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Incest आंधी (नफ़रत और इन्तकाम की)

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
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DEVIL MAXIMUM

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एक गजब का अप्रतिम रोमांचक शानदार लाजवाब और अविस्मरणीय अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Thank you so much bhai LATEST update posted
.
Aapke aakhiri ki lines ki likhi hue icha jaroor poori hogi ore jald he
 
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ayush01111

Well-Known Member
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UPDATE 26



हॉस्पिटल के एक कमरे के अन्दर दरवाजा खुलता है तब आरव अपने सामने अक्कू को देखता वैसे उसकी सास थम सी जाती है तब....


अक्कू – हे भगवान ये तुझे क्या हुआ आरव मेरी जान....


बोलते हुए आरव के पास जाके उसके गाल चूम लेती है तभी पीहू जो आरव के बगल में खड़ी थी , ये नजारा देख चौक जाती है , गुस्से में अक्कू को देखने लगती है तब....


अक्कू – (आरव के गाल में हाथ फेर के) मेरे प्यारे बाबू मैने बोला था ना तुम्हे , मुझसे अलग मत हो और देखा , मैं क्या गई और तेरा ये हॉल जो गया , लेकिन अब मैं अपने सोने बाबू को छोड़ के कही नहीं जाऊंगी....


बोल के आरव के गाल को चार , पांच बार चूम लेती है और फिर धीरे से आरव को होठों को चूमती है , फिर क्या था ये नजारा देख पीहू के सबर का बांध जैसे टूर जाता है मन ही मन अक्कू को गालियां देने लगती है , ये नजारा आरव देख लेता है तभी आरव कुछ बोलने को होता है लेकिन अक्कू अपनी आंखें दिखाती है आरव को जैसे कह रही हो एक शब्द मत बोलना समझे , लेकिन जलन और गुस्से में भरी पीहू बोल पड़ती है....


पीहू – हेलो मैडम आपको थोड़ी भी तमीज है की नहीं ये हॉस्पिटल है घर नहीं जो आप पेशेंट को परेशान कारने आ गई....


अक्कू – (पीहू को देख के बोली) कौन हो तुम और किस हक से मेरे और आरु बीच में बोल रही हो , जब मेरे आरु को दिक्कत नहीं तो तुम इतना क्यों उछल रही हो , ओह शायद तुम नर्स हो यहां पर , खेर अब तुम बाहर जाओ मै अपने आरु का ख्याल रख सकती हो , मुझे किसी नर्स की जरूरत नहीं है....


आरव – (अक्कू की बात सुन अपने मन में – अक्कू दी क्यों मुझे मरवाने पे तुली हुई हो अगर पीहू को गुस्सा आ गया कल एक को उड़ाया है आज आपको ना उड़ा दे साथ में मुझे भी)....


इधर आरव अपने मन में बोले जा रहा था लेकिन अक्कू ने एक नजर आरव को देखा अपनी आंखों से चुप रहने का इशारा किया , बेचारा आरव चाह के भी बोलने को हिम्मत नहीं कर पा रहा था तब....


पीहू – (गुस्से में) मै आरव की गर्ल फ्रेंड और साथ में उसकी होने वाली बीवी....


लेकिन बीच में पीहू की बात को काट के अक्कू बोली....


अक्कू – (बीच में) हा वो इसीलिए क्योंकि तब मै यहां नहीं थी , लेकिन अब मैं वापस आ चुकी हूँ और मेरे मना करने के बाद दुनिया में कोई मेरा फैसला नहीं बदल सकता है....


अक्कू के इतना बोलते ही पीहू ने एक नजर आरव को देखा जैसे बोल रही हो चुप क्यों हो बोलो तुम , लेकिन आरव बेचारा आज से पहले अक्कू की बात को नहीं काटा तो आज कैसे करता , और बस आरव ने कुछ ना बोला चुप रहा ये देख पीहू कि आंख से आंसू आने लगे और वो जाने लगी कमरे से बाहर लेकिन तभी कमरे में परी आ गई और पीहू की आंख में आंसू देख....


परी – ए अक्कू तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी पीहू को रुलाने की , आरु तेरा भाई है तो ये तेरी भाभी है और जरा सम्भल कर कल ही एक को टपका दिया है इस हॉस्पिटल में , कही आज तेरा नंबर ना लग जाय....


इतना बोलते ही परी हसन लगी साथ में अक्कू भी हसने लगी फिर चलते हुए पीहू के पास जाके अपने कान पकड़ के....


अक्कू – माफ कर दो भाभी मै बस टांग खींच रहीं थी (आरव के सिर में हल्का सा टपली मार के) क्यों ज्यादा हीरो पंती सवार हो गई है तुझे अपनी दीदी के बारे में भी नहीं सोचा तूने....


आरव – सौरी दीदी आगे से ऐसा नहीं करूंगा प्लीज़ अक्कू दीदी....


आरव का मासूम चेहरा देख के....


अक्कू – (आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) क्या हाल कर दो कमीनो ने मेरे भाई का , कीड़े पड़े कमीनो को जिसने मेरे भाई को ऐसे मारा है....


तभी लक्की कमरे में आता है हस्ते हुए....


लक्की – हा दीदी यही होना चाहिए एसो के साथ....


ऐसे ही सब मिल के हस्ते हुए बाते करने लगते है इस तरह शाम हो जाती है तब अक्कू सबको घर भेज देती है क्योंकि पीछे तीन दिन से यही पर थे , परी जाना नहीं चाहती थी , लेकिन वो जानती थी कि आरु आज अक्कू से बात करेगा की उसे सारी बात बताएगा जरूर , तो परी ने कल अक्कू से अकेले में बात करने का सोच के चली जाती है घर में , सबके जाने के बाद कमरे में काफी देर तक शांति रहती है , काफी देर तक अक्कू लगातार आरव को देख रही थी लेकिन आरव जैसे आज नजरे ज्यादा तर चुरा रहा था तब , आरव बेड से खड़ा हो खिड़की के पास जाके बाहर देखने लगता है जिसे देख....


अक्कू – आरु क्या बात है....


आरव – (बिना अक्कू को देखे) कुछ नहीं दीदी....


अक्कू – तो अब तू मुझसे भी छुपाएगा बात को , बोल न क्या परेशानी है तुझे....


लेकिन आरव कुछ नहीं बोलता है वो जैसे अपने मन में बातों को दबाए रखना चाहता हो ताकि अक्कू के सामने टूट ना जाए....


अक्कू – एग्जाम के बाद तू मंदिर क्या में गया था....


आरव – वो दीदी एग्जाम अच्छा नहीं गया था इसीलिए....


अक्कू – अपने आप को कितना बेवकूफ बनाएगा , बचपन से पढ़ाया है तुझे मैने....


जिसके बाद भी आरव कुछ नहीं बोलता तब....


अक्कू – हम्ममम समझ गई शायद तू अपना नहीं समझता मुझे....


बस यही अक्कू ने अपना इमोशनल ड्रामा खेला जिसके बाद....


आरव – नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है....


अक्कू – (आरव का हाथ अपने सिर में रख के) तो खा मेरी कसम बोल दे यही बात है....


तभी आरव अपना हाथ हटा लेता है जिसके बाद अक्कू आगे आके आरव को अपन गले लगा लेती है...


अक्कू – तू जनता है ना तेरे और मेरे बीच की बात आज तक कोई नहीं जान पाया है , चल बता क्या बात है मै तेरी पूरी मदद करूंगी.....


बस यही आरव के सब्र का बांध टूटते ही रोने लगा गले लग के अक्कू के जिसे देख अक्कू घबरा गई....


अक्कू – (आरव को पानी पिलाते हुए) देख आरु जो भी बात है बता मुझे तुझे इस तरह देख अब मुझे भी डर लग रहा है....


आरव – दीदी मॉम का अफ़सर चल रहा है किसी और के साथ....


बस इतना सुनना था और कमरे में जैसे शांति हो गई अक्कू को जैसे सुनाई नहीं दी बात आरव कि लेकिन फिर आरव की बात उसके माइंड में आई तब....


अक्कू – (चिल्ला के) ये क्या बोल रहा है तू , परी चाची अपने पति को धोखा दे रही है , तू जनता है क्या बोला है तूने अभी.....


आरव – अपने आखिरी एग्जाम के बाद मूवी देखने का प्लान था लेकिन मै सीधे घर गया वहां मैने अपनी आंखों से सब देखा है दीदी....


और फिर जो कुछ हुआ सब बता देता है जिसके बाद अक्कू सोफे पर बैठ जाती है अपने दोनों हाथों को अपने सिर में लगा के कुछ देर बाद अक्कू सिर उठा के आरव की तरफ देखती है....


अक्कू – अब क्या सोचा है तूने....


तभी कमरे का दरवाजा खुलता है सामने SSP खड़ा होता है अपने सामने SSP खड़ा देख चौक जाट है तब....


आरव – (SSP से) सर आप....


SSP – हा बेटा मै असल में रूटीन में निकला था यहां की सिक्योरिटी के लिए , खेर तुम बताओ अब कैसी है तबियत तुम्हारी....


आरव – पहले से अच्छी है सर....


SSP – हम्ममम अच्छी बात है (आकृति से) तुमने आरव को खुशबरी दी....


आकृति – नहीं सर अभी वक्त ही नहीं मिला मुझे....


आरव – कैसी खुशबरी.....


SSP – आकृति RAW में सिलेक्ट हुई है.....


आरव – (खुशी से) सच में अक्कू दी....


अक्कू – हा आरु....


आरव – तब तो पार्टी बनती है दी....


आकृति – हा लेकिन ये बात सीक्रेट है इस बारे में तेज चाचू के सिवा कोई नहीं जानता है , और मै नहीं चाहती ये बात किसी को भी पता चले....


आरव – ठीक है दीदी ये बात सीक्रेट रहेगी....


SSP – आरव मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है....


आरव – हा कहिए सर....


SSP – (पिस्टल आरव के आगे करते हुए) जिस दिन हादसा हुआ उस दिन ये पिस्टल तुम्हारे पास क्या कर रही थी....


SSP के सवाल के बाद आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था लेकिन ये बात अक्कू ने समझने में देर नहीं की तभी....


आकृति – सर उस दिन गलती से आरव ने गन लेली थी और घर से निकलने से पहले उसे वापस रखना भूल गया था....


SSP – (आरव को देखते हुए) मुझे यकीन तो नहीं हो रहा खेर , देखो आरव बेटा वैसे मैने इस बारे में अभी तक किसी को नहीं बताया है और ना ही तुम्हारे पिता को (आरव को गन देते हुए) मैने इसे लोड कर दिया है जितनी जल्दी हो सके इसे इसकी सही जगह पर फौरन पहुंचा दो , और बेटा एक बात , देखो ये तो मै वहां था और तुम्हे जानता भी हूँ इसीलिए ऐसी वैसी कोई बात नहीं हुई वर्ना बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती थी इसीलिए प्लीज़ आरव बेटा अगली बार से ध्यान से....


आरव – सॉरी सर....


SSP – (मुस्कुरा के आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) इट्स ओक बेटा , अपनी लाइफ एंजॉय करो तुम अब....


बोल के....

SSP – (अपने मन में – इस उम्र में बच्चे लाइफ एंजॉय करते है वही आरव अपनी फैमिली को प्रोटेक्ट के लिए तैयार बैठा है , उम्मीद करता हूँ कि तेज और परी इसे सम्भाल लेगे)...


SSP अपने मन में सोचते हुए चला गया कमरे से....


आरव – (अक्कू को गन देते हुए) आप इसे कल सुबह मेरे कमरे के कबर्ड में रख देना इससे पहले डैड को पता चले...


अक्कू – हम्मम ठीक है , देख आरु तू जो भी करेगा मै उसमें तेरे साथ हूँ , पर जो भी करना सोच समझ के करना , देख मैने अपने मां बाप को बचपन में खो दिया था उसके बाद से तेज चाचा और परी चाची ने संभाला मुझे और साथ मिला मुझे तू , तुझे पढ़ाने के साथ अपना बचपन जिया है मैने तेरे साथ , और यही वजह है की मै तेरे दर्द को समझ सकती हूँ....


आरव – दीदी मुझे समझ नहीं आ रहा मै क्या करू उन्हें माफ करूं या सजा दूं , क्योंकि माफ किया तो डैड के साथ धोखा होगा , और सजा , लेकिन कैसे मोम है मेरी उन्हें कैसे दुखी करूं मै....


अक्कू – देख आरु जहां तक मै जानती हु चाची तुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है और शायद यही वो वजह है कि चाची आगे नहीं बढ़ी अभी तक , और अगर तूने तेज चाचू को सब बता दिया तो शायद सब खत्म हो जाए , इसीलिए पहले खुद काबिल बनो उसके बाद इसे हैंडल करेगे हम....


आरव – मुझे डर है कही देर ना हो जाए....


अक्कू – (मुस्कुरा के) ऐसा कुछ नहीं होगा आरु क्योंकि मै ये बात अच्छे से जानती हूँ कि चाची तेरे प्रति जो प्यार है , बस वही प्यार उन्हें रोक रहा है , इसीलिए अपने प्यार को और दिखा , ये रिश्ता तब तक बचा रहेगा , क्योंकि ये प्रॉब्लम छोटी नहीं है और अभी तेरी उम्र भी इतनी नहीं और ना तेरे हालात की प्रॉब्लम को तू अकेले खत्म कर सके इसीलिए अभी रुकने में भलाई है और उन्हें अभी कुछ पता नहीं चलने देना की तू सब जनता है , वैसे भी अब तो तू कॉलेज में एडमिशन हॉर्न जा रहा है उसके बाद तेरे कॉलेज शुरू होने वाले है....


आरव – हम्ममम ठीक है दीदी....


अक्कू – चल अब आराम से सोजा , सुबह यहां किसी के आते ही मै जाके घर में पिस्टल को रख दूंगी....


आरव को समझा के सुला दिया आकृति ने लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था क्या सच में आरव शांत रह पाएगा इस बारे में रात भर आकृति , सोते हुए आरव को देखते हुए सोचती रही , सुबह होते ही पीहू , अर्चना और परी एक साथ हॉस्पिटल में आरव के कमरे में आए , आते ही जहां अर्चना सभी को चाय देती है पीने के लिए , जिसके बाद....


आकृति – मै चलती हूँ जल्दी ही वापस आती हु मै....


बोल के जाने लगी आकृति कमरे के बाहर तभी....


परी – (आकृति से) अरे आकृति तू घर जा रही है ना रस्ते में मेरा एक काम कर देगी प्लीज़....


अक्कू – हा बताइए चाची....


परी – रुक मेरी गाड़ी में कुछ सामान पड़ा है उसे लेके जा (अर्चना से) मै अभी आती हु...


बोल के परी कमरे से निकल गई आकृति को लेके , चलते हुए परी हॉस्पिटल के बाहर पार्किंग में आ गई आकृति को लेके , अपनी कार में बैठ गई साथ में आकृति भी तब....


आकृति – क्या समान ले जाना है चाची....


परी – अक्कू मुझे , तुझेसे जरूरी बात करनी है....


अक्कू – बात क्या है चाची....


परी – (बिना आकृति को देखे) आरु ने बता दिया होगा तुझे मेरे और रवि के बारे में....


अक्कू – (चौक के) आपको कैसे पता....


परी – आरु ने ये भी बताया होगा , उसके एक्सिडेंट वाले दिन ही उसने मुझे और रवि को एक साथ देखा था घर में....


आकृति – (परी को गौर से देखते हुए) जब सब कुछ पता है आपको उसके बाद भी आपने एक बार भी नहीं सोचा आरु के बारे में और तेज चाचू के बारे में , उन्हें पता चला तो क्या होगा , क्या बीतेगी उनपर , मुझे तो यकीन नहीं हो रहा क्योंकि कल मैने पहली बार उस आरु को देखा जो अन्दर ही अन्दर टूटता जा रहा है , जानती है क्यों , क्योंकि वो अपनी मोम के इस कड़वे सच को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा है , अरे आरु ही क्या मुझे भी यकीन नहीं हुआ जब मुझे ये बात बताई आरु ने , Why Chachi , why did you do that , ऐसी क्या कमी रह गई जो आपने ये रास्ता चुना , बोलिए चाची.....


परी – ये सच है अक्कू , मैने बहुत बड़ी गलती की , लेकिन ये पूरा सच नहीं है अक्कू....


अक्कू – क्या मतलब है आपका और कौन सा राज छुपाया है आपने....


परी – कल मैने तेज को सारी बात बता दी अपने बारे में....


अक्कू – (चौक के) क्या , फिर क्या कहा चाचू ने....


परी – (फिर तेज से हुई सारी बात बताती है साथ में ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ सारी बाते बताने के बाद) लेकिन असली बात नहीं बताई मैने तेज को....


अक्कू – असली बात , कौन सी असली बात नहीं बताई....


परी – रवि , मै और सोनल कॉलेज के वक्त से अच्छे दोस्त रहे है , लेकिन जब तेज का एक्सीडेंट हुआ उसके बाद मैं किसी तरह अपने आप को सम्भाल रखा था लेकिन सोनल ने मेरी इस कमजोरी का फायदा उठाया , सोनल ही जानभुज के रवि को मेरे करीब लाई , मेरी कमजोरी की बातें करते हुए सोनल ने अपना वकील वाला खेल खेला जैसा वो खेलती आई है सबके साथ , उसकी बातों ने मेरा माइंड ऐसा वाश किया कि एक दिन मै रवि के साथ अपनी सीमा लांघ गई....


अक्कू – लेकिन सोनल को आपके साथ ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी....


परी – यही तो सोनल का असली मकसद था , क्योंकि रवि मेहता सिर्फ दौलत का लालची इंसान है साथ में सोनल भी , मेरी दौलत के खातिर ही उन दोनों ने मेरे साथ ये खेल खेला ताकि मैं रवि की हो जाऊ जिससे मेरी प्रॉपर्टी भी रवि की हो जाएगी....


अक्कू – दौलत के वजह से इतना गंदा खेल खेला आपके साथ लेकिन जहां तक मुझे पता है , आरु के नाम है प्रॉपर्टी तो....


परी – हा लेकिन तुझे शायद आरु के दादा की प्रॉपर्टी के बारे में नहीं पता है , उनकी सारी प्रॉपर्टी जिसकी कीमत लगभग दो सौ करोड़ है वो भी आरु के नाम है , ये बात रवि और सोनल को पता है , और ये भी की मै आरु के लिए कितना मायने रखती हूँ , इसीलिए रवि चाहता है मै उसकी हो जाऊं , क्योंकि वो जानता है मेरे और आरु के बारे में इसीलिए....


अक्कू – हम्ममम , जब आपको जानकारी है उन दोनों के इरादों के बारे में फिर आप उनके साथ क्यों हो अभी तक....


परी – अक्कू दो दिन पहले तक मै अंजान थी इस सच से फिर मुझे सच का पता चला , लेकिन अक्कू जितना तू समझ रही है , ये उतना आसान नहीं है , रवि मेहता कहने को बिजनेस मैन है लेकिन उसका इसके इलाव भी और भी बिजनेस है , स्मगलिंग का , ड्रग्स का जो वो अपने जीजा के साथ करता है , रही सोनल की बात , सोनल तलवार पेशे से वकील है लेकिन आज भी उसके काफी हैवी कॉन्टैक और सपोर्टर्स है , अगर मैने अब डायरेक्टली कुछ किया तो हो सकता है शायद मुझे नुकसान हो जाएं....


अक्कू – नुकसान कैसा नुकसान....


परी – जैसे अभी आरु के लिए मै गलत हो गई और क्या पता रवि फिर से कुछ ऐसा ना कर दे कही (बोल के परी चुप हो गई क्योंकि उसे बीते दिन याद आ गए जिसके बाद) नहीं नहीं अक्कू मै ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी अब....


अक्कू – (परी की बात सुन के) क्या बात है चाची क्या हुआ था बताए मुझे....


परी – (बात बदलते हुए) वो सब जाने दे अक्कू , मुझे सिर्फ तुझपे भरोसा है इसीलिए मुझे तेरी मदद चाहिए , वैसे भी अब तूने तो RAW ज्वाइन कर ली है तो तेरे लिए आसान है मेरी मदद करना....


अक्कू – (जल्दी बाजी में) वो सब ठीक है चाची लेकीन (कुछ सेकंड चुप हो गई फिर) एक मिनट आपको कैसे पता मैने RAW को ज्वाइन किया है ये बात तों चाचू और आरु के सिवा कोई नहीं जानता है....


परी – वो मै तुझे अभी नहीं बता सकती हूँ अक्कू , अभी तू मुझे इतना बता तू आरु के लिए क्या कर सकती है....


अक्कू – (परी की बात सुन) किसी की जान लेने से पहले और अपनी जान देने से पहले मै सोचूंगी नहीं चाची , मै आरु के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ....


परी – ठीक है अगले महीने तेज अपने सारे शेयर आरु के नाम करने वाला है....


अक्कू – अगले महीने मतलब आरु के जनम दिन में....


परी – हा अक्कू और मै चाहती हूँ तू हमारा बिजनेस ज्वाइन करे , ताकि रवि और सोनल को अच्छे से सबक सिखा के , दोनों को उनके असली अंजाम तक पहुंचा सके , ताकि कही के नहीं रहे दोनों बहुत जुर्म किए है दोनों ने जिसका पता किसी को नहीं है आज तक....


अक्कू – ये काम तो मै बिना बिजनेस ज्वाइन किए भी कर सकती हूँ चाची उसके लिए इतना इन्तजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी , दोनों की जेल में ऐसी हालत करवा दूंगी कि....


परी – (बीच में) नहीं अक्कू इतना वक्त इसीलिए लगेगा क्योंकि उतने वक्त में मुझे महक को सेफ करना है....


अक्कू – महक कौन है....


परी – रवि की बेटी है महक अभी छोटी है वो , उसके १८ साल होने पर उसकी मां की प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी तब तक के लिए , मै ऐसा कुछ नहीं करना चाहती कि उस छोटी बच्ची की जिंदगी खराब हो जाए , जैसे रवि ने उसकी मां की की थी....


अक्कू – महक की मा के साथ क्या किया था रवि ने....


परी – रवि ने करोड़ो की दौलत के खातिर शादी की थी महक की मा से रवि ने लेकिन जब उसे पता चला रवि की हरकतो का तो उसने सारी प्रॉपर्टी महक के नाम कर दी , और रवि को उसका केयर टेकर बना दिया , इसीलिए रवि अब तक महक को पाल रहा है ताकि उसके १८ साल के होते ही वो सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सके महक की....


अक्कू – और अगर प्रॉपर्टी रवि के नाम हो गई फिर....


परी – क्या पता वो महक को भी उसकी मां की तरह.....


बोल के चुप हो गई परी जिसे समझ के....


अक्कू – इसका मतलब रवि ने ही अपनी बीवी को मारा है....


परी – इस बात की पक्की जानकारी किसी को नहीं है , कुछ कहते है बीमारी के कारण मर गई तो कुछ का मानना यही है कि प्रॉपर्टी की वजह से रवि ने मार दिया उसे , अक्कू मैने जितनी भी बात कही तुझसे , इस बात का मेरे पास कोई सुबूत नहीं है....


अक्कू – हम्मम , ये रवि तो काफी कमीना किस्म का लगता है , लेकिन चाची जब आपके पास सुबूत नहीं है फिर आपको कैसे पता इतना सब कुछ इन सब के बारे में.....


परी – (मन में – अब तुझ कैसे बताऊं अक्कू मै इतना सब कैसे जानती हूँ , ये बात मै चाह के भी नहीं बता सकती किसी को भी) , मुझे कुछ लोगों से सुनने को मिली ये सब बाते , अब तू बता क्या मेरी मदद करेगी.....


अक्कू – हा मै करूंगी मदद लेकिन बदले में आपको भी बताना पड़ेगा कि आपको ये सारी बाते कैसे पता चली है....


परी – अक्कू तुझे आरु की कसम है , हमने जितनी बात की है अभी , ये सारी बाते गलती से भी किसी से मत बोलना तुम , मै इसबार किसी को भी खोना नहीं चाहती हूँ , और इसके लिए मुझे सिर्फ तुझ पर भरोसा है , रही बात मुझे कैसे पता तो सही वक्त पर मै बात बता दूंगी , तब तक इस बारे में किसी से क्या मुझसे कोई बात मत करना....


अक्कू – ठीक है चाची मै आपके साथ हूँ , आप जब कहेगी बिजनेस ज्वाइन करने के लिए मै तैयार मिलूंगी , लेकिन तब तक आरु को हैंडल कैसे करना है कुछ सोचा है आपने....


परी – सही मौका देख मै बात करूंगी आरु से....


अक्कू – ठीक है चाची मै घर जा रही हु , बाद में मिलती हु....


बोल के आकृति निकल गई रस्ते में....


अक्कू – (अपने मन में – चाची ने बोला , इसबार , अब इस बात से क्या मतलब है , चाची कुछ तो छुपा रही है मुझसे , लेकिन क्या , पता लगाना पड़ेगा मुझे)


अक्कू के जाते ही परी किसी को फोन मिलाने लगी....


सामने से – (फोन पर) Good Morning Pari Mam कैसी है आप....


परी – (फोन पर) Good Morning रोहित , मै अच्छी हूँ , तुम कैसे हो....


रोहित – जी मै भी अच्छा हूँ मैंम , अब आरव कैसे है मैडम....


परी – तबियत में अब थोड़ा सुधार हो रहा है उसके , टाइम निकाल के आओ मिलने आरव से , तुमसे मिल के खुश हो जाएगा वो....


रोहित – जी मैडम मै मौका निकाल के आता हु मिलने....


परी – रोहित मौका मत निकालो , फाइल में सिग्नेचर के बहाने तुम हॉस्पिटल में आ जाओ मुझे तुमसे जरूरी काम है....


रोहित – सब ठीक है ना मैडम....


परी – हा सब ठीक है रोहित , तुम मिलने आओ फिर आराम से बात करते है हम....


रोहित – ठीक है मैडम मैं आज ही आता हु आपसे मिलने....


बोल के दोनों ने फोन काट दिया जिसके बाद परी चली गई आरव के पास उसके कमरे में जहां सबकी बातों का सिलसिला चलता रहा कुछ समय बाद आकृति आगई और तेज भी ओर कुछ देर बाद रोहित भी आ गया....


रोहित – (कमरे में आते ही) हेलो परी मेम, हेलो ऑल....


परी – आओ रोहित कैसे हो तुम....


रोहित – मै अच्छा हूँ मेम....


रोहित – (आरव से) हेलो आरव सर अब कैसे है आप....


आरव – मैं ठीक हूँ भईया, और आप मुझे सर मत बोला करिए सिर्फ नाम से बुलाया करो , आप मेरे बड़े भाई की तरह हो....


रोहित – (मुस्कुरा के) ठीक है आरव (लक्की से) और लक्की द रेसर कैसे हो तुम....


लक्की – (मुस्कुरा के) अच्छा हूँ भईया , लेकिन आपको ये नाम किसने बताया....


रोहित – (हस्ते हुए) ऑफिस में जब आपको डाट पड़ रही थी (आरव से) वैसे आरव सेम मुझे बता रहा था कि तुम सब एक नए स्टंट की तैयारी कर रहे हो कुछ नाम भी बताया था उसने मुझे , जाने क्या बातया था नाम....


रोहित की बात से लक्की की हवा टाइट हो गई स्टंट के बारे में सुन के लेकिन तभी....


आरव – (जल्दी बाजी में) वो हवा में मेरा SUPERMAN जैसे उड़ने वाला स्टंट उसकी अभी तो.....


बोल के आरव चुप हो गया क्योंकि बोलते वक्त आरव ने देखा कि परी , तेज और आकृति घूर के उसे देख रहे थे आरव को तब....


आकृति – (आरव से) हा हा बोलो ना क्या बोल रहे थे स्टंट के बारे में उसकी अभी क्या आगे बोलो....


आरव – (बात बदलते हुए रोहित से) भईया मैने छोड़ दिया वो सब स्टंट करना , अब नहीं करता हूँ मै....


आकृति – (आरव से) अच्छी बात है वरना मै तुझे अभी अपना असली स्टंट दिखाती....


आकृति की बात सुन आरव का मू बंद हो गया जिसे देख सभी हंसने लगे तब....


तेज – और बताओ रोहित काम कैसा चल रहा है ऑफिस में....


रोहित – ठीक है सर सब नॉर्मली चल रहा है बिजनेस....


तेज – हम्ममम सही है....


परी – सुनैना कैसी है रोहित.....


रोहित – अच्छी है वो भी मेम , मैने सुना आप अब ऑफिस का काम घर से करेगी.....


परी – हा रोहित जब तक आरु पूरी तरह ठीक नहीं जो जाता तब तक ऑफिस का सारा काम घर से करूंगी....


रोहित – अच्छी बात है मेंम , खैर मैं ये फाइल लेके आया था इसमें आपके सिग्नेचर की जरूरत है....


परी – हम्ममम ठीक है , अच्छा सुनो मेरी कार में एक फाइल रखी है उसे ऑफिस लेके जाना काम की है....


रोहित – ठीक है मेंम....


परी – आओ मैं फाइल देती हूं तुम्हे....


बोल के दोनों कमरे में बाहर आ जाते है पार्किंग में आके....


परी – (रोहित से) मेरा एक काम करोगे रोहित....


रोहित – हा मेंम इसमें पूछने की क्या जरूरत है आप हुकुम करे....


परी – रोहित ये थोड़ा पर्सनल काम है , मैं चाहती हूँ इसके बारे में किसी को भी पता ना चले....


रोहित – Don't Worry mam किसी को पता नहीं चलेगा....


परी – रोहित मुझे रवि के सभी अकाउंट्स की डिटेल चाहिए , पर्सनल की भी साथ में सोनल तलवार के भी....


रोहित – मेंम आप रवि और सोनल की जासूसी करवाना चाहती है....


परी – तुमने सही समझा रोहित , क्या मै भरोसा कर सकती हूँ तुमपे....


रोहित – मेंम आज मैं जो कुछ भी हु सिर्फ आपकी वजह से हु , आपकी वजह से आज मैं एक अच्छी पोजीशन पर हूँ , भरोसा रखिए आपका ये काम हो जाएगा आप निश्चित रहे मेंम , लेकिन आप अचानक से ऐसा क्यों चाहती है सब ठीक तो है ना मेंम....


परी – सब ठीक तो नहीं कह सकती हु रोहित , हा कुछ शक जरूर है मुझे रवि और सोनल के काम पर इसीलिए मैं उनकी सारी डिटेल्स चाहती हूँ हर तरह की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी....


रोहित – ठीक है मेंम मैं कुछ लोगों को जानता हु जो ये काम आसानी से कर सकते है....


परी – ठीक है रोहित जितनी जल्दी होसके मुझे रिपोर्ट करना पर्सनली ओके....


रोहित – ठीक है मेंम....


बोल के दोनों निकल गए अपने काम पे खेर यहां तक तो परी ने तैयारी कर ली अपने हिसाब से आगे के लिए लेकिन आगे क्या और कैसे होगा , क्या परी के मुताबिक होगा सब या फिर कुछ और जल्द जाने को मिलेगा खेर अब जरा चलते है साहिल की तरफ.....


अब थोड़ा आगे बढ़ते है कहानी में....


आज साहिल को घर आए पांच दिन बीत चुके है इन पांच दिनों में साहिल ने किसी से जायद बात चित नहीं की लेकिन सुमन , नेहा , अवनी , खुशी , सुनैना साथ में रीना ने कोशिश जरूर की लेकिन रिस्पॉन्स खास नहीं मिला किसी को भी , हा लेकिन रिकी ने बहुत मजा किया साहिल के साथ कभी गेम खेल के कभी बाते करके रिकी और साहिल का वक्त अच्छा बीता साथ में , दोनों की अच्छी बनने लगी इस बीच रनवीर जो बाहर गया था वो वापस आ गया , घर में और अब सुनंदा को भी कमरा मिल गया रहने के लिए साहिल के बगल में और सेमेंथा का आप सब जानते ही है उसे सिर्फ साहिल के सिवा कोई नहीं देख सुन सकता था और साथ में सुनंदा भी बस साहिल को पता नहीं सुनंदा के लिए खेर इस वक्त दोपहर का वक्त सब मिल के खाना खा रहे थे घर में तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया जिसे सुन लता ने दरवाजा खोला तो....


लता – (खुशी से) अरे सुनीता दीदी आ गए आप , कैसी हो आप....


सुनीता – बहुत अच्छी हूँ.....


पायल और शबनम – (लता से) हम भी है यहां पर दीदी हमसे नहीं मिलोगे आप....


लता – (मुस्कुरा के) तुम दोनों को कैसे भूल सकती हूँ मै....


इसके साथ तीनों अन्दर आने लगे तब....


लता – (कमल को उनके साथ देख) आप कौन....


शबनम – लता दीदी ये भाई है हमारा , कमल नाम है इनका....


कमल – नमस्ते दीदी....



लता – नमस्ते....


खेर लता जानती थी इस बारे में जिसे दादी ने बताया था लेकिन साहिल के सामने बोलने को मना किया था इसीलिए अंजान बन गई थी लता , खेर बोल के चारों अन्दर आगए जहां सब मिले एक दूसरे से फिर सभी बैठ एक साथ खाना खाने लगे तब....


साहिल – (कमल से) मिल गई फुर्सत तुझे आने की....


कमल – हा यार अब नाराज क्यों हो रहा है आ गया न तेरे पास अब साथ में रहेंगे पहले की तरह....


साहिल – पहले की तरह , तुझे देख के लगता तो नहीं है ऐसा....


कमल – (मुस्कुराते हुए) विश्वास नहीं देख लेना फिर....


शबनम – वैसे साहिल भइया सच में कमल भईया बहुत कमाल के है , इन कुछ दिनों में बोर नहीं होने दिया उन्होंने हमें और शहर में ऐसी जगह घुमाया हमें जहां हम आज तक गए नहीं थे....


पायल – और नहीं तो क्या हमे तो पता ही नहीं चला पांच दिन कैसे बीत गए कमल के साथ....


साहिल – (कमल को देख के) ओह बहुत अच्छी बात है ये तो क्यों कमल....


पायल और शबनम ने जल्द बाजी में बोल तो दिया तभी सुनीता ने बीच में आंख दिखाई पायल और शबनम को जिसे दोनों देख समझ गए कि दोनों ने जल्द बाजी में साहिल का ध्यान नहीं दिया , लेकिन अब देर जो हो गई थी तब तक साहिल ने सब सुन लिया था....


(नोट – कमल दादी के कहने पर साहिल से झूठ बोल के गया था सुनीत के घर में क्योंकि सुनीता ने ही कमल को बचपन में गोद लिया था जिसके बारे में कमल को गांव में पता चला था लेकिन ये बात साहिल नहीं जानता है उसे कमल ने झूठ बोला था डिग्री का बहाना बना के गया था सुनीत के साथ उसके घर में)....


इनकी बातों के बीच में साहिल ने कुछ नहीं बोला नॉर्मल बिहेव करता रहा जिससे सभी को लगा कि साहिल ने ध्यान नहीं दिया उनकी बात का , लेकिन इस बीच एक शख्स था जो कमल को गोर से देखे जा रहा था लेकिन उसने कुछ बोल नहीं , खेर खाने के बाद सब कमरे में जाने लगे कमल भी साहिल के साथ जा रहा था तब....


कमल – (साहिल से) तू कमरे में चल मै अपना बैग लेके आता हु , शायद लता दीदी ने सुनीत बुआ के कमरे में रख दिया है....


साहिल – ठीक है जल्दी आ तुझसे जरूरी बात करनी है....


फिर कमल जाता है सुनीता के कमरे में जहां....


सुनीता – (कमल से) आ गया तू , वो पायल और शबनम अनजाने में ज्यादा बोल गई साहिल के सामने , उसने तुझे कुछ बोला तो नहीं....


कमल – आप घबराओ मत ऐसा कुछ नहीं हुआ है बाकी मै देख लूंगा , अच्छा मेरा बैग कहा है उसे लेने आया हूँ....


सुनीता – क्या करेगा बैग लेके बाद में तुझे यही आना है....


कमल – हा जनता हूँ लेकिन बैग में साहिल के लिए समान है उसे देना है ना , मै रात में मिलता हु आपसे ठीक है....


सुनीता – (मुस्कुरा के) हम्ममम ठीक है , जल्दी आना भूलना मत....


बोल के कमल निकल गया साहिल के कमरे की तरफ बीच में....


सुनंदा – (कमल को बाहर से जाता देख उसे रोक के) सुनो....


कमल – जी आपने मुझे बुलाया....


सुनंदा – हा , तुम वही कमल हो ना साहिल के बचपन के दोस्त....


कमल – जी मै ही हूँ , लेकिन आप कौन....


सुनंदा – मेरा नाम सुनंदा है , अच्छा कमल एक छोटा सा काम था कर दोगे प्लीज़ ज़्यादा वक्त नहीं लूंगी तुम्हारा....


कमल – हा बताइए क्या काम है....


सुनंदा – वो कमरे में अलमारी खुल नहीं रही है प्लीज़ उसे खोल दोगे.....


कमल – हा जरूर बताए कहा है अलमारी....


बोल के कमल कमरे में आता है सुनंदा के जिसके बाद पीछे से सुनंदा दरवाजा लॉक कर देती है तभी कमल जैसे ही पीछे मुड़ता है तभी सुनंदा गुस्से में अपने हाथ से कमल की गर्दन पकड़ दीवार से लगा के उसे ऊपर उठा देती है तब....


सुनंदा – (गुस्से में) कौन है तू और क्यों आया है यहां साहिल के पीछे , बता क्या मकसद है तेरा.....


कमल – (दर्द में धीरे से) मै दोस्त हूँ साहिल का , छोड़ो मुझे....


सुनंदा – (गुस्से में) दोस्त और तू साहिल का किसे बेवकूफ बना रहा है , तुझे देखते ही मै समझ गई थी , तू इंसान के शरीर में एक डेविल है....
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जारी रहेग✍️✍️
Bhai aarav or pari kaise sahil se milenge
 

Sunli

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UPDATE 26



हॉस्पिटल के एक कमरे के अन्दर दरवाजा खुलता है तब आरव अपने सामने अक्कू को देखता वैसे उसकी सास थम सी जाती है तब....


अक्कू – हे भगवान ये तुझे क्या हुआ आरव मेरी जान....


बोलते हुए आरव के पास जाके उसके गाल चूम लेती है तभी पीहू जो आरव के बगल में खड़ी थी , ये नजारा देख चौक जाती है , गुस्से में अक्कू को देखने लगती है तब....


अक्कू – (आरव के गाल में हाथ फेर के) मेरे प्यारे बाबू मैने बोला था ना तुम्हे , मुझसे अलग मत हो और देखा , मैं क्या गई और तेरा ये हॉल जो गया , लेकिन अब मैं अपने सोने बाबू को छोड़ के कही नहीं जाऊंगी....


बोल के आरव के गाल को चार , पांच बार चूम लेती है और फिर धीरे से आरव को होठों को चूमती है , फिर क्या था ये नजारा देख पीहू के सबर का बांध जैसे टूर जाता है मन ही मन अक्कू को गालियां देने लगती है , ये नजारा आरव देख लेता है तभी आरव कुछ बोलने को होता है लेकिन अक्कू अपनी आंखें दिखाती है आरव को जैसे कह रही हो एक शब्द मत बोलना समझे , लेकिन जलन और गुस्से में भरी पीहू बोल पड़ती है....


पीहू – हेलो मैडम आपको थोड़ी भी तमीज है की नहीं ये हॉस्पिटल है घर नहीं जो आप पेशेंट को परेशान कारने आ गई....


अक्कू – (पीहू को देख के बोली) कौन हो तुम और किस हक से मेरे और आरु बीच में बोल रही हो , जब मेरे आरु को दिक्कत नहीं तो तुम इतना क्यों उछल रही हो , ओह शायद तुम नर्स हो यहां पर , खेर अब तुम बाहर जाओ मै अपने आरु का ख्याल रख सकती हो , मुझे किसी नर्स की जरूरत नहीं है....


आरव – (अक्कू की बात सुन अपने मन में – अक्कू दी क्यों मुझे मरवाने पे तुली हुई हो अगर पीहू को गुस्सा आ गया कल एक को उड़ाया है आज आपको ना उड़ा दे साथ में मुझे भी)....


इधर आरव अपने मन में बोले जा रहा था लेकिन अक्कू ने एक नजर आरव को देखा अपनी आंखों से चुप रहने का इशारा किया , बेचारा आरव चाह के भी बोलने को हिम्मत नहीं कर पा रहा था तब....


पीहू – (गुस्से में) मै आरव की गर्ल फ्रेंड और साथ में उसकी होने वाली बीवी....


लेकिन बीच में पीहू की बात को काट के अक्कू बोली....


अक्कू – (बीच में) हा वो इसीलिए क्योंकि तब मै यहां नहीं थी , लेकिन अब मैं वापस आ चुकी हूँ और मेरे मना करने के बाद दुनिया में कोई मेरा फैसला नहीं बदल सकता है....


अक्कू के इतना बोलते ही पीहू ने एक नजर आरव को देखा जैसे बोल रही हो चुप क्यों हो बोलो तुम , लेकिन आरव बेचारा आज से पहले अक्कू की बात को नहीं काटा तो आज कैसे करता , और बस आरव ने कुछ ना बोला चुप रहा ये देख पीहू कि आंख से आंसू आने लगे और वो जाने लगी कमरे से बाहर लेकिन तभी कमरे में परी आ गई और पीहू की आंख में आंसू देख....


परी – ए अक्कू तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी पीहू को रुलाने की , आरु तेरा भाई है तो ये तेरी भाभी है और जरा सम्भल कर कल ही एक को टपका दिया है इस हॉस्पिटल में , कही आज तेरा नंबर ना लग जाय....


इतना बोलते ही परी हसन लगी साथ में अक्कू भी हसने लगी फिर चलते हुए पीहू के पास जाके अपने कान पकड़ के....


अक्कू – माफ कर दो भाभी मै बस टांग खींच रहीं थी (आरव के सिर में हल्का सा टपली मार के) क्यों ज्यादा हीरो पंती सवार हो गई है तुझे अपनी दीदी के बारे में भी नहीं सोचा तूने....


आरव – सौरी दीदी आगे से ऐसा नहीं करूंगा प्लीज़ अक्कू दीदी....


आरव का मासूम चेहरा देख के....


अक्कू – (आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) क्या हाल कर दो कमीनो ने मेरे भाई का , कीड़े पड़े कमीनो को जिसने मेरे भाई को ऐसे मारा है....


तभी लक्की कमरे में आता है हस्ते हुए....


लक्की – हा दीदी यही होना चाहिए एसो के साथ....


ऐसे ही सब मिल के हस्ते हुए बाते करने लगते है इस तरह शाम हो जाती है तब अक्कू सबको घर भेज देती है क्योंकि पीछे तीन दिन से यही पर थे , परी जाना नहीं चाहती थी , लेकिन वो जानती थी कि आरु आज अक्कू से बात करेगा की उसे सारी बात बताएगा जरूर , तो परी ने कल अक्कू से अकेले में बात करने का सोच के चली जाती है घर में , सबके जाने के बाद कमरे में काफी देर तक शांति रहती है , काफी देर तक अक्कू लगातार आरव को देख रही थी लेकिन आरव जैसे आज नजरे ज्यादा तर चुरा रहा था तब , आरव बेड से खड़ा हो खिड़की के पास जाके बाहर देखने लगता है जिसे देख....


अक्कू – आरु क्या बात है....


आरव – (बिना अक्कू को देखे) कुछ नहीं दीदी....


अक्कू – तो अब तू मुझसे भी छुपाएगा बात को , बोल न क्या परेशानी है तुझे....


लेकिन आरव कुछ नहीं बोलता है वो जैसे अपने मन में बातों को दबाए रखना चाहता हो ताकि अक्कू के सामने टूट ना जाए....


अक्कू – एग्जाम के बाद तू मंदिर क्या में गया था....


आरव – वो दीदी एग्जाम अच्छा नहीं गया था इसीलिए....


अक्कू – अपने आप को कितना बेवकूफ बनाएगा , बचपन से पढ़ाया है तुझे मैने....


जिसके बाद भी आरव कुछ नहीं बोलता तब....


अक्कू – हम्ममम समझ गई शायद तू अपना नहीं समझता मुझे....


बस यही अक्कू ने अपना इमोशनल ड्रामा खेला जिसके बाद....


आरव – नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है....


अक्कू – (आरव का हाथ अपने सिर में रख के) तो खा मेरी कसम बोल दे यही बात है....


तभी आरव अपना हाथ हटा लेता है जिसके बाद अक्कू आगे आके आरव को अपन गले लगा लेती है...


अक्कू – तू जनता है ना तेरे और मेरे बीच की बात आज तक कोई नहीं जान पाया है , चल बता क्या बात है मै तेरी पूरी मदद करूंगी.....


बस यही आरव के सब्र का बांध टूटते ही रोने लगा गले लग के अक्कू के जिसे देख अक्कू घबरा गई....


अक्कू – (आरव को पानी पिलाते हुए) देख आरु जो भी बात है बता मुझे तुझे इस तरह देख अब मुझे भी डर लग रहा है....


आरव – दीदी मॉम का अफ़सर चल रहा है किसी और के साथ....


बस इतना सुनना था और कमरे में जैसे शांति हो गई अक्कू को जैसे सुनाई नहीं दी बात आरव कि लेकिन फिर आरव की बात उसके माइंड में आई तब....


अक्कू – (चिल्ला के) ये क्या बोल रहा है तू , परी चाची अपने पति को धोखा दे रही है , तू जनता है क्या बोला है तूने अभी.....


आरव – अपने आखिरी एग्जाम के बाद मूवी देखने का प्लान था लेकिन मै सीधे घर गया वहां मैने अपनी आंखों से सब देखा है दीदी....


और फिर जो कुछ हुआ सब बता देता है जिसके बाद अक्कू सोफे पर बैठ जाती है अपने दोनों हाथों को अपने सिर में लगा के कुछ देर बाद अक्कू सिर उठा के आरव की तरफ देखती है....


अक्कू – अब क्या सोचा है तूने....


तभी कमरे का दरवाजा खुलता है सामने SSP खड़ा होता है अपने सामने SSP खड़ा देख चौक जाट है तब....


आरव – (SSP से) सर आप....


SSP – हा बेटा मै असल में रूटीन में निकला था यहां की सिक्योरिटी के लिए , खेर तुम बताओ अब कैसी है तबियत तुम्हारी....


आरव – पहले से अच्छी है सर....


SSP – हम्ममम अच्छी बात है (आकृति से) तुमने आरव को खुशबरी दी....


आकृति – नहीं सर अभी वक्त ही नहीं मिला मुझे....


आरव – कैसी खुशबरी.....


SSP – आकृति RAW में सिलेक्ट हुई है.....


आरव – (खुशी से) सच में अक्कू दी....


अक्कू – हा आरु....


आरव – तब तो पार्टी बनती है दी....


आकृति – हा लेकिन ये बात सीक्रेट है इस बारे में तेज चाचू के सिवा कोई नहीं जानता है , और मै नहीं चाहती ये बात किसी को भी पता चले....


आरव – ठीक है दीदी ये बात सीक्रेट रहेगी....


SSP – आरव मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है....


आरव – हा कहिए सर....


SSP – (पिस्टल आरव के आगे करते हुए) जिस दिन हादसा हुआ उस दिन ये पिस्टल तुम्हारे पास क्या कर रही थी....


SSP के सवाल के बाद आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था लेकिन ये बात अक्कू ने समझने में देर नहीं की तभी....


आकृति – सर उस दिन गलती से आरव ने गन लेली थी और घर से निकलने से पहले उसे वापस रखना भूल गया था....


SSP – (आरव को देखते हुए) मुझे यकीन तो नहीं हो रहा खेर , देखो आरव बेटा वैसे मैने इस बारे में अभी तक किसी को नहीं बताया है और ना ही तुम्हारे पिता को (आरव को गन देते हुए) मैने इसे लोड कर दिया है जितनी जल्दी हो सके इसे इसकी सही जगह पर फौरन पहुंचा दो , और बेटा एक बात , देखो ये तो मै वहां था और तुम्हे जानता भी हूँ इसीलिए ऐसी वैसी कोई बात नहीं हुई वर्ना बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती थी इसीलिए प्लीज़ आरव बेटा अगली बार से ध्यान से....


आरव – सॉरी सर....


SSP – (मुस्कुरा के आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) इट्स ओक बेटा , अपनी लाइफ एंजॉय करो तुम अब....


बोल के....

SSP – (अपने मन में – इस उम्र में बच्चे लाइफ एंजॉय करते है वही आरव अपनी फैमिली को प्रोटेक्ट के लिए तैयार बैठा है , उम्मीद करता हूँ कि तेज और परी इसे सम्भाल लेगे)...


SSP अपने मन में सोचते हुए चला गया कमरे से....


आरव – (अक्कू को गन देते हुए) आप इसे कल सुबह मेरे कमरे के कबर्ड में रख देना इससे पहले डैड को पता चले...


अक्कू – हम्मम ठीक है , देख आरु तू जो भी करेगा मै उसमें तेरे साथ हूँ , पर जो भी करना सोच समझ के करना , देख मैने अपने मां बाप को बचपन में खो दिया था उसके बाद से तेज चाचा और परी चाची ने संभाला मुझे और साथ मिला मुझे तू , तुझे पढ़ाने के साथ अपना बचपन जिया है मैने तेरे साथ , और यही वजह है की मै तेरे दर्द को समझ सकती हूँ....


आरव – दीदी मुझे समझ नहीं आ रहा मै क्या करू उन्हें माफ करूं या सजा दूं , क्योंकि माफ किया तो डैड के साथ धोखा होगा , और सजा , लेकिन कैसे मोम है मेरी उन्हें कैसे दुखी करूं मै....


अक्कू – देख आरु जहां तक मै जानती हु चाची तुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है और शायद यही वो वजह है कि चाची आगे नहीं बढ़ी अभी तक , और अगर तूने तेज चाचू को सब बता दिया तो शायद सब खत्म हो जाए , इसीलिए पहले खुद काबिल बनो उसके बाद इसे हैंडल करेगे हम....


आरव – मुझे डर है कही देर ना हो जाए....


अक्कू – (मुस्कुरा के) ऐसा कुछ नहीं होगा आरु क्योंकि मै ये बात अच्छे से जानती हूँ कि चाची तेरे प्रति जो प्यार है , बस वही प्यार उन्हें रोक रहा है , इसीलिए अपने प्यार को और दिखा , ये रिश्ता तब तक बचा रहेगा , क्योंकि ये प्रॉब्लम छोटी नहीं है और अभी तेरी उम्र भी इतनी नहीं और ना तेरे हालात की प्रॉब्लम को तू अकेले खत्म कर सके इसीलिए अभी रुकने में भलाई है और उन्हें अभी कुछ पता नहीं चलने देना की तू सब जनता है , वैसे भी अब तो तू कॉलेज में एडमिशन हॉर्न जा रहा है उसके बाद तेरे कॉलेज शुरू होने वाले है....


आरव – हम्ममम ठीक है दीदी....


अक्कू – चल अब आराम से सोजा , सुबह यहां किसी के आते ही मै जाके घर में पिस्टल को रख दूंगी....


आरव को समझा के सुला दिया आकृति ने लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था क्या सच में आरव शांत रह पाएगा इस बारे में रात भर आकृति , सोते हुए आरव को देखते हुए सोचती रही , सुबह होते ही पीहू , अर्चना और परी एक साथ हॉस्पिटल में आरव के कमरे में आए , आते ही जहां अर्चना सभी को चाय देती है पीने के लिए , जिसके बाद....


आकृति – मै चलती हूँ जल्दी ही वापस आती हु मै....


बोल के जाने लगी आकृति कमरे के बाहर तभी....


परी – (आकृति से) अरे आकृति तू घर जा रही है ना रस्ते में मेरा एक काम कर देगी प्लीज़....


अक्कू – हा बताइए चाची....


परी – रुक मेरी गाड़ी में कुछ सामान पड़ा है उसे लेके जा (अर्चना से) मै अभी आती हु...


बोल के परी कमरे से निकल गई आकृति को लेके , चलते हुए परी हॉस्पिटल के बाहर पार्किंग में आ गई आकृति को लेके , अपनी कार में बैठ गई साथ में आकृति भी तब....


आकृति – क्या समान ले जाना है चाची....


परी – अक्कू मुझे , तुझेसे जरूरी बात करनी है....


अक्कू – बात क्या है चाची....


परी – (बिना आकृति को देखे) आरु ने बता दिया होगा तुझे मेरे और रवि के बारे में....


अक्कू – (चौक के) आपको कैसे पता....


परी – आरु ने ये भी बताया होगा , उसके एक्सिडेंट वाले दिन ही उसने मुझे और रवि को एक साथ देखा था घर में....


आकृति – (परी को गौर से देखते हुए) जब सब कुछ पता है आपको उसके बाद भी आपने एक बार भी नहीं सोचा आरु के बारे में और तेज चाचू के बारे में , उन्हें पता चला तो क्या होगा , क्या बीतेगी उनपर , मुझे तो यकीन नहीं हो रहा क्योंकि कल मैने पहली बार उस आरु को देखा जो अन्दर ही अन्दर टूटता जा रहा है , जानती है क्यों , क्योंकि वो अपनी मोम के इस कड़वे सच को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा है , अरे आरु ही क्या मुझे भी यकीन नहीं हुआ जब मुझे ये बात बताई आरु ने , Why Chachi , why did you do that , ऐसी क्या कमी रह गई जो आपने ये रास्ता चुना , बोलिए चाची.....


परी – ये सच है अक्कू , मैने बहुत बड़ी गलती की , लेकिन ये पूरा सच नहीं है अक्कू....


अक्कू – क्या मतलब है आपका और कौन सा राज छुपाया है आपने....


परी – कल मैने तेज को सारी बात बता दी अपने बारे में....


अक्कू – (चौक के) क्या , फिर क्या कहा चाचू ने....


परी – (फिर तेज से हुई सारी बात बताती है साथ में ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ सारी बाते बताने के बाद) लेकिन असली बात नहीं बताई मैने तेज को....


अक्कू – असली बात , कौन सी असली बात नहीं बताई....


परी – रवि , मै और सोनल कॉलेज के वक्त से अच्छे दोस्त रहे है , लेकिन जब तेज का एक्सीडेंट हुआ उसके बाद मैं किसी तरह अपने आप को सम्भाल रखा था लेकिन सोनल ने मेरी इस कमजोरी का फायदा उठाया , सोनल ही जानभुज के रवि को मेरे करीब लाई , मेरी कमजोरी की बातें करते हुए सोनल ने अपना वकील वाला खेल खेला जैसा वो खेलती आई है सबके साथ , उसकी बातों ने मेरा माइंड ऐसा वाश किया कि एक दिन मै रवि के साथ अपनी सीमा लांघ गई....


अक्कू – लेकिन सोनल को आपके साथ ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी....


परी – यही तो सोनल का असली मकसद था , क्योंकि रवि मेहता सिर्फ दौलत का लालची इंसान है साथ में सोनल भी , मेरी दौलत के खातिर ही उन दोनों ने मेरे साथ ये खेल खेला ताकि मैं रवि की हो जाऊ जिससे मेरी प्रॉपर्टी भी रवि की हो जाएगी....


अक्कू – दौलत के वजह से इतना गंदा खेल खेला आपके साथ लेकिन जहां तक मुझे पता है , आरु के नाम है प्रॉपर्टी तो....


परी – हा लेकिन तुझे शायद आरु के दादा की प्रॉपर्टी के बारे में नहीं पता है , उनकी सारी प्रॉपर्टी जिसकी कीमत लगभग दो सौ करोड़ है वो भी आरु के नाम है , ये बात रवि और सोनल को पता है , और ये भी की मै आरु के लिए कितना मायने रखती हूँ , इसीलिए रवि चाहता है मै उसकी हो जाऊं , क्योंकि वो जानता है मेरे और आरु के बारे में इसीलिए....


अक्कू – हम्ममम , जब आपको जानकारी है उन दोनों के इरादों के बारे में फिर आप उनके साथ क्यों हो अभी तक....


परी – अक्कू दो दिन पहले तक मै अंजान थी इस सच से फिर मुझे सच का पता चला , लेकिन अक्कू जितना तू समझ रही है , ये उतना आसान नहीं है , रवि मेहता कहने को बिजनेस मैन है लेकिन उसका इसके इलाव भी और भी बिजनेस है , स्मगलिंग का , ड्रग्स का जो वो अपने जीजा के साथ करता है , रही सोनल की बात , सोनल तलवार पेशे से वकील है लेकिन आज भी उसके काफी हैवी कॉन्टैक और सपोर्टर्स है , अगर मैने अब डायरेक्टली कुछ किया तो हो सकता है शायद मुझे नुकसान हो जाएं....


अक्कू – नुकसान कैसा नुकसान....


परी – जैसे अभी आरु के लिए मै गलत हो गई और क्या पता रवि फिर से कुछ ऐसा ना कर दे कही (बोल के परी चुप हो गई क्योंकि उसे बीते दिन याद आ गए जिसके बाद) नहीं नहीं अक्कू मै ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी अब....


अक्कू – (परी की बात सुन के) क्या बात है चाची क्या हुआ था बताए मुझे....


परी – (बात बदलते हुए) वो सब जाने दे अक्कू , मुझे सिर्फ तुझपे भरोसा है इसीलिए मुझे तेरी मदद चाहिए , वैसे भी अब तूने तो RAW ज्वाइन कर ली है तो तेरे लिए आसान है मेरी मदद करना....


अक्कू – (जल्दी बाजी में) वो सब ठीक है चाची लेकीन (कुछ सेकंड चुप हो गई फिर) एक मिनट आपको कैसे पता मैने RAW को ज्वाइन किया है ये बात तों चाचू और आरु के सिवा कोई नहीं जानता है....


परी – वो मै तुझे अभी नहीं बता सकती हूँ अक्कू , अभी तू मुझे इतना बता तू आरु के लिए क्या कर सकती है....


अक्कू – (परी की बात सुन) किसी की जान लेने से पहले और अपनी जान देने से पहले मै सोचूंगी नहीं चाची , मै आरु के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ....


परी – ठीक है अगले महीने तेज अपने सारे शेयर आरु के नाम करने वाला है....


अक्कू – अगले महीने मतलब आरु के जनम दिन में....


परी – हा अक्कू और मै चाहती हूँ तू हमारा बिजनेस ज्वाइन करे , ताकि रवि और सोनल को अच्छे से सबक सिखा के , दोनों को उनके असली अंजाम तक पहुंचा सके , ताकि कही के नहीं रहे दोनों बहुत जुर्म किए है दोनों ने जिसका पता किसी को नहीं है आज तक....


अक्कू – ये काम तो मै बिना बिजनेस ज्वाइन किए भी कर सकती हूँ चाची उसके लिए इतना इन्तजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी , दोनों की जेल में ऐसी हालत करवा दूंगी कि....


परी – (बीच में) नहीं अक्कू इतना वक्त इसीलिए लगेगा क्योंकि उतने वक्त में मुझे महक को सेफ करना है....


अक्कू – महक कौन है....


परी – रवि की बेटी है महक अभी छोटी है वो , उसके १८ साल होने पर उसकी मां की प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी तब तक के लिए , मै ऐसा कुछ नहीं करना चाहती कि उस छोटी बच्ची की जिंदगी खराब हो जाए , जैसे रवि ने उसकी मां की की थी....


अक्कू – महक की मा के साथ क्या किया था रवि ने....


परी – रवि ने करोड़ो की दौलत के खातिर शादी की थी महक की मा से रवि ने लेकिन जब उसे पता चला रवि की हरकतो का तो उसने सारी प्रॉपर्टी महक के नाम कर दी , और रवि को उसका केयर टेकर बना दिया , इसीलिए रवि अब तक महक को पाल रहा है ताकि उसके १८ साल के होते ही वो सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सके महक की....


अक्कू – और अगर प्रॉपर्टी रवि के नाम हो गई फिर....


परी – क्या पता वो महक को भी उसकी मां की तरह.....


बोल के चुप हो गई परी जिसे समझ के....


अक्कू – इसका मतलब रवि ने ही अपनी बीवी को मारा है....


परी – इस बात की पक्की जानकारी किसी को नहीं है , कुछ कहते है बीमारी के कारण मर गई तो कुछ का मानना यही है कि प्रॉपर्टी की वजह से रवि ने मार दिया उसे , अक्कू मैने जितनी भी बात कही तुझसे , इस बात का मेरे पास कोई सुबूत नहीं है....


अक्कू – हम्मम , ये रवि तो काफी कमीना किस्म का लगता है , लेकिन चाची जब आपके पास सुबूत नहीं है फिर आपको कैसे पता इतना सब कुछ इन सब के बारे में.....


परी – (मन में – अब तुझ कैसे बताऊं अक्कू मै इतना सब कैसे जानती हूँ , ये बात मै चाह के भी नहीं बता सकती किसी को भी) , मुझे कुछ लोगों से सुनने को मिली ये सब बाते , अब तू बता क्या मेरी मदद करेगी.....


अक्कू – हा मै करूंगी मदद लेकिन बदले में आपको भी बताना पड़ेगा कि आपको ये सारी बाते कैसे पता चली है....


परी – अक्कू तुझे आरु की कसम है , हमने जितनी बात की है अभी , ये सारी बाते गलती से भी किसी से मत बोलना तुम , मै इसबार किसी को भी खोना नहीं चाहती हूँ , और इसके लिए मुझे सिर्फ तुझ पर भरोसा है , रही बात मुझे कैसे पता तो सही वक्त पर मै बात बता दूंगी , तब तक इस बारे में किसी से क्या मुझसे कोई बात मत करना....


अक्कू – ठीक है चाची मै आपके साथ हूँ , आप जब कहेगी बिजनेस ज्वाइन करने के लिए मै तैयार मिलूंगी , लेकिन तब तक आरु को हैंडल कैसे करना है कुछ सोचा है आपने....


परी – सही मौका देख मै बात करूंगी आरु से....


अक्कू – ठीक है चाची मै घर जा रही हु , बाद में मिलती हु....


बोल के आकृति निकल गई रस्ते में....


अक्कू – (अपने मन में – चाची ने बोला , इसबार , अब इस बात से क्या मतलब है , चाची कुछ तो छुपा रही है मुझसे , लेकिन क्या , पता लगाना पड़ेगा मुझे)


अक्कू के जाते ही परी किसी को फोन मिलाने लगी....


सामने से – (फोन पर) Good Morning Pari Mam कैसी है आप....


परी – (फोन पर) Good Morning रोहित , मै अच्छी हूँ , तुम कैसे हो....


रोहित – जी मै भी अच्छा हूँ मैंम , अब आरव कैसे है मैडम....


परी – तबियत में अब थोड़ा सुधार हो रहा है उसके , टाइम निकाल के आओ मिलने आरव से , तुमसे मिल के खुश हो जाएगा वो....


रोहित – जी मैडम मै मौका निकाल के आता हु मिलने....


परी – रोहित मौका मत निकालो , फाइल में सिग्नेचर के बहाने तुम हॉस्पिटल में आ जाओ मुझे तुमसे जरूरी काम है....


रोहित – सब ठीक है ना मैडम....


परी – हा सब ठीक है रोहित , तुम मिलने आओ फिर आराम से बात करते है हम....


रोहित – ठीक है मैडम मैं आज ही आता हु आपसे मिलने....


बोल के दोनों ने फोन काट दिया जिसके बाद परी चली गई आरव के पास उसके कमरे में जहां सबकी बातों का सिलसिला चलता रहा कुछ समय बाद आकृति आगई और तेज भी ओर कुछ देर बाद रोहित भी आ गया....


रोहित – (कमरे में आते ही) हेलो परी मेम, हेलो ऑल....


परी – आओ रोहित कैसे हो तुम....


रोहित – मै अच्छा हूँ मेम....


रोहित – (आरव से) हेलो आरव सर अब कैसे है आप....


आरव – मैं ठीक हूँ भईया, और आप मुझे सर मत बोला करिए सिर्फ नाम से बुलाया करो , आप मेरे बड़े भाई की तरह हो....


रोहित – (मुस्कुरा के) ठीक है आरव (लक्की से) और लक्की द रेसर कैसे हो तुम....


लक्की – (मुस्कुरा के) अच्छा हूँ भईया , लेकिन आपको ये नाम किसने बताया....


रोहित – (हस्ते हुए) ऑफिस में जब आपको डाट पड़ रही थी (आरव से) वैसे आरव सेम मुझे बता रहा था कि तुम सब एक नए स्टंट की तैयारी कर रहे हो कुछ नाम भी बताया था उसने मुझे , जाने क्या बातया था नाम....


रोहित की बात से लक्की की हवा टाइट हो गई स्टंट के बारे में सुन के लेकिन तभी....


आरव – (जल्दी बाजी में) वो हवा में मेरा SUPERMAN जैसे उड़ने वाला स्टंट उसकी अभी तो.....


बोल के आरव चुप हो गया क्योंकि बोलते वक्त आरव ने देखा कि परी , तेज और आकृति घूर के उसे देख रहे थे आरव को तब....


आकृति – (आरव से) हा हा बोलो ना क्या बोल रहे थे स्टंट के बारे में उसकी अभी क्या आगे बोलो....


आरव – (बात बदलते हुए रोहित से) भईया मैने छोड़ दिया वो सब स्टंट करना , अब नहीं करता हूँ मै....


आकृति – (आरव से) अच्छी बात है वरना मै तुझे अभी अपना असली स्टंट दिखाती....


आकृति की बात सुन आरव का मू बंद हो गया जिसे देख सभी हंसने लगे तब....


तेज – और बताओ रोहित काम कैसा चल रहा है ऑफिस में....


रोहित – ठीक है सर सब नॉर्मली चल रहा है बिजनेस....


तेज – हम्ममम सही है....


परी – सुनैना कैसी है रोहित.....


रोहित – अच्छी है वो भी मेम , मैने सुना आप अब ऑफिस का काम घर से करेगी.....


परी – हा रोहित जब तक आरु पूरी तरह ठीक नहीं जो जाता तब तक ऑफिस का सारा काम घर से करूंगी....


रोहित – अच्छी बात है मेंम , खैर मैं ये फाइल लेके आया था इसमें आपके सिग्नेचर की जरूरत है....


परी – हम्ममम ठीक है , अच्छा सुनो मेरी कार में एक फाइल रखी है उसे ऑफिस लेके जाना काम की है....


रोहित – ठीक है मेंम....


परी – आओ मैं फाइल देती हूं तुम्हे....


बोल के दोनों कमरे में बाहर आ जाते है पार्किंग में आके....


परी – (रोहित से) मेरा एक काम करोगे रोहित....


रोहित – हा मेंम इसमें पूछने की क्या जरूरत है आप हुकुम करे....


परी – रोहित ये थोड़ा पर्सनल काम है , मैं चाहती हूँ इसके बारे में किसी को भी पता ना चले....


रोहित – Don't Worry mam किसी को पता नहीं चलेगा....


परी – रोहित मुझे रवि के सभी अकाउंट्स की डिटेल चाहिए , पर्सनल की भी साथ में सोनल तलवार के भी....


रोहित – मेंम आप रवि और सोनल की जासूसी करवाना चाहती है....


परी – तुमने सही समझा रोहित , क्या मै भरोसा कर सकती हूँ तुमपे....


रोहित – मेंम आज मैं जो कुछ भी हु सिर्फ आपकी वजह से हु , आपकी वजह से आज मैं एक अच्छी पोजीशन पर हूँ , भरोसा रखिए आपका ये काम हो जाएगा आप निश्चित रहे मेंम , लेकिन आप अचानक से ऐसा क्यों चाहती है सब ठीक तो है ना मेंम....


परी – सब ठीक तो नहीं कह सकती हु रोहित , हा कुछ शक जरूर है मुझे रवि और सोनल के काम पर इसीलिए मैं उनकी सारी डिटेल्स चाहती हूँ हर तरह की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी....


रोहित – ठीक है मेंम मैं कुछ लोगों को जानता हु जो ये काम आसानी से कर सकते है....


परी – ठीक है रोहित जितनी जल्दी होसके मुझे रिपोर्ट करना पर्सनली ओके....


रोहित – ठीक है मेंम....


बोल के दोनों निकल गए अपने काम पे खेर यहां तक तो परी ने तैयारी कर ली अपने हिसाब से आगे के लिए लेकिन आगे क्या और कैसे होगा , क्या परी के मुताबिक होगा सब या फिर कुछ और जल्द जाने को मिलेगा खेर अब जरा चलते है साहिल की तरफ.....


अब थोड़ा आगे बढ़ते है कहानी में....


आज साहिल को घर आए पांच दिन बीत चुके है इन पांच दिनों में साहिल ने किसी से जायद बात चित नहीं की लेकिन सुमन , नेहा , अवनी , खुशी , सुनैना साथ में रीना ने कोशिश जरूर की लेकिन रिस्पॉन्स खास नहीं मिला किसी को भी , हा लेकिन रिकी ने बहुत मजा किया साहिल के साथ कभी गेम खेल के कभी बाते करके रिकी और साहिल का वक्त अच्छा बीता साथ में , दोनों की अच्छी बनने लगी इस बीच रनवीर जो बाहर गया था वो वापस आ गया , घर में और अब सुनंदा को भी कमरा मिल गया रहने के लिए साहिल के बगल में और सेमेंथा का आप सब जानते ही है उसे सिर्फ साहिल के सिवा कोई नहीं देख सुन सकता था और साथ में सुनंदा भी बस साहिल को पता नहीं सुनंदा के लिए खेर इस वक्त दोपहर का वक्त सब मिल के खाना खा रहे थे घर में तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया जिसे सुन लता ने दरवाजा खोला तो....


लता – (खुशी से) अरे सुनीता दीदी आ गए आप , कैसी हो आप....


सुनीता – बहुत अच्छी हूँ.....


पायल और शबनम – (लता से) हम भी है यहां पर दीदी हमसे नहीं मिलोगे आप....


लता – (मुस्कुरा के) तुम दोनों को कैसे भूल सकती हूँ मै....


इसके साथ तीनों अन्दर आने लगे तब....


लता – (कमल को उनके साथ देख) आप कौन....


शबनम – लता दीदी ये भाई है हमारा , कमल नाम है इनका....


कमल – नमस्ते दीदी....



लता – नमस्ते....


खेर लता जानती थी इस बारे में जिसे दादी ने बताया था लेकिन साहिल के सामने बोलने को मना किया था इसीलिए अंजान बन गई थी लता , खेर बोल के चारों अन्दर आगए जहां सब मिले एक दूसरे से फिर सभी बैठ एक साथ खाना खाने लगे तब....


साहिल – (कमल से) मिल गई फुर्सत तुझे आने की....


कमल – हा यार अब नाराज क्यों हो रहा है आ गया न तेरे पास अब साथ में रहेंगे पहले की तरह....


साहिल – पहले की तरह , तुझे देख के लगता तो नहीं है ऐसा....


कमल – (मुस्कुराते हुए) विश्वास नहीं देख लेना फिर....


शबनम – वैसे साहिल भइया सच में कमल भईया बहुत कमाल के है , इन कुछ दिनों में बोर नहीं होने दिया उन्होंने हमें और शहर में ऐसी जगह घुमाया हमें जहां हम आज तक गए नहीं थे....


पायल – और नहीं तो क्या हमे तो पता ही नहीं चला पांच दिन कैसे बीत गए कमल के साथ....


साहिल – (कमल को देख के) ओह बहुत अच्छी बात है ये तो क्यों कमल....


पायल और शबनम ने जल्द बाजी में बोल तो दिया तभी सुनीता ने बीच में आंख दिखाई पायल और शबनम को जिसे दोनों देख समझ गए कि दोनों ने जल्द बाजी में साहिल का ध्यान नहीं दिया , लेकिन अब देर जो हो गई थी तब तक साहिल ने सब सुन लिया था....


(नोट – कमल दादी के कहने पर साहिल से झूठ बोल के गया था सुनीत के घर में क्योंकि सुनीता ने ही कमल को बचपन में गोद लिया था जिसके बारे में कमल को गांव में पता चला था लेकिन ये बात साहिल नहीं जानता है उसे कमल ने झूठ बोला था डिग्री का बहाना बना के गया था सुनीत के साथ उसके घर में)....


इनकी बातों के बीच में साहिल ने कुछ नहीं बोला नॉर्मल बिहेव करता रहा जिससे सभी को लगा कि साहिल ने ध्यान नहीं दिया उनकी बात का , लेकिन इस बीच एक शख्स था जो कमल को गोर से देखे जा रहा था लेकिन उसने कुछ बोल नहीं , खेर खाने के बाद सब कमरे में जाने लगे कमल भी साहिल के साथ जा रहा था तब....


कमल – (साहिल से) तू कमरे में चल मै अपना बैग लेके आता हु , शायद लता दीदी ने सुनीत बुआ के कमरे में रख दिया है....


साहिल – ठीक है जल्दी आ तुझसे जरूरी बात करनी है....


फिर कमल जाता है सुनीता के कमरे में जहां....


सुनीता – (कमल से) आ गया तू , वो पायल और शबनम अनजाने में ज्यादा बोल गई साहिल के सामने , उसने तुझे कुछ बोला तो नहीं....


कमल – आप घबराओ मत ऐसा कुछ नहीं हुआ है बाकी मै देख लूंगा , अच्छा मेरा बैग कहा है उसे लेने आया हूँ....


सुनीता – क्या करेगा बैग लेके बाद में तुझे यही आना है....


कमल – हा जनता हूँ लेकिन बैग में साहिल के लिए समान है उसे देना है ना , मै रात में मिलता हु आपसे ठीक है....


सुनीता – (मुस्कुरा के) हम्ममम ठीक है , जल्दी आना भूलना मत....


बोल के कमल निकल गया साहिल के कमरे की तरफ बीच में....


सुनंदा – (कमल को बाहर से जाता देख उसे रोक के) सुनो....


कमल – जी आपने मुझे बुलाया....


सुनंदा – हा , तुम वही कमल हो ना साहिल के बचपन के दोस्त....


कमल – जी मै ही हूँ , लेकिन आप कौन....


सुनंदा – मेरा नाम सुनंदा है , अच्छा कमल एक छोटा सा काम था कर दोगे प्लीज़ ज़्यादा वक्त नहीं लूंगी तुम्हारा....


कमल – हा बताइए क्या काम है....


सुनंदा – वो कमरे में अलमारी खुल नहीं रही है प्लीज़ उसे खोल दोगे.....


कमल – हा जरूर बताए कहा है अलमारी....


बोल के कमल कमरे में आता है सुनंदा के जिसके बाद पीछे से सुनंदा दरवाजा लॉक कर देती है तभी कमल जैसे ही पीछे मुड़ता है तभी सुनंदा गुस्से में अपने हाथ से कमल की गर्दन पकड़ दीवार से लगा के उसे ऊपर उठा देती है तब....


सुनंदा – (गुस्से में) कौन है तू और क्यों आया है यहां साहिल के पीछे , बता क्या मकसद है तेरा.....


कमल – (दर्द में धीरे से) मै दोस्त हूँ साहिल का , छोड़ो मुझे....


सुनंदा – (गुस्से में) दोस्त और तू साहिल का किसे बेवकूफ बना रहा है , तुझे देखते ही मै समझ गई थी , तू इंसान के शरीर में एक डेविल है....
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जारी रहेग✍️✍️
Suprb apdet Bhai
 

parkas

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UPDATE 26



हॉस्पिटल के एक कमरे के अन्दर दरवाजा खुलता है तब आरव अपने सामने अक्कू को देखता वैसे उसकी सास थम सी जाती है तब....


अक्कू – हे भगवान ये तुझे क्या हुआ आरव मेरी जान....


बोलते हुए आरव के पास जाके उसके गाल चूम लेती है तभी पीहू जो आरव के बगल में खड़ी थी , ये नजारा देख चौक जाती है , गुस्से में अक्कू को देखने लगती है तब....


अक्कू – (आरव के गाल में हाथ फेर के) मेरे प्यारे बाबू मैने बोला था ना तुम्हे , मुझसे अलग मत हो और देखा , मैं क्या गई और तेरा ये हॉल जो गया , लेकिन अब मैं अपने सोने बाबू को छोड़ के कही नहीं जाऊंगी....


बोल के आरव के गाल को चार , पांच बार चूम लेती है और फिर धीरे से आरव को होठों को चूमती है , फिर क्या था ये नजारा देख पीहू के सबर का बांध जैसे टूर जाता है मन ही मन अक्कू को गालियां देने लगती है , ये नजारा आरव देख लेता है तभी आरव कुछ बोलने को होता है लेकिन अक्कू अपनी आंखें दिखाती है आरव को जैसे कह रही हो एक शब्द मत बोलना समझे , लेकिन जलन और गुस्से में भरी पीहू बोल पड़ती है....


पीहू – हेलो मैडम आपको थोड़ी भी तमीज है की नहीं ये हॉस्पिटल है घर नहीं जो आप पेशेंट को परेशान कारने आ गई....


अक्कू – (पीहू को देख के बोली) कौन हो तुम और किस हक से मेरे और आरु बीच में बोल रही हो , जब मेरे आरु को दिक्कत नहीं तो तुम इतना क्यों उछल रही हो , ओह शायद तुम नर्स हो यहां पर , खेर अब तुम बाहर जाओ मै अपने आरु का ख्याल रख सकती हो , मुझे किसी नर्स की जरूरत नहीं है....


आरव – (अक्कू की बात सुन अपने मन में – अक्कू दी क्यों मुझे मरवाने पे तुली हुई हो अगर पीहू को गुस्सा आ गया कल एक को उड़ाया है आज आपको ना उड़ा दे साथ में मुझे भी)....


इधर आरव अपने मन में बोले जा रहा था लेकिन अक्कू ने एक नजर आरव को देखा अपनी आंखों से चुप रहने का इशारा किया , बेचारा आरव चाह के भी बोलने को हिम्मत नहीं कर पा रहा था तब....


पीहू – (गुस्से में) मै आरव की गर्ल फ्रेंड और साथ में उसकी होने वाली बीवी....


लेकिन बीच में पीहू की बात को काट के अक्कू बोली....


अक्कू – (बीच में) हा वो इसीलिए क्योंकि तब मै यहां नहीं थी , लेकिन अब मैं वापस आ चुकी हूँ और मेरे मना करने के बाद दुनिया में कोई मेरा फैसला नहीं बदल सकता है....


अक्कू के इतना बोलते ही पीहू ने एक नजर आरव को देखा जैसे बोल रही हो चुप क्यों हो बोलो तुम , लेकिन आरव बेचारा आज से पहले अक्कू की बात को नहीं काटा तो आज कैसे करता , और बस आरव ने कुछ ना बोला चुप रहा ये देख पीहू कि आंख से आंसू आने लगे और वो जाने लगी कमरे से बाहर लेकिन तभी कमरे में परी आ गई और पीहू की आंख में आंसू देख....


परी – ए अक्कू तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी पीहू को रुलाने की , आरु तेरा भाई है तो ये तेरी भाभी है और जरा सम्भल कर कल ही एक को टपका दिया है इस हॉस्पिटल में , कही आज तेरा नंबर ना लग जाय....


इतना बोलते ही परी हसन लगी साथ में अक्कू भी हसने लगी फिर चलते हुए पीहू के पास जाके अपने कान पकड़ के....


अक्कू – माफ कर दो भाभी मै बस टांग खींच रहीं थी (आरव के सिर में हल्का सा टपली मार के) क्यों ज्यादा हीरो पंती सवार हो गई है तुझे अपनी दीदी के बारे में भी नहीं सोचा तूने....


आरव – सौरी दीदी आगे से ऐसा नहीं करूंगा प्लीज़ अक्कू दीदी....


आरव का मासूम चेहरा देख के....


अक्कू – (आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) क्या हाल कर दो कमीनो ने मेरे भाई का , कीड़े पड़े कमीनो को जिसने मेरे भाई को ऐसे मारा है....


तभी लक्की कमरे में आता है हस्ते हुए....


लक्की – हा दीदी यही होना चाहिए एसो के साथ....


ऐसे ही सब मिल के हस्ते हुए बाते करने लगते है इस तरह शाम हो जाती है तब अक्कू सबको घर भेज देती है क्योंकि पीछे तीन दिन से यही पर थे , परी जाना नहीं चाहती थी , लेकिन वो जानती थी कि आरु आज अक्कू से बात करेगा की उसे सारी बात बताएगा जरूर , तो परी ने कल अक्कू से अकेले में बात करने का सोच के चली जाती है घर में , सबके जाने के बाद कमरे में काफी देर तक शांति रहती है , काफी देर तक अक्कू लगातार आरव को देख रही थी लेकिन आरव जैसे आज नजरे ज्यादा तर चुरा रहा था तब , आरव बेड से खड़ा हो खिड़की के पास जाके बाहर देखने लगता है जिसे देख....


अक्कू – आरु क्या बात है....


आरव – (बिना अक्कू को देखे) कुछ नहीं दीदी....


अक्कू – तो अब तू मुझसे भी छुपाएगा बात को , बोल न क्या परेशानी है तुझे....


लेकिन आरव कुछ नहीं बोलता है वो जैसे अपने मन में बातों को दबाए रखना चाहता हो ताकि अक्कू के सामने टूट ना जाए....


अक्कू – एग्जाम के बाद तू मंदिर क्या में गया था....


आरव – वो दीदी एग्जाम अच्छा नहीं गया था इसीलिए....


अक्कू – अपने आप को कितना बेवकूफ बनाएगा , बचपन से पढ़ाया है तुझे मैने....


जिसके बाद भी आरव कुछ नहीं बोलता तब....


अक्कू – हम्ममम समझ गई शायद तू अपना नहीं समझता मुझे....


बस यही अक्कू ने अपना इमोशनल ड्रामा खेला जिसके बाद....


आरव – नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है....


अक्कू – (आरव का हाथ अपने सिर में रख के) तो खा मेरी कसम बोल दे यही बात है....


तभी आरव अपना हाथ हटा लेता है जिसके बाद अक्कू आगे आके आरव को अपन गले लगा लेती है...


अक्कू – तू जनता है ना तेरे और मेरे बीच की बात आज तक कोई नहीं जान पाया है , चल बता क्या बात है मै तेरी पूरी मदद करूंगी.....


बस यही आरव के सब्र का बांध टूटते ही रोने लगा गले लग के अक्कू के जिसे देख अक्कू घबरा गई....


अक्कू – (आरव को पानी पिलाते हुए) देख आरु जो भी बात है बता मुझे तुझे इस तरह देख अब मुझे भी डर लग रहा है....


आरव – दीदी मॉम का अफ़सर चल रहा है किसी और के साथ....


बस इतना सुनना था और कमरे में जैसे शांति हो गई अक्कू को जैसे सुनाई नहीं दी बात आरव कि लेकिन फिर आरव की बात उसके माइंड में आई तब....


अक्कू – (चिल्ला के) ये क्या बोल रहा है तू , परी चाची अपने पति को धोखा दे रही है , तू जनता है क्या बोला है तूने अभी.....


आरव – अपने आखिरी एग्जाम के बाद मूवी देखने का प्लान था लेकिन मै सीधे घर गया वहां मैने अपनी आंखों से सब देखा है दीदी....


और फिर जो कुछ हुआ सब बता देता है जिसके बाद अक्कू सोफे पर बैठ जाती है अपने दोनों हाथों को अपने सिर में लगा के कुछ देर बाद अक्कू सिर उठा के आरव की तरफ देखती है....


अक्कू – अब क्या सोचा है तूने....


तभी कमरे का दरवाजा खुलता है सामने SSP खड़ा होता है अपने सामने SSP खड़ा देख चौक जाट है तब....


आरव – (SSP से) सर आप....


SSP – हा बेटा मै असल में रूटीन में निकला था यहां की सिक्योरिटी के लिए , खेर तुम बताओ अब कैसी है तबियत तुम्हारी....


आरव – पहले से अच्छी है सर....


SSP – हम्ममम अच्छी बात है (आकृति से) तुमने आरव को खुशबरी दी....


आकृति – नहीं सर अभी वक्त ही नहीं मिला मुझे....


आरव – कैसी खुशबरी.....


SSP – आकृति RAW में सिलेक्ट हुई है.....


आरव – (खुशी से) सच में अक्कू दी....


अक्कू – हा आरु....


आरव – तब तो पार्टी बनती है दी....


आकृति – हा लेकिन ये बात सीक्रेट है इस बारे में तेज चाचू के सिवा कोई नहीं जानता है , और मै नहीं चाहती ये बात किसी को भी पता चले....


आरव – ठीक है दीदी ये बात सीक्रेट रहेगी....


SSP – आरव मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है....


आरव – हा कहिए सर....


SSP – (पिस्टल आरव के आगे करते हुए) जिस दिन हादसा हुआ उस दिन ये पिस्टल तुम्हारे पास क्या कर रही थी....


SSP के सवाल के बाद आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था लेकिन ये बात अक्कू ने समझने में देर नहीं की तभी....


आकृति – सर उस दिन गलती से आरव ने गन लेली थी और घर से निकलने से पहले उसे वापस रखना भूल गया था....


SSP – (आरव को देखते हुए) मुझे यकीन तो नहीं हो रहा खेर , देखो आरव बेटा वैसे मैने इस बारे में अभी तक किसी को नहीं बताया है और ना ही तुम्हारे पिता को (आरव को गन देते हुए) मैने इसे लोड कर दिया है जितनी जल्दी हो सके इसे इसकी सही जगह पर फौरन पहुंचा दो , और बेटा एक बात , देखो ये तो मै वहां था और तुम्हे जानता भी हूँ इसीलिए ऐसी वैसी कोई बात नहीं हुई वर्ना बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती थी इसीलिए प्लीज़ आरव बेटा अगली बार से ध्यान से....


आरव – सॉरी सर....


SSP – (मुस्कुरा के आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) इट्स ओक बेटा , अपनी लाइफ एंजॉय करो तुम अब....


बोल के....

SSP – (अपने मन में – इस उम्र में बच्चे लाइफ एंजॉय करते है वही आरव अपनी फैमिली को प्रोटेक्ट के लिए तैयार बैठा है , उम्मीद करता हूँ कि तेज और परी इसे सम्भाल लेगे)...


SSP अपने मन में सोचते हुए चला गया कमरे से....


आरव – (अक्कू को गन देते हुए) आप इसे कल सुबह मेरे कमरे के कबर्ड में रख देना इससे पहले डैड को पता चले...


अक्कू – हम्मम ठीक है , देख आरु तू जो भी करेगा मै उसमें तेरे साथ हूँ , पर जो भी करना सोच समझ के करना , देख मैने अपने मां बाप को बचपन में खो दिया था उसके बाद से तेज चाचा और परी चाची ने संभाला मुझे और साथ मिला मुझे तू , तुझे पढ़ाने के साथ अपना बचपन जिया है मैने तेरे साथ , और यही वजह है की मै तेरे दर्द को समझ सकती हूँ....


आरव – दीदी मुझे समझ नहीं आ रहा मै क्या करू उन्हें माफ करूं या सजा दूं , क्योंकि माफ किया तो डैड के साथ धोखा होगा , और सजा , लेकिन कैसे मोम है मेरी उन्हें कैसे दुखी करूं मै....


अक्कू – देख आरु जहां तक मै जानती हु चाची तुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है और शायद यही वो वजह है कि चाची आगे नहीं बढ़ी अभी तक , और अगर तूने तेज चाचू को सब बता दिया तो शायद सब खत्म हो जाए , इसीलिए पहले खुद काबिल बनो उसके बाद इसे हैंडल करेगे हम....


आरव – मुझे डर है कही देर ना हो जाए....


अक्कू – (मुस्कुरा के) ऐसा कुछ नहीं होगा आरु क्योंकि मै ये बात अच्छे से जानती हूँ कि चाची तेरे प्रति जो प्यार है , बस वही प्यार उन्हें रोक रहा है , इसीलिए अपने प्यार को और दिखा , ये रिश्ता तब तक बचा रहेगा , क्योंकि ये प्रॉब्लम छोटी नहीं है और अभी तेरी उम्र भी इतनी नहीं और ना तेरे हालात की प्रॉब्लम को तू अकेले खत्म कर सके इसीलिए अभी रुकने में भलाई है और उन्हें अभी कुछ पता नहीं चलने देना की तू सब जनता है , वैसे भी अब तो तू कॉलेज में एडमिशन हॉर्न जा रहा है उसके बाद तेरे कॉलेज शुरू होने वाले है....


आरव – हम्ममम ठीक है दीदी....


अक्कू – चल अब आराम से सोजा , सुबह यहां किसी के आते ही मै जाके घर में पिस्टल को रख दूंगी....


आरव को समझा के सुला दिया आकृति ने लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था क्या सच में आरव शांत रह पाएगा इस बारे में रात भर आकृति , सोते हुए आरव को देखते हुए सोचती रही , सुबह होते ही पीहू , अर्चना और परी एक साथ हॉस्पिटल में आरव के कमरे में आए , आते ही जहां अर्चना सभी को चाय देती है पीने के लिए , जिसके बाद....


आकृति – मै चलती हूँ जल्दी ही वापस आती हु मै....


बोल के जाने लगी आकृति कमरे के बाहर तभी....


परी – (आकृति से) अरे आकृति तू घर जा रही है ना रस्ते में मेरा एक काम कर देगी प्लीज़....


अक्कू – हा बताइए चाची....


परी – रुक मेरी गाड़ी में कुछ सामान पड़ा है उसे लेके जा (अर्चना से) मै अभी आती हु...


बोल के परी कमरे से निकल गई आकृति को लेके , चलते हुए परी हॉस्पिटल के बाहर पार्किंग में आ गई आकृति को लेके , अपनी कार में बैठ गई साथ में आकृति भी तब....


आकृति – क्या समान ले जाना है चाची....


परी – अक्कू मुझे , तुझेसे जरूरी बात करनी है....


अक्कू – बात क्या है चाची....


परी – (बिना आकृति को देखे) आरु ने बता दिया होगा तुझे मेरे और रवि के बारे में....


अक्कू – (चौक के) आपको कैसे पता....


परी – आरु ने ये भी बताया होगा , उसके एक्सिडेंट वाले दिन ही उसने मुझे और रवि को एक साथ देखा था घर में....


आकृति – (परी को गौर से देखते हुए) जब सब कुछ पता है आपको उसके बाद भी आपने एक बार भी नहीं सोचा आरु के बारे में और तेज चाचू के बारे में , उन्हें पता चला तो क्या होगा , क्या बीतेगी उनपर , मुझे तो यकीन नहीं हो रहा क्योंकि कल मैने पहली बार उस आरु को देखा जो अन्दर ही अन्दर टूटता जा रहा है , जानती है क्यों , क्योंकि वो अपनी मोम के इस कड़वे सच को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा है , अरे आरु ही क्या मुझे भी यकीन नहीं हुआ जब मुझे ये बात बताई आरु ने , Why Chachi , why did you do that , ऐसी क्या कमी रह गई जो आपने ये रास्ता चुना , बोलिए चाची.....


परी – ये सच है अक्कू , मैने बहुत बड़ी गलती की , लेकिन ये पूरा सच नहीं है अक्कू....


अक्कू – क्या मतलब है आपका और कौन सा राज छुपाया है आपने....


परी – कल मैने तेज को सारी बात बता दी अपने बारे में....


अक्कू – (चौक के) क्या , फिर क्या कहा चाचू ने....


परी – (फिर तेज से हुई सारी बात बताती है साथ में ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ सारी बाते बताने के बाद) लेकिन असली बात नहीं बताई मैने तेज को....


अक्कू – असली बात , कौन सी असली बात नहीं बताई....


परी – रवि , मै और सोनल कॉलेज के वक्त से अच्छे दोस्त रहे है , लेकिन जब तेज का एक्सीडेंट हुआ उसके बाद मैं किसी तरह अपने आप को सम्भाल रखा था लेकिन सोनल ने मेरी इस कमजोरी का फायदा उठाया , सोनल ही जानभुज के रवि को मेरे करीब लाई , मेरी कमजोरी की बातें करते हुए सोनल ने अपना वकील वाला खेल खेला जैसा वो खेलती आई है सबके साथ , उसकी बातों ने मेरा माइंड ऐसा वाश किया कि एक दिन मै रवि के साथ अपनी सीमा लांघ गई....


अक्कू – लेकिन सोनल को आपके साथ ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी....


परी – यही तो सोनल का असली मकसद था , क्योंकि रवि मेहता सिर्फ दौलत का लालची इंसान है साथ में सोनल भी , मेरी दौलत के खातिर ही उन दोनों ने मेरे साथ ये खेल खेला ताकि मैं रवि की हो जाऊ जिससे मेरी प्रॉपर्टी भी रवि की हो जाएगी....


अक्कू – दौलत के वजह से इतना गंदा खेल खेला आपके साथ लेकिन जहां तक मुझे पता है , आरु के नाम है प्रॉपर्टी तो....


परी – हा लेकिन तुझे शायद आरु के दादा की प्रॉपर्टी के बारे में नहीं पता है , उनकी सारी प्रॉपर्टी जिसकी कीमत लगभग दो सौ करोड़ है वो भी आरु के नाम है , ये बात रवि और सोनल को पता है , और ये भी की मै आरु के लिए कितना मायने रखती हूँ , इसीलिए रवि चाहता है मै उसकी हो जाऊं , क्योंकि वो जानता है मेरे और आरु के बारे में इसीलिए....


अक्कू – हम्ममम , जब आपको जानकारी है उन दोनों के इरादों के बारे में फिर आप उनके साथ क्यों हो अभी तक....


परी – अक्कू दो दिन पहले तक मै अंजान थी इस सच से फिर मुझे सच का पता चला , लेकिन अक्कू जितना तू समझ रही है , ये उतना आसान नहीं है , रवि मेहता कहने को बिजनेस मैन है लेकिन उसका इसके इलाव भी और भी बिजनेस है , स्मगलिंग का , ड्रग्स का जो वो अपने जीजा के साथ करता है , रही सोनल की बात , सोनल तलवार पेशे से वकील है लेकिन आज भी उसके काफी हैवी कॉन्टैक और सपोर्टर्स है , अगर मैने अब डायरेक्टली कुछ किया तो हो सकता है शायद मुझे नुकसान हो जाएं....


अक्कू – नुकसान कैसा नुकसान....


परी – जैसे अभी आरु के लिए मै गलत हो गई और क्या पता रवि फिर से कुछ ऐसा ना कर दे कही (बोल के परी चुप हो गई क्योंकि उसे बीते दिन याद आ गए जिसके बाद) नहीं नहीं अक्कू मै ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी अब....


अक्कू – (परी की बात सुन के) क्या बात है चाची क्या हुआ था बताए मुझे....


परी – (बात बदलते हुए) वो सब जाने दे अक्कू , मुझे सिर्फ तुझपे भरोसा है इसीलिए मुझे तेरी मदद चाहिए , वैसे भी अब तूने तो RAW ज्वाइन कर ली है तो तेरे लिए आसान है मेरी मदद करना....


अक्कू – (जल्दी बाजी में) वो सब ठीक है चाची लेकीन (कुछ सेकंड चुप हो गई फिर) एक मिनट आपको कैसे पता मैने RAW को ज्वाइन किया है ये बात तों चाचू और आरु के सिवा कोई नहीं जानता है....


परी – वो मै तुझे अभी नहीं बता सकती हूँ अक्कू , अभी तू मुझे इतना बता तू आरु के लिए क्या कर सकती है....


अक्कू – (परी की बात सुन) किसी की जान लेने से पहले और अपनी जान देने से पहले मै सोचूंगी नहीं चाची , मै आरु के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ....


परी – ठीक है अगले महीने तेज अपने सारे शेयर आरु के नाम करने वाला है....


अक्कू – अगले महीने मतलब आरु के जनम दिन में....


परी – हा अक्कू और मै चाहती हूँ तू हमारा बिजनेस ज्वाइन करे , ताकि रवि और सोनल को अच्छे से सबक सिखा के , दोनों को उनके असली अंजाम तक पहुंचा सके , ताकि कही के नहीं रहे दोनों बहुत जुर्म किए है दोनों ने जिसका पता किसी को नहीं है आज तक....


अक्कू – ये काम तो मै बिना बिजनेस ज्वाइन किए भी कर सकती हूँ चाची उसके लिए इतना इन्तजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी , दोनों की जेल में ऐसी हालत करवा दूंगी कि....


परी – (बीच में) नहीं अक्कू इतना वक्त इसीलिए लगेगा क्योंकि उतने वक्त में मुझे महक को सेफ करना है....


अक्कू – महक कौन है....


परी – रवि की बेटी है महक अभी छोटी है वो , उसके १८ साल होने पर उसकी मां की प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी तब तक के लिए , मै ऐसा कुछ नहीं करना चाहती कि उस छोटी बच्ची की जिंदगी खराब हो जाए , जैसे रवि ने उसकी मां की की थी....


अक्कू – महक की मा के साथ क्या किया था रवि ने....


परी – रवि ने करोड़ो की दौलत के खातिर शादी की थी महक की मा से रवि ने लेकिन जब उसे पता चला रवि की हरकतो का तो उसने सारी प्रॉपर्टी महक के नाम कर दी , और रवि को उसका केयर टेकर बना दिया , इसीलिए रवि अब तक महक को पाल रहा है ताकि उसके १८ साल के होते ही वो सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सके महक की....


अक्कू – और अगर प्रॉपर्टी रवि के नाम हो गई फिर....


परी – क्या पता वो महक को भी उसकी मां की तरह.....


बोल के चुप हो गई परी जिसे समझ के....


अक्कू – इसका मतलब रवि ने ही अपनी बीवी को मारा है....


परी – इस बात की पक्की जानकारी किसी को नहीं है , कुछ कहते है बीमारी के कारण मर गई तो कुछ का मानना यही है कि प्रॉपर्टी की वजह से रवि ने मार दिया उसे , अक्कू मैने जितनी भी बात कही तुझसे , इस बात का मेरे पास कोई सुबूत नहीं है....


अक्कू – हम्मम , ये रवि तो काफी कमीना किस्म का लगता है , लेकिन चाची जब आपके पास सुबूत नहीं है फिर आपको कैसे पता इतना सब कुछ इन सब के बारे में.....


परी – (मन में – अब तुझ कैसे बताऊं अक्कू मै इतना सब कैसे जानती हूँ , ये बात मै चाह के भी नहीं बता सकती किसी को भी) , मुझे कुछ लोगों से सुनने को मिली ये सब बाते , अब तू बता क्या मेरी मदद करेगी.....


अक्कू – हा मै करूंगी मदद लेकिन बदले में आपको भी बताना पड़ेगा कि आपको ये सारी बाते कैसे पता चली है....


परी – अक्कू तुझे आरु की कसम है , हमने जितनी बात की है अभी , ये सारी बाते गलती से भी किसी से मत बोलना तुम , मै इसबार किसी को भी खोना नहीं चाहती हूँ , और इसके लिए मुझे सिर्फ तुझ पर भरोसा है , रही बात मुझे कैसे पता तो सही वक्त पर मै बात बता दूंगी , तब तक इस बारे में किसी से क्या मुझसे कोई बात मत करना....


अक्कू – ठीक है चाची मै आपके साथ हूँ , आप जब कहेगी बिजनेस ज्वाइन करने के लिए मै तैयार मिलूंगी , लेकिन तब तक आरु को हैंडल कैसे करना है कुछ सोचा है आपने....


परी – सही मौका देख मै बात करूंगी आरु से....


अक्कू – ठीक है चाची मै घर जा रही हु , बाद में मिलती हु....


बोल के आकृति निकल गई रस्ते में....


अक्कू – (अपने मन में – चाची ने बोला , इसबार , अब इस बात से क्या मतलब है , चाची कुछ तो छुपा रही है मुझसे , लेकिन क्या , पता लगाना पड़ेगा मुझे)


अक्कू के जाते ही परी किसी को फोन मिलाने लगी....


सामने से – (फोन पर) Good Morning Pari Mam कैसी है आप....


परी – (फोन पर) Good Morning रोहित , मै अच्छी हूँ , तुम कैसे हो....


रोहित – जी मै भी अच्छा हूँ मैंम , अब आरव कैसे है मैडम....


परी – तबियत में अब थोड़ा सुधार हो रहा है उसके , टाइम निकाल के आओ मिलने आरव से , तुमसे मिल के खुश हो जाएगा वो....


रोहित – जी मैडम मै मौका निकाल के आता हु मिलने....


परी – रोहित मौका मत निकालो , फाइल में सिग्नेचर के बहाने तुम हॉस्पिटल में आ जाओ मुझे तुमसे जरूरी काम है....


रोहित – सब ठीक है ना मैडम....


परी – हा सब ठीक है रोहित , तुम मिलने आओ फिर आराम से बात करते है हम....


रोहित – ठीक है मैडम मैं आज ही आता हु आपसे मिलने....


बोल के दोनों ने फोन काट दिया जिसके बाद परी चली गई आरव के पास उसके कमरे में जहां सबकी बातों का सिलसिला चलता रहा कुछ समय बाद आकृति आगई और तेज भी ओर कुछ देर बाद रोहित भी आ गया....


रोहित – (कमरे में आते ही) हेलो परी मेम, हेलो ऑल....


परी – आओ रोहित कैसे हो तुम....


रोहित – मै अच्छा हूँ मेम....


रोहित – (आरव से) हेलो आरव सर अब कैसे है आप....


आरव – मैं ठीक हूँ भईया, और आप मुझे सर मत बोला करिए सिर्फ नाम से बुलाया करो , आप मेरे बड़े भाई की तरह हो....


रोहित – (मुस्कुरा के) ठीक है आरव (लक्की से) और लक्की द रेसर कैसे हो तुम....


लक्की – (मुस्कुरा के) अच्छा हूँ भईया , लेकिन आपको ये नाम किसने बताया....


रोहित – (हस्ते हुए) ऑफिस में जब आपको डाट पड़ रही थी (आरव से) वैसे आरव सेम मुझे बता रहा था कि तुम सब एक नए स्टंट की तैयारी कर रहे हो कुछ नाम भी बताया था उसने मुझे , जाने क्या बातया था नाम....


रोहित की बात से लक्की की हवा टाइट हो गई स्टंट के बारे में सुन के लेकिन तभी....


आरव – (जल्दी बाजी में) वो हवा में मेरा SUPERMAN जैसे उड़ने वाला स्टंट उसकी अभी तो.....


बोल के आरव चुप हो गया क्योंकि बोलते वक्त आरव ने देखा कि परी , तेज और आकृति घूर के उसे देख रहे थे आरव को तब....


आकृति – (आरव से) हा हा बोलो ना क्या बोल रहे थे स्टंट के बारे में उसकी अभी क्या आगे बोलो....


आरव – (बात बदलते हुए रोहित से) भईया मैने छोड़ दिया वो सब स्टंट करना , अब नहीं करता हूँ मै....


आकृति – (आरव से) अच्छी बात है वरना मै तुझे अभी अपना असली स्टंट दिखाती....


आकृति की बात सुन आरव का मू बंद हो गया जिसे देख सभी हंसने लगे तब....


तेज – और बताओ रोहित काम कैसा चल रहा है ऑफिस में....


रोहित – ठीक है सर सब नॉर्मली चल रहा है बिजनेस....


तेज – हम्ममम सही है....


परी – सुनैना कैसी है रोहित.....


रोहित – अच्छी है वो भी मेम , मैने सुना आप अब ऑफिस का काम घर से करेगी.....


परी – हा रोहित जब तक आरु पूरी तरह ठीक नहीं जो जाता तब तक ऑफिस का सारा काम घर से करूंगी....


रोहित – अच्छी बात है मेंम , खैर मैं ये फाइल लेके आया था इसमें आपके सिग्नेचर की जरूरत है....


परी – हम्ममम ठीक है , अच्छा सुनो मेरी कार में एक फाइल रखी है उसे ऑफिस लेके जाना काम की है....


रोहित – ठीक है मेंम....


परी – आओ मैं फाइल देती हूं तुम्हे....


बोल के दोनों कमरे में बाहर आ जाते है पार्किंग में आके....


परी – (रोहित से) मेरा एक काम करोगे रोहित....


रोहित – हा मेंम इसमें पूछने की क्या जरूरत है आप हुकुम करे....


परी – रोहित ये थोड़ा पर्सनल काम है , मैं चाहती हूँ इसके बारे में किसी को भी पता ना चले....


रोहित – Don't Worry mam किसी को पता नहीं चलेगा....


परी – रोहित मुझे रवि के सभी अकाउंट्स की डिटेल चाहिए , पर्सनल की भी साथ में सोनल तलवार के भी....


रोहित – मेंम आप रवि और सोनल की जासूसी करवाना चाहती है....


परी – तुमने सही समझा रोहित , क्या मै भरोसा कर सकती हूँ तुमपे....


रोहित – मेंम आज मैं जो कुछ भी हु सिर्फ आपकी वजह से हु , आपकी वजह से आज मैं एक अच्छी पोजीशन पर हूँ , भरोसा रखिए आपका ये काम हो जाएगा आप निश्चित रहे मेंम , लेकिन आप अचानक से ऐसा क्यों चाहती है सब ठीक तो है ना मेंम....


परी – सब ठीक तो नहीं कह सकती हु रोहित , हा कुछ शक जरूर है मुझे रवि और सोनल के काम पर इसीलिए मैं उनकी सारी डिटेल्स चाहती हूँ हर तरह की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी....


रोहित – ठीक है मेंम मैं कुछ लोगों को जानता हु जो ये काम आसानी से कर सकते है....


परी – ठीक है रोहित जितनी जल्दी होसके मुझे रिपोर्ट करना पर्सनली ओके....


रोहित – ठीक है मेंम....


बोल के दोनों निकल गए अपने काम पे खेर यहां तक तो परी ने तैयारी कर ली अपने हिसाब से आगे के लिए लेकिन आगे क्या और कैसे होगा , क्या परी के मुताबिक होगा सब या फिर कुछ और जल्द जाने को मिलेगा खेर अब जरा चलते है साहिल की तरफ.....


अब थोड़ा आगे बढ़ते है कहानी में....


आज साहिल को घर आए पांच दिन बीत चुके है इन पांच दिनों में साहिल ने किसी से जायद बात चित नहीं की लेकिन सुमन , नेहा , अवनी , खुशी , सुनैना साथ में रीना ने कोशिश जरूर की लेकिन रिस्पॉन्स खास नहीं मिला किसी को भी , हा लेकिन रिकी ने बहुत मजा किया साहिल के साथ कभी गेम खेल के कभी बाते करके रिकी और साहिल का वक्त अच्छा बीता साथ में , दोनों की अच्छी बनने लगी इस बीच रनवीर जो बाहर गया था वो वापस आ गया , घर में और अब सुनंदा को भी कमरा मिल गया रहने के लिए साहिल के बगल में और सेमेंथा का आप सब जानते ही है उसे सिर्फ साहिल के सिवा कोई नहीं देख सुन सकता था और साथ में सुनंदा भी बस साहिल को पता नहीं सुनंदा के लिए खेर इस वक्त दोपहर का वक्त सब मिल के खाना खा रहे थे घर में तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया जिसे सुन लता ने दरवाजा खोला तो....


लता – (खुशी से) अरे सुनीता दीदी आ गए आप , कैसी हो आप....


सुनीता – बहुत अच्छी हूँ.....


पायल और शबनम – (लता से) हम भी है यहां पर दीदी हमसे नहीं मिलोगे आप....


लता – (मुस्कुरा के) तुम दोनों को कैसे भूल सकती हूँ मै....


इसके साथ तीनों अन्दर आने लगे तब....


लता – (कमल को उनके साथ देख) आप कौन....


शबनम – लता दीदी ये भाई है हमारा , कमल नाम है इनका....


कमल – नमस्ते दीदी....



लता – नमस्ते....


खेर लता जानती थी इस बारे में जिसे दादी ने बताया था लेकिन साहिल के सामने बोलने को मना किया था इसीलिए अंजान बन गई थी लता , खेर बोल के चारों अन्दर आगए जहां सब मिले एक दूसरे से फिर सभी बैठ एक साथ खाना खाने लगे तब....


साहिल – (कमल से) मिल गई फुर्सत तुझे आने की....


कमल – हा यार अब नाराज क्यों हो रहा है आ गया न तेरे पास अब साथ में रहेंगे पहले की तरह....


साहिल – पहले की तरह , तुझे देख के लगता तो नहीं है ऐसा....


कमल – (मुस्कुराते हुए) विश्वास नहीं देख लेना फिर....


शबनम – वैसे साहिल भइया सच में कमल भईया बहुत कमाल के है , इन कुछ दिनों में बोर नहीं होने दिया उन्होंने हमें और शहर में ऐसी जगह घुमाया हमें जहां हम आज तक गए नहीं थे....


पायल – और नहीं तो क्या हमे तो पता ही नहीं चला पांच दिन कैसे बीत गए कमल के साथ....


साहिल – (कमल को देख के) ओह बहुत अच्छी बात है ये तो क्यों कमल....


पायल और शबनम ने जल्द बाजी में बोल तो दिया तभी सुनीता ने बीच में आंख दिखाई पायल और शबनम को जिसे दोनों देख समझ गए कि दोनों ने जल्द बाजी में साहिल का ध्यान नहीं दिया , लेकिन अब देर जो हो गई थी तब तक साहिल ने सब सुन लिया था....


(नोट – कमल दादी के कहने पर साहिल से झूठ बोल के गया था सुनीत के घर में क्योंकि सुनीता ने ही कमल को बचपन में गोद लिया था जिसके बारे में कमल को गांव में पता चला था लेकिन ये बात साहिल नहीं जानता है उसे कमल ने झूठ बोला था डिग्री का बहाना बना के गया था सुनीत के साथ उसके घर में)....


इनकी बातों के बीच में साहिल ने कुछ नहीं बोला नॉर्मल बिहेव करता रहा जिससे सभी को लगा कि साहिल ने ध्यान नहीं दिया उनकी बात का , लेकिन इस बीच एक शख्स था जो कमल को गोर से देखे जा रहा था लेकिन उसने कुछ बोल नहीं , खेर खाने के बाद सब कमरे में जाने लगे कमल भी साहिल के साथ जा रहा था तब....


कमल – (साहिल से) तू कमरे में चल मै अपना बैग लेके आता हु , शायद लता दीदी ने सुनीत बुआ के कमरे में रख दिया है....


साहिल – ठीक है जल्दी आ तुझसे जरूरी बात करनी है....


फिर कमल जाता है सुनीता के कमरे में जहां....


सुनीता – (कमल से) आ गया तू , वो पायल और शबनम अनजाने में ज्यादा बोल गई साहिल के सामने , उसने तुझे कुछ बोला तो नहीं....


कमल – आप घबराओ मत ऐसा कुछ नहीं हुआ है बाकी मै देख लूंगा , अच्छा मेरा बैग कहा है उसे लेने आया हूँ....


सुनीता – क्या करेगा बैग लेके बाद में तुझे यही आना है....


कमल – हा जनता हूँ लेकिन बैग में साहिल के लिए समान है उसे देना है ना , मै रात में मिलता हु आपसे ठीक है....


सुनीता – (मुस्कुरा के) हम्ममम ठीक है , जल्दी आना भूलना मत....


बोल के कमल निकल गया साहिल के कमरे की तरफ बीच में....


सुनंदा – (कमल को बाहर से जाता देख उसे रोक के) सुनो....


कमल – जी आपने मुझे बुलाया....


सुनंदा – हा , तुम वही कमल हो ना साहिल के बचपन के दोस्त....


कमल – जी मै ही हूँ , लेकिन आप कौन....


सुनंदा – मेरा नाम सुनंदा है , अच्छा कमल एक छोटा सा काम था कर दोगे प्लीज़ ज़्यादा वक्त नहीं लूंगी तुम्हारा....


कमल – हा बताइए क्या काम है....


सुनंदा – वो कमरे में अलमारी खुल नहीं रही है प्लीज़ उसे खोल दोगे.....


कमल – हा जरूर बताए कहा है अलमारी....


बोल के कमल कमरे में आता है सुनंदा के जिसके बाद पीछे से सुनंदा दरवाजा लॉक कर देती है तभी कमल जैसे ही पीछे मुड़ता है तभी सुनंदा गुस्से में अपने हाथ से कमल की गर्दन पकड़ दीवार से लगा के उसे ऊपर उठा देती है तब....


सुनंदा – (गुस्से में) कौन है तू और क्यों आया है यहां साहिल के पीछे , बता क्या मकसद है तेरा.....


कमल – (दर्द में धीरे से) मै दोस्त हूँ साहिल का , छोड़ो मुझे....


सुनंदा – (गुस्से में) दोस्त और तू साहिल का किसे बेवकूफ बना रहा है , तुझे देखते ही मै समझ गई थी , तू इंसान के शरीर में एक डेविल है....
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जारी रहेग✍️✍️
Bahut hi shaandar update diya hai DEVIL MAXIMUM bhai....
Nice and beautiful update....
 

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UPDATE 26



हॉस्पिटल के एक कमरे के अन्दर दरवाजा खुलता है तब आरव अपने सामने अक्कू को देखता वैसे उसकी सास थम सी जाती है तब....


अक्कू – हे भगवान ये तुझे क्या हुआ आरव मेरी जान....


बोलते हुए आरव के पास जाके उसके गाल चूम लेती है तभी पीहू जो आरव के बगल में खड़ी थी , ये नजारा देख चौक जाती है , गुस्से में अक्कू को देखने लगती है तब....


अक्कू – (आरव के गाल में हाथ फेर के) मेरे प्यारे बाबू मैने बोला था ना तुम्हे , मुझसे अलग मत हो और देखा , मैं क्या गई और तेरा ये हॉल जो गया , लेकिन अब मैं अपने सोने बाबू को छोड़ के कही नहीं जाऊंगी....


बोल के आरव के गाल को चार , पांच बार चूम लेती है और फिर धीरे से आरव को होठों को चूमती है , फिर क्या था ये नजारा देख पीहू के सबर का बांध जैसे टूर जाता है मन ही मन अक्कू को गालियां देने लगती है , ये नजारा आरव देख लेता है तभी आरव कुछ बोलने को होता है लेकिन अक्कू अपनी आंखें दिखाती है आरव को जैसे कह रही हो एक शब्द मत बोलना समझे , लेकिन जलन और गुस्से में भरी पीहू बोल पड़ती है....


पीहू – हेलो मैडम आपको थोड़ी भी तमीज है की नहीं ये हॉस्पिटल है घर नहीं जो आप पेशेंट को परेशान कारने आ गई....


अक्कू – (पीहू को देख के बोली) कौन हो तुम और किस हक से मेरे और आरु बीच में बोल रही हो , जब मेरे आरु को दिक्कत नहीं तो तुम इतना क्यों उछल रही हो , ओह शायद तुम नर्स हो यहां पर , खेर अब तुम बाहर जाओ मै अपने आरु का ख्याल रख सकती हो , मुझे किसी नर्स की जरूरत नहीं है....


आरव – (अक्कू की बात सुन अपने मन में – अक्कू दी क्यों मुझे मरवाने पे तुली हुई हो अगर पीहू को गुस्सा आ गया कल एक को उड़ाया है आज आपको ना उड़ा दे साथ में मुझे भी)....


इधर आरव अपने मन में बोले जा रहा था लेकिन अक्कू ने एक नजर आरव को देखा अपनी आंखों से चुप रहने का इशारा किया , बेचारा आरव चाह के भी बोलने को हिम्मत नहीं कर पा रहा था तब....


पीहू – (गुस्से में) मै आरव की गर्ल फ्रेंड और साथ में उसकी होने वाली बीवी....


लेकिन बीच में पीहू की बात को काट के अक्कू बोली....


अक्कू – (बीच में) हा वो इसीलिए क्योंकि तब मै यहां नहीं थी , लेकिन अब मैं वापस आ चुकी हूँ और मेरे मना करने के बाद दुनिया में कोई मेरा फैसला नहीं बदल सकता है....


अक्कू के इतना बोलते ही पीहू ने एक नजर आरव को देखा जैसे बोल रही हो चुप क्यों हो बोलो तुम , लेकिन आरव बेचारा आज से पहले अक्कू की बात को नहीं काटा तो आज कैसे करता , और बस आरव ने कुछ ना बोला चुप रहा ये देख पीहू कि आंख से आंसू आने लगे और वो जाने लगी कमरे से बाहर लेकिन तभी कमरे में परी आ गई और पीहू की आंख में आंसू देख....


परी – ए अक्कू तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी पीहू को रुलाने की , आरु तेरा भाई है तो ये तेरी भाभी है और जरा सम्भल कर कल ही एक को टपका दिया है इस हॉस्पिटल में , कही आज तेरा नंबर ना लग जाय....


इतना बोलते ही परी हसन लगी साथ में अक्कू भी हसने लगी फिर चलते हुए पीहू के पास जाके अपने कान पकड़ के....


अक्कू – माफ कर दो भाभी मै बस टांग खींच रहीं थी (आरव के सिर में हल्का सा टपली मार के) क्यों ज्यादा हीरो पंती सवार हो गई है तुझे अपनी दीदी के बारे में भी नहीं सोचा तूने....


आरव – सौरी दीदी आगे से ऐसा नहीं करूंगा प्लीज़ अक्कू दीदी....


आरव का मासूम चेहरा देख के....


अक्कू – (आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) क्या हाल कर दो कमीनो ने मेरे भाई का , कीड़े पड़े कमीनो को जिसने मेरे भाई को ऐसे मारा है....


तभी लक्की कमरे में आता है हस्ते हुए....


लक्की – हा दीदी यही होना चाहिए एसो के साथ....


ऐसे ही सब मिल के हस्ते हुए बाते करने लगते है इस तरह शाम हो जाती है तब अक्कू सबको घर भेज देती है क्योंकि पीछे तीन दिन से यही पर थे , परी जाना नहीं चाहती थी , लेकिन वो जानती थी कि आरु आज अक्कू से बात करेगा की उसे सारी बात बताएगा जरूर , तो परी ने कल अक्कू से अकेले में बात करने का सोच के चली जाती है घर में , सबके जाने के बाद कमरे में काफी देर तक शांति रहती है , काफी देर तक अक्कू लगातार आरव को देख रही थी लेकिन आरव जैसे आज नजरे ज्यादा तर चुरा रहा था तब , आरव बेड से खड़ा हो खिड़की के पास जाके बाहर देखने लगता है जिसे देख....


अक्कू – आरु क्या बात है....


आरव – (बिना अक्कू को देखे) कुछ नहीं दीदी....


अक्कू – तो अब तू मुझसे भी छुपाएगा बात को , बोल न क्या परेशानी है तुझे....


लेकिन आरव कुछ नहीं बोलता है वो जैसे अपने मन में बातों को दबाए रखना चाहता हो ताकि अक्कू के सामने टूट ना जाए....


अक्कू – एग्जाम के बाद तू मंदिर क्या में गया था....


आरव – वो दीदी एग्जाम अच्छा नहीं गया था इसीलिए....


अक्कू – अपने आप को कितना बेवकूफ बनाएगा , बचपन से पढ़ाया है तुझे मैने....


जिसके बाद भी आरव कुछ नहीं बोलता तब....


अक्कू – हम्ममम समझ गई शायद तू अपना नहीं समझता मुझे....


बस यही अक्कू ने अपना इमोशनल ड्रामा खेला जिसके बाद....


आरव – नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है....


अक्कू – (आरव का हाथ अपने सिर में रख के) तो खा मेरी कसम बोल दे यही बात है....


तभी आरव अपना हाथ हटा लेता है जिसके बाद अक्कू आगे आके आरव को अपन गले लगा लेती है...


अक्कू – तू जनता है ना तेरे और मेरे बीच की बात आज तक कोई नहीं जान पाया है , चल बता क्या बात है मै तेरी पूरी मदद करूंगी.....


बस यही आरव के सब्र का बांध टूटते ही रोने लगा गले लग के अक्कू के जिसे देख अक्कू घबरा गई....


अक्कू – (आरव को पानी पिलाते हुए) देख आरु जो भी बात है बता मुझे तुझे इस तरह देख अब मुझे भी डर लग रहा है....


आरव – दीदी मॉम का अफ़सर चल रहा है किसी और के साथ....


बस इतना सुनना था और कमरे में जैसे शांति हो गई अक्कू को जैसे सुनाई नहीं दी बात आरव कि लेकिन फिर आरव की बात उसके माइंड में आई तब....


अक्कू – (चिल्ला के) ये क्या बोल रहा है तू , परी चाची अपने पति को धोखा दे रही है , तू जनता है क्या बोला है तूने अभी.....


आरव – अपने आखिरी एग्जाम के बाद मूवी देखने का प्लान था लेकिन मै सीधे घर गया वहां मैने अपनी आंखों से सब देखा है दीदी....


और फिर जो कुछ हुआ सब बता देता है जिसके बाद अक्कू सोफे पर बैठ जाती है अपने दोनों हाथों को अपने सिर में लगा के कुछ देर बाद अक्कू सिर उठा के आरव की तरफ देखती है....


अक्कू – अब क्या सोचा है तूने....


तभी कमरे का दरवाजा खुलता है सामने SSP खड़ा होता है अपने सामने SSP खड़ा देख चौक जाट है तब....


आरव – (SSP से) सर आप....


SSP – हा बेटा मै असल में रूटीन में निकला था यहां की सिक्योरिटी के लिए , खेर तुम बताओ अब कैसी है तबियत तुम्हारी....


आरव – पहले से अच्छी है सर....


SSP – हम्ममम अच्छी बात है (आकृति से) तुमने आरव को खुशबरी दी....


आकृति – नहीं सर अभी वक्त ही नहीं मिला मुझे....


आरव – कैसी खुशबरी.....


SSP – आकृति RAW में सिलेक्ट हुई है.....


आरव – (खुशी से) सच में अक्कू दी....


अक्कू – हा आरु....


आरव – तब तो पार्टी बनती है दी....


आकृति – हा लेकिन ये बात सीक्रेट है इस बारे में तेज चाचू के सिवा कोई नहीं जानता है , और मै नहीं चाहती ये बात किसी को भी पता चले....


आरव – ठीक है दीदी ये बात सीक्रेट रहेगी....


SSP – आरव मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है....


आरव – हा कहिए सर....


SSP – (पिस्टल आरव के आगे करते हुए) जिस दिन हादसा हुआ उस दिन ये पिस्टल तुम्हारे पास क्या कर रही थी....


SSP के सवाल के बाद आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था लेकिन ये बात अक्कू ने समझने में देर नहीं की तभी....


आकृति – सर उस दिन गलती से आरव ने गन लेली थी और घर से निकलने से पहले उसे वापस रखना भूल गया था....


SSP – (आरव को देखते हुए) मुझे यकीन तो नहीं हो रहा खेर , देखो आरव बेटा वैसे मैने इस बारे में अभी तक किसी को नहीं बताया है और ना ही तुम्हारे पिता को (आरव को गन देते हुए) मैने इसे लोड कर दिया है जितनी जल्दी हो सके इसे इसकी सही जगह पर फौरन पहुंचा दो , और बेटा एक बात , देखो ये तो मै वहां था और तुम्हे जानता भी हूँ इसीलिए ऐसी वैसी कोई बात नहीं हुई वर्ना बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती थी इसीलिए प्लीज़ आरव बेटा अगली बार से ध्यान से....


आरव – सॉरी सर....


SSP – (मुस्कुरा के आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) इट्स ओक बेटा , अपनी लाइफ एंजॉय करो तुम अब....


बोल के....

SSP – (अपने मन में – इस उम्र में बच्चे लाइफ एंजॉय करते है वही आरव अपनी फैमिली को प्रोटेक्ट के लिए तैयार बैठा है , उम्मीद करता हूँ कि तेज और परी इसे सम्भाल लेगे)...


SSP अपने मन में सोचते हुए चला गया कमरे से....


आरव – (अक्कू को गन देते हुए) आप इसे कल सुबह मेरे कमरे के कबर्ड में रख देना इससे पहले डैड को पता चले...


अक्कू – हम्मम ठीक है , देख आरु तू जो भी करेगा मै उसमें तेरे साथ हूँ , पर जो भी करना सोच समझ के करना , देख मैने अपने मां बाप को बचपन में खो दिया था उसके बाद से तेज चाचा और परी चाची ने संभाला मुझे और साथ मिला मुझे तू , तुझे पढ़ाने के साथ अपना बचपन जिया है मैने तेरे साथ , और यही वजह है की मै तेरे दर्द को समझ सकती हूँ....


आरव – दीदी मुझे समझ नहीं आ रहा मै क्या करू उन्हें माफ करूं या सजा दूं , क्योंकि माफ किया तो डैड के साथ धोखा होगा , और सजा , लेकिन कैसे मोम है मेरी उन्हें कैसे दुखी करूं मै....


अक्कू – देख आरु जहां तक मै जानती हु चाची तुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है और शायद यही वो वजह है कि चाची आगे नहीं बढ़ी अभी तक , और अगर तूने तेज चाचू को सब बता दिया तो शायद सब खत्म हो जाए , इसीलिए पहले खुद काबिल बनो उसके बाद इसे हैंडल करेगे हम....


आरव – मुझे डर है कही देर ना हो जाए....


अक्कू – (मुस्कुरा के) ऐसा कुछ नहीं होगा आरु क्योंकि मै ये बात अच्छे से जानती हूँ कि चाची तेरे प्रति जो प्यार है , बस वही प्यार उन्हें रोक रहा है , इसीलिए अपने प्यार को और दिखा , ये रिश्ता तब तक बचा रहेगा , क्योंकि ये प्रॉब्लम छोटी नहीं है और अभी तेरी उम्र भी इतनी नहीं और ना तेरे हालात की प्रॉब्लम को तू अकेले खत्म कर सके इसीलिए अभी रुकने में भलाई है और उन्हें अभी कुछ पता नहीं चलने देना की तू सब जनता है , वैसे भी अब तो तू कॉलेज में एडमिशन हॉर्न जा रहा है उसके बाद तेरे कॉलेज शुरू होने वाले है....


आरव – हम्ममम ठीक है दीदी....


अक्कू – चल अब आराम से सोजा , सुबह यहां किसी के आते ही मै जाके घर में पिस्टल को रख दूंगी....


आरव को समझा के सुला दिया आकृति ने लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था क्या सच में आरव शांत रह पाएगा इस बारे में रात भर आकृति , सोते हुए आरव को देखते हुए सोचती रही , सुबह होते ही पीहू , अर्चना और परी एक साथ हॉस्पिटल में आरव के कमरे में आए , आते ही जहां अर्चना सभी को चाय देती है पीने के लिए , जिसके बाद....


आकृति – मै चलती हूँ जल्दी ही वापस आती हु मै....


बोल के जाने लगी आकृति कमरे के बाहर तभी....


परी – (आकृति से) अरे आकृति तू घर जा रही है ना रस्ते में मेरा एक काम कर देगी प्लीज़....


अक्कू – हा बताइए चाची....


परी – रुक मेरी गाड़ी में कुछ सामान पड़ा है उसे लेके जा (अर्चना से) मै अभी आती हु...


बोल के परी कमरे से निकल गई आकृति को लेके , चलते हुए परी हॉस्पिटल के बाहर पार्किंग में आ गई आकृति को लेके , अपनी कार में बैठ गई साथ में आकृति भी तब....


आकृति – क्या समान ले जाना है चाची....


परी – अक्कू मुझे , तुझेसे जरूरी बात करनी है....


अक्कू – बात क्या है चाची....


परी – (बिना आकृति को देखे) आरु ने बता दिया होगा तुझे मेरे और रवि के बारे में....


अक्कू – (चौक के) आपको कैसे पता....


परी – आरु ने ये भी बताया होगा , उसके एक्सिडेंट वाले दिन ही उसने मुझे और रवि को एक साथ देखा था घर में....


आकृति – (परी को गौर से देखते हुए) जब सब कुछ पता है आपको उसके बाद भी आपने एक बार भी नहीं सोचा आरु के बारे में और तेज चाचू के बारे में , उन्हें पता चला तो क्या होगा , क्या बीतेगी उनपर , मुझे तो यकीन नहीं हो रहा क्योंकि कल मैने पहली बार उस आरु को देखा जो अन्दर ही अन्दर टूटता जा रहा है , जानती है क्यों , क्योंकि वो अपनी मोम के इस कड़वे सच को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा है , अरे आरु ही क्या मुझे भी यकीन नहीं हुआ जब मुझे ये बात बताई आरु ने , Why Chachi , why did you do that , ऐसी क्या कमी रह गई जो आपने ये रास्ता चुना , बोलिए चाची.....


परी – ये सच है अक्कू , मैने बहुत बड़ी गलती की , लेकिन ये पूरा सच नहीं है अक्कू....


अक्कू – क्या मतलब है आपका और कौन सा राज छुपाया है आपने....


परी – कल मैने तेज को सारी बात बता दी अपने बारे में....


अक्कू – (चौक के) क्या , फिर क्या कहा चाचू ने....


परी – (फिर तेज से हुई सारी बात बताती है साथ में ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ सारी बाते बताने के बाद) लेकिन असली बात नहीं बताई मैने तेज को....


अक्कू – असली बात , कौन सी असली बात नहीं बताई....


परी – रवि , मै और सोनल कॉलेज के वक्त से अच्छे दोस्त रहे है , लेकिन जब तेज का एक्सीडेंट हुआ उसके बाद मैं किसी तरह अपने आप को सम्भाल रखा था लेकिन सोनल ने मेरी इस कमजोरी का फायदा उठाया , सोनल ही जानभुज के रवि को मेरे करीब लाई , मेरी कमजोरी की बातें करते हुए सोनल ने अपना वकील वाला खेल खेला जैसा वो खेलती आई है सबके साथ , उसकी बातों ने मेरा माइंड ऐसा वाश किया कि एक दिन मै रवि के साथ अपनी सीमा लांघ गई....


अक्कू – लेकिन सोनल को आपके साथ ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी....


परी – यही तो सोनल का असली मकसद था , क्योंकि रवि मेहता सिर्फ दौलत का लालची इंसान है साथ में सोनल भी , मेरी दौलत के खातिर ही उन दोनों ने मेरे साथ ये खेल खेला ताकि मैं रवि की हो जाऊ जिससे मेरी प्रॉपर्टी भी रवि की हो जाएगी....


अक्कू – दौलत के वजह से इतना गंदा खेल खेला आपके साथ लेकिन जहां तक मुझे पता है , आरु के नाम है प्रॉपर्टी तो....


परी – हा लेकिन तुझे शायद आरु के दादा की प्रॉपर्टी के बारे में नहीं पता है , उनकी सारी प्रॉपर्टी जिसकी कीमत लगभग दो सौ करोड़ है वो भी आरु के नाम है , ये बात रवि और सोनल को पता है , और ये भी की मै आरु के लिए कितना मायने रखती हूँ , इसीलिए रवि चाहता है मै उसकी हो जाऊं , क्योंकि वो जानता है मेरे और आरु के बारे में इसीलिए....


अक्कू – हम्ममम , जब आपको जानकारी है उन दोनों के इरादों के बारे में फिर आप उनके साथ क्यों हो अभी तक....


परी – अक्कू दो दिन पहले तक मै अंजान थी इस सच से फिर मुझे सच का पता चला , लेकिन अक्कू जितना तू समझ रही है , ये उतना आसान नहीं है , रवि मेहता कहने को बिजनेस मैन है लेकिन उसका इसके इलाव भी और भी बिजनेस है , स्मगलिंग का , ड्रग्स का जो वो अपने जीजा के साथ करता है , रही सोनल की बात , सोनल तलवार पेशे से वकील है लेकिन आज भी उसके काफी हैवी कॉन्टैक और सपोर्टर्स है , अगर मैने अब डायरेक्टली कुछ किया तो हो सकता है शायद मुझे नुकसान हो जाएं....


अक्कू – नुकसान कैसा नुकसान....


परी – जैसे अभी आरु के लिए मै गलत हो गई और क्या पता रवि फिर से कुछ ऐसा ना कर दे कही (बोल के परी चुप हो गई क्योंकि उसे बीते दिन याद आ गए जिसके बाद) नहीं नहीं अक्कू मै ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी अब....


अक्कू – (परी की बात सुन के) क्या बात है चाची क्या हुआ था बताए मुझे....


परी – (बात बदलते हुए) वो सब जाने दे अक्कू , मुझे सिर्फ तुझपे भरोसा है इसीलिए मुझे तेरी मदद चाहिए , वैसे भी अब तूने तो RAW ज्वाइन कर ली है तो तेरे लिए आसान है मेरी मदद करना....


अक्कू – (जल्दी बाजी में) वो सब ठीक है चाची लेकीन (कुछ सेकंड चुप हो गई फिर) एक मिनट आपको कैसे पता मैने RAW को ज्वाइन किया है ये बात तों चाचू और आरु के सिवा कोई नहीं जानता है....


परी – वो मै तुझे अभी नहीं बता सकती हूँ अक्कू , अभी तू मुझे इतना बता तू आरु के लिए क्या कर सकती है....


अक्कू – (परी की बात सुन) किसी की जान लेने से पहले और अपनी जान देने से पहले मै सोचूंगी नहीं चाची , मै आरु के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ....


परी – ठीक है अगले महीने तेज अपने सारे शेयर आरु के नाम करने वाला है....


अक्कू – अगले महीने मतलब आरु के जनम दिन में....


परी – हा अक्कू और मै चाहती हूँ तू हमारा बिजनेस ज्वाइन करे , ताकि रवि और सोनल को अच्छे से सबक सिखा के , दोनों को उनके असली अंजाम तक पहुंचा सके , ताकि कही के नहीं रहे दोनों बहुत जुर्म किए है दोनों ने जिसका पता किसी को नहीं है आज तक....


अक्कू – ये काम तो मै बिना बिजनेस ज्वाइन किए भी कर सकती हूँ चाची उसके लिए इतना इन्तजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी , दोनों की जेल में ऐसी हालत करवा दूंगी कि....


परी – (बीच में) नहीं अक्कू इतना वक्त इसीलिए लगेगा क्योंकि उतने वक्त में मुझे महक को सेफ करना है....


अक्कू – महक कौन है....


परी – रवि की बेटी है महक अभी छोटी है वो , उसके १८ साल होने पर उसकी मां की प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी तब तक के लिए , मै ऐसा कुछ नहीं करना चाहती कि उस छोटी बच्ची की जिंदगी खराब हो जाए , जैसे रवि ने उसकी मां की की थी....


अक्कू – महक की मा के साथ क्या किया था रवि ने....


परी – रवि ने करोड़ो की दौलत के खातिर शादी की थी महक की मा से रवि ने लेकिन जब उसे पता चला रवि की हरकतो का तो उसने सारी प्रॉपर्टी महक के नाम कर दी , और रवि को उसका केयर टेकर बना दिया , इसीलिए रवि अब तक महक को पाल रहा है ताकि उसके १८ साल के होते ही वो सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सके महक की....


अक्कू – और अगर प्रॉपर्टी रवि के नाम हो गई फिर....


परी – क्या पता वो महक को भी उसकी मां की तरह.....


बोल के चुप हो गई परी जिसे समझ के....


अक्कू – इसका मतलब रवि ने ही अपनी बीवी को मारा है....


परी – इस बात की पक्की जानकारी किसी को नहीं है , कुछ कहते है बीमारी के कारण मर गई तो कुछ का मानना यही है कि प्रॉपर्टी की वजह से रवि ने मार दिया उसे , अक्कू मैने जितनी भी बात कही तुझसे , इस बात का मेरे पास कोई सुबूत नहीं है....


अक्कू – हम्मम , ये रवि तो काफी कमीना किस्म का लगता है , लेकिन चाची जब आपके पास सुबूत नहीं है फिर आपको कैसे पता इतना सब कुछ इन सब के बारे में.....


परी – (मन में – अब तुझ कैसे बताऊं अक्कू मै इतना सब कैसे जानती हूँ , ये बात मै चाह के भी नहीं बता सकती किसी को भी) , मुझे कुछ लोगों से सुनने को मिली ये सब बाते , अब तू बता क्या मेरी मदद करेगी.....


अक्कू – हा मै करूंगी मदद लेकिन बदले में आपको भी बताना पड़ेगा कि आपको ये सारी बाते कैसे पता चली है....


परी – अक्कू तुझे आरु की कसम है , हमने जितनी बात की है अभी , ये सारी बाते गलती से भी किसी से मत बोलना तुम , मै इसबार किसी को भी खोना नहीं चाहती हूँ , और इसके लिए मुझे सिर्फ तुझ पर भरोसा है , रही बात मुझे कैसे पता तो सही वक्त पर मै बात बता दूंगी , तब तक इस बारे में किसी से क्या मुझसे कोई बात मत करना....


अक्कू – ठीक है चाची मै आपके साथ हूँ , आप जब कहेगी बिजनेस ज्वाइन करने के लिए मै तैयार मिलूंगी , लेकिन तब तक आरु को हैंडल कैसे करना है कुछ सोचा है आपने....


परी – सही मौका देख मै बात करूंगी आरु से....


अक्कू – ठीक है चाची मै घर जा रही हु , बाद में मिलती हु....


बोल के आकृति निकल गई रस्ते में....


अक्कू – (अपने मन में – चाची ने बोला , इसबार , अब इस बात से क्या मतलब है , चाची कुछ तो छुपा रही है मुझसे , लेकिन क्या , पता लगाना पड़ेगा मुझे)


अक्कू के जाते ही परी किसी को फोन मिलाने लगी....


सामने से – (फोन पर) Good Morning Pari Mam कैसी है आप....


परी – (फोन पर) Good Morning रोहित , मै अच्छी हूँ , तुम कैसे हो....


रोहित – जी मै भी अच्छा हूँ मैंम , अब आरव कैसे है मैडम....


परी – तबियत में अब थोड़ा सुधार हो रहा है उसके , टाइम निकाल के आओ मिलने आरव से , तुमसे मिल के खुश हो जाएगा वो....


रोहित – जी मैडम मै मौका निकाल के आता हु मिलने....


परी – रोहित मौका मत निकालो , फाइल में सिग्नेचर के बहाने तुम हॉस्पिटल में आ जाओ मुझे तुमसे जरूरी काम है....


रोहित – सब ठीक है ना मैडम....


परी – हा सब ठीक है रोहित , तुम मिलने आओ फिर आराम से बात करते है हम....


रोहित – ठीक है मैडम मैं आज ही आता हु आपसे मिलने....


बोल के दोनों ने फोन काट दिया जिसके बाद परी चली गई आरव के पास उसके कमरे में जहां सबकी बातों का सिलसिला चलता रहा कुछ समय बाद आकृति आगई और तेज भी ओर कुछ देर बाद रोहित भी आ गया....


रोहित – (कमरे में आते ही) हेलो परी मेम, हेलो ऑल....


परी – आओ रोहित कैसे हो तुम....


रोहित – मै अच्छा हूँ मेम....


रोहित – (आरव से) हेलो आरव सर अब कैसे है आप....


आरव – मैं ठीक हूँ भईया, और आप मुझे सर मत बोला करिए सिर्फ नाम से बुलाया करो , आप मेरे बड़े भाई की तरह हो....


रोहित – (मुस्कुरा के) ठीक है आरव (लक्की से) और लक्की द रेसर कैसे हो तुम....


लक्की – (मुस्कुरा के) अच्छा हूँ भईया , लेकिन आपको ये नाम किसने बताया....


रोहित – (हस्ते हुए) ऑफिस में जब आपको डाट पड़ रही थी (आरव से) वैसे आरव सेम मुझे बता रहा था कि तुम सब एक नए स्टंट की तैयारी कर रहे हो कुछ नाम भी बताया था उसने मुझे , जाने क्या बातया था नाम....


रोहित की बात से लक्की की हवा टाइट हो गई स्टंट के बारे में सुन के लेकिन तभी....


आरव – (जल्दी बाजी में) वो हवा में मेरा SUPERMAN जैसे उड़ने वाला स्टंट उसकी अभी तो.....


बोल के आरव चुप हो गया क्योंकि बोलते वक्त आरव ने देखा कि परी , तेज और आकृति घूर के उसे देख रहे थे आरव को तब....


आकृति – (आरव से) हा हा बोलो ना क्या बोल रहे थे स्टंट के बारे में उसकी अभी क्या आगे बोलो....


आरव – (बात बदलते हुए रोहित से) भईया मैने छोड़ दिया वो सब स्टंट करना , अब नहीं करता हूँ मै....


आकृति – (आरव से) अच्छी बात है वरना मै तुझे अभी अपना असली स्टंट दिखाती....


आकृति की बात सुन आरव का मू बंद हो गया जिसे देख सभी हंसने लगे तब....


तेज – और बताओ रोहित काम कैसा चल रहा है ऑफिस में....


रोहित – ठीक है सर सब नॉर्मली चल रहा है बिजनेस....


तेज – हम्ममम सही है....


परी – सुनैना कैसी है रोहित.....


रोहित – अच्छी है वो भी मेम , मैने सुना आप अब ऑफिस का काम घर से करेगी.....


परी – हा रोहित जब तक आरु पूरी तरह ठीक नहीं जो जाता तब तक ऑफिस का सारा काम घर से करूंगी....


रोहित – अच्छी बात है मेंम , खैर मैं ये फाइल लेके आया था इसमें आपके सिग्नेचर की जरूरत है....


परी – हम्ममम ठीक है , अच्छा सुनो मेरी कार में एक फाइल रखी है उसे ऑफिस लेके जाना काम की है....


रोहित – ठीक है मेंम....


परी – आओ मैं फाइल देती हूं तुम्हे....


बोल के दोनों कमरे में बाहर आ जाते है पार्किंग में आके....


परी – (रोहित से) मेरा एक काम करोगे रोहित....


रोहित – हा मेंम इसमें पूछने की क्या जरूरत है आप हुकुम करे....


परी – रोहित ये थोड़ा पर्सनल काम है , मैं चाहती हूँ इसके बारे में किसी को भी पता ना चले....


रोहित – Don't Worry mam किसी को पता नहीं चलेगा....


परी – रोहित मुझे रवि के सभी अकाउंट्स की डिटेल चाहिए , पर्सनल की भी साथ में सोनल तलवार के भी....


रोहित – मेंम आप रवि और सोनल की जासूसी करवाना चाहती है....


परी – तुमने सही समझा रोहित , क्या मै भरोसा कर सकती हूँ तुमपे....


रोहित – मेंम आज मैं जो कुछ भी हु सिर्फ आपकी वजह से हु , आपकी वजह से आज मैं एक अच्छी पोजीशन पर हूँ , भरोसा रखिए आपका ये काम हो जाएगा आप निश्चित रहे मेंम , लेकिन आप अचानक से ऐसा क्यों चाहती है सब ठीक तो है ना मेंम....


परी – सब ठीक तो नहीं कह सकती हु रोहित , हा कुछ शक जरूर है मुझे रवि और सोनल के काम पर इसीलिए मैं उनकी सारी डिटेल्स चाहती हूँ हर तरह की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी....


रोहित – ठीक है मेंम मैं कुछ लोगों को जानता हु जो ये काम आसानी से कर सकते है....


परी – ठीक है रोहित जितनी जल्दी होसके मुझे रिपोर्ट करना पर्सनली ओके....


रोहित – ठीक है मेंम....


बोल के दोनों निकल गए अपने काम पे खेर यहां तक तो परी ने तैयारी कर ली अपने हिसाब से आगे के लिए लेकिन आगे क्या और कैसे होगा , क्या परी के मुताबिक होगा सब या फिर कुछ और जल्द जाने को मिलेगा खेर अब जरा चलते है साहिल की तरफ.....


अब थोड़ा आगे बढ़ते है कहानी में....


आज साहिल को घर आए पांच दिन बीत चुके है इन पांच दिनों में साहिल ने किसी से जायद बात चित नहीं की लेकिन सुमन , नेहा , अवनी , खुशी , सुनैना साथ में रीना ने कोशिश जरूर की लेकिन रिस्पॉन्स खास नहीं मिला किसी को भी , हा लेकिन रिकी ने बहुत मजा किया साहिल के साथ कभी गेम खेल के कभी बाते करके रिकी और साहिल का वक्त अच्छा बीता साथ में , दोनों की अच्छी बनने लगी इस बीच रनवीर जो बाहर गया था वो वापस आ गया , घर में और अब सुनंदा को भी कमरा मिल गया रहने के लिए साहिल के बगल में और सेमेंथा का आप सब जानते ही है उसे सिर्फ साहिल के सिवा कोई नहीं देख सुन सकता था और साथ में सुनंदा भी बस साहिल को पता नहीं सुनंदा के लिए खेर इस वक्त दोपहर का वक्त सब मिल के खाना खा रहे थे घर में तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया जिसे सुन लता ने दरवाजा खोला तो....


लता – (खुशी से) अरे सुनीता दीदी आ गए आप , कैसी हो आप....


सुनीता – बहुत अच्छी हूँ.....


पायल और शबनम – (लता से) हम भी है यहां पर दीदी हमसे नहीं मिलोगे आप....


लता – (मुस्कुरा के) तुम दोनों को कैसे भूल सकती हूँ मै....


इसके साथ तीनों अन्दर आने लगे तब....


लता – (कमल को उनके साथ देख) आप कौन....


शबनम – लता दीदी ये भाई है हमारा , कमल नाम है इनका....


कमल – नमस्ते दीदी....



लता – नमस्ते....


खेर लता जानती थी इस बारे में जिसे दादी ने बताया था लेकिन साहिल के सामने बोलने को मना किया था इसीलिए अंजान बन गई थी लता , खेर बोल के चारों अन्दर आगए जहां सब मिले एक दूसरे से फिर सभी बैठ एक साथ खाना खाने लगे तब....


साहिल – (कमल से) मिल गई फुर्सत तुझे आने की....


कमल – हा यार अब नाराज क्यों हो रहा है आ गया न तेरे पास अब साथ में रहेंगे पहले की तरह....


साहिल – पहले की तरह , तुझे देख के लगता तो नहीं है ऐसा....


कमल – (मुस्कुराते हुए) विश्वास नहीं देख लेना फिर....


शबनम – वैसे साहिल भइया सच में कमल भईया बहुत कमाल के है , इन कुछ दिनों में बोर नहीं होने दिया उन्होंने हमें और शहर में ऐसी जगह घुमाया हमें जहां हम आज तक गए नहीं थे....


पायल – और नहीं तो क्या हमे तो पता ही नहीं चला पांच दिन कैसे बीत गए कमल के साथ....


साहिल – (कमल को देख के) ओह बहुत अच्छी बात है ये तो क्यों कमल....


पायल और शबनम ने जल्द बाजी में बोल तो दिया तभी सुनीता ने बीच में आंख दिखाई पायल और शबनम को जिसे दोनों देख समझ गए कि दोनों ने जल्द बाजी में साहिल का ध्यान नहीं दिया , लेकिन अब देर जो हो गई थी तब तक साहिल ने सब सुन लिया था....


(नोट – कमल दादी के कहने पर साहिल से झूठ बोल के गया था सुनीत के घर में क्योंकि सुनीता ने ही कमल को बचपन में गोद लिया था जिसके बारे में कमल को गांव में पता चला था लेकिन ये बात साहिल नहीं जानता है उसे कमल ने झूठ बोला था डिग्री का बहाना बना के गया था सुनीत के साथ उसके घर में)....


इनकी बातों के बीच में साहिल ने कुछ नहीं बोला नॉर्मल बिहेव करता रहा जिससे सभी को लगा कि साहिल ने ध्यान नहीं दिया उनकी बात का , लेकिन इस बीच एक शख्स था जो कमल को गोर से देखे जा रहा था लेकिन उसने कुछ बोल नहीं , खेर खाने के बाद सब कमरे में जाने लगे कमल भी साहिल के साथ जा रहा था तब....


कमल – (साहिल से) तू कमरे में चल मै अपना बैग लेके आता हु , शायद लता दीदी ने सुनीत बुआ के कमरे में रख दिया है....


साहिल – ठीक है जल्दी आ तुझसे जरूरी बात करनी है....


फिर कमल जाता है सुनीता के कमरे में जहां....


सुनीता – (कमल से) आ गया तू , वो पायल और शबनम अनजाने में ज्यादा बोल गई साहिल के सामने , उसने तुझे कुछ बोला तो नहीं....


कमल – आप घबराओ मत ऐसा कुछ नहीं हुआ है बाकी मै देख लूंगा , अच्छा मेरा बैग कहा है उसे लेने आया हूँ....


सुनीता – क्या करेगा बैग लेके बाद में तुझे यही आना है....


कमल – हा जनता हूँ लेकिन बैग में साहिल के लिए समान है उसे देना है ना , मै रात में मिलता हु आपसे ठीक है....


सुनीता – (मुस्कुरा के) हम्ममम ठीक है , जल्दी आना भूलना मत....


बोल के कमल निकल गया साहिल के कमरे की तरफ बीच में....


सुनंदा – (कमल को बाहर से जाता देख उसे रोक के) सुनो....


कमल – जी आपने मुझे बुलाया....


सुनंदा – हा , तुम वही कमल हो ना साहिल के बचपन के दोस्त....


कमल – जी मै ही हूँ , लेकिन आप कौन....


सुनंदा – मेरा नाम सुनंदा है , अच्छा कमल एक छोटा सा काम था कर दोगे प्लीज़ ज़्यादा वक्त नहीं लूंगी तुम्हारा....


कमल – हा बताइए क्या काम है....


सुनंदा – वो कमरे में अलमारी खुल नहीं रही है प्लीज़ उसे खोल दोगे.....


कमल – हा जरूर बताए कहा है अलमारी....


बोल के कमल कमरे में आता है सुनंदा के जिसके बाद पीछे से सुनंदा दरवाजा लॉक कर देती है तभी कमल जैसे ही पीछे मुड़ता है तभी सुनंदा गुस्से में अपने हाथ से कमल की गर्दन पकड़ दीवार से लगा के उसे ऊपर उठा देती है तब....


सुनंदा – (गुस्से में) कौन है तू और क्यों आया है यहां साहिल के पीछे , बता क्या मकसद है तेरा.....


कमल – (दर्द में धीरे से) मै दोस्त हूँ साहिल का , छोड़ो मुझे....


सुनंदा – (गुस्से में) दोस्त और तू साहिल का किसे बेवकूफ बना रहा है , तुझे देखते ही मै समझ गई थी , तू इंसान के शरीर में एक डेविल है....
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जारी रहेग✍️✍️
Hamesa ki tarah Jabardast update h 👍
 

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UPDATE 26



हॉस्पिटल के एक कमरे के अन्दर दरवाजा खुलता है तब आरव अपने सामने अक्कू को देखता वैसे उसकी सास थम सी जाती है तब....


अक्कू – हे भगवान ये तुझे क्या हुआ आरव मेरी जान....


बोलते हुए आरव के पास जाके उसके गाल चूम लेती है तभी पीहू जो आरव के बगल में खड़ी थी , ये नजारा देख चौक जाती है , गुस्से में अक्कू को देखने लगती है तब....


अक्कू – (आरव के गाल में हाथ फेर के) मेरे प्यारे बाबू मैने बोला था ना तुम्हे , मुझसे अलग मत हो और देखा , मैं क्या गई और तेरा ये हॉल जो गया , लेकिन अब मैं अपने सोने बाबू को छोड़ के कही नहीं जाऊंगी....


बोल के आरव के गाल को चार , पांच बार चूम लेती है और फिर धीरे से आरव को होठों को चूमती है , फिर क्या था ये नजारा देख पीहू के सबर का बांध जैसे टूर जाता है मन ही मन अक्कू को गालियां देने लगती है , ये नजारा आरव देख लेता है तभी आरव कुछ बोलने को होता है लेकिन अक्कू अपनी आंखें दिखाती है आरव को जैसे कह रही हो एक शब्द मत बोलना समझे , लेकिन जलन और गुस्से में भरी पीहू बोल पड़ती है....


पीहू – हेलो मैडम आपको थोड़ी भी तमीज है की नहीं ये हॉस्पिटल है घर नहीं जो आप पेशेंट को परेशान कारने आ गई....


अक्कू – (पीहू को देख के बोली) कौन हो तुम और किस हक से मेरे और आरु बीच में बोल रही हो , जब मेरे आरु को दिक्कत नहीं तो तुम इतना क्यों उछल रही हो , ओह शायद तुम नर्स हो यहां पर , खेर अब तुम बाहर जाओ मै अपने आरु का ख्याल रख सकती हो , मुझे किसी नर्स की जरूरत नहीं है....


आरव – (अक्कू की बात सुन अपने मन में – अक्कू दी क्यों मुझे मरवाने पे तुली हुई हो अगर पीहू को गुस्सा आ गया कल एक को उड़ाया है आज आपको ना उड़ा दे साथ में मुझे भी)....


इधर आरव अपने मन में बोले जा रहा था लेकिन अक्कू ने एक नजर आरव को देखा अपनी आंखों से चुप रहने का इशारा किया , बेचारा आरव चाह के भी बोलने को हिम्मत नहीं कर पा रहा था तब....


पीहू – (गुस्से में) मै आरव की गर्ल फ्रेंड और साथ में उसकी होने वाली बीवी....


लेकिन बीच में पीहू की बात को काट के अक्कू बोली....


अक्कू – (बीच में) हा वो इसीलिए क्योंकि तब मै यहां नहीं थी , लेकिन अब मैं वापस आ चुकी हूँ और मेरे मना करने के बाद दुनिया में कोई मेरा फैसला नहीं बदल सकता है....


अक्कू के इतना बोलते ही पीहू ने एक नजर आरव को देखा जैसे बोल रही हो चुप क्यों हो बोलो तुम , लेकिन आरव बेचारा आज से पहले अक्कू की बात को नहीं काटा तो आज कैसे करता , और बस आरव ने कुछ ना बोला चुप रहा ये देख पीहू कि आंख से आंसू आने लगे और वो जाने लगी कमरे से बाहर लेकिन तभी कमरे में परी आ गई और पीहू की आंख में आंसू देख....


परी – ए अक्कू तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी पीहू को रुलाने की , आरु तेरा भाई है तो ये तेरी भाभी है और जरा सम्भल कर कल ही एक को टपका दिया है इस हॉस्पिटल में , कही आज तेरा नंबर ना लग जाय....


इतना बोलते ही परी हसन लगी साथ में अक्कू भी हसने लगी फिर चलते हुए पीहू के पास जाके अपने कान पकड़ के....


अक्कू – माफ कर दो भाभी मै बस टांग खींच रहीं थी (आरव के सिर में हल्का सा टपली मार के) क्यों ज्यादा हीरो पंती सवार हो गई है तुझे अपनी दीदी के बारे में भी नहीं सोचा तूने....


आरव – सौरी दीदी आगे से ऐसा नहीं करूंगा प्लीज़ अक्कू दीदी....


आरव का मासूम चेहरा देख के....


अक्कू – (आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) क्या हाल कर दो कमीनो ने मेरे भाई का , कीड़े पड़े कमीनो को जिसने मेरे भाई को ऐसे मारा है....


तभी लक्की कमरे में आता है हस्ते हुए....


लक्की – हा दीदी यही होना चाहिए एसो के साथ....


ऐसे ही सब मिल के हस्ते हुए बाते करने लगते है इस तरह शाम हो जाती है तब अक्कू सबको घर भेज देती है क्योंकि पीछे तीन दिन से यही पर थे , परी जाना नहीं चाहती थी , लेकिन वो जानती थी कि आरु आज अक्कू से बात करेगा की उसे सारी बात बताएगा जरूर , तो परी ने कल अक्कू से अकेले में बात करने का सोच के चली जाती है घर में , सबके जाने के बाद कमरे में काफी देर तक शांति रहती है , काफी देर तक अक्कू लगातार आरव को देख रही थी लेकिन आरव जैसे आज नजरे ज्यादा तर चुरा रहा था तब , आरव बेड से खड़ा हो खिड़की के पास जाके बाहर देखने लगता है जिसे देख....


अक्कू – आरु क्या बात है....


आरव – (बिना अक्कू को देखे) कुछ नहीं दीदी....


अक्कू – तो अब तू मुझसे भी छुपाएगा बात को , बोल न क्या परेशानी है तुझे....


लेकिन आरव कुछ नहीं बोलता है वो जैसे अपने मन में बातों को दबाए रखना चाहता हो ताकि अक्कू के सामने टूट ना जाए....


अक्कू – एग्जाम के बाद तू मंदिर क्या में गया था....


आरव – वो दीदी एग्जाम अच्छा नहीं गया था इसीलिए....


अक्कू – अपने आप को कितना बेवकूफ बनाएगा , बचपन से पढ़ाया है तुझे मैने....


जिसके बाद भी आरव कुछ नहीं बोलता तब....


अक्कू – हम्ममम समझ गई शायद तू अपना नहीं समझता मुझे....


बस यही अक्कू ने अपना इमोशनल ड्रामा खेला जिसके बाद....


आरव – नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है....


अक्कू – (आरव का हाथ अपने सिर में रख के) तो खा मेरी कसम बोल दे यही बात है....


तभी आरव अपना हाथ हटा लेता है जिसके बाद अक्कू आगे आके आरव को अपन गले लगा लेती है...


अक्कू – तू जनता है ना तेरे और मेरे बीच की बात आज तक कोई नहीं जान पाया है , चल बता क्या बात है मै तेरी पूरी मदद करूंगी.....


बस यही आरव के सब्र का बांध टूटते ही रोने लगा गले लग के अक्कू के जिसे देख अक्कू घबरा गई....


अक्कू – (आरव को पानी पिलाते हुए) देख आरु जो भी बात है बता मुझे तुझे इस तरह देख अब मुझे भी डर लग रहा है....


आरव – दीदी मॉम का अफ़सर चल रहा है किसी और के साथ....


बस इतना सुनना था और कमरे में जैसे शांति हो गई अक्कू को जैसे सुनाई नहीं दी बात आरव कि लेकिन फिर आरव की बात उसके माइंड में आई तब....


अक्कू – (चिल्ला के) ये क्या बोल रहा है तू , परी चाची अपने पति को धोखा दे रही है , तू जनता है क्या बोला है तूने अभी.....


आरव – अपने आखिरी एग्जाम के बाद मूवी देखने का प्लान था लेकिन मै सीधे घर गया वहां मैने अपनी आंखों से सब देखा है दीदी....


और फिर जो कुछ हुआ सब बता देता है जिसके बाद अक्कू सोफे पर बैठ जाती है अपने दोनों हाथों को अपने सिर में लगा के कुछ देर बाद अक्कू सिर उठा के आरव की तरफ देखती है....


अक्कू – अब क्या सोचा है तूने....


तभी कमरे का दरवाजा खुलता है सामने SSP खड़ा होता है अपने सामने SSP खड़ा देख चौक जाट है तब....


आरव – (SSP से) सर आप....


SSP – हा बेटा मै असल में रूटीन में निकला था यहां की सिक्योरिटी के लिए , खेर तुम बताओ अब कैसी है तबियत तुम्हारी....


आरव – पहले से अच्छी है सर....


SSP – हम्ममम अच्छी बात है (आकृति से) तुमने आरव को खुशबरी दी....


आकृति – नहीं सर अभी वक्त ही नहीं मिला मुझे....


आरव – कैसी खुशबरी.....


SSP – आकृति RAW में सिलेक्ट हुई है.....


आरव – (खुशी से) सच में अक्कू दी....


अक्कू – हा आरु....


आरव – तब तो पार्टी बनती है दी....


आकृति – हा लेकिन ये बात सीक्रेट है इस बारे में तेज चाचू के सिवा कोई नहीं जानता है , और मै नहीं चाहती ये बात किसी को भी पता चले....


आरव – ठीक है दीदी ये बात सीक्रेट रहेगी....


SSP – आरव मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है....


आरव – हा कहिए सर....


SSP – (पिस्टल आरव के आगे करते हुए) जिस दिन हादसा हुआ उस दिन ये पिस्टल तुम्हारे पास क्या कर रही थी....


SSP के सवाल के बाद आरव कुछ बोल नहीं पा रहा था लेकिन ये बात अक्कू ने समझने में देर नहीं की तभी....


आकृति – सर उस दिन गलती से आरव ने गन लेली थी और घर से निकलने से पहले उसे वापस रखना भूल गया था....


SSP – (आरव को देखते हुए) मुझे यकीन तो नहीं हो रहा खेर , देखो आरव बेटा वैसे मैने इस बारे में अभी तक किसी को नहीं बताया है और ना ही तुम्हारे पिता को (आरव को गन देते हुए) मैने इसे लोड कर दिया है जितनी जल्दी हो सके इसे इसकी सही जगह पर फौरन पहुंचा दो , और बेटा एक बात , देखो ये तो मै वहां था और तुम्हे जानता भी हूँ इसीलिए ऐसी वैसी कोई बात नहीं हुई वर्ना बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती थी इसीलिए प्लीज़ आरव बेटा अगली बार से ध्यान से....


आरव – सॉरी सर....


SSP – (मुस्कुरा के आरव के सिर पे हाथ फेरते हुए) इट्स ओक बेटा , अपनी लाइफ एंजॉय करो तुम अब....


बोल के....

SSP – (अपने मन में – इस उम्र में बच्चे लाइफ एंजॉय करते है वही आरव अपनी फैमिली को प्रोटेक्ट के लिए तैयार बैठा है , उम्मीद करता हूँ कि तेज और परी इसे सम्भाल लेगे)...


SSP अपने मन में सोचते हुए चला गया कमरे से....


आरव – (अक्कू को गन देते हुए) आप इसे कल सुबह मेरे कमरे के कबर्ड में रख देना इससे पहले डैड को पता चले...


अक्कू – हम्मम ठीक है , देख आरु तू जो भी करेगा मै उसमें तेरे साथ हूँ , पर जो भी करना सोच समझ के करना , देख मैने अपने मां बाप को बचपन में खो दिया था उसके बाद से तेज चाचा और परी चाची ने संभाला मुझे और साथ मिला मुझे तू , तुझे पढ़ाने के साथ अपना बचपन जिया है मैने तेरे साथ , और यही वजह है की मै तेरे दर्द को समझ सकती हूँ....


आरव – दीदी मुझे समझ नहीं आ रहा मै क्या करू उन्हें माफ करूं या सजा दूं , क्योंकि माफ किया तो डैड के साथ धोखा होगा , और सजा , लेकिन कैसे मोम है मेरी उन्हें कैसे दुखी करूं मै....


अक्कू – देख आरु जहां तक मै जानती हु चाची तुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है और शायद यही वो वजह है कि चाची आगे नहीं बढ़ी अभी तक , और अगर तूने तेज चाचू को सब बता दिया तो शायद सब खत्म हो जाए , इसीलिए पहले खुद काबिल बनो उसके बाद इसे हैंडल करेगे हम....


आरव – मुझे डर है कही देर ना हो जाए....


अक्कू – (मुस्कुरा के) ऐसा कुछ नहीं होगा आरु क्योंकि मै ये बात अच्छे से जानती हूँ कि चाची तेरे प्रति जो प्यार है , बस वही प्यार उन्हें रोक रहा है , इसीलिए अपने प्यार को और दिखा , ये रिश्ता तब तक बचा रहेगा , क्योंकि ये प्रॉब्लम छोटी नहीं है और अभी तेरी उम्र भी इतनी नहीं और ना तेरे हालात की प्रॉब्लम को तू अकेले खत्म कर सके इसीलिए अभी रुकने में भलाई है और उन्हें अभी कुछ पता नहीं चलने देना की तू सब जनता है , वैसे भी अब तो तू कॉलेज में एडमिशन हॉर्न जा रहा है उसके बाद तेरे कॉलेज शुरू होने वाले है....


आरव – हम्ममम ठीक है दीदी....


अक्कू – चल अब आराम से सोजा , सुबह यहां किसी के आते ही मै जाके घर में पिस्टल को रख दूंगी....


आरव को समझा के सुला दिया आकृति ने लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था क्या सच में आरव शांत रह पाएगा इस बारे में रात भर आकृति , सोते हुए आरव को देखते हुए सोचती रही , सुबह होते ही पीहू , अर्चना और परी एक साथ हॉस्पिटल में आरव के कमरे में आए , आते ही जहां अर्चना सभी को चाय देती है पीने के लिए , जिसके बाद....


आकृति – मै चलती हूँ जल्दी ही वापस आती हु मै....


बोल के जाने लगी आकृति कमरे के बाहर तभी....


परी – (आकृति से) अरे आकृति तू घर जा रही है ना रस्ते में मेरा एक काम कर देगी प्लीज़....


अक्कू – हा बताइए चाची....


परी – रुक मेरी गाड़ी में कुछ सामान पड़ा है उसे लेके जा (अर्चना से) मै अभी आती हु...


बोल के परी कमरे से निकल गई आकृति को लेके , चलते हुए परी हॉस्पिटल के बाहर पार्किंग में आ गई आकृति को लेके , अपनी कार में बैठ गई साथ में आकृति भी तब....


आकृति – क्या समान ले जाना है चाची....


परी – अक्कू मुझे , तुझेसे जरूरी बात करनी है....


अक्कू – बात क्या है चाची....


परी – (बिना आकृति को देखे) आरु ने बता दिया होगा तुझे मेरे और रवि के बारे में....


अक्कू – (चौक के) आपको कैसे पता....


परी – आरु ने ये भी बताया होगा , उसके एक्सिडेंट वाले दिन ही उसने मुझे और रवि को एक साथ देखा था घर में....


आकृति – (परी को गौर से देखते हुए) जब सब कुछ पता है आपको उसके बाद भी आपने एक बार भी नहीं सोचा आरु के बारे में और तेज चाचू के बारे में , उन्हें पता चला तो क्या होगा , क्या बीतेगी उनपर , मुझे तो यकीन नहीं हो रहा क्योंकि कल मैने पहली बार उस आरु को देखा जो अन्दर ही अन्दर टूटता जा रहा है , जानती है क्यों , क्योंकि वो अपनी मोम के इस कड़वे सच को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा है , अरे आरु ही क्या मुझे भी यकीन नहीं हुआ जब मुझे ये बात बताई आरु ने , Why Chachi , why did you do that , ऐसी क्या कमी रह गई जो आपने ये रास्ता चुना , बोलिए चाची.....


परी – ये सच है अक्कू , मैने बहुत बड़ी गलती की , लेकिन ये पूरा सच नहीं है अक्कू....


अक्कू – क्या मतलब है आपका और कौन सा राज छुपाया है आपने....


परी – कल मैने तेज को सारी बात बता दी अपने बारे में....


अक्कू – (चौक के) क्या , फिर क्या कहा चाचू ने....


परी – (फिर तेज से हुई सारी बात बताती है साथ में ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ सारी बाते बताने के बाद) लेकिन असली बात नहीं बताई मैने तेज को....


अक्कू – असली बात , कौन सी असली बात नहीं बताई....


परी – रवि , मै और सोनल कॉलेज के वक्त से अच्छे दोस्त रहे है , लेकिन जब तेज का एक्सीडेंट हुआ उसके बाद मैं किसी तरह अपने आप को सम्भाल रखा था लेकिन सोनल ने मेरी इस कमजोरी का फायदा उठाया , सोनल ही जानभुज के रवि को मेरे करीब लाई , मेरी कमजोरी की बातें करते हुए सोनल ने अपना वकील वाला खेल खेला जैसा वो खेलती आई है सबके साथ , उसकी बातों ने मेरा माइंड ऐसा वाश किया कि एक दिन मै रवि के साथ अपनी सीमा लांघ गई....


अक्कू – लेकिन सोनल को आपके साथ ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी....


परी – यही तो सोनल का असली मकसद था , क्योंकि रवि मेहता सिर्फ दौलत का लालची इंसान है साथ में सोनल भी , मेरी दौलत के खातिर ही उन दोनों ने मेरे साथ ये खेल खेला ताकि मैं रवि की हो जाऊ जिससे मेरी प्रॉपर्टी भी रवि की हो जाएगी....


अक्कू – दौलत के वजह से इतना गंदा खेल खेला आपके साथ लेकिन जहां तक मुझे पता है , आरु के नाम है प्रॉपर्टी तो....


परी – हा लेकिन तुझे शायद आरु के दादा की प्रॉपर्टी के बारे में नहीं पता है , उनकी सारी प्रॉपर्टी जिसकी कीमत लगभग दो सौ करोड़ है वो भी आरु के नाम है , ये बात रवि और सोनल को पता है , और ये भी की मै आरु के लिए कितना मायने रखती हूँ , इसीलिए रवि चाहता है मै उसकी हो जाऊं , क्योंकि वो जानता है मेरे और आरु के बारे में इसीलिए....


अक्कू – हम्ममम , जब आपको जानकारी है उन दोनों के इरादों के बारे में फिर आप उनके साथ क्यों हो अभी तक....


परी – अक्कू दो दिन पहले तक मै अंजान थी इस सच से फिर मुझे सच का पता चला , लेकिन अक्कू जितना तू समझ रही है , ये उतना आसान नहीं है , रवि मेहता कहने को बिजनेस मैन है लेकिन उसका इसके इलाव भी और भी बिजनेस है , स्मगलिंग का , ड्रग्स का जो वो अपने जीजा के साथ करता है , रही सोनल की बात , सोनल तलवार पेशे से वकील है लेकिन आज भी उसके काफी हैवी कॉन्टैक और सपोर्टर्स है , अगर मैने अब डायरेक्टली कुछ किया तो हो सकता है शायद मुझे नुकसान हो जाएं....


अक्कू – नुकसान कैसा नुकसान....


परी – जैसे अभी आरु के लिए मै गलत हो गई और क्या पता रवि फिर से कुछ ऐसा ना कर दे कही (बोल के परी चुप हो गई क्योंकि उसे बीते दिन याद आ गए जिसके बाद) नहीं नहीं अक्कू मै ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी अब....


अक्कू – (परी की बात सुन के) क्या बात है चाची क्या हुआ था बताए मुझे....


परी – (बात बदलते हुए) वो सब जाने दे अक्कू , मुझे सिर्फ तुझपे भरोसा है इसीलिए मुझे तेरी मदद चाहिए , वैसे भी अब तूने तो RAW ज्वाइन कर ली है तो तेरे लिए आसान है मेरी मदद करना....


अक्कू – (जल्दी बाजी में) वो सब ठीक है चाची लेकीन (कुछ सेकंड चुप हो गई फिर) एक मिनट आपको कैसे पता मैने RAW को ज्वाइन किया है ये बात तों चाचू और आरु के सिवा कोई नहीं जानता है....


परी – वो मै तुझे अभी नहीं बता सकती हूँ अक्कू , अभी तू मुझे इतना बता तू आरु के लिए क्या कर सकती है....


अक्कू – (परी की बात सुन) किसी की जान लेने से पहले और अपनी जान देने से पहले मै सोचूंगी नहीं चाची , मै आरु के लिए किसी भी हद तक जा सकती हूँ....


परी – ठीक है अगले महीने तेज अपने सारे शेयर आरु के नाम करने वाला है....


अक्कू – अगले महीने मतलब आरु के जनम दिन में....


परी – हा अक्कू और मै चाहती हूँ तू हमारा बिजनेस ज्वाइन करे , ताकि रवि और सोनल को अच्छे से सबक सिखा के , दोनों को उनके असली अंजाम तक पहुंचा सके , ताकि कही के नहीं रहे दोनों बहुत जुर्म किए है दोनों ने जिसका पता किसी को नहीं है आज तक....


अक्कू – ये काम तो मै बिना बिजनेस ज्वाइन किए भी कर सकती हूँ चाची उसके लिए इतना इन्तजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी , दोनों की जेल में ऐसी हालत करवा दूंगी कि....


परी – (बीच में) नहीं अक्कू इतना वक्त इसीलिए लगेगा क्योंकि उतने वक्त में मुझे महक को सेफ करना है....


अक्कू – महक कौन है....


परी – रवि की बेटी है महक अभी छोटी है वो , उसके १८ साल होने पर उसकी मां की प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी तब तक के लिए , मै ऐसा कुछ नहीं करना चाहती कि उस छोटी बच्ची की जिंदगी खराब हो जाए , जैसे रवि ने उसकी मां की की थी....


अक्कू – महक की मा के साथ क्या किया था रवि ने....


परी – रवि ने करोड़ो की दौलत के खातिर शादी की थी महक की मा से रवि ने लेकिन जब उसे पता चला रवि की हरकतो का तो उसने सारी प्रॉपर्टी महक के नाम कर दी , और रवि को उसका केयर टेकर बना दिया , इसीलिए रवि अब तक महक को पाल रहा है ताकि उसके १८ साल के होते ही वो सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा सके महक की....


अक्कू – और अगर प्रॉपर्टी रवि के नाम हो गई फिर....


परी – क्या पता वो महक को भी उसकी मां की तरह.....


बोल के चुप हो गई परी जिसे समझ के....


अक्कू – इसका मतलब रवि ने ही अपनी बीवी को मारा है....


परी – इस बात की पक्की जानकारी किसी को नहीं है , कुछ कहते है बीमारी के कारण मर गई तो कुछ का मानना यही है कि प्रॉपर्टी की वजह से रवि ने मार दिया उसे , अक्कू मैने जितनी भी बात कही तुझसे , इस बात का मेरे पास कोई सुबूत नहीं है....


अक्कू – हम्मम , ये रवि तो काफी कमीना किस्म का लगता है , लेकिन चाची जब आपके पास सुबूत नहीं है फिर आपको कैसे पता इतना सब कुछ इन सब के बारे में.....


परी – (मन में – अब तुझ कैसे बताऊं अक्कू मै इतना सब कैसे जानती हूँ , ये बात मै चाह के भी नहीं बता सकती किसी को भी) , मुझे कुछ लोगों से सुनने को मिली ये सब बाते , अब तू बता क्या मेरी मदद करेगी.....


अक्कू – हा मै करूंगी मदद लेकिन बदले में आपको भी बताना पड़ेगा कि आपको ये सारी बाते कैसे पता चली है....


परी – अक्कू तुझे आरु की कसम है , हमने जितनी बात की है अभी , ये सारी बाते गलती से भी किसी से मत बोलना तुम , मै इसबार किसी को भी खोना नहीं चाहती हूँ , और इसके लिए मुझे सिर्फ तुझ पर भरोसा है , रही बात मुझे कैसे पता तो सही वक्त पर मै बात बता दूंगी , तब तक इस बारे में किसी से क्या मुझसे कोई बात मत करना....


अक्कू – ठीक है चाची मै आपके साथ हूँ , आप जब कहेगी बिजनेस ज्वाइन करने के लिए मै तैयार मिलूंगी , लेकिन तब तक आरु को हैंडल कैसे करना है कुछ सोचा है आपने....


परी – सही मौका देख मै बात करूंगी आरु से....


अक्कू – ठीक है चाची मै घर जा रही हु , बाद में मिलती हु....


बोल के आकृति निकल गई रस्ते में....


अक्कू – (अपने मन में – चाची ने बोला , इसबार , अब इस बात से क्या मतलब है , चाची कुछ तो छुपा रही है मुझसे , लेकिन क्या , पता लगाना पड़ेगा मुझे)


अक्कू के जाते ही परी किसी को फोन मिलाने लगी....


सामने से – (फोन पर) Good Morning Pari Mam कैसी है आप....


परी – (फोन पर) Good Morning रोहित , मै अच्छी हूँ , तुम कैसे हो....


रोहित – जी मै भी अच्छा हूँ मैंम , अब आरव कैसे है मैडम....


परी – तबियत में अब थोड़ा सुधार हो रहा है उसके , टाइम निकाल के आओ मिलने आरव से , तुमसे मिल के खुश हो जाएगा वो....


रोहित – जी मैडम मै मौका निकाल के आता हु मिलने....


परी – रोहित मौका मत निकालो , फाइल में सिग्नेचर के बहाने तुम हॉस्पिटल में आ जाओ मुझे तुमसे जरूरी काम है....


रोहित – सब ठीक है ना मैडम....


परी – हा सब ठीक है रोहित , तुम मिलने आओ फिर आराम से बात करते है हम....


रोहित – ठीक है मैडम मैं आज ही आता हु आपसे मिलने....


बोल के दोनों ने फोन काट दिया जिसके बाद परी चली गई आरव के पास उसके कमरे में जहां सबकी बातों का सिलसिला चलता रहा कुछ समय बाद आकृति आगई और तेज भी ओर कुछ देर बाद रोहित भी आ गया....


रोहित – (कमरे में आते ही) हेलो परी मेम, हेलो ऑल....


परी – आओ रोहित कैसे हो तुम....


रोहित – मै अच्छा हूँ मेम....


रोहित – (आरव से) हेलो आरव सर अब कैसे है आप....


आरव – मैं ठीक हूँ भईया, और आप मुझे सर मत बोला करिए सिर्फ नाम से बुलाया करो , आप मेरे बड़े भाई की तरह हो....


रोहित – (मुस्कुरा के) ठीक है आरव (लक्की से) और लक्की द रेसर कैसे हो तुम....


लक्की – (मुस्कुरा के) अच्छा हूँ भईया , लेकिन आपको ये नाम किसने बताया....


रोहित – (हस्ते हुए) ऑफिस में जब आपको डाट पड़ रही थी (आरव से) वैसे आरव सेम मुझे बता रहा था कि तुम सब एक नए स्टंट की तैयारी कर रहे हो कुछ नाम भी बताया था उसने मुझे , जाने क्या बातया था नाम....


रोहित की बात से लक्की की हवा टाइट हो गई स्टंट के बारे में सुन के लेकिन तभी....


आरव – (जल्दी बाजी में) वो हवा में मेरा SUPERMAN जैसे उड़ने वाला स्टंट उसकी अभी तो.....


बोल के आरव चुप हो गया क्योंकि बोलते वक्त आरव ने देखा कि परी , तेज और आकृति घूर के उसे देख रहे थे आरव को तब....


आकृति – (आरव से) हा हा बोलो ना क्या बोल रहे थे स्टंट के बारे में उसकी अभी क्या आगे बोलो....


आरव – (बात बदलते हुए रोहित से) भईया मैने छोड़ दिया वो सब स्टंट करना , अब नहीं करता हूँ मै....


आकृति – (आरव से) अच्छी बात है वरना मै तुझे अभी अपना असली स्टंट दिखाती....


आकृति की बात सुन आरव का मू बंद हो गया जिसे देख सभी हंसने लगे तब....


तेज – और बताओ रोहित काम कैसा चल रहा है ऑफिस में....


रोहित – ठीक है सर सब नॉर्मली चल रहा है बिजनेस....


तेज – हम्ममम सही है....


परी – सुनैना कैसी है रोहित.....


रोहित – अच्छी है वो भी मेम , मैने सुना आप अब ऑफिस का काम घर से करेगी.....


परी – हा रोहित जब तक आरु पूरी तरह ठीक नहीं जो जाता तब तक ऑफिस का सारा काम घर से करूंगी....


रोहित – अच्छी बात है मेंम , खैर मैं ये फाइल लेके आया था इसमें आपके सिग्नेचर की जरूरत है....


परी – हम्ममम ठीक है , अच्छा सुनो मेरी कार में एक फाइल रखी है उसे ऑफिस लेके जाना काम की है....


रोहित – ठीक है मेंम....


परी – आओ मैं फाइल देती हूं तुम्हे....


बोल के दोनों कमरे में बाहर आ जाते है पार्किंग में आके....


परी – (रोहित से) मेरा एक काम करोगे रोहित....


रोहित – हा मेंम इसमें पूछने की क्या जरूरत है आप हुकुम करे....


परी – रोहित ये थोड़ा पर्सनल काम है , मैं चाहती हूँ इसके बारे में किसी को भी पता ना चले....


रोहित – Don't Worry mam किसी को पता नहीं चलेगा....


परी – रोहित मुझे रवि के सभी अकाउंट्स की डिटेल चाहिए , पर्सनल की भी साथ में सोनल तलवार के भी....


रोहित – मेंम आप रवि और सोनल की जासूसी करवाना चाहती है....


परी – तुमने सही समझा रोहित , क्या मै भरोसा कर सकती हूँ तुमपे....


रोहित – मेंम आज मैं जो कुछ भी हु सिर्फ आपकी वजह से हु , आपकी वजह से आज मैं एक अच्छी पोजीशन पर हूँ , भरोसा रखिए आपका ये काम हो जाएगा आप निश्चित रहे मेंम , लेकिन आप अचानक से ऐसा क्यों चाहती है सब ठीक तो है ना मेंम....


परी – सब ठीक तो नहीं कह सकती हु रोहित , हा कुछ शक जरूर है मुझे रवि और सोनल के काम पर इसीलिए मैं उनकी सारी डिटेल्स चाहती हूँ हर तरह की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी....


रोहित – ठीक है मेंम मैं कुछ लोगों को जानता हु जो ये काम आसानी से कर सकते है....


परी – ठीक है रोहित जितनी जल्दी होसके मुझे रिपोर्ट करना पर्सनली ओके....


रोहित – ठीक है मेंम....


बोल के दोनों निकल गए अपने काम पे खेर यहां तक तो परी ने तैयारी कर ली अपने हिसाब से आगे के लिए लेकिन आगे क्या और कैसे होगा , क्या परी के मुताबिक होगा सब या फिर कुछ और जल्द जाने को मिलेगा खेर अब जरा चलते है साहिल की तरफ.....


अब थोड़ा आगे बढ़ते है कहानी में....


आज साहिल को घर आए पांच दिन बीत चुके है इन पांच दिनों में साहिल ने किसी से जायद बात चित नहीं की लेकिन सुमन , नेहा , अवनी , खुशी , सुनैना साथ में रीना ने कोशिश जरूर की लेकिन रिस्पॉन्स खास नहीं मिला किसी को भी , हा लेकिन रिकी ने बहुत मजा किया साहिल के साथ कभी गेम खेल के कभी बाते करके रिकी और साहिल का वक्त अच्छा बीता साथ में , दोनों की अच्छी बनने लगी इस बीच रनवीर जो बाहर गया था वो वापस आ गया , घर में और अब सुनंदा को भी कमरा मिल गया रहने के लिए साहिल के बगल में और सेमेंथा का आप सब जानते ही है उसे सिर्फ साहिल के सिवा कोई नहीं देख सुन सकता था और साथ में सुनंदा भी बस साहिल को पता नहीं सुनंदा के लिए खेर इस वक्त दोपहर का वक्त सब मिल के खाना खा रहे थे घर में तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया जिसे सुन लता ने दरवाजा खोला तो....


लता – (खुशी से) अरे सुनीता दीदी आ गए आप , कैसी हो आप....


सुनीता – बहुत अच्छी हूँ.....


पायल और शबनम – (लता से) हम भी है यहां पर दीदी हमसे नहीं मिलोगे आप....


लता – (मुस्कुरा के) तुम दोनों को कैसे भूल सकती हूँ मै....


इसके साथ तीनों अन्दर आने लगे तब....


लता – (कमल को उनके साथ देख) आप कौन....


शबनम – लता दीदी ये भाई है हमारा , कमल नाम है इनका....


कमल – नमस्ते दीदी....



लता – नमस्ते....


खेर लता जानती थी इस बारे में जिसे दादी ने बताया था लेकिन साहिल के सामने बोलने को मना किया था इसीलिए अंजान बन गई थी लता , खेर बोल के चारों अन्दर आगए जहां सब मिले एक दूसरे से फिर सभी बैठ एक साथ खाना खाने लगे तब....


साहिल – (कमल से) मिल गई फुर्सत तुझे आने की....


कमल – हा यार अब नाराज क्यों हो रहा है आ गया न तेरे पास अब साथ में रहेंगे पहले की तरह....


साहिल – पहले की तरह , तुझे देख के लगता तो नहीं है ऐसा....


कमल – (मुस्कुराते हुए) विश्वास नहीं देख लेना फिर....


शबनम – वैसे साहिल भइया सच में कमल भईया बहुत कमाल के है , इन कुछ दिनों में बोर नहीं होने दिया उन्होंने हमें और शहर में ऐसी जगह घुमाया हमें जहां हम आज तक गए नहीं थे....


पायल – और नहीं तो क्या हमे तो पता ही नहीं चला पांच दिन कैसे बीत गए कमल के साथ....


साहिल – (कमल को देख के) ओह बहुत अच्छी बात है ये तो क्यों कमल....


पायल और शबनम ने जल्द बाजी में बोल तो दिया तभी सुनीता ने बीच में आंख दिखाई पायल और शबनम को जिसे दोनों देख समझ गए कि दोनों ने जल्द बाजी में साहिल का ध्यान नहीं दिया , लेकिन अब देर जो हो गई थी तब तक साहिल ने सब सुन लिया था....


(नोट – कमल दादी के कहने पर साहिल से झूठ बोल के गया था सुनीत के घर में क्योंकि सुनीता ने ही कमल को बचपन में गोद लिया था जिसके बारे में कमल को गांव में पता चला था लेकिन ये बात साहिल नहीं जानता है उसे कमल ने झूठ बोला था डिग्री का बहाना बना के गया था सुनीत के साथ उसके घर में)....


इनकी बातों के बीच में साहिल ने कुछ नहीं बोला नॉर्मल बिहेव करता रहा जिससे सभी को लगा कि साहिल ने ध्यान नहीं दिया उनकी बात का , लेकिन इस बीच एक शख्स था जो कमल को गोर से देखे जा रहा था लेकिन उसने कुछ बोल नहीं , खेर खाने के बाद सब कमरे में जाने लगे कमल भी साहिल के साथ जा रहा था तब....


कमल – (साहिल से) तू कमरे में चल मै अपना बैग लेके आता हु , शायद लता दीदी ने सुनीत बुआ के कमरे में रख दिया है....


साहिल – ठीक है जल्दी आ तुझसे जरूरी बात करनी है....


फिर कमल जाता है सुनीता के कमरे में जहां....


सुनीता – (कमल से) आ गया तू , वो पायल और शबनम अनजाने में ज्यादा बोल गई साहिल के सामने , उसने तुझे कुछ बोला तो नहीं....


कमल – आप घबराओ मत ऐसा कुछ नहीं हुआ है बाकी मै देख लूंगा , अच्छा मेरा बैग कहा है उसे लेने आया हूँ....


सुनीता – क्या करेगा बैग लेके बाद में तुझे यही आना है....


कमल – हा जनता हूँ लेकिन बैग में साहिल के लिए समान है उसे देना है ना , मै रात में मिलता हु आपसे ठीक है....


सुनीता – (मुस्कुरा के) हम्ममम ठीक है , जल्दी आना भूलना मत....


बोल के कमल निकल गया साहिल के कमरे की तरफ बीच में....


सुनंदा – (कमल को बाहर से जाता देख उसे रोक के) सुनो....


कमल – जी आपने मुझे बुलाया....


सुनंदा – हा , तुम वही कमल हो ना साहिल के बचपन के दोस्त....


कमल – जी मै ही हूँ , लेकिन आप कौन....


सुनंदा – मेरा नाम सुनंदा है , अच्छा कमल एक छोटा सा काम था कर दोगे प्लीज़ ज़्यादा वक्त नहीं लूंगी तुम्हारा....


कमल – हा बताइए क्या काम है....


सुनंदा – वो कमरे में अलमारी खुल नहीं रही है प्लीज़ उसे खोल दोगे.....


कमल – हा जरूर बताए कहा है अलमारी....


बोल के कमल कमरे में आता है सुनंदा के जिसके बाद पीछे से सुनंदा दरवाजा लॉक कर देती है तभी कमल जैसे ही पीछे मुड़ता है तभी सुनंदा गुस्से में अपने हाथ से कमल की गर्दन पकड़ दीवार से लगा के उसे ऊपर उठा देती है तब....


सुनंदा – (गुस्से में) कौन है तू और क्यों आया है यहां साहिल के पीछे , बता क्या मकसद है तेरा.....


कमल – (दर्द में धीरे से) मै दोस्त हूँ साहिल का , छोड़ो मुझे....


सुनंदा – (गुस्से में) दोस्त और तू साहिल का किसे बेवकूफ बना रहा है , तुझे देखते ही मै समझ गई थी , तू इंसान के शरीर में एक डेविल है....
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जारी रहेग✍️✍️
बहुत ही अप्रतिम लाजवाब और अद्भुत मनमोहक मजेदार रोमांचक अपडेट है भाई मजा आ गया है
ये सुनंदा कमल के डेविल रुप को पहचान गयी है और अपने कमरें में उसकी गर्दन दबोचे हुए हैं तो क्या कमल सच बतायेगा
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
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