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Incest सबकी प्यारी..गरिमा हमारी

Seema P Love

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Update 10 सहेली के पापा-B

अब तक आपने पढ़ा:
मैंने हैरानी से ज्योति को देखा तो ज्योति ने मुस्कुराते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया।
और धीरे से कान में बोली- यहां खड़े होकर मजे लोगी या अपने कमरे में चलें?

मैं बिना बोले फिर अंकल-आंटी को देखने लगी.
मेरी निगाह ही नहीं हट रही थी.
तभी ज्योति ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों दबे पैर उसके रूम में चली आई।

अब आगे:

रूम में आने के बाद ज्योति अपने कपड़े बदलने लगी और उसने जींस उतार कर स्कर्ट पहन ली।


मैं उसी तरह हैरान बैठी थी।

ज्योति आंख मारती हुई मुझसे बोली- आज तो तेरी किस्मत ही खुल गई.
मैंने कहा- कैसे?
वो बोली- पहले तो रास्ते में तुझे लंड के दर्शन हुए अब घर आते ही चुदाई देखने को मिल गई.

मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कहां देख पाई … तू यहां खींच कर लेती आई. चल ना देखते हैं क्या कर रहे हैं वे!
ज्योति बोली- अरे थोड़ा धैर्य रखो बाबा … क्यों कवाब में हड्डी बनाने जा रही हो … बेचारे मजे कर रहे हैं, कर लेने दो ना!

मैंने कहा- एक बात बता … तू आज पहली बार अपनी मम्मी पापा को ये करते देख रही है या इसके पहले देख चुकी है?
ज्योति मुस्कुराते हुए बोली- कई बार देखा है.

मैंने हैरानी से पूछा- सच में? तब तो तूने अपने पापा का लंड भी देख होगा?
ज्योति बोली- और नहीं तो क्या … एकदम मस्त मोटा और लंबा है।


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मैं बोली- अरे कितनी बेशर्म है तू यार, कैसे अपने पापा के बारे में बोल रही है।
इस पर वह बोली- अरे इसमें बेशर्म की क्या बात है. तूने पूछा तो मैंने जो सच था, वो बता दिया।

ज्योति बोली- तुझे देखना है क्या पापा का लंड … देखना हो तो बता?
मैंने पूछा- वो कैसे?

ज्योति बोली- अरे ये सब तू मुझ पर छोड़ … बस तू बता कि देखना चाहती है या नहीं … एकदम मस्त लंड है मोटा सा!
मैं आंख मारती हुई बोली- नेकी और पूछ-पूछ, चल दिखा!

ज्योति मेरा गाल खींचते हुए बोली- अरे वाह मेरी रानी … बहुत मन कर रहा है तेरा लंड देखने का? आज तो तुझे लंड का दर्शन करा कर भेजूंगी घर!
मैंने फिर हैरानी से पूछा- मगर कैसे यार?
ज्योति बोली- ये सब तू मुझे पर छोड़ दे … तू बस चुपचाप बैठी रह!

इतने में ज्योति की मम्मी की आवाज़ लॉबी से आई.
शायद वे लोग चुदाई कर चुके थे।


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ज्योति बोली- लगता है काम ख़त्म हो गया।
मैंने कहा- तू कैसे बताएगी उन्हें कि हम यहां कब आयी?
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अभी बता देती हूं. इसमें कौन सी डरने वाली बात है।’

अभी मैं कुछ कहती, तभी ज्योति ने कमरे के दरवाजे पर जाकर अपनी मम्मी को आवाज दी और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली- अरे मम्मी काम हो गया हो तो गरिमा को नाश्ता पानी दे दो … बेचारी कब से प्यासी बैठी है!

जैसे ही आंटी अंकल को पता चला कि हम लोग घर में ही हैं तो अंकल की तो कोई आवाज नहीं आई।
मगर आंटी हंसती हुई कमरे के पास आईं और ज्योति के बाल खींचती हुई बोलीं- बदमाश, तुम लोग कब से आकर चोरों की तरह बैठी हो?


आंटी ने आगे से खुला वाला नाइट गाउन पहना हुआ था और कमर के पास कपड़े रिबन से बांधा था. अगर रिबन खोल दो आंटी आगे से पूरी नंगी हो जाती।

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ज्योति अपने बाल छुड़ाते हुए हंसकर बोली- बस आप और पापा जब अपना काम ख़त्म करने वाले थे, उसके थोड़े पहले ही हम दोनों आई थी.
आंटी तब तक कमरे में आ चुकी थीं।

ववे मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई, बोली- बेटी, तू सीधी-सादी लड़की है इसके (ज्योति) के चक्कर में मत पड़, वरना बिगड़ जाएगी।
मैं हंसने लगी।

इस पर ज्योति बोली- मम्मी तुम इसे सीधी कब से समझने लगी, पता है मैं तो यहां आकर बैठी थी और यही छुप कर देख रही थी तुम्हें और पापा को!

मैंने ज्योति को चिकोटी काटते हुए बोला- अरे नहीं आंटी, यह झूठ बोल रही है … ऐसा कुछ भी नहीं था!

इस पर आंटी बोलीं- अरे देख भी लिया तो क्या हुआ … तुम लोग बड़ी हो गई हो, ये सब भी जानना चाहिए.

ज्योति बोली- मम्मी, इस बेचारी की एक मदद कर दो ना!
आंटी बोली- क्या?

ज्योति मेरी तरफ देखकर आंख मारते हुए बोली- इसने कभी लड़कों का ‘वो’ नहीं देखा है … पापा से कह दो ना कि बेचारी को अपना ‘वो’ दिखा दें।

मैं एकदम शरमा गई और ज्योति की पीठ पर थप्पड़ मारते हुए बोली- अरे नहीं आंटी … बदमाश है ये … मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है।
लेकिन मैं ये देख कर हैरान थी कि ज्योति अपनी मम्मी से कैसी इस तरह बात कर रही है।

फिर भी मैंने इस पर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब बातों में मुझे खुद ही मजा आ रहा था।

आंटी हंसती हुई मुझसे बोली- अरे तो पहले बता दिया होता, इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है?

फिर ज्योति की तरफ इशारा करते हुए मुझसे बोलीं- इससे पूछ … ये तो कितनी बार देख चुकी है अपने पापा का ‘वो’!

तब मेरी गाल पर चुटकी काटते हुए बोलीं- वैसे ये वो क्या होता है? उसका कुछ तो नाम तो होगा ना?

ज्योति बोली- लंड नाम होता है … और क्या? बेचारी नहीं कह पा रही है तो मैं कह देती हूँ। इसे पापा का लंड दिखवा दो।

मैंने गुस्साने का नाटक करते हुए ज्योति को चिकोटी काटी और हुए कहा- तू चुप रहती है कि नहीं, अरे आंटी, ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा।


इस पर ज्योति की मम्मी हंसने लगी और बोली- कोई बात नहीं … अब कह ही दिया है तो अपनी सखी की बात मान लो और एक बार देख लो. इसमें क्या हर्ज़ है। तुम लोग यहीं बैठो मैं इसके पापा को बुला कर लाती हूं!
यह कह कर वे कमरे से बाहर निकल गयी.


उनके जाते ही ज्योति बिस्तर पर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी अपना बगल खींच कर बैठा लिया और बोली- आज तो तेरा सपना पूरा होने जा रहा है लंड देखने का!

मैंने घबराने का नाटक करते हुए कहा- तू अपनी मम्मी और पापा से ऐसे बात कर लेती है? मैं तो जा रही हूं बाबा … मुझे तो शर्म आ रही है। तुम ही देखो अपने पापा का लंड!

इस पर ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अरे, हम लोग आपस में दोस्त की तरह रहते हैं, कोई पर्दा नहीं करते हैं।

अभी हम ये बातें कर ही रहे थे कि कि ज्योति की मम्मी और पापा दोनों कमरे में आ गए।

मेरी तो धड़कन बढ़ गयी.

ज्योति के पापा ने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था और कुछ नहीं पहनना था।
उन्हें देखते ही मैं बिस्तर से खड़ी हो गई और नमस्ते की।

वे मुझे देखते हुए मुस्कुरा रहे थे.

इतने में आंटी बोलीं- क्या देखना था गरिमा, खुद ही बोल दो अपने अंकल से!
मैं एकदम शांत खड़ी रही.
शर्म से मेरा चेहरा लाल हो रहा था, साथ ही मज़ा भी आ रहा था।

ज्योति ने मुझे वापस खींच कर बिस्तर पर बैठा लिया और अपनी मम्मी से बोली- अरे क्यों छेड़ रही हो बेचारी को, देखो कैसे शरमा रही है। चलो मैं ही बोल देती हूं इसकी तरफ से!

फिर ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, दरअसल इसने कभी वो नहीं देखा है जहां से आप लोग सू-सू करते हैं!

तब ज्योति के पापा थोड़ा आगे बढ़ कर ठीक मेरे सामने खड़े हो गए और बोले- अरे तो इसमें दिखने जैसी कौन सी बात है, खुद ही देख लो।
इस पर आंटी और ज्योति दोनों हंसने लगे।

मैं ऐसी बैठी थी जैसी सुहागरात में नई दुल्हन बैठी हो और बस शरमा रही थी।

ज्योति की मम्मी मुस्कुराती हुई अंकल से बोलीं- अरे वह शरमा रही है तो क्यों मज़ाक कर रहे हो … लाओ मैं ही दिखा देती हूं।

यह कह कर उन्होने अंकल का तौलिया ही खोल दिया।

खुलते ही तौलिया नीचे गिर पड़ा और अंकल का मोटा और लम्बा सा लंड ठीक मेरी आँखों के सामने था।

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जैसा कि मैं पहले स्टोरी में बता चुकी हूं कि मैं पहले भी लंड को देख चुकी थी और अपनी चूत, गांड और मुंह में उसका स्वाद भी ले चुकी थी।
जिसमें दो लंड तो लड़कों के थे, एक मेरे भाई सोनू का और दूसरा अमित का!
एक लंड करीब 60 साल के आदमी का था।

मगर पहली बार किसी जवान आदमी का लंड अपनी आंखों के सामने देख रही थी।

हालांकि अभी पिछली रात में अपने पापा का लंड तब देखा था जब वे बुआ की चुदाई कर रहे थे।
मगर वो खिड़की में दरवाजे से देखा था।

अंकल अभी कुछ ही देर पहले आंटी को चोद कर आये थे इसलिए उनका लंड अभी थोड़ा ढीला था मगर अब उसमें हल्का-हल्का तनाव आने लगा था।

मेरे दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

आंटी मुस्कुराती हुई बोलीं- देख लो आराम से … कोई जल्दबाजी नहीं है।

ज्योति जो मेरे बगल बैठी थी, उसने मेरे कांधे पर हाथ रख कर अंकल से कहा- पापा, थोड़ा और पास आ जाइये. क्यों बेचारी को दूर से दिखा कर तरसा रहे हैं।

अंकल मुस्कुराते हुए खिसक कर एकदम मेरे सामने आ गए।
चूंकि मैं बेड पर बैठी थी इसलिए उनका लंड ठीक मेरी चूची के सामने था।

तभी अचानक ज्योति ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अंकल के लंड पर रख दिया और बोली- अरे, इसे सिर्फ आंख से ही नहीं, हाथ से छूकर भी देख कितना मोटा और लम्बा है ये!

अंकल के लंड को छूटे ही मेरे बदन में एकदम सुरसुरी सी दौड़ गई।

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पहले तो मैंने सोचा कि हाथ हटा लूं मगर हटाने का मन नहीं हुआ।
अंकल का लंड एक दम गर्म था.
मेरे पकड़ते ही उनके लंड में तनाव आने लगा।

मैं लंड को मुट्ठी में पकडे एकटक देख रही थी।

ज्योति ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर लंड की चामड़ी को पीछे खींच दिया जिसके लंड का गुलाबी-गुलाबी सुपारा पूरा खुल कर चमक उठा।

वह बोली- ऐसे देखते हैं लंड को … समझी? कितना मस्त लग रहा है ना!

अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा देखते ही मेरी चूत और मुँह दोनों में पानी आ गया।
मन कर रहा था कि तुरंत लंड को मुंह में लेकर चूस लूं.
मगर मैंने किसी तरह खुद को काबू में रखा, बस चुपचाप लंड पकड़े बैठी रही।



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तभी आंटी ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली हो, उन्होंने ज्योति से मुस्कुराते हुए कहा- अरे ज्योति, अपने दोस्त को ये तो बताओ कि ये टेस्टी भी होता है एक बार चख कर तो देख। अभी थोड़ी शरमा रही होगी बेचारी। ऐसा कर कि एक बार तुम बता दो कि इसका टेस्ट कैसे लेते हैं।

इस पर ज्योति हंसने लगी और मेरे गाल पर चिकोटी काट कर बोली- अरे सब कुछ मुझे ही सिखाना पड़ेगा क्या?
फ़िर उसने अंकल से कहा- पापा, थोड़ा इधर आइये।

मैंने अंकल की ओर देखा तो वे चुपचाप खड़े मुस्कुरा रहे थे।

तब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया जिसके बाद वो थोड़ा खिसक कर ज्योति के सामने खड़े हो गए।


ज्योति ने अपने पापा का लंड हाथ से पकड़ा और लंड की स्किन को पीछे खींच दिया और झुक कर सुपारे को मुँह में भर कर चूसने लगी।

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मुझे ये न्यूड फॅमिली सपने जैसा लग रहा था।
विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब सच है।
मेरी लैगिंग चूत के पास एकदम गीली हो चुकी थी।

उधर ज्योति मजे से अपने पापा के लंड को चूस रही थी।

एक-दो मिनट चूसने के बाद ज्योति ने लंड पर से अपना मुंह हटा लिया और मुझसे बोली- अब देख लिया ना, ले अब तू भी टेस्ट कर!
अंकल थोड़ा खिसक कर मेरे पास आ गए।

लंड को देख कर वैसे ही मेरी लार टपक रही थी कि कब मुंह में लेकर चूसना शुरू करूं।
लेकिन थोड़ा शरमाने का नाटक भी जरूरी था।

मैंने एक हाथ से अंकल के लण्ड को पकड़ा और स्किन को पीछे खींच कर सुपारे को पूरा खोल दिया।
ज्योति के थूक से अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा एक दम चमक रहा था।


मैं थोड़ा झुकी और सुपारे को मुंह में लेकर चूसने लगी।

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उधर अंकल ने अपना एक हाथ को मेरे सर को पकड़ कर हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर मेरे मुँह में लंड को आगे पीछे करने लगे।

अभी एक-दो मिनट में ही लंड को चूसा ही था कि अंकल ने कमर हिलाना रोक कर कहा- ये तो बेईमानी है भाई … कि सिर्फ मैंने ही कपड़े नहीं पहने हैं और तुम लोग कपड़े पहने हुए हो।
मैं लंड से मुँह हटा कर उन्हें देखने लगी।

तभी आंटी बोलीं- हां ये बात तो सही है।

फिर मेरे और ज्योति की तरफ इशारा करते हुए बोली- तुम दोनों भी अपने कपड़े उतारो।
इसपर ज्योति हंसते हुए बोली- और आप क्यों नहीं?
आंटी बोली- अरे मुझे तुम लोगों के लिए चाय-नाश्ता भी तो बनाना है ना!

फिर मुझे देखते हुए आंख मारकर बोली- वैसे भी तुम्हारी सहेली तो अंकल का लंड ही देखना चाहती थी ना!
इस पर मैं मुस्कुराने लगी।

ज्योति बोली- चलो ठीक है।
फिर मेरी ओर देख कर बोली- पहले मैं शुरुआत करती हूं।

यह कहकर उसने अपनी स्कर्ट का हुक खोल दिया, जिसमें से उसकी स्कर्ट नीचे गिर गई और फिर उसने पैरों से निकाल कर स्कर्ट को बाहर कर दिया।
फिर टी-शर्ट भी उतार दिया।

ज्योति अब सिर्फ ब्रा और पैंटी मैं थी।

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तभी उसके पापा मुस्कुराते हुए बोले- ये भी उतारो!

इस पर ज्योति की मम्मी ने अंकल को चिकोटी काटा और हंसते हुए बोली- बड़ी जल्दी मची है अपनी बेटी को नंगी देखने की?
हम सब हंसने लगे।

ज्योति आंख मारती हुई बोली- बोल तो ऐसे रहे हैं जैसे पहली बार देखने जा रहे हैं।

फिर ज्योति बोली- मुझे तो देखा ही है, आज इसे देख लीजिये।

यह कहती हुई ज्योति मेरी तरफ देख कर बोली- अरे, अब तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा? मैंने अपने कपड़े उतार दिए, अब तू भी उतार।


तभी ज्योति की मम्मी कमरे से बाहर जाती हुई बोलीं- कामवाली के आने का टाइम हो रहा है। तुम लोग मजे करो, तब तक मैं कपड़े बदल कर चाय-पानी का इंतजाम करती हूं।

यह कहकर वे कमरे के बाहर निकल कर कमरे के दरवाजे पर बाहर से बंद कर काम करने चली गई।

मैंने लैगिंग और टी-शर्ट पहनना हुआ था।
ज्योति की बात पर मैंने बिना कुछ बोले बैठे-बैठे ही अपनी टी-शर्ट उतार दी और सिर्फ ब्रा और लैगिंग में रह गई।
मैं भी अब शर्माना छोड़ कर मजे लेने के मूड में आ चुकी थी।

ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- सब उतारना पड़ेगा गरिमा!
मैं बोली- तुमने भी तो पूरे कपड़े नहीं उतारे हैं।

मेरी बात पर ज्योति के पापा बोले- वही तो मैं भी कह रहा हूँ।
इस पर हम सब हंसने लगे.

ज्योति मुझसे बोली- अच्छा तो ये बात है, चल मेरे साथ-साथ कपड़े उतार!
ये कहते हुए उसने अपनी ब्रा उतार दी।
अब वह सिर्फ पैंटी में थी.

उसने बोला- तू भी अपनी ब्रा उतार!
मैंने अपने दोनो हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया।

हुक खुलते ही मेरी दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गई, फिर मैंने ब्रा को उतार का रख दिया।

अब मैं सिर्फ लैगिंग में खड़ी थी।

ज्योति के पापा मेरी चूचियों को एक टक घूर रहे थे।
तब ज्योति बोली- अब लैगिंग भी उतार।
मैंने कहा- तू भी अपनी पैंटी उतार!

इस पर ज्योति ने अपनी पैंटी को पकड़ कर घुटनो तक खींच दिया और फिर पैरों से बाहर कर दिया।

फिर मैंने भी अपनी लैगिंग को खींच कर नीचे कर दिया और फिर झुक कर पूरी पैरों से बाहर निकाल दिया।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।

अब कमरे में हम तीनों मैं, ज्योति और उसके पापा नंगे खड़े थे।

अंकल थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आ गए और मेरी एक हाथ मेरी चूची पर रख कर सहलाने लगे।
चूची सहलाते-सहलाते वो थोड़ा झुके और मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगे।

मेरी दूसरी चूची को वो अभी भी अपने हाथ से सहला रहे थे।

अचानक उन्हें मेरी चूची को सहलाना छोड़ कर अपने हाथ को मेरी चूत पर रख दिया और उसे सहलाने लगे।
मेरी चूत एकदम पनिया चुकी थी।

तभी ज्योति मेरे बगल आकर खड़ी हो गई और एक हाथ से मेरी चूची को सहलाने लगी और दूसरे हाथ से अपने पापा के सख्त लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।

फिर कुछ देर बाद उसने मेरी चूची पर से अपने हाथ को हटा लिया और घुटनों के बल नीचे बैठ कर अपने पापा का लंड चूसने लगी।

कुछ देर ऐसे ही चलता रहा.

उसके बाद ज्योति उठ कर खड़ी हो गई और मुझसे बोली- तू पापा का लंड चूसेगी एक बार और?
मैं तो कब से इसके लिए तैयार खड़ी थी … मैं तुरंत बैठ गई और अंकल का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

उधर अंकल ज्योति की चूची मुंह में लेकर चूस रहे थे और एक हाथ से उसकी चूत को सहला रहे थे।

लंड चूसते हुए कुछ ही देर हुई थी, तभी ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, अब आप की बारी है अब आप हम दोनों की चाटिये।
यह सुनकर मैं लंड चूसना छोड़ कर खड़ी हो गयी।

अंकल मुस्कुराते हुए बोले- अरे तो मैंने कब मना किया है, तुम दोनों बताओ पहले किसकी चाटूँ?
ज्योति मेरी तरफ इशारा करते हुए बोली- मेरी तो कोई नहीं बात नहीं है इसलिए पहले इसकी चाट लीजिए, फिर मेरी!

अंकल मेरे पास आ गए और बोले- बोलो कैसे चटवाओगी बेटा, खड़ी होकर या लेट कर?
मैंने शर्माते हुए धीरे से कहा- जो आप को पसंद हो!

इस पर ज्योति मेरी गांड पर हाथ फेरती हुई आंख मार कर अपने पापा से बोली- अरे पापा की पसंद तो कुछ और ही है … क्यों पापा … गलत तो नहीं कह रही?
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- बाप की पसंद बेटी से ज्यादा कौन जानेगा।
हम तीनों हंस दिये।
Super hot 🔥
 
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Satyaultime123

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Update 6-
बहनों की अदला -बदली

चुदाई का खेल खत्म करने के बाद अमित और स्वीटी बैठ गये।


स्वीटी ने टाइम देखते हुए अमित से कहा- भैया 7.30 बज गए हैं, गरिमा दीदी और सोनू भी आते ही होंगे। चलो अब चलकर उधर बैठते हैं।
अमित- ठीक है, चलो उधर ही बैठते हैं।

अमित और स्वीटी अभी उठने ही वाले थे कि सोनू ने बैग उठाया और पेड़ के पीछे से सामने आते हुए कहा- अरे कहां जा रहे हो, हम भी यहीं हैं।

तब तक मैं भी सामने आ गई।

हम दोनों को देखते ही अमित और स्वीटी के चेहरे का रंग ही उड़ गया।
उनके मुंह से कुछ आवाज ही नहीं निकली।

इस पर सोनू हंसते हुए बोला- अरे क्या हुआ भाई, हमें देख कर अच्छा नहीं लगा क्या?
तब अमित ने थोड़ा संभलते हुए बोला- अरे ऐसी बात नहीं है। तुम लोग अचानक कैसे आ गए?
सोनू ने कहा- ‘अचानक कहां भाई, हम तो काफी देर से यहां हैं।’

अमित ने मेरी तरफ देखा तो मैं भी हंस पड़ी।

उधर स्वीटी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था।

वे दोनों समझ गये थे कि हमने सब कुछ देख और सुन लिया है।

मैंने स्वीटी को छेड़ते हुए कहा- क्या हुआ स्वीटी, कुछ तो बोलो? अगर हमारा आना पसंद नहीं तो कहो, हम चले जाएं।
इस पर स्वीटी शर्माती हुई बोली- नहीं दीदी, ऐसी बात नहीं है, आओ बैठो।

सोनू ने कहा- अरे घबराओ मत भाई … मैंने कुछ नहीं देखा है क्योंकि मैंने अपनी आंखें बंद कर ली थीं। हां, गरिमा दीदी के बारे में नहीं कह सकता कि इन्होंने कुछ देखा है या नहीं!
इस पर हम चारों हंसने लगे।

लेकिन अमित और स्वीटी अभी भी शर्मा रहे थे कि उनकी पोल खुल गई है।

मैं जाकर स्वीटी के बगल चबूतरे पर बैठ गई और अपने हाथ को स्वीटी के बगल में डाल कर अपनी या खींच लिया और माहौल को नॉर्मल करने के लिए सोनू को चिढ़ाते हुए कहा- अच्छा बड़ा शरीफ बन रहे हो! मैं बताऊं अमित और स्वीटी को कि तुम क्या कर रहे थे। कहो तो तुम्हारी पोल खोलूं?

सोनू- और मैं बता दूँ कि तुम क्या कर रही थी तो?

फिर हम हंसने लगे.

हम दोनों की नोकझोंक से अमित और स्वीटी भी थोड़े नॉर्मल होने लगे।

अमित ने मुस्कुराते हुए कहा- अरे भाई, क्यों एक दूसरे की पोल खोल रहे हो।
मैंने स्वीटी के गाल पर चुटकी काटते हुए कहा- क्या हुआ मेरी रानी, चुप क्यों है?
इस पर स्वीटी हंसने लगी और बोली- नहीं दीदी, कुछ नहीं।

फिर हम सब कुछ देर चुप रहे.

थोड़ी देर बाद चुप्पी तोड़ते हुए अमित शर्माते हुए बोला- यार तुम लोग सब जान गए हो पर प्लीज किसी को कुछ बताना नहीं।
सोनू हंसते हुए बोला- अरे यार, बताने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। अभी तुम्हें एक बात बताऊंगा तो तुम दोनों भी परेशान होकर रह जाओगे।
अमित ने पूछा- कौन सी बात?

सोनू मेरी या देख कर आँख मारते हुए बोला- क्यों दीदी, कहो तो बता दूँ?
मैं हंस पड़ी.

तब स्वीटी भी थोड़ी नॉर्मल होती हुई बोली- हां हां बताओ।

मैंने फिर स्वीटी के गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- अच्छा तुम्हें बहुत जल्दी है जानने की?
फ़िर हम सब हंस दिये।

अब हम सब नॉर्मल होने लगे और आपस में खुल कर बात करने लगे।

सोनू ने फिर मेरी या देख कर कहा- बोलो दीदी, बता दूँ?

अब मैं भी सोच रही थी कि जब अमित और स्वीटी के बारे में हम जान ही गए हैं तो हम भी अपने और सोनू के बारे में बता दें।
क्योंकि तब हमें एक दूसरे से कोई शर्म भी नहीं रहेगी और फिर हम खुलकर मजे कर सकते हैं।

मैंने सोनू से हंसते हुए कहा- चलो बता दो।
अमित ने कहा- अरे भाई, क्या बात है कुछ बताओगे भी?

सोनू ने अमित से कहा- तुम्हें पता है हम इतनी जल्दी क्यों आये थे?
अमित बोला- नहीं!

सोनू ने मेरी या देखकर मुस्कुराते हुए बोला- जो तुम दोनों कर रहे थे उसके चक्कर में मैं और गरिमा दीदी भी आये थे।
जैसे ही सोनू ने ये कहा, अमित और स्वीटी चौंक कर हंस दिये।

स्वीटी मेरे बगल में ही थी.
इस बार उसने मुझे चिकोटी काटते हुए कहा- अच्छा दीदी, तभी चोरी से यहां आकर बैठी थी।

अमित ने कहा- अच्छा ये बताओ कि जब हम यहां पहुंचे तो तुम दोनों भी वही कर रहे थे क्या?
सोनू बोला- नहीं यार, बस माहौल अभी बन ही रहा था कि तुम दोनों टपक पड़े। सच कहूं तो तुम दोनों को आते हुए देख कर मेरा मूड खराब हो गया था। मुझे लगा तुम लोगों ने सब गड़बड़ कर दी। मगर उसके बाद जो हुआ … भाई मजा आ गया।

स्वीटी ने हंसते हुए अमित से कहा- भैया, हमने थोड़ी जल्दी कर दी। अगर हम थोड़ी देर से आए होते तो शायद जो इन लोगों ने हमें करते देखा वही हम इन्हें करते हुए देख रहे होते।
हम सब हंसने लगे.

मैंने स्वीटी को छेड़ते हुए कहा- अरे वाह मेरी रानी, अभी तो मुंह से बोल नहीं पा रहे थे अब बहुत बोल रही हो।
सोनू ने स्वीटी से कहा- स्वीटी, तुम्हारे पास अभी अच्छा मौका है अपने सपने पूरे करने का!

इतना सुनते ही स्वीटी शर्मा गई।

तभी अमित ने मुस्कुराते हुए कहा- हां स्वीटी, तुम अपना सपना पूरा कर लो।

इस पर स्वीटी अमित को चिढ़ाते हुए बोली- अच्छा भैया … मुझे तो लगता है कि मेरा सपना पूरा होने के बहाने आप भी कुछ देखना चाहते हो।

इस पर हम सब फिर हंस पड़े।

सच कहूँ तो हमारे आपस की नोक-झोंक से माहौल एक बार फिर सेक्सी होने लगा था।

अमित ने सोनू से कहा- वैसे ये तो बेईमानी है। तुमने और गरिमा ने चोरी से ही सही मगर हमें और स्वीटी को तो सब करते हुए देख लिया। इसलिए अब तुम और गरिमा वो सब करो जो हमने किया था और मैं और स्वीटी देखेंगे.

फिर अमित ने स्वीटी की तरफ देखते हुए कहा- क्यों स्वीटी, ठीक कहा ना?
स्वीटी बोली- बिल्कुल सही भैया, अब इनकी बारी है।

इसके बाद स्वीटी मेरी तरफ देख कर बोली- गरिमा दीदी, प्लीज ये बेईमानी नहीं चलेगी। अब आप दोनों भी वही करिए जिसके लिए आप लोग इतनी जल्दी स्टेशन आए।
हम और सोनू दोनों हंस दिये।

सोनू ने कहा- जब तुम दोनों इधर लगे हुए थे, तभी हमने भी उधर अपना काम कर लिया था।
और यह कह कर उसने मेरी तरफ देखा और आंख मार दी।

मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया।

अमित बोला- अच्छा जी … इसका मतलब तुम दोनों ने डबल मजा लिया। मगर अब कुछ भी हो तुम दोनों को दोबारा करना पड़ेगा।
फिर सोनू ने कहा- देखो ऐसा है, तुम दोनों को पता नहीं था कि हम यहां पर हैं इसलिए तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई और हमने और गरिमा दीदी ने मजा ले लिया। मगर अब ये तो नहीं हो सकता है कि तुम दोनों कपड़े पहन कर हमें देखो और मैं और दीदी नंगे होकर चुदाई करें।

फ़िर उसने मेरी ओर देख कर कहा- क्यों दीदी सही है ना?

सोनू अब खुल कर चुदाई, चूत और लंड जैसा शब्द बोल रहा था।
मैं भी अब गर्म और बेशर्म दोनों हो चुकी थी।

मैने- हाँ … यह बात तो सही है।
स्वीटी बोली- फिर क्या करें?

अमित- फिर तो यही है कि जो करना है हम सब एक साथ करें।
सोनू- हां … ये ठीक रहेगा। इसमें कोई एक दूसरे से शर्माएगा भी नहीं।

अमित- तो कौन शुरू करेगा?
स्वीटी तपाक से बोली- सबसे पहले भाई लोग!
हम सब फिर हंस दिये.

सोनू- ठीक है, हम तैयार हैं लेकिन बहनें भी तैयार होनी चाहियें।

मैं स्वीटी की ओर देखते हुए बोली- बहनें भी तैयार है! क्यों स्वीटी?
स्वीटी बोली- बिल्कुल।

अमित ने फिर मेरे और स्वीटी की तरफ देखे हुए कहा- पहले मैं और सोनू अपनी पैंट उतारेंगे, उसके बाद तुम दोनों अपनी सलवार और कुर्ते उतारोगी।
मैंने और स्वीटी ने हां में सर हिला दिया।

उसके बाद अमित ने अपनी जींस के बटन खोल कर उसे घुटनों तक सरका दिया और फिर अपने अंडरवियर को भी पकड़ कर घुटनों तक कर लिया।
सोनू ने भी एक ही झटके में अपना निचला खींच कर नीचे कर दिया।

अब दोनों के लंड हमारे आँखों के सामने थे।

दोनों लंड अभी कुछ ही देर पहले झड़े थे इसलिए धीरे थे मगर उन्हें हल्का तनाव आने लगा था।
थोड़ी देर पहले मैंने अमित का लंड थोड़ी दूरी से देखा था मगर अब एक दम पास से उसका लंड देख रही थी।

उधर स्वीटी भी एकटक सोनू के लंड को देख रही थी।
तभी सोनू ने कहा- अब तुम दोनों अपने कपड़े उतारो!

फिर मैंने और स्वीटी ने एक दूसरी की तरफ देखा और खड़ी होकर अपने सलवार का नाड़ा खोल दिया.
नाड़ा खुलते ही सलवार जमीन पर गिर गई, फिर उसे पैरों से बाहर कर दिया।

मैंने अंदर पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए कमर से नीचे मैं पूरी नंगी हो गई।
हालांकि कुर्ती की वजह से चूत अभी भी ढकी हुई थी।

मुझे देख कर स्वीटी ने भी अपनी सलवार को पैर से बाहर कर दिया और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी।

सोनू ने कहा- कुर्ते भी उतारो।
स्वीटी- कुरते रहने दो भैया, वरना हमें ठंड लग जाएगी।

अमित- यार, फिर ऐसे तो मजा नहीं आएगा।
मैं बोली- कोई बात नहीं, हम अपने कुर्ते के बटन खोल देती हैं।

यह कह कर मैंने अपने कुर्ते के आगे के सारे बटन खोल दिये।
मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए कुर्ते का बटन खोलते ही मेरी दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गईं।

अमित एकटक मेरी चूचियों को देखने लगा।

वहीं मेरे कहने पर स्वीटी ने भी अपने कुर्ते के अगले बटन को खोला और फिर कुर्ते को दोनों ओर थोड़ा-थोड़ा फैला कर चूचियों को बाहर कर दिया।
स्वीटी ने भी अंदर ब्रा नहीं पहनी थी।

मैंने देखा कि स्वीटी भले ही उम्र में मुझसे छोटी थी लेकिन उसकी चूचियां मेरे से बड़ी तो नहीं मगर बहुत छोटी भी नहीं थी।

उधर अमित मेरी चूचियों को देख रहा था और सोनू स्वीटी की चूचियों को घूरे जा रहा था।

हमारी चूचियों को देखते ही दोनों के लंड हल्के झटके लेने लगे।

लंड देख कर मेरे मुँह में पानी आने लगा था.
मगर मैंने कुछ कहा नहीं.

तभी सोनू ने मुस्कुराते हुए अमित से कहा- क्यों अमित किसकी चूची ज्यादा अच्छी है? मेरी बहन की या तुम्हारी बहन की?

अमित ने हंसकर सोनू को आंख मारते हुए कहा- देखने में तो दोनों की चूची अच्छी है। बाकी तो स्वाद लेने पर पता चलेगा।
इस पर हम चारों हंस दिये।

सोनू- चलो फिर स्वाद भी लेते हैं।
अमित- ठीक है। तुम मेरी बहन का स्वाद करो, मैं तुम्हारी बहन का स्वाद लेता हूँ।

यह कह कर अमित मेरे सामने आ गया।
मैं पेड़ के किनारे बने चबूतरे पर बैठी थी।

पहले तो उसने अपने हाथ से मेरी दोनों चूचियों को बारी-बारी से दबाया।
फिर झुक कर एक चूची को मुंह में रख कर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा।

उधर सोनू ने भी स्वीटी की चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था।

मैंने अपने हाथ अमित के सिर पर रख दिया था और अमित बारी-बारी से मेरी दोनों चूचियों को चूस रहा था।
थोड़ी देर तक मेरी चूचियों को चूसने के बाद खड़ा हुआ और फिर हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसकी स्किन को पीछे खींच दिया और फिर लंड के सुपारे को मेरी चूची की चूची पर रगड़ने लगा।

अमित का लंड अभी पूरा तरह खड़ा नहीं हुआ था मगर उसमें तनाव आने लगा था।
थोड़ी देर तक लंड के सुपारे को चूची से रगड़ने के बाद अमित ने लंड को मेरे मुँह के लाकर धीरे से बोला- इसे चूसो!

मैं तो कब से इसी दोस्त का इंतज़ार कर रही थी।
मैंने तुरंत अमित के लंड को हाथ पकड़ा और उसकी स्किन पूरी पीछे खींच कर लंड के सुपारे को मुँह में भर लिया और जीभ फेरती हुई चूसने लगी।

सच कहूं तो मुझे चूत चुदवाने में जितना मजा आता है उतना ही मजा लंड चूसने में भी आता है।

उधर सोनू भी स्वीटी की चूचियों को चूसने के बाद खड़ा हो गया था और स्वीटी उसके लंड को चूस रही थी।

इधर अमित अपने हाथ को मेरे सर पकड़ कर अपने कमर को हल्का-हल्का हिला कर लंड को मेरे मुँह में आगे-पीछे कर रहा था।

थोड़ी देर की चुसाई में ही उसका लंड एकदम टाइट हो गया था।
मैं भी मुंह को आगे पीछे कर अमित के लंड को लॉलीपॉप की तरह चुन रही थी।

थोड़ी देर बाद अचानक अमित ने मेरे सिर को कस कर पकड़ लिया और अपने कमर को थोड़ी तेजी से हिलाते हुए लंड को मेरे मुँह में डालने लगा।
मैं समझ गई कि अमित अब झड़ने वाला है।

पहले तो मैंने सोचा कि लंड को मुँह से निकाल दूँ।
फिर मैंने सोचा कि आज लंड के पानी का स्वाद भी चख लेती हूँ।

यह सोच कर मैं भी अमित के लंड को तेज-तेज चूसने लगी।

तभी अमित धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगा- आआ आआआ बस … आआहाहा!
और फिर तेजी से कमर को झटके देते हुए मेरे मुंह में झड़ गया।
उसके गर्म-गर्म और गाढ़े वीर्य से मेरा मुंह भर गया।

अमित ने मेरे सर को इतनी कस कर पकड़ लिया था कि मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकल पा रहा था।
मैं भी एक झटके से उसके वीर्य को पूरा गटक गई।
मुझे वीर्य का नमकीन का स्वाद बड़ा अच्छा लग रहा था।
झड़ने के बाद भी मैंने अमित के लंड को मुँह से नहीं निकाला और चूसती रही।

और सोनू और स्वीटी की ओर देखा तो सोनू भी शायद स्वीटी के मुंह में झड़ गया था.
क्योंकि वह आँख बंद किये खड़ा था और हाँफ रहा था.
उसका लंड अभी भी स्वीटी के मुंह में ही था और स्वीटी भी मेरी तरह शायद सोनू के झड़े लंड को चूस रही थी।

थोड़ी देर तक चूसने के बाद मैंने अमित का लंड मुँह से निकला और देखा तो उसका लंड गुलाबी सुपारा मेरे थूक और चूसने से चमक रहा था।

मुझे देख कर स्वीटी ने भी सोनू के लंड को चूसना बंद कर दिया।

स्वीटी मुझसे मुस्कुराते हुए पूछने लगी- क्यों दीदी, कैसा लगा मेरे भाई के लण्ड का स्वाद?
मैं हल्के से मुस्कुरा कर बोली- अच्छा था.

फिर मैंने स्वीटी को आँख मारते हुए कहा- अब तो इनकी बारी है. क्यों स्वीटी?
स्वीटी- हां … हमने तो चूसा भी और पिया भी अब इनकी बारी है चाटने की और पीने की!

सोनू- अरे हम तो कब से तैयार हैं। पहले एक बार दिखाओ तो सही!
मैं सोनू से बोली- तुम्हें बड़ी जल्दी है देखने की?

तब स्वीटी ने कहा- अरे दीदी, पहले यह तो पूछो कि देखना क्या चाहता है, आपकी या मेरी?
मैं- तुम्हारी ही देखना चाहता होगा। मेरी तो देख भी चुका है और चाट भी चुका है।

अब अमित ने कहा- अरे कोई मुझसे भी तो पूछ लो कि मैं किसको देखना चाहता हूं।
इस पर हम सब हंस दिये।

तभी सोनू ने मुझसे कहा- वैसे दीदी, मेरे और अमित के अलावा भी कोई है जो तुम्हारी देखना भी चाहता है और चाटना भी चाहता है।

फिर उसने स्वीटी की तरफ देख कर आंख मार दी।
अमित बोला- हां स्वीटी, पहले तुम अपनी इच्छा पूरी कर लो।

मैं और स्वीटी एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगे।

स्वीटी बोली- ठीक है मैं तैयार हूं।
फिर मेरी तरफ देखते हुए कहा- दीदी, मेरी एक बात मानोगी।
मैं- क्या बोलो?
स्वीटी- तुम्हें भी मेरी चाटनी होगी।

स्वीटी की यह फरमाइश सुनकर मैं चौंक गई।
मैं सोचने लगी कि क्या बोलूं.

तभी स्वीटी ने फिर कहा- दीदी प्लीज़।
तब मैंने भी सोचा कि लंड का स्वाद तो ले ही चुकी हूँ आज चूत का भी स्वाद ले लिया जाए और स्वीटी जैसी प्यारी लड़की फिर कहाँ मिलेगी.

यह सोच कर मैंने कहा- ठीक है।
स्वीटी खुश हो गई.

अमित हंसते हुए स्वीटी से बोला- चलो फिर देर मत करो, हम लोग भी लाइन में हैं।

स्वीटी बोली- चिंता मत करो, हम दोनों ज्यादा देर नहीं लगाएंगे। तुम लोगों को पूरा टाइम मिलेगा चाटने का!

हम सब हंस पड़े.

फिर स्वीटी मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.
हम दोनों एक दूसरी की तरफ देख कर मुस्कुरा दी।

स्वीटी ने मेरे गालों पर चिकोटी काट ली और फिर घुटनों के बल बैठ गई और मेरे कुर्ते को ऊपर करते हुए मुझसे बोली- इसे पकड़ो दीदी!

मैंने कुर्ते को पकड़ कर पूरा ऊपर उठा दिया और पेट के पास घुमा कर गांठ लगा दी ताकि बार-बार खुले ना!
अब स्वीटी का मुँह ठीक मेरी चूत के सामने था।
वह गौर से मेरी चूत को देख रही थी।

फिर उसने हाथ बढ़ाया कर मेरी झांटों का सहलाया और मेरी चूत को भी सहलाने लगी।

मैंने अपनी जांघों को हल्का सा फैला कर कमर को आगे कर दिया जिससे मेरी चूट उसके मुंह के एकदम पास आ गई।

स्वीटी ने अपने दोनों हाथों से मेरी जांघें पकड़ कर थोड़ा सा फैलाया और आगे बढ़कर मेरी चूत को चूमा, फिर जीभ निकाल कर चाटने लगी।

जैसे ही स्वीटी ने मेरी चूत पर अपनी जीभ फेरी, मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई।

मैंने भी उसके सिर पर अपना हाथ रख दिया और अपने कमर को हल्का-हल्का हिलाकर चूत चटाने लगी।

उधर अमित और सोनू खड़े होकर हमें देख रहे थे।

तभी अमित आगे बढ़कर मेरी बगल आ गया और झुककर मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा।

यह देख कर सोनू भी मेरे दूसरे साइड आ गया और मेरी दूसरी चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा।

अब एक तरफ स्वीटी मेरी चूत चाट रही थी, दूसरी तरफ अमित और सोनू मेरी चूचियों को चूस रहे थे और अपने हाथों से मेरी गांड को भी सहलाते जा रहे थे।

करीब 5 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा.
उसके बाद स्वीटी ने चूत से मुंह हटाया और खड़ी हो गई।

अमित और सोनू भी चूची चूसना छोड़ कर खड़े हो गए।

तभी सोनू मेरी एक चूची को हाथ से पकड़ कर दबाते हुए स्वीटी से बोला- एक बार इसे भी चूस कर देखो।

स्वीटी ने मुस्कुरा कर मेरी ओर देखा, फिर मेरी दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगी।

थोड़ी देर तक चूचियों को चूसने के बाद खड़ी हो गई और मुझसे बोली- दीदी, अब तुम्हारी बारी है।

अब मैं उसके सामने घुटने के बल बैठ गई।
स्वीटी ने अपने कुर्ते को ऊपर उठा कर मेरी ही तरह पेट के पास घुमा कर गांठ लगा दी।

अब उसकी चूत ठीक मेरी आंख के सामने थी।
उसकी चूत पर हल्के-हल्के रेशमी झांटें उग चुकी थी और चूत की खुशबू मेरी नाक में घुस रही थी।

मैंने अपने हाथों से उसकी जांघों को पकड़ कर हल्का सा फैलाया.

स्वीटी ने भी जांघों को खोल कर कमर को आगे कर मुझे चूत चाटने की पूरी जगह दे दी।
मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख कर उसे चूम लिया और फिर जीभ निकल कर चाटने लगी।

मैं पहली बार किसी चूत को चाट रही थी इसलिये शुरुआत में थोड़ा अजीब लगा मगर थोड़ी ही देर में मुझे चूत का स्वाद भी अच्छा लगने लगा।

इधर मैं स्वीटी की चूत को चाट रही थी, वहीं अमित और सोनू अगल-बगल खड़े होकर स्वीटी की चूची पीने लगे।

अमित तो स्वीटी का चूची पीने के साथ ही अपने लंड को उसकी चिकनी जांघ पर रगड़ रहा है।

थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा.
फिर सोनू ने स्वीटी की चूची से मुंह हटाया और मुझसे बोला- अरे दीदी, स्वीटी की चूत का सारा रस तुम्हीं चाट लोगी क्या? थोड़ा मुझे भी मौका दो।

मैंने स्वीटी की चूत से मुंह हटाते हुए कहा- लो भाई तुम भी स्वाद ले लो।

और फिर मैं खड़ी हो गई। फिर वहां सोनू आकर घुटनों के बल बैठ गया और दोनों हाथों से स्वीटी की जांघों को फैला दिया, फिर जीभ से चूत को चाटने लगा।
इधर अमित अभी भी स्वीटी की एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था।

मेरे खड़े होते ही अमित ने स्वीटी की चूची चूसना छोड़ कर मेरे पास आ गया और फिर मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गया।

मैंने अपने दोनों जांघों को फैला दिया।
फिर अमित ने मेरी दोनों जाँघों को हाथ से पकड़ कर थोड़ा और फैलाया और फिर मेरी झाँट पर हाथ फेरते हुए चूत के चने को उंगली से छेड़ने लगा।
मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

फिर उसने उंगलियों से मेरी चूत की दोनों फांकों को फैलाया और जीभ निकाल कर चूत के गुलाबी हिस्से को चाटने लगा।

मेरी शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

हालांकि इसके पहले भी सोनू मेरी चूत को चाट चुका था।
मगर अमित तो ऐसा लग रहा था जैसे चूत चाटने में एक्सपर्ट हो।

अमित ने अब अपनी पूरी तरह से मेरी चूत में घुसेड़ दी और अंदर घुमाने लगा।
मेरी हालत ख़राब होने लगी.

मैंने हाथों से अमित के सिर को कस कर पकड़ लिया और अपनी कमर को हिलाने लगी।

उधर स्वीटी ने सोनू के सर को पकड़ा हुआ था और अपनी आंखें बंद कर कमर हिला-हिला कर चूत चटवा रही थी।

अमित ने अब अपना सिर मेरी दोनों जाँघों के बीच में एडजस्ट कर लिया, जीभ से चूत चाट रहा था और अपने हाथों से मेरी गांड को सहलाता जा रहा था।

करीब दस मिनट तक चटवाने के बाद मेरी हिम्मत ने जवाब दिया और मैंने तेजी से कमर हिलाते हुए अमित के मुंह में अपनी चूत का सारा पानी निकाल दिया।

अमित ने मेरी चूत का सारा रस पी लिया और आखिरी बूंद तक चाट लिया।

मैं अमित के सिर को दोनों जांघों में फंसाये हुए ही लंबी-लंबी सांस लेने लगी।

फ़िर अमित ने अपना मुँह मेरी जाँघों के बीच से निकाला और हाथ से अपने मुँह को साफ करने लगा।
मैंने देखा कि उसके मुँह और नाक पर मेरी चूत पानी लगा हुआ था।

अमित और मेरी निगाह मिली तो हम दोनों मुस्कुरा दिये।
उधर स्वीटी भी शायद सोनू के मुंह में ही झड़ चुकी थी क्योंकि सोनू भी स्वीटी के सामने ही बैठा था.

सोनू अपने मुंह को रुमाल से साफ कर रहा था और स्वीटी पीछे चबूतरे का टेक लेकर खड़ी थी और आंख बंद कर लंबी-लंबी सांसें ले रही थी।
अब तक हम चारों दो-दो बार झड़ चुके थे।

मैं भी अब नॉर्मल हो चुकी थी।

अमित और सोनू भी खड़े हो गए।

मेरी निगाह दोनों के लंड पर पड़ी तो देखा उनका लंड भी अब पूरा टाइट हो कर खड़ा था।

मैं थोड़े पीछे होकर चबूतरे का सहारा लेकर स्वीटी के बगल ही खड़ी हो गई।

थोड़ी देर हम चारों चुप होकर हमारी हालत में खड़े रहे।

अब तक स्वीटी भी नॉर्मल हो चुकी है।
उसकी भी निगाह दोनों के खड़े लंड पर चली गई।

तभी अमित आगे बढ़कर स्वीटी के पास आया और झुक कर उसकी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा साथ ही एक हाथ से मेरी चूचियों को भी दबाने लगा।

सोनू थोड़ी देर देखता रहा, फिर मेरे पास आकार पहले तो एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा.
फिर वह नीचे बैठ गया और हाथों से पकड़ कर मेरी दोनों जांघों को फैला दिया और मेरी चूत चाटने लगा।

हालांकि अभी कुछ मिनट पहले ही मेरी चूत का पानी निकला था लेकिन जब सोनू ने जब चाटना शुरू किया तो मुझ पर दोबारा मस्ती छाने लगी।

उधर अमित स्वीटी की चूची चूसते हुए अपनी उंगलियों को उसकी चूत में डाल कर आगे पीछे करने लगा।

स्वीटी पर भी दोबारा मस्ती छाने लगी थी और वह अपने कमर को हल्का-हल्का हिला रही थी।
इधर सोनू मेरी चूत के दाने को मुंह में भर लिया और हल्का सा उस पर दांत गड़ा कर चूसने लगा।

मेरे ऊपर फिर चुदासी छाने लगी।

कुछ देर इसी तरह चूत चाटने के बाद सोनू खड़ा हो गया और मुझसे बोला- दीदी थोड़ा घूमो।
मैं समझ गई कि अब चूत की चुदाई होनी है.

घूमकर मैंने अपने दोनों हाथ चबूतरे पर टिका दिए और पैरों को फैला कर खड़ी हो गई।

सोनू ने अपने लंड को मेरी चूत से सटाया और एक ही धक्के में जड़ तक पूरा लंड घुसा दिया और फिर धक्के मारने लगा।

मैंने हल्का सा पलट कर स्वीटी को देखा तो चबूतरे के एकदम किनारे बैठी थी और पीछे झुक कर अपने हाथ की कोहनी का टेक लिया हुआ था।
अमित ने उसके पैरों को पकड़ कर फैला दिया था और उसकी चूत में लंड डाल कर चोद रहा था।

थोड़ी देर तक दोनों भाई अपनी बहन की चुदाई करते रहे।
मैं भी गांड उछाल कर सोनू का साथ दे रही थी।

थोड़ी देर बाद अमित बोला- सोनू, अब तुम इधर आ जाओ।

मैंने पलट कर देखा तो अमित स्वीटी की चूत से अपना लंड निकाल कर मेरे पीछे आ गया था।

तब सोनू ने भी मेरी चूत से अपना लंड निकाला और स्वीटी के पास चला गया।

अब स्वीटी ने भी खड़ी होकर मेरी तरह की पोजीशन बना ली थी।
इधर अमित ने अपना लंड मेरी चूत पर रख कर जोरदार धक्का मारा।

एक ही धक्के में अमित का लंड मेरी चूत में घुस गया मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गई क्योंकि अमित का लंड सोनू के लंड से थोड़ा मोटा था।

फिर धीरे-धीरे कमर हिलाते हुए अमित ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।
उधर सोनू भी स्वीटी को चोदने लगा था।

हम चारों दो-दो बार झड़ चुके थे इसलिए जल्दी झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
और मस्त चुदाई चल रही थी।

करीब 15 मिनट की चुदाई के दौर के बाद सबसे पहले सोनू और स्वीटी झड़े.
और फिर कुछ ही देर बाद मैं और अमित भी झड़ गए।

हम चारों इतना थक गए थे कि उसकी तरह नंगी हालत में चबूतरे पर बैठ गए।

थोड़ी देर बाद जब हम सामान्य हुए तो सब अपने कपड़े ठीक से पहनने लगे।

इस बीच हमने आपस में कोई बात नहीं की।

जब हम सब कपड़े ठीक से पहन कर बैठ गए, तब स्वीटी अमित से बोली- भैया, अब अगले एक हफ्ते तक मुझे छूना भी मत, अगले एक हफ्ते की सारी कसर आज ही निकल गई है।
यह सुनते ही हम सब हंस पड़े।
Nice update
 
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Maza aa gya. K
Update 10 सहेली के पापा-B

अब तक आपने पढ़ा:
मैंने हैरानी से ज्योति को देखा तो ज्योति ने मुस्कुराते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया।
और धीरे से कान में बोली- यहां खड़े होकर मजे लोगी या अपने कमरे में चलें?

मैं बिना बोले फिर अंकल-आंटी को देखने लगी.
मेरी निगाह ही नहीं हट रही थी.
तभी ज्योति ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों दबे पैर उसके रूम में चली आई।

अब आगे:

रूम में आने के बाद ज्योति अपने कपड़े बदलने लगी और उसने जींस उतार कर स्कर्ट पहन ली।


मैं उसी तरह हैरान बैठी थी।

ज्योति आंख मारती हुई मुझसे बोली- आज तो तेरी किस्मत ही खुल गई.
मैंने कहा- कैसे?
वो बोली- पहले तो रास्ते में तुझे लंड के दर्शन हुए अब घर आते ही चुदाई देखने को मिल गई.

मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कहां देख पाई … तू यहां खींच कर लेती आई. चल ना देखते हैं क्या कर रहे हैं वे!
ज्योति बोली- अरे थोड़ा धैर्य रखो बाबा … क्यों कवाब में हड्डी बनाने जा रही हो … बेचारे मजे कर रहे हैं, कर लेने दो ना!

मैंने कहा- एक बात बता … तू आज पहली बार अपनी मम्मी पापा को ये करते देख रही है या इसके पहले देख चुकी है?
ज्योति मुस्कुराते हुए बोली- कई बार देखा है.

मैंने हैरानी से पूछा- सच में? तब तो तूने अपने पापा का लंड भी देख होगा?
ज्योति बोली- और नहीं तो क्या … एकदम मस्त मोटा और लंबा है।


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मैं बोली- अरे कितनी बेशर्म है तू यार, कैसे अपने पापा के बारे में बोल रही है।
इस पर वह बोली- अरे इसमें बेशर्म की क्या बात है. तूने पूछा तो मैंने जो सच था, वो बता दिया।

ज्योति बोली- तुझे देखना है क्या पापा का लंड … देखना हो तो बता?
मैंने पूछा- वो कैसे?

ज्योति बोली- अरे ये सब तू मुझ पर छोड़ … बस तू बता कि देखना चाहती है या नहीं … एकदम मस्त लंड है मोटा सा!
मैं आंख मारती हुई बोली- नेकी और पूछ-पूछ, चल दिखा!

ज्योति मेरा गाल खींचते हुए बोली- अरे वाह मेरी रानी … बहुत मन कर रहा है तेरा लंड देखने का? आज तो तुझे लंड का दर्शन करा कर भेजूंगी घर!
मैंने फिर हैरानी से पूछा- मगर कैसे यार?
ज्योति बोली- ये सब तू मुझे पर छोड़ दे … तू बस चुपचाप बैठी रह!

इतने में ज्योति की मम्मी की आवाज़ लॉबी से आई.
शायद वे लोग चुदाई कर चुके थे।


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ज्योति बोली- लगता है काम ख़त्म हो गया।
मैंने कहा- तू कैसे बताएगी उन्हें कि हम यहां कब आयी?
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अभी बता देती हूं. इसमें कौन सी डरने वाली बात है।’

अभी मैं कुछ कहती, तभी ज्योति ने कमरे के दरवाजे पर जाकर अपनी मम्मी को आवाज दी और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली- अरे मम्मी काम हो गया हो तो गरिमा को नाश्ता पानी दे दो … बेचारी कब से प्यासी बैठी है!

जैसे ही आंटी अंकल को पता चला कि हम लोग घर में ही हैं तो अंकल की तो कोई आवाज नहीं आई।
मगर आंटी हंसती हुई कमरे के पास आईं और ज्योति के बाल खींचती हुई बोलीं- बदमाश, तुम लोग कब से आकर चोरों की तरह बैठी हो?


आंटी ने आगे से खुला वाला नाइट गाउन पहना हुआ था और कमर के पास कपड़े रिबन से बांधा था. अगर रिबन खोल दो आंटी आगे से पूरी नंगी हो जाती।

IMG-6323 IMG-6273
ज्योति अपने बाल छुड़ाते हुए हंसकर बोली- बस आप और पापा जब अपना काम ख़त्म करने वाले थे, उसके थोड़े पहले ही हम दोनों आई थी.
आंटी तब तक कमरे में आ चुकी थीं।

ववे मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई, बोली- बेटी, तू सीधी-सादी लड़की है इसके (ज्योति) के चक्कर में मत पड़, वरना बिगड़ जाएगी।
मैं हंसने लगी।

इस पर ज्योति बोली- मम्मी तुम इसे सीधी कब से समझने लगी, पता है मैं तो यहां आकर बैठी थी और यही छुप कर देख रही थी तुम्हें और पापा को!

मैंने ज्योति को चिकोटी काटते हुए बोला- अरे नहीं आंटी, यह झूठ बोल रही है … ऐसा कुछ भी नहीं था!

इस पर आंटी बोलीं- अरे देख भी लिया तो क्या हुआ … तुम लोग बड़ी हो गई हो, ये सब भी जानना चाहिए.

ज्योति बोली- मम्मी, इस बेचारी की एक मदद कर दो ना!
आंटी बोली- क्या?

ज्योति मेरी तरफ देखकर आंख मारते हुए बोली- इसने कभी लड़कों का ‘वो’ नहीं देखा है … पापा से कह दो ना कि बेचारी को अपना ‘वो’ दिखा दें।

मैं एकदम शरमा गई और ज्योति की पीठ पर थप्पड़ मारते हुए बोली- अरे नहीं आंटी … बदमाश है ये … मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है।
लेकिन मैं ये देख कर हैरान थी कि ज्योति अपनी मम्मी से कैसी इस तरह बात कर रही है।

फिर भी मैंने इस पर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब बातों में मुझे खुद ही मजा आ रहा था।

आंटी हंसती हुई मुझसे बोली- अरे तो पहले बता दिया होता, इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है?

फिर ज्योति की तरफ इशारा करते हुए मुझसे बोलीं- इससे पूछ … ये तो कितनी बार देख चुकी है अपने पापा का ‘वो’!

तब मेरी गाल पर चुटकी काटते हुए बोलीं- वैसे ये वो क्या होता है? उसका कुछ तो नाम तो होगा ना?

ज्योति बोली- लंड नाम होता है … और क्या? बेचारी नहीं कह पा रही है तो मैं कह देती हूँ। इसे पापा का लंड दिखवा दो।

मैंने गुस्साने का नाटक करते हुए ज्योति को चिकोटी काटी और हुए कहा- तू चुप रहती है कि नहीं, अरे आंटी, ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा।


इस पर ज्योति की मम्मी हंसने लगी और बोली- कोई बात नहीं … अब कह ही दिया है तो अपनी सखी की बात मान लो और एक बार देख लो. इसमें क्या हर्ज़ है। तुम लोग यहीं बैठो मैं इसके पापा को बुला कर लाती हूं!
यह कह कर वे कमरे से बाहर निकल गयी.


उनके जाते ही ज्योति बिस्तर पर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी अपना बगल खींच कर बैठा लिया और बोली- आज तो तेरा सपना पूरा होने जा रहा है लंड देखने का!

मैंने घबराने का नाटक करते हुए कहा- तू अपनी मम्मी और पापा से ऐसे बात कर लेती है? मैं तो जा रही हूं बाबा … मुझे तो शर्म आ रही है। तुम ही देखो अपने पापा का लंड!

इस पर ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अरे, हम लोग आपस में दोस्त की तरह रहते हैं, कोई पर्दा नहीं करते हैं।

अभी हम ये बातें कर ही रहे थे कि कि ज्योति की मम्मी और पापा दोनों कमरे में आ गए।

मेरी तो धड़कन बढ़ गयी.

ज्योति के पापा ने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था और कुछ नहीं पहनना था।
उन्हें देखते ही मैं बिस्तर से खड़ी हो गई और नमस्ते की।

वे मुझे देखते हुए मुस्कुरा रहे थे.

इतने में आंटी बोलीं- क्या देखना था गरिमा, खुद ही बोल दो अपने अंकल से!
मैं एकदम शांत खड़ी रही.
शर्म से मेरा चेहरा लाल हो रहा था, साथ ही मज़ा भी आ रहा था।

ज्योति ने मुझे वापस खींच कर बिस्तर पर बैठा लिया और अपनी मम्मी से बोली- अरे क्यों छेड़ रही हो बेचारी को, देखो कैसे शरमा रही है। चलो मैं ही बोल देती हूं इसकी तरफ से!

फिर ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, दरअसल इसने कभी वो नहीं देखा है जहां से आप लोग सू-सू करते हैं!

तब ज्योति के पापा थोड़ा आगे बढ़ कर ठीक मेरे सामने खड़े हो गए और बोले- अरे तो इसमें दिखने जैसी कौन सी बात है, खुद ही देख लो।
इस पर आंटी और ज्योति दोनों हंसने लगे।

मैं ऐसी बैठी थी जैसी सुहागरात में नई दुल्हन बैठी हो और बस शरमा रही थी।

ज्योति की मम्मी मुस्कुराती हुई अंकल से बोलीं- अरे वह शरमा रही है तो क्यों मज़ाक कर रहे हो … लाओ मैं ही दिखा देती हूं।

यह कह कर उन्होने अंकल का तौलिया ही खोल दिया।

खुलते ही तौलिया नीचे गिर पड़ा और अंकल का मोटा और लम्बा सा लंड ठीक मेरी आँखों के सामने था।

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जैसा कि मैं पहले स्टोरी में बता चुकी हूं कि मैं पहले भी लंड को देख चुकी थी और अपनी चूत, गांड और मुंह में उसका स्वाद भी ले चुकी थी।
जिसमें दो लंड तो लड़कों के थे, एक मेरे भाई सोनू का और दूसरा अमित का!
एक लंड करीब 60 साल के आदमी का था।

मगर पहली बार किसी जवान आदमी का लंड अपनी आंखों के सामने देख रही थी।

हालांकि अभी पिछली रात में अपने पापा का लंड तब देखा था जब वे बुआ की चुदाई कर रहे थे।
मगर वो खिड़की में दरवाजे से देखा था।

अंकल अभी कुछ ही देर पहले आंटी को चोद कर आये थे इसलिए उनका लंड अभी थोड़ा ढीला था मगर अब उसमें हल्का-हल्का तनाव आने लगा था।

मेरे दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

आंटी मुस्कुराती हुई बोलीं- देख लो आराम से … कोई जल्दबाजी नहीं है।

ज्योति जो मेरे बगल बैठी थी, उसने मेरे कांधे पर हाथ रख कर अंकल से कहा- पापा, थोड़ा और पास आ जाइये. क्यों बेचारी को दूर से दिखा कर तरसा रहे हैं।

अंकल मुस्कुराते हुए खिसक कर एकदम मेरे सामने आ गए।
चूंकि मैं बेड पर बैठी थी इसलिए उनका लंड ठीक मेरी चूची के सामने था।

तभी अचानक ज्योति ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अंकल के लंड पर रख दिया और बोली- अरे, इसे सिर्फ आंख से ही नहीं, हाथ से छूकर भी देख कितना मोटा और लम्बा है ये!

अंकल के लंड को छूटे ही मेरे बदन में एकदम सुरसुरी सी दौड़ गई।

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पहले तो मैंने सोचा कि हाथ हटा लूं मगर हटाने का मन नहीं हुआ।
अंकल का लंड एक दम गर्म था.
मेरे पकड़ते ही उनके लंड में तनाव आने लगा।

मैं लंड को मुट्ठी में पकडे एकटक देख रही थी।

ज्योति ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर लंड की चामड़ी को पीछे खींच दिया जिसके लंड का गुलाबी-गुलाबी सुपारा पूरा खुल कर चमक उठा।

वह बोली- ऐसे देखते हैं लंड को … समझी? कितना मस्त लग रहा है ना!

अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा देखते ही मेरी चूत और मुँह दोनों में पानी आ गया।
मन कर रहा था कि तुरंत लंड को मुंह में लेकर चूस लूं.
मगर मैंने किसी तरह खुद को काबू में रखा, बस चुपचाप लंड पकड़े बैठी रही।



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तभी आंटी ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली हो, उन्होंने ज्योति से मुस्कुराते हुए कहा- अरे ज्योति, अपने दोस्त को ये तो बताओ कि ये टेस्टी भी होता है एक बार चख कर तो देख। अभी थोड़ी शरमा रही होगी बेचारी। ऐसा कर कि एक बार तुम बता दो कि इसका टेस्ट कैसे लेते हैं।

इस पर ज्योति हंसने लगी और मेरे गाल पर चिकोटी काट कर बोली- अरे सब कुछ मुझे ही सिखाना पड़ेगा क्या?
फ़िर उसने अंकल से कहा- पापा, थोड़ा इधर आइये।

मैंने अंकल की ओर देखा तो वे चुपचाप खड़े मुस्कुरा रहे थे।

तब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया जिसके बाद वो थोड़ा खिसक कर ज्योति के सामने खड़े हो गए।


ज्योति ने अपने पापा का लंड हाथ से पकड़ा और लंड की स्किन को पीछे खींच दिया और झुक कर सुपारे को मुँह में भर कर चूसने लगी।

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मुझे ये न्यूड फॅमिली सपने जैसा लग रहा था।
विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब सच है।
मेरी लैगिंग चूत के पास एकदम गीली हो चुकी थी।

उधर ज्योति मजे से अपने पापा के लंड को चूस रही थी।

एक-दो मिनट चूसने के बाद ज्योति ने लंड पर से अपना मुंह हटा लिया और मुझसे बोली- अब देख लिया ना, ले अब तू भी टेस्ट कर!
अंकल थोड़ा खिसक कर मेरे पास आ गए।

लंड को देख कर वैसे ही मेरी लार टपक रही थी कि कब मुंह में लेकर चूसना शुरू करूं।
लेकिन थोड़ा शरमाने का नाटक भी जरूरी था।

मैंने एक हाथ से अंकल के लण्ड को पकड़ा और स्किन को पीछे खींच कर सुपारे को पूरा खोल दिया।
ज्योति के थूक से अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा एक दम चमक रहा था।


मैं थोड़ा झुकी और सुपारे को मुंह में लेकर चूसने लगी।

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उधर अंकल ने अपना एक हाथ को मेरे सर को पकड़ कर हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर मेरे मुँह में लंड को आगे पीछे करने लगे।

अभी एक-दो मिनट में ही लंड को चूसा ही था कि अंकल ने कमर हिलाना रोक कर कहा- ये तो बेईमानी है भाई … कि सिर्फ मैंने ही कपड़े नहीं पहने हैं और तुम लोग कपड़े पहने हुए हो।
मैं लंड से मुँह हटा कर उन्हें देखने लगी।

तभी आंटी बोलीं- हां ये बात तो सही है।

फिर मेरे और ज्योति की तरफ इशारा करते हुए बोली- तुम दोनों भी अपने कपड़े उतारो।
इसपर ज्योति हंसते हुए बोली- और आप क्यों नहीं?
आंटी बोली- अरे मुझे तुम लोगों के लिए चाय-नाश्ता भी तो बनाना है ना!

फिर मुझे देखते हुए आंख मारकर बोली- वैसे भी तुम्हारी सहेली तो अंकल का लंड ही देखना चाहती थी ना!
इस पर मैं मुस्कुराने लगी।

ज्योति बोली- चलो ठीक है।
फिर मेरी ओर देख कर बोली- पहले मैं शुरुआत करती हूं।

यह कहकर उसने अपनी स्कर्ट का हुक खोल दिया, जिसमें से उसकी स्कर्ट नीचे गिर गई और फिर उसने पैरों से निकाल कर स्कर्ट को बाहर कर दिया।
फिर टी-शर्ट भी उतार दिया।

ज्योति अब सिर्फ ब्रा और पैंटी मैं थी।

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तभी उसके पापा मुस्कुराते हुए बोले- ये भी उतारो!

इस पर ज्योति की मम्मी ने अंकल को चिकोटी काटा और हंसते हुए बोली- बड़ी जल्दी मची है अपनी बेटी को नंगी देखने की?
हम सब हंसने लगे।

ज्योति आंख मारती हुई बोली- बोल तो ऐसे रहे हैं जैसे पहली बार देखने जा रहे हैं।

फिर ज्योति बोली- मुझे तो देखा ही है, आज इसे देख लीजिये।

यह कहती हुई ज्योति मेरी तरफ देख कर बोली- अरे, अब तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा? मैंने अपने कपड़े उतार दिए, अब तू भी उतार।


तभी ज्योति की मम्मी कमरे से बाहर जाती हुई बोलीं- कामवाली के आने का टाइम हो रहा है। तुम लोग मजे करो, तब तक मैं कपड़े बदल कर चाय-पानी का इंतजाम करती हूं।

यह कहकर वे कमरे के बाहर निकल कर कमरे के दरवाजे पर बाहर से बंद कर काम करने चली गई।

मैंने लैगिंग और टी-शर्ट पहनना हुआ था।
ज्योति की बात पर मैंने बिना कुछ बोले बैठे-बैठे ही अपनी टी-शर्ट उतार दी और सिर्फ ब्रा और लैगिंग में रह गई।
मैं भी अब शर्माना छोड़ कर मजे लेने के मूड में आ चुकी थी।

ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- सब उतारना पड़ेगा गरिमा!
मैं बोली- तुमने भी तो पूरे कपड़े नहीं उतारे हैं।

मेरी बात पर ज्योति के पापा बोले- वही तो मैं भी कह रहा हूँ।
इस पर हम सब हंसने लगे.

ज्योति मुझसे बोली- अच्छा तो ये बात है, चल मेरे साथ-साथ कपड़े उतार!
ये कहते हुए उसने अपनी ब्रा उतार दी।
अब वह सिर्फ पैंटी में थी.

उसने बोला- तू भी अपनी ब्रा उतार!
मैंने अपने दोनो हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया।

हुक खुलते ही मेरी दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गई, फिर मैंने ब्रा को उतार का रख दिया।

अब मैं सिर्फ लैगिंग में खड़ी थी।

ज्योति के पापा मेरी चूचियों को एक टक घूर रहे थे।
तब ज्योति बोली- अब लैगिंग भी उतार।
मैंने कहा- तू भी अपनी पैंटी उतार!

इस पर ज्योति ने अपनी पैंटी को पकड़ कर घुटनो तक खींच दिया और फिर पैरों से बाहर कर दिया।

फिर मैंने भी अपनी लैगिंग को खींच कर नीचे कर दिया और फिर झुक कर पूरी पैरों से बाहर निकाल दिया।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।

अब कमरे में हम तीनों मैं, ज्योति और उसके पापा नंगे खड़े थे।

अंकल थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आ गए और मेरी एक हाथ मेरी चूची पर रख कर सहलाने लगे।
चूची सहलाते-सहलाते वो थोड़ा झुके और मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगे।

मेरी दूसरी चूची को वो अभी भी अपने हाथ से सहला रहे थे।

अचानक उन्हें मेरी चूची को सहलाना छोड़ कर अपने हाथ को मेरी चूत पर रख दिया और उसे सहलाने लगे।
मेरी चूत एकदम पनिया चुकी थी।

तभी ज्योति मेरे बगल आकर खड़ी हो गई और एक हाथ से मेरी चूची को सहलाने लगी और दूसरे हाथ से अपने पापा के सख्त लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।

फिर कुछ देर बाद उसने मेरी चूची पर से अपने हाथ को हटा लिया और घुटनों के बल नीचे बैठ कर अपने पापा का लंड चूसने लगी।

कुछ देर ऐसे ही चलता रहा.

उसके बाद ज्योति उठ कर खड़ी हो गई और मुझसे बोली- तू पापा का लंड चूसेगी एक बार और?
मैं तो कब से इसके लिए तैयार खड़ी थी … मैं तुरंत बैठ गई और अंकल का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

उधर अंकल ज्योति की चूची मुंह में लेकर चूस रहे थे और एक हाथ से उसकी चूत को सहला रहे थे।

लंड चूसते हुए कुछ ही देर हुई थी, तभी ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, अब आप की बारी है अब आप हम दोनों की चाटिये।
यह सुनकर मैं लंड चूसना छोड़ कर खड़ी हो गयी।

अंकल मुस्कुराते हुए बोले- अरे तो मैंने कब मना किया है, तुम दोनों बताओ पहले किसकी चाटूँ?
ज्योति मेरी तरफ इशारा करते हुए बोली- मेरी तो कोई नहीं बात नहीं है इसलिए पहले इसकी चाट लीजिए, फिर मेरी!

अंकल मेरे पास आ गए और बोले- बोलो कैसे चटवाओगी बेटा, खड़ी होकर या लेट कर?
मैंने शर्माते हुए धीरे से कहा- जो आप को पसंद हो!

इस पर ज्योति मेरी गांड पर हाथ फेरती हुई आंख मार कर अपने पापा से बोली- अरे पापा की पसंद तो कुछ और ही है … क्यों पापा … गलत तो नहीं कह रही?
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- बाप की पसंद बेटी से ज्यादा कौन जानेगा।
हम तीनों हंस दिये।
 

komaalrani

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Update 10 सहेली के पापा-B

अब तक आपने पढ़ा:
मैंने हैरानी से ज्योति को देखा तो ज्योति ने मुस्कुराते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया।
और धीरे से कान में बोली- यहां खड़े होकर मजे लोगी या अपने कमरे में चलें?

मैं बिना बोले फिर अंकल-आंटी को देखने लगी.
मेरी निगाह ही नहीं हट रही थी.
तभी ज्योति ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों दबे पैर उसके रूम में चली आई।

अब आगे:

रूम में आने के बाद ज्योति अपने कपड़े बदलने लगी और उसने जींस उतार कर स्कर्ट पहन ली।


मैं उसी तरह हैरान बैठी थी।

ज्योति आंख मारती हुई मुझसे बोली- आज तो तेरी किस्मत ही खुल गई.
मैंने कहा- कैसे?
वो बोली- पहले तो रास्ते में तुझे लंड के दर्शन हुए अब घर आते ही चुदाई देखने को मिल गई.

मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कहां देख पाई … तू यहां खींच कर लेती आई. चल ना देखते हैं क्या कर रहे हैं वे!
ज्योति बोली- अरे थोड़ा धैर्य रखो बाबा … क्यों कवाब में हड्डी बनाने जा रही हो … बेचारे मजे कर रहे हैं, कर लेने दो ना!

मैंने कहा- एक बात बता … तू आज पहली बार अपनी मम्मी पापा को ये करते देख रही है या इसके पहले देख चुकी है?
ज्योति मुस्कुराते हुए बोली- कई बार देखा है.

मैंने हैरानी से पूछा- सच में? तब तो तूने अपने पापा का लंड भी देख होगा?
ज्योति बोली- और नहीं तो क्या … एकदम मस्त मोटा और लंबा है।


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मैं बोली- अरे कितनी बेशर्म है तू यार, कैसे अपने पापा के बारे में बोल रही है।
इस पर वह बोली- अरे इसमें बेशर्म की क्या बात है. तूने पूछा तो मैंने जो सच था, वो बता दिया।

ज्योति बोली- तुझे देखना है क्या पापा का लंड … देखना हो तो बता?
मैंने पूछा- वो कैसे?

ज्योति बोली- अरे ये सब तू मुझ पर छोड़ … बस तू बता कि देखना चाहती है या नहीं … एकदम मस्त लंड है मोटा सा!
मैं आंख मारती हुई बोली- नेकी और पूछ-पूछ, चल दिखा!

ज्योति मेरा गाल खींचते हुए बोली- अरे वाह मेरी रानी … बहुत मन कर रहा है तेरा लंड देखने का? आज तो तुझे लंड का दर्शन करा कर भेजूंगी घर!
मैंने फिर हैरानी से पूछा- मगर कैसे यार?
ज्योति बोली- ये सब तू मुझे पर छोड़ दे … तू बस चुपचाप बैठी रह!

इतने में ज्योति की मम्मी की आवाज़ लॉबी से आई.
शायद वे लोग चुदाई कर चुके थे।


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ज्योति बोली- लगता है काम ख़त्म हो गया।
मैंने कहा- तू कैसे बताएगी उन्हें कि हम यहां कब आयी?
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अभी बता देती हूं. इसमें कौन सी डरने वाली बात है।’

अभी मैं कुछ कहती, तभी ज्योति ने कमरे के दरवाजे पर जाकर अपनी मम्मी को आवाज दी और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली- अरे मम्मी काम हो गया हो तो गरिमा को नाश्ता पानी दे दो … बेचारी कब से प्यासी बैठी है!

जैसे ही आंटी अंकल को पता चला कि हम लोग घर में ही हैं तो अंकल की तो कोई आवाज नहीं आई।
मगर आंटी हंसती हुई कमरे के पास आईं और ज्योति के बाल खींचती हुई बोलीं- बदमाश, तुम लोग कब से आकर चोरों की तरह बैठी हो?


आंटी ने आगे से खुला वाला नाइट गाउन पहना हुआ था और कमर के पास कपड़े रिबन से बांधा था. अगर रिबन खोल दो आंटी आगे से पूरी नंगी हो जाती।

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ज्योति अपने बाल छुड़ाते हुए हंसकर बोली- बस आप और पापा जब अपना काम ख़त्म करने वाले थे, उसके थोड़े पहले ही हम दोनों आई थी.
आंटी तब तक कमरे में आ चुकी थीं।

ववे मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई, बोली- बेटी, तू सीधी-सादी लड़की है इसके (ज्योति) के चक्कर में मत पड़, वरना बिगड़ जाएगी।
मैं हंसने लगी।

इस पर ज्योति बोली- मम्मी तुम इसे सीधी कब से समझने लगी, पता है मैं तो यहां आकर बैठी थी और यही छुप कर देख रही थी तुम्हें और पापा को!

मैंने ज्योति को चिकोटी काटते हुए बोला- अरे नहीं आंटी, यह झूठ बोल रही है … ऐसा कुछ भी नहीं था!

इस पर आंटी बोलीं- अरे देख भी लिया तो क्या हुआ … तुम लोग बड़ी हो गई हो, ये सब भी जानना चाहिए.

ज्योति बोली- मम्मी, इस बेचारी की एक मदद कर दो ना!
आंटी बोली- क्या?

ज्योति मेरी तरफ देखकर आंख मारते हुए बोली- इसने कभी लड़कों का ‘वो’ नहीं देखा है … पापा से कह दो ना कि बेचारी को अपना ‘वो’ दिखा दें।

मैं एकदम शरमा गई और ज्योति की पीठ पर थप्पड़ मारते हुए बोली- अरे नहीं आंटी … बदमाश है ये … मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है।
लेकिन मैं ये देख कर हैरान थी कि ज्योति अपनी मम्मी से कैसी इस तरह बात कर रही है।

फिर भी मैंने इस पर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब बातों में मुझे खुद ही मजा आ रहा था।

आंटी हंसती हुई मुझसे बोली- अरे तो पहले बता दिया होता, इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है?

फिर ज्योति की तरफ इशारा करते हुए मुझसे बोलीं- इससे पूछ … ये तो कितनी बार देख चुकी है अपने पापा का ‘वो’!

तब मेरी गाल पर चुटकी काटते हुए बोलीं- वैसे ये वो क्या होता है? उसका कुछ तो नाम तो होगा ना?

ज्योति बोली- लंड नाम होता है … और क्या? बेचारी नहीं कह पा रही है तो मैं कह देती हूँ। इसे पापा का लंड दिखवा दो।

मैंने गुस्साने का नाटक करते हुए ज्योति को चिकोटी काटी और हुए कहा- तू चुप रहती है कि नहीं, अरे आंटी, ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा।


इस पर ज्योति की मम्मी हंसने लगी और बोली- कोई बात नहीं … अब कह ही दिया है तो अपनी सखी की बात मान लो और एक बार देख लो. इसमें क्या हर्ज़ है। तुम लोग यहीं बैठो मैं इसके पापा को बुला कर लाती हूं!
यह कह कर वे कमरे से बाहर निकल गयी.


उनके जाते ही ज्योति बिस्तर पर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी अपना बगल खींच कर बैठा लिया और बोली- आज तो तेरा सपना पूरा होने जा रहा है लंड देखने का!

मैंने घबराने का नाटक करते हुए कहा- तू अपनी मम्मी और पापा से ऐसे बात कर लेती है? मैं तो जा रही हूं बाबा … मुझे तो शर्म आ रही है। तुम ही देखो अपने पापा का लंड!

इस पर ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अरे, हम लोग आपस में दोस्त की तरह रहते हैं, कोई पर्दा नहीं करते हैं।

अभी हम ये बातें कर ही रहे थे कि कि ज्योति की मम्मी और पापा दोनों कमरे में आ गए।

मेरी तो धड़कन बढ़ गयी.

ज्योति के पापा ने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था और कुछ नहीं पहनना था।
उन्हें देखते ही मैं बिस्तर से खड़ी हो गई और नमस्ते की।

वे मुझे देखते हुए मुस्कुरा रहे थे.

इतने में आंटी बोलीं- क्या देखना था गरिमा, खुद ही बोल दो अपने अंकल से!
मैं एकदम शांत खड़ी रही.
शर्म से मेरा चेहरा लाल हो रहा था, साथ ही मज़ा भी आ रहा था।

ज्योति ने मुझे वापस खींच कर बिस्तर पर बैठा लिया और अपनी मम्मी से बोली- अरे क्यों छेड़ रही हो बेचारी को, देखो कैसे शरमा रही है। चलो मैं ही बोल देती हूं इसकी तरफ से!

फिर ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, दरअसल इसने कभी वो नहीं देखा है जहां से आप लोग सू-सू करते हैं!

तब ज्योति के पापा थोड़ा आगे बढ़ कर ठीक मेरे सामने खड़े हो गए और बोले- अरे तो इसमें दिखने जैसी कौन सी बात है, खुद ही देख लो।
इस पर आंटी और ज्योति दोनों हंसने लगे।

मैं ऐसी बैठी थी जैसी सुहागरात में नई दुल्हन बैठी हो और बस शरमा रही थी।

ज्योति की मम्मी मुस्कुराती हुई अंकल से बोलीं- अरे वह शरमा रही है तो क्यों मज़ाक कर रहे हो … लाओ मैं ही दिखा देती हूं।

यह कह कर उन्होने अंकल का तौलिया ही खोल दिया।

खुलते ही तौलिया नीचे गिर पड़ा और अंकल का मोटा और लम्बा सा लंड ठीक मेरी आँखों के सामने था।

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जैसा कि मैं पहले स्टोरी में बता चुकी हूं कि मैं पहले भी लंड को देख चुकी थी और अपनी चूत, गांड और मुंह में उसका स्वाद भी ले चुकी थी।
जिसमें दो लंड तो लड़कों के थे, एक मेरे भाई सोनू का और दूसरा अमित का!
एक लंड करीब 60 साल के आदमी का था।

मगर पहली बार किसी जवान आदमी का लंड अपनी आंखों के सामने देख रही थी।

हालांकि अभी पिछली रात में अपने पापा का लंड तब देखा था जब वे बुआ की चुदाई कर रहे थे।
मगर वो खिड़की में दरवाजे से देखा था।

अंकल अभी कुछ ही देर पहले आंटी को चोद कर आये थे इसलिए उनका लंड अभी थोड़ा ढीला था मगर अब उसमें हल्का-हल्का तनाव आने लगा था।

मेरे दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

आंटी मुस्कुराती हुई बोलीं- देख लो आराम से … कोई जल्दबाजी नहीं है।

ज्योति जो मेरे बगल बैठी थी, उसने मेरे कांधे पर हाथ रख कर अंकल से कहा- पापा, थोड़ा और पास आ जाइये. क्यों बेचारी को दूर से दिखा कर तरसा रहे हैं।

अंकल मुस्कुराते हुए खिसक कर एकदम मेरे सामने आ गए।
चूंकि मैं बेड पर बैठी थी इसलिए उनका लंड ठीक मेरी चूची के सामने था।

तभी अचानक ज्योति ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अंकल के लंड पर रख दिया और बोली- अरे, इसे सिर्फ आंख से ही नहीं, हाथ से छूकर भी देख कितना मोटा और लम्बा है ये!

अंकल के लंड को छूटे ही मेरे बदन में एकदम सुरसुरी सी दौड़ गई।

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पहले तो मैंने सोचा कि हाथ हटा लूं मगर हटाने का मन नहीं हुआ।
अंकल का लंड एक दम गर्म था.
मेरे पकड़ते ही उनके लंड में तनाव आने लगा।

मैं लंड को मुट्ठी में पकडे एकटक देख रही थी।

ज्योति ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर लंड की चामड़ी को पीछे खींच दिया जिसके लंड का गुलाबी-गुलाबी सुपारा पूरा खुल कर चमक उठा।

वह बोली- ऐसे देखते हैं लंड को … समझी? कितना मस्त लग रहा है ना!

अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा देखते ही मेरी चूत और मुँह दोनों में पानी आ गया।
मन कर रहा था कि तुरंत लंड को मुंह में लेकर चूस लूं.
मगर मैंने किसी तरह खुद को काबू में रखा, बस चुपचाप लंड पकड़े बैठी रही।



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तभी आंटी ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली हो, उन्होंने ज्योति से मुस्कुराते हुए कहा- अरे ज्योति, अपने दोस्त को ये तो बताओ कि ये टेस्टी भी होता है एक बार चख कर तो देख। अभी थोड़ी शरमा रही होगी बेचारी। ऐसा कर कि एक बार तुम बता दो कि इसका टेस्ट कैसे लेते हैं।

इस पर ज्योति हंसने लगी और मेरे गाल पर चिकोटी काट कर बोली- अरे सब कुछ मुझे ही सिखाना पड़ेगा क्या?
फ़िर उसने अंकल से कहा- पापा, थोड़ा इधर आइये।

मैंने अंकल की ओर देखा तो वे चुपचाप खड़े मुस्कुरा रहे थे।

तब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया जिसके बाद वो थोड़ा खिसक कर ज्योति के सामने खड़े हो गए।


ज्योति ने अपने पापा का लंड हाथ से पकड़ा और लंड की स्किन को पीछे खींच दिया और झुक कर सुपारे को मुँह में भर कर चूसने लगी।

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मुझे ये न्यूड फॅमिली सपने जैसा लग रहा था।
विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब सच है।
मेरी लैगिंग चूत के पास एकदम गीली हो चुकी थी।

उधर ज्योति मजे से अपने पापा के लंड को चूस रही थी।

एक-दो मिनट चूसने के बाद ज्योति ने लंड पर से अपना मुंह हटा लिया और मुझसे बोली- अब देख लिया ना, ले अब तू भी टेस्ट कर!
अंकल थोड़ा खिसक कर मेरे पास आ गए।

लंड को देख कर वैसे ही मेरी लार टपक रही थी कि कब मुंह में लेकर चूसना शुरू करूं।
लेकिन थोड़ा शरमाने का नाटक भी जरूरी था।

मैंने एक हाथ से अंकल के लण्ड को पकड़ा और स्किन को पीछे खींच कर सुपारे को पूरा खोल दिया।
ज्योति के थूक से अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा एक दम चमक रहा था।


मैं थोड़ा झुकी और सुपारे को मुंह में लेकर चूसने लगी।

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उधर अंकल ने अपना एक हाथ को मेरे सर को पकड़ कर हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर मेरे मुँह में लंड को आगे पीछे करने लगे।

अभी एक-दो मिनट में ही लंड को चूसा ही था कि अंकल ने कमर हिलाना रोक कर कहा- ये तो बेईमानी है भाई … कि सिर्फ मैंने ही कपड़े नहीं पहने हैं और तुम लोग कपड़े पहने हुए हो।
मैं लंड से मुँह हटा कर उन्हें देखने लगी।

तभी आंटी बोलीं- हां ये बात तो सही है।

फिर मेरे और ज्योति की तरफ इशारा करते हुए बोली- तुम दोनों भी अपने कपड़े उतारो।
इसपर ज्योति हंसते हुए बोली- और आप क्यों नहीं?
आंटी बोली- अरे मुझे तुम लोगों के लिए चाय-नाश्ता भी तो बनाना है ना!

फिर मुझे देखते हुए आंख मारकर बोली- वैसे भी तुम्हारी सहेली तो अंकल का लंड ही देखना चाहती थी ना!
इस पर मैं मुस्कुराने लगी।

ज्योति बोली- चलो ठीक है।
फिर मेरी ओर देख कर बोली- पहले मैं शुरुआत करती हूं।

यह कहकर उसने अपनी स्कर्ट का हुक खोल दिया, जिसमें से उसकी स्कर्ट नीचे गिर गई और फिर उसने पैरों से निकाल कर स्कर्ट को बाहर कर दिया।
फिर टी-शर्ट भी उतार दिया।

ज्योति अब सिर्फ ब्रा और पैंटी मैं थी।

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तभी उसके पापा मुस्कुराते हुए बोले- ये भी उतारो!

इस पर ज्योति की मम्मी ने अंकल को चिकोटी काटा और हंसते हुए बोली- बड़ी जल्दी मची है अपनी बेटी को नंगी देखने की?
हम सब हंसने लगे।

ज्योति आंख मारती हुई बोली- बोल तो ऐसे रहे हैं जैसे पहली बार देखने जा रहे हैं।

फिर ज्योति बोली- मुझे तो देखा ही है, आज इसे देख लीजिये।

यह कहती हुई ज्योति मेरी तरफ देख कर बोली- अरे, अब तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा? मैंने अपने कपड़े उतार दिए, अब तू भी उतार।


तभी ज्योति की मम्मी कमरे से बाहर जाती हुई बोलीं- कामवाली के आने का टाइम हो रहा है। तुम लोग मजे करो, तब तक मैं कपड़े बदल कर चाय-पानी का इंतजाम करती हूं।

यह कहकर वे कमरे के बाहर निकल कर कमरे के दरवाजे पर बाहर से बंद कर काम करने चली गई।

मैंने लैगिंग और टी-शर्ट पहनना हुआ था।
ज्योति की बात पर मैंने बिना कुछ बोले बैठे-बैठे ही अपनी टी-शर्ट उतार दी और सिर्फ ब्रा और लैगिंग में रह गई।
मैं भी अब शर्माना छोड़ कर मजे लेने के मूड में आ चुकी थी।

ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- सब उतारना पड़ेगा गरिमा!
मैं बोली- तुमने भी तो पूरे कपड़े नहीं उतारे हैं।

मेरी बात पर ज्योति के पापा बोले- वही तो मैं भी कह रहा हूँ।
इस पर हम सब हंसने लगे.

ज्योति मुझसे बोली- अच्छा तो ये बात है, चल मेरे साथ-साथ कपड़े उतार!
ये कहते हुए उसने अपनी ब्रा उतार दी।
अब वह सिर्फ पैंटी में थी.

उसने बोला- तू भी अपनी ब्रा उतार!
मैंने अपने दोनो हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया।

हुक खुलते ही मेरी दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गई, फिर मैंने ब्रा को उतार का रख दिया।

अब मैं सिर्फ लैगिंग में खड़ी थी।

ज्योति के पापा मेरी चूचियों को एक टक घूर रहे थे।
तब ज्योति बोली- अब लैगिंग भी उतार।
मैंने कहा- तू भी अपनी पैंटी उतार!

इस पर ज्योति ने अपनी पैंटी को पकड़ कर घुटनो तक खींच दिया और फिर पैरों से बाहर कर दिया।

फिर मैंने भी अपनी लैगिंग को खींच कर नीचे कर दिया और फिर झुक कर पूरी पैरों से बाहर निकाल दिया।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।

अब कमरे में हम तीनों मैं, ज्योति और उसके पापा नंगे खड़े थे।

अंकल थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आ गए और मेरी एक हाथ मेरी चूची पर रख कर सहलाने लगे।
चूची सहलाते-सहलाते वो थोड़ा झुके और मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगे।

मेरी दूसरी चूची को वो अभी भी अपने हाथ से सहला रहे थे।

अचानक उन्हें मेरी चूची को सहलाना छोड़ कर अपने हाथ को मेरी चूत पर रख दिया और उसे सहलाने लगे।
मेरी चूत एकदम पनिया चुकी थी।

तभी ज्योति मेरे बगल आकर खड़ी हो गई और एक हाथ से मेरी चूची को सहलाने लगी और दूसरे हाथ से अपने पापा के सख्त लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।

फिर कुछ देर बाद उसने मेरी चूची पर से अपने हाथ को हटा लिया और घुटनों के बल नीचे बैठ कर अपने पापा का लंड चूसने लगी।

कुछ देर ऐसे ही चलता रहा.

उसके बाद ज्योति उठ कर खड़ी हो गई और मुझसे बोली- तू पापा का लंड चूसेगी एक बार और?
मैं तो कब से इसके लिए तैयार खड़ी थी … मैं तुरंत बैठ गई और अंकल का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

उधर अंकल ज्योति की चूची मुंह में लेकर चूस रहे थे और एक हाथ से उसकी चूत को सहला रहे थे।

लंड चूसते हुए कुछ ही देर हुई थी, तभी ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, अब आप की बारी है अब आप हम दोनों की चाटिये।
यह सुनकर मैं लंड चूसना छोड़ कर खड़ी हो गयी।

अंकल मुस्कुराते हुए बोले- अरे तो मैंने कब मना किया है, तुम दोनों बताओ पहले किसकी चाटूँ?
ज्योति मेरी तरफ इशारा करते हुए बोली- मेरी तो कोई नहीं बात नहीं है इसलिए पहले इसकी चाट लीजिए, फिर मेरी!

अंकल मेरे पास आ गए और बोले- बोलो कैसे चटवाओगी बेटा, खड़ी होकर या लेट कर?
मैंने शर्माते हुए धीरे से कहा- जो आप को पसंद हो!

इस पर ज्योति मेरी गांड पर हाथ फेरती हुई आंख मार कर अपने पापा से बोली- अरे पापा की पसंद तो कुछ और ही है … क्यों पापा … गलत तो नहीं कह रही?
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- बाप की पसंद बेटी से ज्यादा कौन जानेगा।
हम तीनों हंस दिये।
जबरदस्त अपडेट

कहानी में गति, घटनाएं और छेड़छाड़ सब एक साथ सिर्फ आप दे सकती हैं

और चित्रों का तो कहना ही क्या, बहुत ही उत्तेजक, इन्सेस्ट की तो इस फोरम में बाढ़ है लेकिन इन्सेस्ट को भी नेचुरल ढंग से विकसित करने की कला जिन गिनी चुनी लेखिकाओं में हैं उनमे आप है

लेकिन डाकटर साहिबा की कहानियों में जैसे कविताएं आपकी आती थीं वैसे ही इन अपडेट्स के साथ आएं तो जायदा मजा आएगा

आजकल मैं तीन कहानियां एक साथ पोस्ट कर रही हूँ इसलिए यहाँ हाजिरी देने में कभी कभी विलम्ब हो जाता है।


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arushi_dayal

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Update 10 सहेली के पापा-C
फिर मैंने भी अपनी लैगिंग को खींच कर नीचे कर दिया और फिर झुक कर पूरी पैरों से बाहर निकाल दिया।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।

अब कमरे में हम तीनों मैं, ज्योति और उसके पापा नंगे खड़े थे।

अंकल थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आ गए और मेरी एक हाथ मेरी चूची पर रख कर सहलाने लगे।
चूची सहलाते-सहलाते वो थोड़ा झुके और मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगे।
मेरी दूसरी चूची को वो अभी भी अपने हाथ से सहला रहे थे।

अब आगे:
मैं समझ गई कि अंकल को गांड मारने में ज्यादा मजा आता है।


वैसे सोनू (मेरा छोटा भाई) भी मेरी गांड काई बार मार चुका था मगर ज्योति के पापा के लंड का साइज में सोनू का लंड बड़ा और मोटा था।


IMG-6459
मेरी चूत तो लंड के साथ, मोटे-मोटे बैगन और मूली को भी झेल चुकी है तो वो अंकल का लंड भी आसान से झेल लेगी।
मगर इतना बड़ा लंड मेरी गांड में कभी नहीं गया था और ना ही मैंने कभी बैगन और मूली गांड में डाली थी।

ज्योति मुझसे बोली- वैसे भी आज जो तू चाहे वही होगा।
मैंने पॉर्न मूवी में तो देखा था मगर कभी खुद खड़े होकर चूट नहीं चटवायी थी।

तो मैंने कहा- ठीक है, तो खड़े होकर ही कर लेते हैं।
इस पर अंकल मेरे सामने बैठ गए।
अब उनका मुंह ठीक मेरी चूत के सामने था।

अंकल अपने दोनों हाथ को मेरी चूत के अगल-बगल जांघों पर रख कर मेरे पैरों को हल्का सा फैलाने की कोशिश करने लगे।
जिस पर मैंने खुद ही अपने पैरों को फैला कर चूत को उनके मुंह के पास कर दिया।

अंकल ने अपनी नाक को मेरी चूत के पास लाकर पहले चूत की खुशबू ली।
और फिर अपनी उंगलियों से मेरी चूत के दोनों फाँकों को फैला दिया और जीभ से चाटने लगे।


IMG-6261

मेरे बदन में करंट सा दौड़ने लगा।
मैंने अपने दोनों हाथों को अंकल के सर पर रख दिया और उत्तेजना में अपने कमर को हल्का-हल्का हिला कर चूत चटवाने लगी।

ज्योति मेरे पीछे आकर मुझसे चिपक कर खड़ी हो गई अपने दोनों हाथ को अगल-बगल से आगे लेकर मेरी चूचियों को दबाने लगी।
उसकी चूची मेरी पीठ से दबी हुई थी।

मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी।
मेरे मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकलने लगीं- आआआह …उह … आआ आआह … उम्म … आआ … हांह!
ऐसे लग रहा था कि शरीर का सारा खून छूट रहा है।

चूत चटवाते हुए अभी 4-5 मिनट हुए होंगे कि अचानक मुझे लगा जैसे चूत की नसें फटने वाली हों।
मेरा चेहरा एकदम गर्म हो गया था।

मैंने अंकल का सिर पकड़ कर अपनी चूत पर चिपका दिया और कमर को तेजी से हिलाने लगी।

अंकल अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डाल कर तेजी से हिला रहे थे।

मेरे मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी- आआआह … आआहाहा … आआ आआ आहा … अंकल और तेज … हां हाँअ … बस्स्स स्स्स … अंकल.. आआ आआआ आआ निकलने वाला है।

मैं तेजी से अपनी कमर को झटके देने लगी और फिर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।


IMG-6544

हल्के ठंड के मौसम में भी मेरे शरीर पर पसीना आ गया था।

मैं एकदम निढाल हो गई थी।
अगर ज्योति ने मुझे पीछे से पकड़ा ना होता तो मैं शायद गिर जाती।

अंकल ने मेरी चूत का पूरा पानी चाट कर साफ कर दिया और खड़े हो गए।

मैं बिस्तर पर बैठ गई, पैरों को नीचे लटकाए हुए आंख बंद कर लेट गई और अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करने लगी।
मैं अभी भी हांफ रही थी।

एक-दो मिनट में थोड़ा सामान्य होने पर मैंने आंखें खोली तो देखा कि ज्योति मेरे बगल में ही नीचे खड़ी है और झुक कर अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर टिकाए हुए है।
अंकल ज्योति के पीछे घुटनोंके बल नीचे बैठ कर उसकी चूत चाट रहे हैं।

मैं उठकर बैठ गई और वही ज्योति के बगल में ही बिस्तर पर बैठी रही।
मैंने देखा कि ज्योति के पापा ज्योति की चूत चाटने के साथ ही उसकी गांड के छेद को भी जीभ से चाट रहे थे।

कुछ देर पहले ही मेरी चूत का पानी निकला था मगर बाप-बेटी के बीच का ये सेक्स सीन देखकर मेरी कमसिन चूत में एक बार फिर कुलबुली होने लगी।

ज्योति उत्तेजना में आंखें बंद कर चूत और गांड चटवा रही थी।

थोड़ी देर तक तो मैं उन दोनों बाप बेटी को ओरल सेक्स करती देखती रही, फिर मैं बैठे-बैठे ज्योति की चूची को एक हाथ से पकड़ कर सहलाने लगी।

जैसे ही मैंने उसकी चूची को पकड़ा, ज्योति ने आंखें खोलकर मुझे देखा और फिर मदहोशी में ही हल्का सा मुस्कुराई और फिर आंख बंद कर मजे से अपने पापा से चूत चटवाती रही।

उसके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी.

तभी ज्योति के पापा ने चूत चाटना छोड़ कर खड़े हो गए।
मैंने देखा कि उनका लंड एकदम तना हुआ था और ठीक ज्योति की गांड के पीछे था।


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ज्योति भी खड़ी हो गई और मुड़ कर अपने पापा से थोड़ा नाराजगी दिखाते हुए बोली- क्या पापा … थोड़ी देर और चाटते ना … बस पानी निकालने ही वाला था मेरा!
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- अरे, यही तो नहीं चाहता था मैं! तुम्हारा पानी निकल जाता है तो तुम मेरी पसंद वाला काम नहीं करने देती हो।

इस पर ज्योति मेरी तरफ इशारा करते हुए मुस्कुरा कर बोली- अरे तो क्या हुआ, मेरी सखी तो है ना … आपकी पसंद का काम ये कर देती।

ज्योति फिर मेरे गाल पर चुटकी काट कर बोली- तू समझ रही है या नहीं पापा की पसंद? पापा को आगे से ज्यादा पीछे वाला पसंद है.
अंकल बोले- अरे तुम आगे और पीछे वाला क्या होता है ज्योति … ठीक से बताओ ना अपनी सहेली को!

ज्योति हंसती हुई मुझसे बोली- अरे पापा को चूत चोदने से ज्यादा गांड मारना पसंद है … अब समझी या नहीं?

बाप-बेटी की लंड चूत सेक्स की बातचीत में मुझे भी मजा आ रहा था और अब तक मैं भी बेशर्म बन चुकी थी।
मैंने हंसते हुए कहा- अरे तो क्या हुआ, जो अंकल चाह रहे हैं वो क्यों नहीं कर देती?
इस पर अंकल और ज्योति दोनों हंसने लगे।

ज्योति बोली- अरे बड़ी चिंता है अंकल की … तो तू ही क्यों नहीं उनकी पसंद को पूरा कर दे रही?

मैंने कहा- ठीक है. मगर पहले आप दोनों कर के दिखाओ तो फिर मैं भी कर लूंगी।
फिर हम तीनों हंस दिये।

अंकल ज्योति से बोले- चलो तुम्हारी सखी को ये भी कर के दिखाते हैं।
ज्योति बोली- हां, आपको तो बस मौका मिलना चाहिए मेरी गांड मारने का!

यह कहकर ज्योति ने पहले की तरह अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर टिका लिया और झुक कर खड़ी हो गई और अपने पापा से बोली- पापा, प्लीज थूक लगा कर मत करिएगा. क्रीम लगा लीजिए।

अंकल ने बिस्तर के सिरहाने में लगे दराज में से एक शीशी निकाली और ज्योति के पीछे आकर खड़े हो गए।
उन्होंने शीशी में से तेल लेकर पहले अपने लंड पर लगाया, फिर ज्योति की गांड के छेद पर थोड़ा सा तेल टपका दिया और उंगली से तेल को उसकी गांड के अंदर तक डाल कर एकदम चिकनी कर दिया।

फिर शीशी बिस्तर पर किनारे रख दिया और एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और दूसरे हाथ से ज्योति की गांड को फैला कर सुपारे को सीधा ज्योति की गांड के छेद पर रख दिया।


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उसके बाद दोनों हाथों से उसकी कमर अगल-बगल से पकड़ कर धीरे-धीरे लंड को उसकी गांड में डालने लगे।

ज्यादा तो नहीं … पर दर्द का हल्का सा असर ज्योति के चेहरे पर दिख रहा था.
उसने आंखें बंद किये अपने होठों को दांतों में भींच लिया था।

करीब आधे से ज्यादा लंड ज्योति की गांड में डाल कर अंकल 10-15 सेकेंड के लिए रुके और फिर दोबारा जोर लगा कर पूरा लंड ज्योति की गांड में डाल दिया।

फिर कुछ देर के लिए रुके और हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर उसकी गांड मारने लगे।

ज्योति के मुँह से हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी।

अब ऐसा लग रहा था कि उसे दर्द से ज्यादा मजा आने लगा था।
वह भी हल्का-हल्का गांड से अपने पापा के लंड पर धक्का मार रही थी।


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मैं बेड पर बगल में बैठ चुपचाप देख रही थी।
मेरी चूत में खुजली शुरू हो गई थी।

मैं अपनी जांघ को थोड़ा फैला कर हाथ से अपनी चूत को हिलाने लगी।

उधर ज्योति ने एक हाथ को बिस्तर पर टिकाये दूसरे हाथ से अपनी चूत को तेजी से सहलाती हुई गांड मरा रही थी।

उसके पापा ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी थी।
ज्योति तेजी से सिसकारी ले रही थी- आआ आआआ आहह ह्ह्ह ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह!

5 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा … अंकल ज्योति की गांड मारते हुए मुझे चूत सहलाती देख रहे थे।
मुझे चूत सहलाती देखकर वे शायद और ज्यादा कामिक हो गए क्योंकि वो तेजी से कमर हिलाते हुए ज्योति की गांड मारने लगे थे और मुझे भी देख जा रहे थे।

यह देख कर मेरी भी उत्तेजना बढ़ गई, मैं बेड पर पीछे की ओर या एक हाथ से कोहनी का टेक लेकर आधा लेट गई और अपनी जांघ को अगल-बगल पूरी फैला कर दूसरे हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी।

अंकल भी दुगुनी स्पीड से अपनी बेटी की गांड मारने लगे थे.

उधर ज्योति कमर को तेजी से हिलाते हुए अपने पापा का लंड गांड में ले रही थी।

ज्योति की सिसकारी तेज होती जा रही थी।
वह तेजी से एक हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी- आह हहह हहहह … पापा पापा पपा … आआआ आआआ आआ आआ आआह हहह हहहह!

ज्योति की चूत पानी छोड़ने वाली थी शायद!
उसने अपनी दोनों जांघों को एकदम चिपका लिया और फिर दोनों हाथों की कोहनी को बिस्तर पर टिका कर हांफने लगी।

उधर अंकल भी कमर को तेजी से धक्का देते हुए ज्योति की गांड मार रहे थे।
वे भी शायद झड़ने वाले थे क्योंकि उन्होंने अपने होठों को दबा लिया था और आंखें बंद कर ज्योति की गांड मारे जा रहे थे।

अचानक झटका लेते हुए ज्योति की गांड को एकदम अपने कमर से चिपका लिया और ‘आआ आह्ह्ह्ह … आआ आआह्ह्ह्ह …’ की तेज सिसकारी लेते हुए ज्योति की गांड में ही लंड का सारा पानी निकाल दिया।

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ज्योति की गांड में ही अपना लंड डाले … वे तेजी से हांफ रहे थे और आंखें बंद किये हुए अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे।

उधर ज्योति अब थोड़ा नॉर्मल हो रही थी … अंकल का लंड अभी-भी ज्योति की गांड में ही था।

थोड़ा नॉर्मल होने के बाद अंकल ने ज्योति की गांड से अपना लंड निकाल लिया और बिस्तर के पास आकर एक कपड़े से पहले अपने लंड को साफ किया और फिर ज्योति की गांड को भी कपड़े से पौंछ दिया।

अंकल का लंड ढीला होकर लटक रहा था।
ढीला होने के बावज़ूद अंकल का लंड लंबा और मोटा दिख रहा था।


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ज्योति अब सीधा होकर बिस्तर पर मेरे बगल बैठ गई।
इधर मेरी चूत में दोबारा खुजली शुरू हो चुकी थी।

मगर मुझे लग रहा था कि अंकल के लंड से तो आज चूत की खुजली नहीं मिटेगी क्योंकि अंकल दो बार झड़ चुके थे.
एक बार बीवी की चूत में और दूसरी बार बेटी की गांड में!
तो अब तीसरी बार के लिए इतनी जल्दी दोबारा शायद तैयार नहीं हो पायेंगे।

अभी मैं ये सब सोच ही रही थी कि मैंने देखा कि अंकल जो अभी तक चुपचाप खड़े होकर हम दोनों की तरफ देख रहे थे … अब एक हाथ से अपने लंड को फिर से सहलाने लगे थे।

ज्योति अपने पापा को लंड हिलाते देख कर मजाक में बोली- अब किसकी तैयारी कर रहे हैं पापा?

फिर मेरी या देख कर आँख मारते हुए कहा- अब अगला शिकार तुम हो गरिमा … तैयार हो जाओ।
मैं मुस्कुराने लगी।

वहीं किचन से खटर-पटर की आवाज के साथ ही किसी के बात करने की आवाज भी आ रही थी।

मैंने पूछा- आंटी किस से बात कर रही हैं; कोई आया है क्या?
ज्योति बोली- अरे कामवाली आई है।

मैंने कहा- कमरे में तो नहीं आएगी ना?
इस पर ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अरे आ भी गई तो क्या हुआ … पापा अपनी बंदूक फिर से लोड कर ही रहे हैं … उसका भी शिकार कर लेंगे।
हम तीनों हंस पड़े।

इधर मेरी चूत की खुजली और बढ़ गई थी।

अंकल मुस्कुराते हुए ज्योति से बोले- अरे अपने सहेली से भी तो पूछ लो उसे क्या पसंद है।
मैं मुस्कुराने लगी तो ज्योति बोली- भाई, तुम्हीं बता दो कि तुम्हें क्या पसंद है।

मैं तो वैसे ही चूत में हो रही खुजली को मिटाना चाह रही थी।
मैंने नखरा दिखाते हुए मुस्कुरा कर कहा- पीछे वाला तो आज रहने दीजिए अंकल, बाकी के लिए मैं तैयार हूं।

अंकल मुस्कुराते हुए बोले- पीछे वाला क्या मतलब बोलो?
फिर ज्योति से बोले- ज्योति क्या कह रही है तुम्हारी दोस्त … मुझे तो समझ में नहीं आ रहा।

मैं समझ गई कि अंकल चुदाई की बात मेरे मुंह से सुनना चाह रहे थे.
तो मैं हंसती हुई बोली- मेरा मतलब आज मेरी गांड को छोड़ दीजिए.

ज्योति अपने पापा से बोली- अरे क्यों परेशान कर रहे हैं उसे पापा … वैसे भी आज पहला दिन है सब कुछ एक ही दिन में थोड़ी सीख जाएगी बेचारी … धीरे-धीरे सब सिखा दिया जाएगा.

इतने में अंकल मेरे सामने आकर खड़े हो गए।
वे अभी भी एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर धीरे-धीरे हिला रहे थे। वे शायद अपने लंड को फिर से खड़ा करना चाह रहे थे।

ज्योति मुझसे बोली- भाई, अब अगर तुम्हें मजा लेना है तो पापा की मदद करनी पड़ेगी।

मैं मुस्कुराते हुए मासूमियत से बोली- अरे मैंने कब मन किया है, मैं तो तैयार हूं, करना क्या है, ये तो बताओ?

इस पर अंकल मेरे एकदम पास आकर लंड को हिला कर बोले- बस इसे फिर से टाइट करना है, जैसा पहले किया था।

मैंने ज्योति की ओर देखा तो ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- सिखा तो दिया है … अब करो।

मैं झुक कर लंड का सुपारा मुँह में लेकर चूसने लगी।
लंड चूसते समय मैंने महसूस किया कि वो थोड़ा ढीला था लेकिन उसमें हल्का-हल्का तनाव आ रहा था।

करीब 2-3 मिनट तक चूसने के बाद अभी लंड पूरा तरह खड़ा नहीं हुआ था।
इधर मेरी चूत की खुजली बढ़ती जा रही थी।

तभी मेरे दिमाग में लंड को खड़ा करने का एक नया तरीका आया जिससे लंड भी खड़ा हो जाएगा और मेरी कुलबुलाती चूत को भी थोड़ा आराम मिलेगा।

मैं लंड चूसना छोड़ कर बिस्तर से उठ गई और अंकल के ठीक सामने उनकी या मुंह करे एकदम चिपक कर खड़ी हो गई।

फिर एक हाथ से उनका लंड पकड़ा और अपनी जांघों को हल्का सा फैलाते हुए कमर को आगे कर दिया या करके खड़े-खड़े लंड को अपनी चूत से रगड़ने लगी।

अंकल को शायद इसमें ज्यादा मजा आने लगा था और थोड़ी ही देर में उनका लंड एकदम लोहे की तरह कड़ा और खड़ा हो गया।

दरअसल यह ट्रिक मुझे मेरे छोटे भाई सोनू ने सिखाई थी।

होता क्या था कि मुझे लंड चुनने में और उसका गाढ़ा नमकीन पानी पीने में बहुत मजा आता था।
तो जब तक वो मेरे मुंह में नहीं आया, तब तक सोनू का लंड झड़ जाता था और फिर मेरे लंड का सारा गाढ़ा-गाढ़ा और स्वादिष्ट नमकीन पानी पी जाती थी।

मगर चूत चुदवाने के लिए लंड को दोबारा खड़ा करना होता था तो सोनू अक्सर इसी तरह खड़े होकर अपने लंड को मेरी चूत से रगड़ता था जिससे थोड़ी देर में उसका लंड दोबारा खड़ा हो जाता था.
इसमें मुझे भी बहुत मजा आता था इसलिए मैं अक्सर सोनू के लंड को खड़े होकर अपनी चूत से रगड़ती थी।

इधर मेरी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और चूत का पानी अंकल के लंड पर लग गया था।

अंकल समझ गए थे कि मैं चुदासी हो चुकी हूं।
वे मुझसे बोले- हो गया बेटा … अब पीछे घूम जाओ और बिस्तर का टेक लेकर खड़ी हो जाओ।

मैंने अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर टिका दिया और झुक कर खड़ी हो गई।


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अंकल ठीक मेरे पीछे आकर खड़े हो गए उनका लंड मेरी गांड से टकरा रहा था।
मैं बोली- अंकल, प्लीज गांड मुझे मत डालियेगा।

अंकल ने बिना कुछ बोले लंड को मेरी चूत के मुँह पर रख दिया और एक ही धक्के में आधा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया।
मेरे मुँह से हल्की सी चीख निकल गई- आआआ आआह्ह!

मैं बोली- धीरे से अंकल … आआ आआह्ह!

अंकल धीरे-धीरे अपने कमरे को हिला कर मुझे चोदने लगे और कुछ ही देर पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया।


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दरअसल सोनू के बाहर जाने के बाद से आज करीब 4-5 महीने के बाद मेरी चूत में कोई लंड घुसा था, इसलिए थोड़ा दर्द हुआ।

मगर 1-2 मिनट की चुदाई के बाद मेरा भी दर्द ख़त्म हो गया और मैं भी गांड उछाल-उछल कर चुदवाने लगी, अंकल से चुदाई का मजा लेने लगी.

ज्योति चुपचाप बैठी अपने पापा को मेरी चुदाई करते हुए देख रही थी।

करीब 4-5 मिनट की चुदाई के बाद मुझे ऐसा लगा कि सारा खून मेरी चूत की तरफ आ रहा हो … मेरी चूत से पानी निकलने वाला था।

मैं तेजी से अपनी कमर से अंकल के लंड पर धक्के मारते हुए सिसकारी लेने लगी- आआ आआआ आअह्ह ह्हह … आआ आआ आआआ आआआ!

उधर अंकल ने भी अपनी स्पीड दोगुनी कर दी थी … शायद वे भी झड़ने वाले थे।

मैं तेजी से सिसकारी ले रही थी- आआआ आआ आआआ जा रहा है … आआआ आआस्स्स स्स्स्स् स्श्श!
और अचानक मैं अपनी कमर को तेज झटका देने लगी।

मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।
वहीं अंकल अभी भी तेजी से मुझे चोद रहे थे।
उनके मुँह से भी सिसकारी निकल रही थी- बस्स शस्श्सस … बेटा … आहह हहह!

इसके बाद वे तेजी से अपनी कमर को झटका देते हुए मेरी चूत में ही झड़ गए।

इधर मैं तेजी से हाँफ रही थी, उधर अंकल मेरी पीठ पर हाय अपना सिर रख कर हाँफ रहे थे।

उनका लंड अभी भी मेरी चूत में ही था.
उनके लंड का गाढ़ा पानी चूत से निकल कर मेरी जांघ पर भी रिस रहा था।

थोड़ी देर बाद अंकल सीधे खड़े हो गए और मेरी चूत से अपने लंड को निकाल लिया और बिस्तर पर जाकर बैठ गए।
मैं भी सीधी होकर बिस्तर पर बैठ गई और कपड़े से अपनी चूत और जाँघों को साफ किया।

फिर हम तीनों कपड़े पहनने लगे.

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Random2022

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नमस्ते दोस्तों... मैं गरिमा हूँ और यह कहानी मेरे बचपन से लेकर युवावस्था तक के सफर और इस यात्रा के दौरान मेरे अनुभवों के बारे में है।

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तो सबसे पहले मैं अपना और अपने परिवार का परिचय करा दूं।
शुरूआत मैं अपनी ससुराल से करती हूं।

मेरे ससुराल में कुल चार लोग हैं:
मैं गरिमा, उम्र 24 साल
मेरे पति रोहित, उम्र 27 वर्ष
मेरी ननद पायल, उम्र 21 साल
और मेरे ससुर- उम्र- 50 साल।
मेरी सास की मौत मेरी शादी से पहले ही हो चुकी थी।

ये तो रहा मेरे ससुराल का परिचय।
अब मैं आपको अपने घर यानि अपने घर का परिचय दे दूँ।
वह इसलिए कि मैं अपनी कहानी अपने घर से ही शुरू करूंगी क्योंकि अपनी पहली चुदाई का अनुभव मैंने वहीं लिया था।

मैं एक छोटे से शहर की एक बेहद मध्यम वर्गीय परिवार से हूं।
मेरे घर में मुझे छोड़ कर कुल तीन लोग ही हैं।



मेरे पापा, उम्र 49 वर्ष
मेरी मम्मी, उम्र 47 वर्ष
और मेरा छोटा भाई सोनू, उम्र 23 वर्ष

इसके अलावा कहानी में और भी किरदार आएंगे जिनका मैं आपसे समय-समय पर परिचय कराती रहूंगी।

तो चलिए अब शुरू करते हैं कहानी का सफर जिसकी शुरुआत मैं अपने घर से करूंगी।

जब मैं 19 साल की थी, 12वीं में थी, तभी मैंने पहली चुदाई का पहला आनंद उठाया था।
और मेरी पहली चुदाई का सौभाग्य मिला था मेरे छोटे भाई सोनू को।

सबसे पहले मैं अपने बारे में आप लोगों को बता दूं।
मैं एक गर्ल्स स्कूल में पढ़ती थी।
मैं तब तक चूत और लंड के रिश्ते के बारे में मुझे अच्छी तरह जान चुकी थी।

जवानी का रंग भी मेरे ऊपर तेजी से चढ़ रहा था।
स्कूल जाते वक्त जब मैं स्कर्ट पहन कर घर से निकलती थी तो अक्सर आने जाने वालों की निगाहें मेरे गोरी-गोरी जांघों पर ठहर जाती थी।
छोटा शहर होने की वजह से स्कूल के लिए कोई बस नहीं थी इसलिए मैं रिक्शे से स्कूल जाती थी।

जब मैं रिक्शे पर बैठती थी तो जानबूझ कर कभी-कभी अपनी टांगों को थोड़ा सा फैला देती थी जिससे मेरी गोरी-गोरी मांसल जांघें दिखाई देने लगती थी।
जिसके बाद सामने से आने वाले या खड़े हुए लोग लार टपकते हुए मेरी जांघों को घूरते रहते थे।
जिसमें मुझे बड़ा मजा आता था।

मेरी एक बहुत अच्छी सहेली ज्योति थी जो हमारे पड़ोस में रहती थी.
हम एक स्कूल और एक ही क्लास में पढ़ती थी।

मैं उसके घर जाया करती थी.
उसके घर ज्यादा जाने की एक वजह यह भी थी कि उसके पास लैपटॉप था जिसमें हम दोनों अक्सर पॉर्न मूवी देखती थी।

मूवी देखते समय हम एक दूसरे की छोटी-छोटी चूचियां जो धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी, भी हंसी मजाक में दबा देती थी।
इतना ही नहीं, हम कभी-कभी एक दूसरे को अपनी चूत दिखाती थी और सहलाती भी थी।
इसमें बहुत मजा आता था।

घर में मेरे छोटे भाई सोनू से भी मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी।
चूंकि वह मुझसे सिर्फ डेढ़ साल ही छोटा था तो हम दोनों दोस्तों की तरह रहते थे और एक दूसरे से हंसी मज़ाक भी खूब करते थे।
हम दोनों अपने हर बात एक-दूसरे से साझा करते हैं जिसमें स्कूल, दोस्त और अपनी कॉलोनी के लड़के लड़कियों की बातें भी शामिल रहती थीं जैसे कौन लड़का किस लड़की पर लाइन मार रहा है या कौन लड़की किसके साथ पटी है।

हम एक-दूसरे को लेकर भी अक्सर मजाक करते थे।
जैसे वह मुझसे पूछता- कॉलोनी में कौन-कौन लड़के तुझे लाइन मारते हैं.
तो मैंने कहा था- तू कौन-कौन सी लड़कियों को लाइन मारता है?
उन लड़कियों में मेरी दोस्त ज्योति भी शामिल थी।

सोनू अक्सर मुझसे पूछता था- दीदी, तुम इतनी देर-देर तक ज्योति दीदी से उसके घर जाकर क्या बात करती हो?
मैं बात को हंसी में टाल दिया करती थी और कह देती थी- हम दोनों साथ पढ़ती हैं और मजे भी करती हैं।

तो वह पूछता- पढ़ाई के साथ कौन से मजे किये जाते हैं, मुझे भी बताओ।
मैं भी हंस कर जवाब देती- कुछ भी करती हूंगी तो तुझे क्या!

वह कहता- ज्योति दीदी (ज्योति मेरी दोस्त थी इसलिए सोनू उसे भी दीदी कहता था) से कह दो कि कभी मुझे भी बुला लिया करे, साथ में मजे करेंगे।
तो मैं कहती- तू उसे दीदी भी कहता है और लाइन भी मारता है।
इस पर सोनू हंसते हुए कहता- अरे वो तो दीदी तुम्हारी वजह से कहता हूं. नहीं तो मैं कौन सा उसे अपनी बहन मानता हूं. तुमसे इतनी बार कहा है कि ज्योति से मेरी बात करो. तुम अपने भाई की इतनी सी मदद भी नहीं कर पाती।
इस पर मैं कहती- कि तुम खुद ही पटा लो।

मैं कहती- तुम कौन सा कोई लड़का मुझे पटा कर देते हो जो मैं तुम्हें ज्योति को पटा कर दूं।
तो वह कहता है- तू क्या करेगी लड़का पटा कर?
मैं कहती- जो तू करेगा लड़की पटा कर!
फ़िर हम हंस देते थे।
Starting to bahut achhi hai story ki.
 
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