chapter 83
सुबह होने के साथ अभय को छोर सब नहा धोके रेडी हो गये थे दिशा खाना बनाने मे लगी थी पूजा अदिति भी साथ मे थी हॉल मे आसा बैठी थी तारा रेडी होके आसा के पास आके बैठ जाती है
आसा तारा को देख - सम्धन जी रात को अच्छे से सोई नही क्या
तारा आसा के एकदम सवाल से घबरा जाती है लेकिन खुद को जल्दी से नॉर्मल करते हुवे मुस्कुरा के - हा रात देर से सोई जल्दी नींद आ ही नही रही थी
आसा - अच्छा कभी कभी होता है ऐसा नींद देर से आती है
तारा - जी जी अपने सही कहा
तारा मन मे - आपका लाला मेरा दमाद ने रात जो किया उसके बाद मेरी नींद ही उर गई सोने की कोसिस करती रही लेकिन सो नही पाई देर रात जाके सो पाई हु
तारा रात के याद करने लगती है रात अभय तारा के कमरे मे जाता है तब
अभय आसा से मिल प्यार करके तारा के कमरे मे आता है तारा नाइटी पहने बिस्तर पे लेती हुई थी अभय को देख उठ कर बैठ - दमाद ही आइये बैठिये ना
अभय तारा के पास जाके बैठ जाता है
अभय तारा को देख - मम्मी जी मुझे आपको प्यार करना है
तारा अभय के एकदम डैरेक्ट् बात सुन हैरान शोक होती है
तारा नजरे दूसरी तरफ फेर के अभय को बिना देखे - जानती हु सुरु मे समझ नही पाई थी लेकिन धीरे धीरे एहसास हो गया आपके मन मे मेरे लिये क्या है लेकिन सायद आप भूल रहे है आप मेरी बेटी के पति मेरे दमाद है प्लेस दमाद जी समझने की कोसिस कीजिये
अभय तारा की बात सुनता है तारा को देखते रहता है फिर
अभय - जनता हु अच्छे से समझ भी रहा हु मम्मी जी आपने भी मेरी मा की तरह अकेले दिशा पूजा को पाला है आप मेरी नजर मे एक स्ट्रोंग मा है बस एक सवाल आपका दिल नही करता करने का
तारा अभय को बिना देखे - हर औरत का दिल करता है ये तो नॉर्मल है
अभय तारा को देखते हुवे - तो क्या वजह है आप खुद मेरे साथ नही करना चाहती या दिशा या कुछ और वजह है
तारा थोरि देर सांत रहती है फिर - इसका जवाब मेरे पास नही है
अभय तारा को देखते रहता है और मन मे - सायद एकदम से केह देना सही नही था काजल बुआ मिनिता ऑन्टी कोमल ममता भाभी सब के साथ धीरे धीरे सब हुआ मुझे मम्मी जी के साथ धीरे धीरे ही आगे जाना होगा ताकि मम्मी जी भी आगे करना ना करना अच्छे से सोच सके
अभय तारा को देख - मम्मी जी वो सब नही करते लेकिन उमीद से आया हु तो खाली हि जाने देगी
तारा धीरे से - आप किया चाहते है बोलिये कर सकती हु तो करूँगी
अभय - बस एक बार मुह मे ले लीजिये
तारा एकदम शोक हैरान अभय को देख - क्या नही मे नही कर पाऊँगी
अभय थोरा निरास होके - ठीक है जो प्यार करते आया हु उतना ही कर लेता हु
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अभय तारा को पकर बिस्तर पे लेता के किस करने लगता गर्दन को चूमने लगता है तारा सिसकिया लेना सुरु कर देती है पर मन मे दिमाग मे अभय की बाते ही चल गुज रही थी 2 मिनट बाद
अभय किस करने के बाद तारा को देख - गुड नाइट मम्मी जी
अभय जाने लगता है तो तारा अभय का हाथ पकर अभय को बिना देखे - मेने पहले कभी भी वो नही क्या कैसे करना है पता नही पर आपके लिये करने को तैयार हु
अभय तारा को देखता है फिर बिस्तर पे लेत पैंट खोलते हुवे - ठीक है इतना ही बहोत है मेरे लिये
अभय नीचे से नँगा हो जाता है अभय का मोटा लम्बा लंड फुल टाइट खरा था तारा अभी भी दूसरी तरफ नजरे किये थी मन मे सोच रही थी कैसे करुगी
अभय तारा को देख - मम्मी जी सुरु करिये ना
अभय की बात सुन तारा अभय की तरफ देखती है और जैसे ही तारा की नजर अभय के लंड पे परती है वही हाल तारा का भी होता है जब कोई अभय का लंड पहली बार देखता है

तारा की सासे रुक जाती है मुह खुले आखे फटे रह जाती है तारा जोर जोर से सासे लेने लगती है पुरा शरीर कापने लगता है तारा मन मे - मे मे ये क्या देख रही हु दमाद जी का लंड कैसे इतना बरा लंड भी किसी का होता है
अभय तारा को देख - होस मे आइये और सुरु करने आसान है मुह मे लेके चुसना है बाकी खुद आप कर लेली
तारा अभय को देख सर्मा के - कोसिस करती हु दमाद जी
अभय -कर लोगी आप अभय बिस्तर पे बैठ तारा के सीने से सारी हटा के बिस्तर पे लेत - अब सही है और मजा आयेगा
तारा और सर्म से पानी पानी हो जाती है
अभय तारा को देखते हुवे - मम्मी जी सर्माइये नही हाथ मे पकरिये ना अपने दमाद का लंड
तारा अभय के लंड को देखती है फिर सर्माते कापते हाथो से अभय का लंड जैसे ही पकरति है तारा फिर काप् जाती है पूरी बॉडी मे सिहरन दोर जाती है अभय भी तारा को लंड पकरे देख मस्त हो जाता है

तारा झुक अभय के लंड पकरे हुवे देख मन मे - बहोत गर्म है मोटा लम्बा भी मेरे हाथ जल रहे है यकीन नही होता मेरी बेटी जोर इतना बरा लंड अपनी बुर मे लेती है छी मे क्या सोचने लगी
अभय तो मस्त लेता अपनी सासु मा के मस्त चुचे देख रहा था और तारा कैसे लंड पकरे देख कर रही है वो भी देख मजे ले रहा था
तारा झुकी हुई थी तो तारा के मस्त दोनो गोरे बरे चुचे साफ दिखाई दी रहे थे तारा अभय को देखती है फिर अपने सीने को देख मन मे शर्मा के - मेरे चुचे झुकने की वजह से साफ दामाद जी को दिख रहा है अब समझ आया कियु मेरे सीने से सारी हटा दिये दामाद जी तो बहोत् तेज बेसर्म है
अभय तारा को देख मुस्कुराते हुवे - मम्मी जी आपके चुचे मस्त दिख रहे है खैर और मत तरसाइये मुह मे लीजिये जल्दी से

तारा और झुक अभय के लंड का टोपा मुह मे लेते चुस्ती है और एकदम से छि छि बहोत् गंदा है मे नही करुगी मुझसे नही होता
अभय - गंदा सुरु मे लगता है बाद मे मजा आयेगा बस करते जाइये
तारा अभय को देख - ठीक है
तारा मन मे - कोई लंड मुह मे भी लेता है किया कही दिशा लेती तो नही छोरो जल्दी से कर देती हु बहोत् सर्म आ रही है

तारा हिम्मत कर जी दबा के अभय का लंड मुह मे लेके आखे बंद करके चूसने लगती है अभय को अलग हि मजा आने लगता है
अभय - आह मम्मी जी आपके मुह मे लंड फिल कर देख उफ बहोत् मजा आ रहा ह मम्मी जी हाथ से लंड पकर होठ से दबा के ऊपर नीचे करते हुवे चूसने मुझे और मजा आयेगा आपको भी
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तारा अभय की बात सुन वैसा ही करने लगती है अब तारा को भी असली स्वाद और लंड चूसने मे कितना मजा आता है पता चल जाता है तारा अब मजे से चूस रस पीते जा रही थी और अभय सब देख फिल कर मजे से आह उफ करते जा रहा था
तारा लंड का स्वास चूस कर लेते हुवे मन मे -उफ मा मुझे अब बहोत् मजा आ रहा है लंड चूसने मे पहले बहोत् गंदा लगा था लेकिन अब लंड का स्वाद बहोत् अच्छा लग रहा है दिल कर रहा है चुस्ती रहु
3 minat बाद
अभय उठ कर खरा होके लंड हिलाने लगता है और तारा को देख - मुह खोल के रखिये
तारा हैरान होती ह लेकर फिर शर्मा के मुह खोल अभय को लंड जोर जोर से हिलाते देखती रहती है 5 minat बाद अभय आह मम्मी जी आने वाला है
अभय तारा के सर पकर मुह मे लंड घुसा के जोर जोर से पिचकारी मारते हुवे - आह मम्मी जी उफ अब जाके सुकून मिला
अभय का गर्म गर्म मलाई तारा की मुह को भर लेता है अपने दामाद का गर्म गर्म मलाई मुह मे लेके फिल कर तारा पागल ही हो जाती है
तारा जल्दी से मुह हाथो से बंद कर लेती है
तारा मन मे -दामाद जी ने बहोत् सारा माल मेरे मुह मे भर दिया है अब क्या करू मे
अभय तारा को देख - पी जाइये मम्मी जी
तारा अभय को देखती है फिर एक घुट मे सब पी जाती है फिर जोर जोर से सासे लेने लगती ह
अभय लंड तारा के मुह के पास करते हुवे - लंड साफ कर दीजिये
तारा सर्माते हुवे अभय का लंड पकर मुह मे लेके मजे से चूस साफ कर लेती है लंड चुसाई का खेल खतम हो जाता है अभय पैंट पहन लेता है तारा सर्म से पानी पानी हो गई थी
अभय तारा को देख मुस्कुराते हुवे - मम्मी जी कैसा लगा मजा आया और आपके दामाद का लंड कैसा है
तारा दूसरी तरफ चेहरा करके - जाइये यहा से आप बहोत् बेसर्म है मे कुछ बताने वाली नही
अभय मुस्कुराते हुवे मन मे - मम्मी जी बहोत् सर्मिलि है
अभय जाते हुवे - ठीक है मम्मी जी जा रहा हु लेकिन हा मुझे बहोत् मजा आया आपके लंड भी बहोत् अच्छे से चूसा है
अभय चला जाता है तारा आईने के पास जाके खरी हो जाती है और देखती हो मुह होठ पे अभय का मलाई लगा है
तारा मन मे - यकीन करना मुश्किल हो रहा है मेरे दामाद जी का लंड बहोत् मोटा लम्बा है और मेने अपने दामाद जी का लंड मुह मे किया मजे से चूसा भी उफ जो भी हो आज पता चला लंड चूसने मे बहोत् मजा आता है
तारा होठ पे लगे अभय की मलाई जीब से चाटते हुवे - दामाद जी ने बहोत् माल निकाला इतना माल बुर मे जायेगा तो कोई भी एक बार मे मा बन जायेगी पर मे ये सोच शोक मे हु इतना मोटा लम्बा लंड मेरी बेटी .. तभी तारा अपने गाल मे मारते हुवे, छि तारा तु ये किया सोच रही है
यही हुआ था रात को उसके बाद तारा सोने की कोसिस करती रही लेकिन अभय का लंड आखो के सामने आ जाता लंड का स्वाद मुह मे फैल जाता देर रात बेचारी तारा सो पाई थी
अब आते है अभी अभय रेडी होके नीचे आता है तारा अभय को देख सर्म से नजरे फेर लेती है अभय ये देख मुस्कुराने लगता है
अभय आसा को देख - गुड मोर्निंग का गुड मोर्निंग मम्मी जी
तारा आसा अभय को देख - गुड मोर्निंग
तारा अभय को देख मन मे - हु आपकी गुड नाइट मोर्निंग हुई है मेरी नही बेसर्म दामाद जी
अभय सीधा चिकन मे जाता है तो अदिति पूजा दिशा को देख मुस्कुराते हुवे - अच्छा तुम सब यही हो
अदिति अभय को देख - भाई गुड मोर्निंग
पूजा दिशा अभय को देख - गुड मोर्निंग
अभय - सब को गुड मोर्निंग
अभय - बीवी जी कोफ़ी मिलेगी
दिशा मे बिजी हु पूजा देदे अपने जीजा जी को कोफ़ी
पूजा - जी दीदी
पूजा अभय को कोफ़ी देती है अभय एक जगह बैठ - क्या बना रही हु मेरी जान
दिशा शर्मा के - आलू के पराठा
अभय - वाह मजा आयेगा
अदिति अभय के पास जाके - भाई फिर कब पिकनिक मे जायेंगे आपने कहा था ना एक महीने के लिये लेके जायेंगे.
पूजा भी अभय को देख - जीजा जी बहोत् मजा आया था फिर लेके चलिये ना.
अभय कोफ़ी पीते हुवे - जरूर मेने जो कहा करूँगा इस बार और भी बहोत् खूबसूरत जगह लेके जाऊंगा वो भी महीने के लिये खूब मजा करेगे लेकर फिल्हाल कुछ दिन रुकना परेगा लेकिन जायेंगे जरूर
अदिति पूजा बहोत् खुश हो जाती है - हम इंतज़ार करेगे
बाते करते हुवे खाना रेडी होता है अभय खाने के बाद बाइक लेके मधु से मिलने निकल परता है
अभय सिला के खेत के पास रोड साइड बाइक लगा के सिला के पास आता है सिला घास काटने मे लगी हुई थी अभय को आते देख सिला खरी होके मुस्कुराते हुवे - क्या बात है आज सीधा गुरिया के पास ना जाके मेरे पास कैसे आ गया
अभय सिला के पास जाके कमर मे हाथ हाथ कस के बाहों मे लेके - जाऊंगा लेकिन आपको प्यार करने के बाद याद है ना मे जो बोलूँगा करेगी
सिला शर्मा के - याद है लेकिन वो नही करुगी
अभय मुस्कुराते हुवे - वो क्या
सिला शर्मा के - छि बेसर्म
अभय सिला को देख मुस्कुराते हुवे - मेने सोच लिया है
सिला तेज सासे लेते हुवे - क्या सोच लिया
अभय सिला की आखो मे देख - मा मे कहु आपकी बुर देखनी हो तो आप देखायेगी
अभय की खुली गंदी बाते बुर शब्द सुन सिला शोक हैरान अभय को देखती रहती है सासे जैसे रुक जाती हो गिर सासे आती है तो और तेज हो जाती है दिल जोर से धक करने लगता है पूरी बॉडी मे हचल मच जाती है
सिला सर्म से पूरी लाल होके अभय के गाल पे मारते हुवे - छि बेसर्म कितना गंदा बोलता है
अभय आसा के दोनों हाथ पकर खेत मे अंदर ले जाता है बाहों मे लेके गर्दन पे किस करते हुवे - मा बताइये ना अपनी बुर देखायेगी
सिला अभय की किस करने सी सिसकिया लेते हुवे मचल के - वादा क्या था तो हा अगर तुझे मेरी बुर देखनी है दिखाऊंगी

अभय सिला के सीने से सारी हटा के ब्लाउस मे टाइट कसे दोनो चुचे का देखते हुवे - अगर मे कहु मुझे आपके बरे मस्त गोरे दूध देखने है तो
सिला मदहोस होके शर्मा के - दिखा दूंगी
अभय सिला को बाहों मे लेके आखो मे देख - अगर मे कहु मा मेरे लंड को मुह मे लेके चूसिये तो आप चुसेगी
अभय कि ये बात सिला को बहोत् हैरान शोक कर लेती है
सिला - छि छि बेसर्म कभी नही कितना बेसर्म है कोई अपनी मा से ऐसी गंदी बाते और ये गंदी चीजे करने को बोलता है क्या
अभय मुस्कुराते हुवे - बुर को बुर चुचे को चुचे लंड को लंड ना कहे तो
तभी आसा गुस्से से नीचे परे एक मक्के के कटे पेर उठाने लगती है तो अभय की फट जाती है अभय तेजी से भागते हुवे - माफ करदो मा मे जा रहा हु गुरिया के पास
सिला अभय के पीछे मारने के लिये डोरते हुवे - रुक बेसर्म भाग कियु रहा है आज तेरी तांगे तोर दूंगी
लेकर अभय भागते हुवे बाइक के पास आके - उफ लगता है कुछ जायदा की गंदे शब्द खुल के एक बार मे ही बोल दिया बच गया नही तो मार परती
अभय बाइक पे बैठ मधु से मिलने निकल परता है
सिला अभय को जाते देखती है फिर घास पे बैठ सर पकर - कितना बेसर्म है कैसी गंदी बाते और मुझे छि कैसे बोल रहा था लंड मुह मे लेने के लिये उफ ये लरका आज तक मेने अपने पति का मुह मे नही लिया और ये लरका बच गया हाथ लग जाता तो छोरति नही
आसा मे मन मे एक बात आती है
आसा मन मे - लाला ने मुह मे लेने को कहा इसका मतलब लंड मुह मे लेके चूसा भी जाता है क्या कही दिशा बहु मुह मे छि छि ये लरका तो बहोत् ही गंदा बेसर्म है आने दी फिर फिर बताऊंगी
तभी सिला को कुछ फिल होता है गीला चिपचिपा सिला सारी उठा के नीचे झुक देखती है बुर गीली हो गई थी सिला सारी से बुर साफ कर देती है लेकिन ये साफ था सिला की बुर भी लंड के लिये तरस रही है
अभय घर आता है आगन मे देखता है मधु झुकी कपड़े धो रही है मधु झुक के कपड़े पे बर्स मार रही थी तो पीछे मधु की मस्त गांड उपर नीचे हो रही थी जिसे देख अभय का लंड झटके मारने लगता है अभय को भी एहसास हो जाता है कोई आया है मधु पीछे मूर अभय को देख खुश हो जाती है फिर हाथ धोके खरी होके अभय को देख - भाई
अभय मधु को बाहों मे लेके - गुरिया प्यार करने आया हु करने दोगी ना
मधु नजरे नीचे किये शर्मा के धीरे से - मेने कभी रोका आपको
अभय भी मुस्कुराते हुवे मधु को गोदी मे उठा के कमरे मे बिस्तर पे लेता मधु के ऊपर आके मधु को देख - मेरी गुरिया बहोत् खूबसूरत है अपने भाई को इतना प्यार देने के लिये सुक्रिया
अभय मधु को किस करने लगता है मधु अभय को बाहों मे लेके अभय का साथ लेते हुवे किस करने लगती है

अभय मधु को किस करते हुवे गर्दन मे भी किस करने लगता है तो मधु की सिसकिया फुट परती है मधु मचल के जोर से आह उफ करके सिसकिया लेने लगती है ये सब खेल मे मधु को भी बहोत् मजा आने लगा था

मधु एकदम से अभय के ऊपर आके किस करने लगती है अभय ये देख और जोस मे मधु को किस करने लगता है दोनो सब भूल मजे से एक दूसरे को किस करते रहते है 3 मिनट बाद
अभय मधु के ऊपर से बिस्तर पे बैठ मधु को गोद मे बैठा लेता है मधु सर्म से लाल नजरे नीचे किये हुवे थी
अभय - गुरिया क्या मे तेरे चुचे दबा सकता हु
मधु की सासे तेज दिल जोर से धरकने लगता है
मधु तेज सासे लेते नजरे नीचे किये सर्मा के धीरे से - हा
अभय भी खुश हो जाता है
अभय मधु के लाल टिसर्ट के ऊपर से ही दोनो चुचे दबाते हुवे फिल करके मस्त होके - उफ गुरिया तेरे चुचे बहोत् नर्म टाइट है दबाने मे ऐसा फिल होता है जैसे रुई दबाने मे होता है
मधु होठ दत्त से दाबे हुई थी लेकिन सिसकिया निकल ही परती है मधु जोर जोर से सिसकिया लेके आह उफ आवाजे निकालने लगती हो नजरे नीचे थी तो मधु साफ देख पा रही थी उसका भाई कैसे उसके चुचे दबा रहा है
मधु हिम्मत करके सिसकिया लेते धीरे से - भाई दर्द हो रहा है धीरे
अभय धीरे से चुचे दबाते हुवे - ठीक है गुरिया

अभय दोनो चुचे बरी बारी दबाते हुवे मन मे - उफ कितना मजा आ रहा है सच मे गुरिया के चुचे बहोत् मस्त टाइट गोल मटोल परफेक्ट साइज के है
अभय अपना हाथ टिसर्ट के अंदर डाल चुचे को ठोरा बाहर निकाल जोर से दबाने लगता है

मधु की हालत खराब होने लगती है मधु जोर जोर से आह उफ सिसकिया लेने लगती है अभय नंगे आधे चुचे हाथ मे पकरे दबाते हुवे मन मे - कितना सॉफ्ट हैं हाथ मे पकर मजा आ रहा है दबाने मे
मधु बिस्तर कस के पकरे बैठी अपने चुचे भाई को दबाने दी रही थी मधु मन मे - आह भाई बहोत् जोर से दबा रहे है लेकिन मे उनको रोकना नही चाहती आह भाई मेरे चुचे दबा रहे है आधे बाहर निकाल के
अभय फिर एकदम से रुक मधु के चुचे अंदर कर देता है मधु को राहत मिलती है मधु तेज सासे पे काबू पाने लगती है
अभय मधु के चेहरे को उपर करता है मधु का चेहरा सर्म से लाल था अभय मधु को देख - गुरिया बहोत् मजा आया आगे भी दबाने दोगी ना
मधु सर्म से धीरे से - हा
अभय मधु के आखो मे देख - किया दबाने दोगी
मधु अभय की आखो मे देख - अपने चुचे भाई
अभय - गुरिया तुम्हे कैसा फिल हुआ
मधु मदहोसी मे - भाई बहोत् अच्छा फिल हुआ
अभय - गुरिया क्या तुम अपने भाई का लंड देखना चाहोगी
मधु की सासे रुक जाती है मधु तेज सासे लेते हुवे अभय को देख - आप दिखायेंगे तो देख लुंगी
अभय मधु के एक चुचे दबाते हुवे - बोलो ना भाई अपना लंड दिखाओ ना
मधु मदहोसी मे - भाई अपना लंड देखाइये ना
अभय मुस्कुराते हुवे - गुरिया तुम खुद देख लो
मधु हैरान शर्मा के नजरे नीचे करके - भाई आप ही दिखा तो
अभय बिस्तर से नीचे आके अपना पैंट खोलने लगता है मधु एक बार देखती है फिर शर्मा के नजरे दूसरी तरफ कर लेती है
अभय पैंट नीचे कर मधु को देख - गुरिया देख ले अपने भाई का लंड
मधु मुठी कसते हिम्मत कर कापटे हुवे पीछे मूर अभय को देखती है फिर नजरे नीचे करती है तो अभय का टाइट लम्बा मोटा लंड पुरे फन के साथ खरा दिखाई देखा है बस मधु की हालत भी बाकी सब की तरह हो जाती है
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मधु मुह खुले आके फ़ारे अभय का लंड देखती रह जाती है मधु कुछ देर बाद होस में आते हुवे मन मे - मर गई क्या किसी का लंड इतना मोटा लम्बा हो सकता है मे पहली बार लंड देख रही हु वो भी अपने भाई का लंड नही नही भाई का लंड मुझे लगता है बहोत् बरा है
तभी मधु एकदम से नजरे दूसरी तरफ करते हुवे - भाई अंदर कर लीजिये बहोत् सर्म आ रही है
अभय भी मुस्कुराते हुवे अपना लंड अंदर करके पैंट पहन लेता है
अभय - गुरिया यहा आओ
मधु बिस्तर से नीचे आके सर्माते अभय के सामने नजरे नीचे किये करी हो जाती है
अभय मधु को देख - बताओ ना कैसा है तेरे भाई का लंड
मधु अपने हाथ के उंगली के नाखून दबाते शर्म से धीरे से - अच्छा है
अभय मधु को देखता रहता है फिर मधु के चेहरे को पकर किस करते हुवे - मे चलता हु कही जाना है
मधु शर्मा के - जी भाई
अभय जाने लगता है अभय के जाते ही मधु एकदम से घुटने पे आके सीने पे हाथ रख जोर जोर से सासे लेने लगती है
अभय जल्दी चला गया कियुंकी अभय समझ गया था उसकी गुरिया बहोत् जायदा शर्मा गई है और अभय मधु को और बेचैन नही करना चाहता था
अभय बाइक लेके सीधा नीतिका के घर कि तरफ जाने लगता है फोन बजता है
अभय - हैलो कोन
औरत - नंबर भी पहचान मे नही आ रहा क्या तुम्हे या भूल गये
अभय आवाज पहचान के - नही ऑन्टी आपको कैसे भूल जाऊ मे बाइक पे हु कान मे बुलु टूथ लगाया है
औरत - अच्छा समझ गई कहा जा रहे हो
अभय मुस्कुराते हुवे - गिर्लफ्रेंड को किस करने
औरत - बेसर्म के बेसर्म ही रहोगे सादी हो गई फिर भी
अभय हस्ते हुवे - घर का खाना तो खाते रहता हु कभी कभी बाहर का भी खा लेना चाहिये मेने खाया तो आपका बहोत् मिठा था आज भी
औरत बीच मे शर्मा के - बस बस जब भी बोलोगे गंदी बाते बोलोगे सुनो मे कार्ड देने नही आ सकती याद दिला रही हु आ जाना समझ गये
अभय मुस्कुराते हुवे - मेने कहा था पहले ही आ जाऊंगा पर आपने कहा था किस देगी याद रखना आप आऊंगा देना होगा
औरत हैरान शोक मे जोर से - ओये मेने कहा था सोचूँगी ये नही कहा था दूंगी ही
अभय हस्ते हुवे - तो सोच लीजिये फिर आ कर देना और क्या
औरत - बेसर्म अच्छा रखती हु बाय
फोन कट
अभय - लगता है कोई आ गया होगा
वही मधु सब कांड होने के बाद कपड़े धोने लगती है लेकिन मन दिमाग मे जो हुआ देखा सुना सब चल रहा था बेचारी के आखो के सामने अभय का लंड ही बार बार आ रहा था मधु पकरे धोके सूखने के लिये डाल देती है फिर घर से निकल खेत की तरफ जाने लगती है
मधु मन मे - अभी भी यकीन नही होता मेरे भइया मेरे चुचे दबाये अपना लंड देखाया मुझे उफ मेरी तो सासे ही रुक गई थी भाई का लंड देख के अभी भी मेरे आखो के सामने
मधु सर्म से अपना चेहरा हाथो से धक - मे फिर भाई के सामने कैसे जाउंगी
मधु यही सोचते सिला के पास आती है और सिला को देख - मा आप गुस्से मे लग रही है क्या बात है
सिला मधु को देख - तेरा प्यारा बेसर्म भाई की वजह से आज बच गया फिर कभी हाथ लगा बहोत् मारुगी
मधु हस्ते हुवे - आज तक मुझे नही मारा भाई को मारने की दूर की बात है
सिला - हा तो तूने गलती भी नही की ना सब छोर चल चलते है
मधु सिला फिर घर जाने लगते है
अभय सीधा नीतिका के घर आता है अंदर जाता है तो सिर्फ मिका देखाई देती है जो सोफे पे बैठी न्यूज़ देख रही थी
अभय - मा की तरह तुम भी न्यूज़ देखने मे लगी रहती हो
अभय मीका के पास बैठ जाता है मीका अभय को देख बहोत् शर्मा जाती है लेकर खुद पे काबू रखती है
मीका - मा की तरह बनाना है ना इस लिये न्यूज़ देखती हु दुनिया मे चल क्या रहा है
अभय न्यूज़ देखता है उदय का न्यूज़ चल रहा था नीतिका से कई रिपोटेर सवाल कर रहे थे नीतिका अच्छे से जवाब दे रही थी
अभय नीतिका को देख मुस्कुराते हुवे मन मे - मेरी जान पुलिस वर्दी मे मस्त लगती है
अभय मीका के हाथ पकर मीका को उठा के अपनी गोद मे बैठा लेता है मीका हैरान सर्म से - अभय क्या कर रहे हो
अभय दोनो हाथ से मीका के कमर पकर कस लेता है
अभय धीरे से - मीका बोलो ना बनोगी मेरी गिर्लफ्रेंड
मीका शर्मा के - नही मा तो है ना ये सही नही होगा
अभय - सब सही है अच्छा ठीक है तुम्हारी मा हा करेगी तो
मीका शोक अभय को देख - क्या नही तुम पागल तो नही हो गये
अभय - मे पागल नही हु ये बताओ क्या मे तुम्हारा बॉयफ्रेड बनने के लायक नही हु क्या
मीका - ऐसी बात नही है अभय तुम्हारे जैसा बॉयफ्रेड मिलना किस्मत की बात है तभी तो मेरी मा तुमसे बहोत् प्यार करती है
अभय - हु तो बताओ ना अगर तुम्हारी मा हा करेगी तो
मीका शर्मा के - तो तो मे बन जाउंगी
अभय मीका को अपनी तरफ घुमा के आखो मे देख - क्या
मीका अभय को देख सर्म से - तुम्हारी गिर्लफ्रेंड
अभय - पक्का ना
मीका नजरे नीचे कर शर्मा के - हा

अभय मीका के चेहरे को उपर कर मीका के गुलाबी होठ पे उंगली फेरते हुवे - उस पिकनिक वाली रात बहोत् मजा आया था क्या अभी तुम्हे किस कर सकता हु
मीका की सासे तेज हो जाती है मीका शर्म से - कर लो

अभय भी बिना देरी किये मीका को किस करने लगता है मीका भी सब भूल अभय का साथ देने लगती है मीका मन मे - अगर तुम मेरे बॉयफ्रेड बनोगे तो मुझे क्या ही दिकत होगी अभय 2 मिनट बाद
अभय मीका को देख मुस्कुराते हुवे - बहोत् मस्त होठ है तुम्हारे और होठ का रस भी
मीका सर्म से लाल होके - बेसर्म
अभय जाते हुवे - मेरी जान जा रहा हु साम को आऊंगा फिर
मीका शर्मा के - ठीक है
अभय फिर बाइक लेके घर निकल परता है
अभय जब घर आता है तो घर मे कोई नही था जब अभय बगीचे मे जाता है तो देखता है रीमा उसकी मा पापा विजय मिनिता कोमल सब आये हुवे है और बैठ बाते कर रहे है
अभय सर पकर - अरे मे भूल ही गया मेने ही आज सब को बुलाया था
हा अभय ने सुबह मधु के घर जाने से पहले विजय को बोल सब को लाने को कहा था कियुंकी अभय जल्दी ही जाने वाला था अपनी बुआ मासी के यहा तो अभय चाहता था ये मामला जल्दी खतम हो जाये ताकि बाकी सादी ही बचेगी
आज के लिये इतना ही



प्यार सपोर्ट के लिये सुर्किया प्यार देते रहना आप सब का कॉमेंट पढ़ता रहता हु