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मधु के पति को गुजरे जमाना हो गया था पर मधु आज भी दिखने में बड़ी सुडोल और कामुक महिला थी जैसे की किसी पोर्न फिल्म की बोल्ड महिला , उसके बड़े बड़े बूब्स ब्लाउज में कैद घर का काम करते करते झूलते रहते थे , उसके नितम्बो का भी यही हाल था | मधु क्या यौवन जैसे हर जगह झूल झूल कर उसे भोगने वाले की तलाश करता रहता था |

उसकी शादी बचपन में ही हो गयी थी पर पति के एक्सीडेंट में गुजर जाने की वजह से वो अपने ससुर और अपने जवान बेटे किशन के साथ रहती थी
समाय के साथ सभी में बदलाव आता है , ये वो किशन नहीं था जो कभी माँ की छाती से लग कर उसका दूध पीता था
या ये वो मधु नहीं थी जो उसे मात् भाव से देखती थी और उसका लालन पालन करती थी | समाय के साथ वो भाव कही दफ़न हो गए थे अब दोनों एक साथी की तरह जीवन और घर की गाडी खींचने में लगे हुए थे | किशन कॉलेज से आकर अपनी फोटोकॉपी की दूकान पर काम करता ताकि घर में कुछ आमदनी आ सकते | मधु भी उसे घर के मुखिया के रूप में देखती और उसका कहना मानती |
किशन : "क्या हुआ मम्मी नाश्ता मिलेगा या नहीं ..."
मधु : "अभी लाती हूउउ ...."
रामलाल : "बहुउउ ...चाय का क्या हुआ ...!!"
मधु : "लाई इ इ ...बाबूजी ..."
जब से मोबाइल पे OTT और webseries चालू हुई हैं तब से किशन मोबाइल में कुछ ज़्यादा ही मसरूफ रहने लगा , दूकान पर ज़्यादा ग्राहक आते नहीं थे तो उसे नयी नयी एपिसोड देखने का टाइम मिल जाता था और घर पे मौका नहीं मिलता था क्युकी ज़्यादा कमरे नहीं थे , एक में मधु और किशन सोते थे और एक में ससुर | | बस अगर देर रात सब सू जाने के बाद किशन भलेही कुछ देर के लिया मोबाइल लौ वॉल्यूम पे चला कर अपनी हवस मिटा लेता था | वो बिस्तर पर सोता था और उसकी माँ को निचे जमीन पर पर सोने की आदत थी
कॉलेज और स्कूल में बुरी सांगत से उसे पोर्न की लत तो पहले से ही थी पर webseries के आने के बाद लड़को में एक अलग हवस पैदा हुई थी जिसका इंतजार शायद सभी कर रहे थी | इसकी वजह से लड़को में मन में सेक्स एक कदम और पाउच के अंदर आगया था क्युकी इसमें ससुर बहु , बेहेन भाई , माँ बेटे , देवर भाभी जैसे रिश्तो को बहुत बोल्ड तरीके से पेश किया जा रहा था | शुरू में तो बस किशन इसे एक और पोर्न की तरह देख रहा था पर अब ये सब उसके मन पर हावी होने लगा था | अब उसकी इच्छा देखने से आगे करने की बनती जा रही थी |
रात बिस्तर पर मोबाइल पे देसी कामुक औरतो को देख देख कर अपना शीशिन पायजामे पर से सेहला लेता और कभी कभी अंदर ही संखलित हो जाता और वैसे ही सो जाता | रोज रोज के इस हवस के खेल ने उसे बड़ा बैचैन कर रखा था | बस अपना हाथ जग्गंनाथ और ये बेजान मोबाइल , अब उसे किसी औरत के जिस्म को छूने की बहुत तेज प्यास सताने लगी थी |
माध्यम वर्ग से होने के कारन मधु घर में एक दबी सेहमी हुई ही रहती थी , बेटे किशन के जवान होने पर उसे भी एक बड़े मर्द के रूप में ही देखती थी और एक अच्छी औरत की तरह उसकी बात मानती थी , वही ससुर की सेवा भी वो बहुत तन मन धन से करती थी | सुबह जल्दी उठकर घर की साफ़ सफाई , झाड़ू पुछा बर्तन और नाहा धो कर पूजा पाठ करना , फिर ससुर के लिया सुबह की चाय और उनके नहाने का इंतजाम करना , किचन में जा कर बेटे किशन के लिया नाश्ता बनाना उसके कॉलेज जाने से पहले | ये सब उसके रोज के काम थे
एक दिन जब रात को किशन उत्तेजना में अपने मोबाइल पर नए एपिसोड ढूढ़ने की कोशिश कर रहा था पर उसके मतलब का एक भी नया एपिसोड नहीं मिला तो थक हार कर वो पोर्न साइट पर देसी महिलाओ के वीडियो देखने लगा | पर वो सरे वीडियो वो पहले ही देख चूका था तो फ़्रस्टेशन में आके मोबाइल एक तरफ पटक दिया और बिस्तर पर पेअर लटका कर निचे देखने लगा | उसकी माँ मधु बेसुध वही पड़ी हुई थी , साड़ी ऊपर सरकी हुई थी घुटनो तक , उसके गोरे और मासल पेर हलकी रौशनी में चमक रहे थे ब्लाउज पर से पल्लू सरका हुआ अलग थलग पड़ा था और उसके बड़े बड़े ३६द बूब्स की गहराई जैसे धरती फाड़ कर बहार आने के लिया आतुर थी |
उसका एक वक्ष निचे और एक ऊपर की और मुडा हुआ था जो उसके वक्षो के भरी होने का प्रमाण था , कसाव के कारन उसके ब्लाउज का एक हुक छिटक कर खुल गया था | किशन अपनी माँ की इस दशा को बड़े गौर से निहारने लगा , ऊपर से निचे , निचे से ऊपर , जाने कितनी बार उसकी हवसी निगाहे मधु के बदन को आँखों से ही चाटने में लगी हुई थी | सहसा ही उसका लिंग पायजामे में खुद बा खुद अकड़ने लगा और रह रह कर फड़कने लगा | पूरा सख्त होने पर किशन ने पायजामे के ऊपर से उसे मुट्ठी में भींच लिया और खुद ही दबाते हुए मधु के यौवन को निहारने लगा |
कुछ देर बाद उसे होश आया की ये उसकी अपनी माँ है जिसने उसे पैदा किया और बचपन में दूध पिलाया है | ये बहुत बड़ा पाप है | और ये सोचते हुए वो वापिस पेर ऊपर कर सोने की कोशिश करने लगा | पर उसकी माँ का मांसल बदन उसके जेहन से नहीं हट पा रहा था | फिर मन में विचार आया , अरे देख ही तो रहा हु कुछ कर थोड़े ना रहा | और किशन वापिस बैठ गया निचे पड़ी माँ को आँखों से ही चाटने में | देखना ही है तो क्यों ना पास से देखु इसे , सोचते हुए निचे बैठ गया और वक्षो की दरार को पास से निहारने लगा , उसका मुँह तो खुला ही था , पता नहीं कब जीभ से लार टपकी और मधु के क्लीवेज में जा गिरी जो फिसल कर क्लीवेज की गहराई में समां गयी
देखती ही किशन ने अपना मुँह तुरंत बंद किया और अपने थूक को मधु के क्लीवेज से पोछने के लिया उंगली चला कर उसे वह से हटाने लगा | किशन पहली बार किसी औरत के स्तन को टच कर रहा था , इतने सॉफ्ट और गरम होंगे उसको एहसास नहीं था | उंगली फिसलते फिसलते मधु एक आधे बूब को नाप लिया , अब उसका लुंड पायजामे में बोफोर्स तोप की तरह तन्नाता हुआ खड़ा हो चूका था , अब उससे रहा नहीं जा रहा था , उसका मन हो रहा था मधु का ब्लाउज फाड़ कर उसके गोरे बूब्स को हाथ में भींच कर जी भरकर मसाले और अपना लुंड निकालकर मधु के मुँह में दे दे | पर उसकी उतीजाणा माँ बेटे की सीमा नहीं लांघ पा रही थी | उसने अपना पायजामा निचे सरका लुंड को हवा में खुला छोड दिया और एक हाथ से उसे पकड़ सहलाना लगा | दूसरे हाथ को मधु के वक्षो के ऊपर हवा में ही उनकी गोलाई पर सहलाने लगा , ताकि मधु जाग ना पाए |

उसकी शादी बचपन में ही हो गयी थी पर पति के एक्सीडेंट में गुजर जाने की वजह से वो अपने ससुर और अपने जवान बेटे किशन के साथ रहती थी
समाय के साथ सभी में बदलाव आता है , ये वो किशन नहीं था जो कभी माँ की छाती से लग कर उसका दूध पीता था
या ये वो मधु नहीं थी जो उसे मात् भाव से देखती थी और उसका लालन पालन करती थी | समाय के साथ वो भाव कही दफ़न हो गए थे अब दोनों एक साथी की तरह जीवन और घर की गाडी खींचने में लगे हुए थे | किशन कॉलेज से आकर अपनी फोटोकॉपी की दूकान पर काम करता ताकि घर में कुछ आमदनी आ सकते | मधु भी उसे घर के मुखिया के रूप में देखती और उसका कहना मानती |
किशन : "क्या हुआ मम्मी नाश्ता मिलेगा या नहीं ..."
मधु : "अभी लाती हूउउ ...."
रामलाल : "बहुउउ ...चाय का क्या हुआ ...!!"
मधु : "लाई इ इ ...बाबूजी ..."
जब से मोबाइल पे OTT और webseries चालू हुई हैं तब से किशन मोबाइल में कुछ ज़्यादा ही मसरूफ रहने लगा , दूकान पर ज़्यादा ग्राहक आते नहीं थे तो उसे नयी नयी एपिसोड देखने का टाइम मिल जाता था और घर पे मौका नहीं मिलता था क्युकी ज़्यादा कमरे नहीं थे , एक में मधु और किशन सोते थे और एक में ससुर | | बस अगर देर रात सब सू जाने के बाद किशन भलेही कुछ देर के लिया मोबाइल लौ वॉल्यूम पे चला कर अपनी हवस मिटा लेता था | वो बिस्तर पर सोता था और उसकी माँ को निचे जमीन पर पर सोने की आदत थी
कॉलेज और स्कूल में बुरी सांगत से उसे पोर्न की लत तो पहले से ही थी पर webseries के आने के बाद लड़को में एक अलग हवस पैदा हुई थी जिसका इंतजार शायद सभी कर रहे थी | इसकी वजह से लड़को में मन में सेक्स एक कदम और पाउच के अंदर आगया था क्युकी इसमें ससुर बहु , बेहेन भाई , माँ बेटे , देवर भाभी जैसे रिश्तो को बहुत बोल्ड तरीके से पेश किया जा रहा था | शुरू में तो बस किशन इसे एक और पोर्न की तरह देख रहा था पर अब ये सब उसके मन पर हावी होने लगा था | अब उसकी इच्छा देखने से आगे करने की बनती जा रही थी |
रात बिस्तर पर मोबाइल पे देसी कामुक औरतो को देख देख कर अपना शीशिन पायजामे पर से सेहला लेता और कभी कभी अंदर ही संखलित हो जाता और वैसे ही सो जाता | रोज रोज के इस हवस के खेल ने उसे बड़ा बैचैन कर रखा था | बस अपना हाथ जग्गंनाथ और ये बेजान मोबाइल , अब उसे किसी औरत के जिस्म को छूने की बहुत तेज प्यास सताने लगी थी |
माध्यम वर्ग से होने के कारन मधु घर में एक दबी सेहमी हुई ही रहती थी , बेटे किशन के जवान होने पर उसे भी एक बड़े मर्द के रूप में ही देखती थी और एक अच्छी औरत की तरह उसकी बात मानती थी , वही ससुर की सेवा भी वो बहुत तन मन धन से करती थी | सुबह जल्दी उठकर घर की साफ़ सफाई , झाड़ू पुछा बर्तन और नाहा धो कर पूजा पाठ करना , फिर ससुर के लिया सुबह की चाय और उनके नहाने का इंतजाम करना , किचन में जा कर बेटे किशन के लिया नाश्ता बनाना उसके कॉलेज जाने से पहले | ये सब उसके रोज के काम थे
एक दिन जब रात को किशन उत्तेजना में अपने मोबाइल पर नए एपिसोड ढूढ़ने की कोशिश कर रहा था पर उसके मतलब का एक भी नया एपिसोड नहीं मिला तो थक हार कर वो पोर्न साइट पर देसी महिलाओ के वीडियो देखने लगा | पर वो सरे वीडियो वो पहले ही देख चूका था तो फ़्रस्टेशन में आके मोबाइल एक तरफ पटक दिया और बिस्तर पर पेअर लटका कर निचे देखने लगा | उसकी माँ मधु बेसुध वही पड़ी हुई थी , साड़ी ऊपर सरकी हुई थी घुटनो तक , उसके गोरे और मासल पेर हलकी रौशनी में चमक रहे थे ब्लाउज पर से पल्लू सरका हुआ अलग थलग पड़ा था और उसके बड़े बड़े ३६द बूब्स की गहराई जैसे धरती फाड़ कर बहार आने के लिया आतुर थी |
उसका एक वक्ष निचे और एक ऊपर की और मुडा हुआ था जो उसके वक्षो के भरी होने का प्रमाण था , कसाव के कारन उसके ब्लाउज का एक हुक छिटक कर खुल गया था | किशन अपनी माँ की इस दशा को बड़े गौर से निहारने लगा , ऊपर से निचे , निचे से ऊपर , जाने कितनी बार उसकी हवसी निगाहे मधु के बदन को आँखों से ही चाटने में लगी हुई थी | सहसा ही उसका लिंग पायजामे में खुद बा खुद अकड़ने लगा और रह रह कर फड़कने लगा | पूरा सख्त होने पर किशन ने पायजामे के ऊपर से उसे मुट्ठी में भींच लिया और खुद ही दबाते हुए मधु के यौवन को निहारने लगा |
कुछ देर बाद उसे होश आया की ये उसकी अपनी माँ है जिसने उसे पैदा किया और बचपन में दूध पिलाया है | ये बहुत बड़ा पाप है | और ये सोचते हुए वो वापिस पेर ऊपर कर सोने की कोशिश करने लगा | पर उसकी माँ का मांसल बदन उसके जेहन से नहीं हट पा रहा था | फिर मन में विचार आया , अरे देख ही तो रहा हु कुछ कर थोड़े ना रहा | और किशन वापिस बैठ गया निचे पड़ी माँ को आँखों से ही चाटने में | देखना ही है तो क्यों ना पास से देखु इसे , सोचते हुए निचे बैठ गया और वक्षो की दरार को पास से निहारने लगा , उसका मुँह तो खुला ही था , पता नहीं कब जीभ से लार टपकी और मधु के क्लीवेज में जा गिरी जो फिसल कर क्लीवेज की गहराई में समां गयी
देखती ही किशन ने अपना मुँह तुरंत बंद किया और अपने थूक को मधु के क्लीवेज से पोछने के लिया उंगली चला कर उसे वह से हटाने लगा | किशन पहली बार किसी औरत के स्तन को टच कर रहा था , इतने सॉफ्ट और गरम होंगे उसको एहसास नहीं था | उंगली फिसलते फिसलते मधु एक आधे बूब को नाप लिया , अब उसका लुंड पायजामे में बोफोर्स तोप की तरह तन्नाता हुआ खड़ा हो चूका था , अब उससे रहा नहीं जा रहा था , उसका मन हो रहा था मधु का ब्लाउज फाड़ कर उसके गोरे बूब्स को हाथ में भींच कर जी भरकर मसाले और अपना लुंड निकालकर मधु के मुँह में दे दे | पर उसकी उतीजाणा माँ बेटे की सीमा नहीं लांघ पा रही थी | उसने अपना पायजामा निचे सरका लुंड को हवा में खुला छोड दिया और एक हाथ से उसे पकड़ सहलाना लगा | दूसरे हाथ को मधु के वक्षो के ऊपर हवा में ही उनकी गोलाई पर सहलाने लगा , ताकि मधु जाग ना पाए |
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