इश्क ने ' गालिब ' निकम्म कर दिया , वर्ना हम भी आदमी थे काम के । गालिब साहब की यह शायरी नारंग साहब पर बिल्कुल फीट बैठती है ।
लेकिन यह इश्क नही आसां , बस इतना समझ लीजे , इक आग का दरिया है और डूब कर जाना है । यह लाइन भी नारंग साहब पर सटीक बैठ रहा है ।
नारंग साहब को पहले यह देखना चाहिए कि तार मे करेंट आ भी रहा है या नही ! और अगर आ रहा है तो अवश्य तार को पल्ग से जोड़ने का काम कर सकते हैं , वरना उन्हे समझ लेना चाहिए कि तार भी बेकार है और पल्ग भी ।
इधर राज साहब ने दो नाव पर सवारी कर तो रखी है लेकिन यह भी सच है ऐसे मे लोग डूब जाया ही करते हैं । सारिका के साथ उनका अवैध संबंध और उनका सारिका के साथ बेइज्जती से पेश आना कोई अच्छा लक्षण नही है । एक खुबसूरत औरत के सामने आप एक दूसरे औरत की खुबसूरती की तुलना नही कर सकते । कोई भी औरत यह बर्दाश्त नही कर सकती । और अगर आप उस औरत का अपमान कर रहे हैं तो यह और भी खतरनाक है ।
किसी ने ठीक कहा था - हैल हैथ नो फ्यूरी लाइक ए वुमेन स्कानर्ड । तिरस्कृत रमणी से ज्यादा कहरबरपा शै सृष्टि मे दूसरी ओर कोई नही ।