भैरव सिंह और बल्लभ का संवाद बढ़िया है। ऊपर से वो कुछ भी कहे, लेकिन जाहिर है, उसको अंदर ही अंदर उद्विग्नता हो रही है। जिस विश्व को उसने इतना कमतर आँका हुआ था, उसी विश्व ने उसकी नाक में अभी से दम कर दिया है। इसलिए वो आगे की लड़ाई को ले कर चिंतित तो है।
हाँ चिंतित है
आगे चलकर वह विक्षिप्त भी हो जाएगा
क्यूंकि धीरे धीरे उसकी शक्तियाँ सिमट जाएंगी
अचानक से अनु और वीर की कहानी सुना कर आपने उनकी याद वापस दिला दी। लेकिन आखिरी पंक्ति (न्यूज़ ब्रीफिंग) ने इंगित किया है कि अब वो बहुत देर तक मुख्य-धारा से अलग नहीं रह पाएगा। वो जल्दी ही लड़ाई में शामिल होने वाला है।
हाँ वह लड़ाई में आएगा जरुर क्यूंकि विश्व उसका दोस्त जो ठहरा
और हम सब जानते हैं कि उसका सामना किस से होने वाला है।
विक्रम और विश्व के बीच जो हुआ उससे एक बात जाहिर है - और मैं यह बात सौ बार कह चुका हूँ शायद! विक्रम जैसा महा-चूतिया शायद ही कोई हो। वो भैरव सिंह का सच्चा वारिस है। खोखले गुरूर में चूर! बस, क्रूरता की ही कमी रह गई है - लेकिन बाकी सभी गुण वही हैं। वो न ही अपना परिवार सम्हाल सका, न ही खुद को! अपनी माँ के क़ातिल के सामने जुबां खोलने की दम नहीं है उसमें। नकारा है पूरा। और खेत्रपाल खानदान का न भौंक पाने वाला कुत्ता भी। उसकी अपनी कोई पहचान ही नहीं! वीर कम से कम कुछ कर पाने की तमन्ना और जूनून तो रखता है। इसमें कुछ भी नहीं है। बड़े भाई जैसा भी कोई गुण नहीं।
मतलब साफ़ है - वीर का सामना विक्रम से होना लगता है; और तो और रूप का भी सामना उससे होना लगता है। अभागी है इसकी बीवी। ठीक है, प्रतिभा ऑन्टी के गिड़गिड़ाने से उसके खोखले गुरूर को ठसक मिली हो, लेकिन हाथ क्या आया उसके?
हा हा हा हा हा
हर चरित्र अपने चारो तरफ़ एक सीमा बनाए हुए हैं जिसे वे नहीं लांघ रहे हैं
विक्रम भी ऐसा ही है
कोलकाता में विक्रम ने भैरव सिंह को जवाब देकर इसकी शुरुआत कर दी थी
आगे भी वह धीरे धीरे करता ही जाएगा
पर हाँ यह भी सच है कि वह अपने अहंकार का मारा है जो अपनी बीवी और बहन के सामने मार खाया था जिसकी टीस उसे दर्द दे रहा था जिसका निवारण आज हो गया
हमेशा की ही तरह बहुत ही बढ़िया अपडेट! ऐसे ही (अपेक्षाकृत) जल्दी जल्दी अपडेट मिलते रहें, तो मज़ा आ जाय भाई! कैसे हैं आप?
शुक्रिया मेरे दोस्त मेरे भाई मेरी चिंता करने के लिए व शुभकामनाओं के लिए
कार्तिक पूर्णिमा के दिन हम सपरिवार नाव छोड़ते हैं नदियों में तालाब में
जो इस बार भी हमने बहाया