Update -9
दोनों की धड़कनें तेज थी। डर भी लग रहा था मगर उत्तेजना भी चरम पर थी। क्या कर रहे होंगे मम्मी डैडी? क्या वो सच में अपनी हवस की आग को हवा दे रहे होंगे? क्या हम उनको सुन पायंगे? उनको देख पायंगे? उन्होंने हमें देख लिया तो? अदिती और मयूर यही सोच रहे थे।
मगर अदिती का डिटर्मिनेशन मयूर से ज्यादा था। उनकी आँखें अंधेरे में अज़स्ट कर रही थी। थोड़ा-थोड़ा दिखने लगा था। मगर कुछ पलों से दरवाजे के बाहर होने के बावजूद उनको कुछ सुनाई नहीं दिया था। मयूर ने अदिती की ओर ऊपर वापस जाने का इशारा किया। मगर वो नहीं मानी, और वो सही थी।
कुछ टाइम बाद उनकी माँ की आवाज आई अंदर से- “ओके मैं तैयार हैं। तुम्हारे लिए स्पेशली आज मैंने ये लिंगरी पहनी है...”
दोनों भाई बहन के कान खड़े हो गये। अदिती मुश्कराने लगी। मयूर शर्मा गया। उनकी माँ अपने पति को खुश करने के लिए लिंगरी पहनकर आई थी।
ना चाहते हुए भी मयूर अपनी माँ को उस रूप में इमेजिन करने लगा। कितनी सेक्सी लग रही होगी मोम। उनको अपने बाप की आवाज नहीं आ रही थी। शायद वो आराम से बोल रहा था।
मोनिका- “तुम तो उत्तेजित ही नहीं हए? मेरा शरीर सेक्सी नहीं लग रहा? मेरे चूचे, मेरी गाण्ड... मस्त नहीं लग रही?" फिर से मोनिका की आवाज आई।
अपनी माँ के ये शब्द सुनकर दोनों के जबड़े लटक गये। मयूर तो हैरान था। गाण्ड, चूचे... मेरी माँ के मुँह से ऐसे शब्द।
कमरे के अंदर का दृश्य। अपनी बीवी को ऐसे उसने बहुत टाइम बाद देख था, मगर अभी भी यतीन इतना उत्साहित नहीं था। अपनी बीवी को खुश रखने के लिए वो खुश होने का ड्रामा कर रहा था, कहा- “अच्छी लग रही हो। बहुत हाट...” उसने कहा।
मोनिका- “बैंक यू... डार्लिंग... आज मैं तुम्हारे लिए हर चीज करने को तैयार हूँ..." मोनिका बोली। और यतीन को चूमने लगी। यतीन ने भी उसको वापस चूमा। मोनिका ने उसके हाथ अपनी गाण्ड पर रखवा दिए- "मेरी गाण्ड से खेलो
और मुझे चूमो..” मोनिका बोली।
यतीन ने उसकी गाण्ड दबाना शरू करा। इतनी बड़ी-बड़ी, कोमल गाण्ड। यतीन ने जोर से थप्पड़ मारा उसकी गाण्ड पे।
"अयाया.” मोनिका के मुंह से चीख निकली।
अदिती और मयूर ने एक-एक शब्द सुना था अपने माँ बाप का। अदिती के मुंह पे इतनी शैतानी सी थी। उसने एक बेटे को अपनी माँ का सेक्सी रूप दिखा दिया था। मयूर को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था। ‘पटक' तभी एक और थप्पड़ की आवाज आई। पापा मम्मी की गाण्ड पे थप्पड़ मार रहे थे।
अदिती पास आई और मयूर के कान में बहुत धीरे से बोला- “लगता है मम्मी को भी स्पैकिंग बहुत पसंद है..”
मयूर अपनी माँ की ऐसी बातें सुन रहा था जो किसी बेटे को नहीं सुननी चाहिये। मगर फिर भी उसका लण्ड खड़ा हो रहा था।
अब मोनिका ने किस तोड़ी और यतीन के कच्छे के अंदर हाथ डाल दिया। कितने दिन हो गये थे उसने अपने पति का लण्ड नहीं देखा था। उसने उसको बाहर निकाला। वो अभी भी बैठा हुआ था। मोनिका बोली- “अरे ये तो अभी भी बैठा हुआ है... लगता है इसे मुझे ही खड़ा करना पड़ेगा..” ये बोलकर वो उसे सहलाने लगी।
बाहर दोनों सब सुन रहे थे। उनके बाप के लण्ड की बात हो रही थी। अदिती की चूत गीली होने लगी। डैडी का लण्ड कैसा होगा? वो सोचने लगी।
मोनिका- “पता है यतीन। कितने दिनों से इस पल का इंतेजार था मुझे। प्यासी थी मैं, तुम्हारे लण्ड के लिए। आज नहीं जाने दूंगी ये मौका। ऐसे चूसूंगी तुम्हारा लण्ड जैसा आज तक नहीं चूसा..."
मोनिका की ये बात सुनकर यतीन का लण्ड झटका।
मगर इससे बुरा हाल तो बाहर अदिती और मयूर का हो गया। मम्मी डैडी का लण्ड चूसने वाली है... वो इसके लिये भूखी है... वो लोग ये विचार अपने मन में डाल ही रहे थे की।
यतीन की आवाज आई- “ऊवू.” वो अपनी बीवी का मुँह अपने लण्ड पे पड़ने से खुद को रोक नहीं पाया, और उसके मुँह से आनंद की कराहट निकल गई।
ये आवाज सुनकर दोनों भी समझ गये की उनकी माँ अपने काम में शुरू हो गई है। ये सोचकर ही मयूर के लण्ड से प्री-कम निकलने लगा।
मम्मी डैडी का लण्ड मुँह में लेकर चूस रही है। ये क्या हो रहा है? अदिती भी अपने बाप के लण्ड को इमेजिन करके उत्तेजित हो रही थी। उन दोनों के बीच भी सेक्सुयल टेन्शन बढ़ रही थी। अंदर से अब स्लप-स्लप की आवाजें आ रही थी। ये आवाज मोनिका के मुँह से अंदर-बाहर होते यतीन के लण्ड की थी।
मोनिका- “बहुत सुंदर और स्वादिष्ट है तुम्हारा लण्ड यतीन... स्लर्प-स्लप कैसे बढ़ रहा है मेरे मुँह में... मेरे मुँह को चोदो ना इससे। चोदो ना मेरे मुँह को स्लप-स्लप...” मोनिका चूसते-चूसते ये बोल रही थी।
यतीन भी अपनी बीवी के इस टैलेंट से हैरान था। उसकी सेक्रेटरी सलमा भी रोज उसको ब्लोजाब देती थी। मगर उसकी बीवी आज सलमा को भी मात दे रही थी। शायद ये इतने दिनों से सेक्स ना मिल पाने की आग थी। यतीन ने अपनी पत्नी की बात मानते हए उसके मुँह को चोदना शुरू कर दिया। वो अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा, मोनिका अपना मुँह खोले बैठी रही। 'स्लप-स्लप-स्लप' यतीन के अपनी बीवी के मुँह को चोदने की आवाज बाहर तक आ रही थी।
मयूर का लण्ड जो कुछ मिनटों पहले ही झड़ा था फिर से पाजामे में टेंट बनाए बैठा था। अदिती की हालत ज्यादा खराब थी। वो तो उत्तेजना में भारी सांसें ले रही थी। सुबह से दो लण्डों से खेल चुकी थी, गाण्ड के बीच लण्ड ले चुकी थी। मगर अभी तक उसे आर्गेज्म प्राप्त नहीं हुआ था। उसके हाथ अपने पाजामो के अंदर चले गये और वो जोरों से उंगली करने लग गई। अंदर से आ रही आवाजें उसे और पागल कर रही थी।
अदिती को देखकर मयूर और गरम हो गया। उसे डर था की कहीं उसके माँ बाप बाहर ना आ जाएं। क्या बोलेंगे वो उनको? ये सब सोचते हए भी वो अपने आपको उत्साहित होने से रोक नहीं पा रहा था। आखीरकार, उसकी माँ लण्ड लिए बैठी थी और बाहर उसके सामने उसकी बहन उंगली कर रही थी। उत्साहित कौन नहीं होगा।
मोनिका चिल्ला रही थी- “चोदो मेरा मुँह यतीन, चोदो स्लप.."
यतीन को भी मजा आने लगा था। वो अब जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।
ये सब सुनकर मयूर का हाथ भी अपने आप अपने लण्ड तक पहुँच गया और हिलाने लगा।
यतीन ने एक पाइंट पे आकर अपना पूरा लण्ड मोनिका के मुँह में घुसा दिया और उसे वहीं रखकर उसको गैग करने लगा। उसने जब अपना लण्ड बाहर निकाला, तो मोनिका चिल्लाई- “उहह... आर्गम्ह... फिर से करो.." और यतीन ने फिर पूरा लण्ड उसके मुँह घुसाकर छोड़ दिया।
अदिती सुन रही थी। उसका मन विचलित हो रहा था। कितने मजे से चूस रही है माँ लण्ड? कितना मजा आ रहा है मम्मी को? क्या सच में इतना मजा आता है लण्ड चूसने में? उसका ध्यान मयूर पे गया जिसका लण्ड अब पाजामे के बाहर आ चुका था और वो खुलेआम मूठ मार रहा था। वो भूल चुका था की वो अकेला नहीं है। बस अपनी माँ की आवाजें सुनकर पागल हो रहा था।\
अपने सामने लण्ड देखकर अदिती भी सोचने लगी। कैसे लगेगा मुँह में लण्ड? क्या ट्राई करूँ? चूत गीली हो चुकी है, तड़प रही है। उसके दिल में तूफान उठ रहा था। इतनी हद पार हो चुकी है। एक और... होना तो है ही कभी ना कभी। आज क्यों नहीं? मुँह में तो लण्ड लूँगी ही कभी ना कभी। आज क्यों नहीं? मगर यहां, पेरेंट्स के रूम के आगे... सोचकर डर भी लग रहा था और उत्तेजना भी हो रही थी।
अंदर उनकी माँ अपने पति का लण्ड छोड़ने को राजी ही नहीं हो रही थी। टट्टे तक चाट रही थी। ऊपर से नीचे तक उसका लण्ड गीला हो चुका था। कहा- “दो मुझे लण्ड दो, मेरे चूचे दबाओ ना..."
यतीन उसके मम्मे दबाने लगा। पहाड़ जैसे बड़े-बड़े मम्मे। डीडी साइज के लटके हुए मम्मे। उसके हाथों में इतने कोमल लग रहे थे। उसने अपना हाथ उसकी ब्रा में घुसा दिया, और उसके बड़े निप्पलों को दबाने लगा। एक इंच लंबे निपल रहे होंगे उसके। जो अब यतीन टीज कर रहा था।
"ऊवू अया.." ऐसी आवाजें आ रही थी बाहर- “ऐसे ही दबाते रहो स्लप, पिचकाओ, स्लप, निप्पलों को खींचो.." मोनिका चिल्ला रही थी।
मयूर और अदिती अपने-अपने गुप्तांगों से खेल रहे थे। अदिती की नजरें मयूर पर थी। मयूर ने अदिती को खुद को देखते हुए देखा। अदिती मुश्कुराते हुए उसका लण्ड देख रही थी और साथ-साथ अपनी चूत से खेल रही थी। अदिती ने अपना टाप ऊपर करके मयूर को अपना फिट पेट दिखाया। मयूर को टीज कर रही थी वो।
मयूर ने सोचा की क्या हो रहा है उसकी जिंदगी में? ये कुछ दिनों में कैसा मोड़ ले लिया मेरी लाइफ ने? इतनी हद पार कर दी मैंने अपनी बहन के साथ और अब मैं अपनी माँ की सेक्स लाइफ को सुन रहा हूँ। अपनी चूत में उंगली करती हुई बहन के सामने वो बिना डर के मूठ मार रहा था।
मोनिका की आवाज आई- “एम्म... स्लप... चोदो मेरा मुँह स्लप.."
मयूर ने आँखें बंद की और इन सब चीजों को सोचकर मूठ मारने लगा। वो जोर-जोर से हिलाने लगा अपना लण्ड की तभी अदिती ने उसका लण्ड पकड़ लिया, और वो उसे हिलाने लगी। मयूर आँखें बंद करके एंजोय करने लगा। अदिती के मन में अभी भी वो सब विचार चल रहे थे। मयूर अपनी बहन के हाथों को एंजोय कर रहा था की तभी उसके हाथ रुक गये। मयूर कारण देखने नीचे देखने ही वाला था की उसका लण्ड एक गीली, गरम चीज में समा गया। उसके लण्ड से करेंट की ऐसी लहर उठी जिसने उसकी आत्मा को हिला दिया। वो चीज अब उसके लण्ड पे ऊपर-नीचे होने लगी।
मयूर समझ गया की उसका अच्छा टाइम और अच्छा हो गया है। उसने नीचे देख। अदिती उसकी तरफ देख रही थी, आँखों में चमक थी और मुँह में मयूर का लण्ड। अपने माँ बाप के खेल को सुनते हुए, मयूर और अदिती बहुत गरम हो गये थे। अदिती ने अपने मन की इच्छा मान ली और अपने भाई मयूर का लण्ड मुँह में ले लिया।
मयूर समझ गया की उसका अच्छा टाइम और अच्छा हो गया है। उसने नीचे देख। अदिती उसकी तरफ देख रही थी, आँखों में चमक थी और मुँह में मयूर का लण्ड। अपने माँ बाप के खेल को सुनते हुए, मयूर और अदिती बहुत गरम हो गये थे। अदिती ने अपने मन की इच्छा मान ली और अपने भाई मयूर का लण्ड मुँह में ले लिया।
मयूर को जन्नत नसीब हो गई। मयूर के अंग-अंग में ऐसे झटके लग रहे थे, मानो उसपे बिजली गिर गई हो। ऐसा आनंद, ऐसी फीलिंग आज तक नहीं आई थी। वो दिन आ ही गया जब उसका लण्ड एक लड़की के मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था। लड़की जो एक अप्सरा से भी हसीन थी। लड़की जो बला से भी ज्यादा सेक्सी थी। लड़की जो उसकी अपनी बहन थी।
मयूर- “एम्म्म ... ओहह... ओहह... ओहह... ओहह... एम्म्म... दीदी आहह..” मयूर अपनी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा था। मगर उसकी आनंदित सिसकियां उसके मुंह से निकलना बंद नहीं हो रही थी। लण्ड की पूरी लंबाई पर, ऊपर-नीचे अदिती का मुँह दौड़ रहा था। मयूर का पूरा बदन उत्तेजना में कांप रहा था। अंदर उसकी माँ उसके बाप का लण्ड मुँह में लिए चिल्ला रही थी। और यहां उसकी बहन उसका लण्ड मुंह में लिए बैठी थी। कहां से कहां आ गया था ये भाई बहन का रिश्ता।
अदिती का भी हाल ऐसा ही था। निपल पत्थर से भी सख्त हो गये थे। चूत ऐसे बह रही थी जैसे पानी के पाइप में लीक आ गया हो। अपनी हवस के काबू में आकर उसने अपने भाई का लण्ड मुँह में ले ही लिया था, और उसको ये बहुत मजेदर लगा। पहली बार एक लण्ड उसके मुँह में गया था। पहली बार उसे ये स्वाद सीधा उसके सोर्स से चखने का मौका मिला था। वो इसका पूरा मजा लेना चाहती थी। मयूर के लण्ड को अपने मुँह में और बढ़ते महसूस कर रही थी वो। जैसा आज तक उसने पोर्न में देख था, ठीक वैसा करने की कोशिश कर रही थी।
मयूर फर्श पर पैर फैलाकर बैठा हुआ था। आँखें बंद, सिर सीलिंग की ओर किए इस स्वर्गीय पल का आनंद ले रहा था। अदिती झुक कर उसे ब्लोजाब दे रही थी। वो घुटनों के बल थी, जिससे उसकी गाण्ड हवा में उठ गई थी।
अपने होंठों को लण्ड पर रैप किए ऊपर-नीचे कर रही थी।
अदिती- “कैसा लग रहा है भाई?” उसने रुक के पूछा। उसके मुँह में लण्ड था, और इसी पोजीशन में वो मयूर को देख रही थी। वो इस वक्त दुनियां की सबसे सुंदर पोर्नस्टार लग रही थी।
मयूर- “ओहह... एम्म्म..." मयूर ने बस इतना ही बोला।
मगर अदिती समझ गई। उसने अपनी चुसाई चालू रखी। उसने अब अपनी जीभ से खेलना शुरू किया। अपनी जीभ से वो लण्ड को चाटने लगी। समीर के लण्ड का हेड जो उत्तेजना में एकदम लाल हो गया था, उसपर जब अदिती की जीभ टकराई तो मयूर का लण्ड झड़ने को हो गया। उसने बहुत मुश्किल से कंट्रोल किया, क्योंकी वो इस मोमेंट को और खींचना चाहता था।
अदिती को भी बहुत मजा आ रहा था। वो जितना हो सके उतना अपनी आवाजों को दबा रहे थे। अपने माँ बाप के कमरे के बाहर, उनके ही सेक्स खेल को सुनते हुए ये दोनों सिब्लिंग्स अपना सेक्स खेल कर रहे थे। दिल का यही डर, उनके सेक्स आर्गन्स की उत्तेजना बन गया था।
अदिती ने मयूर के हाथ लिए और अपनी गाण्ड पर रख दिए, और कहा- “तू भी कुछ कर, मेरी गाण्ड से खेल..."
बस ये बोलने की देर थी की मयूर ने एक झटके में अपने हाथ अदिती की पैंटी में घुसा दिये और उसके चूतड़ों को दबोच लिया।
अदिती को मजा आ गया। अब जैसे-जैसे अदिती मयूर का लण्ड चूस रही थी वैसे-वैसे ऊपर से मयूर उसकी गाण्ड को दबोच रहा था। दोनों के मुंह से सेक्स उल्लास के स्वर निकल रहे थे। अदिती का मन किया की काश उसकी चूत की प्यास भी कोई बुझा रहा होता। उसने अपना एक हाथ अपनी चूत तक पहुँचा दिया और उसपर फेरने लगी।
मयूर की जन्नत और हसीन हो रही थी। अब वो खुद को ज्यादा देर कंट्रोल नहीं कर सकता था। वो अदिती की कोमल गाण्ड को और जोरों से दबाने लगा। उसका हाथ अदिती की गाण्ड के छेद तक पहुँच गया। जैसे ही ये हुआ, अदिती की चूत ने पानी छोड़ दिया। वो काँपने लगी, जैसे उसे करेंट लग रहा हो। अपनी हवस की चीखों को दबाते हुए उसने अपना आर्गेज्म पा लिया।
मयूर ये देखकर और भी ज्यादा जल गया। उसकी उंगलियां उसकी बहन के गाण्ड का छेद पर थी। उसके मुंह में अभी भी मयूर का लण्ड था। मयूर के शरीर में हलचल होने लगी। वो बोलने लगा- “दीदी मैं भी..” मगर उससे पहले ही उसके लण्ड का दूध अदिती के मुंह में झड़ने लगा।
अदिती ने एक पल के लिए भी अपना मुँह हटाया नहीं। बस एक आज्ञाकारी राड़ की तरह एक-एक बूंद निगल गई। जब तक मयूर के टट्टे खाली ना हो गये, तब तक वो उसका लण्ड निचोड़ती रही।
मयूर ने सोचा ना जाने उसने क्या अच्छे करम किए होंगे, जो उसे ऐसी बहन मिली। दोनों भाई बहन कुछ पलों तक इसी नशे में रहे, अपनी सेक्स की दुनियां में। मगर एक आवाज ने उनको इस दुनियां से बाहर, असलियत में पहुंचा दिया।
मोनिका- “जल्दी करो यतीन। अब रुका नहीं जाता। घुसा दो अपना मोटा लंबा लण्ड मेरी गीली चूत में..” मोनिका की आवाज आई।
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अगले दिन जब दोनों घर पर अकेले थे तब मयूर ने अदिती को उसके कमरे के बाहर से आवाज दी, पर कोई जवाब नहीं आया। उसने सोचा की शायद वो सो रही है पर जब उसने अंदर देखा तो पता लगा की अदिती दो तकियों के बीच में अपना सिर दबाए कंबल ओढ़े लेटी हुई है। मयूर ने एक बार फिर जोर से आवाज दी तो अदिती ने उसकी तरफ देखा। अदिती की लाल-लाल आँखें देखकर मयूर थोड़ा परेशान हुआ।
अदिती ने बड़ी भारी आवाज में बताया की उसे सिरदर्द हो रहा है और ठंड लग रही है, साथ में हाल्का-हल्का पूरा बदन भी दर्द कर रहा है स्पेशली गर्दन और कंधे।
मयूर- “आपने मेडिसिन ली? और ठंड क्यों लग रही है, कही बुखार तो नहीं है?" मयूर ने आगे बढ़ाकर अदिती के माथे का टेंपरेचर चेक किया
अदिती - “हाँ ले ली, पर उसे कोई फरक नहीं हो रहा है और बुखार नहीं है बस यूँ ही जैसे बहुत तेज थकान जैसा महसूस हो रहा है। तू कुछ कर सकता है क्या?" अदिती बोली।
मयूर- “मैं आपकी मसाज कर दूं.. मुझे बहुत अच्छे से आती है.."
अदिती - “कुछ भी कर, पर ये सिर दर्द और थकान दूर हो जानी चाहिए.."
मयूर- “वो मेरी गारंटी, मैं बस अभी आया..” इतना बोलकर वो रूम के बाहर निकल गया।
मयूर वापस आया तो उसके हाथ में एक कटोरी में गर्म किया सरसों का तेल, एक बाल्टी में हल्का सा गुनगुना पानी और एक तौलिया था, कहा- “आप आगे आकर सीधा बैठ जाओ और अपनी आँखें बंद करके पूरे बदन को आराम से छोड़ दो..” उसने अपने हाथ से सामान नीचे रखते हुए कहा।
अदिती ने अपना कम्बल हटाया। उसने एक पुरी बांह का शर्ट और ग्रे कलर का Jथ पहना हुआ था। शर्ट फुल साइज का था फिर भी उसके बटन अदिती की चूचियों पर टाइट हो रहे थे।
अदिती - "तू करने क्या वाला है इन सबसे?" अदिती ने मयूर को पूछा।
मयूर- “आप बस अपने पाँव इस बकेट में डाल दो...” मयूर ने पानी का बकेट अदिती के पाँव वाली साइड बेड के पास रखकर बोला।
अदिती ने अपना लोवर घुटनों से ऊपर किया और पाँव बकेट में डाल दिए। मयूर तेल की बोतल लेकर अदिती के पीछे घटनों के बल खडा हो गया और हाथ में तेल लेकर अदिती के सिर की मसाज करने लगा।
अपने पाँव पर गरम पानी और सिर में गरम तेल की मसाज पाकर अदिती को थोड़ी गर्माहट महसूस हो रही थी। मयूर की मजबूत उंगलियां अदिती के सिर को अच्छी तरह से मसल रही थी। मयूर को बहुत अच्छा अनुभव था मसाज का। कुछ देर हाथ चलाने के बाद ही अदिती का सिर दर्द कम होने लग गया था। वो अब काफी आराम महसूस कर रही थी और अब उसे ठंड भी नहीं लग रही थी।
अदिती - “मयूर, तेरे हाथों में तो वाकई जादू है..."
अदिती के मुँह से तारीफ पाकर मयूर को अच्छा लगा। उसने उंगलियों को अब थोड़ा अलग-अलग ढंग से घुमाना शुरू किया। अदिती को लग रहा था किसी पर्फेक्ट फिजियोथेरेपिस्ट का हाथ उसके सिर में घूम रहा है।
मयूर- “आपको अब कैसा महसूस हो रहा है..” मयूर ने कुछ 7-8 मिनट बाद पूछा।
अदिती - “बहुत ही अच्छा। ऐसे लग रहा है जैसे मेरा सिर दर्द तो गायब हो गया। बस अब ये थकान दूर हो जाए तो मजा आ जाए। वैसे तूने ये सब कहां से सीखा?" अदिती ने जवाब दिया।
मयूर- “वो भी अभी ठीक हो जाएगा। आप बिल्कुल चिंता ना करो। मैंने इंटरनेट से सीखा ये सब। अब आप खड़ी होकर बैठ जाओ और देखो मेरा कमाल...” मयूर अपना हाथ सिर से होता हआ अदिती के कंधों पर ले आया। अब वो गर्दन और कंधों की मसाज करना चाह रहा था, पर उसकी शर्ट बीच में आ रही थी।
अदिती - “मयूर, मैं ये शर्ट उतार देती हूँ..” अदिती बोली।
मयूर- “हाँ मैं भी यही बोलने वाला था। अगर आप बुरा ना मानो तो मैं खुद अपने हाथ.......” मयूर ने जानबूझ कर अपनी बात अधूरी छोड़ दी।
अदिती - “अरे इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है, जब इतना सब कुछ कर ही चुके हैं तो इसमें क्या हर्ज है। चल तू ही खोल दे इस शर्ट को..” अदिती ने जवाब दिया।
मयूर के दिल में जैसे घंटी बजने लगी। उसके दिमाग में वही बात घूम रही थी की अदिती भी नार्मली रूम में कपड़े नहीं पहनती है। उसे लग रहा था की आज भी अदिती ने ब्रा नहीं पहनी हुई है। वो बहुत ज्यादा खुश हो गया था। अदिती बड़े आराम से अपने दोनों पाँव गर्म पानी की बकेट में डाले हाथों को पीछे करके बेड पर बैठी थी।
मयूर ने अदिती के सामने आकर शर्ट के सबसे नीचे वाले बटन से शुरू किया। दो बटन खुल जाने पर अदिती का गोरा और कोमल पेट दिखने लग गया। मयूर के हाथों में हल्का सा कंपन हो रहा था, जैसे-जैसे बटन्स खुलते जा रहे थे मयूर के दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थी।
मयूर ने अदिती के सामने आकर शर्ट के सबसे नीचे वाले बटन से शुरू किया। दो बटन खुल जाने पर अदिती का गोरा और कोमल पेट दिखने लग गया। मयूर के हाथों में हल्का सा कंपन हो रहा था जैसे-जैसे बटन खुलते जा रहे थे मयूर के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थी।
लेकिन जैसे ही उसने दो बटन और खोले उसके दिल की खुशी छू मंतर हो गई क्योंकी अदिती ने अंदर एक सफेद समीज पहनी हुई थी। मयूर ने एक और बटन खोलने के लिए बटन और शर्ट को पकड़ा तो उसकी उंगलियों को होने वाले नरम एहसास ने उसका पूरा बदन हिला दिया। मयूर की उंगलियां अदिती के मम्मों को छ गई थी। मयूर ने उन्हीं काँपते हाथों से बाकी के सारे बटन को खोल दिया।
अदिती की शर्ट के सारे बटन खुले थे। वो खुले बटन के शर्ट के साथ अपने हाथ पीछे टिकाकर बैठी उस पोजीशन में बहुत ही सेक्सी लग रही थी। फिर मयूर ने शर्ट को ऊपर से पकड़ा और धीरे-धीरे अदिती के कंधों तक नीचे उतार दिया। अदिती ने अपने हाथों को अडजस्ट किया और पूरी शर्ट निकालने में मयूर की हेल्प की। अदिती ने शर्ट के अंदर एक सफेद कलर की पतली स्ट्रैप वाली स्लीवलेश समीज पहनी हुई थी। समीज लंबाई में छोटी और बहत ढीली थी, फिर भी उसके बड़े-बड़े मम्मे पहाड़ की तरह खड़े दिख रहे थे और अंदर ब्रा नहीं होने के कारण निपल भी अपनी मोजूदगी बता रहे थे।
सफेद समीज और ग्रेथ के बीच में नजर आ रही पेट की गोरी और चिकनी स्किन उसके रूप को और निखार रही थी। मयूर बिना पलक झपकाए अदिती के इस रूप को निहार रहा था।
तभी अदिती ने कहा- “अब यूँ ही मुझे घूरता रहेगा या मसाज भी करेगा..."
अदिती की आवाज ने मयूर का ध्यान कहाड़ा। कहा- “मैं भी क्या करूं आप हो ही इतनी सुंदर की कोई भी देखता रह जाए...” मयूर ने जैसे अपने दिल की बात बोल दी और लग गया वापस मसाज करने।
अदिती को मन ही मन अपनी सुंदरता पर प्राउड महसूस हो रहा था।
मयूर के हाथों का जादू अदिती के बदन दर्द को ठीक कर रहा था। मयूर ने अदिती की गर्दन के दोनों तरफ अपने दोनों अंगूठे का दबाव दिया और अपने अंगूठों को रीढ़ के दोनों तरफ स्क्रोल करता हुआ नीचे लाया। अदिती की नंगी और कोमल कमर की स्किन का स्पर्श मयूर को तो रोमांचित कर ही रहा था और उधर अदिती के रोम-रोम में सनसनी फैल रही थी इस मसाज से, उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था की मयूर के हाथों में इतना बड़ा हुनर है।
मयूर अपना हाथ ज्यादा नीचे नहीं ले जा सकता था क्योंकी अदिती ने समीज पहनी हुई थी। मयूर ने अपना हाथ वापस ऊपर की तरफ स्क्रोल किया और गर्दन के पास में अपने हाथ और अंगूठे से मसाज करने लगा। अब वो अपनी हथेली से अदिती के कंधों से होता हआ कलाई का दर्द दूर कर रहा था। गर्मी के कारण दोनों को पशीना हो रहा था जिस वजह से मसाज में प्राब्लम हो रही थी।
अदिती - “तू चाहे तो अब फैन ओन कर दे मयूर, मुझे अब ठंड नहीं लग रही है...” अदिती बोली।
मयूर ने फैन ओन किया और अदिती के पाँव बकेट से निकालकर बकेट साइड में किया। फिर तौलिया लेकर अदिती के पाँव साफ किए।
मयूर- “टाँगों की भी मसाज करनी है?” तेल की कटोरी हाथ में लिए मयूर ने पूछा।
अदिती - "हाँ... करनी ही है। पूछ क्यों रहा है?" अदिती ने अपना रोब जमाते हुए बोला। फिर अपने लोवर की तरफ देखकर बोली- “अच्छा तुझे ये प्राब्लम देगा ना?"
मयूर- “हाँ इसके रहते कैसे पासिबल है..” मयूर ने जवाब दिया।
अदिती - “चल इसे भी तू ही निकाल दे..."
अदिती की बात सुनकर मयूर को यकीन नहीं हो रहा था की उसने जो सुना वो ही सही था ना- “क्या मैं?" मयूर ने कनफर्म करने के लिए पूछा।
अदिती ने एक आँख मारकर उसे हाँ का इशारा किया।
मयूर ने थ की ओर नजर डाली तो वहां एक जीन्स जैसा बटन और जिप थी। उसने अपनी उंगलियां को अदिती के पेट पर घुमाते हुए लोवर के वेस्टबंद में अपनी उंगलियों को घुसाया। अदिती की स्किन बहुत ज्यादा साफ्ट थी। उसने लोवर का बटन खोला और जिप के रन्नर को पकड़कर धीरे-धीरे नीचे करने लगा। थोड़ी सी जिप खुलने पर ही उसे रेड हाट कलर की पैंटी नजर आने लगी।
मयूर को हल्की सी हँसी आ रही थी तो अदिती ने उसका कारण पूछा।
मयूर - “आप लोगों के जिप का क्या इश्तेमाल है, ये सोचकर मुझे हँसी आ रही है..” मयूर ने हँसते हुए जवाब दिया।
मयूर की बात पर अदिती भी हँसने लगी और अपनी दो उंगलियां को दिखाते हुए बोली- “तुम लड़कों की तरह कुछ निकालने के लिए नहीं बल्कि ये तो डालने के लिए बनी है...”
मयूर को थोड़ा सर्पाइज हुआ, पर उसे पता था की अदिती उंगली करती है। वो अदिती की पूरी जिप खोल चुका था अब उसने लोवर को साइड में से पकड़ा और पैंटी के वेस्टबैंड को उससे अलग करते हुए नीचे तरफ स्क्रोल करने लगा। वो अपनी हथेली को अदिती की जांघे पर भी घुमाकर अदिती की कोमलता का मजा ले रहा था।
उधर अदिती को मयूर के हाथों का टच एक अजीब सा एहसास करा रहा था। अदिती का पूरा लोवर निकल चुका था। वो पैंटी में ही बेड पर लेट गई। वो ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे ये सब बिल्कुल नार्मल है। हाट रेड कलर की छोटी सी लेसी पैंटी पहनी हुई थी जो सिर्फ अदिती की चूत कवर कर रही थी। छोटी सी सफेद कलर की समीज जो सिर्फ उसके चूचे और थोड़ा सा पेट कवर रही थी साथ में रेड पैंटी में क्या गजब ही लग रही थी।
मयूर का लण्ड भी पूरा खड़ा हो चुका था। अपने दिल और दिमाग पर काबू करते हुए उसने तेल हाथ में लिया। हालांकी तेल ठंडा हो चुका था पर मयूर के हाथों की गर्मी ही काफी थी अदिती की रही सही थकान दूर करने के लिए।
अदिती बेड पर पीछे सरक के लेट चुकी थी। मयूर भी बेड पर बैठ गया और अदिती के दोनों पाँव को घुटनों से मोड़कर खड़ा कर दिया और मखमली टांगों की मसाज करने लगा। उसका ध्यान मसाज में बिल्कुल भी नहीं था। पाँव मोड़ देने की वजह से नंगी टांगों, जांघों और चूत का जो नजारा उसे दिख रहा था वो किसी का भी ध्यान भटका सकता था। अदिती की पैंटी बहुत ही ज्यादा टाइट थी इस कारण उसकी गुलाबी चूत का शेप रेड पैंटी में दिख रहा था और उसकी बड़ी सडोल गाण्ड के दोनों गोले भी नजर आ रहे थे।
मयूर को पाँव के पायंट प्रेस करना भी आता था। उसने अपना ध्यान मसाज में लगाया और अदिती का एक पाँव अपनी गोद में रखकर उसके पायंट प्रेस करने लगा।