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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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Ossm update mza aa gya sonal ki bhi chudai
Karo sonal ko bhabi ke sath milkar chodo
Sonal ko aur bhabhi ko group me bhi chudwao 3lndo se ossm ossm update
Bahut bahut shukriya dost
 

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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Superb update tha dost... humme to shadishuda beti Aur papa o ka intezar hai.... waiting more
Shukriya dost
 

hotshot

The things you own, end up owning you
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UPDATE 128

पिछले अपडेट मे आप ने पढा कि एक ओर जहा राज तिगडम लगा कर अपने पापा से उनके विचार उगवा रहा है और इस कोसिस मे है कि कही से कोई लिंक मिल जाये । वही दुसरी ओर अनुज अपने निजी अंगो को शांत करने के लिए परेशान हो रहा है और वो उसका उपाय तालाश रहा है । देखते दोनो भाई की ये तालाश कहानी मे क्या रंग जमाती है ।

अब आगे


राज की जुबानी


शाम को मै रोज की तरह चौराहे वाले घर पर चला गया । फिर नहाने के बाद उपर छत पर चला गया कुछ खास लोगो से बात चित करने ।
काजल से बात की तो पता चला कि वो कुछ दिन अपने मौसी के यहा रुक कर आयेगी क्योकि अभी छुट्टिया चल रही है ।

फिर मैने सरोजा से बात की तो उन्होने मुझे कल माल मे आने का न्योता दे दिया क्योकि भी दिल्ली से अपनी किसी डील से वापस आ चुकी थी तो लण्ड की तलब उसे भी और मुझे उसे चोदने को बेताब हो उठा ।

थोडे समय बाद निचे आ गया । फिर हाल मे ही बैठ कर मोबाईल चलाने लगा।
मै WhatsApp पर काजल भाभी को चेक किया तो उनका कोई मैसेज तो नही था लेकिन डीपी चेंज हो गयी थी । डीपी पर काजल भाभी अपने पति के साथ की सेल्फी को सेट की हुई ती । मैने गौर से रोहन को देखा तो मुझे काफी फिट लगा और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन में मुझे वो एक गम्भीर और भावनाओ से भरा हुआ इन्सान लगा ।

फिर मैने उनके स्टेटस चेक किये तो वहा फुल तस्वीर थी । हालकि रोहन स्लिम ट्रिम था मगर ना जाने मुझे उसकी पर्सनालिटि मे कुछ गड़बड़ दिख रही थी जैसे मानो वो अंदर से काफी हिंसक विचार का हो । शायद मेरे मन में उसके लिए ये विचार इस लिये आ रहे थे क्योकि मैने काजल भाभी का मगाया हुआ वो सेक्स गैजेटस देख लिये थे।


खैर मैने उस बात को दिमाग से निकाला और उन्के स्टेटस पर रिप्लाई कर दिया - Nice couple

थोडी ही देर मे रिप्लाई आया - thanks

मै - kya ho raha hai bhaabhi 😍
काजल - main rohan hu. Kaajal kichten me hain

मेरी तो फट गयी कि रोहन कयू भाभी का मोबाइल चला रहा है ।
मै - thik hai, aap kaise ho kbhi aayiye ghar par

काजल (रोहन) - ha ha kyu nhi . Waise aaj aunty ji aayi thi

मै चौक कि मा क्यू गयी थी काजल भाभी के लिए
इधर मै कुछ मिंट तक मैसेज सीन करके सोच रहा था कि रोहन ने फिर से मैसेज किया।

काजल (रोहन) - wo kuch mithayi aur fal laayi thi . Shaayd saadi waala sagun raha hoga

मै जैसे ही पढा मै समझ गया कि कल जब हम मौसी के यहा से आये थे तो उन्होने काफी ज्यादा मात्रा मे फल मिठाईया बान्ध दी और मा ने उन्हे आस पास सभी घरो मे पहुचा दिया होगा ।

फिर मैने ओके बोला और मोबाईल बन्द करके मा के पास किचन मे चला गया

मै - मा वो मौसी के यहा जो फल मिठाई आयी थी सब बट गये है ।
मा - वो तो कुछ अनुज ने दे दिये है और बाकी मैने यहा बाट दिये है । बस गाव पर भेजना बाकी है रंजू दिदी के यहा

मेरी आंखे चमक गयी कि चलो काजल भाभी के यहा ना सही लेकिन अब पंखुडी भाभी से मिलना तो हो ही जाएग ।

मै - अरे कोई बात नही कल सुबह ही मै दे आऊंगा उसमे क्या है

मा - हा तु ही जाना क्योकि अनुज कह रहा था कि उसे घर नही याद है ।
मै मुस्कुरा कर- अच्छा ठिक है मै चला जाऊंगा ।


फिर थोडी देर बाद पापा भी आ गये और हमसबने खाना खाया और वही रोज का रूटीन फ़ालो किया ।

अगली सुबह मे उठा और अपने कमरे मे जाकर फ्रेश हुआ और फिर नासता करके 8 बजे तक निकल गया फुलपुर गाव की ओर ।

बस स्टैंड से एक ई-रिक्सा ली जो मुझे गाव के मुहाने तक ले गया , वहा से मुझे अन्दर जाना था तो मै पैदल चल दिया ।

आखिरी बार आया तो बडी पुछ ताछ करनी पडी थी मगर इस बार सीधा घर की ओर चल दिया
घर पर वैसा ही माहौल था जैसा आप गाव के घरो मे होता है ,, जनुमा ताऊ खेत जा चुके थे और बाहर बरामदे मे सलोनी सोयी हुई थी ।

मै बिना कोई आवाज के अंदर घुसा तो किचन मे पंखुडी भाभी साड़ी पहने खाना तैयार कर रही थी ।

उफ्फ़ इतनी गदराई गाड और कमर देख कर मन मचल उठा मेरा और लण्ड ने सर उठाना शुरु कर दिया ।

मै मस्ती भरा कुछ सोच कर आगे बढा और पंखुडी भाभी की कमर मे गुदगुदी कर दी। ज्यो ही भाभी चहकी मै हसने लगा और भाभी मुझे देख कर खीझ गयी फिर हस्ते हुए - तोहरी बहिन चोदो , तु हवा का


मै भाभी के भोजपुरी ट्यून पर हसा - हिहिहिही का हुआ भौजी डर गयी का ?

भाभी - तु का डेरवा (डरा) पयिबा हमके , तोहार बहिन चोदो

मै हस कर -वो तो ठिक है भौजी ,,लेकिन मेरी दिदी के साथ करोगे कैसे हिहिहिही आपके पास तो है ही नही हाहहहहहा

भाभी हसी और लपक कर मेरे पैंट के उपर से मेरा लण्ड पकडती हुई - अरे तोहार बा ना ,,, उहे घुसवा देंगे तोहरी दिदी के बुर मे


मै शर्म से पानी पानी हो गया और हसे जा रहा था । साथ ही उत्तेजित भी हो गया था कि भाभी ने मेरा लण्ड पकड लिया था ।


भाभी मेरे लण्ड को निहारते हुए -देखो देखो कैसे अफना रहा है दिदी के नाम पर ,,,पक्का बहिनचोद है

मैने माहौल गरम होता देखा तो फायदा लेने का सोचा कि थोडा और फूहड़पना किया जाये क्या पता भाभी इसी मे खुल जाए।


मै हस कर - अरे ये तो कुछ और देख कर परेशान है भौजी हिहिहिहिही


भाभी मेरा अर्थ समझ रही फिर भी वो बातो को खतम करने के बदले आगे बढा रही थी , कारण था घर पर उनके और सलोनी के सिवा कोई था नही तो वो बेहिच्क जो मन मे आ रहा था वो बोल दे रहीथी । उपर से मै ठहरा उनका लाडला देवर तो खिचाई कैसे नही करती मेरी ।

भाभी - अच्छा जी वो क्या
मै बस इसी सवाल की तालाश मे था और हाथ आगे उन्के उभरे हुए कूल्हो को सहलाता हुआ - इसे देख कर

भाभी इतने भी मे भी नही रुकी और ना ही मेरा हाथ हटाया ,,बस गरदन घुमा कर पीछे देखा कि मेरा हाथ कहा और हस कर बोली - बस इत्ने मे भी बहक गये तो काहे का भतार हो तुम हिहिहिही


मै पहले तो उनके कहने का मतलब समझ ही नही पाया - मतलब

भाभी - अरे जब औरत का कुल्हा देख कर ही तुम्हारा तन जा रहा है तो कही खुला माल पा गये तो ...... .हिहिहिहिही
मै समझ गया कि भाभी मूड मे है तो मैने उन्के कूल्हो की गोलाइयो को साडी के उपर से ही सहलाते हुए - रुको फिर तो मै खोल कर देख ही लेता हू कि क्या होता है ....। हिहिही

भाभी की आखे फैली और वो चिहुकी - हिहिहिही धत्त नही बदमाश कही के मै तो मजाक कर रही थी हिहिहिही

जैसे जैसे वो मुझे दुर होने की कोशिस करती मै उनकी कलाई तो कभी भरे हू मुलायम कमर को पकडता और साड़ी उपर खिचता ।

आखिर मैने उनकी दोनो कलाईयाँ ऐंठते हुए उनकी कमर पर ले आया और उन्हे किचन के तरख्त पर झुका कर एक हाथ से उनकी साड़ी उठाने लगा ।

भाभी छटपटाती रही और हसते हुए बोली - छोड दो नही तो सच मे तुम्हारी बहिनिया चोद देंगे ,,,

मै हसता हुआ उनकी साड़ी उठाने लगा लेकिन वो अब पैर झटकने लगी तो साडी मेरे हाथ से छिटकने लगी ।

मै - अरे तो जाओ चोद लो ना ,,,रोका कौन है ,,लेकिन आज तो हम देख के रहेंगे

इधर मैने अपने पैरो से उनका पैर भी फसा दिया । साड़ी और पेतिकोट एक साथ उठाने लगा तो भाभी अब हसते हुए बिनती करने लगी - हिहिहिही प्लीज बाबू मान जाओ ,,छोड दो ना ,अच्छा सॉरी नही कहेंगे कुछ सोनल बहिनी को हिहिही


मै कहा रुकने वाला था मैने उनकी साडी और पेतिकोट को कमर तक उठा दिया - अह्ह्ह क्या मस्त गोरी गाड थी उम्म्ं

फिर एक हाथो से उनकी नंगी गाड़ को मलने लगा जिस्से भाभी और छ्टकने लगी और मुझे गालिया देने लगी ।

भाभी - साले छोड दो ,नही तो पक्का तुमसे ही तुम्हारी दीदी ना चुदवा दी तो कहना

मै अब मस्ती मे आ चुका था और मैने अपनी बिच वाली ऊँगली को मुह मे लेक गिला किया और उसे भाभी गाड़ के सुराख पर रगड़ने लगा ।

भाभी छ्टकती लेकिन कलाई ऐन्ठी होने के कारण दर्द से परेशान भी थी । इधर मैने उनकी गाड़ के सुराख खोजकर अपनी उन्ग्ली पेल दी ।

भाभी चीखी मगर उनकी हसी बरकरार थी जो मुझे लगातार हिम्मत दे रही थी - ऐईईई साले बहिनचोद ,,,का कर रहे हो उम्म्ंम्ं माआआ सीईईई


मै हस्ता हुआ उनकी गाड से उन्गली निकाल कर अपने हाथ को निचे झाटो से भरी चुत पर ले गया ,,जिस्से भाभी की हालत और खराब होने लगी म

भाभी - अह्ह्ह बाबू प्लीज हाथ छोड दो अह्ह्ह दुख रहा है

मैने भी उनके दर्द को समझा और उनकी कलाई छोड दी और जैसे ही वो फ्री हुई तेजी से पल्टी - रुको तोहरी बहिनचोदो बता रहा है

मै अब थोडा मद मे आ चुका था तो इस बार सीधा सामने से उनकी चुत को साड़ी के उपर से रगड़ते हुए उन्हे किचन की दिवाल से चिपका दिया और इस बार उनकी दोनो कलाई वापस से पकड कर उपर कर दी
मै आंखो मे मद मे होके देखता हुआ अपने चेहरे को भीचता हुआ उनकी चुत को सहलाने लगा - हा किस्से चोदोगे आप ? यहा तो कुछ नही है

मैने भाभी के साड़ी के हाथ घुसाकर चुत टटोलता हुआ बोला ।
भाभी लगातार अपनी चुत पर मेरे हाथ से घिसाव से बहुत ही गरम हो गयी थी और लम्बे समय से ना चुदने के कारण उनकी चुत ने पिचपिचाना शुरु कर दिया था ।

बार बार मेरे पुछने पर भाभी मुस्कुरा कर शर्माते हुए मेरे लण्ड की ओर इशारा करके बोली -वो है ना ,उसी से चुदवाउन्गी
मै उन्के बातो से और भी उत्तेजित हो गया और एक हाथ से पैंट खोलते हुए लण्ड बाहर निकाल दिया ।

उसे हाथो मे लेके सहलाते हुए - इससे चुदवाओगी क्या हम्म्म बोलो
भाभी की नजरे मे मोटे लण्ड पर जम गयी और उनकी सासे तेज हो गयी

मैने अपना लण्ड से हाथ हटा कर पहले उन्के गुदाज गाल पर हल्के से चपत लगायी और भी उन्के दोनो गालो को निचे दबाते हुए कबूलवाने लगा - बोलो ना भाभी

भाभी नशिलि आन्खो से मेरे आंखो मे देखी और मुस्कुरा कर बोली - हा इसी को तुम्हारी बहिन के बुर मे डलवाउन्गी

मै और भी उत्तेजित हो गया और सामने आके अपना लण्ड भाभी की चुत पर लगाने लगा - और मै अगर इसमे डाल दू तो

भाभी अपनी चुत के पास मेरे लण्ड की सख्ती मह्सूस कर सिहर गयी और गहरी सासे लेने लगी ।
भाभी की सहमती तो कबकी मिल चुकी थी ,,बस धक्का लगाने की जरूरत थी
मैने अपने हाथ से लण्ड को चुत के मुहाने पर सेट करने के लिए थोडा घुटनो को झुकाया तो उपर मेरे हाथ से भाभी की कलाइया छूट गयी । मगर उन्होने मुझे रोका नही अल्बत्क अपने हाथो से मेरे कंधे थाम कर जांघो को खोल दिया

मै मुस्कुरा कर अपने लण्ड का सुपाडा खोलता हुआ भाभी की गीली चुत के मुहाने पर अपनी गाड़ उचका कर घुसेड़ दिया और फिर उनकी कमर थामते हुए ऐसे ही खडे खडे लण्ड को उन्की बुर मे आधा घुसा दिया ।

भाभी चीखी और सिसकी - अह्ह्ज उम्म्ंम

मैने उनकी साडी को और उपर करके एक जांघ को पकड कर उठाने लगा

भाभी - अह्ह्ह न्हीईई दर्द हो रहा है ,,नस अकड जायेगी रुको उम्म्ंम्म्ं

मै रुका और वो मुझसे अलग होकर एक नजर किचन से बाहर बरामदे की ओर मारा और मुझे पकड कर ऐसे ही खुले लण्ड के साथ उपर ले जाने लगी ।

मै खुश था और अपना लण्ड सहलाता हुआ उपर के हाल मे गया और पीछे से उनको दबोच लिया

भाभी वापस से सिसकिया लेने लगी ।
मैने साडी उपर से हटा कर ब्लाऊज के उपर से उनकी चुचिया मसलते हुए- अह्ह्ह भाभी कितना मिजवाति हो चुचि अपना ,अह्ह्ह मस्त मुलायम है

भाभी चुप रही और सिसकिया लेते हुए अपनी गाड़ मेरे लण्ड पर घिस्ती रही । मैने एक एक करके उन्के हुक खोल दिये और चुचो को आजाद कर दिया

अह्ह्ह 36DD वो गोल भारी चुचे उम्म्ं हाथो मे नही समा रहे थे ।
मै उन्हे मसलता हुआ भाभी के कानो मे - लग रहा है कमलेश भैया के अलावा और भी कोई रगड़ रहा है इन्हे

भाभी कसमसाई और बोली - हा है कुछ बहिनचोद ,,अहहहहह सीईई ओह्ह्ह्फ्फ्फ्फ


मैने भाभी की बात पूरी होने से पहले ही उन्हे घूमाया और मुन्क्के जैसा निप्प्ल मुह मे घूलने लगा ।

भाभी मेरे सर को अपने सिने पर दबाने लगी।
मै बारी बारी उनकी दोनो चुचिय मुह मे लेके चुसने लगा । भाभी की मदहोशि बढती ही जा रही थी उनका हाथ मेरे लण्ड को भीच रहा था
भाभी की गहरे भूरे रंग की घुंडी पर जीभ फ्लिक करते हुए मै उनकी चुचिया मसलता हुआ - अह्ह्ह भौजी कितनी रसिली चुची है उम्म्ंम्ं ,,, नीचे जाओ ना

भाभी मुस्कुराइ और उसी हाल मे एड़ियो के बल बैठते हुए लंड को मुह मे भरने लगी
मै उन्के सर को अपनी लण्ड पर दबाते हुए एडिया उचकाने लगा और लण्ड को गले तक ले जाने लगा ।

भाभी के मुह मे मेरा लण्ड और तन गया था भाभी के गले की घंटी पर जैसे ही मेरे सुपाडे ने घिसा ,,भाभी खासने लगी और ढेर सारा लार मेरे लण्ड पर उडेलने लगी ।

फीर अच्छे से उसे मेरे लण्ड पर घिसा और लण्ड को चिकना करने लगी । मै बहुत बेताब हुआ जा रहा था तो फटाक से भाभी को पकड़ कर हाल मे रखी हुई चौकी पर लिटा दिया और जान्घे खोलते हुए साड़ी कमर तक उठा दी ।

काले घुघराले बालो के बिच भाभी के चुत का गोरा क्लिट मोटी जैसे चमक रहा था ,,मैने अपना हाथ आगे बढाया और चुत के सामने से बालो को हटाया फिर उपर की चमडी को उंगलियो मे गुथने लगा ।

भाभी पागल सी होने लगी मैने उनकी टांगो को खिच कर अपना लण्ड चुत के मुहाने पर लगाया और बोला - क्या हुआ भौजी अब नही दोगी गाली हम्म्म

भाभी मुस्कुराई और धीमे से बोली - तोहार बहिन चोदो
मै मुस्कुराया और लण्ड को एक झटके से उनकी चुत मे धकेलता हुआ - क्याआआ

भाभी सिसकी और थोडा दर्द भरे आवाज मे - अह्ह्ह तोहरी बहिनीया चोदो उम्म्ंम अह्ह्ह


मुझे जब भी भाभी गाली देती मै और भी उत्तेजित मह्सूस करता और लण्ड को बडी बेरहमी से रगडता हुआ पुरा जड़ मे घुसेड़ दिया और मुस्कुरा कर उनकी आंखो मे देखता हुआ - का बोली हिहिहिही

भाभी दर्द से छ्टपटा रही थी मगर मेरे छेड़ने पर वो अब शर्मा भी रही थी तो हस कर - अह्ह्ह तोहर बहिनचोदो रुक काहे गये ,,,पेलो ना अह्ह्ह नही तो उम्म्ंम्म्ं

मैने उनकी टांगो को थामा और धक्का लगाता हुआ - क्या नही तो ,,बोलो उम्म्ंम बोलो ना


भाभी सिस्कते हुए - अह्ह्ह नही तो अह्ह्ह्ह मा ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह सीईईई ओफ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह

मै लगातार धक्के लगाते हुए उनसे कबूलवाये जा रहा था और भाभी सिसकिया लिये जा रही थी ।
भाभी - उफ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह्ह माआआ इह्ह्ह्ह ऐसे ही पेलो अह्ह्ह मिलेगी बाबू सोनल भी मिलेगीयह्ह्ह्ज उसकी बुर भी ऐसे ही चोदना अह्ह्ह्ह माआ

मै दीदी के नाम पर और भी जोश मे आया और लम्बे लम्बे धक्के
लगाने लगा ।
भाभी भी उत्तेजीत होकर अपनी चुत को मेरे लण्ड पर कसती हुई शब्दो को पीसते हुए बोली - अह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम और कस से पेल ना बहिनचोद ,,,बहुत मजा आ रहा है दीदी के नाम पर चोदाने पर ह्न्मममं अह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम्ं और तेज्ज्ज अह्ह्ह

मै उनकी बातो पर मुस्कुराया और अपना धक्का जारी रखा

भाभी सिस्क्किया लेती हुई मुझे और जोशीला करने मे लगी थी - अह्ह्ह हा बाबू और पेल्ल अह्ह्ह बहिनचौद ओह्ह्ह मस्त चोद रहा हौ आह्ह

मै - भाभी सच सच बताना ,और किसका लण्ड घोट चुकी हो उम्म्ंम्ं


भाभी कसमसा कर - आह्ह तुमको क्या लगता है अगर लण्ड मिलता तो ऐसे जन्गल रखती मै अह्ह्ज उम्म्ंम्ं बहुत दिनो बाद दमदार मुसल मिला है अह्ह्ह्ह और एज्ज्ज्ज मेरा होगा उह्ह्ह्ह राज्ज्ज और तेज बाबुउऊ उम्म्ंम

मै अपनी धक्के को तेज करता हुआ -अह्ह्ह फिर ये आपके चुचे इतने मोटे कैसे उम्म्ंम

भाभी मेरे सवाल का जवाब देने से पहले ही झडने लगी ,,उनकी चुत का गरमा गरम माल मेरे लण्ड की चमडी पर बघरने लगा,,,मै और तेज से थपाथप उनकी चुत मे पेलता रहा और मै भी झड़ने क्र करीब ही था


मै उतेजीत होकर - अह्ह्ह भाभी बताओ ना ,,आपके चुचे बडे कैसे हुए फिर

भाभी अब झड़ चुकी थी तो अपने होश मे थि और मुस्कुरा कर अपने चुत को मेरे लण्ड पर कस्ते हुए - आह्ह बाबू ये गाव है यहा कि होली मे बुढे जवां सब देवर हो जाते है ,,,अब कितनो को रोका जाये चोली रग्ने से ,,,, दो दिनो मे लाल कर देते है सीई अह्ह्ज और फिर ....


मै भाभी की बाते सुन कर कल्पना करने लगा कि कैसे होली के दिनो मे गाव के मनचले भाभी के ब्लाउज मे हाथ घुसा का उनकी चुचो की घुंडीया घुमाते होगे ।

मै इस कल्पना मात्र से ही पागल हो गया और जोश से भाभी की एक टांग उठा कर धकाधक पेलने लगा - अह्ह्ज फिर क्या भाभी ???

भाभी मेरे तेज धक्को को सहती हुई सिसकी - वोहहह अह्ह्ह वो बाकी की कसर तुम्हारे भैयाआअह्ह पूरी कर देते है अह्ह्ह उम्म्ं मा

मै अब झड़ने के करीब था तो फटाक से लण्ड निकाला और नसो दबाव बना कर लण्ड सहलाने लगा ।
भाभी फौरन सरकती हूई चौकी से निचे आ गयी और मेरा लण्ड पिचकारी छोड़ी

अह्ह्ज भाभी अह्ह्ह आह्ह
मै एक साथ सारा माल भाभी के मुह पर मारा बाकी कुछ चुचियो पर गयी

बचा कुचा भाभी ने निचोड लिया । थोडी देर बाद भाभी ने खुद को साफ किया और साडी सही करने लगी ।

मै उनके पीछवाड़े पर पन्जा कसता हुआ - तो भाभी अब क्या ख्याल है मेरी दीदी के बारे मे हिहिही।

भाभी शर्मायी और बोली - वो मै चोदवा के रहूँगी हिहिही ,,अच्छा ये बताओ यहा कैसे आना हुआ

मै हस के - वो मौसी के यहा शादी की मिठाईया आयी थी वही देने आया था ।
फिर हम दोनो निचे आये और उन्होंर मुझे पानी लाकर दिया ।

मेरा मन एक राउंड और करने को था लेकिन भाभी ने मना कर दिया कि फिर कभी और मुझे भी दुकान पर जाना था ।तो मै वापस घर आ गया ।

दिनभर दुकान मे व्यस्त था और शादियो की सीजन चल रहा था तो फुरसत नही मिली । दोपहर मे 2 बजे के करीब सरोजा का फोन आया लेकिन मै दुकान मे व्यस्त था तो फोन उठा कर उन्हे फिर कभी आने का बोला और वो मेरी मजबुरी को समझकर हा बोल दी ।

शाम को 5 बजे के करीब जब थोडा दुकान मे काम हल्का हुआ तो अनुज ने थोडा टहलने के लिए पहल की फिर मैने उसे भी जाने दिया कि छोटा है घूम टहल लेने दो ।

फिर मै अपने कामो मे लगा रहा ।

जारी रहेगी
:pepenice:
 

Sanju@

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पिछले अपडेट मे आप ने पढा कि एक ओर जहा राज तिगडम लगा कर अपने पापा से उनके विचार उगवा रहा है और इस कोसिस मे है कि कही से कोई लिंक मिल जाये । वही दुसरी ओर अनुज अपने निजी अंगो को शांत करने के लिए परेशान हो रहा है और वो उसका उपाय तालाश रहा है । देखते दोनो भाई की ये तालाश कहानी मे क्या रंग जमाती है ।

अब आगे


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शाम को मै रोज की तरह चौराहे वाले घर पर चला गया । फिर नहाने के बाद उपर छत पर चला गया कुछ खास लोगो से बात चित करने ।
काजल से बात की तो पता चला कि वो कुछ दिन अपने मौसी के यहा रुक कर आयेगी क्योकि अभी छुट्टिया चल रही है ।

फिर मैने सरोजा से बात की तो उन्होने मुझे कल माल मे आने का न्योता दे दिया क्योकि भी दिल्ली से अपनी किसी डील से वापस आ चुकी थी तो लण्ड की तलब उसे भी और मुझे उसे चोदने को बेताब हो उठा ।

थोडे समय बाद निचे आ गया । फिर हाल मे ही बैठ कर मोबाईल चलाने लगा।
मै WhatsApp पर काजल भाभी को चेक किया तो उनका कोई मैसेज तो नही था लेकिन डीपी चेंज हो गयी थी । डीपी पर काजल भाभी अपने पति के साथ की सेल्फी को सेट की हुई ती । मैने गौर से रोहन को देखा तो मुझे काफी फिट लगा और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन में मुझे वो एक गम्भीर और भावनाओ से भरा हुआ इन्सान लगा ।

फिर मैने उनके स्टेटस चेक किये तो वहा फुल तस्वीर थी । हालकि रोहन स्लिम ट्रिम था मगर ना जाने मुझे उसकी पर्सनालिटि मे कुछ गड़बड़ दिख रही थी जैसे मानो वो अंदर से काफी हिंसक विचार का हो । शायद मेरे मन में उसके लिए ये विचार इस लिये आ रहे थे क्योकि मैने काजल भाभी का मगाया हुआ वो सेक्स गैजेटस देख लिये थे।


खैर मैने उस बात को दिमाग से निकाला और उन्के स्टेटस पर रिप्लाई कर दिया - Nice couple

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मै - kya ho raha hai bhaabhi 😍
काजल - main rohan hu. Kaajal kichten me hain

मेरी तो फट गयी कि रोहन कयू भाभी का मोबाइल चला रहा है ।
मै - thik hai, aap kaise ho kbhi aayiye ghar par

काजल (रोहन) - ha ha kyu nhi . Waise aaj aunty ji aayi thi

मै चौक कि मा क्यू गयी थी काजल भाभी के लिए
इधर मै कुछ मिंट तक मैसेज सीन करके सोच रहा था कि रोहन ने फिर से मैसेज किया।

काजल (रोहन) - wo kuch mithayi aur fal laayi thi . Shaayd saadi waala sagun raha hoga

मै जैसे ही पढा मै समझ गया कि कल जब हम मौसी के यहा से आये थे तो उन्होने काफी ज्यादा मात्रा मे फल मिठाईया बान्ध दी और मा ने उन्हे आस पास सभी घरो मे पहुचा दिया होगा ।

फिर मैने ओके बोला और मोबाईल बन्द करके मा के पास किचन मे चला गया

मै - मा वो मौसी के यहा जो फल मिठाई आयी थी सब बट गये है ।
मा - वो तो कुछ अनुज ने दे दिये है और बाकी मैने यहा बाट दिये है । बस गाव पर भेजना बाकी है रंजू दिदी के यहा

मेरी आंखे चमक गयी कि चलो काजल भाभी के यहा ना सही लेकिन अब पंखुडी भाभी से मिलना तो हो ही जाएग ।

मै - अरे कोई बात नही कल सुबह ही मै दे आऊंगा उसमे क्या है

मा - हा तु ही जाना क्योकि अनुज कह रहा था कि उसे घर नही याद है ।
मै मुस्कुरा कर- अच्छा ठिक है मै चला जाऊंगा ।


फिर थोडी देर बाद पापा भी आ गये और हमसबने खाना खाया और वही रोज का रूटीन फ़ालो किया ।

अगली सुबह मे उठा और अपने कमरे मे जाकर फ्रेश हुआ और फिर नासता करके 8 बजे तक निकल गया फुलपुर गाव की ओर ।

बस स्टैंड से एक ई-रिक्सा ली जो मुझे गाव के मुहाने तक ले गया , वहा से मुझे अन्दर जाना था तो मै पैदल चल दिया ।

आखिरी बार आया तो बडी पुछ ताछ करनी पडी थी मगर इस बार सीधा घर की ओर चल दिया
घर पर वैसा ही माहौल था जैसा आप गाव के घरो मे होता है ,, जनुमा ताऊ खेत जा चुके थे और बाहर बरामदे मे सलोनी सोयी हुई थी ।

मै बिना कोई आवाज के अंदर घुसा तो किचन मे पंखुडी भाभी साड़ी पहने खाना तैयार कर रही थी ।

उफ्फ़ इतनी गदराई गाड और कमर देख कर मन मचल उठा मेरा और लण्ड ने सर उठाना शुरु कर दिया ।

मै मस्ती भरा कुछ सोच कर आगे बढा और पंखुडी भाभी की कमर मे गुदगुदी कर दी। ज्यो ही भाभी चहकी मै हसने लगा और भाभी मुझे देख कर खीझ गयी फिर हस्ते हुए - तोहरी बहिन चोदो , तु हवा का


मै भाभी के भोजपुरी ट्यून पर हसा - हिहिहिही का हुआ भौजी डर गयी का ?

भाभी - तु का डेरवा (डरा) पयिबा हमके , तोहार बहिन चोदो

मै हस कर -वो तो ठिक है भौजी ,,लेकिन मेरी दिदी के साथ करोगे कैसे हिहिहिही आपके पास तो है ही नही हाहहहहहा

भाभी हसी और लपक कर मेरे पैंट के उपर से मेरा लण्ड पकडती हुई - अरे तोहार बा ना ,,, उहे घुसवा देंगे तोहरी दिदी के बुर मे


मै शर्म से पानी पानी हो गया और हसे जा रहा था । साथ ही उत्तेजित भी हो गया था कि भाभी ने मेरा लण्ड पकड लिया था ।


भाभी मेरे लण्ड को निहारते हुए -देखो देखो कैसे अफना रहा है दिदी के नाम पर ,,,पक्का बहिनचोद है

मैने माहौल गरम होता देखा तो फायदा लेने का सोचा कि थोडा और फूहड़पना किया जाये क्या पता भाभी इसी मे खुल जाए।


मै हस कर - अरे ये तो कुछ और देख कर परेशान है भौजी हिहिहिहिही


भाभी मेरा अर्थ समझ रही फिर भी वो बातो को खतम करने के बदले आगे बढा रही थी , कारण था घर पर उनके और सलोनी के सिवा कोई था नही तो वो बेहिच्क जो मन मे आ रहा था वो बोल दे रहीथी । उपर से मै ठहरा उनका लाडला देवर तो खिचाई कैसे नही करती मेरी ।

भाभी - अच्छा जी वो क्या
मै बस इसी सवाल की तालाश मे था और हाथ आगे उन्के उभरे हुए कूल्हो को सहलाता हुआ - इसे देख कर

भाभी इतने भी मे भी नही रुकी और ना ही मेरा हाथ हटाया ,,बस गरदन घुमा कर पीछे देखा कि मेरा हाथ कहा और हस कर बोली - बस इत्ने मे भी बहक गये तो काहे का भतार हो तुम हिहिहिही


मै पहले तो उनके कहने का मतलब समझ ही नही पाया - मतलब

भाभी - अरे जब औरत का कुल्हा देख कर ही तुम्हारा तन जा रहा है तो कही खुला माल पा गये तो ...... .हिहिहिहिही
मै समझ गया कि भाभी मूड मे है तो मैने उन्के कूल्हो की गोलाइयो को साडी के उपर से ही सहलाते हुए - रुको फिर तो मै खोल कर देख ही लेता हू कि क्या होता है ....। हिहिही

भाभी की आखे फैली और वो चिहुकी - हिहिहिही धत्त नही बदमाश कही के मै तो मजाक कर रही थी हिहिहिही

जैसे जैसे वो मुझे दुर होने की कोशिस करती मै उनकी कलाई तो कभी भरे हू मुलायम कमर को पकडता और साड़ी उपर खिचता ।

आखिर मैने उनकी दोनो कलाईयाँ ऐंठते हुए उनकी कमर पर ले आया और उन्हे किचन के तरख्त पर झुका कर एक हाथ से उनकी साड़ी उठाने लगा ।

भाभी छटपटाती रही और हसते हुए बोली - छोड दो नही तो सच मे तुम्हारी बहिनिया चोद देंगे ,,,

मै हसता हुआ उनकी साड़ी उठाने लगा लेकिन वो अब पैर झटकने लगी तो साडी मेरे हाथ से छिटकने लगी ।

मै - अरे तो जाओ चोद लो ना ,,,रोका कौन है ,,लेकिन आज तो हम देख के रहेंगे

इधर मैने अपने पैरो से उनका पैर भी फसा दिया । साड़ी और पेतिकोट एक साथ उठाने लगा तो भाभी अब हसते हुए बिनती करने लगी - हिहिहिही प्लीज बाबू मान जाओ ,,छोड दो ना ,अच्छा सॉरी नही कहेंगे कुछ सोनल बहिनी को हिहिही


मै कहा रुकने वाला था मैने उनकी साडी और पेतिकोट को कमर तक उठा दिया - अह्ह्ह क्या मस्त गोरी गाड थी उम्म्ं

फिर एक हाथो से उनकी नंगी गाड़ को मलने लगा जिस्से भाभी और छ्टकने लगी और मुझे गालिया देने लगी ।

भाभी - साले छोड दो ,नही तो पक्का तुमसे ही तुम्हारी दीदी ना चुदवा दी तो कहना

मै अब मस्ती मे आ चुका था और मैने अपनी बिच वाली ऊँगली को मुह मे लेक गिला किया और उसे भाभी गाड़ के सुराख पर रगड़ने लगा ।

भाभी छ्टकती लेकिन कलाई ऐन्ठी होने के कारण दर्द से परेशान भी थी । इधर मैने उनकी गाड़ के सुराख खोजकर अपनी उन्ग्ली पेल दी ।

भाभी चीखी मगर उनकी हसी बरकरार थी जो मुझे लगातार हिम्मत दे रही थी - ऐईईई साले बहिनचोद ,,,का कर रहे हो उम्म्ंम्ं माआआ सीईईई


मै हस्ता हुआ उनकी गाड से उन्गली निकाल कर अपने हाथ को निचे झाटो से भरी चुत पर ले गया ,,जिस्से भाभी की हालत और खराब होने लगी म

भाभी - अह्ह्ह बाबू प्लीज हाथ छोड दो अह्ह्ह दुख रहा है

मैने भी उनके दर्द को समझा और उनकी कलाई छोड दी और जैसे ही वो फ्री हुई तेजी से पल्टी - रुको तोहरी बहिनचोदो बता रहा है

मै अब थोडा मद मे आ चुका था तो इस बार सीधा सामने से उनकी चुत को साड़ी के उपर से रगड़ते हुए उन्हे किचन की दिवाल से चिपका दिया और इस बार उनकी दोनो कलाई वापस से पकड कर उपर कर दी
मै आंखो मे मद मे होके देखता हुआ अपने चेहरे को भीचता हुआ उनकी चुत को सहलाने लगा - हा किस्से चोदोगे आप ? यहा तो कुछ नही है

मैने भाभी के साड़ी के हाथ घुसाकर चुत टटोलता हुआ बोला ।
भाभी लगातार अपनी चुत पर मेरे हाथ से घिसाव से बहुत ही गरम हो गयी थी और लम्बे समय से ना चुदने के कारण उनकी चुत ने पिचपिचाना शुरु कर दिया था ।

बार बार मेरे पुछने पर भाभी मुस्कुरा कर शर्माते हुए मेरे लण्ड की ओर इशारा करके बोली -वो है ना ,उसी से चुदवाउन्गी
मै उन्के बातो से और भी उत्तेजित हो गया और एक हाथ से पैंट खोलते हुए लण्ड बाहर निकाल दिया ।

उसे हाथो मे लेके सहलाते हुए - इससे चुदवाओगी क्या हम्म्म बोलो
भाभी की नजरे मे मोटे लण्ड पर जम गयी और उनकी सासे तेज हो गयी

मैने अपना लण्ड से हाथ हटा कर पहले उन्के गुदाज गाल पर हल्के से चपत लगायी और भी उन्के दोनो गालो को निचे दबाते हुए कबूलवाने लगा - बोलो ना भाभी

भाभी नशिलि आन्खो से मेरे आंखो मे देखी और मुस्कुरा कर बोली - हा इसी को तुम्हारी बहिन के बुर मे डलवाउन्गी

मै और भी उत्तेजित हो गया और सामने आके अपना लण्ड भाभी की चुत पर लगाने लगा - और मै अगर इसमे डाल दू तो

भाभी अपनी चुत के पास मेरे लण्ड की सख्ती मह्सूस कर सिहर गयी और गहरी सासे लेने लगी ।
भाभी की सहमती तो कबकी मिल चुकी थी ,,बस धक्का लगाने की जरूरत थी
मैने अपने हाथ से लण्ड को चुत के मुहाने पर सेट करने के लिए थोडा घुटनो को झुकाया तो उपर मेरे हाथ से भाभी की कलाइया छूट गयी । मगर उन्होने मुझे रोका नही अल्बत्क अपने हाथो से मेरे कंधे थाम कर जांघो को खोल दिया

मै मुस्कुरा कर अपने लण्ड का सुपाडा खोलता हुआ भाभी की गीली चुत के मुहाने पर अपनी गाड़ उचका कर घुसेड़ दिया और फिर उनकी कमर थामते हुए ऐसे ही खडे खडे लण्ड को उन्की बुर मे आधा घुसा दिया ।

भाभी चीखी और सिसकी - अह्ह्ज उम्म्ंम

मैने उनकी साडी को और उपर करके एक जांघ को पकड कर उठाने लगा

भाभी - अह्ह्ह न्हीईई दर्द हो रहा है ,,नस अकड जायेगी रुको उम्म्ंम्म्ं

मै रुका और वो मुझसे अलग होकर एक नजर किचन से बाहर बरामदे की ओर मारा और मुझे पकड कर ऐसे ही खुले लण्ड के साथ उपर ले जाने लगी ।

मै खुश था और अपना लण्ड सहलाता हुआ उपर के हाल मे गया और पीछे से उनको दबोच लिया

भाभी वापस से सिसकिया लेने लगी ।
मैने साडी उपर से हटा कर ब्लाऊज के उपर से उनकी चुचिया मसलते हुए- अह्ह्ह भाभी कितना मिजवाति हो चुचि अपना ,अह्ह्ह मस्त मुलायम है

भाभी चुप रही और सिसकिया लेते हुए अपनी गाड़ मेरे लण्ड पर घिस्ती रही । मैने एक एक करके उन्के हुक खोल दिये और चुचो को आजाद कर दिया

अह्ह्ह 36DD वो गोल भारी चुचे उम्म्ं हाथो मे नही समा रहे थे ।
मै उन्हे मसलता हुआ भाभी के कानो मे - लग रहा है कमलेश भैया के अलावा और भी कोई रगड़ रहा है इन्हे

भाभी कसमसाई और बोली - हा है कुछ बहिनचोद ,,अहहहहह सीईई ओह्ह्ह्फ्फ्फ्फ


मैने भाभी की बात पूरी होने से पहले ही उन्हे घूमाया और मुन्क्के जैसा निप्प्ल मुह मे घूलने लगा ।

भाभी मेरे सर को अपने सिने पर दबाने लगी।
मै बारी बारी उनकी दोनो चुचिय मुह मे लेके चुसने लगा । भाभी की मदहोशि बढती ही जा रही थी उनका हाथ मेरे लण्ड को भीच रहा था
भाभी की गहरे भूरे रंग की घुंडी पर जीभ फ्लिक करते हुए मै उनकी चुचिया मसलता हुआ - अह्ह्ह भौजी कितनी रसिली चुची है उम्म्ंम्ं ,,, नीचे जाओ ना

भाभी मुस्कुराइ और उसी हाल मे एड़ियो के बल बैठते हुए लंड को मुह मे भरने लगी
मै उन्के सर को अपनी लण्ड पर दबाते हुए एडिया उचकाने लगा और लण्ड को गले तक ले जाने लगा ।

भाभी के मुह मे मेरा लण्ड और तन गया था भाभी के गले की घंटी पर जैसे ही मेरे सुपाडे ने घिसा ,,भाभी खासने लगी और ढेर सारा लार मेरे लण्ड पर उडेलने लगी ।

फीर अच्छे से उसे मेरे लण्ड पर घिसा और लण्ड को चिकना करने लगी । मै बहुत बेताब हुआ जा रहा था तो फटाक से भाभी को पकड़ कर हाल मे रखी हुई चौकी पर लिटा दिया और जान्घे खोलते हुए साड़ी कमर तक उठा दी ।

काले घुघराले बालो के बिच भाभी के चुत का गोरा क्लिट मोटी जैसे चमक रहा था ,,मैने अपना हाथ आगे बढाया और चुत के सामने से बालो को हटाया फिर उपर की चमडी को उंगलियो मे गुथने लगा ।

भाभी पागल सी होने लगी मैने उनकी टांगो को खिच कर अपना लण्ड चुत के मुहाने पर लगाया और बोला - क्या हुआ भौजी अब नही दोगी गाली हम्म्म

भाभी मुस्कुराई और धीमे से बोली - तोहार बहिन चोदो
मै मुस्कुराया और लण्ड को एक झटके से उनकी चुत मे धकेलता हुआ - क्याआआ

भाभी सिसकी और थोडा दर्द भरे आवाज मे - अह्ह्ह तोहरी बहिनीया चोदो उम्म्ंम अह्ह्ह


मुझे जब भी भाभी गाली देती मै और भी उत्तेजित मह्सूस करता और लण्ड को बडी बेरहमी से रगडता हुआ पुरा जड़ मे घुसेड़ दिया और मुस्कुरा कर उनकी आंखो मे देखता हुआ - का बोली हिहिहिही

भाभी दर्द से छ्टपटा रही थी मगर मेरे छेड़ने पर वो अब शर्मा भी रही थी तो हस कर - अह्ह्ह तोहर बहिनचोदो रुक काहे गये ,,,पेलो ना अह्ह्ह नही तो उम्म्ंम्म्ं

मैने उनकी टांगो को थामा और धक्का लगाता हुआ - क्या नही तो ,,बोलो उम्म्ंम बोलो ना


भाभी सिस्कते हुए - अह्ह्ह नही तो अह्ह्ह्ह मा ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह सीईईई ओफ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह

मै लगातार धक्के लगाते हुए उनसे कबूलवाये जा रहा था और भाभी सिसकिया लिये जा रही थी ।
भाभी - उफ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह्ह माआआ इह्ह्ह्ह ऐसे ही पेलो अह्ह्ह मिलेगी बाबू सोनल भी मिलेगीयह्ह्ह्ज उसकी बुर भी ऐसे ही चोदना अह्ह्ह्ह माआ

मै दीदी के नाम पर और भी जोश मे आया और लम्बे लम्बे धक्के
लगाने लगा ।
भाभी भी उत्तेजीत होकर अपनी चुत को मेरे लण्ड पर कसती हुई शब्दो को पीसते हुए बोली - अह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम और कस से पेल ना बहिनचोद ,,,बहुत मजा आ रहा है दीदी के नाम पर चोदाने पर ह्न्मममं अह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम्ं और तेज्ज्ज अह्ह्ह

मै उनकी बातो पर मुस्कुराया और अपना धक्का जारी रखा

भाभी सिस्क्किया लेती हुई मुझे और जोशीला करने मे लगी थी - अह्ह्ह हा बाबू और पेल्ल अह्ह्ह बहिनचौद ओह्ह्ह मस्त चोद रहा हौ आह्ह

मै - भाभी सच सच बताना ,और किसका लण्ड घोट चुकी हो उम्म्ंम्ं


भाभी कसमसा कर - आह्ह तुमको क्या लगता है अगर लण्ड मिलता तो ऐसे जन्गल रखती मै अह्ह्ज उम्म्ंम्ं बहुत दिनो बाद दमदार मुसल मिला है अह्ह्ह्ह और एज्ज्ज्ज मेरा होगा उह्ह्ह्ह राज्ज्ज और तेज बाबुउऊ उम्म्ंम

मै अपनी धक्के को तेज करता हुआ -अह्ह्ह फिर ये आपके चुचे इतने मोटे कैसे उम्म्ंम

भाभी मेरे सवाल का जवाब देने से पहले ही झडने लगी ,,उनकी चुत का गरमा गरम माल मेरे लण्ड की चमडी पर बघरने लगा,,,मै और तेज से थपाथप उनकी चुत मे पेलता रहा और मै भी झड़ने क्र करीब ही था


मै उतेजीत होकर - अह्ह्ह भाभी बताओ ना ,,आपके चुचे बडे कैसे हुए फिर

भाभी अब झड़ चुकी थी तो अपने होश मे थि और मुस्कुरा कर अपने चुत को मेरे लण्ड पर कस्ते हुए - आह्ह बाबू ये गाव है यहा कि होली मे बुढे जवां सब देवर हो जाते है ,,,अब कितनो को रोका जाये चोली रग्ने से ,,,, दो दिनो मे लाल कर देते है सीई अह्ह्ज और फिर ....


मै भाभी की बाते सुन कर कल्पना करने लगा कि कैसे होली के दिनो मे गाव के मनचले भाभी के ब्लाउज मे हाथ घुसा का उनकी चुचो की घुंडीया घुमाते होगे ।

मै इस कल्पना मात्र से ही पागल हो गया और जोश से भाभी की एक टांग उठा कर धकाधक पेलने लगा - अह्ह्ज फिर क्या भाभी ???

भाभी मेरे तेज धक्को को सहती हुई सिसकी - वोहहह अह्ह्ह वो बाकी की कसर तुम्हारे भैयाआअह्ह पूरी कर देते है अह्ह्ह उम्म्ं मा

मै अब झड़ने के करीब था तो फटाक से लण्ड निकाला और नसो दबाव बना कर लण्ड सहलाने लगा ।
भाभी फौरन सरकती हूई चौकी से निचे आ गयी और मेरा लण्ड पिचकारी छोड़ी

अह्ह्ज भाभी अह्ह्ह आह्ह
मै एक साथ सारा माल भाभी के मुह पर मारा बाकी कुछ चुचियो पर गयी

बचा कुचा भाभी ने निचोड लिया । थोडी देर बाद भाभी ने खुद को साफ किया और साडी सही करने लगी ।

मै उनके पीछवाड़े पर पन्जा कसता हुआ - तो भाभी अब क्या ख्याल है मेरी दीदी के बारे मे हिहिही।

भाभी शर्मायी और बोली - वो मै चोदवा के रहूँगी हिहिही ,,अच्छा ये बताओ यहा कैसे आना हुआ

मै हस के - वो मौसी के यहा शादी की मिठाईया आयी थी वही देने आया था ।
फिर हम दोनो निचे आये और उन्होंर मुझे पानी लाकर दिया ।

मेरा मन एक राउंड और करने को था लेकिन भाभी ने मना कर दिया कि फिर कभी और मुझे भी दुकान पर जाना था ।तो मै वापस घर आ गया ।

दिनभर दुकान मे व्यस्त था और शादियो की सीजन चल रहा था तो फुरसत नही मिली । दोपहर मे 2 बजे के करीब सरोजा का फोन आया लेकिन मै दुकान मे व्यस्त था तो फोन उठा कर उन्हे फिर कभी आने का बोला और वो मेरी मजबुरी को समझकर हा बोल दी ।

शाम को 5 बजे के करीब जब थोडा दुकान मे काम हल्का हुआ तो अनुज ने थोडा टहलने के लिए पहल की फिर मैने उसे भी जाने दिया कि छोटा है घूम टहल लेने दो ।

फिर मै अपने कामो मे लगा रहा ।

जारी रहेगी
बहुत ही गरमागरम और कामुक अपडेट है मजा आ गया राज ने तो पंखुड़ी भाभी की चूदाई कर ली सोनल के नाम से दमदार चूदाई की देखते हैं राज अपनी बहन की भी चूदाई कर पता ही या नही
 

DREAMBOY40

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Rochak aur romanchak. Pratiksha agle rasprad update ki
Bahut bahut abhaar
 
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Bhauji ki mast khudayi kar daali dewar ne.

Hot update waiting for next
Thanxxx bhai ji
 
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