• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
7,536
20,947
174
Nice update bro...lekin aap papa ka character ko gayeb(missing)karte ja rahe ho... waiting more
Kbhi kbhi jise hm bahut event samjhte h wo ek basic start bhar hota h...taki aage kahaani grand level par khule


Thnxxx for your valuable support
 

Bhatakta Rahi 1234

Well-Known Member
2,567
4,579
143
आखिर सोनल और निशा का नंबर लग ही गया भले ही बहुत दिनों बाद लगा।
 

Sanju@

Well-Known Member
4,854
19,598
158
UPDATE 130

पिछले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा चंदू मालती के करीब जा रहा है और राज की जीवन थोडा सामान्य रूप ले चुका था । दिन मे दुकान और रात मे पापा के मम्मी की ठुकाई ।
वही दुसरी ओर अनुज और राहुल के कांड की खबर निशा को हो गयी है तो देखते है आगे क्या होने वाला है ।


राज की जुबानी

मौसी के यहा से आये मुझे 3 हफ्ते हो चुके थे और मै एक नोर्मल लाइफ जी रहा था ।
ऐसे ही एक सुबह मै उठा और मैने मेरा मोबाइल चेक किया तो निशा के काफी सारे मैसेज और मिस्काल पड़े हुए थे । उसको मुझसे कोई जरुरी बात करनी थी और आज वो मुझे घर पर बुला रही थी ।
मै भी उसको दोपहर तक आने को बोला फिर नहा धो कर नासता किया । फिर अपने दुकान चला गया ।

दोपहर को जब अनुज खाना खाकर वापस आया तो मै उसे बिठाकर कर चाचा के यहा निकल गया ।

अंदर गया तो चाची से निशा को लेके पूछा
चाची - वो अपने कमरे मे होगी क्या हुआ बेटा

तभी निशा अपने कमरे से बाहर आई - हा मा मैने बुलाया है, वो मेरा मोबाइल थोडा हैन्ग कर रहा है ,,राज को पता है वो ठिक कर देगा

चाची - अच्छा ठिक है बेटा तू बैठ मै खाना लगा देती हू

मै - अरे नही नही मै खा के ही आया हू चाची ,,बस ये काम जल्दी से कर दू मुझे दुकान भी जाना है

चाची - अरे निशा भी पागल है ,,शाम को बुला लेती देखती नही समय नही होता उसके पास

मै हस कर - अरे कोई बात नही आप काम करो मुझे समय नही लगेगा ज्यादा

फिर चाची किचन मे चली गयी बर्तन साफ करनेऔर इधर मै जान छुड़ा कर निशा के कमरे मे गया ।

वहा जाते ही निशा ने पहले दरवाजा बंद किया और हमारी डीप किस्सिंग शुरु हो गयी

2 मिंट बाद मै किसिंग तोड कर हस्ता हुआ - अरे बताओ तो क्यू बुलाया है

निशा गुस्सा दिखाती हूइ - तुम जाओ ,, नही नही तुम जाओ । बडी जल्दी है तो

मै हस कर उसको अपनी बाहो मे भरता हुआ -अच्छा क्या हुआ बताओ ना

निशा इतरा कर - हा नही तो एक तो इत्ने दिन बाद आये तो सीधा काम,, आखिरी बार कब मुझे प्यार किया था याद भी है

मै - ह्म्म्ं तो इसिलिए मुझे बूलाया है ,,लेकिन मेरी जान यहा शुरु हुआ तो हिहिहिही चाचा चाची सब भाग कर आ जायेंगे

निशा शर्मायी - धत्त ,,

मै - हा तो तुम भी तो नही आती हो मुझसे मिलने
निशा - अच्छा ठिक है आऊंगी संडे को सोनल दीदी के साथ

मै - अच्छा तो बताओ काम क्या है
निशा - वो मुझे तुम्हे कुछ बताना है
मै - हा बोलो
निशा - वो क्या है कि अनुज और राहुल ये दोनो पोर्न वीडियो देखने लगे

मै - अरे लेकिन उनके पास मोबाईल कहा है
निशा - अरे मेरी पूरी बात तो सुनो
फिर निशा मुझे बताती कि कैसे बीते एक हफ्ते मे उसके मोबाइल डाटा खतम कर कर के ये दोनो उसकी मोबाईल वापस करते है । फिर निशा मुझे सबूत के तौर पर गूगल डाटा यूज़ की सारी जानकारी दिखाती है । जिसमे उन सभी साइट और टॉप सर्च किये हुए टोपीक्स साफ दिख रहे थे ।

मैने जब सारी डिटेल्स बारीकी से पढी और हाल ही के सर्च टॉपिक को देखा तो वहा भले ही वीडियो फ़ैमिली सेक्स की देखी गयी हो लेकिन सर्च रिजल्ट नोर्मल सेक्स के ही थे ।

मै समझ गया कि इनकी गलती इतनी है कि ये लोग जो खोज रहे वो उन्हे मिल नही पा रहा है और मजबूरी मे इन्हे फैमिली वाले वीडियो देखने पड़ रहे है ।

निशा - क्या हुआ ?? क्या सोच रहे हो ? अब क्या किया जाये ?

मै - देखो फिलहाल इनकी आदत इससे दुर करनी पड़ेगी क्योकि इन्लोगो ने अनजाने मे या मजबूरी मे ही ये वीडियो देखे है क्योकि सारे सर्च रिजल्ट नोर्मल है । ये खोज कुछ और रहे थे लेकिन इन्हे वहा मिल ऐसे वीडियो रहे थे ।

मै - तो अब से इनको मोबाइल मत देना तुम और जरा राहुल पर नजर रखो । मै भी कुछ दिन अनुज पर नजर रख रहा हू । फिर आगे ये क्या प्लानिंग करते है ।

निशा - हमम ठिक है

फिर मै वापस अपने दुकान पर चला गया ।
शाम को अनुज रोज की तरह उसी समय मुझसे घूमने जाने को बोला तो मैने उसे जाने दिया क्योकि मै जानता था कि आज इनकी मंशा पूरी नही होगी ।

और मेरा अनुमान सही निकला । अगले 20 मिंट मे ही अनुज वापस आगया । उस्का चेहरे पर उदासी साफ दिख रही थी ।
उसका मन नही लग रहा था तो वो चौराहे पर चला गया । क्योकि मै जानता था कि अनुज कुछ भी करेगा लेकिन अपने घर वालो को लेके गलत विचार नही लाएगा मन मे ।

रात होने लगी तो मै भी दुकान बन्द करके निकल गया चौराहे पर । मैने तय किया कि अब से रात मे मा की चुदाई के बाद एक बार छत पर अनुज को देखने जाना है ।

मैने अगले कुछ दिनों तक उसपे नजर बनाई रखी । हर रोज शाम को वो राहुल के पास जाता और वापस निराश होकर आता ।
ऐसे ही चार दिन बीते।

एक शाम वापस आकर उसने मुझ्से कहा - भैया मुझे भी मोबाइल ले दो ना ,, अकेले अच्छा नही लगता

मै - अरे तो मेरा मोबाइल लेले
मैने जान बुझ कर अनुज को ये ऑफ़र दिया और उसने मेरे मन मुताबिक ही रिप्लाई दिया - वो आप रात मे मुझे दिया करो मोबाइल,,मुझे फिल्म देखने का मन करता है और फिर घर मे टीवी भी नही है ।

मैने ऐसी कोई प्रतिक्रिया नही दी कि उसे शक हो और उसे रात मे सोने के समय मोबाइल देने के लिए बोल दिया ।

वो खुश हो गया ।
रात को मै जब घर गया तो पहले फ्रेश हुआ और फिर छत पर जाकर निशा को फोन किया ।

फोन पर

मै - हा हैलो ,,कहा हो अभी
निशा - वो मै खाना बना रही हू क्या हुआ
मै - थोडा अकेले मे आओ कुछ बात करनी है ।

निशा - हा बोलो
मै - देखो आज रात को मै अनुज को मोबाइल दे रहा हू तो तुम फोन या मैसेज मत करना

निशा - अरे लेकिन तुमने तो मना किया था ना
मै - हा , लेकिन मैने कुछ सोचा कि क्यू ना अलग अलग दोनो के विचार देखे जाये ।

निशा - मतल्ब
मै - अरे मै रात मे अनुज को पहले मोबाइल दूँगा तो कल वो राहुल को जरुर बतायेगा । फिर राहुल भी कल तुमसे मोबाईल रात के लिए मागेगा तो तुम उसे दे देना

निशा - लेकिन उस्से क्या फाय्दा

मै - अरे फायदा ये होगा कि हम उन दोनो के अलग अलग विचार जान सकेंगे कि कौन कैसी वाली वीडियो पसंद कर रहा है ।

निशा - हा ये भी सही है । ठिक देखते है कल क्या होता है ।

मैने फिर फोन कट किया और सारे जरुरी कॉन्टैक्ट छिपा दिये और मोबाईल क्लीन करके ऐसा स्पैशल ब्राऊजर इंस्टाल करके अनुज को दिया ताकि अनुज चाह के भी अपनी हिस्ट्री डिलीट ना कर पाये क्योकि उसके फंशन काफी टफ्फ थे ।

फिर रात मे मा और पापा के साथ रोज का खेल चालू रहा मेरा ।

अगली सुबह मै उठा और फ्रेश होकर नासते के टेबल पर बैठा तो अनुज ने मेरा फोन मुझे वापस किया । वो काफी खुश नजर आ रहा था ।

फिर मैने बिना कुछ चेक किये मोबाईल जेब मे रखता हुआ - अरे भाई चार्ज है ना

अनुज - हा भैया सुबह उठकर ही लगा दिया था
मै मुस्कुरा कर नासता करने लगा ।

उसके बाद मै दुकान निकल गया ।
दुकान पर पहुचते ही मैने ब्राऊजर की हिस्ट्री चेक की तो मुस्कुरा उठा । अनुज सच मे मासूम था । मैने सारे recent search चेक किये जिनमे सिर्फ दो ही content सर्च किये गये थे। Big boobs girlfriend, big boobs wife

फिर मैने हिस्ट्री चेक की तो उसमे से एक के बाद एक करके करीब आठ दस वीडियो big boobs aunty से related भी ओपन हुए थे ।
इसमे भी मुझे कोई खराबी नही दिखी ।

मैने वापस से history डिलीट की और सारे recent search को भी डिलीट किया और वापस काम मे लग गया ।

शाम को अनुज रोज की तरह आज भी राहुल से मिलने गया और आधे घंटे बाद वापस आकर आज के लिए भी मोबाईल मागा तो मैने उसको हा बोल दिया । वो वापस घर चल गया ।

इधर अनुज के जाने के बाद से मै निशा के फोन का वेट करने लगा ।
रात होने लगी लेकिन निशा का फोन नही आया तो मै दुकान बन्द करके चौराहे वाले घर के लिए निकल गया ।

घर पहुचने से पहले ही निशा का फोन मेरे पास गया ।

फोन पर
निशा - हा राज जैसा तुमने कहा था ,, आज राहुल ने रात के लिए मोबाइल मागा ये कह कर की दीदी आपका सीरीयल शाम को खतम हो जाता है तो मुझे रात मे फिल्म देखने के लिए देदो मोबाइल

मै - हा फिर ,तुमने हा कहा ना
निशा - हा बोल दिया है
मै - ठिक है फिर मै तुम्हे एक ब्राऊजर का लिंक देता हू उसे डाउन्लोड करके उसमे अपना gmail लिंक करो ।

निशा - अरे मेरे मे गूगल है ना
मै - अरे सुनो तो पहले
निशा - हा बोलो
मै - इस ब्राऊजर का फंशन ऐसा है कि इसकी डाटा डिलीट करना बहुत कठिन है तो राहुल रात मे क्या देख रहा है ये हम सुबह मे पता कर सकते है ।

निशा - ठिक है तुम वो लिंक भेज दो ,मै वो डाउन्लोड कर लुन्गी । मुझे खाना बनाना है बाय

मै - हा बाय

फिर मैने फ़ोन रखा और वो ब्राऊजर का लिंक निशा को भेज दिया ।

फिर वही रोज की तरह खाना खाने के बाद मोबाइल अनुज को दिया और मम्मी पापा के साथ मस्ती ।
मुझे बस सुबह का इन्तजार था क्योकि अगले दिन संडे था और आज निशा यही चौराहे पर आने वाली थी ।

मै सुबह दुकान पर आ गया लेकिन दोपहर मे अनुज को बिठा कर चौराहे वाले घर पर निकल गया ।

खाने के बाद मै उपर सोनल दीदी के कमरे मे गया जहा सोनल और निशा अमन से बाते कर रही थी ।

मुझे सबसे पहले निशा का मोबाइल चेक करना था तो मै सीधा उस्से पुछ लिया - अरे निशा दीदी अपना मोबाइल देना

निशा मेरे मुह से दीदी सुन कर मुस्कुराई फिर मुझे मोबाइल देदी । चुकी सोनल अमन के साथ वयस्त थी तो उसने इस बात पर कोई गौर नही किया कि मै निशा का मोबाइल क्यू ले रहा हू ।

मै फटाफट ब्राऊजर खोलकर history चेक की और resent search भी देखे वहा राहुल ने teacher student sex video , aunty big boobs सर्च किये थे । हिस्ट्री मे कुछ इन्ही सबसे से related video थे और कुछ big boobs mom वाले वीडियो भी देखे गये थे । लेकिन उन्हे सर्च नही किया गया था ।

मै संसय मे खड़ा हुआ दिमाग पर जोर दे रहा था कि आखिर कैसे पता किया जाये कि इन दोनो के दिमाग मे क्या चल रहा है ।

मेरा सारा ध्यान मोबाईल मे स्क्रोल हो रही वीडियो पर था जिसके थंबनेल देख कर मेरे लण्ड मे तनाव बना हुआ था ।

इधर मुझे पता ही नही चला कि कब सोनल और निशा मेरे पैर के पास घुटनो के बल खड़ी हो गयी और मेरे जांघो को सहलाने लगी ।

मुझे गुदगुदी लगी और जब नजरे निचे गयी थी उनकी नशीली आंखे और वो कामुक मुस्कुराहत देख कर मेरा लण्ड और भी तन गया पैंट मे ।

सोनल ने बडी कामुकता ने मेरी आंखो मे देखते हुए एक हाथ से मेरे लण्ड के उभार को सहलाया । मै पुरा गनगना गया ।

मैने फौरन दरवाजे पर नजर मारी तो देखा वो तो बंद था जबकि मै उसे खोल कर ही आया था अंदर

निशा अपने हाथ मेरे जांघो पर सहला रही ,,मुझे उनदोनो का स्पर्श पिघलाने लगा था । मेरे पैर हिलने लगे थे ।

इधर सोनल ने पहले बेल्ट और फिर मेरा चैन खोलते हुए मेरा पैंट बडी मदहोशि मे निचे किया ।
उसकी ये अदा मुझे पागल बना रही थी ।वही निशा सोनल के कन्धो को चूमने लगी थी उसके जिस्म पर हाथ घुमाने लगी थी जिस्से सोनल की आन्खे और भी कामुक से भर गयी थी ।

फिर जो उसने अंडरवियर के उपर से मेरे लण्ड के उभार को अपने होठो मे भरा ,,,मै पूरी तरह से कपकपा उठा और मेरा लण्ड एक दम रॉड के जैसे तन गया ।

सोनल ने अपनी अदाओ और स्पर्शो का जादू जारी रखते हुए अंडरवियर के उपर से ही मेरे आड़ो को थाम कर उन्हे आगे पीछे करते हुए मेरे लण्ड के उभार पर जीभ फिराते हुए मेरी आंखो मे देखने लगी ।

मुझसे बर्दाश्त ना हुआ और मैने फौरान अपना लण्ड अंडरवियर से बाहर निकाला । फिर सोनल के बालो को पकड कर खीचा एक हाथ से लण्ड को थामे हुए उसके मुलायम होठो पर दरने लगा ।

वो जब भी जीभ से छूती मै काप जाता और फिर मैने अपना लण्ड उसके मुह मे ठूस दिया ।

अगले ही पल सोनल सीधी हुई और मेरे लण्ड को गले तक ले गयी ,,,मै उत्तेजना से भर गया ।

इधर जैसे ही मेरा लण्ड गिला करके बाहर निकाला उसे निशा ने मुह मे भर लिया और गुउउउउउंंंं गुउउउऊऊऊ करके चुसते हुए सोनल को पास किया और फिर उसने भी थोडा चुस कर निशा को वापस से दिया ।

बारी बारी से दोनो ने मेरा लण्ड निचोड़ना शुरु कर दिया और लण्ड चुसते हुए दोनो ने एक साथ प्लाजो कमर से सरकाने लगी ।

मै समझ गया जन्मो की प्यासी ये आज मुझे निचोड कर रहेंगी

इधर निशा की नजर जब सोनल पर गयी कि वो भी अपना प्लाजो खोल रही है तो वो मेरा लण्ड मुह मे भरे हुए ही खड़ी होने लगी और खड़ा होकर जल्दी से पैंटी प्लाजो एक साथ निकालते हुए हसने लगी ।

निशा - दीदी प्लीज मुझे पहले ,,आप तो रोज लेते होगे ना प्लीज

सोनल भी अपनी पैंटी और प्लाजो निकालते हुए - कहा रोज ,, कितने दिन हो गये नही चोदा इसने मुझे

निशा अपनी चुत रगड़ती हुई - अह्ह्ह दीदी मान जाओ ना उम्म्ं देखो बहुत खुजली कर रही है उह्ह्ह्ह सीईई

सोनल उसके पास गयी और उस्के चुत को उपर से सहलाते हुए बोली - अह्ह्ह ला मै सहला दू मेरी गुड्डो उम्म्ंम क्या मुलायं चुत है तेरी है

इधर निशा सोनल के हाथो का स्पर्श अपनी चुत पर पाकर पागल सी होने लगी ,,उसकी एडिया खड़ी होने लगी और उसका सन्तुलन जाने लगा

सोनल ने मुझे आंखो से इशारा किया और खुद निशा को बिस्तर पर गिरा कर उसकी चुत मे मुह लगा दिया ।

मै सोनल को अपने सामाने झुका हुआ पाकर मस्त हो गया और उसके चिकनी मुलायम गोरी गाड़ के पाटो को फैलाते हुए चुत के पास ऊँगलीया फिराई जिस्से क़ो भी कसमसाने लगी ।

मैने सोनल का एक पैर उठा कर बिसतर पर रखा और मुझे चुत मे जाने की जगह दिखने लगी ।
मैने थोडा सा थुक लेके अपने सुपाडे पर लगाया और सोनल की चुत टटोल कर लण्ड को गच्च से उसकी चुत मे उतार दिया

बदलने दर्द और मजे से सोनल ने निशा की चुत को कस के मुह मे दबोच लिया और निशा सिसकी - अह्ह्ह दीदी उम्म्ंम्ं फ्क्क्क अह्ह्ह उम्म्ंम्ं शिटटत अह्हहह फ्क्क मीईई दिदीई ओह्ह माआय्य्य्य उम्म्ंम ओह्ह्ह

इधर मेरा धक्का सोनल की चुत मे जाने लगा और उधर निशा की सिसकिया तेज होने लगी

थोडे समय सोनल को गाड को थामे हूए पेलता रहा । फिर उसे हटा कर अलग किया और निशा की टाँगे खिच के बिस्तर के किनारे लाया ।

निशा मानो फुल तैयारी मे ही आई थी कि आज उसे मुझसे चुदना है इसिलिए उसकी चुत पर एक भी बाल न्ही थे । उसकी गुलाबी पाव सी फुली चुत देख कर मेरा जी ललचा गया और मैने भी झुक कर उसकी जांघो को फैलाया और मुह उसके चुत पर लगा दिया ।

उम्म्ंम क्या खुस्बु थी क्या नरम अह्सास ,,वही निशा मजे से सिसिकने और छ्टकने लगी । बगल मे सोनल जान्घे खोल कर लेती अपनी चुत मसले जा रही थी ।

मै वापस खड़ा हुआ और लण्ड निशा की चुत पर लगाते हुए गचाक से पेल दिया ।

निशा ने मुह पर हाथ रख लिया और सिस्कने लगी ,,काफी समय बाद चूदने से निशा की चुत टाइट थी लेकिन जल्द ही उसने मेरे लण्ड के लिये जगह बना ली ।

वही सोनल अब निशा के बगल मे करवट लेक सोयी हुई उसकी कुर्ती उठा कर ब्रा ने एक चुची निकाल के उसे पी रही थी । साथ ही सोनल के हाथ निशा के चुत के हिस्सो पर रेन्ग रहे थे तो कभी उसके अपने चुत पर

मै जोश मे धकाधक पेले जा रहा था ,
बारी बारी से कभी सोनल तो कभी निशा दोनो ने मुझसे पेलवाया और दो मुझको निचोडने के बाद ही मुझे जाने दिया ।

फिर मै निचे आया तो मा को चेक किया कि वो कहा तो वो अपने कमरे मे सो रही थी ।
मैने राहत की सास ली और अपने दुकान पर निकल गया ।

जारी रहेगी
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
राज और निशा अनुज और राहुल पर नजर बनाए हुए हैं राज को पता चल गया कि दोनो क्या देखते हैं बहुत दिनो बाद राज ने फिर सोनल और निशा दोनो को पेल दिया
 

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
7,536
20,947
174
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
राज और निशा अनुज और राहुल पर नजर बनाए हुए हैं राज को पता चल गया कि दोनो क्या देखते हैं बहुत दिनो बाद राज ने फिर सोनल और निशा दोनो को पेल दिया
Shukriya dost
 

Sis lover

Member
151
353
63
UPDATE 124

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE


पिछले अपडेट मे आपने पढा कि कैसे एक ओर जहा रंगीलाल ने शकुंतला के साथ नजदीकिया बढ़ाने मे लगा हुआ है वही जानीपुर मे राज ने रात मे एक बढिया प्रोग्राम हुआ और सारे परिवार वालो मजा लिया । मगर दिन मे मेहमानो के लिए सोने की व्यवस्था नही हो पाई थी तो सब्के सोने के लिए सम्स्या होने लगी थी ।

अब आगे

राज की जुबानी

रात मे सोने पर चर्चा होने लगी तो मौसी और मौसा आपस मे बात कर रहे थे । मौके की नजाकत पर चाची थोडा बहुत मौसी पर गुस्सा जरुर हुई थी कि दिन मे मौसी ने ये सब वयवस्था क्यू नही की ।
फिर कुछ तय करने के बाद मौसी ने चाची जी और मा को एक साथ अपने कमरे मे सुला दिया और मामी और बुआ एक कमरे मे सुला दिया ।
फिर ने सारी लडकियो के लिये उपर हाल मे ही बिस्तर डाल दिया जहा वो लोग सो गयी ।

फिर मौसी और हम सारे जेन्स निचे आ गये ।
निचे के कमरो मे नाना पहले ही मौसा के चाचा जी के साथ सो चुके थे तो मैने अगुआई की और अनुज को रमन भैया के साथ उनके कमरे मे भेज दिया और एक कमरे मे मौसा और राजन फुफा को ।

मौसी - सारे लोग तो हो गये तो अब तू कहा सोयेगा

मै - अरे आप जाओ आराम करो मै यही सोफे पर सो जाऊंगा
मौसी - नही नही तू यहा कैसे सो पायेंगा , तू भी उपर चल हाल मे मेरे साथ सो जाना

मै - अरे लेकिन उपर दादी जी अगर गुस्सा हुइ तो
मौसी - हा तो होने दे ,,मै मेरे लाडले को ऐसे थोडी ना सोने दूंगी

मै मुस्करा कर धीमी आवाज मे उनके कान के पास जाकर - फिर तो मै आपको पीछे से पकड कर सोउँगा

मौसी हसके- बदमाश कही का ,,चल अब तू उपर मै आती हू पानी लेके

मै उपर चला गया जहा अभी भी चारो लड़कियो मे कोई सोया नही था सब खुसरफुसर कर रही थी ।
मेरे आने की आहट पर पल्लवि तुरंत उठ कर बैठ गयी और अपना चुन्नी फौरन सीने पर ले लिया ,,मगर उस्से पहले ही मैने उसे नारीयल कैसे मोटे चुचो का उभार देख लिया था और गले के कट से उसकी दरारो को भी ।

मै - अरे आराम मे सो जाओ ,,मै भी यहा सोने आया हू
मेरी बात सुन कर गीता चहकी - सच भैया ,,आओ ना इधर सोवो मेरे

मै - अरे नही मीठी , तुम सो जाओ ना मै इधर सो जाता हू ,ये बोलकर मै पल्लवि के बगल खाली जगह पर सोने लगा ।

चुकी हाल मे तीन चटाई बिछाई गयी थी , तो एक ओर से बबिता फिर सोनल, फिर गीता और फिर पल्लवि सोयी थी । पल्लवि के बाद एक चटाई पुरी खाली थी तो मै वही लेट गया ।
मेरे लेटेते ही गीता उठकर आई और मेरे और पल्लवि के बिच के गैप मे जबरदस्ती घुसने लगी ।

पल्लवि हस कर सोनल की ओर खसक गयी और गीता खिलखिलाकर पल्लवि के जगह पर सरक गयी और मेरा हाथ पकड कर अपनी ओर खिच लिया

मुझे उसके स्पर्श से गुदगुदी सी महसुस हो रही थी तो मै हसे ही जा रहा था ,,बहुत दिनो बाद गीता के मुलायम हाथो का स्पर्श मिला था ।

गीता मुझसे चिपक गयी और मोबाईल खोलने को बोलने लगी और मै भी उसकी जिद पर हार गया ।

इधर पल्लवि बार बार हम दोनो को देख रही थी तो सोनल ने उसे गीता और बबिता के बचपने के बारे मे बताया कि ये दोनो तो ऐसी ही है ,,,ह्मेशा भैया भैया हिहिहिही

बबिता सोनल की बात सुनकर उससे चिपक गयी - नही तो ,,मै तो दीदी दीदी ही कहती हू ,,,दीदी मोबाइल दिखाओ ना

सोनल हस के - देखा अब मोबाईल चाहिये तो दीदी ,,,नही तो तू भी भाग गयी होती उस्के पास ना

सोनल की बात पर बबिता हसने लग जाती है ।
इधर थोडी देर हम लोग मोबाईल चालू करके देख रहे ।
इधर करिब 15 मिंट हो गया और मौसी अभी तक पानी लेके नही आई थी ,,,तो मेरा दिमाग ठनका कही मौसी नाना जी के साथ लगी तो नही ।
मेरे लण्ड एक बार को टनं हो गया और अब मेरे दिल मे बेचैनी सी होने लगी ।

मै उठकर बैठ गया
गीता - क्या हुआ भैया
मैने एकनजर सबको देखा और मुस्कुरा कर बोला - कुछ नही तुम देखो मै पानी पीकर आता हू ।

फिर मै उठ कर सीढियो से निचे चला गया और देखा तो हाल मे पुरा सन्नाटा है ।
रमन भैया का कमरा बन्द था और नाना भी जिस कमरे मे थे वो भी बन्द था । मतलब ये था कि मौसी अब वहा अपने ससुर के सामने नाना से चुदेगी नही ।
फिर मैने सोचा शायद वो पीछे बाथरूम के पास वाले कमरे मे गयी हो कुछ बात करने जहा मौसा और राजन फूफा हो

तो मै उधर ही चला गया
मगर वो कमरा भी अन्दर से पुरा बंद मिला
मैने बाथरूम देखा तो दरवाजा खुला ही था दोनो का
फिर मुझे एक सिसकी सी सुनाई दी और मेरे कान खडे हो गये ।
मैने फौरन कमरे के दरवाजे से कान लगाया तो अन्दर मौसा जी के कराहने की आवाज आ रही थी जो शायद मौसी का नाम लेके झड़ रहे थे ,,तभी मुझे राजन फूफा की भी आवाज आई ।

मेरा दिल धक्क करके रह गया । मतलब मौसी मौसा और अपने नंदोई से एक साथ चुद रही थी ।
कुछ ही पल मे कमरे मे आवाजे तेज हो गयी और मै समझ गया ये लोग दरवाजे की ओर आ रहे है ।
मै फौरन बाथरूम की ओर चला गया और वहा से झाका तो दरवाज खुल चुका था ।
मौसी कमरे के बाहर आ गयी थी और मौसा जी नंगे दरवाजे से बाहर गरदन निकाल कर मौसी से गुहार कर रहे थे

मौसा- रज्जो एक बार और हो जाने दो ना
तभी राजन फुफा ने भी सर निकाला बाहर - हा भाभी जी बस एक और बार बस एक

मौसी थोडा नुकुरते हुए - आप लोगो को तो वही लग रहा है ,,मेहमानो का मेला लगा है ,,अभी कोई खोजता हुआ आ जाये तो सब चौपट हो जायेगा

मौसी की टोंट से दोनो चुप हो गये तो मौसी प्यार से बोली - मै कही भागी नही जा रही हू ,,मेरा भी मन है लेकिन समझिये ना रमन के पापा

मौसा - अच्छा ठिक है जाओ तुम ,,लेकिन कल भी यही व्यव्स्था कर देना

मौसी शर्मायी और हा मे सर हिला कर किचन की ओर चली गयी ।
ये दोनो भी कमरे मे घुस गये और दरवाजा बन्द के लिया ।
मै फौरन वहा से निकला और किचन गया जहा मौसी पानी लेके निकल ही रही थी ।

मौसी - अरे बेटा तू यहा
मै - हा मुझे प्यास लगी थी तो ये बोल कर मैने तुरंत उन्के होठ मुह मे भर लिये

मौसी कसमसा कर मुझसे अलग हुई - धत्त पागल कही का ,,चल पानी पी ले और सोटे है

मै उनके कूल्हो को पकडते हुए - और ये कब दोगी ,,चलो ना यही कर लेते है एक बार

मौसी आन्खे ब्ड़ी करके - नही पागल है क्या ,,,अभी कोई भी आ जायेगा
मै थोडा उदास होकर - तो उपर भी तो नही कर पायेंगे ना

मौसी मुस्कुरा कर - तू चिंता क्यू करता है ,,मुझे भी ये चाहिये हिहिह्जी
मौसी लोवर के उपर से मेरा खड़ा लंड पकडते हुए बोली

फिर हम दोनो उपर चले गये

मौसी - तुम लोग सोये नही अभी ,, कल इतना सारा काम है चलो मोबाइल बंद करो ।

फिर मैने तुरंत गीता से मोबाइल लेके बन्द कर दिया और मौसी ने हाल की बत्ती बुझा दी फिर मेरे बगल मे आकर लेट गयी ।

थोडी देर बाद एक चुप शान्ति छा गयी ,,हालकी बिच मे गीता ने मुझे परेशान किया तो मैने उसे समझाया कि ये सही जगह नही है । लेकिन जब वो नही मानी और बार बार मेरा लण्ड छुने लगी तो मैने मौसी की ओर करवट लेली ।

क्योकि नाजाने क्यू मुझे लग रहा था कि पल्लवि मुझपर खास नजर रख रही है । फिर मेरा उसको मना करने का एक कारण ये भी था कि अगर वो जल्दी सोयेगी नही तो मै मौसी के साथ अपनी मस्ती कैसे कर पाऊन्गा

इसिलिए मैने मौसी की ओर करवट ली जो सीधा लेती हुई थी ।

मैने अपना हाथ उन्के पेट पर रखा वो समझ गयी मै ही हू तो उम्होने मेरा हाथ पकड कर अपने और करिब खिच लिया ।

मै एकदम धीमी आवाज मे मौसी के कान मे - मौसी , अभी नही थोडा रुक कर उपर चलते है ।

मौसी ने मुस्कुरा के हम्म्म्म किया ।

धीरे धीरे मेरे हाथ उन्के बदन पर घूमते रहे और मै ब्लाउज के उपर से ही उनकी चुचिया मिज रहा था और मौसी भी मेरे लण्ड को पकडने की कोसिस कर रही थी ।

धीरे धीरे हम दोनो की उत्तेजना बढ़ी और समय भी काफी हो चुका था ।
मै मौसी से धीरे से कान मे बोला - मौसी छत पर चले
मौसी भी धीरे खुसफुसायि - सब सो गये क्या

मै - हा लग तो रहा है
मौसी - ऐसा कर तू उपर चल मै आ रही हू
मै खुश हुआ और धीरे धीरे अन्धेरे मे जीने का अनुमान लगाता हुआ छत पर निकल गया । उपर बडी सावधानी से जीने के दरवाजे को खोल के उपर निकल गया ।

आह्ह मस्त मौसम था आज , हल्के बादल थे और चादनी रात ।

मै छत पर घूम ही रहा था कि मुझे कुछ आहट सी आई और तभी दरवाजा चुं किया और मौसी उपर आ गयी ।

मै खुश हुआ और उन्हे हग कर लिया ।
मै चौका - अरे मौसी आपकी पायल और चूडिया कहा है
मौसी हस कर-वो तो मैने वही निचे पहले निकाल दिये तब मै आई

मै - तब अब रुकी क्यू हो जल्दी करो ना प्लीज ,,,तडप गया इसपे पर प्यार के लिए
मैने मौसी का हाथ पकड़ कर अपने लोवर से बाहर निकले हुए लण्ड पर रख दिया ।

मौसी गनगना गयी औरा अगले ही पल झुक कर मेरे कदमो मे बैठ गयी और मेरा लण्ड चूसना शुरु कर दी ।

मानो कितने समय बाद मै जन्नत मे आया हू ,, जैसे जैसे मौसी अपने लार से मेरा लंड गिला करती रही , मेरे लण्ड मे सख्ती बढती रही और फिर मैने उन्हे वही चारदिवारी के सहारे घुमा कर खड़ा किया ।
उनकी साडी पेतिकोट को एक साथ उठाते लण्ड को सीधा मौसी की चुत मे पेल दिया
थोडी देर मौसी को चोद लेने के बाद मैने उनको मुह मे माल भर दिया ।
फिर हम दोनो बाथरूम की ओर जाने लगे। मौसी आगे जा चुकी थी और मै जैसे ही मुड़ा ,,मुझे सीढियो पर से तेजी से किसी के नीचे जाने की आहट हुई । मानो कोई दबे पाव सरसराता हुआ अपने हाथ जीने के दिवाल पर रगडता उतरा हो ।

मेरा कलेजा धक कर गया
मैने ये बात मौसी को ब्ताना उचित नही समझा कि जीने पर अभी हमे कोई देख रहा था या फिर मेरा कोई वहम ही हो । क्योकि अब तक सारे लोग सोये हुए थे ।

थोडी देर बाद हम दोनो निचे आ गये और मैने बत्ती जलाई ये देखने के लिए कोई जगा तो नही ।

तो लगभग सभी के चेहरे शांत दिखे सिवाय पल्लवि के ,,उसकी सासे तेज मह्सूस हो रही थी और उसने अपना चेहरा चुन्नी से ढका हुआ था ।
मै समझ गया कि वो पल्लवि ही थी क्योकि सोने का नाटक कैसे करते ये मुझसे बेहतर कौन समझ सकता था ,,मैने खुद कयी बार इसी से अपना फायदा लिया था ।

मुझे एक डर सा लगने लगा था ,,,आजतक मेरे जिस छिपाये संबंधो को कोई दुसरा नही जान पाया था ,,उसके बारे मे अब पल्लवि को खबर थी । मै बुत बन कर वही बोर्ड पर खड़ा होकर कुछ सोचने लगा और जब मौसी ने मुझे बोला तो मैने बत्ती बुझा दी और अपनी जगह पर आकर सो गया ।

मुझे नीद नही आ रही थी
एक भय सा लगा हुआ था अन्दर,,,मन मे आ रहा था कि पल्लवि से बात कर लू और उसे थोडी सफाई दू ,,मगर अगले पल मे लगता कि नही ,,अगर मान लो वो नही उसकी जगह कोई और था तो ???
लेकिन हर बार मेरे शक की सुई पल्लवि पर ही जा रही थी क्योकी कल से जब मै आया तबसे उसकी नजरे मै खुद पर ज्यादा पाई है ।

मेरा दिमाग लगातार इसी उधेड़बुन मे लगा रहा और फिर मैने तय किया कि अब कल सुबह ही ये चार लोगो के चेहरे पढने पड़ेंगे और अंजान होकर इनकी प्रतिक्रियाये देखुगा । तब शायद कुछ कन्फर्म हो पाये ।
बस इसी तसल्ली के साथ रात के किस पहर मे मै सोया मुझे पता नही लेकिन सुबह 5 बजे ही मुझे मौसी ने जगाया ।

मौसी - उठ लल्ला , झाडू पोछा करना है
मै नीद मे कुनमुनाते हुए करवट बदल लिया - नही मौसी सोने दो ना

मौसी हसी और बोली - ठिक है जा मेरे कमरे मे सो जा ,,नही तो चाची जी भी गुस्सा करेंगी

मै उखड़ कर उठा , मेरी आंखे सही से खुली नही थी । थोडी दुर पर किसी से खिलखिलाने की आवाजे आ रही थी तो मौसी उसे डांट रही थी ।
मै उबासी लेते हुए मौसी के कमरे मे चला गया और पेट के बल सो गया ।

पता नही कब लेकिन जब मेरी आंखे खूली तो कमरे मे कोई गोरी औरत थी ,,जो पेतिकोट मे खड़ी होकर अपने ब्लाऊज के हुक बंद कर रही थी और उसकी पीठ मेरी ओर थी ।
कमरे मे साबुन की भीनी खुश्बू फैली हुई थी ।
मैने बस लेटे हुए पूरी आंखे खोली तो देखा ये तो ममता बुआ है और उनका मोटा कुल्हा पेतिकोट मे ये बाहर की ओर फैला हुआ है ।

देख कर मेरे होठ और लण्ड दोनो फैल गये
भाई मै मुस्करा उठा और मेरा लण्ड भी ममता बुआ ने सख्त कूल्हो को देखने के लिए पागल होने लगा ।

इधर मैने सोचा कि अभी अंगड़ाई लेके उठू तभी कमरे का दरवाजा खुला और मौसी भी पीले रंग के ब्लाउज पेतिकोट मे अन्दर आई और दरवाजा बंद कर दिया ।


मैने फौरन आंखे मूंद ली ,,तभी मौसी की आवाज आई - अरे आज अपने भईया को घायल करके के छोडोगि क्या मेरी ननद रानी

ममता - वो तो पहले से ही घायल है भाभी ,,, कुछ बचा ही कहा है अब

मौसी हस कर - अरे मेरी लाडो रानी अभी तो ये पिछ्ला आँगन मे घूमाया ही नही अपने भैया को

मैने थोडी सी बारीक आंखे खोली और देखा तो मौसी का हाथ ममता बुआ के बडी सी गाड पर घूम रहा था ।

ममता बुआ - वो तो भैया की मर्जी है ,,जब चाहे घूम ले हिहिही

मै उनदोनो की बाते सुन कर मन ही मन बहुत मस्त हो गया । मुझे समझ आने लगा कि मा की तरह मौसी ने भी ममता बुआ को मौसा के लिये सेट किया होगा ,,, फिर मैने रात मे मौसा और राजन फुफा के कमरे वाली बात याद आई ।
मै मन मे - यार अगर ममता बुआ और मौसि एक साथ मौसा से चुदते है और वही राजन और मौसा मिलकर मौसी को चोदते है तो कल रात इन्होने ममता बुआ को क्यू नही बुलाया ,,कही मौसी ने ममता बुआ से राजन फूफा से चुदने वाली बात और राजन फूफा से ममता बुआ और मौसा की चुदाई की बात छिपा के तो नही रखी ।

मै थोडा सोचा विचार रहा था कि इतने मे मौसी ने मुझे आवाज दी उठने के लिए

ममता बुआ जो कि अभी ब्लाउज पेतिकोट मे थी - अरे भाभी रुको मुझे साडी तो पहन लेने दो

मौसी हस कर- तू भी ना ममता ,,अरे बच्चा है वो

मौसी - राज उठ जा लल्ला
मै कुनमुना कर उबासी लेते हुए उठा

मै आंखे मिजते हुए एक बडी सी उबासी लेते हुए - गुड मॉर्निंग मौसी

मौसी - 8 बजने वाले है और तेरा अभी गुड मॉर्निंग हो रहा है ,,जा जल्दी से नहा धोकर आ ।

मै कमरे से बाहर आया तो मौसी ने कमरे का दरवाजा बन्द कर लिया ,,,मुझे सामने सीढि दिखी तो निचे जाने के बजाय मै उपर छत पर चला गया ।

जीने से बाहर छत पर पहुचा तो मुझे वही रात वाली जगह पर मेरे वीर्य के कुछ बडी बुन्दे दिखी और मुझे रात का सब याद आने लगा ।

मैने उस गाढे चिपचिपे सुख चुके वीर्य को चप्पल से घिसा तो वो अभी भी निचे से गिला ही था तो वहा फैल गया ।

मैने अपना माथा पिट लिया कि अबे यार ये क्या गन्दगी फैला दी मैने ,,लग रहा है पानी डालना पडेगा ,,वैसे तो किसी की नजर नही जाती ,,लेकिन अब जरुर जायेगी ।

मै आस पास देखा तो छत पर कोई नजर नही आया तो मै बाथरूम की ओर गया कि पहले खाली करता हू फिर इसे साफ करता हू ।

मै जल्दी जल्दी चल कर पाखाने मे घुस गया और जैसे ही बैठा ,,मुझे बगल मे नहाने वाले हिस्से से किसी के गुनगुनाने की आवाज आई ,,,, ये कोई और नही पल्लवि ही थी जो रात का वही गाना गुनगुना रही थी जिसपे उसने डांस किया था - कजरा रे कजरा रे

मगर इधर जैसे ही मैने पाखाने की टोटी चलाई उसने गाना बंद कर दिया ।
फिर नहानघर का दरवाजा खुला और इधर मै भी पल्लवी के नहाने के बाद उसके खिले हुए जिस्म को देखने के लिए लालायित हो गया ।

तो मै फटाफट अपनी धुलाई करके जैसे ही दरवाजा खोल कर बाहर निकला

मेरी आंखे फैल गयी और मुह खुल गया

क्योकि छत की अरगन पर पल्लवि सिर्फ़ एक पीले सूट पहने कपडे डाल रही थी ,,हालाकी उसने ब्लूमर पहना हुआ था ।
उसने जैसे ही मूड मुझे बुत बने हुए देखा तो मेरी नजरे उसकी सूट के बगल से नंगी दिखती जांघो से उसके चेहरे पर गयी ।

उसके चेहरे के भावो से लगा कि अब चिल्लाने वाली है तो मैने लपक कर उसके मुह पर हाथ रख दिया ।

उसकी सासे भारी होने लगी वो उउउऊ उउउउऊ किये जा रही थी ।
बदले मे मै माफी मागते हुए बड़बड़ाते हुए समझा रहा था कि ये सब अनजाने मे हुआ तो प्लीज शोर ना करे वो

मै उसे बाथरूम की दिवाल के एक ओर ले गया और वहा उसके मुह से हाथ हटाया

मै आंखे भीच कर - सॉरी प्लीज ,,चिल्ल्लाना मत

पल्लवी मौका पाते ही फौरन दौड़ कर बाथरूम मे घुस गयी और भागते हुए उसके मोटे कूल्हो की थिरकन अह्ह्ह

वो तस्वीर मेरे जहन मे बैठ गयी ,मगर अगले ही पल मै चेता और वापस से बाथरूम के पास जाकर पल्लवि से माफी मागी

थोडी देर बाद पल्लवि ने दरवाजा खोला तो मै नजरे निचे किये खड़ा रहा ,,
पल्लवि वापस से अरगन की ओर गयी और बाकी बचे हुए कपड़े फैलाने लगी ।

मैने एक नजर उठा कर पल्लवि को देखा तो उसने सल्वार पहन ली थी । तो मै मुस्कुरा कर जैसे ही उसके पास गया और इतना ही बोल पाया - सॉरी ना पल्लवि ,,वो बस अन.....

मेरी नजर पल्लवि के हाथो मे पकडे हुए नीले ब्रा पर गयी जिसका 34B का लेबल साफ दिखा मुझे

पल्लवि ने जैसे ही मुझे अपने बगल मे पाया वो शर्मा गयी और अपना ब्रा वापस बालटी मे डाल दिया ।

मै तुरंत उसकी ओर पीठ कर लिया और धीमी आवाज मे बड़बड़ाया - हे भगवान ये क्या हो रहा है मेरे साथ ,,,फिर से सॉरी पल्लवी

इसबार पल्लवी की थोडी सी खिलखिलाने की आवाज आई और मुझे बडी राहत हुई ।
फिर पल्लवि ने पीछे से ही मेरे कन्धे पर तौलिया रखा और बोली - नहा कर धूप मे डाल दिजियेगा इसे ,,हिहिही


फिर वो मुस्कुरा कर भागती हुई निचे जाने लगी और मै उस गीले तौलिये को कन्धे से उतार जीने की ओर पल्लवि को उसके भारी कुल्हे हिलाते जाते देखकर मुस्कुराया ।

तभी पल्लवि अचानक से जीने के दरवाजे के पास उस जगह पर जाकर रुक गयी जहा मेरा वीर्य गिरा था ।

पल्लवि वो गन्दगी देखी और फिर मुस्कुराकर मुझे देखा तो मै फौरन मुह दुसरी ओर कर लिया । क्योकि मेरी फट चुकी थी । मेरा शक सही निकला ,,कल रात मे पल्लवि ही थी जो सीढिओ पर खड़े होकर मेरी और मौसी की चुदाई देख रही थी ।
मुझे अब समझ नही आ रहा था कि मै कैसे उसका सामना करूँगा , हालकि उसके हरकतो से नही लग रहा था कि वो किसी से कुछ कहने वाली है । मगर एक डर जरुर था मन मे ।
मुझे उपर नहाना था नही क्योकि मेरे ब्रश और कपडे सब निचे थे । तो मै वो तौलिया निचोड कर उसे छत पर डाल दिया और सबसे जरुरी एक गिले कपडे से वो दाग साफ करके निचे चला गया ।

फिर मैने भी नहा धोके पिला कुर्ता और सफेद पाजामा डाला । आज नाश्ता तो बना था लेकिन हम बच्चो को और मौसा मौसी नही मिलने वाला था । क्योकि आज हल्दी थी जब तक कथा और हल्दी का कार्यक्रम हो नही जाता तब तक हमे सिर्फ पानी पीने का आदेश मिला था ।

सारे लोग पीले कपड़ो मे थे ।
सुबह से ही घर मे चहल पहल थी , मौसा के गाव से उनके कुछ रिश्तेदार आ गये थे ,,यहा मुहल्ले की भी कुछ औरते और लडकिया आ गयी थी ।

सबसे उपर की मंजिल पर एक टेंट लगाया गया । फिर वही कथा शुरु हुई । करीब 11 बजे तक कथा समाप्त हुई ,,सबकी आवभगत से लेके प्रासाद बाटने मे हर जगह भागा दौडी लगी थी ।
राहत तब हुई जब पंडित जी ने हमे प्रसाद खाने के लिए बोला ,,,, प्रासाद खाने के बाद हमने पानी पिया ,,,सुबह से सर चकरा रहा था तो मौसी ने चाय भी बनवाया ।

थोडी देर बाद पंडित जी निकल गये ।
फिर उसके बाद वही कथा वाले जगह पर ही रमन भैया को एक छोटी चौकी देके बिठाया गया ।

फिर एक मीडियम साइज़ पतिले मे रखी हल्दी लाई गयी । पहले मौसा मौसी ने भैया को हल्दी लगायी ।
फिर मा , फिर ममत बुआ ने ।
लेकिन जब मामी की बारी आई तो वो भी हल्का हल्का ही भैया के गाल , बाजू पर हल्दी लगा रही थी

मै हस कर मामी को छेड़ते हुए - मामी अगर आप ऐसे कन्जुसी करोगी तो मै अपनी शादी मे आपसे हल्दी नही लगवाउँगा

मेरी बात पर सब हस पडे
मामी हस के - आओ हीरो तुम भी बैठो और जहा कहो वहा लगा दे
मै चल कर रमन भैया के पीछे गया और धीरे से उनका ढिला कुर्ता पकड कर एक ही बार खिच दिया ।

रमन भैया अब उपर से पुरे नंगे हो गये । पेट और सीने पे बाल ही बाल थे और वो शर्मा रहे थे ।

मा मुझे डाटती है - बदमाश ये क्या रहा है
मै हस कर पतिले मे से ठंडी ठंडी हल्दी लेके रमन भैया के गरम पीठ पर उंगलियो से बडे आराम से लगाते हुए - अरे मा रसम है तो अच्छे से करना चाहिए ना हिहिहिह

रमन भैया अपनी पीठ पर ठंडी हल्दी का लेप पाते ही खिलखिलाए और मुझे पकड कर आगे कर दिया ।

हालकी रमन भैया भले ही उतने भारी शरीर के नही थे लेकिन उनकी पकड बहुत मजबूत थी ।

उन्होने मेरा हाथ ऐठ के मुझे सामने किया और फिर हल्दी लेके मेरे कुर्ते के अन्दर नाभि के आस पास लगाने लगे ।

मै गुदगुदी से छ्टकने लगा और मुझे फसा हुआ पाकर मामी को मानो मौका मिल गया ।

वो भी उठ कर आई और पीछे से मेरे कालर मे हाथ डाल कर पीठ मे ठंडी हल्दी पोतने लगी ।
इधर मुझे फसा देख के सब हस रहे थे सिवाय गीता बबिता के ,,,मेरी मासूम बहनो को मुझे परेशान होता देखा नही गया और वो रमन भैया को पकड कर गुदगुदाने लगी ।

इधर रमन भैया ने मेरे हाथ छोड़े तो मैने लपक कर हल्दी के पतिले मे डाला और मामी की मुलायम कमर पर हल्दी मल दिया ।

वो खिल्खिला कर उठ कर भागी तो मैने उन्हे ताड़ा और दौड़ा कर बाथरूम के दिवाल के कोने मे ले गया जहा सबसे छिपते ही मामी चुप हो गयी ।
फिर मै हसते अपने हाथो मे हल्दी मलने लगा।

मामी ने इतराकर खुद से ही अपने पेट से पल्लू हटा कर बोली - आओ लगा लो ना
मै उनकी इस अदा से उत्तेजित हो गया और उन्हे पकड के घुमाया । फिर उनकी नाभि के पास मुलायम पेट पे हल्दी मलते हुए पीछे से अपना लण्ड उनकी गाड़ पे घिसने लगा ।
इधर मुझे फसा हुए देख के मामी ने धीरे से मेरे दुसरे हाथ को पकड़ा और मेरे ही चेहरे पर मल दिया । फिर हस्ते हुए टेन्ट की ओर भाग गयी ।

मै हस्ते हुए वापस आया तो लोगो को लगा इस झड़प मे मेरी ही हाल हुई क्योकि मामी ने अपना पेट वापस पल्लू से ढक लिया था ।
इधर गीता बबिता और सोनल पलल्लवी ने रमन भैया को हल्दी ल्गायी । मैने भी गीता के गुलगुले गालो मे हल्दी लगाई

तस्वीरे निकाली गयी और फिर हम सबने वो स्पेशल बिना नमक हल्दी वाली उड़द की दाल , चावल सब्जी पूरी खाई

स्वाद तो जमा नही लेकिन रस्मो की खाना पूर्ति के लिए थोडा थोडा खाना ही पड़ा ।


लेखक की जुबानी

अब इधर एक ओर जहा राज ने खाना खा लिया ,,,वही राज के पापा यानी रंगीलाल काफी समय से शकुन्तला की राह देख रहे थे कि कब वो खाना लेके आये
क्योकि दोपहर के 1 बजने को थे ,,, सुबह के नास्ते की दही जलेबी ने रंगीलाल की भूख को और बढा दिया था ।

राह जोहते करीब डेढ़ बजे शकुन्तला एक रिक्शा से दुकान पर थैला लेके उतरि ।

रंगीलाल के जान मे जान आई
इधर शकुन्तला ने आते ही माफी मांगी ।

रंगीलाल - अरे भाभी जी क्यू शर्मिंदा कर रही है आईये अन्दर चलिये

शकुन्तला- अरे नही नही ,वो रोहन आ गया है ना तो मै बस ये खाना देने आयी थी

रंगीलाल - अच्छा ठिक है फिर मै ये टिफ़िन रात मे वापस दे दूँगा ।

शकुन्तला हस कर - अरे आप क्यू आयेगे ,,मै वैसे भी रात मे आऊंगी ही , ,ठिक है मै जाती हू

रंगीलाल अवाक होकर रह गया और शकुन्तला उसके सामने मुस्करा कर वापस उसी रिक्से से निकल गयी ।

इधर रंगीलाल का लण्ड अंगड़ाई लेने लगा और वो अन्दर खाना खाने के लिए चला गया

राज की जुबानी

हल्दी का रस्म अदायगी के बाद घर मे सभी मेहमानो के खाने पीने की व्यव्स्था मे जुट गये हम लोग ।

सब्जी तैयार हो रही थी और मै वही रसोई मे मौजूद था ,, इधर भंडारी के साथ राजन फूफा ने कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर काम मे लगे थे ।
वही बगल के एक लोग आंटा लगा रहे थे ।

तभी भंडारी ने बोला कि सब्जी बस तैयार है, जल्दी जल्दी पुरिया बेलवा ,,लेकिन दिक्कत की बात थी कि बेलेगा कौन ???

राजन - अरे बेटा घर मे जाकर पल्लवि और अगर उसकी अम्मा कुछ काम नही कर रही हो तो बुला लाओ , फटाफ़ट हो जायेगा और हा बेलना ले लेना 2 3

इधर मै भाग कर सबसे उपर की छ्त पर गया और वहा औरते आपस ने मेहदी रख रही थी ।

मै हाफते हुए - पल्लवि चलो फूफा बुला रहे है

मुझे हाफ्ते देख कर मौसी परेशान होकर- क्या हुआ लल्ला तू हाफ क्यू रहा हौ

मै हस्कर - अरे मौसी कुछ नही बस सीढिया चढने मे ये अह्ह्ह ,,,, वो मुझे एक्स्ट्रा बेलन चाहिये पुरिया निकलवानी

मौसी ने इधर उधर नजर घुमायि लेकिन उन्के मतलब का कोई नजर नही आ रहा था ,,क्योकि ममता बुआ को सोनल दिदी मेहदी लगा रही थी और मौसी को मामी ,,,मा शायद निचे ही थी ।
मौसी मुझ से - अच्छा बेटा पल्लवि निचे जा रही है तो

मौसी -पल्लवि ,,बेटी जरा स्टोर रूम से बेलन निकाल लेना नये वाले वहा दो होंगे और एक निचे किचन से ले लेना

पल्लवि मे हा मे सर हिलाया ।
इधर मै - और कोई फ्री है पूरी बेलने के लिए

मौसी- अरे तेरी मा निचे ही है , उसे लिवा लेना
मै हा मे सर हिलाया और फिर पल्लवि को देख कर मुस्कुराते हुए निचे चलने का इशारा किया ।

पल्लवी ने भी मुस्कुरा कर हा मे सर हिला दी और हम दोनो स्टोर रूम मे चले गये ।

वहा जाने के बाद पल्लवि थोडा बहुत खोज बिन करने लगी ।

मैने मौका देख के थोडा बात करने की कोशिस की - वैसे मै कल शर्त जीत गया था

पल्लवि एक ट्रंक मे खड़बड़ाती हुई बेलन खोज रही थी और मेरे बात को सुन कर थोडा चुप रहने के बाद बोली - हा तो मैने भी डांस किया था ना

मै - तो शर्त जीतने के पहले ही,,वो थोडी ना गिना जायेगा

पल्लवि - तो फिर अब क्या शर्त बदल दोगे ,,कुछ और करना पडेगा मुझे

मै - नही वो बात नही है ,,मै तो ये सोच रहा था अगर मै हार जाता शर्त तो तुम मुझसे क्या करवाति

पल्लवि हाथ मे बेलन लेके उसे मुझे थमाते हुए इतरायी - मै तो बस एक सलाह देती आपको

मै थोड़ा असमंजस भरा हसी के भाव लाता हुआ - सलाह ? मतलब किस चीज़ के लिए

पल्ल्ल्वी मुस्कुरा कर - यही कि कुछ चीजे सही जगह पर ही करनी चाहिये एकदम से खुले मे नही

पल्लवी की बाते सुन कर मेरी फ़ट गयी क्योकि मै समझ गया वो रात मे मौसी के साथ मेरी चुदाई की बाते कर रही थी ।

मै अटकते हुए -क क क क्या आ मतलब है तुम्हारा ,,,साफ साफ बोलो

पल्लवि मुस्कुरा कर दरवाजे की ओर जाते हुए - वही जो तुम समझ रहे हो ,,,वैसे मै ये किसी से नही कहूँगी । अब चलो ।

मेरी फट रही थी और पल्लवि का डेयरीन्ग अंदाज मुझे और भी डरा रहा था तो पता नही मेरे दिमाग मे क्या सुझा कि मै बस अपने बचाव के लिए एक तुक्का फेका ,,,जोकि शायद मुझे उसकी जरुरत भी थी और वो बात बस वही खतम हो जाती ।
मगर नियती का खेल वो ही जाने और बात आगे बढ गयी ।

मै हकला कर - त त तुम अगर बता दोगी किसी को तो मै भी तुम्हारे और अनुज के बीच की बात सबको बता दूँगा


पल्लवि के पाव रुक गये तो मुझे लगा मेरा दाव चल गया तो मैने बात को और लपेट कर बोला - अनुज ने मुझे सब बता दिया है ,,वो मुझसे कुछ नही छिपाता

पल्लवि के पाव हिल रहे थे और गुस्से से तमतमाती हुई घूमी और मुझे ऊँगली दिखाते हुए - सुनो मिस्टर मुझे धमकी देने की सोचना भी मत , और वैसे भी मै अपने मामी जी की इज्जत किसी के सामने नही उछालने वाली ।


पल्लवि की ऐसी प्रतिक्रिया देख कर मै समझ गया कि मेरा तुक्का सही जगह पर लगा था और पल्लवि ने अभी अभी उसका प्रमाण दे दिया था । अपनी जीत पर मुझे बहुत खुशी हुई और मेरे मन से डर अब पूरी तरह गायब हो गया था ।

मैने लपक कर पल्लवी के कमर मे हाथ डाला और उसे अपनी ओर खीचा ,,,वो मेरे बाहो मे छ्टपटाने लगी ।


पल्लवि - गन्दे इन्सान छोड दो मुझे ,,नही तो मै उम्म्ंम्म्ंमम्मम्ंं

पल्लवि और कुछ कहती उस्से पहले ही मैने उसके होठ अपने मुह मे भर लिये और चुस कर छोड दिया ।

पल्लवि हाफते हुए - ये क्या किया तूमने ,,मुझे लगा तुम जैसे भी होगे लेकिन अच्छे इन्सान होगे । कम से कम एक लड़की की भावनाओ की इज्जत तो करोगे ।

पल्लवि की बाते सुन कर मुझे समझ आया कि मै ये क्या करने लगा था और मुझे खुद पर घिन सी हुई । फिर एक पल को मै ग्लानि मे तब भर गया जब मुझे अनुज का ख्याल आया कि ये तो उसकी गर्लफ्रैंड है और मैने मेरे भाई के साथ धोखा किया ।

मै उदास सा हो गया लेकिन खुद के लिए एक गुस्सा भर गया और मैने पल्लवि के हाथ को पकड कर जोर से अपने गालो पर मारा और सॉरी बोल कर कमरे से बाहर आ गया ।

पल्लवि बुत बनकर वही खड़ी रही ।
मैने खुद के आंसू पोछे और बेलन लेके निचे चला गया ।

किचन मे मा मिली तो उन्हे भी साथ लेके बगल के घर मे चला गया ।

इधर मा मुझे पुरिया बेलना बताने लगी ,,मा के साथ हसी मजाक मे कुछ पलो के लिए मै भूल गया था । मगर जैसे ही पल्लवि वहा आई मै शांत हो गया ।

वो मा के बगल मे बैठ कर पुरिया बेलने लगी ।
मुझे अचान्क से चुप देख कर मा को कुछ शक हुआ ।

मा - क्या हुआ राज तु चुप क्यू हो गया ,
मै जबरन की हसी चेहरे पर लाता हुआ जिसमे मेरी आन्खे डबडबा सी गयी - कुछ तो नही मा ,,,वो बस खाने का देखकर पापा की याद आ गयी कि पता नही उन्होने खाया कि नही ।

मा- अरे हा आज कामो मे फस कर उनसे बात भी नही हुई , जरा लगा ना उनको फोन

मै - रुको मा मै मोबाईल लेके आता हू ,फिर मै उठा और मेरी लाल हुई आन्खो से पल्लवी को देखा और घर मे रमन भैया के कमरे मे चला गया ।

मैने अपना बैग खोलकर उसमे से मोबाइल निकाला और जैसे ही कमरे के बाहर जाने को हुआ तो कमरे मे पल्लवि खड़ी थी ।

मै चौक के - अरे तुम यहा ,,कुछ चाहिये क्या मम्मी को

पल्लवि धीमी आवाज मे नही बोल कर सर हिलाई
मै - तो फिर
पल्लवि मुह गिरा कर - वो सॉरी , मुझे आपको ऐसे नही कहना चाहिये था

मै जबरन की हसी लाता हुआ भरे गले से - अरे तुम क्यू सॉरी कह रही ,,,गलती तो मेरी थी मैने अपने छोटे भाई की जीएफ के साथ वो सब किया

पल्लवी चौकी और जिज्ञासू होकर - जीएफ मतलब

मै मुस्कुरा कर - गर्लफ्रेंड
पल्लवि हसी - हा लेकिन मै तुम्हारे भाई की गर्लफ्रेंड नही हू ,,लेकिन मेरा बॉयफ्रेंड अनुज ही है

मै फसा हुआ मह्सूस किया - क्या मतलब कि तुम उसकी GF नही हो लेकिन वो तुम्हारा BF है

पल्लवि मुझे समझाते हुए - अरे नही वो मेरा अनुज मेरे गाव मे रहता है ,,, मेरे ताऊ जी का लड़का है ।

मै पहले उसकी बात पर हसा लेकिन फिर कुछ सवालो ने मुझे उलझा दिया - अच्छा,,,मगर ,,,लेकिन

मै - अगर वो गाव वाला अनुज तुम्हारा BF है तो तुमने मेरे अनुज से वो सब क्यू ???

पल्लवि मुस्कुरा कर शर्माते हुए मुह फेर ली - वो बस ऐसे ही जरूरतें थी कि हो गया ,,, लेकिन आपका अनुज बहुत ही अच्छा है ।

मुझे बहुत शौकीन्ग सा ल्गा और मन ही ग्लानि शांत हुई कि चलो दिल का बोझ हल्का हो गया । लेकिन इंसानी फितरत है कि मौके और दस्तूर की ताक मे हमेशा रहता है और वही फिलहाल मुझे जो चाहिये वो बस एक इजाजत थी ।

मै आगे बढा - वैसे कुछ जरूरते मेरी भी है , अगर तुम कुछ मदद कर सको तो

पल्लवि की आंखे बडी हो गयी और उसके चेहरे पर मुस्कान थी ।
मै हस कर उसकी आँखो मे देखता हुआ - मै पुछा मदद करोगी मेरी

वो शर्म से नजरे झुका ली और बाहर की ओर जाने लगी ।
मै उसके पीछे जाता हुआ - मुझे तुम्हारे जवाब का इन्तजार रहेगा और फिर मै फोन लेके मा के पास चला गया ।


फिर मैने पापा से बात की उनका हाल चाल लिया ,,तो बातो ही बातो मे पता चला कि रोहन भैया आ गये है । मै भी मन ही मन काजल भाभी को सोच कर मुस्कुराया कि आज रात काजल भाभी अपने औजारो का प्रयोग करेंगी रोहन भैया पर हिहिहिह

खैर थोडी देर मे पल्लवि भी आई और उसने मुझे देख कर स्माइल पास की ।
फिर मै खुश होकर सारे कामो मे भिड़ गया

इधर खाना तैयार हुआ तो बारी बारी करके खाना सबको खिलाया गया ।
खाना एक ही टाईम मे एक्स्ट्रा बनाया गया था ताकी जिसे रात मे भूख हो वो खा सके ।

इधर काफी सारी मस्तिया हुई और रात मे कुछ खास होना तो था नही इसिलिए मै निचे के हाल मे कुछ नये आये मेहमानो के साथ सोया ।
बाकी की सारी औरते उपर छत पर ही सोयी ।
****______******______****______

जानीपुर मे तो सब सो गये लेकिन चमन्पुरा मे रंगीलाल की रात आज बहुत लम्बी होने वाली थी ।

जारी रहेगी
मस्त खान
 
Top