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rajaji420

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सोनी 46 साल की थी। उसकी गोरी त्वचा पर उम्र की कुछ लकीरें थीं, पर उसका भरा हुआ, थोड़ा चबी बदन उसे अभी भी आकर्षक बनाता था। उसकी ब्रा का साइज़ 34D था, जिससे उसकी बड़ी चूचियाँ हमेशा भारी और उभरी हुई दिखती थीं, और पैंटी का साइज़ 90 सेमी था, जो उसकी मोटी जाँघों और गोल नितंबों को ढकता था। सात महीने पहले उसके पति की मृत्यु हो गई थी, और पिछले दो साल से उसकी ज़िंदगी में कोई मर्द नहीं था। वो अपनी इच्छाओं को दबाकर रखती थी, कभी किसी से ज़िक्र नहीं करती थी। लेकिन उसका भतीजा, 25 साल का राहुल, जो अब शहर में रहता था और कभी-कभार गाँव आता था, उसकी चुप्पी को भाँप लेता था। दोनों के बीच सालों से एक अजीब-सी केमिस्ट्री थी—नज़रों का खेल, हल्के-हल्के स्पर्श, और वो मौन जो बहुत कुछ कह जाता था।राहुल को याद था कि सोनी नींद में कितनी संवेदनशील थी। कई बार उसने रात को चुपके से उसके कमरे में जाकर उसकी भारी चूचियों को हल्के से दबाया था, उसकी चूत को साड़ी के ऊपर से सहलाया था, और उसकी मोटी जाँघों को रगड़ा था। हर बार सोनी की चूत हल्की-हल्की गीली हो जाती थी, साड़ी और पेटीकोट तक नमी पहुँच जाती थी, पर वो जागती नहीं थी। एक बार तो उसने उसकी जाँघों को मसाज करने की हिम्मत की थी, और सोनी बस नींद में हल्की-सी करवट बदलकर चुप रही थी। राहुल जानता था—सोनी को नींद में छूने से उसका भरा हुआ शरीर जवाब देता है, भले ही वो मुँह से कुछ न कहे।

एक रात राहुल गाँव आया। सोनी ने उसे देखकर हल्की मुस्कान दी। "क्या हुआ, थका हुआ लग रहा है?" उसने पूछा। राहुल ने थकी हुई आवाज़ में कहा, "हाँ चाची, नींद नहीं आ रही। आपके पास कुछ है क्या?" सोनी ने किचन की ओर इशारा किया, "चाय बना लूँ?" राहुल ने हँसकर कहा, "हाँ, ठीक है।" लेकिन जब सोनी चाय बनाने गई, राहुल ने अपनी जेब से एक नींद की गोली निकाल ली, जो उसने शहर से ली थी। उसने चुपके से गोली को पीसकर सोनी की चाय में मिला दिया। सोनी को कुछ पता नहीं चला। उसने चाय पी और थोड़ी देर बाद उसे सुस्ती छाने लगी। "मुझे नींद आ रही है," उसने कहा और अपने कमरे में चली गई।राहुल इंतज़ार करता रहा। आधी रात को वो चुपके से सोनी के कमरे में घुसा। सोनी बिस्तर पर लेटी थी, उसकी साड़ी उसकी मोटी जाँघों तक सरकी हुई थी, पेटीकोट हल्का-सा ऊपर चढ़ा था। उसकी साँसें गहरी थीं, पर नींद की गोली का असर हल्का था—वो पूरी तरह बेहोश नहीं थी, बस सुस्त और नशे में थी। राहुल ने धीरे से उसकी जाँघ को छुआ। सोनी की बॉडी में हल्की-सी सिहरन हुई, उसकी चूत के पास साड़ी पहले से ही नम थी। राहुल ने हिम्मत बढ़ाई और उसकी भारी चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से दबाया। सोनी की साँसें तेज़ हुईं, और उसकी आँखें अचानक खुल गईं।"राहुल! ये क्या कर रहा है?" सोनी चौंककर उठ बैठी, उसकी आवाज़ में गुस्सा और घबराहट थी। उसका दिमाग सुस्त था, पर उसे समझ आ गया कि कुछ गलत हो रहा है। राहुल पीछे हटा, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। "चाची, शांत हो जाओ। मैं बस आपको अच्छा फील कराना चाहता था।" सोनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। "मैं तेरी माँ जैसी हूँ, ये गलत है! तुझे शर्म नहीं आती? मैं किसी को बुला लूँगी!" उसने धमकी दी, पर उसकी आवाज़ में वो ताकत नहीं थी। उसका भरा हुआ शरीर अभी भी गर्म था, उसकी चूत की नमी अब साड़ी को भिगो रही थी।राहुल ने उसकी आँखों में देखा और कहा, "चाची, मैंने आपको कई बार देखा है। चाचा जब ठीक थे, तब से—5-7 साल पहले से। आप अपनी चूत में उंगलियाँ डालती थीं, तकिया रगड़ती थीं, मोबाइल तक इस्तेमाल करती थीं। मैंने सब देखा है। आप खुद को शांत करती थीं, तो अब क्यों छोड़ दिया? आपको इसकी ज़रूरत है, समझो।"

सोनी का मुँह खुला रह गया। उसे शर्मिंदगी और गुस्सा दोनों महसूस हुआ। "तू झूठ बोल रहा है! मैं ऐसा कुछ नहीं करती!" उसने चिल्लाकर कहा, पर उसकी आँखें राहुल की बातों से काँप रही थीं।राहुल पास आया और धीरे से बोला, "नहीं मानतीं तो ठीक है। मैं तुम्हें नंगा करके बस एक मसाज दूँगा। वादा है, जब तक तुम नहीं कहोगी, मैं तुम्हें चोदूँगा नहीं। लंड बाहर भी नहीं निकालूँगा। बस अपने हाथों से, उंगलियों से, और शायद जीभ से तुम्हें सुख दूँगा।" सोनी को अजीब-सा लगा। उसकी इच्छा अचानक तेज़ हो गई, उसकी चूत में एक गर्म लहर दौड़ गई। वो उत्तेजित थी, पर फिर भी उसने नाटक किया। "ये गलत है, राहुल! मैं अभी चिल्ला दूँगी, सबको बुला लूँगी!" उसने फिर धमकी दी।राहुल अब गुस्से का नाटक करने लगा। उसने सोनी को गुस्से से देखा और कहा, "अच्छा? तो बुलाओ ना! फिर क्या होगा? तुम भी बदनाम होगी, चाची। मैं तो लड़का हूँ, लोग मुझे माफ़ कर देंगे। पर तुम? गाँव में क्या कहेंगे? विधवा औरत अपने भतीजे के साथ? सोचो, तुम्हारी इज़्ज़त का क्या होगा?"

सोनी के मन में डर पैदा हो गया। वो पहले से ही उत्तेजित थी, और उसका भरा हुआ शरीर उसकी बातों को मानने से इनकार कर रहा था।राहुल ने उसका हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर धक्का दे दिया। "देखो चाची, ये सब छोड़ो। कोई नहीं जानता। मैं तुम्हें बस सुख देना चाहता हूँ। तुम्हारी चूत को देखकर लगता है, ये दो साल से तरस रही है।" उसने गंदे लहजे में कहा और सोनी की साड़ी को ऊपर सरका दिया। सोनी ने विरोध करने की कोशिश की, पर उसकी ताकत कम पड़ रही थी। उसकी पेटीकोट गीली थी, और राहुल ने उसे खींचकर उतार दिया। सोनी नंगी हो गई। उसकी मोटी चूचियाँ ब्लाउज़ से बाहर निकल आईं, और उसकी चूत पूरी तरह गीली थी।राहुल ने अपनी उंगलियाँ सोनी की चूत पर फिराईं। सोनी की साँसें तेज़ हो गईं, उसने आँखें बंद कर लीं। "राहुल, मत कर..." उसने हल्के से कहा, पर उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं, एक अजीब-सी चाहत थी। राहुल ने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया। सोनी की बॉडी में बिजली-सी दौड़ गई, उसने बिस्तर की चादर को मुठ्ठी में जकड़ लिया। राहुल ने अपनी उंगलियाँ सोनी की चूत में डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। "देखो चाची, कितनी गीली हो तुम। ये दो साल का भूखा बदन अब मुझसे मज़ा लेगा।" सोनी अब चुप थी। उसका डर और इच्छा मिलकर उसे हारा हुआ महसूस करा रहे थे। उसने आखिरी बार कहा, "ये गलत है..." और फिर चुप हो गई।राहुल ने उसकी मोटी चूचियों को मसला, उसकी चूत को चाटा, और उसे ऐसे सुख दिया जो उसने दो साल में कभी नहीं महसूस किया था। सोनी की बॉडी काँपने लगी, और एक ज़ोरदार सिसकारी के साथ वो झड़ गई। उसकी चूत से पानी बह रहा था, और उसकी साड़ी पूरी तरह गीली हो गई थी। राहुल उठा और हँसा। "देखा चाची, मैंने कहा था ना—तुम्हें इसकी ज़रूरत थी।"सोनी ने आँखें खोलीं और उसे घूरा। "हरामी, तूने मुझे इस हाल में पहुँचा दिया," उसने गुस्से में कहा, पर उसकी आवाज़ में अब वो नकली गुस्सा नहीं था—एक मज़े की छुअन थी। राहुल हँसा, "अरे चाची, हरामी मैं हूँ तो तुम क्या रंडी बन गई हो? देखो ना, तुम्हारी चूत कैसे पानी छोड़ रही है।"

सोनी का चेहरा लाल हो गया, पर वो अब चुप नहीं रही। "साले, तूने मुझे नंगा कर दिया, अब मुँह भी चलाएगा?" उसने जवाब दिया और हल्के से उसकी छाती पर थप्पड़ मारा।दोनों के बीच अब एक अजीब-सा खेल शुरू हो गया। राहुल ने उसकी मोटी जाँघों को फिर से सहलाया और कहा, "चाची, तुम्हारी ये भारी चूचियाँ और गीली चूत देखकर कोई भी पागल हो जाए। बोलो, कितना मज़ा आ रहा है?" सोनी ने सिसकारी भरी और बोली, "कुत्ते, बहुत मज़ा आ रहा है। दो साल से तरस रही थी, तूने आज आग लगा दी।" वो अब पूरी तरह खेल में शामिल हो गई थी। उसने राहुल के बाल पकड़े और उसे अपनी चूत के पास खींचा। "चाट साले, और चाट। मुझे पूरा मज़ा दे," उसने गंदे लहजे में कहा।राहुल ने उसकी चूत को फिर से चाटना शुरू किया। उसकी जीभ सोनी की चूत के अंदर तक जा रही थी, और सोनी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। "हाँ, राहुल, ऐसे ही... तू कितना गंदा है, पर मज़ा देता है," उसने कहा और अपनी भारी चूचियों को खुद मसलने लगी। राहुल ने उसकी चूत से मुँह हटाया और बोला, "चाची, तुम भी तो रंडी की तरह मज़ा ले रही हो। बोलो ना, कितना भूखी थी तुम्हारी चूत?" सोनी हँसी और बोली, "बहुत भूखी थी, हरामी। तूने आज इसे शांत कर दिया।"सोनी अब पूरी तरह उत्तेजित थी। उसका भरा हुआ शरीर गर्म था, उसकी चूत बार-बार गीली हो रही थी, और उसका मन अब किसी नैतिकता को नहीं मान रहा था। उसने राहुल को देखा और कहा, "राहुल, अब और मत तड़पा। बस निकाल अपना लंड और चोद दे अपनी चाची को।" उसकी आवाज़ में एक बेकरारी थी, जैसे वो बेकाबू हो चुकी थी। राहुल चौंका, पर उसकी आँखों में शरारत चमक उठी। "चाची, क्या कहा? चोद दूँ?" उसने मज़े लेते हुए पूछा।सोनी ने उसकी शर्ट पकड़ी और उसे अपनी ओर खींचा। "हाँ, साले, चोद दे। दो साल से तरस रही हूँ। अब और नहीं सह सकती। तेरा लंड चाहिए मुझे, अभी!" वो अब राहुल से भीख माँग रही थी। राहुल ने उसे तड़पाने का मज़ा लिया। "अरे चाची, इतनी जल्दी क्या है? अभी तो मैंने तुम्हें उंगलियों से मज़ा दिया। थोड़ा और तरसो," उसने हँसते हुए कहा और उसकी चूत पर फिर से उंगलियाँ फिराईं। सोनी तड़प उठी। "कुत्ते, मत तड़पा। मैं मर जाऊँगी। बस चोद दे अब!" उसने चिल्लाकर कहा।

राहुल ने आखिरकार अपनी पैंट खोली और अपना लंड बाहर निकाला। सोनी की आँखें फैल गईं—उसका लंड मोटा और सख्त था। लेकिन तभी राहुल ने अपनी जेब से एक कॉन्डम निकाला और उसे लंड पर चढ़ाने लगा। सोनी चौंक गई। "ये क्या, राहुल? तुझे कैसे पता था कि मैं मान जाऊँगी? तू तो तैयारी के साथ आया है!" उसने गालियाँ देते हुए पूछा, "साले, तूने पहले से सोच रखा था कि मुझे चोदेगा?" लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्से के साथ-साथ खुशी भी थी। "अच्छा किया, हरामी, कॉन्डम का ख्याल रखा," उसने मुस्कुराते हुए कहा।राहुल हँसा। "चाची, मैं जानता था तुम्हारी चूत की भूख। 5-7 साल से देख रहा हूँ तुम्हें। आज मौका मिला तो तैयारी पूरी रखी।" उसने कॉन्डम पहना और सोनी की मोटी टाँगें चौड़ी कीं। "अब तैयार हो जाओ, चाची। तुम्हारी चूत को आज पूरा मज़ा मिलेगा।" उसने अपना लंड सोनी की चूत पर रगड़ा। सोनी सिसकारी भरी, "हाँ, राहुल, डाल दे। चोद दे मुझे।"राहुल ने एक झटके में अपना लंड सोनी की चूत में डाल दिया। सोनी की चीख निकल गई, "आह, साले, कितना मोटा है!" राहुल ने तेज़ी से धक्के मारने शुरू किए। सोनी की भारी चूचियाँ उछल रही थीं, उसकी साड़ी पूरी तरह गीली थी, और कमरे में उसकी सिसकारियाँ गूँज रही थीं। "हाँ, राहुल, ऐसे ही... चोद मुझे... और ज़ोर से," वो चिल्ला रही थी। राहुल ने कहा, "चाची, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है। दो साल बाद भी मज़ा दे रही है।" सोनी हँसी, "साले, तेरा लंड भी कमाल है। चोदता रह, रुक मत।"राहुल ने सोनी को अलग-अलग तरीके से चोदा। पहले उसे बिस्तर पर लिटाकर, फिर उसे घोड़ी बनाकर। सोनी हर धक्के के साथ मज़ा ले रही थी। "हाँ, कुत्ते, ऐसे ही... मुझे पूरा चोद... मैं झड़ने वाली हूँ," उसने कहा। राहुल ने अपनी स्पीड बढ़ाई, और सोनी की बॉडी काँपने लगी। एक ज़ोरदार सिसकारी के साथ वो फिर से झड़ गई, उसकी चूत से पानी बह रहा था। राहुल भी अब रुक नहीं सका। "चाची, मैं भी झड़ने वाला हूँ," उसने कहा और कॉन्डम में ही झड़ गया।दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। सोनी की साड़ी, पेटीकोट, और बिस्तर सब गीले थे।

उसने राहुल को देखा और हँसते हुए कहा, "हरामी, तूने मुझे पूरा निचोड़ दिया।" राहुल ने जवाब दिया, "चाची, तुम भी तो रंडी की तरह चुदवाती हो। मज़ा आया ना?" सोनी ने उसकी छाती पर हल्का थप्पड़ मारा और बोली, "हाँ, बहुत मज़ा आया।" फिर उसकी आँखें नम हो गईं। "तूने आज जो किया, वैसा तो तेरे चाचा ने कभी नहीं किया। 18 साल की शादी में उसने शुरू में मुझे बच्चे के लिए चोदा, फिर अपने स्वार्थ के लिए। मेरी खुशी का ख्याल नहीं किया। इसीलिए मुझे खुद को उंगलियों से, तकिए से शांत करना पड़ता था।"राहुल ने उसे चुपचाप सुना। उसने सोनी को अपनी बाँहों में खींच लिया और उसके माथे को चूमा। "चाची, अब रो मत। मैं हूँ ना। मैं तुम्हें वो सब दूँगा जो तुम्हें कभी नहीं मिला," उसने प्यार से कहा। सोनी ने उसकी छाती पर सिर टिकाया और थोड़ा ठीक होने के बाद हल्के से हँसी। "तेरे इरादे तो मैं बहुत पहले से जानती थी, कमिने हरामी," उसने प्यार भरे लहजे में कहा। "पर ये रिश्ता हमारा वैसा है कि... तू देख, तेरे बाकी भाइयों ने, बाकी बच्चों ने कभी ऐसा नहीं सोचा। तू ही कमिना है, हरामी।"सोनी ने आगे कहा, "मैंने कितनी बार तुझसे दूर रहने की कोशिश की। समझाना चाहा, खुद को रोकना चाहा। पर साला, मैं भी तो चाहती थी। ज्यादा दूर नहीं रह पाई, ना शक्ति रह पाई। और आज... आखिरकार ये हो गया। बस ये बात किसी को कभी पता न चले।" राहुल ने उसकी आँखों में देखा और हँसते हुए कहा, "चाची, तुम्हें जब भी मेरी जरूरत हो, बस बता देना। मैं यही करूँगा—जोरदार चोदूँगा, साली मेरी प्यारी रंडी चाची।"सोनी हँस पड़ी। "कुत्ता, गंदी बातें करता है," उसने कहा और उसकी छाती पर हल्का मुक्का मारा। राहुल ने मज़े लेते हुए कहा, "और सुनो चाची, अब फिर से खुद को खुश करने की आदत डाल लो। कभी-कभी उंगली कर लिया करो, कोई दिक्कत नहीं है उसमें। तुझे अच्छा लगेगा।" सोनी ने उसे घूरा और फिर जोर से हँस दी। "साले, तू मुझे सिखाएगा? चल, ठीक है। पर तू जब आएगा, तब ये सब छोड़कर बस मुझे चोदना।" दोनों हँसते-हँसते एक-दूसरे से लिपट गए। राहुल ने सोनी को कसकर गले लगाया, और सोनी ने उसके गाल पर एक चुम्मन दे दिया। "कमिना, तू बहुत अच्छा है," उसने धीरे से कहा।दोनों थक चुके थे। वो एक-दूसरे से लिपटकर सो गए, उनकी साँसें एक-दूसरे में मिल रही थीं। सुबह होने से पहले दोनों उठे। सोनी ने जल्दी से अपनी साड़ी ठीक की, पेटीकोट पहना, और राहुल ने अपनी पैंट और शर्ट पहन ली। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और हल्के से मुस्कुराया। "किसी को कुछ पता नहीं चलेगा," सोनी ने कहा। राहुल ने हामी भरी, "बिल्कुल, चाची। ये हमारा राज़ है।"राहुल सुबह चला गया। सोनी ने बिस्तर की चादर बदली, अपनी गीली साड़ी को धोने के लिए रखा, और फिर एक कप चाय लेकर बैठ गई। उसकी बॉडी में अभी भी रात का मज़ा गूँज रहा था। उसने मन में सोचा, "कुत्ता, फिर आना।" दूसरी ओर, राहुल शहर पहुँचकर मुस्कुराया। "चाची, तुम मेरी हो," उसने मन में कहा। दोनों के बीच अब एक नया रिश्ता था—प्यार, मज़ा, और गहरा राज़।
 

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सोनी 46 साल की थी। उसकी गोरी त्वचा पर उम्र की कुछ लकीरें थीं, पर उसका भरा हुआ, थोड़ा चबी बदन उसे अभी भी आकर्षक बनाता था। उसकी ब्रा का साइज़ 34D था, जिससे उसकी बड़ी चूचियाँ हमेशा भारी और उभरी हुई दिखती थीं, और पैंटी का साइज़ 90 सेमी था, जो उसकी मोटी जाँघों और गोल नितंबों को ढकता था। सात महीने पहले उसके पति की मृत्यु हो गई थी, और पिछले दो साल से उसकी ज़िंदगी में कोई मर्द नहीं था। वो अपनी इच्छाओं को दबाकर रखती थी, कभी किसी से ज़िक्र नहीं करती थी। लेकिन उसका भतीजा, 25 साल का राहुल, जो अब शहर में रहता था और कभी-कभार गाँव आता था, उसकी चुप्पी को भाँप लेता था। दोनों के बीच सालों से एक अजीब-सी केमिस्ट्री थी—नज़रों का खेल, हल्के-हल्के स्पर्श, और वो मौन जो बहुत कुछ कह जाता था।राहुल को याद था कि सोनी नींद में कितनी संवेदनशील थी। कई बार उसने रात को चुपके से उसके कमरे में जाकर उसकी भारी चूचियों को हल्के से दबाया था, उसकी चूत को साड़ी के ऊपर से सहलाया था, और उसकी मोटी जाँघों को रगड़ा था। हर बार सोनी की चूत हल्की-हल्की गीली हो जाती थी, साड़ी और पेटीकोट तक नमी पहुँच जाती थी, पर वो जागती नहीं थी। एक बार तो उसने उसकी जाँघों को मसाज करने की हिम्मत की थी, और सोनी बस नींद में हल्की-सी करवट बदलकर चुप रही थी। राहुल जानता था—सोनी को नींद में छूने से उसका भरा हुआ शरीर जवाब देता है, भले ही वो मुँह से कुछ न कहे।

एक रात राहुल गाँव आया। सोनी ने उसे देखकर हल्की मुस्कान दी। "क्या हुआ, थका हुआ लग रहा है?" उसने पूछा। राहुल ने थकी हुई आवाज़ में कहा, "हाँ चाची, नींद नहीं आ रही। आपके पास कुछ है क्या?" सोनी ने किचन की ओर इशारा किया, "चाय बना लूँ?" राहुल ने हँसकर कहा, "हाँ, ठीक है।" लेकिन जब सोनी चाय बनाने गई, राहुल ने अपनी जेब से एक नींद की गोली निकाल ली, जो उसने शहर से ली थी। उसने चुपके से गोली को पीसकर सोनी की चाय में मिला दिया। सोनी को कुछ पता नहीं चला। उसने चाय पी और थोड़ी देर बाद उसे सुस्ती छाने लगी। "मुझे नींद आ रही है," उसने कहा और अपने कमरे में चली गई।राहुल इंतज़ार करता रहा। आधी रात को वो चुपके से सोनी के कमरे में घुसा। सोनी बिस्तर पर लेटी थी, उसकी साड़ी उसकी मोटी जाँघों तक सरकी हुई थी, पेटीकोट हल्का-सा ऊपर चढ़ा था। उसकी साँसें गहरी थीं, पर नींद की गोली का असर हल्का था—वो पूरी तरह बेहोश नहीं थी, बस सुस्त और नशे में थी। राहुल ने धीरे से उसकी जाँघ को छुआ। सोनी की बॉडी में हल्की-सी सिहरन हुई, उसकी चूत के पास साड़ी पहले से ही नम थी। राहुल ने हिम्मत बढ़ाई और उसकी भारी चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से दबाया। सोनी की साँसें तेज़ हुईं, और उसकी आँखें अचानक खुल गईं।"राहुल! ये क्या कर रहा है?" सोनी चौंककर उठ बैठी, उसकी आवाज़ में गुस्सा और घबराहट थी। उसका दिमाग सुस्त था, पर उसे समझ आ गया कि कुछ गलत हो रहा है। राहुल पीछे हटा, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। "चाची, शांत हो जाओ। मैं बस आपको अच्छा फील कराना चाहता था।" सोनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। "मैं तेरी माँ जैसी हूँ, ये गलत है! तुझे शर्म नहीं आती? मैं किसी को बुला लूँगी!" उसने धमकी दी, पर उसकी आवाज़ में वो ताकत नहीं थी। उसका भरा हुआ शरीर अभी भी गर्म था, उसकी चूत की नमी अब साड़ी को भिगो रही थी।राहुल ने उसकी आँखों में देखा और कहा, "चाची, मैंने आपको कई बार देखा है। चाचा जब ठीक थे, तब से—5-7 साल पहले से। आप अपनी चूत में उंगलियाँ डालती थीं, तकिया रगड़ती थीं, मोबाइल तक इस्तेमाल करती थीं। मैंने सब देखा है। आप खुद को शांत करती थीं, तो अब क्यों छोड़ दिया? आपको इसकी ज़रूरत है, समझो।"

सोनी का मुँह खुला रह गया। उसे शर्मिंदगी और गुस्सा दोनों महसूस हुआ। "तू झूठ बोल रहा है! मैं ऐसा कुछ नहीं करती!" उसने चिल्लाकर कहा, पर उसकी आँखें राहुल की बातों से काँप रही थीं।राहुल पास आया और धीरे से बोला, "नहीं मानतीं तो ठीक है। मैं तुम्हें नंगा करके बस एक मसाज दूँगा। वादा है, जब तक तुम नहीं कहोगी, मैं तुम्हें चोदूँगा नहीं। लंड बाहर भी नहीं निकालूँगा। बस अपने हाथों से, उंगलियों से, और शायद जीभ से तुम्हें सुख दूँगा।" सोनी को अजीब-सा लगा। उसकी इच्छा अचानक तेज़ हो गई, उसकी चूत में एक गर्म लहर दौड़ गई। वो उत्तेजित थी, पर फिर भी उसने नाटक किया। "ये गलत है, राहुल! मैं अभी चिल्ला दूँगी, सबको बुला लूँगी!" उसने फिर धमकी दी।राहुल अब गुस्से का नाटक करने लगा। उसने सोनी को गुस्से से देखा और कहा, "अच्छा? तो बुलाओ ना! फिर क्या होगा? तुम भी बदनाम होगी, चाची। मैं तो लड़का हूँ, लोग मुझे माफ़ कर देंगे। पर तुम? गाँव में क्या कहेंगे? विधवा औरत अपने भतीजे के साथ? सोचो, तुम्हारी इज़्ज़त का क्या होगा?"

सोनी के मन में डर पैदा हो गया। वो पहले से ही उत्तेजित थी, और उसका भरा हुआ शरीर उसकी बातों को मानने से इनकार कर रहा था।राहुल ने उसका हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर धक्का दे दिया। "देखो चाची, ये सब छोड़ो। कोई नहीं जानता। मैं तुम्हें बस सुख देना चाहता हूँ। तुम्हारी चूत को देखकर लगता है, ये दो साल से तरस रही है।" उसने गंदे लहजे में कहा और सोनी की साड़ी को ऊपर सरका दिया। सोनी ने विरोध करने की कोशिश की, पर उसकी ताकत कम पड़ रही थी। उसकी पेटीकोट गीली थी, और राहुल ने उसे खींचकर उतार दिया। सोनी नंगी हो गई। उसकी मोटी चूचियाँ ब्लाउज़ से बाहर निकल आईं, और उसकी चूत पूरी तरह गीली थी।राहुल ने अपनी उंगलियाँ सोनी की चूत पर फिराईं। सोनी की साँसें तेज़ हो गईं, उसने आँखें बंद कर लीं। "राहुल, मत कर..." उसने हल्के से कहा, पर उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं, एक अजीब-सी चाहत थी। राहुल ने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया। सोनी की बॉडी में बिजली-सी दौड़ गई, उसने बिस्तर की चादर को मुठ्ठी में जकड़ लिया। राहुल ने अपनी उंगलियाँ सोनी की चूत में डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। "देखो चाची, कितनी गीली हो तुम। ये दो साल का भूखा बदन अब मुझसे मज़ा लेगा।" सोनी अब चुप थी। उसका डर और इच्छा मिलकर उसे हारा हुआ महसूस करा रहे थे। उसने आखिरी बार कहा, "ये गलत है..." और फिर चुप हो गई।राहुल ने उसकी मोटी चूचियों को मसला, उसकी चूत को चाटा, और उसे ऐसे सुख दिया जो उसने दो साल में कभी नहीं महसूस किया था। सोनी की बॉडी काँपने लगी, और एक ज़ोरदार सिसकारी के साथ वो झड़ गई। उसकी चूत से पानी बह रहा था, और उसकी साड़ी पूरी तरह गीली हो गई थी। राहुल उठा और हँसा। "देखा चाची, मैंने कहा था ना—तुम्हें इसकी ज़रूरत थी।"सोनी ने आँखें खोलीं और उसे घूरा। "हरामी, तूने मुझे इस हाल में पहुँचा दिया," उसने गुस्से में कहा, पर उसकी आवाज़ में अब वो नकली गुस्सा नहीं था—एक मज़े की छुअन थी। राहुल हँसा, "अरे चाची, हरामी मैं हूँ तो तुम क्या रंडी बन गई हो? देखो ना, तुम्हारी चूत कैसे पानी छोड़ रही है।"

सोनी का चेहरा लाल हो गया, पर वो अब चुप नहीं रही। "साले, तूने मुझे नंगा कर दिया, अब मुँह भी चलाएगा?" उसने जवाब दिया और हल्के से उसकी छाती पर थप्पड़ मारा।दोनों के बीच अब एक अजीब-सा खेल शुरू हो गया। राहुल ने उसकी मोटी जाँघों को फिर से सहलाया और कहा, "चाची, तुम्हारी ये भारी चूचियाँ और गीली चूत देखकर कोई भी पागल हो जाए। बोलो, कितना मज़ा आ रहा है?" सोनी ने सिसकारी भरी और बोली, "कुत्ते, बहुत मज़ा आ रहा है। दो साल से तरस रही थी, तूने आज आग लगा दी।" वो अब पूरी तरह खेल में शामिल हो गई थी। उसने राहुल के बाल पकड़े और उसे अपनी चूत के पास खींचा। "चाट साले, और चाट। मुझे पूरा मज़ा दे," उसने गंदे लहजे में कहा।राहुल ने उसकी चूत को फिर से चाटना शुरू किया। उसकी जीभ सोनी की चूत के अंदर तक जा रही थी, और सोनी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। "हाँ, राहुल, ऐसे ही... तू कितना गंदा है, पर मज़ा देता है," उसने कहा और अपनी भारी चूचियों को खुद मसलने लगी। राहुल ने उसकी चूत से मुँह हटाया और बोला, "चाची, तुम भी तो रंडी की तरह मज़ा ले रही हो। बोलो ना, कितना भूखी थी तुम्हारी चूत?" सोनी हँसी और बोली, "बहुत भूखी थी, हरामी। तूने आज इसे शांत कर दिया।"सोनी अब पूरी तरह उत्तेजित थी। उसका भरा हुआ शरीर गर्म था, उसकी चूत बार-बार गीली हो रही थी, और उसका मन अब किसी नैतिकता को नहीं मान रहा था। उसने राहुल को देखा और कहा, "राहुल, अब और मत तड़पा। बस निकाल अपना लंड और चोद दे अपनी चाची को।" उसकी आवाज़ में एक बेकरारी थी, जैसे वो बेकाबू हो चुकी थी। राहुल चौंका, पर उसकी आँखों में शरारत चमक उठी। "चाची, क्या कहा? चोद दूँ?" उसने मज़े लेते हुए पूछा।सोनी ने उसकी शर्ट पकड़ी और उसे अपनी ओर खींचा। "हाँ, साले, चोद दे। दो साल से तरस रही हूँ। अब और नहीं सह सकती। तेरा लंड चाहिए मुझे, अभी!" वो अब राहुल से भीख माँग रही थी। राहुल ने उसे तड़पाने का मज़ा लिया। "अरे चाची, इतनी जल्दी क्या है? अभी तो मैंने तुम्हें उंगलियों से मज़ा दिया। थोड़ा और तरसो," उसने हँसते हुए कहा और उसकी चूत पर फिर से उंगलियाँ फिराईं। सोनी तड़प उठी। "कुत्ते, मत तड़पा। मैं मर जाऊँगी। बस चोद दे अब!" उसने चिल्लाकर कहा।

राहुल ने आखिरकार अपनी पैंट खोली और अपना लंड बाहर निकाला। सोनी की आँखें फैल गईं—उसका लंड मोटा और सख्त था। लेकिन तभी राहुल ने अपनी जेब से एक कॉन्डम निकाला और उसे लंड पर चढ़ाने लगा। सोनी चौंक गई। "ये क्या, राहुल? तुझे कैसे पता था कि मैं मान जाऊँगी? तू तो तैयारी के साथ आया है!" उसने गालियाँ देते हुए पूछा, "साले, तूने पहले से सोच रखा था कि मुझे चोदेगा?" लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्से के साथ-साथ खुशी भी थी। "अच्छा किया, हरामी, कॉन्डम का ख्याल रखा," उसने मुस्कुराते हुए कहा।राहुल हँसा। "चाची, मैं जानता था तुम्हारी चूत की भूख। 5-7 साल से देख रहा हूँ तुम्हें। आज मौका मिला तो तैयारी पूरी रखी।" उसने कॉन्डम पहना और सोनी की मोटी टाँगें चौड़ी कीं। "अब तैयार हो जाओ, चाची। तुम्हारी चूत को आज पूरा मज़ा मिलेगा।" उसने अपना लंड सोनी की चूत पर रगड़ा। सोनी सिसकारी भरी, "हाँ, राहुल, डाल दे। चोद दे मुझे।"राहुल ने एक झटके में अपना लंड सोनी की चूत में डाल दिया। सोनी की चीख निकल गई, "आह, साले, कितना मोटा है!" राहुल ने तेज़ी से धक्के मारने शुरू किए। सोनी की भारी चूचियाँ उछल रही थीं, उसकी साड़ी पूरी तरह गीली थी, और कमरे में उसकी सिसकारियाँ गूँज रही थीं। "हाँ, राहुल, ऐसे ही... चोद मुझे... और ज़ोर से," वो चिल्ला रही थी। राहुल ने कहा, "चाची, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है। दो साल बाद भी मज़ा दे रही है।" सोनी हँसी, "साले, तेरा लंड भी कमाल है। चोदता रह, रुक मत।"राहुल ने सोनी को अलग-अलग तरीके से चोदा। पहले उसे बिस्तर पर लिटाकर, फिर उसे घोड़ी बनाकर। सोनी हर धक्के के साथ मज़ा ले रही थी। "हाँ, कुत्ते, ऐसे ही... मुझे पूरा चोद... मैं झड़ने वाली हूँ," उसने कहा। राहुल ने अपनी स्पीड बढ़ाई, और सोनी की बॉडी काँपने लगी। एक ज़ोरदार सिसकारी के साथ वो फिर से झड़ गई, उसकी चूत से पानी बह रहा था। राहुल भी अब रुक नहीं सका। "चाची, मैं भी झड़ने वाला हूँ," उसने कहा और कॉन्डम में ही झड़ गया।दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। सोनी की साड़ी, पेटीकोट, और बिस्तर सब गीले थे।

उसने राहुल को देखा और हँसते हुए कहा, "हरामी, तूने मुझे पूरा निचोड़ दिया।" राहुल ने जवाब दिया, "चाची, तुम भी तो रंडी की तरह चुदवाती हो। मज़ा आया ना?" सोनी ने उसकी छाती पर हल्का थप्पड़ मारा और बोली, "हाँ, बहुत मज़ा आया।" फिर उसकी आँखें नम हो गईं। "तूने आज जो किया, वैसा तो तेरे चाचा ने कभी नहीं किया। 18 साल की शादी में उसने शुरू में मुझे बच्चे के लिए चोदा, फिर अपने स्वार्थ के लिए। मेरी खुशी का ख्याल नहीं किया। इसीलिए मुझे खुद को उंगलियों से, तकिए से शांत करना पड़ता था।"राहुल ने उसे चुपचाप सुना। उसने सोनी को अपनी बाँहों में खींच लिया और उसके माथे को चूमा। "चाची, अब रो मत। मैं हूँ ना। मैं तुम्हें वो सब दूँगा जो तुम्हें कभी नहीं मिला," उसने प्यार से कहा। सोनी ने उसकी छाती पर सिर टिकाया और थोड़ा ठीक होने के बाद हल्के से हँसी। "तेरे इरादे तो मैं बहुत पहले से जानती थी, कमिने हरामी," उसने प्यार भरे लहजे में कहा। "पर ये रिश्ता हमारा वैसा है कि... तू देख, तेरे बाकी भाइयों ने, बाकी बच्चों ने कभी ऐसा नहीं सोचा। तू ही कमिना है, हरामी।"सोनी ने आगे कहा, "मैंने कितनी बार तुझसे दूर रहने की कोशिश की। समझाना चाहा, खुद को रोकना चाहा। पर साला, मैं भी तो चाहती थी। ज्यादा दूर नहीं रह पाई, ना शक्ति रह पाई। और आज... आखिरकार ये हो गया। बस ये बात किसी को कभी पता न चले।" राहुल ने उसकी आँखों में देखा और हँसते हुए कहा, "चाची, तुम्हें जब भी मेरी जरूरत हो, बस बता देना। मैं यही करूँगा—जोरदार चोदूँगा, साली मेरी प्यारी रंडी चाची।"सोनी हँस पड़ी। "कुत्ता, गंदी बातें करता है," उसने कहा और उसकी छाती पर हल्का मुक्का मारा। राहुल ने मज़े लेते हुए कहा, "और सुनो चाची, अब फिर से खुद को खुश करने की आदत डाल लो। कभी-कभी उंगली कर लिया करो, कोई दिक्कत नहीं है उसमें। तुझे अच्छा लगेगा।" सोनी ने उसे घूरा और फिर जोर से हँस दी। "साले, तू मुझे सिखाएगा? चल, ठीक है। पर तू जब आएगा, तब ये सब छोड़कर बस मुझे चोदना।" दोनों हँसते-हँसते एक-दूसरे से लिपट गए। राहुल ने सोनी को कसकर गले लगाया, और सोनी ने उसके गाल पर एक चुम्मन दे दिया। "कमिना, तू बहुत अच्छा है," उसने धीरे से कहा।दोनों थक चुके थे। वो एक-दूसरे से लिपटकर सो गए, उनकी साँसें एक-दूसरे में मिल रही थीं। सुबह होने से पहले दोनों उठे। सोनी ने जल्दी से अपनी साड़ी ठीक की, पेटीकोट पहना, और राहुल ने अपनी पैंट और शर्ट पहन ली। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और हल्के से मुस्कुराया। "किसी को कुछ पता नहीं चलेगा," सोनी ने कहा। राहुल ने हामी भरी, "बिल्कुल, चाची। ये हमारा राज़ है।"राहुल सुबह चला गया। सोनी ने बिस्तर की चादर बदली, अपनी गीली साड़ी को धोने के लिए रखा, और फिर एक कप चाय लेकर बैठ गई। उसकी बॉडी में अभी भी रात का मज़ा गूँज रहा था। उसने मन में सोचा, "कुत्ता, फिर आना।" दूसरी ओर, राहुल शहर पहुँचकर मुस्कुराया। "चाची, तुम मेरी हो," उसने मन में कहा। दोनों के बीच अब एक नया रिश्ता था—प्यार, मज़ा, और गहरा राज़।
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 

rajaji420

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सोनी उस रात के बाद से थोड़ी बेचैन थी। राहुल की हरकतों ने उसके जिस्म में एक सुलगती आग जगा दी थी, पर वह उसे अब भी भतीजे की शरारत से ज़्यादा कुछ नहीं समझती थी। मगर राहुल का दिमाग अब कुछ और ही रच रहा था। उसकी आँखों में सोनी की वो गीली चूत और सिसकारियाँ बार-बार उभर रही थीं। वह चाहता था कि यह खेल फिर से शुरू हो—इस बार इतना चालाकी से कि सोनी को भनक भी न पड़े। उसने ठान लिया कि वह सोनी की चूत को नींद में ही उसकी हद तक तरसा देगा, और उसे लगेगा कि उसकी अपनी चूत उसे चोद रही है।

उसने सोचा, "चाची को पैंटी पहनाकर उसकी चूत को मसाले से भड़का दूँगा।"सुबह का वक्त था। सोनी रसोई में चाय बना रही थी, उसकी साड़ी उसकी मोटी जाँघों से चिपकी हुई थी, और उसकी 34 की भारी चूचियाँ ब्लाउज़ में उभरी हुई थीं। राहुल चुपके से उसके कमरे में घुसा और अलमारी से उसकी एक पुरानी काली पैंटी निकाली—हल्की फटी हुई, जो सोनी अब कम ही पहनती थी। उसने सोचा, "इस पैंटी को चाची की चूत का जाल बना दूँगा।" उसने रसोई से एक चुटकी से भी कम मिर्च पाउडर चुराया और मूव की ट्यूब उठाई। उसकी उंगलियाँ ट्यूब को दबाते हुए उसने कल्पना की कि सोनी की चूत इसकी ठंडक और गर्मी से तड़प उठेगी। उसने एक कटोरी में मिर्च को ठंडे पानी में घोला, फिर मूव की एक मटर जितनी दवा डालकर मिलाई। मिश्रण को और गंदा करने के लिए उसने थोड़ा शहद टपकाया—इतना कि उसकी चिपचिपाहट सोनी की चूत को चिकना कर दे। उसने इस मसाले को पैंटी के उस हिस्से पर मला जो उसकी चूत को रगड़ेगा, और फिर उसे खिड़की के पास सूखने छोड़ दिया।

दो घंटे बाद, दोपहर तक, पैंटी सूखकर हल्की चिपचिपी हो गई थी—गंध इतनी हल्की कि सोनी को शक न हो। उसने पैंटी को वापस अलमारी में रख दिया, ठीक ऊपर की तरफ, ताकि सोनी उसे आसानी से उठा ले।

राहुल ने सोनी को पैंटी पहनाने की चाल सोची। दोपहर में वह सोनी के पास गया, जहाँ वह टीवी देख रही थी। उसने मासूमियत से कहा, "चाची, आजकल गर्मी बहुत है न? साड़ी में पसीना नहीं हो जाता?" सोनी ने उसे घूरा, "तो क्या करूँ, हरामी?" राहुल ने हँसते हुए कहा, "कुछ नहीं, बस सुना है कि पैंटी पहनने से पसीना कम लगता है। आपकी अलमारी में वो काली पैंटी पड़ी थी, वही ट्राई कर लो न।" सोनी ने उसे थप्पड़ मारने की धमकी दी, "कुत्ते, मेरे कपड़ों में ताक-झांक करता है?" लेकिन राहुल की बात उसके दिमाग में अटक गई। गर्मी वाकई ज़्यादा थी, और साड़ी के नीचे पसीने से उसकी जाँघें चिपचिपी हो रही थीं। उसने सोचा कि शायद पैंटी पहनने से राहत मिले। शाम को उसने अलमारी खोली और वही काली पैंटी उठाई—जो राहुल ने मसाले से भरी थी। उसने उसे अपनी साड़ी के नीचे पहन लिया, पैंटी उसकी चूत और मोटी जाँघों से चिपक गई।रात 10 बजे सोनी अपने बिस्तर पर लेटी। उसकी साड़ी उसकी जाँघों तक सरकी हुई थी, और पैंटी उसकी चूत को कसकर पकड़े हुए थी।

उसकी 34 की चूचियाँ ब्लाउज़ में साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। नींद की गोली का हल्का नशा उसकी आँखों को भारी कर रहा था। राहुल अपने कमरे में लेटा, लेकिन उसकी नज़र सोनी के दरवाज़े पर टिकी थी। उसने मन में कहा, "चाची, अब तुम्हारी पैंटी तुम्हारी चूत को चोदेगी।"रात 1 बजे, जब चाँद की रोशनी सोनी की जाँघों पर पड़ रही थी, वह नींद में करवट लेती है। पैंटी उसकी चूत से रगड़ खाती है। मूव की ठंडक उसकी चूत में सिहरन भर देती है—उसकी मोटी जाँघें सिकुड़ती हैं, फिर धीरे-धीरे फैलती हैं। फिर मूव की गर्मी उसकी चूत में आग सी लगा देती है, मिर्च की हल्की चुभन उसकी चूत को तड़पाने लगती है। शहद की चिपचिपाहट उसकी चूत को चिकना कर देती है, और पैंटी उसकी गीली चूत से चिपकने लगती है। सोनी की साँसें तेज़ हो जाती हैं, उसकी चूत में एक आग का गोला फटने को तैयार था। उसकी नींद में उसकी उंगलियाँ पैंटी के ऊपर उसकी चूत को रगड़ने लगती हैं। "आह... ये क्या हो रहा है..." उसकी सुस्त सिसकारी कमरे में गूँजती है, उसकी चूत से पानी टपकने लगता है।उसकी नींद आधी टूटती है, लेकिन उसका दिमाग अभी धुंध में डूबा है। उसे लगता है कि उसकी चूत में कोई गीला सपना चोद रहा है। वह अपनी साड़ी को खींचती है, पैंटी को एक झटके में उतार फेंकती है—उसकी मोटी गांड और चूत नंगी हो जाती है, गीली और चमकती हुई। पैंटी उसके हाथ में चिपचिपी थी, उसकी चूत का पानी उसमें रिस रहा था। उसकी 34 की चूचियाँ ब्लाउज़ में दब रही थीं, और उसने बटन फाड़कर उन्हें आज़ाद कर दिया। उसकी भारी चूचियाँ उछल पड़ीं, निप्पल सख्त और गहरे भूरे रंग में चमक रहे थे। वह बिस्तर पर लोटने लगी, उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी। उसने अपनी उंगलियाँ नंगी चूत में डाल दीं, तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगी। "राहुल... आह... नहीं... मेरी चूत..." उसकी सिसकारियाँ तेज़ हो गईं, लेकिन वह राहुल को नहीं देख रही थी—उसे लग रहा था कि उसकी चूत खुद ही उसे चोद रही है। उसकी मोटी गांड बिस्तर पर रगड़ खा रही थी, उसकी चूचियाँ हवा में लहरा रही थीं। उसकी चूत से पानी की पिचकारी निकली, और वह एक ज़ोरदार चीख के साथ झड़ गई— "आह... मेरी चूत... फट गई..." उसकी नंगी बॉडी काँप रही थी, उसकी गीली पैंटी बिस्तर पर पड़ी थी।

राहुल दरवाज़े की झिरी से सब देख रहा था। उसका लंड पैंट में सख्त हो गया था, और उसकी आँखों में शरारत नाच रही थी। "चाची, तुम्हारी पैंटी ने तुम्हारी चूत को चोद डाला," उसने मन में सोचा। सोनी हाँफते हुए लेट गई, उसकी नंगी चूत और 34 की चूचियाँ चाँदनी में चमक रही थीं। उसकी साँसें अभी भी भारी थीं, और उसकी उंगलियाँ उसकी चूत पर चिपचिपी पड़ी थीं।

राहुल चुपके से अपने कमरे में लौट आया, उसका लंड अभी भी सख्त था। अगली सुबह, सोनी उठी तो उसे रात का सब कुछ एक गीला सपना लगा। उसने गीली पैंटी और बिखरे कपड़े देखे, अपनी चूत को छुआ—वह अभी भी हल्की गर्म और गीली थी। "ये क्या था? शायद पैंटी की वजह से..." उसने सोचा और चाय बनाने चली गई। राहुल ने उसे देखा, उसकी आँखों में शरारत थी। "चाची, नींद कैसी थी?" उसने पूछा। सोनी ने उसे घूरा, "हरामी, चुप रह," लेकिन उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी कशिश थी, और उसकी चूत में फिर से हल्की आग सुलग उठी।

राहुल मुस्कुराया। उसने सोचा, "अगली बार नींबू और विक्स से तुम्हारी चूत को और चोदूँगा।" यह खेल अब और गहरा हो गया था—सोनी की नंगी आग और राहुल की चालाकी का एक गंदा मेल, जो उसे बिना समझे उसकी चूत को तरसाता जा रहा था।

09th
 
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Aryan Raj

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सोनी उस रात के बाद से थोड़ी बेचैन थी। राहुल की हरकतों ने उसके जिस्म में एक सुलगती आग जगा दी थी, पर वह उसे अब भी भतीजे की शरारत से ज़्यादा कुछ नहीं समझती थी। मगर राहुल का दिमाग अब कुछ और ही रच रहा था। उसकी आँखों में सोनी की वो गीली चूत और सिसकारियाँ बार-बार उभर रही थीं। वह चाहता था कि यह खेल फिर से शुरू हो—इस बार इतना चालाकी से कि सोनी को भनक भी न पड़े। उसने ठान लिया कि वह सोनी की चूत को नींद में ही उसकी हद तक तरसा देगा, और उसे लगेगा कि उसकी अपनी चूत उसे चोद रही है। उसने सोचा, "चाची को पैंटी पहनाकर उसकी चूत को मसाले से भड़का दूँगा।"सुबह का वक्त था। सोनी रसोई में चाय बना रही थी, उसकी साड़ी उसकी मोटी जाँघों से चिपकी हुई थी, और उसकी 34 की भारी चूचियाँ ब्लाउज़ में उभरी हुई थीं। राहुल चुपके से उसके कमरे में घुसा और अलमारी से उसकी एक पुरानी काली पैंटी निकाली—हल्की फटी हुई, जो सोनी अब कम ही पहनती थी। उसने सोचा, "इस पैंटी को चाची की चूत का जाल बना दूँगा।" उसने रसोई से एक चुटकी से भी कम मिर्च पाउडर चुराया और मूव की ट्यूब उठाई। उसकी उंगलियाँ ट्यूब को दबाते हुए उसने कल्पना की कि सोनी की चूत इसकी ठंडक और गर्मी से तड़प उठेगी। उसने एक कटोरी में मिर्च को ठंडे पानी में घोला, फिर मूव की एक मटर जितनी दवा डालकर मिलाई। मिश्रण को और गंदा करने के लिए उसने थोड़ा शहद टपकाया—इतना कि उसकी चिपचिपाहट सोनी की चूत को चिकना कर दे। उसने इस मसाले को पैंटी के उस हिस्से पर मला जो उसकी चूत को रगड़ेगा, और फिर उसे खिड़की के पास सूखने छोड़ दिया। दो घंटे बाद, दोपहर तक, पैंटी सूखकर हल्की चिपचिपी हो गई थी—गंध इतनी हल्की कि सोनी को शक न हो। उसने पैंटी को वापस अलमारी में रख दिया, ठीक ऊपर की तरफ, ताकि सोनी उसे आसानी से उठा ले।राहुल ने सोनी को पैंटी पहनाने की चाल सोची। दोपहर में वह सोनी के पास गया, जहाँ वह टीवी देख रही थी। उसने मासूमियत से कहा, "चाची, आजकल गर्मी बहुत है न? साड़ी में पसीना नहीं हो जाता?" सोनी ने उसे घूरा, "तो क्या करूँ, हरामी?" राहुल ने हँसते हुए कहा, "कुछ नहीं, बस सुना है कि पैंटी पहनने से पसीना कम लगता है। आपकी अलमारी में वो काली पैंटी पड़ी थी, वही ट्राई कर लो न।" सोनी ने उसे थप्पड़ मारने की धमकी दी, "कुत्ते, मेरे कपड़ों में ताक-झांक करता है?" लेकिन राहुल की बात उसके दिमाग में अटक गई। गर्मी वाकई ज़्यादा थी, और साड़ी के नीचे पसीने से उसकी जाँघें चिपचिपी हो रही थीं। उसने सोचा कि शायद पैंटी पहनने से राहत मिले। शाम को उसने अलमारी खोली और वही काली पैंटी उठाई—जो राहुल ने मसाले से भरी थी। उसने उसे अपनी साड़ी के नीचे पहन लिया, पैंटी उसकी चूत और मोटी जाँघों से चिपक गई।रात 10 बजे सोनी अपने बिस्तर पर लेटी। उसकी साड़ी उसकी जाँघों तक सरकी हुई थी, और पैंटी उसकी चूत को कसकर पकड़े हुए थी। उसकी 34 की चूचियाँ ब्लाउज़ में साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। नींद की गोली का हल्का नशा उसकी आँखों को भारी कर रहा था। राहुल अपने कमरे में लेटा, लेकिन उसकी नज़र सोनी के दरवाज़े पर टिकी थी। उसने मन में कहा, "चाची, अब तुम्हारी पैंटी तुम्हारी चूत को चोदेगी।"रात 1 बजे, जब चाँद की रोशनी सोनी की जाँघों पर पड़ रही थी, वह नींद में करवट लेती है। पैंटी उसकी चूत से रगड़ खाती है। मूव की ठंडक उसकी चूत में सिहरन भर देती है—उसकी मोटी जाँघें सिकुड़ती हैं, फिर धीरे-धीरे फैलती हैं। फिर मूव की गर्मी उसकी चूत में आग सी लगा देती है, मिर्च की हल्की चुभन उसकी चूत को तड़पाने लगती है। शहद की चिपचिपाहट उसकी चूत को चिकना कर देती है, और पैंटी उसकी गीली चूत से चिपकने लगती है। सोनी की साँसें तेज़ हो जाती हैं, उसकी चूत में एक आग का गोला फटने को तैयार था। उसकी नींद में उसकी उंगलियाँ पैंटी के ऊपर उसकी चूत को रगड़ने लगती हैं। "आह... ये क्या हो रहा है..." उसकी सुस्त सिसकारी कमरे में गूँजती है, उसकी चूत से पानी टपकने लगता है।उसकी नींद आधी टूटती है, लेकिन उसका दिमाग अभी धुंध में डूबा है। उसे लगता है कि उसकी चूत में कोई गीला सपना चोद रहा है। वह अपनी साड़ी को खींचती है, पैंटी को एक झटके में उतार फेंकती है—उसकी मोटी गांड और चूत नंगी हो जाती है, गीली और चमकती हुई। पैंटी उसके हाथ में चिपचिपी थी, उसकी चूत का पानी उसमें रिस रहा था। उसकी 34 की चूचियाँ ब्लाउज़ में दब रही थीं, और उसने बटन फाड़कर उन्हें आज़ाद कर दिया। उसकी भारी चूचियाँ उछल पड़ीं, निप्पल सख्त और गहरे भूरे रंग में चमक रहे थे। वह बिस्तर पर लोटने लगी, उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी। उसने अपनी उंगलियाँ नंगी चूत में डाल दीं, तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगी। "राहुल... आह... नहीं... मेरी चूत..." उसकी सिसकारियाँ तेज़ हो गईं, लेकिन वह राहुल को नहीं देख रही थी—उसे लग रहा था कि उसकी चूत खुद ही उसे चोद रही है। उसकी मोटी गांड बिस्तर पर रगड़ खा रही थी, उसकी चूचियाँ हवा में लहरा रही थीं। उसकी चूत से पानी की पिचकारी निकली, और वह एक ज़ोरदार चीख के साथ झड़ गई— "आह... मेरी चूत... फट गई..." उसकी नंगी बॉडी काँप रही थी, उसकी गीली पैंटी बिस्तर पर पड़ी थी।राहुल दरवाज़े की झिरी से सब देख रहा था। उसका लंड पैंट में सख्त हो गया था, और उसकी आँखों में शरारत नाच रही थी। "चाची, तुम्हारी पैंटी ने तुम्हारी चूत को चोद डाला," उसने मन में सोचा। सोनी हाँफते हुए लेट गई, उसकी नंगी चूत और 34 की चूचियाँ चाँदनी में चमक रही थीं। उसकी साँसें अभी भी भारी थीं, और उसकी उंगलियाँ उसकी चूत पर चिपचिपी पड़ी थीं। राहुल चुपके से अपने कमरे में लौट आया, उसका लंड अभी भी सख्त था। अगली सुबह, सोनी उठी तो उसे रात का सब कुछ एक गीला सपना लगा। उसने गीली पैंटी और बिखरे कपड़े देखे, अपनी चूत को छुआ—वह अभी भी हल्की गर्म और गीली थी। "ये क्या था? शायद पैंटी की वजह से..." उसने सोचा और चाय बनाने चली गई। राहुल ने उसे देखा, उसकी आँखों में शरारत थी। "चाची, नींद कैसी थी?" उसने पूछा। सोनी ने उसे घूरा, "हरामी, चुप रह," लेकिन उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी कशिश थी, और उसकी चूत में फिर से हल्की आग सुलग उठी।
Bahut acche shuruaat
 

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सोनी की उस रात की तड़प राहुल के दिमाग से निकल नहीं रही थी। उसकी गीली पैंटी, नंगी चूत, और 34 की चूचियों की उछाल ने उसे पागल कर दिया था। सोनी उसे हरामी कहकर टाल देती थी, पर उसकी आँखों में वो कशिश राहुल की चूत में आग लगा रही थी। उसने ठान लिया कि नींबू और विक्स से सोनी की चूत को तरसाएगा, फिर अपने लंड से चोदकर उसकी सिसकारियाँ निकालेगा—ऐसा कि सोनी खुद लंड माँगे।

सुबह सोनी नहाने गई थी। उसकी साड़ी और ब्लाउज़ बाथरूम के बाहर पड़े थे, उसकी 34 की चूचियों की छाप ब्लाउज़ पर दिख रही थी। राहुल ने उसकी अलमारी से एक लाल पैंटी निकाली—पतली, चूत को कसने वाली। उसने सोचा, "चाची की चूत को नींबू की चुभन और विक्स की ठंडक से गीला करूँगा, फिर लंड से चोदूँगा।" उसने रसोई से एक नींबू काटा, उसका रस निचोड़ा, और कटोरी में डाला। विक्स की डिब्बी खोली, उसकी ठंडी महक ने उसके लंड को सख्त कर दिया। उसने नींबू के रस में एक चम्मच विक्स मिलाई, और पैंटी के उस हिस्से पर मला जो सोनी की चूत को चाटेगा। थोड़ा शहद टपकाया—चिपचिपाहट के लिए, ताकि चूत उसमें लिपट जाए। पैंटी को खिड़की के पास सूखने छोड़ दिया। दो घंटे बाद, पैंटी हल्की चिपचिपी हो गई—नींबू की खटास और विक्स की गंध हल्की थी। उसने पैंटी को अलमारी में ऊपर रख दिया।
दोपहर में राहुल सोनी के पास गया। वह आँगन में बैठी थी, उसकी साड़ी उसकी मोटी जाँघों से चिपकी थी, और उसकी चूचियाँ ब्लाउज़ में उभर रही थीं। राहुल ने कहा, "चाची, गर्मी में साड़ी से पसीना बहता है न? कल वाली पैंटी से चूत को राहत मिली थी?" सोनी ने घूरा, "कुत्ते, फिर वही बात?" राहुल ने हँसते हुए कहा, "लाल वाली पैंटी अलमारी में है, वो चूत को ठंडक देगी।" सोनी ने गाली दी, "हरामी, चुप रह," पर उसकी चूत में हल्की गुदगुदी थी। शाम को उसने अलमारी से वही लाल पैंटी निकाली और साड़ी के नीचे पहन ली। पैंटी उसकी चूत को कसकर चिपक गई, उसकी मोटी जाँघें उसमें दब गईं।रात 10 बजे सोनी बिस्तर पर लेटी।

उसकी साड़ी जाँघों तक सरकी हुई थी, लाल पैंटी उसकी चूत को जकड़ रही थी। उसकी 34 की चूचियाँ ब्लाउज़ में साँसों के साथ उछल रही थीं, निप्पल सख्त होकर दिख रहे थे। नींद की गोली का नशा उसकी आँखों को भारी कर रहा था। राहुल अपने कमरे में था, उसकी नज़र सोनी पर थी।रात 2 बजे, चाँद की रोशनी सोनी की जाँघों पर पड़ रही थी। वह नींद में करवट लेती है, पैंटी उसकी चूत से रगड़ खाती है। विक्स की ठंडक उसकी चूत में सिहरन भर देती है, नींबू की चुभन उसकी चूत को चाकू सी चुभती है, और शहद की चिपचिपाहट उसे गीला कर देती है। सोनी की साँसें तेज़ हो जाती हैं, उसकी चूत में आग का गोला फटने को तैयार था। उसकी उंगलियाँ पैंटी के ऊपर उसकी चूत को रगड़ने लगती हैं। "आह... मेरी चूत... जल रही है..." उसकी सिसकारी गूँजती है, उसकी चूत से पानी टपकने लगता है। उसकी नींद टूटती है, वह साड़ी खींचती है, पैंटी उतार फेंकती है—उसकी मोटी गांड और चूत नंगी हो जाती है, गीली और लाल। उसने ब्लाउज़ फाड़ा, उसकी 34 की चूचियाँ उछल पड़ीं, निप्पल सख्त और गहरे भूरे रंग में चमक रहे थे। वह अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर मसलने लगी, उसकी मोटी गांड बिस्तर पर रगड़ खा रही थी। "आह... राहुल... मेरी चूत..." उसकी सिसकारियाँ तेज़ हो गईं।तभी राहुल अचानक दरवाज़ा खोलकर अंदर आ गया।

उसकी पैंट पहले से उतरी हुई थी, उसका सख्त लंड हवा में लहरा रहा था। सोनी चौंकी, उसकी उंगलियाँ चूत में अटकी थीं, उसकी चूचियाँ नंगी चमक रही थीं। राहुल हँसते हुए बोला, "चाची, चूत में इतनी खुजली है कि नींद में भी उंगलियाँ डाल रही हो? देखो, मेरा लंड तैयार है।" सोनी चिल्लाई, "हरामी, कुत्ते, बाहर निकल!" पर उसकी चूत गीली थी, उसकी जाँघें काँप रही थीं। राहुल बिस्तर पर चढ़ गया, उसकी मोटी जाँघें फैलाईं, और उसकी चूत को चाटने लगा। सोनी की चूत से नींबू और शहद की महक आ रही थी, राहुल ने जीभ अंदर डाली, "चाची, तुम्हारी चूत तो रसीली मिठाई है।" सोनी गालियाँ देती रही, "कुत्ते... हरामी... आह... मत चाट..." पर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, उसकी गांड हिलने लगी।राहुल ने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा, "चाची, पैंटी मैंने तैयार की थी। अब लंड से चूत की आग बुझाऊँगा।" सोनी चीखी, "हरामी, तुझे शर्म नहीं? निकाल... आह..." पर उसकी चूत लंड को अंदर खींच रही थी। राहुल ने एक झटके में लंड उसकी चूत में ठूँस दिया, सोनी की चूत टाइट थी, उसकी चीख निकल गई, "आह... कुत्ते... फट गई..." राहुल हँसते हुए बोला, "चाची, गाली देती हो पर चूत तो लंड चूस रही है।" वह ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा, सोनी की 34 की चूचियाँ उछलने लगीं, निप्पल हवा में चमक रहे थे। सोनी गालियाँ देती रही, "हरामी... कुत्ते... आह... चोद और ज़ोर से..." उसकी मोटी गांड बिस्तर पर धक्के खा रही थी, उसकी चूत से पानी बह रहा था।

राहुल ने उसकी चूचियाँ पकड़कर मसलीं, निप्पल चूसे, और बोला, "चाची, तुम्हारी चूचियाँ दूध की थैली हैं।" सोनी सिसकारी लेती रही, "आह... कुत्ते... चूस... मेरी चूत चोद..." उसकी चूत टाइट हो गई, वह ज़ोर से झड़ गई, उसकी चूत से पानी की पिचकारी निकली, बिस्तर गीला हो गया।राहुल ने उसकी चूत को और चोदा, उसकी गांड को थप्पड़ मारे, "चाची, अब गांड भी मारूँगा।" सोनी हाँफते हुए बोली, "हरामी... बस चूत चोद... आह..." राहुल ने अपना माल उसकी चूत में छोड़ दिया, "चाची, ले मेरा रस, चूत को भर दूँगा।" सोनी की चूत से रस टपक रहा था, वह हाँफते हुए नंगी लेट गई। उसकी 34 की चूचियाँ चमक रही थीं, उसकी गीली चूत लाल और खुली पड़ी थी। उसने राहुल को देखा, "कुत्ते, तूने मुझे चोदकर बर्बाद कर दिया," और मज़े से करवट लेकर लेट गई।

उसकी चूत से रस बिस्तर पर बह रहा था, उसकी साँसें भारी थीं। राहुल हँसा, "चाची, मज़ा आया न? अगली बार लंड और गहरा डालूँगा।" वह अपने कमरे में चला गया।अगली सुबह, सोनी उठी, उसकी चूत और चूचियाँ सुलग रही थीं। उसने राहुल को देखा, "हरामी, अब क्या करेगा?" राहुल मुस्कुराया, "चाची, अगली बार चूत और गांड दोनों चोदूँगा।" सोनी ने गाली दी, "कुत्ते," पर उसकी चूत फिर गीली हो गई। यह खेल अब और गहरा हो गया था—सोनी की चुदाई और राहुल की चालाकी का

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गंदा मेल।
 

Aryan Raj

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Nice update
 
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