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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#164.

“बहुत अच्छे क्रिस्टी। तुमने बहुत अच्छी चीज पर ध्यान दिया।” सुयश ने क्रिस्टी की तारीफ करते हुए कहा- “यानि की अगर हम उस किताब पर लिखी तारीख को सही कर दें तो मूर्ति के पैरों में लगी बेड़ियां अपने आप हट जायेंगी।”

“कैप्टेन, आपने मेरी तारीफ क्यों नहीं की ?” ऐलेक्स ने नकली मुंह बनाते हुए कहा।

ऐलेक्स का ऐसा मुंह देख सभी की चेहरे पर मुस्कान आ गई।

सुयश ने ऐलेक्स की ओर देखा और जोर से उसका गाल पकड़ कर खींच दिया। यह देख सभी हंस दिये।

“अच्छा अगली बात कि मूर्ति के हाथ में पकड़ी मशाल की फ्लेम भी गायब है, हमें उसे भी ढूंढना पड़ेगा।” सुयश ने सभी को फिर से काम की याद दिलाते हुए कहा।

“कैप्टेन, मशाल वाली जगह पर जाने के लिये तो सीढ़ियां बनी हैं, पर इस किताब वाली जगह पर कैसे जायेंगे, वहां जाने का तो कोई रास्ता नहीं है।” तौफीक ने सुयश को ध्यान दिलाते हुए कहा।

“हमें वहां पर उतरने के लिये एक लंबी और मजबूत रस्सी चाहिये होगी...जो कि शायद यहीं कहीं हमें ढूंढने पर मिल जाये?...पर पहले हमें मशाल वाली जगह पर चलना होगा।” सुयश यह कहकर वापस सीढ़ियों की ओर बढ़ गया।

कुछ देर में सभी मशाल वाली जगह पर थे।

यह जगह मूर्ति की सबसे ऊंची जगह थी, यहां से न्यूयार्क शहर का एक बहुत बड़ा हिस्सा दिख रहा था।

सभी ने चारो ओर देखा, पर मशाल की फ्लेम कहीं भी नजर नहीं आयी।
जब काफी देर तक मशाल की फ्लेम नहीं मिली, तो थककर ऐलेक्स ने कहा - “मशाल की फ्लेम का आकार काफी बड़ा है, ऐसे में उस फ्लेम को इस स्थान के अलावा मूर्ति में कहीं नहीं रखा गया होगा, क्यों कि अगर उसे कहीं और रखा गया होता, तो उसको उठाकर यहां तक लाने के लिये कुछ ना कुछ व्यवस्था जरुर होती? पर हमें यहां और कुछ नहीं दिखाई दे रहा? इसका मतलब कुछ तो जरुर ऐसा है, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं?”

ऐलेक्स के शब्द सुन सुयश कुछ देर के लिये सोच में पड़ गया और फिर वह मशाल की सीढ़ियां चढ़कर मशाल की फ्लेम के पास आ गया।

सुयश कुछ देर तक मशाल की फ्लेम के ऊपर हवा में हाथ लहराता
रहा और अचानक से जैसे ही सुयश ने अपना हाथ नीचे किया, मशाल पर फ्लेम दिखाई देने लगी।

सुयश अब उतरकर नीचे आ गया। सुयश के नीचे आते ही सभी ने उसे घेर लिया।

“कैप्टेन, आप ने यह कैसे किया?” जेनिथ ने सुयश से पूछ लिया।

“दरअसल मुझे अपने पुराने समय की एक घटना याद आ गई।” सुयश ने कहा- “जब मैं xv साल का था, तो मुझे याद है कि अमेरिका के एक प्रसिद्ध जादूगर ‘डेविड कॉपरफील्ड’ ने सबके सामने जादू से, स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी को गायब कर दिया था, मैंने भी वह शोटी.वी. पर देखा था। उस समय तो सभी के लिये, यह एक बहुत बड़े जादू के समान था, पर बाद में पता चला कि स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी कहीं गायब ही नहीं हुआ था, जादूगर ने उसके सामने एक शीट लगा कर सिर्फ दुनिया की नजर में गायब किया था।

“तो जब ऐलेक्स यह कह रहा था कि मशाल की फ्लेम को कहीं और नहीं रखा जा सकता? तो मुझे लगा कि कहीं मशाल की फ्लेम अपनी जगह पर ही तो नहीं है, जिसे किसी अदृश्य शीट से ढक दिया गया हो। तभी मुझे उस अदृश्य चीज का ख्याल आया, जिससे कैश्वर ने 25 वीं खिड़की गायब की थी। बस यही सोचने के बाद, मैं उसे चेक करने के लिये मशाल के पास जा पहुंचा और मेरा सोचना बिल्कुल ठीक निकला। कैश्वर ने मशाल की फ्लेम को भी हमें भ्रमित करने के लिये अदृश्य कर रखा था।”

“तो कैप्टेन अब सिर्फ 2 चीजें ही बदलने को बची हैं।” तौफीक ने कहा- “एक तो किताब की तारीख बदल कर मूर्ति की बेड़ियां तोड़नी है और दूसरा मूर्ति का रंग भूरे से हरा करना है बस।”

“तो फिर पहले हमें तुरंत कहीं से रस्सी ढूंढनी होगी।” क्रिस्टी ने कहा।

“तो फिर सबसे पहले इस स्थान को ही ठीक से चेक कर लेते हैं और फिर वापस मुकुट वाले स्थान पर जायेंगे।” ऐलेक्स ने कहा।

सभी ने मशाल वाली जगह को हाथ से टटोलकर ठीक से देख लिया, पर वहां कुछ भी नहीं था।

इसके बाद सभी मुकुट वाले स्थान पर आ गये। पूरा कमरा सबने छान मारा, पर कहीं भी उन्हें रस्सी ना मिली।

यह देख जेनिथ ने हर खिड़की को खोलकर, उसके नीचे बाहर की ओर चेक करना शुरु कर दिया।

आखिरकार जेनिथ को सफलता मिल ही गई। उसका हाथ किसी अदृश्य चीज से टकराया।

“कैप्टेन!” जेनिथ ने खुशी से चीखते हुए कहा- “हम लोग रस्सी ढूंढ रहे थे, पर यहां इस खिड़की के नीचे बाहर की ओर अदृश्य सीढ़ियां हैं, जो कि नीचे किताब तक जा रहीं हैं।” यह सुन सुयश ने राहत की साँस ली।

“पर यह सीढियां तो अदृश्य हैं, बिना देखे इस पर से उतरना खतरे से खाली नहीं है।” क्रिस्टी ने कहा।

“इसीलिये तो मैं आप लोगों के साथ हूं।” शैफाली ने मुस्कुराते हुए कहा- “यह काम भी मुझसे अच्छा कोई नहीं कर सकता।”

सभी को शैफाली का तर्क सही लगा। अब शैफाली ने खिड़की के ऊपर चढ़कर अपना पहला कदम
सीढ़ियों पर रखा।

कुछ ही देर में टटोलते हुए शैफाली किताब तक पहुंच गई। शैफाली ने अब किताब के ऊपर लिखे रोमन अक्षरों को सही से सेट कर दिया।

जैसे ही किताब के अक्षर बदले, मूर्ति के पैर में बंधी बेड़ियां अपने आप खुल गईं। शैफाली धीरे-धीरे वापस ऊपर आ गई।

तभी एका एक स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के ऊपर काले घनघोर बादल नजर आने लगे और मौसम बहुत ज्यादा खराब हो गया।

सभी आश्चर्य से ऊपर की ओर देख रहे थे, क्यों कि बादल सिर्फ स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के ही ऊपर थे।
न्यूयार्क की ओर मौसम बिल्कुल साफ नजर आ रहा था।

तभी समुद्र का पानी भी जोर-जोर से ऊपर की ओर उछलने लगा।

“यह मौसम एकाएक कैसे खराब हो गया?” सुयश ने आश्चर्य से ऊपर आसमान की ओर देखते हुए कहा।

तभी अचानक सुयश को कुछ याद आया और वह चीखकर सभी से बोला- “तुरंत यहां से नीचे की ओर भागो, नहीं तो सब मारे जायेंगे।”

“ये आप क्या कह रहे हैं कैप्टेन?” ऐलेक्स ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा- “हमें यहां पर किससे खतरा है?”

“पहले भागो, रास्ते में बताता हूं।” यह कहकर सुयश भी तेजी से सीढ़ियां उतरने लगा।

किसी को कुछ भी समझ में नहीं आया कि सुयश क्यों सबको भागने के लिये कह रहा है, पर फिर भी सभी सुयश के पीछे भागने लगे।

भागते-भागते सुयश ने चिल्ला कर कहा- “यह मूर्ति तांबे की बनी है, जिसके कारण यह मूर्ति आसमान की बिजली को अपनी ओर खींचती है। इसी वजह से पूरे साल में इस पर कम से कम 300 बार बिजली गिरती है। अगर हमारे यहां रहते, वह बिजली इस पर गिरी तो हम झुलस जायेंगे।”

सुयश के शब्द सुन सभी डर गये और तेजी से सीढ़ियां उतरने लगी।

तभी कहीं पानी में जोर की बिजली गिरी, जिसकी वजह से समुद्र के पानी ने मूर्ति को भिगा दिया।

समुद्र के पानी में भीगते ही स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी का रंग भूरे से, हल्का हरा हो गया।

तभी सभी मूर्ति के नीचे मौजूद पत्थर पर पहुंच गये। अभी यह जैसे ही पत्थर के पास पहुंचे, तभी मूर्ति के ऊपर एक जोर की बिजली गिरी।

बिजली के गिरने से तेज प्रकाश चारो ओर फैल गया। अगर सुयश सभी को लेकर समय पर नीचे नहीं आया होता, तो अब तक सभी बिजली में झुलस गये होते।

तभी सुयश की निगाह मूर्ति के हरे रंग पर गई।

“लगता है समुद्र का पानी मूर्ति पर गिरने से ऑक्सीकरण के द्वारा मूर्ति हरी हो गई है।” सुयश ने कहा- “पर अगर मूर्ति हरी हो गई है तो अभी तक यह माया जाल टूटा क्यों नहीं?” सुयश के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभरे।

तभी एक और बिजली आकर मूर्ति पर गिरी। बिजली की रोशनी में सुयश ने जो देखा, उसे देखकर उसकी रुह फना हो गई।

बगल वाली स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी जिंदा हो गई थी और उन्हीं की ओर आ रही थी।

सुयश के चेहरे के भावों को बदलता देख सभी की निगाह उस ओर चली गई, जिधर सुयश देख रहा था।

दूसरी मूर्ति को जिंदा होते देख सबकी हालत खराब हो गई क्यों कि इस समय किसी के भी पास कोई भी चमत्कारी शक्ति नहीं थी और बिना किसी चमत्कारी शक्ति के 151 फुट ऊंची धातु की प्रतिमा को पराजित करना इनमें से किसी के भी बस की बात नहीं थी।

“अब क्या करें कैप्टेन?” क्रिस्टी ने घबराए स्वर में कहा- “बिजली अभी चमकना बंद नहीं हुई है, इसलिये हम मूर्ति के अंदर भी नहीं जा सकते और बाहर रहे तो ये दूसरी मूर्ति हमें मार देगी और इस मूर्ति को हम किसी भी प्रकार से परजित नहीं कर सकते।”

क्रिस्टी की बात तो सही थी, पर पता नहीं क्यों अभी भी सुयश तेजी से कुछ सोच रहा था।

अचानक सुयश जोर से चिल्लाया- “तुम लोग कुछ देर तक इससे बचने की कोशिश करो, मैं देखता हूं कि मैं क्या कर सकता हूं?” यह कहकर सुयश तेजी से सीढ़ियां चढ़कर वापस ऊपर की ओर भागा।

किसी की समझ में नहीं आया कि सुयश क्यों अब मूर्ति के ऊपर जाकर अपनी मौत को दावत दे रहा है, पर अभी सबका ध्यान दूसरी मूर्ति की ओर था।

दूसरी मूर्ति चलती हुई पहली मूर्ति के पास आयी और पानी में हाथ लगाकर उसे गिराने का प्रयत्न करने लगी।

सभी उसे देखकर मूर्ति वाले पत्थर के नीचे छिपकर खड़े हो गये थे।

अभी तक दूसरी मूर्ति की निगाह इनमें से किसी पर नहीं पड़ी थी, इसलिये वह बस पहली मूर्ति को उखाड़ने का प्रयत्न ही कर रही थी।

उधर सुयश लगातार सीढ़ियां चढ़ता जा रहा था, इस समय जैसे उस पर किसी थकान का कोई असर नहीं हो रहा था।

कुछ ही देर में सुयश मूर्ति के मुकुट वाले स्थान पर पहुंच गया, अब वो तेजी से जमीन पर टटोलते हुए जापानी पंखा ढूंढ रहा था।

कुछ देर की मेहनत के बाद सुयश के हाथ वह जापानी पंखा लग गया। सुयश ने तेजी से उस पंखे को वापस बंद कर दिया।

ऐसा करते ही पहली मूर्ति के मुकुट की सारी किरणें सिमट कर एक हो गईं और दूसरी मूर्ति अपनी जगह पर स्थिर हो गई।

तभी फिर से एक जोर की बिजली आसमान से पहली मूर्ति पर गिरी, परंतु आश्चर्यजनक ढंग से वह सारी बिजली बिना सुयश को क्षति पहुंचा ये उस एक किरण से निकलकर दूर पानी में जा गिरी। यह देख सुयश के चेहरे पर मुस्कान खिल गई।

अब उसने जापानी पंखें के द्वारा पहली मूर्ति की किरण को इस प्रकार सेट कर दिया कि अगर अब पहली मूर्ति पर बिजली गिरे तो वह परावर्तित होकर दूसरी मूर्ति पर जा गिरे।

अब बस सुयश को इंतजार था, एक बार फिर से बिजली के पहली मूर्ति पर गिरने का। और इसके लिये सुयश को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा।

कुछ ही देर में आसमान में फिर जोर की बिजली कड़की और पहली मूर्ति पर आ गिरी।

इसी के साथ पहली मूर्ति के मुकुट में बनी किरण ने, बिजली को संकेन्द्रित करके दूसरी मूर्ति की ओर भेज दिया।

दूसरी मूर्ति पर बिजली गिरते ही वह मूर्ति टूटकर कणों में परिवर्तित हो गई। और इसी के साथ आसमान में छाए घने बादल कहीं गायब हो गए।

अब सुयश ने एक बार फिर से जापानी पंखे का प्रयोग कर पहली मूर्ति की सातो किरणों को पहले के समान कर दिया।

जैसे ही मूर्ति अपने वास्तविक रुप में आयी, मूर्ति जिस पत्थर पर खड़ी थी, उसमें एक नया द्वार खुल गया, जो कि इस बात का प्रमाण था कि तिलिस्मा का यह द्वार भी पार हो चुका है।

अब सभी को बस सुयश के नीचे आने का इंतजार था। जैसे ही सुयश नीचे आया, सभी ने सुयश के नाम का जोर का जयकारा लगाया।

कुछ देर खुशी मनाने के बाद सभी शांत हो गये।

अब ऐलेक्स ने आखिर पूछ ही लिया- “आपने यह सब कैसे किया कैप्टेन?”

“मैंने सोचा कि दूसरी मूर्ति अगर पहली मूर्ति की सब कमियां दूर करने के बाद जिंदा हुई है, तो वापस पहली मूर्ति में कमी लाकर दूसरी मूर्ति को रोका जा सकता था। यही सोचकर मैंने जापानी पंखे के द्वारा मूर्ति के मुकुट में फिर से कमी ला दी, जिससे दूसरी मूर्ति अपने स्थान पर ही रुक गई। अब रही बात उस मूर्ति को नष्ट करने की, तो मैंने यह देखा कि बिजली उस मूर्ति पर नहीं गिर रही है, इसका साफ मतलब था कि वह मूर्ति तांबे से नहीं बनी है।"

“अब बची बात इस मूर्ति की तो तांबा हमेशा नमक वाले पानी से रिएक्शन कर एक बैटरी का रुप ले लेता है और समुद्र के पानी में नमक था, यानि कि जितनी बार बिजली इस मूर्ति पर गिर रही थी, वह इसे चार्ज करती जा रही थी, अब बस उस बिजली को बढ़ाकर सही दिशा देने की जरुरत थी और वह सही दिशा मैंने सभी किरणों को एक करके कर दी। इस प्रकार से नयी गिरी बिजली, मूर्ति में स्टोर की हुई बिजली के साथ संकेन्द्रित होकर एक दिशा में जाने लगी। जिसे देखकर मैंने उस किरण का मुंह दूसरी मूर्ति की ओर कर दिया और इसी के साथ वह दूसरी मूर्ति नष्ट हो गई।”

“वाह कैप्टेन! आपने तो कमाल कर दिया ।” क्रिस्टी ने सुयश की तारीफ करते हुए कहा- “हम तो सोच भी नहीं सकते थे कि इतनी बड़ी मूर्ति को बिना किसी चमत्कारी शक्ति के भी पराजित किया जा सकता है।”

“जिस समय तुमने बिना किसी शक्ति के रेत के सभी जीवों को पराजित किया था, यह भी बिल्कुल वैसे ही था।” सुयश ने क्रिस्टी से कहा- “हमें किसी भी चीज को पराजित करने के लिये सही समय पर सही सोच की जरुरत होती है बस...और वह सही सोच हममें से सबके पास है।”

सुयश के शब्दों से सभी प्रभावित हो गए। कुछ देर बाद सभी अगले द्वार में प्रवेश कर गये।


जारी रहेगा_____✍️
शांदार अपडेट❤❤
 

Raj_sharma

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#165.

अंधेरे का देवता:
(16.01.02, बुधवार, 13:50, मकोटा महल, सीनोर राज्य, अराका द्वीप)

लुफासा जब मेलाइट, रोजर और सुर्वया का परिचय पूछ रहा था, तभी मकोटा ने लुफासा को सिग्नल भेजकर अपने महल में बुलवा लिया था।

पर आज पूरा 1 दिन बीत जाने के बाद भी मकोटा, लुफासा से मिला नहीं था। लुफासा इंतजार करते-करते पूरी तरह से परेशान हो गया था, पर मकोटा से वह कुछ कह भी नहीं सकता था।

एक तो मकोटा महल में उन काले भेड़ियों के अलावा कोई था भी तो नहीं, तो लुफासा आखिर पूछता भी तो किससे? कि मकोटा को मिलने में और कितना समय लगेगा? बहरहाल लुफासा के पास और इंतजार करने के अलावा कुछ नहीं था।

आखिरकार एक लंबे इंतजार के बाद, उस कमरे का एक दरवाजा खुला और उसमें से मकोटा चलकर आता दिखाई दिया।

मकोटा को देख लुफासा ने राहत की साँस ली और झुककर मकोटा को अभिवादन किया।

“कल से तुम्हें बुलाने के बाद अचानक से पिरामिड में काम कुछ बढ़ गया था, इसलिये मिलने में कुछ ज्यादा ही समय लग गया। उम्मीद है तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई होगी?” मकोटा ने लुफासा को देखते हुए कहा।

लुफासा का मन किया कि इस मकोटा की गंजी खोपड़ी पर कोई डंडा फेंक कर मार दे, पर उसने अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए ‘ना ’ में अपना सिर हिला दिया।

मकोटा लुफासा के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोला- “देखो लुफासा, तुम अराका का भविष्य हो। मैं चाहता हूं कि तुम अराका ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी पर राज करो, बस इसी लिये मैं दिन-रात मेहनत कर रहा हूं। मेरी मेहनत को देखते हुए तुम्हारा भी हक बनता है कि तुम भी पूरे दिल से मेरा साथ दो।....और अब वैसे भी मेरे सपने को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता....मेरा मतलब है कि तुम्हें राजा बनने से।..... देखो लुफासा, मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें कई कार्य सौंपे, पर तुम इतनी शक्तियां होने के बाद भी, किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाये।

“जब मैंने ध्यान से सोचा तो मुझे लगा कि ये तुम्हारी शक्तियों का दोष नहीं है, सिर्फ तुम्हारी मानसिक स्थिति का दोष है। तुम अपने स्वयं के निर्णय लेने में भी बहुत असमंजस में दिखते हो। और ऐसा इसलिये है कि तुम्हें मैं ज्यादा कुछ नहीं बताता। पर आज मैंने तुम्हें सबकुछ बताने का निर्णय लिया है। जिससे आगे भविष्य में तुम अपने अच्छे-बुरे को पहचान सको। ये पहचान सको कि तुम्हारे साथ कौन खड़ा है? और तुम्हारे विरुद्ध कौन है?”

मकोटा के शब्द सुनकर लुफासा और सतर्क हो गया। वह समझ गया कि मकोटा उसके आस-पास कोई और जाल बुनना चाह रहा है।

“तुम मेरे साथ पिरामिड चलो, मैं आज तुम्हें सारा सच बताना चाहता हूं।” यह कहकर मकोटा कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया।

मकोटा को उठकर जाते देख लुफासा भी मकोटा के पीछे-पीछे चल दिया।

लुफासा जान गया था कि कुछ भी हो पर आज मकोटा के कई रहस्यों से पर्दा उठने वाला था।

कुछ ही देर में भेड़ियों के रथ पर बैठकर मकोटा और लुफासा सीनोर राज्य में स्थित, उन 4 पिरामिडों के पास पहुंच गये।

मकोटा ने अपना रथ पिरामिड नंबर 4 के पास रोका, यह देख लुफासा हैरान हो गया क्यों कि आज तक उसने किसी को भी पिरामिड नंबर 4 में जाते हुए नहीं देखा था? मकोटा, लुफासा को लेकर पिरामिड नंबर 4 में प्रवेश कर गया।

पिरामिड नंबर 4 के बीच में 2 ताबूत रखे थे। मकोटा लुफासा को लेकर उन्हीं ताबूतों के पास पहुंच गया।
उन ताबूतों का ऊपरी हिस्सा पारदर्शी शीशे का बना था। लुफासा आश्चर्य से उन ताबूतों को देखने लगा।

“तुम्हें पता है लुफासा कि इन ताबूतों में कौन है?” मकोटा ने लुफासा से पूछा।

लुफासा ने अपना सिर ना के अंदाज में हिला दिया।

“इन ताबूतों में ‘मुफासा और कागोशी’ की लाश हैं।” मकोटा ने कहा।

मकोटा के शब्द सुनते ही लुफासा पर बिजली सी गिर गई।

“आपका मतलब है कि इन ताबूतों में मेरे माता-पिता की लाशें हैं?” लुफासा ने शीशे के पास अपना चेहरा लाकर, अंदर झांकते हुए कहा।

“हां ये तुम्हारे माता-पिता की ही लाश हैं, जिन्हें आज से 22 वर्ष पहले सामरा राज्य के राजा कलाट ने मार दिया था।” मकोटा के शब्द रहस्य से भरे थे।

“कलाट ने?” लुफासा कलाट का नाम सुन आश्चर्य से भर उठा।

“चलो मैं तुम्हें शुरु से सुनाता हूं।” लग रहा था कि आज मकोटा सारे रहस्य खोलने के मूड में था-

“तुम्हें पता है कि सामरा और सीनोर के लोगों की औसत आयु 800 वर्ष होती है, पर दोनों ही राज्यों के नियम के अनुसार जिस व्यक्ति को राजा बनाया जाता है, उसे 600 वर्षों तक अपने राज्य पर शासन करना होता है, इस दौरान वह पुत्र या पुत्री उत्पन्न नहीं कर सकता। तो आज से 625 वर्ष पहले भी, इसी प्रकार से सीनोर का राजा मुफासा को और सामरा का राजा कलाट को बनाया गया। तुम तो जानते ही हो कि सामरा और सीनोर की दुश्मनी हजारों वर्षों से चली आ रही थी। इस दुश्मनी की वजह से दोनों ही अपनी शक्तियों को बढ़ाना चाहते थे।

“पर इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब सन् 1908 में मध्य साइबेरिया के जंगलों में एक बहुत बड़ा उल्का पिंड गिरा। मुफासा उस उल्का पिंड की जांच के लिये साइबेरिया जा पहुंचा। वहां पहुंचकर मुफासा को पता चला कि वह कोई उल्का पिंड नहीं, बल्कि बुद्ध ग्रह की एक यान रुपी प्रयोगशाला थी। जिसमें बुद्ध ग्रह के जीव, हरे कीड़े थे, जो कि पृथ्वी पर एक प्रयोग करने आ रहे थे, परंतु पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय, किसी प्रकार उनका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह साइबेरिया के जंगलों में जा गिरे।

“उन बुद्ध ग्रह के हरे कीड़ों ने मनुष्यों से तो अपना यान छिपा लिया, परंतु मुफासा से नहीं छिपा पाये। मुफासा को जब हरे कीड़ों के आने का उद्देश्य पता चला, तो वह उनकी मदद को तैयार हो गया, पर बदले में वह उनके देवता जैगन से मिलना चाहता था। हरे कीड़े सहर्ष ही इस बात पर तैयार हो गये। जैगन से मिलने के बाद यह तय हुआ कि मुफासा पृथ्वी पर हरे कीड़ों की शक्तियों के विस्तार के लिये पिरामिड बनवायेगा और बदले में जैगन उन्हें वैज्ञानिक शक्तियां देकर शक्तिशाली बनायेगा। अब शुरु हुआ धरती पर पिरामिडों का निर्माण। बुद्ध गह की मदद से धरती पर कुल 8 पिरामिडों का निर्माण हुआ, जिसमें 4 पिरामिड सीनोर राज्य में, 2 पिरामिड मैक्सिको में और 2 पिरामिड मिस्र में बनवाये गये।

“ सारा कार्य बहुत गुपचुप तरीके से किया गया। दरअसल हरे कीड़े मनुष्यों के शरीर की ऊर्जा खींचकर, अपना आकार बढ़ाना चाहते थे, जिससे वह हर प्रकार के वातावरण में जिंदा रह सकें। इस कार्य की
शुरुआत के लिये जब जैगन पृथ्वी पर आया, तब तुम और वीनस 2-3 साल के थे। मुफासा का राजा होने का कार्यकाल अब खत्म हो चुका था। मुफासा ने जैगन से काला मोती प्राप्त करने के लिये मदद मांगी, तभी पता नहीं कैसे धरा, मयूर और कलाट ने हमारे इस पिरामिड पर हमला कर दिया।

"जहां एक ओर धरा ने अपनी धरा शक्ति से जैगन को पृथ्वी से बांध दिया, वहीं दूसरी ओर अराका द्वीप के नियमों के विपरीत जाने की वजह से कलाट ने तुम्हारे पिता और माता को मार दिया। सभी के यहां से जाने के बाद, मैंने तुम्हारे माता और पिता के शरीर पर एक रसायन का लेप लगाकर इस ताबूत में रख दिया। मुझे पता था कि जब जैगन जागेगा, तो अपने गुरु ‘कुवान’ की मदद से तुम्हारे माता-पिता को फिर से जिंदा कर देगा क्यों कि जैगन की अंधेरी शक्तियां भी कुवान की ही देन थीं। पर जब 15 वर्षों के बाद भी जैगन नहीं जागा, तो हमने जैगन के सेवक गोंजालो के कहने से, स्वयं अदृश्य शक्तियों के स्वामी कुवान की साधना करनी शुरु कर दी।

“ कुवान के आशीर्वाद से हमें भेड़ियों की फौज और मेरा सेवक वुल्फा मिला। अब हम कुवान के आदेशानुसार काला मोती को प्राप्त करने के लिये, दूसरे पिरामिड से तिलिस्मा के अंदर तक एक सुरंग बना रहे हैं, जिससे हम बिना तिलिस्मा में प्रवेश किये ही काला मोती को प्राप्त कर लें और तुम्हारे माता-पिता को जिन्दा करके कलाट से बदला ले सकें।” यह कहकर मकोटा कुछ देर के लिये रुक गया और ध्यान से लुफासा के चेहरे को देखने लगा।

लुफासा मकोटा की बातें सुनकर बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था, यह देख मकोटा फिर से बोल उठा-

“अगर तुम्हें सबकुछ समझ आ गया हो और अगर तुम मेरी बात से सहमत हो तो मुझे बताओ, तब मैं इसके आगे की बात बताऊं?”

“पहले मुझे ये बताये कि ये सारी बातें सनूरा को क्यों नहीं पता ? जबकि वह तो पिछले 600 वर्षों से सीनोर राज्य की सेनापति है।” लुफासा ने अपना शक प्रकट करते हुए कहा।

“मुफासा का साइबेरिया जाना और जैगन से मिलकर पिरामिड बनवाना बहुत ही गुप्त रखा गया था, इस बात का पता तो तुम्हारी माँ कागोशी को भी नहीं था, फिर सनूरा को कैसे होता? और अब रही बात कलाट के तुम्हारे माता-पिता को मारने की बात, तो उस समय सनूरा किसी कार्य से अराका द्वीप से बाहर गई थी? उसके आने के बाद हमने कलाट की बात उसे इसलिये नहीं बताई कि यह बात सुनकर कहीं तैश में आकर सामरा राज्य पर हमला ना बोल दे और उस समय तक सामरा राज्य की शक्तियां हमसे ज्यादा थीं, इसलिये मैं बस समय आने का इंतजार कर रहा था, जिससे उचित समय पर मैं ये सारी बातें तुम्हें स्वयं बता सकूं।” मकोटा ने कहा।

“अब मुझे ये बताइये कि कलाट ने मेरी माँ को क्यों मारा, उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?” लुफासा ने क्रोध में आते हुए कहा।

“कलाट ने जब तलवार से तुम्हारे पिता पर हमला किया, उस समय तुम्हारी माँ बीच में आ गई, जिससे वह भी मारी गई।” मकोटा ने कहा।

“जैगन के इस प्रयोग से तो पूरी इंसानियत खतरे में पड़ रही थी, आप लोगों ने जैगन की बात मानने ये पहले ये क्यों नहीं सोचा?” लुफासा ने कहा।

“मनुष्य पहले भी अटलांटियन के आगे कुछ नहीं थे, इसलिये अटलांटियन को कभी भी मनुष्यों की चिंता नहीं रही।....ऐसा मैं नहीं ...तुम्हारे पिता का कहना था। मैं तो बस उनकी आज्ञा का पालन कर रहा था।” मकोटा ने उदास होते हुए कहा।

“ठीक है, अब आप मुझसे क्या चाहते हैं?” लुफासा ने कहा।

“चलो मैं पहले तुम्हें बाकी के पिरामिड दिखाता हूं, फिर कहीं बैठकर बात करेंगे।” यह कहकर मकोटा तीसरे पिरामिड की ओर बढ़ गया।

तीसरे पिरामिड में एक विशाल भेड़िया मानव की मूर्ति लगी थी, जिसके पीछे की ओर एक काँच की लिफ्ट लगी थी। मकोटा उसी लिफ्ट में बैठा कर, लुफासा को जमीन के नीचे की ओर ले गया।

यहां चारो ओर लगभग 20 काँच के कैप्सूल दिखाई दे रहे थे, जिसमें बहुत से विचित्र जीव योद्धा खड़े दिखाई दे रहे थे, परंतु वह सभी निष्क्रिय थे।

“ये सभी योद्धा अलग-अलग जीवों से मिलाकर बनाये गये हैं, जिसे बाद में कुवान अपनी शक्तियों से जीवित करेंगे। यह सभी योद्धा हमें सामरा राज्य से युद्ध में जीत दिलायेंगे।” यह कहकर मकोटा लुफासा को वहां से भी लेकर दूसरे पिरामिड की ओर चल दिया।

यह पिरामिड पिछले 2 पिरामिडों से बड़ा था। दूसरे पिरामिड के एक कमरे में कुछ हरे कीड़े जमीन में सुरंग खोद रहे थे।

एक कमरे में गोंजालो जख्मी हालत में लेटा था, और हरे कीड़े उसका इलाज कर रहे थे।

“यह गोंजालो कैसे जख्मी हो गया, इसके पास तो बहुत सी शक्तियां थीं।” लुफासा ने मकोटा से पूछा।

“आजकल समय ही खराब है...मैंने तुम्हें जिस देवी शलाका से मिलाया था, वह भी झूठी निकली और मेरी कई शक्तियां लेकर भाग गई। उधर गोंजालो जब सामरा राज्य मे छिपकर खबर लाने गया था, तो किसी अज्ञात इंसान ने गोंजालो पर महाशक्ति से हमला कर दिया, बहुत मुश्किल से गोंजालो बचकर वापस आ पाया है।”

मकोटा ने कहा- “मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा कि एक इंसान के पास महाशक्ति आयी कैसे?.... उधर गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से टकरा गया, जिससे तिलिस्मा का कोई जीव भी भाग निकला, पर हम जैसे ही उस द्वार से घुसने चले, वह द्वार पुनः बंद हो गया।”

“तिलिस्मा का ऊर्जा द्वार?” लुफासा ने हैरान होते हुए कहा।

“हां, हमें भी नहीं मालूम था कि पिरमिड के पीछे तिलिस्मा का कोई छिपा ऊर्जा द्वार है, नहीं तो हम पहले ही उस द्वार से छिपकर तिलिस्मा में प्रवेश कर जाते, पर अब तो वह भी बंद हो गया। अब तो सुरंग ही एक
मात्र रास्ता है, अगर वहां भी कोई अड़चन नहीं आयी तो?” मकोटा ने कहा- “बस एक ही चीज हमारे साथ अच्छी हुई है.....ना जाने कैसे धरा शक्ति ने काम करना बंद कर दिया जिससे जैगन होश में आ गया है....
अब अगर तुम और सनूरा भी दिल से हमारा साथ देना शुरु कर दो, तो फिर हम जल्दी ही तुम्हारे माता-पिता को भी जिंदा कर लेंगे और फिर जीत हमारी ही होगी।”

“मैं तो पहले भी आपका साथ दे रहा था, फिर भी मैं आपके हर कार्य को करने के लिये अब अपनी जी-जान लगा दूंगा। आप बस आदेश करें मांत्रिक” लुफासा ने कहा और मकोटा के सामने अपने घुटने टेक कर सिर झुका दिया।

मकोटा ने रहस्य बताने के बहाने लुफासा को अपनी ओर करना चाहा था, लुफासा इस बात को अच्छी तरह से समझ रहा था, पर फिर भी अपने माता-पिता के नाम पर, वह भी मकोटा का साथ देने को मजबूर था।

लुफासा का यह रुप देख मक्कार मकोटा मुस्कुरा दिया....आखिर उसकी चाल कामया ब हो ही गई।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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shefali character really good 👍🏼

New update

Bhai sach bolu to story to kal night se lekar parso tak khatam kar sakta hu par it's so interesting ki har part ko enjoy kar ke yaad rakh kar age badh raha hu bura mat mana dost

बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

adhbut aur akalpaniya ....superb updates Sharma ji.:perfect::perfect::love2:


Oh toh kahani ka villan Makota :roll3: hai! Poore aarka 🏝️ dweep par raaj karne ke liye usne Jaigan 🐛 ka sahara liya.

Aakruti 🤵‍♀️ ko Shalaka 👸 banakar usne Lufasa 🦁 aur Sanura 🐈‍⬛ ko bhi behka diya.

Supreme 🛳️ ke Bermuda Triangle mei aane ke baad jo bhi musibate aayi woh kahina kahi usi ke wajah se hai.

Supreme par se sabhi laasho ke gayab hone ka raaz toh woh keede 🐛 hi thay.

Lekin Lufasa 🐀 aur Sanura 🐈‍⬛ ne Aakruti aur Makota ki baate sunn hi li. Shayad ab ab woh sahi raasta chune.

Iss Aarka / Atlantis ke chakkar mei hum Supreme par hue sab se pehle khoon ki baat toh bhool hi gaye Aur kyo Aslam ne jahaaz ko Bermuda Triangle ki taraf moda! Aur Woh Vega ki kahani bhi wahi chhut gayi.
Lekin aaj ke iss update mei kaafi sawaalo ke jawaab mil hi gaye. :cool3:





I don't know ,aap padhakar batana kaisi lagi ,

Awesome update

Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

उचित समय आने पर, अवश्य ही

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

BAHUT MAST STOTY

सुयश और शलाका का 5000 वर्ष बाद मिलन
शेफाली की शरारती मांग
अच्छा और चटपटा अपडेट

Radhe Radhe guruji,, break pe chala gya tha uske baad is id ka password issue ho gya tha so sign in nahi tha itne time se ab wapas aaya hu to dubara se updates ki demand rakhunga...waise stock to abhi full hai kuch time ke liye so read karta hu

Shandaar update and nice story

शानदार अपडेट राज भाई

O teri, kya se kya soch lete ho bhai??
Wo khopdi jo suyesh jhopdi se lekar aaya tha , uska ye upyog hoga kisi ne socha bhi nahi hoga? 😱 octopus ko bhi lapeta aur kankaal ko bhi amazing tarike se niptaya aapne, ab sabhi log agle padaav ki or badh gaye hain, aage kya surprise hai ye dekhne wali baat hogi 🤔 mind blowing Update bhai ji 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💥💥💥💥👍👌🏻👌🏻💥💥💥

intezaar rahgea....

अद्भुत अंक भाई

फिर से एक अप्रतिम रोमांचक और अद्भुत अविस्मरणीय मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अब स्टॅचू ऑफ लिबर्टी की मुर्ती पर तिलिस्मा का नया खेल शुरु हो गया
खैर देखते हैं आगे
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा

Outstanding update and awesome story and excellent writing

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

Shaandar update

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Chemistry, Physics sabka istemaal kar rahi he Suyash and Party

Aakhirkar Statue of Liberty wala dwar bhi paar ho hi gaya............

Ab naye obstacle unka intezar kar rahe he...........

Keep posting Bro

Wonderful update brother, aapne Chemistry ke rule ko achhe se follow kiya hai, let's see how things unfold ahead.

lovely update. alex ka majakiya andaj sabko hansne par majbur kar hi deta hai .
sabhi kadiya hal karne ke baad khatra tala nahi tha par suyash ne sahi waqt pe dimag lagake dusri murti ko nasht kar diya .

nice update

Nice update.....

Hamesha ki tarah lajawab update

Bhut hi badhiya update Bhai
Sabhi ne milkar is statue of Liberty vali problem ko lagbhag aadha solve kar liya hai

Bhut hi jabardast update bhai
Suyash ne apni suj bhuj se sabhi ki jaan bacha li
Aur is dvar ko bhi paar kar liya

यह वाला द्वार अधिक कठिन था।
लेकिन पूरे दल की सूझ बूझ से इसके पार जाया जा सका।

सुयश कप्तान तो दो कौड़ी का था, लेकिन भूतपूर्व आर्यन के अवतार के रूप में उसके अंदर वही प्रतिभा है।
वैसे एक बात पर गौर दें तो हम यह देखते हैं कि शेफ़ाली को अगर छोड़ दें, तो बाकी सुप्रीम के बचे हुए यात्रियों में जो ये सभी बच गए हैं, उनके व्यवहार में बहुत परिवर्तन आ गए हैं।
शेफ़ाली स्वयं भी अब देख सकती है।
अब इनमें से किसी का भी वापस भू-लोक में जा कर सामान्य जीवन जीना असंभव है।
मतलब यह कि भविष्य में जब तिलिस्मा टूट जाएगा और वार ऑफ़ द वर्ल्ड्स भी जीत लिया जाएगा, तब इनका क्या हश्र होगा!
क्या करेंगे ये लोग? यहीं इस द्वीप पर रहेंगे? मानव लोक इनके रहने योग्य तो नहीं रह गया है।
हाँ हाँ - बहुत बहुत आगे का सोच रहा हूँ, लेकिन यह प्रश्न दिमाग में आए बग़ैर नहीं रह रहा है।

हमेशा की ही तरह - बेहद उम्दा लेखन। भौतिकी और रसायन के कई सिद्धांतों का प्रयोग हुआ इस अपडेट में!
न केवल मनोरंजन, बल्कि ज्ञानवर्धन का भी उत्तम साधन है यह लेख!

अति उत्तम 👏 👏 ♥️

मेरा तो हमेशा से मानना रहा है कि पाठक की संख्या मायने नहीं रखती; कहानी को कितनी रुचि के साथ पाठक पढ़ते हैं, वही मायने रखता है।
अगर एक व्यक्ति भी कहानी पढ़ रहा है और लेखक जितना ही उत्साहित है उस कहानी को लेकर, तो यही लेखक की असली जीत है।
सैकड़ों लाइक, व्यूज़ और कमेंट वाली कहानी में भी सिर्फ 8- 10 ही ऐसे पाठक होते हैं जो ध्यान से कहानी पढ़ते हैं ,बाकी सब भीड़-चाल वाले ,नाइस अपडेट , वेटिंग फॉर अपडेट लिखने वाले पाठक होते हैं।

रीडर की क्वांटिटी नहीं, रीडर्स की क्वालिटी को तवज्जो देना चाहिए।

हमेशा कोशिश यही रहती है कि जिन भी लेखक की कहानी पढ़ूँ, उस पर प्रतिक्रिया दूँ।

Maza aa gya bhai

Waiting for NeXT update

शांदार अपडेट❤❤

अपडेट पोस्ट कर दिया है दोस्तों, आप सभी की रिप्लाई का इंतजार रहेगा।:dost:
 

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
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#165.

अंधेरे का देवता:
(16.01.02, बुधवार, 13:50, मकोटा महल, सीनोर राज्य, अराका द्वीप)

लुफासा जब मेलाइट, रोजर और सुर्वया का परिचय पूछ रहा था, तभी मकोटा ने लुफासा को सिग्नल भेजकर अपने महल में बुलवा लिया था।

पर आज पूरा 1 दिन बीत जाने के बाद भी मकोटा, लुफासा से मिला नहीं था। लुफासा इंतजार करते-करते पूरी तरह से परेशान हो गया था, पर मकोटा से वह कुछ कह भी नहीं सकता था।

एक तो मकोटा महल में उन काले भेड़ियों के अलावा कोई था भी तो नहीं, तो लुफासा आखिर पूछता भी तो किससे? कि मकोटा को मिलने में और कितना समय लगेगा? बहरहाल लुफासा के पास और इंतजार करने के अलावा कुछ नहीं था।

आखिरकार एक लंबे इंतजार के बाद, उस कमरे का एक दरवाजा खुला और उसमें से मकोटा चलकर आता दिखाई दिया।

मकोटा को देख लुफासा ने राहत की साँस ली और झुककर मकोटा को अभिवादन किया।

“कल से तुम्हें बुलाने के बाद अचानक से पिरामिड में काम कुछ बढ़ गया था, इसलिये मिलने में कुछ ज्यादा ही समय लग गया। उम्मीद है तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई होगी?” मकोटा ने लुफासा को देखते हुए कहा।

लुफासा का मन किया कि इस मकोटा की गंजी खोपड़ी पर कोई डंडा फेंक कर मार दे, पर उसने अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए ‘ना ’ में अपना सिर हिला दिया।

मकोटा लुफासा के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोला- “देखो लुफासा, तुम अराका का भविष्य हो। मैं चाहता हूं कि तुम अराका ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी पर राज करो, बस इसी लिये मैं दिन-रात मेहनत कर रहा हूं। मेरी मेहनत को देखते हुए तुम्हारा भी हक बनता है कि तुम भी पूरे दिल से मेरा साथ दो।....और अब वैसे भी मेरे सपने को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता....मेरा मतलब है कि तुम्हें राजा बनने से।..... देखो लुफासा, मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें कई कार्य सौंपे, पर तुम इतनी शक्तियां होने के बाद भी, किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाये।

“जब मैंने ध्यान से सोचा तो मुझे लगा कि ये तुम्हारी शक्तियों का दोष नहीं है, सिर्फ तुम्हारी मानसिक स्थिति का दोष है। तुम अपने स्वयं के निर्णय लेने में भी बहुत असमंजस में दिखते हो। और ऐसा इसलिये है कि तुम्हें मैं ज्यादा कुछ नहीं बताता। पर आज मैंने तुम्हें सबकुछ बताने का निर्णय लिया है। जिससे आगे भविष्य में तुम अपने अच्छे-बुरे को पहचान सको। ये पहचान सको कि तुम्हारे साथ कौन खड़ा है? और तुम्हारे विरुद्ध कौन है?”

मकोटा के शब्द सुनकर लुफासा और सतर्क हो गया। वह समझ गया कि मकोटा उसके आस-पास कोई और जाल बुनना चाह रहा है।

“तुम मेरे साथ पिरामिड चलो, मैं आज तुम्हें सारा सच बताना चाहता हूं।” यह कहकर मकोटा कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया।

मकोटा को उठकर जाते देख लुफासा भी मकोटा के पीछे-पीछे चल दिया।

लुफासा जान गया था कि कुछ भी हो पर आज मकोटा के कई रहस्यों से पर्दा उठने वाला था।

कुछ ही देर में भेड़ियों के रथ पर बैठकर मकोटा और लुफासा सीनोर राज्य में स्थित, उन 4 पिरामिडों के पास पहुंच गये।

मकोटा ने अपना रथ पिरामिड नंबर 4 के पास रोका, यह देख लुफासा हैरान हो गया क्यों कि आज तक उसने किसी को भी पिरामिड नंबर 4 में जाते हुए नहीं देखा था? मकोटा, लुफासा को लेकर पिरामिड नंबर 4 में प्रवेश कर गया।

पिरामिड नंबर 4 के बीच में 2 ताबूत रखे थे। मकोटा लुफासा को लेकर उन्हीं ताबूतों के पास पहुंच गया।
उन ताबूतों का ऊपरी हिस्सा पारदर्शी शीशे का बना था। लुफासा आश्चर्य से उन ताबूतों को देखने लगा।

“तुम्हें पता है लुफासा कि इन ताबूतों में कौन है?” मकोटा ने लुफासा से पूछा।

लुफासा ने अपना सिर ना के अंदाज में हिला दिया।

“इन ताबूतों में ‘मुफासा और कागोशी’ की लाश हैं।” मकोटा ने कहा।

मकोटा के शब्द सुनते ही लुफासा पर बिजली सी गिर गई।

“आपका मतलब है कि इन ताबूतों में मेरे माता-पिता की लाशें हैं?” लुफासा ने शीशे के पास अपना चेहरा लाकर, अंदर झांकते हुए कहा।

“हां ये तुम्हारे माता-पिता की ही लाश हैं, जिन्हें आज से 22 वर्ष पहले सामरा राज्य के राजा कलाट ने मार दिया था।” मकोटा के शब्द रहस्य से भरे थे।

“कलाट ने?” लुफासा कलाट का नाम सुन आश्चर्य से भर उठा।

“चलो मैं तुम्हें शुरु से सुनाता हूं।” लग रहा था कि आज मकोटा सारे रहस्य खोलने के मूड में था-

“तुम्हें पता है कि सामरा और सीनोर के लोगों की औसत आयु 800 वर्ष होती है, पर दोनों ही राज्यों के नियम के अनुसार जिस व्यक्ति को राजा बनाया जाता है, उसे 600 वर्षों तक अपने राज्य पर शासन करना होता है, इस दौरान वह पुत्र या पुत्री उत्पन्न नहीं कर सकता। तो आज से 625 वर्ष पहले भी, इसी प्रकार से सीनोर का राजा मुफासा को और सामरा का राजा कलाट को बनाया गया। तुम तो जानते ही हो कि सामरा और सीनोर की दुश्मनी हजारों वर्षों से चली आ रही थी। इस दुश्मनी की वजह से दोनों ही अपनी शक्तियों को बढ़ाना चाहते थे।

“पर इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब सन् 1908 में मध्य साइबेरिया के जंगलों में एक बहुत बड़ा उल्का पिंड गिरा। मुफासा उस उल्का पिंड की जांच के लिये साइबेरिया जा पहुंचा। वहां पहुंचकर मुफासा को पता चला कि वह कोई उल्का पिंड नहीं, बल्कि बुद्ध ग्रह की एक यान रुपी प्रयोगशाला थी। जिसमें बुद्ध ग्रह के जीव, हरे कीड़े थे, जो कि पृथ्वी पर एक प्रयोग करने आ रहे थे, परंतु पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय, किसी प्रकार उनका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह साइबेरिया के जंगलों में जा गिरे।

“उन बुद्ध ग्रह के हरे कीड़ों ने मनुष्यों से तो अपना यान छिपा लिया, परंतु मुफासा से नहीं छिपा पाये। मुफासा को जब हरे कीड़ों के आने का उद्देश्य पता चला, तो वह उनकी मदद को तैयार हो गया, पर बदले में वह उनके देवता जैगन से मिलना चाहता था। हरे कीड़े सहर्ष ही इस बात पर तैयार हो गये। जैगन से मिलने के बाद यह तय हुआ कि मुफासा पृथ्वी पर हरे कीड़ों की शक्तियों के विस्तार के लिये पिरामिड बनवायेगा और बदले में जैगन उन्हें वैज्ञानिक शक्तियां देकर शक्तिशाली बनायेगा। अब शुरु हुआ धरती पर पिरामिडों का निर्माण। बुद्ध गह की मदद से धरती पर कुल 8 पिरामिडों का निर्माण हुआ, जिसमें 4 पिरामिड सीनोर राज्य में, 2 पिरामिड मैक्सिको में और 2 पिरामिड मिस्र में बनवाये गये।

“ सारा कार्य बहुत गुपचुप तरीके से किया गया। दरअसल हरे कीड़े मनुष्यों के शरीर की ऊर्जा खींचकर, अपना आकार बढ़ाना चाहते थे, जिससे वह हर प्रकार के वातावरण में जिंदा रह सकें। इस कार्य की
शुरुआत के लिये जब जैगन पृथ्वी पर आया, तब तुम और वीनस 2-3 साल के थे। मुफासा का राजा होने का कार्यकाल अब खत्म हो चुका था। मुफासा ने जैगन से काला मोती प्राप्त करने के लिये मदद मांगी, तभी पता नहीं कैसे धरा, मयूर और कलाट ने हमारे इस पिरामिड पर हमला कर दिया।

"जहां एक ओर धरा ने अपनी धरा शक्ति से जैगन को पृथ्वी से बांध दिया, वहीं दूसरी ओर अराका द्वीप के नियमों के विपरीत जाने की वजह से कलाट ने तुम्हारे पिता और माता को मार दिया। सभी के यहां से जाने के बाद, मैंने तुम्हारे माता और पिता के शरीर पर एक रसायन का लेप लगाकर इस ताबूत में रख दिया। मुझे पता था कि जब जैगन जागेगा, तो अपने गुरु ‘कुवान’ की मदद से तुम्हारे माता-पिता को फिर से जिंदा कर देगा क्यों कि जैगन की अंधेरी शक्तियां भी कुवान की ही देन थीं। पर जब 15 वर्षों के बाद भी जैगन नहीं जागा, तो हमने जैगन के सेवक गोंजालो के कहने से, स्वयं अदृश्य शक्तियों के स्वामी कुवान की साधना करनी शुरु कर दी।

“ कुवान के आशीर्वाद से हमें भेड़ियों की फौज और मेरा सेवक वुल्फा मिला। अब हम कुवान के आदेशानुसार काला मोती को प्राप्त करने के लिये, दूसरे पिरामिड से तिलिस्मा के अंदर तक एक सुरंग बना रहे हैं, जिससे हम बिना तिलिस्मा में प्रवेश किये ही काला मोती को प्राप्त कर लें और तुम्हारे माता-पिता को जिन्दा करके कलाट से बदला ले सकें।” यह कहकर मकोटा कुछ देर के लिये रुक गया और ध्यान से लुफासा के चेहरे को देखने लगा।

लुफासा मकोटा की बातें सुनकर बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था, यह देख मकोटा फिर से बोल उठा-

“अगर तुम्हें सबकुछ समझ आ गया हो और अगर तुम मेरी बात से सहमत हो तो मुझे बताओ, तब मैं इसके आगे की बात बताऊं?”

“पहले मुझे ये बताये कि ये सारी बातें सनूरा को क्यों नहीं पता ? जबकि वह तो पिछले 600 वर्षों से सीनोर राज्य की सेनापति है।” लुफासा ने अपना शक प्रकट करते हुए कहा।

“मुफासा का साइबेरिया जाना और जैगन से मिलकर पिरामिड बनवाना बहुत ही गुप्त रखा गया था, इस बात का पता तो तुम्हारी माँ कागोशी को भी नहीं था, फिर सनूरा को कैसे होता? और अब रही बात कलाट के तुम्हारे माता-पिता को मारने की बात, तो उस समय सनूरा किसी कार्य से अराका द्वीप से बाहर गई थी? उसके आने के बाद हमने कलाट की बात उसे इसलिये नहीं बताई कि यह बात सुनकर कहीं तैश में आकर सामरा राज्य पर हमला ना बोल दे और उस समय तक सामरा राज्य की शक्तियां हमसे ज्यादा थीं, इसलिये मैं बस समय आने का इंतजार कर रहा था, जिससे उचित समय पर मैं ये सारी बातें तुम्हें स्वयं बता सकूं।” मकोटा ने कहा।

“अब मुझे ये बताइये कि कलाट ने मेरी माँ को क्यों मारा, उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?” लुफासा ने क्रोध में आते हुए कहा।

“कलाट ने जब तलवार से तुम्हारे पिता पर हमला किया, उस समय तुम्हारी माँ बीच में आ गई, जिससे वह भी मारी गई।” मकोटा ने कहा।

“जैगन के इस प्रयोग से तो पूरी इंसानियत खतरे में पड़ रही थी, आप लोगों ने जैगन की बात मानने ये पहले ये क्यों नहीं सोचा?” लुफासा ने कहा।

“मनुष्य पहले भी अटलांटियन के आगे कुछ नहीं थे, इसलिये अटलांटियन को कभी भी मनुष्यों की चिंता नहीं रही।....ऐसा मैं नहीं ...तुम्हारे पिता का कहना था। मैं तो बस उनकी आज्ञा का पालन कर रहा था।” मकोटा ने उदास होते हुए कहा।

“ठीक है, अब आप मुझसे क्या चाहते हैं?” लुफासा ने कहा।

“चलो मैं पहले तुम्हें बाकी के पिरामिड दिखाता हूं, फिर कहीं बैठकर बात करेंगे।” यह कहकर मकोटा तीसरे पिरामिड की ओर बढ़ गया।

तीसरे पिरामिड में एक विशाल भेड़िया मानव की मूर्ति लगी थी, जिसके पीछे की ओर एक काँच की लिफ्ट लगी थी। मकोटा उसी लिफ्ट में बैठा कर, लुफासा को जमीन के नीचे की ओर ले गया।

यहां चारो ओर लगभग 20 काँच के कैप्सूल दिखाई दे रहे थे, जिसमें बहुत से विचित्र जीव योद्धा खड़े दिखाई दे रहे थे, परंतु वह सभी निष्क्रिय थे।

“ये सभी योद्धा अलग-अलग जीवों से मिलाकर बनाये गये हैं, जिसे बाद में कुवान अपनी शक्तियों से जीवित करेंगे। यह सभी योद्धा हमें सामरा राज्य से युद्ध में जीत दिलायेंगे।” यह कहकर मकोटा लुफासा को वहां से भी लेकर दूसरे पिरामिड की ओर चल दिया।

यह पिरामिड पिछले 2 पिरामिडों से बड़ा था। दूसरे पिरामिड के एक कमरे में कुछ हरे कीड़े जमीन में सुरंग खोद रहे थे।

एक कमरे में गोंजालो जख्मी हालत में लेटा था, और हरे कीड़े उसका इलाज कर रहे थे।

“यह गोंजालो कैसे जख्मी हो गया, इसके पास तो बहुत सी शक्तियां थीं।” लुफासा ने मकोटा से पूछा।

“आजकल समय ही खराब है...मैंने तुम्हें जिस देवी शलाका से मिलाया था, वह भी झूठी निकली और मेरी कई शक्तियां लेकर भाग गई। उधर गोंजालो जब सामरा राज्य मे छिपकर खबर लाने गया था, तो किसी अज्ञात इंसान ने गोंजालो पर महाशक्ति से हमला कर दिया, बहुत मुश्किल से गोंजालो बचकर वापस आ पाया है।”

मकोटा ने कहा- “मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा कि एक इंसान के पास महाशक्ति आयी कैसे?.... उधर गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से टकरा गया, जिससे तिलिस्मा का कोई जीव भी भाग निकला, पर हम जैसे ही उस द्वार से घुसने चले, वह द्वार पुनः बंद हो गया।”

“तिलिस्मा का ऊर्जा द्वार?” लुफासा ने हैरान होते हुए कहा।

“हां, हमें भी नहीं मालूम था कि पिरमिड के पीछे तिलिस्मा का कोई छिपा ऊर्जा द्वार है, नहीं तो हम पहले ही उस द्वार से छिपकर तिलिस्मा में प्रवेश कर जाते, पर अब तो वह भी बंद हो गया। अब तो सुरंग ही एक
मात्र रास्ता है, अगर वहां भी कोई अड़चन नहीं आयी तो?” मकोटा ने कहा- “बस एक ही चीज हमारे साथ अच्छी हुई है.....ना जाने कैसे धरा शक्ति ने काम करना बंद कर दिया जिससे जैगन होश में आ गया है....
अब अगर तुम और सनूरा भी दिल से हमारा साथ देना शुरु कर दो, तो फिर हम जल्दी ही तुम्हारे माता-पिता को भी जिंदा कर लेंगे और फिर जीत हमारी ही होगी।”

“मैं तो पहले भी आपका साथ दे रहा था, फिर भी मैं आपके हर कार्य को करने के लिये अब अपनी जी-जान लगा दूंगा। आप बस आदेश करें मांत्रिक” लुफासा ने कहा और मकोटा के सामने अपने घुटने टेक कर सिर झुका दिया।

मकोटा ने रहस्य बताने के बहाने लुफासा को अपनी ओर करना चाहा था, लुफासा इस बात को अच्छी तरह से समझ रहा था, पर फिर भी अपने माता-पिता के नाम पर, वह भी मकोटा का साथ देने को मजबूर था।

लुफासा का यह रुप देख मक्कार मकोटा मुस्कुरा दिया....आखिर उसकी चाल कामया ब हो ही गई।


जारी रहेगा_____✍️
Mujhe nahi lagta hai ki Lufasha ke mata pita ki hatya Kalat ne ki hogi, khair yadi Makota ne jaise kaha hai wo sach bhi hai toh Kalat ka koi dosh nazar nahi aa raha hai isme, khair wonderful update brother.
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
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16,329
159
#165.

अंधेरे का देवता:
(16.01.02, बुधवार, 13:50, मकोटा महल, सीनोर राज्य, अराका द्वीप)

लुफासा जब मेलाइट, रोजर और सुर्वया का परिचय पूछ रहा था, तभी मकोटा ने लुफासा को सिग्नल भेजकर अपने महल में बुलवा लिया था।

पर आज पूरा 1 दिन बीत जाने के बाद भी मकोटा, लुफासा से मिला नहीं था। लुफासा इंतजार करते-करते पूरी तरह से परेशान हो गया था, पर मकोटा से वह कुछ कह भी नहीं सकता था।

एक तो मकोटा महल में उन काले भेड़ियों के अलावा कोई था भी तो नहीं, तो लुफासा आखिर पूछता भी तो किससे? कि मकोटा को मिलने में और कितना समय लगेगा? बहरहाल लुफासा के पास और इंतजार करने के अलावा कुछ नहीं था।

आखिरकार एक लंबे इंतजार के बाद, उस कमरे का एक दरवाजा खुला और उसमें से मकोटा चलकर आता दिखाई दिया।

मकोटा को देख लुफासा ने राहत की साँस ली और झुककर मकोटा को अभिवादन किया।

“कल से तुम्हें बुलाने के बाद अचानक से पिरामिड में काम कुछ बढ़ गया था, इसलिये मिलने में कुछ ज्यादा ही समय लग गया। उम्मीद है तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई होगी?” मकोटा ने लुफासा को देखते हुए कहा।

लुफासा का मन किया कि इस मकोटा की गंजी खोपड़ी पर कोई डंडा फेंक कर मार दे, पर उसने अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए ‘ना ’ में अपना सिर हिला दिया।

मकोटा लुफासा के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोला- “देखो लुफासा, तुम अराका का भविष्य हो। मैं चाहता हूं कि तुम अराका ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी पर राज करो, बस इसी लिये मैं दिन-रात मेहनत कर रहा हूं। मेरी मेहनत को देखते हुए तुम्हारा भी हक बनता है कि तुम भी पूरे दिल से मेरा साथ दो।....और अब वैसे भी मेरे सपने को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता....मेरा मतलब है कि तुम्हें राजा बनने से।..... देखो लुफासा, मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें कई कार्य सौंपे, पर तुम इतनी शक्तियां होने के बाद भी, किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाये।

“जब मैंने ध्यान से सोचा तो मुझे लगा कि ये तुम्हारी शक्तियों का दोष नहीं है, सिर्फ तुम्हारी मानसिक स्थिति का दोष है। तुम अपने स्वयं के निर्णय लेने में भी बहुत असमंजस में दिखते हो। और ऐसा इसलिये है कि तुम्हें मैं ज्यादा कुछ नहीं बताता। पर आज मैंने तुम्हें सबकुछ बताने का निर्णय लिया है। जिससे आगे भविष्य में तुम अपने अच्छे-बुरे को पहचान सको। ये पहचान सको कि तुम्हारे साथ कौन खड़ा है? और तुम्हारे विरुद्ध कौन है?”

मकोटा के शब्द सुनकर लुफासा और सतर्क हो गया। वह समझ गया कि मकोटा उसके आस-पास कोई और जाल बुनना चाह रहा है।

“तुम मेरे साथ पिरामिड चलो, मैं आज तुम्हें सारा सच बताना चाहता हूं।” यह कहकर मकोटा कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया।

मकोटा को उठकर जाते देख लुफासा भी मकोटा के पीछे-पीछे चल दिया।

लुफासा जान गया था कि कुछ भी हो पर आज मकोटा के कई रहस्यों से पर्दा उठने वाला था।

कुछ ही देर में भेड़ियों के रथ पर बैठकर मकोटा और लुफासा सीनोर राज्य में स्थित, उन 4 पिरामिडों के पास पहुंच गये।

मकोटा ने अपना रथ पिरामिड नंबर 4 के पास रोका, यह देख लुफासा हैरान हो गया क्यों कि आज तक उसने किसी को भी पिरामिड नंबर 4 में जाते हुए नहीं देखा था? मकोटा, लुफासा को लेकर पिरामिड नंबर 4 में प्रवेश कर गया।

पिरामिड नंबर 4 के बीच में 2 ताबूत रखे थे। मकोटा लुफासा को लेकर उन्हीं ताबूतों के पास पहुंच गया।
उन ताबूतों का ऊपरी हिस्सा पारदर्शी शीशे का बना था। लुफासा आश्चर्य से उन ताबूतों को देखने लगा।

“तुम्हें पता है लुफासा कि इन ताबूतों में कौन है?” मकोटा ने लुफासा से पूछा।

लुफासा ने अपना सिर ना के अंदाज में हिला दिया।

“इन ताबूतों में ‘मुफासा और कागोशी’ की लाश हैं।” मकोटा ने कहा।

मकोटा के शब्द सुनते ही लुफासा पर बिजली सी गिर गई।

“आपका मतलब है कि इन ताबूतों में मेरे माता-पिता की लाशें हैं?” लुफासा ने शीशे के पास अपना चेहरा लाकर, अंदर झांकते हुए कहा।

“हां ये तुम्हारे माता-पिता की ही लाश हैं, जिन्हें आज से 22 वर्ष पहले सामरा राज्य के राजा कलाट ने मार दिया था।” मकोटा के शब्द रहस्य से भरे थे।

“कलाट ने?” लुफासा कलाट का नाम सुन आश्चर्य से भर उठा।

“चलो मैं तुम्हें शुरु से सुनाता हूं।” लग रहा था कि आज मकोटा सारे रहस्य खोलने के मूड में था-

“तुम्हें पता है कि सामरा और सीनोर के लोगों की औसत आयु 800 वर्ष होती है, पर दोनों ही राज्यों के नियम के अनुसार जिस व्यक्ति को राजा बनाया जाता है, उसे 600 वर्षों तक अपने राज्य पर शासन करना होता है, इस दौरान वह पुत्र या पुत्री उत्पन्न नहीं कर सकता। तो आज से 625 वर्ष पहले भी, इसी प्रकार से सीनोर का राजा मुफासा को और सामरा का राजा कलाट को बनाया गया। तुम तो जानते ही हो कि सामरा और सीनोर की दुश्मनी हजारों वर्षों से चली आ रही थी। इस दुश्मनी की वजह से दोनों ही अपनी शक्तियों को बढ़ाना चाहते थे।

“पर इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब सन् 1908 में मध्य साइबेरिया के जंगलों में एक बहुत बड़ा उल्का पिंड गिरा। मुफासा उस उल्का पिंड की जांच के लिये साइबेरिया जा पहुंचा। वहां पहुंचकर मुफासा को पता चला कि वह कोई उल्का पिंड नहीं, बल्कि बुद्ध ग्रह की एक यान रुपी प्रयोगशाला थी। जिसमें बुद्ध ग्रह के जीव, हरे कीड़े थे, जो कि पृथ्वी पर एक प्रयोग करने आ रहे थे, परंतु पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय, किसी प्रकार उनका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह साइबेरिया के जंगलों में जा गिरे।

“उन बुद्ध ग्रह के हरे कीड़ों ने मनुष्यों से तो अपना यान छिपा लिया, परंतु मुफासा से नहीं छिपा पाये। मुफासा को जब हरे कीड़ों के आने का उद्देश्य पता चला, तो वह उनकी मदद को तैयार हो गया, पर बदले में वह उनके देवता जैगन से मिलना चाहता था। हरे कीड़े सहर्ष ही इस बात पर तैयार हो गये। जैगन से मिलने के बाद यह तय हुआ कि मुफासा पृथ्वी पर हरे कीड़ों की शक्तियों के विस्तार के लिये पिरामिड बनवायेगा और बदले में जैगन उन्हें वैज्ञानिक शक्तियां देकर शक्तिशाली बनायेगा। अब शुरु हुआ धरती पर पिरामिडों का निर्माण। बुद्ध गह की मदद से धरती पर कुल 8 पिरामिडों का निर्माण हुआ, जिसमें 4 पिरामिड सीनोर राज्य में, 2 पिरामिड मैक्सिको में और 2 पिरामिड मिस्र में बनवाये गये।

“ सारा कार्य बहुत गुपचुप तरीके से किया गया। दरअसल हरे कीड़े मनुष्यों के शरीर की ऊर्जा खींचकर, अपना आकार बढ़ाना चाहते थे, जिससे वह हर प्रकार के वातावरण में जिंदा रह सकें। इस कार्य की
शुरुआत के लिये जब जैगन पृथ्वी पर आया, तब तुम और वीनस 2-3 साल के थे। मुफासा का राजा होने का कार्यकाल अब खत्म हो चुका था। मुफासा ने जैगन से काला मोती प्राप्त करने के लिये मदद मांगी, तभी पता नहीं कैसे धरा, मयूर और कलाट ने हमारे इस पिरामिड पर हमला कर दिया।

"जहां एक ओर धरा ने अपनी धरा शक्ति से जैगन को पृथ्वी से बांध दिया, वहीं दूसरी ओर अराका द्वीप के नियमों के विपरीत जाने की वजह से कलाट ने तुम्हारे पिता और माता को मार दिया। सभी के यहां से जाने के बाद, मैंने तुम्हारे माता और पिता के शरीर पर एक रसायन का लेप लगाकर इस ताबूत में रख दिया। मुझे पता था कि जब जैगन जागेगा, तो अपने गुरु ‘कुवान’ की मदद से तुम्हारे माता-पिता को फिर से जिंदा कर देगा क्यों कि जैगन की अंधेरी शक्तियां भी कुवान की ही देन थीं। पर जब 15 वर्षों के बाद भी जैगन नहीं जागा, तो हमने जैगन के सेवक गोंजालो के कहने से, स्वयं अदृश्य शक्तियों के स्वामी कुवान की साधना करनी शुरु कर दी।

“ कुवान के आशीर्वाद से हमें भेड़ियों की फौज और मेरा सेवक वुल्फा मिला। अब हम कुवान के आदेशानुसार काला मोती को प्राप्त करने के लिये, दूसरे पिरामिड से तिलिस्मा के अंदर तक एक सुरंग बना रहे हैं, जिससे हम बिना तिलिस्मा में प्रवेश किये ही काला मोती को प्राप्त कर लें और तुम्हारे माता-पिता को जिन्दा करके कलाट से बदला ले सकें।” यह कहकर मकोटा कुछ देर के लिये रुक गया और ध्यान से लुफासा के चेहरे को देखने लगा।

लुफासा मकोटा की बातें सुनकर बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था, यह देख मकोटा फिर से बोल उठा-

“अगर तुम्हें सबकुछ समझ आ गया हो और अगर तुम मेरी बात से सहमत हो तो मुझे बताओ, तब मैं इसके आगे की बात बताऊं?”

“पहले मुझे ये बताये कि ये सारी बातें सनूरा को क्यों नहीं पता ? जबकि वह तो पिछले 600 वर्षों से सीनोर राज्य की सेनापति है।” लुफासा ने अपना शक प्रकट करते हुए कहा।

“मुफासा का साइबेरिया जाना और जैगन से मिलकर पिरामिड बनवाना बहुत ही गुप्त रखा गया था, इस बात का पता तो तुम्हारी माँ कागोशी को भी नहीं था, फिर सनूरा को कैसे होता? और अब रही बात कलाट के तुम्हारे माता-पिता को मारने की बात, तो उस समय सनूरा किसी कार्य से अराका द्वीप से बाहर गई थी? उसके आने के बाद हमने कलाट की बात उसे इसलिये नहीं बताई कि यह बात सुनकर कहीं तैश में आकर सामरा राज्य पर हमला ना बोल दे और उस समय तक सामरा राज्य की शक्तियां हमसे ज्यादा थीं, इसलिये मैं बस समय आने का इंतजार कर रहा था, जिससे उचित समय पर मैं ये सारी बातें तुम्हें स्वयं बता सकूं।” मकोटा ने कहा।

“अब मुझे ये बताइये कि कलाट ने मेरी माँ को क्यों मारा, उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?” लुफासा ने क्रोध में आते हुए कहा।

“कलाट ने जब तलवार से तुम्हारे पिता पर हमला किया, उस समय तुम्हारी माँ बीच में आ गई, जिससे वह भी मारी गई।” मकोटा ने कहा।

“जैगन के इस प्रयोग से तो पूरी इंसानियत खतरे में पड़ रही थी, आप लोगों ने जैगन की बात मानने ये पहले ये क्यों नहीं सोचा?” लुफासा ने कहा।

“मनुष्य पहले भी अटलांटियन के आगे कुछ नहीं थे, इसलिये अटलांटियन को कभी भी मनुष्यों की चिंता नहीं रही।....ऐसा मैं नहीं ...तुम्हारे पिता का कहना था। मैं तो बस उनकी आज्ञा का पालन कर रहा था।” मकोटा ने उदास होते हुए कहा।

“ठीक है, अब आप मुझसे क्या चाहते हैं?” लुफासा ने कहा।

“चलो मैं पहले तुम्हें बाकी के पिरामिड दिखाता हूं, फिर कहीं बैठकर बात करेंगे।” यह कहकर मकोटा तीसरे पिरामिड की ओर बढ़ गया।

तीसरे पिरामिड में एक विशाल भेड़िया मानव की मूर्ति लगी थी, जिसके पीछे की ओर एक काँच की लिफ्ट लगी थी। मकोटा उसी लिफ्ट में बैठा कर, लुफासा को जमीन के नीचे की ओर ले गया।

यहां चारो ओर लगभग 20 काँच के कैप्सूल दिखाई दे रहे थे, जिसमें बहुत से विचित्र जीव योद्धा खड़े दिखाई दे रहे थे, परंतु वह सभी निष्क्रिय थे।

“ये सभी योद्धा अलग-अलग जीवों से मिलाकर बनाये गये हैं, जिसे बाद में कुवान अपनी शक्तियों से जीवित करेंगे। यह सभी योद्धा हमें सामरा राज्य से युद्ध में जीत दिलायेंगे।” यह कहकर मकोटा लुफासा को वहां से भी लेकर दूसरे पिरामिड की ओर चल दिया।

यह पिरामिड पिछले 2 पिरामिडों से बड़ा था। दूसरे पिरामिड के एक कमरे में कुछ हरे कीड़े जमीन में सुरंग खोद रहे थे।

एक कमरे में गोंजालो जख्मी हालत में लेटा था, और हरे कीड़े उसका इलाज कर रहे थे।

“यह गोंजालो कैसे जख्मी हो गया, इसके पास तो बहुत सी शक्तियां थीं।” लुफासा ने मकोटा से पूछा।

“आजकल समय ही खराब है...मैंने तुम्हें जिस देवी शलाका से मिलाया था, वह भी झूठी निकली और मेरी कई शक्तियां लेकर भाग गई। उधर गोंजालो जब सामरा राज्य मे छिपकर खबर लाने गया था, तो किसी अज्ञात इंसान ने गोंजालो पर महाशक्ति से हमला कर दिया, बहुत मुश्किल से गोंजालो बचकर वापस आ पाया है।”

मकोटा ने कहा- “मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा कि एक इंसान के पास महाशक्ति आयी कैसे?.... उधर गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से टकरा गया, जिससे तिलिस्मा का कोई जीव भी भाग निकला, पर हम जैसे ही उस द्वार से घुसने चले, वह द्वार पुनः बंद हो गया।”

“तिलिस्मा का ऊर्जा द्वार?” लुफासा ने हैरान होते हुए कहा।

“हां, हमें भी नहीं मालूम था कि पिरमिड के पीछे तिलिस्मा का कोई छिपा ऊर्जा द्वार है, नहीं तो हम पहले ही उस द्वार से छिपकर तिलिस्मा में प्रवेश कर जाते, पर अब तो वह भी बंद हो गया। अब तो सुरंग ही एक
मात्र रास्ता है, अगर वहां भी कोई अड़चन नहीं आयी तो?” मकोटा ने कहा- “बस एक ही चीज हमारे साथ अच्छी हुई है.....ना जाने कैसे धरा शक्ति ने काम करना बंद कर दिया जिससे जैगन होश में आ गया है....
अब अगर तुम और सनूरा भी दिल से हमारा साथ देना शुरु कर दो, तो फिर हम जल्दी ही तुम्हारे माता-पिता को भी जिंदा कर लेंगे और फिर जीत हमारी ही होगी।”

“मैं तो पहले भी आपका साथ दे रहा था, फिर भी मैं आपके हर कार्य को करने के लिये अब अपनी जी-जान लगा दूंगा। आप बस आदेश करें मांत्रिक” लुफासा ने कहा और मकोटा के सामने अपने घुटने टेक कर सिर झुका दिया।

मकोटा ने रहस्य बताने के बहाने लुफासा को अपनी ओर करना चाहा था, लुफासा इस बात को अच्छी तरह से समझ रहा था, पर फिर भी अपने माता-पिता के नाम पर, वह भी मकोटा का साथ देने को मजबूर था।

लुफासा का यह रुप देख मक्कार मकोटा मुस्कुरा दिया....आखिर उसकी चाल कामया ब हो ही गई।


जारी रहेगा_____✍️

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai,

Makota ne jo jhuthi kahaniya lufasa ko sunayi he lufasa samajh to gaya he

Lekin is ummeed me ki uske mata pita dobara jivit ho jayenge vo makota ka sath dene ko raji ho gaya he.........

Keep posting Bro
 

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parkas

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अंधेरे का देवता:
(16.01.02, बुधवार, 13:50, मकोटा महल, सीनोर राज्य, अराका द्वीप)

लुफासा जब मेलाइट, रोजर और सुर्वया का परिचय पूछ रहा था, तभी मकोटा ने लुफासा को सिग्नल भेजकर अपने महल में बुलवा लिया था।

पर आज पूरा 1 दिन बीत जाने के बाद भी मकोटा, लुफासा से मिला नहीं था। लुफासा इंतजार करते-करते पूरी तरह से परेशान हो गया था, पर मकोटा से वह कुछ कह भी नहीं सकता था।

एक तो मकोटा महल में उन काले भेड़ियों के अलावा कोई था भी तो नहीं, तो लुफासा आखिर पूछता भी तो किससे? कि मकोटा को मिलने में और कितना समय लगेगा? बहरहाल लुफासा के पास और इंतजार करने के अलावा कुछ नहीं था।

आखिरकार एक लंबे इंतजार के बाद, उस कमरे का एक दरवाजा खुला और उसमें से मकोटा चलकर आता दिखाई दिया।

मकोटा को देख लुफासा ने राहत की साँस ली और झुककर मकोटा को अभिवादन किया।

“कल से तुम्हें बुलाने के बाद अचानक से पिरामिड में काम कुछ बढ़ गया था, इसलिये मिलने में कुछ ज्यादा ही समय लग गया। उम्मीद है तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई होगी?” मकोटा ने लुफासा को देखते हुए कहा।

लुफासा का मन किया कि इस मकोटा की गंजी खोपड़ी पर कोई डंडा फेंक कर मार दे, पर उसने अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए ‘ना ’ में अपना सिर हिला दिया।

मकोटा लुफासा के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोला- “देखो लुफासा, तुम अराका का भविष्य हो। मैं चाहता हूं कि तुम अराका ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी पर राज करो, बस इसी लिये मैं दिन-रात मेहनत कर रहा हूं। मेरी मेहनत को देखते हुए तुम्हारा भी हक बनता है कि तुम भी पूरे दिल से मेरा साथ दो।....और अब वैसे भी मेरे सपने को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता....मेरा मतलब है कि तुम्हें राजा बनने से।..... देखो लुफासा, मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें कई कार्य सौंपे, पर तुम इतनी शक्तियां होने के बाद भी, किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाये।

“जब मैंने ध्यान से सोचा तो मुझे लगा कि ये तुम्हारी शक्तियों का दोष नहीं है, सिर्फ तुम्हारी मानसिक स्थिति का दोष है। तुम अपने स्वयं के निर्णय लेने में भी बहुत असमंजस में दिखते हो। और ऐसा इसलिये है कि तुम्हें मैं ज्यादा कुछ नहीं बताता। पर आज मैंने तुम्हें सबकुछ बताने का निर्णय लिया है। जिससे आगे भविष्य में तुम अपने अच्छे-बुरे को पहचान सको। ये पहचान सको कि तुम्हारे साथ कौन खड़ा है? और तुम्हारे विरुद्ध कौन है?”

मकोटा के शब्द सुनकर लुफासा और सतर्क हो गया। वह समझ गया कि मकोटा उसके आस-पास कोई और जाल बुनना चाह रहा है।

“तुम मेरे साथ पिरामिड चलो, मैं आज तुम्हें सारा सच बताना चाहता हूं।” यह कहकर मकोटा कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया।

मकोटा को उठकर जाते देख लुफासा भी मकोटा के पीछे-पीछे चल दिया।

लुफासा जान गया था कि कुछ भी हो पर आज मकोटा के कई रहस्यों से पर्दा उठने वाला था।

कुछ ही देर में भेड़ियों के रथ पर बैठकर मकोटा और लुफासा सीनोर राज्य में स्थित, उन 4 पिरामिडों के पास पहुंच गये।

मकोटा ने अपना रथ पिरामिड नंबर 4 के पास रोका, यह देख लुफासा हैरान हो गया क्यों कि आज तक उसने किसी को भी पिरामिड नंबर 4 में जाते हुए नहीं देखा था? मकोटा, लुफासा को लेकर पिरामिड नंबर 4 में प्रवेश कर गया।

पिरामिड नंबर 4 के बीच में 2 ताबूत रखे थे। मकोटा लुफासा को लेकर उन्हीं ताबूतों के पास पहुंच गया।
उन ताबूतों का ऊपरी हिस्सा पारदर्शी शीशे का बना था। लुफासा आश्चर्य से उन ताबूतों को देखने लगा।

“तुम्हें पता है लुफासा कि इन ताबूतों में कौन है?” मकोटा ने लुफासा से पूछा।

लुफासा ने अपना सिर ना के अंदाज में हिला दिया।

“इन ताबूतों में ‘मुफासा और कागोशी’ की लाश हैं।” मकोटा ने कहा।

मकोटा के शब्द सुनते ही लुफासा पर बिजली सी गिर गई।

“आपका मतलब है कि इन ताबूतों में मेरे माता-पिता की लाशें हैं?” लुफासा ने शीशे के पास अपना चेहरा लाकर, अंदर झांकते हुए कहा।

“हां ये तुम्हारे माता-पिता की ही लाश हैं, जिन्हें आज से 22 वर्ष पहले सामरा राज्य के राजा कलाट ने मार दिया था।” मकोटा के शब्द रहस्य से भरे थे।

“कलाट ने?” लुफासा कलाट का नाम सुन आश्चर्य से भर उठा।

“चलो मैं तुम्हें शुरु से सुनाता हूं।” लग रहा था कि आज मकोटा सारे रहस्य खोलने के मूड में था-

“तुम्हें पता है कि सामरा और सीनोर के लोगों की औसत आयु 800 वर्ष होती है, पर दोनों ही राज्यों के नियम के अनुसार जिस व्यक्ति को राजा बनाया जाता है, उसे 600 वर्षों तक अपने राज्य पर शासन करना होता है, इस दौरान वह पुत्र या पुत्री उत्पन्न नहीं कर सकता। तो आज से 625 वर्ष पहले भी, इसी प्रकार से सीनोर का राजा मुफासा को और सामरा का राजा कलाट को बनाया गया। तुम तो जानते ही हो कि सामरा और सीनोर की दुश्मनी हजारों वर्षों से चली आ रही थी। इस दुश्मनी की वजह से दोनों ही अपनी शक्तियों को बढ़ाना चाहते थे।

“पर इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब सन् 1908 में मध्य साइबेरिया के जंगलों में एक बहुत बड़ा उल्का पिंड गिरा। मुफासा उस उल्का पिंड की जांच के लिये साइबेरिया जा पहुंचा। वहां पहुंचकर मुफासा को पता चला कि वह कोई उल्का पिंड नहीं, बल्कि बुद्ध ग्रह की एक यान रुपी प्रयोगशाला थी। जिसमें बुद्ध ग्रह के जीव, हरे कीड़े थे, जो कि पृथ्वी पर एक प्रयोग करने आ रहे थे, परंतु पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय, किसी प्रकार उनका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह साइबेरिया के जंगलों में जा गिरे।

“उन बुद्ध ग्रह के हरे कीड़ों ने मनुष्यों से तो अपना यान छिपा लिया, परंतु मुफासा से नहीं छिपा पाये। मुफासा को जब हरे कीड़ों के आने का उद्देश्य पता चला, तो वह उनकी मदद को तैयार हो गया, पर बदले में वह उनके देवता जैगन से मिलना चाहता था। हरे कीड़े सहर्ष ही इस बात पर तैयार हो गये। जैगन से मिलने के बाद यह तय हुआ कि मुफासा पृथ्वी पर हरे कीड़ों की शक्तियों के विस्तार के लिये पिरामिड बनवायेगा और बदले में जैगन उन्हें वैज्ञानिक शक्तियां देकर शक्तिशाली बनायेगा। अब शुरु हुआ धरती पर पिरामिडों का निर्माण। बुद्ध गह की मदद से धरती पर कुल 8 पिरामिडों का निर्माण हुआ, जिसमें 4 पिरामिड सीनोर राज्य में, 2 पिरामिड मैक्सिको में और 2 पिरामिड मिस्र में बनवाये गये।

“ सारा कार्य बहुत गुपचुप तरीके से किया गया। दरअसल हरे कीड़े मनुष्यों के शरीर की ऊर्जा खींचकर, अपना आकार बढ़ाना चाहते थे, जिससे वह हर प्रकार के वातावरण में जिंदा रह सकें। इस कार्य की
शुरुआत के लिये जब जैगन पृथ्वी पर आया, तब तुम और वीनस 2-3 साल के थे। मुफासा का राजा होने का कार्यकाल अब खत्म हो चुका था। मुफासा ने जैगन से काला मोती प्राप्त करने के लिये मदद मांगी, तभी पता नहीं कैसे धरा, मयूर और कलाट ने हमारे इस पिरामिड पर हमला कर दिया।

"जहां एक ओर धरा ने अपनी धरा शक्ति से जैगन को पृथ्वी से बांध दिया, वहीं दूसरी ओर अराका द्वीप के नियमों के विपरीत जाने की वजह से कलाट ने तुम्हारे पिता और माता को मार दिया। सभी के यहां से जाने के बाद, मैंने तुम्हारे माता और पिता के शरीर पर एक रसायन का लेप लगाकर इस ताबूत में रख दिया। मुझे पता था कि जब जैगन जागेगा, तो अपने गुरु ‘कुवान’ की मदद से तुम्हारे माता-पिता को फिर से जिंदा कर देगा क्यों कि जैगन की अंधेरी शक्तियां भी कुवान की ही देन थीं। पर जब 15 वर्षों के बाद भी जैगन नहीं जागा, तो हमने जैगन के सेवक गोंजालो के कहने से, स्वयं अदृश्य शक्तियों के स्वामी कुवान की साधना करनी शुरु कर दी।

“ कुवान के आशीर्वाद से हमें भेड़ियों की फौज और मेरा सेवक वुल्फा मिला। अब हम कुवान के आदेशानुसार काला मोती को प्राप्त करने के लिये, दूसरे पिरामिड से तिलिस्मा के अंदर तक एक सुरंग बना रहे हैं, जिससे हम बिना तिलिस्मा में प्रवेश किये ही काला मोती को प्राप्त कर लें और तुम्हारे माता-पिता को जिन्दा करके कलाट से बदला ले सकें।” यह कहकर मकोटा कुछ देर के लिये रुक गया और ध्यान से लुफासा के चेहरे को देखने लगा।

लुफासा मकोटा की बातें सुनकर बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था, यह देख मकोटा फिर से बोल उठा-

“अगर तुम्हें सबकुछ समझ आ गया हो और अगर तुम मेरी बात से सहमत हो तो मुझे बताओ, तब मैं इसके आगे की बात बताऊं?”

“पहले मुझे ये बताये कि ये सारी बातें सनूरा को क्यों नहीं पता ? जबकि वह तो पिछले 600 वर्षों से सीनोर राज्य की सेनापति है।” लुफासा ने अपना शक प्रकट करते हुए कहा।

“मुफासा का साइबेरिया जाना और जैगन से मिलकर पिरामिड बनवाना बहुत ही गुप्त रखा गया था, इस बात का पता तो तुम्हारी माँ कागोशी को भी नहीं था, फिर सनूरा को कैसे होता? और अब रही बात कलाट के तुम्हारे माता-पिता को मारने की बात, तो उस समय सनूरा किसी कार्य से अराका द्वीप से बाहर गई थी? उसके आने के बाद हमने कलाट की बात उसे इसलिये नहीं बताई कि यह बात सुनकर कहीं तैश में आकर सामरा राज्य पर हमला ना बोल दे और उस समय तक सामरा राज्य की शक्तियां हमसे ज्यादा थीं, इसलिये मैं बस समय आने का इंतजार कर रहा था, जिससे उचित समय पर मैं ये सारी बातें तुम्हें स्वयं बता सकूं।” मकोटा ने कहा।

“अब मुझे ये बताइये कि कलाट ने मेरी माँ को क्यों मारा, उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?” लुफासा ने क्रोध में आते हुए कहा।

“कलाट ने जब तलवार से तुम्हारे पिता पर हमला किया, उस समय तुम्हारी माँ बीच में आ गई, जिससे वह भी मारी गई।” मकोटा ने कहा।

“जैगन के इस प्रयोग से तो पूरी इंसानियत खतरे में पड़ रही थी, आप लोगों ने जैगन की बात मानने ये पहले ये क्यों नहीं सोचा?” लुफासा ने कहा।

“मनुष्य पहले भी अटलांटियन के आगे कुछ नहीं थे, इसलिये अटलांटियन को कभी भी मनुष्यों की चिंता नहीं रही।....ऐसा मैं नहीं ...तुम्हारे पिता का कहना था। मैं तो बस उनकी आज्ञा का पालन कर रहा था।” मकोटा ने उदास होते हुए कहा।

“ठीक है, अब आप मुझसे क्या चाहते हैं?” लुफासा ने कहा।

“चलो मैं पहले तुम्हें बाकी के पिरामिड दिखाता हूं, फिर कहीं बैठकर बात करेंगे।” यह कहकर मकोटा तीसरे पिरामिड की ओर बढ़ गया।

तीसरे पिरामिड में एक विशाल भेड़िया मानव की मूर्ति लगी थी, जिसके पीछे की ओर एक काँच की लिफ्ट लगी थी। मकोटा उसी लिफ्ट में बैठा कर, लुफासा को जमीन के नीचे की ओर ले गया।

यहां चारो ओर लगभग 20 काँच के कैप्सूल दिखाई दे रहे थे, जिसमें बहुत से विचित्र जीव योद्धा खड़े दिखाई दे रहे थे, परंतु वह सभी निष्क्रिय थे।

“ये सभी योद्धा अलग-अलग जीवों से मिलाकर बनाये गये हैं, जिसे बाद में कुवान अपनी शक्तियों से जीवित करेंगे। यह सभी योद्धा हमें सामरा राज्य से युद्ध में जीत दिलायेंगे।” यह कहकर मकोटा लुफासा को वहां से भी लेकर दूसरे पिरामिड की ओर चल दिया।

यह पिरामिड पिछले 2 पिरामिडों से बड़ा था। दूसरे पिरामिड के एक कमरे में कुछ हरे कीड़े जमीन में सुरंग खोद रहे थे।

एक कमरे में गोंजालो जख्मी हालत में लेटा था, और हरे कीड़े उसका इलाज कर रहे थे।

“यह गोंजालो कैसे जख्मी हो गया, इसके पास तो बहुत सी शक्तियां थीं।” लुफासा ने मकोटा से पूछा।

“आजकल समय ही खराब है...मैंने तुम्हें जिस देवी शलाका से मिलाया था, वह भी झूठी निकली और मेरी कई शक्तियां लेकर भाग गई। उधर गोंजालो जब सामरा राज्य मे छिपकर खबर लाने गया था, तो किसी अज्ञात इंसान ने गोंजालो पर महाशक्ति से हमला कर दिया, बहुत मुश्किल से गोंजालो बचकर वापस आ पाया है।”

मकोटा ने कहा- “मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा कि एक इंसान के पास महाशक्ति आयी कैसे?.... उधर गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से टकरा गया, जिससे तिलिस्मा का कोई जीव भी भाग निकला, पर हम जैसे ही उस द्वार से घुसने चले, वह द्वार पुनः बंद हो गया।”

“तिलिस्मा का ऊर्जा द्वार?” लुफासा ने हैरान होते हुए कहा।

“हां, हमें भी नहीं मालूम था कि पिरमिड के पीछे तिलिस्मा का कोई छिपा ऊर्जा द्वार है, नहीं तो हम पहले ही उस द्वार से छिपकर तिलिस्मा में प्रवेश कर जाते, पर अब तो वह भी बंद हो गया। अब तो सुरंग ही एक
मात्र रास्ता है, अगर वहां भी कोई अड़चन नहीं आयी तो?” मकोटा ने कहा- “बस एक ही चीज हमारे साथ अच्छी हुई है.....ना जाने कैसे धरा शक्ति ने काम करना बंद कर दिया जिससे जैगन होश में आ गया है....
अब अगर तुम और सनूरा भी दिल से हमारा साथ देना शुरु कर दो, तो फिर हम जल्दी ही तुम्हारे माता-पिता को भी जिंदा कर लेंगे और फिर जीत हमारी ही होगी।”

“मैं तो पहले भी आपका साथ दे रहा था, फिर भी मैं आपके हर कार्य को करने के लिये अब अपनी जी-जान लगा दूंगा। आप बस आदेश करें मांत्रिक” लुफासा ने कहा और मकोटा के सामने अपने घुटने टेक कर सिर झुका दिया।

मकोटा ने रहस्य बताने के बहाने लुफासा को अपनी ओर करना चाहा था, लुफासा इस बात को अच्छी तरह से समझ रहा था, पर फिर भी अपने माता-पिता के नाम पर, वह भी मकोटा का साथ देने को मजबूर था।

लुफासा का यह रुप देख मक्कार मकोटा मुस्कुरा दिया....आखिर उसकी चाल कामया ब हो ही गई।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Mujhe nahi lagta hai ki Lufasha ke mata pita ki hatya Kalat ne ki hogi, khair yadi Makota ne jaise kaha hai wo sach bhi hai toh Kalat ka koi dosh nazar nahi aa raha hai isme, khair wonderful update brother.
Klaat hatyara to apun ko bhi nahi lagta dost, :shhhh: per sach kya hai ye apun ko bhi nahi maloom.
Filhaal to yuddh ki bhumika banti nazar aa rahi hai.:dazed:
Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 
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