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Shukriya bhaiWaaah bahut khoob nik bhai,,,,,
Shukriya bhaiWaaah bahut khoob nik bhai,,,,,
bahut bahut shukriya itni tareef ke liyeबहोत ख़ुब , क्या बात कही है , तारीफ़ के लिए लफ्ज़ नहीं हैं , .... बस पढ़ती जाती हूँ , पढ़ती जाती हूँ ,....

Greattt bro. Such a beautiful poetry.एक उम्र वो थी कि,
जादू में भी यक़ीन था.
एक उम्र ये है कि,
हक़ीक़त पर भी शक़ है



आप की खा़तिर अगर हम लूट भी लें आसमाँ,
क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के।
Kya baat bahut khuubअना कहती है इल्तेजा क्या करनी,
वो मोहब्बत ही क्या जो मिन्नतों से मिले।

ShukriyaGreattt bro. Such a beautiful poetry.![]()
Shukriya bhai,,,,Kya baat bahut khuub![]()
Bahut khoob,,,,," रुतबा " तो खामोशियों का होता है … "अलफ़ाज़ "तो बदल जाते है लोगों को देखकर…