पहले तो क्षमा चाहूंगा अगर किसी की भावना आहत होती है मेरे सुझाव से !
भीषण संभोग के बाद, जब सोनल की साँसें अब भी तेज़ चल रही थीं और उसका शरीर थकान व आनंद के मिश्रण में डूबा हुआ था, मयूर ने उसकी ठोड़ी उठाकर आँखों में आँखें डालीं। उसकी आवाज़ में गहरा अधिकार था।
“सुनो, सोनल। अब तुम अपने दाँत साफ करोगी—टूथपेस्ट की जगह मेरे गाढ़े, गरम वीर्य से। ब्रश पर अच्छे से लगाओ और धीरे-धीरे ब्रश करो, ताकि हर कोना मेरे स्वाद से भर जाए।”
फिर वह मुस्कुराया, अपनी उँगलियाँ उसके होंठों पर फेरते हुए।
“और कुल्ले? उसके लिए मेरा पेशाब। मुँह भरो, घुमाओ, और फिर निगल जाना... एक बूंद भी बाहर नहीं गिरनी चाहिए। समझी?”