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Incest Ek gaon aur ek pariwar

Kon sa language me likhu batao aap sab jispar 5 vote aa jayega uspar likhunga

  • Hindi

    Votes: 11 35.5%
  • Hinglish

    Votes: 22 71.0%
  • Khanai pasand aa raha hai ki nahi

    Votes: 1 3.2%
  • Ha

    Votes: 5 16.1%
  • Na

    Votes: 0 0.0%

  • Total voters
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INDEX


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Family Introduction

सज्जन सिंह – उम्र 46 साल, सरकारी टीचर
कुलवंत कौर – उम्र 42 साल, सरकारी टीचर

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कोमलप्रीत कौर (लड़की, उम्र 24 साल)

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सिमरजीत सिंह (लड़का, अपना हीरो, 18 साल)
गोपी (सिमर का पक्का दोस्त, उसी उम्र का)
कुलजीत कौर (गोपी की माँ, उम्र 43 साल, सरकारी टीचर)

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संदीप कौर (गोपी की बहन, शादीशुदा)

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प्रिंस (संदीप का पति)
जगदीश मास्टर (कुलवंत कौर का पुराना यार)
कमलेश कौर (जगदीश की बीवी)

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रानी (जगदीश की बहन, 26 साल)

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हैपी (कुलवंत कौर का यार और पड़ोसी)
मंजीत कौर (हैपी की बीवी)

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दिलप्रीत कौर (हैपी की छोटी बहन)

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परदीप सिंह छोटा नाम करण (दिलप्रीत का पति)
जसप्रीत कौर (हैपी की बड़ी बहन)

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मिंटू (जसप्रीत का पति)
तनवीर कौर (जसप्रीत की बेटी)

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अमनप्रीत सिंह (जसप्रीत का बेटा और कोमल का होने वाला पति)
किरणप्रीत कौर (एसआई पंजाब पुलिस, तलाकशुदा, अपने मम्मी-डैडी और भाई के साथ रहती है)
सनी (किरणप्रीत का भाई, सिमर का दोस्त)
परमिंदर (मिंटू का छोटा भाई)
परमजीत कौर (मिंटू के भाई की बीवी)
परमिंदर और परमजीत की 3 बेटियाँ (रमनीक कौर, सरबजीत कौर, रूपिंदर कौर)
रिकी 25 साल (तनवीर कौर का पति)
नवप्रीत 32 साल (रिकी का बड़ा भाई)
दविंदर कौर 28 साल (रिकी की भाभी, नवप्रीत की बीवी)
गुरप्रीत कौर 30 साल (रिकी और नवप्रीत की बहन, एक्सीडेंट में पैरों से नीचे लकवा, शादी नहीं करने का फैसला किया)
दलजीत कौर 52 साल (नवप्रीत-रिकी की माँ, आज भी अच्छी-भली फिट है, घर के सारे काम खुद करती है और खेती के काम भी, जिससे शरीर फिट है और अपनी उम्र से 5 साल छोटी लगती है)
हरभजन सिंह 55 साल (दलजीत का पति, फौज से रिटायर्ड, नॉर्मल फौजी जैसा फिट शरीर वाला, पूरा रौबदार आदमी, हमेशा तैयार रहता है)
हरदीप कौर 36 साल (मंत्री की बीवी)
हरमीत 39 साल (सिमर के स्कूल में टीचर)
जस्सा (हरमीत का पति, 44 साल)
रूपिंदर (हरमीत का बेटा, 20 साल)
जसविंदर 40 साल (लोकल डॉक्टर)
रवनीत 20 साल (डॉक्टर जसविंदर का बेटा)
सुखमनी (जसविंदर की बेटी, रवनीत की बड़ी बहन)
...और बाकी किरदार आगे आते जाएंगे।
 
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tera hero

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♣️ Update 1 ♣️


कहानी होशियारपुर के एक गाँव के घर से शुरू होती है और इसी परिवार व आस-पास घूमती है। परिवार में सिर्फ 4 सदस्य ही रहते थे।
दोनों माँ-बाप – सरदार सज्जन सिंह और कुलवंत कौर – सरकारी टीचर थे। थोड़ी-बहुत जमीन भी थी, मतलब पैसों की कोई कमी नहीं।
उनकी बड़ी बेटी कोमल, अब 24 साल की, और उससे छोटा बेटा अब 18 साल का हो चुका था।
कहानी के मुख्य 3 किरदार हैं, बाकी आते-जाते रहेंगे। सबसे पहले कुलवंत कौर – उम्र कोई 40 के आस-पास। अच्छी पढ़ी-लिखी सरकारी टीचर। गाँव में पूरी इज्जत। अपने काम से लेकर रख-रखाव तक – सुंदर, भरे हुए शरीर की मालकिन। सुबह-शाम जब भी गुरुद्वारे जाती, गाँव के लड़के तो क्या जवान भी मोटरसाइकिल पर उसका पीछा करते।
कोमल अपनी माँ जैसी ही सुंदर, साधारण-सादी लड़की। पढ़ाई में भी पंजाबी लड़कियों जैसी तेज। हमेशा टॉप पोजीशन में रहती। बिल्कुल अपनी माँ की कॉपी।
सिमर कुलवंत का इकलौता बेटा। बॉडी अच्छी बनाई हुई। आए दिन कॉलेज में कोई न कोई पंगा खड़ा कर देता। लड़ाई-झगड़ा उसके लिए आम बात थी।
रोज की तरह आज भी रात का खाना खाकर तीनों लेटे हुए थे कि सिमर को गली में कार की आवाज आई। दोनों भाई-बहन के कान खड़े हो गए। दोनों ने एक-दूसरे की तरफ मुस्कुरा कर देखा लेकिन कुछ बोले नहीं।
दोनों को पता था – आज फिर कोई न कोई आने वाला है। क्योंकि डैडी आज घर पर नहीं थे। वे अपनी बड़ी बेटी कोमल के साथ चंडीगढ़ किसी काम से गए थे।
कोमल ने धीरे से कहा, “आँखें बंद कर ले, मम्मी आने वाली हैं चेक करने।”
ठीक वैसा ही हुआ। कुलवंत उनके कमरे की खिड़की के पास आई। दोनों भाई-बहन को सोया देख उसने हल्के से बाहर वाला दरवाजा खोला और जगदीप सर अंदर आ गए।
जगदीप कोई 29 साल का था। स्कूल में कंप्यूटर टीचर। अच्छी बॉडी, अच्छी पर्सनैलिटी। कपड़े पहनने का और बोलने का तरीका इतना अच्छा कि स्कूल की दो और टीचरें भी उसके जाल में फँस चुकी थीं।
अंदर आते ही जगदीप ने कुलवंत की कमर में दोनों हाथ डाल कर उसे दीवार से सटा कर जोरदार किस किया और कमरे में चले गए। दरवाजा बंद हुआ और कमरे से उह्ह्ह्ह… मुह्ह्ह्ह… आह्ह्ह… सीईईई… की आवाजें आने लगीं।
दोनों भाई-बहन बाहर खड़े चुपचाप सब देख रहे थे। कैसे उनकी दिन में साधारण-सीधी, पूरे गाँव में इज्जत वाली, सरकारी टीचर मम्मी – जिससे छोटे से बड़े स्टूडेंट तक डरते हैं – सिर्फ सलवार में किसी जवान टीचर की गोद में बैठी है। काले रंग की ब्रा और कमीज़ बेड के साइड में पड़ी थी।
थोड़ी देर बाद उनकी मम्मी बेड पर घोड़ी बनी हुई थी और जगदीप उनकी माँ की कमर पकड़ कर जोर-जोर से झटके मार रहा था।
मम्मी के मुँह से निकल रहा था, “हाय प्लीज धीरे करो सर… हाय मैं मर गई… इतना बड़ा… उह्ह्ह्ह… आह्ह्ह…”
दोनों भाई-बहन बड़े आराम से अपनी माँ को चुदते देख रहे थे। पता नहीं कितने साल हो गए थे अपनी माँ की चुदाई देखते-देखते। उस वक्त सेक्स की समझ भी नहीं थी, तभी से देखते आ रहे थे।
इतने सालों में बदला सिर्फ इतना था कि ऊपर चढ़ने वाले मर्द बदलते रहते थे, लेकिन मम्मी की सेक्स की भूख आज भी उतनी ही थी।
जगदीप काफी सालों से कुलवंत को चोदता आ रहा था। वह पहले कुलवंत का ही स्टूडेंट था। जब वह 12वीं में पढ़ता था, तभी उसने पहली बार अपनी सबसे सख्त टीचर कुलवंत को चोद लिया था। शरीर उसका पक्वा, हद से परे था।
अच्छा खाना और खेतों में मेहनत ने उसे मजबूत बना दिया था। अब कंप्यूटर की पढ़ाई पूरी कर वह किस्मत से उसी स्कूल में लग गया।
थोड़ी ही देर में मम्मी की सलवार और नीचे पहनी काले फूलों वाली पैंटी बेड के नीचे पड़ी थी। कुलवंत जगदीप की गोद में बैठी उसके पैरों में लपेटे हुए थी और दोनों एक-दूसरे का रस पीने में पूरी तरह व्यस्त थे।
कुलवंत 5 फुट 8 इंच लंबी, भरे हुए शरीर वाली औरत थी। शादी उस वक्त के हिसाब से बहुत जल्दी हो गई थी। सुंदर रंग-रूप वाली, एकदम फिट परफेक्ट औरत थी कुलवंत, जिसने लंड लिए बिना सोना सीखा ही नहीं था।
पति तो बस नाम का था। कभी-कभी ही हाथ लगाता था। जब कुलवंत सलवार उतार ही रही होती, तब तक सिमर और कोमल के डैडी का पानी निकल चुका होता।
किस करते-करते जगदीप ने कुलवंत को पीछे की तरफ धकेला और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। पैरों को कुलवंत के कंधों से लगा कर उसने पूरी तरह जकड़ लिया कि वह हिल भी न सके।
पूरी रात यह खेल चलता रहा। पोजिशन बदल-बदल कर जगदीप उसे चोदता रहा। सिमर का पानी तो कच्छे में कब का निकल चुका था। उसके पापा जैसा ही उसका लंड भी कुछ खास नहीं था। न खड़ा होता था ठीक से, और अगर होता भी तो पानी तुरंत निकल जाता।
सिमर अपने कमरे में आकर लेट गया। अब वह शांत हो चुका था। लेकिन कोमल अभी भी वहीं खड़ी अपनी माँ की चुदाई देखती रही।
नींद सिमर की आँखों में दूर-दूर तक नहीं थी। आने वाली भी कैसे, जब कमरे में माँ किसी पराए मर्द से चुद रही हो।
ऊपर से मम्मी की गांड पर पड़ते थप्पड़ और पट्टे की आवाज रात में मीठा संगीत चला रहे थे।
इसी सोच में वह कब नींद में चला गया, पता नहीं चला।
सुबह उठ कर दोनों भाई-बहन बाइक पर कॉलेज चले गए। कुलवंत अपने स्कूल चली गई। भले ही सिमर सेक्स में इतना लकी न हो, लेकिन उसमें पूरा जोश था।
हमेशा उसके साथ उसका पक्का दोस्त गोपी रहता। दोनों की दोस्ती पूरी थी। गोपी ही जानता था कि सिमर लड़ाई में बिल्कुल नहीं डरता, उसका असली राज क्या है।
सिर्फ उसे पता था कि सिमर सेक्स करने के काबिल नहीं है। ऐसा नहीं कि बिल्कुल खाली था, लेकिन पता नहीं क्यों उसके अंदर एक डर सा था।
 

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♣️ Update 2 ♣️

ठंड के दिन शुरू हो चुके थे। स्कूल-कॉलेज गुरपुरब की वजह से बंद थे। सुबह का खाना खाकर सिमर चादर लेकर अपनी छत वाली मंजी पर लेट गया। उसकी मम्मी नहाने बाथरूम चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी भी छत पर दुपहरे में बाल सुखाने आ गई।

कोमल अपने कमरे में टीवी देख रही थी।

सिमर को अभी नींद नहीं आई थी कि मम्मी के पैरों की आवाज से उसकी नींद खुल गई। उसने चादर हल्का सा हटा कर देखा – मम्मी ने दुपट्टा नहीं लिया था। हरे रंग का सलवार-सूट पहना था। 36 के मम्मे जब हिलते तो कमाल लगते।

तभी पड़ोसी के दरवाजे खुले और हैपी पड़ोसी का लड़का 32-33 साल का आ गया। वह भी छत पर आ गया। हैपी भी खेती करता था। उसकी शादी को 5 साल हो गए थे।

गाँव की काफी भाभियाँ उसके साथ सेट थीं। जो औरत एक बार उसके काबू में आ जाती, उसकी खूब तसल्ली करता। भले नशा करने से उसका शरीर सूख गया था, लेकिन सेक्स के मामले में आज भी कायम था।

गुजारा मुश्किल से चलता था और घर पुराने टाइप का खुला था। सेक्स में पूरा हरामी था। जब अपनी बीवी की सील तोड़ रहा था तब उसकी चीखें पूरे मोहल्ले ने सुनी थीं।

गाँव वालों को पता था – शाम 7 बजे के बाद गाँव में शांति हो जाती है। इसलिए उसकी बीवी की चीखें सुबह 4 बजे तक सुन-सुन कर मोहल्ले की हर औरत उस रात अपने पति से चुद चुकी होती।

कुलवंत बातें करते-करते उस तरफ चली गई।

हैपी – “क्यों चाची, क्या हाल है? मनाया जा रहा गुरपुरब?”

कुलवंत – “हाँ, अभी घर का काम करके फ्री हुई हूँ। बस गुरुद्वारे जाने की तैयार हूँ। तेरी मम्मी कहाँ है, गुरुद्वारे चली गई?”

हैपी – “हाँ सब कब के चले गए। कह रहे थे गुरुद्वारे सेवा करनी है।”

कुलवंत – “हाँ मैं भी लेट हो गई। घर के काम खत्म करते-करते। मैं भी जाना था सेवा करने, लेकिन घर के काम कभी खत्म नहीं होते।”

हैपी – “अब तो चाची बहुत लेट हो गई। इधर ही आ जाना, दीवार फाँद कर मेरी सेवा कर दे। बहुत अकेला लग रहा है।”

हैपी के साथ भी कुलवंत की पुरानी दोस्ती थी। दीवार फाँद कर वह दिन में भी कई बार आ जाता जब मौका मिलता।

कुलवंत हँसते हुए – “हट बेशर्म कुत्ते। धीरे बोल, पीछे मेरा बेटा सो रहा है। वह सुन न ले। और नीचे मेरी बेटी है, टीवी देख रही होगी, ऊपर न आ जाए।”

हैपी – “कोई नहीं, यह नहीं उठेगा। सोते-सोते हम काम निबटा लेंगे। किसी को पता नहीं लगेगा। तू टेंशन न ले, तू तो डरपोक है। दिल भी करता होगा न। चल ज्यादा नखरे न कर, आ जा छत वाले कमरे में। मेरे घर वाले भी जल्दी नहीं आएँगे। गुरुद्वारे के बाद सीधे खेत चले जाएँगे।”

कुलवंत ने मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखा और धीरे से आवाज लगाई। सिमर ने कुछ जवाब नहीं दिया तो उसे यकीन हो गया कि वह सो गया है। कुलवंत ने हैपी की तरफ इशारा किया और 3 फुट ऊँची दीवार फाँद कर दूसरी तरफ चली गई। हैपी ने जाते ही उसे बाँहों में लिया और किस करने लगा। साथ ही उसके चिताड़ को मसलने लगा।

कुलवंत अभी भी हल्की टेंशन में थी। बीच-बीच में हैपी को किस करती और मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखने लगती कि कहीं वह उठ न जाए। कभी सिसकी लेने लगती। आखिर हमेशा की तरह उसकी अंदर की आग जीत गई और बेटे वाला प्यार थोड़े समय के लिए हार गया।

फिर कुलवंत और हैपी दोनों छत वाले कमरे में आ गए। कमरा स्टोर जैसा था जहाँ घर का फालतू सामान पड़ा था। छत पर बैठने के लिए 2-3 कुर्सियाँ और एक लंबा मेजा रखा था। कमरे में आते ही कुलवंत को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर रस चूसने लगा।

कुलवंत वैसी ही औरत थी जिसका रस पीने को पूरा गाँव तरसता था, लेकिन यह रस सिर्फ कुछ खास लोगों को ही मिलता था। पता नहीं कितनी देर दोनों किस करते रहे। जब कुलवंत का साँस लेना मुश्किल हो गया तब उसने हैपी को जोर से धक्का मारा और जोर-जोर से साँस लेने लगी।

कुलवंत – “मुझे मार डालेगा हरामी… जान ही निकाल दी।”

हैपी हँसते हुए – “जान तो तेरी जरूर निकालूँगा लेकिन तुझे चोद कर।”

हैपी ने कुलवंत के सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

कुलवंत – “यह क्या कर रहा है? मुझे पूरी नंगी क्यों कर रहा है? कोई आ जाएगा। सिर्फ सलवार नीचे कर और चूत मार जल्दी से।”

हैपी – “कोई नहीं आएगा। तू क्यों टेंशन लेती है। मेरी मम्मी और बीवी खेत चली जाएँगी। कोई नहीं आएगा।”

कुलवंत को भी पता था हैपी के इरादे का। हैपी ने अफीम खा रखी थी, आँखें लाल थीं। इसे जल्दी जाने नहीं था। यही सोच कर आज गुरुद्वारे भी नहीं जाना था। उसने फोन निकाला और अपने पति को लैंडलाइन पर फोन किया। बेटी ने फोन उठाया। उसने कहा कि वह अपनी स्कूल की सहेली के साथ बाजार जा रही है, शाम तक आएगी।

अब वह खुल कर मजा लेने लगी। उसे कोई टेंशन नहीं रही। इस बात से अनजान कि उसका बेटा जो पहले लेटा था, अब दीवार फाँद कर कमरे के बाहर छुप कर देख रहा था। उसे पता था – मम्मी अब जल्दी बाहर नहीं आने वाली।

सिमर अब दरवाजे के पास पहुँच चुका था और अंदर झाँकने लगा। तभी कमरे से कुछ गिरने की आवाज आई।

सिमर ने आगे झाँक कर देखा तो छत पर मम्मी का सलवार-कमीज़ और पैंटी पड़ी थी। ब्रा उन कपड़ों में नहीं दिखी। उसने सावधानी से बिखरे कपड़ों को उठा कर देखा – ब्रा नहीं थी।

हैपी पूरा कमीना था। औरत को काबू में कैसे करना, उसे अच्छे से आता था। सिमर ने अंदर झाँक कर देखा – हैपी भी नंगा हो चुका था और मम्मी के साथ लिपटा हुआ था।

सिमर को यह देख कर पता नहीं क्यों बहुत सुकून सा मिला। हैपी कुलवंत के भरे हुए शरीर का दीवाना था। कुलवंत वैसी ही थी। हैपी उसके गालों पर किस करता हुआ नीचे निप्पलों पर आ गया।

उसके निप्पल मुँह में लेकर खींचने लगा। जिससे कुलवंत के अंदर दर्द और मजा दोनों की लहर दौड़ गई। उसने हैपी के सिर को जोर से पकड़ लिया। हैपी कुलवंत के मम्मों के साथ मस्ती करता रहा।

कभी निप्पल चूसता, कभी मुँह से खींचता, और दूसरे हाथ से कभी-कभी पूरा जोर लगा कर निप्पल मसल देता। जिससे कुलवंत के शरीर में दर्द की लहर दौड़ जाती। कुलवंत को दर्द भी होता लेकिन मजा भी आता।

आधा घंटा और मम्मों के साथ खेलने के बाद वह पेट को चूमता हुआ नीचे बैठ गया और चूत चूसने लगा। सिमर कमरे के बाहर खड़ा चुपचाप सब देख रहा था और मजा ले रहा था।

यह सब कुछ पहले भी पता नहीं कितनी बार देख चुका था। अपनी माँ की चूत देख कर उसने अपने सूखे लंड पर जीभ फेरी। उसे पता था मम्मी अपनी चूत पूरी तरह साफ रखती है।

अपनी माँ की चूत पर उसने कभी बाल नहीं देखे। कुलवंत अपनी चूत का पूरा खयाल रखती थी। कई ब्यूटी क्रीम, दूध की मलाई और कई चीजें लगाती थी।

कुलवंत ज्यादा देर खड़ी नहीं रह सकी। उसकी लतें जवाब दे गईं। उसका पानी निकलने वाला था। वह पास पड़ी डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर पैर फैला कर बैठ गई।

कुर्सी की बाजुएँ नहीं थीं इसलिए कुलवंत के पैर फैलाने में हैपी को कोई दिक्कत नहीं हुई। वह उसके पैरों में बैठ गया और चूत चूसने लगा। चूत के दाने को मुँह में भर कर ऐसे चूस रहा था जैसे छोटा बच्चा अपनी माँ के निप्पल चूसता है।

थोड़ी ही देर में कुलवंत का पानी निकलने लगा। हैपी ने थोड़ा सा चाटा और पीछे हट गया। कुलवंत लगभग बेहोश हो गई थी। हैपी उसके बालों को देख कर हँसता हुआ अपना कोई 7.5 इंच का लंड हिला रहा था।

उसने कुलवंत को थोड़ी देर साँस लेने दिया और फिर दीवार से पकड़ कर उसका सिर ऊपर करके अपना लंड उसके दाने के पास कर दिया।

सिमर ने देखा – मम्मी ने बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर हैपी का लंड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। सिमर ने देखा कैसे मम्मी पूरी एक्सपर्ट है। एक हाथ से बेस पकड़ रखा था और चूसे मार रही थी।

कुछ 2-3 मिनट ही चूसे मारे थे कि हैपी ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और कुलवंत को कुर्सी के सहारे झुका दिया। चूत में एक जोरदार झटका मारते हुए अपना लंड पूरा सिमर की माँ की चूत में पेल दिया।

सिमर की माँ की पतली कमर पकड़ कर हैपी ने थोड़े अपने पैर फैला कर पोजिशन सेट की और तूफानी झटकों से सिमर की माँ को चोदने लगा।

झटकों की स्पीड बहुत तेज थी। इतनी कि कुलवंत के दर्द और मजा वाली चीखें निकलने लगीं। उसके दिमाग में अब अपने बेटे का कोई खयाल नहीं था। वह तो मजा ले कर चुद रही थी।

हैपी के पट्ट जब पूरे जोर से कुलवंत के गोल-मटोल भरे हुए गोरे चिताड़ से टकराते तो जो आवाज पैदा होती, वह हैपी का जोश और बढ़ा देती। हैपी फिर टॉप तक लंड बाहर निकाल कर पूरे जोर से झटका मारता। बाहर खड़ा सिमर अपना लंड मसलते पूरा मजा ले रहा था अपनी माँ को चुदते देख कर।

कुछ 10 मिनट हैपी ने पूरे जोर से इसी पोजिशन में ठोक कर कुलवंत को चोदा। झटके मारते-मारते ही पास पड़े तकिए को नीचे डाल दिया। जिसे देख कर कुलवंत को एक सेकंड भी नहीं लगा समझने में कि हैपी क्या करना चाहता है।

जैसे ही हैपी ने लंड बाहर निकाला, कुलवंत नीचे घोड़ी बन गई। गांड ऊपर कर ली। तकिया अपने घुटनों के नीचे रख लिया ताकि घुटने छिल न जाएँ। वैसे तो फर्श पर मार्बल लगा था, फिर भी इतने जोर के झटके पड़ने वाले थे कि तकिया न होता तो घुटने लाल हो जाते।

हैपी सिमर की माँ की गांड के पीछे आया और 4-5 थप्पड़ पूरे जोर से मारे। जिनकी आवाज भी काफी आई और कुलवंत को दर्द भी काफी हुआ लेकिन वह बोली कुछ नहीं। कुलवंत के गोरे चिताड़ 5 थप्पड़ों में ही पूरी तरह लाल हो गए।

हैपी का यही स्टाइल था। इससे एक तो वह रिलैक्स हो जाता क्योंकि एक ही पोजिशन में चोदता तो 2-4 मिनट में उसका काम हो जाता। उसने कुलवंत जो सीधी घोड़ी बनी थी उसका सिर नीचे की तरफ कर दिया और दोबारा पूरे जोर से चोदने लगा। माँ अंदर लंड ले कर मजा ले रही थी, बेटा बाहर खड़ा देख कर मजा ले रहा था।

10-15 मिनट बाद हैपी ने कुलवंत कौर को सीधा किया और उसके पैर उठा कर अपने कंधों पर रख लिए और उसके ऊपर पूरा झुक गया। अब कुलवंत के घुटने उसके कंधों से लगभग टच हो रहे थे। हैपी ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया था।

हैपी ने अपने पीछे की दीवार से पैर टिका लिए। सिमर यह पोजिशन देख कर एक बार तो घबरा गया। उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई क्योंकि अब मम्मी पूरी तरह हैपी के काबू में थी। यह वो पोजिशन थी जिसमें से बचना अब मुमकिन नहीं था।

इस पोजिशन में हैपी सिर्फ 10 मिनट ही टिक सका लेकिन जितने झटके मारे, कुलवंत की बस करवा दी। कुलवंत के मुँह से भी निकलने लगा था – “हाय हैपी छोड़ दे बस कर… मम्मी हाय आह्ह्ह… सीईई…” और जब हैपी का काम हुआ तो कुलवंत ने सुकून की साँस ली। हैपी साइड में गिर पड़ा। कुलवंत कौर भी पैर फैला कर थोड़ी देर ऐसे ही पड़ी रही।

कुलवंत 5 मिनट बाद उठी और हैपी के ढीले पड़े लंड से कंडोम उतार कर पास प्लास्टिक बैग में डाल दिया।

तभी सीढ़ियों की आवाज आई। सिमर ने देखा हैपी का जीजा सुक्खा पोर्च में चढ़ आया। “वाह भाभी मजा आ गया।” सुक्खा हैपी का बड़ा जीजा था। वह कुलवंत को भाभी कहता था।

सिमर का दिल घबरा गया। पूरी तरह कि मम्मी नंगी पड़ोसी के लड़के के साथ पकड़ी गई। लेकिन मम्मी को नंगी पकड़े जाने से ज्यादा अच्छा लगा कि उसका लंड देख कर मम्मी का पानी निकल गया।

कुलवंत पूरी तरह घबरा गई थी। उसका रोना निकल गया। सिसकते हुए बोली, “प्लीज पाजी किसी को मत बताना, मुझे माफ कर दो।” उसने मुड़ कर हैपी की तरफ देखा – वह तो बस मुस्कुरा रहा था। कुलवंत समझ गई कि यह साजिश दोनों ने मिल कर रची है।

कुलवंत – “हैपी कुत्ते मुझे जान से नहीं मारता तो मैं चिल्ला देती।”

हैपी – “चिल्ला दे, तेरे कपड़े बाहर पूरी छत पर बिखरे पड़े हैं। नंगी तू यहाँ खड़ी है। क्या कहेगी लोगों को?”

हैपी देख चाची ज्यादा पाखंड न कर। वैसे भी अब तू कुछ कर नहीं सकती।

कुलवंत भी समझ गई कि अब बहस करने से कोई फायदा नहीं। वक्त उसके खिलाफ चल रहा था आज। सेक्स तो उसे बहुत पसंद था लेकिन आज जो हैपी ने किया वह गलत था।

इसके बाद सिमर ने देखा – पूरी दोपहर मम्मी ठुकती रही। हैपी और उसके जीजा ने पूरी रूह से कुलवंत को चोदा। सुक्खा का लंड कुछ खास नहीं था लेकिन टाइमिंग ठीक थी। कभी चूत में कभी गांड में – यह काम शाम 7 बजे तक चलता रहा।

कुलवंत जब बाहर आने लगी तो सिमर वहाँ से खिसक लिया। जब वापस मुड़ा तो देखा कोमल उसके पीछे खड़ी थी। हैपी जैसी ही पूरी पसीने से भीगी हुई। उसका हाथ उसकी सलवार में था। पता नहीं कब से वह वहाँ खड़ी थी।

सिमर ने उसकी हालत देखी और समझ गया कि उसने भी खुद पर काबू पा लिया था। जल्दी से आगे हो कर उसका ढीला नाड़ा बाँध दिया – “दीदी तू नीचे चली जा जल्दी, मम्मी बाहर आ रही है।”

कोमल ने सिर्फ सिर हिलाया और नीचे चली गई। वह असल में सिमर को देखने आई थी कि कब से सो रहा है, उसे उठा दे। लेकिन जब सिमर को पड़ोसी की दीवार से सटा देखा तो वह भी पीछे आकर देखने लगी।

हैपी और उसका जीजा नीचे चले गए थे। सिमर ने देखा शायद कोई और पड़ोसी की औरत ऊपर आने लगी थी। अपनी माँ के बिखरे कपड़े उसने इकट्ठे किए। आगे हो कर अपनी माँ जो पूरी दोपहर चुदाई के बाद नंगी ही बाहर आ रही थी, उसके सामने आ गया।

इससे पहले कुलवंत कुछ समझ पाती या बोल पाती, सिमर बोला – “मम्मी तेरे पास कपड़े पहनने का टाइम नहीं, जल्दी यह चादर लपेट ले। नीमल आंटी ऊपर आ रही है, मैंने उन्हें सीढ़ी चढ़ते देखा।”

कुलवंत ने जल्दी से वैसा ही किया और नीचे चली गई। शर्म तो उसे बहुत आई लेकिन सिमर की समझदारी देख कर राहत की साँस ली। उसने एक बार मुड़ कर देखा – सिमर उसके कपड़े उठा कर नीचे आ रहा था।

नीचे आ कर कुलवंत अपने कमरे में चली गई। आज उसे कई दिनों बाद बुरा लगा सेक्स कर के। उसने कभी सेक्स के लिए मना नहीं किया जब कोई ठीक तरीके से कहता था।

ऐसा नहीं था कि वह हर आने वाले के लिए सलवार उतार कर लेट जाती। उसका अपना स्टेटस था गाँव में, स्कूल में। हर कोई उसे हाँजी-जी कह कर बुलाता। इसलिए उसने हमेशा दिमाग से काम लिया।

उसके पति को भी कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वह खुद कई बार ले कर जाता था। उसे पता था कि वह कुलवंत कौर को ठंडा नहीं कर सकता।

इसलिए कई बार जब कुलवंत को शहर के होटल में अपने यार से मिलना होता तो वह खुद कार में ड्रॉप करता और खुद ले कर आता। कुलवंत भी अपने पति को पूरी इज्जत देती। कभी ऊँचा नहीं बोलती, कभी बुरा फील नहीं करवाती।
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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