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Incest कैसे कैसे परिवार

prkin

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prkin

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Thanks Mass. Hope to be back sometime
Congrats Bhai for your story getting 19+ L views!!

बहुत दिनों से स्टोरी पे उपदटेस नहीं है..फिर भी बहुत पॉपुलर है. अगर रेगुलर उपदटेस होते तो it might have clicked 50L views by now!!

Hearty Congrats though!!


prkin
 
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Mass

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prkin

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हेलो मित्रों,

मैं एक बार फिर से लिखना आरम्भ करना चाहता हूँ.

मेरी इच्छा है कि मैं पहले ससुराल की नई दिशा को आगे बढ़ाऊँ।

कैसे कैसे परिवार में मैं अटका हुआ हूँ. कई परिदृश्यों में से किसको चुनूँ समझ नहीं पा रहा हूँ. इसीलिए उस पर बाद मैं लौटूँगा।

मामी का ट्रेनिंग भी आगे बढ़ाने का विचार है.

और एक और कथा जो किसी राज परिवार से सम्बन्धित हो उसे भी लिखना चाहता हूँ.

तो आप अपने विचार बताएं. कैसे कैसे परिवार को अभी छोड़ दें.

कुछ समय में इस पर कार्य आरम्भ करूँगा.

संतोषजनक और पर्याप्त प्रतिक्रिया मिलने के पश्चात ही मैं आगे बढूँगा।
 
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Mass

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हेलो मित्रों,

मैं एक बार फिर से लिखना आरम्भ करना चाहता हूँ.

मेरी इच्छा है कि मैं पहले ससुराल की नई दिशा को आगे बढ़ाऊँ।

कैसे कैसे परिवार में मैं अटका हुआ हूँ. कई परिदृश्यों में से किसको चुनूँ समझ नहीं पा रहा हूँ. इसीलिए उस पर बाद मैं लौटूँगा।

मामी का ट्रेनिंग भी आगे बढ़ाने का विचार है.

और एक और कथा जो किसी राज परिवार से सम्बन्धित हो उसे भी लिखना चाहता हूँ.

तो आप अपने विचार बताएं. कैसे कैसे परिवार को अभी छोड़ दें.

कुछ समय में इस पर कार्य आरम्भ करूँगा.

संतोषजनक और पर्याप्त प्रतिक्रिया मिलने के पश्चात ही मैं आगे बढूँगा।
भाई ये तो बहुत बढ़िया खबर दी है आपने. कैसे कैसे परिवार तो थोड़ा complex स्टोरी है और आप इतने दिन बाद आये हो तो ज़ाहिर है की उसको सोचने के लिए थोड़ा टाइम चाहिए रहेगा. तो ससुराल की नई दिशा को ही आगे बढ़ाइए. और आप जो और २ कहानियों के बारे में लिखा है उसे भी आरम्भ करे. इंतज़ार में ...

prkin
 
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prkin

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मेरे विचार से ससुराल की नयी दिशा को आगे बढ़ाता हूँ. दूसरी कहानी पर अगर समय मिला तो लिखने के बाद देखूँगा।
कुछ समय लगेगा.
 
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prkin

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अभी ससुराल-की नयी दिशा कहानी को पढ़ा जा रहा है. उसके बाद अगला अपडेट दूँगा। हालाँकि मन में अगले अपडेट की रुपरेखा बन चुकी है.
 
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prkin

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अगले सप्ताह से ससुराल की नयी दिशा के अपडेट आएँगे।
 
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prkin

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ससुराल की नई दिशा के पुराने अध्याय पढ़ लिए हैं. अब आगे की कहानी चलेगी. अगला अध्याय शीघ्र आएगा. परन्तु अपडेट छोटे रहेंगे.
 

rkhedekar

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कैसे कैसे परिवार

प्रस्तावना

एक बड़े शहर में एक सुंदर कॉलोनी थी. मात्र ८ घर ही घर थे इस कॉलोनी में. इनके स्वामी अधिकतर या तो व्यवसाई थे या ऊँचे पद पर काम करने वाले प्रतिष्ठित व्यक्ति. पुरुषों की एक मित्र मंडली थी, और महिलाओं की किटी. आठों भवन दो पंक्तियों में थे. एक ओर इन्होने एक जिम, स्पोर्ट्स हाल और स्विमिंग पूल बनवाया था, और दूसरी ओर एक दो मंज़िला भवन जिसमे लगभग ४०० लोगों की पार्टी आराम से हो सकती थी. इसमें ही एक किचॅन था. पहले रेस्तराँ खोलने का प्लान था पर इतने कम लोगों के लिए उसका कोई औचित्य नहीं था. परन्तु किटी पार्टीस और जेंट्स पार्टीस यहीं होती थीं. हालाँकि सब अच्छे दोस्त थे पर एक दूसरे के जीवन में कोई हस्तक्षेप नहीं करता था. ये पार्टीस ही थीं जिनमें कुछ बातें सामने आती थीं. पर कभी भी इस कमरे से बाहर किसी ने इसको दोबारा नहीं बोला.

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६ लोग इन दोनों की प्रबंधन के लिए रखे थे, और एक सेक्यूरिटी एजेन्सी पहरेदारी के लिए.

अब क्योंकि इस कॉलोनी का कोई नाम भी होना चाहिए, तो हम इसे "संभ्रांत नगर" से बुला लेंगे. ये अलग बात है कि पर्दे के पीछे झाँकने पर कुछ और ही मिलेगा.

हम अब हर घर का लेखा जोखा लेंगे और देखेंगे की उन घरों में कब कब क्या क्या खेल खेले जाते हैं.



अध्याय १ पहला घर: अदिति और अजीत बजाज १


इस घर में वैसे तो चार ही लोग रहते हैं, पर कुछ महीनों से अजीत की माँ शालिनी बजाज भी यहीं आ गई थीं. अपने पति के देहांत के बाद तीन साल तो उन्होंने काट लिए, पर अजीत की बहुत ज़िद के कारण उन्होंने अपना घर बेचकर यहीं रहना शुरू कर दिया था. अब लगभग साल भर निकालने के बाद वो अपने निर्णय से बहुत संतुष्ट थीं. न सिर्फ़ अदिति उनका अत्यधिक आदर सम्मान करती थी, बल्कि बच्चों के साथ रहने से उनका अकेलापन भी अब उन्हें सताता नहीं था. अजीत तो दिन में हमेशा बाहर ही रहता था, पर दोनों सास बहू की खूब पटती थी.


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अदिति के बेटी अनन्या और बेटा गौतम भी अपनी दादी का बहुत ध्यान रखते थे. दोनों में बस १.५ साल का अंतर था और कॉलेज में थे. गौतम अनन्या से बड़ा था.

कुछ ही दिन पहले अदिति का एक ऑपरेशन हुआ था जिससे उसको शारीरिक संबंध बनाने की ३ महीने की मनाही थी. अजीत उसे पहले हफ्ते में लगभग तीन से चार दिन चोदता था, पर इस ऑपरेशन ने उस पर अंकुश लगा दिया था. अदिति और गौतम कई बार अपने दोस्तों के घर रुक जाते थे, उनके भी दोस्त ऐसा ही करते थे. सप्ताह में एक दिन तो वो बाहर ही रहते थे. आज भी वो अपने दोस्तों के साथ बाहर थे.

आज शाम को अजीत अपने कार्यालय से घर पहुँचा और मुंह हाथ धोकर अदिति के साथ सोफे पर बैठ गया. अदिति ने उसे उसकी मनपसंद ड्रिंक हाथ में थमाई और एक अपने लिए भी ले ली. तभी किचन से शालिनी भी अपनी ड्रिंक के साथ आ गई. इस प्रकार से एक साथ मदिरा सेवन सामान्य घटना थी. तीनों पूरे दिन में घटित घटनाओं की बातें करने लगे. ड्रिंक्स का एक और राउंड होने के बाद सब खाने के लिए बैठ गये. अजीत को इस सबमें कुछ योजना दिख रही थी. पर वो शांत रहा और उचित समय की प्रतीक्षा करने लगा. खाने के बाद अदिति ने एक और ड्रिंक की बात की तो अजीत चौंक गया. पर उसने हामी भारी और जाकर सोफे पर बैठ गया. तीनों फिर अपनी ड्रिंक्स की चुस्कियाँ लेने लगे.

"हनी, मेरे ऑपरेशन के समय से अपने बहुत धैर्य रखा है." ये कहते हुए उसने अजीत के हाथ में एक गोली थमा दी. गोली देखते ही अजीत सकपका गया.

"पर तुम्हें तो अभी २ महीने तक कुछ भी नहीं करना है." अजीत ने अदिति की ओर देखकर कहा. वो अपनी माँ को भी कनखियों से देख रहा था क्योंकि ये पति और पत्नी के बीच का संवाद था जिसे अदिति उसकी माँ के सामने ही उदित कर रही थी.

"वो तो है. पर मैं चाहती हूँ कि अब मैं भी तुम्हारी और शालिनी की प्रेम कहानी में भागीदार बन जाऊं."
अजीत का दिमाग़ चक्कर खाने लगा. उसकी पत्नी उसकी माँ को नाम से पुकार रही थी. न सिर्फ़ इतना बल्कि उसे संभवतः उन दोनों के बारे में पता था. अजीत ने अपनी माँ को ओर नज़र डाली तो वो मुस्कुरा रही थी.

"मैं तुम्हें हमेशा कहती हूँ कि मुझे इस घर में बहुत प्यार मिला है." शालिनी उठकर अदिति के पास बैठ गई और उसके होंठ चूम लिए. "अदिति को अपने बारे में मैने ही बताया, पर शायद तुम्हें हम दोनों के बारे में कुछ नहीं पता." शालिनी ने फिर से अदिति को चूमते हुए कहा.

"मैने तुम्हारे लिए एक अविस्मरणीय रात्रि शाम का प्रबंध किया है."

इस बार अजीत का ध्यान अपनी माँ की ओर गया, अभी तक उसने ध्यान नहीं दिया थे पर वो इस समय बहुत सुंदर लग रही थी. वो अपने शरीर का बहुत ध्यान रखती थी और इस आयु में भी लोगों को आकर्षित कर सकती थी. अजीत के दिमाग़ पर छाई धुन्ध छटने लगी और उसे योजना का अनुमान होने लगा. उसने बेध्यानी में अपने हाथ की गोली तो एक सिप के साथ खा लिया.

अब ऐसा नहीं था की अजीत इन तीन हफ्तों में सेक्स से वंचित रहा था. वो हफ्ते दो बार तो अपनी सेक्रेटरी को चोद लेता था. इसका लाइसेन्स उसे अदिति ने ही दिया था. दरअसल दोनों काफ़ी खुले विचारों के थे. जब वो कहीं बाहर जाता तो उसे और अदिति के बाहर जाने पर अदिति को कुछ सीमा तक दूसरों को चोदने की छूट थी. पर वो ऐसा कम ही करते थे. वो सोचता था कि अपनी माँ के साथ संबंधों का अदिति को भी पता नहीं था.

"बेडरूम में चलें?" अदिति ने अचंभित अजीत का हाथ पकडकर उसे उठाया और अपनी सास को साथ आने का इशारा किया.

बिस्तर के पास पहुँचकर अदिति ने उसे जोरदार चुंबन दिया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया.

"माँ जी, आइए." अदिति बोली.

उन दोनों ने मिलकर कुछ ही क्षणों में अजीत को नंगा कर दिया. अजीत का शरीर काफ़ी गठा हुआ था. जो गोली उसने खाई थी उसके असर से उसका लंड भी बुरी तरह से तना हुआ था. अदिति घुटनों के बल बैठ गई और उसने अजीत का लंड अपने मुँह में भर लिया और पूरे ज़ोर शोर से चूसने लगी. अजीत ने कनखियों से देखा तो उसकी माँ अपने कपड़े उतार रही थी और जल्दी ही वो भी नंगी हो गई. उसने अजीत के चेहरे की ओर आकर अजीत के मुँह पर अपनी पसीजी हुई चूत को रख दिया. अजीत उसकी चूत को चूसने लगा. जल्दी ही उसने अपनी जीभ अंदर डाल दी और घुमाने लगा. नीचे अदिति उसके लंड को चूस रही थी और ऊपर वो शालिनी की चूत.

"माँ जी, आपका बेटा तैयार है सवारी के लिए. चढ जाइए."
"और तुम?"
"मुझे ज़्यादा तनाव नहीं लेना है. मैं आपकी जगह ले लेती हूँ."

ये कहते हुए, अदिति ऊपर आ गई और शालिनी ने अजीत का भारी मोटा लंड अपने हाथ में लिया. २ मिनट के लिए चूसा और फिर दोनों ओर पाँव फैलाकर अपनी रसीली चूत को उस पर उतार दिया. अदिति ने थोड़ा संभाल कर अपनी चूत को अजीत के मुँह पर रखा, अजीत की जीभ फिर हरकत में आ गई. पर अदिति के लिए इसमे थोड़ी मुश्किल हो रही थी. सो वो हट गई और एक तरफ बैठकर अपनी चूत को सहलाने लगी. अजीत को देखकर अच्छा नहीं लगा.

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अदिति ने थोड़ा संभाल कर अपनी चूत को अजीत के मुँह पर रखा, अजीत की जीभ फिर हरकत में आ गई. पर अदिति के लिए इसमे थोड़ी मुश्किल हो रही थी. सो वो हट गई और एक तरफ बैठकर अपनी चूत को सहलाने लगी. अजीत को देखकर अच्छा नहीं लगा.

उसने जानने के लिए पूछा, "तो तुम दोनों का क्या रहस्य है."

"हम दिन में एक दूसरे को सुख देते हैं." माँ ने बड़े नपे तुले शब्दों में कहा. अजीत को हँसी आ गई.

"अपने बेटे से यहाँ नंगी होकर अपनी बहू के सामने चुदवा रही हो और बातें ऐसी जैसे कोई सती सावित्री हो. कोई बात नहीं मैं समझ गया."

"अदिति, आओ तुम यहाँ लेट जाओ और माँ को तुम्हें सुख देने दो और मैं उन्हें घोडी बनाकर सुख दूँगा" अजीत ने व्यंग्य से कहा.

अदिति और शालिनी की हँसी छूट गई. पर शालिनी हट गई और उसने अदिति को बिस्तर पर लिटा दिया. खुद घोड़ी बनकर, अदिति की चूत में अपना मुँह घुसा दिया. पीछे से अजीत ने उसकी चूत में लंड पेल दिया.

"ओह, माँ ! तुम्हारी चूत की अब भी कोई तुलना नहीं है ." अजीत ज़ोरदार धक्के लगता हुआ बोला.

शालिनी भी पूरी मस्ती से इस तबाड़तोड़ चुदाई का आनंद ले रही थी. उसका मुँह उसकी बहू के चूत में था और अपनी जीभ पूरी अंदर कर रखी थी. अदिति भी इस समय एक अलग ही लोक में थी. अजीत ने ये दृश्य कभी सपने में भी नहीं सोचा था.उसने अपने धक्कों की गति तेज़ कर दी.

"अओऊउघह" अजीत की आँखों के आगे तारे से नाचने लगे. उसे अपने लंड में एक जबरदस्त फुलाव महसूस हुआ. वो झडने लगा था और उसने अपनी माँ की चूत में अपना रस भर दिया. ये दुनिया का संभवतः सबसे नीच काम था पर वो तीनों अपने वासना में ऐसे रंगे हुए थे कि इस सुख के आगे उन्हें कुछ न दिख रहा था. तभी अदिति और शालिनी का भी पानी छूट गया. शालिनी बेझिझक अपनी बहू का स्वादिष्ट रस पी गई. अदिति भी इस समय निढाल सी हो गई.

"अपने पति और मेरे रस का एक साथ स्वाद लोगी?" शालिनी ने अदिति की चूत पर एक चुंबन लेते हुए पूछा.
अदिति की आँखों में एक चमक आ गई.

"क्यों नहीं"

"तुम लेटी रहो, मैं तुम्हारे मुँह में सीधे परोसती हूँ." ये कहकर उसने अजीत को हटने को कहा और अपने दोनों पाँव अदिति के सिर के पास रखकर अपनी चूत को उसके मुँह से लगा दिया.


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अदिति सडप सडप कर शालिनी की चूत से बहता हुआ रस गटक गई. तीनों एक संतुष्टि का अहसास करते हुए एक दूसरे से लिपट गए.

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"आई लव यू" तीनों के मुँह से एक साथ निकला.

तीनों हँसते हुए आगे आने वाले नये रोमांच के बारे में सोचते हुए सो गये.


कुछ दिनों बाद:

रात के १ बजे अदिति की नींद खुली तो उसने देखा की वो अकेली है. वो बाथरूम गई, और लौट कर बिस्तर पर आकर लुढ़क गई. दोबारा नींद लगने से पहले उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आयी ये सोचकर कि अजीत शायद शालिनी के कमरे में चला गया होगा. माँ बेटे का दिल नहीं भरा होगा और वो उसकी नींद न टूटे इस कारण दूसरे कमरे में चले गए होंगे.

शालिनी के कमरे में वही चल रहा था जैसी अदिति ने कल्पना की थी. अजीत लेटा हुआ था और उसकी माँ उसके ऊपर चढ़कर उसका लंड चूस रही थी. इस समय शालिनी की चूत अजीत के मुंह पर सटी थी जिसे वो बहुत प्यार और जोश से चाट रहा था. शालिनी को अपनी चूत चटवाने और चुसवाने में बहुत आनंद आता था. जब उसके पति जीवित थे तो वो घंटों उसकी चूत में छुपे रहते थे. उसके इसी प्रेम के कारण शालिनी अब मौखिक सहवास की इतनी आदी हो गई थी कि उसका दिन बिना इस क्रीड़ा के निकलता ही नहीं था. जब अजीत लगभग २० वर्ष का था तो एक बार शालिनी ने उसे कमरे में झांककर अपने पिता के इस कार्य में रत देख लिया था. शालिनी ने तब ये निश्चय किया था कि वो अजीत को वो सब गुर सिखाएगी जिससे वो किसी भी स्त्री को हर प्रकार से संतुष्ट कर सके.

और एक दिन जब उसके पति टूर पर बाहर थे उसने अवसर देखकर अजीत को ये प्रशिक्षण देने का प्रण किया था.

और उस रात शालिनी ने अजीत को रात भर चूत चाटने का प्रशिक्षण दिया. पर उसने अजीत के लंड को छुआ तक नहीं. अगले दिन अजीत की हालत ख़राब थी, एक तो रात भर का परिश्रम और उस पर उसे कोई झड़ने का समय जो नहीं मिला. उसने एक दो बार मुठ मारी और खाना खाने के बाद सो गया. रात में फिर शालिनी के उसे अपने कमरे में बुला लिया और इस बार माँ बेटे ने एक दूसरे की चूत और लंड चाटे और चूसे. और तीसरी रात में शालिनी ने उसे अपनी चूत में प्रवेश दिया. जवान लड़का रात में ५ बार अपनी माँ को चोदकर सोया था. अगले दिन ही शालिनी के पिता वापिस आने वाले थे और इस रात शालिनी ने उसे गांड चाटना सिखाया और अंततः प्रशिक्षण की अंतिम सीढ़ी पार कराते हुए उसके लंड को अपनी गांड की यात्रा भी करा दी.

अपने पति के आने के बाद अब अजीत और शालिनी जब समय मिलता तब इस नैसर्गिक सुख में लिप्त हो जाते थे. ४ साल बाद अजीत का विवाह अदिति से हो गया और इस सम्बन्ध पर विराम लग गया. अजीत अब कभी कभार ही अकेला आ पाता था. लगभग २० साल इसी तरह निकल गए और शालिनी के पति का स्वर्गवास हो गया. शालिनी अब इस अकेलेपन में बहुत दुखी रहने लगी थी. अजीत और अदिति से जब बात होती तो वो उसके इस दर्द को समझ लेते थे. एक दिन अदिति गयी और जिद करके शालिनी को अपने साथ ले आई। २ महीने निकलने के बाद अंततः शालिनी ने यहीं रहने का निर्णय लिया. इस दो महीनों में माँ बेटे के सम्बन्ध दोबारा स्थापित हो चुके थे. अजीत ने शालिनी का घर बेचकर उसके खाते में जमा कर दिए. अब शालिनी के पास धन और परिवार दोनों थे. उसका मन और तन दोनों खिल गए. चढ़ता हुआ बुढ़ापा जैसे लौटने लगा था.

इसी बीच शालिनी ने राधा को अपना हमराज बनाया और राधा से सुबह सुबह अपनी चूत और गांड चटवा कर संतुष्ट हो जाती. पर इसकी भनक अदिति को लग गई क्योंकि जब एक दिन राधा शालिनी के कमरे से बाहर निकली तो अदिति ने उसे किसी काम के लिए बुलाया. उसके मुंह और उँगलियों से चूत की सुगंध आते ही वो सब समझ गई. अदिति ने अपनी सास के पास जाकर उनसे पूछा तो शालिनी घबरा गई, की वो अब कहाँ जाएगी.

"माँ जी, आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है. पर क्या आप चूत केवल अपनी ही चटवाती हो या दूसरे की भी चाटती हो."
शालिनी ने माना की उसने अभी तक कभी चूत चाटी नहीं है.
"ठीक है, माँ जी. वो अब मैं आपको सिखाऊंगी." कहकर अदिति ने अपने कपडे उतारे और पांव फैलाकर शालिनी को बुलाकर काम पर लगने को कहा.
"माँ जी आप जैसे चटवाती हो, बस वैसे ही करो."

उस दिन से शालिनी के जीवन में और बहार आ गई. सुबह राधा, दोपहर अदिति, और अवसर के अनुरूप अजीत उसके शरीर की प्यास बुझाने लगे. जब अदिति का ऑपरेशन हुआ तो शालिनी ने अजीत को आराम देने के लिए अपना शरीर प्रस्तुत कर दिया. इसमें अदिति की सहमति थी हालाँकि अजीत को इसका ज्ञान नहीं था. वो हफ्ते में २ बार अपनी सेक्रेटरी को चोद लेता था, पर अपनी माँ को वो कभी भी मना नहीं कर पाया.

यही वो समय है जहाँ हम इस परिवार से मिले थे.

घर के सर्वेंट क्वार्टर में इस समय राधा अपने पति गोकुल का लंड चूस रही थी. गोकुल बिस्तर पर लेटा हुआ था और राधा के मुंह का आनंद ले रहा था.

गोकुल ने राधा से पूछा, "बड़ी मालकिन ने क्यों बुलाया था आज तुझे?"

"जिस काम के लिए हमेशा बुलाती है."

ये सुनते ही गोकुल के लंड में तनाव और बढ़ गया.

"पर बुलाती क्यों हैं तुझे ? और वहां से लौटकर तू मुझसे चुदने के लिए बहुत अधीर रहती है."

राधा ने अपना दायाँ हाथ बढ़ाया और गोकुल की नाक से लगाया. गोकुल ने बिना कुछ जाने एक गहरी साँस ली तो उसकी नाक में चूत की खुशबू भर गयी."

"तू अपनी चूत मुझे क्यों सुंघा रही है?"

"इतने साल में तुझे क्या मेरी चूत की खुशबू भी नहीं पता?"

गोकुल ने फिर सूंघा तो ये गंध राधा की चूत से अलग थी.

"तू बड़ी मालकिन की चूत चोद कर आयी है क्या."

"हाँ, मेरे राजा. बेचारी इस उम्र में भी बहुत प्यासी है. सुबह इसीलिए बुलाती है जिससे उसे एक दो बार झड़ा देती हूँ तो उनका दिन अच्छा निकलता है. पर उनकी चूत चूसने में मजा बहुत आता है."

"तुझे तो लंड हो या चूत कुछ भी चुसवा लो, मजा ही आता है."

"सच कहा, पर आज का उनका स्वाद अलग था."

"कैसे?"

"उसमे मर्द के पानी का भी स्वाद था. लगता है रात में चुदवाई है किसी से."

"पर घर में तो कोई दूसरा आदमी आया नहीं. फिर?"

"घर वाला ही कोई रहा होगा." राधा अर्थपूर्ण ढंग में बोली.

"घर वाला ?" अचानक गोकुल के पसीने छूट गए. "सुन ये किसी से कहना नहीं. हमारी नौकरी खतरे में आ जाएगी."

"मुझे पता है. अब तेरा लंड तैयार है. पेल दे मेरी चूत में."

ये कहकर राधा पांव फैलाकर लेट गयी और गोकुल उसे चोदने में व्यस्त हो गया.

************

शालिनी, अदिति और अजीत इस बात से अनिभिज्ञ थे की कल रात का खेल गौतम ने देख लिया था. रात में जब बीच में उसकी नींद खुली तो उसने पाया कि उसके कमरे में पीने का पानी नहीं है. जब उसने किचन में जाने के लिए कमरे का दरवाजा खोला ही था कि उसने पापा और दादी को दादी के कमरे में घुसते हुए देखा. पर सबसे बड़े अचरज की बात ये थी कि दोनों ने अपने कपडे पहने नहीं थे बल्कि हाथ में लिए हुए थे. अपनी दादी की मटकती गांड देखकर गौतम के लंड में तनाव आ गया. वो पानी के लिए किचन में गया और एक बोतल भर कर ले आया.

पूरे समय उसके दिमाग में यही घूम रहा था कि चक्कर क्या है. उसे कुछ बातें तो समझ आ रही थी.

१. पापा और दादी के सम्बन्ध उतने पवित्र नहीं जैसे दिखते हैं.
२. उसकी माँ को या तो पता है या वो भी इसमें शामिल हैं.

और उसने इस संदेह को दूर करने का निश्चय किया. और संभवतः अपने लिए एक या दो नई चूतों की उपलब्धि. यही सोचकर उसने अगले दो तीन दिन घर में ही रहने का निश्चय किया और अपनी दादी की दिनचर्या को समझा. दूसरे दिन उसने चूतों की संभावित सूची में राधा का नाम भी जोड़ दिया. उसने ये समझा कि राधा के जाने के लगभग आधे घंटे बाद दादी किचन में जाती है और दो घंटे वहीँ रहती हैं उसकी मम्मी के साथ. फिर यही क्रम शाम पांच बजे दोहराया जाता है, पर इस समय दादी ३ घंटे से अधिक अपने कमरे से बाहर रहती है. गौतम ने दादी के कमरे में गुप्त कैमरे लगाने का निश्चय किया.

उसने अगले दो दिन दोपहर को दादी के कमरे में जाकर उनसे बातें कीं और ये ताड़ने का प्रयास किया कि कैमरे कहाँ सही बैठेंगे. अंत में उसने तीन कैमरे का स्थान सुनिश्चित किया। अब बारी थी कैमरे खरीदने और फिर लगाने की. HD कैमरे जो केवल बैटरी से चलते हैं और साउंड भी रिकॉर्ड करते हैं, इस के लिए सबसे उपयुक्त थे. मंहगे होने के बाद भी गौतम ने उन्हें ख़रीदा और समझा कि किस प्रकार लगाया और प्रयोग किया जाता है. इसके लिए उसने तीन दिन अपने कमरे में इसका अभ्यास किया. जब उसने ये जान लिया की वो तीनों कैमरे २ घंटे के अंदर लगा सकता है, तब उसने अगले दिन शाम को (जब तीन घंटे कमरा खाली रहता है) कैमरे लगाने का निश्चय किया.

अगले दिन उसने सफलता पूर्वक कैमरे लगा दिए और अपने कमरे में चेक भी कर लिया. अब वो तैयार था.

************

अगले दिन गौतम अपने काम से दो दिन के लिए बाहर चला गया. और लौटने के बाद उसका ध्यान अपने कमरे में रिकॉर्डर पर ही था जहाँ दो दिन के उसकी दादी के कमरे के वीडियो रिकॉर्ड हुए पड़े थे. रात को खाना होने के बाद उसने सबसे कहा कि वो सोने जा रहा है. अपने कमरे में जाकर उसने रिकॉर्डर को टीवी से लगाया और ब्लू टूथ एयरफ़ोन अपने कानों में लगाकर पहले कमरे के वीडियो को चालू कर दिया. वीडियो पहले दिन रात का था.

************



क्रमशः
Super 👍
 
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