भाग:–143
बहुत दिन बाद लौटे थे। एक बार फिर कॉटेज की साफ सफाई शुरू की गयी। लगभग 2 घंटे की सफाई और उसके बाद धूल से पूरे तर बतर हो चुके थे।
रूही:– आर्य तुम किचन का समान ले आओ जबतक मैं फ्रेश हो जाती हूं।
आर्यमणि, सहमति जताकर निकला। आर्यमणि जैसे ही बाहर निकला रूही टॉवल लेकर बाथरूम में। लेकिन बाथरूम का दरवाजा बंद करती उस से पहले ही आर्यमणि बाथरूम के अंदर था।
रूही, आर्यमणि को आंखें दिखाती... “आर्य जाओ।”..
आर्यमणि, रूही के कंधे पर हल्की–हल्की मालिश करते.... “मैं भी जवां, तू भी जवां डर है फिर किस बात की?”...
रूही इस हल्की मालिश पर पिघलती हुई, मदहोश सी आवाज में.... “नही, नही अभी नही अभी करो इंतजार।”...
आर्यमणि, रूही के गले पर प्यार से चुम्बन लेते, अपने दोनो हाथ रूही के सुडोल वक्ष पर रखते.... “नहीं नहीं कभी नहीं मैं हु बेक़रार।”
रूही, आर्यमणि से खुद को छुड़ाकर, आर्यमणि को बाहर के ओर धक्का देती.... “बड़े वो हो तुम पिया, जिद क्यों नहीं छोड़ते।”...
आर्यमणि, के ओर मुड़ा और अपने क्ला से उसके टॉप को फाड़कर होंठ से होंठ जकड़ते.... “नहीं नहीं कभी नहीं मैं हु बेक़रार।”
रूही लगभग पूरी पिघलती, आर्यमणि को भींचती, लचरती सी आवाज में आखरी शब्द कही.... “थोड़ा इंतजार।”...
लेकिन अब इंतजार कहां। शरीर से वस्त्र का हर टुकड़ा निकल चुका था और दोनो कई महीनो बाद अपने मिलन की पुरजोर गर्मी निकाल रहे थे। जो हाल यहां था उस से मिलता जुलता हालत इवान और अलबेली का भी था। कई महीनो की प्यास वो दोनो ऊपर बुझा रहे थे।
फिर तो निढल होकर जो ही चारो सोए, सीधा रात में ही जागे। अगले कुछ दिन जैसे छुट्टी में बीते हो। अलबेली और इवान तो फिर भी स्कूल चले जाते थे, लेकिन रूही और आर्यमणि, उनकी तो दिन भर प्यार भरी बातें जारी थी। नवंबर बिता दिसंबर आनेवाला था। और नवंबर के आखरी हफ्ता समाप्त होने के साथ ही फेहरीन अपने कुछ लोगों के साथ आर्यमणि के कॉटेज पहुंच चुकी थी।
आज ओशुन अपने इकलौती साली होने का फायदा उठाकर आर्यमणि से खूब चिपक रही थी, जबकि रूही बार–बार ओशुन को दूर कर रही थी। अंत में यही तय हुआ की 5 दिसंबर को रूही और इवान दोनो फेहरीन के साथ उनके पैतृक देश तुर्की के लिये रवाना हो जायेंगे। आर्यमणि ने भी हामी भर दिया और शादी की तैयारियों के लिये एक लाख डॉलर की राशि थमा दिया। यूं तो फेहरीन वह राशि नही ले रही थी, परंतु रूही की शादी में उसे किसी बात का मलाल न रहे, उसकी तैयारियों के लिये छोटी सी भेंट के रूप में वह राशि थमा ही दिया।
शाम का वक्त था। आर्यमणि और रूही जंगल के बीच घास पर लेटे ऊपर आसमान को देख रहे थे। रूही, आर्यमणि के ओर चेहरा करती... “जान शादी के नाम पर मुझे इतनी दूर क्यों भेज रहे। यहीं सिंपल सी शादी कर लेते है, न।”
आर्यमणि, रूही के गाल पर प्यार से हाथ फेरते.… "हम सबका एक परिवार है रूही। शादी परिवार के बीच हो फिर उसके क्या कहने। वैसे भी मैं यदि अपने परिवार को बताए बिना शादी कर लूं, फिर तो उम्र भर भटकना होगा"...
रूही, आर्यमणि की बात सुनकर ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी। थोड़ी बुझी से थी। वह आर्यमणि से मुंह मोड़कर दूसरी ओर देखने लगी। आर्यमणि भी ठीक उसके सामने खड़े होते... “ए सोना, मेरी हंसी, मेरी जिंदगी... अब ये मायूसी क्यों?”
रूही आर्यमणि के गले लगती…. "कुछ वर्ष पूर्व केवल मरने की ख्वाइश थी। अब तो जीने की चाहत और भी बढ़ गई है।…
रूही, आर्यमणि के गले लगकर अपनी चाहतें बयान करने लगी। तभी अचानक आर्यमणि को कुछ महसूस हुआ और रूही को खुद से अलग करते, सवालिया नजरों से देखने लगा।
रूही, आर्यमणि की सवालिया नजरों को भांप गई और अपनी नजरे नीचे झुकाती.... "माफ करना मैं तुम्हे बताना चाहती थी, लेकिन हिम्मत नही जुटा पाई"…
आर्यमणि बिलकुल बोझिल सा हो गया। अपने घुटनो पर आकर वह रूही के पेट पर हाथ फेरते.… "तुम मुझे बताने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी। फिर क्या सोच रखा था तुमने"…
रूही:– इतना कुछ सोची नही थी। बस मुझे ये बच्चा चाहिए था।
आर्यमणि कुछ पल रूही के पेट पर हाथ फेरता रहा। उसकी आंखे डबडबा गई। वह खड़ा हुआ और रूही के होंठ से अपने होंठ को लगाकर एक प्यारा सा स्पर्श करते.… "ये पल मेरे लिए अदभुत है। हमारा बच्चा इस संसार में आनेवाला है रूही।"…
आर्यमणि का चेहरा उसकी खुशी बयां कर रहा था। रूही अपने बाहें फैलाकर आर्यमणि के गले लग गई। दोनो ही अंदर से काफी खुश थे। गले लगकर जैसे एक दूसरे में खो गये हो। काफी देर तक एक दूसरे के गले लगे रहे। फिर दोनो वहीं पास के एक पेड़ के नीचे बैठ गये। आर्यमणि का सर रूही के गोद में था और रूही प्यार से आर्यमणि के सर पर हाथ फेर रही थी.…
"आर्या…. आर्य"…. रूही प्यार से आर्य के सर पर हाथ फेरती उसे पुकारने लगी...
"हां रूही"…
"आर्य, मुझे ये सब कुछ सपने जैसा लग रहा है। अपना परिवार, प्यारा पति और हम दोनो के बीच और भी प्यार बढ़ाने, हमारा आने वाला बच्चा... जिंदगी से और क्या चाहिए आर्य"…
"हां और क्या चाहिए जिंदगी से। हम तुम और हमारा बड़ा सा परिवार। एक सामान्य सी जिंदगी। लेकिन….."
"लेकिन क्या आर्य.…"
"हम्म्म… कुछ नही बस दिमाग में ऐसे ही कुछ ख्याल आ गया"
"कैसा ख्याल मेरी जान। क्या अब अपनी होने वाली बीवी से भी नही कहोगे"….
"नही बस पूर्व में हुई गलतियां याद आ रही है। काश हमे उन एलियन की कहानी पता न होती। काश इतना रायता फैलाकर हम जी न रहे होते। पहले डर नही लगता था, लेकिन अभी शायद मैं डरा हूं।"
रूही प्यार से आर्यमणि के चेहरे पर हाथ फेरती... "यदि तुम पंगे नही करते तो शायद आज मेरी जगह कोई और होती। क्योंकि तुम्हारे इन्ही पंगों ने मुझे उस घटिया से जगह से निकाला, वरना मैं तो अब भी नागपुर में सरदार खान की गली में होती"…
"हां सही कही। वैसे भी वो एलियन हमारा पीछा नहीं छोड़ने वाले.… इसलिए अब मैं कुछ और ही सोच रहा हूं।"
"क्या सोच रहे हो आर्या"
"शादी के बाद हम प्रशांत महासागर में हजारों मिलों का सफर तय करके एक वीरान से टापू पर चले जायेंगे। मैं पूरी दुनिया से कटकर साधना में लीन हो जाऊंगा"…
"क्या हम डर कर भाग रहे?"
"नही रूही। हम डरकर भाग नही रहे, बल्कि एक बड़ी लड़ाई से पहले उसकी पूरी तैयारी कर रहे।"
"और क्या होगा जब इवान और अलबेली हमारे साथ सफर पर आने से इंकार कर दे।"….
"कहां जाने से कौन इंकार कर रहा है?"…. इनके खोए से आलम को इवान भंग करते, पूछने लगा और वो भी आर्यमणि की तरह ही रूही के गोद में सर रखकर सो गया। पीछे से अलबेली भी वहां पहुंची और वो भी बाकियों के साथ सामिल हो गई।
वहां का माहोल और एक भरा पूरा परिवार को नजरों के सामने यूं प्यार से गोद में लेटे देखकर रूही की आंखें भर आयी। भावनात्मक क्षण थे। दोनो टीन ने मिलकर रूही के आंसू पोछे और तबतक करतब दिखाते रहे जबतक उसकी हंसी नही निकल आयी। कहीं जाने की बात एक बार फिर से इवान पूछने लगा।
बातों का फिर एक लंबा दौड़ चला, जहां पहले तो हर कोई रूही की प्रेगनेंसी के बारे में सुनकर खुशी से झूम गये और बाद में रूही को ऐसा छेड़े की मारे शर्म के बेचारी अपना सर ऊपर नही उठा पायी। तभी आर्यमणि ने सबके बीच अपनी मनसा जाहिर कर दिया। आर्यमणि के वीरान टापू पर जाने के बारे मे थोड़ी सी चर्चा हुई और अंत में सभी प्रशांत महासागर जाने को तैयार हो गये। वहां मौजूद हर कोई बस एक ही बात महसूस कर रहा था, "ईश्वर जब खुशियां देना शुरू किया, फिर दामन पूरे खुशियों से भर दिया।"…
खुशियों से भरी एक अद्भुत शाम बिताने के बाद अल्फा पैक वापस अपने कॉटेज लौट आये।सबकुछ पहले से तय हो चुका था। रूही और इवान नेरमिन के साथ टर्की निकलते वहीं आर्यमणि अपने सभी रिश्तेदारों के साथ रूही को टर्की में मिलता। दिन अपने लय से गुजर रही थी। खुशियां जैसे हर दिन बढ़ती ही जा रही थी।
चला था कारवां नागपुर से। अब देखना था ये सफर कहां जाकार थमता है। फिलहाल तो अल्फा पैक की ओजल अपने आगे का सफर सात्त्विक आश्रम वालों के साथ तय करने निकल चुकी थी, वहीं बचे अल्फा पैक अपना सफर प्रशांत महासागर में तय करने के लिए उसकी तैयारियों में जुट गया.…
आर्यमणि का पूरा कुनवा शिप बनाने वाली एक कंपनी के पास पहुंची। कंपनी के मार्केटिंग हेड ने उन्हे अपने चेंबर में बिठाया और उनकी जरूरतें पूछने लगे.… आर्यमणि अपने लोगों के ओर देखते.… "तो फैमिली मेंबर, क्या–क्या जरूरतें है वो सब बताते जाओ"….
अलबेली, हाथ ऊपर करती हुई, "पहले मैं, पहले मैं" करने लगी... सभी लोग हाथ के इशारे से उसे शुरू होने कह दिये। उसे शुरू होने क्या कहे। टॉयलेट पेपर पर एक किलोमीटर जितना रिक्वायरमेंट लिख कर ले आई थी, जिसे देखकर सभी की आंखें फैल गई...
इधर अलबेली चहकती हुई जैसे ही शुरू होने लगी, ठीक उसी वक्त मार्केटिंग हेड उन्हे रोकते.… "सर पहले मैं ही कुछ पूछ लूं तो ज्यादा अच्छा है।"
आर्यमणि:– हां पूछो...
मार्केटिंग हेड:– सर कितने लोगों का क्रू सफर पर जायेगा"..
आर्यमणि:– 4
मार्केटिंग हेड:– सर क्या आप फिशिंग के लिए बोट लेने आये हैं।
आर्यमणि:– नही, हमे प्रशांत महासागर एक्सप्लोर करना है। हजार मिल का सफर तय करेंगे...
मार्केटिंग हेड:– क्या आप पागल है... 2 इंजीनियर, 2 टेक्नीशियन, 2 सेलर, 1 कैप्टन, 5 वर्किंग स्टाफ, 2 कुक… इतने तो केवल स्टाफ लगेंगे। इसके अलावा सिक्योरिटी के लिए कम से कम 5 गार्ड... 4 लोग में कैसे महासागर एक्सप्लोर करेंगे...
आर्यमणि:– मतलब तुम्हारा बनाया शिप इतना खराब होता है की हमे बीच समुद्र में 4 लोग केवल उसे ठीक करने वाले चाहिए। चलो यहां से...
मार्केटिंग हेड अपने कस्टमर को भागते देख उसे पकड़ते हुए... "हमारे बनाए शिप में अगले 10 साल तक कोई प्राब्लम नही होगी। लेकिन मरीन डिपार्टमेंट इतने क्रू के बिना आपको सफर पर निकलने की इजाजत नहीं देगा"..
आर्यमणि:– वो हमारा सिरदर्द है... तुम्हे कुछ और पूछना है... या फिर हम रिक्वायरमेंट बताएं।
मार्केटिंग हेड:– प्रशांत महासागर एक्सप्लोर करना है और कम लोगों की टीम रहेगी... तो सर ये बताइए आपका बजट क्या है...
आर्यमणि:– तुम समझ गये ना की उतना सफर तय करने के लिए हमे कितनी बड़ी क्रूज शिप चाहिए... तो अब कम से कम कीमत वाली शिप बताओ...
मार्केटिंग हेड:– 400 से 450 मीटर लंबी आपको एक क्रूज शिप देंगे, जिसमे बेसिक फैसिलिटी होगी और कीमत 300 मिलियन यूएसडी तक जायेगी...
आर्यमणि:– और उसके हमे अपने हिसाब के कुछ चीजें चाहिए तो…
मार्केटिंग हेड:– सर बेसिक फैसिलिटी में, वाटर फिल्टर, डबल स्टोरी शिप, ऑलमोस्ट 2 हॉल, 4 स्वीट, 10 कमरे, मिनिजेट पार्किंग, मिनी बोट, लाइफ सपोर्टिंग मेटेरियल, वाटर प्यूरीफायर, जिम, सेपरेट नेविगेटिंग एरिया... इसके अलावा आपको और क्या चाहिए..
अलबेली:– हमे शूटिंग प्रैक्टिस भी करनी है और साथ में फाइट ट्रेनिंग भी... तो वो एरिया भी चाहिए...
आर्यमणि:– फ्यूल एफिशिएंसी इतनी हो की 20000 किलोमीटर तक भी अपना फ्यूल खत्म न हो... स्टोरेज रूम कितना बड़ा होगा वो नही बताए, जिसमे कई बैरल फ्यूल स्टोर करने के साथ–साथ हम बचे एरिया में फूड बेवरेज लोड कर सके...
रूही:– मेडिकल सेक्शन और किचन कहां है...
मार्केटिंग हेड:– ये सब बेसिक फैसिलिटी में आती है। हां लेकिन मेडिकल सेक्शन केवल होगा, इक्विपमेंट आप देंगे। आपकी जरूरत के हिसाब से मैं एक बेसिक लेवल के ऊपर डबल स्टोरी क्रूज बनाता हूं... बेसिक लेवल पर बड़ा सा स्टोरेज, ट्रेनिंग और जिम एरिया हो जायेगा। बाकी सब बेसिक फैसिलिटी ऊपर होगी.…
आर्यमणि:– अब पैसे बता कितने लगेंगे...
मार्केटिंग हेड:– सर एक बेसिक लेवल एक्स्ट्रा बनाना होगा तो अब टोटल प्राइस 325 मिलियन यूएसडी...
अमाउंट सुनकर ही चक्कर आने लगे... चारो आपस में गुपचुप करते... "भाड़ में गया खुद का क्रूज... किसी किराए के शिप में देख लेंगे"… चारो आपस में संगोष्ठी करने के बाद खड़े हो गये... "चलते हैं मार्केटिंग हेड वाले भाई... हमारा इतना बजट नही है।"…
मार्केटिंग हेड:– सर आप 4 लोग ही है ना... हम थोड़ा सा साइज एडजस्ट करके बजट देख लेंगे... आप अपना बजट तो बताइए….
रूही, बड़ी अदा से इठलाती हुई कहने लगी.… "ज्यादा से ज्यादा 10 मिलियन का बजट है।"..
मार्केटिंग हेड:– सर बोट के प्राइस में आप क्रूज खरीदने चले आए.… आइए मैं आपको बोट सेक्शन में लिए चलता हूं।…
आर्यमणि:– रहने दो भाई... ये क्रूज देखने के बाद बोट पसंद नही आयेगी... हम रेंट पर शिप ले लेंगे...
मार्केटिंग हेड:– सर हमारे यहां रेंट फैसिलिटी भी है... आप हमारे रेंट सेक्शन में चलिए... केवल ड्रॉप करके क्रूज को वापस आना हो तो, 2000 यूएसडी एक किलोमीटर के हिसाब से रेंट लगेगा। और एक नाइट का 10000 यूएसडी अलग से चार्ज देना होगा...
आर्यमणि:– नाइट चार्ज 10000 अलग से क्यू…
मार्केटिंग हेड:– एक रात ओवरटाइम करने के लिये क्रू का ये रेट है। उसके बाद अगली सुबह वो फिर से ऑफिशियल ड्यूटी पर होते हैं।
आर्यमणि:– देखिए हमे कई हजार किलोमीटर तय करने है... इसलिए 1000 यूएसडी एक किलोमीटर पर लगाए और नाइट चार्ज 2000…
मोल भाव का दौर चला, अंत में 1500 यूएसडी एक किलोमीटर और 4000 यूएसडी नाइट चार्ज फिक्स हो गया। 5000 यूएसडी एडवांस जमा करना पड़ा जो वापस नही होता और जिस दिन निकलते उस दिन तय जगह के हिसाब से पूरा पेमेंट...
प्रशांत महासागर में उतरने की तो पूरी प्लानिंग हो गयी थी। अब बस जो एक जरूरी बात थी वो ये की एक डॉक्टर को तैयार किया जाये, जो वहां रूही की देख–भाल के लिये मुस्तैद रहे। 2–3 दिन भटकना पड़ा लेकिन कैलिफोर्निया में एक भारतीय मूल के डॉक्टर से इनकी मुलाकात हो गयी। जूनियर डॉक्टर नाम कृष्णन मूर्ति...
बेचारा मूर्ति किस्मत का मारा... जब से हॉस्पिटल ज्वाइन किया था, अब तक एक ढंग का केस नही दिया। कुल मिलाकर वार्ड बॉय बना रखा था, जो केवल टांके और इंजेक्शन के लगाने के लिये था। मूर्ति की कमजोरी का फायदा आर्यमणि ने उठाया और सालाना 1 मिलियन यूएसडी पर हायर किया। मूर्ति बड़ी जिज्ञासावश आर्यमणि से पूछा.… "सर हमे काम कहां शुरू करना है।"…
आर्यमणि भी उतने ही शातिराना अंदाज में कह गया... "सुदूर इलाके में गरीबों की सेवा करनी है और तुम मुख्य डॉक्टर रहोगे... सारे इक्विपमेंट की लिस्ट दे दो.."
डॉक्टर मूर्ति और सभी लोगों के जाने की तारीख तय हो गई... 25 दिसंबर की शाम लॉस एंजेलिस से उन्हे रवाना होना था... डॉक्टर मूर्ति तो फूले न समाए। बेचारे के आंखों में खुशी के आंसू थे... मुख्य डॉक्टर जो लोगों की सेवा करने जायेगा और नाम कमा कर आयेगा... बेचारा मूर्ति...
कैलिफोर्निया में तो जैसे उत्सव सा हो रहा था। और हो भी क्यों न... 16 दिसंबर को जिस परिवार और दोस्तों से टर्की में मिलना था, उसे किसी तरह झांसा देकर 7 दिसंबर को ही कैलिफोर्निया बुला लिया गया था। वैसे आर्यमणि तो अपने दोस्त और परिवार को सीधा टर्की बुलाता लेकिन अलबेली ने अपना चक्कर चलाया और चित्रा सारा मामला सेट करती सबको 7 दिसंबर तक कैलिफोर्निया चलने के लिये राजी चुकी थी। इस पूरे वाक्ये में एक बात रोचक रही, घर के सभी लोग कैलिफोर्निया आ तो रहे थे पर किसी को पता नही था कि आर्यमणि की शादी तय हो चुकी है।
भाग:–144
हालांकि 21 दिसंबर के शादी की खबर तो चित्रा को भी नही थी, किंतु जब अलबेली ने उसे यह खबर दी फिर तो वह फोन पर ही खुशी से झूमने लगी... उसके बाद तो फिर चित्रा ने भी आर्यमणि को उसका प्यारा वेडिंग गिफ्ट देने की ठान ली। यानी की किसी भी तरह से आर्यमणि के माता जया, पिता केशव कुलकर्णी, भूमि दीदी और कुछ अन्य लोगों के साथ 7 दिसंबर की सुबह कैलिफोर्निया पहुंचना। इस पूरे योजना में चित्रा ने निशांत की पूरी मदद ली, इस बात से अनभिज्ञ की निशांत को सब पहले से पता था।
भारत से सभी लोग न्यूयॉर्क पहुंचे चुके थे और न्यूयार्क से कैलिफोर्निया उनकी फ्लाइट सुबह 10 बजे पहुंचती। रूही और इवान तो नेरमिन के पैक के साथ 2 दिन पहले ही टर्की पहुंच चुके थे। अब केवल अलबेली बची थी जो आर्यमणि के उत्साह को झेल रही थी।
आर्यमणि सुबह के 4 बजे ही उठ गया और जाकर सीधा अलबेली को जगा दिया। यूं तो रोज सुबह 4 बजे ही वो जागती थी, लेकिन आज की सुबह अलबेली के लिए सरदर्द से कम नहीं थी। अलबेली रोज की तरह ही अपने ट्रेनिग एरिया में पहुंचकर अभ्यास शुरू कर चुकी थी। इसी बीच आर्यमणि अपने कमरे से बाहर आते.… "अरे तुम तैयार नहीं हुई, हमे एयरपोर्ट जाना है।"..
अलबेली अपना सर खुजाती… "एयरपोर्ट क्यों दादा"..
आर्यमणि:– भूल गई, आज 7 दिसंबर है, सब लोग पहुंच रहे होंगे.…
अलबेली अपने मोबाइल दिखाती.… “बॉस अनलोगों ने कुछ देर पहले न्यूयॉर्क से उड़ान भरी है। सुबह 10 बजे तक बर्कले पहुंचेंगे…
आर्यमणि:– हां अभी तो वक्त है.. एक काम करता हूं सो जाता हूं, वक्त जल्दी कट जायेगा... तुम भी ट्रेनिंग खत्म करके सो जाना...
आर्यमणि चला गया, अलबेली वहीं अपना रोज का अभ्यास करने लगी। सुबह 7 बजे के करीब वो अपना अभ्यास खत्म करके हाई स्कूल के लिए तैयार होने लगी। अलबेली स्कूल निकल ही रही थी कि पीछे से आर्यमणि उसे टोकते.… "स्कूल क्यों जा रही हो... सबको पिकअप करने नही चलोगी"…
अलबेली:– अब कुछ दिन बाद तो वैसे भी यहां के सभी लोग पीछे छूट जाएंगे... जबतक यहां हूं, कुछ यादें और समेट लूं... आप आ जाना मुझे लेने.. मैं वहीं से साथ चल दूंगी...
अलबेली निकल गयी लेकिन आर्यमणि का वक्त ही न कटे... किसी तरह 8.30 बजे और आर्यमणि भागा सीधा अलबेली के स्कूल.… उसके बाद तो बस अलबेली थी और आर्यमणि… कब पहुंचेंगे... कहां पहुंचे... पूछ पूछ कर अलबेली को पका डाला। आखिरकार सुबह के 10 बज ही गये और उनकी फ्लाइट भी लैंड कर चुकी थी।
एक ओर जहां आर्यमणि उत्साह में था, वहीं दूसरी ओर सभी मिलकर निशांत की बजा रहे थे। हुआ यूं की सुबह के 2.10 बजे ये लोग न्यूयॉर्क लैंड किए और सुबह के 3.20 की इनकी कनेक्टिंग फ्लाइट थी। पूरा परिवार कह रहा था की फ्लाइट छोड़ दो लगेज लेंगे पहले... लेकिन जनाब ने सबको दौड़ाते हुए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़वा दिया और समान न्यूयॉर्क एयरपोर्ट अथॉरिटी के भरोसे छोड़कर चले आये...
जब से कैलिफोर्निया लैंड हुये थे पूरा परिवार निशांत को गालियां दे रहा था और एयरपोर्ट अथॉरिटी को बुलाकर अपना सामान अगले फ्लाइट से कैलिफोर्निया भेजने कह रहे थे। इन लोगों ने उन्हे भी इतना परेशान किया की अंत में एयरपोर्ट प्रबंधन के मुख्य अधिकारी को आकार कहना पड़ा की उनका सामान पहले ही न्यूयॉर्क से रवाना हो चुका है, सुबह के 11.30 बजे वाली फ्लाइट से उनका सारा सामान पहुंच जायेगा...
अब हुआ ये की फ्लाइट तो इनकी 10 बजे लैंड कर गयी लेकिन ये लोग एयरपोर्ट के अंदर ही समान लेने के लिये रुक गये... अंदर ये लोग अपने समान के इंतजार में और बाहर आर्यमणि अनलोगो के इंतजार में... और ये इंतजार की घड़ी बढ़ते जा रही थी। एक–एक करके उस फ्लाइट के यात्री जा रहे थे और आर्यमणि बाहर उत्सुकता के साथ इंतजार में था..
आखिरकार सुबह के 11.35 बजे आर्यमणि के चेहरे पर चमक और आंखों में आंसू आ गये जब वो अपने परिवार के लोगों को बाहर आते देखा... वो बस सबको देखता ही रह गया... आर्यमणि को तो फिर भी सब पता था। लेकिन उधर...
जया बस इतनी लंबी जर्नी से परेशान थी। केशव, निशांत और चित्रा की बातों में आकर जया को यहां ले आया, इस वजह से जया, केशव को ही खड़ी खोटी सुना रही थी। वहीं भूमि अपने बच्चे के साथ थी और छोटा होने की वजह से वह काफी परेशान कर रहा था, जिसका गुस्सा wa चित्रा पर उतार रही थी, क्योंकि यहां आने के लिए उसे चित्रा ने ही राजी किया था। बाकी पीछे से चित्रा का लवर माधव और निशांत सबके समान ढो भी रहा था और इन सबकी कीड़कीड़ी का मजा भी ले रहे थे। हर कोई तेज कदमों के साथ बाहर आ रहा था। एयरपोर्ट के बाहर आने पर भी किसी की नजर आर्यमणि पर नही पड़ी।
बाकी सबलोग टैक्सी को बुलाने की सोच रहे थे, इतने में निशांत और चित्रा ने दौड़ लगा दी। पहले तो सब दोनो को पागल कहने लगे लेकिन जैसे ही नजर आर्यमणि पर गई, वो लोग भी भागे... आर्यमणि दोनो बांह फैलाए खड़ा था। चित्रा और निशांत इस कदर तेजी से आर्यमणि पर लपके की तीनो ही अनियंत्रित होकर गिर गये। गिर गये उसका कोई गम नही था, लेकिन मिलने की गर्मजोशी में कोई कमी नहीं आयी।
सड़क की धूल झाड़ते जैसे ही तीनो खड़े हुये, तीनो के ही कान निचोड़े जा रहे थे.… "जल्दी बताओ ये सब प्लान किसका था"…. जया ने सबसे पहले पूछा...
तभी एक जोरदार सिटी ने सबका ध्यान उस ओर आकर्षित किया.… "आप सभी आराम से घर चलकर दादा से मिल लेना... यहां तबियत से शायद खबर न ले पाओ…. क्योंकि घर पर किसी की बहु और पोता इंतजार कर रहा है, तो किसी की भाभी और भतीजा"…. अलबेली ने चल रहे माहोल से न सिर्फ सबका ध्यान खींचा बल्कि अपनी बातों से सबका दिमाग भी घुमा दी...
सभी लोग हल्ला–गुल्ला करते गाड़ी में सवार हो गये। आर्यमणि सफाई देने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन कोई उसकी सुने तब न.… सब को यही लग रहा था की आर्यमणि अपने बीवी और बच्चे से मिलवाने बुलाया है... सभी घर पहुंचते ही ऐसे घुसे मानो आर्यमणि की पत्नी और बच्चे से मिलने के लिए कितने व्याकुल हो... इधर आर्यमणि आराम से हॉल में बैठा... "अलबेली ये बीबी और बच्चा का क्या चक्कर है।"…
अलबेली:– इतने दिन बाद मिलने का ये रोना धोना मुझे पसंद नही, इसलिए इमोशनल सीन को मैंने सस्पेंस और ट्रेजेडी में बदल दिया...
इतने में सभी हल्ला गुल्ला करते हॉल में पहुंचे। घर का कोना–कोना छान मारा लेकिन कोई भी नही था। अब सभी आर्यमणि को घेरकर बैठ गये.…. "कहां छिपा रखा है अपनी बीवी और बच्चे को नालायक".. जया चिल्लाती हुई पूछने लगी…
भूमि:– मासी इतने दिन बाद मिल रहे हैं, आराम से..
जया:– तू चुपकर.... तेरा ही चमचा है न... पूछ इससे शादी और बच्चे से पहले एक बार भी हमे बताना जरूरी नही समझा..
माधव:– शादी का तो समझे लेकिन बच्चे के लिए भी गार्डियन से पूछना पड़ता है क्या?…
चित्रा उसे घूरकर देखी और चुप रहने का इशारा करने लगी।
भूमि:– आर्य, कुछ बोलता क्यों नही...
आर्यमणि:– मैं तो कव्वा के पकड़ में आने का इंतजार कर रहा हूं।..
सभी एक साथ... "महंझे"..
आर्यमणि:– मतलब किसी ने कह दिया कव्वा कान ले गया तो तुम सब कौवे के पीछे पड़े हो। बस मैं भी उसी कौवे के पकड़ में आने का इंतजार कर रहा हूं...
सभी लगभग एक साथ... "ओह मतलब तेरी शादी नही हुई है"…
आर्यमणि:– जी सही सुना शादी नही हुई है। इसलिए अब आप सब भी अपने मन के आशंका को विराम लगा दीजिए और जाकर पहले सफर के थकान को दूर कीजिए।
सभी लोग नहा धोकर फ्रेश होने चल दिये। आर्यमणि और अलबेली जब तक सभी लोगों के लिए खाने का इंतजाम कर दिया। सभी लोग फ्लाइट का खाना खाकर ऊब
चुके थे इसलिए घर के खाने को देखते ही उसपर टूट पड़े। शानदार भोजन और सफर की थकान ने सबको ऐसा मदहोश किया फिर तो बिस्तर की याद ही आयी।
सभी लोग सोने चल दिए सिवाय भूमि के। जो कमरे में तो गई लेकिन अपने बच्चे को सुलाकर वापस आर्यमणि के पास पहुंच गयी... "काफी अलग दिख रहे आर्या..."
आर्यमणि:– बहुत दिन के बाद देख रही हो ना दीदी इसलिए ऐसा लग रहा है.… वैसे बेबी कितना क्यूट है न... क्या नाम रखी हो?...
भूमि:– घर में सब अभी किट्टू पुकारते हैं। नामकरण होना बाकी है...
आर्यमणि:– क्या हुआ दीदी, तुम कुछ परेशान सी दिख रही हो…
भूमि:– कुछ नही सफर से आयी हूं इसलिए चेहरा थोड़ा खींचा हुआ लग रहा है...…
आर्यमणि:– सिर्फ चेहरा ही नही आप भी पूरी खींची हुई लग रही हो.…
भूमि, यूं तो बात को टालती रही लेकिन जिस कौतूहल ने भूमि को बेचैन कर रखा था उसे जाहिर होने से छिपा नहीं पायी। बहुत जिद करने के बाद अंत में भूमि कह दी.… "जबसे तू नागपुर से निकला है तबसे ऐसा लगा जैसे परिवार ही खत्म हो गया है। आई–बाबा का तो पता था, वो करप्ट लोग थे लेकिन जयदेव.. वो भी तेरे नागपुर छोड़ने के बाद से केवल 2 बार ही मुझसे मिला और दोनो ही बार हमारे बीच कोई बात नही हुई। परिवार के नाम पर केवल मैं, मेरा बच्चा, मौसा–मौसी और चंद गिनती के लोग है।"
"प्रहरी के अन्य साखा में क्या हो रहा है मुझे नही पता। उनलोगो ने नागपुर को जैसे किनारे कर दिया हो। यदि किसी बात का पता लगाने हम महाराष्ट्र के दूसरे प्रहरी इकाई जाते हैं, तो वहां हमे एक कमरे में बिठा दिया जाता है जहां हमसे एक अनजान चेहरा मिलता है। जितनी बार जाओ नया चेहरा ही दिखता है। किसी के बारे में पूछो तो बताते नही। किसी से मिलना चाहो तो मिलता नही। सोची थी नागपुर अलग करने के बाद प्रहरी समुदाय में क्या चल रहा है, वो आराम से पता लगाऊंगी लेकिन यहां तो खुद के परिवार का पता नही लगा पा रही। प्रहरी की छानबीन क्या खाक करूंगी। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा"..
आर्यमणि:– जब कुछ समझ में नहीं आये तो सब वक्त पर छोड़ देना चाहिए। ऐसे मौन रहोगी तो कहां से काम चलेगा...
भूमि:– तू मेरी हालत नही समझ सकता आर्य। जिसका पति पास न हो और न ही पास आने की कोई उम्मीद उसके दिल का हाल तू नही समझ सकता...
आर्यमणि:– हां आपके दिल का हाल वाकई मैं नही समझ सकता लेकिन आपकी पीड़ा कम करने में मदद जरूर कर सकता हूं...
भूमि:– मतलब...
आर्यमणि:– मतलब जीजू को ढूंढ निकलूंगा और तुम तक पहुंचा दूंगा...
भूमि:– झूठी दिलासा मत दे। और शैतान तुझे हम सब को यहां बुलाने की क्यों जरूरत आन पड़ी? जनता भी है कितना बड़ा झोखिम उठाया है...
आर्यमणि:– कहीं कोई जोखिम नहीं है दीदी... रुको मैं तुम्हे कुछ दिखता हूं...
आर्यमणि अपनी बात कहकर वहां से उठा और अपने साथ अनंत कीर्ति की पुस्तक लेकर लौटा। अनंत कीर्ति की पुस्तक भूमि के गोद में रखते.… "खोलो इसे"..
भूमि आश्चर्य से आर्यमणि को देखती.… "क्या तुमने वाकई"…
आर्यमणि:– मेरी ओर सवालिया नजरों से देखना बंद करो और एक बार खोलो तो...
भूमि ने जैसे ही कवर को हाथ लगाकर पलटा वह पलट गई। भूमि के आश्चर्य की कोई सीमा नही थी। बड़े ही आश्चर्य से वो वापस से आर्यमणि को देखती... "ये कैसे कर दिया"…
आर्यमणि:– बस कर दिया... यहां प्रकृति की सेवा करते हुये मैने कई पेड़–पौधे को सूखने से बचाया। कई जानवरों का दर्द अपने अंदर समेट लिया। बस उन्ही कर्मो का नतीजा था कि एक दिन इस पुस्तक को पलटा और ये खुल गयी। इसके अंदर क्या लिख है वो तो अब तक पढ़ नही पाया, लेकिन जल्द ही उसका भी रास्ता निकाल लूंगा...
भूमि:– क्या कमाल की खबर दिया है तुमने... मैं सच में बेहद खुश हूं...
आर्यमणि:– अरे अभी तो केवल खुश हुई हो... जब जयदेव जीजू तुम्हारे साथ होंगे तब तुम और खुश हो जाओगी…
भूमि:– जो व्यक्ति किताब खोल सकता है वो मेरे पति के बारे में भी पता लगा ही लेगा।
आर्यमणि:– निश्चित तौर पर... अब तुम जाओ आराम कर लो... जबतक मैं कुछ सोचता हूं...
भूमि, आर्यमणि के गले लगकर उसके गालों को चूमती वहां से चली गयी। अलबेली वहीं बैठी सब सुन रही थी वो सवालिया नजरों से आर्यमणि को देखती... "भूमि दीदी से झूठ बोले और झूठा दिलासा तक दिये"..
आर्यमणि:– कभी कभी कुछ बातें सबको नही बताई जाती...
अलबेली:– लेकिन बॉस जयदेव जैसे लोगों के बारे में झूठ बोलना..
आर्यमणि:– तो क्या करता मैं। बता देता की जैसा तुम शुकेश और मीनाक्षी के बारे में सोच रही वैसा करप्शन की कोई कहानी नही बल्कि उस से भी बढ़कर है। जयदेव भी उन्ही लोगों से मिला है। मिला ही नही बल्कि वो तो तुम्हारे मम्मी पापा के जैसे ही एक समान है।
अलबेली:– हे भगवान... फिर तो भूमि दीदी का दर्द...
आर्यमणि:– कुछ बातों को हम चाहकर भी ठीक नहीं कर सकते। उन्हे वक्त पर छोड़ना ही बेहतर होता है। कई जिंदगियां तो पहले से उलझी थी बस जब ये उलझन सुलझेगी, तब वो लोग कितना दर्द बर्दास्त कर सकते हैं वो देखना है... चलो फिलहाल एक घमासान की तैयारी हम भी कर ले...
अलबेली:– कौन सा घमासान बॉस...
आर्यमणि:– रूही और मेरी शादी का घमासान...
अलबेली:– इसमें घमासान जैसा क्या है?
आर्यमणि:– अभी चील मारो... जब होगा तो खुद ही देख लेना.…
आर्यमणि क्या समझना चाह रहा था ये बात अलबेली को तो समझ में तब नही आयी, लेकिन शाम को जैसे ही सब जमा हुये और सबने जब सुना की आर्यमणि, रूही से शादी कर रहा है, ऐसा लगा बॉम्ब फूटा हो। सब चौंक कर एक ही बात कहने लगे.... "एक वुल्फ और इंसान की शादी"…
"ये पागलपन है।"… "हम इस शादी को तैयार नहीं"… "आर्य, तुझे हमेशा वुल्फ ही मिलती है।"…. "तु नही करेगा ये शादी"…. कौतूहल सा माहोल था और हर कोई इस शादी के खिलाफ... भूमि आवेश में आकर यहां तक कह गयी की वो लड़की तो सरदार खान के किले में लगभग नंगी ही घूमती थी। जिसने जब चाहा उसके साथ संबंध बना लिये, ऐसी लड़की से शादी?…
भूमि की तीखी बातें सुनकर आर्यमणि को ऐसा लगा जैसे दिल में किसी ने तपता हुआ सरिया घुसेड़ दिया हो। कटाक्ष भरे शब्द सुनकर आर्यमणि पूरे गुस्से में आ चुका था और अंत में खुद में फैसला करते वह उस स्वरूप में सबके सामने खड़ा हो गया, जिसे देख सबकी आंखें फैल गयी। वुल्फ साउंड की एक तेज दहाड़ के साथ ही आर्यमणि गरजा…. "लो देख लो, ये है आर्यमणि का असली रूप। और ये रूप आज का नही बल्कि जन्म के वक्त से है। मेरा नाम आर्यमणि है, और मैं एक प्योर अल्फा हूं।"….
To Albeli ne yha bhi apna albelapan dikhaya or Nishant va chitra ke sath milkr sabko bulva liya...
Ruhi ne arya se kuchh din ke liye apni pregnancy chupai pr akhirkar baad me jungle ke bich pedho ki chhav me arya ko dil ka haal sunate huye pahchan hi liya ki ruhi pregnant hai...
Bahut hi khubsurati ke sath darsaya aapne bhai maine abhi tk us khushi ko mahsus nhi kiya hai pr janta hu ki jarur vo kmaal ki hogi jb khud ke bacche ke aane ka abhash hoga...
Sabko bulva liya hai arya ne or idhar bhi arya kuchh der ke liye bach jaye iske liye bhramit kr diya nyi disha me ki arya ki Bibi or baccha unka intjar kar rahe hai Ghar...
Bhumi Di ko ek jhuthi tasalli di hai aisa Albeli ko Lagta hai or arya ne unhe anant Kirti ki book bhi khol kar dikhai hai pr kya sach me real jaydev jinda hai ya maar diya gya tha...
Ruhi ke bare me bhumi Di ko aisa nhi bolna chahiye tha pr kya kare ek to vo Pahle se hi tens hai or baat unke sabse chahite arya ki hai to flow flow me kuchh jyada hi bol gyi...
Arya ne Aaj ruhi ke liye hi sahi pr apne ghar ke samne apna Asli chehra dikha hi diya, ek pure Alfa ke rup me or bta diya ki vo kyA hai kab se hai...
Mind blowing superb updates bhai jabarjast sandar lajvab amazing
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