हकीकत (असली वाली)
उस रात घर लौटते हुए कार की खामोशी में एक अनकहा वादा था। हम दोनों जानते थे कि जो आग लगी है, वो अब बुझने वाली नहीं। घर पहुँचकर, श्रेया ने मेरी आँखों में देखा, और बिना कुछ कहे ही हमने एक-दूसरे को सब कुछ कह दिया। अगली रात, जब हम फिर से उस खाली जिम में दाखिल हुए, तो हवा में सिर्फ़ तनाव नहीं, बल्कि एक तयशुदा इरादा था। ये रात, फैसले की रात थी।
मैंने अपना प्लान बना लिया था। मैं उन्हें अकेला छोड़ कर जाने की गलती नहीं करने वाला था। मैं अपनी आँखों से, अपने सामने, अपनी बीवी की कल्पना को हकीकत बनते देखना चाहता था। मैंने जिम का कोना-कोना छानकर एक जगह पहले ही चुन ली थी - स्नूकर रूम के ठीक बगल वाला छोटा सा स्टोर रूम। उसका दरवाज़ा थोड़ा सा टूटा हुआ था, और अगर बत्ती बंद कर दी जाए, तो उस दरार से स्नूकर रूम का कोना-कोना साफ़ नज़र आता था।
कसरत सिर्फ़ नाम के लिए थी। हम तीनों एक-दूसरे के चारों ओर शिकारी की तरह घूम रहे थे। आख़िरकार, मैंने रोहित को एक इशारा किया, एक हल्का सा सिर हिलाना, जिसका मतलब साफ़ था - आज रात, कोई रोक-टोक नहीं। फिर मैं श्रेया के पास गया। "मेरी पीठ में दर्द हो रहा है, मैं ज़रा स्टीम लेने लॉकर रूम जा रहा हूँ," मैंने कहा और चला गया।
लेकिन मैं लॉकर रूम नहीं गया। मैं फिसलकर उस अँधेरे स्टोर रूम में घुस गया और दरवाज़े की दरार से अपनी आँखें चिपका दीं। मेरा दिल किसी तूफ़ानी ढोल की तरह बज रहा था।
कुछ ही मिनटों बाद, रोहित श्रेया के पास गया। उसने धीरे से श्रेया का हाथ पकड़ा, और उसे खींचता हुआ स्नूकर रूम की तरफ ले आया। दरवाज़ा मेरे सामने ही बंद हुआ। अब उस कमरे में सिर्फ़ वो दोनों थे, और इस तरफ अँधेरे में, मैं।
रोहित ने श्रेया को दीवार से सटा दिया और उसे चूमना शुरू कर दिया। ये एक भूखा, जंगली चुंबन था। मैं देख सकता था कि श्रेया पूरी तरह से जवाब दे रही थी, उसकी उँगलियाँ रोहित के बालों में फँस गई थीं। फिर रोहित पीछे हटा, और उसने धीरे-धीरे श्रेया की टी-शर्ट को ऊपर उठाना शुरू किया। श्रेया ने अपनी बाहें उठा दीं, और टी-शर्ट उसके सिर से निकलकर फर्श पर जा गिरी। मेरे सामने मेरी बीवी, एक दूसरे मर्द के सामने, सिर्फ़ एक स्पोर्ट्स ब्रा और उन छोटे शॉर्ट्स में खड़ी थी।
रोहित ने उसके कपड़ों को फाड़ा नहीं, जैसा मैंने किया था। उसने उन्हें एक-एक करके उतारा, जैसे किसी तोहफ़े को खोल रहा हो। उसने ब्रा का हुक खोला और उसे नीचे गिरने दिया। श्रेया के परफेक्ट गोल स्तन आज़ाद हो गए, उनके निप्पल पहले से ही पत्थर की तरह सख़्त थे। रोहित ने उन्हें देखा, सराहा, और फिर नीचे झुककर उन्हें अपने मुँह में भर लिया, बारी-बारी से दोनों को चूसा, अपनी जीभ से उनके चारों ओर ऐसे घेरे बनाए कि मैं देख सकता था कि श्रेया की टाँगें काँप रही थीं।
फिर उसने उसे स्नूकर टेबल पर बैठने में मदद की, और खुद उसके पैरों के पास घुटनों पर बैठ गया। उसने श्रेया के शॉर्ट्स को धीरे से नीचे सरका दिया, और मेरी बीवी उसके सामने पूरी तरह से नंगी हो गई। और जैसा श्रेया हमेशा से चाहती थी, रोहित ने अपना चेहरा उसकी टाँगों के बीच में डाल दिया। उसने श्रेया को ऐसे चूमा और चाटा जैसे वो कोई देवी हो और वो उसका भक्त। मैं श्रेया के मुँह से निकलती सिसकारियाँ सुन सकता था, वो अपनी उँगलियों से टेबल की हरी सतह को खरोंच रही थी, आनंद में पूरी तरह से खोई हुई।
जब श्रेया आनंद की लहरों में काँप रही थी, रोहित उठा। श्रेया ने आँखें खोलीं और उसकी आँखों में जो भूख थी, वो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उसने रोहित के शॉर्ट्स के कमरबंद को पकड़ा और उसे नीचे खींच लिया।
और तब मैंने उसे देखा। रोहित का काला लंड। वो मेरी कल्पना से भी ज़्यादा बड़ा था। मोटा, लंबा, और उसकी सतह पर नसें ऐसे उभरी हुई थीं जैसे किसी संगमरमर पर तराशी गई हों। वो हवा में एक हथियार की तरह तनकर खड़ा था।
श्रेया एक पल भी नहीं रुकी। वो टेबल से उतरी और उस शानदार लंड के सामने अपने घुटनों पर बैठ गई। उसने पहले उसे सिर्फ़ देखा, अपनी आँखों से उसकी पूजा की। फिर, उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके सिरे पर, जो गहरे बैंगनी रंग का था, एक गोला बनाया। रोहित के मुँह से एक गहरी कराह निकली। श्रेया ने फिर अपनी जीभ से उसे सहलाना शुरू किया, ऊपर से नीचे तक, और फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया।
धीरे-धीरे, इंच-दर-इंच, वो उसे अंदर लेती गई, जब तक कि उसका पूरा का पूरा लंड श्रेया के गले की गहराई में समा नहीं गया। उसकी आँखें बंद थीं, और वो अपने सिर को आगे-पीछे कर रही थी। रोहित की उँगलियाँ उसके बालों में कस गईं, वो लगभग काँप रहा था। ये सिर्फ़ एक ब्लो जॉब नहीं था; ये समर्पण था, ये इबादत थी। फिर श्रेया ने वो किया जिसमें वो माहिर है। उसने अपना ध्यान नीचे रोहित की गेंदों पर लगाया। उसने उन्हें अपने मुँह में भरा, हल्के से चूसा, अपनी जीभ से उन्हें सहलाया... एक ऐसी कला जिसमें वो निपुण थी। मैं देख सकता था कि रोहित अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
उसने श्रेया को बालों से पकड़कर उठाया और उसे वापस स्नूकर टेबल पर पटक दिया। एक पल की भी देरी किए बिना, उसने अपनी पूरी ताक़त से अपना लंड श्रेया के अंदर उतार दिया। श्रेया के मुँह से एक चीख़ निकली - दर्द और परम सुख का एक मिश्रण।
और फिर जो शुरू हुआ, वो मेरे ज़हन में हमेशा के लिए अंकित हो गया। रोहित ने श्रेया को उस टेबल पर चोदना शुरू कर दिया। ये प्यार नहीं था, ये हवस थी, ये शक्ति का प्रदर्शन था। हर झटके के साथ, स्नूकर टेबल हिल रही थी। श्रेया की टाँगें रोहित के कंधों पर थीं, और वो उसे इतनी गहराई तक चोद रहा था कि मैं सोच भी नहीं सकता था। मैं स्टोर रूम के अँधेरे में खड़ा था, मेरा अपना लंड मेरे हाथ में था, और मैं अपनी ही बीवी को किसी और के नीचे परम सुख में चिल्लाते हुए देख रहा था। मेरे गालों पर आँसू थे - जलन के, गर्व के, और अपनी सबसे गहरी, सबसे घिनौनी कल्पना के सच होने के।
वो उस पर तब तक सवार रहा जब तक दोनों एक साथ काँपते हुए चरम पर नहीं पहुँच गए। श्रेया की चीखें सिसकियों में बदल गईं, और रोहित का शक्तिशाली शरीर थक कर उसके ऊपर ढह गया।
कुछ देर बाद, वे उठे और चुपचाप कपड़े पहने। उन्होंने एक-दूसरे से कुछ नहीं कहा। कहने के लिए कुछ बचा भी नहीं था। जब वो कमरे से निकल गए, मैं कुछ और मिनटों तक उसी अँधेरे में खड़ा रहा, काँपता हुआ।
मैं उस रात जो देखा था, उसने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया था। हमारा एक्सपेरिमेंट खत्म हो चुका था। एक नई, खतरनाक और असीम रूप से रोमांचक हकीकत शुरू हो चुकी थी।