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Incest माँ का चेकअप और चुदाई (नए अंदाज में )Running Story

दोस्तों क्या आप इस कहानी की नायिका ममता का अपने दोनों पुत्रो के साथ threesome sex चाहते है

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Premkumar65

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ऋषभ की नज़रें सीधे ममता की तरफ गईं। ममता ने अपनी नज़रें उठाईं और ऋषभ की आँखों में वह भूखापन देखा, जिसने उसकी रूह तक को कँपा दिया।

ऋषभ की आँखों में एक साफ़ चुनौती थी
—एक ऐसी भूख जो केवल ममता के शरीर से शांत हो सकती थी।


ममता, जो अभी भी उस स्पर्श की गर्मी महसूस कर रही थी, घबरा गई और तुरंत अपना सिर झुका लिया। उसकी चेहरे पर आई लालिमा और उसकी झुकी हुई पलकें यह बता रही थीं कि वह अंदर से कितनी टूट चुकी है और कितनी उत्तेजित है।

तभी रीना, जो अपनी बातों में मशगूल थी, बीच में बोली, "भैया, कल का अपॉइंटमेंट ले लें आपका डॉक्टर से? अब काफी समय हो गया है और आपकी सेहत का मामला है, देरी नहीं करनी चाहिए।"

राजेश थोड़ा हिचकिचाए। उनके चेहरे पर एक अजीब सी बेबसी थी। अपनी नपुंसकता और गिरते स्वास्थ्य ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था।

उन्हें डर था कि डॉक्टर शायद उन्हें कोई ऐसी खबर दे दे जिसे वे स्वीकार न कर पाएं। उन्होंने धीरे से कहा, "हाँ... शायद लेना चाहिए, लेकिन क्या अभी ज़रूरत है?"

ऋषभ ने तुरंत बात संभाली। उसने अपनी आवाज़ में एक दृढ़ता लाते हुए कहा, "हाँ, अपॉइंटमेंट बुक कर लो रीना।

नहीं तो फिर डॉक्टर कहीं बाहर चले गए तो हमें और इंतज़ार करना पड़ेगा।" बोलते-बोलते ऋषभ ने एक बार फिर तिरछी नज़र से ममता की तरफ देखा।


उसकी नज़रें ममता के होंठों से होते हुए उसकी छाती की उभार पर टिकी थीं, जो उसकी तेज़ सांसों के कारण ऊपर-नीचे हो रही थीं।

ममता, जो अब तक चुप थी, ने धीरे से अपना सिर उठाया और ऋषभ की बात का समर्थन करते हुए बोली, "सही तो है... सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। ऋषभ के पापा को कल जाना ही चाहिए।"

ममता की आवाज़ में एक हल्की सी थरथराहट थी। वह जानती थी कि वह अपने पति की सेहत की बात नहीं कर रही, बल्कि वह उस आज़ादी की बात कर रही है जिसका रास्ता यह अपॉइंटमेंट खोल सकता था।

राजेश ने लंबी सांस ली और सहमति जताते हुए कहा, "ठीक है, बुक कर लो। लेकिन... हम चलेंगे कैसे? मेरी तबीयत ऐसी नहीं कि मैं लंबी यात्रा कर सकूँ और रीना के पति भी तो अपने काम में व्यस्त होंगे।"

रीना ने तुरंत जवाब दिया, "भैया, आप चिंता मत कीजिए। मैं अपने हसबैंड को बोलती हूँ, वह कल सुबह की फ्लाइट बुक कर देंगे। हम साथ चलेंगे और आराम से डॉक्टर के पास पहुँच जाएंगे।"

जैसे ही रीना ने 'सुबह की फ्लाइट' और 'सबके साथ जाने' की बात कही, ऋषभ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई। उसने मौका ताड़ लिया। उसने बड़े प्यार से कहा, "कोई बात नहीं, मैं बुआ और पापा को कल सुबह एयरपोर्ट छोड़ दूँगा।"

यह वाक्य सुनते ही ममता के शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई। 'एयरपोर्ट छोड़ना'—इसका मतलब था कि कल सुबह रीना और राजेश घर से चले जाएंगे अपने इलाज के लिए , और सबसे बड़ी बात, रीना भी उनके साथ होगी जाएगी ।

ऋषभ का यह प्रस्ताव वास्तव में एक योजना थी। वह जानता था कि जब वह उन्हें एयरपोर्ट छोड़ेगा,
उसके बाद जो बवाल होगा उसको भगवान ही जानते हैं ।

लेकिन इस बात ने ममता के अंदर एक अलग ही हलचल मचा दी। जैसे ही ऋषभ ने 'एयरपोर्ट' शब्द कहा, ममता की चूत ने जैसे एक ज़ोरदार झटका महसूस किया और अचानक रस का एक फव्वारा छूटा।


उसे महसूस हुआ कि उसकी चूत से निकलने वाला गर्म पानी उसकी साड़ी के कपड़े को और ज़्यादा भिगो रहा है। वह इतनी उत्तेजित हो गई कि उसकी जाँघें अपने आप आपस में रगड़ने लगीं। उसे ऐसा लगा जैसे ऋषभ का वह सख्त लंड उसकी कल्पना में उसके अंदर धंस गया हो।

ममता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक दबी हुई आह ली। उसे डर था कि कहीं उसकी यह उत्तेजना सबके सामने न आ जाए। वह सोच रही थी, 'हे भगवान, मैं कितनी गिर चुकी हूँ।

मेरा पति अपनी बीमारी से जूझ रहा है, मेरी ननद हमारे साथ है, और मैं अपने बेटे के साथ बिस्तर साझा करने के सपने देख रही हूँ। लेकिन... लेकिन मेरा शरीर अब इस तड़प को और नहीं सह सकता। मुझे ऋषभ का वह लंड चाहिए, मुझे उसकी वह जंगली भूख चाहिए।'

राजेश, जो इस पूरी कामुकता से अनजान थे, ने राहत की सांस ली और कहा, "ठीक है रीना, फिर कल चलते हैं। ऋषभ, शुक्रिया बेटा कि तुम हमें छोड़ दोगे।"

ऋषभ ने मुस्कुराते हुए कहा, "पापा, इसमें शुक्रिया कैसा? यह तो मेरा फर्ज़ है।"

लेकिन ऋषभ का 'फर्ज़' कुछ और ही था। उसकी नज़रें अब भी ममता के चेहरे पर थीं। वह देख सकता था कि उसकी माँ इस वक्त किस मानसिक और शारीरिक स्थिति से गुज़र रही है।

वह समझ गया था कि ममता की चूत इस वक्त पानी-पानी हो चुकी है। उसे ममता की वह बेचैनी, वह शर्म और वह तड़प साफ़ नज़र आ रही थी।
Uffff kitni garam ho rahi hai Mamta. Soch kar hi uski chut bah rahi hai.
 

Premkumar65

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रीना और राजेश की फ्लाइट की सारी तैयारी पूरी हो चुकी थी। घर में एक अजीब सी बेचैनी थी, लेकिन वह बेचैनी राजेश की विदाई से ज़्यादा ऋषभ और ममता के बीच पनप रही उस वर्जित आग की थी, जो अब बस फटने का इंतज़ार कर रही थी।

नाश्ते की मेज पर सब मौजूद थे। ऋषभ ने अपनी कॉफी का आखिरी घूँट भरा और घड़ी देखते हुए बोला, "मैं क्लिनिक जा रहा हूँ।


दोपहर में आकर मैं बुआ और माँ को ज्योति के यहाँ ले जाऊँगा ताकि उनकी पट्टी चेंज हो सके।" यह कहकर वह उठा और घर से बाहर निकल गया।

जैसे ही ऋषभ अपनी कार में बैठा और इंजन स्टार्ट किया, उसका दिमाग पूरी तरह से अपनी माँ, ममता की देह में खो गया।


उसने फोन निकाला और काँपते हाथों से ममता को एक मैसेज टाइप किया: "माँ, मुझे पता है कि इस वक्त आपकी चूत बहुत गीली है।

बस कल का इंतज़ार करो... कल आपकी चूत की प्यास पूरी तरह मिटने वाली है। मैं अपने सख्त लंड से उसे इतना भर दूँगा कि आप चीखने लगोगी।"

उधर किचन में ममता बर्तन रख रही थी। जैसे ही फोन की नोटिफिकेशन बजी, उसने मैसेज पढ़ा। मैसेज के शब्दों ने उसके शरीर में बिजली का करंट दौड़ा दिया। उसकी साँसें अचानक तेज़ हो गईं और दिल इतनी ज़ोर से धड़कने लगा कि उसे अपने सीने में महसूस हो रहा था।


ऋषभ की वह बात—'चूत की प्यास'—सुनकर ममता की चूत के अंदर एक तीव्र संकुचन हुआ और अचानक रस का एक गर्म फव्वारा छूटा।

उसकी साड़ी का कपड़ा बीच से गीला हो गया। वह वहीं खड़ी रह गई, अपनी जाँघों को आपस में रगड़ते हुए, उसकी आँखों में वासना और शर्म का मिला-जुला भाव था।

तभी रीना किचन में आई और बोली, "भाभी, लाइए मैं मदद कर देती हूँ।" ममता ने हड़बड़ाहट में फोन छुपाया और चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश की।

दोनों औरतें खाना बनाने लगीं, लेकिन ममता का ध्यान केवल उस गीलेपन पर था जो उसकी चूत से रिसकर उसकी जाँघों तक जा रहा था।

दूसरी ओर, ऋषभ अपने क्लिनिक पहुँच चुका था। ऋषभ एक मशहूर सेक्सोलॉजिस्ट (Sexologist) था, इसलिए उसके पास आने वाले मरीज अपनी सबसे निजी और कामुक समस्याओं को लेकर आते थे।

आज लंच से पहले उसके पास 10 अपॉइंटमेंट्स थे। लेकिन ऋषभ का मन आज चिकित्सा से ज़्यादा कामुकता की ओर था। वह हर मरीज में अपनी माँ की छवि ढूँढ रहा था और अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए मरीजों के साथ मर्यादाओं को लाँघ रहा था।

पहला मरीज: मिसेज खन्ना (42 वर्ष)
मिसेज खन्ना अपनी 'वेजाइनल ड्राईनेस' (चूत का सूखापन) की शिकायत लेकर आई थीं। उन्होंने एक टाइट सिल्क की साड़ी पहनी थी।

जब ऋषभ ने उन्हें चेक करने के लिए बेड पर लिटाया और उनके पैरों को फैलाया, तो उसकी नज़र उनकी चूत के गुलाबी हिस्सों पर पड़ी। ऋषभ ने दस्ताने पहने थे, लेकिन उसने जानबूझकर अपनी उँगलियों को गहराई तक अंदर डाला। मिसेज खन्ना ने एक आह भरी।


ऋषभ ने धीरे से उनके क्लिटोरिस को सहलाया। वह उन्हें इलाज दे रहा था या अपनी वासना मिटा रहा था, यह कहना मुश्किल था। उसने सोचा, 'मेरी माँ की चूत तो इससे कहीं ज़्यादा रसभरी और गीली होगी।'

दूसरा मरीज: सुमित (25 वर्ष)
सुमित को 'शीघ्रपतन' (Premature Ejaculation) की समस्या थी। ऋषभ ने उसे अपनी मेज के सामने बिठाया। बातचीत के दौरान ऋषभ का ध्यान सुमित के डर पर नहीं, बल्कि अपनी पैंट में खड़े हो रहे अपने लंड पर था।

उसने सुमित को कुछ एक्सरसाइज बताईं, लेकिन उसका दिमाग कल्पना कर रहा था कि वह ममता को इसी तरह अपने सामने बिठाकर उसके कपड़े उतार रहा है।

तीसरा मरीज: मिस प्रिया (23 वर्ष)
प्रिया को 'एनोर्गस्मिया' (चरम सुख न मिल पाना) की समस्या थी। वह बहुत सुंदर और जवान थी।

ऋषभ ने उसे रिलैक्स करने के लिए कहा और उसके पेट और जाँघों के ऊपरी हिस्से की मसाज शुरू की। जैसे-जैसे ऋषभ के हाथ प्रिया की जाँघों के करीब जा रहे थे, प्रिया की साँसें तेज़ होने लगीं।

ऋषभ ने धीरे से अपनी उँगलियों को उसकी अंडरवियर के किनारे से अंदर डाला और उसकी चूत को सहलाया। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और कराहने लगी। ऋषभ ने उसे चरम सुख तक पहुँचाया, लेकिन उसके दिमाग में केवल ममता का चेहरा था।

चौथा मरीज: मिस्टर कपूर (50 वर्ष)
मिस्टर कपूर को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या थी। ऋषभ उन्हें दवाइयाँ लिख रहा था, लेकिन उसकी नज़र बार-बार अपनी घड़ी पर जा रही थी।

वह सोच रहा था कि घर पर ममता इस वक्त क्या कर रही होगी। उसने कपूर जी को समझाते हुए अपने लंड को पैंट के अंदर ही सहलाया, जिससे उसे एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हुई।

पाँचवाँ मरीज: श्रीमती वर्मा (35 वर्ष)
श्रीमती वर्मा अपनी कामेच्छा की कमी (Low Libido) की शिकायत लेकर आई थीं। ऋषभ ने उन्हें एक विशेष थेरेपी देने का फैसला किया।

उसने उन्हें अपनी गोद में बैठने को कहा ताकि वह उनकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से को उत्तेजित कर सके। जैसे ही श्रीमती वर्मा उसकी गोद में बैठीं, ऋषभ का सख्त लंड सीधे उनकी चूत से सट गया।

श्रीमती वर्मा को वह कठोरता महसूस हुई और वह उत्तेजित हो गईं। ऋषभ ने उनके कूल्हों को ज़ोर से भींचा और उनके कान में फुसफुसाया, "क्या आपको यह महसूस हो रहा है?" श्रीमती वर्मा ने अपनी गर्दन पीछे झुका ली और ऋषभ के कंधे पर हाथ रख दिया।

छठा मरीज: नेहा (27 वर्ष)
नेहा को अपनी चूत में खुजली और जलन की समस्या थी। जब ऋषभ ने उसे चेक किया, तो उसने देखा कि नेहा बहुत ज़्यादा उत्तेजित थी।

ऋषभ ने अपनी उँगली से उसके अंदरूनी हिस्सों को सहलाते हुए उसे उत्तेजित करना शुरू किया। नेहा ने ऋषभ का हाथ पकड़ लिया और उसे और गहराई तक जाने का इशारा किया।

ऋषभ ने उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया, लेकिन उसका मन अभी भी अतृप्त था क्योंकि उसे वह 'वर्जित' स्वाद चाहिए था जो केवल उसकी माँ के पास था।

सातवाँ मरीज: मिस्टर मेहरा (45 वर्ष)
मिस्टर मेहरा अपनी पत्नी के साथ आए थे। पत्नी को 'वेजिस्मस' (चूत का संकुचन) की समस्या थी। ऋषभ ने पत्नी को चेक करते समय पति को बाहर इंतज़ार करने को कहा।

कमरे के अंदर, ऋषभ ने पत्नी के साथ बहुत ही कामुक तरीके से व्यवहार किया। उसने उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने का नाटक किया (इलाज के नाम पर) जिससे वह महिला पूरी तरह से पिघल गई।

आठवाँ मरीज: मिस तान्या (21 वर्ष)
तान्या एक कॉलेज छात्रा थी जिसे अपनी सेक्सुअल आइडेंटिटी को लेकर भ्रम था। ऋषभ ने उसे मानसिक रूप से रिलैक्स करने के लिए एक 'टच थेरेपी' दी।

उसने तान्या के चूचियों को धीरे-धीरे सहलाया और उसके निप्पल्स को अपनी उँगलियों से मरोड़ा। तान्या की सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। ऋषभ ने सोचा, 'माँ के चूची तो इससे भी भारी और नरम होंगे।'

नौवाँ मरीज: श्रीमती गांगुली (48 वर्ष)
श्रीमती गांगुली को मेनोपॉज के बाद की समस्याओं के लिए परामर्श चाहिए था। ऋषभ ने उन्हें समझाते हुए उनके हाथ पकड़े, लेकिन उसका ध्यान उनके चेहरे की परिपक्वता पर था।

उसे महसूस हुआ कि परिपक्व औरतें ज़्यादा कामुक होती हैं। उसने कल्पना की कि वह ममता को इसी तरह अपनी मेज पर लिटाकर उसके कपड़े फाड़ रहा है।

दसवाँ मरीज: मिस ईशा (26 वर्ष)
ईशा को अपनी कामुकता बढ़ाने के लिए सलाह चाहिए थी। वह बहुत बोल्ड थी और उसने ऋषभ को सीधे तौर पर संकेत दिया कि वह उसके साथ कुछ करना चाहती है।

ऋषभ ने अब तक का अपना सारा संयम खो दिया था। उसने ईशा को बेड पर पटका, उसकी स्कर्ट ऊपर की और उसका मोटा, नसों से भरा हुआ लंड उसकी चूत में धँसा दिया।

ईशा ज़ोर से चिल्लाई, "ओह गॉड, डॉक्टर! आप बहुत सख्त हैं!" ऋषभ ने उसे पागलों की तरह चोदा, लेकिन हर धक्के के साथ वह चिल्ला रहा था, "माँ... माँ... तुम्हारी चूत... तुम्हारी गीली चूत!"

जैसे ही ऋषभ ने ईशा के अंदर अपना गाढ़ा वीर्य (cum) छोड़ा, वह हाँफने लगा। उसका शरीर पसीने से तरबतर था। उसने ईशा को कपड़े पहनने को कहा और खुद अपनी कुर्सी पर गिर गया।

उसने अपनी पैंट ठीक की और खिड़की के बाहर देखा। लंच का समय हो गया था। अब उसे घर जाना था, ज्योति के पास जाना था और फिर उस इंतज़ार को खत्म करना था जो उसे और उसकी माँ को पागल कर रहा था।

उधर घर में, ममता ने खाना बना लिया था। वह अभी भी उस मैसेज के असर में थी। उसकी चूत से अब भी रस रिस रहा था और वह बार-बार अपनी उँगलियों से उसे सहला रही थी।

वह जानती थी कि ऋषभ अब घर आएगा और उसकी आँखों में वह भूख होगी जिसे केवल वह शांत कर सकती थी।

वह अपनी साड़ी के पल्लू को उँगलियों में लपेटे हुए ऋषभ का इंतज़ार करने लगी, यह जानते हुए कि अब कोई वापसी नहीं है।
Aggg bahut jor se lagi hui hai dono taraf.
 

insotter

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लंच का समय हो चुका था। ऋषभ ने अपने क्लिनिक से निकला और अपनी कार की ओर बढ़ा। उसके दिमाग में अभी भी उन दस मरीजों के साथ किए गए कामुक प्रयोगों की यादें ताज़ा थीं,

लेकिन अब उसकी भूख किसी मरीज के लिए नहीं, बल्कि अपनी माँ की उस 'प्यास' के लिए थी जिसका उसने मैसेज में जिक्र किया था। वह तेज़ी से कार चलाकर घर पहुँचा।

जैसे ही उसने डोरबेल बजाई, दरवाज़ा खुला। सामने ममता खड़ी थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और चेहरे पर वह शर्म जो उसे और भी कामुक बना रही थी।

ऋषभ ने उसकी आँखों में गहराई से देखा और एक शरारती मुस्कुराहट के साथ अंदर दाखिल हुआ। उसने जानबूझकर ममता के कंधे को हल्का सा छुआ, जिससे ममता के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई।

राजेश पहले से ही लंच टेबल पर बैठ चुके थे। ममता और रीना ने मिलकर टेबल पर गरमा-गरम खाना लगाया था। दाल, चावल, सब्ज़ी और रोटियों की खुशबू पूरे कमरे में फैली थी,

लेकिन ऋषभ की नाक केवल ममता के शरीर से आने वाली उस भीनी खुशबू को महसूस कर रही थी, जो उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी।

ऋषभ टेबल पर बैठा और उसने जानबूझकर ममता के ठीक बगल वाली कुर्सी चुनी।

दोनों के कंधे एक-दूसरे से सट रहे थे। जैसे ही सबने खाना शुरू किया, ऋषभ ने टेबल के नीचे अपना दायाँ पैर धीरे से ममता की जाँघ पर रखा।

ममता अचानक चौंक गई। उसने एक पल के लिए ऋषभ की ओर देखा, लेकिन ऋषभ बड़े आराम से अपनी रोटी चबा रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो।

ममता ने अपना पैर हटाने की कोशिश की, लेकिन ऋषभ ने अपने पैर को और ऊपर सरकाया और अपनी उँगलियों से ममता की जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाने लगा।

ममता की साँसें अटक गईं। उसे याद आया कि सुबह ऋषभ ने उसे क्या मैसेज भेजा था—"आपकी चूत की प्यास मिटने वाली है।" अब जब ऋषभ का पैर उसकी जाँघों के बीच उस संवेदनशील जगह की ओर बढ़ रहा था,

तो ममता की चूत में फिर से रस का प्रवाह शुरू हो गया। वह घबराहट में राजेश की ओर देखने लगी कि कहीं उन्हें शक न हो जाए, लेकिन राजेश अपनी बातों में मगन थे।

तभी रीना ने बातचीत शुरू की, "भैया, कल की टिकट फाइनल हो गई है। हमें सुबह चार बजे एयरपोर्ट के लिए निकलना होगा।"

राजेश ने सिर हिलाते हुए कहा, "ठीक है, समय तो सही है।"

रीना ने ऋषभ की ओर देखते हुए कहा, "ऋषभ, हमें तुम सुबह चार बजे छोड़ देना। टैक्सी का झंझट नहीं रहेगा और हम समय पर पहुँच जाएंगे।"

ममता, जो ऋषभ के पैर की शरारतों से पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी थी और जिसकी चूत अब गीली होकर उसकी साड़ी में चिपक रही थी, उसने धीरे से कहा, "मैं भी आऊँगी एयरपोर्ट ड्रॉप करने।"

राजेश ने हैरानी से ममता की ओर देखा और बोले, "जी, क्यों सुबह-सुबह तुम परेशान होगी? इतनी जल्दी उठना मुश्किल होगा, तुम आराम करना।"

ऋषभ ने इस मौके का फायदा उठाया। उसने टेबल के नीचे अपना पैर अब ममता की चूत के बिल्कुल करीब ले जाकर उसे हल्का सा दबाया। ममता के मुँह से एक दबी हुई आह निकलने ही वाली थी कि ऋषभ ने बात संभाल ली।

ऋषभ मुस्कुराते हुए बोला, "अगर माँ आना चाहती हैं तो आने देना पापा। सब साथ चलेंगे। वैसे भी, सुबह की ताजी हवा अच्छी होती है और हम सब साथ में समय बिता पाएंगे।"

ऋषभ की आवाज़ में एक गहरा अर्थ था।

ममता ने ऋषभ की ओर देखा। उसकी आँखों में अब शर्म के साथ-साथ एक तीव्र इच्छा थी। वह समझ गई थी कि ऋषभ उसे संकेत दे रहा है।

ऋषभ ने एक बार फिर अपने पैर से उसकी चूत के उभार को सहलाया, जिससे ममता की कमर अपने आप झुक गई और उसने अपनी जाँघों को कस लिया।

रीना और राजेश को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि उनके सामने बैठे इस माँ-बेटे के बीच वासना का एक ऐसा खेल चल रहा है,


जो कल सुबह की यात्रा को और भी रोमांचक और वर्जित बनाने वाला था। लंच खत्म हुआ, लेकिन ऋषभ और ममता के मन में भूख और बढ़ गई थी—एक ऐसी भूख जिसे केवल एक-दूसरे का शरीर ही शांत कर सकता था।
Outstanding update
 

shineplace

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लंच खत्म होने के बाद घर में एक अजीब सी खामोशी थी, लेकिन ऋषभ और ममता के बीच की केमिस्ट्री बिजली की तरह दौड़ रही थी।

ऋषभ ने अपनी प्लेट हटाते हुए कहा, "बुआ और माँ, आप दोनों तैयार हो जाइए, फिर चलते हैं ज्योति के क्लिनिक। आपकी पट्टी बदलवा देते हैं।"

ममता ने एक नज़र ऋषभ की ओर देखा और फिर धीरे से सिर हिलाया। वह अंदर अपने कमरे में गई ताकि तैयार हो सके। जब वह और रीना बाहर आईं, तो ऋषभ की साँसें जैसे थम सी गईं।

आज ममता ने एक बेहद पतली, पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट पिंक साड़ी पहनी थी। वह साड़ी इतनी महीन थी कि ममता के शरीर का हर कर्व साफ झलक रहा था।

सबसे ज़्यादा उत्तेजक बात यह थी कि उसने अंदर कोई भारी पेटीकोट या सही फिटिंग का ब्लाउज नहीं पहना था, जिससे उसकी भारी और गोल चूचियाँ साफ़ उभर कर दिख रही थीं।

जैसे ही वह चली, उसकी चूचियाँ साड़ी के पार हल्का-हल्का हिल रही थीं।

ऋषभ की नज़रें जैसे चुंबकीय खिंचाव के साथ ममता की उन उभरी हुई चूचियों पर टिक गईं।

वह अपनी माँ के शरीर की इस बेशर्मी और खूबसूरती को देख कर अंदर ही अंदर उबल रहा था। उसकी पैंट के अंदर उसका लंड अब सख्त होने लगा था।

ममता ने महसूस किया कि ऋषभ उसे घूर रहा है। उसने धीरे से अपनी नज़रें उठाईं, ऋषभ की भूखी आँखों को देखा और फिर शर्म के मारे अपना सिर नीचे झुका लिया।

उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी, जो यह बता रही थी कि उसे ऋषभ का यह घूरना पसंद आ रहा है।

तभी रीना ने उसे टोकते हुए कहा, "चल ऋषभ, देखते रहोगे क्या? जल्दी चल।"

ऋषभ झेंप गया और हकलाते हुए बोला, "हाँ... हाँ, चलिए।"

तीनों कार में बैठे और निकल पड़े। आज किस्मत अच्छी थी कि ट्रैफिक ज़्यादा नहीं था, इसलिए वे जल्दी ही ज्योति के क्लिनिक पहुँच गए।

क्लिनिक पहुँचते ही ज्योति ने अपनी असिस्टेंट को इशारा किया और वह तुरंत ममता और रीना की पट्टी बदलने में लग गई।

ममता जब पट्टी बदलवाने के लिए लेटी, तो उसकी ट्रांसपेरेंट साड़ी उसके पैरों से थोड़ा ऊपर खिसक गई, जिससे उसकी गोरी जाँघें दिखने लगीं।

ऋषभ वहीं खड़ा था और उसकी नज़रें ममता की जाँघों और उसकी साड़ी के पार दिख रहे शरीर पर टिकी थीं।

वह बस यही सोच रहा था कि काश वह इस वक्त अकेला होता और अपनी माँ को इसी टेबल पर लिटाकर उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटता।

इसी बीच, ज्योति को मौका मिला और वह धीरे से ऋषभ के पास आई। उसने फुसफुसाते हुए कहा, "ऋषभ, मुझे पता नहीं क्यों, लेकिन मेरी योनि (vagina) में बहुत खुजली होने लगी है। मैं चाहती हूँ कि तुम एक बार चेक कर लो।"

ऋषभ ने ज्योति की ओर देखा। वह जानता था कि ज्योति भी उसे पसंद करती है, लेकिन इस वक्त उसका पूरा ध्यान अपनी माँ की उस गुलाबी साड़ी और उसके शरीर पर था।

उसने पेशेवर अंदाज़ में जवाब दिया, "कोई बात नहीं ज्योति, कल आ जाना। लंच के बाद मैं फ्री होता हूँ, तब आराम से चेक कर लूँगा।"

तभी असिस्टेंट ने बताया कि पट्टी बदल चुकी है। ममता और रीना उठीं और उन्होंने कहा, "चलो ऋषभ, अब घर चलते हैं।"

ऋषभ ने गहरी साँस ली और बोला, "हाँ, चलिए।"

तीनों वापस घर की ओर निकल पड़े। कार के अंदर का माहौल फिर से तनावपूर्ण था। ममता बगल वाली सीट पर बैठी थी और उसकी जाँघें ऋषभ के पैर से हल्का सा छू रही थीं। ऋषभ का मन कर रहा था कि गाड़ी किनारे रोककर अपनी माँ की उस ट्रांसपेरेंट साड़ी को फाड़ दे और उसकी चूत में अपना मोटा लंड उतार दे।

वे अभी घर पहुँचने ही वाले थे कि तभी ऋषभ का फोन बजा। फोन राजू का था, जो उसके क्लिनिक का स्टाफ था।

राजू ने घबराते हुए कहा, "डॉक्टर साहब, जल्दी आ जाइए! बहुत सारे पेशेंट्स वेट कर रहे हैं और कुछ लोग शोर मचा रहे हैं। प्लीज जल्दी आ जाओ।"

ऋषभ ने एक लंबी आह भरी। वह अपनी माँ के साथ कुछ पल बिताना चाहता था, लेकिन काम की मजबूरी थी। उसने कार घर के सामने रोकी और जल्दी से ममता और रीना को उतारा।

"माँ, बुआ, आप लोग अंदर जाइए। मुझे अचानक क्लिनिक जाना पड़ रहा है, पेशेंट्स इंतज़ार कर रहे हैं

," ऋषभ ने कहा और बिना देर किए कार घुमाकर तेज़ी से क्लिनिक की ओर निकल गया।

ममता ने कार के पीछे जाते हुए ऋषभ को देखा। उसकी आँखों में एक अधूरी इच्छा थी। वह अपनी उस पारदर्शी साड़ी में खुद को बहुत कामुक महसूस कर रही थी

और उसे इस बात का मलाल था कि ऋषभ को इतनी जल्दी जाना पड़ा। वह मन ही मन सोचने लगी कि अगली बार जब ऋषभ उसके पास आएगा, तो वह उसे अपनी इस साड़ी के अंदर क्या-क्या दिखाएगी।
 

Sugna

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लंच खत्म होने के बाद घर में एक अजीब सी खामोशी थी, लेकिन ऋषभ और ममता के बीच की केमिस्ट्री बिजली की तरह दौड़ रही थी।

ऋषभ ने अपनी प्लेट हटाते हुए कहा, "बुआ और माँ, आप दोनों तैयार हो जाइए, फिर चलते हैं ज्योति के क्लिनिक। आपकी पट्टी बदलवा देते हैं।"

ममता ने एक नज़र ऋषभ की ओर देखा और फिर धीरे से सिर हिलाया। वह अंदर अपने कमरे में गई ताकि तैयार हो सके। जब वह और रीना बाहर आईं, तो ऋषभ की साँसें जैसे थम सी गईं।

आज ममता ने एक बेहद पतली, पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट पिंक साड़ी पहनी थी। वह साड़ी इतनी महीन थी कि ममता के शरीर का हर कर्व साफ झलक रहा था।

सबसे ज़्यादा उत्तेजक बात यह थी कि उसने अंदर कोई भारी पेटीकोट या सही फिटिंग का ब्लाउज नहीं पहना था, जिससे उसकी भारी और गोल चूचियाँ साफ़ उभर कर दिख रही थीं।

जैसे ही वह चली, उसकी चूचियाँ साड़ी के पार हल्का-हल्का हिल रही थीं।

ऋषभ की नज़रें जैसे चुंबकीय खिंचाव के साथ ममता की उन उभरी हुई चूचियों पर टिक गईं।

वह अपनी माँ के शरीर की इस बेशर्मी और खूबसूरती को देख कर अंदर ही अंदर उबल रहा था। उसकी पैंट के अंदर उसका लंड अब सख्त होने लगा था।

ममता ने महसूस किया कि ऋषभ उसे घूर रहा है। उसने धीरे से अपनी नज़रें उठाईं, ऋषभ की भूखी आँखों को देखा और फिर शर्म के मारे अपना सिर नीचे झुका लिया।

उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी, जो यह बता रही थी कि उसे ऋषभ का यह घूरना पसंद आ रहा है।

तभी रीना ने उसे टोकते हुए कहा, "चल ऋषभ, देखते रहोगे क्या? जल्दी चल।"

ऋषभ झेंप गया और हकलाते हुए बोला, "हाँ... हाँ, चलिए।"

तीनों कार में बैठे और निकल पड़े। आज किस्मत अच्छी थी कि ट्रैफिक ज़्यादा नहीं था, इसलिए वे जल्दी ही ज्योति के क्लिनिक पहुँच गए।

क्लिनिक पहुँचते ही ज्योति ने अपनी असिस्टेंट को इशारा किया और वह तुरंत ममता और रीना की पट्टी बदलने में लग गई।

ममता जब पट्टी बदलवाने के लिए लेटी, तो उसकी ट्रांसपेरेंट साड़ी उसके पैरों से थोड़ा ऊपर खिसक गई, जिससे उसकी गोरी जाँघें दिखने लगीं।

ऋषभ वहीं खड़ा था और उसकी नज़रें ममता की जाँघों और उसकी साड़ी के पार दिख रहे शरीर पर टिकी थीं।

वह बस यही सोच रहा था कि काश वह इस वक्त अकेला होता और अपनी माँ को इसी टेबल पर लिटाकर उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटता।

इसी बीच, ज्योति को मौका मिला और वह धीरे से ऋषभ के पास आई। उसने फुसफुसाते हुए कहा, "ऋषभ, मुझे पता नहीं क्यों, लेकिन मेरी योनि (vagina) में बहुत खुजली होने लगी है। मैं चाहती हूँ कि तुम एक बार चेक कर लो।"

ऋषभ ने ज्योति की ओर देखा। वह जानता था कि ज्योति भी उसे पसंद करती है, लेकिन इस वक्त उसका पूरा ध्यान अपनी माँ की उस गुलाबी साड़ी और उसके शरीर पर था।

उसने पेशेवर अंदाज़ में जवाब दिया, "कोई बात नहीं ज्योति, कल आ जाना। लंच के बाद मैं फ्री होता हूँ, तब आराम से चेक कर लूँगा।"

तभी असिस्टेंट ने बताया कि पट्टी बदल चुकी है। ममता और रीना उठीं और उन्होंने कहा, "चलो ऋषभ, अब घर चलते हैं।"

ऋषभ ने गहरी साँस ली और बोला, "हाँ, चलिए।"

तीनों वापस घर की ओर निकल पड़े। कार के अंदर का माहौल फिर से तनावपूर्ण था। ममता बगल वाली सीट पर बैठी थी और उसकी जाँघें ऋषभ के पैर से हल्का सा छू रही थीं। ऋषभ का मन कर रहा था कि गाड़ी किनारे रोककर अपनी माँ की उस ट्रांसपेरेंट साड़ी को फाड़ दे और उसकी चूत में अपना मोटा लंड उतार दे।

वे अभी घर पहुँचने ही वाले थे कि तभी ऋषभ का फोन बजा। फोन राजू का था, जो उसके क्लिनिक का स्टाफ था।

राजू ने घबराते हुए कहा, "डॉक्टर साहब, जल्दी आ जाइए! बहुत सारे पेशेंट्स वेट कर रहे हैं और कुछ लोग शोर मचा रहे हैं। प्लीज जल्दी आ जाओ।"

ऋषभ ने एक लंबी आह भरी। वह अपनी माँ के साथ कुछ पल बिताना चाहता था, लेकिन काम की मजबूरी थी। उसने कार घर के सामने रोकी और जल्दी से ममता और रीना को उतारा।

"माँ, बुआ, आप लोग अंदर जाइए। मुझे अचानक क्लिनिक जाना पड़ रहा है, पेशेंट्स इंतज़ार कर रहे हैं

," ऋषभ ने कहा और बिना देर किए कार घुमाकर तेज़ी से क्लिनिक की ओर निकल गया।

ममता ने कार के पीछे जाते हुए ऋषभ को देखा। उसकी आँखों में एक अधूरी इच्छा थी। वह अपनी उस पारदर्शी साड़ी में खुद को बहुत कामुक महसूस कर रही थी


और उसे इस बात का मलाल था कि ऋषभ को इतनी जल्दी जाना पड़ा। वह मन ही मन सोचने लगी कि अगली बार जब ऋषभ उसके पास आएगा, तो वह उसे अपनी इस साड़ी के अंदर क्या-क्या दिखाएगी।
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ऋषभ जैसे ही क्लिनिक पहुँचा, वहाँ का नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। बाहर मरीजों की भारी भीड़ लगी थी और लोग शोर मचा रहे थे।

ऋषभ ने राजू को कड़े लहजे में निर्देश दिया, "राजू, सबको शांत करो और एक-एक करके अंदर भेजो। कोई भी जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।"

राजू ने भीड़ को संभाला और सबसे पहले एक अधेड़ उम्र की महिला को अंदर भेजा, जिनका नाम शालिनी था। शालिनी की उम्र करीब 38-40 साल रही होगी।

वह एक घरेलू महिला थी, जिसने एक साधारण सूती साड़ी पहनी थी, लेकिन उसकी देह का उभार उसकी उम्र के बावजूद बहुत कामुक था। शालिनी पिछले कई सालों से शादीशुदा थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वह प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही थी।

वह अपनी बांझपन की समस्या को लेकर बहुत परेशान थी और ऋषभ के पास आखिरी उम्मीद लेकर आई थी।

जैसे ही शालिनी ऋषभ के सामने आई और उसने अपनी समस्या बतानी शुरू की, ऋषभ की नज़रें उसके चेहरे पर टिक गईं।

शालिनी का चेहरा, उसकी आँखों की मासूमियत और उसके बात करने का तरीका बिल्कुल उसकी माँ ममता जैसा था।

ऋषभ के दिमाग में अचानक अपनी माँ की वह ट्रांसपेरेंट पिंक साड़ी और उसकी उभरी हुई चूचियों की छवि कौंध गई। शालिनी को देखते ही ऋषभ के अंदर दबी हुई वासना ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी।

उसकी कल्पनाओं ने काम करना शुरू कर दिया। उसे शालिनी में अपनी माँ की परछाई दिखने लगी। जैसे ही उसने शालिनी की तरफ देखा, उसकी पैंट के अंदर उसका मोटा लंड एक झटके में तनकर खड़ा हो गया।

वह इतना सख्त हो गया कि पैंट का कपड़ा उसे चुभने लगा। ऋषभ की सांसें तेज हो गईं और उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख उतर आई।

ऋषभ ने अपनी आवाज़ को पेशेवर रखने की कोशिश की, लेकिन उसके शब्दों में कामुकता साफ झलक रही थी।

उसने शालिनी से कहा, "शालिनी जी, आपकी समस्या थोड़ी जटिल लग रही है। मुझे आपका गहन शारीरिक चेकअप (Physical Examination) करना पड़ेगा। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपने सारे कपड़े उतार दें और इस बेड पर लेट जाएँ।"

शालिनी थोड़ी झिझकी, उसने धीरे से कहा, "डॉक्टर साहब, क्या यह ज़रूरी है? क्या मैं सिर्फ साड़ी हटाकर नहीं लेट सकती?"

ऋषभ ने अपनी कुर्सी से उठकर उसके करीब कदम बढ़ाए। उसकी नज़रे शालिनी के सीने पर थीं। उसने धीमे लेकिन अधिकारपूर्ण स्वर में कहा, "देखिए, मैं एक स्पेशलिस्ट हूँ।

जब तक मैं आपके शरीर के हर हिस्से की जांच नहीं करूँगा, मैं सही कारण नहीं बता पाऊंगा। अगर आप माँ बनना चाहती हैं, तो आपको मुझ पर भरोसा करना होगा।"

शालिनी, जो माँ बनने की तड़प में थी, ने धीरे-धीरे अपनी साड़ी का पल्लू गिराया। उसने अपनी ब्लाउज की हुक खोली और धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगी।

जैसे-जैसे कपड़े उतर रहे थे, ऋषभ की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। जब शालिनी पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ के सामने एक ऐसा शरीर था जो परिपक्वता और कामुकता का संगम था।

उसकी चूचियाँ भारी और गोल थीं, और उनके बीच की गहरी घाटी ऋषभ को अपनी ओर खींच रही थी।

ऋषभ ने दस्ताने पहने और शालिनी के पास गया। उसने सबसे पहले उसकी चूचियों की जांच करने का फैसला किया।

उसने अपने दोनों हाथों से शालिनी की भारी चूचियों को मजबूती से पकड़ा और उन्हें दबाने लगा।

"आह... डॉक्टर साहब..." शालिनी के मुँह से एक हल्की सी आह निकली।

ऋषभ ने उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाया और मरोड़ा, यह चेक करने के बहाने कि क्या उनमें से दूध आने के कोई संकेत हैं या हार्मोनल असंतुलन है।

लेकिन असल में, वह अपनी माँ की याद में उन चूचियों का आनंद ले रहा था। जैसे ही ऋषभ की उंगलियों ने शालिनी के गुलाबी निप्पल्स को रगड़ा, शालिनी के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई।

उसकी चूत में एक तीव्र सिहरन हुई और वह अनजाने में अपनी जाँघें फैलाने लगी।

शालिनी की चूत अब गीली होने लगी थी। वह डॉक्टर के इस स्पर्श से उत्तेजित हो रही थी। ऋषभ ने देखा कि शालिनी की सांसें तेज हो गई हैं और उसका शरीर हल्का सा कांप रहा है।

ऋषभ ने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया। उसने शालिनी की जाँघों को फैलाया और उसकी चूत के पास अपनी उंगलियाँ ले गया।

शालिनी की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, जिससे वहां एक चिपचिपा पानी जैसा पदार्थ निकल रहा था।

ऋषभ ने फुसफुसाते हुए कहा, "शालिनी जी, आपकी चूत बहुत ज्यादा उत्तेजित और गीली है। लगता है आपके शरीर में कामेच्छा बहुत अधिक है, जो शायद आपकी प्रेग्नेंसी में बाधा बन रही है।"

यह सुनकर शालिनी और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जैसे वह ऋषभ को अपनी चूत के और करीब बुला रही हो।

ऋषभ अब और नियंत्रण नहीं रख सका। उसने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना खड़ा हुआ, मोटा और लाल लंड बाहर निकाल लिया।

शालिनी ने जब उस विशाल लंड को देखा, तो उसकी आँखें फैल गईं। उसने कभी इतना बड़ा और सख्त लंड नहीं देखा था।

ऋषभ ने बिना समय गंवाए शालिनी के पैरों को उसके कंधों पर रख दिया और अपनी उंगलियों से उसकी चूत के छेद को सहलाने लगा।

"डॉक्टर साहब... यह आप क्या कर रहे हैं... आह..." शालिनी ने कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध नहीं, बल्कि एक गहरी तड़प थी।

ऋषभ ने अपनी जीभ निकाली और शालिनी की चूत के क्लिटोरिस को जोर से चाटना शुरू कर दिया।

"चप-चप-चप" की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। ऋषभ उसकी चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे वह अपनी माँ की चूत को चाट रहा हो।

वह उसकी गीली गर्माहट और स्वाद का आनंद ले रहा था। शालिनी अपनी कमर को बेड पर पटकने लगी और जोर-जोर से कराहने लगी।

"ओह गॉड... डॉक्टर... बहुत अच्छा लग रहा है... और जोर से चाटिए... आह!"

जब शालिनी चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी, तभी ऋषभ ने अपना मोटा लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में उसे पूरा अंदर उतार दिया।

"आह्ह्ह्ह!" शालिनी की एक लंबी चीख निकली, लेकिन वह चीख दर्द की नहीं, बल्कि एक असीम सुख की थी।

ऋषभ का मोटा लंड उसकी तंग चूत को फाड़ता हुआ अंदर तक चला गया था।

ऋषभ ने अब अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया। "धप-धप-धप" की आवाज़ आने लगी।

वह पूरी ताकत से शालिनी की चूत में अपना लंड ठोक रहा था। हर धक्के के साथ शालिनी की भारी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं।

ऋषभ ने एक हाथ से उसकी चूचियों को जोर से दबाया और दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा।

"तुम बिल्कुल मेरी ममता जैसी लग रही हो... तुम्हारी चूत बहुत तंग और गर्म है!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा।

शालिनी अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। वह ऋषभ के लंड को अपनी चूत की दीवारों से जकड़ने लगी।

वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, "हाँ... मुझे भर दो... मुझे अपने बीज से भर दो डॉक्टर... मुझे प्रेग्नेंट कर दो!"

ऋषभ की रफ्तार और बढ़ गई। वह पागलों की तरह शालिनी की चूत में अपना लंड उतार रहा था।

उसकी चूत से निकलने वाला पानी और ऋषभ का पसीना मिलकर एक कामुक शोर पैदा कर रहे थे। ऋषभ को महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने वाला है।

उसने आखिरी के कुछ धक्के बहुत जोर से मारे और शालिनी की चूत की गहराई में अपना लंड पूरी तरह धंसा दिया।

एक जोरदार झटके के साथ, ऋषभ का गर्म और गाढ़ा वीर्य शालिनी की चूत के अंदर फुहारों की तरह छूटने लगा।

"आह्ह्ह्ह... उम्ममम!" ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना पूरा लोड शालिनी के गर्भाशय के मुहाने पर खाली कर दिया।

शालिनी भी उसी पल चरम सुख (Orgasm) पर पहुँच गई और उसकी चूत ने ऋषभ के लंड को कसकर जकड़ लिया।

काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में रहे, उनकी सांसें तेज थीं। ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे शालिनी की चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर बहने लगा।

ऋषभ ने अपनी पैंट ठीक की और शालिनी से कहा, "अब आप कपड़े पहन लीजिए। मैंने आपकी समस्या का 'इलाज' कर दिया है। अब उम्मीद है कि आप जल्द ही प्रेग्नेंट हो जाएंगी।"

शालिनी ने एक मदहोश मुस्कान के साथ ऋषभ की ओर देखा। वह पूरी तरह संतुष्ट थी। वह धीरे से उठी, अपने कपड़े पहने और ऋषभ को एक कामुक नज़र देकर क्लिनिक से बाहर चली गई।

ऋषभ ने एक गहरी सांस ली और अपने मन को शांत करने की कोशिश की। शालिनी के साथ जो कुछ भी हुआ था,

उसने उसके शरीर में कामुकता का एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था जो अभी भी शांत नहीं हुआ था।

उसके लंड में अभी भी हल्की सी झनझनाहट थी और दिमाग में शालिनी की उन भारी चूचियों और गीली चूत की यादें घूम रही थीं।

लेकिन क्लिनिक में भीड़ बहुत थी, इसलिए उसने खुद को संभाला और तुरंत बेल बजाई।

अगला मरीज एक 54 साल का व्यक्ति था, जो काफी उदास और परेशान दिख रहा था। उसने अपनी समस्या बताई—उसे 'इरेक्टाइल डिस्फंक्शन' (Erectile Dysfunction) की समस्या थी।

वह बता रहा था कि अब उसका लंड उत्तेजित नहीं होता और वह अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा है।

ऋषभ ने पेशेवर अंदाज में उसकी बात सुनी, उसे कुछ कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises) समझाईं और कुछ दवाइयां लिखकर दे दीं। वह आदमी राहत की सांस लेकर बाहर चला गया।

उसके बाद एक और पुरुष आया, जिसे 'हाइड्रोसील' (Hydrocele) की समस्या थी। उसके अंडकोष में सूजन थी। ऋषभ ने उसकी जांच की और उसे सटीक निदान के लिए स्क्रोटम के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के लिए बाहर भेज दिया।

अब ऋषभ की बारी थी उस मरीज को बुलाने की जिसका नंबर अगला था। जैसे ही उसने बेल बजाई, अंदर एक 23 साल की युवती दाखिल हुई।

उसका नाम रिया था। वह बहुत ही सुंदर, छरहरी काया वाली और मासूम दिखने वाली लड़की थी। उसने एक टाइट फिटिंग वाली कुर्ती और लेगिंग्स पहनी हुई थी,

जिससे उसके शरीर के कर्व्स साफ झलक रहे थे। उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी और वह अपनी नजरें नीचे झुकाए हुए थी।

रिया ने धीमी आवाज में कहा, "डॉक्टर साहब... मेरे पीरियड्स पिछले दो महीने से मिस हो गए हैं। मैं बहुत डरी हुई हूँ।"

ऋषभ ने उसकी ओर देखा। उसकी उम्र, उसकी मासूमियत और वह घबराहट... ऋषभ के अंदर का शिकारी जाग उठा।

उसने रिया की आंखों में देखा, जो डर और शर्म से झुकी हुई थीं। ऋषभ एक अनुभवी डॉक्टर था, वह समझ गया कि यह कोई हार्मोनल समस्या नहीं, बल्कि कुछ और है।

ऋषभ ने अपनी कुर्सी पर पीछे झुकते हुए एक कामुक मुस्कान के साथ कहा, "रिया, पीरियड्स मिस होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम कारण प्रेग्नेंसी है।

मुझे तुम्हारा गहन चेकअप करना होगा ताकि मैं पक्का कर सकूँ कि अंदर क्या चल रहा है।"

रिया ने धीरे से सिर हिलाया, लेकिन वह अभी भी झिझक रही थी। ऋषभ ने अपनी आवाज को थोड़ा सख्त और अधिकारपूर्ण बनाया, "देखो रिया, अगर तुम चाहती हो कि समस्या का सही समाधान निकले, तो तुम्हें मेरी बात माननी होगी। चलो, अपने सारे कपड़े उतारो और इस बेड पर लेट जाओ।"

रिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने धीरे से पूछा, "क्या... क्या पूरे कपड़े उतारना ज़रूरी है, डॉक्टर साहब?"

ऋषभ ने अपनी नजरें उसकी टाइट कुर्ती के नीचे उभरी हुई छोटी लेकिन सख्त चूचियों पर टिका दीं।

उसने कहा, "हाँ, बिल्कुल। मुझे पेट के निचले हिस्से और चूत की जांच करनी होगी। बिना कपड़ों के जांच करना मेडिकल प्रोटोकॉल है। डरो मत, मैं सिर्फ एक डॉक्टर हूँ।"

रिया ने धीरे-धीरे अपनी कुर्ती उतारी। उसके नीचे एक पतला सा ब्रा था, जो उसकी गोरी त्वचा को और भी उभार रहा था।

फिर उसने अपनी लेगिंग्स और अंडरवियर भी उतार दिए। जब वह पूरी तरह नग्न होकर बेड पर लेटी, तो ऋषभ की सांसें तेज हो गईं।

रिया का शरीर एकदम तराशा हुआ था। उसकी त्वचा मखमली और सफेद थी, और उसकी चूत के ऊपर के बाल बहुत ही सलीके से ट्रिम किए हुए थे।

ऋषभ ने मन ही मन सोचा, 'इस मासूम लड़की को किसी ने अच्छे से चोदा होगा, तभी तो यह इतनी डरी हुई है। अब जब यह मेरे पास आई है, तो थोड़ा मजा मैं भी लूँगा।'

ऋषभ ने दस्ताने पहने और रिया के पास गया। उसने सबसे पहले उसके पेट को दबाकर चेक करना शुरू किया। जैसे ही ऋषभ की उंगलियां उसके पेट के निचले हिस्से पर घूमीं, रिया ने एक हल्की सी आह भरी।

ऋषभ ने धीरे से पूछा, "रिया, क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? क्या तुमने हाल ही में असुरक्षित यौन संबंध बनाए हैं?"

रिया ने शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया और धीरे से फुसफुसाते हुए कहा, "जी... डॉक्टर साहब..."

ऋषभ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई। उसने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और रिया की जाँघों को धीरे से फैलाया।

उसकी चूत गुलाबी और बेहद नाजुक दिख रही थी। ऋषभ ने अपनी उंगली उसकी चूत के मुहाने पर रखी और धीरे से अंदर धकेलने की कोशिश की।

"आह्ह्ह..." रिया के मुँह से एक कराह निकली।

ऋषभ ने महसूस किया कि रिया की चूत अंदर से गर्म और हल्की गीली थी। उसने अपनी उंगली को थोड़ा और अंदर डाला और उसकी दीवारों को सहलाने लगा।

वह यह चेक करने का नाटक कर रहा था कि गर्भाशय का मुँह कैसा है, लेकिन असल में वह रिया की कामुकता को जगा रहा था।

"तुम्हारी चूत बहुत तंग है, रिया। लगता है तुम बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रही हो," ऋषभ ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया।

रिया की सांसें अब तेज होने लगी थीं। वह डॉक्टर के इस स्पर्श से डर रही थी, लेकिन साथ ही उसे एक अजीब सा सुख भी मिल रहा था।

उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जो ऋषभ के लिए एक खुला निमंत्रण था।

ऋषभ अब और इंतजार नहीं कर सका। उसने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना वह विशाल, सख्त और लाल लंड बाहर निकाल लिया, जो शालिनी के बाद अब रिया के लिए तड़प रहा था।

जब रिया ने उस भीमकाय लंड को देखा, तो वह दंग रह गई। उसने कभी इतना बड़ा अंग नहीं देखा था।

ऋषभ ने बिना किसी देरी के रिया के दोनों पैरों को पकड़कर उसके कंधों तक फैला दिया। उसने अपने लंड की नोक को रिया की गीली चूत के छेद पर रगड़ा।

"डॉक्टर साहब... यह... यह गलत है... प्लीज..." रिया ने कहने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज में कोई ताकत नहीं थी। उसकी चूत से अब पानी रिसने लगा था।

ऋषभ ने एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड रिया की तंग चूत के अंदर उतार दिया।

"आह्ह्ह्ह्ह!" रिया की एक तीखी चीख निकली। उसकी चूत इतनी तंग थी कि ऋषभ को ऐसा लगा जैसे वह किसी गर्म मखमल के अंदर घुस गया हो। लंड के अंदर जाते ही रिया की चूत ने उसे कसकर जकड़ लिया।

ऋषभ ने अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया। "धप-धप-धप" की आवाज क्लिनिक के कमरे में गूंजने लगी।

वह पूरी ताकत से रिया की मासूम चूत को फाड़ रहा था। हर धक्के के साथ रिया का शरीर बेड पर ऊपर-नीचे उछल रहा था।

ऋषभ ने एक हाथ से उसकी छोटी चूचियों को जोर से मरोड़ा और दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा।

"तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने तुम्हें ठीक से नहीं चोदा होगा, तभी तुम यहाँ आई हो। देखो, मेरा लंड तुम्हारी चूत के हर कोने को छू रहा है!" ऋषभ ने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा।

रिया अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। वह अपनी आँखें बंद करके कराहने लगी, "ओह गॉड... डॉक्टर... बहुत गहरा जा रहा है... आह... मुझे और जोर से चोदिए... मुझे खत्म कर दीजिए!"

ऋषभ की रफ्तार अब पागलों जैसी हो गई थी। वह रिया की चूत में अपना लंड ऐसे ठोक रहा था जैसे वह कोई मशीन हो।

रिया की चूत से निकलने वाला पानी और ऋषभ का पसीना मिलकर एक कामुक शोर पैदा कर रहे थे। ऋषभ को महसूस हुआ कि उसका वीर्य अब फटने वाला है।

उसने रिया की जाँघों को और कसकर पकड़ लिया और आखिरी के कुछ धक्के इतनी जोर से मारे कि रिया की चीखें कमरे की दीवारों से टकराने लगीं।

एक जोरदार झटके के साथ, ऋषभ ने अपना पूरा लोड रिया की चूत की गहराई में, उसके गर्भाशय के मुहाने पर खाली कर दिया।

"आह्ह्ह्ह्ह... उम्ममम!" ऋषभ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और गर्म वीर्य की फुहारों ने रिया के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह भर दिया।

रिया भी उसी पल चरम सुख (Orgasm) पर पहुँच गई और उसकी चूत ने ऋषभ के लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि ऋषभ को एक पल के लिए लगा कि वह वहीं फंस गया है।

काफी देर तक दोनों उसी स्थिति में रहे, उनकी भारी सांसें कमरे की खामोशी को तोड़ रही थीं। ऋषभ ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे रिया की चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर बहने लगा।

ऋषभ ने अपनी पैंट ठीक की और रिया से कहा, "अब तुम कपड़े पहन सकती हो। मैंने तुम्हारा 'चेकअप' पूरा कर लिया है। अब तुम्हें पता चल गया होगा कि असली इलाज क्या होता है।"

रिया ने एक मदहोश और संतुष्ट नजर से ऋषभ की ओर देखा। वह पूरी तरह से खाली हो चुकी थी।

इसके बाद रिया को अबॉर्शन पिल दे दिया

उसने धीरे से अपने कपड़े पहने और एक धीमी मुस्कान के साथ क्लिनिक से बाहर चली गई।

ऋषभ ने अपनी कुर्सी पर बैठकर एक लंबी सांस ली। आज उसने दो अलग-अलग उम्र की महिलाओं की कामुकता का आनंद लिया था,

लेकिन उसके अंदर की असली आग अभी भी जल रही थी। शालिनी और रिया सिर्फ एक जरिया थे, उसकी असली मंजिल तो उसकी माँ ममता थी।

वह अब बस उस पल का इंतजार कर रहा था जब वह अपनी माँ को पूरी तरह से अपने वश में कर लेगा और उसे अपनी वासना की आग में जलाकर राख कर देगा।
 

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दोस्तो टाइम बहुत कम है gif add नहीं कर सका हूँ नहीं तो अपडेट का मजा कुछ और होता ।
 
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