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34 - फ्लैशबैक !!!
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पार्टी वाली रात को जयसिंह सबको ऑफिस का सीक्रेट डिस्कशन है ऐसा कहके ड्राइवर के साथ घरपे भेज देता है .
जयसिंह को पता था के वो जब घर जायेगा तब मधु अपनी मां के कमरे में होगी तो मेरे पकड़े जाने वाला नही।
सबके जाने के बाद जयसिंह माथुर उसके दोनो भाई रूम में शराब पीने बैठने लगे ।
जयसिंह बोला असली पार्टी तो अब सुरु होगी , अरे माथुर क्या लाए हो हमारे लिए ।
माथुर भी किसी मांझे हुए अदाकार की तरह ये लीजिए साहब कहके एक से एक अंग्रेजी शराब की बोतले रख देता है और सब एक साथ हस देते है ।
4 राउंड होने और अनाब सनाब बाते करने के बाद जयसिंह एकदम खड़ा हो जाता ही और गाना गाने लगता है ..
मुझे पीने का सोख नहीं पीता हु गम भुलाने को तेरी यादें मिटाने को तेरी यादें मिटाने को पीता हु गम भुलाने को ।
उसके दोनो भाई बोल पड़ते ही हमे डरा मत तु कोई भी गाना गाले बस ये गाना मत गा ।
माथुर बोल पड़ता हैं क्या खराबी है इस गाने में इतना अच्छा तो गाना है ।
अरे तुम नही जानते इसके पीछे की कहानी और हम क्यू डरते इसके इस गाने से ।
माथुर बोला तो बताओ ना क्या है मे भी तो जानू ।
तो सुनो दरअसल भाईसाहब को कॉलेज के बाद कोई मनीषा नामकी लड़की से एक तरफा प्यार हो गया था ये उसे प्रपोज कर पाते उससे पहले ही उसका ब्याह हो गया ।
तो इस साहबजादे ने उसके गम में इतना शराब पीया करते थे के कुछ ही महीनों में हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा ।
और इस दौरान भाईसाहब किसी दिल टूटे आशिक की तरह हाथ में शराब की बोतल लेके एक ही गाना गया करते थे की
मुझे पीने का सोख नहीं पीता हु गम भुलाने को तेरी यादें मिटाने को तेरी यादें मिटाने को पीता हु गम भुलाने को ।
और तो और शादी के बाद हमे लगा की ये उसे भूल गए है लेकिन हम तब गलत साबित हुए जब इन्होंने अपनी बड़ी बेटी का नाम मनीषा के नाम से ही मनिका रखा था ।
और रही बात डरने की तो अस्पताल वाला वो मंजर हमे याद आ जाता है जब हम दोनो भाई इसे अस्पताल ले गए थे ।
जयसिंह ये सब चुपचाप सुन रहा था और एकदम बोल पड़ा बंध करो बकवास शराब खत्म हो गई मुझे घर जाना हे ।
माथुर ने कम पी थी तो उसे थोड़ा होस था वो बोला के हा यार शराब की पांच बोतले खतम हो गई पर बाते नही ।
शराब की वजह से तीनो भाई नशे में धुत थे उन्हे कोई होश ही न था ।
माथुर ड्राइवर को बुलाता है और सबको घर भेज देने को बोलता ही .
तीन ड्राइवर सबको एक एक करके अपनी अपनी गाड़ी में बिठा देते है और अपने अपने मालिक के घर की और चल देते है ।
घर पहुंच के ड्राइवर ही जयसिंह को उसके कमरे तक पहुंचता है । मधु तो अपनी मां के कमरे में थी तो उसे पता कहा चलने वाला था की कौनसी सिक्रेट मीटिंग करके आए है ।
करीब आधा पोना घंटे के बाद जयसिंह को पेशाब लगती हैं तो वो जैसे करके उठता है और मूतने के बाद बेड के मुहाने के पास तकिया रखके लेट जाता है और इसके हाथ में मोबाइल आ जाता हैं ।
वह बड़बड़ाने लगता है .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका .... मनीषा मनिका
और फिर वो मनिका को मेसेज करता है
आगे का वाकया तो आपको पता ही हे ।।।।।