• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Erotica फागुन के दिन चार

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
फागुन के दिन चार

भाग -५३ गुड्डी और रंजी --मस्ती ही मस्ती पृष्ठ ५०१

अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
Finally Guddi ki jeevan ka pehla sambhog ka sukh mil gya.
एकदम एक लम्बे इन्तजार के बाद

कहानी उसी चाहत के साथ शुरू हुयी, अगले भाग में ही गुड्डी की हाँ और तैयारी भी लेकिन अब आ ही गया वो दिन

और यह मिलन यामिनी अगले भाग में भी जारी रहेगी, और उम्मीद करती हूँ की उस पार्ट को भी आपके कमेंट का, आशीष का सुख प्राप्त होगा,

जब भी समय मिले, जैसे भी समय मिले,

आभार, धन्यवाद

:thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks:
 

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
Suspense को एक्दम romantic में बदल दिया आपने...


अब होगी असली मिलन..... देखो कैसे रात में प्रेम मिलन होता है दोनों का...


सारे सवाल का 1 जवाब.....😘😘😘😘

कैसी लगी प्रणय की यह रात

और अगले भाग में भी गुड्डी और आनंद बाबू की प्रणय लीला जारी रहेगी

आतंक, बम के धमाकों की दहशत के बीच सुलगता रोमांस, मन से तन तक खुल कर इस भाग में पहुंचा और अगले भाग में भी जारी रहेगा

पढियेगा भी और अपनी टिप्पणी और समर्थन से उसे सजाइयेगा भी

आभार, धन्यवाद

Alice In Wonderland Thank You GIF
 

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
Bhut shandaar तरीके से किस के साथ शुरुआत हुई हैं.....देखो आज ज्ञान काम आता है या नहीं???
चुंबन के कोमल पग धरते, यह मिलन यात्रा शुरू हुयी है और देह के रहस्यों का आज उद्घाटन होगा, और अगले भाग में भी यह मिलन यात्रा जारी रहेगी

धन्यवाद
 

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
अरे वाह! किला फतेह कर लिया अखिरकार ladke ने..... गुड्डी के साथ....


दोनों ने मिलकर जीवन का वास्तविक आनंद ले लिया.....


अभी तो शुरू हुआ है देखो आगे क्या क्या करते हैं ये दोनों.....
इतने सार्थक और कहानी के भाव के अनुरूप कमेंट्स के लिए धन्यवाद

अगला भाग भी गुड्डी और आनंद की इस मिलन यात्रा के लिए

और आज ही
 
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
Bhut shandaar.... 1 round k baad chatting ho rahi hai... next round ki तैयारी.....



Dekho Vaseline ka kuch use hota h kya ????
एकदम सही कहा आपने और बनारस में भी दुष्ट दमन के बीच भी रीत को अपनी सहेली, छोटी बहन की तरह, गुड्डी की चिंता है और ख़ास तौर से उसे आंनद बाबू की झिझक मालूम है

लेकिन रीत तो रीत है सीधे मुद्दे पर
 

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
Are wah . पहले chudayi hi palang tod paan k sath....


Lag rha hai subah guddi se utha nahi jayega.... itna maja aaj ki रात ही ले legi.....


Wait for update
बस आज ही
 

komaalrani

Well-Known Member
25,526
70,164
304
बहोत बहोत बढ़ाई कोमलजी. कुछ ही दिनों मे छुटकी भी 30 लाख पर कर जाएगी.

568c4cb95edeeb383c555a46851ec9e3 cdb6642579f8ca65ddb93b5575e4f052
बस आप और अन्य मित्रों का साथ रहा

शुभकामनाएं और आशीष रहेगा तो यह और बाकी कहानी भी आगे बढ़ती रहेंगी

आभार
 

Shetan

Well-Known Member
18,181
52,901
259
आभार।

अपडेट बहुत जल्द, आपने कहा है तो कोशिश करुँगी की आज ही

आनंद - गुड्डी की यह मिलन यामिनी जारी रहेगी, अगली पोस्ट में भी
हमें तो आप के लेबजो का नशा है कोमलजी. पर आप अपने हिसाब से चलिएगा.

IMG-20251119-110044 IMG-20251119-071449
 

Premkumar65

Don't Miss the Opportunity
10,518
11,502
213
प्रथम चुम्बन -मिलन यामिनी का
kiss-boy-romantic-beauty-love-affection.jpg


पहल उसी ने की। एक हल्की सी किस्सी मेरे होंठों पे।

उसके बाद तो बाँध टूट पड़ा।

जैसे कोई स्टुडेंट बहुत देर तक एक्जामिनेशन हाल में बैठा रहे परचा लिए हुए। कुछ ना समझ में आये और अचानक सब कुछ याद आये।

जो कुछ मैंने सोचा था चंदा भाभी ने जो सिखाया पढ़ाया था, सब कुछ। मेरे कितने होंठ कितनी उंगलियां उग आई पता नहीं।

मेरे होंठों ने पहले तो उन नयनों से हाल चाल पूछी, जिनसे मेरी आँखें चार हुई थी, जिनमें मेरे सपने तिरते थे। और वो न शंर्मायें, न लजाएं इसलिए उन्हें चूम के बंद कर दिया।

फिर तो।

गोरे गुलाबी गाल, लजीले मीठे रसीले होंठ। पहले कहाँ। होंठ भी ठिठक रहे थे।

आज सब तुम्हारा है पूरी की पूरी गुड्डी और पूरी की पूरी ये फागुन की रात।

कपोलों के चुम्बन के बाद मेरे होंठ गुड्डी के रसीले होंठों से चिपक गए। पहले तो एक-दो छोटी-छोटी किस्सी, फिर मेरे होंठों ने उसके रस से भरे निचले होंठ को पकड़कर कस-कसकर चूसना शुरू कर दिया।


kiss-15990458.gif


मेरे हाथ भी खाली नहीं बैठ थे। पहले तो कसकर मेरी बाहों ने उसे भींचा, मेरे एक हाथ की उंगलियां उसके कंधे से लेकर नीचे तक हल्के-हल्के सहला रही थी, जैसे कोई कब से सोये सितार को उठाकर उसके तार छेड़ दे। और फिर कुछ देर में वो सितार के तार भी उसकी उंगलियों के साथ झंकृत होने लगें।

जैसे कोई किशोरी एक अलसाई सुस्ताती झील के किनारे बैठ उस में हल्के से पैर डालकर हिला दे और हजार हजार लहरें हिल उठें। मेरा दूसरा हाथ उसके किशोर नितम्बों को दबा रहा था, मेरे नाखून इस ना भूलने वाली रात के निशान बना रहे थे।

उसके गदराये किशोर गुदाज उभार मेरे सीने के नीचे दबे हुए थे, वो योवन कमल जिनके आस पास हमेशा मेरी आँखों के भौंरे मंडराया करते थे।

मैंने अपनी दोनों पैर उसकी लम्बी टांगों के बीच फैलाकर पूरी तरह खोल दिया था और मेरा उत्थित चरम दंड अपने लक्ष्य के आस पास था, फुंफकारता हुआ बैचैन, बेताब।

मेरी नदीदी उंगलियों से नहीं रहा गया।

जिस हाथ ने गुड्डी के भरे-भरे नितम्बों को दबोच रखा था, वो फिसल कर उसकी जांघ के ऊपरी हिस्से पे पहुँच गई और हल्के-हल्के काम समीर बहाने लगी, आनंद के कूप के एकदम पास और जो उंगलियां पीठ पे थी वो सीधे रस कलश पे। पहले तो थोड़ी देर उन पहाड़ियों के नीचे वो रही और फिर एक झटके में मुट्टी में।


मेरे अंगूठे और उंगली के बीच में जब उसके योवन कलश के शिखर, उसके निपल आये और मैंने हल्के से मसल दिया तो गुड्डी की मदमाती सिसकी निकल गई। और उसे रोकने के लिए मेरे दोनों होंठों ने गुड्डी के होंठों को जकड़ लिया। भींच लिया जैसे बरसों बाद किसी प्रिय को प्रियतमा मिले।

बरस तो हो ही गए थे मुझे इस रात के सपने संजोये। और फिर मेरी जीभ ने उसके मुँह में सेंध लगा दी। ये। उसका मुँह मेरी जीभ को चूस रहा था। मेरा एक हाथ उसके जोबन को रगड़ मसल रहा था और दूसरा उसकी रस से भरी योनि से इंच भर दूर जांघों को मसलता रगड़ता मदन पवन बहाता।

मेरी नदीदी उंगलियों से नहीं रहा गया। जिस हाथ ने गुड्डी के भरे-भरे नितम्बों को दबोच रखा था, वो फिसल कर उसकी जांघ के ऊपरी हिस्से पे पहुँच गई और हल्के-हल्के काम समीर बहाने लगी। आनंद के कूप के एकदम पास। और जो उंगलियां पीठ पे थी वो सीधे रस कलश पे। पहले तो थोड़ी देर उन पहाड़ियों के नीचे वो रही और फिर एक झटके में मुट्टी में। मेरे अंगूठे और उंगली के बीच में जब उसके योवन कलश के शिखर, उसके निपल आये और मैंने हल्के से मसल दिया तो गुड्डी की मदमाती सिसकी निकल गई।



Guddi-nip-77163383f5bf87e5d022082a1977a5d8.jpg


और उसे रोकने के लिए मेरे दोनों होंठों ने गुड्डी के होंठों को जकड़ लिया। भींच लिया जैसे बरसों बाद किसी प्रिय को प्रियतमा मिले।

बरस तो हो ही गए थे मुझे इस रात के सपने संजोये। और फिर मेरी जीभ ने उसके मुँह में सेंध लगा दी। ये पहला मौका नहीं था, गलती गुड्डी की ही थी, आदत उसी ने लगायी थी।

पिछली रात बनारस में जब मैंने मना किया था पान खाने को तो उसकी जीभ मेरे मुँह में आई थी, और आज गुड्डी ने वही किया जो मैंने कल किया था। उसका मुँह मेरी जीभ को चूस रहा था। मेरा एक हाथ उसके जोबन को रगड़ मसल रहा था और दूसरा उसकी रस से भरी योनि से इंच भर दूर जांघों को मसलता रगड़ता मदन पवन बहाता।

गुड्डी भी सिसक रही थी, मचल रही थी।
Ufff kitna kamuk mahaul bana diya hai komal ji. Mujhe bhi ekdam apne pratham milan ki anubhuti ho rahi hai.
 
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Premkumar65

Don't Miss the Opportunity
10,518
11,502
213
गुड्डी -बात कम काम ज्यादा

Girl-Bucchi-7bffb7b4c0a535b9b64b472eff4e9bd4.jpg


गलती की कि पूछ लिया और ऐसा करने पे जो होता है वो हुआ। डांट पड़ी।

“तुमने रखी थी…” घुड़क कर गुड्डी ने पूछा।

“नहीं, लेकिन…” मैं हल्के से बोला।

“तो। अगर मैं तुम्हारा कुछ प्लान न करूँ न तो तुम ऐसे ही रह जाओ। बुद्धू…” वो बोली।

मेरा एक हाथ उसके उभार पे था और दूसरा नीचे। एक उंगली आधी अन्दर। धीमे-धीमे अन्दर-बाहर। आग सुलगाती।

“हे बात बहुत हो गई अब काम…”

“एकदम…”

और मेरे कुछ करने के पहले उसने सिर पीछे घुमाया और उसके होंठ मेरे होंठों पे और उसकी जीभ मेरे मुँह के अन्दर।

जैसे थोड़ी देर पहले मैं उसके होंठों को चूस रहा था अब वो मेरे होंठों को सक कर रही थी। चाट रही थी, जिस तरह मेरी उंगली उसकी बुर के अन्दर चारों और घूम रही थी उसी तरह उसकी जुबान मेरे मुँह में। उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को भी कसकर पकड़ लिया और अपनी ओर खींच लिया।

कुछ देर बाद उसने मेरे होंठ छोड़े और बोली बस एक मिनट।

अब वो मेरी गोद में मेरी ओर मुँह करके बैठ गई थी और अपने दोनों पैर मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिए। और एक बार फिर मेरे होंठ उसके होंठों के कब्जे में। एक हाथ से वो मेरा सिर पकड़कर अपनी ओर खींचे हुए थी। मेरे दोनों हाथ गुड्डी के किशोर उभारों पे थे कभी हल्के से प्यार से सहलाते और कभी कसकर दबा देते। बहुत तरसाया तड़पाया था इन्होंने।



और मेरे जंगबहादुर एक बार स्वाद पा चुकने के बाद फिर तडफडा रहे थे।

गुड्डी की चुनमुनिया के ठीक ऊपर। एक हाथ की उंगली से पहले गुड्डी शरारत से उसके बेस पे छेड़ रही थी। और फिर हल्के से उसने मेरे लिंग को पकड़ लिया और आगे-पीछे करने लगी। किसी भी इज्जतदार शिश्न को एक गोरी किशोरी अपने कोमल कोमल हाथों में ले आगे-पीछे करे तो क्या होगा।



वही हुआ।

वो जोर से तनमना उठे। ऊपर से गुड्डी ने अपनी उंगली के टिप से उसके सुपाड़े के पी-होल पे सुरसुरी कर दी। अब हालत कंट्रोल से बाहर होती जा रही थी। लेकिन गुड्डी मेरी गोद से उठ गई।



“हे क्या हुआ इससे डर गई क्या?” मैं

ने अपने फिर से पूरी तरह खड़े लिंग की ओर इशारा करके कहा।



वो रुक के लौट आई और झुक के लिंग पकड़कर उसे देखकर कहने लगी-

“इससे क्यों डरूँगी, ये तो मेरे प्यारा सा, सोना सा, मुन्ना :

और खुले सुपाड़े को गुड्डी ने जीभ निकालकर अच्छी तरह चाट लिया और फिर होंठ के बीच पूरा सुपाड़ा गड़प कर, खूब कसकर चूम लिया और अपने मस्त नितम्ब हिलाती, मटकाती चल दी। उसकी पतली सी कमर पे उसके किशोर नितम्ब भी भारी लगते थे।



मेरा मन किया की अगर एक बार मौका मिले तो इसके पिछवाड़े का भी।



गुड्डी ने एक बार मुड़कर पीछे देखा जैसे उसे मेरे मन की बात का पता चल गया हो और मुश्कुरा दी। अलमारी से एक कागज का वो पाकेट लेकर आ गई और फिर से मेरी गोद में बैठकर उसे खोलने लगी।



“मैं भी न तुम्हारी संगत में पड़ के भुलक्कड़ हो रही हूँ, तुमने बोला था ना पान के लिए…” मुश्कुराकर वो बोली।

“हाँ वो…”

कल के पहले मैंने कभी पहले पान खाया भी नहीं था और वो भी बनारस का स्पेशल। कल रात इसी ने सबसे पहले अपने होंठों से। मैं सोच रहा था की गुड्डी ने चांदी के बर्क में लिपटे महकते गमकते दो जोड़े पान निकालकर साइड टेबल पे रख दिए।



“हे ये तो चार हैं…” मैं चौंक के बोला- “मैंने तो दो मेरा मतलब हम दोनों के लिए। दो…”



“अरे बुद्धू चलो कोई बात नहीं। ये पान वैसे भी जोड़े में ही आते हैं…” गुड्डी बोली और एक जोड़ी पान अपने होंठों में लेकर मेरी ओर बढ़ाया।



कल की तरह बजाय नखड़ा दिखाने के मैंने मुँह खोल दिया। और गुड्डी ने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़कर आधे से ज्यादा पान मेरे मुँह में डाल दिया और यही नहीं अपनी जुबान मेरे मुँह में डालकर ठेल भी दिया। थोड़ी देर में पान ने असर दिखलाना शुरू कर दिया। एक अजब सी मस्ती हम दोनों पे छाने लगी। मैं कसकर गुड्डी के जोबन का रस कभी हाथों से कभी होंठों से लेने लगा और गुड्डी भी कभी मुझे चूम लेती कभी होंठों को चूस लेती कभी चूस लेती।



फिर अचानक उसने मुझे पलंग पे गिरा दिया और इशारे से बोली की मैं बस चुपचाप लेटा रहूँ। उसके होंठ मेरे होंठों से सरक के मेरे सीने पे आ गई और पान चूसते चुभलाते उसने मेरे टिट्स पे अपनी जुबान फ्लिक करनी शुरू कर दी जैसे मैं थोड़ी देर पहले उसके निपलों पे कर रहा था। एक टिट पे उसकी जीभ थी और दूसरे पे उसके नाखून। जोश के मारे मेरे नितम्ब अपने आप ऊपर उठ रहे थे।



जंगबहादुर तो बहुत पहले ही 90 डिग्री पे थे।
Very very erotic update.
 
Top