
Update 2
ठंड के दिन शुरू हो चुके थे। स्कूल-कॉलेज गुरपुरब की वजह से बंद थे। सुबह का खाना खाकर सिमर चादर लेकर अपनी छत वाली मंजी पर लेट गया। उसकी मम्मी नहाने बाथरूम चली गई। थोड़ी देर बाद मम्मी भी छत पर दुपहरे में बाल सुखाने आ गई।
कोमल अपने कमरे में टीवी देख रही थी।
सिमर को अभी नींद नहीं आई थी कि मम्मी के पैरों की आवाज से उसकी नींद खुल गई। उसने चादर हल्का सा हटा कर देखा – मम्मी ने दुपट्टा नहीं लिया था। हरे रंग का सलवार-सूट पहना था। 36 के मम्मे जब हिलते तो कमाल लगते।
तभी पड़ोसी के दरवाजे खुले और हैपी पड़ोसी का लड़का 32-33 साल का आ गया। वह भी छत पर आ गया। हैपी भी खेती करता था। उसकी शादी को 5 साल हो गए थे।
गाँव की काफी भाभियाँ उसके साथ सेट थीं। जो औरत एक बार उसके काबू में आ जाती, उसकी खूब तसल्ली करता। भले नशा करने से उसका शरीर सूख गया था, लेकिन सेक्स के मामले में आज भी कायम था।
गुजारा मुश्किल से चलता था और घर पुराने टाइप का खुला था। सेक्स में पूरा हरामी था। जब अपनी बीवी की सील तोड़ रहा था तब उसकी चीखें पूरे मोहल्ले ने सुनी थीं।
गाँव वालों को पता था – शाम 7 बजे के बाद गाँव में शांति हो जाती है। इसलिए उसकी बीवी की चीखें सुबह 4 बजे तक सुन-सुन कर मोहल्ले की हर औरत उस रात अपने पति से चुद चुकी होती।
कुलवंत बातें करते-करते उस तरफ चली गई।
हैपी – “क्यों चाची, क्या हाल है? मनाया जा रहा गुरपुरब?”
कुलवंत – “हाँ, अभी घर का काम करके फ्री हुई हूँ। बस गुरुद्वारे जाने की तैयार हूँ। तेरी मम्मी कहाँ है, गुरुद्वारे चली गई?”
हैपी – “हाँ सब कब के चले गए। कह रहे थे गुरुद्वारे सेवा करनी है।”
कुलवंत – “हाँ मैं भी लेट हो गई। घर के काम खत्म करते-करते। मैं भी जाना था सेवा करने, लेकिन घर के काम कभी खत्म नहीं होते।”
हैपी – “अब तो चाची बहुत लेट हो गई। इधर ही आ जाना, दीवार फाँद कर मेरी सेवा कर दे। बहुत अकेला लग रहा है।”
हैपी के साथ भी कुलवंत की पुरानी दोस्ती थी। दीवार फाँद कर वह दिन में भी कई बार आ जाता जब मौका मिलता।
कुलवंत हँसते हुए – “हट बेशर्म कुत्ते। धीरे बोल, पीछे मेरा बेटा सो रहा है। वह सुन न ले। और नीचे मेरी बेटी है, टीवी देख रही होगी, ऊपर न आ जाए।”
हैपी – “कोई नहीं, यह नहीं उठेगा। सोते-सोते हम काम निबटा लेंगे। किसी को पता नहीं लगेगा। तू टेंशन न ले, तू तो डरपोक है। दिल भी करता होगा न। चल ज्यादा नखरे न कर, आ जा छत वाले कमरे में। मेरे घर वाले भी जल्दी नहीं आएँगे। गुरुद्वारे के बाद सीधे खेत चले जाएँगे।”
कुलवंत ने मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखा और धीरे से आवाज लगाई। सिमर ने कुछ जवाब नहीं दिया तो उसे यकीन हो गया कि वह सो गया है। कुलवंत ने हैपी की तरफ इशारा किया और 3 फुट ऊँची दीवार फाँद कर दूसरी तरफ चली गई। हैपी ने जाते ही उसे बाँहों में लिया और किस करने लगा। साथ ही उसके चिताड़ को मसलने लगा।
कुलवंत अभी भी हल्की टेंशन में थी। बीच-बीच में हैपी को किस करती और मुड़ कर अपने बेटे की तरफ देखने लगती कि कहीं वह उठ न जाए। कभी सिसकी लेने लगती। आखिर हमेशा की तरह उसकी अंदर की आग जीत गई और बेटे वाला प्यार थोड़े समय के लिए हार गया।
फिर कुलवंत और हैपी दोनों छत वाले कमरे में आ गए। कमरा स्टोर जैसा था जहाँ घर का फालतू सामान पड़ा था। छत पर बैठने के लिए 2-3 कुर्सियाँ और एक लंबा मेजा रखा था। कमरे में आते ही कुलवंत को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर रस चूसने लगा।
कुलवंत वैसी ही औरत थी जिसका रस पीने को पूरा गाँव तरसता था, लेकिन यह रस सिर्फ कुछ खास लोगों को ही मिलता था। पता नहीं कितनी देर दोनों किस करते रहे। जब कुलवंत का साँस लेना मुश्किल हो गया तब उसने हैपी को जोर से धक्का मारा और जोर-जोर से साँस लेने लगी।
कुलवंत – “मुझे मार डालेगा हरामी… जान ही निकाल दी।”
हैपी हँसते हुए – “जान तो तेरी जरूर निकालूँगा लेकिन तुझे चोद कर।”
हैपी ने कुलवंत के सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।
कुलवंत – “यह क्या कर रहा है? मुझे पूरी नंगी क्यों कर रहा है? कोई आ जाएगा। सिर्फ सलवार नीचे कर और चूत मार जल्दी से।”
हैपी – “कोई नहीं आएगा। तू क्यों टेंशन लेती है। मेरी मम्मी और बीवी खेत चली जाएँगी। कोई नहीं आएगा।”
कुलवंत को भी पता था हैपी के इरादे का। हैपी ने अफीम खा रखी थी, आँखें लाल थीं। इसे जल्दी जाने नहीं था। यही सोच कर आज गुरुद्वारे भी नहीं जाना था। उसने फोन निकाला और अपने पति को लैंडलाइन पर फोन किया। बेटी ने फोन उठाया। उसने कहा कि वह अपनी स्कूल की सहेली के साथ बाजार जा रही है, शाम तक आएगी।
अब वह खुल कर मजा लेने लगी। उसे कोई टेंशन नहीं रही। इस बात से अनजान कि उसका बेटा जो पहले लेटा था, अब दीवार फाँद कर कमरे के बाहर छुप कर देख रहा था। उसे पता था – मम्मी अब जल्दी बाहर नहीं आने वाली।
सिमर अब दरवाजे के पास पहुँच चुका था और अंदर झाँकने लगा। तभी कमरे से कुछ गिरने की आवाज आई।
सिमर ने आगे झाँक कर देखा तो छत पर मम्मी का सलवार-कमीज़ और पैंटी पड़ी थी। ब्रा उन कपड़ों में नहीं दिखी। उसने सावधानी से बिखरे कपड़ों को उठा कर देखा – ब्रा नहीं थी।
हैपी पूरा कमीना था। औरत को काबू में कैसे करना, उसे अच्छे से आता था। सिमर ने अंदर झाँक कर देखा – हैपी भी नंगा हो चुका था और मम्मी के साथ लिपटा हुआ था।
सिमर को यह देख कर पता नहीं क्यों बहुत सुकून सा मिला। हैपी कुलवंत के भरे हुए शरीर का दीवाना था। कुलवंत वैसी ही थी। हैपी उसके गालों पर किस करता हुआ नीचे निप्पलों पर आ गया।
उसके निप्पल मुँह में लेकर खींचने लगा। जिससे कुलवंत के अंदर दर्द और मजा दोनों की लहर दौड़ गई। उसने हैपी के सिर को जोर से पकड़ लिया। हैपी कुलवंत के मम्मों के साथ मस्ती करता रहा।
कभी निप्पल चूसता, कभी मुँह से खींचता, और दूसरे हाथ से कभी-कभी पूरा जोर लगा कर निप्पल मसल देता। जिससे कुलवंत के शरीर में दर्द की लहर दौड़ जाती। कुलवंत को दर्द भी होता लेकिन मजा भी आता।
आधा घंटा और मम्मों के साथ खेलने के बाद वह पेट को चूमता हुआ नीचे बैठ गया और चूत चूसने लगा। सिमर कमरे के बाहर खड़ा चुपचाप सब देख रहा था और मजा ले रहा था।
यह सब कुछ पहले भी पता नहीं कितनी बार देख चुका था। अपनी माँ की चूत देख कर उसने अपने सूखे लंड पर जीभ फेरी। उसे पता था मम्मी अपनी चूत पूरी तरह साफ रखती है।
अपनी माँ की चूत पर उसने कभी बाल नहीं देखे। कुलवंत अपनी चूत का पूरा खयाल रखती थी। कई ब्यूटी क्रीम, दूध की मलाई और कई चीजें लगाती थी।
कुलवंत ज्यादा देर खड़ी नहीं रह सकी। उसकी लतें जवाब दे गईं। उसका पानी निकलने वाला था। वह पास पड़ी डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर पैर फैला कर बैठ गई।
कुर्सी की बाजुएँ नहीं थीं इसलिए कुलवंत के पैर फैलाने में हैपी को कोई दिक्कत नहीं हुई। वह उसके पैरों में बैठ गया और चूत चूसने लगा। चूत के दाने को मुँह में भर कर ऐसे चूस रहा था जैसे छोटा बच्चा अपनी माँ के निप्पल चूसता है।
थोड़ी ही देर में कुलवंत का पानी निकलने लगा। हैपी ने थोड़ा सा चाटा और पीछे हट गया। कुलवंत लगभग बेहोश हो गई थी। हैपी उसके बालों को देख कर हँसता हुआ अपना कोई 7.5 इंच का लंड हिला रहा था।
उसने कुलवंत को थोड़ी देर साँस लेने दिया और फिर दीवार से पकड़ कर उसका सिर ऊपर करके अपना लंड उसके दाने के पास कर दिया।
सिमर ने देखा – मम्मी ने बिना कुछ बोले मुस्कुरा कर हैपी का लंड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। सिमर ने देखा कैसे मम्मी पूरी एक्सपर्ट है। एक हाथ से बेस पकड़ रखा था और चूसे मार रही थी।
कुछ 2-3 मिनट ही चूसे मारे थे कि हैपी ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और कुलवंत को कुर्सी के सहारे झुका दिया। चूत में एक जोरदार झटका मारते हुए अपना लंड पूरा सिमर की माँ की चूत में पेल दिया।
सिमर की माँ की पतली कमर पकड़ कर हैपी ने थोड़े अपने पैर फैला कर पोजिशन सेट की और तूफानी झटकों से सिमर की माँ को चोदने लगा।
झटकों की स्पीड बहुत तेज थी। इतनी कि कुलवंत के दर्द और मजा वाली चीखें निकलने लगीं। उसके दिमाग में अब अपने बेटे का कोई खयाल नहीं था। वह तो मजा ले कर चुद रही थी।
हैपी के पट्ट जब पूरे जोर से कुलवंत के गोल-मटोल भरे हुए गोरे चिताड़ से टकराते तो जो आवाज पैदा होती, वह हैपी का जोश और बढ़ा देती। हैपी फिर टॉप तक लंड बाहर निकाल कर पूरे जोर से झटका मारता। बाहर खड़ा सिमर अपना लंड मसलते पूरा मजा ले रहा था अपनी माँ को चुदते देख कर।
कुछ 10 मिनट हैपी ने पूरे जोर से इसी पोजिशन में ठोक कर कुलवंत को चोदा। झटके मारते-मारते ही पास पड़े तकिए को नीचे डाल दिया। जिसे देख कर कुलवंत को एक सेकंड भी नहीं लगा समझने में कि हैपी क्या करना चाहता है।
जैसे ही हैपी ने लंड बाहर निकाला, कुलवंत नीचे घोड़ी बन गई। गांड ऊपर कर ली। तकिया अपने घुटनों के नीचे रख लिया ताकि घुटने छिल न जाएँ। वैसे तो फर्श पर मार्बल लगा था, फिर भी इतने जोर के झटके पड़ने वाले थे कि तकिया न होता तो घुटने लाल हो जाते।
हैपी सिमर की माँ की गांड के पीछे आया और 4-5 थप्पड़ पूरे जोर से मारे। जिनकी आवाज भी काफी आई और कुलवंत को दर्द भी काफी हुआ लेकिन वह बोली कुछ नहीं। कुलवंत के गोरे चिताड़ 5 थप्पड़ों में ही पूरी तरह लाल हो गए।
हैपी का यही स्टाइल था। इससे एक तो वह रिलैक्स हो जाता क्योंकि एक ही पोजिशन में चोदता तो 2-4 मिनट में उसका काम हो जाता। उसने कुलवंत जो सीधी घोड़ी बनी थी उसका सिर नीचे की तरफ कर दिया और दोबारा पूरे जोर से चोदने लगा। माँ अंदर लंड ले कर मजा ले रही थी, बेटा बाहर खड़ा देख कर मजा ले रहा था।
10-15 मिनट बाद हैपी ने कुलवंत कौर को सीधा किया और उसके पैर उठा कर अपने कंधों पर रख लिए और उसके ऊपर पूरा झुक गया। अब कुलवंत के घुटने उसके कंधों से लगभग टच हो रहे थे। हैपी ने उसे पूरी तरह जकड़ लिया था।
हैपी ने अपने पीछे की दीवार से पैर टिका लिए। सिमर यह पोजिशन देख कर एक बार तो घबरा गया। उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई क्योंकि अब मम्मी पूरी तरह हैपी के काबू में थी। यह वो पोजिशन थी जिसमें से बचना अब मुमकिन नहीं था।
इस पोजिशन में हैपी सिर्फ 10 मिनट ही टिक सका लेकिन जितने झटके मारे, कुलवंत की बस करवा दी। कुलवंत के मुँह से भी निकलने लगा था – “हाय हैपी छोड़ दे बस कर… मम्मी हाय आह्ह्ह… सीईई…” और जब हैपी का काम हुआ तो कुलवंत ने सुकून की साँस ली। हैपी साइड में गिर पड़ा। कुलवंत कौर भी पैर फैला कर थोड़ी देर ऐसे ही पड़ी रही।
कुलवंत 5 मिनट बाद उठी और हैपी के ढीले पड़े लंड से कंडोम उतार कर पास प्लास्टिक बैग में डाल दिया।
तभी सीढ़ियों की आवाज आई। सिमर ने देखा हैपी का जीजा सुक्खा पोर्च में चढ़ आया। “वाह भाभी मजा आ गया।” सुक्खा हैपी का बड़ा जीजा था। वह कुलवंत को भाभी कहता था।
सिमर का दिल घबरा गया। पूरी तरह कि मम्मी नंगी पड़ोसी के लड़के के साथ पकड़ी गई। लेकिन मम्मी को नंगी पकड़े जाने से ज्यादा अच्छा लगा कि उसका लंड देख कर मम्मी का पानी निकल गया।
कुलवंत पूरी तरह घबरा गई थी। उसका रोना निकल गया। सिसकते हुए बोली, “प्लीज पाजी किसी को मत बताना, मुझे माफ कर दो।” उसने मुड़ कर हैपी की तरफ देखा – वह तो बस मुस्कुरा रहा था। कुलवंत समझ गई कि यह साजिश दोनों ने मिल कर रची है।
कुलवंत – “हैपी कुत्ते मुझे जान से नहीं मारता तो मैं चिल्ला देती।”
हैपी – “चिल्ला दे, तेरे कपड़े बाहर पूरी छत पर बिखरे पड़े हैं। नंगी तू यहाँ खड़ी है। क्या कहेगी लोगों को?”
हैपी देख चाची ज्यादा पाखंड न कर। वैसे भी अब तू कुछ कर नहीं सकती।
कुलवंत भी समझ गई कि अब बहस करने से कोई फायदा नहीं। वक्त उसके खिलाफ चल रहा था आज। सेक्स तो उसे बहुत पसंद था लेकिन आज जो हैपी ने किया वह गलत था।
इसके बाद सिमर ने देखा – पूरी दोपहर मम्मी ठुकती रही। हैपी और उसके जीजा ने पूरी रूह से कुलवंत को चोदा। सुक्खा का लंड कुछ खास नहीं था लेकिन टाइमिंग ठीक थी। कभी चूत में कभी गांड में – यह काम शाम 7 बजे तक चलता रहा।
कुलवंत जब बाहर आने लगी तो सिमर वहाँ से खिसक लिया। जब वापस मुड़ा तो देखा कोमल उसके पीछे खड़ी थी। हैपी जैसी ही पूरी पसीने से भीगी हुई। उसका हाथ उसकी सलवार में था। पता नहीं कब से वह वहाँ खड़ी थी।
सिमर ने उसकी हालत देखी और समझ गया कि उसने भी खुद पर काबू पा लिया था। जल्दी से आगे हो कर उसका ढीला नाड़ा बाँध दिया – “दीदी तू नीचे चली जा जल्दी, मम्मी बाहर आ रही है।”
कोमल ने सिर्फ सिर हिलाया और नीचे चली गई। वह असल में सिमर को देखने आई थी कि कब से सो रहा है, उसे उठा दे। लेकिन जब सिमर को पड़ोसी की दीवार से सटा देखा तो वह भी पीछे आकर देखने लगी।
हैपी और उसका जीजा नीचे चले गए थे। सिमर ने देखा शायद कोई और पड़ोसी की औरत ऊपर आने लगी थी। अपनी माँ के बिखरे कपड़े उसने इकट्ठे किए। आगे हो कर अपनी माँ जो पूरी दोपहर चुदाई के बाद नंगी ही बाहर आ रही थी, उसके सामने आ गया।
इससे पहले कुलवंत कुछ समझ पाती या बोल पाती, सिमर बोला – “मम्मी तेरे पास कपड़े पहनने का टाइम नहीं, जल्दी यह चादर लपेट ले। नीमल आंटी ऊपर आ रही है, मैंने उन्हें सीढ़ी चढ़ते देखा।”
कुलवंत ने जल्दी से वैसा ही किया और नीचे चली गई। शर्म तो उसे बहुत आई लेकिन सिमर की समझदारी देख कर राहत की साँस ली। उसने एक बार मुड़ कर देखा – सिमर उसके कपड़े उठा कर नीचे आ रहा था।
नीचे आ कर कुलवंत अपने कमरे में चली गई। आज उसे कई दिनों बाद बुरा लगा सेक्स कर के। उसने कभी सेक्स के लिए मना नहीं किया जब कोई ठीक तरीके से कहता था।
ऐसा नहीं था कि वह हर आने वाले के लिए सलवार उतार कर लेट जाती। उसका अपना स्टेटस था गाँव में, स्कूल में। हर कोई उसे हाँजी-जी कह कर बुलाता। इसलिए उसने हमेशा दिमाग से काम लिया।
उसके पति को भी कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वह खुद कई बार ले कर जाता था। उसे पता था कि वह कुलवंत कौर को ठंडा नहीं कर सकता।
इसलिए कई बार जब कुलवंत को शहर के होटल में अपने यार से मिलना होता तो वह खुद कार में ड्रॉप करता और खुद ले कर आता। कुलवंत भी अपने पति को पूरी इज्जत देती। कभी ऊँचा नहीं बोलती, कभी बुरा फील नहीं करवाती।