Seema P Love
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Super hotUpdate 10 सहेली के पापा-B
अब तक आपने पढ़ा:
मैंने हैरानी से ज्योति को देखा तो ज्योति ने मुस्कुराते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया।
और धीरे से कान में बोली- यहां खड़े होकर मजे लोगी या अपने कमरे में चलें?
मैं बिना बोले फिर अंकल-आंटी को देखने लगी.
मेरी निगाह ही नहीं हट रही थी.
तभी ज्योति ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों दबे पैर उसके रूम में चली आई।
अब आगे:
रूम में आने के बाद ज्योति अपने कपड़े बदलने लगी और उसने जींस उतार कर स्कर्ट पहन ली।
मैं उसी तरह हैरान बैठी थी।
ज्योति आंख मारती हुई मुझसे बोली- आज तो तेरी किस्मत ही खुल गई.
मैंने कहा- कैसे?
वो बोली- पहले तो रास्ते में तुझे लंड के दर्शन हुए अब घर आते ही चुदाई देखने को मिल गई.
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कहां देख पाई … तू यहां खींच कर लेती आई. चल ना देखते हैं क्या कर रहे हैं वे!
ज्योति बोली- अरे थोड़ा धैर्य रखो बाबा … क्यों कवाब में हड्डी बनाने जा रही हो … बेचारे मजे कर रहे हैं, कर लेने दो ना!
मैंने कहा- एक बात बता … तू आज पहली बार अपनी मम्मी पापा को ये करते देख रही है या इसके पहले देख चुकी है?
ज्योति मुस्कुराते हुए बोली- कई बार देखा है.
मैंने हैरानी से पूछा- सच में? तब तो तूने अपने पापा का लंड भी देख होगा?
ज्योति बोली- और नहीं तो क्या … एकदम मस्त मोटा और लंबा है।
मैं बोली- अरे कितनी बेशर्म है तू यार, कैसे अपने पापा के बारे में बोल रही है।
इस पर वह बोली- अरे इसमें बेशर्म की क्या बात है. तूने पूछा तो मैंने जो सच था, वो बता दिया।
ज्योति बोली- तुझे देखना है क्या पापा का लंड … देखना हो तो बता?
मैंने पूछा- वो कैसे?
ज्योति बोली- अरे ये सब तू मुझ पर छोड़ … बस तू बता कि देखना चाहती है या नहीं … एकदम मस्त लंड है मोटा सा!
मैं आंख मारती हुई बोली- नेकी और पूछ-पूछ, चल दिखा!
ज्योति मेरा गाल खींचते हुए बोली- अरे वाह मेरी रानी … बहुत मन कर रहा है तेरा लंड देखने का? आज तो तुझे लंड का दर्शन करा कर भेजूंगी घर!
मैंने फिर हैरानी से पूछा- मगर कैसे यार?
ज्योति बोली- ये सब तू मुझे पर छोड़ दे … तू बस चुपचाप बैठी रह!
इतने में ज्योति की मम्मी की आवाज़ लॉबी से आई.
शायद वे लोग चुदाई कर चुके थे।
ज्योति बोली- लगता है काम ख़त्म हो गया।
मैंने कहा- तू कैसे बताएगी उन्हें कि हम यहां कब आयी?
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अभी बता देती हूं. इसमें कौन सी डरने वाली बात है।’
अभी मैं कुछ कहती, तभी ज्योति ने कमरे के दरवाजे पर जाकर अपनी मम्मी को आवाज दी और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली- अरे मम्मी काम हो गया हो तो गरिमा को नाश्ता पानी दे दो … बेचारी कब से प्यासी बैठी है!
जैसे ही आंटी अंकल को पता चला कि हम लोग घर में ही हैं तो अंकल की तो कोई आवाज नहीं आई।
मगर आंटी हंसती हुई कमरे के पास आईं और ज्योति के बाल खींचती हुई बोलीं- बदमाश, तुम लोग कब से आकर चोरों की तरह बैठी हो?
आंटी ने आगे से खुला वाला नाइट गाउन पहना हुआ था और कमर के पास कपड़े रिबन से बांधा था. अगर रिबन खोल दो आंटी आगे से पूरी नंगी हो जाती।
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ज्योति अपने बाल छुड़ाते हुए हंसकर बोली- बस आप और पापा जब अपना काम ख़त्म करने वाले थे, उसके थोड़े पहले ही हम दोनों आई थी.
आंटी तब तक कमरे में आ चुकी थीं।
ववे मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई, बोली- बेटी, तू सीधी-सादी लड़की है इसके (ज्योति) के चक्कर में मत पड़, वरना बिगड़ जाएगी।
मैं हंसने लगी।
इस पर ज्योति बोली- मम्मी तुम इसे सीधी कब से समझने लगी, पता है मैं तो यहां आकर बैठी थी और यही छुप कर देख रही थी तुम्हें और पापा को!
मैंने ज्योति को चिकोटी काटते हुए बोला- अरे नहीं आंटी, यह झूठ बोल रही है … ऐसा कुछ भी नहीं था!
इस पर आंटी बोलीं- अरे देख भी लिया तो क्या हुआ … तुम लोग बड़ी हो गई हो, ये सब भी जानना चाहिए.
ज्योति बोली- मम्मी, इस बेचारी की एक मदद कर दो ना!
आंटी बोली- क्या?
ज्योति मेरी तरफ देखकर आंख मारते हुए बोली- इसने कभी लड़कों का ‘वो’ नहीं देखा है … पापा से कह दो ना कि बेचारी को अपना ‘वो’ दिखा दें।
मैं एकदम शरमा गई और ज्योति की पीठ पर थप्पड़ मारते हुए बोली- अरे नहीं आंटी … बदमाश है ये … मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है।
लेकिन मैं ये देख कर हैरान थी कि ज्योति अपनी मम्मी से कैसी इस तरह बात कर रही है।
फिर भी मैंने इस पर ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सब बातों में मुझे खुद ही मजा आ रहा था।
आंटी हंसती हुई मुझसे बोली- अरे तो पहले बता दिया होता, इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है?
फिर ज्योति की तरफ इशारा करते हुए मुझसे बोलीं- इससे पूछ … ये तो कितनी बार देख चुकी है अपने पापा का ‘वो’!
तब मेरी गाल पर चुटकी काटते हुए बोलीं- वैसे ये वो क्या होता है? उसका कुछ तो नाम तो होगा ना?
ज्योति बोली- लंड नाम होता है … और क्या? बेचारी नहीं कह पा रही है तो मैं कह देती हूँ। इसे पापा का लंड दिखवा दो।
मैंने गुस्साने का नाटक करते हुए ज्योति को चिकोटी काटी और हुए कहा- तू चुप रहती है कि नहीं, अरे आंटी, ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा।
इस पर ज्योति की मम्मी हंसने लगी और बोली- कोई बात नहीं … अब कह ही दिया है तो अपनी सखी की बात मान लो और एक बार देख लो. इसमें क्या हर्ज़ है। तुम लोग यहीं बैठो मैं इसके पापा को बुला कर लाती हूं!
यह कह कर वे कमरे से बाहर निकल गयी.
उनके जाते ही ज्योति बिस्तर पर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी अपना बगल खींच कर बैठा लिया और बोली- आज तो तेरा सपना पूरा होने जा रहा है लंड देखने का!
मैंने घबराने का नाटक करते हुए कहा- तू अपनी मम्मी और पापा से ऐसे बात कर लेती है? मैं तो जा रही हूं बाबा … मुझे तो शर्म आ रही है। तुम ही देखो अपने पापा का लंड!
इस पर ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- अरे, हम लोग आपस में दोस्त की तरह रहते हैं, कोई पर्दा नहीं करते हैं।
अभी हम ये बातें कर ही रहे थे कि कि ज्योति की मम्मी और पापा दोनों कमरे में आ गए।
मेरी तो धड़कन बढ़ गयी.
ज्योति के पापा ने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था और कुछ नहीं पहनना था।
उन्हें देखते ही मैं बिस्तर से खड़ी हो गई और नमस्ते की।
वे मुझे देखते हुए मुस्कुरा रहे थे.
इतने में आंटी बोलीं- क्या देखना था गरिमा, खुद ही बोल दो अपने अंकल से!
मैं एकदम शांत खड़ी रही.
शर्म से मेरा चेहरा लाल हो रहा था, साथ ही मज़ा भी आ रहा था।
ज्योति ने मुझे वापस खींच कर बिस्तर पर बैठा लिया और अपनी मम्मी से बोली- अरे क्यों छेड़ रही हो बेचारी को, देखो कैसे शरमा रही है। चलो मैं ही बोल देती हूं इसकी तरफ से!
फिर ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, दरअसल इसने कभी वो नहीं देखा है जहां से आप लोग सू-सू करते हैं!
तब ज्योति के पापा थोड़ा आगे बढ़ कर ठीक मेरे सामने खड़े हो गए और बोले- अरे तो इसमें दिखने जैसी कौन सी बात है, खुद ही देख लो।
इस पर आंटी और ज्योति दोनों हंसने लगे।
मैं ऐसी बैठी थी जैसी सुहागरात में नई दुल्हन बैठी हो और बस शरमा रही थी।
ज्योति की मम्मी मुस्कुराती हुई अंकल से बोलीं- अरे वह शरमा रही है तो क्यों मज़ाक कर रहे हो … लाओ मैं ही दिखा देती हूं।
यह कह कर उन्होने अंकल का तौलिया ही खोल दिया।
खुलते ही तौलिया नीचे गिर पड़ा और अंकल का मोटा और लम्बा सा लंड ठीक मेरी आँखों के सामने था।
जैसा कि मैं पहले स्टोरी में बता चुकी हूं कि मैं पहले भी लंड को देख चुकी थी और अपनी चूत, गांड और मुंह में उसका स्वाद भी ले चुकी थी।
जिसमें दो लंड तो लड़कों के थे, एक मेरे भाई सोनू का और दूसरा अमित का!
एक लंड करीब 60 साल के आदमी का था।
मगर पहली बार किसी जवान आदमी का लंड अपनी आंखों के सामने देख रही थी।
हालांकि अभी पिछली रात में अपने पापा का लंड तब देखा था जब वे बुआ की चुदाई कर रहे थे।
मगर वो खिड़की में दरवाजे से देखा था।
अंकल अभी कुछ ही देर पहले आंटी को चोद कर आये थे इसलिए उनका लंड अभी थोड़ा ढीला था मगर अब उसमें हल्का-हल्का तनाव आने लगा था।
मेरे दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं।
आंटी मुस्कुराती हुई बोलीं- देख लो आराम से … कोई जल्दबाजी नहीं है।
ज्योति जो मेरे बगल बैठी थी, उसने मेरे कांधे पर हाथ रख कर अंकल से कहा- पापा, थोड़ा और पास आ जाइये. क्यों बेचारी को दूर से दिखा कर तरसा रहे हैं।
अंकल मुस्कुराते हुए खिसक कर एकदम मेरे सामने आ गए।
चूंकि मैं बेड पर बैठी थी इसलिए उनका लंड ठीक मेरी चूची के सामने था।
तभी अचानक ज्योति ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अंकल के लंड पर रख दिया और बोली- अरे, इसे सिर्फ आंख से ही नहीं, हाथ से छूकर भी देख कितना मोटा और लम्बा है ये!
अंकल के लंड को छूटे ही मेरे बदन में एकदम सुरसुरी सी दौड़ गई।
पहले तो मैंने सोचा कि हाथ हटा लूं मगर हटाने का मन नहीं हुआ।
अंकल का लंड एक दम गर्म था.
मेरे पकड़ते ही उनके लंड में तनाव आने लगा।
मैं लंड को मुट्ठी में पकडे एकटक देख रही थी।
ज्योति ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर लंड की चामड़ी को पीछे खींच दिया जिसके लंड का गुलाबी-गुलाबी सुपारा पूरा खुल कर चमक उठा।
वह बोली- ऐसे देखते हैं लंड को … समझी? कितना मस्त लग रहा है ना!
अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा देखते ही मेरी चूत और मुँह दोनों में पानी आ गया।
मन कर रहा था कि तुरंत लंड को मुंह में लेकर चूस लूं.
मगर मैंने किसी तरह खुद को काबू में रखा, बस चुपचाप लंड पकड़े बैठी रही।
तभी आंटी ने जैसे मेरे मन की बात सुन ली हो, उन्होंने ज्योति से मुस्कुराते हुए कहा- अरे ज्योति, अपने दोस्त को ये तो बताओ कि ये टेस्टी भी होता है एक बार चख कर तो देख। अभी थोड़ी शरमा रही होगी बेचारी। ऐसा कर कि एक बार तुम बता दो कि इसका टेस्ट कैसे लेते हैं।
इस पर ज्योति हंसने लगी और मेरे गाल पर चिकोटी काट कर बोली- अरे सब कुछ मुझे ही सिखाना पड़ेगा क्या?
फ़िर उसने अंकल से कहा- पापा, थोड़ा इधर आइये।
मैंने अंकल की ओर देखा तो वे चुपचाप खड़े मुस्कुरा रहे थे।
तब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया जिसके बाद वो थोड़ा खिसक कर ज्योति के सामने खड़े हो गए।
ज्योति ने अपने पापा का लंड हाथ से पकड़ा और लंड की स्किन को पीछे खींच दिया और झुक कर सुपारे को मुँह में भर कर चूसने लगी।
मुझे ये न्यूड फॅमिली सपने जैसा लग रहा था।
विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये सब सच है।
मेरी लैगिंग चूत के पास एकदम गीली हो चुकी थी।
उधर ज्योति मजे से अपने पापा के लंड को चूस रही थी।
एक-दो मिनट चूसने के बाद ज्योति ने लंड पर से अपना मुंह हटा लिया और मुझसे बोली- अब देख लिया ना, ले अब तू भी टेस्ट कर!
अंकल थोड़ा खिसक कर मेरे पास आ गए।
लंड को देख कर वैसे ही मेरी लार टपक रही थी कि कब मुंह में लेकर चूसना शुरू करूं।
लेकिन थोड़ा शरमाने का नाटक भी जरूरी था।
मैंने एक हाथ से अंकल के लण्ड को पकड़ा और स्किन को पीछे खींच कर सुपारे को पूरा खोल दिया।
ज्योति के थूक से अंकल के लंड का गुलाबी सुपारा एक दम चमक रहा था।
मैं थोड़ा झुकी और सुपारे को मुंह में लेकर चूसने लगी।
उधर अंकल ने अपना एक हाथ को मेरे सर को पकड़ कर हल्का-हल्का अपने कमर को हिला कर मेरे मुँह में लंड को आगे पीछे करने लगे।
अभी एक-दो मिनट में ही लंड को चूसा ही था कि अंकल ने कमर हिलाना रोक कर कहा- ये तो बेईमानी है भाई … कि सिर्फ मैंने ही कपड़े नहीं पहने हैं और तुम लोग कपड़े पहने हुए हो।
मैं लंड से मुँह हटा कर उन्हें देखने लगी।
तभी आंटी बोलीं- हां ये बात तो सही है।
फिर मेरे और ज्योति की तरफ इशारा करते हुए बोली- तुम दोनों भी अपने कपड़े उतारो।
इसपर ज्योति हंसते हुए बोली- और आप क्यों नहीं?
आंटी बोली- अरे मुझे तुम लोगों के लिए चाय-नाश्ता भी तो बनाना है ना!
फिर मुझे देखते हुए आंख मारकर बोली- वैसे भी तुम्हारी सहेली तो अंकल का लंड ही देखना चाहती थी ना!
इस पर मैं मुस्कुराने लगी।
ज्योति बोली- चलो ठीक है।
फिर मेरी ओर देख कर बोली- पहले मैं शुरुआत करती हूं।
यह कहकर उसने अपनी स्कर्ट का हुक खोल दिया, जिसमें से उसकी स्कर्ट नीचे गिर गई और फिर उसने पैरों से निकाल कर स्कर्ट को बाहर कर दिया।
फिर टी-शर्ट भी उतार दिया।
ज्योति अब सिर्फ ब्रा और पैंटी मैं थी।
तभी उसके पापा मुस्कुराते हुए बोले- ये भी उतारो!
इस पर ज्योति की मम्मी ने अंकल को चिकोटी काटा और हंसते हुए बोली- बड़ी जल्दी मची है अपनी बेटी को नंगी देखने की?
हम सब हंसने लगे।
ज्योति आंख मारती हुई बोली- बोल तो ऐसे रहे हैं जैसे पहली बार देखने जा रहे हैं।
फिर ज्योति बोली- मुझे तो देखा ही है, आज इसे देख लीजिये।
यह कहती हुई ज्योति मेरी तरफ देख कर बोली- अरे, अब तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा? मैंने अपने कपड़े उतार दिए, अब तू भी उतार।
तभी ज्योति की मम्मी कमरे से बाहर जाती हुई बोलीं- कामवाली के आने का टाइम हो रहा है। तुम लोग मजे करो, तब तक मैं कपड़े बदल कर चाय-पानी का इंतजाम करती हूं।
यह कहकर वे कमरे के बाहर निकल कर कमरे के दरवाजे पर बाहर से बंद कर काम करने चली गई।
मैंने लैगिंग और टी-शर्ट पहनना हुआ था।
ज्योति की बात पर मैंने बिना कुछ बोले बैठे-बैठे ही अपनी टी-शर्ट उतार दी और सिर्फ ब्रा और लैगिंग में रह गई।
मैं भी अब शर्माना छोड़ कर मजे लेने के मूड में आ चुकी थी।
ज्योति मुस्कुराती हुई बोली- सब उतारना पड़ेगा गरिमा!
मैं बोली- तुमने भी तो पूरे कपड़े नहीं उतारे हैं।
मेरी बात पर ज्योति के पापा बोले- वही तो मैं भी कह रहा हूँ।
इस पर हम सब हंसने लगे.
ज्योति मुझसे बोली- अच्छा तो ये बात है, चल मेरे साथ-साथ कपड़े उतार!
ये कहते हुए उसने अपनी ब्रा उतार दी।
अब वह सिर्फ पैंटी में थी.
उसने बोला- तू भी अपनी ब्रा उतार!
मैंने अपने दोनो हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया।
हुक खुलते ही मेरी दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गई, फिर मैंने ब्रा को उतार का रख दिया।
अब मैं सिर्फ लैगिंग में खड़ी थी।
ज्योति के पापा मेरी चूचियों को एक टक घूर रहे थे।
तब ज्योति बोली- अब लैगिंग भी उतार।
मैंने कहा- तू भी अपनी पैंटी उतार!
इस पर ज्योति ने अपनी पैंटी को पकड़ कर घुटनो तक खींच दिया और फिर पैरों से बाहर कर दिया।
फिर मैंने भी अपनी लैगिंग को खींच कर नीचे कर दिया और फिर झुक कर पूरी पैरों से बाहर निकाल दिया।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी।
अब कमरे में हम तीनों मैं, ज्योति और उसके पापा नंगे खड़े थे।
अंकल थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आ गए और मेरी एक हाथ मेरी चूची पर रख कर सहलाने लगे।
चूची सहलाते-सहलाते वो थोड़ा झुके और मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगे।
मेरी दूसरी चूची को वो अभी भी अपने हाथ से सहला रहे थे।
अचानक उन्हें मेरी चूची को सहलाना छोड़ कर अपने हाथ को मेरी चूत पर रख दिया और उसे सहलाने लगे।
मेरी चूत एकदम पनिया चुकी थी।
तभी ज्योति मेरे बगल आकर खड़ी हो गई और एक हाथ से मेरी चूची को सहलाने लगी और दूसरे हाथ से अपने पापा के सख्त लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।
फिर कुछ देर बाद उसने मेरी चूची पर से अपने हाथ को हटा लिया और घुटनों के बल नीचे बैठ कर अपने पापा का लंड चूसने लगी।
कुछ देर ऐसे ही चलता रहा.
उसके बाद ज्योति उठ कर खड़ी हो गई और मुझसे बोली- तू पापा का लंड चूसेगी एक बार और?
मैं तो कब से इसके लिए तैयार खड़ी थी … मैं तुरंत बैठ गई और अंकल का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।
उधर अंकल ज्योति की चूची मुंह में लेकर चूस रहे थे और एक हाथ से उसकी चूत को सहला रहे थे।
लंड चूसते हुए कुछ ही देर हुई थी, तभी ज्योति अपने पापा से बोली- पापा, अब आप की बारी है अब आप हम दोनों की चाटिये।
यह सुनकर मैं लंड चूसना छोड़ कर खड़ी हो गयी।
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- अरे तो मैंने कब मना किया है, तुम दोनों बताओ पहले किसकी चाटूँ?
ज्योति मेरी तरफ इशारा करते हुए बोली- मेरी तो कोई नहीं बात नहीं है इसलिए पहले इसकी चाट लीजिए, फिर मेरी!
अंकल मेरे पास आ गए और बोले- बोलो कैसे चटवाओगी बेटा, खड़ी होकर या लेट कर?
मैंने शर्माते हुए धीरे से कहा- जो आप को पसंद हो!
इस पर ज्योति मेरी गांड पर हाथ फेरती हुई आंख मार कर अपने पापा से बोली- अरे पापा की पसंद तो कुछ और ही है … क्यों पापा … गलत तो नहीं कह रही?
अंकल मुस्कुराते हुए बोले- बाप की पसंद बेटी से ज्यादा कौन जानेगा।
हम तीनों हंस दिये।





















