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जब इत्मीनान से खंगाला ख़ुद को,
थोडा मैं मिला और बहुत सारे तुम...
थोडा मैं मिला और बहुत सारे तुम...
Shukriya niks bhai,,,,,,,Bahut ghera![]()
Waah kya baat hai,,,,,खत जो मैंने लिखा इंसानियत के पते पर
डाकिया ही चल बसा शहर ढूंढते -ढूंढते
Bahut khoob bhai,,,,,वहाँ से है मेंरी हिम्मत की इब्तिदा वल्लाह
जो इंतिहा है तेरे सब्र आज़माने की

Waah kya baat,,,,,जरा सा ख़ामोश रह कर,
आजमा लिया मैने सबको