Update:28
वहाँ बाहर चौक़ीदार ने दरवाज़ा खोला। कार अंदर पहुँची और दोनों नीचे उतरे। नमिता अपनी ज़िंदगी में पहला फ़ार्म हाउस देख रही थी। वह उसकी हरियाली और सुंदरता देख me कर दंग रह गयी। अंदर मकान में भी बहुत सजावट की हुई थी। फिर सुधाकर उसे पीछे एक स्विमिंग पूल दिखाया जो कि ऊपर से ही ढका हुआ था। सुधाकर उसको पीछे से जकड़ लिया और बोला: आज नंगे होकर नहाएँगे? ठीक है ना?
नमिता : छी आप भी ना, उलटे सीधे विचार कहाँ से लाते हैं।
सुधाकर उसकी गर्दन चूमते हुए और उसकी छाती दबाते हुए बोला: आऽऽहहह जाऽऽऽंन क्या मस्त गदरायी हुई हो । देखो मेरा लौड़ा भी तुम्हारी चूतरों के स्पर्श से ही कैसा पागल हो रहा है।
वह उसकी गाँड़ पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा।
सुधाकर: तुम्हें तैरना आता है?
नमिता: हाँ गाँव के तालाब में तैरती थी पर कई साल हो गए , पता नहीं अब तैर पाऊँगी कि नहीं।
सुधाकर: इंसान तैरना सीख जाए तो वह कभी नहीं भूलता।
नमिता: आऽऽऽहहह थोड़ा धीरे से दबायिये ना। यहाँ के नौकर कहाँ हैं?
सुधाकर: उनको सुबह ही मैंने कह दिया था की खाना वग़ैरह बनाकर चले जाना। वह अब शाम को आएँगे। यहाँ हम दोनों के बीच में इन कपड़ों के अलावा कोई नहीं है।
नमिता हँसने लगी और बोली: तो अब क्या करें?
सुधाकर: कपड़े उतारें और स्विमिंग करें।
नमिता: आप भी ना । स्विमिंग सूट नहीं है यहाँ? हम वो पहन लेते हैं।
सुधाकर: क्या यार तुम भी ना? अब स्विमिंग सूट की क्या ज़रूरत है? जब सिर्फ़ हम दोनों ही हैं यहाँ।
ये कहते हुए उसने उसको घुमाया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूमने लगा। नमिता भी उसका साथ देने लगी। जल्द ही उसकी जीभ नमिता के मुँह के अंदर आ गयी जिसे वह चूसने लगी। अब सुधाकर के हाथ उसकी चिकनी कमर को सहला रहे थे और फिर नीचे जाकर उसके गोल चूतरों को सहलाने लगे। नमिता की बुर भी गीली होने लगी। उसने भी हाथ बढ़ाकर पैंट के ऊपर से ही उसका लौड़ा पकड़ लिया और दबाकर मज़े से भरने लगी।
सुधाकर: रानी चलो ना कपड़े खोलो।
नमिता इठला कर बोली: आज तो आप ही खोलो मेरे कपड़े।
वह हँसते हुए बोला: ज़रूर , क्यों नहीं।
अब उसने नमिता की साड़ी खोल दी। फिर उसके हाथ उसके ब्लाउस पर थे और हुक खुलते चले गए । नमिता ने भी अपने हाथ उठाकर ब्लाउस उतारने में उसकी मदद की। सुधाकर अब उसकी उठी हुई बाहँ देखकर उत्तेजित हो गया, और उसकी बग़ल सूंघकर गरम हो गया और फिर वह वहाँ जीभ से चाटने लगा।
सुधाकर: आऽऽह रानी क्या मस्त गंध है तुम्हारे बदन की।
नमिता अब ब्रा और पेटिकोट में थी।
नमिता ने सुधाकर को कहा: अपने कपड़े भी तो उतारिए।
वह बोला: तुम ही उतार दो ना मेरी जान।
नमिता उसकी टी शर्ट उतारी और और पैंट की बेल्ट खोलकर पैंट उतार दी। अब उसका तगड़ा बदन और बालों से भरी छाती और मोटी मोटी जाँघों के बीच पूरी फूली ही चड्डी और उसमें लगा हुआ सफ़ेद प्रीकम देखकर नमिता की बुर ने तो पानी ही छोड़ना शुरू कर दिया। नमिता ने सोचा कि क्या मस्त मर्द है।
अब सुधाकर भी नमिता के पेटिकोट के नाड़े को खोला और उसकी पेटिकोट नीचे गिरा दिया और नमिता की गीली पैंटी देखकर सोचने लगा कि क्या सेक्सी औरत है , एकदम से चुदासि हो चली है। ब्रा और पैंटी में क्या मदमस्त दिख रही है।
अचानक़ नमिता ने उसे हैरान कर दिया , वह पानी में कूद गयी।
अब वह वहाँ से उसको बुलाने लगी। कमर भर पानी में वह तैरने लगी, और जल्दी ही अपनी लय पा ली। उसे तैरने में बड़ा मज़ा आने लगा। अब सुधाकर ने अपनी चड्डी उतार दी और अपना मोटा लम्बा लौड़ा हिलाते हुए पानी में छलाँग लगा दी।
वह तैरते हुए नमिता के पास पहुँचा और नमिता को बोला: अरे तुम तो बहुत अच्छा तैर लेती हो।
नमिता: जी आप भी अच्छा तैरते हो।
दोनों एक दूसरे के पास खड़े हो गए कमर भर पानी में और वह नमिता को भींचकर चूमने लगा। नमिता का हाथ उसकी पीठ पर से उसके बालों से भरे ठोस चूतरों पर आया और वह चौंक गयी कि वह नंगा था। अब वह अपना हाथ सामने लायी और उसके लौड़े को पकड़कर सहलाने लगी। वह भी नमिता की ब्रा का हुक खोलकर उसकी एक चूचि दबाते हुए दूसरी मुँह में लेकर चूसने लगा।उसकी ब्रा उसने बाहर फेंक दिया पूल के बाहर। नमिता की आऽऽह निकलने लगी। वह अब उसके लौड़े को ज़ोर से दबाकर मस्ती से भरने लगी। अब वह उछल कर पूल की दीवार पर बैठ गया और उसका मोटा काला लौड़ा नमिता के सामने ऊपर नीचे हो रहा था।
नमिता पानी में ही खड़ी होकर अपना मुँह खोला और उसके सुपाडे को अपने मुँह में ले ली और चूसने लगी। उसकी जीभ उसके पेशाब के छेद पर अठखेलियाँ करने लगी। वह अपनी जीभ उसके सुपाडे पर ऊपर से नीचे घुमा रही थी। सुधाकर आह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म कर उठा।
फिर उसने उसके बड़े बॉल्ज़ सहलाते हुए उसके लौड़े को चूसना शुरू किया। सुधाकर भी अपने हाथ को उसकी नंगी चूचियों पर रखकर दबाने लगा। नमिता के ऊपर नीचे होते सिर को देखकर वह मस्त हो रहा था। उसकी उँगलियाँ नमिता के बड़े निपल्ज़ को दबा रही थीं। नमिता अब और गरम हो गयी थी और उसकी बुर उसको तंग कर रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने नमिता को बाहर आने को कहा। वह बाहर आयी और सुधाकर के पास आयी जो पूल के बग़ल में रखे एक लकड़ी के तख़्त पर जिसमें कुशन भी था लेटा हुआ था। वह अपना लौड़ा सहला रहा था। नमिता के आते ही वह उठा और नमिता को उसपर लिटा दिया और नीचे आकर उसकी पैंटी खोलने लगा। अब उसकी मादक बुर उसकी नज़रों के सामने थी।
इस तरह खुले में ऐसी नंगी लेटी हुई नमिता बहुत ही कामुक लग रही थी। उसने अपना मुँह उसकी जाँघों के बीच डाल दिया और उसकी बुर को चूमते हुए चाटने लगा। नमिता की सिसकारियाँ गूँजने लगीं।
अब वह नमिता की जाँघों के बीच बैठ कर उसकी चुदायी में लग गया। नमिता भी उसका साथ अपनी कमर उछलके दे रही थी। फ़च फ़चऔर आऽऽहहहह ह्हाऽऽऽऽयह ह्म्म्म्म्म्म्म की आवाज़ें वहाँ भर गयी थी।
सुधाकर पूरे जोश में आकर नमिता की दोनों टाँगें उसके सिर की ओर उठाकर धमासान चुदायी करने लगा। अब तो नमिता की आहें गूँजने लगीं। आऽऽऽऽऽऽहहहह मारोओओओओओओओ और ज़ोर से चोदोओओओओओओओओओओ आऽऽऽऽऽहहहह मज़ाआऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ गयाआऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य मैं तो गयीइइइइइइइइ अब वह झड़ने लगी तभी ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म आऽऽह्ह्ह्ह्ह करके वह भी झड़ गया।
जब वह उसके ऊपर से उठा तो उसने देखा कि उसकी बुर से उसका गाढ़ा सफ़ेद रस अब भी बाहर गिरे जा रहा था।
अब नमिता ने आऽऽह करके अपनी टाँगें सीधी की और बोली: आऽऽह आज क्या हो गया था आपको ? बाप रे क्या ज़बरदस्त चुदायी की है आपने। मेरी तो अभी भी साँस फूल रही है।
सुधाकर उसकी चूचियाँ दबाकर बोला: तुम माल ही इतनी मस्त हो कि साला लौड़ा शांत होने का नाम ही नहीं लेता।
नमिता हँसते हुए उठी और बाथरूम में चली गयी और बाद में वहाँ से एक तौलिया लपेट कर आयी और बोली: हाय मैं तो भूल ही गयी कि मेरे पास कपड़े तो है हीं नहीं। मेरी ब्रा और पैंटी भीग गयी है।
सुधाकर ने उसका तौलिया खिंचा और उसको नंगी करते हुए बोला: तुम्हें मेरी बीवी के कई कपड़े मिल जाएँगे। तुम्हें कुछ पसंद आएँ तो ले भी जाना। अब दोनों नंगे ही वापस मकान की तरफ़ चले। नमिता आगे चल रही थी और सुधाकर उसके मटकते हुए चूतरों का मज़ा ले रहा था ।
वह बोला: क्या मस्त गाँड़ है किसका लौड़ा साला खड़ा नहीं होगा।
नमिता मस्ती से और जानबूझकर ज़ोर ज़ोर से गाँड़ मटकाने लगी। सुधाकर हँसते हुए अपने लौड़े को हिलाकर बोला: क्या बच्चे की जान लोगी?
नमिता: ये और बच्चा , साला अंदर घुसता है तो जैसे कलेजा मुँह में आता है।
अब दोनों हँसते हुए बेडरूम में आ गए थे। सुधाकर ने उसको एक आलमारी खोल कर दिखाई और उसमें रखे कपड़े दिखाकर बोला: जान, जो कपड़ा चाहे ले लो और पहनो। यहाँ पड़े पड़े ख़राब ही होंगे। अब नमिता ख़ुद ही आलमारी देखने लगी। उसने एक से एक सेक्सी नायटी और ब्रा और पैंटी भी थीं।
सुधाकर मुस्कुरा कर बोला: सभी आलमारी देखो , एक से एक समान पड़ा है।
नमिता ने अब दूसरी आलमारी खोली तो उसने आदमी के कपड़े थे। वह सुधाकर के ही थे। अगली आलमारी का समान उसे समझ नहीं आया और वह बोली: ये सब क्या है?
वह बोला: ये सेक्स का मज़ा बढ़ाने की चीज़ें हैं।
नमिता वहाँ चाबुक , रबर के दस्ताने , डिल्डो, कई चमड़े की बेल्ट्स वग़ैरह देखी।
उसे याद आया कि कई बार राज का पापा उसको ऐसी ही बेल्ट से बाँध कर उसको चोदता था।
सुधाकर: चलो अब कुछ खा लेते हैं। नौकर खाना बना कर गया है।
वो दोनों नंगे हीं खाना खाए। नमिता ने राज को फ़ोन किया और बोली: आज तुम अकेले ही खाना खा लो। मैं नहीं आ पाऊँगी।
बाद में दोनों बिस्तर पर लेटे थे तभी नमिता बोली: आप कल ही अमेरिका जा रहे हैं?
सुधाकर उसकी चूची दबाते हुए बोला: हाँ। क्यों क्या हुआ?
नमिता ने उसके नरम लौड़े को सहलाते हुए कहा: ये फ़ार्म हाउस तो ऐसे ही ख़ाली रहेगा जब तक आप और मनीष वापस नहीं आते?
सुधाकर: हाँ , क्या बात है बोलो ना?
नमिता: कल राज के पेपर’s ख़त्म हो रहे हैं। अगर आप इजाज़त दें तो मैं उसे यहाँ ले आऊँ दो तीन दिन के लिए। उसने भी ऐसी शानदार जगह कभी नहीं देखी है।
सुधाकर: हाँ हाँ क्यों नहीं, मैं तो राज को भी मनीष की तरह अपना बेटे सा ही मानता हूँ। ज़रूर ले आओ उसको और ख़ूब घूमो फिरो। इसके पीछे एक जंगल भी है वहाँ भी पिकनिक कर सकते हो। चाहो तो एक दो परिवार और बुला लेना। मेरे नौकर को मैं बोल दूँगा वह सब इंतज़ाम कर देगा। उसका मोबाइल नम्बर भी तुमको दे दूँगा।
नमिता बहुत ख़ुश हो गई और बोली: आपने वैसे भी मेरे ऊपर कई अहसान किए हैं। मैं आपका ये अहसान कभी नहीं भूलूँगी।
सुधाकर ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया और उसके होंठ चूमते हुए उसकी चूतरों को दबाते हुए बोला: जान, ख़बरदार आज के बाद ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया तो। यह सही है की मैं कई लड़कियों को चोदता हूँ अपर तुम मेरे लिए स्पेशल हो।
नमिता ने भी उसकी चौड़ी छाती में अपना सिर छुपा लिया और उसके लौड़े को सहलाकर खड़ा कर ली।
अब नमिता उठी और उसके लौड़े को बड़े प्यार से चूसने लगी ।
सुधाकर भी उसकी चूचियाँ दबाते हुए मज़े से अपना चूसवा रहा था।
अब उसने नमिता को कहा : चलो ज़रा कुतिया बनो मैं पीछे से चोदूँगा ।
नमिता चौपाया बन गयी और अपना पिछवाड़ा उठा दी । सुधाकर उसके चूतरों को चूमा और एक दो थप्पड़ भी मारा और फिर अपना लौड़ा बुर में लगाकर उसको अंदर पेल दिया। अब नमिता ने भी अपनी गाँड़ पीछे करके उसका पूरा लौड़ा निगल लिया ।
अब ज़बरदस्त चुदायी का माहोल बन ही चुका था। उसने नमिता की ठुकाई चालू की और नमिता भी गाँड़ हिला हिला कर उसका पूरा साथ देने लगी। क़रीब आधे घंटे चली तूफ़ानी चुदायी ने पलंग की भी हालत ख़राब कर दी। वह भी पूरे टाइम चूँ चूँ ही करता रह गया। इसके अलावा वहाँ आऽऽह और चोदोओओओओओ राजाआऽऽऽ फाड़ दोओओओओओओओ नाआऽऽऽ और साथ ही ले सालीइइइइइइइइ और लेएएएएएए आह्ह्ह्ह्ह। हम्म्म्म्म्म्म वग़ैरह आवाजें भी गूँज रही थीं ।
फिर मैं गाइइइइइइइइइइइइ और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैंभीइइइइइइइइ। के साथ दोनों स्खलन का मज़ा लेते हुए एक दूसरे में समा से गए।
बाद में साफ़ सफ़ाई के बाद नमिता किचन में गयी और चाय बना लायी जो दोनों नंगे ही पिए। सुधाकर ने उसे अपनी गोद में बिठाकर ही चाय पी।
सुधाकर: जान एक बात बोलूँ? बुरा तो नहीं मानोगी?
नमिता: बोलो ना ?
वह: शादी कर लें क्या हम?
नमिता: आज से चार साल पहले भी आपने यही पूछा था तब भी मैंने कहा था की हमारे बच्चे इसे किस तरह से लेंगें पता नहीं।
सुधाकर: देखो उस समय वो छोटे थे अब समझदार हो गए हैं। शायद मान जाएँ?कोशिश करूँ क्या? मनीष से बात करूँ? तुम भी राज से बात करो।
नमिता: पता नहीं हिम्मत भी होगी कि नहीं बात करने की। और आपकी बेटी जो अपनी नानी के यहाँ पढ़ रही है? वह मान जाएगी?
सुधाकर: पता नहीं उससे तो मैं साल में दो तीन बार ही मिल पाता हूँ। अब कह रही है कि यहाँ आकर रहेगी मेरे और मनीष के साथ और कॉलेज भी यहीं पढ़ेगी।
नमिता: फिर उसकी राय भी ज़रूरी होगी।
वह नमिता की चुचि सहलाते हुए बोला: सच कितना अच्छा होता अगर हम सब साथ रहते!
नमिता: हाँ ये तो है, चलो देखते हैं क्या होता है भविष्य में ।
फिर दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार किए और कपड़े पहनकर बाहर आए । सुधाकर ने नमिता को नौकर का नम्बर दे दिया और उसके सामने ही फ़ोन करके सब बता दिया। बाहर आकर उसने चाबी नमिता को दे दी और दरबान को भी बता दिया कि ये लोग कल ही आएँगे दो तीन दिनों के लिए।
अब कार में भी वह नमिता के हाथ को सहलाता रहा और फिर नमिता को उसके घर के पास वाले चौक पर छोड़ कर वह चला गया। नमिता भी अपने घर को चल पड़ी। वह सोच रही थी कि राज को कल ही सब बताऊँगी और सर्प्राइज़ गिफ़्ट दूँगी। उसकी अपनी माँ से पहली चुदायी एक शानदार फ़ार्म हाउस में होगी और उसके लिए यादगार बन जाएगी। यह सोच कर घर में घुसते हुए वह मुस्कुरा उठी।
नमिता घर पहुँची तो सीधे अपने कमरे में गयी और वहाँ उसने अपने कपड़े उतारे और नहाकर ब्लाउस और पेटिकोट पहना। सुधाकर के फ़ार्म हाउस से वह बिना ब्रा और पैंटी के ही आयी थी पर साड़ी को अच्छे से लपेटकर चौक से घर तक वह आराम से आ गयी ।
अब वह शाम की चाय बना कर राज के कमरे में गयी और उसे बहुत ध्यान से पढ़ते देख कर वह ख़ुशी से भर उठी।
नमिता ने उसे प्यार करते हुए कहा: बेटा खाना खा लिया था?
राज: हाँ माँ खा लिया?
फिर वह उसकी कमर में हाथ डालकर उसके नरम कमर और पेट के स्पर्श का आनंद लेने लगा। और बोला: आप आज इतना व्यस्त कहाँ हो गईं ?
नमिता: वो वो ऑफ़िस में आज ज़्यादा ही काम आ गया था। असल में सुधाकर कल अमेरिका जा रहे हैं तो काफ़ी काम निपटाना था।
राज ने अब उसके चूतरों को पेटिकोट के ऊपर से सहलाया और बोला: ओह तो फिर कल से आपकी छुट्टी?
नमिता: हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो।
राज ने अपनी पास खड़ी नमिता का पेटिकोट ऊपर किया और उसके नंगे चूतरों को सहलाते हुए बोला: आह माँ तो इसका मतलब तीन दिनों की आपकी भी मेरे साथ छुट्टी? वाह मज़ा आएगा फिर तो पूरे दिन चुदाई करेंगे।
ये कहते हुए उसने उसके चूतरों के बीच से उसकी बुर में भी ऊँगली कर दी।
नमिता : आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या करता है? हाथ निकाल। नालायक है एकदम। बदमाश कहीं का।
ये कहकर उसको धक्का देकर अलग दूर खड़ी हुई और अपना पेटिकोट नीचे कर ली।
नमिता अब बिस्तर पर बैठ कर चाय पीने लगी।
नमिता: बेटा पूरा कोर्स पढ़ लिया? तय्यारी हो गई?
राज: हाँ माँ अभी दोहराना भी चालू कर दिया।
नमिता: चलो आज अच्छी तरह से पढ़ लो और कल से तो तुम्हारी तीन दिन की छुट्टी हो ही जाएगी।
राज: हाँ माँ चलो अब आप जाओ नहीं तो मैं फिर से मस्ती के मूड में आ जाऊँगा। ये देखो खड़ा होने लगा है ।वह अपने लौड़े को दिखा कर बोला।
नमिता उठी और उसको चूमते हुए बाहर चली गयी।
किचन का काम ख़त्म करके वह TV देख रही थी। तभी सुषमा का फ़ोन आया और वह बोली: क्या हाल है ?
सुषमा: बस दीदी सब ठीक है। आप कैसी हैं?
नमिता: मैं तो ठीक हूँ। तुम्हारी ठुकाई कैसी चल रही है? दोनों लगे हुए हैं क्या?
सुषमा: अरे राजन तो टूर पर है बस अभी राजू का ही राज है और वह तो बस चढ़ा ही रहता है मेरे ऊपर ।
नमिता: ओह, कितने राउंड कर लेता है?
सुषमा: वह तो पाँच बार झड़ता है और मुझे भी दो तीन बार तो झड़वा ही लेता है। और एक बार तो रोज़ गाँड़ भी मारता ही है।
बाक़ी समय चूसवाते रहता है।
नमिता: ह्म्म्म्म्म तो तेरे तो मज़े ही हैं।
सुषमा: हाँ वो तो है पर आज आपकी याद आ रही थी। हम लोग भी तो काफ़ी समय से मज़ा नहीं किए। मुझे तो आपकी चपटी की बहुत याद आ रही है।
नमिता : मुझे भी तेरी चपटी को चूमने का मन कर रहा है।
सुषमा: कल तो जब राजू मुझे चोद रहा था तो उसके पापा दूसरे शहर में अपने होटेल के कमरे से स्काइप पर हमें देख रहे थे और वहाँ ख़ुद अपना हिला रहे थे। सच बड़ा उत्तेजक दृश्य था।
नमिता: आह्ह्ह्ह्ह्ह उनको तो मज़ा ही आ गया होगा। वो तो हमेशा तुमको चुदवाते हुए देखना चाहता था।
सुषमा: हाँ यही बात है। वह बहुत उत्तेजित हो गए थे।
नमिता: चल मज़ा कर तू तो।
सुषमा: तेरा कहाँ तक पहुँचा? राज ने चोद लिया क्या?
नमिता: नहीं रे कल उसका पेपर ख़त्म होगा तो फिर तीन दिन की छुट्टी होगी उसकी , तभी लगता है कि वह करेगा मेरे साथ।
सुषमा: तो कल चुदेगी उससे ? चलो हैपी फ़किंग विध युअर सन।
गुड नाइट।
नमिता भी हँसते हुए बोली: गुड नाइट।
फिर वह राज को खाने के लिए आवाज़ दी।
जब दोनों खाना खा रहे थे तब राज बोला: माँ बताओ ना कल क्या क्या करेंगे?
नमिता: क्या क्या का मतलब? कहना क्या चाहते हो?
राज: अरे कैसे चुदायी करेंगे?
नमिता: ओह जैसे सारी दुनिया करती है।
राज: माँ आप भी ना कुछ ठीक से बताती ही नहीं।
नमिता: चल अब फ़ालतू की बातें छोड़ और पढ़ने बैठ। उलटा सीधा सोचेगा तो कल का पेपर गड़बड़ हो जाएगा।
राज उठते हुए बोला: ठीक है माँ अब जाता हूँ पढ़ने। और हाँ आज रात को नहीं आऊँगा मेरा बहुत कोर्स दुहराना है।
वह नमिता के पास आकर उसको प्यार किया और गुड नाइट बोलकर चला गया । नमिता ने भी उसे प्यार किया और गुड नाइट करके बिदा किया।
रात को और कुछ नहीं हुआ।
सुबह नमिता ने राज को चाय दी और पूछा: बेटा तय्यारी हो गयी?
राज: हाँ माँ हो गयी।
नमिता: चल फिर फ़्रेश हो जाओ। मैं नाश्ता बनाती हूँ।
नमिता ने उसे प्यार किया और किचन में आ गयी।
बाद में नाश्ता कराके राज को उसने दहीं शक्कर दे कर बिदा किया।
राज ने जाते हुए माँ से प्यार किया और अचानक उसकी पेटिकोट के ऊपर से उसकी बुर को दबा दिया और बोला: माँ आज ये तो ले के ही रहूँगा। आज कोई बहाना नहीं सुनूँगा।
नमिता: अच्छा बेटा जो चाहे कर लेना। बस अभी पूरे ध्यान से पेपर देना। चल अब इसे छोड़ ।
नमिता ने उसका हाथ अपनी बुर् से हटाते हुए कहा: अच्छे से पेपर देना। जा ऑल दी बेस्ट।
राज उसका मुँह चूम कर चला गया।
अब नमिता नहाने चली गयी और फिर तय्यार होकर बाज़ार गयी और कुछ खाने पीने का सामान ख़रीदा और फिर घर आकर एक छोटा सा सूटकेस निकाली और अपने और राज के दो जोड़ी कपड़े और अंडर गर्मेंट्स वग़ैरह रखा । वैसे फ़ार्म हाउस में तो सब मिल जाएगा पर वह कुछ तय्यारियाँ कर ही लेना चाहती थी।
जब पूरी तय्यारी हो गयी तो वह थोड़ा आराम करने लगी।
अब नमिता ने सोचा कि आज ऑफ़िस तो जाना नहीं है क्या किया जाए?
तभी उसको सुषमा की याद आयी , राजन तो टूर पर था और शायद वह अकेली ही होगी ,राजू तो स्कूल में होगा।
उसने सुषमा को फ़ोन लगाया।
सुषमा: हेलो क्या हाल है?
नमिता: ठीक हूँ बस साली चपटी खुजा रही है।
सुषमा: तो आ जाइए ना अभी उसकी खुजली मिटा देती हूँ।
नमिता: सच? अकेली है क्या?
सुषमा: बिलकुल अकेली हूँ।
नमिता : अभी आयी।
नमिता ने डिल्डो निकाला और पर्स में रखा और मन ही मन मुस्करायी कि आज उसको इस नक़ली लौड़े का मज़ा भी देगी।
नमिता सुषमा के घर मैं घुसी और सुषमा अभी बस एक तौलिए में ही थी, वह अभी नहा के आयी थी।
नमिता: अभी नहायी हो?
सुषमा: हाँ नहा कर बाहर आयी तो आपका फ़ोन आया तो सोचा कि कपड़े क्यों पहनूँ। उसने आँख मारते हुए कहा ।
नमिता मुस्कुराते हुए उसका तौलिया खिंची और उसका नंगा और थोड़ा गीला सा गोरा चमकता बदन देख कर मस्ती से बोली: यार तू तो रेग्युलर चुदायी से अब मस्त भरने लगी है। तेरे मम्मे भी तेरे चोदू बेटे ने चूस चूस के और बड़े कर दिए है ।
सुषमा: हा हा जल्दी ही आपसे भी बड़े हो जाएँगे।
अब नमिता ने अपनी बाँह फैलायी और सुषमा उसकी बाहों में आ गयी और उनके होंठ एक दूसरे में जैसे समा गए। पूरे ज़ोर से वो एक दूसरे के होंठ चूस रहीं थीं। उनकी जीभ भी एक दूसरे के मुँह में घुसी जा रही थीं। दोनों के हाथ अब एक दूसरे की चूचियों पर आ गए।
सुषमा: आऽऽहहह कपड़े खोलिए ना दीदी प्लीज़।
नमिता हँसते हुए अपने कपड़े निकाल कर पूरी नंगी हो गयी।
अब नमिता उसको बिस्तर पर गिरा दी और सुषमा पर चढ़ गई और फिर से चुम्बन की लम्बी प्रक्रिया चालू हुई। चूचियाँ दबाते हुए सुषमा ने अपने मुँह को नीचे करके नमिता की एक चूचि अपने मुँह में भर ली और चूसने लगी। उसका दूसरा हाथ नमिता की पीठ पर घूम रहा था।
नमिता अब सुषमा की दोनों चूचियाँ दबाये जा रही थी। वह अपनी बुर सुषमा की बुर से रगड़े जा रही थी। सुषमा ने अब उसके चूतरों को दबाना चालू किया। उसकी ऊँगली उसके दरार में जाकर उसकी गाँड़ के छेद को सहला रही थी। फिर उसकी उँगलियाँ नीचे जाकर उसकी बुर का गीलापन का अहसास भी कर रही थी। नमिता की आऽऽऽहहह निकल गयी। अब वह नीचे आकर उसकी चूचि चूसने लगी। फिर नीचे होकर उसके पेट और कमर को चूमंते हुए उसकी जाँघों को चूमने लगी। फिर अपनी जीभ से उसकी जाँघ और बुर के जोड़ को चाटा और सुषमा की आऽऽह्ह्ह्ह्ह दीदीइइइइइ निकल गयी।
नमिता अब अपनी जीभ से उसकी बुर के बाहरी फाँकों को चाटने लगी।सुषमा आऽऽऽहें भरने लगी। अब नमिता उसकी फाँकों को फैलायी और अंदर के हिस्से में जीभ डाल कर उसको चाटने लगी। जैसे ही उसकी जीभ उसके clit से टकराती सुषमा की सिसकी निकल जाती। अब सुषमा ने अपनी टाँगें ऐसे उठा ली और फैला भी ली,मानो चुदवा रही हो। नमिता अब मज़े से उसकी बुर में दो ऊँगली डाल दी और अपनी जीभ से उसके clit के आसपास के हिस्से को कुरेदने लगी।
अब वह आऽऽऽऽऽऽऽह करने लगी ।
अचानक नमिता उठी और अपने पर्स से उसने ८ इंचि डिल्डो निकाला और उसको मुँह में लेकर थूक से गीला की और उसके स्विच को चालू की। अब ह्म्म्म्म्म्म की आवाज़ के साथ वह हिलने लगा। सुषमा आँखें फाड़े यह देख रही थी , वह बोली : दीदी इतना बड़ा क्या अंदर डालोगी? मेरी फट जाएगी।
नमिता: हा हा क्या राजन का और राजू का इतना बड़ा नहीं है?
सुषमा: नहीं दीदी राजन का तो ६ इंच का है और राजू का ७ इंच का । पर ये तो बड़ा मोटा और लंबा है।
नमिता हँसते हुए बोली: राज का इतना ही बड़ा है।
सुषमा: सच? इतना बड़ा? आपको दुखेगा नहीं अंदर लेने में ?
नमिता: वह तो आज पता चलेगा जब अंदर लूँगी।
सुषमा: आऽऽह दीदी आज आप भी अपने बेटे से चुदोगी?
जानती हो मैं बहुत ख़ुश हूँ कि मैं अपने बेटे से चुदवा रही हूँ। हम दोनों ही बहुत मज़े से मस्ती करते है । मेरे जीवन में इतनी ख़ुशी पहले कभी नहीं आयी जितना अब अपने बेटे से चुदवाने के बाद आयी है।
नमिता: आह चल अब इसे अंदर ले।
ये कहते हुए उसने डिल्डो को उसकी बुर के मुँह पर रखा और धीरे से उसका सुपाड़ा अंदर करके वाइब्रेटर चालू कर दी।
सुषमा आऽऽहहह दीदीइइइइइइइइ चिल्लायी।
अब नमिता ने आधा लौड़ा उसके बुर के अंदर ठेल दिया और सुषमा हाय्य्य्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइइइ कर उठी।
नामित अब धीरे से पूरा लौड़ा अंदर कर दी और सुषमा अब अपनी कमर उछालके चुदायी का मज़ा लेने लगी।
नमिता ने अपनी एक ऊँगली में थूक लगाया और उसकी गाँड़ में डाल दिया और अब सुषमा डबल चुदायी से मस्त हो कर आऽऽऽहहहह चोदोओओओओओओओओ आऽऽऽहहह फाड़ दोओओओओओओओ चिल्लाने लगी। नमिता ने झुक कर उसकी चूचियाँ चूसीं और सुषमा बहुत उत्तेजित होकर आऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह हाय्य्य्य्य्य्य्य करके झड़ने लगी।
फिर नमिता ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
सुषमा भी लस्त होकर पड़ी थी।
अब नमिता उसके पास लेट गयी और उसके बदन में हाथ फेरते हुए बोली: कैसा लगा मेरा लौड़ा ?
सुषमा: बहुत बढ़िया। कहाँ से मिला आपको?
नमिता: मेरे पति लाए थे मेरे लिए विदेश से । कहते थे मेरा तो इतना बड़ा नहीं है पर अगर तुम्हें बड़े लौड़े से चुदवाना हो तो ये तुम्हें मज़ा देगा। वो कई बार ख़ुद भी मुझे इससे मज़ा देते थे।
सुषमा: ओह कभी तुम्हें ये तो नहीं कहा कि वो तुमको किसी और से चुदता देखना चाहते थे? जैसे मेरे पति चाहते थे और अब मुझे राजू से चुदते देख कर मज़े लेते हैं।
नमिता उसकी चुचि चूमते हुए बोली: नहीं ऐसा तो कभी नहीं कहा। अच्छा और बताओ तुम तीनों का कैसा चल रहा है।
सुषमा: मुझे तुमको एक बात बतानी है। जैसे हम दोनों बाई सेक्शूअल है ना ,वैसे ही आजकल राजन और राजू भी बाइसेक्शूअल हो गए हैं।
नमिता हैरानी से : वो कैसे?
पिछले दिनों मैं जब शाम को बाज़ार गयी थी तो थोड़ी देर हो गयी थी।हम सबके पास घर की एक एक चाबी है। जब मैं आयी
तो इनको मेरे आने का पता नहीं चला। मैंने देखा कि ये दोनों अपने लोअर नीचे किए हुए थे और एक दूसरे का लौड़ा हिला रहे थे। मैं चुपचाप देखती रही। फिर राजन झुके और राजू का लौड़ा चूसने लगे। मैं हैरान रह गयी। मैंने पूछा कि क्या कर रहे हो आप दोनों?
दोनों थोड़ा सा हड़बड़ाए जैसे चोरी पकड़ी गयी हो पर बाद में बोले कि मेरा इंतज़ार कर रहे थे और राजन ने मुझे कहा कि आओ मेरा लौड़ा चूसो, मैं जब चूसने लगी तो वह ख़ुद राजू का चूसने लगे। राजू भी मस्ती से मेरी चूचि दबाते हुए मज़ा ले रहा था।
नमिता: ओह तो अब पूरा परिवार सब तरह का मज़ा ले रहा है।
नमिता : अच्छा ये बताओ कि तुम्हारी उनके साथ की दिनचर्या क्या है?
सुषमा भी उसकी चूचि सहलाते हुए बोली: तुम्हें तो पता ही है कि हम तीनों एक साथ सोते हैं और वो भी पूरे नंगे। सुबह वह पहले उठता है और हमारे लिए चाय बनाता है। वह पहले अपने पापा को उठाता है और चाय देता है। मैंने देखा है कि राजन चाय पीने के पहले उसका लौड़ा चूमता और चूसता है। मैं सोने का नाटक करती हूँ। फिर वह मुझे उठाता है और मैं भी उसका थूक लगा लौड़ा चूसती हूँ। फिर चाय पीने के बाद हम फ़्रेश होते हैं। उस समय मुझे दोनों का लौड़ा खड़ा ही दिखता है। अब वो मेरे ऊपर चढ़ाई करते हैं। एक चोदता हैं दूसरा चूस्वाता है।फिर दूसरा भी चोदता है। इस तरह सुबह ही एक राउंड हो जाता है।
नमिता: ओह शुरुआत ही दिन की चुदायी से ही होती है।फिर उसके बाद? उसने सुषमा के चूतरों को दबाते हुए कहा।
सुषमा: राजन तो ऑफ़िस चला जाता है।राजू बाद में जाता है।
नाश्ता करने के बाद एक बार फिर मुझसे चिपट कर प्यार करता है और या तो मुझे चोदता है और अगर मेरा मूड ना हो तो अपना लौड़ा चूसवाता है। वह दोपहर को आता है और आते ही मुझे चोदता है, दो दिनों से तो दोपहर को वह गाँड़ ही मारता है।
फिर शाम को राजू फिर या तो चूसवाता है या चोदता है । रात को सोने के पहले वह और राजन मेरी ज़बरदस्त चुदायी करते हैं । वैसे आजकल वह टूर पर हैं तो ये अकेला ही लगा रहता है ,जो कि उसका पापा भी स्काइप पर देखते है, जैसे कि मैंने कल बताया था। इस तरह कई बार हो जाता है हम लोगों का ।
नमिता हँसते हुए बोली: यार तेरे तो मज़े हैं। दो दो लौड़े खा रही है। तेरी बातों ने मुझे गरम कर दिया है आ मुझे भी ठंडा कर दे।
सुषमा हँसते हुए उठी और उसकी बुर पर मुँह डालकर चूमने और चूसने लगी ।नमिता भी आऽऽहहह करने लगी। थोड़ी देर बाद सुषमा ने उसकी बुर में तीन उँगलियाँ डाली और उसके clit को जीभ से रगड़ते हुए , उँगलियाँ अंदर बाहर करने लगी। नमिता भी चूतरों को उछालकर आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह करके जल्द ही झड़ गयी।
थोड़ी देर तक एक दूसरे को प्यार करने के बाद वो अलग हुई और बाथरूम में एक साथ गयीं। सुषमा कोमोड पर बैठ कर मूती और फिर नमिता भी मूति । अब सुषमा ने नीचे झुक कर नमिता की बुर और गाँड़ को को साबुन से धोया और फिर हैंड शॉवर से धोकर साफ़ किया। फिर नमिता ने उसकी बुर और गाँड़ साफ़ की।
सुषमा: जानती हो राजू को कई बार मेरे साथ नहाना भी होता है। वह बहुत उत्तेजित हो जाता है और यहीं इस दीवाल के सहारे मैं आगे को झुक जाती हूँ और वो पीछे से मेरी चुदायी करता है।
नमिता हँसने लगी और बोली: तुम हो ही सेक्सी वह भी क्या करे?
फिर दोनों बाहर आए और उन्होंने कपड़े पहने और अब नमिता ने डिडलो अपने पर्स में रखा और बोली: चलती हूँ , बहुत मज़ा आया आज तेरे साथ।
अब दोनों एक बार फिर से चिपक गयीं और चुम्बन की लम्बी प्रक्रिया के बाद वह दोनों अलग हुईं और नमिता अपने घर चली गयी।
घर आकर नमिता ने अपने कपड़े बदले और बाहर जाने के लिए तय्यार हुई। उसने हल्का सा मेक अप भी किया । वह आज राज को बहुत सेक्सी दिखना चाहती थी। उसने स्लीवलेस ब्लाउस पहना। अंदर ब्रा और पैंटी भी बड़ी सेक्सी थी। फिर उसने एक सुंदर सी साड़ी पहनी। अब शीशे में अपने आप को देखा और सोची कि हाँ अभिसारिका तय्यार है अपने साजन से मिलन के लिए। वह यह सोच कर मुस्कुरा उठी।
तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी। वो जानती थी कि राज घर के अंदर आ गया है। वह कमरे से बाहर निकली --
To be continue