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तू दुआ बनके शामिल है मेरी हर इक साँस में,
तेरी बंदगी ही अब तो, मेरा दीनो-ईमान है।
लोग ढूँढते हैं ख़ुदा को पत्थरों के शहर में,
मेरे लिए तो तेरा चेहरा ही, मुकम्मल दीदार है।
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erriction
सिलसिला ही न होता
कोई गिला ही ना होता
या तो मिल गया होता या
फिर मिला ही नहीं होता
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Meesa
Meesa
erriction
जो मिला ही नहीं होता, तो ये दिल सँभलता कैसे?
बिन तपिश के मोम का ये वजूद पिघलता कैसे?
गिला तो उसे होता है, जिसे खोने का डर हो,
पर जो रूह में उतर गया, वो जुदा फिर होता कैसे?
शायद अधूरा रहना ही, मुकम्मल होने की शर्त थी,
वरना ख़ुद से मिलने का ये ख़्वाब, आँखों में पलता कैसे?
E
erriction
होने थे जो खेल मुकद्दर के हो गए
हम टूटी नाव ले के समंदर के हो गए
खुशबू हमारे हाथ को छू कर निकल गई
हम फूल सबको बांट के पत्थर के हो गए
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