भाग:–146
दोनो में काफी देर तक हंसी मजाक चलता रहा। शाम को नाच गाने के कार्यक्रम का भी आयोजन था जहां रूही सबसे पहले ओशुन से माफी मांगी और आर्यमणि को खींचकर ओशुन के साथ डांस करने भेज दी। कई तरह के कार्यक्रम और झूम कर मजे करने वाली शाम थी। आज तो यह पहला दिन था और अभी तो शादी का रंग जमना शुरू ही हुआ था।
17 दिसंबर की सुबह आर्यमणि अपने पूरे पैक के साथ टहल रहा था तभी उनकी खुशियों को बढ़ाने एक और साथी चली आयी। ओजल उनके बीच चहकती हुई पहुंची और झपट्टा मार कर सीधा अपने भाई के गले लग गयी। उसके बालों को सहलाती, उसके गालों को चूमती... "कामीने तूने मुझे जरा भी मिस नही किया न"…
इवान:– अच्छा... छोड़कर गयी तुम और मुझसे मेरे दिल का हाल जानने के बदले सीधा अपनी बात थोप दी...
"मैं तो मजाक कर रही थी। तू अब भावुक न हुआ"… इतना कह कर वो इवान से अलग हुई और चहकती हुई सबके गले लग गई.…
आर्यमणि:– ये संन्यासी शिवम सर पीछे क्यों खड़े है?
ओजल:– .. मेरी खास सुरक्षा के लिए आये है?
संन्यासी शिवम:– फिर से मस्ती। गुरुदेव मैं ओजल की सुरक्षा के लिये नही बल्कि ओजल से सुरक्षा के लिये आया हूं।
आर्यमणि:– मैं समझा नही।
संन्यासी शिवम:– अभी ओजल यहां आ गयी है तो मेरी बात भी समझ में आ जायेगी। फिलहाल छोटे गुरुदेव (अपस्यु) पलक के साथ सीखने में कुछ ज्यादा व्यस्त थे इसलिए विवाह में नही पहुंच पाने का उन्हे खेद है। बाकी आपकी शादी के मंत्र पढ़ने के लिये आचार्य जी ने मुझे भेजा है। उन्होंने खास तौर से यह कहा था कि विवाह के दौरान पढ़े गये वैदिक मंत्र के संपर्क में एक भी पत्थर नही आना चाहिए, इसलिए एमुलेट को वो लोग मेरे पास अभी जमा कर दे। वो सबके पास अपने आप पहुंच जायेगा। आपकी शादी में कोई विघ्न न आये इसके लिये 11 संन्यासी हमेशा तत्पर रहेंगे। खुल कर इस शादी का लुफ्त उठाए।
आर्यमणि:– टीम आचार्य जी की बात का खास ख्याल रहे... और यहां के मस्ती में कोई कमी न रहे...
अल्फा पैक पूरा हो चुका था। सब हंसी खुशी साथ घूमने निकले। चलते हुए आर्यमणि एक मैदान में पहुंचा जहां ओशुन अपने कुछ साथियों के साथ खेल रही थी। ये नेरमिन के पैक का हिस्सा तो नही थे लेकिन आर्यमणि सबको पहचानता था। ये वुल्फ हाउस के वही बीटा थे जो वहां के अल्फा को मारकर उसकी ताकत को हासिल करके भागे थे। कुल 5 लोग थे... अजरा, रोज, लिलियन लोरीश, जाइनेप यलविक और ओशुन।
उन लोगों की नजर जैसे ही आर्यमणि पर गयी.…. "क्यों मेरे तन बदन की आग एक बार फिर वही पुराना गेम शुरू करे क्या?"…. दिलफेक रोज जो अक्सर आर्यमणि को छेड़ा करती थी, एक बार फिर छेड़ती हुई कहने लगी...
रूही, गुस्से में उस रोज को घूरती.… "ये लड़की कौन है आर्य"
आर्यमणि:– तुम्हे याद है मैने वुल्फ हाउस की एक कहानी बताई थी जिसने 5 लोग अल्फा बनकर निकले थे..
रूही:– हां...
आर्यमणि:– ये वही पांचों है...
अल्फा पैक ने जैसे ही यह सुना, सबकी आंखों में जैसे खून उतर आया हो... चारो ही तेजी से उनके ओर भागे... वो लोग भी अपना खेल छोड़कर अल्फा पैक ओर भागे... तभी बीच में नेरमिन किसी रेफरी की तरह पहुंची और दोनो पक्ष को पीछे हटाती.… "ये सब क्या है यालविक... यदि हमारा यहां आना तुम्हे पसंद नही था तो पहले बता देते... लेकिन शादी का यूं माहोल तो खराब मत करो"…
जाइनेप यलविक:– हमारे क्षेत्र में आकर यही लोग हम पर हमला करने की सोच रहे थे नेरमिन। अपने मेहमानों को पहले वेयरवुल्फ और उसके लिy उसका इलाका क्या होता है वो समझाओ। और उसके बाद ये समझाओ की याल्विक के पैक से पंगा लेने पर क्या होगा? जाओ चूजों, मेहमान हो इसलिए बच गये लेकिन हर बार नही बचोगे फिर चाहे बीच में नेरमिन ही क्यों न आ जाये...
आर्यमणि:– तुम सब आ जाओ... सुना नही ये किसका इलाका है... हम शादी का मजा लेते है, उन्हे अपने इलाके का मजा लेने दो...
रोज:– इलाके का प्रतिबंध तुम पर नही है आर्यमणि… क्योंकि हम सब यहां तुम्हारी वजह से ही तो है...
आर्यमणि:– जरा धीरे बोलो रोज कहीं यालविक को बुरा न लग जाए।
यालविक:– नही चुतिए मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगेगा। रोज सही बोली, तेरे ऊपर सीमा प्रतिबंध नही है। जरा यहां तो आ और अपने पैक को दिखा की कैसे हम तेरी लेते थे।
अजरा:– तू तो इसे देखकर समलैंगिक हो गया था बे…
ये लोग आपस में चिल्लाकर कह रहे थे और इधर अल्फा पैक के सभी वुल्फ अपना आपा खो रहे थे... "बॉस शादी गई भाड़ में, आज तो उन्हे सबक सिखाकर जायेंगे"… अलबेली पूरे आवेश में आ कर बोली... जिसके बात का समर्थन सबने किया...
आर्यमणि:– ओजल इस वक्त तुम ही संतुलित दिख रही। सबको यही रोककर रखो...
आर्यमणि अपनी बात कहकर तेजी से निकला। इस बार भी नेरमिन बीच में आयी... "आपने सुना नही यालविक ने क्या कहा, सीमा विवाद मुझ पर लागू नहीं होता... अब जरा रास्ते से तो हटो"…
यालविक:– रास्ते से हट जाओ नेरमिन, चुतिये से जरा हम मिल ले...
जैसे ही नेरमिन उनके बीच से हटी वैसे ही आर्यमणि उनके बीच पहुंचा... यालविक ने सीधा आर्यमणि का गला दबोच लिया अपने क्ला को उसके कमर में घूसाकर पैंट फाड़ने वाला था। लेकिन तभी आर्यमणि ने कमर पर गई हाथ को पकड़ा और उल्टा घुमा दिया... कड़क की आवाज के साथ उसकी हड्डी चूर हो गई। अगले ही पल आर्यमणि ने पहले यालविक के टी–शर्ट को पकड़ा और उसे खींच कर निकाल दिया।
जैसे ही ये कारनामा हुआ यालविक का पूरा पैक दौड़ गया लेकिन अगले ही पल आर्यमणि हवा में हाथ ऊपर किया और 360⁰ पूरा घूमकर माउंटेन ऐश फैला दिया। जमीन पर गिरते ही माउंटेन ऐश की गोल दीवार बन गई। जितनी तेजी से वो लोग करीब आ रहे थे, माउंटेन ऐश की सीमा से टकराकर वो हाल हुआ की सबकी हालत खराब हो गई।
टी–शर्ट निकाला, हवा में माउटेन ऐश बिखेरा और फिर एक ज़ोरदार लात उसके सीने पर। यालविक जाकर माउंटेन ऐश की दीवार से टकराया और उसके मुंह से पूरा झाग, थूक निकलने लगा। आर्यमणि बिना कोई वक्त गवाए यालविक के बचे कपड़े उतारकर उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी इतनी हालत नही थी की वो उठकर बैठ सके आर्यमणि पर हाथ उठाना तो दूर की बात है। वैसे एक बात और थी, जितने भी वेयरवुल्फ थे उन्होंने हमला करने के लिए अपना शेप शिफ्ट किया था सिवाय आर्यमणि के, जो बिना शेप शिफ्ट किये यालविक को उसके बड़बोलेपन की सजा दे रहा था।
यालविक के हाथ की हड्डी नही बची। सीने की हड्डी गई और माउंटेन ऐश की दीवार से टकराने की वजह से उसे 2 सेकंड के लिए उससे 1200 वोल्ट का झटका भी लगा था। आर्यमणि आराम से नीचे बैठा... प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते... "अकेले में कहता न तो मैं चुप चाप चला जाता। किसी शांत इंसान को उसके परिवार के सामने बेज्जती नही करना चाहिए यही आज का तुम्हारा सबक है।"…
"अ.. आ.. आर्य.. ब.. ब... बहुत दर्द हो रहा है"… किसी तरह कर्राहते हुए यालविक गुहार लगाने लगा... आर्यमणि अपना हाथ डालकर उसकी पीड़ा को हरने लगा। जैसे–जैसे दर्द कम होता जा रहा था वैसे–वैसे वो असीम सुख अपने अंदर महसूस कर रहा था। और जैसे ही वो पूरा हील हुआ अगले ही पल फिर एक बार सीधा अपने फेंग आर्यमणि के गर्दन में घुसा दिया।
इस बार आर्यमणि कुछ टॉक्सिक को अपने हथेली में प्रवाह करते हुए उसके सर पर ऐसा पंजा मारा की हथेली जितना जगह मे उसका पूरा सर गंजा हो गया और उसके सर से धुवां उठने लगा.. ऐसा लगा जैसे पिघला लावा किसी ने सर पर डाल दिया हो। बाप–बाप चिल्लाने लगा...
आर्यमणि उसे वही चिंखता छोड़ अपने कदम जैसे ही आगे बढ़ाया, सभी वोल्फ की आंखें फैल गई। और जैसे ही आर्यमणि ने माउंटेन ऐश की दीवार पार किया, सभी गहरे सदमे में चले गए... "आखिर से संभव कैसे हुआ"..
किसी तरह रोज, आजरा, लिलियन और ओशुन खड़े हुए लेकिन अगले ही पल आर्यमणि मात्र अपने नजरों के इशारे से उन्हे घुटने पर ला दिया। ऐसा एनिमल कंट्रोल इंस्टिंक्ट देखकर खुद नेरमिन भी हैरान थी.… तभी पहली बार उस जगह पर आर्यमणि की आवाज गूंजी.…
"पूर्व में क्या हुआ था और क्या नही, वो तुम सब जितनी जल्दी भूल जाओ उतना बेहतर है। एक बात याद रहे, किसी भी वजह से यदि दोबारा मेरी फैमिली को जिल्लत झेलनी पड़ी फिर तुम लोग सोच भी नही सकते की मैं कितना दर्द दे सकता हूं। कुत्तों के सीमा नियम कुत्तों पर लागू होते है, शेर जंगल का राजा होता है और पूरी जंगल ही उसकी सीमा है... ये बात अपने दिमाग में डाल लो। खासकर तुम ओशुन, क्योंकि तुम्हारा जो वहम था न की कोई तुम्हे कंट्रोल नही कर सकता वो शायद अब टूट गया होगा। अब जरा मैं अपने पैक के साथ समय बिता लूं। शादी के मजेदार पल को मैं तुम जैसे बदबूदार मल पर बर्बाद नही कर सकता"…
अलबेली दो उंगली अपने मुंह में डालकर कान फाड़ सिटी बजाती.… "बॉस इनका पिछे से पिछवाड़ा फटकर फ्लावर हो गया है। चलो यहां से वरना कहीं दिल का दौड़ा पड़ गया तो शादी में शोक की शहनाई गूंजने लगेगी"…
अलबेली की बात पर सभी हंसते हुए निकले। इधर आर्यमणि ने अपने आंखों से ऐसा कंट्रोल किया की उसके जाने के 2–4 घंटे बाद तक वो लोग वैसे ही घुटनो पर रहे। पूरी तरह से खौफजदा हो चुके थे। यालविक के 250 वुल्फ का पैक उस रिजॉर्ट में पहुंचा। उनका मुखिया सदक यालविक जब सुना की एक ऐसा वुल्फ भी है जो माउंटेन ऐश हो पार कर गया, सुनकर ही वो सकते में आ गया।
यूं तो वो हमला करने के इरादे से आया था लेकिन जाइनेप यलविक उन सबको रोकते.… "सादिक तुम अपने अल्फा और बीटा को वुल्फ साउंड से कंट्रोल करते हो, वो मात्र नजरों से कंट्रोल करता है। उसे चिल्लाने की भी जरूरत नही। ईडन जैसी केवल फर्स्ट अल्फा को उसने नही मारा, बल्कि जिस सरदार खान के डर से अपना पूरा पैक छिप जाता था उस सरदार खान को मारकर, वहां से फेहरीन की बेटी रूही को निकाल लाया। वो केवल शादी के लिये यहां आया है, मुझसे ही गलती हुई जो उसे कमजोर समझकर उकसा दिया"…
सादिक गहरी श्वांस लेते.… "मतलब वो लड़ाई की चुनौती देकर हमारा पैक तोड़ने नही आया"..
नेरमिन:– बिलकुल नहीं... शादी की इजाजत तो मैं खुद मांगने आयी थी ना...
सादिक:– ठीक है फिर, उसे शादी करके जाने दो... हम बेकार में उनसे क्यों उलझे... देखा जाए तो माउंटेन ऐश की सीमा में वो तुम्हे मार सकता था लेकिन उसने तुम्हे हील किया। अच्छा वुल्फ है... ऐसे वुल्फ से दोस्ती बनाकर रखने में ही फायदा है... नेरमिन आज रात जश्न का दावत दो...
नेरमिन:– वो वुल्फ की दावत में नही आ सकता क्योंकि वो अपने कुछ इंसानी दोस्त और रिश्तेदार के साथ आया है। तुम ही रिजॉर्ट चले आओ।
सादिक:– हम्मम ठीक है, कुछ लोगों के साथ मैं ही मिलने आता हूं।
17 दिसंबर की शाम सादिक अपने कुछ वुल्फ के साथ आर्यमणि के शादी की जश्न में सामिल हुआ। एक बड़े से लॉन में इनकी पार्टी चल रही थी जब सादिक वहां पहुंचा। यूं तो पहुंचा था आर्यमणि से मिलने लेकिन सामने भूमि को देखकर.… "एक वेयरवुल्फ और एक शिकारी की दोस्ती"…
भूमि:– सादिक... यालविक पैक के मुखिया... मैं भूल क्यों गयी की तुमसे यहां मुलाकात हो सकती है...
सादिक:– मैं तो अपने पैक केड ओर से माफी मांगने और आर्यमणि के ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने आया था लेकिन, अब लगता है कि जान बचाकर भागने की नौबत आ गयी हैं..
भूमि:– मजाक अच्छा था... वैसे कहां है तुम्हारा 400 का बड़ा सा पैक... हमला करने के लिए इतना इंतजार क्यों कर रहे...
सादिक:– इंसानों के बीच हम अपनी पहचान जाहिर नही करते... और न ही किसी भी प्रकार के हमले के इरादे से आए हैं...
आर्यमणि:– सादिक यालविक, आप मेरी शादी में शरीक हो रहे ये हमारी खुशकिस्मती है। आज सुबह जो कुछ भी हुआ वो मात्र एक छोटी सी गलतफहमी का नतीजा था, वरना लड़ाई–झगड़े को मैं कभी पसंद नही करता...
सादिक:– तभी तो शांति और दोस्ती की बात करने आया हूं।
आर्यमणि:– बेफिक्र रहिए यहां शांति ही रहेगी। और रही बात दोस्ती की तो हम दोस्त तो नही हो सकते। लेकिन विश्वास कीजिए आप मेरे अपने है। अच्छे काम के लिए जब भी मुझसे सपर्क कीजिएगा मैं आपके साथ खड़ा रहूंगा...एक सच्चे सहायक के रूप में... अब जरा माफ कीजिए.. मैं बाकी लोगों से भी मिल लूं...
आर्यमणि, अपनी बात कहकर वहां से निकला और निशांत के पास आकर बैठ गया। दोनो बीयर की एक घूंट पीकर एक दूसरे को देख मुस्कुराने लगे। कुछ नए पुराने, खट्टे मीठे बातों से कारवां शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। एक–एक करके लोग आते रहे और उनके साथ जुड़ते रहे...
निशांत जब भी आर्यमणि के मजे लेता एक बार रूही से जरूर कहता, "माफ कीजिएगा भाभी, अभी अपने पति के बारे में सुनकर मूझपर गुस्सा न होना"… इतने छोटे से सफाई के बाद निशांत जो ही आर्यमणि की खिंचाई करता... फिर काहे का अल्फा, बीटा और गामा का लिहाज... सभी टीन वुल्फ अपने बॉस की खिंचाई का पूरा आनंद उठा रहे थे।
18 दिसंबर, शाम के लगभग 6 बजे, मुंबई की किसी खुफिया जगह पर बहुत से लोग मिल रहे थे। लगभग 100 लोगों की ये सभा थी, जिसमे कुछ जाने पहचाने चेहरे भी थे। सुकेश भारद्वाज उनमें से एक प्रमुख नाम, जो सबको शांत रहने का इशारा करते.… “यहां जितनी भी बातें होंगी वो आपके दूसरे नायजो साथियों को भी पता न चले। यहां जितने लोग है, वो किसी से भी इस मीटिंग की चर्चा नही करेंगे। आगे की मीटिंग के लिये मैं विवियन को बुलाना चाहूंगा जो हुर्रीयेंट प्लेनेट पर अपने तेज दिमाग और 12000 खूंखार टुकड़ी की कमांडिंग के लिये मशहूर है।”...
विवियन:– एक नाग फन फैलाए हमे डशने की कोशिश कर रहा। हमारा बहुत नुकसान कर चुका है। उसने वाकई दिखा दिया की वह खतरनाक है और किस हद तक कुरुर हो सकता है। हमे डराकर, हमारे अस्तित्व को चुनौती देकर, हमसे पृथ्वी छोड़ने की धमकी देकर, वह बेखौफ घूम रहा। क्या हम इतने कमजोर हो गये की अदना से वोल्फ पैक और दुर्बल से सात्त्विक आश्रम से डर जाये?”...
पूरी भीर आक्रोश में आते.... “उसका सर धर से अलग कर, चौराहे पर टांग देंगे।”...
“तो फिर चलते है.... हमारी ये 100 की टुकड़ी उस आर्यमणि को उसके शादी पर मौत का तोहफा देकर आये।”.... विवियन ने जोश भरा और चारो ओर से मारो–मारो, मार डालो की गूंज उठने लगी।
Excellent fantastic outstanding update bade bhai
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Jiski kami thi ohh log bhi ahi gaye hey jada tr ojhal ko miss Kar rahe the sab log..
Sath mey shivam sir bhi agye hey arya ke shadi mey Shamil hone keliye or uski shadi karane keliye...
Or unke emulate bhi niakal par satwik asharm mey jayenge or shadi ke bad fir vapas inko milenge ye sahi kiya unone...
Ye apsyu bhi busy hey vaha par palak ke sath....
Or ye oshun or uske dost to bohot hi phudak rahe hey or unka mukhiya to kya nam hey us chuje ka kuch to tha..
Sala bhot uchal raha tha gandu....
Ye Araya ne uski or uske pack ki hekdi bhi nikal diyi hey ek zatke mey pura dum ek zatke mey nikal diya hey...
Or us oshun ki bhi galat fehmi dur kardi ki ohh usko control kar nhi sakta hey uski...
Arya ne to inko 4 ghantetak control mey ley rakha tha...
Or last mey usks sardar yalvik agya apne sabhi pack ke sath lekin arya ke bare mey sunke ohh bhi thanda pad gya ha ha ha ha
Aur dosti ka hath age baodhane pohacha pada unke thikane...
Arya ne bhi usko ache se pesh ake usko bhi naraj na kiya hey.. Ye sahi kiya arya ne age Jake kuch fayda bhi ho sakta hey....
Or ye kon agya sala dushman ke tim mey naya Panter vaylin ya kuch Aisa hi kuch..
Uske 100 gurgo ko leke chala hey arya ki shadi ko barbad krne Ko...
Ab dekhte hey age kya hota hey
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