पेशल आर्म्ड पुलिस के पैरा कमांडोज हैं...
विश्व - (हैरानी भरे लहजे में) मुझ जैसे... एक आम आदमी के लिए... पैरा कमांडोज... यह बात कुछ हजम नहीं हो रही है...
रोणा - भई... एफिडेविट तुमने करा है... तुम कोई गैर मामूली तो हो नहीं... न्यूज पेपर हो या टीवी... हर जगह तुम ही तुम छाए हुए हो... आरटीआई एक्टिविस्ट... एडवोकेट और ना जाने क्या क्या...
विश्व - ठीक है फिर... अगर बात ऐसी है... तो मेरे साथ आप अकेले चलिए... आप उन लोगों को वापस भेज दीजिए...
रोणा - ना... ऐसा तो नहीं हो सकता... सरकारी ऑर्डर तुमने निकलवाई है... और हम ठहरे... सरकारी मुलाजिम... (लहजा थोड़ा कड़क कर) अब तुम चाहो या ना चाहो... यह लोग आज तुम्हारे साथ रहेंगे... आफ्टर ऑल हम पब्लिक सर्वेंट जो ठहरे... ऑफ द पीपुल.. बाय द पीपुल.. फॉर द पीपुल..
विश्व - यह डेमोक्रेसी में गवर्नमेंट के लिए कहा जाता है...
रोणा - हाँ मालुम है... और हम पार्ट ऑफ द... गवर्नमेंट हैं... और हाँ आज कोई चालाकी नहीं करना... क्यूँकी आज के लिए.. मैंने स्पेशल ऑर्डर निकलवाया है... अगर इस वक़्त तुम मेरे कहे मुताबिक नहीं चले... तो ऐसी रिपोर्ट बनाऊँगा की... तुम कुछ दिनों के लिए ही सही... मेरे थाने में मेहमान बन कर रहोगे...
विश्व - (कुछ सोचने लगता है, कुछ देर के बाद) ठीक है... मुझे उन पैरा कमांडोज साथ... इंट्रोड्युस करायीये...
रोणा - अभी कराए देते हैं...

रोणा बाहर जाकर सभी पैरा कमांडोज को अंदर बुलाता है l सभी रोणा के साथ अंदर आते हैं l विश्व अपनी जगह से खड़ा होता है, रोणा एक एक कर के सबका विश्व से परिचय करवाता है l

रोणा - तो... क्या फैसला किया तुमने... (विश्व कुछ सोचने लगता है) देखो नवा नवा वकील... तुम हमारे साथ चलो... गाँव में कोई सीन ना करो... तो तुम्हारे लिए अच्छा ही रहेगा... और हाँ... अपने ज़ज्बात... हाथ पैर पर काबु बनाए रखो... यह लोग... सरकारी मिशन पर हैं... तुम्हारा एक भी गलत कदम... तुम्हारे खिलाफ जा सकता है...
विश्व - ह्म्म्म्म... बहुत तैयारी के साथ आए हो... इंस्पेक्टर अनिकेत रोणा....
रोणा - (एक कुटिल मुस्कराहट के साथ) कोई शक़...
विश्व - (सरेंडर करने के अंदाज में) बात मेरी समझ में आ गई... मैं चाहे जाऊँ या ना जाऊँ... तुम लोग आज मेरे साथ चिपके रहोगे... चूंकि सरकारी फरमान है... मैं कम से कम आज के दिन... मैं तुम लोगों के खिलाफ... जा नहीं सकता....
रोणा - वाकई... बहुत समझदार हो गए हो... (लहजा कड़क करते हुए) चलें...


विश्व चुप चाप उनके साथ बाहर जाने लगता है l घर के बरामदे से उतरते वक़्त टीलु पायदान उतरने लगता है तो रोणा उसे रोक कर गाने के अंदाज में

रोणा - विश्व के साथ यशपुर में तुम्हारा क्या काम है...
पैरा कमांडोज है साथ तो तु क्यूँ परेशान है...

विश्व उसे सिर हिला कर अपना सहमती देता है l पहले वाले जीप में विश्व के साथ रोणा ड्राइवर और दो कमांडोज बैठ जाते हैं l पिछले गाड़ी में बाकी सात कमांडोज l गाड़ी राजगड़ से निकल कर यशपुर के रास्ते पर धुल उड़ाते हुए दौड़ने लगती है l एक किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अचानक रोणा के कान में पीछे वाली गाड़ी की हॉर्न सुनाई देती है l रोणा अपनी गाड़ी को रुकवाता है l

अपनी गाड़ी से उतर कर पीछे वाली गाड़ी के पास आता है, देखता है उनकी गाड़ी के इंजन में कोई प्रॉब्लम आई थी शायद l स्टार्ट ही नहीं हो रही थी l रोणा चिढ़ कर उस वैन के ड्राइवर से पूछता है

- और कितना वक़्त लगेगा...
ड्राइवर - पता नहीं सर... ज्यादा से ज्यादा... एक घंटा...
रोणा - ठीक है... मैं तुम लोगों का... सर्कल आउट हाउस में इंतजार कर रहा हूँ... अगर एक घंटे में नहीं आए... तो हम चारों ही विश्व को लेकर निकल जाएंगे...
ड्राइवर - कोई मसला नहीं है सर... हम एक घंटे से पहले ही... सर्कल आउट हाउस में पहुँच जाएंगे...

रोणा अपनी गाड़ी में वापस आकर बैठता है और ड्राइवर से सर्कल आउट हॉउस चलने को कहता है l ड्राइवर गाड़ी को ड्राइव करते हुए बीस मिनट बाद यशपुर के सर्कल ऑउट हॉउस में दाखिल होता है l विश्व उस ऑउट हॉउस को अच्छी तरह से मुआयना करता है l

रोणा - आओ एडवोकेट साहब... जब तक दुसरी टीम नहीं पहुँचती... तब तक क्यूँ ना अंदर कुछ गुफ़्तगू करें..
विश्व - जगह अच्छी चुनी है इंस्पेक्टर साहब... यह वह जगह है ना... जहां... सरकारी किडनैपिंग के बाद छुपा कर रखा जाता है... अरेस्ट नहीं दिखाया जाता...
रोणा - (आस्तीन से रिवॉलवर निकाल कर) जानता हूँ... तु बहुत तेज हो गया है... दिमाग से भी... और शरीर से भी... पर यहाँ कोई होशियारी मत करना... सीधे अंदर चल... आज मेरा दिन है विश्वा... इसलिए चुप चाप अंदर चल... वर्ना यकीन मान... मुझे गोली मारते हुए... कोई हिचक नहीं होगी...

कमांडोज में से एक भागते हुए उस हॉउस का दरवाजा खोलता है l विश्व देखता है अंदर एक कमरे में आमने सामने दो ही कुर्सी पड़े हैं l रोणा विश्व की पीठ पर रिवॉलवर की नाल लगा कर धकेलते हुए एक कुर्सी पर बिठा देता है और खुद विश्व की सामने वाली कुर्सी पर बैठ जाता है l इतने में वह तीन कमांडोज रोणा के पीछे आकर खड़े होते हैं और अपनी अपनी जेब से रिवॉलवर निकाल कर विश्व की ओर तान देते हैं l अब रोणा शरारती मुस्कान मुस्कराते हुए अपनी रिवॉलवर को आस्तीन में रखता है l

रोणा - आखिर... तु आया ना मेरे कब्जे में... (अचानक रोणा का चेहरा और आँख लाल हो जाता है) साले हरामजादे... आज एक एक का हिसाब लूँगा... माँ कसम एक एक का हिसाब लूँगा... जब से जैल से छुटा है... साले हरामी... मेरी लिए जा रहा है... बजाये जा रहा है... आज तुझे पुरे सुध के साथ लौटाऊँगा...
विश्व - यह अचानक तुम स्प्लीट पर्सनालिटी के शिकार कैसे हो गए... भूल गए... तुम मुझे यशपुर क्यूँ लेकर आए हो...
रोणा - नहीं भुला हूँ... सब याद है मुझे... तेरे साथ साथ... उस हरामी अज्ञात को भी धर दबोचना है... इसीलिए तो... तु अब तक जिंदा है... नहीं तो...
विश्व - नहीं तो तु मेरा झांट की बाल उखाड़ना तो दुर... मोड़ भी नहीं पाता... ना अभी पाएगा...
रोणा - अच्छा... हा हा हा हा...

हँसने लगता है, उसके साथ आए वह तीन बंदे भी हँसने लगते हैं l हँस लेने के बाद बड़े अदब से विश्व के सामने अपना पैर मोड़ कर घुटने पर रखता है l

रोणा - (खिल्ली उड़ाते हुए) तुझे क्या लगा... डैनी का चेला है... बड़ा लड़ाकू है... तो हमको यहाँ निपटा कर चला जाएगा... (अचानक गुस्से वाले लहजे में) गोली से तो तेज तु हो नहीं सकता... और मत भुल... तेरा एनकाउंटर भी हो सकता है...
विश्व - (हल्का सा मुस्कान लाते हुए) रोणा... गोली से कोई तेज नहीं हो सकता... माना... पर गोली चलाने के लिए जिगर चाहिए...
रोणा - ओ... तो तु इन लोगों का जिगर देखना चाहता है...
विश्व - हा हा हा हा...

अब विश्व हँसने लगता है l विश्व को हँसते देख कर रोणा हैरानी से विश्व की ओर देखने लगता है फिर मुड़ कर अपने बंदों को देखने लगता है l अंदर ही अंदर रोणा को डर लगने लगता है l वह धीरे से अपना कुर्सी पीछे की ओर थोड़ा सा खिसकाता है l विश्व हँसते हुए ही पूछता है

विश्व - इनकी नहीं बे... भुतनी के तेरी... (उसी मुस्कुराहट के साथ) भुवनेश्वर में तो तेरे से गोली चली नहीं... तो इन छपरीओं को लेकर आया है... मेरी एनकाउंटर करने... वह भी... स्मगल्ड चाइनीज माउजर के साथ...
रोणा - (आँखे फैल जाता है) मतलब तु समझ गया... यह लोग पुलिस वाले नहीं है...
विश्व - हाँ बे ढक्कन... (एक बंदे की ओर इशारा करते हुए) यह... यह देवगड़ रेड लाइट एरिया का गुंडा... हफ्ता वसुली करता है... नाम है... गुल्लू... (और एक बंदे की ओर इशारा कर) यह देवगड़ इंडस्ट्रीयल एरिया में मटका चलाने वाला... कांगालु... (आखिरी बंदे की ओर इशारा कर) यह देवगड़ का मशहूर जेब कतरा बाबुनी...
रोणा - (अपनी कुर्सी से हैरानी से उठ कर खड़े होते हुए) तु इन सब के बारे में कैसे जानता है...
विश्व - मैं इन्हें इसलिए जानता हूँ... के मैं तेरी जात और और औकात... अच्छी तरह से जानता हूँ.... तु मेरा एनकाउंटर कर ही नहीं सकता... क्यूँकी उसके लिए... तुझे सरकारी बंदूक इस्तेमाल करना पड़ता... और सरकारी गोली खर्चने पड़ते... इसीलिए... तु यह प्लान किया है... किसी तरह... मुझसे इनकी पुरानी दुश्मनी एस्टाब्लीश कर... मुझे मरवाने की सोच रखा है...

रोणा अपनी हलक से थूक निगलता है l वह तीन बंदे अब पुरी तरह से विश्व की ओर ऋण निशाना लगाए खड़े थे, तभी बाहर एक वैन आकर रुकती है l कुछ लोगों की अंदर आने की आहट होती है l बिना पीछे मुड़े रोणा पूछता है

रोणा - दलाई... तुम लोग आ गए...
बाहर से आवाज आती है - हाँ सर... हम आ गए...
रोणा -(विश्व से) हाँ... हरामजादे हाँ... तु सही समझा... पर तुझे मारना... मेरा प्लान बी है... प्लान ए नहीं... प्लान ए के तहत तुझे अपने पिंजरे में रखने के लिए... तुझे कुत्ते की तरह अपने तलवे चटवाने के लिए... तु क्या समझता है... तेरी सुरक्षा के लिए जो दो कांस्टेबल क्यूँ लगाए थे... उन्हीं के हाथों से मैंने रिपोर्ट बनाया है... के तुझे आज किसी से मिलने जाना है... इसी बहाने तुझे मैंने एक ऑफिशियल ऑर्डर बना कर यहाँ यशपुर लेकर आया हूँ... यहीं थोड़ी देर बाद तेरा गुमशुदगी का रिपोर्ट... थाने में दर्ज होगी... पर तु रहेगा मेरे कब्जे में... मेरे पिंजरे में... फिर कुछ दिनों बाद तेरी लाश सरकार को मिलेगी... पर तुझे मैं मारूंगा नहीं... बल्कि तु खुद अपनी जिंदगी को कोसते हुए... अपनी मर्दानगी पर थूकते हुए... खुदकुशी करेगा... समझा...
विश्व - ह्म्म्म्म प्लान तो बहुत बढ़िया है... तो तु इन छपरीओं के दम पर... मुझे काबु करेगा...
रोणा - बेहतरी इस में है के तु कोई हरकत ना करे... वर्ना... प्लान बी ऐक्टिव हो सकता है... क्यूँकी तु अब मेरे आदमियों से घिरा हुआ है... और उनके हाथों में.. चीनी कट्टे हैं... सोच ले...
विश्व - सोच लिया...
रोणा - (मुस्कराते हुए) क्या सोचा है तुने... मरेगा या... मेरे जुते चाटेगा...
विश्व - तु अपनी जुते इन छपरीयों से चटवा ले... मैं शेर हूँ... तेरे खुन का प्यासा हूँ... तेरा खुन ही पीयूंगा...
रोणा - मेरे दस बंदों के बीच तु घिरा हुआ है... वह भी हतीयार बंद... पर अकड़ ऐसी... जैसे तु हमारी लेने वाला है...
विश्व - हूँ तो... देख ना... अड्डा तेरा... आदमी तेरे... फिर भी मैं बैठा हुआ हूँ... और तुम सब खड़े हुए हो...

रोणा कुछ कह नहीं पाता, गुस्से में उसका जिस्म थर्राने लगती है l साँसे इतनी जोर से लेने लगता है कि नथुने उपर नीचे होने लगते हैं l अपने आदमियों को हुकुम देता है

रोणा - मार दो हरामजादे को... (कोई हरकत नहीं होती, पीछे मुड़ कर) अरे खड़े खड़े देख क्या रहे हो मार दो... इस... (रुक जाता है)

रोणा देखता है उसके तीनों बंदों के कनपटी पर पीछे से तीन नकाबपोश लोग माउजर लगा रखे हैं, यह देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है, उसे कुछ सूझता नहीं है तो अपने आस्तीन से रिवाल्वर निकाल कर विश्व पर तान देता है l पर यह क्या पलक झपकने भर की देरी थी अब रिवाल्वर विश्व के हाथ में थी l रोणा को यकीन ही नहीं हो रहा था l कुछ सेकेंड पहले जो रिवाल्वर उसके हाथ में थी अब विश्व के हाथ में थी l

विश्व - तु अभी भी नहीं समझा... रास्ते में वैन ख़राब नहीं हुई थी... उसे खराब मेरे बंदों ने किया था... उसमें जितने भी छपरी थे... उन सबको बड़े हिफाज़त से यहाँ लेकर आ गए हैं... अब मैं तुम लोगों के कब्जे में नहीं हूँ... तुम सब अब... मेरे कब्जे में हो... और रोणा... तु तो जानता है ना... रिपोर्ट अब मैं बना सकता हूँ... और अदालत में पेश कर सकता हूँ...

विश्व रोणा की कलर पकड़ कर रोणा को अपनी जगह बिठा देता है और इशारे से रोणा के आदमियों को रोणा के पीछे खड़े होने के लिए कहता है l वह सारे लोग वही करते हैं l

विश्व - तुझे कहा था... औरत तु है नहीं... मर्द तु रहा नहीं और... हिजड़ों में तेरी भर्ती होगी नहीं... फिर साले... तु किस बात रौब झाड़ रहा है बे...
रोणा - देख विश्वा....
विश्व - श्श्श्श्... अब मैं कहता हूँ तु सुन... राजगड़ में तु अपने चेलों के जरिए नजर रख रहा था... आज के दिन अगर मैं छुप के भी निकलता... तो तेरे जासूस मुझे ढूंढने निकल जाते... जिसके वज़ह से... मेरे उस मोहसिन की जान और पहचान दोनों खतरे में पड़ सकती थी... इसीलिये... तेरे उन दो कांस्टेबलों के जरिए... मुझे ऑफिशियली राजगड़ से निकलने के लिए... तेरे पास आधी अधुरी खबर भिजवाया था... (यह सुन कर रोणा सकते में आ जाता है) तुने भी पिछली बार की तरह... अंगुल ट्रेनिंग स्कुल की तरह एक ऑर्डर निकलवाई... पर उसके साथ साथ एक फेक ऑर्डर भी बनाया... ताकि एसकॅट के बहाने... इन छपरीयों के जरिए... मुझे काबु में लेने के लिए... पर तेरी चालाकी तुझ पर ही भारी पड़ गई ना... (विश्व अपने एक बंदे से पूछता है) एजेंट वन..
वन - येस बॉस...
विश्व - इस घर का मुआयना किया...
वन - जी हो गया है...
विश्व - कोई काम की चीज़...
वन - कुछ नहीं बॉस... एक फ्रिज और एक वाशिंग मशीन है...
विश्व - इतनी बड़ी चीज़ है... और तुम कह रहे हो... कोई काम की चीज़ नहीं है... (रोणा के पीछे खड़े बंदों से) अब तुम सब बिना देरी किए... अपने अपने कपड़े उतरो... जल्दी...

वह लोग एक दूसरे को देखने लगते हैं l विश्व के आदमी सब उन पर रिवाल्वर तान देते हैं, उस पर भी जब वह लोग अपने कपड़े नहीं उतार रहे थे तब एजेंट वन जाकर उनमें से एक को जोरदार थप्पड़ मार देता है l उस झन्नाटेदार थप्पड़ के गूंज से ही सभी रोणा के बंदे अपने अपने कपड़े उतार कर जांघीये में खड़े रहते हैं l

एजेंट वन - अबे ढक्कनों... सारे कपड़े उतारने को बोला बॉस ने... उतारो नहीं तो... तुम लोगों के नो एंट्री पॉइंट में... गोली एंटर कर दूँगा...
गुल्लू - पर नंगे...
एजेंट वन - कौनसा फेशन परेड में जा रहे हो... सब के सब.. लौड़े वाले हो... शर्माना किससे बे... अब ज्यादा बकैती नहीं... या तो चड्डी उतारो... या फिर पर लोक सिधारो...

सब के सब फटाफट अपनी अपनी जांघीया उतार फेंक देते हैं l विश्व इशारा करता है तो विश्व का एक एजेंट जाकर उन सबके कपड़े इकट्ठा करने लगता है l विश्व रोणा की ओर देखता है तो एजेंट वन विश्व से पूछता है l

एजेंट वन - इसे ऐसे क्या देख रहे हो बॉस...
विश्व - सोच रहा हूँ... इन नंगों के बारात में... यह कपड़े वाला दूल्हा क्यूँ...
रोणा - ऐ... खबर दार... ऐसा सोचना भी मत...
एजेंट वन - सोचना भी मत... क्या सोचना भी मत... अरे बॉस ने ऑल रेडी सोच लिया है... चल कपड़े उतार...
रोणा - मर जाऊँगा... मगर...
एजेंट वन - तेरी मर्जी पूछा ही कौन...
रोणा - हाथ तो लगा के देख...

एजेंट वन रोणा की ओर बढ़ रहा था कि विश्व उसे रोक लेता है और रोणा के जो बंदे अपने अपने कपड़े उतार कर नंगे खड़े थे उनकी ओर देख कर

विश्व - (सारे नंगों को) अगर तुम लोग कपड़ों में अपने गाँव जाना चाहते हो... तो तुम लोग इसके कपड़े उतारो... फाड़ के उतारोगे या खोल के... यह तुम्हारी मर्जी...

सभी नंगे पहले एक दुसरे को देखते हैं और फिर सभी रोणा की ओर देखने लगते हैं l रोणा गुस्से से विश्व से

रोणा - ऐ... यह क्या ड्रामा है... हमें कब्जे में ले रखा है... हम से तुमको कोई खतरा भी नहीं है... फिर...
विश्व - फिर भी तु जहरीला है... बीच बीच में जहर उगलता रहता है... तेरे सारे जहरीले दांत आज उखाड़ फेंकना है... (रोणा के बंदों से) देरी क्यूँ हो रही है... अपने गाँव जाना नहीं है क्या...

उन लोगों में से बाबुनी आगे आ कर रोणा के कंधे पर हाथ रखता है l रोणा पलट कर एक थप्पड़ लगा देता है l

रोणा - अबे हराम के जने... तेरी इतनी हिम्मत... मत भूल आज तुम लोग जो भी हो... वह मेरी मेहरबानी के वज़ह से... जिस काम के लिए तुम लोगों को लाया था... वह तो तुमसे हुआ नहीं... किया नहीं... मादरचोदों मेरे कंधे पर हाथ रखने की जुर्रत कर रहे हो...

इतने में कांगालु आकर रोणा के गाल पर एक झन्नाटेदार तमाचा मार देता है l थप्पड़ इतना जोरदार था कि पूरा का पूरा कमरा गूँज उठा l रोणा हैरानी से उन सबकी और देखने लगता है l

रोणा - मेरे टुकड़ों पर पलने वाले कुत्तों... आज मुझे ही काटने चले हो... खबरदार अगर किसीने कोई गुस्ताखी की... तो कहे देता हूँ... तुम में से कोई जिंदा वापस नहीं जाएगा...

तभी रोणा के पीछे से गुल्लू आकर पकड़ लेता है l रोणा गुल्लू के हाथ छुड़ाने की कोशिश करता है पर उस पर सभी नंगे एक साथ टूट पड़ते हैं l रोणा बहुत हाथ पैर चलाने लगता है पर फायदा कुछ नहीं होता l सभी मिलकर रोणा के बदन से कपड़े छोटे छोटे टुकड़ों में फाड़ फाड़ कर उसे नंगा कर देते हैं l रोणा के लिए यह एक बहुत बड़ा शॉक था l वह रेंगते हुए एक कोने में खुद में सिमटे हुए दुबक कर बैठा हुआ था l

विश्व - (सभी नंगों को) तुम लोग अब एक किनारे हो जाओ... (वे लोग सभी वही करते हैं) (विश्व एक कुर्सी लेकर रोणा के पास बैठता है) अनिकेत रोणा... सोचा था.. तेरी इलाज हिजड़ों ने अच्छी तरह से कर दी है... पर तु है कि मानता ही नहीं... तु भूल कैसे गया... अभी भी तेरी वीडियो का मीडिया वालों को इंतजार है... मैंने तुझे कहा था... एक को मारने की सोच रखा था... तु दुसरा मत बन... पर... तु है की मानता ही नहीं... कपड़ा चाहे किसी की उतरे... मर्जी के खिलाफ... वह बलात्कार से कम नहीं होता है... तुने ना जाने कितने बेबसों की कपड़े उतारे होंगे... यह उसीका सिला है... वह कहते हैं ना... कर्मा द बिच... (अपनी कुर्सी से उठता है) तु तब भी बेवक़ूफ़ था... आज भी है... मेरे खिलाफ तेरे अंदर की जहर ने... आज तुझे आखिर फंसा ही दिया... रोणा आज तुने अपनी आखिरी लाइफ लाइन मिटा दी है... अब तेरे पास कोई लाइफ लाइन नहीं बची है.... यह मेरा अंतिम चेतावनी है... या तो तु एसआईटी ऑफिसर श्रीधर परीड़ा की तरह खुद को गायब कर दे... या फिर नौकरी छोड़ कर चला जा... क्यूँ की तेरी मेरे खिलाफ अगली हरकत... जानलेवा होगा... तु ऐसी मौत मरेगा... जिसकी तुने सोचा भी ना होगा...

विश्व कमरे की दरवाजे के पास आता है आपने एजेंटों को कुछ फुसफुसा कर कहता है l उनमें से एक एजेंट सभी उतरे हुए कपड़ों को बाहर ले जाता है l थोड़ी देर बाद वाशिंग मशीन चलने की आवाज आती है l और कुछ एजेंट पानी के कुछ बॉटल लाकर वहीँ रख देते हैं l

विश्व - अभी तुम लोग मेरा काम ख़तम होने तक.. यहाँ नजर बंद हो... तब तक प्यास लगे तो पानी पियो... पेशाब या संढास जाना हो तो इसी कमरे में बिंदास करो... चार घंटे बाद तुम लोगों को कपड़े मिल जाएंगे... वह भी धुले हुए...
गुल्लू - विश्वा भाई... (रोणा को दिखाते हुए) इंस्पेक्टर साहब के कपड़े...
विश्व - फाड़े तो तुम लोगों ने ही है ना... जिसे इस इंस्पेक्टर को अपना दामाद बनाना हो... वह अपना कपड़ा इसे दहेज में दे सकता है...

यह सुन कर गुल्लू चुप हो जाता है l विश्व के एजेंट कमरे का दरवाजा बंद कर देते हैं l सभी अब बाहर आ चुके थे l तब तक सबके चेहरे से नकाब उतर चुका था l विश्व मुड़ कर देखता है सीलु मीलु जिलु और टीलु से बारी बारी गले मिलता है l बाकी सभी से वह पहले हाथ मिलाता है फिर गले से लगा लेता है l

विश्व - (सब से हाथ जोड़ कर) आप सबका शुक्रिया... काम मुश्किल था... पर आप लोगों ने इसे बखुबी अंजाम दिया...
उनमें से एक - क्या विश्वा भाई... आप तो शर्मिंदा कर रहे हो... हम सभी किसी ना किसी तरह से आप से बहुत कुछ पाया है... हक अदा करने का वक़्त आया तो पीछे कैसे रह सकते थे... आपके साथ तो भगवान भी है... तभी तो... बिना किसी एरर के प्लान कामयाब हो गया... वैसे विश्वा भाई अभी के लिए क्या काम है...
विश्वा - कोई काम नहीं... अभी तुम लोग अलग अलग हो कर यशपुर से निकल जाओ... आधे घंटे में धीरे धीरे यहाँ से खिसक लो...
टीलु - यह लोग तो चले जाएंगे.. तो फिर हम अभी क्या करें...
विश्व - वाशिंग मशीन को चलने दो... आधे घंटे बाद शायद बंद हो जाएगा... उससे पहले तुम लोग भी अपने अपने ठिकाने पर लौट जाओ...
मीलु - और तुम...
विश्व - मुझे मिलना है... उस आदमी से... जो मुझे केस के बारे में... बहुत कुछ इंफॉर्मेशन देना चाहता है... इसलिए हम शाम को सीलु के घर में मिलते हैं...
जिलु - तब तक क्या यह लोग...
विश्व - दिन के उजाले में... यह लोग बाहर नहीं निकलेंगे... इसलिए... घबराओ मत...

फिर विश्व उनसे आगे क्या करना है समझाने लगता है, विश्व के सब कुछ समझाने के बाद सभी विदा ले कर चले जाते हैं l विश्व भी ऑउट हाऊस से बाहर निकल कर यशपुर के यशवर्धन लाइब्रेरी की ओर जाने लगता है l क्यूंकि जो संदेशा उसे न्यूज पेपर से मिला था उसके अनुसार उसे लाइब्रेरी में एक महत्त्वपूर्ण सूचना मिलने वाली थी l विश्व लाइब्रेरी में आता है l देखता है लाइब्रेरी एक कमरे वाला है l वहाँ पर एक लाइब्रेरियन बैठा हुआ था, बाकी पुरा का पुरा लाइब्रेरी खाली ही था l विश्व उसके पास जाता है और मिले संदेशा के तहत आज की नभवाणी साप्ताहिक पत्रिका माँगता है l

लाइब्रेरियन विश्व को पहले उपर से नीचे तक देखता है फिर ड्रॉयर से पत्रिका निकाल कर देता है l विश्व एक टेबल पर बैठ जाता है और पत्रिका खोलता है l पत्रिका के ऊपर उसे पेंसिल में लिखे नंबर दिखता है l विश्व उन्हें डिकोड करने लगता है l डिकोड में उसे एक और संदेश मिलता है l

“ लाइब्रेरियन से राजगड़ रियासत की गौरव गाथा नाम की किताब माँगो., उस किताब की अंतिम पृष्ठा में एक जेब होगी l"

बस इतना ही संदेश था l विश्व लाइब्रेरियन के पास जाकर वही किताब माँगता है l

लाइब्रेरियन - यहीं पढ़ना है... या कहीं लेकर जाना है...
विश्व - यहीं पढ़ना है..
लाइब्रेरियन - सी रैक के तीसरे रो में होगा... जाकर लेलो...

विश्व जाता है और वहां से किताब निकाल कर उसके आखिरी पन्ने में पाकेट को टटोलता है l उस पाकेट में उसे एक चाट मिलता है, उस चाट में सारे टेबल खाली थे l इसका मतलब यह हुआ कि इस किताब को किसीने अपने साथ नहीं लेकर गए थे l विश्व चाट को पलटता है, उस में एक छोटी पॉली पैक चिपकी हुई थी l विश्व उस पॉली पैक खोल कर देखता है, जिसमें यशपुर बैंक की रसीद और एक चाबी मिलता है जो शायद एक लॉकर की चाबी था l उस रसीद के साथ एक और काग़ज़ मिलता है जिसमें लिखा था
"सौवें पेज पर जो है उसे ले जाओ, और बाकी के लिए बैंक जाओ"
विश्व सौवें पन्ने को खोलता है, एक थ्री डी होलोग्राम वाला फोटो का चौकर में कटी हुई चौथा हिस्सा मिलता है l विश्व उस फोटो को गौर से देखता है पर उसे समझ में कुछ नहीं आता l फिर विश्व वह बैंक रसीद और चाबी को जेब में रख कर वह फोटो अपने शर्ट के अंदर डालता है l किताब को उसी रैक में रख कर लाइब्रेरियन के पर आकर गेस्ट लॉग बुक में साइन कर बाहर निकल जाता है l

बाहर आकर एक ऑटो लेता है और यशपुर बैंक पहुँचता है l बैंक में बैंक मैनेजर से मिलकर लॉकर खोलने की बात कहता है l बैंक मैनेजर पहले विश्व को घूर कर देखता है और फिर अपनी जगह से उठ कर विश्व के साथ लॉकर रुम में आता है l बैंक मैनेजर अपने तरफ से चाबी लगा कर लॉकर की एक लॉक खोलता है और उसके बाद लॉकर रुम से बाहर चला जाता है l विश्व अपना चाबी निकाल कर उस लॉकर में चाबी डाल कर खोलता है l लॉकर में फिर से वही थ्री डी फोटो का एक और हिस्सा मिलता है, साथ साथ तीन दिन पहले रिजर्वेशन किया गया सोनपुर जाने वाली एक बस का टिकट था l तारीख आज की थी l विश्व कुछ समझ नहीं पाता उसे क्या करना चाहिए l क्यूंकि बस के यशपुर छोड़ने का समय आज दो पहर साढ़े बारह बजे का था l विश्व घड़ी देखता है टाइम में और आधा घंटा बचा था l विश्व लॉकर में चाबी डाल कर वह फोटो और बस का टिकट लेकर बैंक से जल्दी निकल जाता है l एक ऑटो लेकर बस स्टैंड में पहुँचता है l बस छोड़ने ही वाली थी l विश्व भागते हुए बस चढ़ जाता है l कंडक्टर को टिकट दिखा कर सीट में बैठ जाता है l वह विंडो वाली सीट थी, बगल में एक आदमी बैठा हुआ था l बस में ज्यादा भीड़ थी नहीं, बसस्टैंड से निकल कर बस राजमार्ग पर आ जाता है l ठीक डेढ़ बजे रास्ते पर एक ढाबा में गाड़ी रुकती है l सभी यात्री गाड़ी से उतर कर ढाबे में खाने के लिए चले जाते हैं l विश्व भी उतर कर ढाबे के पास एक दुकान से पानी की बोतल लेकर पानी पीने लगता है l वह आँखे मूँद कर समझने की कोशिश करता है कि वह जो आदमी उसे कुछ संदेश देना चाहता है या उससे खेल खेल रहा है l दो फोटो मिले हैं, साफ था कि वे दो फोटो किसी एक बड़े फोटो के हिस्से थे l उसे जो जरूरत है क्या उन फोटो के टुकड़ों में है l वह आदमी विश्व से सीधे मिलने से कतरा क्यूँ रहा है l ऐसे सोच में खोया हुआ था कि बस हॉर्न देता है, विश्व वापस अपनी सीट पर बैठ जाता है l उसका को पैसेंजर अभी तक नहीं आया था l पर विश्व के सीट पर एक किताब पड़ा हुआ था l उस के कवर पेज पर लिखा हुआ था
"तुम्हारे लिए संदेश"
विश्व अपने सिर पर हाथ दे मारता है l इसका मतलब यह हुआ कि वही पैसेंजर उसे संदेश दे रहा था l टेंशन के मारे विश्व उस को पैसेंजर पर नजर नहीं डाल पाया था l विश्व वह किताब उठाता है, पन्ने पलटने लगता है, किताब के बीचों-बीच उसे एक और फोटो मिलता है, उस फोटो में सोनपुर रेल्वे स्टेशन के क्लॉक रूम की एक रसीद चिपकी हुई थी l

बस सोनपुर में पहुँचता है l विश्व स्टेशन के लिए ऑटो पकड़ता है l क्लॉक रुम जाकर रसीद दिखाता है l क्लॉकरुम का आदमी सौ रुपये के बदले विश्व को एक ब्रीफ केस देता है l विश्व वह ब्रीफ केस ले लेता है और खोलने की कोशिश करता है पर लॉक्ड था l विश्व के पास अब प्रॉब्लम यह थी कि उसके पास ब्रीफकेस की चाबी नहीं थी l विश्व और कोई कोशिश नहीं करता, ब्रीफकेस को लेकर वहाँ से निकलता है l बस स्टैंड में आकर वापस यशपुर का बस पकड़ता है l बस में बैठ कर ब्रीफकेस को दुबारा चेक करता है, उसे फॉर नंबर लॉकींग सिस्टम दिखता है l अब विश्व हैरान था, अब खोले तो खोले कैसे l वह सोचने लगा, कहीं वह बेवक़ूफ़ तो नहीं बन गया l वह आँखे बंद कर सोचने लगता है l इस बीच उसे कहीं ना कहीं हींट मिला होगा l वह उन पैटर्न्स को याद करने लगा जिस पैटर्न के जरिए उसे मैसेज मिलता रहा l पहले लाइब्रेरी, फिर बैंक, फिर बस अंत में क्लॉक रुम l कुछ सोचने के बाद लाइब्रेरी के लिए सात, बैंक के लिए चार, बस स्टैंड के लिए आठ और क्लॉक रुम के लिए नौ नंबर डालता है l लॉक खुल जाता है l ब्रीफकेस के अंदर उसे फिर से एक होलोग्राम वाला फोटो मिलता है l विश्व समझ जाता है कि चारो फोटो एक फोटो के चार हिस्से हैं और हो ना हो इन्हीं फोटो में कोई ना कोई इन्फॉर्मेशन है l

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रात के दस बजे
रोणा के क्वार्टर में अंधेरा था l बल्लभ स्विच टटोलने लगता है और ऑन करता है l उसे कमरे के बीचों-बीच रोणा नंगा बैठा हुआ था l रोणा को इस हालत में देख कर बल्लभ चौंक जाता है l

बल्लभ - पुरा दिन भर तु गायब रहा... पता किया तो... तु विश्व को लेकर अपने टीम के साथ यशपुर गया हुआ था... पर यह क्या... तु इस हालत में...

रोणा कोई जवाब नहीं देता, बस एक पत्थर की बुत की तरह बिना हिले डुले वैसे ही बैठा रहा l ना पलकें झपका रहा था ना ही कहीं किसी और देख रहा था l बल्लभ थोड़ा डर जाता है l डरते डरते पुकारता है

बल्लभ - अनिकेत... (इस बार रोणा बल्लभ की ओर देखता है) यह... क्या हाल बना रखा है... (रोणा की आँखे अंगारों की तरह दहकने लगता है)
बल्लभ - र.. रोणा...
रोणा - (बहुत ही गम्भीर आवाज में) तु इस वक़्त यहाँ क्यूँ आया है...
बल्लभ - क्या... क्या हुआ है आज...
रोणा - (उठ खड़ा होता है, पास से एक टवैल उठा कर अपने कमर पर बाँध कर, टेबल पर पड़े एक लिफ़ाफ़ा उठाता है और बल्लभ के पास आकर) यह मेरी लिव एप्लिकेशन है... जाकर हेड ऑफिस में पहुँचा देना...
बल्लभ - क्या हुआ है बता क्यूँ नहीं रहा...
रोणा - (आवाज को थोड़ी ऊँची कर) क्या सुनना चाहता है... विश्व ने मेरी गांड बिना मारे छोड़ दिया... वर्ना उसका प्रोग्राम कुछ ऐसा ही था... यही सुनना चाहता है ना...
बल्लभ - मतलब... विश्व ने तुझे और और तेरी टीम को...
रोणा - अबे काहे का टीम... (फिर रोणा सारी बातेँ बताने लगता है) देवगड़, झारसुगड़ा में जिन हराम खोरों पर एहसान किया था... उन्हें लाया था... विश्व को काबु करने... (दर्द भरी आवाज में) साले हराम के जने... (और कुछ कह नहीं पाता) विश्व और उसके गुर्गों हमें कमरे में बंद कर चले गए... वाशिंग मशीन बंद होने के लगभग आधे घंटे के बाद तक जब बाहर से कोई शोर शराबा सुनाई नहीं दिया तब मालुम हुआ... विश्व और उसके पट्ठे हमें वहीँ पर अकेला छोड़ कर चले गए थे... मेरे साथ के सारे बंदे दरवाजा तोड़ कर बाहर जाकर अपने अपने कपड़े पहन कर चले गए... हरामी साले... कोई पीछे मुड़ कर देखा भी नहीं... मैं निकल नहीं सकता था... नंगा जो था... जब अंधेरा हुआ तब बाहर आकर देखा... मेरी गाड़ी थी... सीट पर चाबी और मेरी मोबाइल रखी हुई थी... अंधेरा थोड़ी गहरी होने के बाद... मैं अपने क्वार्टर पर वापस आ गया...
बल्लभ - बोला था... सौ बार बोला था... तुझे तेरी उतावले पन ने... ऐसी गत बनाई है... तुझे अगर विश्व को दबोचना ही था... तो असली टीम लेकर जाता...
रोणा - श्श्श्श्... अब तुझे सब पता चल गया... अब तु जा यहाँ से...
बल्लभ - ठीक है... समझ सकता हूँ... तेरा मुड़ अभी ठीक नहीं है...(लिफ़ाफ़ा दिखाते हुए) पर यह छुट्टी..
रोणा - एक बात मेरी समझ में आ गई... मेरे इर्द गिर्द... विश्व ने अपना आदमी छोड़ रखा है... या यूँ कहें... मेरा कोई आदमी विश्व से मिला हुआ है...
बल्लभ - हाँ... ऐसा हो सकता है... तुझे क्या लगता है... कौन हो सकता है...
रोणा - मुझे सब पर शक़ हो रहा है... (कहते हुए बल्लभ को घूरते हुए देखने लगता है)
बल्लभ - व्हाट... तु मुझे घूर कर देख रहा है... कहीं..
रोणा - क्या करूँ... अभी तो मैं अपने साये पर भी शक़ कर रहा था... इसीलिए अंधेरे में बैठा हुआ था... तुने ही आकर लाइट जलाई...
बल्लभ - हैइ हैइ... तु पागल हो गया है...
रोणा - इसीलिए तो छुट्टी लिया है... ताकि यह पागलपन ठीक हो जाए...
बल्लभ - ओह गॉड...

इतना कह कर बल्लभ अपना माथा पीटते हुए वहाँ से चला जाता है l उसके जाते ही रोणा दरवाजा बंद कर देता है l फिर एक टेबल के पास आकर एक आधर कार्ड और एक वोटर आईडी कार्ड निकालता है l अपना मोबाइल निकाल कर फोटो उठाता है फिर व्हाट्सआप में टोनी नाम निकाल कर भेज देता है, फिर सोफ़े पर आकर छत की ओर घूरते हुए बैठ जाता है l कुछ देर बाद उसका फोन बजने लगता है, देखता है टोनी का कॉल था l

रोणा - देखा..
टोनी - जी... क्या यह मेरा नया आईडी है...
रोणा - हाँ... तेरा डॉक्यूमेंट सारे रेडी हैं... अब तु बता वह मेरा काम कहाँ तक पहुँची है...
टोनी - कुछ ही दिनों में... वह लड़की नंदिनी विश्व को सरप्राइज़ देने राजगड़ जाएगी... बीच रास्ते में ही... मैं उसे उठा लूँगा... और आप तक पहुँचा दूँगा...
रोणा - ह्म्म्म्म... पर यह लेन देन की प्रक्रिया... यशपुर के Xxxx गोदाम में होगी...
टोनी - यशपुर क्यूँ...
रोणा - तुझसे मतलब...
टोनी - सॉरी... पर मैं डेलीवरी करने के तुरंत बाद... वहाँ से निकल जाऊँगा...
रोणा - हाँ भोषड़ी के... तुझे कौनसा मेरा दामाद बनाना है...

कह कर रोणा फोन काट देता है और टी पोए की ओर देखने लगता है l टी पोए पर विश्व की फोटो लगी हुई थी l उसे देखते हुए रोणा बड़बड़ाने लगता है

रोणा - बहुत गलत किया तुने आज... मुझे जिंदा नहीं छोड़ना था... पर तुने छोड़ दिया... जैसे तुझे जिंदा छोड़ कर आज तक पछता रहा हूँ... वैसे ही तु पछताएगा... बहुत पछताएगा... अब मैं राजगड़ में नहीं रहूँगा... उसी गोदाम में... तेरी बंदी की चुत फाड़ कार्यक्रम पुरा करूँगा... फिर तुझे उसीके हाथों बुलवाऊंगा... तु तेरी औकात से बाहर जाकर मुझसे पंगे लिए हैं... वादा रहा... तेरी औकात तुझे दिखाऊंगा... तुझे तेरी बंदी की दल्ला बनाऊँगा... तेरे ही हाथों... उसकी नीलामी करवाऊंगा... बहुत गलत किया रे... आज तुने बहुत गलत किया... भुवनेश्वर की ज़िल्लत भुला सकता था... पर आज तुने उन राहों में नंगा गुजरने को मजबूर कर दिया... जिन राहों में.. मैं शेर की तरह आया जाया करता था... तुझे एक सबक भी सिखाऊंगा... किसी को इतना जलील नहीं करना... के उसकी जलालत... उसका जुनून बन जाए... तेरे किए हर जलालत का हिसाब मैं करूँगा... एक एक का हिसाब करूँगा...

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यशपुर की एक बस्ती की एक झोपड़ी l भले ही वह बाहर से एक झोपड़ी है पर अंदर से आराम दायक घर है l असल में यह तीन आपस में सटे हुए झोपड़ियों के एक कॉमन रुम था जिसे बाहर से कोई भी जान नहीं सकता था l उस कमरे में पांचों दोस्त एक टेबल के इर्द-गिर्द बैठे हुए हैं l विश्व के हाथ में एक चिट्टी था और पांचों के सामने टेबल पर विश्व के लाए चारों फोटो के टुकड़े पड़े हुए थे l सभी के सभी उन फ़ोटो को देख कर समझने की कोशिश कर रहे थे l क्यूंकि वह चार होलोग्राम वाले फोटो एक ही बड़े फोटो के चार बराबर टुकड़े थे l अब चारों टुकड़ों को ठीक से जोड़ देने पर कोर्ट में रखे न्याय की देवी की फोटो बन गई थी l आँखों में पट्टी, हाथ में न्याय की भार दंड और एक हाथ में तलवार l

टीलु - पिछले आधे घंटे से यही देखे जा रहे हैं... मेरे पल्ले में कुछ नहीं पड़ा...
जिलु - हाँ विश्वा भाई... क्या आपको अभी भी लगता है.. इन फोटो में कहीं छुपा हुआ संदेशा है...
मीलु - हाँ है... मुझे तो लगता है... है...
सीलु - हूँम्म... मुझे लगता है... या तो तुझे चश्मा लगा लेनी चाहिए... या फिर हमें... (विश्व को छोड़ कर सभी खि खि कर हँसने लगते हैं)
मीलु - देखा नहीं... यह फोटो थ्री डी इमेज वाला होलोग्राम वाला फोटो है... थोड़ा नजर सीधा और ध्यान से देखने पर... अंदर भगवत गीता उपदेश समय के... कृष्ण विश्वरुप छुपा हुआ था...
टीलु - हाँ तो... उसमें ऐसा क्या संदेशा है... (फिर अचानक वह कुछ समझते हुए पूछता है) अच्छा विश्वा भाई... कहीं वह भगवत गीता में छिपे किसी संदेश के बारे में तो नहीं कह रहा है...
सीलु - हाँ साले... अभी तेरा बल्ब जला लगता है... गीता में ही संदेश होगा... चूँकि विश्वा भाई को... महाभारत जो लड़ना है...
मीलु - हाँ तो विश्वा भाई की लड़ाई महाभारत से कौनसा कम है...
विश्व - तुम लोग क्या थोड़ी देर के लिए चुप रहोगे...

सभी चुप हो जाते हैं, विश्व चिट्ठी को पटक देता है और अपना माथा पकड़ कर आँखे बंद कर बैठ जाता है l कुछ देर बाद अपनी साँसे दुरुस्त करने के बाद अपने दोनों हाथों से चारों फोटो को उठा कर बल्ब की ओर ले जा कर देखने लगता है l तभी सीलु की नजर फोटो के पीछे पड़ता है l वह विश्व से पूछता है

सीलु - विश्वा भाई... इन फोटो के पीछे निचले कोने में... यह क्या है...

विश्व चारों फोटो को पलट देता है l देखता है चारों फोटो के नीचे कोने में कुछ निशान बने हुए हैं l वह अब उन फोटों के कोनों बने निशानों को जोड़ कर देखता है l अचानक विश्व की आँखों में एक चमक आ जाती है l

विश्व - अरे यह तो एक क्युआर कोड है... तुम लोगों के किसीके मोबाइल में क्युआर स्कैनर है क्या...
मीलु - हाँ है... मेरे मोबाइल पर है...
विश्व - लाओ दो जरा...

मीलु अपना मोबाइल विश्व को देता है l विश्व स्कैनर ऑन कर उस क्युआर कोड को स्कैन करता है l स्कैन होते ही एक लिंक डिस्प्ले होता है l उस लिंक पर क्लिक करने पर एक जीप फाइल दिखती है विश्व उस फाइल को डाउनलोड करता है l ब्रीफकेस में फोटो के साथ उसे एक काग़ज़ भी मिला था जिस पर एक नंबर लिखा हुआ था l विश्व उस जीप फाइल को खोलने के लिए उसी नंबर को पासवर्ड में ईस्तेमाल करता है l फाइल खुल जाता है l फाइल एक वॉयस रेकार्ड का था l विश्व उस वॉयस रेकार्ड को ऑन करता है l

"श्रद्धेय विश्व प्रताप,
अगर तुम मेरी यह वॉयस रेकार्ड सुन रहे हो तो बेशक तुम सही आदमी हो l तुम सोच रहे होगे मैं तुमसे सीधा बात करने के बजाय ऐसे अप्रत्यक्ष रुप से क्यूँ संदेश भेज रहा हूँ, तो ज़वाब यह है कि हम सब अभी नैपथ्य में हैं l जैसे जैसे तुम्हारा युद्ध आगे बढ़ता जाएगा, हम धीरे धीरे समक्ष आते जाएंगे l तुम इसे हमारा डर भी कह सकते हो l तुम उसी दिन से हमारे नजर में आ चुके थे, जब से तुमने अपनी वकालत की डिग्री हासिल कर ली थी l तब से हमें मालूम था, राजा साहब से कोई खुल्ला दुश्मनी ले सकता है तो वह केवल तुम ही हो l इसीलिए मैंने अपने दिल की तसल्ली के लिए इस तरह से खबर पहुँचाता रहा l खैर अब मुद्दे पर आते हैं 'रुप फाउंडेशन' याद तो होगा l हाँ क्यूँ नहीं आखिर तुम्हारे दिल का नासूर जो ठहरा, पर अगर तुम यह सोच रहे हो कि इस केस को दोबारा उछाल कर राजा साहब का कुछ बिगाड़ सकते हो तो तुम गलत हो l हाँ सर्कार ने नई एसआईटी का गठन कर दिया है पर फिलहाल के लिए अभी उनके हाथ कुछ नहीं लगेगा और केस वहीँ घूमता ही रहेगा l वज़ह, जयंत सर के अनुसार जितने भी गवाह थे या हो सकते थे, सभी के सभी या तो पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं या फिर सरकारी डॉक्टर के द्वारा पागल घोषित हो चुके हैं, जिनकी गवाही अदालत में मान्य नहीं होती l इतना तो कानून तुम जानते ही होगे l
जो जिन्हें तुम गवाह बना सकते हो या बना सकते थे यानी एक था पूर्व एसआईटी की अधिकारी श्रीधर परीड़ा, जैसे ही सर्कार ने उसे एसआईटी से हटाया उसने खुद को अंडरग्राउंड कर लिया है ताकि वह किसी भी तरह से राजा साहब के हत्थे ना चढ़ जाए l बाकी बचा इंस्पेक्टर रोणा और खुद राजा साहब, रोणा की गवाही को प्रतिपक्ष के वकील अदालत में नकार सकता है क्यूंकि उसे जयंत सर ने झूठा साबित कर दिया था बचे खुद राजा साहब इन सात सालों में अच्छी तरह से खुद को केस से अलग कर चुके हैं झूठे सबूतों के सहारे l तो अब किया क्या जाए l
विश्व जुर्म की राह पर चलने वाला, उस पर पलने वाला कभी जुर्म छोड़ नहीं सकता l वह नए नए राह तलाशते रहता है जुर्म करने के लिए l जाहिर है अभी भी जुर्म वैसे हो रहे हैं l खिलाड़ी वही है, बस प्यादें बदल गए हैं l पैसों की लुट मची हुई है बस तरकीबें बदल गई हैं l
रुप फाउंडेशन के द्वारा मनरेगा की पैसे, टेंडर के पैसे मुर्दों के आधार कार्ड के जरिए हुआ था l पर अबकी बार जो फ्रॉड हो रहा है कोई सोच भी नहीं सकता है l इसलिए इस बाबत मैं तुमको सारी इन्फॉर्मेशन देने जा रहा हूँ l तुम्हें इसका भंडाफोड़ करना है l कैसे करना है यह मैं तुम पर छोड़ता हूँ l इस राह में तुम खुद को अकेला मत समझना l वह एक पुराना शेर है
'मैं चला था जानीवे मंजिल को
लोग मिलते गए कारवाँ बनता गया'
तुम्हें आगे चलते हुए हर एक मोड़ पर एक राहगीर एक हमसफ़र मिलता जाएगा l अब विस्तृत से सुनो राजा साहब और उनके सपोलों के जरिए क्या गोरखधंधा चल रहा है l
तुम्हें याद होगा राजा साहब और ओंकार चेट्टी की दोस्ती तब हुई थी जब तुम पर मुक़दमा चल रहा था l तुम्हारी सजा मुकर्रर होने के बाद भी यश वर्धन ने यहीं राजगड़ में एक बहुत बड़ी ज़मीन ली ताकि वह उस पर अपनी निरोग हस्पताल का ब्रांच खोलने के साथ साथ निरोग फार्मास्यूटिकल्स फैक्ट्री खोल सके l इसके लिए सब्सिडी पर बहुत ही सस्ते में डेढ़ सौ एकड़ जमीन उन्हें मिली l अब हस्पताल और फैक्ट्री के लिए मार्केट से लोन उठाया गया, जाहिर है वह लोन यश वर्धन ने ही उठाया था पर उन्हीं दिनों में किसी कारण वश चेट्टी परिवार और क्षेत्रपाल परिवार के बीच दूरियां आ गई और चेट्टी परिवार खुद को इस प्रोजेक्ट से दुर कर लिए l ऐसे में राजा साहब यह डेढ़ सौ एकड़ जमीन यूँ जाने नहीं दे सकता था l इसीलिए उसने कुछ सरकारी अधिकारियों से मिलकर राजगड़ मल्टिपरपॉज को ऑपरेटिव सोसाईटी का पंजीकरण किया जिसे सर्कार ने सहसा पास भी कर दिया l उसने चालाकी से राजगड़ और आसपास के तकरीबन पच्चीस गाँव के लोगों को इस सोसाइटी में मेंबर बनाया और खुद को प्रेसिडेंट l यश वर्धन के लोन को चुकाने के लिए उसने सारे गाँव वालों की जमीनों को बैंक में मड़गैज कर दिया l हाँ तुम हैरान हो सकते हो जब राजगड़ के सारे जमीनों का मालिक क्षेत्रपाल है फिर गाँव वालों के पास जमीनें आई कहाँ से, तो इसमें भी बड़ा झोल है l आजादी के बाद सर्कार ने यह कानून बनाया था कि कोई भी निजी जमीन को दस एकड़ से ज्यादा नहीं रख सकता l उस दौरान तत्कालीन राजा ने सारी जमीनें किसानों को बांट देने की घोषणा कर वह सारी कागजातों को अपने पास रख लिया था l इसीलिए राजगड़ और उसके आसपास के लोगों को यह नहीं मालुम के जिस जमीन पर अपना खुन निचोड़ कर पसीना बना कर खेती कर रहे हैं, असल में उन्हीं जमीनों की वे स्वयं मालिक हैं l पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी ही जमीन पर खेती कर राजा साहब की तिजोरी भर रहे हैं l तो इस तरह से अब ज़मीन राजा साहब के हाथ आई और वह लोन का पैसा भी l अब सोसाइटी की बिल्डिंग खड़ा करने के लिए फिर से एक लोन उठाया गया l उसके लिए गाँव वालों के घरों को मड़गैज किया गया l गाँव वालों ने दस्तावेजों पर दस्तखत भी कर दिया बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे l वह लोन पैसा भी राजा साहब ने गटक लिया l
अब बात यह है कि वह बिल्डिंग कहाँ है l कोई बिल्डिंग नहीं है l फिर वह लोन का पैसा कैसे चुकाया जा रहा है l तो विश्व प्रताप, चूँकि यह मल्टीपल कोऑपरेटिव सोसाइटी है और जाहिर है इसे सरकारी सहायता मिल सकती है, इस लिए बिल्डिंग बनाने से लेकर रास्ता बनाने तक हर एक काम को मनरेगा के आधीन सर्कार द्वारा अनुमोदित करके एक साल में तीन सौ दिन की रोजगार स्कीम में लोगों से अपने फैक्ट्री में काम करवाता रहा है l और जो पैसे सर्कार से लोगों को मिलता रहा है उन्हें लोन की इंस्टॉलमेंट चुकाने के लिए डाइवर्ट किया जा रहा है l यानी लोगों के खाते में मनरेगा का पैसा आ रहा है, पर ईसीएस के जरिए वही पैसे उस लोन की इंस्टॉलमेंट में चला जा रहा है, जो उन्होंने किया ही नहीं l और राजा भैरव सिंह को बैठे बिठाए मजदूर मिल गए जिन्हें वह कोई मजदूरी नहीं दे रहा है और उसे पैसों पर पैसा फायदा हो रहा है l विडंबना देखो जो जमीन राजा साहब ने कब्जा कर बैठा है उस पर कोई बिल्डिंग भी नहीं है l इससे बैंक वालों को कोई परेशानी नहीं है, क्यूंकि उनके लोन पर उन्हें इंस्टॉलमेंट मिल जा रहा है l
अब आते हैं और एक ब्लंडर पर l बैंक में गाँव वालों के जमीन और घर की कोई भी मड़गैज पेपर नहीं है l वज़ह, कुछ महीने पहले सर्कार ने कोऑपरेटिव सोसाइटी की सारे लोन वाइभ आउट की घोषणा कर दी, उसके बावजूद कुछ सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत से केवल कागजात पर गाँव वालों को डिफॉल्टर बना दिया गया और वह सारी ज़मीन जायदाद की काग़ज़ भैरव सिंह ने अपने कब्जे में ले लिया है, और यह दिखाया जा रहा है गाँव वालों के तरफ से भैरव सिंह यह लोन चुका रहा है l पर असलियत में सरकारी लोन सर्कार ही चुका रहा है और लोन अमाउंट से लेकर सारी जमीन जायदाद पर भैरव सिंह सांप की तरह कुंडली मार रखा है l
अब तुम सवाल करोगे इतना जानने के बाद भी हम लोग क्यूँ कुछ नहीं कर पा रहे हैं l तो विश्व भैरव सिंह की यह दुनिया एक खूबसूरत मकड़ समान है l एक बार घुसे तो सिवाय फंसने के दूसरा कोई रास्ता नहीं है l इसलिए अब तुम पर ही दारोमदार है, मैं तुम्हें बस इतना कह सकता हूँ, भैरव सिंह की इस तिलिस्म को खुद सर्कार भी उखाड़ फेंकना चाहती है, पर कुछ मजबूरियों के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है l पर यह भी सच है तुम जैसे जैसे आगे बढ़ोगे वैसे वैसे तुम्हें अनुरूप सहायता सर्कार से मिलती जाएगी l"
Ati uttam naag Bhai der se hi sahi kuch suspense to hataya aapne aise hi kahani ko aage badhate rahe thoda jaldi update Dene ki koshish kijiye bas itna hi kehna hai
 
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Kala Nag

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Ati uttam naag Bhai der se hi sahi kuch suspense to hataya aapne aise hi kahani ko aage badhate rahe thoda jaldi update Dene ki koshish kijiye bas itna hi kehna hai
धन्यबाद मित्र आपके इस टिप्पणी के लिए आभार
अब मैं निरंतर कोशिश में हूँ जनवरी के अंत तक कहानी को समाप्त करने के लिए l
बस साथ जुड़े रहें और बने रहें
 

RAAZ

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शुक्रिया लियोन भाई

यही उसकी तकदीर थी

हाँ जिनके दम पर आया था वही उसे छोड़ कर भाग गए

हाँ सभी मुक्ति चाह रहे हैं पर लड़ाई कोई नहीं लड़ रहा है l विश्व की लड़ाई में धीरे धीरे खुद को शामिल करने लगे हैं

हाँ इन्हीं इन्फॉर्मेशन के बलबूते विश्व राजा भैरव सिंह को कानून के लपेटे में फंसायेगा
अंत तक जुड़े रहें
अगला अपडेट भी थोड़ी रोमांचक रहेगी
Intezar rahega bhai is update ka
 

Kala Nag

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👉एक सौ बयालीसवां अपडेट
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क्षेत्रपाल महल

नागेंद्र के कमरे में एक मेडिकल बेड लगा हुआ है l डॉक्टर्स और नर्सेस अपने काम में लगे हुए हैं l बेड के पास एक चेयर पर भैरव सिंह बैठा हुआ है और बेड के सिरहाने पर सुषमा खड़ी हुई है l कमरे में भीमा और बल्लभ भी दरवाजे के पास खड़े हैं l एक सैलाईन बोतल स्टैंड पर लगा कर नागेंद्र के कलाई पर ड्रिप लगा देता है, उसके बाद डॉक्टर नागेंद्र को एक इंजेक्शन देता है और फिर भैरव सिंह के पास आकर कहता है

डॉक्टर - राजा साहब... उम्र का तकाजा है... इस पड़ाव पर... लाइट फ़ूड खाना सेहत के लिए ठीक होता है... बड़े राजा जी को... बदहजमी के वज़ह से उल्टी और गैस हो गई थी... हमने इंजेक्शन दे दिया है... अब फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है....
भैरव सिंह - (ताली बजाता है, कुछ नौकर दौड़कर आते हैं) जाओ... डॉक्टर और उनकी टीम को छोड़ कर आओ... (सुषमा से) छोटी रानी... इनकी जितनी भी फीस बनती है... इन्हें दे दीजिए...
डॉक्टर - यह फीस की क्या बात कर रहे हैं राजा साहब... हम तो आपकी प्रजा हैं... बड़े राजा जी की सेवा... बड़े भाग्य से मिला है... हम भाग्य को पैसों से कैसे तोल सकते हैं...
भैरव सिंह - यह क्या कह रहे हो डॉक्टर... आपने सर्विस दी है...
बल्लभ - राजा साहब... जैसी जिसकी भावना... भावना अगर नेक हो... तो उसका सम्मान तो होनी ही चाहिए...
भैरव सिंह - ठीक कहते हो प्रधान... (भीमा की ओर देख कर) भीमा... जाओ इन्हें हमारी गाड़ी से छोड़ आओ...

सारे मेडिकल स्टाफ़ झुक कर नमस्कार करते हैं और भीमा के साथ बाहर चले जाते हैं l भैरव सिंह एक नजर सुषमा को देखता है, सुषमा समझ जाती है और अपना सिर पर घूंघट ला कर सिर हिला कर कमरे में ठहर कर नागेंद्र की सेवा करने की हामी भरती है l उसके बाद उस उस कमरे से पहले भैरव सिंह निकलता है और उसके पीछे पीछे बल्लभ l दोनों महल के लंबे से गलियारे में पहुंचते हैं l बल्लभ भैरव सिंह से अपनी घुटी जुबान से पूछता है

बल्लभ - राजा साहब.. राजगड़ हो या यशपुर... आप फीस देना चाहें तो भी कोई फीस लेने की हिम्मत आज तक किया नहीं है... यह जानते हुए भी... आप उन्हें फीस क्यों ऑफर कर रहे थे...
भैरव सिंह - (कुछ सोच में खोया खोया सा था, उसी खोए खोए अंदाज में) कुछ नहीं... चांद सुरज में ग्रहण अक्सर लगते हैं... कहीं क्षेत्रपाल के रुआब में ग्रहण तो नहीं लग रहा... यही चेक कर रहे थे...
बल्लभ - ऐसा क्यूँ राजा साहब... लगता है... कोई चिंता का विषय है...
भैरव सिंह - खास तो नहीं है... पर... क्या हम... उसे खास ना समझ कर नजर अंदाज कर... गलती तो नहीं कर रहे हैं...
बल्लभ - ओ.. समझ गया... शायद आप विश्वा... (बल्लभ आगे कुछ कहता नहीं है)
भैरव सिंह - प्रधान बाबु... मत भूलें... आप कौन हैँ... क्षेत्रपाल से दोस्ती या दुश्मनी करने के लिए... क्षेत्रपाल के बराबर का कद होना चाहिए... विश्वा जैसे आदमी के लिए सोच कर... हम समय और शक्ति दोनों का नष्ट नहीं करना चाहते...
बल्लभ - (थोड़ा खरासते हुए) हम भी यही मानते हैं... जानते हैं... पर समय के चिलमन में क्या छुपा है... कौन जाने...
भैरव सिंह - हमारी उम्र जरुर ढल रही है प्रधान... पर आज भी हमारी सोच वैसी की वैसी ही है... रुआब और पैसों के आगे हम किसीके लिए... दिल में कोई दयामाया नहीं पालते...
बल्लभ - हम भी यही कह रहे हैं... आप अपनी रबाब से नीचे ना सोचें... विश्व जैसों के लिए सोचने के लिए... आपने हम जैसे लोग पाल रखे हैं..
भैरव सिंह - हाँ अब वही लोग... एक एक करके नाकारा साबित हो रहे हैं...
बल्लभ - ऐसा अभी क्या हो गया है राजा साहब...
भैरव सिंह - प्रधान... हमने विश्व के पीछे... रोणा को छोड़ा था... पर अब... रोणा गायब हो गया है... कोई खबर ही नहीं है... पता नहीं कहीं... मर मरा तो नहीं गया...
बल्लभ - नहीं... राजा साहब... वह जिंदा जरूर है... विश्वा को दबोचने के लिए... आड़े हाथ लेने के लिए... जरुर कोई तिकड़म भीड़ा रहा होगा...
भैरव सिंह - पुरी बात बताओ प्रधान... विश्वा... जिसकी सिर को अपने जुते की बराबर की ऊँचाई पर रखे थे... अब लगता है या तो वह अपना कद बढ़ा रहा है... या फिर... हमें हमारी कद से नीचे की ओर खिंच रहा है... रोणा को विश्व के पीछे छोड़ा था... पर पता नहीं क्या हुआ... उसकी कोई खबर नहीं है... फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है...
बल्लभ - राजा साहब... विश्वा... लगता है शायद उसके ऊपर भारी पड़ा... इस कदर भारी पड़ा के... शर्म और जिल्लत के मारे... अब मुहँ छुपाये कहीं छिप गया है... इंडेफिनाइट छुट्टी की एप्लिकेशन डाल कर चला गया है... उधर भुवनेश्वर में श्रीधर परीड़ा... भी गायब हो गया है...
भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... इसका मतलब यह हुआ... की विश्वा अपना दायरा फैला रहा है... ताकि हमारे दायरे को काट सके...
बल्लभ - बात वहाँ तक नहीं आएगी... हम आने ही नहीं देंगे...
भैरव सिंह - वह तो देखा जाएगा... फिलहाल... हम अपने घर के सदस्यों के बारे में सोच रहे हैं...
बल्लभ - राजकुमार के बारे में...
भैरव सिंह - ह्म्म्म्म....
बल्लभ - समझ सकता हूँ... युवराज के मना करने के बाद... आपने राजकुमार को राजनीति में युवा चेहरा बना कर सामने लाने की कोशिश की गई... पर राजकुमार जी के उस लड़की के साथ... (चुप हो जाता है)
भैरव सिंह - कहो प्रधान कहो... चुप क्यूँ हो गए... राजकुमार ने हमारी सारे प्लान पर पानी फ़ेर दिया... वज़ह... वह दो कौड़ी की लड़की... और जब तक वह लड़की उसके साथ है... राजकुमार वापस नहीं आयेंगे...
बल्लभ - छोटे राजा जी भी तो अभी नहीं आए हैं... उन्हें अब राजगड़ आ जाना चाहिए... भुवनेश्वर में पता नहीं क्या कर रहे हैं...
भैरव सिंह - नहीं भुवनेश्वर में उनका काम बाकी है... जब तक काम ख़तम ना हो जाए... तब तक... छोटे राजा जी राजगड़ नहीं आयेंगे...
बल्लभ - क्या आप... उस बाबत भुवनेश्वर जाएंगे...
भैरव सिंह - नहीं... फ़िलहाल.. नहीं... हम यहाँ अपनी किला को मजबूत करेंगे... ताकि कोई दुश्मन राजगड़ में हमारे खिलाफ कोई किलाबंदी ना कर सके...
बल्लभ - क्या हम युवराज जी से संपर्क करें...
भैरव सिंह - प्रधान... बेटा अपने पैर में बाप का जुता पहनता है... बाप बेटे का जुता नहीं पहनता...
बल्लभ - क्षमा चाहते हैं... फिर राजकुमार कैसे वापस आयेंगे...
भैरव सिंह - हमने छोटे राजा जी को कह रखा है... उनके बारे में... छोटे राजा जी ज़रूर कुछ ना कुछ सोच रहे होंगे....

थोड़ी देर के लिए दोनों के बीच एक चुप्पी पसर जाती है l दोनों यूँही चले जा रहे थे l कुछ देर बाद बाद भैरव सिंह कहता है

भैरव सिंह - प्रधान...
बल्लभ - जी राजा साहब...
भैरव सिंह - तुम्हें क्या लगता है...
बल्लभ - जी... मैं कुछ समझा नहीं...
भैरव सिंह - (एक गहरी साँस छोड़ते हुए) देखो... कितना शांत वातावरण है... इतना शांत... के... कहीं दुर बहती नदी की कल कल शब्द यहाँ तक सुनाई दे रही है...
बल्लभ - (चुप रहता है)
भैरव सिंह - वातावरण इतना शांत कब होता है प्रधान...
बल्लभ - (हकलाते हुए) न न.. नहीं जानता राजा साहब...

तभी भीमा इन दोनों के पास आ पहुँचता है और चुपचाप सिर झुकाए खड़ा हो जाता है l

भैरव सिंह - प्रधान... इतनी खामोशी किसी आने वाले तूफान का इशारा है... तुम अब हर कोने में... हर हिस्से में... अपनी पैनी नजर घुमाओ... अपना कान लगाओ... हमारे अंदर से एक वाईव सा आ रहा है... कहीं ना कहीं... कुछ ना कुछ.. हो रहा है... पर क्या... हमें बहुत सतर्क रहना होगा... और भीमा तुम...
भीमा - जी हुकुम...
भैरव सिंह - कुछ दिनों के लिए... आखेट परिसर के... मगरमच्छों को और लकड़बग्घों को भूखा रखो...
भीमा - जी हुकुम...
भैरव सिंह - लगता है... बहुत जल्द उन्हें इंसानी गोश्त मिलने वाली है...

भीमा हैरानी भरे नजरों से बल्लभ की ओर देखता है l वैसा ही हाल बल्लभ का भी हुआ जा रहा था l


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किचन में अनु गैस पर कुकर को रखती है फिर गैस जलाती है l तभी उसे कलिंग बेल की टिंग टोंग की आवाज सुनाई देती है l अपने पल्लू से हाथ और चेहरा पोछते हुए दरवाजा खोलती है l सामने वीर खड़ा था l चेहरे पर थोड़ी उदासी और मायूसी लिए l वीर हल्का सा मुस्कराते हुए अंदर दाखिल होता है और सोफ़े पर धप कर बैठ जाता है l अनु अभी भी दरवाजे पर थी l वीर अनु की ओर देखता है, अनु अपनी बड़ी बड़ी आँखों से वीर की ओर थोड़ी हैरानी और परेशान भरे नजरों से देखे जा रही थी l वीर अपना हाथ बढ़ा कर इशारे से अनु को बुलाता है l अनु का चेहरा खिल उठता है l वह किसी मासूम बच्ची की तरह खिलखिलाते हुए भागते हुए आती है और दोनों हाथों से वीर की हाथ पकड़ लेती है l वीर उसे अपनी गोद में खिंच लेता है l

अनु की पीठ अब वीर के सीने से चिपकी हुई थी l वीर अपना चेहरा अनु की कंधे पर रख देता है l अनु को अपने कंधे पर एक गर्म चुंबन का एहसास होता है l उसकी आँखे बंद हो जाती है l पर उसे हैरानी होती है कि वीर अपना चेहरा उसके कंधे पर रख कर वैसे ही बैठ गया था l अनु वीर से सवाल करती है

अनु - राजकुमार जी... आज क्या हुआ...
वीर - (वैसे ही अपने गालों को अनु की कंधे पर रगड़ते हुए कहता है) कुछ नहीं मेरी जान... कुछ भी तो नहीं...
अनु - फिर आप ऐसे... मायूस से.. हारे हुए से क्यूँ लग रहे हैं...
वीर - (अपना माथा अनु के कंधे से हटा कर) क्या मैं तुम्हें हारा हुआ लग रहा हूँ... (अनु चुप रहती है, उसे सूझती नहीं है क्या कहे, वीर उसकी मनःस्थिति को समझ जाता है) अरे मेरी अनु... मेरी तो सबसे बड़ी जीत तु है... और जब तक तु मेरे साथ है... मुझे कौन हरा सकता है... खुद वह तकदीर लिखने वाला भी नहीं...
अनु - (वीर की ओर घुमती है, अपने दोनों हाथों से वीर की चेहरे को थामती है) राजकुमार... तो आपके चेहरे पर यह मायूसी क्यूँ...
वीर - चलो नहीं बताता... मैं तुम से नाराज हूँ... बहुत बहुत नाराज हूँ...
अनु - (वीर की चेहरे को छोड़ देती है) झूठे... नहीं बताना चाहते हैं... तो मत बताइए... यूँ मुझसे नाराज होने की झूठी बात क्यूँ कर रहे हैं...
वीर - क्या करूँ बोलो... मैं दुखी होने की ऐक्टिंग करता हूँ... पर तुम्हारा चेहरा देखता हूँ... तो सारे दुख भुला जाता हूँ... कभी कभी सोचता हूँ... के तुम्हें थोड़ा नाराज कर दूँ... ताकि तुम्हें मनाऊँ... पर तुम हो कि मेरी झूठ पकड़ लेती हो... और रूठने की झूठी नाटक तक नहीं करती...
अनु - जान चली जाए मेरी... अगर कभी आपसे मैं रूठी तो...
वीर - (अनु के गाल पर हल्का सा चपत लगाते हुए) श्श्श... क्या बात कर रही है... ऐसी बातों से मुझ पर क्या गुज़रती है.. सोच समझ कर बातेँ किया कर.. समझी...
अनु - (वीर की गोद से उतर कर वीर के बगल में बैठ जाती है और अपने कान पकड़ कर) ठिक है बाबा कान पकड़ती हूँ... फिर कभी ऐसा नहीं कहूँगी... पर मुझे बताइए तो सही... आप जाके कहाँ से आ रहे हैं...
वीर - (अनु के दोनों हाथों को अपने गालों पर रख कर) हमारे प्यारे संसार में... खुशियां ही खुशियां है... घर है... पैसा भी है... पर... संसार जैसा कुछ लग नहीं रहा है... इसलिए एक संसार का बंदोबस्त करने गया था...
अनु - मतलब...
वीर - अरे मेरी भोली अनु... काम ढूंढने गया था...
अनु - काम...
वीर - हाँ... ताकि मैं सुबह तेरी यह खूबसूरत चेहरा देख कर काम को निकलुं... तु मुझे पीछे से आवाज देकर बुलाए... मैं तेरी आवाज सुन कर रुक जाऊँ... तु मेरे पास आकर... मेरे हाथ में टिफिन कैरेज दे दे... मैं इस आशय से निकलुं... के मुझे शाम को लौटना है.. दो प्यारी प्यारी बड़ी सी हिरनी जैसी आँखे मेरी राह तक रही होंगी... जब मैं दुनिया से जद्दोजहद कर थका हारा लौटुं... तो मेरी राह में पलकें बिछाये इन दो नैनों को देखते ही... मेरी थकान सारी फुर्र हो जाए...

अनु मुस्करा देती है, शर्म से उसके गालों पर लाली छाने लगती है, वह वीर के गालों से अपना हाथ खिंच कर अपना चेहरा छुपा लेती है l

वीर - है.. क्या हुआ... (अनु के चेहरे पर हाथ हटा कर)
अनु - आप ना बड़े... छोड़िए...
वीर - अरे बात तो पुरा करो...
अनु - आप बड़े...
वीर - हाँ हाँ... आगे..
अनु - आप बड़े झूठे हो...
वीर - (अनु की हाथ छोड़ कर) लो करदिया मेरा मुड़ खराब...
अनु - (घबराते हुए) उई माँ.. क्या हुआ...
वीर - बताऊँगा... पहले यह बोलो... मैंने झूठ क्या बोला...
अनु - वह तो मैंने यूँही कह दी..
वीर - मुझे झूठा कहना... तुम्हें बड़ा मजा देता है ना...

अनु बड़ी मासूमियत से अपना सिर हिला कर हामी भरती है, जिसे देख कर वीर उसकी नाक खिंच कर कहता है l

वीर - तुम्हारी यही अदा तो मुझे दुनिया से टकराने के लिए हिम्मत देती है...
अनु - पर आपने बताया नहीं... किस काम के लिए गए थे और हुआ क्या...

वीर अनु को अपने उपर खिंच लेता है l अनु उसके उपर आकर गिरती है l पहले वीर उसके आँखों में झाँकता है फिर अपना सिर अनु के सीने पर धड़कन के पास रख देता है l अनु भी उसके सिर को थाम लेती है l

वीर - जानती है अनु... मेरे पिता ने... मेरी मदत को सबसे मना कर रखा है... यहाँ तक... जो कभी मुझसे डरा करते थे... मेरे रीकमेंडेशन पर जो दूसरों को नौकरी दिया करते थे... वे लोग भी... अब मुझसे कन्नी काटने लगे हैं... पर तु इसे दिल पर मत लगा ले... जो मैंने कभी बोया था... आज वह लौट कर आ रहा है... दुनिया से असल पहचान हो रही है...
अनु - आपके पास तो पैसे हैं ना... फिर आप क्यूँ कहीं जा रहे हैं...
वीर - वह मेरे पैसे नहीं है अनु... वह विक्रम भैया के पैसे हैं... मैं जिंदगी भर कुछ भी ना करूँ... फिर भी... मेरा एकाउंट कभी खाली होने नहीं देंगे... तेरे बदन पर... सूती साड़ी ही सही... पर एक बार अपनी कमाई से देखना चाहता हूँ... किसी रेस्टोरेंट के बजाय... फुटपाथ ही सही... पर एकबार तुझे अपनी कमाई से नास्ता खिलाना चाहता हूँ... (वीर के गालों पर गर्म पानी की बूंद आकर गिरती है, वीर अचानक अनु से अलग हो जाता है) अनु... यह क्या... तेरे आँखों में आँसू.. मेरे दिल को चीर देंगे... प्लीज मत रो...
अनु - मैं एक पनौती बन कर आपके जीवन में आई ना... आप राजकुमार... काम ढूंढ रहे हैं...
वीर - धत पगली... तु जानती है ना... मेरे पास इतना पैसा है कि... तुझे हीरों से सजा सकता हूँ... (अनु अपना सिर हामी भरते हुए हिलाती है) तुझे सेवन स्टार होटल में खिला सकता हूँ... (अनु उसी मासूमियत के साथ हाँ कहती है) यह तो एक मेरी एक ऐसी.. मासूम सी ख़्वाहिश है... जिसे एक दिन मैं पुरा करना चाहता हूँ... (अनु की नाक पकड़ कर उसका सिर हिलाते हुए) समझी मेरी मासूम पगली... (अनु हँस देती है) यह हुई ना बात... अब तुझे खुश ख़बर भी सुना देता हूँ... एक बंदे ने मुझे काम पर रख लिया...
अनु - झुठे...
वीर - सच्ची...
अनु - झूठ मत बोलिए... आपको झूठ बोलना आता ही नहीं है...
वीर - अच्छा... मुझे झूठ बोलना नहीं आता... तो और एक बात कहूँ...
अनु - (अपनी आँखे पोछते हुए) जी कहिये...
वीर - आई लव यु... (अनु शर्मा कर उठ कर जाने लगती है तो वीर अनु की हाथ पकड़ लेता है) क्या हुआ...
अनु - राजकुमार जी छोड़िए ना... किचन में बहुत कम पड़ा है...
वीर - (खड़े होकर) हाँ हाँ... पता है कितना काम पड़ा है... आज मिली हो तुम मुझे... चलो... मेरे बात का जवाब दो...
अनु - (हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है) छोड़िए ना राजकुमार जी...
वीर - नहीं... बिल्कुल नहीं... आज तो तुम्हारे मुहँ से सुन कर ही रहूँगा...

अनु हाथ छुड़ा नहीं पाती और वीर की घुम जाती है, वीर उसे फिर से अपने पास खिंच कर सीने से जकड़ लेता है l

वीर - चलो बोलो...
अनु - (शर्म ओ हया के साथ अपनी हँसी को दबाते हुए) क्या...
वीर - आई लव यु...
अनु - ऊँ.. हूँ..
वीर - अनु...
अनु - हूँ...
वीर - प्लीज...
अनु - अच्छा ठीक है... आप अपनी आँखे बंद कर लीजिए...
वीर - यह क्या... इसमे आँख बंद करने वाली क्या बात है..
अनु - प्लीज...
वीर - ठीक है... (आँखे बंद कर लेता है) कहो अब...
अनु - (धीरे से,धीमी आवाज़ में)आई...
वीर - हाँ हाँ... आई...
अनु - लव...
वीर - हाँ हाँ... लव...
अनु - आई लव...
वीर - हाँ हाँ.. आई लव...

तभी प्रेसर कुकर की सीटी जोर से बजने लगती है जिससे वीर चौंक कर अनु को छोड़ देता है l मौका पाकर अनु किचन की ओर भाग जाती है l

वीर - अनु... (अनु रुक कर पीछे मुड़ कर देखती है) दिस इज़ नॉट फेयर... (अनु वीर को जीभ दिखा कर किचन के अंदर चली जाती है, वीर मुस्करा कर रह जाता है)

अनु के किचन के अंदर जाने के बाद वीर सोफ़े पर बैठ कर रिमोट से टीवी ऑन करता है l टीवी पर एक न्यूज ब्रीफिंग चल रही थी l न्यूज सुनते ही वीर की आँखे हैरानी से फैल जाती हैं

"कल देर रात कटक में वाव की अध्यक्षा प्रतिभा सेनापति जी के घर पर कुछ अज्ञात लोगों ने डकैती की कोशिश की थी l घर में समान तितर-बितर होकर पड़े थे l घर पर तक कोई था या नहीं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है l पुलिस सेनापति दंपति से संपर्क करने की कोशिश कर रही है पर अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है l "

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भुवनेश्वर के प्रवेश पर टोल नाके पर सुपरिटेंडेंट जान निसार खान सादे कपड़े में जीप के बोनेट पर कुहनियों पर टेक लगाए खड़ा था l कुछ देर बाद एक ट्रक टोल नाके पर रुकती है l विश्व उस ट्रक से उतर कर भागते हुए खान के पास आता है l खान जल्दी से जीप की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है और बगल में विश्व l खान गाड़ी स्टार्ट कर शहर की ओर घुमा देता है l विश्व बहुत ही सीरियस हो कर अपनी सीट पर बैठा हुआ था l मुट्ठीयाँ भिंची हुई थी चेहरा सख्त हो गया था l

खान - विश्व डोंट बी सो पेनिक...
विश्व - (बिना खान की ओर देखे) कैसे ना होऊँ खान सर... माँ और डैड... रात से गायब हैं... उनकी अभी तक कोई खबर नहीं...
खान - देखो मुझे भी देर रात खबर मिली... जोडार ने तुम्हारे साथ साथ... मुझे भी खबर किया था... पुलिस हरकत में आ चुकी है... घबराओ नहीं... ट्विन सिटी पुरा नाका बंदी कर ली गई है...
विश्व - कोई फायदा नहीं होगा खान सर...
खान - ओह... कॉम ऑन विश्व... इतना भी निरास ना हो... कम से कम... तुम... भाभीजी का स्टेट में... क्या पोजीशन है... तुम जानते हो... और तापस एक बड़े अहदे वाला ऑफिसर रहा है... जिसने भी अगुआ किया है... वह पुरे सिस्टम से पंगा नहीं ले सकता...
विश्व - हाँ नहीं ले सकता... पर अगर वह सिर फ़िरा हुआ तो...

इस बार खान चुप रहता है l गाड़ी जोडार ग्रुप्स लिमिटेड के ऑफिस में रुकती है l विश्व और खान दोनों उतर कर ऑफिस के अंदर सीधे कांफ्रेंस रुम में पहुँचते हैं l विश्व देखता है कमरे में सुभाष और सुप्रिया भी जोडार के साथ बैठे हुए थे l विश्व को देखते ही तीनों खड़े हो जाते हैं l

विश्व - (जोडार से) जोडार साहब... मैं क्या कहूँ... कैसे कहूँ...
सुप्रिया - विश्व प्रताप...
विश्व - मैं आपसे बात नहीं कर रहा हूँ... यह कोई मीडिया मसाला वाली बात नहीं है...
जोडार - तुम्हें एक बार... मिस सुप्रिया को सुनना चाहिए...
सुभाष - हाँ विश्व... सुप्रिया के पास तुम्हारे लिए एक खबर है...

विश्व हैरानी से सुप्रिया की ओर देखता है, सुप्रिया हाँ में अपना सिर हिलाते हुए अपना मोबाइल निकाल कर एक विडिओ चला कर विश्व के हाथ में देती है l विश्व के लिए प्रतिभा का वीडियो मैसेज था

प्रतिभा - मेरे बेटे प्रताप... जानती हूँ... तु डर रहा होगा... हमारे बारे में सोच कर... हाँ... यह सच है... हमारी किडनैपिंग की कोशिश हुई... गनीमत है मर्डर करने की कोशिश नहीं हुई... पर उन किडनैपर से हमें तेरे एक शुभ चिंतक ने बचा लिया है... अब हम... यानी मैं और तेरे डैड दोनों उसके पास महफ़ूज़ हैं... नाम उसका मैं तुमसे इस वक़्त रिवील नहीं कर सकती... उसका कहना है कि तुम... समझ जाओगे और बहुत जल्द तुम उसे और हमें ढूंढ लोगे...

वीडियो बंद हो जाता है l विश्व के माथे पर बल पड़ जाता है l पास ही एक चेयर पर धढ़ाम कर बैठ जाता है l जोडार एक पानी का ग्लास लाकर विश्व को देता है पर विश्व मना कर देता है l

विश्व - जोडार सर... कैसे हुआ... मुझे थोड़ा डिटेल में बतायेंगे प्लीज...
जोडार - देखो विश्व... मुझसे एक छोटी गलती यह हुई कि... मुझे डबल लेयर सिक्युरिटी लगानी चाहिए थी... पर मैंने सिंगल लेयर सिक्युरिटी लगाया था... जो कि ब्रिच हो गया... जिन्होंने भी यह कांड किया है... वे लोग पहले से ही... अच्छी तरह से रेकी किए थे... (एक गहरी साँस छोड़ता है, फिर, एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक डीवाइस निकाल कर विश्व के हाथ में देता है) यह एक ट्रांसमिशन जैमर है... जिसके वज़ह से... सीसीटीवी की ट्रांसमिशन रुक गई... जिसकी अलर्ट... तुम्हारे मोबाइल पर तुम्हें मिली... जाहिर है... ऐसा ही अलर्ट... हमारे कंट्रोल रुम में भी आया था... तुमने जैसे ही फोन किया... मेरे आदमी जब तक घर पर पहुँचे... तब तक... सेनापति जी... और मैम किडनैप हो चुके थे... हमने अपने आदमियों को चेक किया तो पाया... (सीरींज नुमा एक शॉट दिखाते हुए) सबको ऐनेस्थेटीक ट्रांकुलाइजर शॉट से... बेहोश किया गया था...
विश्व - (उस शॉट को हाथ में लेकर) आपके आदमियों को बेहोश कर जिन्होंने माँ और डैड को किडनैप करी... माँ उन्हीं के कब्जे में है... या किसी और के कब्जे में...
सुभाष - जोडार ग्रुप को छका कर जो चोर सेनापति सर और मैम को किडनैप किया... उन पर कोई तीसरा मोर बन गया...
विश्व - यह आप कैसे कह सकते हैं...
सुभाष - देखो विश्व... मैं इस केस में नहीं हूँ... तुम्हारे वज़ह से... मुझे होम मिनिस्ट्री ने... रुप फाउंडेशन का एसआईटी चीफ बनाया है... तुम तक खबर पहुँचाने के लिए मैम ने... तुम्हारे फोन के बजाय... सुप्रिया जी को क्यूँ इन्फॉर्म किया... यह मैं नहीं कह सकता... पर जैसे ही यह विडिओ... सुप्रिया जी को मिला... उन्होंने मुझे कॉन्टैक्ट किया... मैंने खान सर से मिलकर... तुम्हारे लिए कुछ इन्फॉर्मेशन जुटाए हैं... शायद तुम्हारे काम आ जाए... (इतना कह कर सुभाष एक टेबलेट निकाल कर विश्व के हाथ में देता है) यह देखो... यह लिंक रोड पर जो प्रेस क्लब है... वहाँ की सीसीटीवी की फुटेज है...

विश्व देखता है दो काली रंग की गाड़ी को प्रेस क्लब जंक्शन के आगे चार काले रंग के गाड़ी आकर रुकती हैं l उससे कुछ बंदे उतर कर उन दो गाड़ी में बैठे लोगों को बंदूक की नोक पर ले लेते हैं, फिर वे लोग गाड़ी की डोर खोल कर बेहोश तापस दंपति को अपनी गाड़ी में लेकर उन दो गाड़ियों के हवा निकाल कर चले जाते हैं l तब एक आदमी एक गाड़ी से उतर कर अपना नकाब उतरता है और फिर बोनेट पर मुक्का मारता है l

विश्व - रंगा... यह तो रंगा है... इसने...
सुभाष - हाँ... रंग चरण सेठी... याद है... तुमसे छत्तीस का आँकड़ा है...
विश्व - इसने इतनी हिम्मत जुटाई कहाँ से... पर न्यूज में तो यह क्लिप नहीं चला रहे हैं...
खान - अभी तक पुलिस वालों को भी यह क्लिप नहीं मिली है...
विश्व - व्हाट...
सुभाष - हाँ... इसे हमने सुप्रिया जी की मदत से... पूरा का पूरा मास्टर क्लिप ले आए हैं... क्यूँकी... खान सर चाहते थे... पहले तुम... तसल्ली कर लो... उसके बाद ही हम... पुलिस और मीडिया तक पहुँचाएँगे...
विश्व - मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा... डैड के पास एक रिवॉलवर है... कैसे इस्तेमाल नहीं कर सके...
खान - उनके सोने के बाद... यह सब आधी रात को हुआ है... घर में घुसने वाले... किचन की खिड़की की सरिया को तेजाब से पिघला कर घुसे थे...

विश्व सोच में पड़ जाता है l सभी के सभी विश्व की ओर देखने लगते हैं l तभी अचानक विश्व सुभाष से दोबारा टेबलेट दिखाने के लिए कहता है l विश्व फुटेज को गौर से देखता है l सेनापति दंपति को अपनी गाड़ी में बिठाने के बाद एक नकाबपोश रंगा के गाड़ी के पास आता है और सीसीटीवी की ओर देखता है फिर एक काग़ज़ की पर्ची निकाल कर गाड़ी के छत पर चिपका का चला जाता है l

विश्व - (सुभाष से) सतपती जी... यह गाड़ी मौका ए वारदात पर क्या पुलिस को मिली...
सुभाष - हाँ... इस गाड़ी का चारों टायरों के हवा निकाल दी गई थी... इसलिए किडनैपर मजबूरन उस गाड़ी को छोड़ कर चले गए...
विश्व - क्या यह गाड़ी अभी पुलिस की कब्जे में है...
सुभाष - नहीं... पुलिस को यह नहीं मालुम है कि सेनापति सर और मैम की इस गाड़ी से किडनैपिंग की कोशिश हुई थी... इसलिए... यह गाड़ी ट्रैफ़िक पुलिस ऑफिस में है...
विश्व - क्या... मुझे इस चिट... या फिर इस चिट की फोटो मिल सकती है...

विश्व की हाथ से टेबलेट लेकर सुभाष वीडियो को दोबारा देखता है फिर अपना मोबाइल निकाल कर कहीं पर फोन लगाता है l कुछ देर बाद सुभाष के फोन पर एक व्हाट्सअप फोटो का मेसेज आती है l सुभाष उस फोटो को डाउन लोड करने के बाद विश्व को दिखाता है l वह फोटो ओरायन मॉल की पार्किंग एरिया की टोकन थी l अचानक विश्व की आँखे फैल जाती हैं l

विश्व - (जोडार से) सर मुझे आपकी गाड़ी चाहिए...
खान - मतलब तुम्हें मालुम हो गया... सेनापति और भाभी जी कहाँ है इस वक़्त...
विश्व - जी... पर यह निमंत्रण सिर्फ मेरे अकेले के लिए है... जाहिर है... मुझे अकेले जाना होगा...

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"अबे चुप"

चिल्लाया पिनाक l उसके सामने एक शख्स खड़ा हुआ था l पिनाक एक कुर्सी पर शराब का ग्लास हाथ लिए बैठा था l एक घुट पीने के बाद अपने आस्तीन से अपना मुहँ साफ करता है l

पिनाक - साले... तुझे काम दिया था... यह सिला दिया... कुछ भी नहीं हो रहा है तुझसे... (ग्लास ख़तम कर, एक छटपटाहत के साथ) लगता है... किसी और से बोलना पड़ेगा... तुझसे कुछ नहीं हो पा रहा है...
@ - जो आप समझ सकते हैं समझ लें... न्यूज में दिखा रहा है... सेनापति दंपति अभी भी... लापता हैं...
पिनाक - पर मेरे कब्जे में तो नहीं हैं ना.... पता नहीं वह कौनसा मनहूस दिन था... जो मैं तुझ पर इम्प्रेस हो गया.... पर तु तो एकदम से पनौती निकला... कोई एक काम ढंग से किया भी है तु...
@ - (एक गहरी साँस छोड़ते हुए) हाँ पर काम जब भी... लगभग लगभग होने को था... तभी कोई ना कोई भाजी मार जाता है... पर क्या करूँ... मैं आपके हुकुम का गुलाम... हमेशा इसी कोशिश में रहा... कहीं भी कभी भी... आपका नाम बाहर ना आए...
पिनाक - फायदा क्या हुआ.... ना मेरा बेटा मेरे पास है... ना ही उस विश्व को अपने घुटने पर ला सका... यह कौन आकर... सेनापति दंपति को हमसे छुड़ा ले गया...
@ - जो भी है... विश्व का दोस्त तो हो नहीं सकता... जरुर विश्व का कोई दुश्मन होगा... क्यूँकी अभी भी... वे लोग लापता हैं... और मुझे लगता है... विश्व का दुश्मन... विश्व से कॉन्टैक्ट किया भी नहीं होगा... वर्ना पुलिस की हलचल हमें बता चुकी होती...
पिनाक - ठीक है... हम ना सही... कोई तो विश्व को घुटने पर लाएगा... पर तुमने उस दो कौड़ी लड़की का भी अभी तक कुछ नहीं किया...
@ - इस बात के लिए... आपका भतीजा... मेरा मतलब है... युवराज जिम्मेदार हैं...
पिनाक - उसने क्या किया...
@ - जिस अपार्टमेंट में राजकुमार... और वह लड़की रह रहे हैं... उस अपार्टमेंट की सेक्यूरिटी से लेकर लिफ्ट मेन... दुध वाला... सब्जी वाला... सब... ESS के लोग हैं...
पिनाक - ओ... मतलब युवराज पूरी जान लगा कर... उस लड़की की हिफाजत कर रहे हैं...
@ - हाँ शायद... इसलिए तो... हमारे कोई भी आदमी... उस अपार्टमेंट के आसपास भी फटक नहीं पा रहे हैं...
पिनाक - चलो मान लिया... उस लड़की के पास तुम या तुम्हारा कोई आदमी फटक भी नहीं पा रहे हैं... पर सेनापति दंपति की हिफाजत तो युवराज नहीं कर रहे थे ना... वहाँ तो तुम्हारी दाल नहीं गली....
@ - अब विश्वा सिर्फ क्षेत्रपालों से तो दुश्मनी नहीं रखी होगी... जैल में विश्वा भाई था... जरुर किसी और ने दुश्मनी उतारी होगी... हाँ यह बात और है कि... वह हम पर भी नजर रखे हुए था...
पिनाक - यह कहते हुए... तुम्हें शर्म भी नहीं आ रही...
@ - छोटे राजा जी... मैं कोई प्रोफेशनल नहीं हूँ... हाँ जिन्हें प्रोफेशनल समझ कर काम सौंपा था... वह फुस्सी बम निकले...
पिनाक - जानते हो... मैं कुछ न कुछ कर के... एक जीत वाली सुकून के साथ... राजगड़ जाना चाहता हूँ... सिर उठा कर... सीना ताने... अपनी मूँछ पर ताव देते हुए... इसलिए... मैं ना तो... पार्टी ऑफिस जा रहा हूँ... ना ही... मेयर ऑफिस...
@ - कोई नहीं छोटे राजा जी... मेरा वादा है आपसे... अगला जो भी कदम हम उठाएंगे... चाहे वह उस लड़की के मामले में हो या... विश्व के मामले में... कामयाबी के साथ ही हम... लौटेंगे... फिलहाल तो विश्व की मुहँ बोले माँ बाप... लापता हैं... इस खबर का मजा लीजिए....

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चर्र्र्र्र्र्र्र्र् की आवाज के साथ एक गाड़ी द हैल की लोहे के फाटक के सामने आकर रुकती है l ड्राइविंग सीट की डोर खोल कर विश्व उतरता है l तब तक फाटक के बाहर चार गार्ड्स आकर अपना पोजीशन ले लेते हैं l विश्व उनके पास आकर खड़ा होता है l

विश्व - (उन गार्ड्स से) जाओ... अपने मालिक को खबर दो... विश्वा आया है...

गार्ड्स विश्व की बात सुनकर हैरानी से एकदूसरे को देखते हैं फिर उनमें से एक गार्ड विश्व से कहता है l

गार्ड - युवराज जी ने कहा था... विश्वा नाम का कोई बंदा आए तो उन्हें अदब के साथ सीधे जीम पर भेज देना... (इतने में बाकी गार्ड्स फाटक खोल देते हैं) वह रहा जीम... जहां पर युवराज एक्सरसाइज कर रहे हैं... और आपका इंतजार भी...

विश्व द हैल के परिसर के अंदर दाखिल होता है और सीधे जीम की ओर बढ़ने लगता है l जीम में दाखिल होते ही देखता है एक बड़ा सा हॉल है जो लाइट्स से जगमगा रहा है l एक और जीम के सभी प्रकार के इंस्टृमेंट्स लगे हुए हैं और दुसरी तरफ स्पेरिंग के लिए रिंग भी सजा हुआ है l वहीँ सिफ एक पैंट में और ऊपर का पूरा बदन नंगा था, विक्रम एक ओर पंच बैग पर घुसों और लातों की बौछार कर रहा था l विक्रम पसीने से लथपथ था, अपनी जीम पर विश्व को नजर घूमाते देख विश्व से पूछता है

विक्रम - पसंद आया... यह मेरा वर्ल्ड क्लास जीम है...
विश्व - (उसके पास पहुँच कर) मेरे माँ डैड कहाँ हैं...
विक्रम - वाव... मैं तो डर गया... मुझे लगा तुम मुझे थैंक्यू कहोगे...
विश्व - विक्रम... मैंने तुमसे पहले ही कह दिया था... तुम्हारे और मेरे फिलींग्स के बीच परिवार आना नहीं चाहिए...
विक्रम - हाँ कहा तो था... और तुमने यह वॉर्न भी किया था... के मुझे तुम्हारे घर में कभी घुसना नहीं चाहिए... क्यूँकी अगर मैंने ऐसा किया तो तुम... मेरे घर में घुसोगे...
विश्व - हाँ...
विक्रम - पर मैं तुम्हारे घर में घुसा ही नहीं... विश्व प्रताप... पर तुम मेरे घर में घुस आये... हा हा हा...
विश्व - विक्रम... मैं यहाँ तुमसे कोई बकवास करने नहीं आया हूँ... अब सीधी तरह से मेरे माता पिता को मेरे हवाले करो... नहीं तो...
विक्रम - ह्म्म्म्म... धमकी... गुड... (पंच बैग से दुर चलते हुए स्पेरिंग रिंग में पहुँच कर) नहीं तो... क्या कर लोगे... विश्वा...

विश्व स्पेरिंग रिंग की रस्सी को पकड़ कर एक कुदी मार कर रिंग के अंदर पहुँचता है l

विश्व - नहीं तो... मैं तुम्हारा वह हश्र करूँगा के तुम कभी सोच भी नहीं पाओगे युवराज...
विक्रम - वाह मजा आ गया... चलो दिखाओ... तुम क्या क्या कर सकते हो... जो मैं... सोच नहीं सकता... (विश्व एक पंच मारता है जिसे विक्रम डॉज करता है) ना... इस पंच में... कोई ताकत नहीं है... चलो... आज विश्वा द बिष्ट को दिखाओ...

विश्व अब लगातार कुछ पंच और किक मारने लगता है पर विक्रम आसानी से सारे पंच और किक को डॉज कर लेता है l पर धीरे धीरे विश्व की पंच और किक में तेजी आने लगती है l डॉज करते हुए विक्रम एक जबरदस्त मुक्का विश्व के जबड़े पर मारता है l मुक्का जबरदस्त था विश्व छिटक कर रस्सियों के बकल पर गिरता है l थोड़ी देर के लिए विश्व का सिर झनझना जाता है l

विक्रम - बहुत दिन हो गए हैं ना... तुम्हें मार खाते हुए... कोई ना... आज सारी की सारी कसर मैं पुरा कर दूँगा...

विश्व अब अपना शर्ट उतार कर एक ओर फेंक देता है l फिर स्पेरिंग वाला पोजिशन लेता है l विक्रम भी अपना पोजीशन लेता है l विश्व अब हमला कर देता है, विक्रम विश्व के सारे मूव को डॉज करते हुए परखता है फिर एक हिट विश्व के पिंजर पर करता है l पर इस बार विश्व तैयार था l विक्रम की पंच को रोक कर विश्व एक अपरकट पंच विक्रम के जबड़े पर जड़ देता है l इसबार विक्रम छिटक कर रिंग के बकल पर पड़ता है l

विक्रम - आह... वाव... बहुत अच्छे... पर विश्व तुम्हारे हर दाव का तोड़ है आज मेरे पास..

इस बार विक्रम विश्व पर धाबा बोल देता है l अब दोनों एक-दूसरे पर हावी होने के लिए दाव पर दाव आजमाने लगते हैं l पर कोई किसी को पछाड़ नहीं पा रहा होता है l दोनों थक कर आमने सामने वाले बकल पर साँस दुरुस्त करने लगते हैं l

विक्रम - सिर्फ दो मिनट... आज हर हाल में... फैसला हो जाना चाहिए...

विश्व इस बार विक्रम पर जम्प लगा देता है, पर वार खाली जाता है, क्यूंकि शायद विक्रम को अंदाजा हो गया था, इसलिए विक्रम फर्श पर रोल होते हुए दूसरे किनारे पर पहुँच जाता है l

विक्रम - बड़ी जल्दी है तुम्हें... चलो फिर... आज खेल ख़तम कर ही देते हैं...

दोनों के बीच फिर से स्पेरिंग शुरु हो जाती है l इस बार विक्रम धीरे धीरे स्लो होने लगता है तो विक्रम बकल के पास पहुँचता है और अचानक दाव बदल कर अपने पैरों का सीजर लॉक मूव विश्व के पैरों पर आजमाता है विश्व रिंग के बकल पर गिरता है तो विक्रम नीचे वाले बकल के रस्सी को विश्व के गले में फांस देता है l विश्व रस्सी में फंसे अपनी गर्दन को छुड़ाने के लिए अपने हाथ को बकल के बीच रख देता है l विक्रम पीछे से विश्व के घुटने पर अपना पैर रख कर विश्व का घुटना मोड़ देता है l इससे विश्व अब विक्रम के कब्जे में आ जाता है l तभी एक चीखने की जनाना आवाज आती है तो दोनों का ध्यान उस आवाज के तरफ जाता है l प्रतिभा भागते हुए रिंग के पास आती है l


प्रतिभा - यह क्या कर रहे हो विक्रम... मेरे बेटे ने क्या किया है...
विक्रम - ओह माँ जी आप... यहाँ... कैसे...
प्रतिभा - तुम दोनों लड़ क्यूँ रहे हो... और मेरे बेटे ने किया क्या है... देखो अगर इससे कोई गलती हो गई है... तो मैं इसके लिए माफी मांगती हूँ... (प्रतिभा हाथ जोड़ कर) प्लीज... छोड दो मेरे बेटे को...

विक्रम इतना सुनते ही विश्व के गले से वह बकल वाला रस्सी निकाल देता है l विश्व रिंग पर बकल वाले रस्सी पर पीठ टिकाए बैठ कर जोर जोर से साँस लेने लगता है l प्रतिभा विश्व को पीछे से पकड़ कर गले लगा कर रोने लगती है l अपनी साँस दुरुस्त करने के बाद विश्व विक्रम की ओर देखता है l विक्रम विश्व को देखते हुए एक विजयी मुस्कान के साथ अपनी मूँछों पर ताव देता है l विश्व के चेहरे पर भी एक मुस्कान आ कर चली जाती है l इतने में शुभ्रा, रुप और तापस सभी आकर रिंग के पास पहुँचते हैं l

घूम कर विश्व प्रतिभा की आँखों को पोंछता है फिर रिंग से उतर कर प्रतिभा और तापस दोनों के पैरों को छूता है l

प्रतिभा - (हैरानी के साथ) यह क्या है विक्रम....
विक्रम - कोई बात नहीं माँ जी... बस एक सुकून था जो खो गया था... आज आपने पुरा कर दिया...

विक्रम रिंग से बाहर आता है और गौर से शुभ्रा और रुप की ओर देखता है, फिर तापस और प्रतिभा की ओर देखता है l

विक्रम - वैसे माँ जी...
प्रतिभा - क्यूँ ना आती तो मार देता मेरे बच्चे को...
विश्व - रिलैक्स माँ रिलैक्स... कुछ नहीं हुआ है...
प्रतिभा - (विक्रम से) हमें उन किडनैपरों से बचा कर... क्या यह दिखा ने के लिए यहाँ लाए थे...
विक्रम - माँ जी... यह एक इतिहास है... और गुरुर भी...
विक्रम - माँ जी... मैं हमेशा से आपका गुनहगार रहा हूँ... शायद उसकी सजा आपके इस बेटे के हाथों मुझे मिली थी... पर क्या करूँ... मेरे धमनीयों में राजसी खुन बह रही है... अपना सिर और मूंछें ऊँचा रखने के लिए... हम किसी भी हद तक चले जाते हैं... आपके बेटे ने मुझे मूंछें रखने लायक नहीं रखा था... मैंने बस आज वही गुरुर दोबारा हासिल कर लिया है... (प्रतिभा हैरानी के साथ विक्रम की ओर देख रही थी) एक वह दिन था... जब मेरी पत्नी विश्व के आगे मेरे लिए गिड़गिड़ाइ थी... आज विश्व के लिए... मेरे सामने हाथ जोड़ दिए... बस... आपका मान रह गया... और मेरा गुमान बच गया...

 

Surya_021

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👉एक सौ बयालीसवां अपडेट
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क्षेत्रपाल महल

नागेंद्र के कमरे में एक मेडिकल बेड लगा हुआ है l डॉक्टर्स और नर्सेस अपने काम में लगे हुए हैं l बेड के पास एक चेयर पर भैरव सिंह बैठा हुआ है और बेड के सिरहाने पर सुषमा खड़ी हुई है l कमरे में भीमा और बल्लभ भी दरवाजे के पास खड़े हैं l एक सैलाईन बोतल स्टैंड पर लगा कर नागेंद्र के कलाई पर ड्रिप लगा देता है, उसके बाद डॉक्टर नागेंद्र को एक इंजेक्शन देता है और फिर भैरव सिंह के पास आकर कहता है

डॉक्टर - राजा साहब... उम्र का तकाजा है... इस पड़ाव पर... लाइट फ़ूड खाना सेहत के लिए ठीक होता है... बड़े राजा जी को... बदहजमी के वज़ह से उल्टी और गैस हो गई थी... हमने इंजेक्शन दे दिया है... अब फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है....
भैरव सिंह - (ताली बजाता है, कुछ नौकर दौड़कर आते हैं) जाओ... डॉक्टर और उनकी टीम को छोड़ कर आओ... (सुषमा से) छोटी रानी... इनकी जितनी भी फीस बनती है... इन्हें दे दीजिए...
डॉक्टर - यह फीस की क्या बात कर रहे हैं राजा साहब... हम तो आपकी प्रजा हैं... बड़े राजा जी की सेवा... बड़े भाग्य से मिला है... हम भाग्य को पैसों से कैसे तोल सकते हैं...
भैरव सिंह - यह क्या कह रहे हो डॉक्टर... आपने सर्विस दी है...
बल्लभ - राजा साहब... जैसी जिसकी भावना... भावना अगर नेक हो... तो उसका सम्मान तो होनी ही चाहिए...
भैरव सिंह - ठीक कहते हो प्रधान... (भीमा की ओर देख कर) भीमा... जाओ इन्हें हमारी गाड़ी से छोड़ आओ...

सारे मेडिकल स्टाफ़ झुक कर नमस्कार करते हैं और भीमा के साथ बाहर चले जाते हैं l भैरव सिंह एक नजर सुषमा को देखता है, सुषमा समझ जाती है और अपना सिर पर घूंघट ला कर सिर हिला कर कमरे में ठहर कर नागेंद्र की सेवा करने की हामी भरती है l उसके बाद उस उस कमरे से पहले भैरव सिंह निकलता है और उसके पीछे पीछे बल्लभ l दोनों महल के लंबे से गलियारे में पहुंचते हैं l बल्लभ भैरव सिंह से अपनी घुटी जुबान से पूछता है

बल्लभ - राजा साहब.. राजगड़ हो या यशपुर... आप फीस देना चाहें तो भी कोई फीस लेने की हिम्मत आज तक किया नहीं है... यह जानते हुए भी... आप उन्हें फीस क्यों ऑफर कर रहे थे...
भैरव सिंह - (कुछ सोच में खोया खोया सा था, उसी खोए खोए अंदाज में) कुछ नहीं... चांद सुरज में ग्रहण अक्सर लगते हैं... कहीं क्षेत्रपाल के रुआब में ग्रहण तो नहीं लग रहा... यही चेक कर रहे थे...
बल्लभ - ऐसा क्यूँ राजा साहब... लगता है... कोई चिंता का विषय है...
भैरव सिंह - खास तो नहीं है... पर... क्या हम... उसे खास ना समझ कर नजर अंदाज कर... गलती तो नहीं कर रहे हैं...
बल्लभ - ओ.. समझ गया... शायद आप विश्वा... (बल्लभ आगे कुछ कहता नहीं है)
भैरव सिंह - प्रधान बाबु... मत भूलें... आप कौन हैँ... क्षेत्रपाल से दोस्ती या दुश्मनी करने के लिए... क्षेत्रपाल के बराबर का कद होना चाहिए... विश्वा जैसे आदमी के लिए सोच कर... हम समय और शक्ति दोनों का नष्ट नहीं करना चाहते...
बल्लभ - (थोड़ा खरासते हुए) हम भी यही मानते हैं... जानते हैं... पर समय के चिलमन में क्या छुपा है... कौन जाने...
भैरव सिंह - हमारी उम्र जरुर ढल रही है प्रधान... पर आज भी हमारी सोच वैसी की वैसी ही है... रुआब और पैसों के आगे हम किसीके लिए... दिल में कोई दयामाया नहीं पालते...
बल्लभ - हम भी यही कह रहे हैं... आप अपनी रबाब से नीचे ना सोचें... विश्व जैसों के लिए सोचने के लिए... आपने हम जैसे लोग पाल रखे हैं..
भैरव सिंह - हाँ अब वही लोग... एक एक करके नाकारा साबित हो रहे हैं...
बल्लभ - ऐसा अभी क्या हो गया है राजा साहब...
भैरव सिंह - प्रधान... हमने विश्व के पीछे... रोणा को छोड़ा था... पर अब... रोणा गायब हो गया है... कोई खबर ही नहीं है... पता नहीं कहीं... मर मरा तो नहीं गया...
बल्लभ - नहीं... राजा साहब... वह जिंदा जरूर है... विश्वा को दबोचने के लिए... आड़े हाथ लेने के लिए... जरुर कोई तिकड़म भीड़ा रहा होगा...
भैरव सिंह - पुरी बात बताओ प्रधान... विश्वा... जिसकी सिर को अपने जुते की बराबर की ऊँचाई पर रखे थे... अब लगता है या तो वह अपना कद बढ़ा रहा है... या फिर... हमें हमारी कद से नीचे की ओर खिंच रहा है... रोणा को विश्व के पीछे छोड़ा था... पर पता नहीं क्या हुआ... उसकी कोई खबर नहीं है... फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है...
बल्लभ - राजा साहब... विश्वा... लगता है शायद उसके ऊपर भारी पड़ा... इस कदर भारी पड़ा के... शर्म और जिल्लत के मारे... अब मुहँ छुपाये कहीं छिप गया है... इंडेफिनाइट छुट्टी की एप्लिकेशन डाल कर चला गया है... उधर भुवनेश्वर में श्रीधर परीड़ा... भी गायब हो गया है...
भैरव सिंह - ह्म्म्म्म... इसका मतलब यह हुआ... की विश्वा अपना दायरा फैला रहा है... ताकि हमारे दायरे को काट सके...
बल्लभ - बात वहाँ तक नहीं आएगी... हम आने ही नहीं देंगे...
भैरव सिंह - वह तो देखा जाएगा... फिलहाल... हम अपने घर के सदस्यों के बारे में सोच रहे हैं...
बल्लभ - राजकुमार के बारे में...
भैरव सिंह - ह्म्म्म्म....
बल्लभ - समझ सकता हूँ... युवराज के मना करने के बाद... आपने राजकुमार को राजनीति में युवा चेहरा बना कर सामने लाने की कोशिश की गई... पर राजकुमार जी के उस लड़की के साथ... (चुप हो जाता है)
भैरव सिंह - कहो प्रधान कहो... चुप क्यूँ हो गए... राजकुमार ने हमारी सारे प्लान पर पानी फ़ेर दिया... वज़ह... वह दो कौड़ी की लड़की... और जब तक वह लड़की उसके साथ है... राजकुमार वापस नहीं आयेंगे...
बल्लभ - छोटे राजा जी भी तो अभी नहीं आए हैं... उन्हें अब राजगड़ आ जाना चाहिए... भुवनेश्वर में पता नहीं क्या कर रहे हैं...
भैरव सिंह - नहीं भुवनेश्वर में उनका काम बाकी है... जब तक काम ख़तम ना हो जाए... तब तक... छोटे राजा जी राजगड़ नहीं आयेंगे...
बल्लभ - क्या आप... उस बाबत भुवनेश्वर जाएंगे...
भैरव सिंह - नहीं... फ़िलहाल.. नहीं... हम यहाँ अपनी किला को मजबूत करेंगे... ताकि कोई दुश्मन राजगड़ में हमारे खिलाफ कोई किलाबंदी ना कर सके...
बल्लभ - क्या हम युवराज जी से संपर्क करें...
भैरव सिंह - प्रधान... बेटा अपने पैर में बाप का जुता पहनता है... बाप बेटे का जुता नहीं पहनता...
बल्लभ - क्षमा चाहते हैं... फिर राजकुमार कैसे वापस आयेंगे...
भैरव सिंह - हमने छोटे राजा जी को कह रखा है... उनके बारे में... छोटे राजा जी ज़रूर कुछ ना कुछ सोच रहे होंगे....

थोड़ी देर के लिए दोनों के बीच एक चुप्पी पसर जाती है l दोनों यूँही चले जा रहे थे l कुछ देर बाद बाद भैरव सिंह कहता है

भैरव सिंह - प्रधान...
बल्लभ - जी राजा साहब...
भैरव सिंह - तुम्हें क्या लगता है...
बल्लभ - जी... मैं कुछ समझा नहीं...
भैरव सिंह - (एक गहरी साँस छोड़ते हुए) देखो... कितना शांत वातावरण है... इतना शांत... के... कहीं दुर बहती नदी की कल कल शब्द यहाँ तक सुनाई दे रही है...
बल्लभ - (चुप रहता है)
भैरव सिंह - वातावरण इतना शांत कब होता है प्रधान...
बल्लभ - (हकलाते हुए) न न.. नहीं जानता राजा साहब...

तभी भीमा इन दोनों के पास आ पहुँचता है और चुपचाप सिर झुकाए खड़ा हो जाता है l

भैरव सिंह - प्रधान... इतनी खामोशी किसी आने वाले तूफान का इशारा है... तुम अब हर कोने में... हर हिस्से में... अपनी पैनी नजर घुमाओ... अपना कान लगाओ... हमारे अंदर से एक वाईव सा आ रहा है... कहीं ना कहीं... कुछ ना कुछ.. हो रहा है... पर क्या... हमें बहुत सतर्क रहना होगा... और भीमा तुम...
भीमा - जी हुकुम...
भैरव सिंह - कुछ दिनों के लिए... आखेट परिसर के... मगरमच्छों को और लकड़बग्घों को भूखा रखो...
भीमा - जी हुकुम...
भैरव सिंह - लगता है... बहुत जल्द उन्हें इंसानी गोश्त मिलने वाली है...

भीमा हैरानी भरे नजरों से बल्लभ की ओर देखता है l वैसा ही हाल बल्लभ का भी हुआ जा रहा था l


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किचन में अनु गैस पर कुकर को रखती है फिर गैस जलाती है l तभी उसे कलिंग बेल की टिंग टोंग की आवाज सुनाई देती है l अपने पल्लू से हाथ और चेहरा पोछते हुए दरवाजा खोलती है l सामने वीर खड़ा था l चेहरे पर थोड़ी उदासी और मायूसी लिए l वीर हल्का सा मुस्कराते हुए अंदर दाखिल होता है और सोफ़े पर धप कर बैठ जाता है l अनु अभी भी दरवाजे पर थी l वीर अनु की ओर देखता है, अनु अपनी बड़ी बड़ी आँखों से वीर की ओर थोड़ी हैरानी और परेशान भरे नजरों से देखे जा रही थी l वीर अपना हाथ बढ़ा कर इशारे से अनु को बुलाता है l अनु का चेहरा खिल उठता है l वह किसी मासूम बच्ची की तरह खिलखिलाते हुए भागते हुए आती है और दोनों हाथों से वीर की हाथ पकड़ लेती है l वीर उसे अपनी गोद में खिंच लेता है l

अनु की पीठ अब वीर के सीने से चिपकी हुई थी l वीर अपना चेहरा अनु की कंधे पर रख देता है l अनु को अपने कंधे पर एक गर्म चुंबन का एहसास होता है l उसकी आँखे बंद हो जाती है l पर उसे हैरानी होती है कि वीर अपना चेहरा उसके कंधे पर रख कर वैसे ही बैठ गया था l अनु वीर से सवाल करती है

अनु - राजकुमार जी... आज क्या हुआ...
वीर - (वैसे ही अपने गालों को अनु की कंधे पर रगड़ते हुए कहता है) कुछ नहीं मेरी जान... कुछ भी तो नहीं...
अनु - फिर आप ऐसे... मायूस से.. हारे हुए से क्यूँ लग रहे हैं...
वीर - (अपना माथा अनु के कंधे से हटा कर) क्या मैं तुम्हें हारा हुआ लग रहा हूँ... (अनु चुप रहती है, उसे सूझती नहीं है क्या कहे, वीर उसकी मनःस्थिति को समझ जाता है) अरे मेरी अनु... मेरी तो सबसे बड़ी जीत तु है... और जब तक तु मेरे साथ है... मुझे कौन हरा सकता है... खुद वह तकदीर लिखने वाला भी नहीं...
अनु - (वीर की ओर घुमती है, अपने दोनों हाथों से वीर की चेहरे को थामती है) राजकुमार... तो आपके चेहरे पर यह मायूसी क्यूँ...
वीर - चलो नहीं बताता... मैं तुम से नाराज हूँ... बहुत बहुत नाराज हूँ...
अनु - (वीर की चेहरे को छोड़ देती है) झूठे... नहीं बताना चाहते हैं... तो मत बताइए... यूँ मुझसे नाराज होने की झूठी बात क्यूँ कर रहे हैं...
वीर - क्या करूँ बोलो... मैं दुखी होने की ऐक्टिंग करता हूँ... पर तुम्हारा चेहरा देखता हूँ... तो सारे दुख भुला जाता हूँ... कभी कभी सोचता हूँ... के तुम्हें थोड़ा नाराज कर दूँ... ताकि तुम्हें मनाऊँ... पर तुम हो कि मेरी झूठ पकड़ लेती हो... और रूठने की झूठी नाटक तक नहीं करती...
अनु - जान चली जाए मेरी... अगर कभी आपसे मैं रूठी तो...
वीर - (अनु के गाल पर हल्का सा चपत लगाते हुए) श्श्श... क्या बात कर रही है... ऐसी बातों से मुझ पर क्या गुज़रती है.. सोच समझ कर बातेँ किया कर.. समझी...
अनु - (वीर की गोद से उतर कर वीर के बगल में बैठ जाती है और अपने कान पकड़ कर) ठिक है बाबा कान पकड़ती हूँ... फिर कभी ऐसा नहीं कहूँगी... पर मुझे बताइए तो सही... आप जाके कहाँ से आ रहे हैं...
वीर - (अनु के दोनों हाथों को अपने गालों पर रख कर) हमारे प्यारे संसार में... खुशियां ही खुशियां है... घर है... पैसा भी है... पर... संसार जैसा कुछ लग नहीं रहा है... इसलिए एक संसार का बंदोबस्त करने गया था...
अनु - मतलब...
वीर - अरे मेरी भोली अनु... काम ढूंढने गया था...
अनु - काम...
वीर - हाँ... ताकि मैं सुबह तेरी यह खूबसूरत चेहरा देख कर काम को निकलुं... तु मुझे पीछे से आवाज देकर बुलाए... मैं तेरी आवाज सुन कर रुक जाऊँ... तु मेरे पास आकर... मेरे हाथ में टिफिन कैरेज दे दे... मैं इस आशय से निकलुं... के मुझे शाम को लौटना है.. दो प्यारी प्यारी बड़ी सी हिरनी जैसी आँखे मेरी राह तक रही होंगी... जब मैं दुनिया से जद्दोजहद कर थका हारा लौटुं... तो मेरी राह में पलकें बिछाये इन दो नैनों को देखते ही... मेरी थकान सारी फुर्र हो जाए...

अनु मुस्करा देती है, शर्म से उसके गालों पर लाली छाने लगती है, वह वीर के गालों से अपना हाथ खिंच कर अपना चेहरा छुपा लेती है l

वीर - है.. क्या हुआ... (अनु के चेहरे पर हाथ हटा कर)
अनु - आप ना बड़े... छोड़िए...
वीर - अरे बात तो पुरा करो...
अनु - आप बड़े...
वीर - हाँ हाँ... आगे..
अनु - आप बड़े झूठे हो...
वीर - (अनु की हाथ छोड़ कर) लो करदिया मेरा मुड़ खराब...
अनु - (घबराते हुए) उई माँ.. क्या हुआ...
वीर - बताऊँगा... पहले यह बोलो... मैंने झूठ क्या बोला...
अनु - वह तो मैंने यूँही कह दी..
वीर - मुझे झूठा कहना... तुम्हें बड़ा मजा देता है ना...

अनु बड़ी मासूमियत से अपना सिर हिला कर हामी भरती है, जिसे देख कर वीर उसकी नाक खिंच कर कहता है l

वीर - तुम्हारी यही अदा तो मुझे दुनिया से टकराने के लिए हिम्मत देती है...
अनु - पर आपने बताया नहीं... किस काम के लिए गए थे और हुआ क्या...

वीर अनु को अपने उपर खिंच लेता है l अनु उसके उपर आकर गिरती है l पहले वीर उसके आँखों में झाँकता है फिर अपना सिर अनु के सीने पर धड़कन के पास रख देता है l अनु भी उसके सिर को थाम लेती है l

वीर - जानती है अनु... मेरे पिता ने... मेरी मदत को सबसे मना कर रखा है... यहाँ तक... जो कभी मुझसे डरा करते थे... मेरे रीकमेंडेशन पर जो दूसरों को नौकरी दिया करते थे... वे लोग भी... अब मुझसे कन्नी काटने लगे हैं... पर तु इसे दिल पर मत लगा ले... जो मैंने कभी बोया था... आज वह लौट कर आ रहा है... दुनिया से असल पहचान हो रही है...
अनु - आपके पास तो पैसे हैं ना... फिर आप क्यूँ कहीं जा रहे हैं...
वीर - वह मेरे पैसे नहीं है अनु... वह विक्रम भैया के पैसे हैं... मैं जिंदगी भर कुछ भी ना करूँ... फिर भी... मेरा एकाउंट कभी खाली होने नहीं देंगे... तेरे बदन पर... सूती साड़ी ही सही... पर एक बार अपनी कमाई से देखना चाहता हूँ... किसी रेस्टोरेंट के बजाय... फुटपाथ ही सही... पर एकबार तुझे अपनी कमाई से नास्ता खिलाना चाहता हूँ... (वीर के गालों पर गर्म पानी की बूंद आकर गिरती है, वीर अचानक अनु से अलग हो जाता है) अनु... यह क्या... तेरे आँखों में आँसू.. मेरे दिल को चीर देंगे... प्लीज मत रो...
अनु - मैं एक पनौती बन कर आपके जीवन में आई ना... आप राजकुमार... काम ढूंढ रहे हैं...
वीर - धत पगली... तु जानती है ना... मेरे पास इतना पैसा है कि... तुझे हीरों से सजा सकता हूँ... (अनु अपना सिर हामी भरते हुए हिलाती है) तुझे सेवन स्टार होटल में खिला सकता हूँ... (अनु उसी मासूमियत के साथ हाँ कहती है) यह तो एक मेरी एक ऐसी.. मासूम सी ख़्वाहिश है... जिसे एक दिन मैं पुरा करना चाहता हूँ... (अनु की नाक पकड़ कर उसका सिर हिलाते हुए) समझी मेरी मासूम पगली... (अनु हँस देती है) यह हुई ना बात... अब तुझे खुश ख़बर भी सुना देता हूँ... एक बंदे ने मुझे काम पर रख लिया...
अनु - झुठे...
वीर - सच्ची...
अनु - झूठ मत बोलिए... आपको झूठ बोलना आता ही नहीं है...
वीर - अच्छा... मुझे झूठ बोलना नहीं आता... तो और एक बात कहूँ...
अनु - (अपनी आँखे पोछते हुए) जी कहिये...
वीर - आई लव यु... (अनु शर्मा कर उठ कर जाने लगती है तो वीर अनु की हाथ पकड़ लेता है) क्या हुआ...
अनु - राजकुमार जी छोड़िए ना... किचन में बहुत कम पड़ा है...
वीर - (खड़े होकर) हाँ हाँ... पता है कितना काम पड़ा है... आज मिली हो तुम मुझे... चलो... मेरे बात का जवाब दो...
अनु - (हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है) छोड़िए ना राजकुमार जी...
वीर - नहीं... बिल्कुल नहीं... आज तो तुम्हारे मुहँ से सुन कर ही रहूँगा...

अनु हाथ छुड़ा नहीं पाती और वीर की घुम जाती है, वीर उसे फिर से अपने पास खिंच कर सीने से जकड़ लेता है l

वीर - चलो बोलो...
अनु - (शर्म ओ हया के साथ अपनी हँसी को दबाते हुए) क्या...
वीर - आई लव यु...
अनु - ऊँ.. हूँ..
वीर - अनु...
अनु - हूँ...
वीर - प्लीज...
अनु - अच्छा ठीक है... आप अपनी आँखे बंद कर लीजिए...
वीर - यह क्या... इसमे आँख बंद करने वाली क्या बात है..
अनु - प्लीज...
वीर - ठीक है... (आँखे बंद कर लेता है) कहो अब...
अनु - (धीरे से,धीमी आवाज़ में)आई...
वीर - हाँ हाँ... आई...
अनु - लव...
वीर - हाँ हाँ... लव...
अनु - आई लव...
वीर - हाँ हाँ.. आई लव...

तभी प्रेसर कुकर की सीटी जोर से बजने लगती है जिससे वीर चौंक कर अनु को छोड़ देता है l मौका पाकर अनु किचन की ओर भाग जाती है l

वीर - अनु... (अनु रुक कर पीछे मुड़ कर देखती है) दिस इज़ नॉट फेयर... (अनु वीर को जीभ दिखा कर किचन के अंदर चली जाती है, वीर मुस्करा कर रह जाता है)

अनु के किचन के अंदर जाने के बाद वीर सोफ़े पर बैठ कर रिमोट से टीवी ऑन करता है l टीवी पर एक न्यूज ब्रीफिंग चल रही थी l न्यूज सुनते ही वीर की आँखे हैरानी से फैल जाती हैं

"कल देर रात कटक में वाव की अध्यक्षा प्रतिभा सेनापति जी के घर पर कुछ अज्ञात लोगों ने डकैती की कोशिश की थी l घर में समान तितर-बितर होकर पड़े थे l घर पर तक कोई था या नहीं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है l पुलिस सेनापति दंपति से संपर्क करने की कोशिश कर रही है पर अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है l "

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भुवनेश्वर के प्रवेश पर टोल नाके पर सुपरिटेंडेंट जान निसार खान सादे कपड़े में जीप के बोनेट पर कुहनियों पर टेक लगाए खड़ा था l कुछ देर बाद एक ट्रक टोल नाके पर रुकती है l विश्व उस ट्रक से उतर कर भागते हुए खान के पास आता है l खान जल्दी से जीप की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है और बगल में विश्व l खान गाड़ी स्टार्ट कर शहर की ओर घुमा देता है l विश्व बहुत ही सीरियस हो कर अपनी सीट पर बैठा हुआ था l मुट्ठीयाँ भिंची हुई थी चेहरा सख्त हो गया था l

खान - विश्व डोंट बी सो पेनिक...
विश्व - (बिना खान की ओर देखे) कैसे ना होऊँ खान सर... माँ और डैड... रात से गायब हैं... उनकी अभी तक कोई खबर नहीं...
खान - देखो मुझे भी देर रात खबर मिली... जोडार ने तुम्हारे साथ साथ... मुझे भी खबर किया था... पुलिस हरकत में आ चुकी है... घबराओ नहीं... ट्विन सिटी पुरा नाका बंदी कर ली गई है...
विश्व - कोई फायदा नहीं होगा खान सर...
खान - ओह... कॉम ऑन विश्व... इतना भी निरास ना हो... कम से कम... तुम... भाभीजी का स्टेट में... क्या पोजीशन है... तुम जानते हो... और तापस एक बड़े अहदे वाला ऑफिसर रहा है... जिसने भी अगुआ किया है... वह पुरे सिस्टम से पंगा नहीं ले सकता...
विश्व - हाँ नहीं ले सकता... पर अगर वह सिर फ़िरा हुआ तो...

इस बार खान चुप रहता है l गाड़ी जोडार ग्रुप्स लिमिटेड के ऑफिस में रुकती है l विश्व और खान दोनों उतर कर ऑफिस के अंदर सीधे कांफ्रेंस रुम में पहुँचते हैं l विश्व देखता है कमरे में सुभाष और सुप्रिया भी जोडार के साथ बैठे हुए थे l विश्व को देखते ही तीनों खड़े हो जाते हैं l

विश्व - (जोडार से) जोडार साहब... मैं क्या कहूँ... कैसे कहूँ...
सुप्रिया - विश्व प्रताप...
विश्व - मैं आपसे बात नहीं कर रहा हूँ... यह कोई मीडिया मसाला वाली बात नहीं है...
जोडार - तुम्हें एक बार... मिस सुप्रिया को सुनना चाहिए...
सुभाष - हाँ विश्व... सुप्रिया के पास तुम्हारे लिए एक खबर है...

विश्व हैरानी से सुप्रिया की ओर देखता है, सुप्रिया हाँ में अपना सिर हिलाते हुए अपना मोबाइल निकाल कर एक विडिओ चला कर विश्व के हाथ में देती है l विश्व के लिए प्रतिभा का वीडियो मैसेज था

प्रतिभा - मेरे बेटे प्रताप... जानती हूँ... तु डर रहा होगा... हमारे बारे में सोच कर... हाँ... यह सच है... हमारी किडनैपिंग की कोशिश हुई... गनीमत है मर्डर करने की कोशिश नहीं हुई... पर उन किडनैपर से हमें तेरे एक शुभ चिंतक ने बचा लिया है... अब हम... यानी मैं और तेरे डैड दोनों उसके पास महफ़ूज़ हैं... नाम उसका मैं तुमसे इस वक़्त रिवील नहीं कर सकती... उसका कहना है कि तुम... समझ जाओगे और बहुत जल्द तुम उसे और हमें ढूंढ लोगे...

वीडियो बंद हो जाता है l विश्व के माथे पर बल पड़ जाता है l पास ही एक चेयर पर धढ़ाम कर बैठ जाता है l जोडार एक पानी का ग्लास लाकर विश्व को देता है पर विश्व मना कर देता है l

विश्व - जोडार सर... कैसे हुआ... मुझे थोड़ा डिटेल में बतायेंगे प्लीज...
जोडार - देखो विश्व... मुझसे एक छोटी गलती यह हुई कि... मुझे डबल लेयर सिक्युरिटी लगानी चाहिए थी... पर मैंने सिंगल लेयर सिक्युरिटी लगाया था... जो कि ब्रिच हो गया... जिन्होंने भी यह कांड किया है... वे लोग पहले से ही... अच्छी तरह से रेकी किए थे... (एक गहरी साँस छोड़ता है, फिर, एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक डीवाइस निकाल कर विश्व के हाथ में देता है) यह एक ट्रांसमिशन जैमर है... जिसके वज़ह से... सीसीटीवी की ट्रांसमिशन रुक गई... जिसकी अलर्ट... तुम्हारे मोबाइल पर तुम्हें मिली... जाहिर है... ऐसा ही अलर्ट... हमारे कंट्रोल रुम में भी आया था... तुमने जैसे ही फोन किया... मेरे आदमी जब तक घर पर पहुँचे... तब तक... सेनापति जी... और मैम किडनैप हो चुके थे... हमने अपने आदमियों को चेक किया तो पाया... (सीरींज नुमा एक शॉट दिखाते हुए) सबको ऐनेस्थेटीक ट्रांकुलाइजर शॉट से... बेहोश किया गया था...
विश्व - (उस शॉट को हाथ में लेकर) आपके आदमियों को बेहोश कर जिन्होंने माँ और डैड को किडनैप करी... माँ उन्हीं के कब्जे में है... या किसी और के कब्जे में...
सुभाष - जोडार ग्रुप को छका कर जो चोर सेनापति सर और मैम को किडनैप किया... उन पर कोई तीसरा मोर बन गया...
विश्व - यह आप कैसे कह सकते हैं...
सुभाष - देखो विश्व... मैं इस केस में नहीं हूँ... तुम्हारे वज़ह से... मुझे होम मिनिस्ट्री ने... रुप फाउंडेशन का एसआईटी चीफ बनाया है... तुम तक खबर पहुँचाने के लिए मैम ने... तुम्हारे फोन के बजाय... सुप्रिया जी को क्यूँ इन्फॉर्म किया... यह मैं नहीं कह सकता... पर जैसे ही यह विडिओ... सुप्रिया जी को मिला... उन्होंने मुझे कॉन्टैक्ट किया... मैंने खान सर से मिलकर... तुम्हारे लिए कुछ इन्फॉर्मेशन जुटाए हैं... शायद तुम्हारे काम आ जाए... (इतना कह कर सुभाष एक टेबलेट निकाल कर विश्व के हाथ में देता है) यह देखो... यह लिंक रोड पर जो प्रेस क्लब है... वहाँ की सीसीटीवी की फुटेज है...

विश्व देखता है दो काली रंग की गाड़ी को प्रेस क्लब जंक्शन के आगे चार काले रंग के गाड़ी आकर रुकती हैं l उससे कुछ बंदे उतर कर उन दो गाड़ी में बैठे लोगों को बंदूक की नोक पर ले लेते हैं, फिर वे लोग गाड़ी की डोर खोल कर बेहोश तापस दंपति को अपनी गाड़ी में लेकर उन दो गाड़ियों के हवा निकाल कर चले जाते हैं l तब एक आदमी एक गाड़ी से उतर कर अपना नकाब उतरता है और फिर बोनेट पर मुक्का मारता है l

विश्व - रंगा... यह तो रंगा है... इसने...
सुभाष - हाँ... रंग चरण सेठी... याद है... तुमसे छत्तीस का आँकड़ा है...
विश्व - इसने इतनी हिम्मत जुटाई कहाँ से... पर न्यूज में तो यह क्लिप नहीं चला रहे हैं...
खान - अभी तक पुलिस वालों को भी यह क्लिप नहीं मिली है...
विश्व - व्हाट...
सुभाष - हाँ... इसे हमने सुप्रिया जी की मदत से... पूरा का पूरा मास्टर क्लिप ले आए हैं... क्यूँकी... खान सर चाहते थे... पहले तुम... तसल्ली कर लो... उसके बाद ही हम... पुलिस और मीडिया तक पहुँचाएँगे...
विश्व - मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा... डैड के पास एक रिवॉलवर है... कैसे इस्तेमाल नहीं कर सके...
खान - उनके सोने के बाद... यह सब आधी रात को हुआ है... घर में घुसने वाले... किचन की खिड़की की सरिया को तेजाब से पिघला कर घुसे थे...

विश्व सोच में पड़ जाता है l सभी के सभी विश्व की ओर देखने लगते हैं l तभी अचानक विश्व सुभाष से दोबारा टेबलेट दिखाने के लिए कहता है l विश्व फुटेज को गौर से देखता है l सेनापति दंपति को अपनी गाड़ी में बिठाने के बाद एक नकाबपोश रंगा के गाड़ी के पास आता है और सीसीटीवी की ओर देखता है फिर एक काग़ज़ की पर्ची निकाल कर गाड़ी के छत पर चिपका का चला जाता है l

विश्व - (सुभाष से) सतपती जी... यह गाड़ी मौका ए वारदात पर क्या पुलिस को मिली...
सुभाष - हाँ... इस गाड़ी का चारों टायरों के हवा निकाल दी गई थी... इसलिए किडनैपर मजबूरन उस गाड़ी को छोड़ कर चले गए...
विश्व - क्या यह गाड़ी अभी पुलिस की कब्जे में है...
सुभाष - नहीं... पुलिस को यह नहीं मालुम है कि सेनापति सर और मैम की इस गाड़ी से किडनैपिंग की कोशिश हुई थी... इसलिए... यह गाड़ी ट्रैफ़िक पुलिस ऑफिस में है...
विश्व - क्या... मुझे इस चिट... या फिर इस चिट की फोटो मिल सकती है...

विश्व की हाथ से टेबलेट लेकर सुभाष वीडियो को दोबारा देखता है फिर अपना मोबाइल निकाल कर कहीं पर फोन लगाता है l कुछ देर बाद सुभाष के फोन पर एक व्हाट्सअप फोटो का मेसेज आती है l सुभाष उस फोटो को डाउन लोड करने के बाद विश्व को दिखाता है l वह फोटो ओरायन मॉल की पार्किंग एरिया की टोकन थी l अचानक विश्व की आँखे फैल जाती हैं l

विश्व - (जोडार से) सर मुझे आपकी गाड़ी चाहिए...
खान - मतलब तुम्हें मालुम हो गया... सेनापति और भाभी जी कहाँ है इस वक़्त...
विश्व - जी... पर यह निमंत्रण सिर्फ मेरे अकेले के लिए है... जाहिर है... मुझे अकेले जाना होगा...

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"अबे चुप"

चिल्लाया पिनाक l उसके सामने एक शख्स खड़ा हुआ था l पिनाक एक कुर्सी पर शराब का ग्लास हाथ लिए बैठा था l एक घुट पीने के बाद अपने आस्तीन से अपना मुहँ साफ करता है l

पिनाक - साले... तुझे काम दिया था... यह सिला दिया... कुछ भी नहीं हो रहा है तुझसे... (ग्लास ख़तम कर, एक छटपटाहत के साथ) लगता है... किसी और से बोलना पड़ेगा... तुझसे कुछ नहीं हो पा रहा है...
@ - जो आप समझ सकते हैं समझ लें... न्यूज में दिखा रहा है... सेनापति दंपति अभी भी... लापता हैं...
पिनाक - पर मेरे कब्जे में तो नहीं हैं ना.... पता नहीं वह कौनसा मनहूस दिन था... जो मैं तुझ पर इम्प्रेस हो गया.... पर तु तो एकदम से पनौती निकला... कोई एक काम ढंग से किया भी है तु...
@ - (एक गहरी साँस छोड़ते हुए) हाँ पर काम जब भी... लगभग लगभग होने को था... तभी कोई ना कोई भाजी मार जाता है... पर क्या करूँ... मैं आपके हुकुम का गुलाम... हमेशा इसी कोशिश में रहा... कहीं भी कभी भी... आपका नाम बाहर ना आए...
पिनाक - फायदा क्या हुआ.... ना मेरा बेटा मेरे पास है... ना ही उस विश्व को अपने घुटने पर ला सका... यह कौन आकर... सेनापति दंपति को हमसे छुड़ा ले गया...
@ - जो भी है... विश्व का दोस्त तो हो नहीं सकता... जरुर विश्व का कोई दुश्मन होगा... क्यूँकी अभी भी... वे लोग लापता हैं... और मुझे लगता है... विश्व का दुश्मन... विश्व से कॉन्टैक्ट किया भी नहीं होगा... वर्ना पुलिस की हलचल हमें बता चुकी होती...
पिनाक - ठीक है... हम ना सही... कोई तो विश्व को घुटने पर लाएगा... पर तुमने उस दो कौड़ी लड़की का भी अभी तक कुछ नहीं किया...
@ - इस बात के लिए... आपका भतीजा... मेरा मतलब है... युवराज जिम्मेदार हैं...
पिनाक - उसने क्या किया...
@ - जिस अपार्टमेंट में राजकुमार... और वह लड़की रह रहे हैं... उस अपार्टमेंट की सेक्यूरिटी से लेकर लिफ्ट मेन... दुध वाला... सब्जी वाला... सब... ESS के लोग हैं...
पिनाक - ओ... मतलब युवराज पूरी जान लगा कर... उस लड़की की हिफाजत कर रहे हैं...
@ - हाँ शायद... इसलिए तो... हमारे कोई भी आदमी... उस अपार्टमेंट के आसपास भी फटक नहीं पा रहे हैं...
पिनाक - चलो मान लिया... उस लड़की के पास तुम या तुम्हारा कोई आदमी फटक भी नहीं पा रहे हैं... पर सेनापति दंपति की हिफाजत तो युवराज नहीं कर रहे थे ना... वहाँ तो तुम्हारी दाल नहीं गली....
@ - अब विश्वा सिर्फ क्षेत्रपालों से तो दुश्मनी नहीं रखी होगी... जैल में विश्वा भाई था... जरुर किसी और ने दुश्मनी उतारी होगी... हाँ यह बात और है कि... वह हम पर भी नजर रखे हुए था...
पिनाक - यह कहते हुए... तुम्हें शर्म भी नहीं आ रही...
@ - छोटे राजा जी... मैं कोई प्रोफेशनल नहीं हूँ... हाँ जिन्हें प्रोफेशनल समझ कर काम सौंपा था... वह फुस्सी बम निकले...
पिनाक - जानते हो... मैं कुछ न कुछ कर के... एक जीत वाली सुकून के साथ... राजगड़ जाना चाहता हूँ... सिर उठा कर... सीना ताने... अपनी मूँछ पर ताव देते हुए... इसलिए... मैं ना तो... पार्टी ऑफिस जा रहा हूँ... ना ही... मेयर ऑफिस...
@ - कोई नहीं छोटे राजा जी... मेरा वादा है आपसे... अगला जो भी कदम हम उठाएंगे... चाहे वह उस लड़की के मामले में हो या... विश्व के मामले में... कामयाबी के साथ ही हम... लौटेंगे... फिलहाल तो विश्व की मुहँ बोले माँ बाप... लापता हैं... इस खबर का मजा लीजिए....

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चर्र्र्र्र्र्र्र्र् की आवाज के साथ एक गाड़ी द हैल की लोहे के फाटक के सामने आकर रुकती है l ड्राइविंग सीट की डोर खोल कर विश्व उतरता है l तब तक फाटक के बाहर चार गार्ड्स आकर अपना पोजीशन ले लेते हैं l विश्व उनके पास आकर खड़ा होता है l

विश्व - (उन गार्ड्स से) जाओ... अपने मालिक को खबर दो... विश्वा आया है...

गार्ड्स विश्व की बात सुनकर हैरानी से एकदूसरे को देखते हैं फिर उनमें से एक गार्ड विश्व से कहता है l

गार्ड - युवराज जी ने कहा था... विश्वा नाम का कोई बंदा आए तो उन्हें अदब के साथ सीधे जीम पर भेज देना... (इतने में बाकी गार्ड्स फाटक खोल देते हैं) वह रहा जीम... जहां पर युवराज एक्सरसाइज कर रहे हैं... और आपका इंतजार भी...

विश्व द हैल के परिसर के अंदर दाखिल होता है और सीधे जीम की ओर बढ़ने लगता है l जीम में दाखिल होते ही देखता है एक बड़ा सा हॉल है जो लाइट्स से जगमगा रहा है l एक और जीम के सभी प्रकार के इंस्टृमेंट्स लगे हुए हैं और दुसरी तरफ स्पेरिंग के लिए रिंग भी सजा हुआ है l वहीँ सिफ एक पैंट में और ऊपर का पूरा बदन नंगा था, विक्रम एक ओर पंच बैग पर घुसों और लातों की बौछार कर रहा था l विक्रम पसीने से लथपथ था, अपनी जीम पर विश्व को नजर घूमाते देख विश्व से पूछता है

विक्रम - पसंद आया... यह मेरा वर्ल्ड क्लास जीम है...
विश्व - (उसके पास पहुँच कर) मेरे माँ डैड कहाँ हैं...
विक्रम - वाव... मैं तो डर गया... मुझे लगा तुम मुझे थैंक्यू कहोगे...
विश्व - विक्रम... मैंने तुमसे पहले ही कह दिया था... तुम्हारे और मेरे फिलींग्स के बीच परिवार आना नहीं चाहिए...
विक्रम - हाँ कहा तो था... और तुमने यह वॉर्न भी किया था... के मुझे तुम्हारे घर में कभी घुसना नहीं चाहिए... क्यूँकी अगर मैंने ऐसा किया तो तुम... मेरे घर में घुसोगे...
विश्व - हाँ...
विक्रम - पर मैं तुम्हारे घर में घुसा ही नहीं... विश्व प्रताप... पर तुम मेरे घर में घुस आये... हा हा हा...
विश्व - विक्रम... मैं यहाँ तुमसे कोई बकवास करने नहीं आया हूँ... अब सीधी तरह से मेरे माता पिता को मेरे हवाले करो... नहीं तो...
विक्रम - ह्म्म्म्म... धमकी... गुड... (पंच बैग से दुर चलते हुए स्पेरिंग रिंग में पहुँच कर) नहीं तो... क्या कर लोगे... विश्वा...

विश्व स्पेरिंग रिंग की रस्सी को पकड़ कर एक कुदी मार कर रिंग के अंदर पहुँचता है l

विश्व - नहीं तो... मैं तुम्हारा वह हश्र करूँगा के तुम कभी सोच भी नहीं पाओगे युवराज...
विक्रम - वाह मजा आ गया... चलो दिखाओ... तुम क्या क्या कर सकते हो... जो मैं... सोच नहीं सकता... (विश्व एक पंच मारता है जिसे विक्रम डॉज करता है) ना... इस पंच में... कोई ताकत नहीं है... चलो... आज विश्वा द बिष्ट को दिखाओ...

विश्व अब लगातार कुछ पंच और किक मारने लगता है पर विक्रम आसानी से सारे पंच और किक को डॉज कर लेता है l पर धीरे धीरे विश्व की पंच और किक में तेजी आने लगती है l डॉज करते हुए विक्रम एक जबरदस्त मुक्का विश्व के जबड़े पर मारता है l मुक्का जबरदस्त था विश्व छिटक कर रस्सियों के बकल पर गिरता है l थोड़ी देर के लिए विश्व का सिर झनझना जाता है l

विक्रम - बहुत दिन हो गए हैं ना... तुम्हें मार खाते हुए... कोई ना... आज सारी की सारी कसर मैं पुरा कर दूँगा...

विश्व अब अपना शर्ट उतार कर एक ओर फेंक देता है l फिर स्पेरिंग वाला पोजिशन लेता है l विक्रम भी अपना पोजीशन लेता है l विश्व अब हमला कर देता है, विक्रम विश्व के सारे मूव को डॉज करते हुए परखता है फिर एक हिट विश्व के पिंजर पर करता है l पर इस बार विश्व तैयार था l विक्रम की पंच को रोक कर विश्व एक अपरकट पंच विक्रम के जबड़े पर जड़ देता है l इसबार विक्रम छिटक कर रिंग के बकल पर पड़ता है l

विक्रम - आह... वाव... बहुत अच्छे... पर विश्व तुम्हारे हर दाव का तोड़ है आज मेरे पास..

इस बार विक्रम विश्व पर धाबा बोल देता है l अब दोनों एक-दूसरे पर हावी होने के लिए दाव पर दाव आजमाने लगते हैं l पर कोई किसी को पछाड़ नहीं पा रहा होता है l दोनों थक कर आमने सामने वाले बकल पर साँस दुरुस्त करने लगते हैं l

विक्रम - सिर्फ दो मिनट... आज हर हाल में... फैसला हो जाना चाहिए...

विश्व इस बार विक्रम पर जम्प लगा देता है, पर वार खाली जाता है, क्यूंकि शायद विक्रम को अंदाजा हो गया था, इसलिए विक्रम फर्श पर रोल होते हुए दूसरे किनारे पर पहुँच जाता है l

विक्रम - बड़ी जल्दी है तुम्हें... चलो फिर... आज खेल ख़तम कर ही देते हैं...

दोनों के बीच फिर से स्पेरिंग शुरु हो जाती है l इस बार विक्रम धीरे धीरे स्लो होने लगता है तो विक्रम बकल के पास पहुँचता है और अचानक दाव बदल कर अपने पैरों का सीजर लॉक मूव विश्व के पैरों पर आजमाता है विश्व रिंग के बकल पर गिरता है तो विक्रम नीचे वाले बकल के रस्सी को विश्व के गले में फांस देता है l विश्व रस्सी में फंसे अपनी गर्दन को छुड़ाने के लिए अपने हाथ को बकल के बीच रख देता है l विक्रम पीछे से विश्व के घुटने पर अपना पैर रख कर विश्व का घुटना मोड़ देता है l इससे विश्व अब विक्रम के कब्जे में आ जाता है l तभी एक चीखने की जनाना आवाज आती है तो दोनों का ध्यान उस आवाज के तरफ जाता है l प्रतिभा भागते हुए रिंग के पास आती है l


प्रतिभा - यह क्या कर रहे हो विक्रम... मेरे बेटे ने क्या किया है...
विक्रम - ओह माँ जी आप... यहाँ... कैसे...
प्रतिभा - तुम दोनों लड़ क्यूँ रहे हो... और मेरे बेटे ने किया क्या है... देखो अगर इससे कोई गलती हो गई है... तो मैं इसके लिए माफी मांगती हूँ... (प्रतिभा हाथ जोड़ कर) प्लीज... छोड दो मेरे बेटे को...

विक्रम इतना सुनते ही विश्व के गले से वह बकल वाला रस्सी निकाल देता है l विश्व रिंग पर बकल वाले रस्सी पर पीठ टिकाए बैठ कर जोर जोर से साँस लेने लगता है l प्रतिभा विश्व को पीछे से पकड़ कर गले लगा कर रोने लगती है l अपनी साँस दुरुस्त करने के बाद विश्व विक्रम की ओर देखता है l विक्रम विश्व को देखते हुए एक विजयी मुस्कान के साथ अपनी मूँछों पर ताव देता है l विश्व के चेहरे पर भी एक मुस्कान आ कर चली जाती है l इतने में शुभ्रा, रुप और तापस सभी आकर रिंग के पास पहुँचते हैं l

घूम कर विश्व प्रतिभा की आँखों को पोंछता है फिर रिंग से उतर कर प्रतिभा और तापस दोनों के पैरों को छूता है l

प्रतिभा - (हैरानी के साथ) यह क्या है विक्रम....
विक्रम - कोई बात नहीं माँ जी... बस एक सुकून था जो खो गया था... आज आपने पुरा कर दिया...

विक्रम रिंग से बाहर आता है और गौर से शुभ्रा और रुप की ओर देखता है, फिर तापस और प्रतिभा की ओर देखता है l

विक्रम - वैसे माँ जी...
प्रतिभा - क्यूँ ना आती तो मार देता मेरे बच्चे को...
विश्व - रिलैक्स माँ रिलैक्स... कुछ नहीं हुआ है...
प्रतिभा - (विक्रम से) हमें उन किडनैपरों से बचा कर... क्या यह दिखा ने के लिए यहाँ लाए थे...
विक्रम - माँ जी... यह एक इतिहास है... और गुरुर भी...
विक्रम - माँ जी... मैं हमेशा से आपका गुनहगार रहा हूँ... शायद उसकी सजा आपके इस बेटे के हाथों मुझे मिली थी... पर क्या करूँ... मेरे धमनीयों में राजसी खुन बह रही है... अपना सिर और मूंछें ऊँचा रखने के लिए... हम किसी भी हद तक चले जाते हैं... आपके बेटे ने मुझे मूंछें रखने लायक नहीं रखा था... मैंने बस आज वही गुरुर दोबारा हासिल कर लिया है... (प्रतिभा हैरानी के साथ विक्रम की ओर देख रही थी) एक वह दिन था... जब मेरी पत्नी विश्व के आगे मेरे लिए गिड़गिड़ाइ थी... आज विश्व के लिए... मेरे सामने हाथ जोड़ दिए... बस... आपका मान रह गया... और मेरा गुमान बच गया...
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