






Twist, turn and new beginings naye rishto ki shuruaatUpdate 12-पापा की परी–B
पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि कैसे गरिमा ने अपनी सहेली के पापा से चुदने के बाद अपने पापा को सिड्यूस करने का प्लान बनाया।..पिछले अपडेट से कुछ पंक्तिय……
उधर पापा आंख बंद कर तेजी से बुआ को चोद रहे थे। मुझे लग रहा था कि पापा शायद मेरे बारे में सोच कर बुआ को चोद रहे थे क्योंकि कल रात में कली की चुदाई करते वक्त पापा ने एक बार भी आँख बंद नहीं की थी।
पापा को अभी चुदाई करते हुए 2-3 मिनट ही हुए होंगे कि पापा रुक-रुक कर कमर को तेज झटका देने लगे. शायद उनके लंड ने पानी छोड़ दिया था।
आज पापा जल्दी झड़ गये।
इधर मैं तेजी से अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी। फिर ये सोच कर कि कहीं लौटते समय फिर पापा दरवाजा ना खोल कर झांकने लगे, मैं अपने कमरे में आ गई।
मेरी चूत ने अभी पानी नहीं छोड़ा था तो मैं पापा के जाने का इंतजार करने लगी ताकि जल्दी से मैं चूत का पानी निकालूं।
अब आगे…
अगले दिन सुबह 8 बजे नींद खुली।
ज्योति की रिलेशन में कोई शादी थी इसलिए वो करीब एक हफ्ते के लिए बाहर गई थी.
तो मैं भी कॉलेज नहीं गई; दिन भर घर में ही रही.
पापा के सामने पड़ने पर वे और मैं दोनों एकदम नॉर्मल रहे।
हालांकि मैंने महसूस किया कि पापा चोरी से कई बार मुझे देख रहे थे, साथ ही मुझसे किसी ना किसी बहाने ज्यादा बात भी कर रहे थे।
खैर … फिर रात हुई, सबने खाना-पीना खाया और फिर रोज की तरह हम सब कमरे में आ गए।
मैं ठीक कल की तरह ही कपड़े पहनने और नाइट बल्ब जला कर बिस्तर पर आ गई.
फिर उसी तरह पापा आए और थोड़ी देर चोरी से मुझे देखने के बाद बुआ को चोदने चले गए।
यह सिलसिला दो दिन तक चला.
इस बीच पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।
यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।
मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे।
उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।
उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।
अब मैं भी पापा के पास किसी ना किसी बहाने से जाने लगी।
मैं तो इस चक्कर में थी कि जब तक बुआ हैं तो रात में ही कुछ मामला आगे बढ़ जाएगा।
मगर बुआ को अभी 4 दिन ही हुए थे कि फूफा जी का फोन आ गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से वे जल्दी लौट आए हैं।
तो आज पापा को ऑफिस जाते समय बुआ को उनके घर छोड़ आये।
बुआ के ऐसे अचानक चले जाने से मेरा मूड एकदम खराब हो चुका था और मायूस हो गई थी कि अच्छा-खासा पापा को पटाने का प्लान चल रहा था मगर बीच में ही बुआ चली गई।
अब बुआ थी नहीं इसलिए रात में खाना भी जल्दी हो गया।
रात 10 बजे तक खाना खाकर मैं ऊपर अपने कमरे में आ गई।
मेरा तो मन ही नहीं लग रहा था.
मैं यही सोच रही थी कि क्या करूं।
मैंने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई।
बुआ के जाने के बाद पापा ऊपर आएंगे नहीं तो अब नाइट बल्ब जलाने का कोई मतलब भी नहीं था।
इसलिए मैं अँधेरे में ही बिस्तर पर लेटी रही।
मेरी आँखों में नींद नहीं आ रही थी.
काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी।
आंख बंद कर सोने की कोशिश की तो पिछले 3-4 दिनों में मेरे साथ जो भी हुआ था, ये सब सोच कर मुझे थोड़ी उत्तेजना भी होने लगी।
फिर मैं मोबाइल पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी।
मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने अपनी पैंटी उतार दी।
अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टी-शर्ट में थी।
जब से मैंने पापा को पटाने के बारे में सोचा था तब से मैं डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज्यादा देखने लगी थी।
तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 11.45 हो गए।
मूवी देखते हुए मैं अपनी नंगी चूत भी सहलाती जा रही थी।
अभी मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता था कि मुझे कुछ आवाज आयी।
मैंने टाइम देखा तो 12.15 बज रहे थे।
तो मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और आवाज सुनने की कोशिश करने लगी।
जैसे ही मेरी निगाह दरवाजे के नीचे से गई तो परछाई से समझ गई कि कोई खड़ा है।
मैंने तुरंत हाथ से अपनी आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
मैं समझ गई थी कि मम्मी के सो जाने के बाद मेरे पापा धीरे से मुझे सोती हुई देखने आए हैं।
अभी मेरी ये सोच ही रही थी कि कमरे का दरवाजा धीरे से बहुत थोड़ा सा खुला।
पापा को लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्ब जल रहा होगा।
मगर अंदर एकदम अंधेरा था।
कुछ देर रुकने के बाद पापा ने दो बार धीरे से मेरा नाम लेकर बुलाया- गरिमा … गरिमा!
पापा शायद कन्फर्म करना चाहते हैं कि मैं जागी हूं या सो रही हूं।
जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उनको भरोसा हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ।
इसके बाद उन्होंने दरवाजे को थोड़ा और खोला और धीरे से हाथ अंदर डाल कर स्विच की तरफ ले जाने लगे।
मैं हाथ से आंखों को ढके चोरी से पापा की हरकत देख रही थी।
जैसे ही पापा का हाथ स्विच की तरफ बढ़ा मैं समझ गई कि वे नाइट बल्ब जला कर मुझे देखना चाह रहे हैं।
यह सोचकर ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
सच कहूं तो मुझे पसीना आने लगा था … पर मैं चुपचाप उसी तरह लेटी रही।
पापा ने हाथ बढ़ाकर नाइट बल्ब जला दिया।
उन्होंने बनियान और अंडरवियर पहना हुआ था।
1 मिनट तक वे दरवाज़े से ही देखते रहे।
वहीं मेरी तरफ से कोई हरकत ना होने पर उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थी और वे दरवाज़े से कमरे के अंदर मेरे बिस्तर के पास आ गए।
अब मैं अपने पापा के सामने लेटी थी।
मेरी छोटी सी स्कर्ट मेरी जांघों को पूरा ढक नहीं पा रही थी और पापा बिस्तर के बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों को निहार रहे थे।
तभी पापा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया।
मैंने अपनी पैंटी पहले ही उतार ली थी जिससे मेरी नंगी चूत उन के सामने थी।
मेरी सांस जोर-जोर से चल रही थी।
पापा को शायद उम्मीद नहीं थी कि मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी।
इसलिए उनकी आंखें एकटक मेरी चूत पर टिक गईं।
अभी मैं कुछ सोचती कि तभी अचानक पापा ने अपने दोनों हाथ से अपने अंडरवियर को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
चड्डी नीचे खिसकते ही उनका लंड झटके से बाहर आ गया।
इसके बाद वे अपने लंड को धीरे-धीरे एक हाथ से हिलाने लगे।
पापा को इस तरह अपनी चूत को देखते हुए मुठ मारते देख एक्साइटमेंट और अजीब सी फीलिंग से मेरा शरीर और चेहरा गर्म होने लगा था।
उधर पापा खिसक कर बेड के बगल आ गए और मेरी चूत के पास आकर खड़े हो गए।
मैं बेड के किनारे की तरफ ही थी इसलिए अब पापा के लंड और मेरी जांघ के बीच मुश्किल से 6 इंच की दूरी थी।
चुपचाप मैं उसी तरह लेटी रही।
मेरी तरफ से कोई हरकत ना होते देख पापा की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और वे इतने एक्साइट हो गए थे कि पापा झुक कर अपने एक हाथ से धीरे से मेरी चूत के ऊपर मेरी झांटों को सहलाने लगे।
पापा ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, वैसे ही मेरी बदन में करंट सा दौड़ गया।
मेरा शरीर हल्का सा हिल गया.
यह देख पापा रुक गये और जल्दी से उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपर कर लिया।
वे डर गये थे कि कहीं मेरी नींद न खुल जाए।
मगर करीब आधा मिनट तक रुककर पापा ने रुक कर चेक किया कि मैं जग तो नहीं गयी।
मैं भी सांस रोके उसी तरह पड़ी रही।
मुझे लगा ऐसा ना हो कि पापा घबरा कर लौट जाएं।
खैर जब पापा ने सुनिश्चित कर लिया कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने फिर से अपने अंडरवियर को थोड़ा नीचे खिसका कर लंड को बाहर निकाल लिया।
इस बार शायद पापा कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे तो उन्होंने मुझे हाथ से छुआ तो नहीं लेकिन वे मेरी चूत को देखते हुए मुठ मारने लगे।
अभी मुठ मारते हुए करीब 2-3 मिनट हुए थे कि पापा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली और अचानक उनके लंड से धार के साथ वीर्य निकल गया।
जैसे ही वीर्य निकला तो पापा ने तेजी से अपने लंड को दोनों हाथ से ढकने लगे।
शायद वे नहीं चाह रहे थे कि उनका वीर्य मेरे ऊपर गिरे या कमरे में इधर-उधर गिरे।
लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी और तेजी से झड़ जाएंगे।
पापा के लंड का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चूत, जाँघ और चादर पर फैल गया।
पहले पापा ने अपने लंड को लुंगी से पौंछा, फिर मेरी जांघ और चूत पर फैल लंड के पानी को धीरे से पौंछने की कोशिश करने लगे।
मगर मेरी नींद खुलने के डर से बस हल्का सा ही पौंछ कर वो तेजी से कमरे से बाहर निकले और फिर धीरे से दरवाजे को बंद कर चले गए।
कमरे से बाहर निकलते वक्त पापा ने घबराहट और जल्दबाजी में नाइट बल्ब बंद नहीं किया।
मैं थोड़ी देर उसी तरह लेटी रही।
जब पापा के सीढ़ी से नीचे उतरने की आवाज सुन ली, उसके बाद मैं धीरे से उठ कर बैठी।
नीचे देखा तो फर्श पर भी वीर्य फैला हुआ था।
मैंने बाथरूम में जाकर पहले अपनी जांघ और चूत पर फैले वीर्य को उंगली पर लेकर सूंघा. मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.
इसके बाद मैंने उस वीर्य को अपने बदन पर से साफ किया।
फिर कमरे में आकर बेड की चादर उठाई और उसी चादर से फर्श को भी साफ कर रख दिया और फिर दूसरी चादर बिछाई और फिर कपड़े पहन कर सो गई।
अगले दिन सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली।
मैं उठी और हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर को लेकर नीचे आ गई।
नीचे आई तो देखा कि पापा चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे।
मम्मी भी उनके साथ बैठ कर चाय पी रही थी।
मेरे हाथ में चादर देख कर पापा थोड़े सकपका गए.
अभी मैं कुछ कहती, तभी मम्मी बोली- गरिमा, ये चादर क्यों लेकर आई हो?
मैंने पापा की ओर देखा तो वे अखबार पर आंख गड़ाये हुए थे मगर ध्यान मेरी तरफ ही था।
उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि वे घबराए हुए हैं।
उन की हालत देख कर मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी, फिर भी मैं संभलती हुई बोली- अरे यह गंदी हो गई थी मम्मी!
इतना कह कर मैं जानबूझ कर चुप हो गई।
मैं सोच रही थी कि अब मम्मी पूछेंगी जरूर कि कैसे गंदी हो गई।
मम्मी बोलीं- अभी तो कल सुबह ही बिछाई थी इतनी जल्दी कैसे गंदी हो गई?
मैंने जानबूझ कर थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा- अरे … कल सोने जा रही थी तभी गिलास का पानी गिर गया था इसलिए इसे हटा दिया था और दूसरी चादर बिछा कर सो गई थी।
दरअसल मैं पापा को ये जताना चाह रही थी कि मैं भी मम्मी से झूठ बोलकर कुछ छुपा रही हूं।
मैंने पापा की ओर देखा तो वे अभी भी पेपर पर नज़र गड़ाये बैठे थे।
मेरा जवाब सुन कर वे शायद थोड़े नॉर्मल हो गए।
हालांकि वे अभी भी मुझसे नज़र बचा रहे थे।
मुझे लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि पापा ज्यादा घबरा जाएं और फिर बात आगे ही ना बढ़े और यहीं पर खत्म हो जाए।
इसलिए मैंने पापा की घबराहट दूर करने के लिए खुद ही उनसे बात करने लगी और कहा- आज बड़ी देर तक चाय पी रहे हैं पापा … आपको ऑफिस नहीं जाना क्या?
और फिर मैं जाकर उनके बगल बैठ गई और चाय पीने लगी।
पापा थोड़े नॉर्मल होते हुए बोले- अरे अभी 8 बजे हैं
फिर मैंने और भी थोड़ी इधर-उधर की बातें कर उनकी घबराहट एकदम दूर करने की कोशिश की।
उसके बाद पापा तैयार होकर ऑफिस चले गए।
मैं भी अपने कमरे में आ गयी.
मेरा तो दिन ही नहीं कट रहा था।
बस सोच रही थी कि जल्दी से रात हो जाए ताकि पता चले कि आज फिर पापा आते हैं या नहीं।
किसी तरह रात हुई और खाना खाकर पापा-मम्मी भी अपने कमरे में चले गए और मैं भी ऊपर अपने कमरे में आ गई।
मैंने कपड़े बदले और छोटी स्कर्ट और टी शर्ट पहन ली।
टी शर्ट और स्कर्ट के नीचे मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी क्योंकि कल जो हुआ था वो तो अचानक हुआ था लेकिन आज मैने जानबूझकर इसलिए नहीं पहना कि पापा को लगे कि मैं रोज बिना पैंटी के सोती हूँ।
फिर नाइट बल्ब जलाकर कर लाइट को ऑफ कर दिया।
अँधेरा रहेगा तो पापा को नाइट बल्ब ऑन करना पड़ेगा इसलिए मैंने पहले ही नाइट बल्ब ऑन कर दिया था।
साथ ही मैने चादर के ऊपर एक तौलिया बिछा कर लेटी थी ताकि अगर आज फिर पापा के लंड से पानी निकले तो बिस्तर पर ना पड़े।
कुल मिलाकर मैं पापा को यह अहसास दिलाना चाह रही थी कि क्या होने वाला है, ये मैं जान रही हूं।
आज क्या होगा, ये सोच कर मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था।
अपनी चूत सहलाते हुए बेसब्री से पापा का इंतज़ार करने लगी।
रात के करीब पौने एक बजे मुझे सीढ़ियों से हल्की सी आवाज आयी.
मैं समझ गयी कि पापा आ रहे हैं।
फिर कल रात की तरह मैंने पीठ के बल लेट गयी और अपने हाथ को मोड़कर आँखों को ढक लिया कि चोरी से उनकी हरकतों को देख सकूं।
पापा ने धीरे से कमरे का दरवाजा खोला, फिर 10-15 सेकेण्ड तक दरवाजे पर ही रुके रहे।
शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नाइट बल्ब पहले से जल रहा होगा।
खैर 10-15 सेकेण्ड रुकने के बाद वे धीरे से दबे पाँव कमरे में आये और बेड के पास आकर खड़े हो गये।
आज पापा ने हाफ पैंट और बनियान पहना हुआ था।
पापा बेड के पास बिलकुल मेरे बगल खड़े थे।
आंखों को मैंने हाथों से ढक रखा था, इस वजह से मुझे उनका चेहरा तो नहीं दिख रहा था लेकिन पेट से नीचे का पूरा हिस्सा दिख रहा था।
मैंने स्कर्ट और टी शर्ट पहनी थी … पापा करीब 15-20 सेकेण्ड तक ऐसे ही खड़े रहे।
फिर धीरे से झुककर उन्होंने मेरी स्कर्ट के निचले हिस्से को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगे।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
फिर पापा ने स्कर्ट को पूरा ऊपर की तरफ खिसका कर मेरे पेट पर कर दिया।
अब आज एक बार फिर मेरी नंगी चूत पापा की आँखों के सामने थी।
पापा ने कल की तरह चूत या झांटों को छूने की हिम्मत नहीं दिखाई।
उसके बाद पापा सीधे खड़े हो गये और फिर वही हुआ जो मैं सोच रही थी।
उन्होंने अपनी हाफ पैंट को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
जैसे ही उन्होंने पैंट नीचे खिसकाया उनका लण्ड एक झटके से बाहर आ गया।
उनका लण्ड करीब-करीब खड़ा था।
पापा धीरे धीरे अपने लण्ड की चमड़ी को आगे पीछे कर मुठ मारने लगे।
तभी अचानक पापा ने लण्ड को हिलाना छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ को धीरे से बेड के किनारे रखा और फिर नीचे झुकने लगे।
मैं समझ नहीं पायी कि वे क्या करने जा रहे हैं।
तभी मैंने देखा कि पापा अपना मुंह मेरी चूत के पास लाकर नाक से मेरी चूत को सूंघने लगे।
मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।
मैं बिना हिले डुले सो रही थी।
करीब 15 सेकेण्ड तक मेरी चूत को सूँघने के बाद वे वापस खड़े हो गये।
इस बार जब खड़े हुए तो उनका लण्ड एकदम टाइट खड़ा था।
अब पापा थोड़ा आगे खिसकर बेड से एकदम सट कर खड़े हो गये।
उनका लण्ड करीब-करीब मेरी चूत के ठीक ऊपर था।
अब वे तेजी से अपने लण्ड को हिलाकर मुठ मारने लगे।
करीब 5 मिनट तक बीते होंगे कि उन्होंने अपनी कमर को तेजी से हिलाना शुरू किया और अचानक तेज झटके और धार के साथ रुक-रुक कर उनके लण्ड से पानी निकलने लगा जो मेरी चूत, जाँघ, स्कर्ट और तौलिये पर फैल गया।
झड़ने के बाद भी करीब 4-5 सेकेण्ड तक पापा उसी तरह लण्ड को पकड़े खड़े रहे और फिर अपने पैंट से को ऊपर खिसका कर उसी से लण्ड को साफ कर पूरा पहन लिया।
और फिर मेरे ऊपर चूत और जांघ पर फैले लण्ड के पानी को बिना साफ किये कमरे से बाहर निकले और धीरे से दरवाजा बंद कर चले गये।
इसके बाद मैं धीरे से बिस्तर से उठी और दरवाजे को अंदर से लॉक करके लाइट जलाई।
मैंने देखा कि पापा के वीर्य की कुछ बूंद नीचे जमीन पर भी गिरी थी।
चूंकि मैंने चादर के ऊपर तौलिया डाल लिया था इसलिए चादर बच गई थी।
मगर तौलिये और स्कर्ट पर पापा के लंड का पानी पड़ा था।
मैंने बाथरूम में पानी से अपनी चूत और जांघ को साफ किया और फिर फर्श पर पड़े वीर्य को तौलिये से साफ किया और दूसरे कपड़े पहने।
फिर मोबाइल में सुबह 8 बजे का अलार्म लगा कर मैं सो गई।
मैंने 8 बजे का अलार्म इसलिए लगाया था क्योंकि यही समय था जब पापा और मम्मी चाय पीते हैं।
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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि कैसे गरिमा ने अपनी सहेली के पापा से चुदने के बाद अपने पापा को सिड्यूस करने का प्लान बनाया।..पिछले अपडेट से कुछ पंक्तिय……
उधर पापा आंख बंद कर तेजी से बुआ को चोद रहे थे। मुझे लग रहा था कि पापा शायद मेरे बारे में सोच कर बुआ को चोद रहे थे क्योंकि कल रात में कली की चुदाई करते वक्त पापा ने एक बार भी आँख बंद नहीं की थी।
पापा को अभी चुदाई करते हुए 2-3 मिनट ही हुए होंगे कि पापा रुक-रुक कर कमर को तेज झटका देने लगे. शायद उनके लंड ने पानी छोड़ दिया था।
आज पापा जल्दी झड़ गये।
इधर मैं तेजी से अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी। फिर ये सोच कर कि कहीं लौटते समय फिर पापा दरवाजा ना खोल कर झांकने लगे, मैं अपने कमरे में आ गई।
मेरी चूत ने अभी पानी नहीं छोड़ा था तो मैं पापा के जाने का इंतजार करने लगी ताकि जल्दी से मैं चूत का पानी निकालूं।
अब आगे…
अगले दिन सुबह 8 बजे नींद खुली।
ज्योति की रिलेशन में कोई शादी थी इसलिए वो करीब एक हफ्ते के लिए बाहर गई थी.
तो मैं भी कॉलेज नहीं गई; दिन भर घर में ही रही.
पापा के सामने पड़ने पर वे और मैं दोनों एकदम नॉर्मल रहे।
हालांकि मैंने महसूस किया कि पापा चोरी से कई बार मुझे देख रहे थे, साथ ही मुझसे किसी ना किसी बहाने ज्यादा बात भी कर रहे थे।
खैर … फिर रात हुई, सबने खाना-पीना खाया और फिर रोज की तरह हम सब कमरे में आ गए।
मैं ठीक कल की तरह ही कपड़े पहनने और नाइट बल्ब जला कर बिस्तर पर आ गई.
फिर उसी तरह पापा आए और थोड़ी देर चोरी से मुझे देखने के बाद बुआ को चोदने चले गए।
यह सिलसिला दो दिन तक चला.
इस बीच पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।
यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।
मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे।
उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।
उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।
अब मैं भी पापा के पास किसी ना किसी बहाने से जाने लगी।
मैं तो इस चक्कर में थी कि जब तक बुआ हैं तो रात में ही कुछ मामला आगे बढ़ जाएगा।
मगर बुआ को अभी 4 दिन ही हुए थे कि फूफा जी का फोन आ गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से वे जल्दी लौट आए हैं।
तो आज पापा को ऑफिस जाते समय बुआ को उनके घर छोड़ आये।
बुआ के ऐसे अचानक चले जाने से मेरा मूड एकदम खराब हो चुका था और मायूस हो गई थी कि अच्छा-खासा पापा को पटाने का प्लान चल रहा था मगर बीच में ही बुआ चली गई।
अब बुआ थी नहीं इसलिए रात में खाना भी जल्दी हो गया।
रात 10 बजे तक खाना खाकर मैं ऊपर अपने कमरे में आ गई।
मेरा तो मन ही नहीं लग रहा था.
मैं यही सोच रही थी कि क्या करूं।
मैंने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई।
बुआ के जाने के बाद पापा ऊपर आएंगे नहीं तो अब नाइट बल्ब जलाने का कोई मतलब भी नहीं था।
इसलिए मैं अँधेरे में ही बिस्तर पर लेटी रही।
मेरी आँखों में नींद नहीं आ रही थी.
काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी।
आंख बंद कर सोने की कोशिश की तो पिछले 3-4 दिनों में मेरे साथ जो भी हुआ था, ये सब सोच कर मुझे थोड़ी उत्तेजना भी होने लगी।
फिर मैं मोबाइल पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी।
मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने अपनी पैंटी उतार दी।
अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टी-शर्ट में थी।
जब से मैंने पापा को पटाने के बारे में सोचा था तब से मैं डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज्यादा देखने लगी थी।
तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 11.45 हो गए।
मूवी देखते हुए मैं अपनी नंगी चूत भी सहलाती जा रही थी।
अभी मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता था कि मुझे कुछ आवाज आयी।
मैंने टाइम देखा तो 12.15 बज रहे थे।
तो मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और आवाज सुनने की कोशिश करने लगी।
जैसे ही मेरी निगाह दरवाजे के नीचे से गई तो परछाई से समझ गई कि कोई खड़ा है।
मैंने तुरंत हाथ से अपनी आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
मैं समझ गई थी कि मम्मी के सो जाने के बाद मेरे पापा धीरे से मुझे सोती हुई देखने आए हैं।
अभी मेरी ये सोच ही रही थी कि कमरे का दरवाजा धीरे से बहुत थोड़ा सा खुला।
पापा को लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्ब जल रहा होगा।
मगर अंदर एकदम अंधेरा था।
कुछ देर रुकने के बाद पापा ने दो बार धीरे से मेरा नाम लेकर बुलाया- गरिमा … गरिमा!
पापा शायद कन्फर्म करना चाहते हैं कि मैं जागी हूं या सो रही हूं।
जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उनको भरोसा हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ।
इसके बाद उन्होंने दरवाजे को थोड़ा और खोला और धीरे से हाथ अंदर डाल कर स्विच की तरफ ले जाने लगे।
मैं हाथ से आंखों को ढके चोरी से पापा की हरकत देख रही थी।
जैसे ही पापा का हाथ स्विच की तरफ बढ़ा मैं समझ गई कि वे नाइट बल्ब जला कर मुझे देखना चाह रहे हैं।
यह सोचकर ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
सच कहूं तो मुझे पसीना आने लगा था … पर मैं चुपचाप उसी तरह लेटी रही।
पापा ने हाथ बढ़ाकर नाइट बल्ब जला दिया।
उन्होंने बनियान और अंडरवियर पहना हुआ था।
1 मिनट तक वे दरवाज़े से ही देखते रहे।
वहीं मेरी तरफ से कोई हरकत ना होने पर उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थी और वे दरवाज़े से कमरे के अंदर मेरे बिस्तर के पास आ गए।
अब मैं अपने पापा के सामने लेटी थी।
मेरी छोटी सी स्कर्ट मेरी जांघों को पूरा ढक नहीं पा रही थी और पापा बिस्तर के बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों को निहार रहे थे।
तभी पापा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया।
मैंने अपनी पैंटी पहले ही उतार ली थी जिससे मेरी नंगी चूत उन के सामने थी।
मेरी सांस जोर-जोर से चल रही थी।
पापा को शायद उम्मीद नहीं थी कि मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी।
इसलिए उनकी आंखें एकटक मेरी चूत पर टिक गईं।
अभी मैं कुछ सोचती कि तभी अचानक पापा ने अपने दोनों हाथ से अपने अंडरवियर को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
चड्डी नीचे खिसकते ही उनका लंड झटके से बाहर आ गया।
इसके बाद वे अपने लंड को धीरे-धीरे एक हाथ से हिलाने लगे।
पापा को इस तरह अपनी चूत को देखते हुए मुठ मारते देख एक्साइटमेंट और अजीब सी फीलिंग से मेरा शरीर और चेहरा गर्म होने लगा था।
उधर पापा खिसक कर बेड के बगल आ गए और मेरी चूत के पास आकर खड़े हो गए।
मैं बेड के किनारे की तरफ ही थी इसलिए अब पापा के लंड और मेरी जांघ के बीच मुश्किल से 6 इंच की दूरी थी।
चुपचाप मैं उसी तरह लेटी रही।
मेरी तरफ से कोई हरकत ना होते देख पापा की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और वे इतने एक्साइट हो गए थे कि पापा झुक कर अपने एक हाथ से धीरे से मेरी चूत के ऊपर मेरी झांटों को सहलाने लगे।
पापा ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, वैसे ही मेरी बदन में करंट सा दौड़ गया।
मेरा शरीर हल्का सा हिल गया.
यह देख पापा रुक गये और जल्दी से उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपर कर लिया।
वे डर गये थे कि कहीं मेरी नींद न खुल जाए।
मगर करीब आधा मिनट तक रुककर पापा ने रुक कर चेक किया कि मैं जग तो नहीं गयी।
मैं भी सांस रोके उसी तरह पड़ी रही।
मुझे लगा ऐसा ना हो कि पापा घबरा कर लौट जाएं।
खैर जब पापा ने सुनिश्चित कर लिया कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने फिर से अपने अंडरवियर को थोड़ा नीचे खिसका कर लंड को बाहर निकाल लिया।
इस बार शायद पापा कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे तो उन्होंने मुझे हाथ से छुआ तो नहीं लेकिन वे मेरी चूत को देखते हुए मुठ मारने लगे।
अभी मुठ मारते हुए करीब 2-3 मिनट हुए थे कि पापा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली और अचानक उनके लंड से धार के साथ वीर्य निकल गया।
जैसे ही वीर्य निकला तो पापा ने तेजी से अपने लंड को दोनों हाथ से ढकने लगे।
शायद वे नहीं चाह रहे थे कि उनका वीर्य मेरे ऊपर गिरे या कमरे में इधर-उधर गिरे।
लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी और तेजी से झड़ जाएंगे।
पापा के लंड का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चूत, जाँघ और चादर पर फैल गया।
पहले पापा ने अपने लंड को लुंगी से पौंछा, फिर मेरी जांघ और चूत पर फैल लंड के पानी को धीरे से पौंछने की कोशिश करने लगे।
मगर मेरी नींद खुलने के डर से बस हल्का सा ही पौंछ कर वो तेजी से कमरे से बाहर निकले और फिर धीरे से दरवाजे को बंद कर चले गए।
कमरे से बाहर निकलते वक्त पापा ने घबराहट और जल्दबाजी में नाइट बल्ब बंद नहीं किया।
मैं थोड़ी देर उसी तरह लेटी रही।
जब पापा के सीढ़ी से नीचे उतरने की आवाज सुन ली, उसके बाद मैं धीरे से उठ कर बैठी।
नीचे देखा तो फर्श पर भी वीर्य फैला हुआ था।
मैंने बाथरूम में जाकर पहले अपनी जांघ और चूत पर फैले वीर्य को उंगली पर लेकर सूंघा. मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.
इसके बाद मैंने उस वीर्य को अपने बदन पर से साफ किया।
फिर कमरे में आकर बेड की चादर उठाई और उसी चादर से फर्श को भी साफ कर रख दिया और फिर दूसरी चादर बिछाई और फिर कपड़े पहन कर सो गई।
अगले दिन सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली।
मैं उठी और हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर को लेकर नीचे आ गई।
नीचे आई तो देखा कि पापा चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे।
मम्मी भी उनके साथ बैठ कर चाय पी रही थी।
मेरे हाथ में चादर देख कर पापा थोड़े सकपका गए.
अभी मैं कुछ कहती, तभी मम्मी बोली- गरिमा, ये चादर क्यों लेकर आई हो?
मैंने पापा की ओर देखा तो वे अखबार पर आंख गड़ाये हुए थे मगर ध्यान मेरी तरफ ही था।
उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि वे घबराए हुए हैं।
उन की हालत देख कर मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी, फिर भी मैं संभलती हुई बोली- अरे यह गंदी हो गई थी मम्मी!
इतना कह कर मैं जानबूझ कर चुप हो गई।
मैं सोच रही थी कि अब मम्मी पूछेंगी जरूर कि कैसे गंदी हो गई।
मम्मी बोलीं- अभी तो कल सुबह ही बिछाई थी इतनी जल्दी कैसे गंदी हो गई?
मैंने जानबूझ कर थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा- अरे … कल सोने जा रही थी तभी गिलास का पानी गिर गया था इसलिए इसे हटा दिया था और दूसरी चादर बिछा कर सो गई थी।
दरअसल मैं पापा को ये जताना चाह रही थी कि मैं भी मम्मी से झूठ बोलकर कुछ छुपा रही हूं।
मैंने पापा की ओर देखा तो वे अभी भी पेपर पर नज़र गड़ाये बैठे थे।
मेरा जवाब सुन कर वे शायद थोड़े नॉर्मल हो गए।
हालांकि वे अभी भी मुझसे नज़र बचा रहे थे।
मुझे लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि पापा ज्यादा घबरा जाएं और फिर बात आगे ही ना बढ़े और यहीं पर खत्म हो जाए।
इसलिए मैंने पापा की घबराहट दूर करने के लिए खुद ही उनसे बात करने लगी और कहा- आज बड़ी देर तक चाय पी रहे हैं पापा … आपको ऑफिस नहीं जाना क्या?
और फिर मैं जाकर उनके बगल बैठ गई और चाय पीने लगी।
पापा थोड़े नॉर्मल होते हुए बोले- अरे अभी 8 बजे हैं
फिर मैंने और भी थोड़ी इधर-उधर की बातें कर उनकी घबराहट एकदम दूर करने की कोशिश की।
उसके बाद पापा तैयार होकर ऑफिस चले गए।
मैं भी अपने कमरे में आ गयी.
मेरा तो दिन ही नहीं कट रहा था।
बस सोच रही थी कि जल्दी से रात हो जाए ताकि पता चले कि आज फिर पापा आते हैं या नहीं।
किसी तरह रात हुई और खाना खाकर पापा-मम्मी भी अपने कमरे में चले गए और मैं भी ऊपर अपने कमरे में आ गई।
मैंने कपड़े बदले और छोटी स्कर्ट और टी शर्ट पहन ली।
टी शर्ट और स्कर्ट के नीचे मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी क्योंकि कल जो हुआ था वो तो अचानक हुआ था लेकिन आज मैने जानबूझकर इसलिए नहीं पहना कि पापा को लगे कि मैं रोज बिना पैंटी के सोती हूँ।
फिर नाइट बल्ब जलाकर कर लाइट को ऑफ कर दिया।
अँधेरा रहेगा तो पापा को नाइट बल्ब ऑन करना पड़ेगा इसलिए मैंने पहले ही नाइट बल्ब ऑन कर दिया था।
साथ ही मैने चादर के ऊपर एक तौलिया बिछा कर लेटी थी ताकि अगर आज फिर पापा के लंड से पानी निकले तो बिस्तर पर ना पड़े।
कुल मिलाकर मैं पापा को यह अहसास दिलाना चाह रही थी कि क्या होने वाला है, ये मैं जान रही हूं।
आज क्या होगा, ये सोच कर मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था।
अपनी चूत सहलाते हुए बेसब्री से पापा का इंतज़ार करने लगी।
रात के करीब पौने एक बजे मुझे सीढ़ियों से हल्की सी आवाज आयी.
मैं समझ गयी कि पापा आ रहे हैं।
फिर कल रात की तरह मैंने पीठ के बल लेट गयी और अपने हाथ को मोड़कर आँखों को ढक लिया कि चोरी से उनकी हरकतों को देख सकूं।
पापा ने धीरे से कमरे का दरवाजा खोला, फिर 10-15 सेकेण्ड तक दरवाजे पर ही रुके रहे।
शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नाइट बल्ब पहले से जल रहा होगा।
खैर 10-15 सेकेण्ड रुकने के बाद वे धीरे से दबे पाँव कमरे में आये और बेड के पास आकर खड़े हो गये।
आज पापा ने हाफ पैंट और बनियान पहना हुआ था।
पापा बेड के पास बिलकुल मेरे बगल खड़े थे।
आंखों को मैंने हाथों से ढक रखा था, इस वजह से मुझे उनका चेहरा तो नहीं दिख रहा था लेकिन पेट से नीचे का पूरा हिस्सा दिख रहा था।
मैंने स्कर्ट और टी शर्ट पहनी थी … पापा करीब 15-20 सेकेण्ड तक ऐसे ही खड़े रहे।
फिर धीरे से झुककर उन्होंने मेरी स्कर्ट के निचले हिस्से को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगे।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
फिर पापा ने स्कर्ट को पूरा ऊपर की तरफ खिसका कर मेरे पेट पर कर दिया।
अब आज एक बार फिर मेरी नंगी चूत पापा की आँखों के सामने थी।
पापा ने कल की तरह चूत या झांटों को छूने की हिम्मत नहीं दिखाई।
उसके बाद पापा सीधे खड़े हो गये और फिर वही हुआ जो मैं सोच रही थी।
उन्होंने अपनी हाफ पैंट को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
जैसे ही उन्होंने पैंट नीचे खिसकाया उनका लण्ड एक झटके से बाहर आ गया।
उनका लण्ड करीब-करीब खड़ा था।
पापा धीरे धीरे अपने लण्ड की चमड़ी को आगे पीछे कर मुठ मारने लगे।
तभी अचानक पापा ने लण्ड को हिलाना छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ को धीरे से बेड के किनारे रखा और फिर नीचे झुकने लगे।
मैं समझ नहीं पायी कि वे क्या करने जा रहे हैं।
तभी मैंने देखा कि पापा अपना मुंह मेरी चूत के पास लाकर नाक से मेरी चूत को सूंघने लगे।
मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।
मैं बिना हिले डुले सो रही थी।
करीब 15 सेकेण्ड तक मेरी चूत को सूँघने के बाद वे वापस खड़े हो गये।
इस बार जब खड़े हुए तो उनका लण्ड एकदम टाइट खड़ा था।
अब पापा थोड़ा आगे खिसकर बेड से एकदम सट कर खड़े हो गये।
उनका लण्ड करीब-करीब मेरी चूत के ठीक ऊपर था।
अब वे तेजी से अपने लण्ड को हिलाकर मुठ मारने लगे।
करीब 5 मिनट तक बीते होंगे कि उन्होंने अपनी कमर को तेजी से हिलाना शुरू किया और अचानक तेज झटके और धार के साथ रुक-रुक कर उनके लण्ड से पानी निकलने लगा जो मेरी चूत, जाँघ, स्कर्ट और तौलिये पर फैल गया।
झड़ने के बाद भी करीब 4-5 सेकेण्ड तक पापा उसी तरह लण्ड को पकड़े खड़े रहे और फिर अपने पैंट से को ऊपर खिसका कर उसी से लण्ड को साफ कर पूरा पहन लिया।
और फिर मेरे ऊपर चूत और जांघ पर फैले लण्ड के पानी को बिना साफ किये कमरे से बाहर निकले और धीरे से दरवाजा बंद कर चले गये।
इसके बाद मैं धीरे से बिस्तर से उठी और दरवाजे को अंदर से लॉक करके लाइट जलाई।
मैंने देखा कि पापा के वीर्य की कुछ बूंद नीचे जमीन पर भी गिरी थी।
चूंकि मैंने चादर के ऊपर तौलिया डाल लिया था इसलिए चादर बच गई थी।
मगर तौलिये और स्कर्ट पर पापा के लंड का पानी पड़ा था।
मैंने बाथरूम में पानी से अपनी चूत और जांघ को साफ किया और फिर फर्श पर पड़े वीर्य को तौलिये से साफ किया और दूसरे कपड़े पहने।
फिर मोबाइल में सुबह 8 बजे का अलार्म लगा कर मैं सो गई।
मैंने 8 बजे का अलार्म इसलिए लगाया था क्योंकि यही समय था जब पापा और मम्मी चाय पीते हैं।
अब जल्दी ही पापा के साथ खेल खेलेगीUpdate 12-पापा की परी–B
पिछले अपडेट में आपने पढ़ा कि कैसे गरिमा ने अपनी सहेली के पापा से चुदने के बाद अपने पापा को सिड्यूस करने का प्लान बनाया।..पिछले अपडेट से कुछ पंक्तिय……
उधर पापा आंख बंद कर तेजी से बुआ को चोद रहे थे। मुझे लग रहा था कि पापा शायद मेरे बारे में सोच कर बुआ को चोद रहे थे क्योंकि कल रात में कली की चुदाई करते वक्त पापा ने एक बार भी आँख बंद नहीं की थी।
पापा को अभी चुदाई करते हुए 2-3 मिनट ही हुए होंगे कि पापा रुक-रुक कर कमर को तेज झटका देने लगे. शायद उनके लंड ने पानी छोड़ दिया था।
आज पापा जल्दी झड़ गये।
इधर मैं तेजी से अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी। फिर ये सोच कर कि कहीं लौटते समय फिर पापा दरवाजा ना खोल कर झांकने लगे, मैं अपने कमरे में आ गई।
मेरी चूत ने अभी पानी नहीं छोड़ा था तो मैं पापा के जाने का इंतजार करने लगी ताकि जल्दी से मैं चूत का पानी निकालूं।
अब आगे…
अगले दिन सुबह 8 बजे नींद खुली।
ज्योति की रिलेशन में कोई शादी थी इसलिए वो करीब एक हफ्ते के लिए बाहर गई थी.
तो मैं भी कॉलेज नहीं गई; दिन भर घर में ही रही.
पापा के सामने पड़ने पर वे और मैं दोनों एकदम नॉर्मल रहे।
हालांकि मैंने महसूस किया कि पापा चोरी से कई बार मुझे देख रहे थे, साथ ही मुझसे किसी ना किसी बहाने ज्यादा बात भी कर रहे थे।
खैर … फिर रात हुई, सबने खाना-पीना खाया और फिर रोज की तरह हम सब कमरे में आ गए।
मैं ठीक कल की तरह ही कपड़े पहनने और नाइट बल्ब जला कर बिस्तर पर आ गई.
फिर उसी तरह पापा आए और थोड़ी देर चोरी से मुझे देखने के बाद बुआ को चोदने चले गए।
यह सिलसिला दो दिन तक चला.
इस बीच पापा मुझसे अब पहले से काफी ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे।
यहां तक कि मेरे पापा अब कोई ना कोई बहाने मुझसे मजाक भी करने लगे।
मैं समझ गई कि पापा मेरे में इंटरेस्ट ले रहे थे।
उनको भी अब शायद लग रहा था कि घर में ही एक मस्त माल चोदने के लिए है तो उसका फायदा उठाया जाए।
उन्हें क्या पता कि यहां खुद उनकी बेटी कब से चुदने को तैयार बैठी है।
अब मैं भी पापा के पास किसी ना किसी बहाने से जाने लगी।
मैं तो इस चक्कर में थी कि जब तक बुआ हैं तो रात में ही कुछ मामला आगे बढ़ जाएगा।
मगर बुआ को अभी 4 दिन ही हुए थे कि फूफा जी का फोन आ गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से वे जल्दी लौट आए हैं।
तो आज पापा को ऑफिस जाते समय बुआ को उनके घर छोड़ आये।
बुआ के ऐसे अचानक चले जाने से मेरा मूड एकदम खराब हो चुका था और मायूस हो गई थी कि अच्छा-खासा पापा को पटाने का प्लान चल रहा था मगर बीच में ही बुआ चली गई।
अब बुआ थी नहीं इसलिए रात में खाना भी जल्दी हो गया।
रात 10 बजे तक खाना खाकर मैं ऊपर अपने कमरे में आ गई।
मेरा तो मन ही नहीं लग रहा था.
मैं यही सोच रही थी कि क्या करूं।
मैंने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई।
बुआ के जाने के बाद पापा ऊपर आएंगे नहीं तो अब नाइट बल्ब जलाने का कोई मतलब भी नहीं था।
इसलिए मैं अँधेरे में ही बिस्तर पर लेटी रही।
मेरी आँखों में नींद नहीं आ रही थी.
काफ़ी देर तक करवट बदल-बदल कर सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी।
आंख बंद कर सोने की कोशिश की तो पिछले 3-4 दिनों में मेरे साथ जो भी हुआ था, ये सब सोच कर मुझे थोड़ी उत्तेजना भी होने लगी।
फिर मैं मोबाइल पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी।
मूवी देखते हुए मेरी एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने अपनी पैंटी उतार दी।
अब मैं सिर्फ स्कर्ट और टी-शर्ट में थी।
जब से मैंने पापा को पटाने के बारे में सोचा था तब से मैं डैड-डॉटर वाली पॉर्न मूवी ज्यादा देखने लगी थी।
तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 11.45 हो गए।
मूवी देखते हुए मैं अपनी नंगी चूत भी सहलाती जा रही थी।
अभी मूवी देखते हुए थोड़ी देर बीता था कि मुझे कुछ आवाज आयी।
मैंने टाइम देखा तो 12.15 बज रहे थे।
तो मैंने तुरंत मोबाइल बंद किया और आवाज सुनने की कोशिश करने लगी।
जैसे ही मेरी निगाह दरवाजे के नीचे से गई तो परछाई से समझ गई कि कोई खड़ा है।
मैंने तुरंत हाथ से अपनी आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
मैं समझ गई थी कि मम्मी के सो जाने के बाद मेरे पापा धीरे से मुझे सोती हुई देखने आए हैं।
अभी मेरी ये सोच ही रही थी कि कमरे का दरवाजा धीरे से बहुत थोड़ा सा खुला।
पापा को लगा होगा कि शायद अंदर नाइट बल्ब जल रहा होगा।
मगर अंदर एकदम अंधेरा था।
कुछ देर रुकने के बाद पापा ने दो बार धीरे से मेरा नाम लेकर बुलाया- गरिमा … गरिमा!
पापा शायद कन्फर्म करना चाहते हैं कि मैं जागी हूं या सो रही हूं।
जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उनको भरोसा हो गया कि मैं गहरी नींद में हूँ।
इसके बाद उन्होंने दरवाजे को थोड़ा और खोला और धीरे से हाथ अंदर डाल कर स्विच की तरफ ले जाने लगे।
मैं हाथ से आंखों को ढके चोरी से पापा की हरकत देख रही थी।
जैसे ही पापा का हाथ स्विच की तरफ बढ़ा मैं समझ गई कि वे नाइट बल्ब जला कर मुझे देखना चाह रहे हैं।
यह सोचकर ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
सच कहूं तो मुझे पसीना आने लगा था … पर मैं चुपचाप उसी तरह लेटी रही।
पापा ने हाथ बढ़ाकर नाइट बल्ब जला दिया।
उन्होंने बनियान और अंडरवियर पहना हुआ था।
1 मिनट तक वे दरवाज़े से ही देखते रहे।
वहीं मेरी तरफ से कोई हरकत ना होने पर उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई थी और वे दरवाज़े से कमरे के अंदर मेरे बिस्तर के पास आ गए।
अब मैं अपने पापा के सामने लेटी थी।
मेरी छोटी सी स्कर्ट मेरी जांघों को पूरा ढक नहीं पा रही थी और पापा बिस्तर के बगल खड़े होकर मेरी चिकनी नंगी जांघों को निहार रहे थे।
तभी पापा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया।
मैंने अपनी पैंटी पहले ही उतार ली थी जिससे मेरी नंगी चूत उन के सामने थी।
मेरी सांस जोर-जोर से चल रही थी।
पापा को शायद उम्मीद नहीं थी कि मैंने पैंटी नहीं पहनी होगी।
इसलिए उनकी आंखें एकटक मेरी चूत पर टिक गईं।
अभी मैं कुछ सोचती कि तभी अचानक पापा ने अपने दोनों हाथ से अपने अंडरवियर को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
चड्डी नीचे खिसकते ही उनका लंड झटके से बाहर आ गया।
इसके बाद वे अपने लंड को धीरे-धीरे एक हाथ से हिलाने लगे।
पापा को इस तरह अपनी चूत को देखते हुए मुठ मारते देख एक्साइटमेंट और अजीब सी फीलिंग से मेरा शरीर और चेहरा गर्म होने लगा था।
उधर पापा खिसक कर बेड के बगल आ गए और मेरी चूत के पास आकर खड़े हो गए।
मैं बेड के किनारे की तरफ ही थी इसलिए अब पापा के लंड और मेरी जांघ के बीच मुश्किल से 6 इंच की दूरी थी।
चुपचाप मैं उसी तरह लेटी रही।
मेरी तरफ से कोई हरकत ना होते देख पापा की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और वे इतने एक्साइट हो गए थे कि पापा झुक कर अपने एक हाथ से धीरे से मेरी चूत के ऊपर मेरी झांटों को सहलाने लगे।
पापा ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, वैसे ही मेरी बदन में करंट सा दौड़ गया।
मेरा शरीर हल्का सा हिल गया.
यह देख पापा रुक गये और जल्दी से उन्होंने अपना अंडरवियर ऊपर कर लिया।
वे डर गये थे कि कहीं मेरी नींद न खुल जाए।
मगर करीब आधा मिनट तक रुककर पापा ने रुक कर चेक किया कि मैं जग तो नहीं गयी।
मैं भी सांस रोके उसी तरह पड़ी रही।
मुझे लगा ऐसा ना हो कि पापा घबरा कर लौट जाएं।
खैर जब पापा ने सुनिश्चित कर लिया कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने फिर से अपने अंडरवियर को थोड़ा नीचे खिसका कर लंड को बाहर निकाल लिया।
इस बार शायद पापा कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे तो उन्होंने मुझे हाथ से छुआ तो नहीं लेकिन वे मेरी चूत को देखते हुए मुठ मारने लगे।
अभी मुठ मारते हुए करीब 2-3 मिनट हुए थे कि पापा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली और अचानक उनके लंड से धार के साथ वीर्य निकल गया।
जैसे ही वीर्य निकला तो पापा ने तेजी से अपने लंड को दोनों हाथ से ढकने लगे।
शायद वे नहीं चाह रहे थे कि उनका वीर्य मेरे ऊपर गिरे या कमरे में इधर-उधर गिरे।
लेकिन उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी और तेजी से झड़ जाएंगे।
पापा के लंड का गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चूत, जाँघ और चादर पर फैल गया।
पहले पापा ने अपने लंड को लुंगी से पौंछा, फिर मेरी जांघ और चूत पर फैल लंड के पानी को धीरे से पौंछने की कोशिश करने लगे।
मगर मेरी नींद खुलने के डर से बस हल्का सा ही पौंछ कर वो तेजी से कमरे से बाहर निकले और फिर धीरे से दरवाजे को बंद कर चले गए।
कमरे से बाहर निकलते वक्त पापा ने घबराहट और जल्दबाजी में नाइट बल्ब बंद नहीं किया।
मैं थोड़ी देर उसी तरह लेटी रही।
जब पापा के सीढ़ी से नीचे उतरने की आवाज सुन ली, उसके बाद मैं धीरे से उठ कर बैठी।
नीचे देखा तो फर्श पर भी वीर्य फैला हुआ था।
मैंने बाथरूम में जाकर पहले अपनी जांघ और चूत पर फैले वीर्य को उंगली पर लेकर सूंघा. मुझे उसकी खुशबू अच्छी लगी.
इसके बाद मैंने उस वीर्य को अपने बदन पर से साफ किया।
फिर कमरे में आकर बेड की चादर उठाई और उसी चादर से फर्श को भी साफ कर रख दिया और फिर दूसरी चादर बिछाई और फिर कपड़े पहन कर सो गई।
अगले दिन सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली।
मैं उठी और हाथ-मुंह धोकर गंदी वाली चादर को लेकर नीचे आ गई।
नीचे आई तो देखा कि पापा चाय पीते हुए पेपर पढ़ रहे थे।
मम्मी भी उनके साथ बैठ कर चाय पी रही थी।
मेरे हाथ में चादर देख कर पापा थोड़े सकपका गए.
अभी मैं कुछ कहती, तभी मम्मी बोली- गरिमा, ये चादर क्यों लेकर आई हो?
मैंने पापा की ओर देखा तो वे अखबार पर आंख गड़ाये हुए थे मगर ध्यान मेरी तरफ ही था।
उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि वे घबराए हुए हैं।
उन की हालत देख कर मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी, फिर भी मैं संभलती हुई बोली- अरे यह गंदी हो गई थी मम्मी!
इतना कह कर मैं जानबूझ कर चुप हो गई।
मैं सोच रही थी कि अब मम्मी पूछेंगी जरूर कि कैसे गंदी हो गई।
मम्मी बोलीं- अभी तो कल सुबह ही बिछाई थी इतनी जल्दी कैसे गंदी हो गई?
मैंने जानबूझ कर थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा- अरे … कल सोने जा रही थी तभी गिलास का पानी गिर गया था इसलिए इसे हटा दिया था और दूसरी चादर बिछा कर सो गई थी।
दरअसल मैं पापा को ये जताना चाह रही थी कि मैं भी मम्मी से झूठ बोलकर कुछ छुपा रही हूं।
मैंने पापा की ओर देखा तो वे अभी भी पेपर पर नज़र गड़ाये बैठे थे।
मेरा जवाब सुन कर वे शायद थोड़े नॉर्मल हो गए।
हालांकि वे अभी भी मुझसे नज़र बचा रहे थे।
मुझे लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि पापा ज्यादा घबरा जाएं और फिर बात आगे ही ना बढ़े और यहीं पर खत्म हो जाए।
इसलिए मैंने पापा की घबराहट दूर करने के लिए खुद ही उनसे बात करने लगी और कहा- आज बड़ी देर तक चाय पी रहे हैं पापा … आपको ऑफिस नहीं जाना क्या?
और फिर मैं जाकर उनके बगल बैठ गई और चाय पीने लगी।
पापा थोड़े नॉर्मल होते हुए बोले- अरे अभी 8 बजे हैं
फिर मैंने और भी थोड़ी इधर-उधर की बातें कर उनकी घबराहट एकदम दूर करने की कोशिश की।
उसके बाद पापा तैयार होकर ऑफिस चले गए।
मैं भी अपने कमरे में आ गयी.
मेरा तो दिन ही नहीं कट रहा था।
बस सोच रही थी कि जल्दी से रात हो जाए ताकि पता चले कि आज फिर पापा आते हैं या नहीं।
किसी तरह रात हुई और खाना खाकर पापा-मम्मी भी अपने कमरे में चले गए और मैं भी ऊपर अपने कमरे में आ गई।
मैंने कपड़े बदले और छोटी स्कर्ट और टी शर्ट पहन ली।
टी शर्ट और स्कर्ट के नीचे मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी क्योंकि कल जो हुआ था वो तो अचानक हुआ था लेकिन आज मैने जानबूझकर इसलिए नहीं पहना कि पापा को लगे कि मैं रोज बिना पैंटी के सोती हूँ।
फिर नाइट बल्ब जलाकर कर लाइट को ऑफ कर दिया।
अँधेरा रहेगा तो पापा को नाइट बल्ब ऑन करना पड़ेगा इसलिए मैंने पहले ही नाइट बल्ब ऑन कर दिया था।
साथ ही मैने चादर के ऊपर एक तौलिया बिछा कर लेटी थी ताकि अगर आज फिर पापा के लंड से पानी निकले तो बिस्तर पर ना पड़े।
कुल मिलाकर मैं पापा को यह अहसास दिलाना चाह रही थी कि क्या होने वाला है, ये मैं जान रही हूं।
आज क्या होगा, ये सोच कर मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था।
अपनी चूत सहलाते हुए बेसब्री से पापा का इंतज़ार करने लगी।
रात के करीब पौने एक बजे मुझे सीढ़ियों से हल्की सी आवाज आयी.
मैं समझ गयी कि पापा आ रहे हैं।
फिर कल रात की तरह मैंने पीठ के बल लेट गयी और अपने हाथ को मोड़कर आँखों को ढक लिया कि चोरी से उनकी हरकतों को देख सकूं।
पापा ने धीरे से कमरे का दरवाजा खोला, फिर 10-15 सेकेण्ड तक दरवाजे पर ही रुके रहे।
शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि नाइट बल्ब पहले से जल रहा होगा।
खैर 10-15 सेकेण्ड रुकने के बाद वे धीरे से दबे पाँव कमरे में आये और बेड के पास आकर खड़े हो गये।
आज पापा ने हाफ पैंट और बनियान पहना हुआ था।
पापा बेड के पास बिलकुल मेरे बगल खड़े थे।
आंखों को मैंने हाथों से ढक रखा था, इस वजह से मुझे उनका चेहरा तो नहीं दिख रहा था लेकिन पेट से नीचे का पूरा हिस्सा दिख रहा था।
मैंने स्कर्ट और टी शर्ट पहनी थी … पापा करीब 15-20 सेकेण्ड तक ऐसे ही खड़े रहे।
फिर धीरे से झुककर उन्होंने मेरी स्कर्ट के निचले हिस्से को पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगे।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
फिर पापा ने स्कर्ट को पूरा ऊपर की तरफ खिसका कर मेरे पेट पर कर दिया।
अब आज एक बार फिर मेरी नंगी चूत पापा की आँखों के सामने थी।
पापा ने कल की तरह चूत या झांटों को छूने की हिम्मत नहीं दिखाई।
उसके बाद पापा सीधे खड़े हो गये और फिर वही हुआ जो मैं सोच रही थी।
उन्होंने अपनी हाफ पैंट को पकड़ कर नीचे खिसका दिया।
जैसे ही उन्होंने पैंट नीचे खिसकाया उनका लण्ड एक झटके से बाहर आ गया।
उनका लण्ड करीब-करीब खड़ा था।
पापा धीरे धीरे अपने लण्ड की चमड़ी को आगे पीछे कर मुठ मारने लगे।
तभी अचानक पापा ने लण्ड को हिलाना छोड़ दिया और अपने दोनों हाथ को धीरे से बेड के किनारे रखा और फिर नीचे झुकने लगे।
मैं समझ नहीं पायी कि वे क्या करने जा रहे हैं।
तभी मैंने देखा कि पापा अपना मुंह मेरी चूत के पास लाकर नाक से मेरी चूत को सूंघने लगे।
मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।
मैं बिना हिले डुले सो रही थी।
करीब 15 सेकेण्ड तक मेरी चूत को सूँघने के बाद वे वापस खड़े हो गये।
इस बार जब खड़े हुए तो उनका लण्ड एकदम टाइट खड़ा था।
अब पापा थोड़ा आगे खिसकर बेड से एकदम सट कर खड़े हो गये।
उनका लण्ड करीब-करीब मेरी चूत के ठीक ऊपर था।
अब वे तेजी से अपने लण्ड को हिलाकर मुठ मारने लगे।
करीब 5 मिनट तक बीते होंगे कि उन्होंने अपनी कमर को तेजी से हिलाना शुरू किया और अचानक तेज झटके और धार के साथ रुक-रुक कर उनके लण्ड से पानी निकलने लगा जो मेरी चूत, जाँघ, स्कर्ट और तौलिये पर फैल गया।
झड़ने के बाद भी करीब 4-5 सेकेण्ड तक पापा उसी तरह लण्ड को पकड़े खड़े रहे और फिर अपने पैंट से को ऊपर खिसका कर उसी से लण्ड को साफ कर पूरा पहन लिया।
और फिर मेरे ऊपर चूत और जांघ पर फैले लण्ड के पानी को बिना साफ किये कमरे से बाहर निकले और धीरे से दरवाजा बंद कर चले गये।
इसके बाद मैं धीरे से बिस्तर से उठी और दरवाजे को अंदर से लॉक करके लाइट जलाई।
मैंने देखा कि पापा के वीर्य की कुछ बूंद नीचे जमीन पर भी गिरी थी।
चूंकि मैंने चादर के ऊपर तौलिया डाल लिया था इसलिए चादर बच गई थी।
मगर तौलिये और स्कर्ट पर पापा के लंड का पानी पड़ा था।
मैंने बाथरूम में पानी से अपनी चूत और जांघ को साफ किया और फिर फर्श पर पड़े वीर्य को तौलिये से साफ किया और दूसरे कपड़े पहने।
फिर मोबाइल में सुबह 8 बजे का अलार्म लगा कर मैं सो गई।
मैंने 8 बजे का अलार्म इसलिए लगाया था क्योंकि यही समय था जब पापा और मम्मी चाय पीते हैं।
जल्दी ही बिटिया पापा के संग खेलेगी सारे खेलअब जल्दी ही पापा के साथ खेल खेलेगी