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Adultery पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना

aamirhydkhan

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कहानी "पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना: गौरव कुमार की है

मेरा नाम गौरव कुमार है। मैं, कपूरथला, पंजाब का रहने वाला हूँ। हमारा आड़त का काम है यानी हम किसान और सरकार मे बीच मे फसल का लेंन देंन का काम करते है। अब मे पंजाब से हूँ तो बता दूं के यहा की दो चीजें बहुत मशहूर है, एक पटियाला पेग ओर दुसरी पंजाबन जट्टीयां। हमारा किसानो के साथ आना जाना लगा रहता है तो किसी ना किसी जट्टी के साथ भी बात बन जाती है। आज एसी ही कहानी लेकर आया हूँ। तो कहानी आरंभ करते है।


SARBI
 
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Premkumar65

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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–87

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की क्रिस्टी को अनु चूमने लगी फिर फिर दोनों आपस में चूमा चाटी करने लगी । अब आगे।

अनुपमा का फिगर 34C-24-33 है, वो दिखने में इतनी खूबसूरत और सेक्सी है कि उसकी गांड देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। उसके बड़े-बड़े boobs, पतली कमर और मोटी जांघें उसे सेक्स की देवी बनाती हैं, वो मदिरा की ऐसी बोतल हो जो पीने वाले को नशे में डुबो दे।

और क्रिस्टी ईरानी बाप और अमरीकन गोरी माँ के मिलन से पैदा हुई बेहद खूबसूरत गोरी सुंदरी थी, और साथ ही सेक्सी और बोल्ड थी – उसकी आँखों में हवस झलक रही थी, फिगर 36D-28-36, बड़े boobs और मोटी गांड। सब क्लियर दिख रहा था—पिंक चूत, हार्ड निप्पल, स्मूद स्किन।

मैं और क्रिस्टी एक-दूसरे के पास लेटकर धीरे-धीरे बातें करने लगे। उसकी सांसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं, उसकी बॉडी की गर्मी महसूस हो रही थी। थोड़ी देर बाद अनु मेरी दूसरी साइड लेट गई,

दोनों लड़कियां एक से बढ़कर एक माल थीं—गोरी चिट्टी स्किन, लंबे बाल, और बॉडी ऐसी कि किसी को भी ललचा दें। क्रिस्टी थोड़ी शरारती टाइप की थी, उसके ब्रेस्ट इतने टाइट और फर्म कि टी-शर्ट से बाहर आने को बेताब लगते। उसकी गांड इतनी राउंड और जूसी थी कि हाथ फेरने का मन करे।

क्रिस्टी के सेक्सी बूब्स कमाल लग रहे थे। मैंने तुरंत उसके बूब्स पर हमला कर दिया, उन्हें जोर-जोर से दबाने और चूसने लगा। क्रिस्टी बहुत मजा ले रही थी।

मैंने अनुपमा से कहा : "अनु ...आज हम सभी मिलकर मजे करेंगे .."

मेरी बात सुनकर अनु के साथ-२ क्रिस्टी भी आश्चर्य से मुझे और अनु को देखने लगी ..

अनु बोली, “हां बेबी जैसा की मैंने तिम्हे बताया है काके ही है जो मुझे जन्नत दिखाता है।” इतना कहते ही अनु ने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी। क्रिस्टी ने पूछा, “वाउ, मजा आ रहा है क्या?” अनु बोली, “बहुत!”

अनु ने क्रिस्टी को इशारा किया कि पास आ। क्रिस्टी हैरान-परेशान मेरे लंड के सामने आ गई। अनु ने उसका हाथ पकड़ा और मेरे लंड को टच करवाने की कोशिश की। क्रिस्टी ने अपना हाथ खींच लिया। अनु बोली, “ टच करने से कुछ नहीं होगा। कर ना, अभी फील कर इसे। डर निकाल, अगर अब नहीं निकाला तो फिर कब निकालेगी? आज अच्छा मौका है, कुछ सीख ले, वरना तुझे कुछ आएगा ही नहीं।”

अनु ने फिर से उसका हाथ पकड़कर मेरे लंड पर रखा और बोली, “अच्छे से फील कर।” उसने क्रिस्टी को बताया कि अपने हाथ को गोल बनाकर मेरे लंड पर घुमाए। जब क्रिस्टी ये सब कर रही थी, मेरी नजर उसकी क्लिवेज पर पड़ी। क्या सेक्सी क्लिवेज थी, अनु की क्लिवेज से भी ज्यादा हॉट। मैंने अनु को इशारा किया कि इसकी क्लिवेज देख। अनु ने मुझे वेट करने का इशारा किया।

अनु ने क्रिस्टी से कहा, “ लंड को किस कर के देख।” लेकिन क्रिस्टी मेरे बॉल्स को सहलाने में मस्त थी। और तभी, हैरानी की बात, उसने अचानक मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। अनु जैसे पागल हो गई और उसने क्रिस्टी के पीछे से उसकी शर्ट में हाथ डालकर उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए। क्रिस्टी और अनु दोनों मोर्न कर रही थीं और वो आवाजें मुझे दीवाना बना रही थीं।

अब दोनों ने अपने-अपने हाथ अपनी चूत पर रखे और उसे रगड़ने लगीं। अनु एक हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी और दूसरे हाथ से क्रिस्टी का एक बूब दबा रही थी। क्रिस्टी का एक हाथ उसकी चूत पर था और दूसरे से वो मेरा लंड पकड़कर चूस रही थी। मैं इस सब का मजा ले रहा था।

दोनों आँखे बंद कर लेट गयी . लेटे-लेटे मैंने चुपके से अनु की गांड पर हाथ रखा। वो इतनी सॉफ्ट और गर्म थी कि मेरा लंड झटका मारने लगा। 5-10 सेकंड बीते, क्रिस्टी हिली नहीं। मैंने हिम्मत बढ़ाई, गांड ऑनर जांघ के ऊपर से हाथ फेरा, उसकी चिकनी टांगों तक गया। वो अभी भी चुप। उफ़्फ़, क्या फीलिंग थी—उसकी स्किन सिल्की, और गांड इतनी जूसी कि दबाने का मन करे।

फिर सोचा, क्यों न क्रिस्टी पर ट्राई करूं। मैंने धीरे से पोज़िशन चेंज की, और मैंने धीरे से हाथ बढ़ाया। नींद की एक्टिंग करते हुए हाथ उसके ब्रेस्ट के ठीक नीचे रखा। उसकी सांसों से मेरा हाथ ऊपर-नीचे हो रहा था—क्या गर्मी थी! मैंने हाथ हटाने के बहाने उसके ब्रेस्ट को टच किया, वो फर्म और बड़े थे। क्रिस्टी ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। मैं समझ गया—या तो दोनों मज़े ले रही हैं, या नशे में गहरी नींद सो रही हैं। लेकिन मैंने ठान लिया, आज इन दोनों से फुल मज़े लूंगा, ऐसा मौका दोबारा पता नहीं कब मिलेगा!

अब मैं कभी अनु की बॉडी पर हाथ फेरता, कभी क्रिस्टी की। मैं क्रिस्टी के ब्रेस्ट दबाता, अनु की गांड सहलाता। करीब दस मिनट बाद अनु मेरी तरफ मुड़ी। मैं हाथ हटाने लगा, लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चुत पर रख दिया। उफ़्फ़, वो गीली हो चुकी थी! उसकी चूत इतनी वेट और हॉट कि मैं पागल हो गया। मैंने अनु की तरफ देखा—वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी, नशे में आंखें चमक रही थीं!

तभी क्रिस्टी ने मेरा दूसरा हाथ अपनी गीली चुत पर रख दिया .

. मैं उठा, और और दोनों को पास कर दोनों को जोर से किस करने लगा। उनके होंठ इतने सॉफ्ट, जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। दोनों मस्त हो रही थीं, सिसकारियां भर रही थीं। तभी पीछे से क्रिस्टी मेरे ऊपर चढ़ गई, उसके ब्रेस्ट मेरी पीठ पर दबे। वो बोली, “कए , मेरे पास पहले क्यों नहीं आया तू? मैं इंतज़ार कर रही थी!” उसकी आवाज सेक्सी थी । मैं पलटा, और क्रिस्टी के ब्रेस्ट दबाने लगा। बड़े बूब्स , निप्पल हार्ड। मैं बारी-बारी उनके के ब्रेस्ट दबाता, चूसता, निप्पल काटता। वो दोनों मेरे पूरे बॉडी पर किस कर रही थीं—गर्दन, चेस्ट, पेट। मेरा लंड बहुत देर से खड़ा था, अनु ने उसे पकड़ लिया, सहलाने लगी।

मैंने बारी-बारी उनकी चूत चाटी—जीभ अंदर डाली, क्लिट चूसा। वो सिसकारियां भर रही थीं, “आह… काके … और करो… उफ़्फ़!” मैंने उनके पूरे बॉडी पर हाथ फेरा—ब्रेस्ट मसलता, गांड थपथपाता, चूत में उंगली डालता। हम तीनों बुरी तरह गर्म हो गए थे सांसें तेज़, बॉडी पसीने से चमक रही थी।

मैं उनके ब्रेस्ट पकड़ता, चूत सहलाता, गांड पर थप्पड़ मारता। मेरा लंड बड़ा, हार्ड, वीर्य टपकने को तैयार। बस फिर क्या— अनु लंड चूमने लगी, क्रिस्टी मेरे बॉल्स से खेलने लगी, फिर जीभ से चाटने लगी। वो दोनों मुझे बीच में लेटाकर चूम रही थीं—एक लंड चूसती, दूसरी किस करती, फिर दोनों एक साथ आधा धा लंड चूसने लगी चाटती। इस डप सेक्स कन्याओं के साथ मैं जन्नत में था!

जब सहन नहीं हुआ, मैं बोला, “झड़ने वाला हूं… जिसे चूसना है, मुंह में ले लो!” दोनों लंड के लिए लड़ पड़ीं—धक्का-मुक्की, हंसी। वो मोमेंट मेरी लाइफ का बेस्ट था, खुद को गॉड फील कर रहा था। पांच मिनट बाद मैं झड़ गया—वीर्य दोनों के होंठों पर, चेहरे पर। वो चाटती रहीं, मुस्कुराती रहीं।

क्रिस्टी किसी सेक्स गॉडेस जैसी लग रही थी। वो जोर-जोर से मेरे लंड को चूस रही थी, जिससे उसका पूरा बदन हिल रहा था और उसके बूब्स हवा में गोते खा रहे थे। ये नजारा देखकर मेरे लंड से जूस निकल गया, जिसे क्रिस्टी ने पी लिया।

मैंने क्रिस्टी को खड़ा किया और उसके बूब्स दबाने लगा। क्या दिन था, मेरे सामने दो सेक्सी लड़कियां पूरी तरह नंगी खड़ी थीं, मेरे द्वारा चुदने को तैयार।

मैंने अपना लंड क्रिस्टी की चूत पर रखा और उसे रगड़ने लगा। वो पागल सी हो रही थी। लेकिन तभी अनु ने हमें रोका और बोली, “इस लंड पर मेरा हक है।” उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मुझ पर चढ़ गई। पलक झपकते ही उसने अपनी चूत मेरे लंड पर सेट की और जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगी। वो जोर-जोर से मोर्न कर रही थी।

क्रिस्टी भी अपनी चूत खोलकर मेरे पास आई और मेरे सीने पर बैठ गई। मैंने उसे अपने मुंह के पास एडजस्ट किया और उसकी चूत चाटने लगा। वाह, क्या सीन था! एक तरफ अनु मुझसे चुद रही थी, दूसरी तरफ मैं क्रिस्टी की चूत चाट रहा था। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली और वो जन्नत में पहुंच गई।



क्रिस्टी के बड़े बड़े गोल-गोल अनार जैसे बूब्स मेरे सामने थे, निप्पल्स एकदम पिंक और सख्त। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा, दूसरा हाथ से मसल रहा था। क्रिस्टी आहें भर रही थी, “आह… और चूसो… मज़ा आ रहा है।”

अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरा एकदम चिकनी और गुलाबी थी। मैंने क्रिस्टी को सोफे पर लिटाया और उसकी चूत पर मुँह रख दिया। उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैंने जीभ से उसकी चूत चाटना शुरू किया, और वो चिल्लाने लगी, “आह… खा जाओ इसे… और चूसो!” उधर, अब अनु मेरे लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी। मैंने अनु की चूत में उंगली डाली, और वो और ज़ोर से सिसकारने लगी। 10 मिनट में ही पहले क्रिस्टी फिर अनु ने पानी छोड़ दिया, और मैंने उनका सारा रस पी लिया।



अब मैंने क्रिस्टी को नीचे लिटाया और उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश की। उसकी चूत पहली चुदाई के कारण सूजी हुई थी और इतनी टाइट थी कि मेरा लंड बस 2 इंच ही गया, और वो दर्द से चीखने लगी। मैंने अनु को उसके बूब्स चूसने को कहा, ताकि वो रिलैक्स हो। मैंने एक और झटका दिया, और मेरा लंड 5 इंच अंदर चला गया। क्रिस्टी की आँखों में आँसू थे, लेकिन वो मज़े से सिसकार भी रही थी। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई, और अब वो भी मज़ा लेने लगी। अनु अपनी चूत लेकर क्रिस्टी के मुँह पर चढ़ गई, और क्रिस्टी ने अनु की चूत चाटना शुरू कर दिया। कमरे में सिर्फ़ हमारी सिसकारियाँ और चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं, “आह… चोदो… और ज़ोर से… मज़ा आ रहा है!”।

20 मिनट बाद क्रिस्टी फिर से झड़ गई। अब मैंने अनु की चूत में अपना लंड डाला, और इस बार वो पूरी तरह तैयार थी। वो मज़े से चुदवाने लगी। मैंने 35 मिनट तक उसे अलग-अलग पोज़ में चोदा। अनु इस बीच 3 बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने अपना लंड निकाला और अनु के मुँह में दे दिया। उसने मेरा सारा माल पी लिया। दोनों थककर निढाल हो गईं, लेकिन मेरा लंड अभी भी तना हुआ था।

इसके बाद मैंने क्रिस्टी को लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी चूत में लंड पेल दिया जिससे वह चिल्ला पड़ी थोड़ी देर उसके साथ वैसे ही रहा और फिर धक्के लगाने लगा और करीब 20 मिनट में झड़ गया इतने में जया 3 बार झड़ चुकी थी इधर ये सब देखकर अनु का बुरा हाल था उसकी चूत से रस टपक रहा था उसने चूत में उंगली करके 2 बार झड़ चुकी थी. मैंने भी क्रिस्टी की कसकस्र कर चुदाई कर उसे तृप्त किया इसके बाद क्रिस्टी निढाल होकर पड़ी रही. तब अनु मेरे पास आई और फिर से मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर दिया मैंने उसको लेटाया और खूब उसकी चूत मारी ।

अब मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरा लण्ड फाड़ता हुआ गहराई में उतर गया। भोसड़े में लण्ड ठुकते ही अनु बुरी तरह से हिल गई।

अनु आईईईईई अआईईई मर्रर्रर्रर्र गाईईई।

मेरा लण्ड अंदर फिट हो चूका था। अब मै लपालप लण्ड ठोकने लगा। मै झमाझम में लण्ड पेले जा रहा था। अनु बुरी तरह से चुद रही थी।

अनु – आईईईई आईएईई ओह सिससस्स आह्ह आह्ह आह्ह ओह काके ….धीरे…….धीरे……आह्ह…सिससस्स

“ आह्ह आह्ह सिससस्स आह्ह आहः ओह सिसस्ससस्स आईईईई।

मैं झमाझम दबा दबा कर लण्ड पेल रहा था। मेरे लंड के झटको से अनु के बोबे उछल रहे थे।

” आह्हा आह्हा ओह्ह्ह् आईई आह्हा। ”

” ओह्ह्ह्ह् अनु बहुत मज़ा आ रहा है। आह्हा। ”

” । आह्हा आह्हा ओह्ह्ह् आईई मम्मी। ”

मै अनु की चूत मे जमकर लंड पेल रहा था। मेरे लंड के घमासान से अनु पानी पानी हो रही थी। और तभी क्रिस्टी आकर मेरे ऊपर चढ़ गयी और उसके बड़े बूब्स मेरी पीठ के साथ चिपक गयी मेरी छाती से अनु के बूब्स चिपके हुए थे तभी थोड़ी देर के घमासान के बाद अनु का जिस्म अकड़ गया और ुकि चुत में पानी छुट आया।

” ओह्ह्ह्ह् मम्मी मर गईई आईई आह्हा। ”

अब मेरा लण्ड धक्के मार मारकर पानी बाहर निकालने लगा। मेरा लंड अनु की चुत में पूरा डूब रहा था। मै लगातार अनु को ज़बरदस्त तरीके से पेल रहा था।

” आईएईई सिससस्स आहाहा आह्ह आह्ह ओह सिसस्ससस्स

मेरे लंड के ज़बरदस्त घमासान के कारण अनु की हालत थोड़ी देर में ही ख़राब हो चुकी थी। इसी बीच अनु फिर से पानी पानी हो गई।

” आह्हा आह्हा ओह्ह्ह् आईई। ”

तभी क्रिस्टी मेरे और अनु के बीच घुसी और क्रिस्टी अनु पर लेट गयी . और मेरा लंड पकड़ अनु की चुत से निकाल अपनी चुत पर रग्स अपनी कमर उठा दी जिससे लंड अंदर गया . मैंने क्रिस्टी की टांगो को पूरा पीछे मोड़कर उसे फोल्ड कर दिया। अब मैं खड़ा होकर क्रिस्टी को चोदने लगा ऑनर हाथ अनु के बूब्स दबा रहे थे , अनु क्रिस्टी के बूब्स दबा रही थी । अब क्रिस्टी को फोल्ड करके चोदने में मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

“आईईईई सिससस्स आह्ह आह्ह अआहः सिससस्स ओह साले आईईईई मर गईईई आज तो। आहाहा आहहह।”

मैं– ओह साली। आहाः बहुत मज़ा आ रहा है। आहाहाह।

” सारी कसर आज ही निकालेगा क्या काके अनु कह उठी ! ”

” हाँ रानी । ”

मेरा लंड एकदम सीधा क्रिस्टी के भोसड़े में प्रहार कर रहा था। क्रिस्टी दर्द से बुरी तरह से झल्ला रही थी। मै दे दना दन चोद रहा था।

” आह्हा आह आईई आईई आह्हा आह्हा। ”

” बहुत मज़ा आ रहा है । आह्हा। ”

अब देर में ही क्रिस्टी पसीने पसीने हो गई। आज मेरा लंड क्रिस्टी पर कहर बनकर टूट रहा था। तभी क्रिस्टी एकबार फिर से पानी पानी हो गई। उनके भोसड़े में फिर से पानी का बहाव आ चुका था। फिर अनु ने लंड खींच कर अपने अंदर दाल चोदा, मैंने बहुत देर तक कभी अनु और कभी क्रिस्टी को ऐसे ही बजाया।


ये सिलसिला चलता रहा। कभी मैं अनु को चोदता, कभी क्रिस्टी को पूरे दो दिन रात मैंने उन्हें बारबार चोदा। खाते पीते नहाते घर के हर कोने में हमने चुदाई की आसन बदल कर खड़े लेते बैठे , हम बारबार चुदाई करते रहे , क जाते तब आराम करते और फिर शुरू हो जाते बाद में हम तीनों ने एक साथ नहाये और सोमवार सुबह लड़किया कालज चली गयी ।


Woww kya mast chudai hui hai Anu aur Christie ke sath.
 

deeppreeti

DEEP PREET
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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–101

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की मैं टीम रूम में गोल्डी की चुदाई कर रहा था वहां हम्ररी विरोधी टीम की कप्तान शीना आ गयी ,और हमारे बीच जदरदस्त मजेदार थ्रीसम हुआ - अब आगे।


शीना मैं और गोल्डी कुछ देर ऐसे ही लिपटे रहे , सुबह के चार बजने वाले थे, फिर हम उठे और अपने कपड़े पहने और सबसे पहले मैंने शीना को भेजा फिर उसके बाद गोल्डी और सबसे बाद में मैं अपने कमरे में जाने के लिए निकला तब मुझे लगा की लड़कियों के दो साये हमे छुप कर देख रहे थे. जब मैं उस तरफ गया तब वहाँ कोई नहीं था , उसे वहम मान मैं अपने कमरे में आराम करने चला गया . और कुछ देर आराम करने के बाद मैंने अनुरीत को फोन लगाया ,उससे क्या बात हुई उसका खुलसा आगे होगा .

बाद में हमारी टीम मीटिंग हुई और हमे कुछ त्यारी की और क्वार्टरफाईनल हम किसी तरह जीत गए और सेमीफाइनल में पहुंच गए. इस क्वार्टरफाईनल में शीना की टीम हार गयी पर शीना ने सबसे पहले हमे बधाई दी . अगले दिन सेमीफाइनल था .

सुबह हो चुकी थी और उधर मनप्रीत पूरी तरह से थक चुकी थी उसका शरीर दर्द कर रहा था। रामू भी उसकी चुदाई करता था पर इस बार गुरमेल ने उसकी चूत के 12 बज दिए थे मनप्रीत मन ही मन खुश भी थी कि इतने टाइम बाद उसकी अच्छे से चुदाई हुई है वो खुश होने के साथ-साथ अपने घर का काम भी खत्म कर रही थी।

और उधर रीत अपने कमरे में कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही थी उसने आज लाल रंग की टाइट पजामी डाली हुई थी और लाल ही रंग का टाइट सूट डाला इस सूट में उसका बदन पूरा दिख रहा था उसका एक एक अंग साफ चमक रहा था, तैयार होने के बाद रीत ने रोटी खाई और घर से निकलने लगी तभी उसकी मम्मी मनप्रीत ने उसे बोला – रीत बेटा जाते जाते ये रोटी रामू को पकड़ा दियो।

रीत रामू की रोटी ले कर उसके कमरे की तरफ चल पड़ी। रामू ने जैसी ही रीत को अपनी आते देखा तो उसका लंड खड़ा हो गया। वो अपने हाथ से अपना लंड मसलने लग गया। रीत ने रामू को रोटी और वो जाने के लिए पीछे मुड़ी तो रामू उसकी गोलमोटल गांड देख कर बोला – छोटी मालकिन आपकी भी बड़ी मालकिन जैसी है।

रीत रामू की बात का इशारा समझ चुकी थी उससे बहुत गुस्सा आया आखिर ये कैसे हो सकता है एक खूबसूरत जवान पंजाबन जट्टी को एक नौकर ऐसा कुछ बोल जाए, रीत उसी टाइम पीछे मुड़ी और रामू के पास जाकर उसकी गाल पर जोर से एक थप्पड़ मारा और बोली – अगर आज के बाद मेरे और मम्मी के बारे में ज्यादा बकवास की ना मैं पापा को कह कर तुझे नौकरी से निकाल दूंगी समझा कुत्ते।

रामू रीत के थप्पड़ से एक दम हेरान हो गया और रीत को जाते देखता ही रह गया, अब रीत अनुरीत के घर की तरफ चल पड़ी और रीत को अनुरीत उसके घर के बाहर ही मिल गई आज अनुरीत ने क्रीम कलर का सूट पहना था वो बहुत कमाल की लग रही थी पर उससे ज्यादा कमाल की क्रीम कलर की टाइट पजामी में उसकी गांड लग रही थी, रीत और अनुरीत अब बस स्टैंड की तरफ चल पड़ी रास्ते में ही अनुरीत का फोन बजने लगा उसने देखा कि फोन मेरा है उसने फोन उठाया और बोली – सत श्री अकाल काका जी .

मैं – सत श्री अकाल मेरी जान कहाँ है ?

अनुरीत – मैं रीत के साथ बस स्टैंड जा रही हूँ।

मैं – एक काम कर कल वाली जगह आ जाओ आज कार में यूनिवर्सिटी चलेंगे हम।

अनुरीत – नहीं यार अगर किसी ने देख लिया ना पंगा पड़ जाएगा प्लीज़।

मैं – यार कोई नहीं देखता हम दोस्त हैं आज मेरा मैच है यूनिवर्सिटी में , तू नहीं आएगी ?

अनुरीत – ठीक है मैं रीत को पूछती हूँ।

मैं – ठीक है यार उसको भी ले आ , मुझे तुन सबकी सपोर्ट की जरूरत है।

अनुरीत – यार एक मिनट रुको तो सही।

मैं – ठीक है जल्दी पूछ फिर।

अनुरीत ने फ़ोन होल्ड किया और रीत की तरफ़ देखते हुए बोली – रीत काका कल वाली जगह पर बुला रहा है, कह रहा है कार ले कर हमें यूनिवर्सिटी बुला रहा है ।

‘अनुरीत तेरा दिमाग़ तो ठीक है ना मैंने इस तरह कालेज की क्लास छोड़ के नहीं जाना’ रीत ने अनुरीत की तरफ़ देखते हुए जवाब दिया।

‘प्लीज़ रीत चल ले यार मेरी बहन नहीं है तू’ अनुरीत रीत से रिक्वेस्ट करते हुए बोली।

‘अनु तुझे एक बार में समझ नहीं आता क्या मैंने नहीं जाना’ रीत ने अनुरीत को फिर से वो ही जवाब दिया।

अनुरीत ने अपने कान पर फ़ोन लगाया और मुझे ना कह दिया और फ़ोन कट कर दिया।

रीत ने अनु का उदास चेहरा देखते हुए बोली – अनु मेरी बहन तू मेरी बात का गुस्सा ना मान प्लीज़ मैंने जान कर तुझे माना किया है पता है कल कार में से उतरते हुए हम दोनों को गुरप्रीत ने देख लिया था तुझे पता है वो मुझे क्या कह रहा था गली में।

‘ऐ भगवान उसने कैसे देख लिया और क्या कह रहा था वो’ अनु घबराते हुए बोली।

‘गुप्रीत कह रहा था लगता है आज तो दोनों आशिकी मार के आ रहे हो’ रीत ने अनु को जवाब दिया।

‘ठीक है रीत अब हम नहीं जाएंगे कार में चल बस स्टैंड चलते हैं’ अनुरीत डरते हुए बोली।

कुछ ही देकर रीत और अनु बस स्टैंड पाउच गई जब एक दो सवारी ही खड़ी थी अनुरीत ने मोका देखते हुए रीत से बोली – रीत यार एक मैं एक बात करनी थी बस तुझे मेरी कसम तूने ना नहीं करनी।

रीत ने अनु की बात सुनी और अपने मन में सोचने लग गई कि बात तो मैंने भी अनु से करनी है और फिर थोड़ा सोचते हुए रीत बोली – अनु यार बात तो मैंने भी करनी है एक काम करते हैं मैं तेरी बात मान लूंगी तू मेरी बात मान लियो ठीक है ना.

‘ओके प्रॉमिसेस’ अनु ने बिना सोचे समझे जवाब दे दिया.

रीत – चल ठीक है बोल क्या बात है.

अनु रीत से बोलने ही वाली थी इतनी बस आ गई और वो दोनों बस में चढ़ गई बस में रोज़ की तरह आज भी बहुत भीड़ थी वो दोनों भीड़ में फंसी हुई थी कुछ मनचले लड़के उन दोनों की गांड पर हाथ फेर कर मजे ले रहे थे पर ये सब तो अनु और रीत के लिए अब आम बात हो गई थी वो दोनों आराम से खड़ी रही और कुछ ही देर में उनके कॉलेज का स्टॉप आ गया और वो दोनों बस से उतर गई.

उनके साथ ही सिमरन भी बस से उतर गई सिमरन आगे सीट पर बैठी थी अनु और रीत सिमरन से मिली और अपनी क्लास रूम की तरफ चल पड़ी.

सिमरन ने आज ब्लैक कलर का सूट पहना था और वो उस सूट में कयामत लग रही थी। इस लड़के को वो मिट्टी मिट्टी करके देख रहे थे। आखिर रीत ने चलते चलते बोली – क्या बात है सिमरन आज तो तू पटाखा लग रही है।

‘तुम दोनों भी कम नहीं हो’ सिमरन से शर्माते हुए जवाब दिया।

‘नहीं सिमरन तू कहाँ हम कहाँ ’ अनुरीत ने कहा।

‘ये सब छोड़ो तुम दोनों पहले ये बातें कल तुम दोनों कहाँ चले गए थे मुझे बिना बताये’ सिमरन से रीत और अनुरीत से बात बदलते हुए पूछा।

‘यार सिमरन कल तो हमें अनु का आशिक ले गया था’ रीत ने जवाब दिया।

‘अच्छा जी फिर तू क्या करने गई थी इनके साथ’ सिमरन ने पूछा।

‘अनु मैडम मुझे कह रही थी कि मैंने अकेले नहीं जाना इस लिए मुझे साथ जाना पड़ा’ रीत ने कहा।

अनुरीत ने रीत से कहा – चल रीत वॉशरूम हो कर आते हैं।

रीत ने सिमरन को पूछा पर उसने मना कर दिया इस लिए वो दोनों ही वॉशरूम की तरफ चल पड़ी।

‘रीत अब बता क्या बात करनी थी’ अनु ने रीत से कहा।

‘हाँ यार मैं तो भूल ही गई थी रात को भाई रिपु कह रहा था कि अनुरीत से दोस्ती करा दे ’ रीत ने कहा।

‘अच्छा जी फिर तूने क्या कहा’ अनु ने पूछा।

‘मैंने क्या कहना है तू बता’ रीत बोली।

अनु ने सोचा कि ये क्या हो गया ये तो मेरी वाली बात हो गई मैंने भी तो रीत से ये बात करनी थी अनु ने कुछ देर सोचा और बोली – रीत चल ठीक है पर मेरी एक शर्त है अगर तू मान जाए तो मेरी हाँ है।

‘हाँ हाँ यार बोल क्या शर्त है’ रीत ने खुशी से पूछा।

काके ने मुझे कहा था कि तू रीत के साथ दोस्ती करा दे अनुरीत लंबे सांस लेती हुई बोली।

‘यार यह कैसे होगा रिपु तेरा भई ही मैंने भी उसे हमेशा भाई ही माना है " रीत ने बाल सीधे कर कहा।

‘देख ले रीत मरजी है तेरी ’ अनु ने जवाब दिया।

‘चल ठीक है अनु पर तू काके को यह मत बता दियो कि मेरी रिपु से भी दोस्ती है’ रीत ने सोच कर जवाब दिया।

‘नहीं बताती यार बस तू गुलशन और हैप्पी को भी न बता दियो कुछ’ अनु ने खुश हो कर कहा।

‘ठीक है फिर’ रीत ने कहाँ और वो दोनों वॉशरूम के अंदर चली गई।

तभी कालेज में अनाउंसमेंट हुई और नोटिस भी लगा हुआ था की आज क्लास नहीं लगेगी और स्टूडेंट्स कालेज की क़्विज टीम को सपोर्ट करने यूनिवर्सिटी जाए .

जारी रहेगी
 

deeppreeti

DEEP PREET
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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–102

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की मैं टीम रूम में शीना और गोल्डी की चुदाई कर रहा था अगले दिन रीत सिमरन और अनुरीत कालेज पहुंची । तब कालेज में अनाउंसमेंट हुई और नोटिस भी लगा हुआ था की आज क्लास नहीं लगेगी और स्टूडेंट्स कालेज की क़्विज टीम को सपोर्ट करने यूनिवर्सिटी जाए- अब आगे।

सिमरन, अनुपमा , अनुरीत , और रीत तथा अन्य स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी चले गए , मैंने दूर से ग्रुप बना कर आ रही सिमरन अनुपमा , अनुरीत , और रीत को अंदर जाते देख लिया था , हमारा मैच शुरू होने को था।

मैंने दूर से इन्हे हाथ हिला कर अभिबादन किया और पास बुलाया। मैंने इन्हे आने के लिए थैंक्स कहा ।

। फिर हमारी टीम मीटिंग हुई और क्वार्टरफाईनल हम किसी तरह जीत गए और सेमीफाइनल में पहुंच गए। इस क्वार्टरफाईनल में शीना की टीम हार गयी पर शीना ने सबसे पहले हमे बधाई दी । अगले दिन सेमीफाइनल था । और मैच ख़त्म होते ही सिमरन अनुपमा , अनुरीत , और रीत ने भी मुझे अन्य टीचर और स्टूडेंट्स के साथ बधाई दी । मैंने अनुरीत से उसके कान में यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में टीम रूम पर अकेली आने के लिए कहा और मौका देख फटाफट टीम रूम में गया जहाँ , क्लास नहीं लगती थी स्टोर टीम रूम बनाया गया था वहां कोई नहीं जाता था और किसी अन्य को जाने की इजाजत भी नहीं थी इसलिए बिलकुल सुनसान था ।

मैंने फ़ोन निकाला और अनुरीत को नंबर डायल करने लग गया उधर रिंग बजी अनुरीत ने फ़ोन उठा लिया।

अनुरीत – हाँ जी काका जी ।

मैं – कहाँ है?

अनुरीत – मैं यूनिवर्सिटी में हूँ आप कहाँ हो?

मैं – हॉस्टल के नीचे बाली बेसमेंट में हमारा टीम रूम है वही आजा ।

अनुरीत – मैं नहीं आऊँगी आप ऊपर आ जाओ।

मैं – प्लीज आजा कुछ बात करनी है ।

यह कह कर मैंने फ़ोन कट कर दिया, अनुरीत कुछ कहना चाहती थी पर उससे पहले ही फ़ोन कट गया।

‘रीत यार चल नीचे जा कर आते हैं’ अनुरीत ने रीत की तरफ देखते हुए कहा।

‘नहीं यार तू जा कर आजा इतना मैं सिमरन के पास बैठी हूँ’ रीत ने जवाब दिया।

‘चल ठीक है फिर मैं जा रही हूँ अच्छा मैं बता दूँ ना काके को कि तूने हाँ कर दी है’ अनुरीत ने रीत को ज़्यादा फ़ोर्स न करते हुए कहा।

रीत ने अपना सिर हिलाते हुए जवाब दिया और यूनिवर्सिटी कैंटीन की तरफ चल पड़ी।

अनुरीत भी सीढ़ियाँ उतरकर बसेमेन्ट में आ गई उसने एक रूम देखा जिसमे में से आवाज़ आ रही थी वो अंदर घुस गई अंदर मैं , गोल्डी और अपनी टीम की मेंबर रिया और रिमी बातें मार रहे थे।

अनुरीत को देखते ही मेरा लंड हरकत में आ गया अनुरीत पास आई और अनुरीत मेरे से हाथ मिलते हुए बोली – बधाई हो काकाजी आपने तो क्विज में कमाल कर दिया बहुत बढ़िया किया कलेज की टीम को सेमीफइनल तक ले आये अब क्या इरादा है ।

मैं बेंच पर बैठा था उसकी मस्त ड्रेस देख मुझे मस्ती चढ़ गयी और साथ ही जीत का भी नशा था , मैंने मस्ती में अनुरीत की कमर में हाथ डालते हुए उसे अपनी और खिंच लिया अपने साथ चिपका लिया और बोला – थैंक्स, बस मेरी जान बस अब तेरा ही ख्याल है।

अनुरीत को शर्म आ रही थी उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की पर वो कामयाब न हो सकी इसके लिए उसने अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख के लिए और बोली – आज तुम्हारे लिए एक और खुश खबरी है।

‘क्या खुश खबरी है अनुरीत ’ रिया एक दम बोली

‘रीत ने हाँ कर दी’ अनुरीत रिया की तरफ मुस्कुराते हुए बोली। ( वैसे मुझे ये पहले हीउ मालूम था क्योंकि रीत मेरे साथ किस कर चुकी थी और उसकी इस हाँ का मतलब था अब मेरे साथ इश्क की पींगे आगे बढ़ाने के लिए रीत अब त्यार थी। )

अनुरीत की बात सुन कर मेरे मुँह में पानी आ गया मैंने गोल्डी और रिया की तरफ देखा और बोला – अच्छा फिर उसे बुला तो यहीं।

‘मैंने उसे कहा तो पर वो नहीं आई अभी शर्माती है ना’ अनुरीत ने कहा। "आप तो नहीं शर्माती ना " ये कहते हुए और अनुरीत की बात सुन कर मैंने अपने होठों को अनुरीत के होठों पर रख दिया और उसके होठों को चूसने लग गया। अनुरीत ने अपने होठों को वापस खींचना चाहे पर मैं भी कम नहीं था, फिर बड़ी मुश्किल से अनुरीत ने अपने होठों को मेरे होठों से अलग किया और बोली – काके ये सब ऐसे सबके सामने, कुछ तो लिहाज करो ।

मैंने कहा , ये सब अपनी टीम की मेंबर है, गोल्डी मेरी टीम पार्टनर है और फिर अँधेरे में तीर मारते हुए कहा रिया और रिमी भी हमारी अच्छी राजदार हैं, ( मुझे लगा रिया और रिमी ही वे साये थे जो मैंने आज सुबह देखे थे जो गोल्डी और शीना के साथ हमारा थ्रीसम सेक्स देख रहे थे । ) मेरा तीर ठीक निशाने पर लगा और मेरी बात सुन दोनी मिमियने लगी , तब मैंने मुस्कुरा कर उन्हें आँख मार दी ।

ये सुन रिया कहने लगी ये फोन नहीं लग रहा ये लड़के मिठाई लेने गए थे, पता नहीं कहाँ रह गए चले गोल्डी जी हम कैंटीन से कुछ खाना पीना ले कर आते है, बॉस आप अनुरीत जी से बाते करो और रिमी तुम दरवाज़े पर जाओ देखो कि कोई आ न जाए।

ये कह कर रिया गोल्डी कमरे के बाहर चली गयी और रिमी दरवाज़े पर खड़ी हो गयी पर उसे अभी भी अंदर दिख रहा था। मैंने फिर से अपने होठों को अनुरीत के होठों पर रख दिए और उसके होठों को चूसने लग गया। मेरा एक हाथ अनुरीत के चूतड़ पर था जो अनुरीत के चुत्तड मसल रहा था। ये सब गोल्डी , रिया और रिमी बाहर खड़ी देख रही थी ।

अनुरीत पूरी मस्त हो चुकी थी वो अपनी आँखें बंद करके के पूरे स्वाद ले रही थी इतने में मैंने अपना एक हाथ आगे किए और अनुरीत की छाती पर फिरा का उसके बूब्स सहलए और दबाये , तब उसने हाथ पकड़ छटका की हाथ सीधा उसकी पजामी पर ले गया और पजामी नाड़ा खोल दिया नाड़ा खुलते ही पजामी थोड़ा नीचे खिंच गई अनुरीत को जैसे ही थोड़ा होश आया उसने अपने हाथों से पजामी ऊपर की और बोली – प्लीज़ काके पजामी नहीं खोलनी प्लीज़।

अनुरीत थोड़ा पीछे हट गई पर उसकी पजामी का नाड़ा मेरे हाथ में था अनुरीत अपना नाड़ा छुड़वाने की पूरी कोशिश कर रही थी पर मैं भी पूरी मस्ती में था और उसका नाड़ा नहीं छोड़ रहा था, फिर मैंने मुस्कुराते हुए अनुरीत को अपनी और खींच लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया और फिर से अपने होंठों पर अनुरीत के होंठों पर रख कर किस करने लग गया। मैंने एक हाथ से पजामी का नाड़ा खींच कर पजामी पीछे से पूरी ढीली कर दी और एक हाथ पीछे से अनुरीत के कुर्ते में डाल दिया यह सब बाहर से टीम की लड़किया रिया गोल्डी और रिमी सब देख रहे थे , अनुरीत की गांड पूरे शेप में दिख रही थी उसकी ब्लैक पेंटी करीम कलर की पजामी में साफ दिख रही थी मेरे हाथ अनुरीत के चूतड़ों को दबा रहे थे और मसल रहे थे।

मैंने अनुरीत को थोड़ा सा पीछे किया और अपना एक हाथ उसकी पजामी में डाल दिया अब मेरा हाथ सीधा अनुरीत की चूत पर था अनुरीत ने अपनी कमर का जोर लगाया और थोड़ा पीछे होकर मेरा हाथ हटाते हुए बोली – काके ना कर, प्लीज मुझे जाने दो अब।

मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया और अनुरीत को छोड़ दिया अनुरीत ने फटाफट अपना नाड़ा बांध लिया और अपने कपड़े ठीक करके सीधी खड़ी हो गई अनुरीत ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लग गई और थोड़ा आगे आ कर मेरे गले लग गई और बोली – आई लव यू ।

मैंने अनुरीत को थोड़ा पीछे किया और अपनी पेंट की ज़िप खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया। अनुरीत ने ये देखते ही अपनी आँखें बंद कर ली और बोली – मेरे बाबू प्लीज़ इसे अंदर कर लो प्लीज़।

मैंने अनुरीत का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया रिया और रिमी ये सब देख रही थी अब वो दोनों भी अपने चूत अपने ब्रेस पर बाहर से मसल रही थी मैंने ने अनुरीत को आँखें खोलने के लिए कहा अनुरीत ने अपनी आँखें खोली तो उसने देखा कि उसके गोरे गोरे हाथों में काले रंग का लंड बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने अनुरीत को लंड ऊपर नीचे करने को कहा अनुरीत अपने हाथ से लंड को ऊपर नीचे करने लग गई ,मैंने अपने हाथ से अनुरीत के बूब्स दबाते हुए बोला – चल मेरी जान अब इसे अपने मुँह में डाल ले।

अनुरीत ने लंड को छोड़ दिया और मेरे गले से लगते हुए बोली – मैं नहीं आप तो बहुत गंदे हो ।

मैंने फिर अनुरीत को पीछे किया और बोला – मेरी जान बस एक बार प्लीज़ बस एक बार।

अनुरीत कुछ देर सोचती है मैं बेंच पर बैठा था अनुरीत थोड़ा झुकी और मेरे लंड पर किस की और फिर अपने मुँह में डाल लिया और लंड को ऊपर ऊपर से चूसने लग गई मैंने अनुरीत का सिर पकड़ा और बोला – मेरी जान पूरा अंदर ले पूरा।

अनुरीत मेरी बात सुन कर लंड को थोड़ा और अंदर ले कर चूसने लग गई वो बहुत मज़े में लंड को मुँह में अंदर बाहर कर रही थी और मेरी आँखें मस्ती में बंद हो रही थीं। ये देख लड़किया अपने बूब्स और चूत मसल रही थी ।

अनुरीत ने अभी 2 मिनट ही लंड चूसा था कि रिमी अंदर आयी और बोली – बॉस , प्रिंसिपल सर , और मुस्कान मैडम इधर आ रहे है ।

‘मैं कहाँ जाऊँ ?’ अनुरीत ने घबराते हुए मेरा लंड मुँह में निकलते हुए बोली।

‘अनुरीत ! तू उधर रिया के पास चली जा’ मैंने अपना लंड पेंट में डालते हुए जवाब दिया।

अनुरीत दरवाज़े से भर जाने लगी तो रिया ने अपने हाथ उसके चुट्टर पर मसलते हुए कहा – इधर आ जा बहन ।

अनुरीत ने रिया की तरफ देखा पर वो कुछ नहीं बोली और उधर चली गई।

प्रिंसिपल सर और मुस्कान मैडम आये उनके साथ बाकी टीम मेंबर भी थे और हाथ मिला कर उन्होंने मुझे और पूरी टीम को मुबारक दी और कहा , गौरव हमने देखा की कैसे तुमने मेहनत कर टीम को जितवाया है और कॉलेज का नाम रोशन किया है, तुम्हे टीम चुनने का पूरा अधिकार है और कल भी पूरा कालेज यहाँ तुम्हारी टीम की सपोर्ट में आयेगा . मुस्कान मैडम ने मुझे गले लगा कर बधाई दी .

उनके जाने के बाद अनुरीत ने मेरी तरफ देखा मुस्कुरायी और बिना कुछ कहे सीढिया चढ़ चली गई। अनुरीत के जाने के बाद टीम का दूसरा लड़का कहने लगा – बॉस! आपकी पसंद बहुत बढ़िया है , ये अनुरीत की गांड कितनी मस्त है एक दम गोल है बास जब आपने उसकी कमीज ऊपर कि थी तब मैंने देखी।

‘तू टेंशन न ले तुझे एक दिन इसे नंगी करके भी दिखाऊंगा मैं बस पहले रीत को पट्टा लूँ , मैं उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला।

‘बॉस ! रीत तो बस पट्ट ही गई समझ लो ’ रिया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

मैं - आपसे बाद में बात करता हूँ , मोहतरमा , मिलिए सब लोग एक घंटे बाद टीम रूम में, कल सेमीफइनल की तयारी करनी है ?

फिर हम सभी ६ टीम मेंबर आपस में बातें करते करते कैंटीन की और चल पड़े।

अनुरीत कैंटीन रूम में आ गई उसने देखा कि रीत सिमरन के पास बैठी थी और उनके पास सुख भी बैठा था। अनु को आते देख रीत बोली – देखो आ गई महारानी।

अनुरीत ने रीत की बात का कोई जवाब नहीं दिया और बेंच पर बैठ कर बोली – चलो यार कुछ खाते पीते हैं।

‘रीत मैंने सुख से कोई बात करनी है तुम दोनों जाओ आर्डर दे दो ’ सिमरन ने रीत को धीरे से कहा।



जारी रहेगी
 
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Sushil@10

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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–102

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की मैं टीम रूम में शीना और गोल्डी की चुदाई कर रहा था अगले दिन रीत सिमरन और अनुरीत कालेज पहुंची । तब कालेज में अनाउंसमेंट हुई और नोटिस भी लगा हुआ था की आज क्लास नहीं लगेगी और स्टूडेंट्स कालेज की क़्विज टीम को सपोर्ट करने यूनिवर्सिटी जाए- अब आगे।

सिमरन, अनुपमा , अनुरीत , और रीत तथा अन्य स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी चले गए , मैंने दूर से ग्रुप बना कर आ रही सिमरन अनुपमा , अनुरीत , और रीत को अंदर जाते देख लिया था , हमारा मैच शुरू होने को था।

मैंने दूर से इन्हे हाथ हिला कर अभिबादन किया और पास बुलाया। मैंने इन्हे आने के लिए थैंक्स कहा ।

। फिर हमारी टीम मीटिंग हुई और क्वार्टरफाईनल हम किसी तरह जीत गए और सेमीफाइनल में पहुंच गए। इस क्वार्टरफाईनल में शीना की टीम हार गयी पर शीना ने सबसे पहले हमे बधाई दी । अगले दिन सेमीफाइनल था । और मैच ख़त्म होते ही सिमरन अनुपमा , अनुरीत , और रीत ने भी मुझे अन्य टीचर और स्टूडेंट्स के साथ बधाई दी । मैंने अनुरीत से उसके कान में यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में टीम रूम पर अकेली आने के लिए कहा और मौका देख फटाफट टीम रूम में गया जहाँ , क्लास नहीं लगती थी स्टोर टीम रूम बनाया गया था वहां कोई नहीं जाता था और किसी अन्य को जाने की इजाजत भी नहीं थी इसलिए बिलकुल सुनसान था ।

मैंने फ़ोन निकाला और अनुरीत को नंबर डायल करने लग गया उधर रिंग बजी अनुरीत ने फ़ोन उठा लिया।

अनुरीत – हाँ जी काका जी ।

मैं – कहाँ है?

अनुरीत – मैं यूनिवर्सिटी में हूँ आप कहाँ हो?

मैं – हॉस्टल के नीचे बाली बेसमेंट में हमारा टीम रूम है वही आजा ।

अनुरीत – मैं नहीं आऊँगी आप ऊपर आ जाओ।

मैं – प्लीज आजा कुछ बात करनी है ।

यह कह कर मैंने फ़ोन कट कर दिया, अनुरीत कुछ कहना चाहती थी पर उससे पहले ही फ़ोन कट गया।

‘रीत यार चल नीचे जा कर आते हैं’ अनुरीत ने रीत की तरफ देखते हुए कहा।

‘नहीं यार तू जा कर आजा इतना मैं सिमरन के पास बैठी हूँ’ रीत ने जवाब दिया।

‘चल ठीक है फिर मैं जा रही हूँ अच्छा मैं बता दूँ ना काके को कि तूने हाँ कर दी है’ अनुरीत ने रीत को ज़्यादा फ़ोर्स न करते हुए कहा।

रीत ने अपना सिर हिलाते हुए जवाब दिया और यूनिवर्सिटी कैंटीन की तरफ चल पड़ी।

अनुरीत भी सीढ़ियाँ उतरकर बसेमेन्ट में आ गई उसने एक रूम देखा जिसमे में से आवाज़ आ रही थी वो अंदर घुस गई अंदर मैं , गोल्डी और अपनी टीम की मेंबर रिया और रिमी बातें मार रहे थे।

अनुरीत को देखते ही मेरा लंड हरकत में आ गया अनुरीत पास आई और अनुरीत मेरे से हाथ मिलते हुए बोली – बधाई हो काकाजी आपने तो क्विज में कमाल कर दिया बहुत बढ़िया किया कलेज की टीम को सेमीफइनल तक ले आये अब क्या इरादा है ।

मैं बेंच पर बैठा था उसकी मस्त ड्रेस देख मुझे मस्ती चढ़ गयी और साथ ही जीत का भी नशा था , मैंने मस्ती में अनुरीत की कमर में हाथ डालते हुए उसे अपनी और खिंच लिया अपने साथ चिपका लिया और बोला – थैंक्स, बस मेरी जान बस अब तेरा ही ख्याल है।

अनुरीत को शर्म आ रही थी उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की पर वो कामयाब न हो सकी इसके लिए उसने अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख के लिए और बोली – आज तुम्हारे लिए एक और खुश खबरी है।

‘क्या खुश खबरी है अनुरीत ’ रिया एक दम बोली

‘रीत ने हाँ कर दी’ अनुरीत रिया की तरफ मुस्कुराते हुए बोली। ( वैसे मुझे ये पहले हीउ मालूम था क्योंकि रीत मेरे साथ किस कर चुकी थी और उसकी इस हाँ का मतलब था अब मेरे साथ इश्क की पींगे आगे बढ़ाने के लिए रीत अब त्यार थी। )

अनुरीत की बात सुन कर मेरे मुँह में पानी आ गया मैंने गोल्डी और रिया की तरफ देखा और बोला – अच्छा फिर उसे बुला तो यहीं।

‘मैंने उसे कहा तो पर वो नहीं आई अभी शर्माती है ना’ अनुरीत ने कहा। "आप तो नहीं शर्माती ना " ये कहते हुए और अनुरीत की बात सुन कर मैंने अपने होठों को अनुरीत के होठों पर रख दिया और उसके होठों को चूसने लग गया। अनुरीत ने अपने होठों को वापस खींचना चाहे पर मैं भी कम नहीं था, फिर बड़ी मुश्किल से अनुरीत ने अपने होठों को मेरे होठों से अलग किया और बोली – काके ये सब ऐसे सबके सामने, कुछ तो लिहाज करो ।

मैंने कहा , ये सब अपनी टीम की मेंबर है, गोल्डी मेरी टीम पार्टनर है और फिर अँधेरे में तीर मारते हुए कहा रिया और रिमी भी हमारी अच्छी राजदार हैं, ( मुझे लगा रिया और रिमी ही वे साये थे जो मैंने आज सुबह देखे थे जो गोल्डी और शीना के साथ हमारा थ्रीसम सेक्स देख रहे थे । ) मेरा तीर ठीक निशाने पर लगा और मेरी बात सुन दोनी मिमियने लगी , तब मैंने मुस्कुरा कर उन्हें आँख मार दी ।

ये सुन रिया कहने लगी ये फोन नहीं लग रहा ये लड़के मिठाई लेने गए थे, पता नहीं कहाँ रह गए चले गोल्डी जी हम कैंटीन से कुछ खाना पीना ले कर आते है, बॉस आप अनुरीत जी से बाते करो और रिमी तुम दरवाज़े पर जाओ देखो कि कोई आ न जाए।

ये कह कर रिया गोल्डी कमरे के बाहर चली गयी और रिमी दरवाज़े पर खड़ी हो गयी पर उसे अभी भी अंदर दिख रहा था। मैंने फिर से अपने होठों को अनुरीत के होठों पर रख दिए और उसके होठों को चूसने लग गया। मेरा एक हाथ अनुरीत के चूतड़ पर था जो अनुरीत के चुत्तड मसल रहा था। ये सब गोल्डी , रिया और रिमी बाहर खड़ी देख रही थी ।

अनुरीत पूरी मस्त हो चुकी थी वो अपनी आँखें बंद करके के पूरे स्वाद ले रही थी इतने में मैंने अपना एक हाथ आगे किए और अनुरीत की छाती पर फिरा का उसके बूब्स सहलए और दबाये , तब उसने हाथ पकड़ छटका की हाथ सीधा उसकी पजामी पर ले गया और पजामी नाड़ा खोल दिया नाड़ा खुलते ही पजामी थोड़ा नीचे खिंच गई अनुरीत को जैसे ही थोड़ा होश आया उसने अपने हाथों से पजामी ऊपर की और बोली – प्लीज़ काके पजामी नहीं खोलनी प्लीज़।

अनुरीत थोड़ा पीछे हट गई पर उसकी पजामी का नाड़ा मेरे हाथ में था अनुरीत अपना नाड़ा छुड़वाने की पूरी कोशिश कर रही थी पर मैं भी पूरी मस्ती में था और उसका नाड़ा नहीं छोड़ रहा था, फिर मैंने मुस्कुराते हुए अनुरीत को अपनी और खींच लिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया और फिर से अपने होंठों पर अनुरीत के होंठों पर रख कर किस करने लग गया। मैंने एक हाथ से पजामी का नाड़ा खींच कर पजामी पीछे से पूरी ढीली कर दी और एक हाथ पीछे से अनुरीत के कुर्ते में डाल दिया यह सब बाहर से टीम की लड़किया रिया गोल्डी और रिमी सब देख रहे थे , अनुरीत की गांड पूरे शेप में दिख रही थी उसकी ब्लैक पेंटी करीम कलर की पजामी में साफ दिख रही थी मेरे हाथ अनुरीत के चूतड़ों को दबा रहे थे और मसल रहे थे।

मैंने अनुरीत को थोड़ा सा पीछे किया और अपना एक हाथ उसकी पजामी में डाल दिया अब मेरा हाथ सीधा अनुरीत की चूत पर था अनुरीत ने अपनी कमर का जोर लगाया और थोड़ा पीछे होकर मेरा हाथ हटाते हुए बोली – काके ना कर, प्लीज मुझे जाने दो अब।

मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया और अनुरीत को छोड़ दिया अनुरीत ने फटाफट अपना नाड़ा बांध लिया और अपने कपड़े ठीक करके सीधी खड़ी हो गई अनुरीत ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लग गई और थोड़ा आगे आ कर मेरे गले लग गई और बोली – आई लव यू ।

मैंने अनुरीत को थोड़ा पीछे किया और अपनी पेंट की ज़िप खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया। अनुरीत ने ये देखते ही अपनी आँखें बंद कर ली और बोली – मेरे बाबू प्लीज़ इसे अंदर कर लो प्लीज़।

मैंने अनुरीत का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया रिया और रिमी ये सब देख रही थी अब वो दोनों भी अपने चूत अपने ब्रेस पर बाहर से मसल रही थी मैंने ने अनुरीत को आँखें खोलने के लिए कहा अनुरीत ने अपनी आँखें खोली तो उसने देखा कि उसके गोरे गोरे हाथों में काले रंग का लंड बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने अनुरीत को लंड ऊपर नीचे करने को कहा अनुरीत अपने हाथ से लंड को ऊपर नीचे करने लग गई ,मैंने अपने हाथ से अनुरीत के बूब्स दबाते हुए बोला – चल मेरी जान अब इसे अपने मुँह में डाल ले।

अनुरीत ने लंड को छोड़ दिया और मेरे गले से लगते हुए बोली – मैं नहीं आप तो बहुत गंदे हो ।

मैंने फिर अनुरीत को पीछे किया और बोला – मेरी जान बस एक बार प्लीज़ बस एक बार।

अनुरीत कुछ देर सोचती है मैं बेंच पर बैठा था अनुरीत थोड़ा झुकी और मेरे लंड पर किस की और फिर अपने मुँह में डाल लिया और लंड को ऊपर ऊपर से चूसने लग गई मैंने अनुरीत का सिर पकड़ा और बोला – मेरी जान पूरा अंदर ले पूरा।

अनुरीत मेरी बात सुन कर लंड को थोड़ा और अंदर ले कर चूसने लग गई वो बहुत मज़े में लंड को मुँह में अंदर बाहर कर रही थी और मेरी आँखें मस्ती में बंद हो रही थीं। ये देख लड़किया अपने बूब्स और चूत मसल रही थी ।

अनुरीत ने अभी 2 मिनट ही लंड चूसा था कि रिमी अंदर आयी और बोली – बॉस , प्रिंसिपल सर , और मुस्कान मैडम इधर आ रहे है ।

‘मैं कहाँ जाऊँ ?’ अनुरीत ने घबराते हुए मेरा लंड मुँह में निकलते हुए बोली।

‘अनुरीत ! तू उधर रिया के पास चली जा’ मैंने अपना लंड पेंट में डालते हुए जवाब दिया।

अनुरीत दरवाज़े से भर जाने लगी तो रिया ने अपने हाथ उसके चुट्टर पर मसलते हुए कहा – इधर आ जा बहन ।

अनुरीत ने रिया की तरफ देखा पर वो कुछ नहीं बोली और उधर चली गई।

प्रिंसिपल सर और मुस्कान मैडम आये उनके साथ बाकी टीम मेंबर भी थे और हाथ मिला कर उन्होंने मुझे और पूरी टीम को मुबारक दी और कहा , गौरव हमने देखा की कैसे तुमने मेहनत कर टीम को जितवाया है और कॉलेज का नाम रोशन किया है, तुम्हे टीम चुनने का पूरा अधिकार है और कल भी पूरा कालेज यहाँ तुम्हारी टीम की सपोर्ट में आयेगा . मुस्कान मैडम ने मुझे गले लगा कर बधाई दी .

उनके जाने के बाद अनुरीत ने मेरी तरफ देखा मुस्कुरायी और बिना कुछ कहे सीढिया चढ़ चली गई। अनुरीत के जाने के बाद टीम का दूसरा लड़का कहने लगा – बॉस! आपकी पसंद बहुत बढ़िया है , ये अनुरीत की गांड कितनी मस्त है एक दम गोल है बास जब आपने उसकी कमीज ऊपर कि थी तब मैंने देखी।

‘तू टेंशन न ले तुझे एक दिन इसे नंगी करके भी दिखाऊंगा मैं बस पहले रीत को पट्टा लूँ , मैं उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला।

‘बॉस ! रीत तो बस पट्ट ही गई समझ लो ’ रिया ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

मैं - आपसे बाद में बात करता हूँ , मोहतरमा , मिलिए सब लोग एक घंटे बाद टीम रूम में, कल सेमीफइनल की तयारी करनी है ?

फिर हम सभी ६ टीम मेंबर आपस में बातें करते करते कैंटीन की और चल पड़े।

अनुरीत कैंटीन रूम में आ गई उसने देखा कि रीत सिमरन के पास बैठी थी और उनके पास सुख भी बैठा था। अनु को आते देख रीत बोली – देखो आ गई महारानी।

अनुरीत ने रीत की बात का कोई जवाब नहीं दिया और बेंच पर बैठ कर बोली – चलो यार कुछ खाते पीते हैं।

‘रीत मैंने सुख से कोई बात करनी है तुम दोनों जाओ आर्डर दे दो ’ सिमरन ने रीत को धीरे से कहा।



जारी रहेगी
Shandaar update and nice story
 

deeppreeti

DEEP PREET
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3,269
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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–103

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की मैं टीम रूम में शीना और गोल्डी की चुदाई कर रहा था अगले दिन रीत सिमरन और अनुरीत कालेज पहुंची । मैंने क्विज के क्वार्टरफईनल की जीत पर मुझे जीत की बधाई देने आयी अनुरीत से मस्ती में भर कर किस की, फिर अनुरीत रीत के पास कैंटीन में गयी - अब आगे।

‘ओह होये सोनिये अकेले में क्या बात करनी है’ रीत ने सिमरन को मोढ़ा (कंधा) मारते हुए शैतानी से मुस्क़ुरते हुए कहा।

सिमरन ने आगे कोई जवाब नहीं दिया अब रीत और अनुरीत उठकर बाहर की और चल पड़े, सुख सिमरन के पास ही बैठा था, दोनों बाहर गए और एक खाली कमरे की तरफ चले गए सिमरन ने उसकी तरफ देखा तो उसने अपनी नज़र नीची कर ली और फिर धीरे से बोली – सुख मुझे पता है तुम मुझे पसंद करते हो ।

सुख ने सिमरन का हाथ अपने हाथों से पकड़ लिया। सिमरन ने अपने हाथ पीछे कर लिया । सुख ने उसका हाथ फिर पकड़ना चाहा । सिमरन पूरी तरह से हिल गयी क्योंकि आज तक किसी लड़के ने उसका हाथ नहीं पकड़ा था। फिर सुख बोला – सिमरन मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ यार। आई लव यू सो मच।

सिमरन ने अब हिम्मत करके अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा कर अपना हठ छुड़ा कर बोली – देख सुख हम कालेज में पढ़ने आये हैं अभी हमे पढ़ना है . जब टाइम आयेगा तब हम इस पर बात करेंगे ठीक है।

‘सिमरन मैं किसी को कुछ नहीं पता चलने दूँगा बस तेरे दिल में इतनी सी जगह है ये बहुत है मेरे लिए’ सुख को विश्वास नहीं हो रहा था कि सिमरन उससे ये कह रही थी इस लिए उसने खुश होकर कह दिया। ‘ठीक है फिर आज के बाद किसी से मेरे लिए नहीं लड़ोगे ना’ सिमरन मुस्कुराती हुई बोली।

सुख ने मोका देख सिमरन की कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ सिमरन को खींचते हुए अपने होंठों को उसके गाल पर रखने लगा तभी सिमरन ने अपना मुँह दूसरी तरफ मोड़ा और बोली – सुख मैंने ऐसे कम नहीं करने प्लीज़।

सुख ने ज़्यादा फ़ोर्स नहीं किया और सिमरन को छोड़ते हुए बोला – सिमरन आई लव यू सो मच।

‘प्लीज् अभी इसका टाइम नहीं है हमे पढ़ाई पर ध्यान देना चहिये, पहले कुछ बन जाए फिर देखेंगे ’ सिमरन ने अपनी नज़रें नीचे की और बोली।

‘सॉरी बाबा माफ़ करदे, चल अब चलते हैं’ सुख ने उठते हुए कहा।

सिमरन ने सुख की बात सुनी और उठकर सुख के साथ कैंटीन की और चल पड़ी रास्ते में मेरी टीम खड़ी हुई थी जैसे ही सुख और सिमरन हमारे पास से निकले तो सिमरन ने और सुख ने रुक कर हमे बधाई दी और मुस्कुरा कर आगे चल दी . पास खड़ा टीम का एक लड़का काला सिमरन के हिलते हुए चुत्तरों को देखते हुए फुसफुसाया – काके यार जुगाड़ तो ये भी काम का है।

‘बात तो तेरी ठीक है काले पर मुझे ये लड़की शरीफ लगती है’ मैंने सिमरन को देखते हुए जवाब दिया।

‘क्यों काके ये साली उस दिन बस में पीछे पीछे हो कर तेरे लंड का स्वाद ले रही थी पर साले इस नए लड़के से कुछ नहीं होगा जिसके साथ ये घूम रही है’ काले ने पेंट में से अपना लंड मसलते हुए कहा।

‘ये बात तो ठीक कहीं तूने पर बस की भीड़ में ऐस हो सकता है पर ये भी सच है इस जैसी कमाल की लड़की की तो मेरे जैसा ही अच्छे से तसल्ली करा सकता हैं " मैंने हंसते हुए बोला। "क्या कहते हो यारो मिशन प्रभु सिमरन शुरू किया जाये ?( ये मेरी टोली के साथी नहीं जानते थे की मैं सिमरन से भी किस कर चूका था ) "

‘हाँ भाई तू इसे भी मेरी भाभी बना दे ’ काला हंसते हुए बोला।

‘हाँ हाँ क्यों नहीं जल्दी ही ये भी कर दूंगा’ मैंने जवाब दिया।

फिर कैंटीन में हमने कुछ खाया पीया, उसके बाद बातें करते टीम , पार्किंग की और चल पड़ी।

इतने में विनोद सर को फ़ोन आया उन्होंने बताय यूनिवर्सिटी ने कुछ गेम रूल चेंज किये है अब हमे टीम से एक और खिलड़ी का नाम देना होगा , मैं अनुपमा का नाम देना चाहता था और अनुपमा थी भी यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा की टॉपर , पर वो अपने घर गयी हुई थी छुट्टियों पर , और एक रात में उसका आना और तयारी कर क्विज खेलन भी मुश्किल था , सर ने मुझे सिमरन का नाम सुझाया क्योंकि सिमरन उस परीक्षा में सेकंड रही थी . मेरा मन ख़ुशी से उछल गया, मैं नाटक करते हुए बोलै , ठीक है सर जैसा आप ठीक समझे . मैंने मदद के लिए कुछ टॉपिक में मधु मैडम का नाम सुझाया .

सर ने सिमरन से बात करने की बात की और पूरी हेल्प का वादा किया और मधु मैडम की ड्यूटी टीम के साथ लगवा दी .

सुख और सिमरन कैंटीन में जाकर रीत और अनु के साथ बैठ गए, उन्होंने बर्गर और कोल्ड ड्रिंक मंगवाई और आपस में बातें करने लग गए,उससे पहले अनुरीत ने रीत को यह बताया था कि मुझे बताया है कि तूने उससे दोस्ती करने के लिए हाँ कर दी है।

इतने में अनुरीत के मोबाइल फोन पर मेरी कॉल आई और उसने फोन पिक करते हुए कहा।

अनुरीत – हाँ जी कहाँ हो?

मैं – मैं तो पार्किंग में हूँ तू बताता तू कहाँ है?

अनुरीत – मैं कैंटीन में हूँ।

मैं – अच्छा एक काम कर रीत को लेकर पार्किंग में आ कोई बात करनी है उससे।

अनुरीत – क्या बात करनी है ?

मैं – यार बस उसे ले आ ?

अनुरीत – ठीक है।

अनुरीत ने फ़ोन काटकर अपने फ़ोन पर्स में डाला और रीत से बोली – चल रीत काका बुला रहा है।

‘क्या हुआ अब उसे’ रीत अपना मुँह बना कर बोली।

‘यार तू चल तो सही अनुरीत उसकी बाजू पकड़ती हुई बोली।

रीत और अनुरीत सिमरन और सुख को इंतज़ार करने का कहकर पार्किंग की तरफ़ चल पड़ी।

पार्किंग में कोने में मेरी कार खड़ी हुई थी। रीत और अनुरीत को आते देख काला कार से बाहर निकल गया और जिससे अनु और रीत कार के पास आए तो काला बोला – रीत काका अंदर है कार में।

रीत ने कार का दरवाजा खोल लिया और अंदर बैठ गई। मैं कार की पिछली सीट पर ही बैठा था। मैं ने रीत के अंदर बैठते ही कहा – क्या हाल है रीत।

‘वादिया है जी आप सुनाओ’ रीत ने जवाब दिया।

‘रीत आई लाइक यू अनु ने तुझे बताया ही दिया होगा’ मैंने रीत का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा।

‘हाँ बताया था’ रीत ने शर्मिंदगी हुए जवाब दिया।

‘अच्छा अपना नंबर तो दे दे’ रीत के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

रीत ने अपना नंबर मुझे बताया और मैंने रीत का नंबर अपने फोन में सेव कर लिया और बोला – चल रीत अब हम दोनों एक फोटो ले लेते हैं।

‘नहीं मैं नहीं मैं नहीं’ रीत अपना मुँह अपने हाथ से छुपते हुए बोली – नहीं प्लीज मैंने कोई फोटो नहीं लेनी।

मैंने फट से रीत की बात मान ली और अपना फोन अपनी जेब में डाल लिया और अपने दोनों हाथों से रीत को अपनी तरफ खींच लिया। रीत अब मुझसे सीधी चिपक चुकी थी उसके बूब्स मेरी छाती पर लग रहे थे और मैं उसके मुलायम मुलायम बूब्स को महसूस कर रहा था। मैंने कहा , यार अब जीत की ख़ुशी में मुँह ही मीठा करा दे और अपने होठ रीत के होठों पर रख के उसके होठों को चूसने लग गया। रीत ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी किसी लड़के को किस करने लग जाएगी पर अब वह कुछ नहीं कर सकती थी क्योंकि मैंने ने उसे अपनी बाहों में बड़ी मज़बूती से पकड़ा था इसलिए रीत अब बड़े मजे में अपने होंठ चुसवा रही थी।

इतने में मेरा एक हाथ रीत की जांघ की तरफ आ गया और अपने हाथ रीत के जाभ पर फेरने लग गया मैं रीत के होंठ भी चूस रहा था और उसके जांघ की गर्मी के भी मजे ले रहा था पर रीत ने अपने हाथ से मेरा हाथ अपनी जांघ से हटा दिया और अपने होंठ उसे अलग करके बोली – बस अब मुँह मीठा हो गया ,चलू. मुझे जाना होगा जाने का टाइम हो गया है।

मैं रीत से ज़्यादा जल्दबाजी नहीं करना चाहता था इसलिए रीत को जाने दिया अब रीत अपने कपड़े ठीक करके मेरे गाल पर किस कर बोली आपकी यही बट सबसे अच्छी ही , मेरे कहते ही मान जाते हो, फिर कार से बाहर निकली और अनुरीत से बोली – चल अनु चलते हैं अब।

‘लगता है आज स्टैम्प लग गई होंठों पर’ अनुरीत ने रीत से चलते हुए बोली।

‘चुप कर जा सिर्फ तेरे चक्कर के कारण मुझे दो बार अपने होंठ चुसवाने पड़ रहे हैं’ रीत ने अणु को मुक्का मरते हुए कहा।

‘अच्छा जी फिर मजे भी तो तू ही ले रही है डबल - डबल’ अनुरीत ने कहा।

अब वो दोनों सिमरन और सुख चारों बस में वापस अपने घर जाने के लिए बस में बैठ गयी तभी प्रिंसिपल सर का सिमरन को फोन आया और उसे मेरी हेल्प करने के लिए कहा , सिमरन ने कहा सर घर जाने में देर हो जयेगी तब सर ने कहा मैंने आपके घर में बात में बात कर ली है , आप यूनिवर्सिटी आ जाऔ , मधु मैडम भी एक घंटे में आ जाएँगी , वे आपको कालेज कार में वापिस घर छोड़ देंगी. आप टीम रूम में जाईये, आप काके से बात कीजिये और उसे मेरा नम्बर भेज दिया । अब प्रिंसिपल सर के हुक्म से सिमरन बस से उत्तर वापिस यूनिवर्सिटी गयी ।बाकि तीनो घर चले गए .

रीत और अनुरीत अपने गाँव वाले बस स्टॉप पर उतर गई .रीत और अनुरीत अपने घर जा रही थी जिसे ही उन्होंने अगला मोड़ मुड़ा उन्होंने देखा कि आगे एक कार खड़ी है और जिसे ही वो मुड़ी तो कार का दरवाजा खुला और कार में से नीतू बाहर निकली नीतू ने अपनी स्कूल की ड्रेस नीले कुर्ता और सफेद सलवार डाली हुई थी.

नीतू को देख रीत और अनुरीत हेरान रह गई क्योंकि नीतू ने उन्हें बताया था कि उसकी किसी के साथ नहीं है पर उन्हें यह ज़रूर पता था कि उसकी सेटिंग विक्की के साथ थी.अब ये कार वाला पता नहीं कौन था ? नीतू जल्दी जल्दी अपने घर की और चल पड़ी।

रीत और अनुरीत भी अपनी गांड मटकती कार के पास से निकली कार में पहले से ही जाली लगी थी इस लिए वो दोनों अंदर कुछ नहीं देख पाई और कार वापस होकर वापस चली गई।

रीत बहुत हेरान होकर बोली – अनु इस नीतू को कौन छोड़ कर गया कार में।

‘मुझे क्या पता रीत आज उससे पूछेंगे’ अनुरीत ने भी बड़ी हेरानी से जवाब दिया।

‘हाँ यार पूछना तो पड़ेगा ही’ रीत ने जवाब दिया।


2
अब वो दोनों अपने अपने घर की और चल पड़ी।

गाँव के स्कूल के पास एक ग्राउंड था और ग्राउंड के पास काफ़ी ज़मीन खाली पड़ी थी जिसके कारण वह काफ़ी ज़्यादा घास फूस उगा हुआ था।

रमिंदर गुरप्रीत और उनका एक और दोस्त बहादुर तीनों वहा बैठकर भंग रगड़ रहे थे।

रमिंदर तो जट्टो का लड़का था और गुरप्रीत और बहादुर मजदूरों के परिवार से थे और गुरप्रीत की मम्मी की रमिंदर के ताया गुरमेल ने बहुत बार चूत मारी थी और बहादुर की मम्मी की रीत के पापा हरजीत ने काफ़ी बार चूत मारी थी. यह बात सारे गाँव वालों को पता था कि पर कोई भी मुँह पर नहीं कहता था।

एक साथ नशा करते करते रमिंदर की उन दोनों से अच्छी दोस्ती हो गई थी वो तीनों जायदातर एक साथ ही रहते थे और एक साथ ही घूमते थे। रमिंदर अपने हाथ में भंग रगड़ते हुए बोला – गुरप्रीत यार सुना कोई गाँव का नया कांड।

‘भाई कांड तो साले बहुत होते हैं पर बहनचोद हमें तो पता ही नहीं लगते’ गुरप्रीत ने भी भंग रगड़ते हुए जवाब दिया।

‘अच्छा चल फिर बता दे कोई नया सा कांड’ रमिंदर बोला।

‘भाई हमारे पड़ोस में है ना वो गुडू की लड़की प्रीत’ गुरप्रीत बोला।

‘हाँ हाँ बताता जा आगे’ परमिंदर सवाद लेते हुए बोला।

‘साली में बहुत आग है भाई अभी वो 9th क्लास में पढ़ती है’ गुरप्रीत ने कहा।

और बहादुर चुप चाप परमिंदर और गुरप्रीत की बातें सुन रहा था।

‘अच्छा सेटिंग है उसकी किसी के साथ’ परमिंदर बोला।

‘भाई अपने गाँव में तो नहीं है पर वो साथ वाले गाँव में पढ़ने जाती है और सुना है वो का कोई जट्टो का लड़का है उसने प्रीत बहुत बजाई है’ गुप्रीत ने बताया।

‘हाँ भाई हाँ मैंने भी सुना है अपने गाँव की 6 – 7 लड़कियाँ पढ़ने जाती हैं साथ वाले गाँव में और वो उन्होंने अपने गाँव का नाम रोशन किया है’ बहादुर बोला जो भी तक चुप था।

‘अच्छा और कौन कौन जाती है’ रमिंदर और सवाद लेते हुए बोला।

‘यह जो बलजीत की लड़की नीतू भी जाती है’ गुरप्रीत ने आगे बताया।

‘अच्छा वो साली तो बहुत काम की है यार’ रमिंदर ने गुरप्रीत की तरफ देखते हुए कहा।

‘नीतू तो बहुत बजाई है वो के लड़के ने’ बहादुर एक दम बोला।

‘अच्छा कौन है वो लड़का’ परमिंदर बोला।

‘यार कोई सोनी नाम का लड़का है मुझे अमन ने बताया था पहले सुना है उसके दोस्तों ने हमारे गाँव की लड़कियों के पूरे नजारे लिए हैं’ गुरप्रीत ने बताया।

‘तो सालों अब मुझे भी किसी की दिला दो अब’ रमिंदर ने अपने हाथों से भांग उतारते हुए बोला।

‘भाई तू टेंशन न ले लेते हैं कुछ तेरे बारे में प्रीत से बात करते हैं’ बहादुर बोला।

फिर वो तीनों एक साथ बैठकर सिगरेट पीने लग गए और आपस में बातें करने लग गए बातें करते करते उन्हें भांग का नशा हो रहा था। परमिंदर बोला – वो यार देखा जाए तो अपने गाँव में भी लड़कियाँ और आंटी एक से बढ़कर एक हैं।

‘हाँ भाई हाँ मैंने तो यहाँ तक सुना है कि नीतू की मम्मी गुरुद्वारे के साथ वाले माहाी से चुदती है’ गुरप्रीत बोला।

रमिंदर अपने हाथ से अपना लंड मसलते हुए बोला – हाँ भाई तू ठीक कह रहा है.

है ये बात तो मैंने भी सुनी है पर अब तुम मेरी बात सुनो।

‘हाँ भाई बोल हम सुन रहे हैं’ बहादुर बोला।

‘सालो मैंने भी कल रात एक चूत मारी’ रमिंदर ने सिरगेट का काश मरते हुए कहा।

‘क्यों झूठ बोल रहा है मेरे यार’ गुरपीत हँसते हुए बोला।

‘ओ बहन के लंड पहले मेरी पूरी बात सुन ले’ रमिंदर ने गुस्से में कहा।

‘हाँ भाई तू गुस्सा न हो बताता चल आगे क्या हुआ’ बहादुर बोला।

रमिंदर ने बहुत कम आवाज़ में बोला – भाई किसी को बताइए ना कल शाम को मैंने चाची और गुरमेल ताए को मोटर वाले कमरे में रंगे हाथों पकड़ लिया, ताए ने चाची को घोड़ी बनाया हुआ था और चाची की चूत मार रहा था।

रमिंदर की बात सुन गुरप्रीत और बहादुर के लंड खड़े होने शुरू हो गए।

तभी बहादुर बोला – भाई कौन सी चाची की बात कर रहा है तू?

‘हरजीत चाचा वाली यार’ परमिंदर बोला।

मनप्रीत के बारे में पता चलते ही दोनों ने अपने लंड अपने हाथ में पकड़ लिए और पैंट के ऊपर से ही मसलने लग गए।

और गुरप्रीत बोला – यार रमिंदर मनप्रीत चाची तो सबसे कमाल की है।

परमिंदर ने आगे बोलना शुरू कर दिया – चल छोड़ तू आगे सुन जब मैंने कहा ताया मैंने भी मारनी है पर उस टाइम तो चाची चली गई पर वो रात को वापस आई और मैंने और ताया ने उसकी अच्छे से ठुकाई कर दी।

‘हाय भगवान ऐसी जट्टी की मिल जाए तो मैं भगवान का लाख बार शुक्रिया करूं’ बहादुर अपना लंड मसलते हुए बोला।

‘साले गप्प कम छोड़ा कर समझा’ गुरपीत बोला।

रमिंदर ने अपना फ़ोन निकाला और कहा – सालों मुझे पता था तुमने मेरा विश्वास नहीं करना इस लिए मैंने अपने फ़ोन में चाची और ताए की वीडियो बनाई है।

‘यार दिखा तो शी फिर’ गुरप्रीत रमिंदर के पास होता हुआ बोला।

‘तेरी माँ का भोसड़ा साले पहले मुझे किसी नई और जवान लड़की की चूत दिलाओ फिर मैं दिखाऊंगा’ रमिंदर ने गुरप्रीत को पीछे करते हुए बोला।

‘ठीक है भाई प्रीत के साथ तेरी करते हैं पर उसके बाद वीडियो दिखानी पड़ेगी’ बहादुर ने कहा।

‘ठीक है फिर मैं पक्का दिखाऊंगा’ रमिंदर ने कह कर अपना फ़ोन वापस जेब में डाल लिया।

‘वेसे भाई तेरे चाचा की लड़की भी कम नहीं है’ गुरप्रीत ने सिगरेट का काश मरते हुए बोला।

‘कौन सी चाचा की लड़की की बात कर रहा है’ परमिंदर ने बोला।

गुरप्रीत ने अपनी सिगरेट परमिंदर को पकड़ी और बोला – रीत यार वो साली कमाल की जट्टी है जिसके नीचे आएगी ना वो धन धन कर देगी।

रमिंदर और रीत के घरवालों की पहले से ही दुश्मनी थी इस लिए वो उनके बारे में ऐसा वैसा पहले ही बोलता रहता था। इसके लिए गुरप्रीत की बात सुन कर बोला – साले वो रीत तो अभी तक पता नहीं कितनों के नीचे आ चुकी है और उसकी सील तो पता नहीं कब की टूटी हुई है।

बहादुर बोला – भाई तू ठीक कह रहा है कुछ दिन पहले ही मैंने और गुरप्रीत ने रीत और जस की बहन को कार में से उतारते देखा था गाँव के दूसरे मोड़ पर कार में एक लड़का था । बड़ी महंगी कार थी ..

‘भाई और क्या बताऊँ तुझे यहाँ तक अपने गाँव वाले भी कहते हैं कि रीत की अपने गुलशन के साथ है क्या पता उसने भी रीत की चूत भी मारी हो’ गुरप्रीत ने कहा।

‘हाँ यार क्या पता चलता है आज कल इन लड़कियों का तभी सालों की गांड पीछे से मोटी होती जा रही है’ रमिंदर ने जवाब दिया।

गुरप्रीत बोला – भाई तू जो मर्जी कह पर सालों की गांड बड़ी मस्त है अगर मुझे एक बार मिल जाए ना साली तस्सली करा देगी ।

रमिंदर उठा और बोला – चल ठीक है भाइयों मैं खेत की तरफ एक नज़र मार आऊँ शाम को मिलते हैं ग्राउंड के पीछे सामान ले आना मैं सिगरेट का पैकेट ले आऊँगा।

‘ठीक है भाई फिर शाम को मिलते हैं’ गुरप्रीत ने कहा।

अब परमिंदर अपने खेत की तरफ चल पड़ा।

जारी रहेगी
 

deeppreeti

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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–104

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की हमारी टीम क्विज का क्वार्टरफईनल जीत गयी और जीत की ख़ुशी में रीत ने मेरा मुँह मीठा करवाया और सेमीफइनल के लिए टीम में एक और स्टूडेंट यूनिवर्सिटी ने शमिल करने का नियम बनाया और तब टीम में सिमरन को शामिल करना तय हुआ - अब आगे।

मैं यूनिवर्सिटी में फटाफट अपने कमरे में फ्रेश होने गया और वापिस लाइब्रेरी में जा रहा था तभी मुझे सामने से एक लड़की दिखाई दी वो गजब थी . गोल्डी से भी सुंदर थी क्या फिगर थी उसकी.

आप पास खड़े लड़के इसी लड़की के बारे में मैं बात कर रहे थे .

-एक ने कहा -यार एक से बढ़कर एक पंजाबी माल है अपनी यूनिवर्सिटी में .

दूसरे ने कहा -भाई पंजाबी यूनिवर्सिटी तीन चीज़ों के लिए मशहूर है लड़कीया ... सोनी लड़कीया और बहुत सुंदर पंजाबी लड़किया . हाआ... .यूनिवर्सिटी में काफ़ी पटोला और बम लड़की पढ़ती है और कॉलेज में बी-टेक मिला कर काफ़ी सारे कोर्स हैं...

मैं वही रुक के उसे देख रहा हूँ

तभी दो सीनियर लड़के उसे छेड़ने लगे

मैंने सोचा निकल लेता हूँ यहाँ से सीनियर से क्यों पंगे लेना

पर तभी वो लड़के उसे छम्हिया टोटा वगरा उल्टे शब्द बोलने लगे

वो लड़की वहाँ से तेज़ चलने लगी पर वो लड़के भी उसके पीछे चल के उसे छेड़ने लगे

मेरा ये देख के खून खोला में उस लड़की के पास गया और उस लड़के को बोला

मैं-- भाई लोग क्यों एक लड़की को छेड़ रहे हो?

लड़का 1-- अबे तू फ्रेशर है ना, चल आगे चल अपना काम कर!

मैं-- अपना काम ही कर रहा हूँ, प्लीज इसे छेड़ना बंद करो

लड़का 2-- अच्छा अब तुम चूजे हमे बताओगे कि क्या करें हम!

लड़का 1-- चल निकल यहाँ से नहीं तेरी वाट लगा देंगे !

मैं-- तो तुम लोग नहीं मानोगे....

लड़का 1-- अच्छा चूजे धमकी वो भी हमें

लड़का 2-- चल बता क्या करेगा?

लड़की (मेरे कानों में)-- तुम क्या कर रहे....तुम मुझे मरवाओगे क्या?

मैं-- यही तो दिक्कत है सबकी, डरते बहुत हैं, तुम यही रुको इनको मैं देखता हूँ.

इतने में वो दोनों मुझे धक्का देने लगे, मैंने भी गुस्से में आ के एक लड़के के मुँह पे मुक्का मारा.

इतने में दूसरे लड़के ने मेरे मुँह पे मुक्का मारा मैं मुक्का बचा गया पर दूसरे ने पैर पर पैर मारा
अब कंट्रोल उनके हाथ में था तो एक ही लात से मैं नीचे गिर गया फिर दोनों ने मिलकर मुझे मारा .

इतने में उस लड़की ने चिल्लाया शुरू कर दिया फिर दो तीन लड़के के भाग के आये और मुझे बचाया, इन लड़को में एक लड़का सुनील भी था .

अब तक तो मेरे हालात खराब हो चुकी थी, मैं तब तक बेहोश हो गया.

मुझे होश आया और देखा तो मैं यूनिवर्सिटी की डिस्पेंसरी में हूँ.

मैंने रूम में देखा तो वहा शीना और सुनील भी थे.

सुनील -- और भाई आ गया होश, अब ठीक है ना.

मैं-- हाँ अब ठीक लग रहा है.

सुनील -- तू अब ये बता कि किसने तेरी कुटाई की मैं उसकी माँ बहन एक करता हूँ .

शीना -- सुनील आराम से उसे थोड़ी साँस तो लेने दो.

शीना अब मेरे बेड पे साइड में बैठ गई और मेरे माथे पे हाथ फेरने लगी

मैंने फिर उन दोनों को उस अनजान लड़की वाली पूरी बात बताई

सुनील -- नाम वाम कुछ पता है उन लड़को का?

मैं-- तू टेंशन न ले उनकी मैं बाद में वाट लगाऊंगा.

सुनील - दो से पिट के आ गया, अब क्या उखाड़ लेगा उनका.

शीना -- इस मामले में जिस लड़की की बजह से ये सब हुआ , काके पहले ये बता वो लड़की कौन थी जिसके लिए तू हीरो बनने गया था .

मैं-- नाम तो नहीं पता उसका,

सुनील -- लैला ले लिए मजनू ने मार खाली और जिसके लिए मार खाई उसका नाम भी नहीं पता, हाय रे मेरे यार !

मैं-- ये छोड़ ये बता मुझे कोई सीरियस चोट तो नहीं लगी ना

शीना -- नहीं....चोट नहीं है बस थोड़ी सुजन है तेरे हाथ पे, डॉक्टर ने बोला है एक दिन आराम कर बस

सुनील -- एक काम कर तू मेरे फ्लैट चले जा एक दिन की छुट्टी ले के थोड़ा आराम सही रहेगा.

मैं-- भई तुझे पता है की कल क्विज का सेमिफाइनल है , अब आराम नहीं कर सकता, मुझे टीम के साथ रह तयारी करनी है .

सुनील - ये बात उन बदमाशों से पंगा लेने से पहले नहीं सोची तूने ? खैर मैं डाक्टर से तेरे लिए कोई दवाई लाता हूँ, सुनील डाक्टर से बात कर कुछ दवाई ले आया और मुझे दी .

मैं - शीना और सुनील प्लीज ये झगड़े वाली बात किसी को मत बताना, खास कर किसी सर या हमारी मधु मैडम या मेरी टीम के मेंबर्स को , टीम परेशान हो जाएगी , और मेरी एक और मदद का दे सुनील .

सुनील - भाई तूने मुझे यूनिवर्सिटी के बैन से बचाया है , और मैं समझता हूँ तूने ये क्यों किया , मैं भी गोल्डी के इश्क़ में पागल हो गया था . बता क्या करना है .

मैं - बस सेमीफइनल की तयारी में मेरी मदद कर दे और मुझे अपने ग्रुप में शामिल कर ले .

सुनील- ठीक है यार तेरे लिए कुछः भी और डिस्पेंसरी से बाहर चला गया फ़ोन करने केे लिए

अब रूम में, मैं और शीना थे, शीना मेरे माथे पे बच्चे की तरह हाथ फेर रही थी

मैं-- शीना तुम ये बच्चे की तरह हाथ क्यों फेर रही हो?

शीना -- ओह हो तुम्हें मैं बिल्कुल दिमाग नहीं है, ये एक प्यार करने का तरीका होता है

मैं-- वो मेरे पे बड़ा प्यार आ रहा है किस लिए मोहतरमा ?

शीना -- क्यों कि एक लड़की को उन लड़कों से बचाया

मैं-- वो तो मेरा फर्ज है बल्की ये सब लड़कों का फर्ज होना चाहिए

हम दोनों बात ही कर रहे थे कि रूम में एक लड़की आई.

जब मैंने देखा तो ये वही जिसके कारण मैं यहाँ लेटा हुआ था

मैं-- शीना ये वही लड़की है

लड़की-- नमस्ते, क्या तुम अब ठीक हो, मैं तुम्हें थैंक यू बोलने आई हूँ.

मैं-- थोड़ा ठीक लग रहा है अब, थैंक यू की कोई ज़रूरत नहीं है वो मेरा फर्ज था, वैसे अपना नाम तो बताओ, सब पूछ रहे हैं जिसके लिए मार खाई उसका नाम ही नहीं पता?

लड़की-- सॉरी वो मैं नाम बताना भूल गई, मेरा नाम अंजलि है, और आपका

-- मेरा नाम गौरव है साइंस बैच से-

शीना (फटाक से हस्ती हुई बोली)-- और मेरा नाम शीना , और काका ओह सारी गौरव मेरा बॉयफ्रेंड है.

-- शीना क्या कर रही हो -- ये क्या बोल रही हो तुम, ये बताने वाली चीज़ है क्या?

शीना -- ओह हो काके आज सुबह तो तुमने मेरा हाथ कस के पकड़ा था ना, वो भूल गए, इतनी जल्दी ?

मैं-- वो टाइम पास था.

शीना -- तो मैं भी तो अभी मज़ाक कर रही हो, क्यों जली ना तुम्हारी, सारी अंजलि ये सब मजाक था ! हम सब दोस्त हैं

अंजलि हम दोनों को कुसर फुसर करते देखती रही.

शीना (सब से)-- अंजलि , मैं मज़ाक कर रही थी, तुम बताओ किस बैच से हो.

अंजलि -- शीना मैंने आज ही एडमिशन लिया है -मैं ... कालेज में साइंस स्टूडेंट हूँ, और तुम दोनों?

मैं-- शीना और इसका एक बॉयफ्रेंड सुनील पड़ोस के कालेज में हमारे सीनियर है और मैं तुम्हारे ही कालेज में हूँ हम एक ही बैच में हैं.

अंजलि -- आप सभी से मिलकर अच्छा लगा, तुम अपना ध्यान रखना और बाय मैं चलती हूँ

अंजलि फिर कमरे से चली गई

शीना -- हूँ ऊह अब पता चला कि तुम्हारा क्या फर्ज था हाँ..

मैं-- कुछ समझा नहीं मैं.

शीना -- और नादान मत बनो, तेरी आँखों ने सब बता दिया कैसे उसको एक ही नज़र से देख रहा था.

मैं-- तुझे क्यों मिर्च लगी, जैसे मर्जी देखु उसको मैं.

शीना -- मुझसे सुंदर लगी तेरको वो, सेटिंग कर ले उससे .


जारी रहेगी
 
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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–105

कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की हमारी टीम क्विज का क्वार्टरफईनल जीत गयी और जीत की ख़ुशी में रीत ने किस करके मेरा मुँह मीठा करवाया और सेमीफइनल के लिए टीम में एक और स्टूडेंट सिमरन को शामिल करना तय हुआ - फिर मेरा एक नई खूबसुरत लड़की अंजलि के लिए कुछ सीनियर लड़को से मेरा झगड़ा हुआ. अब आगे।

फिर सुनील अंदर आया और उसने बताया की सेमीफइनल में यूनिवर्सिटी के प्रोफेस्सर नरेंदर क्विज के सवाल पूछेंगे और हम लाइब्रेरी गए , वहां जुली मिली जिसने मुझे शतरंज की किताबे दी थी , उसने मुझे चुपके से बताया की नरेंदर सर ने हालफिलहाल में कौन से बुक्स लाइब्रेरी से ली है. हमने उन्ही विषयो की किताबे ली और फिर मैंने सुनील को टीम से मिलवाया, जिससे सुनील और गोल्डी में दोस्ती हो गयी।

जैसे ही मैं लाइब्रेरी बिल्डिंग के बाहर निकला और सामने देखा मुझे सिमरन दिखी और उसने भी मुझे देखा।

सिमरन-- हेलो काके कैसे हो ?क्वाटरफिनल में तुमने बहुत अच्छा किया , बहुत बधाई !

मैं-- सिमरन मैं तो फिट हूँ . और उसे कुछ किताबे दे कर हम टीम रुम में गए और हमने तयारी की . ।

कुछ देर बाद मैंने सिमरन से कहा - आप इनकी अच्छी तयारी कर लो , कुछ और चाहिए हो तो मुझे बताना ।

सिमरन-- हाँ ज़रूर....।

सिमरन भी थोड़ा ब्लश करने लगी थी...।

सिमरन-- तुम फ्री हो तो कैफे चले कॉफी पीने?

मैं-- कोई इतनी सुंदर लड़की कॉफी के लिए अगर पूछे उसे ना नहीं कर सकते।

सिमरन-- तुम भी न बहुत मज़ाक करते हो चलो।

फिर हम दोनों बात करते हुए कैफे जाने लगे, रास्ते में मुझे वही दो सीनियर मिलें।

लड़का1-- और हीरो जी अब ठीक हो गया क्या?

लड़का 2-- और इस छमिया को कहाँ घुमा रहे हो?

मुझे फिर से गुस्सा आया पर मेरा मन पीटने का नहीं था।

इतने में कुछ बोलने वाला था कि सिमरन ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली छोड़ो यहाँ से चलो।

फिर हम दोनों वहाँ से निकलने लगे।

लड़का 1-- बंदी के पल्लू के पीछे चुप के भाग रहा है।

फिर दोनों सीनियर हँसने लगे।

मुझे सही में काफ़ी गुस्सा आ रहा था।

सिमरन ने फिर मेरा हाथ कस के पकड़ा और कैफ़े ले गई, हमारे पीछे बाकी टीम मेम्बेर, सुनील और शीना भी आ रहे थे इसलिए सीनियर चुप चाप वहां से खिसक गए ।

हम दोनों कैफ़े में जाकर बैठे।

मैं-- सिमरन तुमने मुझे रोक के गलत किया उनको मैं सबक सिखाता हूँ।

सिमरन-- तुम भी ना मेरी वजह से किसी से झगड़ा मत करो ।

मैं-- यार वो तुम्हें चमिया बोल रहे थे।

सिमरन-- मुझे बोल रहे थे तो तुम्हें क्यों मिर्च लगी।

मैं कुछ नहीं बोल पाया।

सिमरन-- मैं तो मज़ाक कर रही थी रिलैक्स।

मैं-- सिमरन तुम मेरे बैच में आ जाओ फिर तुम हमारे साथ सेफ रहोगी।

सिमरन-- क्यों तुम मेरे बॉयफ्रेंड बनकर मेरी रक्षा करोगे।

मैं-- तुम भी ना कुछ भी बोल दोगी।

सिमरन-- क्यों तुम मेरे बॉयफ्रेंड नहीं बनोगे क्यों शीना गोल्डी पसंद है तुम्हें इसलिए अब समझी मैं।

मैं-- यार कितनी बार कहाँ है शीना सुनील की बंदी है और सुनील गोल्डी पर फ़िदा है और उनमे दोस्ती भी हो गयी है , तुम्हारा भी कोई और हैंडसम बॉयफ्रेंड पहले ही होगा।

सिमरन--- ओह हो, अब मेरा बॉयफ्रेंड पूछा जा रहा है, ये बताओ कि तुम हैंडसम नहीं हो क्या?

मैं-- मैं कहाँ इतना हैंडसम हूँ, तुम खुद ही बताओ।

सिमरन-- तुम हैंडसम, समझदार और बहादुर हो नहीं पता क्या, पुरे कालेज और यूनिवर्सिटी में तुम्हारी नॉलेज के सब कायल है , मुझे प्रिंसिपल सर ने फोन क्र तुम्हारे साथ टीम में शामिल किया है ।

मैं-- आज नींद नहीं आएगी इतनी तारीफ़ कर दी है तुमने।

सिमरन-- तुम ये बताओ, तुम लड़के लोग कॉलेज में मेरे बारे में ज़रूर बात करते होंगे।

मैं-- लड़के तो बात करेंगे ही, तुम कॉलेज की सबसे सेक्सी फ्रेशर हो।

सिमरन-- अब ये बताओ कि क्या बात करते हो।

मैं-- बात मैं नहीं करता पर मैं उनकी बातें सुनता हूँ ज़रूर हूँ।

सिमरन-- क्या सुनते हो ये भी बता दो।

मैं-- तुम्हें सुन के अच्छा नहीं लगेगा रहने दो।

सिमरन-- बोलो ना जल्दी।

मैं-- तुम्हें सब अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहते हो और तुम्हें पंजाब का एक नंबर माल कहते हैं।

सिमरन-- सब मतलब तुम भी मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहते हो।

मैं--- मैंने कहाँ ना मैं सिर्फ बातें सुनता था।

सिमरन-- तो तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड नहीं बनाना चाहते सही कहाँ ना मैंने? मैं-- तुम मेरे मुँह से क्या सुनना चाहती हूँ, सीधा बोलो मुझे बताओ मत फसाओ।

( मैं मन में -इसमें क्या शक है मैं भी सबकी तरह तुम्हे पसंद करता हूँ, ये कहता इससे पहले ही रिया हमरे पास आ गयी । )

सिमरन--- चलो मैं चलती हूँ बाय।

सिमरन फिर कैफ़े से जा रही थी।

मैं उसकी गांड को जींस में बंद देख रहा था क्या शेप में थी ।

सिमरन ने उसी वक़्त पीछे मुड़कर मुझे घूरते हुए देखा और मुस्कुरा कर अपने रूम की तरफ निकल गई ।

मेरे को कुछ समझ में नहीं आया इसको मैं पसंद हूँ या ये कोई गेम खेल रही है? पर जिस तरह से उसने मुझ से बात की थी उससे मेरा मन बहुत खुश था ।

मैं भी सीधा हॉस्टल की तरफ निकल गया मैंने देखा में अकेला ही हूँ, मैं फ्रेश होकर लोअर पहन के नीचे लड़की ताड़ने चला गया. मैं यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग के पास घूमने लगा।

यूनिवर्सिटी में क्लॉस खत्म होने के बाद सब बिल्डिंग को ताला लगा दिया जाता है, ताकि कोई हॉस्टल वाला उसमें ना जा सके।

मैं ऐसे ही घूमता रहा और तभी मेरी नज़र मेरी एक बिल्डिंग पे गई।

जिसके मेन दरवाज़े पे ताला था पर ताले में ही चाबी लगी थी लगता था गेट कीपर चाबी ताले में ही भूल गया था।

मैंने ऐसा पास देखा कि कोई है या नहीं, उस टाइम में भी अकेला था।

मैंने सोचा क्यों ना अंदर जाकर देखा जाए।

मैंने ताले से चाबी निकाली और बिल्डिंग का मेन दरवाज़ा खोला और जल्दी से अंदर चला गया और ताला अंदर से चाबी से बंद कर दिया।

मैंने अंदर जाकर देखा तो पूरी बिल्डिंग खाली थी।

और सारी लाइटें बंद थीं तो अंधेरा भी था।

मैंने बिल्डिंग का एक राउंड मारा और कन्फर्म किया मेरे इलावा कोई नहीं है।

मेरे मन में बहुत तूफानी करने का ख्याल आने लगा।

मैंने सोचा क्यों ना अपनी क्लास में नंगा घूमा जाए और नंगी फोटो खिंची जाए।

मैंने अपने सारे कपड़े गेट पे ही उतारे और पूरा नंगा हो गया मैंने अपना मोबाइल निकाला और रिकॉर्डिंग ऑन कर ली कि मुझे सिमरन की याद आयी और मेरा लंड खड़ा होने लगा, यह काफी अलग एक्सपीरियंस था मेरे लिए. मैं मुठ मारने लगा।

मैं यह सोच कर मुठ मारने लगा कि क्लास में सिमरन मुझे ब्लो जॉब दे रही है।

मैंने सोचा अगर ऐसी ही हो तो मज़ा आ जाता।

इतने में मेरी मुठ निकलने वाला हो गया ।

तभी मुझे मेन गेट खोलने की आवाज़ आने लगी।

मेरा अब पूरा मज़ा किरकिरा हो गया और सोचने लगा कि मुझे कोई नंगा न देख ले।

मैं आराम से चल के गेट के पास गया और एक दीवार के पीछे छुप गया और देखने लगा ।

मैंने देखा कि ये और कोई नहीं बल्की गेटकीपर अंदर आ रहा है।

शायद उसको याद आया होगा कि वो चाबी भूल गया था ताले में. उसको बाहर ताले में चाबी नहीं मिली और वो शायद डुप्लीकेट चाबी से अंदर चेक करने आया था ।

उसने अंदर आकर आवाज़ की कि कोई अंदर है क्या।

पर मैं नंगा उसके सामने नहीं जा सकता था तो मैं चुप रहा।

फिर गेटकीपर वापस बाहर जाने लगा और जाती टाइम उसकी नज़र मेरे कपड़ों पे पड़ी।

उसने मेरे कपड़े अपने हाथ में लिए और कुछ सोचने लगा, मुझे लगा बेटे आज तो काम से गए।

पर गेटकीपर मेरे कपड़े अपने साथ बाहर ले गया और गेट बाहर से लॉक कर दिया।

चाबी तो मेरे पास थी पर मेरे कपड़े चले गए थे और मैं नंगा यही फस गया था.।

जारी रहेगी
 

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DEEP PREET
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पंजाब दियाँ मस्त रंगीन पंजाबना–पार्ट–106


कहानी का अगला भाग-पिछले भाग में आपने पढ़ा की सेमीफइनल के लिए टीम में एक और स्टूडेंट सिमरन को शामिल करना तय हुआ - फिर मेरा एक नई खूबसुरत लड़की अंजलि के लिए कुछ सीनियर लड़को से मेरा झगड़ा हुआ.फिर मैंने सिमरन से बाते की और मैं नंगा यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग में फस गया अब आगे।

गेटकीपर मेरे कपड़े अपने साथ बाहर ले गया और गेट बाहर से लॉक कर दिया।

चाबी तो मेरे पास थी पर मेरे कपड़े चले गए थे और मैं नंगा यही फस गया था।

मैंने सोचा सुनील या गोल्डी को कॉल करु , पर सुनील या गड़ी और शीना किसी का फोन नहीं लगा....।

मैं अब सोचने लगा कि क्या करा जाए, मैं फिर गेट के पास गया और बाहर देखा तो ऐसा पास कोई नहीं था. हल्का अँधेरा था ।.

मैं छिपता हुआ बिल्डिंग से बाहर आया और गेट को चाबी से लॉक करके एक जगह के पीछे छिप गया।

शाम का टाइम था हल्का अँधेरा तह तो किसी की नज़र नहीं पड़ती मेरे पे आसानी से.।

मैं अब किसी जान बचाने वाले को देखने लगा जो मेरी मदद कर सके।

मैं जल्दी के पीछे से छिप देख ही रहा था कि किसी ने मेरे पीछे से मेरे कंधों पर हाथ रखा।

मुझे शॉक लगा कि किसने मुझे नंगा देखा लिया।

मैंने हिम्मत करके पीछे देखा तो कोई लड़की खड़ी थी।

लड़के ने जिम वाले कपड़े और जिम बैग ले रखा था शायद जिम से वापस आ रही हो।


मैंने उसे पहले गोर से देखा तो ये हमारी सीनियर थी।

इसका नाम निमरत था, सब कॉलेज के लड़के इसे जानते थे क्यों कि ये कॉलेज की स्टूडेंट गर्ल्स क्लब की प्रेसिडेंट थी।

निमरत दिखने में सेक्सी थी पर उसकी चूचियां और गांड ठीक थे, ना ज्यादा बड़े और ना ही छोटे।

निमरत .... कौन हो तुम और नंगे क्यों खड़े हो।

मैंने एक दम से अपना लंड छुपाया और मैंने मोबाइल और चाबी पहले ही छुपा दी थी ।

मुझे अब झूठ बोलना था क्यों कि सच इसको नहीं बता सकता था।

मैं.... वो किसी सीनियर ने मेरी रेंगिंग ले ली और मेरे कपड़े ले के भाग गए।

निमरत .... तो तुम फ्रेशर हो और तुम्हारी रैगिंग हुई है।

मैं.... हाँ, प्लीज़ मेरी हेल्प करो, मुझे यहाँ कोई और नंगा न देख ले।

निमरत ... तुम मुझे जानते हो मैं कौन हूँ।

मैं... हाँ आप निमरत हो, क्लब की प्रेसिडेंट हो।

निमरत -- ठीक है, एक मिनट रुको मेरे बैग में मेरी जिम शर्ट है पसीने से गीला है चलेगी क्या।

मैं.... सुंदर लड़की का पसीना..पसीना नहीं होता, जल्दी दे दो कोई भी कपड़ा।

निमरत -- अच्छा मेरे पे लाइन मर रहे हो, इस टाइम पे भी ।

हम बात कर ही रहे थे कि मुझे सामने से लड़के का एक ग्रुप आता हुया दिखा।

मैंने जल्दी से निमरत को झाड़ियां मैं खींच और उसकी कमर में हाथ डाल के किस करने के एक्टिंग करने लगा।

निमरत को एक दाम शॉक लगा कि मैंने ये क्या किया।

फिर वो लड़के झाड़ियां के पास से गुजरे और निमरत और मुझे किस करते हुए देख के कुछ कमेंट करने लगे।

लड़का 1-- देखो भाई लोग इनका तो झाड़ियां के पीछे चूमा चाटी चल रहा है।

लड़का 2-- लड़की भी पटाखा है गांड तो देखो इसकी मन कर रहा है मैं अभी मसल दूं।

निमरत को ये सब सुन गुस्सा आया, पर मैंने उसे कस के पकड़ रखा था ।

फिर वो ग्रुप वहाँ से चला गया।

मैंने अब निमरत को छोड़ा और चैन की साँस ली।

निमरत -- ये सब तुम क्या कर रहे थे।


मैं-- वो सॉरी, मैं ये नहीं करता तो वो मुझे नंगा देख लेते।

निमरत -- और वो सब मेरे ऊपर क्या कमेंट कर गए।

मैं-- जो उन्हें दिखा उन्होंने बोला, पर मैं फिर से सॉरी माँगता हूँ ।

निमरत -- ठीक है....और तुम्हारी गन ने ये क्या किया।

निमरत ये बात मेरे लंड की तरफ देखते हुए बोली।

पहले मैंने हाथ से लंड छुपाया और देखा कि निमरत के ब्लैक शॉर्ट्स पे निशान पड़ गए थे .।

मैं-- सॉरी इसके लिए भी वो तुम्हें देखकर कि ये खड़ा हो गया होगा।

निमरत -- नहीं तुमने ये जानबुझ के किया है, ऐसे क्या किसी को देखते ही मुठ छोड़ देगा ये।

मैं-- जानबुझ के क्यों करूंगा प्लीज कपड़े दे दो मुझे कोई और नंगा न देख ले।

निमरत -- नहीं पहले दिखाओ कि कैसे इसने खड़े खड़े ही निकल गया तुहारा ।

मैंने अब अपने हाथ लंड से हटाए।

मैं-- लो खुद चेक करलो जल्दी।

मेरा लंड अब पूरा खड़ा हो चुका था और उसके तोप पे मुठ के निशान थे।

निमरत मेरा खड़ा लंड ध्यान से देख रही थी फिर बोली।

निमरत -- यार तुम्हारा तो लंड काफी बड़ा है, एक काम करो तुम आज रात मेरे साथ गर्ल्स हॉस्टल चलो... तुमसे एक काम है।

मैं-- क्यों चलु , मुझे नहीं जाना पता नहीं तुम क्या करोगी मेरा।

निमरत -- ठीक है मैं अभी सबको यहाँ बुलाती हूँ कि एक बंदा नंगा खड़ा है यहाँ।

मैं-- पागल हो गई हो क्या, मैं गर्ल्स हॉस्टल कैसे जा सकता हूँ, मुझे एंट्री नहीं मिलेगी।

निमरत -- वो मेरी समस्या है चल, मेरी ये शर्ट से लंड ढक और चल।

निमरत ने मुझे एक शर्ट दी और मैंने उस शर्ट को लंड पे लपेटा और चुपके से मोबाइल और चाबी शर्ट में छुपा ली।

मैं-- निमरत मुझे अभी भी कोई आधा नंगा देख लेगा।

निमरत -- ओह हो, तुम रुको मैं किसी को फोन करके के बुलाती हूँ।

निमरत ने किसी लड़की को फ़ोन करके बुलाया और वो निमरत को कपड़े दे कर चली गई।

निमरत -- लो ये जींस पहनो और मुँह पे ये चुन्नी बाँध लो ।

निमरत ने मुझे लेडीज़ जींस और टीशर्ट दी मैंने सब पहन लिए।

मैंने सोचने लगा कि आज क्या करने वाली है ये लड़की।

निमरत -- चलो मेरे पीछे आना बाकी मैं संभाल लुंगी।

निमरत की गर्ल हॉस्टल में काफ़ी पहुँच थी इसलिए मैं आसानी से मुँह छुपा छुपा के उसके कमरे में पहुंच गया ।

निमरत -- चलो हटा लो चुन्नी लो आ गए मेरे कमरे में।

मैंने देखा कि उसके कमरे में एक डबल बेड है और हम दोनों का इलावा कोई और कमरा मैं नहीं था.।

मैं -- निमरत जी अब ये बताओ कि तुम मुझसे चाहती क्या हो।

निमरत -- मैं तो बस खेलना चाहती हूँ, चल अपने सारे कपड़े उतार।

मैं-- तुम ये सब अपने बॉयफ्रेंड के साथ करना मुझे जाने दो।

निमरत -- उसके साथ सब कर चुन्की हूँ अब तेरे साथ करना है चल कपड़े उतार।

मैंने फिर अपने सारे कपड़े उतारे और कमरे में पूरा नंगा हो गया।

निमरत अपनी अलमारी से कुछ निकालने लगी........उसने एक तौलिया निकाला और मुझे दिया।

निमरत -- चल मेरे साथ बाथरूम में।

मैं-- मैंने तो कपड़े निकाल दिए फिर से पहनने होगे।

निमरत -- नहीं तुम नंगे ही चलो।

मैं-- निमरत पागल हो गई क्या कोई देख लेगा।

निमरत -- साले फट्टू लड़की ही देखेगी ना चल ।

मेरे पास हाथ करने का इलावा कोई ऑप्शन नहीं था।

निमरत ने गेट खोला और कॉमन बाथरूम की तरफ जाने लगी।

रास्ते में काफी लड़कियां बाहर खड़ी थीं मुझे बहुत शर्म आ रही थी।

मैं अपना लंड छुपते हुए और सिर नीचे करके चलता रहा निमरत के पीछे।

सब लड़कियां मुझे नंगा देख बात करने लगी थीं।

फिर हम दोनों बाथरूम पहुंचें, कॉमन बाथरूम में 5 नहाने के और 5 वॉश रूम थे और बाहर वॉश बेसिन थे।

पूरा बाथरूम में कोई नहीं था।

निमरत ने फिर एक दम अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे सामने पूरी नंगी हो गई।

मैंने उसको ऊपर नीचे घुर रहा था क्या गोरी चीटटी टाइट माल थी वो।

निमरत -- तो कैसे लगी मैं।

-- सेक्सी माल लग रही हो।

निमरत -- हाँ वो तुम्हारे लंड ने बता दिया।

मैंने नीचे देखा तो मेरा लंड पूरा खड़ा था।

निमरत -- चल शावर में मुझे नहला जल्दी से।

-- क्या मैं तुमको नहला दूँ ।

निमरत -- हाँ क्यों तुमको ये काम नहीं करना।

-- कोई चूतिया ही ना करेगा चल धननो।

निमरत -- ओह हो धननो चलो मेरे रजा बजा दो मेरा बाजा।

जिंदगी में पहली बार कोई लड़की सामने से बुला रही अपनी मरवाने को।

मैं अब सब शर्म भूल गया और निमरत को गोदी में उठा लिया .मैंने उसको उसकी गांड से उठाया और कसम से लड़कियों की गांड होती ही सॉफ्ट है।

मैं उसे एक बाथरूम में ले गया और उतर के बाथरूम का गेट बंद करने लगा।

निमरत -- रुको बंद क्यों कर रहे हो पूरे बाथरूम में इस टाइम कोई नहीं आएगा।

-- निमरत क्या बात है प्रेसिडेंट का राज है यहाँ।

मैंने फिर शावर ऑन किया, और निमरत को अपने गले में लिया और उसकी गांड अपने हाथ से मसलने लगा।

मैं-- निमरत तुम्हारे बंदे का क्या नाम है?

-- निमरत -- तुम्हें इससे कोई मतलब नहीं तुम बस मुझे इस लंड की सवारी करवाओ।

मैं-- तो मेरा लंड तुम्हारे बंदे से बड़ा है... बात यही है ना?

निमरत -- हाँ और मुझे बड़ा लंड लेना पसंद है, तेरी तो निकल पड़ी अपनी सीनियर की गांड मारेगा अब।

मैंने निमरत को गोद में उठाया और शावर में उसको लिप किस करने लगा।

निमरत को तो किस बहुत अच्छे से आता था, उसने अब किस का कंट्रोल लिया और मेरे मुँह में जीभ डाल डाल के किस करने लगी।

किस करने से मेरा लंड टाइट हो गया और वो नीचे निमरत की गांड को टच करने लगा।

मैंने और निमरत ने 5 मिनट किस किया।

मैंने अब शावर बंद किया और निमरत को कॉमन एरिया में ले गया और वॉश बेसिन पे बैठा दिया।

मैं-- निमरत हर लड़कियों की चूचियाँ सॉफ्ट क्यों होती हैं।

निमरत -- हर किसी की नहीं देखो मेरी चूचियां मीडियम साइज़ और टाइट हैं, और किसी किसी की चूचियां बड़ी होती हैं और सॉफ्ट भी वो थोड़ी लटकती हैं।

मैं-- हाँ तुम्हारी चूची तो बिना ब्रा के भी टाइट है, चलो अब इनका रस पीकर देखता हूँ।

मैंने सीधे अपना मुँह निमरत की चूचियों पे रखा, और चूची मुँह के अंदर डाल के चूसने लगा।

निमरत की पूरी चूचियां एक टाइम में मेरे मुँह में आ जाती थीं।

मैंने इसका फ़य्यादा उठे हुए ज़ोर से चाटना और काटना शुरू किया।

निमरत -- आह! जोर से चूसो और......।

मैंने फिर दोनों हाथों से चूची पकड़ी को मुंह में लेकर काटने लगा।

15 मिनट चूसने के बाद मुझे पहली बार किसी लड़की की गांड मारने का मौका मिला।

मैंने पोर्न में काफी बार डॉगी स्टाइल देखा है।

मैं-- निमरत एक काम करो चलो, इधर दीवार के साथ खड़े होकर घोड़ी बन जाओ।

निमरत वैसे ही घोड़ी बन गई।

निमरत -- तुम आराम से मारना गांड स्टार्टिंग में फिर स्पीड बढ़ाना।

मैं-- ये साब तो लंड के अंदर जाने के बाद ही पता लगेगा।

मैंने पहले अपनी उंगली निमरत की गांड में डाल के घुमाने लगा।

फिर मैंने निमरत की टाइट गांड पे थप्पड़ मारी जोर से।

निमरत --. आह्ह! आराम से मारो।

मैंने देखा कि उसकी गांड दो थप्पड़ के बाद लाल हो गई।

मैं फिर घुटने के बाल नीचे बैठा

निमरत -- क्या कर रहे हो जल्दी डालो अंदर।

मैंने उसकी बात का जवाब नहीं दिया और अपना मुँह उसकी गांड के पास लाया।

शुरू में मैंने पहले उसकी पूरी गांड जीभ से चाटी, इसमें मुझे इतना मज़ा नहीं आया।

फिर मैंने अपनी जीभ उसकी गांड में डाल के हिलने लगा।

निमरत को मज़ा आ रहा था और वो आह्ह्ह्ह बढ़ गई ।

मेरे जितनी अंदर जीभ जा सके उतनी ही गांड में डाली और घुमाने लगा फिर लास्ट में लंड की बारी थी अंदर जाने की ।

मैं खड़ा हुआ और अब जल्दी से उसकी गांड पे लंड सेट किया, और एकं झटका मारा और अंधा लंड उसकी गांड के अंदर।

निमरत आह कर करहने लगी मतलब इतना लेना उसके लिए आम था ।

मैंने अब धीरे पूरा लंड उसकी गांड में डालने लगा.... मुझे थोड़ा जोर लगाना पड़ा लगभग एक जटका और मारा अब पूरा लंड उसकी गांड में।दोनों के मुँह से एक सिसकारी निकली "आआआ!"

यह किस ने, मेरी गान्ड में

इतना बड़ा लंड डाला?

मार डाला हाएएयी मार डाला! "

निमरत दर्द की शिद्दत से चिल्ला उठी।

" हाईई मरर गई आआ ऊऊ ईई अम्मिईीई! मेरिइ तो फटत्त गेिई

अब निमरत की फट गई मेरा पूरा लंड जब अंदर गया और व जोर से कराहने लगी आअह्ह्ह्हह मर गयी आराम से कर। ईईईईईईईईईईईईईईईईईईई!

मैं-- रिलैक्स रहो चला गया सारा अंदर अब दर्द नहीं होगा।

मैं अब धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा।

मुझे स्टार्टिंग में अलग ही मज़े आ रहे थे, मुझे पता ही नहीं लगा जोश में मैंने कब गांड मारने की स्पीड बढ़ा दी।

सच में जब लंड लड़की की गांड में जाता है तो अलग ही दुनिया में पहुँच जाते हैं।

मैंने निमरत की चुचियाँ अपने हाथों से पकड़ी और पता नहीं स्पीड में कब वो भी ज़ोर से दबा दी।

निमरत -- धीरे दर्द हो रहा है प्लीज़।.ईईईईईईईईईईईईईईईईईईई!

मुझे कुछ सुनायी नहीं दे रहा मैं उसी स्पीड में गांड मारता गया ।

मुझे सिर्फ थपथपाने की आवाज़ आ रही थी, जब पूरा लंड अंदर जाता तब अलग ही फीलिंग आती है।

अब बाथरूम में निमरत की आह और मेरी गांड मारने की आवाज़ आ रही थी।

मुझे जब होश आया जब मैं झड़ने वाला था।

मुझे नहीं पता था माल कहाँ छोड़ु ।

मैं-- निमरत ये माल कहाँ निकलना है।

निमरत -- आह मेरे मुँह में छोड़ दे जल्दी से।

मैंने अपने एक हाथ से लंड गांड से निकाला और निमरत भी सीधी नीचे ही बैठ गई।

मैंने लंड उसके मुँह की तरफ करके मुँह की पिचकारी उसके मुँह में छोड़ी ।

मैं-- निमरत मेरे लंड को भी चाट के साफ कर दे ।

निमरत मेरा माल मुँह में पी के बोली ।

निमरत -- मैं किसी को ब्लो जॉब नहीं देती।

मैं-- ऐसा ना बोल प्लीज़ चूस दे इसे ।

निमरत कुछ नहीं बोली ।

मैं-- चल छोड़, चल दूसरा राउंड शुरू करते हैं।

निमरत --- साले तूने मेरी बिना रुके आधे घंटे गांड मारी है, मेरे अब और हिम्मत नहीं है मुझे तौलिए से साफ़ कर के कमरे में ले चल।

मेरा मन था एक बार और गांड मारने का पर मैं अब कुछ नहीं कर सकता था ।

मैंने निमरत को उठाया गोद में और उसके ऊपर तौलिया गिराया और उसके कमरे में ले गया।

मैंने उसके कमरे की कुंडी लगाई और बोला ।

मैं-- निमरत अब मैं वापिस कैसे जाऊं ।

निमरत -- रुक एक मिनट.।

निमरत ने किसी को रूम में फ़ोन करके बुलाया।

फिर 5 मिनट बाद रूम पे कोई नॉक करता है।

मैंने नंगा ही गेट खोला क्यों कि निमरत भी नंगी ही बेड पे थी तो मैं क्यों शर्माउन ।

पर मैंने जैसे ही गेट खोला तो देखा सामने हॉस्टल की लेडीज़ वार्डन है।

मेरी उसको देख फटी और निमरत का तौलिया ले उससे अपने आप को छुपाने लगा।

निमरत -- तुम शर्माओ मत ये मेरे साथ ही है ।

अब मैं थोड़ा रिलैक्स हुआ और तौलिया गिरा दिया ।

निमरत -- वार्डन जी इसको नीचे तक पहुँच वा दो।

वार्डन-- पहले मुझे भी इस लंड के मज़े लेने दे ।

वार्डन की बात सुन मैं शॉक हुआ कि यह चल क्या रहा है इस हॉस्टल में ।

कमरे के बिस्तर पर निमरत -अपने कपड़ों की क़ैद से आज़ाद बिल्कुल नंगी लेटी हुई अपनी प्यासी चूत पर अपने हाथ को आहिस्ता-आहिस्ता फेर कर प्यार कर रही थी।

उस की फूली हुई गोरी चूत के गुलाबी होंठो से रस की बूंदे टपक रही थींl

निमरत -- फिर कभी दिलवा दूंगी इसकी अभी लंड थक गया है ।

मैंने फिर वही लड़की वाली जींस और शर्ट पहनी और जाने से पहले निमरत को किस किया।

मैं-- सॉरी अगर ज़्यादा ज़ोर से मार दी हो तो।

निमरत ने मुझे वापस छोटा किस किया और बोली।

निमरत -- कोई बात नहीं बेबी बाय।

मैं वार्डन के साथ कमरे के बाहर निकला ।

वार्डन-- ऐसा क्या किया तुमने आज से पहले इतनी बुरी हालत कभी नहीं हुई इसकी।

मैं-- बस मेरे लंड का कमाल है।

वार्डन-- ऐसा क्या है लंड में तुम्हारे।

मैं-- यह तुम्हें राइड करके ही पता लगेगाV

वार्डन-- मैं तो कबसे तैयार हूँ राइड के लिए......।.

जारी रहेगी

 
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