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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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कहानी का नया अपडेट
पेज नंबर 1166 पर पोस्ट किया गया है
 
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Reactions: Raj Kumar Kannada

ASR

I don't just read books, wanna to climb & live in
Divine
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मित्र आप सच में ड्रीम बॉय हों, अभी तक मैं 118 एपिसोड तक पहुचा हूँ, परंतु अच्छा लगा हम सब कि कुछ मन की ईच्छा होती है स्वप्न में ही सही, आप उन को पूरा करने के लिए तत्पर है, ये सच मे ऐसा हो {सम्बंध} , सम्भव नहीं होता, शेष पूरे एपिसोड पढ़ने के बाद और भी शेयर करूगा
 

DREAMBOY40

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मित्र आप सच में ड्रीम बॉय हों, अभी तक मैं 118 एपिसोड तक पहुचा हूँ, परंतु अच्छा लगा हम सब कि कुछ मन की ईच्छा होती है स्वप्न में ही सही, आप उन को पूरा करने के लिए तत्पर है, ये सच मे ऐसा हो {सम्बंध} , सम्भव नहीं होता, शेष पूरे एपिसोड पढ़ने के बाद और भी शेयर करूगा
बहुत बहुत आभार दोस्त ... अगले विश्लेशण का इंतजार रहेगा
 

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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Bhai Aaj update nahi aayega Kiya.... update Bina bahut hii suna suna lagta hai... waiting
Sorry dost .... update adhura h av
Kal subah deta hu
 

DREAMBOY40

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UPDATE 131

पिछले अपडेट मे आपने पढा कि कैसे एक ओर राज निशा के साथ मिल कर अनुज और राहुल की जासूसी शुरु कर दी है वही दुसरी ओर सोनल के साथ मिल निशा की चुदाई भी की । देखते है आगे क्या होता है ।



राज की जुबानी

निशा और सोनल की चुदाई के बाद मै वापस दुकान पर निकल गया और वहा थोडा उलझन मे ही रहा कि आगे क्या किया जाये ताकि कोई छिपी हुई बात सामने आये ।

काफी सोचने के बाद मैने तय किया क्यू ना इन दोनो का टेस्ट लू और इनदोनो को हिन्दी incest sex story पढवा के इनकी प्रतिकिया देखू ।
मगर कैसे?? कुछ जोरदार विचार लाना पडेगा तभी ये प्लान काम करेगा ।


कुछ सोचने के बाद मुझे एक आइडिया आया और मै मुस्कुरा कर अपने काम मे लग गया ।

शाम को अनुज रोज की तरह घूमने गया और जब वापस आने का समय हुआ तो मै उसका इन्तेजार करने लगा ।


इधर जैसे ही वो वापस आता दिखा मै दुकान के पिछले कमरे मे कान पर फोन लगाये झुटमुट की बात करने लगा ।

अनुज जैसे ही दुकान मे घुसा मुझे फोन पर बात करते हुए पीछे के कमरे मे जाते देखा और मै जानबुझ कर ऐसे बात कर रहा था कि मानो मै किसी से बहस कर रहा हू ताकि अनुज मेरे बातो पर ध्यान दे और हुआ भी वही ।

मै फोन पर - यार तु समझता क्यो नही है ,,रात मे अनुज भी मोबाइल चलाता है और कही उसने वो कहानिया पढ ली तो

मै - हा हा ठिक है ,, हा उस लिंक को मैने बुकमार्क करके रखा है । ठिक है कल तू उसे ले लेना फिर मै उसे डिलीट कर दूँगा

मै थोडा चुप होकर - हा लेकिन तु तो जानता ही है ना कैसी कैसी कहानिया है उसमे अगर कही अनुज ने देख ली तो वो यही समझेगा ना की मै ये सब पढता हू ,,, हा ठिक है रख बाय


मेरे बाय बोलने पर अनुज वापस कमरे से हटकर दुकान के गल्ले पर आगया ।
मै दुकान मे आया तो ऐसे दिखाया कि मानो मेरी कोई चोरी पकड़ी गयी हो ।

अनुज भी मेरे चेहरे के भावो को पढने की कोसिस कर रहा था ।
इधर कुछ ग्राहक आ गये तो हम दोनो दुकान मे व्यस्त हो गये


रात को खाने के बाद मैने एक हिन्दी सेक्स स्टोरी की साइट को बुकमार्क कर दिया ,,जिसमे सिर्फ शॉर्ट हिन्दी सेक्स कहानिया थी ।

शार्ट कहानिया मैने इसलिये चुनी ताकी रात मे अनुज एक से ज्यादा कहानिया पढ सके ।

फिर मैने उसको मोबाईल दे दिया और मम्मी पापा के पास चला गया ।

अगली सुबह जब अनुज ने मुझे मोबाइल वापस किया तो मै बिना चेक किये दुकान आया और फिर यहा चेक किया तो देखा कि कल रात अनुज ने एक भी सेक्स वीडियो नही देखी थी और history मे सब शॉर्ट हिन्दी सेक्स कहानियो के है ।

उसने काफी सारी पारिवारिक कहानियो को भी खोला था ।
खास कर "चचेरि बहन से चुदाई" के काफी सारे पेज खोले गये थे ।

मै समझ गया कि उसने ये कहानि अच्छे से पढी थी ।
फिर एक "जीजा साली की चुदाई" कहानी के काफी सारे पेज खुले थे । "मौसेरी बहन के साथ चुदाई" के भी कुछ पेज उसने पढे थे ।

हालाकी उसने "मा के साथ चुदाई ", "सगी मा को पेला" जैसे पेज भी खोले थे मगर उन कहानियो के सिंगल पेज ही खुले थे । मतलब साफ था कि अनुज ने इन्हे इग्नोर कर दिया था । उसे सगे रिश्तो मे कोई दिलचस्पी नही थी ।


मै सारी history पढ कर खुश हुआ और समझ गया कि आगे क्या करना है ।
मैने तूरन्त उस कहानी की साइट की सारी हिस्ट्री और बुकमार्क डिलीट कर दी ।
क्योकि असली टेस्ट अनुज अभी होना था । अगर वो आज रात को वापस से सेक्स कहानिया खोजगा तो मतलब साफ है कि उसे इनसब मे रुचि है ।

अगले दिन की सुबह मैने फिर से मोबाइल चेक किया तो मेरा अनुमान सही निकला ,,अनुज ने रात मे वही सेक्स कहानिया पढ रहा है । जिसमे चचेरि बहन की चुदाई की कहानीयो के आगे की कड़ीया थी ।

अनुज का रुझान मै समझा गया और ऐसे ही दो रात मैने उसको मोबाईल देके उसकी आदत बढाई । बीते चार दिनो मे अनुज ने सिवाय सेक्स कहानियो के कुछ नही खोला और तो और वो शाम के समय राहुल से चार दिनो से मिलने भी नही गया वो मन लगा कर दुकान मे काम करता और हर समय मेरे फरमान की राह देखता । मै समझ कि इसे जो चाहिये आसानी ने मिल जा रहा है । तो मैने योजना आगे बधाई
फिर अग्ली दो रातो के लिए मैने अनुज को मोबाइल नही दिया । उसकी बेचैनी साफ नजर आ रही थी पुरे एक हफ्ते बाद शाम को अनुज ने घूमने जाने की बात की ।

मै जान गया कि मेरा तीर निशाने पर लगा है ,,,अनुज को उन रोचक कहानियो की चस्क लग गयी है और वो अब राहुल से निशा का मोबाईल जरुर मागेगा ।


इधर अनुज जैसे ही दुकान से गया मैने फौरन निशा को फोन लगा कर सारी बात उसे समझाई और कहा कि अगर आज राहुल मोबाईल मागे दे देना ।
निशा ने मेरे भरोसे हा कर दी ।


शाम को जब अनुज वापस आया तो वो खुश नजर आ रहा था । उसने आज मोबाईल के लिये भी नही कहा मुझसे ।मतलब साफ था कि उसने वो चीजे राहुल से शेयर कर दी है और अब राहुल रात मे भी वो साइट खोल कर कहानिया जरुर पढेगा ।


अगले दिन मैने निशा को दुकान पर बुलाया कि वो कोई बहाना करके आये और मुझे मोबाइल दिखाये ।
दोपहर को जब अनुज खाना खाने के लिए चौराहे पर गया तो मैने निशा को आने को कहा और थोडे समय बाद वो मेरे दुकान पर आ गयी ।


मैने उसके मोबाइल मे ब्राऊजर खोला तो देखा कि सेम वही साइट राहुल ने रात मे खोला था लेकिन उसकी मंशाए अनुज से विपरीत थी । उसने ज्यादातर सगी मा बहन के साथ सेक्स वाली कहानिया पढी थी । अब मै सब क्लियर समझ गया ।


निशा मुझे सोच मे देख कर - क्या हुआ राज बोलो

मै मुस्कुरा कर - अब क्या बोलू मेरी जानेमन तेरे आशिको की लिस्ट लम्बी हो रही है हिहिहिही

निशा अचरज से - मतलब
मै - मतलब ये कि राहुल और अनुज दोनो ने तुम्हे अपनी कल्पनाओ ने भोगना शुरु कर दिया है । मगर ये बात उन्होंने आपस मे छिपा रखी कि वो तुमसे सेक्स करना चाहते है ।

निशा चौकी - क्या ???? त त तु तू तुम इतने यकीन से कैसे कह सकते हो ,,मेरा राहुल ऐसा नही है । वो क्यू मेरे बारे मे ऐसा कुछ सोचेगा

मैने निशा को राहुल की पढी हुई सारी कहानीयो की हिस्ट्री दिखाई और फिर अनुज की भी ।
निशा को अब भी संसय था - हा लेकिन ये कैसे होगा ,,,वो दोनो छोटे है मुझसे

मै हस कर - हिहिही वैसे छोटा तो मै भी हू तुमसे दीदी

निशा हस दी - धत्त तुम्हारी बात अलग है लेकिन खुद के सगे भाई से ,,मतलब कैसे ??


मै - देखो जो सच था वो मैने तुम्हे बता दिया है,,अब अगर तुम्हे यकीन ना हो तो आज रात भी मोबाईल देदो राहुल को और उसपे नजर रखो ।

निशा - हम्म्म ठिक है तो मै आज ये करके रहूँगी ।

फिर निशा वापस घर चली गयी और मै अपने कामो मे लग गया ।


लेखक की जुबानी

इधर जबसे निशा को राहुल और अनुज की सच्चाई पता चली थी वो काफी परेशान थी । उसे समझ नही आ रहा था कि कब राहुल ने उसे इस नजर से देखना शुरु कर दिया ।

निशा अपने कमरे मे सोफे पर बैठी हुई थी । पंखे की हवा भी उसके तन और मन की ज्वाला को शांत नही कर पा रही थी ।
उसका सर दर्द से फटा जा रहा था इसिलिए उसने तय किया कि वो पहले जाकर नहा ले कुछ खा ले फिर शायद इसका कोई उपाय खोज निकालने मे मदद हो ।

निशा ने अपने कपडे लिये और उपर चली गयी ।
आधे घंटे तक शॉवर मे नहाने के बाद उसे थोडा आराम हुआ और वो कपडे बदल कर सीढियो से निचे आ रही थी कि राहुल उसके कमरे से भागता हुआ बाहर गया ।

निशा को पता नही क्या सुझा और वो भाग कर कमरे मे गयी । उसने अपना मोबाइल चेक किया तो समझ गयी कि वो जब नहा रही थी तो राहुल ने उसके मोबाइल पर वापस से सेक्स कहानिया पढी और जैसे ही उसे मेरे आने की आहट मिली वो बन्द करके भाग गया ।


निशा मन मे - आखिर इसमे ऐसा है क्या कि वो इसे पढने के लिए उतावला है । हालकि मैने भी राज के साथ सेक्स किया है लेकिन इतनी भी दिवानगी नही हुई मुझे ।

निशा ने वही खड़े उसी कहानी को खोला जिसे अभी राहुल छोड कर गया था ।

निशा ने दरवाजा बंद किया और उसने कहानी पढनी शुरु की ।

वो एक मध्यम वर्गीय परिवार की कहानी थी । जिसमे चार लोग रहते थे ।

हीरो - अमर , बडी बहन - रेखा , मा और पापा
स्कूल कालेजो और मुहल्ले के दोस्तो से कुछ सेक्स जानकारिया पाकर हीरो का सेक्स के लिए झुकाव बढने लगा था , मगर अपने शर्मिले स्वभाव के कारण हीरो की कभी कोई लड़की दोस्त नही बन पाई । वही उसकी दीदी उसकी अच्छी दोस्त थी और हसी मजाक मे उसको उसकी होने वाली गर्लफ्रेंड को लेके बहुत तंग करती थी । जिससे अमर चिढ़ कर रेखा के साथ मस्ती भरी नोक्झोक और लड़ाईया करता रहता ।
वही रेखा भी अब बडी हो चुकी थी तो आम परिवारो की तरह अब उस पर भी ज्यादा बाहर आने जाने पर रोक होती थी । उसके भी कोई ज्यादा दोस्त नही थे तो घर मे अमर को परेशान करने मे कोई कसर नही छोडती थी ।
समय बदला और अमर के लण्ड की गर्मी ने उसे ऐसी संगत में फसा दिया जहा से उसकी लाइफ बदल गयी ।
उसने अपने दोस्त के घर पर कुछ ऐसा देख लिया था जिससे उसका झुकाव भी उसकी दीदी की ओर होने लगा । अब वो रेखा को एक हुस्न की मल्लिका के तौर पर देखता था ।

धिरे धिरे समय के साथ अमर ने रेखा के साथ मस्ती मजाक मे फलर्टींग शुरु कर दी। कभी कभी रेखा को अच्छा मह्सूस होता तो कभी कभी उसे शक होता कि अचानक से अमर मे ये बदलाव क्यू आ गये । मगर रेखा के साथ अमर का रिश्ता कुछ दोसताना जैसा था तो उसे लगता था कि ये सब नोर्मल ही है । क्योकि अक्सर वो भो अमर को परेशान करती ही रहती थी ।

धीरे धीरे रेखा उसकी भी आदी हो गयी और उसे अमर से अपनी तारिफ सुनना अच्छा लगने लगा । कभी कभी अमर रेखा के बाल बनाता तो हाथो मे मेहन्दी रखने के बहाने उसे छूना चाहता । कभी कभी मालिश के बहाने उसके कन्धे और गले को छुता ।


यहा तक कि वो रेखा के लिए कपडे पसंद करने लगा , उस्के जिस्मो को अच्छे से निहार सके इसके लिये वो उसे बार बार साड़ी पहनने के लिए कहता । जिससे उसे रेखा के नंगी कमर पेट और ब्लाऊज मे कसे चुचो के उभार दिख जाते । साड़ी मे रेखा का कुल्हा भी उभर कर सामने आता था ।
फिर वो तस्वीरो के बहाने रेखा से कुछ मॉडर्न पोज देने को कहता । ऐसे माहौल मे अमर को अक्सर मौका मिल जाता था कि वो रेखा के कपड़े सही करने के बहाने उसे छू पाये और उसे सेक्सी हॉट जैसे शब्दो से उसकी तारिफ कर पाये ।

कयी मौको पर उसने रेखा को खुले बालो मे रहने को कहता और चोरी छिपे रेखा को अपनी जीन्स पहनने को देखा । फिर उनकी भी तस्वीरे निकालता ।
हर रात अमर रेखा के नाम से मूठ मारता था और दिन भर की तडप निकाल देता था ।

वही रेखा भी समय के साथ अमर की आदी हो गयी थी हर चिज़ के लिए उसे अमर का उसपे क्या रियेक्शन होगा ये जानना जरुरी था ।

समय के साथ वो भी अमर की ओर आकर्षित होने लगी थी क्योकि जब कभी अमर घर नही होता वो बेचैन परेशान होती और उसके साथ की हुई मस्तिया याद करती और अनायास वो अपने जिस्मो को सहलाने लगती मानो अभी अमर उसे छू लेगा ।

कभी वो मुस्कुराती तो कभी वो परेशान हो जाती कि ऐसा क्यू हो रहा है । आखिरकार जब उसे समझ आया कि वो अमर से प्रेम करने लगी है ती नेट पर इस रिश्ते को लेके उचित अनुचित जानना चाहा । उसे नेट पर भाईबहन के रिश्ते को लेके काफी सारी कहानीया मिली जिसने उसके जीवन मे कुछ बदलाव लाये और उसकी जिस्मानी ऊर्जा बेकाबू होने लगी ।

वो खुद से अमर के करीब जाने लगी । उसका लण्ड देखने के लिए कभी उसके अंडरवियर गायब कर देती और पुरा दिन अमर परेशान होकर सिर्फ लोवर मे होता फिर मौका पाकर रेखा उसका लोवर खिच देती ,,,फिर उसका मोटा लण्ड देख कर हस्ती ।

अमर भी अब इस बात को समझने लगा था तो उसने अपने दीदी की ब्रा गायब करनी शुरु कर दी जिससे रेखा के चुचे पुरे दिन हिलते थे और रेखा भी समझती थी कि ये अमर का ही काम है ।

अब रेखा ने अपने कपड़ो पर ध्यान देना छोड दिया था और वो अक्सर अमर को अपना जिस्म दिखाने के लिए कुछ ना कुछ तीगड़म लगाती रह्ती थी ।
ऐसे ही एक दिन उसने खुद से साड़ी पहनने और फ़ोटो निकलवाने की योजना बनाई और उस दिन उसने बहुत ही बोल्ड फ़ोटो दिये
अमर की हालात उस दिन बहुत खराब थी बिना अंडरवियर के लोवर मे उसका लण्ड तना हुआ था औ रेखा की नजर उसपे बराबर थी ।

उस दिन रेखा जान बुझ कर फ़ोटो निकलवाते समय अमर के लण्ड पर अपने जान्घे और पिछवाडा स्पर्श करवाति रही और जब वो कपडे बदलने के लिए कमरे मे गयी तो अमर भाग कर बाथरूम मे गया ।

रेखा के पास यही एकलौता मौका था अमर को रंगे हाथ पकड कर उस्से अपनी मनमानी करवाने का ।
वो भी उसके पीछे बाथरूम मे गयी और उसने जो आवाजे सुनी वो बहुत ही सुख्द थी ।
अमर रेखा का नाम लेके झड़ रहा था और रेखा बाथरूम के बाहर से सब सुन कर बिना ब्रा वाली ब्लाऊज के उपर से अपनी 32 साइज़ की चुचिया मसल रही थी ।

मगर रेखा ने खुद को सम्भाला क्योकि वो अभी जल्दीबाजी नही चाहती थी और वो अमर के साथ मस्तीया करना चाहती थी । इसिलिए उसने अमर को बाहर से आवाज दी - कमीने अपनी होने वाली गर्लफ्रेंड को भी याद कर ले ,,कब तक मेरे भरोसे रहेगा हिहिहिही

वो संवाद उन दोनो भाइयो के जीवन को बदलने वाले थे ।

क्योकि अमर और रेखा आमने सामने होने वाले थे ।



निशा ने एक एक करके अब तक की लिखी हुई कहानी के सारे अध्याय पढ लिये और कहानी पूरी ना पाकर उसकी बेचैनी बढने लगी । कि आखिर उस बाथरूम वाली घटना के बाद अमर और रेखा के जीवन मे क्या बदलाव आयेगा होगा । अमर अब कैसे रेखा का सामना करेगा ? क्या इसके बाद रेखा अमर से वो सब करेगी लेकिन कैसे ?? इस कहानी का आगे का भाग कब आयेगा ?

निशा - ओह्ह ये कहानी सच मे बहुत दिलचस्प है किसी को भी ललचा सकती है और बेताब कर सकती है । वैसे इसका लेखक DREAMBOY40 बहुत ही अच्छा लिखता है । कब आएगा अगला अपडेट


निशा परेशान होकर बिस्तर पर लेट गयी ,,उसकी चुत तो कहानी पढने से ही कबसे पनियायी जा रही थी कि तभी उसके दिमाग मे एक विचार कौंधा - क्यू ना इस कहानी मे रेखा ने जो अपने भाई अमर के साथ किया वो मै राहुल के साथ करके देखू । क्या सच मे वो मुझे उस नजर से देखता भी है या बस उसकी रुचि कहानीयो तक ही सिमित है ।

कहानी पढते हुए निशा को पता ही नही चला कि कब चार घन्टे बीत गये
इधर अनुज शाम को टहलने के लिए राहुल को लिवाने आ गया था ।
हाल मे चहल पहल सुन कर वो दुपट्टा लेके बाहर आई और उसके हाथ मे मोबाइल भी था ।

जैसे ही वो बाहर आई राहुल और अनुज दोनो ने एक साथ आहट की ओर ध्यान दिया तो सामने निशा खड़ी थी ।

राहुल खिखी करता हुआ - दीदी वो मोबाइल देदो हिहिही

निशा मन मे - जैसी इसकी बन्दरो वाली हरकते है लगता नहीं हैं कि ये मेरे बारे मे कुछ ऐसा वैसा सोचता होगा ।

निशा अनुज को देखकर( मन मे) - हा ये अनुज बहुत शांत रहता है पता नही इसके मन मे क्या चल रहा होगा ? देखो देखो कैसे निहार रहा है कमीना ।

निशा राहुल को मोबाईल देते हुए - हा लो ,,,लेकिन मेरा डाटा खतम मत करना

राहुल खिखी करके हस्ता हुआ मोबाइल ले लिया - हीहीह्ही ठिक है

निशा को उसकी हरकतो पर हसी आई - बन्दर कही का

फिर वो दोनो घर से निकल कर उसी पुलिया पर गये ।
दोनो भले ही निशा को पाने के लिए परेशान थे मगर दोनो ने अपनी भावनाये छिपाए रखी थी ।यहा तक कि शाम मे जब वो मिलते तो भी वो ऐडल्टरी/रोमांस कहानिया ही पढते जहा ज्यादा से ज्यादा जीजा साली , वाइफ और प्रेमिका के साथ , प्रेमिका की सहेली के साथ वाले सेक्स होते थे ।

जी तो दोनो का करता था कि अपनी अपनी कहानियो के बारे मे एक दुसरे को बता दे और फिर साथ मिलकर मजे से पढे । मगर दोनो के मन मे डर था ।

लेकिन इनसब से अलग राहुल का आत्मविश्वास अनुज के मुकाबले ज्यादा था तो वो बातो ही बातो मे अप्रत्यक्ष रूप से अनुज के साथ incest कहानियो को लेके चर्चा कर ही देता था ।

दरअसल वो भी अनुज का इन कहानीयो को लेके उसकी दिलचस्पी जानना चाहता था ।

राहुल - यार पता है कल रात मे दिदी ने मुझे मोबाइल दिया था तो क्या मस्त कहानी पढी मैने

अनुज की आंखे चमकी - कौन सी भाई बोल ना

राहुल अनुज को टटोलने के अंदाज से - वो कहानी तो मुझे कुछ पसन्द नही आई लेकिन उसमे हीरो कैसे हीरोइन को फसाता है वो बहुत दिलचस्प था ।


अनुज की उत्सुकता बढ़ी - अरे भाई बता ना कौन सी थी ।
राहुल - नही नही तु वो पढ़ेगा ही नही
अनुज - अरे बताओ तब ना

राहुल ने फिर वो कहानी खोली जिसे वो कल रात मे पढ रहा था "बडी बहन के साथ चुदाई का सफ़र "


अनुज ने जैसे ही वो शीर्षक पढा उस्की आंखे फैल गयी और वो सोचने लगा कि राहुल अगर ये कहानी पढ रहा है तो वो पक्का निशा दीदी को चोदना चाहता है ।

राहुल अनुज को सोच मे डुबा देख कर - क्या हुआ बोल ना
अनुज - भाई , कही तु निशा दीदी को ...।


राहुल की आंखे फैल गयी मानो उसकी चोरी पकड़ी गयी ।
राहुल हिचकता हुआ - अररे नही यारर ये ये ये तो बस कहानी है बे । तु ये कैसे सोच सकता है कि मै निशा दीदी को ....।


अनुज राहुल को अटकता देख समझ गया कि उसका अंदेशा सही है - चल चल अब मुझसे ना छिपा । तेरे चेहरे से साफ पता चल रहा है कि तेरे मन मे क्या है ।


राहुल अब जजबाती होने लगा - द द देख अनुज अब ये ज्यादा हो रहा है । तु ये कैसे बोल सकता है ।

अनुज जैसा भी था उसने अपने भाई राज के साथ अच्छा खासा समई बिताया था ,,उसे थोडा बहुत ज्ञान हो ही गया था कि कब किस्से कुछ उगलवाना है ।

अनुज ने राहुल का मजा लेना शुरु कर दिया ताकी वो भड़ास मे सच्चाई उगल दे -हिहिही चल चल रहने दे । जो तेरे बस का नही है तो मेरे पर रोब दिखा रहा है । तू चाहेगा भी तो निशा दीदी तुझे भाव क्यू देगी । हहाहाहाहाआ


राहुल पहले से ही डरा हुआ और जजबातो से घिरा था ऐसे मे अनुज का उससे मजा लेना उसके ईगो को सहा नही गया और हुआ वही जो अनुज चाहता था । राहुल ने कबूल कर ही लिया ।

राहुल आवेश मे - तु क्या मुझे अनाडी समझता है ,, मै तो अब तक इस बात को टाल रहा था लेकिन अब देख मै कैसे निशा दीदी को चोद के दिखाऊँगा

अनुज हस कर - चल रहने दे तेरे बस का नही है तु बस निशा दीदी को देख कर हिला सकता है हिहिहिहिही

राहुल - ठिक है अब तु देखना मै कया करता हू

अनुज - अरे मुझे क्या पता तु सही बतायेगा या झूठ

राहुल - सच झूठ का फैसला तु खुद करेगा ,,जब मै खुद चोद कर दिदी को तुझे भी दिलवा दूँगा

अनुज का दिल गदगद तो हुआ मगर वो अपनी भावनाये छिपाता हुआ - अरे तु कर ले पहले हिहिहिही

दोनो की बहस जारी रही और वो अपने घर वापस आ गये ।
इधर अनुज अपनी दुकान पर आ गया ।

वही राहुल अपने घर जाकर काफी सोच विचार करने लगा क्योकि अब उसका दिमाग थोडा शांत था । उसे समझ नही आ रहा था कि उसने अनुज को बता कर सही किया की नही और उपर से दीदी को उससे चुदवाने के लिए भी कह दिया ।

राहुल मन मे - क्यू ना मै भी उस कहानी के जैसे ही दीदी के साथ विहेव करू क्या पता बात बन ही जाये क्योकि उस कहानी मे और मेरी कहानी मे काफी ज्यादा समानताए भी है ।


राहुल ने कुछ तय किया और निशा के पास जो किचन मे खाने की तैयारी कर रही थी ।

जारी रहेगी
 
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