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आप केसी सेक्स स्टोरी पढना चाहते है. ??

  • माँ - बेटा

  • भाई - बहेन

  • देवर - भाभी

  • दामाद – सासु

  • ससुर – बहु


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junglecouple1984

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सासू मां की चुदाई-8





सासू मां को भी समझ में आ गया कि आज दामाद गांड मार के ही मानेगा। उन्होंने लाख मिन्नतें की, लेकिन मैं कहा सुनने वाला था। मैंने अपने मुंह से खड़े-खड़े उनकी गांड और मेरे लोड़े के ऊपर थूक दिया, और थोड़ा सा जोर लगा कर उनकी गांड में अपना लोड़ा थोड़ा सा अंदर डाल दिया। मेरी सासू मां चीख रही थी। मुझे गालियां दे रही थी, और आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

जब उन्हें पूरी तरीके से पता चला कि आज उनकी गांड दामाद के लोड़े से फटने वाली थी, तब उन्होंने सरेंडर कर दिया, और कहने लगी-

सासू मां: धीरे-धीरे करना, काफी दर्द हो रहा है। एक काम कीजिए, वहां सरसों का तेल है, उसे अपने लोड़े पर मल दीजिए, और थोड़ा तेल मेरी गांड के अंदर भी लगा दीजिए।

मैंने कहा ठीक है और मैं सरसों का तेल लेने चला गया। लेकिन जब मैंने अपना आधा लौड़ा उनकी गांड से निकाला, तब पक्क करके आवाज आई। यह आवाज सुन कर हम दोनों हैरान हो गए थे। मैं अंदर जाकर सरसों का तेल ले आया, और अपनी सासू मां के हाथ में देकर कहां कि-

मैं: आप ही तेल लगा दीजिए मेरे लोड़े पर।

तब सासू मां ने काफी तेल लिया, और मेरे लोड़े पर लगाने लगी। जब वह तेल लगा रही थी, तब उनके चेहरे पर खुशी की जगह दर्द नजर आ रहा था, और आंखों से आंसू बह रहे थे। वो मुझे देख कर मिन्नतें करने लगी-

सासू मां: दामाद जी आज रहने दीजिए, और किसी दिन और मेरी गांड मार लेना।

लेकिन मैंने उनसे कहा: तेरी गांड तो मैं आज ही मारूंगा, चाहे तू कितनी भी भीख मांग ले। अब मेरे लोड़े को तेरी गांड का चस्का लग गया है।

और यह बोल कर मैंने उनको पलटा दिया। फिर घोड़ी बना कर अपने लोड़े को उनकी गांड के छेद पर सहला रहा था।

मेरी सासू मां: अब जो भी करना है थोड़े आराम से करना। क्योंकि पहली बार कोई मेरी गांड खोल रहा है।

तब मैंने हंसते हुए सरसों का तेल उनकी गांड पर लगा कर, अपने लोड़े का टोपा उनकी गांड के छेद पर रख कर, दोनों हाथों से उनकी कमर को पकड़ कर, थोड़ा सा जोर लगाया। टोपा तो अंदर घुस गया और मुझे मेरी सासू मां के रोने की आवाज दर्द के साथ आने लगी। मैंने इन चीजों को ध्यान ना देते हुए अपना कार्य चालू रखा, और फिर मैंने थोड़ा सा और जोर लगाया। मेरा आधा लौड़ा उनकी गांड में जा चुका था।

मुझे भी हल्का सा दर्द का एहसास हुआ। क्योंकि उनकी गांड काफी टाइट थी, और गांड हमेशा चूत से ज्यादा टाइट होती है। अब मैंने अपनी सासू मां से कहा-

मैं: मैं अपना पूरा लौड़ा आपकी गांड में डालने वाला हूं। तो तैयार हो जाइए।

फिर उन्होंने पास में पड़े अपने पेटिकोट को अपने मुंह में ठूंस लिया, और आंखें बंद करते हुए मुझे चार गालियां तो जरूर दी होंगी। अब मैंने उनकी कमर छोड़ कर उनके कंधों को पकड़ लिया, और अपनी गांड को थोड़ा सा पीछे करके धक्का मार दिया। उसका अंजाम ऐसा हुआ कि मुझे अपना लौड़ा कहीं दिख नहीं रहा था। वह पूरी तरीके से मेरी सासू मां के गांड में समा गया था, और वहां मेरी सासू मां काफी जोर चीखी थी।

लेकिन पेटिकोट की वजह से आवाज़ बाहर नहीं आयी। बस मुझे उनके कराहने की आवाज सुनाई दे रही थी। मैं धीरे-धीरे अपना लौड़ा उनकी गांड में आगे-पीछे कर रहा था। मैं तो सातवें आसमान में आ गया। 2 मिनट के बाद मेरी सासू मां अपना पेटिकोट अपने मुंह से निकाल कर सिसकियां लेते हुए मुझे कहने लगी-

सासू मां: मादरचोद, बहन के लौड़े, तुझे मुझ पर थोड़ा भी रहम नहीं आ रहा? अरे कम से कम मेरी उम्र का तो लिहाज कर लेता।

तब मैंने उनसे कहा: जब चूत मैं लौड़ा ले रही थी, तब तुझे अपनी उम्र का खयाल नहीं आया?

अब मुझे धीरे-धीरे मजा आने लगा, और मेरे दिमाग में खयाल आया।

मैंने उनसे कहा: बहुत कर लिया यहां, अब चलो अलमारी के सामने। वहां शीशे के सामने तेरी गांड मारते हुए एक-दूसरे को देखेंगे।

और यह बोल कर मैं उन्हें अलमारी के आइने के सामने ले आया। उनसे तो चला भी नहीं जा रहा था। लेकिन वह कुछ भी नहीं कर सकती थी। मैं वहां पर पास पड़ी एक कुर्सी को हमारे पास ले आया, और अपनी सासू मां से कहा-

मैं: अपनी एक टांग इस कुर्सी पर रख दो, और थोड़ा सा आगे झुक जाओ।

बेचारी मेरी बाते सुनने के लिए मजबूर थी। उन्होंने वैसा ही किया जैसा मैंने कहा था। अब मैं उनके पीछे आ गया, और अपने लोड़े को उनकी गांड में डालने लगा। गांड और लोड़े पर काफी सारा सरसों का तेल होने से आधा लौड़ा उनकी गांड में घुस गया। मुझे पता था वह चिल्लाएंगी, इसलिए पहले ही मैंने उनके मुंह पर अपना एक हाथ रख लिया था, और दूसरे हाथ से उनका एक तरबूज दबा रहा था।

जब मुझे पता लगा कि अब वह नहीं चिल्लाने वाली थी, तब मैं उनके मुंह से वह हाथ हटा कर उनके दूसरे तरबूज दबाने लगा, और जब मैंने यह चीज आईने में देखी, तब मुझमें और जोश आ गया। मैंने अब अपना पूरा लौड़ा उनकी गांड में डाल दिया। आईने के दोनों और उनके हाथ थे, और झुकी होने के कारण उनके बाल सिर के दोनों और बंट गए थे। मैं उनकी कमर को पकड़ कर उनकी गांड मार रहा था। तब उनके दोनों तरबूज काफी जोर-जोर से आगे-पीछे हिल रहे थे।

तब मैंने अपनी सासू मां से कहा: जरा आईने में भी देखिए।

तब उन्होंने सर उठा कर आईने में देखा और देख कर दर्द होने के बावजूद भी शर्मा कर हस दी, और मुझसे कहने लगी-

सासू मां: तुझे सच में शर्म नहीं आती कि एक बूढी औरत के साथ तू यह सब कर रहा है?

तब मैंने उनसे कहा: मेरी जान तू ही वह औरत है जो मेरे लोड़े को सुकून दिला सकती है।

2 मिनट इसी तरीके से गांड मारने का कार्यक्रम चल रहा था। मैं बड़े आराम से गांड मार रहा था।

तब उन्होंने मुझे कहां: बेटा कमर में बहुत दर्द हो रहा है, बिस्तर पर चले?

मुझे थोड़ी सी उन पर दया आ गई।

मैंने कहा: चलो, अब बिस्तर पर ही पानी निकालूंगा।

फिर वह लंगड़ाते हुए बिस्तर पर आकर लेट गई,‌ और मुझसे कहा: अब तो बस करो। चाहे तो चूत मार लो।

मैंने उनसे कहा: नहीं, पानी तो तेरी गांड में ही निकलूंगा।

यह कह‌ कर, अपने लोड़े पर सरसों का तेल लगा कर तैयार हो गया। वो चुप-चाप घोड़ी बन गई, लेकिन मैंने उन्हें घोड़ी बनने से मना कर दिया, और उनकी कमर के नीचे मोटा वाला तकिया रख कर उनकी दोनों टांगों को हवा में लहरा दिया। अब उन्हें ऐसा लगा कि शायद मैं उनकी चूत मारूंगा, लेकिन ऐसा ना करते हुए मैंने अपने लोड़े को उनकी गांड से सटा कर धक्का दे दिया।

उनके मुंह से उफ्फ की आवाज निकली। तब उन्होंने अपना दिमाग चला कर सीधा मुझे अपने शरीर पर खींच लिया, और मेरे कान में बोली-

सासू मां: अरे भड़वे, अपनी मां के साथ भी ऐसा करता क्या?

और यह बोल कर मेरे मुंह के अंदर अपना मुंह डाल कर जुबान फेरने लगी। उसकी यह हरकत की वजह से मेरे लोड़े पर काफी तेज करंट दौड़ने लग गया। मुझे पता चल गया कि अगले 5-6 झटकों में मेरा पानी उनकी गांड में निकल जायेगा। मैं भी जोश में आकर जोर-जोर से उनकी गांड मारने लग गया। उनका मुंह मेरे मुंह में होने कारण वह आवाज नहीं कर पा रही थी, और सिर्फ उम उम कर पा रही थी।

उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह से छुड़ाया और अपनी दोनों टांगें पकड़ कर अपने पेट के पास मोड़ दी। इस वजह से मेरा लौड़ा और आसानी से उनकी गांड में आने-जाने लगा। मैं तो पागल हो गया उनकी गांड मारते-मारते।

मैंने कहा: सासू मां मेरा पानी निकलने वाला है। मैं अपना पूरा पानी आपकी गांड में भर दूंगा।‌

तब उन्होंने मुझसे कहां: तो जल्दी निकाल, यह तेरी मां की गांड नहीं है जो तू उसे इतनी मजे से मार रहा है।

यह सुनते ही मेरे लोड़े से फवारा छूट गया, और मुझे स्वर्ग मिल गया। जब मैं उनके ऊपर से उठ गया, तब मैंने देखा उनकी गांड खुल गई थी और उसमें से मेरे लोड़े के पानी के साथ थोड़ा खून भी आ रहा था।

मेरी सासू मां बोली: गांड मरवाने में बहुत तकलीफ होती है। लेकिन बाद में मजा भी आता है। अगली बार जब भी तुम मेरी गांड मारो, तब मेरे इंकार करने के बावजूद भी

मेरी एक भी बात मत सुनना, और मेरी गांड मार‌ के ही छोड़ना। जब इस गांड को तुम्हारे लवड़े की आदत हो जाएगी, तब मैं खुद सामने से अपनी गांड लेकर आऊंगी।

 
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junglecouple1984

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धार्मिक और संस्कारी मां




हैलो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मेरी उम्र 19 साल है। आज मैं आपको जो कहानी बताने जा रहा हूं, वो 1 साल पहले की है, और एक दम सच्ची कहानी है। मैंने बहुत कहानियां पढ़ी, जिसके बाद मुझे लगा कि एक किस्सा मुझे भी शेयर करना चाहिए।

मेरे घर में 4 सदस्य है। एक मैं, और पापा (42साल)और मां(संगीता) और दादी। पापा सरकारी अध्यापक है। मेरी मां जो बहुत धार्मिक है, हफ्ते में दो दिन वृत्त रखती है मंगलवार और गुरुवार। और वो हर दिन पूजा पाठ करती है। पापा भी सुबह उठते है, और नहा धो कर स्कूल चले जाते है।

इसी तरह दैनिक जीवन चल रहा था। सब एक दम ठीक था। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, कि एक दिन ऐसा भी होगा। मेरी मां की उम्र 40 थी। वो कभी किसी दूसरे मर्द की तरफ आंख उठाना तो दूर की बात है सोचती भी नहीं थी। एक दम घरेलू महिला थी। वो साड़ी पहनती थी, और वो भी इस तरह से, जिसमे कुछ नहीं दिखता था। अब आप ही सोचो कितनी संस्कारी और धार्मिक थी मम्मी।

एक दिन की बात है। हमारे घर के सामने एक अंकल आए रहने के लिए किराए पर। उनकी उम्र लगभग 54 साल थी। उन्होंने अपनी बॉडी को अच्छे से मेंटेन करके रखा था। 6 फीट हाइट और बड़ी-बड़ी मूछे थी उनकी। उनका नाम था हुसैन खान।

वो प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते थे। तो लगभग वो घर पर रहते थे। अब पापा के पास सेंविंग थी, तो उन्होंने सही रेट में एक फ्लैट ले लिया अंकल से। इस तरह अंकल की पापा से जान-पहचान बढ़ गई। रविवार के दिन पापा का स्कूल से अवकाश होता था। तो पापा अंकल के घर चले जाते थे, ऐसे ही टाइम पास के लिए और कभी अंकल आ जाते थे हमारे घर।

अभी तक ना तो अंकल ने मम्मी को देखा था, और ना ही मम्मी ने अंकल को देखा था। क्यूंकि अंकल आके बाहर ही बैठ जाते पापा के पास, और मम्मी चाय वगेरह कुछ बनाती तो मैं दे आता था। और मम्मी को कोई मतलब नहीं था कौन हैं और कौन नहीं। वो बस अपने कामों मे बिज़ी रहती थी।

वो जब बाहर आती थी, तब भी घूंघट निकाल के आती थी। अपनी बॉडी को पूरा ढक कर। एक दिन क्या हुआ कि मैं बाहर गया हुआ था और रविवार था। हुसैन अंकल हमारे घर आए हुए थे, और पापा के साथ बाहर बैठे थे और ऐसे ही राजनीति की बातें कर रहे थे।

अब उनको चाय नाश्ता देने वाला कोई नहीं था। मम्मी ने काफी देर तक वेट किया मेरा, लेकिन मैं नहीं आ पाया। फिर मम्मी खुद ही घूंघट निकाल कर, खुद को कवर करके चाय नाश्ता देने गई। इधर अंकल बातचीत मैं व्यस्त थे। लेकिन जैसे ही मम्मी चाय नाश्ता देके मुड़ी, इधर मैं घर में आ गया।

मैंने देखा कि हुसैन अंकल मम्मी को उपर से नीचे तक देख रहे थे, और बार-बार मम्मी की गांड देख रहे थे। मम्मी के बारे मे बता दूं। मम्मी बहुत खूबसूरत है। उनकी बॉडी एक दम शेप में है। कमर 32″ बोबे 34″ और गांड 38″ की और चेहरे से तो नूर छलकता है। अगर कोई मर्द उनको सही से देख ले तो उनको चोदने के ख्वाब लेने लगे।

लेकिन मम्मी खुद को कवर रखती है साड़ी में। तो किसी की नजर जा नहीं पाती। लेकिन मैंने पहली बार देखा कि अंकल मम्मी की गांड को बहुत गंदे तरीके से देख रहे थे। मुझे उनकी आंखों में हवस नजर आ रही थी। पापा को इसकी खबर नहीं थी कि अंकल मम्मी की गांड देख रहे थे। और यही से कहानी शुरू होती है।

फिर ऐसा कई दिनों तक चलता रहा, और अंकल एक भी मौका नहीं छोड़ते थे मम्मी को देखने का। वो घूंघट के अंदर से मम्मी का चेहरा देखने की कोशिश करते और इसमें वो कामयाब भी हुए। मैंने देखा, अब हुसैन अंकल का आना-जाना बढ़ गया था हमारे घर। और अब मम्मी भी पापा के बताए अनुसार अंकल को जानने लग गई कि ऐसा कोई आदमी यहां किराए पर रह रहा था।

कुछ टाइम बाद पापा की शिक्षण प्रशिक्षण की ट्रेनिंग आ गई। 20 दिन के लिए पापा वहां चले गए। अब पापा 20 दिन बाद ही आने वाले थे। और मैं तो स्कूल जाता ही था। दादी मंदिर जाती थी भजन करने। और अंकल इसी मौके की तलाश में थे कि कैसे मम्मी को पटाए और कैसे चोदे इस खूबसूरत औरत को।

अंकल को जब पापा की ट्रेनिंग का पता चला, तो वो बहुत खुश हुए। अब उनका रास्ता और साफ हो गया था। पहले दिन ही घर में कुछ सामान खत्म हो गया, और मैं सुबह-सुबह मेरे स्कूल के टाइम में लाके दे नहीं सकता था। तो मम्मी ने पापा को कॉल किया कि-

मम्मी: ये समान चाहिए अभी, और राहुल स्कूल जा रहा है।

पापा ने कहा: मैं देखता हूं।

फिर पापा का दुबारा कॉल आया, और उन्होंने कहा: मैंने हुसैन जी को कह दिया है। वो ला देंगे

मम्मी ने कहा: ठीक है।

मैंने सोचा अंकल जरूर कुछ गड़बड़ करेंगे। और अगर मैं स्कूल चला जाऊंगा तो कुछ पता नहीं चलेगा। तो मैं पेट दर्द का बहाना बना कर घर पर ही रुक गया, और कमरे में जाके सो गया। कुछ देर बाद मम्मी आई मुझे देखने तो मैं सोने का नाटक कर रहा था। मम्मी को लगा जैसे मैं सो रहा था।

फिर मम्मी बाहर रसोई में वापस अपने काम लग गई। कुछ देर बाद अंकल आए बिना आवाज किए सामान लेके। अंकल को पता था कि अगर आवाज करुंगा तो मम्मी खुद को सही से कवर कर लेगी और घूंघट निकाल लेगी। तो अंकल सीधे रसोई में आ गए, और मम्मी को देखा।

वो मम्मी को देखते ही रह गए और मैं कमरे की खिड़की से सब कुछ देख रहा था। मम्मी को पता भी नहीं चला कि अंकल आ गए थे, और अंकल उनके ब्लाऊज से बहते हुए पसीने को देख रहे थे। मम्मी की व्हाइट कलर की ब्रा साफ़ नज़र आ रही थी अंकल को, और गांड को तो ऐसे देख रहे थे मानो कि अभी जाके गांड को अपने हाथों में लेले।

फिर जैसे ही अचानक मम्मी मुड़ी, तो अंकल को देख कर हैरान हो गई, और खुद को संभालने लगी। पहली बार अंकल ने मम्मी का पेट जिस पर गहरी नाभी थी और सिर्फ ब्लाऊज में चेस्ट देखी। और अंकल तो मानो जैसे पागल हो गए थे।

मम्मी ने फिर खुद को जल्दी-जल्दी ठीक किया। इतने में अंकल ने जी भर के मम्मी को देख लिया। इस बात एहसास मम्मी को भी हो गया था, कि आज ये गलत हो गया था। फिर मम्मी साइड में होके घूंघट निकाल के बोली-

मम्मी: जी कहिए?

तो अंकल ने कहा: जी ये सामान जो आपने मंगाया था।

मम्मी ने कहा: रख दीजिए।‌ आप बाहर से ही आवाज लगा देते या रख देते, मैं ले लेती।

तब अंकल ने झूठ ही कहा: मैंने आवाज लगाई थी, पर आपने सुनी नहीं।

फिर अंकल ने कहा: और किसी सामान की जरूरत हो तो बता देना भाभी जी, मैं घर पर ही हूं।

मम्मी ने कहा: ठीक है।

फिर कुछ देर बाद मैं बाहर आया कमरे से तो मम्मी ने पूछा: कैसा है पेट दर्द?

मैंने कहा: अब ठीक है। मम्मी मैं अंकल के घर जा रहा हूं अखबार पढ़ने।

और जाके मैंने देखा कि अंकल हाफ पेंट में थे और उपर बनियान थी। उस हाफ पेंट मे अंकल के लंड का तंबू बना हुआ था। मैं चुपके से देख रहा था कि अंकल मम्मी को याद करके मुट्ठ मारना चाह रहे थे। तभी अंकल ने अपना लंड पेंट से बाहर निकाला और मेरी आंखे खुली की खुली रह गई।

भगवान! इतना बड़ा लंड मैंने आज तक कभी नहीं देखा था। कम से कम 9 इंच लम्बा और 3 अंगुली जितना मोटा और एक दम काला। और अंकल मुट्ठ मार रहे थे। तभी शायद अंकल को पता चल गया कि मैं उन्हे देख रहा था। तो जल्दी से उन्होंने अपना लंड पेंट मे डाल लिया और मुझे आवाज दी-

अंकल: राहुल, यहां क्या कर रहे हो बेटा?

तो मैंने भी कह दिया: आपको देख रहा हूं अंकल।

इससे अंकल शॉक्ड हो गए, और उन्होंने मुझे किसी से कुछ ना कहने को कहा। उनके घर वीडियो गेम था, तो उन्होंने मुझे कहा-

अंकल: आओ तुम्हे कुछ दिखाता हूं।

और जब मैंने वीडियो गेम देखा, तो मैं बहुत खुश हुआ। मैं सब कुछ भूल गया था, जो कुछ भी हुआ। लेकिन अंकल ने बातों-बातों में मम्मी के बारे में सब कुछ पूछ लिया। चूंकि अंकल के घर वीडियो गेम था, तो मैं भी अंकल को बहुत पसंद करने लगा। क्यूंकी जब भी मैं जाता तो अंकल घंटो तक मुझे वीडियो गेम खेलने देते थे।

मैं स्कूल से आता और सीधा अंकल के घर जाता गेम खेलने। लेकिन इससे मम्मी परेशान रहने लगी, और पापा से कॉल करके मेरी शिकायत की। लेकिन मेरे सर पर वीडियो गेम का भूत सवार था। फिर एक दिन मम्मी के पीहर से बस में कुछ सामान आया था, तो मम्मी ने पापा को कॉल किया। क्यूंकी बहुत भारी सामान था, और मैं अकेला ला नहीं सकता था।

इसलिए पापा ने अंकल को कॉल किया, लेकिन अंकल को लगा नहीं। मैं अंकल के घर ही गेम खेल रहा था। तब पापा ने मम्मी को कहा-

पापा: तुम चली जाओ हुसैन जी के घर, और राहुल को भी ले आओ। और हुसैन जी को भी कह आओ सामान के लिए।

मम्मी ने कहा: ठीक है।

फिर वही मेरी संस्कारी मां साड़ी सही करके घूंघट निकाल के पहली बार हुसैन अंकल के घर आई। घर पे अंकल केवल हाफ पेंट में बाहर आए। उपर कुछ भी नहीं पहन रखा था उन्होंने। तब मैं भी बाहर आया। अंकल छाती एक दम सांड के जैसी थी, और बालों से भरी हुई थी।

मम्मी एक बार देख के शर्म के मारे लाल हो गई, और साइड हो गई। वो दूसरी तरफ देख ने लगी। तभी अंकल ने कहा-

अंकल: भाभी जी इतना क्या शर्माना? मैं तो आपके घर का ही मेंबर हूं। इतना घूंघट क्यों निकलते हो?

मम्मी कुछ नहीं बोली और मेरा हाथ पकड़ के मुझे ले आई। फिरसे अंकल मम्मी की गांड को ताड़ रहे थे। और अपना लंड खुजा रहे थे। पापा की ट्रेनिंग के 8 दिन हो गए थे। अब कोई काम होता था तो मम्मी पापा को कॉल नहीं करती थी। सीधे अंकल को ही कॉल कर देती थी, और मम्मी के संस्कार और धार्मिकता देख के अंकल की भी हिम्मत नहीं हुई कि मम्मी के साथ ऐसी-वैसी हरकत कर दे,‌या कॉल पर कुछ कह‌दे।

अगले दिन मम्मी के फोन मे नेटवर्क नहीं आ रहा था, तो मम्मी ने मुझे दिया फोन और कहा: अंकल को फोन दिखा के आ, और पूछ कि क्या दिक्कत हुई है?

मैं लेके गया फोन तो अंकल ने एक प्लान किया। फोन पर पापा के नाम से नंबर सेव था। वहां पर पापा का नंबर हटा के उन्होंने खुद का नंबर पापा के नाम से सेव कर दिया। फोन मे सिम हिल्ली हुई थी, तो उन्होंने फोन को वापिस सही कर दिया। इसके बाद उन्होंने मुझे दे दिया फोन।

मैं वापस ले आया फोन। अगले दिन रविवार था तो मैं घर पे ही था। मैं कमरे में सो रहा था। तभी अंकल आए, कुछ देर दादी से बात की, और चले गए।

उसके कुछ देर बाद काम करते-करते मम्मी का पैर मुड़ गया, जिससे वो गिर पड़ी। दादी मंदिर गई थी,‌तो मैं भाग के अंकल को बुला के लेके आया। अंकल को तो जैसे मौका ही मिल गया था।‌ अंकल बनियान में थे। अंकल ने मम्मी को गोद में उठा लिया। अब मम्मी के बोबे अंकल की छाती से सट गए, और मम्मी शर्म से मरी जा रही थी।

फिर अंकल ने मम्मी को कमरे में सुलाया, और वापस अपने घर की तरफ दौड़े और एक मालिश करने वाली दवाई लेके आए। वो खुद ही मालिश करने लग गए। अब पेटीकोट ऊपर हो गया, और एक दम चिकनी टांगे दिखने लगी। अंकल पेटीकोट को और उपर करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मम्मी ने पैर दबा रखे थे।

घुटने से उपर अंकल को कुछ नहीं दिख रहा था। लेकिन तभी अंकल का लंड तंबू बन गया और मां ने भी ये देखा। पर मां ने नजर हटा ली। फिर अंकल वापस अपने घर आ गए। जब मम्मी का पैर ठीक हो गया, तो वो मां को वापस वो दवाई देने आए। शाम का वक्त था, और करीब 8 बजे थे।

मम्मी ने अंकल को धन्यवाद कहा। फिर जैसे ही मम्मी वापस मुड़ी, तब अंकल ने कहा-

अंकल: रुको भाभी जी, मुझे ये सब्जी बना दो, ये बनानी नहीं आती।

अंकल के कहने पर मम्मी सब्जी बनाने लगी, और अंकल ने अंदर आके एक पेग बनाया लार्ज और वापस रसोई में आ गए।

फिर अंकल ने मम्मी को कहा: तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, और मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। मेरी बीवी को मरे 10 साल हो गए है। मैं प्यार के लिए तरस गया हूं।

इतना सुनते ही मम्मी घबरा गई, और वहा से भाग के घर आ गई। अंकल भी डर गए कि कह तो दिया, और पता नहीं अब क्या होगा। घर आते ही मम्मी ने पापा को कॉल की, लेकिन कॉल आया अंकल के पास क्यूंकि पापा के नाम से अंकल‌ का नंबर सेव था। अंकल ने एक भी कॉल अटेंड नहीं की, क्यूंकी अटेंड करते तो मम्मी को पता चल जाता और मम्मी घबराई हुई थी।

मैंने देखा कि मम्मी को पता चल गया था, कि कुछ तो गड़बड़ की थी अंकल ने। फिर मैं सोने लगा। रात के 10 बजे बाहर कोई आया, और मेरी भी आंख खुल गई। मम्मी बाहर ब्लाउज और पेटीकोट में आई क्यूंकि मम्मी ने अपेक्षा नहीं की थी कि बाहर अंकल होगे। फिर जैसे ही मम्मी ने अंकल को देखा, तो मम्मी शॉक्ड हो गई।

अंकल बोले: भाभी जी प्लीज मुझे माफ कर दो। ऐसी गलती फिर नहीं होगी।

और ये सब मैं सुन रहा था। मम्मी दौड़ के अंदर आई, और दुप्पटा लेके अपने ऊपर फिर बाहर गई। वो अंकल पर गुस्सा करने लगी-

मम्मी: आपकी हिम्मत कैसे हुई ये सब कहने की? मैं ऐसी-वैसी नहीं हूं। मेरे पति को बताऊंगी आपकी इस हरकत के बारे में।

और मम्मी ने उन्हें एक थप्पड़ लगा दिया।

लेकिन फिर अंकल बोले: जब तक आप मुझे माफ नहीं करोगी, तब तक जाऊंगा नहीं मैं यहां से। इसमें मेरी क्या गलती है भाभी जी? आप हो इतने खूबसूरत। इसमें मेरा कोई कसूर नहीं।

मम्मी ने कहा: चुप-चाप चले जाओ, नहीं तो मैं चिलाऊगी।

तो अंकल बोले: इसमें आपकी बदनामी है।

ये कहते ही मां चुप हो गई बदनामी के डर से। ऐसा करते करते 1 घंटा हो गया, और अंकल मां की तारीफ करते गए। और इस बार मां ने एक थप्पड करने के लिए हाथ उठाया तो अंकल ने हाथ पकड़ लिया और खुद से सटा लिया। मम्मी छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन छुड़ा नहीं पाई।

वो चिला भी नहीं सकती थी और अंकल ने उनके हाथ को चूम लिया। उन्होंने मम्मी का दुप्पटा भी अलग कर लिया, और ऐसा करते-करते मम्मी और अंकल दूसरे कमरे में आ गए। बाहर से मैं उनको देखने लगा। अंकल ने मां को गले से चूमना शुरू कर दिया। लेकिन मम्मी छूटने की कोशिश कर रही थी।

फिर अंकल ने एक जोरदार समूच किया 2 मिनट तक, जिससे मम्मी अंदर तक हिल गई। फिर अंकल ने मम्मी की गांड को जबरदस्त तरीके से दबाया और ब्लाउज के उपर से बोबे मसल दिया। अब मम्मी ने भी गर्म हो गई और सोच लिया कि आज तो ये चोद के ही मानेगा, और मम्मी का किया कराया सारा धर्म भ्रष्ट हो गया।

फिर अंकल ने एक झटके में पेटीकोट का नाड़ा तोड़ दिया, और पेटीकोट खुल गया। फिर अंकल ने इतनी जोर से गांड मसली, कि गांड लाल हो गई। मम्मी भी अब थोड़ा-थोड़ा साथ देने लगी थी, और कामुक हो गई।

फिर एक 10 मिनट का लंबा स्मूच किया अंकल ने और मम्मी ने और ब्लाउज भी खोल दिया अंकल ने और ब्रा भी निकला दी। अंकल ने मम्मी को एक घंटे तक चूसा, और चूस-चूस के होंठ टमाटर की तरह लाल कर दिए।

मम्मी का तड़प-तड़प के बुरा हाल हो गया था। मम्मी की चूत इतनी साफ थी,‌ जैसे कुंवारी लड़की की होती है। अब अंकल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अंकल का लंड देख के मां बुरी तरह घबरा गई।

अंकल ने कहा: साली चूस इसे।

मम्मी ने साफ मना कर दिया और कहा: मैंने आज तक नहीं किया ऐसा।

लेकिन अंकल ने मम्मी को बालों से पकड़ के खींच के अपना लंड मां के मुंह मे घुसा दिया, जो आधा ही गया।‌उन्होंने आधे घंटे तक लंड चुसवाया मां को। फिर मां की गांड पर जोर-जोर से 2-4 थप्पड़ मारे, और मां की टांगे ऊंची करके लंड मां की चूत पर लगा दिया।

फिर उन्होंने जोर झटका मारा, जिससे लंड का टोपा ही अंदर गया और मां की चूत फट गई और खून आने लगा। मां रोने लग‌ गयी। लेकिन अंकल कहा रुकने वाले थे। उन्होंने एक झटका और मारा, और आधा लंड चूत में समा गया। अब मम्मी को असहनीय दर्द हो रहा था।

फिर अंकल कुछ देर रुके, और मम्मी का दर्द भी कुछ कम हुआ। मम्मी को अब मजा भी आने लगा, और इस बार एक और झटके में अंकल ने अपना पूरा लंड डाल दिया। मां जबरदस्त दर्द में थी, लेकिन धीरे-धीरे मां को मजा आने लगा। करीब 15-20 मिनट बाद अंकल ने सारा वीर्य मां की चूत में छोड़ दिया।

उस रात अंकल ने मम्मी को 7 बार चोदा, और एक संस्कारी औरत को रण्डी बना दिया। सुबह मां से उठा भी नहीं गया। दो दिन तक मां ठीक से नहीं चल पाई, इतनी बेरहमी से चोदा था अंकल ने। फिर मां प्रेगनेंट भी हो गई। मां एक और लड़का हुआ, मेरा छोटा भाई।

पापा सोचते है वो उनका है, पर वो उनका नहीं हुसैन अंकल का है। और कुछ दिन बाद अंकल वो घर छोड़ के चले गए।
 
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junglecouple1984

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हनीमून पर कपल की अदला बदली - 1





मैं रोमा आज फिर से नई कहानी लेकर आप सभी के सामने हाजिर हुई हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि मेरी ये कहानी आप सभी को पसंद आएगी। आप सभी को कहानी पसंद आये तो मैं आप से गुजारिश करती हूँ कि मुझे अपना फीडबैक मेल करके जरूर दें।

पिछली कहानी से बहुत ही कम फीडबैक मिला था। आप सभी से रिक्वेस्ट है कहानी पढ़ के कहानी कैसी लगी ये मुझे मेल करके जरूर बताएं।

मैंने पिछली कहानी में आप सभी को बताया था, कि कैसे मेरे होने वाले पति निखिल ने मुझे कार में लेजा कर जंगल में मेरी पहली चुदाई की थी। और फिर निखिल का दोस्त नीलेश भी वहाँ आया। उसने भी अपनी होने वाली वाइफ की हमारे सामने ही चुदाई की थी।

अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है, तो पहले आप मेरी पिछली कहानी पढ़ ले, तभी आप को मेरी ये कहानी पढ़ने का मज़ा आएगा।

मेरी ये कहानी उसके बाद की है। उसके बाद क्या हुआ आईये आगे पढ़ते है।

अब मेरी और नीलेश की शादी की डेट नज़दीक ही थी। और उसी टाइम निखिल के दोस्त नीलेश की भी शादी थी।

दोनों दोस्तों की शादी पंद्रह दिनों के अंतराल पर होनी थी। पहले मेरी और निखिल की शादी हुई। उसके पंद्रह दिन बाद नीलेश और टीना की शादी हुई। शादी के बाद हम चारों अब आपस मे काफी घुल मिल गए थे। मेरी भी अब टीना से अच्छी दोस्ती हो गई थी। चारों की आपस में खूब बातें होने लगी थी। चारों ने अपना हनीमून मालदीव्स में मनाने का तय किया।

शादी की धमाचौकड़ी के बाद हम दोनों कपल मालदीव्स के लिए रवाना हुए। सुबह की फ्लाइट से हम दोनों जोड़े मालदीव्स पहुंचे और वहाँ स्पीड बोट से विललिंगिली रिसोर्ट आइलैंड पर पहुंचे। वो बहुत ही खूबसूरत सा आइलैंड था और उस आइलैंड के रिसोर्ट की खूबसूरती का मंजर और भी मनमोहक था।

रिसोर्ट का रूम भी बहुत ही सुंदर था। रूम में किंग साइज़ बेड, बाथरूम में बड़ा सा बाथ टब, बाहर एक प्राइवेट स्वीमिंग पूल फ्रिज में बार से लेकर व्हिस्की, तरह-तरह की कॉफ़ी और चाय के फ्लेवर, और हमारे स्वागत में उनके नाम का एक केक और फ्रूट ट्रे टेबल पर रखी थी।

एक तो हम चारों की नई शादी हुई थी, और ऊपर से रिसोर्ट का माहौल ही एसा था, कि रिसेप्शन से अपने रूम तक आते-आते हमें कई जोड़े सिर्फ नाम के कपड़ों में एक दूसरे से लिपटे-चिपटे दिखाई दिए। किसी को किसी की कोई परवाह नहीं थी।

हम दोनों कपल का रूम आमने-सामने ही था। फिर हम अपने-अपने रूम में चले गए। रूम में आते ही निखिल ने सारा समान एक साइड किया और वो मुझ पर टूट पड़ा। निखिल ने मेरा टॉप और ब्रा निकाल फेंकी, और फिर मैंने नीचे बैठ कर निखिल का शॉर्ट्स और अंडरवेअर उतार दिये और उसका लंड अपने मुंह में ले लिया।

निखिल तो जैसे पागल हो गया था। कुछ देर मैंने उसका लंड चूसा। फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठा कर गुदगुदे बैड पर पटक दिया, और उछल कर बैड पर ही कूद गया।

बैड स्प्रिंग के गद्दों का था, तो उछल कूद करने का मजा ही अलग था। रिसोर्ट वालों को अच्छे से मालूम था, कि यहाँ इन बैड्स पर कैसी-कैसी कुश्ती होती हैं।

अब हम दोनों पूरे नंगे हो कर एक दूसरे से लिपट गए। हम दोनों एक दूसरे को खा जाना चाहते थे। निखिल ने मेरी दोनों टाँगें ऊपर उठा कर चुदाई शुरू की। तभी रूम की घंटी बज गई।

निखिल रुकने लगा तो मैं हंस कर बोली: जरूर वो तुम्हारा कमीना दोस्त ही होगा। उसने अपना काम निपटा लिया होगा, और आ गया हमारे बीच में!

बेल बजती रही पर निखिल और मैं चुदाई पूरी करके ही माने। फिर हम लोग अलग हुए और निखिल ने मुझसे कहा-

निखिल: तुम वाशरूम में जाकर नाहा लो।

जब मैं बैग खोलने लगी, तब निखिल ने कहा: जो मेरा बैग है, उसमें एक छोटा कैरी-बैग होगा, उसे ले जाओ। और उसमें जो होगा, वही पहनना।

मैंने वो कैरी-बैग निकाली, और उसे लेकर वॉशरूम में चली गई। मेरा पूरा बदन निखिल के वीर्य से गंदा था।

अब मैं नहाने लगी। मैंने सारे बदन और चूत को अच्छे से साफ किया। जब नाहा कर हो गया, तब मैंने वो कैरी-बैग खोली और वो खोलते ही मैं थोड़ी शॉक भी हुई और मुझे शर्म भी आई। उसमें एक छोटी सी शॉर्ट्स और उस से भी छोटी टॉप थी। वो एक दम सेक्सी ड्रेस थी।

जब मैंने वो शॉर्ट्स पहनी, तो वो सिर्फ मेरी गांड को ही छुपा पा रही थी। और टॉप भी इतनी छोटी कि सिर्फ बूब्स ही ढक पा रही थी। मुझे वो पहन के निखिल के सामने जाने में इतनी शर्म आ रही थी, कि बता नहीं सकती। अब ये मुझे निखिल ने दिया था, तो मुझे पहनना था। इसलिये मैंने वो कपड़े पहने, और बाहर आ गई। मैं बाहर आई तब तक नीलेश जा चुका है।

निखिल ने मुझे देखा और कहा: मैंने जब ये कपड़े लिए थे,‌ तो उतने सुंदर नहीं थे जितने अब तुम्हारे पहनने पर लग रहे है। आज कोई भी आदमी तुम्हे देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाये।

उनकी बात सुन कर मैं बोल पड़ी: किसी और आदमी का क्यों, क्या तुम्हारा खड़ा नहीं हुआ?

तो निखिल बोले: मेरा तो हमेशा ही खड़ा हो जाता है।

फिर निखिल ने बताया कि नीलेश आया था। वो कह रहा था कि डिनर के लिए चलते है।‌ तो मैंने भी निखिल से कहा-

मैं: हाँ भूख तो मुझे भी बहुत लगी है। निखिल अब तुम भी नाहा लो, फिर हम चलते है

निखिल जब नाहा रहा था, तब फिर से रूम की बेल बजी। मैंने डोर खोला तो सामने नीलेश और टीना थे। वो कहने लगे-

वो दोनों: तुम दोनों को और कितना टाइम लगेगा?

मैंने उन्हें बताया: निखिल बस नाहा रहा है, बस उसके बाद चलते है।

निखिल के तैयार होने के बाद हम रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए निकल गये।

मैंने निखिल की दी हुई सेक्सी ड्रेस पहनी थी, जिसके बारे में मैंने आप को बताया है। निखिल और नीलेश ने शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनी थी। और टीना ने एक शार्ट फ्रॉक पहनी थी।

रेस्टोरेंट में जो भी जोड़े थे, कपड़े कुल मिला कर सभी के ना के बराबर ही पहने थे। फिर हमने साथ खाना खाया और फिर वहाँ डांस फ्लोर पर थोड़ा डांस किये, और थोड़ी देर समुद्र तट पर घूमते रहे। रात के करीब 10 बज चुके थे। तो अब हमने अपने-अपने कमरों में लौट जाना ठीक समझा, और हम रूम पर गए।

रूम में जाते ही निखिल ने मुझे गोद मे उठाया, और बाथरूम में लेके जाने लगा। बाथरूम में अंदर जाते ही निखिल ने मुझे नीचे खड़ा किया और खुद की टी-शार्ट निकाल दी और तुरंत ही शॉवर चालू कर दिया।

उनकी इस हरकत से हम दोनों शॉवर के नीचे भीगने लगे। तभी निखिल मेरे होंठो को चूसने लगे और काटने लगे। एक बार तो उन्होंने इतनी जोर से काट लिया, कि मैं चिल्ला पड़ी। पर वही दर्द के मज़े में मैंने भी अब उनको किस करना शुरू कर दिया। हम बहुत टाइम तक एक दूसरे के होंठो को चूसते रहे।

किस करते-करते ही निखिल ने मेरे और मैंने निखिल के कपड़े खोल दिये, और दोनों बिल्कुल नंगे शॉवर के नीचे खड़े हो गए। हम दोनों शॉवर के पानी की वजह से कांप रहे थे, क्योंकि पानी ठंडा था पर हमारे जिस्म की गर्मी बढ़ती जा रही थी।

निखिल धीरे-धीरे नीचे आते गया, और मेरे बूब्स के पास आ कर वो उन्हें चूसने लगे और दबाने लगे। तभी मैंने भी अपना एक हाथ निखिल के लंड पे रख दिया, जो पहले से ही बिल्कुल तना हुआ था। तब मैंने निखिल का लंड हाथ में पकड़ा और रगड़ने लगी और आगे-पीछे किया, जिससे निखिल के मुँह से सिसकारियां निकलने लगी।

वो बोला: आह आह जानेमन, आज मेरे लंड पे बड़ा प्यार आ रहा है।

मैं भी अब इतनी गरम हो चुकी थी। तभी मैंने निखिल से कहा-

मैं: अपनी आँखें बंद कीजिये।

वो पूछने लगे: क्यों।

पर फिर उन्होंने आँखे बंद कर ही ली। उनकी आँखे बंद करते ही मैंने उनका लंड हाथ से छोड़ दिया तो वो पूछने लगे-

निखील: क्यों छोड़ दिया?

तो मैंने कहा: जरा सब्र रखिये।

फिर मैंने पास में ही पड़ा साबुन लिया, और उसको मसल कर निखिल के लंड पे लगा दिया, और लंड को मसल कर पूरा अच्छे से साफ कर लिया। मैंने शॉवर के पानी से लंड को धो दिया। ये सब करते वक़्त निखिल की आँख मैंने बंद ही रखवाईं थी।

फिर मैं तुरंत ही नीचे घुटनों पे बैठ गयी, और निखिल के लंड को रगड़ने लगी, और फिर उनके लंड के टॉप को थोड़ा मुँह में लेके जीभ से चाटने लगी। मेरे ये करते ही निखिल बोला-

निखिल: आह जान!

ये कहते हुये वो चिल्ला पड़ा और आँखे खोल कर मुझे देखने लगा। उनके चेहरे का भाव देख के में समझ चुकी थी अब वो पूरे उत्तेजित थे। इसलिए मैं रुकी नहीं और थोड़ा-थोड़ा करके लंड मुँह में लेके चूसने लगी। मेरे ऐसा करने से निखिल खुद को बिल्कुल रोक नहीं पाए, और अपने हाथ से मेरे सर को पकड़ कर जोर-जोर से कमर हिलाने लगे,‌और मेरे मुँह को अपने लंड से चोदने लगे।

निखिल के ऐसा करने से लंड मेरे गले तक जा रहा था। लंड का सुपाड़ा मेरे गले मे फंस रहा था, जिससे मेरी सांसे रुक रही थी और मेरी आंखों से आंसू आने लगे थे।

मेरी ऐसी हालत देख कर निखिल रुक गए, और मुझे खड़ी करके खुद नीचे बैठ कर मेरी चूत में फच से एक उंगली घुस दिए। मेरे मुँह से बहुत जोर से चीख़ निकली आह करके। फिर निखिल ने दो उंगलियां एक साथ मेरी चूत में घुसा दी, और अपनी उंगलिया मेरी चूत में आगे-पीछे करने लगे। में पागल सी होने लगी थी।

मेरी ऐसी हालत देख कर निखिल समझ चुके थे। तब फिर वो खड़े हो गए और तभी उन्होंने खड़े-खड़े ही मेरी एक टांग ऊपर उठाई, और नीचे से अपना लंड मेरी चूत में घुसाने लगे। उनका ऐसा करना मैं समझ नहीं पाई। मैं उनसे कहने ही वाली थी कि नीचे लेट जाऊँ, पर तभी उन्होंने एक-दम से पूरा लंड एक बार में ही मेरी चूत में पूरा अंदर तक घुसा दिया।

मैंने कभी नहीं सोची थी, कि वो ऐसा करेंगे और पूरा लंड खड़े-खड़े मेरी चूत में घुसा देंगे। वो मेरे होंठो को चूसने लगे जोर-जोर से और मेरे बूब्स को दबाने लगे। मैं तो जैसे आसमान में उड़ रही थी। चूत में लंड, बूब्स दबवाना, होंठो को चूसना सब एक साथ मेरे शरीर पर हो रहा था। अब निखिल ने खड़े-खड़े ही लंड के झटके मारने शुरू किए। पर मुझे वैसे बहुत दर्द हो रहा था।

इसलिए उन्होंने मुझे नीचे गांड से पकड़ कर अपनी कमर तक उठा लिया। मैंने भी उनकी कमर को अपने पैरों से बांध लिया। ये करते ही उन्होंने फिर से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, और चुदाई करने लगे। वो तेज-तेज झटके मारे जा रहे थे। नीचे चूत में गरमी बढ़ रही थी, और ऊपर शॉवर से ठंडा पानी। दोनों का ऐसा मिलन था, जिसे बोला नहीं जा सकता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

ऐसी ही जोरदार और तेज चुदाई कुछ 10 से 15 मिनट चली। तभी मैं जोर से चीख पड़ी-

मैं: आह निखिल आहहह, मेरा निकल रहा है।

ये कहते-कहते मेरी चूत से उस वक़्त ऐसा पानी निकला, जैसे पहले कभी नहीं निकला था। मेरा पानी निकलते ही सारी गर्माहट निखिल के लंड पे लग गई, जिससे उनमें और जोश आ गया और निखिल मुझे और ज्यादा तेजी से चोदने लगा। अब तो ऐसे चोद रहे थे, कि पूरा लंड अंदर तक जा रहा था, और पूरे बाथरूम में फच-फच थप-थप की आवाज गूंजने लगी थी।

कुछ करीब और 10 मिनट मेरी चूत चुदती गई, और मेरा फिर से पानी निकलने लगा तो में चिल्लाई-

मैं: निखिल मेरा फिर से निकल रहा है।

निखिल ने कहा: मेरा भी निकल रहा है जानेमन।

और ये कहते ही कुछ 5 से 6 धक्के मार कर उन्होंने अपने लावे की पिचकारी मेरी चूत में डाल दी। तो दोस्तों ये तो सिर्फ मेरे हनीमून की पहली रात थी, जो कि बहुत ही सुहानी बीती।

अगले दिन हम चारों घूमने के लिए निकले। उस दिन भी निखिल ने मुझे एक शार्ट फ्रॉक पहनने के लिए कहा, और अंदर भी मैंने एक सेक्सी सी पिंक कलर की ब्रा-पेंटी पहन ली थी। मेरी फ्रॉक कुछ ज्यादा ही छोटी थी, जो कि सिर्फ मेरी पेंटी को ही ढक रही थी। बस पता नहीं क्यों निखिल मुझे इतनी छोटी-छोटी ड्रेस पहनने को कह रहा था। पर मुझे भी इसमें कोई दिक्कत नहीं थी।

मुझे भी ये सब अच्छा लग रहा था। उधर टीना ने भी मेरे ही तरह ड्रेस पहनी हुई थी। हम दोनों ही बहुत सेक्सी लग रही थी। टीना और मुझमें भी अब काफी अच्छी अंडरस्टैंडिंग हो गई थी।

हम चारों एक समुद्र तट पर थे। कुछ देर वहाँ घूमने के बाद मैं और निखिल जेटस्की पर राइड के लिए गए। हमने नीलेश और टीना को भी चलने के लिए कहाँ, पर उन्होंने मना कर दिया, और वो दोनों समुद्र तट पर ही एक कोने में धूप सेकने के लिए लेट गए। हम दोनों जेटस्की पर बड़े मजे से राइड कर रहे थे। बहुत मजा आ रहा था। मैं कस कर निखिल को पकड़ कर बैठी थी और धीरे-धीरे उसके लंड को सहला रही थी।

कुछ ही देर बाद हमने देखा, तो नीलेश और टीना दोनों समुद्र की लहरों में एक दूसरे के साथ मस्ती कर रहे थें। टीना ने अपनी फ्रॉक उतार दी थी। और अब वो सिर्फ ब्रा पेन्टी में थी। नीलेश भी सिर्फ एक छोटी अंडरवेअर में था।

वो दोनों बिना किसी शर्म के एक दूसरे के साथ मस्ती कर रहे थे। कभी नीलेश टीना को चूमता, तो कभी उसके बूब्स दबाता। ये सब मैं देख रही थी, फिर कुछ देर बाद वो दोनों पानी से निकल कर अपने उसी स्थान पर पहुंच गए जहाँ पहले वो लेटे हुये थे।

फिर नीलेश ने टीना की ब्रा उतार दी, और टीना के बूब्स चूसने लगा। ये सब देख कर मुझे थोड़ी हैरानी हुई, कि ये दोनों कैसे इस खुले समुद्र तट पर एक दूसरे से चिपके हुए थे। ये जब मैंने निखिल को दिखाया तो निखिल भी अब जेटस्की को समुद्र से किनारे पर ले आया और मुझे वहाँ नीलेश और टीना के पास चलने को कहा। मैंने मना किया तो वो नहीं माना और मुझे अपनी गोद मे उठा कर उनके पास ले गया।

जब हम दोनों उनके पास गए, तो मैं थोड़ी शर्मा रही थी। क्योंकी टीना ऊपर से तो नंगी ही थी, और बिना किसी शर्म के लेटी हुई थी। नीलेश उसके ऊपर था। मेरे पति निखिल उन दोनों को इस तरह देख कर गरम हो रहे थे, और मेरे बूब्स दबा रहे थे। पर मैं उन्हें मना किये जा रही थी।

तभी नीलेश और टीना बोल पड़े: रोमा इतना मत शर्माओ,‌ हम यहां हनीमून मनाने आये है। इसमें इतना झिझकने वाली बात नहीं है। रिलेक्स हो कर एन्जॉय करो।

तब मैंने भी अपनी शर्म कम की और याद किया, कि कैसे उस दिन जंगल में मैंने नीलेश और टीना को नंगे होकर सेक्स करते देखा था। तो आज भी जब वो मेरे सामने नंगे थे, तो शर्म कैसी? और मैं रिलैक्स हो गई, और निखिल के इस तरह मेरे बूब्स दबाने से मैं गरम होने लगी थी।

तब निखिल ने भी मेरी ब्रा उतारनी चाही, पर मैंने उसे ये करने नहीं दिया। उधर नीलेश ने अब टीना की पेंटी भी उतार दी थी, और वो उसकी चूत चाटने लगा था। ये देख मेरे अंदर और गरमी आ गई। पर मैं ऐसे खुले में समुंद्र तट पर नंगी नहीं होना चाहती थी। और वो भी किसी गैर मर्द के सामने। तो मैंने निखिल को वॉशरूम में चलने का कहा, जो कि समुंद्र तट पर ही था।

और वहाँ जा कर निखिल ने मेरी चुदाई शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद निलेश और टीना भी वहाँ आ गये, और बाजू वाले वॉशरूम में घुस कर उन्होंने भी अपनी चुदाई शुरू कर दी। चुदाई खत्म होने पर हम लोग वही पर फ्रेश हुए। फिर हम दो तीन जगह और घूमने के लिए गये और रात का खाना खा कर अपने रिसॉर्ट मे लौटे।

एक दो दिन ऐसे ही बीत गए। हमारा करीब एक हफ्ते का प्रोग्राम था। 2 दिन तो सब ठीक चला। इस दौरान हम दोनों कपल ने खूब खाया, पिया, किसी चीज का कोई परहेज नहीं किया। मतलब हम दोनों ही कपल एक दूसरे के इतने करीब आ गए कि एक दूसरे से कोई बात छिपी नहीं थी।

मैं और टीना दोनों ही नई नवेली दुल्हन थी। दोनों के हाथों में मेहँदी, कलाई में लाल चूड़े, मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र थे। हम दोनों ही खूब सेल्फ़ी और फोटोज़ ले रहे थे। हम एक दूसरे के बदन को भी छूने लगे थे। कभी निलेश मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे अपनी और खींचता, तो उधर निखिल भी टीना से लिपट जाता था।

मेरे बूब्स टीना से साइज में थोड़े बड़े थे, तो नीलेश को जब भी मौका मिलता, वो जोर से मेरे बूब्स दबाता। मैं भी इस बात का कोई विरोध नहीं करती, क्योंकि मुझे भी मजा आता था।

ऐसे ही एक रात घूम के आने के बाद हम चारों मेरे रूम में ही थे, और बातें कर रहे थे।

तभी नीलेश ने कहा: कुछ गेम खेलतें है।

तो चारों ने मिल कर ताश खेलने का प्रोग्राम बनाया। सबको आईडिया पसंद आया, पर दिक्कत ये थी, कि मुझे ताश खेलना नहीं आता था। तो नीलेश ने कहा कि कोई आसान सा गेम खेलेंगे। मैं तुम्हे सिखा दूंगा। और इसमें एक टविस्ट ये होगा कि हारने वाले को जीतने वाले की कहीं हुई बात माननी होगी। सब राजी हो गए, तो हम चारों गोल चक्कर बना कर बैठ गए।


 
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junglecouple1984

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हनीमून पर कपल की अदला बदली-2





पत्ते बांट दिए गए। हर कोई खेलने लगा। सब को मज़ा आ रहा था। फिर एक बाज़ी में नीलेश जीत गया, और निखिल हार गया। तो नीलेश ने निखिल से अपनी टी-शर्ट उतारने के लिए कहा। तब निखिल ने अपनी टी-शर्ट उतार दी। हम सब हूटिंग करने लगे।

अगली बाजी में निखिल जीत गया और टीना हार गई। तो निखिल ने टीना से उसका पहना हुआ टॉप मांग लिया। इस बात से मैं तो सन्न रह गई, कि निखिल ये क्या बोल रहा था। जब मैंने नीलेश ओर टीना की तरफ देखा, तो निखिल की इस बात से जैसे उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ा। मैंने सोचा, कि अब टीना गेम छोड़ देगी, मगर उसने अपना टॉप उतारा और निखिल को दे दिया।

गोरे बदन पर उसने लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी, और उसके बूब्स की क्लीवेज में फंसा उसका मंगलसूत्र लटक रहा था। अगली बाज़ी में मैं नीलेश से हर गई। तो फिर नीलेश ने भी मुझसे मेरा टॉप मांग लिया। मैंने निखिल की तरफ देखा। निखिल भी मुझे देख रहा था पर कुछ ना बोल सका।

तब नीलेश ने कहा: गेम तो गेम है डियर, तुमको गेम के नियम मानने पड़ेंगे।

तो थोड़ा सा संकुचाते हुए मैंने भी अपना टॉप उतार कर नीलेश के हाँथों में दे दिया। ब्लैक ब्रा में मेरे बूब्स देख कर नीलेश बोला-

नीलेश: वाह! इसे कहते है ब्यूटी। सच मे रोमा, तुम्हारे बूब्स लाजवाब है।

मैं थोड़ा शरमाई, मगर फिर भी गेम खेलती रही। इसी तरह गेम चलता रहा और एक-एक करके सब के कपड़े उतरने लगे। अब नीलेश ओर निखिल सिर्फ चड्डियों में थे। और टीना और मैं सिर्फ ब्रा-पेंटी में ही रह गए थे।

हमको ब्रा-पेंटी में देख कर नीलेश ओर निखिल के लंड अब तन चुके थे। और वो हमें उनकी चड्डियों में से अकड़े हुए दिख रहे थे।

फिर अगली बाज़ी में जब टीना जीती। तो उसने निखिल से चड्डी उतारने को कहा। निखिल ने बिना देर किए ही अपनी चड्डी नीचे खिसका कर उतार दी। फिर मेरे जीतते ही मैंने भी नीलेश की चड्डी उतरवाई। अब दोनों मर्द हमारे सामने बिल्कुल नंगे बैठे थे, और उनके तने हुए लंड देख कर हमारा भी मूड बन रहा था।

आज मैं किसी पराये मर्द को अपने पति के सामने ही नंगा देख रही थी। जो ठीक मेरे सामने था। उसका लंड देख कर मेरे मुँह से तो लार टपकने लगी। नीलेश का लंड गजब का मोटा ओर लम्बा था। अगली बाज़ी में पहले निखिल ने टीना की ब्रा-पेंटी उतरवा दी, और फिर नीलेश ने मेरी ब्रा-पेंटी उतरवा दी।

अब हम चारों बिल्कुल नंगे थे। पर गेम रुका नहीं। फिर अगली बाज़ी में नीलेश ने मुझे हराया, और मुझे अपनी गोद में आकर बैठने के लिए कहा। इसकी इजाजत मुझे निखिल ने दे दी, तो मैं नीलेश की गोद मे जा कर बैठी। उसका तना हुआ लंड मेरी चूत से लगा। मेरा तो दिल किया कि ये मेरी चूत में ही घुस जाए, पर पति के सामने कैसे करती।

फिर ऐसे ही टीना को भी निखिल ने अपनी गोद मे बिठा लिया।

बेशक मुझे लग रहा था कि ये गेम सिर्फ हमें बेवकूफ बना कर सेक्स पार्टी मनाने के लिए खेला जा रहा था। पर कहीं ना कहीं सबको ये अच्छा लग रहा था। तो सब चुप रह कर एन्जॉय कर रहे थे। टीना और मैं एक-दूसरे के पतियों की गोद में बैठी हुई थी।

फिर एक और बाज़ी हुई तो नीलेश से मेरे पति निखिल हर गये।

तो नीलेश ने कहा: मैं रोमा को चोदना चाहता हूँ।

एक बार को तो कमरे मे सन्नाटा से छा गया। मैंने फिर से अपने पति निखिल की तरफ देखा तो निखिल ने मुझे आँखों से इशारा करके हामी भर दी, और इजाज़त दे दी। तो फिर मैं उठी और नीलेश से बोली: चलो, कहाँ चोदोगे?

फिर नीलेश ने मुझे वहीं लिटाया, और मेरी टांगे खोल कर अपना लंड उसने मेरी चूत पर रख दिया। मैंने भी अपनी कमर उठा कर उसके लंड को अपने अंदर ले लिया। हम दोनों के बदन एक हुए। वो अपने होंठों को मेरे होंठो से मिला कर किस करते हुए धीरे-धीरे अपनी कमर चलाने लगा।

ये देख कर टीना खुद ही नीचे लेटा गई, और निखिल जैसे ही उसके ऊपर आया, तो टीना ने अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ लिया और चुदाई शुरू हो गई। टीना मेरे पति निखिल से चुद रही थी, और मैं उधर टीना के पति नीलेश से चुद रही थी। माहौल बहुत गर्म था।

जब नीलेश मुझे चोद रहा था तो बोला: जानती हो रोमा जब हम इस हनीमून ट्रिप पर निकले थे, तो तभी मेरे दिल में यह ख्वाहिश थी कि मैं तुम्हारी चुदाई करू। और देखो आज मेरी ये ख्वाहिश पूरी हो गई। इतने बड़े-बड़े बूब्स जिन्हें मैं छू सकता हूँ, चूस सकता हूँ। और ये संगमरमर जैसा तुम्हारा ज़िस्म, जिसे में सहला सकता हूँ। तुम बहुत सेक्सी हो रोमा डार्लिंग!

ये कह कर उसने मेरे बूब्स पकड़े और बच्चों की तरह चूसने लगा। यही हाल टीना और निखिल का भी था। आधी रात तक हम चारों का चुदाई का प्रोग्राम ऐसे ही चलता रहा। फिर धीरे-धीरे हम चारों ही झड़ गए, और सब वहीं लेटे-लेटे सो गए।

हम सब जब सुबह सो कर उठे तो हम चारों नंगे ही थे। तो मैंने हंसते हुए निखिल और नीलेश से कहा-

मैं: अभी रात में ही तो तुम्हारे लंडो की हवा निकाली है। ये तो फिर खड़े हो गए?

नीलेश बोला: रोमा जी, अब तो ये इंडिया पहुँच कर ही शांत होंगे। यहाँ तो अंदर-बाहर चारों तरफ ही सेक्स के नजारे हैं। यहाँ तो बम्बू का तम्बू तना ही रहेगा। और चारों हंस पड़े।

निखिल रूम के बाहर बने पूल में उतर गया, और उसने मुझे और टीना को भी बुलाया। टीना तो गई नहीं, पर मैं पूल में उतर गई। टीना और नीलेश रूम के अंदर ही थे। अब यह कोई कहने की बात नहीं कि उन दोनों पति-पत्नी ने एक-दूसरे को चूमना चाटना शुरू कर दिया था। बाहर निखिल मुझे पानी में नीचे खींच कर मेरे बूब्स दबा रहा था। तो मैंने भी निखिल का लंड ऊपर से पकड़ लिया था।

मैं समझ गई कि अब अगर अंदर से टीना और नीलेश बाहर नहीं आये, तो पक्का उधर उन दोनों की चुदाई चल रही होगी। तब मैं पूल से बाहर आ गई। मेरा अंदाज सही था। नीलेश और टीना के होंठ मिले हुए थे, और दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे।

मैंने ऐसा दिखाया कि मैंने कुछ देखा नहीं है और जोर से निखिल को आवाज दी। तब नीलेश और टीना दोनों शीशे का दरवाजा खोल कर बाहर आ गए। जब वो दोनों बाहर आये तो मैं वाशरूम में बने बाथटब में चली गई, निखिल भी पीछे-पीछे चला आया।

तभी कुछ देर बाद टीना की आवाज आई कि वो दोनों जा रहे थे, और लंच पर रिसोर्ट के रेस्टोरेंट में एक घंटे बाद मिलेंगे। असल में निखिल ने मुझे ओर नीलेश ने टीना को गर्म कर दिया था। तो अब दोनों को चुदाई सूझ रही थी.

रूम का दरवाजा बंद होने की आवाज आते ही निखिल ने बाथटब में ही मुझे घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया, और फिर यह चुदाई अंदर बेड पर आकर ही पूरी हुई।

एक घंटे बाद रूम का फोन बजा। नीलेश ने रूम से बाहर आने को कहा था। निखिल ने फटाफट बरमूडा और टी-शर्ट और मैंने एक फ्रॉक डाली, और दोनों बाहर आ गए। बाहर वो एक बैटरी रिक्शा जिसे वहाँ बग्गी बोलते थे, में बैठे थे।

टीना ने तो एक टॉप और स्कर्ट डाली थी, और नीलेश शॉर्ट्स और टी-शर्ट में था। टीना की स्कर्ट तो शार्ट थी, जिससे स्कर्ट का पहनना या ना पहनना बराबर था। पर उसने पैंटी पहन रखी थी। ब्रा हम दोनों लड़कियों ने नहीं पहनी थी, तो झुकते ही देव दर्शन हो जाते थे। खाना खाकर चारों समुद्र तट पर रेत पर ही लेट गए।

वहाँ रिसोर्ट के बंदे ने हमें नीचे बिछाने को टॉवल दे दिये। वहाँ कुछ टाइम मस्ती करने के बाद हम चारों अपने-अपने रूम की ओर चल दिए। रास्ते में हमें बग्गी मिल गई, तो आगे तो निखिल और मैं, और पीछे नीलेश और टीना बैठ गये ।

पहले मेरा रूम पड़ा तो मैं नीलेश ओर टीना को बाय बोल कर अपने रूम की ओर हंसते हुए चल दी। रात को हम वापस रेस्टोरेंट में जाकर डिनर करके आये। रेस्टोरेंट के रास्ते में माहौल बहुत सेक्सी था। एक तो रिसोर्ट बहुत सेफ था, ऊपर से अँधेरा और एकांत। रास्ते में अनेक जोड़े एक दूसरे को चूमते चाटते मिले। एक दो तो शायद सेक्स भी कर रहे थे। अब पेड़ की ओट में अंधेरे में कौन क्या कर रहा है, किसी को किसी की परवाह नहीं थी।

वहीँ रिसोर्ट के कोने में एक कॉमन बड़ा सा स्विमिंग पूल था। जब हम वहाँ से निकल रहे थे, तो हमने देखा कि कुछ विदेशी जोड़े उसमें उतरे हुए थे और खुल कर बेशर्मी कर रहे थे। उन्हें देख कर नीलेश को मस्ती आ गई। उसने रिसोर्ट की हेल्प डेस्क से चारों के लिए स्विमिंग कोस्ट्यूम इशू कराये, और चारों कपड़े बदल कर स्विमिंग पूल में उतर गए।

अंदर छेड़-छाड़ पूरे जोरों पर थी। चारों ओर अंधेरा था, और हल्का म्यूजिक चल रहा था। नीलेश ने टीना के टॉप को ऊपर कर दिया जिससे उसके मम्मे बाहर आ गए। तो टीना ने भी नीलेश का लंड बाहर निकाल दिया। निखिल ओर मैं ये सब देख कर हैरान थे कि वो दोनों कैसे बिना किसी शर्म के इतने सारे लोगों के बीच मे एक दूसरे को नंगा कर रहे थे।

इस बीच निखिल ने नीलेश को कह दिया: हम रूम में जा रहे है।

तो नीलेश ने कहा: रुको, कुछ ही देर में हम भी साथ चलेंगे।

फिर शायद उन्हें भी कुछ शर्म आई, तो उन लोगों ने अपने कपड़े ठीक किये और आधे घंटे मस्ती करने के बाद बिना कपड़े बदले ही हम अपने-अपने रूम की ओर चल दिए। वहाँ पहुंच कर नीलेश ने ऑफर दिया: चलो पूल में ड्रिंक करेंगे।

इधर निखिल को भी मस्ती सूझ रही थी, तो उन्होंने भी हाँ कह दी।

तो हम चारों नीलेश ओर टीना के रूम में पहुंचे और पीछे बने पूल के पास बैठ गए। नीलेश फ्रिज से व्हिस्की निकाल लाया। मैंने और टीना ने पीने से मना कर दिया, और हम दोनों तो पूल में उतर गई।

निखिल और नीलेश गीले कपड़े उतार कर टॉवल लपेट कर वहीं पड़ी चेयर्स पर बैठ गए और ड्रिंक लेने लगे। पूल में टीना और मैंने अपनी अदाओं से उनको उकसा-उकसा कर जल्दी ही उन्हें भी पूल में आने पर मजबूर कर दिया।

नीलेश टॉवल उतार कर स्विमिंग कोस्ट्यूम पहनना चाह रहा था, पर टीना बोली-

टीना: बिना कपड़ों के ही जाओ दोनों।

इस पर नीलेश बोला: तुम दोनों भी उतार दो, तो हम भी ऐसे ही आ जायेंगे।

तो टीना ने एक ही झटके में अपने कपड़े उतार दिए, और बाहर फेंक दिए। उसने मेरे भी कपड़े जबरदस्ती उतरवा दिए। अब चारों नंगे ही पूल में थे। चारों ओर अँधेरा था। पर बराबर वाले रूम में भी शायद पूल में एक जोड़ा था जिसकी हल्की-हल्की आवाज हमें आ रही थी। और वो भी शायद चुदाई में मशगूल थे।

पूल में आते ही निखिल ने मुझे ओर नीलेश ने टीना को अपनी तरफ खींच लिया। पूल छोटा सा था, पर सेक्स और रोमांच के लिए बहुत था। निखिल ने मुझे पीछे से पकड़ा और मेरे बूब्स जकड़ लिए। हमारी वासना चरमोत्कर्ष पर आ गई थी। एक मिनट के अंदर ही मेरे और निखिल के होंठ मिले हुए थे।

उधर नीलेश और टीना का भी यही चल रहा था। कुछ देर चुम्मा-चाटी के बाद टीना और मैं एक दूसरे के पतियों के गले में बाहें डाल कर झूल गई, और पतियों को एक्सचेंज करके चूमना शुरू कर दिया। ऐसा करते ही दोनों ने एक दूसरे की पत्नियों को पागलों की तरह चूमना शुरू कर दिया।

निलेश का लंड बार-बार मेरी चूत पर टक्कर मार रहा था, और नीलेश तो मेरे के बूब्स को खा ही जाना चाहता था।फिर नीलेश ने मेरी की एक टांग ऊपर करके अपना लंड मेरी चूत में करना चाहा, पर मैं बैलेंस नहीं कर पा रही थी। तो मैं नीचे झुकी और नीलेश के लंड को अपने मुंह में लेके चूसने लगी।

फिर हम दोनों से ही बर्दाश्त नहीं हुआ, तो हम फटाफट पूल से बाहर निकले, और अपने बदन को टॉवल से पौंछ कर बेड की ओर भागे। बेड पर जाते ही नीलेश ने अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा दी, तो में सिहार गई। फिर नीलेश ने मेरी टांगे अच्छे से फैला दी, और जीभ अंदर तक घुसा दी, और अपने हाथों से मेरे बूब्स मसलने शुरू कर दिये। मैंने भी उसके बाल कस कर पकड़ लिए थे, और उसके सिर को चूत पर दबा रही थी।

उधर पूल का मामला कुछ और ही था। मेरे पति निखिल और टीना बाहर बने पूल में उतर गए थे, और उनके कपड़े उतर कर बाहर आ पड़े थे। निखिल पूल की सीढ़ी पर बैठ गया तो टीना ने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। दो मिनट चुसवाने के बाद निखिल नीचे उतरा, और टीना को सीढ़ी पर ही घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत को चोदने लगा।

निखिल के दोनों हाथ टीना के बूब्स मसल रहे थे। इधर मैंने अपने आप को नीलेश से अलग किया और बाथरूम में जाकर शावर लेने लगी। तो नीलेश भी मेरे पीछे-पीछे आ गया और शावर लेने लगा। नीलेश का लंड पूरे जोश में खड़ा था। में उसकी ओर इशारा करके हंस पड़ी। तो नीलेश ने मुझे अपनी गोदी में उठाया और बोला-

नीलेश: अभी तुम्हारी हंसी बंद करता हूँ।

मैंने नीलेश को कस के चूमा और बोली: मैं हंस इसलिए रही थी कि जो लंड अभी तन कर खड़ा है, थोड़ी ही देर में मैं उसे निचोड़ दूँगी।

नीलेश बोला: तुम तो बाद में निचोड़ोगी, उससे पहले तो ये तुम्हारी चूत फाड़ देगा।

मुझको चुदने की कोई जल्दी नहीं थी। तो मैंने नीलेश से पूछा: ड्रिंक लोगे?

तो नीलेश ने हाँ कर दी। मैंने बार से बियर निकली, और एक छोटी शीशी शहद की।

नीलेश बोला: शहद का क्या करोगी?

तो मैंने मुस्कुरा दिया। हम दोनों नंगे ही सोफे पर बैठ गये, और नीलेश बोतल से ही बियर पीने लगा। फिर नीलेश ने मेरे बूब्स पर बियर टपकाया और फिर उसे चाट-चाट कर पीया। अब चुदाई का पूरा माहौल गर्म था। नीलेश का लंड तनतना रहा था, और मेरी फुद्दी भी फुद-फुद कर रही थी। मैंने दो बड़े टॉवल बेड पर बिछाये।

नीलेश ने पूछा: ये क्यों?

तो मैंने बोली: चुपचाप लेट जाओ।

नीलेश लेटा तो मैंने उसके लंड पर शहद लपेट दिया, और फिर लगी उसे चूसने। मैं इतना कस कर चूस रही थी, कि उम्म्ह… अहह… हय… याह… नीलेश की तो हालत ख़राब हो गई थी.।

फिर वो चीखा: मान जाओ, वर्ना मुँह में ही धार छूट जायेगी।

दया खाकर मैंने उसे छोड़ दिया तो अब नीलेश ने मुझे नीचे टॉवल पर पटका और बचा हुआ शहद मेरे बूब्स और चूत में भर दिया। अब नीलेश की बारी थी चूत और चूत वाली को मदहोश करने की। उसने चूस-चूस कर मुझे इतना गर्म कर दिया, कि मैं वासना की आग में जलते हुए गिड़गिड़ाने लगी-

मैं: नीलेश, अब अपना लंड दे दो। मेरी चूत को अब फाड़ दो जानू। अब बर्दाश्त नहीं हो रहा प्लीज।

तभी निखिल और टीना भी बेड पर ही आ गये थे, और वो लोग भी अपनी कामक्रीड़ा में बिजी थे। नीलेश ने मेरी टांगें ऊपर करके चौड़ी की, और लंड को मेरी चूत में पेल दिया। दोनों मर्दो ने एक दूसरे की बीवियों की जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी। चूत का तो भोसड़ा बना ही गया, पर लंड भी ऐसा निचुड़ा कि पूरा बेड तहस-नहस हो गया।

नीचे बिछा टॉवल वीर्य और चूत रस से भीग चुका था, और वासना की आग में जले दोनों बदन निढाल पड़े थे। आगे के 3-4 दिन भी एसे ही मस्ती में बीते। कभी अपनी-अपनी के साथ, और कभी बदल कर। और कभी-कभी तो निखिल नीलेश ने एक साथ कभी मुझ को चोदा तो कभी टीना को। मुझ से ज्यादा जबरदस्त चुदाई तो टीना की हुई।

नीलेश ने नीचे लेट कर उसकी चूत में अपना लंड नीचे से घुसाया, और ऊपर से निखिल ऊपर से उसकी चूत में धक्का देते हुए घुस गया। अब चूत एक और लंड दो थे। टीना तो चीखने लगी थी। फिर उन्होंने यही चुदाई मेरे साथ करनी चाही, पर इसके लिए मैंने उन्हें साफ मना कर दिया था, कि में दो लंड एक साथ अपनी चूत में नहीं ले सकती।

तो उन्होंने भी मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की।

चूत लंड का ऐसा घमासान शायद उस रिसार्ट में पहले कभी नहीं हुआ होगा। अगले दिन इतनी रंग बिरंगी यादों को लेकर दोनों जोड़े वापस हुए। इस वादे के साथ कि जो हुआ वो एक हसीन सपना था। इससे ज्यादा कुछ नहीं!


 
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नानी की चूत और मां की गांड़ मारी




हेलो दोस्तो मेरा नाम प्रकाश है और मै बिहार से हु। मेरा गांव पटना से कुछ ही दूर है। मै आप को गांव का नाम नहीं बता सकता… मेरी उम्र 22 साल का हु दिखने में सवाल और दुबला पतला ल़डका हु।

दोस्तो मेरी मां जब मैं छोटा था तभी इस दुनियां से चली गई थी मुझे मेरे पापा ने ही पाला है.. पर जब मैं 10 साल का था तब मेरे पापा ने दूसरी शादी की। मेरी सौतेली मां का पहले ही एक बार तलाक हो गया था। क्यूं की वो बच्चा पैदा नहीं कर सकती थी।

1 साल पहले एक मेरे पापा की भी मृत्यु हो गई। अब घर मे मै और मेरी मम्मी ही रहती है। गांव में मेरा राशन का दुकान है और खेती है। मुझे खेती के बारे में ज्यादा समझ नहीं है तो मां ही संभालती है।

मां उनकी उम्र 38 साल है। वो दिखाने में सावली और शरीर से एक भरे बदन की औरत है। उनके बूब्स और गांड़ थोड़ी बड़ी है। खेत में काम करने की वजह से वो थोड़े काली दिखती है।

पापा के जाने के बाद उन्होंने ही मेरा खयाल रखा।

एक दिन मम्मी खेत से आई और खाना बनाया। रात के 9 बजे होंगे तभी मैने भी दुकान बंद की और हम खाना खाने लगे।

मां:- बेटा तुमसे कुछ बात करनी है।

मै:- हां मां बोलो

मां:- बेटा मेरी मां का कॉल आया था। मां और तुमरी मामी का अक्सर झगड़ा हो रहा है। मां बोल रही थी अब उसे वहा रहा नहिं जाता तो क्या मैं उन्हें अपने पास बुलाऊ अगर तूमे बुरा ना लगे तो।

मै:- मुझे क्यों बुरा लगेगा वैसे भी हम दोनो ही रहते है और आप के सिवा कोई और है भी नहीं मेरा।

फिर कुछ दिनों बाद मामा नानी को हमारे घर छोड़ गए। नानी की ऊमर 58 साल की थी। पर वो उमर के हिसाब से एकदम बुड्ढी नही लगती। अब उनके बूब्स ढीले हो गए थे। नानी भी मां की तरा सावली थी और थोड़ी मोटी थी। उनको आए हुऐ एक महीना बीत गया था। सब कुछ ठिक चल रहा था।

एक दिन रात को मां ने मेरा बिस्तर नीचे लगाया और दादी के लिए खाट पर बिस्तर लगाए और मां बेड पर सोने लगी।

करीब रात को मेरी नींद खुली तो मुझे हल्की सी सिसकारी की 4आवाज सुनाई दी। मैने नज़र ऊपर उठाकर देखा तो। नानी एक हाथ चादर के अंदर शायद चूत पर था हो हाथ हिल रहा था और आंखें बंद करके अबने होंठ चबा रही थी।

मैं लेट लेटे सुनने लगा और मेरी नींद उड़ गई।

तभी नानी उठी और बाहर जाने लगी। थोड़ी देर बाद आई और सो गई। मै भी बाहर गया और बाथरुम में गया। मैने देखा नानी ने पिशाब की तो पानी भी 4नही डाला था।
और बाथरुम के अंदर एक रस्सी थी उसपर नानी की अंडरवेयर थी जो अभी धुली हुई थी।

मैने अंडरवेयर को बाहर लाया और लाइट के नीचे लाकर देखा तो उनकी अंडरवीयर पर अब भी स्पर्म की कुछ बूंदे थी। मै समझ गया बुड्ढी चूत में उंगली की और चड्डी ही खराब करदी।

अगले दिन मै नानी को हवस की नज़र से देखने लगा।

2 दिन बीत गए

मै दुकान का सामान लाने पटना जाने की तैयारी करने लगा तो नानी ने मुझे उनके लिए कुछ सामान लाने को बोला। नानी को पान खाने का शौक था तो पान भी मंगवाए।
मैने उन्हे बोला मैं आते वक्त ले आऊंगा ।

फिर मै तैयारी करने लगा तभी। मेरे दिमाग में नानी की उस रात की बात याद आई और पता नही क्यों मैने उन्हे साथ मे आने को बोला। और नानीजी भी तैयार हों गई फिर हम जाने लगे। जाते जाते मै जानबूझ कर ब्रेक लगा रहा था। और नानी जो एक साईड पैर करके बैठी थी उनका एक बूब्स मेरे पीठ को लग रहा था। उनके बूब्स अब बहोत लूज हो गए थे। फिर हम पटना पोहछ गए।

नानी ने उनके लिए और मां के लिए पेटीकोट लिए और कुछ सामान लिया। मैने भी दुकान का सामान लिया क्यूं की बाइक पर नही इतना समान नही आ सकता था इस लिए मैंने कुछ सामान नही लिया।

आते समय मुझे बहोत जोर से पिशब आईं पर मै कंट्रोल करने लगा। हम पटना के बाहर निकले और सुनसान रोड पर थे। दिनों साईड सिर्फ़ खेत थे। मुझे लगा इससे पहले पेंट मे हो जाए मै गाड़ी रोक कर कर लेता हु।

मैने गाड़ी रोकी।

नानी:- क्या हुआ बेटा

मै:- नानी मै जल्दी से पिषाब करके आता हु।

नानी:- बेटा मुझे भी लगी है। मै भी आती हु। फिर हम एक खेत मे गए और मैं पिशाब करने एक साईड गया और नानी दूसरे साईड गई।

जब मै वापास आने लागा तो देखा नानी खड़ी होकर चड्डी पहने लगी तभी मैने उनके गोरी जांघें देखी। तभी वो पलटी और मुझे देखा फ़िर मैने अपनी नज़र फेर ली और हम वापास घर आएं।

मै नानी को नज़र नही मिला पा रहा था। क्यों की नानी ने मुझे उन्हे घूरते देखा था। नानी समझ गई मै क्यूं उन्हसे आंख नही मिला रहा था।

अगले दिन नानी दुकान मे बैठ कर बातें करने लगी।

नानी:- क्या हुआ बेटा कल से तुम तो बात भी नहीं कर रहे हों क्या हुआ

मै:- कुछ नही नानी जी बस यूंही

नानी:- तुम कल के लिए शर्मिंदा है ना। कल तुम मुझे देख रहे थे इसलिए।

मै:- ऐसा कुछ नही बस मै आने वाल था की नज़र गई तभी अप ने देखा।

नानी:- कुछ नही होता बेटा। होता है इस ऊमर में

और मुस्कुराकर पान बनाने लगी और मेरे लिऐ भी बनाया।

अगले दिन मैं नहाने जाने लगा और कपडे लेकर अंदर गया तभी अंदर नानी पिशाब के लिए बैठी थी मुझे मुझे दिख कर खड़ी हो गई मै वापास बाहर आया। मै फिर शर्माने लगा।

वैसे भी मै बहुत शर्मीला ल़डका हु। कभी किसी लड़की के साथ कुछ कर नही पाया तो अब बुड्ढी को देख कर भी लंड खडा होने लगा था। फिर मै नहाने गया तो बुड्ढी के बारे में सोचकर मूठ मारी।

फिर कुछ दिन बाद मैं गड़बड़ी मे नहाने गया तो मैं अंडरवेयर लाना भूल गया। मां खेत में गई थी और नानी को मैने दूकान में बिठाया था तो 4मै टॉवल लगाकर बाहर आया और रूम में अंडरवियर ढूंढने लगा। पर मिल नही रही थी।

तभी नानी 4आईं और बोलीं क्या धुंड रहे हो 4तो मैने बताया। वो भी मेरे साथ धुंडने लगी। हम अपने कपडे एक तार पर लटकाए हुऐ थे वहा भी नही थी। इसी चक्कर मे मेरा टॉवल नीकल कर गिर गया। मै नानी के सामने पूरा नंगा था। मैने जल्दी से टावल उठाया और बाथरुम गया। अब शर्म के मारे मुझे पसीना आ रहा था। मैने अंडरवेयर के बिना ही पेंट पहना। और दूकान में बैठे गया।

फिर नानी जब भी मेरे सामने से गुजरती मुझे चोदने के खयाल आते और मेरा लंड खडा हो गया।

मै सहलाने लगा तभी नानी दूकान के अंदर आईं और बैठ गई। मै उन्हें देख कर थोडा शरमाया और नीचे बैठे कर एक कपड़ा गोद में रखा ताकि खडा लंड ना दिखे।

नानी:- क्या हुआ बेटा इतना पसीना क्यूं आ रहा है

मै:- कुछ नही नानी जी।

नानी:- अंडरवेयर दिखी तुमारी

मै:- नही दिखी

नानी:- तो अभी कुछ नही पहना

मै शर्मते हुए ना बोला तो नानी भी मुस्कुरा रही थी।

नानी:- इतना मत शरमाओ। इतना शर्मावोगे तो शादी के बाद कैसे चलेगा।

मै फिर शर्माने लगा तभी

नानी:- कितना शरमाते हो तुम मैने जो देखा किसी को नही बताऊंगी। तुमने भी तो देखा है मै शरमाई क्या?

कितना पसीना आ रहा है तुझे शर्म के मारे इतना बोल कर मेरे गोद का कपड़ा उठाकर मेरा माथा पोछने लगी।

तभी उनकी नज़र मेरे लंड वाली जगा पर गई। और वो स्माइल करते हुए देखने लगी।

नानी:- अभी छोटा था और अभी अंदर बडा हो गया तेरा। मै शरमाते हुऐ फिर इधर उधर देखने लगा। तभी मानी का हाथ मेरे जांघों पर आया और हाथ फेरते हुऐ नानी बोलीं

नानी:- अभी मै तुमारी सारी शर्म उतारती हु। बोलते हुए जांघों पर हाथ फेरने लगी।

तभी एक कस्टमर आया तो मैं खडा होकर उन्हें समान देना लगा और फ़िर बैठ गया। नानी ने फिर हाथ जांघों पर रखा और फेरने लगी। मै उन्हें हस्ते हुए मना कर रहा था और वो हस्ते हुऐ और फेरने लगी। तभी उन्होंने पेंट के ऊपर से ही लंड पकड़ लिया और दबाने लगी।

नानी:- अब शर्म कम हुइ।

मै मुस्कुराने लगा। मुझे अच्छा लग रहा था। बुड्डी ही सही किसी औरतों ने मेरा लंड हात में पकड़ा था।

नानी:- कैसा लग रहा है।

मै:- अजीब लग रहा है

नानी:- इतना शर्माओगे तो कैसे चलेगा। तुमारा मैने हाथ में पकड़ा और तुमे अजीब लग रहा है। पहले किसी ने नहीं पकड़ा क्या

मैने ना में गर्दन हिलाई।

नानी:- अच्छा एक काम कर दूकान का शटर बंद कर थोड़े देर के लिऐ।

मै शरमाते हुऐ इधर उधर देख कर मुस्कुरा रहा था। तभी सोचा यही मौक़ा है। जवान लड़की जब मिले तब मिले अभी इसी से काम चलाना पड़ेगा। मै उठा और शटर डाउन किया। फिर नानी ने मज़े पास बिठाया और पेंट को नीचे करके लंड बाहर निकाला। मेरा लंड करीब 8 इंच लंबा था और काफ़ी काड़ा था।

नानी मेरे तरफ़ देख कर लंड हिलाने लगी। मै शर्मा रहा था। तभी नानी ने झूल कर लंड मुंह में लिया और चूसने लगी। तभी नानी ने डस्बिन मे पान थूका और लंड चुसने लगी।

लंड को केस कर पकड़ा और चमड़ी पिछे करले लंड पर थूक कर सुर सुर करके चूसने लगी। मुझे हलकी सी जलन और बाहोट माजा आने लगा। 2 मिनट भी नहीं हुऐ थे की

मैने नानी को फुसफुसाते हुऐ बोला-

मै:- नानीजी मेरा पनी निकलने वाला है निकालो बाहर।

नानी ने मेरे तरफ़ देख कर हाथ से और आंखों से इशरा किया की निकलने दे। और चुनने लगी तभी मेरा पनी नीकल गया। और नानी मेरा पूरा वीर्य पी गई। फिर लंड चूसते हुऐ मेरे जांघों पर भी चाटने लगी।

कुछ देर और चुनने लगी। नानी ने ब्लाउज के हुक खोले उनके बूब्स झूल रहे थे

नानी फुसफुसाते हुऐ:- इसे दबाओ जब ताक मै चूसती हु।

फिर नानी लंड चूसे लगी और पूरे लंड और गोटियों पर चाटने लगी और मैं उनके बूब्स दबाने लगा।

मेरा लंड फिर खड़ा हुआ। मेरे लंड का सूपड़ा पूरा बाहर आया था। नानी खड़ी हुइ और साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठा कर चड्डी निकाली। और चूत को फैलाकर दिखाने लगी नानी की चूत बहोत काली और ढीली थी।

नानी फुसफुसाते बोलीं:- ये मेरी चूत देख। नीचे बैठ कर उसमे अपनी जीभ से चाट जेसे मैने चाटा वैसे और एक उंगली अंदर बाहर कर। मैं शर्माने लगा तो नानी गुस्सा हो गई।

नानी:- अभी इतना कुछ किया अब क्यूं शर्मा रहा है बैठ नीचे।

मै नीचे बैठ कर चूत चाटे लगे। और एक उंगली चूत मे डालकर इंदर बाहर करने लगा।

नानी:- थोड़ा और तेज जुबान चला। मै नानी की चूत चाट रहा था और उंगली कर रहा था।

नानी:- और एक उंगली डाल

फिर मैने दो उंगलियां डाली। नानी ने चड्डी मुंह मे डाली और धिरे से सिसकरिया लेने लगी।

कुछ देर बाद नानी नीचे लैट गई और मैं हांटो के सहारे उनके ऊपर आया। नानी ने लंड पकड़ कर चूत पर रखा और मुझे अंदर डालने को बोलीं।

मैने धिरे से अंदर डाला नानी ने अपनी आंखे बंद की और बोलीं कमर हिलाकर अनदर बाहर करो। मै वैसे ही करने लगा। अब मुझे मजा आ रहा था। और नानी भी सिसकारियां ले रही थी।

कुछ देर बाद नानी:- जोर से कर

मैने स्पीड बडा दी और नानी की चूत 6ने पनी छोड़ दीया।

नानी उठी और चूत पोंछ कर मेरा लंड हिलाया फ़िर चूसने लगी। करीब 15 मिनट चूसे के बाद मेरा पानी नीकला। नानी पुरा पी गई और लंड साफ करके मैंने पैंट पहन ली

नानी:- अछा कैसा लगा तुझे मजा आया

मै:- हां बहोत

नानी:- अभि और मेज करेगे.. अभी मै सोने जा रही हु तुम दूकान संभालो

नानी भी बैडरूम मे जाकर सोने लगी। और मैने शटर खोल कर दूकान संभालने लगा।



 

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मेरी चुदक्कड़ चाची-1




मेरा नाम अनुज है, और उम्र 21 साल है, मैं अपने कॉलेज के तीसरे साल में था। एग्जाम ख़तम होने के बाद मैंने गांव जाने का फ़ैसला लिया।

गाँव में मेरे चाचा, चाची, उनका बेटा जो काफी छोटा था, साथ में दादी, सब लोग साथ में रहते है।

साथ में एक नौकर भी था, जो कुछ साल पहले चाचा ने अपनी मदद के लिए रखा था। नौकर का घर चाचा के गांव में ही था।

चाचा ने शुरू से ही खेती संभाली है, और दादी ने बड़े बेटे यानी मेरे पापा को शहर भेज दिया था। चाचा की शादी को 3 साल हो चुके थे, और चाचा की उम्र 29 है, जबकि चाची की उम्र 23 है। गांव में अक्सर लड़कियो की शादी कम उम्र में ही हो जाती है।

चाचा और चाची की शादी के वक्त मैं 18 साल का था। तब मैं चाची को अक्सर एक जवान लड़के की नज़रों से देखता रहता था। कई बार मेरे मन में उनके लिए गंदे ख़याल आते, पर मैं रिश्तों के बारे में सोचता और मेरी इच्छा मेरे मन में ही रह जाती।

खैर में शाम को 5 बजे गांव पहुंचा। चाचा-चाची और दादी से बड़े दिनों बाद मिल कर अच्छा लग रहा था।

थोड़ी देर दादी के साथ बैठ कर बात-चीत करी। एक घंटे बाद चाचा मुझे खेत घूमने ले गये। वहां से हम शाम 7 बजे घर आ गये।

मैं पानी पीने किचन में गया। चाची हम सब के लिए खाना बना रही थी। किचन में बहुत गर्मी होने से चाची पसीने से भीग चुकी थी।

आज भी चाची का बदन उतना ही बोल्ड था जितना कि शादी के वक्त था। चाची ने अपने बदन को पूरी तरह से ढका हुआ था।

चाची की सुंदरता को देखते ही अचानक मेरे हाथ से पानी का ग्लास छूट गया, और नीचे पानी गिर गया। चाची जल्दी से पोछा लेकर आई जैसे ही चाची नीचे बैठी, उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया, और उनका बदन सफ दिखाई देने लगा। पसीने से उनका ब्लाउस पूरी तरह भीग चुका था। पसीने की बूंदे उनके ब्लाउज़ के अंदर जा रही थी।

ब्लाउस गीला होने से चाची की चूचियां दिखाई देने लगी। उनके दूधे आज भी उतने ही बड़े थे।

चाची पानी साफ करती रही, और मैं उनके बदन को देखते ही रहा।

मैं खड़े-खड़े उनकी सुंदरता को निहारता रहा। मन ही मन मैं उनकी गांड को पकड़ कर जम के दबाना चाहता था, और उनकी चूचियों को जम कर सहलाना चाहता था। पानी पोंछने के बाद चाची ने मेरी ओर देखा।‌ मैं चाची के बदन को घूर रहा था।

चाची ने अपने बदन पर वापस साड़ी डाल दी, और मेरी ओर देख कर मुस्कुरा के वापस काम करने चली गयी। मैंने कुछ नहीं किया, और चुपचाप पानी पी कर बाहर चला गया। अब रात को खाना खाने के बाद सब साथ में बैठ कर बात-चीत करने लगे।

कुछ देर बाद सब सोने चले गये। चाचा ने मुझे अपने साथ छत पर सोने के लिए बुला लिया। अब मैं, चाचा, और चाची छत पर सो रहे थे। दादी और चाचा का लड़का नीचे सो रहे थे।

कुछ देर बाद चाचा को उनके दोस्त का फोन आया, और वो अपने दोस्तों के साथ रात को खेत में पार्टी करने चले गये। अब चाची और मैं छत पर अकेले थे।

चाची काम करते थक गयी थी, और वो चाचा के जाने के बाद ही सो गयी थी। मैं कुछ देर तक चाची को निहारता रहा, और अब मैं भी अब सो गया। आधी रात को मुझे प्यास लगी। मैंने चाची को उठाने का सोचा, पर वो वहां नहीं थी।

मैं सीढ़ियों से नीचे गया, सीढ़ियों के नीचे एक स्टोर रूम बना है।

जैसे ही मैं स्टोर रूम के पास से गुजरा, मैंने सुना कि स्टोर रूम से आवाजें आ रही थी। मैंने स्टोर रूम का गेट खोलने की कोशिश की, पर गेट अंदर से लगा था। तो मैंने खिड़की से झांक कर देखा, और मैं हैरान रह गया।

रमेश (जिसे चाचा ने काम पर रखा था) और चाची आपस में लिपटे हुए थे। रमेश ने चाची की साड़ी निकल दी, और चाची की चूचियों को ब्लाऊज़ के उपर से दबा रहा था। चाची सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ पेहने हुई थी।

अब चाची ने नीचे झुक कर रमेश की पैंट निकाल दी, और लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी। रमेश का लंड पूरी तरह चाची ने अपने अंदर ले लिया। रमेश भी कम नहीं था। उसने चाची का सिर पकड़ा, और ज़ोर-ज़ोर से लंड अंदर-बाहर करने लगा। मैं बाहर खिड़की से यह सब देखता रहा। थोड़ी देर बाद रमेश ने अपना माल चाची के मुंह में भर दिया, और चाची चिनाल की तरह पूरा माल पी गयी।

चाची खड़ी हो गयी, और रमेश से लिपट गयी, और धीरे-धीरे उसकी शर्ट के सारे बटन खोल दिये।

वो रमेश के बदन को चूमने लगी, और रमेश भी चाची कि गांड दबाने लगा। रमेश ने चाची के ब्लाऊज़ के सरे हुक खोल दिये, और पलटा कर चाची की पीठ को चूमने लगा।

गांव में अक्सर औरते ब्रा नहीं पहनती है, और चाची ने भी ब्रा नहीं पहनी थी।

चाची की पीठ को चूमते ही चाची की हवस जाग उठी। किसी रांड कि तरह चाची अपनी चूचियां दबाने लगी। फिर रमेश चाची की दोनों चूचियों को दबाने लगा, और धीरे से चाची का पेटिकोट खोल कर चाची को नीचे से नंगा कर दिया।

स्टोर रूम में रखी गेहूं की बोरियों पर चाची को लिटा दिया।

पूरी तरह नंगी होकर चाची बोरियों पर लेट गयी, और रमेश ने अपना मुँह चाची की दोनो टांगो के बीच डाल दिया, और चाची के चूतड़ को चूसने लगा। यह सब देख कर मेरा लंड खड़ा हो कर तड़पने लगा। मैं लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगा।

रमेश बड़ा ही हरामखोर इंसान है। वो बिन रुके लगातार चाची की चूत को अपनी जीभ से चूमते रहा।

चाची भी तड़प रही थी, और उनकी चूचियों को अपने हाथों से दबाते रही। कुछ देर बाद चाची झड़ने वाली थी। चाची की आवाज़ निकल गयी, “आह आह, और चोदो रमेश, फाड़ दो मेरी चूत को। आह आह ऐसे ही चूस्ते रहो”।

रमेश बिन रुके चूसता चला गया। थोड़ी देर बाद चाची बोल पडी, “मैं झड़ने वाली हूं, और जोर से चूसते रहो मेरी चूत को”।

रमेश ने कहा, “इतनी जल्दी कैसे छोड़ दूं सेठानी जी, अभी तो आधा ही हुआ है, अपने माल को अंदर ही रखो”।

चाची ने कहा, “मैं पहले ही काफी थक चुकी हूं। अब और नहीं रोक पाऊंग़ी ।

रमेश ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी, और चाची भी धीरे-धीरे आवाजें निकालती रही। मैं चुप-चाप खिड़की से यह सब देखते रहा, और हिलते हुए अपने माल को अंदर ही रोक कर पूरे आनंद से हिलने लगा। आस-पास का ध्यान ना देते हुए मेरा हाथ खिड़की से टकरा गया, और खिड़की पीछे दीवार से टकरा गयी।

अचानक हुई आवाज़ से चाची ने खिड़की की तरफ देखा।

मैं डर गया था, और चुप-चाप खिड़की के पास ही खड़े रहा। मगर चाची ने खिड़की के पास मुझे देख लिया। चाची ने मेरी ओर देखा। मुझे लंड हिलाते देख कर चाची चौंक गयी, और सारे माल से रमेश के मुंह में झड़ गयी। रमेश डर के मारे खड़े हो रहा था, पर चाची ने अपने पैरों से रमेश का सिर अपनी चूत के पास ही दबा के रखा।

थोड़ी देर तक चाची और मैं एक-दूसरे को देखते रहे। चाची भी कुछ नहीं बोली। रमेश ने धीरे से मुंह उठा कर बोला, “लगता है, कोइ जाग गया है सेठानी जी”।

चाची ने कहा, “कोइ नहीं है, बिल्ली थी खिड़की के पास। तुम मत रुको, चूसते रहो मेरे गुलाबी फूल को”। मैं चुप रहा, वो दोनों फिर से शुरू हो गये। रमेश चाची की चूत को सहलाता रहा, और चाची मुझे देखते‌ हुए जम कर उछलती रही।

थोड़ी देर बाद चाची का माल बाहर आने लगा, और रमेश उठ कर खड़ा हो गया। चाची भी अपनी साड़ी उठा कर बाहर आने लगी। मैं और आनंद लेना चाहता था, पर रमेश का लंड सूख गया था।

चाची काफी थक चुकी थी, और अपनी साड़ी उठा कर बाहर आ रही थी। अचानक रमेश ने चाची का हाथ पकड़ कर वापस खींच लिया, चाची ने कहा “अब तो तुम्हारा औजार भी थक गय़ा, अब क्या करने का मन है?”

रमेश ने अपनी पेंट में से एक गोली निकाली और खा गया। उसने फिर चाची को नीचे झुक कर लंड चूसने को कहा। पर चाची यह सब नहीं करना चाहती थी।दरसल वो वाएग्रा कि गोली थी, जिससे मर्दों के औजार की ताकत बढ़ जाती है।

चाची ने कहा, “छोड़ दो, मेरे अंदर ताकत नहीं बची है, अब और मत करो। मैं तुम्हारी सेठानी हूं चुप-चाप मेरा कहा मानो”।

रमेश ने कहा, “जैसा कहा है, वैसा ही करो। वर्ना मैं चिल्ला कर सब को जगा दूंगा, और तुम कुछ नहीं कर पाओगी”।

रमेश ने फिर कहा, “बहुत दिनों के बाद सेठ घर पर नहीं है, मैं इस मौके को केसे जाने दे सकता हूं?”

चाची पर मुझे तरस आ रहा था, पर मैं भी चाची को चुदते हुए देखना चाहता था।चाची मेरी ओर आशा से देखती रही, पर मैं चुप-चाप देखता रहा। रमेश ने चाची का सिर नीचे झुका दिया। चाची ने रमेश के दोनो गोटे अपने मुंह में ले लिये, और चूसते जा रही थी।

यह सब देख कर मुझे चाचा पर तरस आ रहा था, पर मैं चुप-चाप देखता रहा।

कुछ देर बाद रमेश फिर से तैयार हो गया। चाची अब और चुदवाना नहीं चाहती थी। उन्होंने रमेश की बाहों से छूटने की कोशिश की, पर रमेश ने चाची को जम कर बाहों में पकड़े रखा, और चाची के होंठो को चूमते रहा। चाची को चूमते हुए उसने चाची को फिर से बोरियों पर लिटा दिया।

रमेश ने चाची की दोनो टांगो को उठा कर अपने कन्धों पे रख लिया। धीरे से अपना लंड चाची की चूत में डालने लगा। पूरी तरह अंदर जाने से, चाची की आवाज निकल पड़ी। चाची मदद की आशा से मेरी ओर देखती, पर मैं चुप-चाप उन्हें देखता रहा।

एक बर झड़ने के बाद भी मेरा लंड फिर से जाग उठा, और मैं उन दोनों को देख कर हिलाने लगा।

चाची मेरे लंड को फिर से जगते देख हैरान रह गई। रमेश ने अब रफ्तार‌ बढ़ा दी, और जोर-जोर से लंड को अन्दर बाहर करने लगा।

चाची के दूध उछल कर आगे-पीचे होने लगे। चाची ने अपने दोनो दूध को पकड़ा और मसलने लगी।

दोनों हाथ से दबाते हुए चाची उछल रही थी। रमेश भी उन्हें जम कर चोदते चलता गया। चाची अब जम कर आनंद लेने लगी। जम कर अपनी चूचियों को दबाने लगी।

हरामखोर रमेश पूरी ताकत से चूत मारता रहा। चाची बार-बार उससे छूटने की कोशिश करती।

पर रमेश बिना रुके अपना लंड घुसाता रहा। दस मिनट बाद चाची की चूत पूरी तरह से लाल हो चुकि थी, और धीरे-धीरे चाची कि चूत में से झाग बाहर गिरने लगा।

रमेश ने भी अपना लंड बाहर निकला, और चाची दूसरी बार झड़ गई।

रमेश ने अपना सारा माल चाची के मुंह में डाल दिया। यह सब देख कर मैं भी झड़ गया, और चाची को चोदने कि इच्छा और भी ज्यादा हो गयी। रमेश बाहर आ रहा था, तो मैं धीरे से सिढ़ियों पर जाके छिप गया। रमेश कपड़े पहन कर बाहर आया, और पीछे के गेट से बाहर निकल गया।

उसने चाची को निर्दयी तरीके से चोदा, उसकी हरकतों के लिए मैं मन ही मन गालियां दे रहा था।

इतनी चुदाई के बाद चाची थकी, पसीने से भीग चुकी थी, और आखें बंद करके लेटी रही।

मैं वापस छत पर जाके सो गया। दस मिनट बाद चाची भी आकर सो गयी। रमेश ने इतनी जम कर चाची कि चूत मारी कि चाची की चाल ही बदल गयी। चाची मेरे पीछे चिपक कर लेट गयी, और बोली “आज जो हुआ वो किसी को मत बताना, वरना मैं”

इससे पहले चाची आगे बोलती, मैं पल्टा और उनके होंठो को अपने होंठो‌ में ले लिया। चाची समझ गयी कि मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊँगा। चाची काफी थक चुकी थी, और कहा “अभी रुक जा, उस भड़वे रमेश से जम के चुदने के बाद में बोहोत थक गई हूं”।

मैंने चाची को अपने मन की सारी इच्छा बता दी, कि कैसे में उनको शादी के बाद से ही चाहता था, और मैंने अपने मन में चाची को चोदने कि इच्छा भी बता दी। मेरे मन कि बात सुनते ही चाची सो गयी। चाची के सोने के बाद में चाची कि चूचियों को सहलाने लगा। चाची के दूध पर हाथ रख थोड़ा-थोड़ा मसलते रहा, और चाची से चिपक गया। हम दोनों ऐसे ही चिपक कर रात भर सोते रहे।


 

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मेरी चुदक्कड़ चाची-2





मेरी पिछली कहानी में आपने देखा कि कैसे चाचा के घर पर उनके नौकर रमेश ने चाची कि जम कर चूत मारी, और चाची की कामुक हरकते देख मैं कैसे चाची की ओर आकर्षित हो गया। उन दोनों की चुदाई देखते मैं अपने लंड को भी इसका आनंद देने लगा, और हिलाते हुए चाची ने मुझे देख लिया। ज्यादा हैरान ना होते हुए चाची चुप रही, और रमेश के साथ चुदती रही।

खैर मैं अपने दर्शको को बता दूं कि इस कहनी के आगे और भी कई सारे किस्से है। अगर मुझे हर कहानी पर आपका अच्छा रिस्पोंस मिला, तो आगे के पार्ट और भी जल्दी मिलेंगे। अब वापस कहानी में आते है।

जैसा कि आपने पिछली कहानी में पढ़ा, उस रात रमेश से जम कर गांड मरवाने के बाद, चाची लंगड़ाते हुए छत पर आकर मेरे पास सो गयी। दर्द के मारे चाची की चाल ही बदल गयी थी। चाची मेरे पीछे आकर सो गयी, और अपना एक हाथ और पैर मेरे ऊपर रख लिया।

मैंने धीरे से हिलने की कोशिश की, पर चाची ने मुझे जम के जकड़ लिया था। मैं बिना हिले ही चाची से बात करने लगा। चाची दर्द से कराहते हुए बोलती रही। चाची बताने लगी कि कैसे रमेश और उनका काम पिछ्ले पाँच-छह महीनों से चल रहा था। चाची बोलती रही, “दरअसल छोटू के पैदा होने के बाद ही तेरे चाचा

में अब उतनी जान नही बची है, अब छोटू के पैदा होने के बाद से मेरा योन सुख खत्म हो चुका था।”

“कई बार अपनी चूत में उँगली डाल कर मुझे खुश रहना पड़ता था। फिर तेरे चाचा ने रमेश को काम पर रखा। तब रमेश शहर से अपना कालेज खतम करके वापस गांव बस गया, और लगभग एक-दो महिने बाद मैं उसकी ओर आकर्षित होती चली गयी। फिर एक दिन चाचा के ना होने पर रमेश के साथ कुछ काम से खेत जाना पड़ा, और वहां मैं और रमेश पहली बार दोनों एक-दूसरे के साथ लिपट गये।”

धीरे-धीरे मैं चाची की कहानी सुनता रहा, और फिर मैं मुड़ा और फिर से चाची को चूम लिया। थोडी ही देर बाद मैं चाची से अलग हुआ, पर चाची अब भी काफी दर्द में थी। मैं धीरे से अपना हाथ उनकी चूचियों के पास ले गया, और साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा।

चाची बोल पड़ी, “हां ऐसे ही दबाते रह वहां पर। इसके आगे आज मेरे साथ कुछ मत करना तू। मैं जानती हूं कि तू भी मुझे चोदना चाहता है। पर आज मैं बहुत थक गयी हूं। मेरी चूत बहुत ही जोर से फट कर लाल हो रही है।” मैं चाची की बात सुन कर समझ गया था, कि चाची कितनी बड़ी चुदक्क्ड़ थी। चाची को गांड मरवाना शायद बेहद पसन्द था।

अगले दिन सुबह ब्रश करके मैं हाल में बैठा। वहां चाचा भी वापस आ चुकी थी। इतने में रमेश भी आया, और दरवाजे के पास खड़ा हो गया। चाचा ने उसे अपने साथ बैठने के लिए कहा। मैं मन ही मन चाचा के लिए‌ दुखी था, और वो मादरचोद रमेश मुस्कुराते हुए बैठ गया। खैर थोड़ी देर बाद चाची हम तीनों के लिए चाय लेकर आई।

चाची चाय रख कर जाने ही वाली थी, कि रमेश बोल पड़ा, “सेठ जी आपको एक बात बतानी थी”।

चाची और मैं एक-दूसरे की तरफ देखने लगे। रमेश ने कहा, “मेरी नौकरी शहर में लग चुकी है, अब मैं कल दिन में शहर चले जाऊंगा”।

चाचा काफी खुश थे, मैं चाचा के लिए काफी खुश था। पर चाची शायद इससे दुखी थी। खैर चाय खतम होते ही चाचा को किसी का फोन आया, और वो चले गये।

जैसे ही चाचा वापस आए, उनके साथ साथ चाची का मुंह-बोला भाई सुरज भी आया था।

सुरज इस कहानी का नया किरदार है। वो चाची के मायके गांव का पड़ोसी और मुंह बोला भाई है। दरअसल चाची दो बेहने है, जिनमें चाची बड़ी और उनकी छोटी बहन रानु है। चाची का कोई भाई नहीं था, शायद इसलिए चाची ने सुरज को अपना भाई बनाया होगा।

चाची सुरज मामा के लिए चाय लेकर आयी, और हमारे साथ बैठ गयी। चाचा को किसी का फोन आया और वो बाहर चले गये।

मैं भी नहाने के लिए‌ अपने कपड़े लेने चला गया। मैं अपने आधे रास्ते में था, कि मुझे याद आया मेरा बैग तो चाची ने रखा था, और वो जगह मुझे याद नहीं थी।

मैं वापस हाल की ओर जाने लगा। चाची, सुरज मामा,‌और रमेश तीनों आपस में कुछ बात कर रहे थे। मैं छिप कर उनकी बाते सुनने लगा।

चाची: सुरज अचानक यहां कैसे आना हुआ?

सुरज: अरे अरुणा‌(चाची का नाम) दीदी, अब तुमसे क्या छिपाना। रमेश कल मुम्बई चला जाएगा, इसलिए में आज उससे मिलने आया हूं।

रमेश: बिल्कुल सही कहा, और अब हमारे बारे में नही बताओगे सेठानी जी को।

चाची: क्या छिपा रहे हो मुझसे? और तुम रमेश को कैसे जानते हो?

सुरज ने चाची का हाथ पकड़ा और बोला: अरे मेरी जानू, तुम्हारे और रमेश के बीच में जो चल रहा है वो मैं सब जनता हूं। रमेश मेरे कालेज के समय से मेरा जिगरी यार है।

रमेश हैरान होते हुए: तुम सेठानी जी को जानू कह रहे हो? क्या छिपा रहे हो सच बताओ?

हाल में उन तीनों के अलावा कोई नही था, और सुरज मामा ने अपनी कहानी बताई कि चाची की शादी के कुछ महीने पहले, चाची और सुरज गांव से भाग कर शादी करना चाहते थे। स्कूल के दिनों से अरुणा और सुरज दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे।

मैं उन तीनों की बातें ध्यान से सुन रहा था। आगे सुरज कहता है कि जब अरुणा चाची और सुरज मामा ने भागने का प्लान बनाया, तो उनके घर वालों ने उन्हें पकड़ लिया।

फिर दोनों के घर वालों ने मिल कर फैंसला लिया कि इन दोनों में भाई बहन का रिश्ता बना दिया जाए। बस फिर क्या था, दोनों की शादी अलग जगह पर जल्द ही करवा दी गयी।

अब सुरज ने चाची की कमर पर हाथ रख पकड़ ली, और अपनी ओर बांध लिया।

रमेश बोला: वाह सुरज, तू तो मुझसे भी बड़ा हरामी निकला रे।

सुरज बोला: अब जब तू भी अरुणा के साथ खेल चुका है, तो आज रात को…।

चाची बोली: आज वैसे भी आखरी बार है, मैं सिर्फ आखरी बार ही तुम्हरा साथ दे सकती हूं।

आगे सुरज उसका प्लान बताने लगा। पूरा प्लान सुनने के बाद, रमेश खुशी से पागल हो चुका था। चाची के चेहरे पर कोई भाव नजर नहीं आ रहा था। मैं सुरज का प्लान सुनते ही चाची की हालत समझ सकता था। रमेश और सुरज दोनों ने चाची को मजबूर करके मना लिया। उनका प्लान मैं आगे आपको बताऊंगा। मैं थोड़ी देर तक रुका, और उन तीनों को अकेले में बात करने दी। चाची मना करने लगी, पर फिर रमेश ने चाची का दूसरा हाथ पकड़ा और धमकते हुए बोला-

रमेश: तू क्या चाहती है? कल रात और पहले की कहानी मैं सबको बता दूं?

चाची कुछ ना बोली और हां में हां मिलाती गई। मैं थोड़ी देर और बाहर खड़ा रहा। अब मैंने हाल में आकर चाची से मेरे बैग में रखा मोबाईल चार्जर मांगा। चाची मेरा मोबाईल चार्जर लेने चली गयी, और सुरज और रमेश साथ में बतियाने लगे। मैंने आलस में देर से नहाने का सोचा। रमेश चाचू के साथ काम पर चला गया, और छोटू अपने मामा के साथ हाल में खेल रहा था।

अब बारह बजे खाना खाने के बाद सभी लोग दोपहर में आराम करने चले गये। खाना खाने के बाद तुरन्त ही दादी कहने पर मैं तुरन्त नहाने चला गया। गांव के घरों में बाथरुम सबसे पीछे ही बनाये जाते है।

अब घर में सब सो रहे थे,और चाची किचन में अपना काम कर रही थी। मैं बाथरुम में नहाने चला गया। गांव में घर के बाथरुम में कोइ गेट नही था, सिर्फ एक परदा ही लगा हुआ था।

मैं बाथरुम में देखा, कि वहा चाची के कपड़े पड़े हुए थे। मैंने कपड़ों को उठा कर साईड में रख दिया। उन कपड़ों को उठाते समय चाची की ब्रा नीचे गिर गयी। ब्रा देखते हि मेरे अन्दर अलग ही हवस जाग उठी, और मैं चाची की ब्रा-पेन्टी उठा कर सूंघने लगा।

चाची कि ब्रा से मैं मन में ही चाची को नंगी कर सोचने लगा, और मेरा लंड सलामी देने लगा। कल रात के द्रश्य अभी भी मेरे मन में ताजा हो गये। चाची की कोमल और इतनी बड़ी ब्रा देख चाची के मम्मों को दबाने की तलब और जाग उठी थी। चड्डी निकाल कर मैं पूरा नंगा हो गया।

मैंने चाची कि पेन्टी को अपने लंड के ऊपर लगाया, और हिलाने लगा। आंखे बन्द कर चाची के बारे में सोचने लगा। चाची कि ब्रा को सीने से लगा लिया।

बिना रुके मैं हिलाता रहा, कि अचानक चाची बाथरुम में आ गयी। मैं चाची को देख घबरा गया, और पूरा माल चाची की पेन्टी और उनके कपड़ों पर गिरा दिया। मेरी हरकते देख चाची मुस्कुराने लगी। चाची मुझे घूरे जा रही थी।

फिर मैं घबराते हुए बोला: चाची वो कल रात की बात को सोच कर ही मैं अपने आप को रोक नहीं पाया।

चाची सब जानती थी, बिना कुछ कहे वो अपने कपड़े लेकर जा रही थी। अब मैं भी समझ गया कि चाची भी किसी को कुछ नहीं बोल पाएंगी, तो मैंने तुरन्त ही चाची की कमर को पकड़ा, और अपने से लगा लिया।

चाची: मैं जानती थी, तुम भी अभी जवानी के प्यासे हो। कल रात को तुम्हारा लिंग देख कर मैं हैरान थी। तुम्हारी हरकतें और मर्दाना बदन देख कर मैं और उतेजित हो उठी थी।

मैं बोला: हां, कल की चुदाई के बाद आपकी चूत मारने की तलब और बढ़ गयी है। बस अब मैं अपने आप को और नहीं रोक पाऊंगा चाची।

फिर क्या था, मैंने चाची का पल्लू गिरा दिया, और उनके गोरे बदन को चूमने लगा। धीरे-धीरे चाची ब्लाऊज़ के सारे हुक खोल दिये, और चाची के मम्मों पर टूट पड़ा। चाची ने आज ब्रा नहीं पहनी थी। चाची भी अपनी साड़ी निकालने लगी। मैंने चाची को घुमा कर बाथरुम की दीवार से टिका दिया, और उनके मम्मों को जम कर दबाने लगा। चाची को जम कर आनंद मिल रहा था।

चाची के मम्में इतने बड़े थे कि मैंने आज तक नही देखे थे। वो चरमसुख में आहें भरने लगी। उनकी आवाज़ बढ़ती जा रही थी। मैंने उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिये। उनके होंठो को अपने होंठो से लगा कर एक ही सांस में चूम लिया, और मम्मों को दबा-दबा कर लाल कर दिया।

चाची की चूचियां कड़क हो गयी। मैं उनकी चूचियों को अपने दांतो से दबाने लगा। इतने बड़े मम्मे मैंने आज तक नहीं देखे थे, और इस मौके को मैं हाथ से जाने नहीं दे सकता था।

अब मेरे लंड में फिर से सलामी देने लगा। चाची ने अपने आप को अलग किया, और मुझे अब दीवार से लगा दिया। मेरे गोरे मर्दाना बदन को चाची पूरी तरह चूमने लगी। मैं पीछे से चाची के चूतड़ को जम कर एक थप्पड़ मार दिया।

चाची चीख़ उठी: आह साले, इतना जोर से मार दिया रे।

दोनों चूतड़ को जम कर दबा के मैंने लाल कर दिया। चाची ने अपने दोनों हाथो से मेरे गाल पर रखे और मेरे होंठो को अपने होंठो का रस पिलाती रही। मैंने एक हाथ से चाची का पेटीकोट खोल दिया, और उनकी पेंटी के उपर से ही अपने हाथ से उनकी चूत सहलाने लगा। चाची मुझसे अलग हुई और नीचे बैठ गयी, और मेरा लंड मुंह में भर लिया।

चाची: वाह रे, इतना जवान औजार मैं बहुत दिनों के बाद महसूस कर रही हूं।

मैं: अरे मेरी जानू, आज तक इस औजार को सिर्फ लडकियां ही मिली है, आज पहली बार किसी औरत ने इसे स्पर्श दिया है।

चाची के लंड चूसते ही मानो एक अलग ही आनंद मिल रहा था, जो आज से पहले मैंने महसूस नहीं किया था। पांच मिनट तक चाची मेरा लंड चूसती रही। चूस-चूस कर पुरा थूक से गीला हो गया।

अब मैं झड़ने वाला था। मैंने चाची को लिटाया और चाची के ऊपर लेट गया, और मेरा लंड उनके मम्मों के बीच में डाल‌ कर आगे-पीछे करने लगा। कुछ देर तक मैं अपने लंड को चाची के मम्मों के बीच सहलाता रहा।

चाची बोली: तू अभी माल मत निकालना। मेरी चूत की प्यास बुझाना अभी बाकी है।

मैं: नहीं अरुणा चाची, मैं आज रात को रमेश और सुरज के बाद आपकी चूत की प्यास मिटाने आऊंगा।

चाची के होश निकल गये। फिर मैंने चाची को बताया कि कैसे मैंने उनकी सारी बातें सुन ली थी। दरअसल रात में सुरज और रमेश का चाचू के साथ मिल कर छत पर दारु पार्टी का प्लान था। और वो दोनों चाचू की शराब की लत के बारे में जानते थे। चाचू को नशे में छत पर ही सुला कर चाची के साथ रमेश और सुरज ने चुदाई का प्लान बनाया था।

चाची: नहीं रे, वो रमेश के औजार में कुछ जान नहीं है, इसलिए वो दोनों एक बार गोली खा कर मेरी गांड मारेंगे। तू ऐसा ना कर। उन दोनों भड़वों से चुदने के बाद मेरे अन्दर बिल्कुल ही जान नहीं बचेगी।

चाची की मजबूरी मैं समझ सकता था, पर मैं भी अपनी प्यारी चाची की चूत फाड़ना चाहता था। मैं कुछ ना कहा और अपना लंड चाची के मम्मों के बीच में सहलाता रहा, और थोड़ी देर में झड़ गया। झड़ते हुए चाची चेहरे पर पूरा माल गिर गया, और चाची ने होंठों पर लगे गरम माल को अपनी जीभ से पूरा चाट लिया।

अब थक कर मैं चाची के ऊपर ही लेटा रहा, और चाची भी अपनी जगह से ना हिली। मैंने महसूस किया कि चाची की चूत गिली हो गयी थी। मैं चाची के ऊपर से उठा और चाची की चूत में अपनी सारी उंगलियों से खेलने लगा। चाची की चूत पर अपनी जीभ से सहलाने लगा। चाची सिसकियां लेने लगी, और मैंने अपनी रफतार बढ़ा दी, और जोर-जोर से अपनी जीभ से सहलाने लगा। फिर चाची ने अपना अंदर का माल पिचकारी की तरह मेरे पर निकाल दिया। चाची कपड़े पहन कर बाहर जाने लगी।

चाची: वाह रे, आज तक मुझे ऐसा आनंद नहीं मिला। तू बड़ा ही कमीना निकला।

मैं: आज रात को मैं आपकी चूत फाड़ के ही अपनी प्यास खत्म करने को एक बार फिर आपको चोदना है। रमेश और सुरज की चिंता आप ना करो।

चाची हैरान होते हुए मेरी तरफ देखने लगी। पर आखिरी बार मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा, और उनके होंठों पर एक लम्बी किस दी। फिर चाची अपने कपड़े लेकर चली गयी।

 

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मेरी चुदक्कड़ चाची-3




जैसा कि आपने पिछ्ले पार्ट में पढ़ा कि कैसे मैंने चाची, रमेश, और सुरज की बातें सुन ली, और नहाते समय चाची के मधमस्त बदन का आनंद लिया। अब कहानी में आगे बढ़ते हुए आगे की कहानी आपको बताता हूं।

रात का समय हो चुका था। मैं, चाचा, और सुरज (चाची का भाई) खाना खा कर हाल में बैठ गये। चाची किचन में अपना काम कर रही थी। कुछ एक घंटे तक हम बातें करते रहे। तभी वहां रमेश आया और चाचा, सुरज, और रमेश तीनों बाहर चले गये।

चाची ने मेरा बिस्तर हाल में ही लगा दिया, और चाची अपने रूम में जाके सो गयी। मैं समझ गया था कि छत पर तीनों की मस्त पार्टी चल रही थी, और फिर मैं भी सो गया, क्योंकि उनकी पार्टी अब लम्बी चलने वाली थी।

खैर मैं अपने प्लान से रात को ग्यारह बजे उठा, और स्टोर रूम में जा कर वहां रखी पुरानी कुर्सियों के पीछे छिप गया। कमरे में काफी अंधेरा था। करीब दस मिनट बाद चाची और सुरज वहां पर आये, और आते ही दोनों एक-दूसरे से लिपट गये। सूरज ने चाची को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठो के साथ अपने होंठ जोड़ दिए।

अब दोनों एक-दूसरे के लिप्स चूस रहे थे। काफी मज़ेदार किस कर रहा था सूरज। साथ में चाची की गांड भी दबा रहा था। फिर उसने चाची का पल्लू हटाया, और उसका ब्लाउज खोलने लगा। पर ब्लाउज ना खुलने पर सुरज ने ब्लाउज फाड़ कर फेंक दिया और उसके बाद ब्रा में कसे चाची के बूब्स में अपना मुंह डाल के चाटने लगा। उसका सर चाची के बूब्स में दबा रहा था।

चाची की खुशबु उसको मदहोश कर रही थी, और वो चाची की गर्दन पर काट रहा था। फिर उसने चाची की साड़ी निकाल दी, और पेटीकोट भी नीचे गिरा दिया। अब वो चाची के पीछे आ गया और पीठ पर किस करते हुए उसकी ब्रा खोल कर गिरा दी। फिर उसने अपने कपड़े उतारे, और अंडरवियर में आ गया। उसने चाची को पीछे से बाहों में भर लिया और उसके साथ चिपक गया।

अब दोनों के गरम बदन एक-दूसरे के साथ चिपके हुए थे। उसके हाथ चाची के बूब्स पर थे, और वो बूब्स मसल रहा था। उसका लंड चाची की गांड पर महसूस हो रहा था। फिर उसने चाची की पैंटी में हाथ डाल लिया, और चाची की गर्दन को चूमते हुए उसकी चूत सहलाने लगा। उतनी देर में रमेश वापस आ गया।

दोनों को ये सब करते देख रमेश का लंड खड़ा हो गया। वो भी जल्दी से नंगा हो गया और घुटनो के बल चाची के सामने बैठ गया। फिर उसने चाची की पैंटी पकड़ी और उसको खींच कर निकाल दिया। अब जिस चूत को सूरज मसल रहा था रमेश ने उसमे अपनी जीभ डाल ली।

सूरज ने अपने दोनों हाथ चाची के बूब्स पर रख लिए। अब रमेश नीचे चाची की चूत चाट रहा था, और सूरज चाची के बूब्स मसल रहा था, और चाची की गर्दन और शोल्डर्स पे किस कर रहा था। चाची का तो बुरा हाल हो गया था। उसकी अहह अहह की सिसकारियां निकल रही थी। फिर सूरज ने रमेश को नीचे लेटने को कहा।

रमेश नीचे ज़मीन पर लेट गया। उसके बाद उसने चाची को उसके ऊपर लंड को चूत में लेके बैठने को कहा। वो रमेश के ऊपर बैठी और उसके लंड को अपनी चूत में ले लिया। फिर उसने चाची को रमेश के ऊपर लिटा दिया। असल में वो चाची की गांड मारना चाहता था। उसने चाची के पीछे आके चाची के चूतड़ खोले, और चाची की गांड का छेद चाटने लगा। इससे उसको मज़ा आने लगा।

नीचे से रमेश धीरे-धीरे अपना लंड चाची की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। फिर सूरज ने अपने लंड को हाथ में लिया जो 7 इंच का था और आयल से पूरा भिगो लिया। जब उसने उसको ऐसा करते देखा तो मैं समझ गया कि वो गांड मारने की तैयारी में था। चाची को पता था कि बहुत दर्द होने वाला था। लेकिन अब वो साला कहा मानने वाला था।

उसने रमेश को बोल दिया कि उसको पकड़ कर रखे। फिर जब तक वो कुछ कर पाती, उसने चाची की गांड के छेद पर लंड रख कर ज़ोर का धक्का मारा। आयल की वजह से लंड गांड को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया। उसकी चीख मारने से पहले रमेश ने अपने मुंह से उसका मुंह बंद कर दिया। सूरज ने ताबड़-तोड़ धक्कों से पूरा लंड चाची की गांड में डाल दिया। उसको बहुत दर्द हो रहा था।

लेकिन रमेश उसको किस करके और उसके बूब्स चूस कर उसको गरम करता जा रहा था। 5 मिनट सूरज उसको झटके मारता रहा और चूत में तो लंड था ही। फिर उसको मज़ा आने लगा और वो खुद भी गांड हिला-हिला कर दोनों लंड का मज़ा लेने लगी। अब तीनों आराम से सेट हो गए, और दोनों तेज़ी से चाची की चूत और गांड तोड़ने लगे।

रमेश नशेड़ी हालत में खुद पर काबू नहीं कर पाया, और उसका मुठ भी बीच में ही निकल गया। दोनों की चुदाई से चाची की चूत 3 बार झड़ चुकी थी। चाची पूरी बेहाल होकर खटिया पर लेट गयी। सुरज ने चाची को साईड में लिटाया, और दोनों पैरो को कन्धों पे रख दिया और चाची की चूत में लंड सेट कर

एक ही बार में अंदर डाल दिया। चाची जोर से आवाज निकालने लगी आहह आआह्ह्ह, और जोर से पूरा अंदर डाल, और जोर से कर।

सुरज लगातार चाची को पेलता रहा, और साईड में रमेश थक कर लेटा रहा। दस मिनट के बाद सुरज ने चाची को उठाया, और खुद खटिया पर बैठ गया। चाची को पकड़ कर अपने पैरों पर बिठा लिया। इतना थकने के बाद भी चाची उसके लंड पर जम कर उछल रही थी। सुरज भी पूरी जान से ठोक रहा था।

अब रमेश तो आंखें बन्द कर लेटा हुआ था, और सुरज चाची को ठोकने में लगा हुआ था। तभी मैं धीरे से उठा और रमेश के कपड़ों में ताकत की चार गोलियां रखी थी। उन गोलियों को निकाल कर मैंने अपने पास रख लिया। अब मेरा प्लान खतम हुआ और मैं वापस कुर्सियों के पीछे जाकर छिप गया।

चाची की ठुकाई से वो जम कर उछल रही थी, और उनके गदराए मम्मे आपस में टकरा कर उछल रहे थे। दस मिनट तक ठोकने के बाद सुरज झड़ने वाला था। उसने चाची को खड़ा किया और नीचे बैठा दिया। चाची भी अपने रसीले मम्मों के बीच में लंड फसा कर सहलाने लगी। फिर कुछ देर बाद सुरज चाची के मुंह पर सारा माल निकाल दिया। चाची उंगलियों से सारा माल चाट गयी।

सुरज के झड़ते ही रमेश उठा और अपने कपड़ों में से गोली निकालने लगा। सुरज भी खड़ा हो गया और रमेश के पास गया। रमेश को गोली नहीं मिल रही थी। वो और सुरज दोनों हैरान थे, दोनों के औजार ठंडे पड़ गये थे। रमेश सुरज पर शक कर रहा था, और दोनों आपस में लड़ने लगे। पर कोई फायदा नही था। चाची थकी हुई लेटी रही, और चाची की चूत का पूरा भोंसड़ा बन गया था।

दोनों अपने ठंडे औजार के साथ उठे और कपड़े पहन कर जाने लगे।

रमेश: आज आखरी दिन में तेरी किस्मत अच्छी थी, वरना तेरी मारने का तो अभी और भी मन है ।

चाची: तुम दोनो में तो अब कुछ जान भी नहीं बची है। अब मेरी चूत तो प्यासी ही तड़प जाएगी ।

सुरज और रमेश स्टोर रुम से बाहर चले गये। रमेश आगे से चला गया और सुरज छत पर सो गया। चाची स्टोर रूम में लेटी रही, और उनकी चूत में से माल गिर रहा था। अब चाची भी उठ कर अपने कपड़ों को समेट रही थी। तभी मैं बाहर आया, और चाची मुझे देख कर डर गयी।

इससे पहले चाची चिल्लाती, मैंने उन्हें जम कर चूम लिया, चाची हाथों से मुझे थका रही थी, पर मैंने उन्हें अपने जिस्म से लगा कर चूमना शुरु किया। धीरे-धीरे उनके गदराए बदन को चूमा और मम्में दोनों हाथों से सहलाने लगा।

मैं: चाची आज दोपहर का मजा अधूरा था, अब तो आप भी मेरे लिए तड़प रही हो।

फिर चाची मुसकुराती हुई बोली: आजा अभी मेरी प्यास खत्म नहीं हुई है। देखती हूं तेरे में कितनी जान है अनुज।

चाची मेरे कपड़े निकाल कर मेरा बदन चूमने लगी और में चाची की कमर से हाथ ले जाते हुए, उनके पीछे से चूत में उंगली करने लगा। चाची की चूत गीली हो रही थी। मैं रफ्तार बढ़ाते हुए जोर-जोर से उंगलिया डालने लगा, और चाची का बचा हुआ माल निकल गया।

माल निकलते ही चाची नीचे बैठ गयी और मैंने चाची का सिर पकड़ कर पूरा लंड चाची के मुंह में भर दिया। मैं जोर-जोर से चाची के मुंह को आगे-पीछे करने लगा।पांच मिनट बाद चाची के मुंह से लार टपकने लगा, और चाची का सिर मैंने छोड़ दिया।

चाची सांस लेती हुई बोली: साले इतना जोर से कोन करता है? और तेरा इतना बड़ा लंड मैंने आज तक नही लिया। मेरी तो सांस ही रुक गयी थी ।

उनके मुंह में थूक से मेरा पूरा लंड गीला हो चुका था। अब मैंने चाची को उठाया, और वापस खटिया पर लिटा दिया। चाची भी मेरा लंड अपने अंदर लेने को तैयार थी। मैं चाची के ऊपर लेटा और अपना लंड चूत में सेट कर एक ही बार में अंदर डाल दिया। चाची की तो आवाज़ ही निकल गयी, पर मैं नहीं रुका और जोर लगा कर पेलते रहा। आधे घंटे तक पेलने के बाद मैंने चाची को पलटाया और उनकी गांड में पेलना शुरु कर दिया।

कुछ दस मिनट बाद मैं चाची की गांड में सारा माल निकाल कर झड़ गया, और चाची के बाजू में लेट गया। अब चाची मुझसे चिपक कर लेटी रही।

चाची: वाह रे आज तो तूने मेरी पूरी प्यास खतम कर दी। तेरे अंदर तो बहुत जान है।

अब मैं उठ कर कपड़े पहनने लगा, और चाची अपनी साड़ी लपेट रही थी। इतनी ठुकाई के बाद चाची ठीक से खड़ी भी नहीं हो रही थी। चाची लंगड़ा कर चल रही थी। फिर मैंने चाची को गोद में लिया, और उठा कर उन्हें उनके रुम में लिटा दिया। चाची की गांड पर क्रीम लगाने के बाद वो सो गयी और मैं वापस हाल में जाकर सो गया।

खैर मैं कुछ तीन-चार दिन और गांव में रहा। चाची और मैंने बहुत चुदाई की। कभी खेतो में, तो कभी किचन में, पर चाची जैसी मरदाना औरत को पहली बार चोदना अजग ही मजा था। खैर में अब वापस शहर जाने की तैयारी करने लगा। चाची को आखरी बार एक जम कर चुम्मी दी, और गांड दबा कर मैं शहर के लिये निकल गया।
 
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junglecouple1984

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Hi Friends ab Hindi khatam ho gayi hai..
 

junglecouple1984

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agar aapko lagta hai ke Hinglish ( Hindi story in english ) then replay .
 
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