भाग:–145
भूमि की तीखी बातें सुनकर आर्यमणि को ऐसा लगा जैसे दिल में किसी ने तपता हुआ सरिया घुसेड़ दिया हो। कटाक्ष भरे शब्द सुनकर आर्यमणि पूरे गुस्से में आ चुका था और अंत में खुद में फैसला करते वह उस स्वरूप में सबके सामने खड़ा हो गया, जिसे देख सबकी आंखें फैल गयी। वुल्फ साउंड की एक तेज दहाड़ के साथ ही आर्यमणि गरजा…. "लो देख लो, ये है आर्यमणि का असली रूप। और ये रूप आज का नही बल्कि जन्म के वक्त से है। मेरा नाम आर्यमणि है, और मैं एक प्योर अल्फा हूं।"….
प्योर अल्फा... आर्यमणि एक प्योर अल्फा। सभी लोगों के पाऊं के नीचे से जैसे जमीन खिसक गयी हो। आंखे फाड़े, पूरे भौचक्के और हैरान। वो लोग तो बस आंखें फाड़ आर्यमणि को ही देख रहे थे। उनका बच्चा एक वेयरवोल्फ वो भी प्योर अल्फा।
अलबेली:– बॉस सब घर के लोग है। वापस अपने रूप में आओ...
आर्यमणि:– नही अलबेली इन्हे भी इत्मीनान से देख लेने दो। मानता हूं एक वुल्फ और इंसान की शादी से इंकार हो सकता था, लेकिन रूही के लिये कहे गये शब्द...
आर्यमणि अपनी बात कह ही रहा था तभी उसके गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ पड़ी। भूमि, आर्यमणि को कसकर तमाचा मारती.… "चल वापस अपने रूप में आ। यहां आकर तो मुझे झटके पर झटका लग रहा है। मुझे लगा तू कुछ तो होगा, लेकिन एक प्योर अल्फा। भगवान.. क्या खतरनाक वुल्फ दिख रहा। इतना भव्य रूप तो मैं कल्पना में भी नही सोच सकती। मैं अपनी कही बात के लिये दोनो हाथ जोड़ती हूं। मानती हूं गुस्से में मैं बहुत गलत बोल गयी। लेकिन जहां बात तेरी होती है, मेरे अक्ल पर पर्दा पड़ जाता है।"…
इधर आर्यमणि को थप्पड़ पड़ा उधर आर्यमणि के पिता केशव को जैसे होश आया हो। वह जया को घूरती नजरों से देखते.... “तुम्हे शुरू से पता था न हमारा बेटा क्या है?”
जया:– पता तो तुम्हारे पापा को भी था कि आर्य किसी अलौकिक शक्ति के साथ पैदा हुआ था, लेकिन मेरा बेटा शेप शिफ्ट करने वाला एक प्योर अल्फा होगा, ये तो कल्पना में भी नही था। क्या भव्य स्वरूप है, देखो तो।
भूमि, आर्यमणि को सवालिया नजरों से देखती.... “तुम टेस्ट के दौरान माउंटेन ऐश की रेखा कैसे पार कर गये?.. इतने सारे टेस्ट के बावजूद क्यों तुम्हे पकड़ नही पाये की तुम एक वेयरवोल्फ हो?...
आर्यमणि:– मैं एक प्योर अल्फा हूं। यानी जिनके माता पिता कभी वेयरवुल्फ नही रहे हो लेकिन उसके बच्चे में ये अनुवांशिक गुण आ जाये... मैं एक वेयरवुल्फ हूं ये बात तब तक कोई नही जान सकता जब तक मैं जाहिर न होने दूं... बाकी न तो मेरे और न ही मेरे ब्लड पैक के किसी भी वुल्फ के क्ला या फैंग लगने से कोई वुल्फ बनेगा...
चित्रा:– ओह वेयरवुल्फ का मोडिफाइड वर्जन है अपना आर्य...
जया:– अब मैं इस बात से खुश हो जाऊं या अपनी किस्मत पर आंसू बहा लूं... ये सब तेरे दादा जी के अजीब से चीजों का ही दुष्परिणाम है...
आर्यमणि, किनारे से अपने मां से लिपटते…. "मां कुछ भी दुष्परिणाम नही है। और केवल मैं ही नही बल्कि हम सब इंसान है। हमसे कोई खतरा नहीं" …
जया, आर्यमणि के गाल को चूमती.… "तुझसे कोई खतरा नहीं लेकिन जो तेरा ससुराल पक्ष है उसका क्या? बेटा शादी में थोड़ी बहुत भी बहस हुई, तो तू तो उनसे उलझा होगा यहां वो हमारा मांस नोच रहे होंगे"…
आर्यमणि:– वाह मां अच्छी समीक्षा है। लेकिन आप वेयरवुल्फ तो क्या भयंकर काल जीवों के बीच क्यों न फंसी हो, आपकी सुरक्षा जिनके जिम्मे है वो आप सबको कुछ नही होने देगा ..
चित्रा:– हां मां बाप को बचा लेगा लेकिन अपने दोस्तों को शाहिद करवा देना..
भूमि:– अपनी बहन और छोटे भांजे को भी... स्वार्थी निकला रे..
आर्यमणि:– बस भी करो खिंचाई करना... आप सब सुरक्षित हो। वैसे भी जहां मैं रहूं वहां कोई मेरे परिवार को हाथ लगा ले... ऐसा संभव है क्या?...
केशव:– तुम लोग बस बातें ही करते रहो... 20 दिसंबर की शादी है और तुम सब उसकी कोई तैयारी ही मत करना...
माधव:– हां वही तो... चलो चित्रा हम शॉपिंग करने चलते हैं...
चित्रा:– हां बिलकुल... चलो चलते है। ओय फाइनेंसर... चल हमे डॉलर दे... ताकि खूब लूटा सकूं...
आर्यमणि:– एक पूरी कंपनी दे दी तुम लोगों को... 500 करोड़ की डील साइन किए फिर भी मुझसे पैसे मांग रहे..
निशांत:– कंपनी अभि अपने पहले स्टेज में है... वहां से पैसे नही निकाल सकते। वैसे भी बड़ा नजर बनाये है हम पर?...
भूमि:– लड़के तुझे विदेश की हवा लग गयी क्या... अरबों रुपए जो दिए थे, उसका तो हिसाब ही नही लिया अब तक...
आर्यमणि:– हां समझ गया.. अलबेली सबको क्रेडिट कार्ड दे दो...
यूं तो सब मजाक कर रहे थे लेकिन आर्यमणि ने सबको जबरदस्ती कार्ड थमा दिया। फिर तो शॉपिंग के लिए इन लोगों ने पूरे यूएसए का भ्रमण कर डाला... न्यूयॉर्क से लेकर वॉशिंगटन डीसी तक शॉपिंग करने पहुंच गए। कपड़े, गहने, जूते और भी ना जाने क्या क्या... शॉपिंग से ज्यादा तो ये लोग साथ घूमने का लुफ्त उठा रहे थे...
16 दिसंबर की शाम सभी इस्तांबुल पहुंचे। लड़की पक्ष वालों के ओर से उतना ही गर्मजोशी से सबका स्वागत किया गया। वहां के लोगों को देखकर भूमि हंसती हुई आखिर कह ही दी.… "क्या खाकर इनकी मां ने ऐसे सुंदर लड़के लड़कियों को जन्म दिए है, सब एक से बढ़कर एक दिख रहे"…
एक बड़ा सा रिजॉर्ट ही बुक किया गया था जहां हर गेस्ट का अपना एक स्वीट था। वहां के एकोमोडेशन को देखकर तो सबका दिल खुश हो गया। सब अपने–अपने स्वीट में दिन भर आराम करने के बाद, शाम को एक जगह जमा हुए, जहां लड़का और लड़की दोनो पक्ष के लोग थे। वहां नेरमिन सबको शादी के कार्यक्रम के बारे में समझा रही थी।
इसी बीच रूही और आर्यमणि की नजरें एक दूसरे से टकराई और दोनो की नजरों में एक छोटा सा इशारा भी हो गया। सब लोग यहां अपनी वार्तालाप में लगे हुए थे और ये दोनो वहां से गायब.…
आर्यमणि जैसे ही रूही के पास पहुंचा, उसे कस के गले से लगाते, चूमना शुरू कर दिया.… "आर्य कुछ तो सब्र करो... मुझे बहुत शर्म आ रही है"…
आर्यमणि रूही की आंखों में झांकते.… "सब्र करो, शर्म आ रही... ये सब तो समझा लेकिन तुम्हे देखकर जो दिल का हाल हो रहा उसे तुम मत समझो"…
रूही शरारताना मुस्कान चेहरे पर लाई और अपने हाथ को नीचे आर्यमणि के लिंग तक ले जाते... "ये अंदर में फुदक कर, तुम और तुम्हारे दिल से ज्यादा अपनी भावना बता रहा है आर्या"…
"अच्छा... और इसे पकड़ने के बाद तो तुम्हारे दिल के अरमान सत्संग करने को कर रहा होगा न… ये तो खाली मेरी ही इक्छा है... तुम्हारी तो सारी इक्छा मर गई"…
"इक्छा तो ऐसी है की अभी दिल कर रहा चलो कमरे में और इत्मीनान से प्यार करे लेकिन 4 दिन रुक जाओ। अभी जो भी अरमान दिखाने है, जैसे भी अरमान दिखाने है, सब शादी बाद"…
"आह्हहहहहहहहह... रूही... एक तो शादी तक रुकने भी कह रही, ऊपर से अपने हाथ का अत्याचार भी कर रही... चलो न थोड़ा कंसोलेशन मोहब्बत कर आते हैं।"..
"4 दिन के लिए मैं हूं ना... मुझे सिखा दो कंसलेशन मोहब्बत क्या होती है। सीस को अभी छोड़ दो"… दोनो के खूबसूरत मिलन के बीच ओशुन आते ही अपनी बात कहने लगी... रूही आर्यमणि से अलग होकर उसे घूरती... "तु मेरे हसबैंड से दूर रह... वरना हमारे बहन के रिश्ते अभी इतने गहरे नही हुए जितनी गहराई मेरे प्यार में है। जान निकाल लूंगी"…
ओशुन:– उफ्फ.. पजेसिव गर्ल... मैं तो दिलफेक हूं आर्य पर डोरे भी डालूंगी... अपने होने वाले हसबैंड को कंट्रोल में रख"…
रूही:– आर्य पर पूरा विश्वास है लेकिन तुझ जैसी नागिन जब जाल फैलाएगी तो बेचारा मेरा पति क्या करेगा... इसलिए दूर रहो…
ओशुन:– रूही तुम कल तक तो मुझसे अच्छे से बात कर रही थी। 2 मिनट आर्य के साथ क्या रुक गई, तुम तो पागलों की तरह बिहेव करने लगी...
रूही:– बस तुम आर्य से दूर रहो... बाकी सब अपने आप सही हो जायेगा...
आर्यमणि:– रूही ये क्या तरीका है... हमारे बीच कुछ नही ये तुम्हे भी पता है ना... 2 मिनट साथ हो ही गई तो कौन सा तूफान आ गया...
रूही:– कोइ तूफान नही आया... 2 मिनट क्या पूरे 4 रात तक दोनो रंगरलियां मनाओ… मैं ही यहां पर गलत हूं... जाओ जो करना है करो...
"अरे रूही सुनो तो... रूही... रूही..." आर्यमणि पीछे से आवाज देता रहा लेकिन रूही बिना कुछ सुने तेजी से निकल गई और उसके पीछे–पीछे आर्यमणि भी गया... रूही आर्यमणि की बात को अनसुनी करती सबके बीच जा बैठी। आर्यमणि भी ठीक रूही के पास बैठकर जैसे ही उसके कंधे को पकड़ा.… ठीक उसी वक्त सूप का एक प्याला आर्यमणि के सर पर.… "अरे आप सब हैरान न हो... मेरा आर्य सूप ऐसे ही पीता है। जीभ बाहर निकालो आर्य और जरा स्वाद तो ले लो... मेरी जान को सीधे और उल्टे हर रास्ते से खाने की आदत है।"…
लड़के पक्ष वाले हैरान तो लड़की पक्ष वालों का हंस–हंस कर बुरा हाल। जया आंखों के इशारे से अलबेली और इवान को साथ चलने कही। उसके पीछे पूरा परिवार भी गया। जया थोड़े कड़े लहजे में अलबेली और इवान से रूही की इस हरकत के बारे में पूछने लगी...
अलबेली:– “आंटी ये सभी लड़के कुत्ते की दुम होते हैं। आप लोग को शायद पता नही लेकिन रूही की कजिन सिस्टर ओशुन और बॉस का टांका तब भिड़ा था जब वो पहली बार बिना बताए गायब हुए थे। बॉस तो दिल जिगर और जान से ऐसे प्यार करते थे उसे…. की उसके लिए वुल्फ हाउस की सबसे ताकतवर अल्फा ईडेन को मार गिराए। लेकिन ये ओशुन केवल उस वुल्फ पैक से आजाद होने और दूसरे वोल्फ को मारकर उसकी ताकत हासिल करने के लिए बॉस का इस्तमाल कर रही थी।”…
“खैर ये चेप्टर को क्लोज हुए वर्षों हो गए थे। बॉस ओशुन को भूल भी गए लेकिन फिर अचानक एक दिन ये ओशुन किसी ऐसे कैद में फसी थी, जहां से उसका निकलना नामुमकिन था। अरे उसे बचाने के लिए बॉस ने अपनी जान दाव पर लगा दी और बॉस को बचाने के लिए हम लोग लगभग मर गए थे। ऐसा जहर हमने अपने नब्ज़ में उतारा की बॉस होश में जब आए और हमे हील किया, तब वो खुद एक महीने बाद जागे थे। और ये सब केवल उस ओशुन के जान बचाने के चक्कर में हुआ था।”
“लेकिन कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा तो तब शुरू हुआ जब बॉस एक महीना बाद जागे। उस वक्त हम सब और वो ओशुन भी हमारे कॉटेज में मौजूद थी। हमे लगा बॉस ओशुन को झपट्टा मारकर गले लगाएंगे और उसे लव यू कहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ... बॉस जागे तो उन्हे रूही दीदी के प्यार का एहसास हुआ और उसे ही झपट्टा मारकर गले लगा लिए। एक लड़की जो मन ही मन आर्य को अपने जान से ज्यादा चाहती थी, जिसे कभी उम्मीद नहीं थी की बॉस कभी उस से प्यार भी करेंगे। उस लड़की के दिल के तार छेड़ गए। अब इतनी जान से चाहने वाली कोई लड़की जब अपने प्यार को उस लड़की के करीब देखेगी जिसके लिए बॉस जान को दाव पर लगा आए थे, फिर सोच लीजिए मन में कैसे ख्याल आयेंगे”...
केशव:– लेकिन अब तो दोनो के बीच कुछ नही है न..
जया:– आप चुप करो... दोनो के बीच कुछ नही है... जब दोनो के बीच कुछ नही है और रूही को केवल उस एक लड़की से समस्या है, तो उस से दूरी क्यों नही बना लेता...
इवान:– अरे जाहिलों... बॉस तो कबका दूरी बना लिए.. अभी भी बॉस और दीदी ही साथ में थे, वो तो ओशुन ही पीछे से पहुंची थी और दीदी थोड़ा ओवर रिएक्ट कर गई..
अलबेली:– तुम तो कुछ बोलो ही मत नालायक... ओशुन पीछे से पहुंच गई, तो बॉस नॉर्मल होकर बात करते... जरूर कुछ दिललगी की होगी तभी भाभी भड़की है...
जया:– नही आर्य कुछ नही भी किया हो तो भी रूही भड़क ही जाती... किसी एक स्त्री व
विशेष को लेकर कभी–कभी दिल में डर सा बन जाता है कि कहीं ये मेरे प्यार को मुझसे छीन तो नही रही... मैं दोनो को बिठाकर समझाऊंगी... लेकिन अभी तुम दोनो ये बताओ की दोनो ऐसा क्या कर दिए जो तुम दोनो की शादी भी करवानी पड़ रही है...
अलबेली:– आंटी हम दोनों एक दूसरे को चाहते हैं और रहना सदा साथ में ही है... इसलिए हमने भी शादी करने का फैसला कर लिया...
भूमि:– वाह वाह.. क्या उच्च विचार है... या शायद इतने कम उम्र होने के बावजूद दोनों काबू ही नही रख पाते थे। ओय लड़के तेरी जुड़वा कहां है...
इवान शायद सात्त्विक आश्रम की चर्चा कर देता इसलिए अलबेली टपाक से बोल पड़ी... "बस वही जो आपने कहा दीदी... अब अपनी जुड़वा के सामने ही सर शुरू हो जाते थे, इसलिए उसने हमे छोड़ दिया और इस वक्त वो आर्यमणि के किसी करीबी दोस्त के साथ भारत में ही है।"…
चित्रा:– ये कौन सा करीबी दोस्त है जिसे हम नही जानते..
अलबेली:– कोई टेक्निकल एक्सपर्ट है, उसी के साथ रहकर वो टेक्नोलॉजी का ज्ञान लेगी। फिर वहीं से वो सीधा नागपुर पहुंचेगी... हम सब से पहले...
चित्रा:– और तुम लोग कब नागपुर लौटोगे...
अलबेली:– बॉस की शादी के बाद हम वर्ल्ड टूर पर निकलेंगे... एक लंबा वेकेशन और उसके बाद सब नागपुर...
जया:– चलो ये तो बड़ी अच्छी खबर सुनाई... अब तुम सब जाओ और मेरी होने वाली बहु को केवल भेजना...
सभी लोग चले गए। कुछ देर बाद रूही उस कमरे में पहुंची। थोड़ी डरी थी और भीड़ के बीच जो उसने किया, उस हरकत पर थोड़ी शर्मिंदा भी थी, इसलिए जैसे ही वो जया के सामने पहुंची.… "मां जी मुझे माफ कर दीजिए, उस वक्त थोड़ा गुस्से में थी, इसलिए आपकी सबको मौजूदगी को नजरंदाज करती ऐसा कर गई"..
जया, मुस्कुराती हुई रूही के सर पर हाथ फेरती... "बेटा इतना डरेगी तो सच में कोई आर्य को ले जायेगा"…
रूही:– मैं आर्य के लिए पागल हूं मां। लेकिन ऐसा नही है की इस पागलपन ने मेरा दिमाग खराब किया है। मां पता नही क्यों लेकिन जब भी ओशुन को आर्या के साथ देखती हूं, पता नही क्या हो जाता है। ऐसा लगता है की दिमाग ही ब्लॉक हो गया हो। जबकि पलक के साथ वो पूरा महीने का टूर प्लान कर ले जिसमें मैं नही भी रहूं तो भी किसी प्रकार का ख्याल नही आयेगा।
जया:– हां मैं समझ सकती हूं। लेकिन तुम ऐसे बार–बार पागलों की तरह करोगी तो तुम्हारे बच्चे पर क्या असर पड़ेगा। तुम्हे उस लड़की पर विश्वास नहीं, लेकिन आर्य पर तो है न...
रूही, भौचक्की नजरों से जया को देखती.… "मां आपको कैसे पता"..
जया:– मैं भी कभी मां बनी थी। मैं भी कभी तुम्हारे दौड़ से गुजरी थी। और जिस गुस्से का परिचय तुमने दिया था, वो प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग का नतीजा है। जिनसे खुन्नस खाए होते हैं, उनकी अच्छी बात भी काटने को दौड़ती है..
रूही, जया से लिपट कर... "मां शादी से पहले ही मैं गर्भवती हो गई इस बात से आप नाराज तो नही?"..
जया:– इस बात से नाराज नही बेहद खुश हूं। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के दौरान तुम लापरवाह हुई तब नाराज हो जाऊंगी... खुश रहो और अच्छा खाओ... ताकि बच्चा भी स्वास्थ्य और खुशमिजाज हो"…
रूही:– बस 2–4 दिन और मां… ये ओशुन जब रहती है उतने देर मैं पागल रहती हूं, वरना तो मैं एक नाजुक कली हूं...
जया:– कली से फूल बन गई है रे... अच्छा है जल्दी से वर्ल्ड टूर कर आओ फिर तूझसे खूब सेवा करवाऊंगी...
दोनो में काफी देर तक हंसी मजाक चलता रहा। शाम को नाच गाने के कार्यक्रम का भी आयोजन था जहां रूही सबसे पहले ओशुन से माफी मांगी और आर्यमणि को खींचकर ओशुन के साथ डांस करने भेज दी। कई तरह के कार्यक्रम और झूम कर मजे करने वाली शाम थी। आज तो यह पहला दिन था और अभी तो शादी का रंग जमना शुरू ही हुआ था।
भाग:–146
दोनो में काफी देर तक हंसी मजाक चलता रहा। शाम को नाच गाने के कार्यक्रम का भी आयोजन था जहां रूही सबसे पहले ओशुन से माफी मांगी और आर्यमणि को खींचकर ओशुन के साथ डांस करने भेज दी। कई तरह के कार्यक्रम और झूम कर मजे करने वाली शाम थी। आज तो यह पहला दिन था और अभी तो शादी का रंग जमना शुरू ही हुआ था।
17 दिसंबर की सुबह आर्यमणि अपने पूरे पैक के साथ टहल रहा था तभी उनकी खुशियों को बढ़ाने एक और साथी चली आयी। ओजल उनके बीच चहकती हुई पहुंची और झपट्टा मार कर सीधा अपने भाई के गले लग गयी। उसके बालों को सहलाती, उसके गालों को चूमती... "कामीने तूने मुझे जरा भी मिस नही किया न"…
इवान:– अच्छा... छोड़कर गयी तुम और मुझसे मेरे दिल का हाल जानने के बदले सीधा अपनी बात थोप दी...
"मैं तो मजाक कर रही थी। तू अब भावुक न हुआ"… इतना कह कर वो इवान से अलग हुई और चहकती हुई सबके गले लग गई.…
आर्यमणि:– ये संन्यासी शिवम सर पीछे क्यों खड़े है?
ओजल:– .. मेरी खास सुरक्षा के लिए आये है?
संन्यासी शिवम:– फिर से मस्ती। गुरुदेव मैं ओजल की सुरक्षा के लिये नही बल्कि ओजल से सुरक्षा के लिये आया हूं।
आर्यमणि:– मैं समझा नही।
संन्यासी शिवम:– अभी ओजल यहां आ गयी है तो मेरी बात भी समझ में आ जायेगी। फिलहाल छोटे गुरुदेव (अपस्यु) पलक के साथ सीखने में कुछ ज्यादा व्यस्त थे इसलिए विवाह में नही पहुंच पाने का उन्हे खेद है। बाकी आपकी शादी के मंत्र पढ़ने के लिये आचार्य जी ने मुझे भेजा है। उन्होंने खास तौर से यह कहा था कि विवाह के दौरान पढ़े गये वैदिक मंत्र के संपर्क में एक भी पत्थर नही आना चाहिए, इसलिए एमुलेट को वो लोग मेरे पास अभी जमा कर दे। वो सबके पास अपने आप पहुंच जायेगा। आपकी शादी में कोई विघ्न न आये इसके लिये 11 संन्यासी हमेशा तत्पर रहेंगे। खुल कर इस शादी का लुफ्त उठाए।
आर्यमणि:– टीम आचार्य जी की बात का खास ख्याल रहे... और यहां के मस्ती में कोई कमी न रहे...
अल्फा पैक पूरा हो चुका था। सब हंसी खुशी साथ घूमने निकले। चलते हुए आर्यमणि एक मैदान में पहुंचा जहां ओशुन अपने कुछ साथियों के साथ खेल रही थी। ये नेरमिन के पैक का हिस्सा तो नही थे लेकिन आर्यमणि सबको पहचानता था। ये वुल्फ हाउस के वही बीटा थे जो वहां के अल्फा को मारकर उसकी ताकत को हासिल करके भागे थे। कुल 5 लोग थे... अजरा, रोज, लिलियन लोरीश, जाइनेप यलविक और ओशुन।
उन लोगों की नजर जैसे ही आर्यमणि पर गयी.…. "क्यों मेरे तन बदन की आग एक बार फिर वही पुराना गेम शुरू करे क्या?"…. दिलफेक रोज जो अक्सर आर्यमणि को छेड़ा करती थी, एक बार फिर छेड़ती हुई कहने लगी...
रूही, गुस्से में उस रोज को घूरती.… "ये लड़की कौन है आर्य"
आर्यमणि:– तुम्हे याद है मैने वुल्फ हाउस की एक कहानी बताई थी जिसने 5 लोग अल्फा बनकर निकले थे..
रूही:– हां...
आर्यमणि:– ये वही पांचों है...
अल्फा पैक ने जैसे ही यह सुना, सबकी आंखों में जैसे खून उतर आया हो... चारो ही तेजी से उनके ओर भागे... वो लोग भी अपना खेल छोड़कर अल्फा पैक ओर भागे... तभी बीच में नेरमिन किसी रेफरी की तरह पहुंची और दोनो पक्ष को पीछे हटाती.… "ये सब क्या है यालविक... यदि हमारा यहां आना तुम्हे पसंद नही था तो पहले बता देते... लेकिन शादी का यूं माहोल तो खराब मत करो"…
जाइनेप यलविक:– हमारे क्षेत्र में आकर यही लोग हम पर हमला करने की सोच रहे थे नेरमिन। अपने मेहमानों को पहले वेयरवुल्फ और उसके लिy उसका इलाका क्या होता है वो समझाओ। और उसके बाद ये समझाओ की याल्विक के पैक से पंगा लेने पर क्या होगा? जाओ चूजों, मेहमान हो इसलिए बच गये लेकिन हर बार नही बचोगे फिर चाहे बीच में नेरमिन ही क्यों न आ जाये...
आर्यमणि:– तुम सब आ जाओ... सुना नही ये किसका इलाका है... हम शादी का मजा लेते है, उन्हे अपने इलाके का मजा लेने दो...
रोज:– इलाके का प्रतिबंध तुम पर नही है आर्यमणि… क्योंकि हम सब यहां तुम्हारी वजह से ही तो है...
आर्यमणि:– जरा धीरे बोलो रोज कहीं यालविक को बुरा न लग जाए।
यालविक:– नही चुतिए मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगेगा। रोज सही बोली, तेरे ऊपर सीमा प्रतिबंध नही है। जरा यहां तो आ और अपने पैक को दिखा की कैसे हम तेरी लेते थे।
अजरा:– तू तो इसे देखकर समलैंगिक हो गया था बे…
ये लोग आपस में चिल्लाकर कह रहे थे और इधर अल्फा पैक के सभी वुल्फ अपना आपा खो रहे थे... "बॉस शादी गई भाड़ में, आज तो उन्हे सबक सिखाकर जायेंगे"… अलबेली पूरे आवेश में आ कर बोली... जिसके बात का समर्थन सबने किया...
आर्यमणि:– ओजल इस वक्त तुम ही संतुलित दिख रही। सबको यही रोककर रखो...
आर्यमणि अपनी बात कहकर तेजी से निकला। इस बार भी नेरमिन बीच में आयी... "आपने सुना नही यालविक ने क्या कहा, सीमा विवाद मुझ पर लागू नहीं होता... अब जरा रास्ते से तो हटो"…
यालविक:– रास्ते से हट जाओ नेरमिन, चुतिये से जरा हम मिल ले...
जैसे ही नेरमिन उनके बीच से हटी वैसे ही आर्यमणि उनके बीच पहुंचा... यालविक ने सीधा आर्यमणि का गला दबोच लिया अपने क्ला को उसके कमर में घूसाकर पैंट फाड़ने वाला था। लेकिन तभी आर्यमणि ने कमर पर गई हाथ को पकड़ा और उल्टा घुमा दिया... कड़क की आवाज के साथ उसकी हड्डी चूर हो गई। अगले ही पल आर्यमणि ने पहले यालविक के टी–शर्ट को पकड़ा और उसे खींच कर निकाल दिया।
जैसे ही ये कारनामा हुआ यालविक का पूरा पैक दौड़ गया लेकिन अगले ही पल आर्यमणि हवा में हाथ ऊपर किया और 360⁰ पूरा घूमकर माउंटेन ऐश फैला दिया। जमीन पर गिरते ही माउंटेन ऐश की गोल दीवार बन गई। जितनी तेजी से वो लोग करीब आ रहे थे, माउंटेन ऐश की सीमा से टकराकर वो हाल हुआ की सबकी हालत खराब हो गई।
टी–शर्ट निकाला, हवा में माउटेन ऐश बिखेरा और फिर एक ज़ोरदार लात उसके सीने पर। यालविक जाकर माउंटेन ऐश की दीवार से टकराया और उसके मुंह से पूरा झाग, थूक निकलने लगा। आर्यमणि बिना कोई वक्त गवाए यालविक के बचे कपड़े उतारकर उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी इतनी हालत नही थी की वो उठकर बैठ सके आर्यमणि पर हाथ उठाना तो दूर की बात है। वैसे एक बात और थी, जितने भी वेयरवुल्फ थे उन्होंने हमला करने के लिए अपना शेप शिफ्ट किया था सिवाय आर्यमणि के, जो बिना शेप शिफ्ट किये यालविक को उसके बड़बोलेपन की सजा दे रहा था।
यालविक के हाथ की हड्डी नही बची। सीने की हड्डी गई और माउंटेन ऐश की दीवार से टकराने की वजह से उसे 2 सेकंड के लिए उससे 1200 वोल्ट का झटका भी लगा था। आर्यमणि आराम से नीचे बैठा... प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते... "अकेले में कहता न तो मैं चुप चाप चला जाता। किसी शांत इंसान को उसके परिवार के सामने बेज्जती नही करना चाहिए यही आज का तुम्हारा सबक है।"…
"अ.. आ.. आर्य.. ब.. ब... बहुत दर्द हो रहा है"… किसी तरह कर्राहते हुए यालविक गुहार लगाने लगा... आर्यमणि अपना हाथ डालकर उसकी पीड़ा को हरने लगा। जैसे–जैसे दर्द कम होता जा रहा था वैसे–वैसे वो असीम सुख अपने अंदर महसूस कर रहा था। और जैसे ही वो पूरा हील हुआ अगले ही पल फिर एक बार सीधा अपने फेंग आर्यमणि के गर्दन में घुसा दिया।
इस बार आर्यमणि कुछ टॉक्सिक को अपने हथेली में प्रवाह करते हुए उसके सर पर ऐसा पंजा मारा की हथेली जितना जगह मे उसका पूरा सर गंजा हो गया और उसके सर से धुवां उठने लगा.. ऐसा लगा जैसे पिघला लावा किसी ने सर पर डाल दिया हो। बाप–बाप चिल्लाने लगा...
आर्यमणि उसे वही चिंखता छोड़ अपने कदम जैसे ही आगे बढ़ाया, सभी वोल्फ की आंखें फैल गई। और जैसे ही आर्यमणि ने माउंटेन ऐश की दीवार पार किया, सभी गहरे सदमे में चले गए... "आखिर से संभव कैसे हुआ"..
किसी तरह रोज, आजरा, लिलियन और ओशुन खड़े हुए लेकिन अगले ही पल आर्यमणि मात्र अपने नजरों के इशारे से उन्हे घुटने पर ला दिया। ऐसा एनिमल कंट्रोल इंस्टिंक्ट देखकर खुद नेरमिन भी हैरान थी.… तभी पहली बार उस जगह पर आर्यमणि की आवाज गूंजी.…
"पूर्व में क्या हुआ था और क्या नही, वो तुम सब जितनी जल्दी भूल जाओ उतना बेहतर है। एक बात याद रहे, किसी भी वजह से यदि दोबारा मेरी फैमिली को जिल्लत झेलनी पड़ी फिर तुम लोग सोच भी नही सकते की मैं कितना दर्द दे सकता हूं। कुत्तों के सीमा नियम कुत्तों पर लागू होते है, शेर जंगल का राजा होता है और पूरी जंगल ही उसकी सीमा है... ये बात अपने दिमाग में डाल लो। खासकर तुम ओशुन, क्योंकि तुम्हारा जो वहम था न की कोई तुम्हे कंट्रोल नही कर सकता वो शायद अब टूट गया होगा। अब जरा मैं अपने पैक के साथ समय बिता लूं। शादी के मजेदार पल को मैं तुम जैसे बदबूदार मल पर बर्बाद नही कर सकता"…
अलबेली दो उंगली अपने मुंह में डालकर कान फाड़ सिटी बजाती.… "बॉस इनका पिछे से पिछवाड़ा फटकर फ्लावर हो गया है। चलो यहां से वरना कहीं दिल का दौड़ा पड़ गया तो शादी में शोक की शहनाई गूंजने लगेगी"…
अलबेली की बात पर सभी हंसते हुए निकले। इधर आर्यमणि ने अपने आंखों से ऐसा कंट्रोल किया की उसके जाने के 2–4 घंटे बाद तक वो लोग वैसे ही घुटनो पर रहे। पूरी तरह से खौफजदा हो चुके थे। यालविक के 250 वुल्फ का पैक उस रिजॉर्ट में पहुंचा। उनका मुखिया सदक यालविक जब सुना की एक ऐसा वुल्फ भी है जो माउंटेन ऐश हो पार कर गया, सुनकर ही वो सकते में आ गया।
यूं तो वो हमला करने के इरादे से आया था लेकिन जाइनेप यलविक उन सबको रोकते.… "सादिक तुम अपने अल्फा और बीटा को वुल्फ साउंड से कंट्रोल करते हो, वो मात्र नजरों से कंट्रोल करता है। उसे चिल्लाने की भी जरूरत नही। ईडन जैसी केवल फर्स्ट अल्फा को उसने नही मारा, बल्कि जिस सरदार खान के डर से अपना पूरा पैक छिप जाता था उस सरदार खान को मारकर, वहां से फेहरीन की बेटी रूही को निकाल लाया। वो केवल शादी के लिये यहां आया है, मुझसे ही गलती हुई जो उसे कमजोर समझकर उकसा दिया"…
सादिक गहरी श्वांस लेते.… "मतलब वो लड़ाई की चुनौती देकर हमारा पैक तोड़ने नही आया"..
नेरमिन:– बिलकुल नहीं... शादी की इजाजत तो मैं खुद मांगने आयी थी ना...
सादिक:– ठीक है फिर, उसे शादी करके जाने दो... हम बेकार में उनसे क्यों उलझे... देखा जाए तो माउंटेन ऐश की सीमा में वो तुम्हे मार सकता था लेकिन उसने तुम्हे हील किया। अच्छा वुल्फ है... ऐसे वुल्फ से दोस्ती बनाकर रखने में ही फायदा है... नेरमिन आज रात जश्न का दावत दो...
नेरमिन:– वो वुल्फ की दावत में नही आ सकता क्योंकि वो अपने कुछ इंसानी दोस्त और रिश्तेदार के साथ आया है। तुम ही रिजॉर्ट चले आओ।
सादिक:– हम्मम ठीक है, कुछ लोगों के साथ मैं ही मिलने आता हूं।
17 दिसंबर की शाम सादिक अपने कुछ वुल्फ के साथ आर्यमणि के शादी की जश्न में सामिल हुआ। एक बड़े से लॉन में इनकी पार्टी चल रही थी जब सादिक वहां पहुंचा। यूं तो पहुंचा था आर्यमणि से मिलने लेकिन सामने भूमि को देखकर.… "एक वेयरवुल्फ और एक शिकारी की दोस्ती"…
भूमि:– सादिक... यालविक पैक के मुखिया... मैं भूल क्यों गयी की तुमसे यहां मुलाकात हो सकती है...
सादिक:– मैं तो अपने पैक केड ओर से माफी मांगने और आर्यमणि के ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने आया था लेकिन, अब लगता है कि जान बचाकर भागने की नौबत आ गयी हैं..
भूमि:– मजाक अच्छा था... वैसे कहां है तुम्हारा 400 का बड़ा सा पैक... हमला करने के लिए इतना इंतजार क्यों कर रहे...
सादिक:– इंसानों के बीच हम अपनी पहचान जाहिर नही करते... और न ही किसी भी प्रकार के हमले के इरादे से आए हैं...
आर्यमणि:– सादिक यालविक, आप मेरी शादी में शरीक हो रहे ये हमारी खुशकिस्मती है। आज सुबह जो कुछ भी हुआ वो मात्र एक छोटी सी गलतफहमी का नतीजा था, वरना लड़ाई–झगड़े को मैं कभी पसंद नही करता...
सादिक:– तभी तो शांति और दोस्ती की बात करने आया हूं।
आर्यमणि:– बेफिक्र रहिए यहां शांति ही रहेगी। और रही बात दोस्ती की तो हम दोस्त तो नही हो सकते। लेकिन विश्वास कीजिए आप मेरे अपने है। अच्छे काम के लिए जब भी मुझसे सपर्क कीजिएगा मैं आपके साथ खड़ा रहूंगा...एक सच्चे सहायक के रूप में... अब जरा माफ कीजिए.. मैं बाकी लोगों से भी मिल लूं...
आर्यमणि, अपनी बात कहकर वहां से निकला और निशांत के पास आकर बैठ गया। दोनो बीयर की एक घूंट पीकर एक दूसरे को देख मुस्कुराने लगे। कुछ नए पुराने, खट्टे मीठे बातों से कारवां शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। एक–एक करके लोग आते रहे और उनके साथ जुड़ते रहे...
निशांत जब भी आर्यमणि के मजे लेता एक बार रूही से जरूर कहता, "माफ कीजिएगा भाभी, अभी अपने पति के बारे में सुनकर मूझपर गुस्सा न होना"… इतने छोटे से सफाई के बाद निशांत जो ही आर्यमणि की खिंचाई करता... फिर काहे का अल्फा, बीटा और गामा का लिहाज... सभी टीन वुल्फ अपने बॉस की खिंचाई का पूरा आनंद उठा रहे थे।
18 दिसंबर, शाम के लगभग 6 बजे, मुंबई की किसी खुफिया जगह पर बहुत से लोग मिल रहे थे। लगभग 100 लोगों की ये सभा थी, जिसमे कुछ जाने पहचाने चेहरे भी थे। सुकेश भारद्वाज उनमें से एक प्रमुख नाम, जो सबको शांत रहने का इशारा करते.… “यहां जितनी भी बातें होंगी वो आपके दूसरे नायजो साथियों को भी पता न चले। यहां जितने लोग है, वो किसी से भी इस मीटिंग की चर्चा नही करेंगे। आगे की मीटिंग के लिये मैं विवियन को बुलाना चाहूंगा जो हुर्रीयेंट प्लेनेट पर अपने तेज दिमाग और 12000 खूंखार टुकड़ी की कमांडिंग के लिये मशहूर है।”...
विवियन:– एक नाग फन फैलाए हमे डशने की कोशिश कर रहा। हमारा बहुत नुकसान कर चुका है। उसने वाकई दिखा दिया की वह खतरनाक है और किस हद तक कुरुर हो सकता है। हमे डराकर, हमारे अस्तित्व को चुनौती देकर, हमसे पृथ्वी छोड़ने की धमकी देकर, वह बेखौफ घूम रहा। क्या हम इतने कमजोर हो गये की अदना से वोल्फ पैक और दुर्बल से सात्त्विक आश्रम से डर जाये?”...
पूरी भीर आक्रोश में आते.... “उसका सर धर से अलग कर, चौराहे पर टांग देंगे।”...
“तो फिर चलते है.... हमारी ये 100 की टुकड़ी उस आर्यमणि को उसके शादी पर मौत का तोहफा देकर आये।”.... विवियन ने जोश भरा और चारो ओर से मारो–मारो, मार डालो की गूंज उठने लगी।
Viviyan aaya hai huriyant planet se senapati ke rup me or meating arrange ki hai sukesh ne assure Thik se sadi bhi nhi karne dena chahte...
Ye Osun abhi tk apne ghamand me rhi hai Jo apne sath bhage 4ro werewolf ko uksa kr arya ko bully karva rhi thi, arya ne kya sandar show dikhaya hai unhe sath hi Nemrin ko bhi, arya ki baat sahi hai, koi bhi nhi chahta ki koi uski family ya family ke samne bejjati Kare, or Yadi koi Karne ki Kosis karta hai to use sabak sikhana banta hai or arya ne Jabardast sabak sikhaya hai, sabko hi control kr liya apni ankho se Kai ghanto ke liye...
Ruhi or arya ki story short me Albeli Evan ne bta diya jaya or Keshav ji ko Vahi ruhi ko bula kar use samjha diya ki use kya karna hai or uske sath kya ho rha hai, unhe uske pregnant hone ka bhi bta diya ki mood swing hone se aisa ho rha tha...
Sadik yalvik ne arya ke bare me sun kr usse dosti karne pahuch gya pr arya ne use jarurat padne pr madad karne ka asvasan diya pr dosti nhi ki, yah bhi sahi hai ki Har koi dost banne ke kabil nhi hota, kuchh log jan pahchan vale bhi ho sakte hai...
Ojal pahuch chuki hai sanyashi shivam ji ke sath pr yha aakr vo kah rhe hai ki Vo pichhe isliye khade hai kyoki Vo Ojal se bach rhe hai, mtlb apni Ojal ne asram me khub masti ki hai khub pareshan kiya hai pure asram ko apni shaitaniyo se...
Un chamatkarik pattharo ko pendent sahit shivam ji ne apne pass rakh liya hai kyoki jo mantra sadi me sunaye Jane vale hai unse Sayad vo dampatti or bacche ko uchit labh prapt hone vala hai...
Shivam ji ne 8 sanyashi rakshak lagaye hai har samay suraksha ke liye pr Vo sukesh jo 100 logo ki tukdi ke sath aane wala hai, kya unko rok payenge ya fir apne Nishant or arya logo ko bhi hissa lena padega (kaisa chutiyo vala saval kiya Maine, sala bina arya or team ke kaisa maza, jb sukesh ki gamle me chhed kiye ja rhe ho) mtlb sadi me maza aane vala hai Jabardast...
Superb Lajvab amazing updates bhai sandar wonders