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Adultery शीला की लीला -५५ साल की शीला की जवानी (Completed)

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sujatakasantara

लाड़ली 🍑
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५५ साल की शीला, रात को १० बजे रसोईघर की जूठन फेंकने के लिए बाहर निकली... थोड़ी देर पहले ही बारिश रुकी थी। चारों तरफ पानी के पोखर भरे हुए थे... भीनी मिट्टी की मदमस्त खुशबू से ठंडा वातावरण बेहद कामुक बना देने वाला था। दूर कोने मे एक कुत्तिया... अपनी पुत्ती खुद ही चाट रही थी... शीला देखती रह गई..!! वह सोचने लगी की काश..!! हम औरतें भी यह काम अगर खुद कर पाती तो कितना अच्छा होता... मेरी तरह लंड के बिना तड़पती, न जाने कितनी औरतों को, इस मदमस्त बारिश के मौसम में, तड़पना न पड़ता...

वह घर पर लौटी... और दरवाजा बंद किया... और बिस्तर पर लेट गई।

उसका पति दो साल के लिए, कंपनी के काम से विदेश गया था... और तब से शीला की हालत खराब हो गई थी। वैसे तो पचपन साल की उम्र मे औरतों को चुदाई की इतनी भूख नही होती... पर एकलौती बेटी की शादी हो जाने के बाद... दोनों पति पत्नी अकेले से पड़ गए थे.. पैसा तो काफी था... और उसका पति मदन, ५८ साल की उम्र मे भी.. काफी शौकीन मिजाज था.. रोज रात को वह शीला को नंगी करके अलग अलग आसनों मे भरपूर चोदता.. शीला की उम्र ५५ साल की थी... मेनोपोज़ भी हो चुका था.. फिर भी साली... कूद कूद कर लंड लेती.. शीला का पति मदन, ऐसे अलग अलग प्रयोग करता की शीला पागल हो जाती... उनके घर पर ब्लू-फिल्म की डीवीडी का ढेर पड़ा था.. शीला ने वह सब देख रखी थी.. उसे अपनी चुत चटवाने की बेहद इच्छा हो रही थी... और मदन की नामौजूदगी ने उसकी हालत और खराब कर दी थी।
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ऊपर से उस कुत्तीया को अपनी पुत्ती चाटते देख... उसके पूरे बदन मे आग सी लग गई...

अपने नाइट ड्रेस के गाउन से... उसने अपने ४० इंच के साइज़ के दोनों बड़े बड़े गोरे बबले बाहर निकाले.. और अपनी हथेलियों से निप्पलों को मसलने लगी.. आहहहह..!! अभी मदन यहाँ होता तो... अभी मुझ पर टूट पड़ा होता... और अपने हाथ से मेरी चुत सहला रहा होता.. अभी तो उसे आने मे और चार महीने बाकी है.. पिछले २० महीनों से... शीला के भूखे भोसड़े को किसी पुरुष के स्पर्श की जरूरत थी.. पर हाय ये समाज और इज्जत के जूठे ढकोसले..!! जिनके डर के कारण वह अपनी प्यास बुझाने का कोई और जुगाड़ नही कर पा रही थी।

"ओह मदन... तू जल्दी आजा... अब बर्दाश्त नही होता मुझसे...!!" शीला के दिल से एक दबी हुई टीस निकली... और उसे मदन का मदमस्त लोडा याद आ गया.. आज कुछ करना पड़ेगा इस भोसड़े की आग का...

शीला उठकर खड़ी हुई और किचन मे गई... फ्रिज खोलकर उसने एक मोटा ताज़ा बैंगन निकाला.. और उसे ही मदन का लंड समझकर अपनी चुत पर घिसने लगी... बैंगन मदन के लंड से तो पतला था... पर मस्त लंबा था... शीला ने बैंगन को डंठल से पकड़ा और अपने होंठों पर रगड़ने लगी... आँखें बंद कर उसने मदन के सख्त लंड को याद किया और पूरा बैंगन मुंह मे डालकर चूसने लगी... जैसे अपने पति का लंड चूस रही हो... अपनी लार से पूरा बैंगन गीला कर दिया.. और अपने भोसड़े मे घुसा दिया... आहहहहहहह... तड़पती हुई चुत को थोड़ा अच्छा लगा...
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आज शीला.. वासना से पागल हो चली थी... वह पूरी नंगी होकर किचन के पीछे बने छोटे से बगीचे मे आ गई... रात के अंधेरे मे अपने बंगले के बगीचे मे अपनी नंगी चुत मे बैंगन घुसेड़कर, स्तनों को मरोड़ते मसलते हुए घूमने लगी.. छिटपुट बारिश शुरू हुई और शीला खुश हो गई.. खड़े खड़े उसने बैंगन से मूठ मारते हुए भीगने का आनंद लिया... मदन के लंड की गैरमौजूदगी में बैंगन से अपने भोंसड़े को ठंडा करने का प्रयत्न करती शीला की नंगी जवानी पर बारिश का पानी... उसके मदमस्त स्तनों से होते हुए... उसकी चुत पर टपक रहा था। विकराल आग को भी ठंडा करने का माद्दा रखने वाले बारिश के पानी ने, शीला की आग को बुझाने के बजाए और भड़का दिया। वास्तविक आग पानी से बुझ जाती है पर वासना की आग तो ओर प्रज्वलित हो जाती है। शीला बागीचे के गीले घास में लेटी हुई थी। बेकाबू हो चुकी हवस को मामूली बैंगन से बुझाने की निरर्थक कोशिश कर रही थी वह। उसे जरूरत थी.. एक मदमस्त मोटे लंबे लंड की... जो उसके फड़फड़ाते हुए भोसड़े को बेहद अंदर तक... बच्चेदानी के मुख तक धक्के लगाकर, गरम गरम वीर्य से सराबोर कर दे। पक-पक पुच-पुच की आवाज के साथ शीला बैंगन को अपनी चुत के अंदर बाहर कर रही थी। आखिर लंड का काम बैंगन ने कर दिया। शीला की वासना की आग बुझ गई.. तड़पती हुई चुत शांत हो गई... और वह झड़कर वही खुले बगीचे में नंगी सो गई... रात के तीन बजे के करीब उसकी आँख खुली और वह उठकर घर के अंदर आई। अपने भोसड़े से उसने पिचका हुआ बैंगन बाहर निकाला.. गीले कपड़े से चुत को पोंछा और फिर नंगी ही सो गई।

सुबह जब वह नींद से जागी तब डोरबेल बज रही थी "दूध वाला रसिक होगा" शीला ने सोचा, इतनी सुबह, ६ बजे और कौन हो सकता है!! शीला ने उठकर दरवाजा खोला... बाहर तेज बारिश हो रही थी। दूधवाला रसिक पूरा भीगा हुआ था.. शीला उसे देखते ही रह गई... कामदेव के अवतार जैसा, बलिष्ठ शरीर, मजबूत कदकाठी, चौड़े कंधे और पेड़ के तने जैसी मोटी जांघें... बड़ी बड़ी मुछों वाला ३५ साल का रसिक.. शीला को देखकर बोला "कैसी हो भाभीजी?"

गाउन के अंदर बिना ब्रा के बोबलों को देखते हुए रसिक एक पल के लिए जैसे भूल ही गया की वह किस काम के लिए आया था!! उसके भीगे हुए पतले कॉटन के पतलून में से उसका लंड उभरने लगा जो शीला की पारखी नजर से छिप नही सका।
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"अरे रसिक, तुम तो पूरे भीग चुके हो... यहीं खड़े रहो, में पोंछने के लिए रुमाल लेकर आती हूँ.. अच्छे से जिस्म पोंछ लो वरना झुकाम हो जाएगा" कहकर अपने कूल्हे मटकाती हुई शीला रुमाल लेने चली गई।

"अरे भाभी, रुमाल नही चाहिए,... बस एक बार अपनी बाहों में जकड़ लो मुझे... पूरा जिस्म गरम हो जाएगा" अपने लंड को ठीक करते हुए रसिक ने मन में सोचा.. बहेनचोद साली इस भाभी के एक बोबले में ५-५ लीटर दूध भरा होगा... इतने बड़े है... मेरी भेस से ज्यादा तो इस शीला भाभी के थन बड़े है... एक बार दुहने को मिल जाए तो मज़ा ही आ जाए...

रसिक घर के अंदर ड्रॉइंगरूम में आ गया और डोरक्लोज़र लगा दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

शीला ने आकर रसिक को रुमाल दिया। रसिक अपने कमीज के बटन खोलकर रुमाल से अपनी चौड़ी छाती को पोंछने लगा। शीला अपनी हथेलियाँ मसलते उसे देख रही थी। उसके मदमस्त चुचे गाउन के ऊपर से उभरकर दिख रहे थे। उन्हे देखकर रसिक का लंड पतलून में ही लंबा होता जा रहा था। रसिक के सख्त लंड की साइज़ देखकर... शीला की पुच्ची बेकाबू होने लगी। उसने रसिक को बातों में उलझाना शुरू किया ताकि वह ओर वक्त तक उसके लंड को तांक सके।

"इतनी सुबह जागकर घर घर दूध देने जाता है... थक जाता होगा.. है ना!!" शीला ने कहा

"थक तो जाता हूँ, पर क्या करूँ, काम है करना तो पड़ता ही है... आप जैसे कुछ अच्छे लोग को ही हमारी कदर है.. बाकी सब तो.. खैर जाने दो" रसिक ने कहा। रसिक की नजर शीला के बोबलों पर चिपकी हुई थी.. यह शीला भी जानती थी.. उसकी नजर रसिक के खूँटे जैसे लंड पर थी।

शीला ने पिछले २० महीनों से.. तड़प तड़प कर... मूठ मारकर अपनी इज्जत को संभाले रखा था.. पर आज रसिक के लंड को देखकर वह उत्तेजित हथनी की तरह गुर्राने लगी थी...

"तुझे ठंड लग रही है शायद... रुक में चाय बनाकर लाती हूँ" शीला ने कहा

"अरे रहने दीजिए भाभी, में आपकी चाय पीने रुका तो बाकी सारे घरों की चाय नही बनेगी.. अभी काफी घरों में दूध देने जाना है" रसिक ने कहा

फिर रसिक ने पूछा "भाभी, एक बात पूछूँ? आप दो साल से अकेले रह रही हो.. भैया तो है नही.. आपको डर नही लगता?" यह कहते हुए उस चूतिये ने अपने लंड पर हाथ फेर दिया

रसिक के कहने का मतलब समझ न पाए उतनी भोली तो थी नही शीला!!

"अकेले अकेले डर तो बहोत लगता है रसिक... पर मेरे लिए अपना घर-बार छोड़कर रोज रात को साथ सोने आएगा!!" उदास होकर शीला ने कहा

"चलिए भाभी, में अब चलता हूँ... देर हो गई... आप मेरे मोबाइल में अपना नंबर लिख दीजिए.. कभी अगर दूध देने में देर हो तो आप को फोन कर बता सकूँ"

तिरछी नजर से रसिक के लंड को घूरते हुए शीला ने चुपचाप रसिक के मोबाइल में अपना नंबर स्टोर कर दिया।

"आपके पास तो मेरा नंबर है ही.. कभी बिना काम के भी फोन करते रहना... मुझे अच्छा लगेगा" रसिक ने कहा

शीला को पता चल गया की वह उसे दाने डाल रहा था

"चलता हूँ भाभी" रसिक मुड़कर दरवाजा खोलते हुए बोला

उसके जाते ही दरवाजा बंद हो गया। शीला दरवाजे से लिपट पड़ी, और अपने स्तनों को दरवाजे पर रगड़ने लगी। जिस रुमाल से रसिक ने अपनी छाती पोंछी थी उसमे से आती मर्दाना गंध को सूंघकर उस रुमाल को अपने भोसड़े पर रगड़ते हुए शीला सिसकने लगी।

कवि कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतल और मेघदूत में जैसे वर्णन किया है बिल्कुल उसी प्रकार.. शीला इस बारिश के मौसम में कामातुर हो गई थी। दूध गरम करने के लिए वो किचन में आई और फिर उसने फ्रिज में से एक मोटा गाजर निकाला। दूध को गरम करने गेस पर चढ़ाया.. और फिर अपने तड़पते भोसड़े में गाजर घुसेड़कर अंदर बाहर करने लगी।
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रूम के अंदर बहोत गर्मी हो रही थी.. शीला ने एक खिड़की खोल दी.. खिड़की से आती ठंडी हवा उसके बदन को शीतलता प्रदान कर रही थी और गाजर उसकी चुत को ठंडा कर रहा था। खिड़की में से उसने बाहर सड़क की ओर देखा... सामने ही एक कुत्तीया के पीछे १०-१२ कुत्ते, उसे चोदने की फिराक में पागल होकर आगे पीछे दौड़ रहे थे।

शीला मन में ही सोचने लगी "बहनचोद.. पूरी दुनिया चुत के पीछे भागती है... और यहाँ में एक लंड को तरस रही हूँ"

सांड के लंड जैसा मोटा गाजर उसने पूरा अंदर तक घुसा दिया... उसके मम्मे ऐसे दर्द कर रहे थे जैसे उनमे दूध भर गया हो.. भारी भारी से लगते थे। उस वक्त शीला इतनी गरम हो गई की उसका मन कर रहा था की गैस के लाइटर को अपनी पुच्ची में डालकर स्पार्क करें...

शीला ने अपने सख्त गोभी जैसे मम्मे गाउन के बाहर निकाले... और किचन के प्लेटफ़ॉर्म पर उन्हे रगड़ने लगी.. रसिक की बालों वाली छाती उसकी नजर से हट ही नही रही थी। आखिर दूध की पतीली और शीला के भोसड़े में एक साथ उबाल आया। फरक सिर्फ इतना था की दूध गरम हो गया था और शीला की चुत ठंडी हो गई थी।
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रोजमर्रा के कामों से निपटकर, शीला गुलाबी साड़ी में सजधज कर सब्जी लेने के लिए बाजार की ओर निकली। टाइट ब्लाउस में उसके बड़े बड़े स्तन, हर कदम के साथ उछलते थे। आते जाते लोग उन मादक चूचियों को देखकर अपना लंड ठीक करने लग जाते.. उसके मदमस्त कूल्हे, राजपुरी आम जैसे बबले.. और थिरकती चाल...

एक जवान सब्जी वाले के सामने उकड़ूँ बैठकर वह सब्जी देखने लगी। शीला के पैरों की गोरी गोरी पिंडियाँ देखकर सब्जीवाला स्तब्ध रह गया। घुटनों के दबाव के कारण शीला की बड़ी चूचियाँ ब्लाउस से उभरकर बाहर झाँकने लगी थी..

शीला का यह बेनमून हुस्न देखकर सब्जीवाला कुछ पलों के लिए, अपने आप को और अपने धंधे तक को भूल गया।

शीला के दो बबलों को बीच बनी खाई को देखकर सब्जीवाले का छिपकली जैसा लंड एक पल में शक्करकंद जैसा बन गया और एक मिनट बाद मोटी ककड़ी जैसा!!!
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"मुली का क्या भाव है?" शीला ने पूछा

"एक किलो के ४० रूपीए"

"ठीक है.. मोटी मोटी मुली निकालकर दे मुझे... एक किलो" शीला ने कहा

"मोटी मुली क्यों? पतली वाली ज्यादा स्वादिष्ट होती है" सब्जीवाले ने ज्ञान दिया

"तुझे जितना कहा गया उतना कर... मुझे मोटी और लंबी मुली ही चाहिए" शीला ने कहा

"क्यों? खाना भी है या किसी ओर काम के लिए चाहिए?"

शीला ने जवाब नही दिया तो सब्जीवाले को ओर जोश चढ़ा

"मुली से तो जलन होगी... आप गाजर ले लो"

"नही चाहिए मुझे गाजर... ये ले पैसे" शीला ने थोड़े गुस्से के साथ उसे १०० का नोट दिया

बाकी खुले पैसे वापिस लौटाते वक्त उस सब्जीवाले ने शीला की कोमल हथेलियों पर हाथ फेर लिया और बोला "और क्या सेवा कर सकता हूँ भाभीजी?"

उसकी ओर गुस्से से घूरते हुए शीला वहाँ से चल दी। उसकी बात वह भलीभाँति समझ सकती थी। पर क्यों बेकार में ऐसे लोगों से उलझे... ऐसा सोचकर वह किराने की दुकान के ओर गई।

बाकी सामान खरीदकर वह रिक्शा में घर आने को निकली। रिक्शा वाला हरामी भी मिरर को शीला के स्तनों पर सेट कर देखते देखते... और मन ही मन में चूसते चूसते... ऑटो चला रहा था।
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एक तरफ घर पर पति की गैरहाजरी, दूसरी तरफ बाहर के लोगों की हलकट नजरें.. तीसरी तरफ भोसड़े में हो रही खुजली तो चौथी तरफ समाज का डर... परेशान हो गई थी शीला!!

घर आकर वह लाश की तरह बिस्तर पर गिरी.. उसकी छाती से साड़ी का पल्लू सरक गया... यौवन के दो शिखरों जैसे उत्तुंग स्तन.. शीला की हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे। लेटे लेटे वह सोच रही थी "बहनचोद, इन माँस के गोलों में भला कुदरत ने ऐसा क्या जादू किया है की जो भी देखता है बस देखता ही रह जाता है!!" फिर वह सोचने लगी की वैसे तो मर्द के लंड में भी ऐसा कौनसा चाँद लगा होता है, जो औरतें देखते ही पानी पानी हो जाती है!!

शीला को अपने पति मदन के लंड की याद आ गई... ८ इंच का... मोटे गाजर जैसा... ओहहह... ईशशश... शीला ने इतनी गहरी सांस ली की उसकी चूचियों के दबाव से ब्लाउस का हुक ही टूट गया।
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कुदरत ने मर्दों को लंड देकर, महिलाओं को उनका ग़ुलाम बना दिया... पूरा जीवन... उस लंड के धक्के खा खाकर अपने पति और परिवार को संभालती है.. पूरा दिन घर का काम कर थक के चूर हो चुकी स्त्री को जब उसका पति, मजबूत लंड से धमाधम चोदता है तो स्त्री के जनम जनम की थकान उतर जाती है... और दूसरे दिन की महेनत के लिए तैयार हो जाती है।

शीला ने ब्लाउस के बाकी के हुक भी खोल दिए... अपने मम्मों के बीच की कातिल चिकनी खाई को देखकर उसे याद आ गया की कैसे मदन उसके दो बबलों के बीच में लंड घुसाकर स्तन-चुदाई करता था। शीला से अब रहा नही गया... घाघरा ऊपर कर उसने अपनी भोस पर हाथ फेरा... रस से भीग चुकी थी उसकी चुत... अभी अगर कोई मिल जाए तो... एक ही झटके में पूरा लंड अंदर उतर जाए... इतना गीला था उसका भोसड़ा.. चुत के दोनों होंठ फूलकर कचौड़ी जैसे बन चुके थे।

शीला ने चुत के होंठों पर छोटी सी चिमटी काटी... दर्द तो हुआ पर मज़ा भी आया... इसी दर्द में तो स्वर्गिक आनंद छुपा था.. वह उन पंखुड़ियों को और मसलने लगी.. जितना मसलती उतनी ही उसकी आग और भड़कने लगी... "ऊईईई माँ... " शीला के मुंह से कराह निकल गई... हाय.. कहीं से अगर एक लंड का बंदोबस्त हो जाए तो कितना अच्छा होगा... एक सख्त लंड की चाह में वह तड़पने लगी.. थैली से उसने एक मस्त मोटी मुली निकाली और उस मुली से अपनी चुत को थपथपाया... एक हाथ से भगोष्ठ के संग खेलते हुए दूसरे हाथ में पकड़ी हुई मुली को वह अपने छेद पर रगड़ रही थी। भोसड़े की गर्मी और बर्दाश्त न होने पर, उसने अपनी गांड की नीचे तकिया सटाया और उस गधे के लंड जैसी मुली को अपनी चुत के अंदर घुसा दिया।

लगभग १० इंच लंबी मुली चुत के अंदर जा चुकी थी। अब वह पूरे जोश के साथ मुली को अपने योनिमार्ग में रगड़ने लगी.. ५ मिनट के भीषण मुली-मैथुन के बाद शीला का भोसड़ा ठंडा हुआ... शीला की छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। सांसें नॉर्मल होने के बाद उसने मुली बहार निकाली। उसके चुत रस से पूरी मुली सन चुकी थी.. उस प्यारी सी मुली को शीला ने अपनी छाती से लगा लिया... बड़ा मज़ा दिया था उस मुली ने! मुली की मोटाई ने आज तृप्त कर दिया शीला को!!

मुली पर लगे चिपचिपे चुत-रस को वह चाटने लगी.. थोड़ा सा रस लेकर अपनी निप्पल पर भी लगाया... और मुली को चाट चाट कर साफ कर दिया।

अब धीरे धीरे उसकी चुत में जलन होने शुरू हो गई.. शीला ने चूतड़ों के नीचे सटे तकिये को निकाल लिया और दोनों जांघें रगड़ती हुई तड़पने लगी... "मर गई!!! बाप रे!! बहुत जल रहा है अंदर..." जलन बढ़ती ही गई... उस मुली का तीखापन पूरी चुत में फैल चुका था.. वह तुरंत उठी और भागकर किचन में गई.. फ्रिज में से दूध की मलाई निकालकर अपनी चुत में अंदर तक मल दी शीला ने.. !! ठंडी ठंडी दूध की मलाई से उसकी चुत को थोड़ा सा आराम मिला.. और जलन धीरे धीरे कम होने लगी.. शीला अब दोबारा कभी मुली को अपनी चुत के इर्द गिर्द भी भटकने नही देगी... जान ही निकल गई आज तो!!
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शाम तक चुत में हल्की हल्की जलन होती ही रही... बहनचोद... लंड नही मिल रहा तभी इन गाजर मूलियों का सहारा लेना पड़ रहा है..!! मादरचोद मदन... हरामी.. अपना लंड यहाँ छोड़कर गया होता तो अच्छा होता... शीला परेशान हो गई थी.. अब इस उम्र में कीसे पटाए??

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vakharia

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Supreme
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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..

शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..

अब आगे..

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एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
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इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई

प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
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2


टिंग टॉंग..!!!

घर की डोरबेल बजी..

वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!

अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??

उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..

वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"

बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..

वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..

वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी

वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"

शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"

वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"

शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..

शीला: "कौन है अंदर?"

अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी

वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"

संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई

शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी

सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!

शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..

वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..

शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"

वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था

उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"

अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"

वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास

वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"

शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??

शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"

बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई

शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"

अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..

एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"

शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा

रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई

सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..

थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"

वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"

शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..

शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"

वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"

शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..

उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"

वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"

शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"

वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"

शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी

बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई

वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"

शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"

वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा

वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"

शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"

वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"

शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"

शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"

वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी

शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"

वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..

बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"

वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"

असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"

वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"

वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
​

3

वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..

‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..

कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..

इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
​

5

शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..​


9

वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..

चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..

जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..

वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..

बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..

डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..

जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??

‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..

‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’

यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..

जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?

बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..

वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..

एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..

जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..

बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"

वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"

बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"

वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"

यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..

बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!

वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..

दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..

‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..

वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’

वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..

उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..

एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..

वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..

जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..

शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..

उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..

दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
​

1a
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो

बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..

अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी

उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..

‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..

बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"

शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"

बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..

‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..

‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’

इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..

‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..

‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’

शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..

बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..


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Pk8566

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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..

शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..

अब आगे..

__________________________________________________________________________________________________

एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
​


1

इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई

प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
​

2


टिंग टॉंग..!!!

घर की डोरबेल बजी..

वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!

अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??

उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..

वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"

बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..

वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..

वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी

वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"

शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"

वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"

शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..

शीला: "कौन है अंदर?"

अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी

वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"

संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई

शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी

सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!

शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..

वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..

शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"

वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था

उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"

अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"

वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास

वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"

शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??

शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"

बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई

शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"

अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..

एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"

शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा

रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई

सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..

थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"

वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"

शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..

शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"

वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"

शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..

उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"

वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"

शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"

वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"

शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी

बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई

वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"

शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"

वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा

वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"

शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"

वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"

शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"

शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"

वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी

शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"

वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..

बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"

वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"

असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"

वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"

वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
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3

वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..

‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..

कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..

इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
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शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..​


9

वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..

चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..

जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..

वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..

बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..

डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..

जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??

‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..

‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’

यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..

जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?

बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..

वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..

एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..

जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..

बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"

वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"

बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"

वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"

यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..

बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!

वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..

दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..

‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..

वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’

वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..

उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..

एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..

वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..

जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..

शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..

उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..

दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
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1a
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो

बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..

अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी

उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..

‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..

बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"

शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"

बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..

‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..

‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’

इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..

‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..

‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’

शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..

बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..
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बाबिल का शिकार म मां बेटी मिलकर करेगी
 
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