• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest रेखा, स्मिता और उसका बेटा : एक अनकहा रिश्ता

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Napster

Well-Known Member
8,870
21,230
188
रेखा का वो तीखा-नमकीन अंदाज़ और स्मिता की वो रहस्यमयी मुस्कान पूरे कमरे में एक नशीली ख़ामोशी छोड़ गई। हवा में वासना की गर्मी अभी भी तैर रही थी, लेकिन कहानी में एकदम से कोई बड़ा तूफ़ान आने से पहले रेखा ने माहौल का रुख़ बदल दिया।

रेखा ने मुस्कुराते हुए अपनी पर्स से एक सुनहरे रंग का लिफ़ाफ़ा निकाला और उसे टी-टेबल पर रख दिया।

"चलो अर्जुन, और मेरी प्यारी दीदी... इस रहस्यमयी मुस्कान का जवाब ढूँढने के लिए मेरे पास अभी और वक़्त नहीं है। मुझे एक ज़रूरी काम से अभी निकलना होगा। लेकिन हाँ, यह एक ख़ास पार्टी का न्योता है। शनिवार रात में हम सब वहाँ मिल रहे हैं, और दीदी... अपना यह जवाब वहीं संभाल कर रखना।"

इतना कहकर रेखा ने अर्जुन को एक आख़िरी तिरछी नज़र से देखा, अपने पल्लू को संभाला और कमरे से बाहर निकल गई।

उसके जाने के बाद कमरे में कोई भड़कता हुआ हंगामा या थ्रिलिंग मोड़ नहीं आया। दोनों मां और बेटे के बीच बस एक अनकही-सी सिहरन शांत हो गई। स्मिता ने एक गहरी सांस ली, लिफ़ाफ़े को उठाया और अर्जुन की तरफ़ देखते हुए अपने कपड़ों को ठीक करने लगी। जो गर्मी रेखा के होने से चरम पर पहुँच रही थी, वो अब एक ठहर चुके सस्पेंस में बदल गई थी—एक ऐसी ख़ामोशी, जो आने वाले तूफ़ान की आहट दे रही थी।

*******

होटल के विशाल कंवेंशन हॉल की मद्धम, सुनहरी रोशनी में एक अलग ही रसूख और रईसी तैर रही थी। शहर के बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स, बिजनेसमैन और हाई-सोसाइटी के लोग वहाँ जमा थे। कांच के झूमरों से छनकर आती रोशनी सीधे हॉल के फर्श पर बिछे मखमली कालीनों पर बिखर रही थी। लेकिन इस पूरी महफिल की चकाचौंध को मात दे रहा था कंवेंशन हॉल के प्रवेश द्वार पर खड़ा एक जोड़ा, जिसे देखते ही वहाँ मौजूद कई लोगों की बातचीत एक पल के लिए थम गई।

स्मिता आज किसी मल्लिका की तरह अर्जुन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं। उनके बदन पर इस बार कोई पारंपरिक बनारसी साड़ी नहीं थी, बल्कि उन्होंने एक बेहद आलीशान, मॉडर्न और एलीगेंट डिज़ाइनर साड़ी पहनी थी। गहरे आधी रात के नीले रंग (Midnight Blue) की यह शिफॉन-सैटिन ब्लेंड साड़ी उनके बदन पर इस कदर लिपटी थी जैसे पानी उनके जिस्म से बह रहा हो। साड़ी का फैब्रिक इतना महीन और मक्खन जैसा था कि स्मिता का हर एक कर्व, उनकी हर एक हरकत के साथ उभर कर सामने आ रहा था। ५४ साल की उम्र में स्मिता का बदन एक परिपक्व, रसीली और प्लस-साइज़ काया का सबसे मुकम्मल उदाहरण था। उनके भारी चूतड़ और चौड़े कूल्हे उस महीन साड़ी के भीतर अपनी पूरी गोलाई के साथ मटक रहे थे।

surabhi black saree

साड़ी को नाभि से काफी नीचे, पेल्विक बोन के ठीक पास बांधा गया था, जिससे उनकी मांसल, गोरी और चिकनी कमर का एक बड़ा हिस्सा नग्न होकर चमक रहा था। पेट पर जमी हल्की सी चर्बी की तह उस एलीगेंट साड़ी के घेरे से झांक रही थी, जो उनकी परिपक्व कामुकता को और भी ज्यादा भड़काऊ बना रही थी। साड़ी के पल्लू को उन्होंने एक पतली सी पट्टी के रूप में कंधे पर पिन किया हुआ था, जिससे उनके ३६D के भारी और भरे हुए स्तनों का आधा हिस्सा, उनका गहरा क्लीवेज महफिल की रोशनी में साफ नुमायां हो रहा था। स्तनों का भारीपन ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहा था।

ब्लाउज का डिज़ाइन तो और भी ज्यादा कातिलाना था। साड़ी के मैचिंग का ही स्लीवलेस और पूरी तरह से बैकलेस (बिना पीठ वाला) ब्लाउज था, जो पीछे सिर्फ दो बारीक डोरियों के सहारे टिका हुआ था। स्मिता की पूरी गोरी, थलथलाती हुई चिकनी पीठ पूरी तरह नग्न थी, जिस पर रीढ़ की हड्डी के पास का उभार और कमर की तरफ जाता ढलान किसी भी मर्द के होश उड़ाने के लिए काफी था। उनके गले में हीरों का एक बारीक, चमकीला हार था जो सीधे उनके उरोजों के गहरे उतार-चढ़ाव के मुहाने पर जाकर टिक गया था। अर्जुन के साथ रहने के बाद उनके चेहरे पर जो निखार और आत्मविश्वास आया था, उसने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे।


saree eshanya
उनके बगल में खड़ा अर्जुन एक मुकम्मल, गठीला और बेहद रसूखदार मर्द लग रहा था। काले रंग के टक्सीडो सूट, सफेद कड़क शर्ट और सलीके से सेट किए गए बालों में उसका चौड़ा कंधा और मर्दाना कद-काठी स्मिता की परिपक्वता को एक सुरक्षात्मक घेरा दे रही थी। अर्जुन की गहरी, तेज आँखें महफिल में घूम रही थीं, लेकिन उसका पूरा ध्यान, उसकी पूरी चेतना उसके बगल में चल रही अपनी माँ के इस बेहद सम्मोक अवतार पर टिकी हुई थी।

हॉल के एक कोने में, जहाँ मद्धम संगीत बज रहा था, अर्जुन ने हल्के से झुककर स्मिता के कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ीं।

"आज तुम इस महफिल में आग लगाने के इरादे से आई हो क्या, स्मिता?" अर्जुन की भारी और रसीली आवाज़ स्मिता के कानों से होती हुई सीधे उनकी नाभि के नीचे एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई। अर्जुन जब अकेले में या इस तरह के माहौल में होता था, तो वह उन्हें नाम से पुकार कर उस रोमांच को दस गुना बढ़ा देता था।

स्मिता ने अपनी बड़ी-बड़ी, कजरारी आँखों को धीरे से उठाया और अर्जुन की तरफ देखा। उनके होठों पर एक मदहोश करने वाली मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को जानबूझकर थोड़ा और खिसका दिया, जिससे उनके स्तनों का ऊपरी गोरा हिस्सा और भी ज्यादा साफ दिखने लगा।

"क्यों? मेरा यह रूप सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो है, अर्जुन। क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?" स्मिता ने बहुत ही मद्धम और कामुक आवाज़ में कहा, उनकी सांसों की गर्मी अर्जुन के गालों ने महसूस की।

"अच्छा?" अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसका हाथ बहुत ही स्वाभाविक अंदाज़ में स्मिता की खुली, गोरी पीठ पर गया। महफिल की भीड़ से बचते हुए, उसने अपनी बड़ी, गर्म हथेलियों को स्मिता की चिकनी कमर के उस मांसल हिस्से पर रख दिया जहाँ साड़ी बंधी थी।

उसकी उंगलियों ने स्मिता की कमर के मांस को हल्के से भींचा। "मेरा बस चले तो मैं इस भीड़ को यहीं छोड़ दूं और तुम्हें अपनी बाहों में भरकर उस कोने वाले कमरे में ले जाऊं। यह जो तुम्हारी पीठ पूरी नग्न घूम रही है ना, इस पर पूरे शहर के मर्दों की नजरें हैं, और मुझे इस बात से जितनी जलन हो रही है, उतना ही नशा चढ़ रहा है।"

testmp4 saree

स्मिता के बदन में अर्जुन के इस खुले स्पर्श से एक बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा और अर्जुन की तरफ ढीला छोड़ दिया, जिससे उनका भारी चूतड़ अर्जुन की जांघ से जाकर सट गया। उस महीन साड़ी के आर-पार अर्जुन को अपनी माँ के नितम्बों का भारीपन साफ महसूस हो रहा था। स्मिता ने हल्के से हांफते हुए कहा, "तो फिर रोके किसने रखा है तुम्हें? अपनी इस जागीर पर अपना हक जताओ..."

अभी दोनों के बीच यह साइलेंट कामुक तनाव चल ही रहा था कि अचानक महफिल का माहौल बदल गया।

हॉल के दूसरे छोर से कुछ लोग हंसते-बात करते हुए उनकी तरफ बढ़ रहे थे। अर्जुन की नजरें जैसे ही उन पर पड़ीं, उसकी पकड़ स्मिता की कमर पर थोड़ी और मजबूत हो गई। स्मिता ने अर्जुन की आँखों में अचानक आए उस सख्त बदलाव को भांप लिया। उन्होंने उस दिशा में देखा, और देखते ही उनके चेहरे का खून जैसे जम गया। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके हाथ में पकड़ा हुआ वाइन का ग्लास हल्का सा कांप गया।

सामने स्मिता का एक्स-हस्बैंड (पूर्व पति) खड़ा था। ५८ साल की उम्र का वह शख्स, जो कुछ रईस क्लाइंट्स के साथ हाथ में ड्रिंक लिए बात कर रहा था, अचानक रुक गया। उसकी नज़र जैसे ही स्मिता पर पड़ी, उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई।

वह स्मिता को पहचान ही नहीं पा रहा था। उसने स्मिता को हमेशा एक दबी-कुचली, ढीले-ढाले सूट पहनने वाली और आत्मविश्वास से हीन औरत के रूप में देखा था। वह स्मिता को एक बोझ समझता था, जिसकी वजह से उसने उसे बेसहारा छोड़ दिया था। लेकिन आज... आज उसके सामने जो औरत खड़ी थी, वह किसी रईस घराने की सबसे वांछनीय और कामुक कामिनी लग रही थी। आधी रात के नीले रंग की उस डिज़ाइनर साड़ी में स्मिता का वह भारी, सम्मोहक बदन, वह पूरी खुली गोरी पीठ, हार, और सबसे बढ़कर—वह बेबाक आत्मविश्वास, जो किसी अप्सरा जैसा था।

एक्स-हस्बैंड के भीतर का पुरुष अहंकार और लालच एक साथ जाग उठा। उसने अपने साथ खड़े लोगों को वहीं छोड़ा और बड़े-बड़े कदम बढ़ाता हुआ सीधे स्मिता की तरफ आने लगा।

स्मिता के पैर एक पल के लिए पीछे हटने को हुए। अतीत का वह पुराना डर, वह कमज़ोरी एक सेकंड के लिए उनके ज़हन पर हावी होने लगी। उनका सांस लेना थोड़ा भारी हो गया, जिससे उनके स्तन ब्लाउज के भीतर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगे, जो उनकी घबराहट को साफ बयां कर रहा था।

लेकिन इससे पहले कि अतीत का वो साया स्मिता को छू पाता, अर्जुन एक अभेद्य चट्टान की तरह स्मिता के ठीक आगे आकर खड़ा हो गया। उसका चौड़ा, गठीला बदन स्मिता के सामने एक ढाल बन गया। अर्जुन ने पीछे हाथ ले जाकर स्मिता के दोनों भारी चूतड़ों पर अपना पूरा हाथ रख दिया और उन्हें खींचकर पीछे से अपने टक्सीडो सूट से सटा लिया। इस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर के सारे डर को एक झटके में गायब कर दिया और उसकी जगह एक अजीब सी कामुक उत्तेजना ने ले ली।

एक्स-हस्बैंड अर्जुन के सामने आकर रुका। उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा, और फिर अर्जुन के पीछे से झांक रही स्मिता पर अपनी नजरें गड़ाईं। उसकी आँखों में वासना और हैरानी का एक गंदा मिश्रण था।

"स्मिता? तुम... यहाँ?" एक्स-हस्बैंड की आवाज़ में एक नकली सा अधिकार था। "विश्वास नहीं होता। यह कैसा रूप बना रखा है तुमने? इस उम्र में ऐसी साड़ी... और यह बैकलेस ब्लाउज? तुम इस तरह..."

इससे पहले कि वह अपना वाक्य पूरा कर पाता, अर्जुन ने अपनी गहरी, भारी और रौबदार मर्दाना आवाज़ में उसे टोक दिया। हॉल के उस कोने में अर्जुन का रसूख साफ महसूस हो रहा था।

"अपनी ज़बान को लगाम दो, मिस्टर," अर्जुन की आँखों में एक ठंडी आग थी, जिसने एक्स-हस्बैंड को एक कदम पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। "अपनी हैसियत में रहकर बात करो। अब तुम्हारी उस घटिया सोच और उस अतीत से हम बहुत आगे निकल चुके हैं, जहाँ तुम मां को कमज़ोर समझते थे।"

अर्जुन के पिता का चेहरा गुस्से और अपमान से लाल हो गया। उसने स्मिता की तरफ देखकर चिल्लाने की कोशिश की, "स्मिता! यह अर्जुन क्या कह रहा है और तुम इसके दम पर उड़ रही हो? भूल गई कि तुम क्या थीं? मेरे छोड़ने के बाद तुम्हारी क्या हैसियत रह गई थी?"

स्मिता, जो अर्जुन के ठीक पीछे खड़ी थीं, उन्होंने अर्जुन की चौड़ी पीठ पर अपना एक गोरा हाथ रखा। अर्जुन की शर्ट के कपड़े के नीचे से उन्हें उसके कड़े मसल्स महसूस हो रहे थे। स्मिता ने अपनी साड़ी के पल्लू को और सलीके से संभाला, अपने भारी उरोजों को तानकर अर्जुन के पीछे से थोड़ा आगे आईं। अब उनके चेहरे पर कोई डर नहीं था, सिर्फ एक विजेता की मुस्कान थी।

"हैसियत?" स्मिता की आवाज़ पूरी महफिल में मद्धम लेकिन इतनी साफ थी कि एक्स-हस्बैंड के कान बजने लगे। "मेरी हैसियत यह है कि आज मैं उस मुकाम पर हूँ जहाँ तुम जैसे लोग सिर्फ अपॉइंटमेंट लेकर आ सकते हैं। तुमने मुझे अपनी कमज़ोरी समझा था ना? लेकिन मेरे बेटे ने..." उन्होंने बड़े गर्व से अर्जुन की तरफ देखा, "...इस मर्द ने मुझे मेरी असली ताकत का अहसास कराया है। अब तुम मेरे लिए सिर्फ एक बीता हुआ कल हो, जिसकी कोई कीमत नहीं है।"

इसी बीच रेखा, जो कुछ दूर खड़े होकर यह सारा तमाशा देख रही थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए बेहद मटकती हुई वहाँ पहुंच गईं।

रेखा हमेशा की तरह बोल्ड, चुलबुली और हाई-क्लास लग रही थीं।

"अरे... तुम अभी तक यहीं मँडरा रहे हो?" रेखा ने एक्स-हस्बैंड को ऊपर से नीचे देखते हुए एक तीखा तंज कसा। "देखो भाई, अपनी औकात के हिसाब से किसी कोने में जाकर मुफ्त की ड्रिंक एंजॉय करो। हमारी स्मिता और अर्जुन का वक्त बहुत कीमती है। और वैसे भी, आज स्मिता का यह रूप देखने के लिए तुम्हारी आँखें बहुत छोटी हैं।" उन्होंने हंसते हुए अर्जुन की तरफ देखा।

एक्स-हस्बैंड के पास अब वहाँ रुकने का कोई बहाना नहीं था। आसपास के कुछ और लोगों की नजरें भी अब उनकी तरफ मुड़ने लगी थीं। अपनी पूरी बेइज्जती महसूस करते हुए, वह पैर पटकता हुआ महफिल के दूसरे छोर की तरफ भाग गया।

उसके जाते ही स्मिता ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उनका पूरा बदन उत्तेजना और एक अजीब सी जीत के अहसास से कांप रहा था। उनके स्तन ब्लाउज के भीतर इतनी ज़ोर से धड़क रहे थे कि उनके बीच का क्लीवेज तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था। पूर्व पति के सामने अर्जुन के इस मर्दाना रसूख, उसकी पजेसिवनेस और उस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर कामुकता की एक ऐसी आग लगा दी थी जो अब शांत होने वाली नहीं थी।

अर्जुन ने मुड़कर स्मिता की तरफ देखा। स्मिता की आँखों में छलकती हुई दीवानगी और उनके हांफते हुए होठों को देखकर वह समझ गया कि अब यहाँ एक पल भी रुकना मुमकिन नहीं है। उसने रेखा मौसी की तरफ देखा, जिन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ उन्हें आँख मारी।

"चलो अर्जुन... इसे यहाँ से ले जाओ," रेखा ने स्मिता की नग्न, गोरी पीठ पर हल्के से थपकी देते हुए मद्धम आवाज़ में कहा। "इसकी छाती की यह धड़कन और बदन की यह गर्मी सिर्फ तुम्हारे कमरे में ही शांत हो सकती है।"

अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता का हाथ अपने मजबूत हाथ में थाम लिया। स्मिता की साड़ी का पल्लू हल्का सा लहराया, और वे दोनों महफिल की चकाचौंध को पीछे छोड़ते हुए, होटल के अपने कमरे की तरफ बढ़ गए, जहाँ उनकी तीव्र इच्छा का एक नया और बेहद raw इतिहास लिखा जाने वाला था।

होटल के शोर-शराबे और कंवेंशन हॉल की तीखी रोशनी को पीछे छोड़ते हुए जब अर्जुन और स्मिता लिफ्ट से होते हुए २४वें माले के रूम की तरफ बढ़ रहे थे, तो कॉरिडोर के सन्नाटे में स्मिता की सैंडल की खट-खट और उनकी भारी साड़ियों की सरसराहट साफ गूंज रही थी। स्मिता की सांसें अभी भी तेज थीं। कंवेंशन हॉल में एक्स-हस्बैंड का वह अचानक सामना और उसके बाद अर्जुन का एक खूंखार, रसूखदार मर्द की तरह उनके सामने तनकर खड़े हो जाना—इस पूरे वाकये ने स्मिता के भीतर एक ऐसा रोमांच भर दिया था जिसकी तपिश उनके पूरे बदन में महसूस हो रही थी।

अर्जुन ने सुइट का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड स्वैप किया और भारी नक्काशीदार दरवाज़ा एक हल्के से क्लिक के साथ खुल गया। भीतर की दुनिया पूरी तरह से मद्धम, सुनहरी और मखमली रोशनी में डूबी हुई थी। किंग-साइज़ बेड पर रेशमी चादरें बिछी थीं और खिड़की से बाहर मुंबई की गगनचुंबी इमारतों की रोशनियां किसी मुकम्मल पेंटिंग जैसी लग रही थीं। रेखा मौसी पहले ही अपने हाथ में वाइन की बोतल लिए सुइट के आलीशान लिविंग एरिया में दाखिल हो चुकी थीं।

स्मिता जैसे ही कमरे के भीतर आईं, उन्होंने एक लंबी और गहरी सांस ली। उत्तेजना के मारे उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा हल्का सा संकुचित हो रहा था, और आधी रात के नीले रंग की उस महीन सैटिन-शिफॉन साड़ी के भीतर उनके भारी उरोज ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। ब्लाउज की बैकलेस डिज़ाइन की वजह से उनकी पूरी गोरी, मांसल पीठ पर पसीने की कुछ बारीक बूंदें चमक रही थीं, जो कंवेंशन हॉल के उस दिमागी तनाव और दबी हुई कामुकता का नतीजा थीं।

अर्जुन ने कोट के बटन खोले और टक्सीडो जैकेट को उतारकर सोफे पर फेंक दिया। उसकी सफेद कड़क शर्ट के ऊपर के दो बटन पहले ही खुले थे, जिससे उसकी चौड़ी मर्दाना छाती के घने बाल साफ झांक रहे थे। उसकी भूखी और दीवानी नजरें अपनी माँ की उस भारी, ललचाती हुई काया पर टिक गईं।

तब तक रेखा मौसी आई और उसने मेज पर कांच के तीन क्रिस्टल ग्लास रखे और वाइन उड़ेलते हुए एक गहरी, रसभरी हंसी हंसी। वह स्मिता के करीब आईं, जिनकी पीठ पूरी तरह नग्न थी। रेखा ने अपनी ठंडी उंगलियों को स्मिता की उस थलथलाती हुई, गोरी और चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे तक फेरा। स्मिता के मुंह से एक ठंडी सी सिसकारी निकल गई।

"ओह स्मिता... सच कहूं तो आज उस बुड्ढे की शक्ल देखने लायक थी!" रेखा ने वाइन का ग्लास स्मिता के हाथ में थामते हुए कहा।

"जिस औरत को उसने अपनी जिंदगी का सबसे बेकार हिस्सा समझकर छोड़ दिया था, आज उसे इतने आलीशान लिबास में, फिर से चढ़ी हुई जवानी के साथ देखकर उसकी छाती पर जो सांप लोटा है ना... आहा! मुझे तो मजा ही आ गया।"

स्मिता ने वाइन का एक घूंट लिया, जिससे उनके लाल होठों पर वाइन की एक चमकीली परत जम गई। उन्होंने अर्जुन की तरफ देखा, जो अपनी गहरी आँखों से उन्हें लगभग निगल जाने वाली निगाहों से घूर रहा था।

"सब अर्जुन और तेरी बदौलत है, रेखा..." स्मिता की आवाज़ में एक अजीब सी लचक और गीलापन था। "अगर आज यह मेरे आगे न खड़ा होता, तो शायद अतीत का वो डर मुझे फिर से कमज़ोर कर देता। लेकिन इसके स्पर्श ने..."

"मुझे पता है, मुझे सब पता है," रेखा ने चुलबुले अंदाज़ में स्मिता की बात काटी और अर्जुन के पास जाकर उसकी चौड़ी छाती पर हाथ रखा। "अर्जुन, तेरी यह माँ ना... आज सच में किसी रसीली जागीर जैसी लग रही है। इसकी यह नाभि के नीचे बंधी साड़ी, यह पूरी खुली हुई गोरी पीठ, और यह भारी मटकर चलते कूल्हे... कसम से, हॉल में जितने मर्द थे, सबकी राल टपक रही थी। लेकिन मैं जानती हूँ कि इस ३६D के खजाने पर सिर्फ और सिर्फ मेरे इस शेर का हक है।"

रेखा ने आगे बढ़कर स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी दो बारीक डोरियों में से ऊपर वाली डोरी को हल्के से खींचकर खोल दिया।

डोरियां खुलते ही स्मिता का बैकलेस ब्लाउज कंधों के पास से हल्का सा ढीला हो गया, जिससे उनके भारी स्तनों का ऊपरी उभार और क्लीवेज और भी ज्यादा बेपर्दा हो गया। स्मिता ने शर्म और उत्तेजना के मारे अपने हाथ से पल्लू को छाती पर भींच लिया।

"रेखा... यह तुम क्या कर रही हो?" स्मिता ने लजाते हुए कहा।

"अरे, तुम्हें आराम दे रही हूँ मेरी जान," रेखा ने हंसते हुए अपनी पर्स उठाई और दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ा दिए। "और वैसे भी, अब मेरा काम यहाँ खत्म होता है। इस शेर की आँखों की भूख मुझसे देखी नहीं जा रही। तुम दोनों इस मुकम्मल जीत का जश्न मनाओ। मैं आज रात अपने उस जुहू वाले फ्लैट पर रुक रही हूँ, वहाँ एक जरूरी क्लाइंट मीटिंग भी है सुबह। इसलिए यह पूरा सुइट, यह मद्धम रोशनी और तुम्हारी यह रसीली माँ... सब सिर्फ तुम्हारे हवाले है, अर्जुन। पूरा समय लो, और आज इसे घुटनों पर ला दो।"

रेखा ने अर्जुन को एक शरारती लुक दिया, स्मिता के गाल को हल्के से चूमा और बड़े ही सलीके से सुइट का भारी दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया।

कमरे में अब सिर्फ एक गहरा, भारी सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ दो इंसानों की तेज होती सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।

दरवाज़ा बंद होते ही कमरे का तापमान जैसे अचानक कई डिग्री बढ़ गया। अर्जुन सोफे के पास स्थिर खड़ा था, उसकी बाजुओं की नसें कड़क शर्ट के भीतर उभर आई थीं। स्मिता कमरे के बीचों-बीच खड़ी थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए। उनके ब्लाउज की ऊपरी डोरी खुली होने के कारण नीली सैटिन की पतली पट्टी उनके गोरे, गोल कंधे से फिसलकर बाजू पर आ गिरी थी। ३६D के दोनों भारी, मांसल स्तन उस ढीले पड़ चुके ब्लाउज के भीतर कड़े हो चुके निप्पलों के साथ साफ मटक रहे थे।

video2gif 20190113 090512

अर्जुन ने बिना एक शब्द बोले अपनी शर्ट के बाकी बचे बटन भी झटके से खोल दिए और उसे उतारकर फेंक दिया। उसका कड़ा, सांवला और गठीला मर्दाना बदन, जिस पर छह-फिट के कद की धमक थी, स्मिता के सामने पूरी तरह नग्न-अर्धशग्न खड़ा था। वह बड़े, धीमे लेकिन भारी कदमों से स्मिता की तरफ बढ़ा।

स्मिता का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उनके गले की नसें साफ फड़कती हुई दिख रही थीं। जैसे ही अर्जुन उनके बिल्कुल करीब आया, स्मिता ने डर से नहीं, बल्कि असीम इच्छा के मारे अपनी आँखें मूंद लीं। अर्जुन ने उनके हाथ से वाइन का ग्लास लिया और उसे साइड टेबल पर रख दिया।

अगले ही पल, अर्जुन के दोनों बड़े और खुरदरे हाथों ने स्मिता की उस आधी खुली, गोरी और मखमली पीठ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने स्मिता को अपनी तरफ खींचा और एक झटके में उन्हें पीछे की दीवार से सटा दिया। स्मिता के मुंह से एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली—"अह्ह्... अर्जुन!"

अर्जुन की मर्दाना सांसों की गरमाहट स्मिता के पूरे चेहरे पर फैल गई। अर्जुन ने अपनी एक जांघ को स्मिता की दोनों टांगों के बीच, उनकी साड़ी के घेरे को चीरते हुए अंदर घुसा दिया। शिफॉन की वह महीन साड़ी दोनों के बदन के बीच एक बारीक परत मात्र रह गई थी। अर्जुन की कड़ी जांघ जैसे ही स्मिता के पेटीकोट के अंदर छिपी हुई उनकी रसीली, भारी जांघों और उनके संवेदनशील ऊंचे मुहाने (योनि) से टकराई, स्मिता का पूरा बदन धनुष की तरह मुड़ गया। उन्होंने अपने दोनों गोरे हाथ अर्जुन के कड़े कंधों पर टिका दिए।

"अर्जुन... प्लीज... अब और तड़पाओ मत... आज मैं अंदर से पूरी जल रही हूँ..." स्मिता ने अपनी आँखें खोलकर बेहद कामुक, गीली निगाहों से अपने जवान बेटे के चेहरे को देखा। उनकी आँखों में केवल और केवल असीम समर्पण और तीव्र वासना का नशा था।

अर्जुन ने जवाब में स्मिता के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भींचा और उनके रसीले, लिपस्टिक से सने होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई धीमा चुंबन नहीं था, बल्कि एक भूखे मर्द का अपनी पसंदीदा जागीर पर किया गया पहला हमला था। अर्जुन स्मिता के निचले होंठ को अपने दांतों के बीच दबाकर चूसने लगा, और उसकी जीभ स्मिता के मुंह के भीतर जाकर उनकी लार के रस को पीने लगी। स्मिता के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां अर्जुन के मुंह के भीतर ही घुट कर रह गईं—"उम्मम्... आह्... अर्जुन... मेरे बच्चे..."

19852967
चूमते हुए ही अर्जुन का दायां हाथ स्मिता के कंधे से सरकते हुए उनकी छाती पर आया। उसने साड़ी के उस पतले पल्लू को एक ही झटके में कंधे से नीचे गिरा दिया। अब स्मिता का क्लीवेज और उनके भारी स्तनों का दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह आज़ाद हो चुका था। अर्जुन ने अपने बड़े, मजबूत हाथ से स्मिता के बाएं स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ही पूरा अपनी मुट्ठी में भर लिया और उसे बुरी तरह से भींचने लगा।

स्मिता का भारी स्तन अर्जुन की उंगलियों के बीच दबकर अपनी गोलाई बदलने लगा। ५४ साल की परिपक्वता के कारण उनके स्तनों में जो एक भारी, थलथलाता हुआ मांसल खिंचाव था, वह अर्जुन की मर्दाना ताकत के सामने पूरी तरह पिघल रहा था।

"आह्ह्ह्... अर्जुन... धीरे... उफ्फ्... बहुत कसकर भींच रहे हो..." स्मिता ने सिसकते हुए अपने सिर को पीछे दीवार पर टिका दिया, उनकी गर्दन की सुराहीदार नसें तन गईं।

अर्जुन ने उनके होठों को छोड़ा और नीचे की तरफ बढ़ा। उसने स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी नीचे वाली आखिरी डोरी को भी एक झटके में खींचकर खोल दिया। डोरियां खुलते ही वह आधी रात के नीले रंग का डिज़ाइनर ब्लाउज आगे से पूरी तरह खुल गया। अर्जुन ने ब्लाउज के दोनों पल्लों को दोनों तरफ से हटा दिया।

कमरे की मद्धम पीली रोशनी में स्मिता का ३६D का वो आलीशान, गोरा और बेहद रसीला सीना पूरी तरह से नग्न होकर अर्जुन के सामने आ गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके स्तनों का भारीपन और उनकी गोलाई किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थी।

स्तनों के नीचे का हिस्सा भारी होने के कारण थोड़ा झुका हुआ था, लेकिन उनके कड़े, बड़े और भूरे रंग के निप्पल उत्तेजना के मारे पूरी तरह से कड़े होकर तीर की तरह बाहर की ओर तने हुए थे। उरोजों की त्वचा इतनी साफ और गोरी थी कि उन पर नीली नसें साफ दिखाई दे रही थीं।

अर्जुन इस असीम खजाने को देखकर एक पल के लिए थमा, उसकी सांसें और भारी हो गईं। उसने अपने दोनों हाथों से स्मिता की उन भारी छातियों को नीचे से थामा, जैसे कोई पुजारी किसी कीमती मूर्ति को संभालता है। उसने अपने मुंह को आगे बढ़ाया और स्मिता के बाएं स्तन के उस बड़े, भूरे निप्पल को पूरा का पूरा अपने मुंह के भीतर भर लिया।

"ओह्ह्ह्... माई गॉड... अर्जुन!... आहाहा..." स्मिता के पैर हवा में डगमगाए। उन्होंने अर्जुन के घने बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसकी खोपड़ी को अपनी छाती पर और कसकर भींच लिया।
अर्जुन अपनी जीभ से उस कड़े निप्पल को चारों तरफ से चाटने लगा और फिर उसे अपने दांतों के बीच हल्का सा दबाकर चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा दूध पी रहा हो। उसका दूसरा हाथ स्मिता के दाएं स्तन को लगातार गोल-गोल घुमाते हुए मसल रहा था, जिससे स्मिता की पूरी काया कामुकता के चरम पर पहुंचने लगी। स्मिता के मुंह से ठेठ देसी अंदाज़ में बेबाक आवाजें निकलने लगीं—"अह्ह्... हां... वैसे ही चूसा करो... पूरा मुंह में भर लो... अपनी इस माँ को आज पूरा खत्म कर दो अर्जुन..."


(m ldpwiqacxt E Ai)(mh 3Xilovl XDj lw PRR)42127621b

स्तनों को बुरी तरह से तृप्त करने के बाद, अर्जुन नीचे की तरफ झुका। उसकी उंगलियां स्मिता की नाभि के पास गईं, जहाँ डिज़ाइनर साड़ी का सिल्क-सैटिन फैब्रिक बंधा हुआ था। अर्जुन ने साड़ी के उस पिन को खोला और एक ही झटके में साड़ी को खींच दिया। नीले रंग की वह महंगी साड़ी स्मिता के बदन से सरकती हुई फर्श पर एक ढेर बनकर गिर गई।

अब स्मिता के बदन पर सिर्फ एक गहरे नीले रंग का साटन का पेटीकोट बचा था। नाभि से नीचे बंधे होने के कारण उनकी चिकनी, भारी और थलथलाती हुई पेट की चर्बी और उनकी चौड़ी कमर का उभार पूरी तरह से अर्जुन की नजरों के सामने था। अर्जुन ने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ा और उसे एक झटके में ढीला कर दिया। पेटीकोट भी सरसराता हुआ नीचे गिर गया। स्मिता ने रेखा की सलाह मानकर नीचे पेंटि नहीं पहनी था।

जैसे ही पेटीकोट नीचे गिरा, ५४ साल की स्मिता की वह मुकम्मल, नग्न, प्लस-साइज़ काया कनवेंशन सुइट की रोशनी में पूरी तरह बेपर्दा हो गई। उनकी भारी, गोरी और आपस में रगड़ खाती हुई मांसल जांघें, उनके चौड़े और भारी चूतड़ों का वो विशाल ढलान, और उनकी दोनों जांघों के बीच छिपा हुआ वो घने, सलीके से ट्रिम किए हुए बालों से ढका हुआ उनका सबसे संवेदनशील और गीला हो चुकी यौनि —सब कुछ अर्जुन के सामने था। स्मिता की जांघों के बीच से कामुक रस की कुछ बूंदें रिसकर उनकी चिकनी त्वचा पर चमक रही थीं, जो यह साबित करने के लिए काफी थीं कि वह अंदर से कितनी बुरी तरह से तैयार थीं।

अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता को दोनों बगलों से उठाया और उन्हें सीधे उस किंग-साइज़ बेड के बीचों-बीच ले जाकर लिटा दिया। स्मिता जैसे ही रेशमी चादर पर लेटीं, उनके भारी स्तन दोनों तरफ थोड़े फैल गए, जिससे उनकी काया और भी ज्यादा कामुक और ललचाती हुई दिखने लगी।

अर्जुन ने अपने पैंट और कच्छा को भी एक झटके में लात मारकर उतार दिया। उसका ६-इंच का लंबा, कड़ा और लोहे जैसा सख्त हो चुका मर्दाना लंड पूरी तरह से तानकर बाहर आ गया, जो उसकी नसों के उभार के साथ ज़ोर-ज़ोर से फड़क रहा था।

वह घुटनों के बल स्मिता के ऊपर आया। स्मिता ने जैसे ही अर्जुन के उस बड़े और भयानक रूप से कड़े हो चुके लंड को देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सा नशा छा गया। उन्होंने अपनी दोनों भारी, मांसल जांघों को पूरा का पूरा बाहर की तरफ फैला दिया और अपने घुटनों को मोड़ लिया, जिससे उनकी योनि का वो गुलाबी, गीला और सूजा हुआ मुहाना अर्जुन के सामने पूरी तरह से खुल गया।

अर्जुन ने स्मिता की दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ा और उन्हें उनके कंधों की तरफ थोड़ा और भींच दिया। उसका कड़ा, गर्म औजार स्मिता की योनि के बाहरी होंठों पर जाकर टिक गया, जहाँ पहले से ही कामुक रस का गीलापन मौजूद था। अर्जुन ने अपने औजार के सुपारी वाले हिस्से को स्मिता के उस गीले मुहाने पर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा।


unnamed

"अह्ह्... अर्जुन... अब बर्दाश्त नहीं होता बाबा... डाल दो... पूरा का पूरा अंदर ले लो..." स्मिता ने बेड की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर मुट्ठी में भींच लिया, उनका पूरा बदन काम के मारे कांप रहा था।

"तैयार रहो मां... आज तुम्हें चीरते हुए मैं तुम्हारे अतीत के हर दर्द को मिटा दूंगा," अर्जुन ने कहा और अपनी कमर को एक बेहद धीमे, मध्यम लेकिन पूरी ताकत के साथ आगे की तरफ धकेल दिया।

उस कड़े, मोटे और लोहे जैसे सख्त औजार का अगला हिस्सा जैसे ही स्मिता की ५४ साल की उस तंग, रसीली और बेहद गीली चुत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर दाखिल हुआ, स्मिता के मुंह से एक लंबी, चीख जैसी सिसकारी निकली—"ओह्ह्ह्ह्... आहाहा... अर्जुन!... उफ्फ्... मम्मा रे... पूरा भर गया..."

57669904

अर्जुन ने जल्दबाजी नहीं की। आपकी पसंदीदा शैली के मुताबिक, प्रवाह बेहद धीमा और मध्यम था। उसने अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। स्मिता की चुत की गर्म, मांसल दीवारें अर्जुन के उस कड़े मूसल को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थीं। जैसे-जैसे वह अंदर जा रहा था, स्मिता की आँखों से सुख और असीम आनंद के दो बूंद आंसू निकलकर उनके गालों पर ढलक गए। यह उनके जीवन की सबसे मुकम्मल जीत थी—अपने ही जवान बेटे के नीचे, उसकी पूरी मर्दानगी को अपने भीतर समाते हुए।

जब अर्जुन का पूरा का पूरा ६-इंच का मूसल स्मिता के गर्भाशय के मुहाने से जाकर टकरा गया, तो दोनों के बदन एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। अर्जुन के अंडकोष स्मिता के भारी चूतड़ों के निचले हिस्से से जाकर सट गए।

अर्जुन ने कुछ सेकंड के लिए खुद को रोका, और फिर उसने एक धीमा लेकिन बेहद गहरा देसी धक्के लगाना शुरू किया।


23719434

*छपक... छपक... छपक...*

कमरे के सन्नाटे में दोनों के बदन के आपस में टकराने की और योनि के भीतर रिसते हुए रसीले पानी की 'चप-चप' की आवाज़ गूंजने लगी। अर्जुन जब अपनी कमर पीछे खींचता, तो स्मिता का पूरा मुहाना बाहर की तरफ खिंच जाता, और जब वह पूरी ताकत से अंदर धकेलता, तो स्मिता के ३६D के दोनों भारी स्तन हवा में ज़ोर-ज़ोर से उछलते। अर्जुन ने ऊपर झुककर उनके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में दबोच लिया और उन्हें बुरी तरह मसलते हुए अपने धक्के की रफ्तार को थोड़ा और गहरा कर दिया।

"आह... हां... अर्जुन... मेरे राजा... वैसे ही... उफ्फ्... तुम्हारे लंड की मोटाई मुझे पागल कर रही है... मारो... और गहरे धक्के मारो..."

स्मिता अब पूरी तरह से होश खो चुकी थीं। उनका परिपक्व बदन अर्जुन के हर एक धक्के को अपनी गहराइयों में सोख रहा था। उनकी भारी जांघें अर्जुन की कमर के दोनों तरफ कसती जा रही थीं।
अर्जुन की सांसें अब घोड़ों जैसी चलने लगी थीं। उसकी पीठ पर पसीने की धाराएं बह रही थीं जो स्मिता की छाती पर गिर रही थीं।

दोनों का यह समागम वासना से परे, एक-दूसरे के प्रति असीम आदर, सुरक्षा और उस असीम प्रेम का प्रतीक था, जिसने स्मिता को एक नई जिंदगी दी थी। अर्जुन ने धक्कों की रफ्तार को थोड़ा और मध्यम लेकिन बेहद भारी कर दिया। हर एक स्ट्रोक स्मिता के भीतर तक तहलका मचा रहा था।

लगभग २० मिनट के इस बेहद raw और सेंसुअल समागम के बाद, स्मिता का पूरा बदन अचानक अकड़ने लगा। उनकी योनि के भीतर की दीवारें अर्जुन के औजार को पागलों की तरह भींचने लगीं। उनका चरम Orgasm बिल्कुल करीब था।

(m ldpwiqacxt E Ai)(mh 7pdutvp Z c6m QL3h)15275842b
"अर्जुन... मेरा पानी छूट रहा है... ओहोहो... मैं टूट रही हूँ... अर्जुन!... मुझे अपने पानी से भर दो..." स्मिता ने चिल्लाते हुए अर्जुन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।

अर्जुन को भी अहसास हो गया कि उसका भी बांध अब टूटने वाला है। उसने आखिरी तीन बेहद गहरे और खूंखार धक्के लगाए, और उसका लंड मां की चुत के बिल्कुल आखिरी छोर तक धंस गया।

अर्जुन ने एक गहरी, मर्दाना दहाड़ मारी—"अह्ह्ह्ह्ह्..."

और उसका कड़ा औजार स्मिता की योनि के भीतर ही फड़कते हुए अपने गर्म, गाढ़े और सफेद मर्दाना वीर्य की पिचकारियां छोड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य की एक-एक बूंद स्मिता के गर्भाशय की दीवारों पर ज्वालामुखी की तरह बरसने लगी। स्मिता ने अपनी आँखें ऊपर की तरफ मूंद लीं और उनका पूरा बदन झटके लेता हुआ चादर पर पूरी तरह से ढीला पड़ गया।

समागम खत्म होने के बाद भी अर्जुन अलग नहीं हुआ। वह स्मिता के उस भारी, रसीले बदन के ऊपर ही लेट गया, उसका औजार अभी भी स्मिता की योनि के भीतर ही फंसा हुआ था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे, हांफते हुए, आँखों में आँखे डाल एक दूजे को चूमते हुए उस मद्धम रोशनी में उस मुकम्मल जी
त और असीम प्यार के नशे में पूरी तरह डूब चुके थे।
बडा ही खुबसुरत शानदार लाजवाब और जबरदस्त गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर उन्मादक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
  • Like
Reactions: Ek number

Kanhaiyaa

कान्हा
28
19
3
अत्यंत सुन्दर तस्वीर रेखा और स्मिता की। परिपक्व, गरिमामयी और बेहद सैक्सी नारियाँ, अगर बिस्तर में साथ हो तो सम्पूर्ण आनन्द दें।
 
  • Like
Reactions: Napster
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Befriendmy

New Member
43
362
69
फाइव-स्टार होटल के आलीशान सुइट की खिड़की के भारी, मखमली परदे सुबह की गुनगुनी धूप को पूरी तरह अंदर आने से रोक रहे थे, लेकिन फिर भी सूरज की एक पतली सी सुनहरी किरण तैरती हुई सीधे उस किंग-साइज़ बेड पर आ गिरी थी। पूरा कमरा अभी भी रात के उस खूंखार, रसीले और बेबाक देसी समागम की महक से सराबोर था। चादरें पूरी तरह से तहस-नहस थीं, हवा में स्मिता के महंगे परफ्यूम और अर्जुन के मर्दाना पसीने के साथ-साथ योनि और वीर्य के रसीले पानी की एक तीखी, कामुक गंध घुली हुई थी।

स्मिता अभी भी पूरी तरह नग्न अवस्था में चादर को आधा ओढ़े अर्जुन की चौड़ी, सांवली और गठीली छाती पर सिर रखकर सो रही थीं। उनकी ३६D की भारी, थलथलाती हुई गोरी छाती का एक बड़ा हिस्सा अर्जुन के सीने के कड़े मसल्स से सटा हुआ था। रात भर अर्जुन के बड़े हाथों की मार झेलने की वजह से उनके बड़े, भूरे निप्पलों पर अभी भी हल्की सी सुर्खी और कड़ापन साफ दिख रहा था। अर्जुन का एक मजबूत हाथ अभी भी स्मिता के चौड़े, मांसल चूतड़ों के ढलान पर थमा हुआ था।

जब दोपहर के बारह बजने को आए, तब स्मिता की आँखें अलसाए अंदाज़ में खुलीं। बदन के हर हिस्से में रात की दीवानगी की एक मीठी सी थकान थी, लेकिन दिल में एक असीम सुकून और जीत का अहसास था। उन्होंने ऊपर देखा, अर्जुन जाग चुका था और अपनी गहरी, दीवानी नजरों से अपनी माँ के इस अलसाए, रसीले रूप को ही निहार रहा था।

"जाग गईं, मेरी मल्लिका?" अर्जुन ने अपनी भारी, रसीली मर्दाना आवाज़ में फुसफुसाते हुए स्मिता के होठों पर एक गहरा, गीला चुंबन अंकित कर दिया।

file-0000000075108211880c4a155b4f3219

"उम्मम्... अर्जुन... तुमने रात को मुझे कहीं का नहीं छोड़ा। मेरी कमर अभी भी टूट रही है," स्मिता ने लजाते हुए अपनी आँखें मूंद लीं और अपने भारी स्तनों को अर्जुन की छाती में और ज्यादा भींच दिया।


file-0000000078548208bad195de16fb4ad0
remove duplicates from pasted column

दो घंटे बाद, स्मिता और अर्जुन पूरी तरह तैयार होकर अपने घर पहुंच चुके थे। दोपहर ढल रही थी, और रेखा मौसी, जो सुबह सुइट से अपने काम के लिए निकली थीं, वह स्मिता से मिलने और रात का हालचाल जानने उनके घर आई हुई थीं। घर के एक एकांत और आलीशान कोने में दोनों बहनें—स्मिता और रेखा—हाथ में कॉफ़ी के मग लिए बैठ गईं। अर्जुन अपने स्टडी रूम में किसी कॉल में व्यस्त था।

खिड़की से आती मद्धम धूप में स्मिता का चेहरा अभी भी रात के समागम के निखार से दमक रहा था, जिसे रेखा की पारखी नजरों ने तुरंत भांप लिया।

"आहा... स्मिता! सच कहूं तो आज तुम्हारे चेहरे की यह लाली और आँखों का यह गीलापन साफ बता रहा है कि रात को अर्जुन ने तुम्हें किस कदर अपनी मर्दानगी के रस से सराबोर किया है," रेखा ने एक नटखट, रसभरी हंसी हंसते हुए अपनी कॉफ़ी की चुस्की दी।

रेखा ने उस वक्त गहरे जामुनी रंग की एक बेहद मॉडर्न, sleeveless वाली मैक्सी पहनी थी, जिससे उनकी ४९ साल की उम्र का सुडौल बदन, गोरी बाहें और भारी जांघों का उभार साफ झलक रहा था।

"उस बुड्ढे (एक्स-हस्बैंड) के सामने अर्जुन का वो रसूख देखकर तो मेरा भी बदन सिहर उठा था। मुझे तो तभी समझ आ गया था कि होटल के सुइट में जाते ही तुम दोनों के बीच कैसी आग भड़कने वाली है।"

स्मिता के गाल रेखा की इस बेबाक बात को सुनकर लाल हो गए। उन्होंने अपनी कॉफ़ी की चुसकी ली, थोड़ा आगे झुकीं, जिससे उनकी छातियों का भारी उभार सोफे के किनारे से हल्का सा सटा। उन्होंने रेखा का हाथ थाम लिया।

"सब तुम्हारी वजह से है, रेखा। अगर तुमने शुरुआत में मुझे उस झिझक से बाहर न निकाला होता, अर्जुन के प्रति मेरी उस छुपी हुई तीव्र इच्छा को पंख न दिए होते, तो शायद मैं आज भी उसी दर्द में जी रही होती," स्मिता की आवाज़ में गहरा प्यार था। फिर उनके होठों पर एक शरारती, नटखट मुस्कान तैर गई। उन्होंने रेखा की आँखों में आँखें डालीं। "पर रेखा... एक बात कहूं? अब हमारा तो सब सेट हो गया। अर्जुन जैसा मर्द पाकर मेरी जिंदगी मुकम्मल हो गई है। लेकिन अब... अब तेरा क्या? हमारा तो करा दिया, अब तेरा और तेरे कबीर का कुछ करना पड़ेगा।"

स्मिता की यह बेबाक और अप्रत्याशित बात सुनकर रेखा के हाथ एक पल के लिए थम गए। ४९ साल की उस बोल्ड, हाई-क्लास औरत के चेहरे पर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। रेखा ने अपनी जामुनी मैक्सी के पल्लू को थोड़ा संभाला, अपनी भारी जांघों को आपस में थोड़ा भींचा।

"धत्त... स्मिता! तुम भी क्या बातें लेकर बैठ गईं," रेखा ने अपनी नजरें चुराते हुए हंसने की कोशिश की, लेकिन उनकी सांसें थोड़ी भारी हो गई थीं। "कबीर? वह मेरा बेटा है, स्मिता। और वैसे भी, तुम तो जानती ही हो कि मेरा अपना घर, मेरी अपनी गृहस्थी अलग है। मेरे हस्बैंड अपने बिजनेस के सिलसिले में सालों से इतने बिजी रहते हैं कि उन्हें घर-परिवार या मेरे बदन की जरूरतों से कोई मतलब ही नहीं रहा। कबीर पिछले पांच-छह सालों से विदेश में रहा है, अब जब वह हमेशा के लिए इंडिया लौट रहा है और शायद यही रहेगा पर उसका सोचना, उसका नज़रिया बिल्कुल अलग है।"

"तो क्या हुआ? अर्जुन भी तो मेरा बेटा है," स्मिता ने पूरी समझदारी और परिपक्वता से रेखा का हाथ और कसकर दबाया। "रिश्ते तो समाज के लिए होते हैं रेखा, पर इस चारदीवारी के भीतर असली सुख तो सिर्फ एक ताकतवर, जवान और वफादार मर्द के स्पर्श से ही मिलता है। कबीर अब २८ साल का एक पूरा, मुकम्मल मर्द बन चुका है। चौड़ा कंधा, लंबा कद... मैंने उसकी तस्वीरें देखी हैं। तू खुद अपने घर में इतनी अकेली रहती है, और इस उम्र में भी इतनी हॉट और सम्मोहक है, बेटे समान अर्जुन से तो चुदाई करा ली, तब नहीं सोचा बेटे जैसा ही है। सच बोल ऐसे ही क्या तेरे मन में कभी कबीर के लिए कोई वैसी तरंग नहीं उठी?"

रेखा ने एक गहरी, लंबी सांस ली। उनकी छाती मैक्सी के भीतर ज़ोर से ऊपर-नीचे हुई। स्मिता की बातों ने उनके भीतर के उस दबे हुए ज्वालामुखी को हल्के से कुरेद दिया था।

"तू समझ नहीं रही है स्मिता... यह बहुत टफ है," रेखा ने अपनी आवाज़ को धीमा करते हुए कहा, उनकी आँखों में एक अजीब सा कामुक सस्पेंस था। "अर्जुन की बात अलग थी। वह शुरुआत से ही तेरे प्रति एक गहरा जुड़ाव, एक सुरक्षा की भावना रखता था। वह तुझे जी-जान से चाहता है, तेरी इस काया का वो दीवाना था, इसलिए यह रिश्ता इतनी सहजता और असीम प्यार से बन गया। लेकिन कबीर... कबीर की कहानी अलग है। विदेश में उसकी कई गर्लफ्रेंड्स रह चुकी हैं। गोरी, मेम जैसी लड़कियां। हालांकि वह किसी के साथ सीरियस नहीं रहा, लेकिन मुझे लगता है कि उसे सिर्फ जवान और स्लिम लड़कियां ही पसंद हैं। वह भला मुझ जैसी ४९ साल की परिपक्व और भारी बदन वाली औरत की तरफ उस नज़र से क्यों देखेगा? और वह भी अपनी मॉम।"

स्मिता ने एक रहस्यमयी हंसी हंसी। उन्होंने रेखा की नग्न, गोरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा, "यही तो मर्दों की साइकोलॉजी है, रेखा। कबीर ने विदेश की वो सूखी-साकी लड़कियां देखी हैं, लेकिन उसने अभी तक एक मुकम्मल, रसीली, भारी और बोल्ड देसी औरत का स्वाद नहीं चखा है। तू अभी ४९ की उम्र में भी किसी २५ साल की लड़की को मात देती है। यह जो तेरी भारी जांघें और यह सुडौल बदन है ना, जब इसके करीब वह आएगा, तो विदेश की सारी मेमों को भूल जाएगा। बस, हमें और अर्जुन को मिलकर कुछ ऐसा ताना-बाना बुनना होगा कि उसे बिना पता चले, वह तेरी इस कशिश में आ जाए।"

तभी रेखा के फोन पर एक नोटिफिकेशन टोन बजी। उन्होंने स्क्रीन देखी और उनके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई।

"लो... कबीर का मैसेज आ गया। वह एयरपोर्ट से बाहर निकल चुका है और ड्राइवर लेकर सीधे घर पर पहुंच रहा है। मुझे अब तुरंत अपने घर निकलना होगा, उसे वहां अकेले अजीब लगेगा," रेखा ने अपनी मैक्सी को संभालते हुए हड़बड़ाहट में कहा।
 

Befriendmy

New Member
43
362
69
स्मिता ने मुस्कुराते हुए रेखा को गले लगाया और उनके कान में फुसफुसाया, "जा रेखा... अपनी इस जवानी का जादू आज से ही उस जवान मर्द पर चलाना शुरू कर दे।" रेखा ने शरमाते हुए स्मिता को देखा, अर्जुन से विदा ली और तुरंत अपनी गाड़ी से अपने आलीशान पेंटहाउस की तरफ रवाना हो गईं।

रेखा का पेंटहाउस शहर के एक बेहद पॉश और रईस इलाके की २2वीं मंजिल पर था। आधुनिक इंटीरियर, कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियां और आलीशान सजावट रेखा के हाई-क्लास स्टेटस को साफ बयां करती थी। उनके पति हमेशा की तरह एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के सिलसिले में देश से बाहर थे, इसलिए पूरा घर खाली और शांत था।

रेखा जैसे ही अपने घर पहुंचीं, उन्होंने जल्दी से लिविंग रूम को सलीके से व्यवस्थित किया। दोपहर की धूप कांच की खिड़कियों से छनकर फर्श पर तैर रही थी। रेखा के दिल की धड़कन बढ़ रही थी। कबीर... उनका जवान बेटा, २८ साल का पूरा मर्द, सालों बाद हमेशा के लिए अपनी माँ के पास लौट रहा था।

ठीक बीस मिनट बाद, पेंटहाउस की मुख्य घंटी बजी। रेखा ने गहरी सांस ली, अपनी जामुनी स्लीवलेस मैक्सी के गले को हल्का सा ठीक किया और भारी दरवाज़ा खोल दिया।

दरवाज़े पर २८ साल का कबीर खड़ा था। छह फीट का लंबा कद, चौड़े और कड़े कसरती कंधे, सांवला-रफ रंग रूप, और चेहरे पर ट्रिम की हुई हल्की सी दाढ़ी—कबीर अपनी माँ रेखा की तरह ही बेहद आकर्षक, मॉडर्न और एक मुकम्मल रसूखदार जवान मर्द लग रहा था। उसने नीले रंग की जींस और एक कसी हुई काले रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिससे उसकी छाती और बाइसेप्स के कड़े मसल्स साफ उभर कर दिख रहे थे। उसके साथ उसके दो बड़े ट्रॉली बैग्स थे।

"मॉम!" कबीर के चेहरे पर एक बड़ी सी, चमकीला मुस्कान आ गई। उसने बिना एक पल गंवाए अपने बैग्स को वहीं छोड़ा और आगे बढ़कर रेखा को अपनी कसी हुई, मजबूत बाहों में भर लिया।

जैसे ही कबीर के कड़े, कसरती सीने ने रेखा के ४९ साल के उस भरे-पूरे, रसीले बदन को भींचे लिया, रेखा के मुंह से एक मद्धम सी सिसकारी निकलने को हुई जिसे उन्होंने बहुत मुश्किल से भीतर ही रोक लिया। कबीर के बदन की वो मर्दाना कड़वाहट, उसकी गर्म सांसें जो रेखा के नग्न गोरे कंधे पर पड़ रही थीं, और उसके हाथों का वो भारी दबाव—रेखा को अंदर तक हिला गया। कबीर ने रेखा को इतने ज़ोर से भींचा कि उन्हें ज़मीन से एक इंच ऊपर उठा दिया, जिससे रेखा की भारी जांघें और उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा अनजाना में कबीर की जींस से कड़े हो चुके जांघों के हिस्से से बुरी तरह रगड़ खा गया।

file-000000003ef082118bc7b0fc50cb4d07
"ओह गॉड, मॉम! आई मिस्ड यू सो मच!" कबीर ने रेखा को वापस नीचे उतारते हुए कहा। उसके दोनों बड़े, गर्म हाथ अभी भी रेखा के दोनों गोरे, नग्न कंधों पर टिके हुए थे।

कबीर ने पिछले पांच सालों में अपनी माँ को सिर्फ वीडियो कॉल्स पर देखा था, जहाँ कैमरे के एंगल्स हकीकत को छुपा देते हैं। लेकिन आज, जब वह अपनी माँ के ठीक सामने खड़ा था, तो उनके इस भारी, रसीले और सम्मोहक देसी बदन को देखकर कबीर की आँखों में एक पल के लिए एक अजीब सी मर्दाना हैरानी और कशिश कौंध गई। उसकी नजरें एक सेकंड के लिए रेखा की मैक्सी के गहरे गले से झांकते उनके उरोजों के भारी उभार पर टिकीं और फिर बहुत ही स्वाभाविक रूप से हट गईं।

"विश्वास नहीं होता मॉम... आप वीडियो कॉल से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और हॉट लग रही हैं," कबीर ने बहुत ही बेबाकी और विदेशी तारीफ भरे अंदाज़ में कहा। "डैड सच में बहुत लक्की और अनलकी दोनों हैं, आप जैसी खूबसूरत बीवी मिली पर हमेशा काम के चक्कर में इस खूबसूरत घर और आपसे दूर रहते हैं।"

विदेश में रहने के कारण कबीर का बातचीत का तरीका बहुत खुला था, लेकिन रेखा के लिए एक जवान मर्द के मुंह से, जो उनका अपना बेटा था, अपने बदन और खूबसूरती की ऐसी बेबाक तारीफ सुनना उनके खून की रवानी को अचानक तेज कर गया।

"चलो-चलो, अब अंदर आओ। थके होगे," रेखा ने अपनी धड़कनों को संभालते हुए कहा। उन्होंने कबीर के गाल को चूमा, लेकिन चूमते वक्त उनके हाथ कबीर के टी-शर्ट के नीचे छिपे कड़े बाइसेप्स पर हल्के से कांप गए।

कबीर अपना सामान खींचते हुए आलीशान लिविंग रूम के भीतर आया और वहाँ रखे मखमली सोफे पर आराम से अपनी लंबी टांगें फैलाकर बैठ गया। रेखा किचन की तरफ बढ़ीं ताकि उसके लिए पानी और जूस ला सकें। जब वह चल रही थीं, तो मैक्सी के भीतर से उनके चूतड़ों का भारी, रसीला मटकना कबीर की नजरों के सामने था। कबीर सोफे पर बैठा अनजाने में अपनी माँ के उस परिपक्व और सम्मोहक बदन के पीछे के हिस्से को निहार रहा था, और उसके दिमाग में एक अनजानी सी, धुंधली कामुक कशिश का पहला बीज बिना उसकी मर्जी के बोया जा चुका था।

खेल की शुरुआत रेखा के अपने इसी एकांत पेंटहाउस से हो चुकी थी, जहाँ पति के न होने का सन्नाटा और कबीर की यह जवान मर्दानगी , रेखा का हुस्न माहौल में नशा घोल रहा था।

कबीर ने सामने मेज से पानी का ग्लास हाथ में लिया और आँखें बंद करके सोफे पर सिर टिका दिया, जबकि रेखा कमरे के कोने से उसकी उस कसरती काया को देखकर अंदर ही अंदर सिहर रही थीं।

file-0000000022d88206aa92f297b696bb2c
पानी का खाली गिलास मेज पर रखते हुए कबीर ने एक लंबी, राहत भरी सांस ली। सोफे पर सिर टिकाए हुए उसकी आँखें आधी मुंदी थीं, जिससे उसकी घनी पलकों के नीचे की सांवली रंगत और उभरी हुई जॉ-लाइन और भी ज़्यादा आकर्षक लग रही थी। विदेश की लंबी और थकाऊ फ्लाइट के बाद इस आलीशान पेंटहाउस का सन्नाटा और घर की जानी-पहचानी खुशबू उसके बदन को ढीला कर रही थी। लेकिन वहीं, किचन के संगमरमरी काउंटर के सहारे खड़ी रेखा की हालत बिल्कुल अलग थी।

रेखा के ४९ साल के रसीले और परिपक्व बदन के भीतर एक अनजानी सी तपन धीरे-धीरे सुलगने लगी थी।
स्मिता की कही हुई हर एक बेबाक बात उनके कानों में किसी मंत्र की तरह गूंज रही थी—*"तू अभी भी इतनी हॉट और सम्मोहक है... क्या तेरे मन में कभी कबीर के लिए कोई तरंग नहीं उठी?"*
और अभी बेटे कबीर ने भी *"आप वीडियो कॉल से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और हॉट लग रही हैं"* कहकर आग में घी डालने का काम किया था।

रेखा ने अपनी नज़रों को सोफे पर फैले अपने २८ साल के जवान बेटे के बदन पर टिका दिया। कबीर की कसी हुई काले रंग की टी-शर्ट उसकी चौड़ी छाती से इतनी चिपकी हुई थी कि उसकी छाती के कड़े मसल्स और टी-शर्ट के ऊपर से झलकते दो छोटे, सख्त उभार रेखा की आँखों में सीधे चुभ रहे थे। कबीर ने जब अपनी लंबी, कसरती टांगों को थोड़ा फैलाया, तो उसकी नीले रंग की जींस का अगला हिस्सा उसकी मर्दानगी के भारीपन के कारण हल्का सा तन गया।

रेखा की सांसें अचानक भारी होने लगीं। उनकी जामुनी मैक्सी के भीतर ढके उनके दोनों भारी उरोज अपनी जगह पर जोर-जोर से धड़कने लगे। उन्होंने अपनी कांपती हुई उंगलियों से मैक्सी के पतले स्ट्रैप को संभाला और दबे पैरों से सोफे के करीब आईं।

"कबीर..." रेखा की आवाज़ में एक अजीब सा गीलापन और अलसायापन था, जैसे कोई कामुक सुरा उनकी जुबान पर तैर गई हो।

कबीर ने आँखें खोलीं और अपनी माँ को देखा। धूप की सुनहरी किरणें रेखा के गोरे, सुडौल कंधों और उनकी मैक्सी के गहरे गले से झलकती क्लीवेज की गहरी घाटी पर पड़ रही थीं।

"हम्म, मॉम?" कबीर की भारी, रसीली आवाज़ ने माहौल के सन्नाटे को तोड़ा।

"बेटा, तू बहुत थका हुआ होगा। सामान वैसे ही रहने दे... चल, मैं तुझे तेरे कमरे तक छोड़ देती हूँ। तू थोड़ा शावर ले ले और आराम कर," रेखा ने एक बेहद मीठी, मादक मुस्कान के साथ कहा।

कबीर मुस्कुराया और धीरे से सोफे से उठ खड़ा हुआ। छह फीट का वह कड़ा, कसरती जवान बदन जब रेखा के ठीक सामने खड़ा हुआ, तो रेखा की आँखें कबीर के कंधे तक ही पहुँच पाईं। कबीर ने एक अनजाने अधिकार भाव से रेखा के नग्न गोरे कंधे पर अपना भारी, गर्म हाथ रखा। कबीर की उंगलियों की तपन रेखा के मखमली बदन में सीधे उतर गई। रेखा का पूरा वजूद एक पल के लिए कांप उठा; उनकी भारी जांघों के बीच एक हल्की सी नमी की बूँद रसातल की ओर सरक गई।

"आप सही कह रही हैं मॉम, मुझे सच में एक हॉट शावर की ज़रूरत है," कबीर ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी सांसें रेखा की गर्दन के पास से गुजरती हुई उनके कान की लौ को छुईं।

रेखा उसे मास्टर बेडरूम की तरफ ले गईं। कमरा पूरी तरह से वातानुकूलित था और उसकी बड़ी कांच की खिड़की से पूरे शहर का नजारा दिखता था। कबीर ने अपनी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ा और एक ही झटके में उसे सिर के ऊपर से उतारकर बेडरूम की कुर्सी पर फेंक दिया।

जैसे ही कबीर का ऊपरी बदन नग्न हुआ, रेखा की आँखें फटी की फटी रह गईं। चौड़ा, सांवला और सुगठित सीना, जिस पर बहुत हल्के सांवले बाल थे, छः पैक्स में बँटा हुआ पेट, और बाइसेप्स की कड़ी नसें... कबीर की जवानी का यह नग्न प्रदर्शन रेखा के दिमाग में एक तीखा नशा घोल गया।

कबीर ने बिना किसी झिझक के अपनी जींस का बटन भी खोल दिया और ज़िपर की तीखी 'ज़िप' की आवाज़ से सन्नाटा टूट गया।

"मॉम, टॉवल?" कबीर ने अपनी जींस को नीचे सरकाते हुए पूछा, वह नीचे सिर्फ एक काले रंग के बॉक्सर अंडरवेयर में खड़ा था, जो उसकी भारी मर्दानगी और कड़े चूतड़ों को पूरी तरह से उभार रहा था।

file-000000002a1882119b54a45d120128aa
रेखा की नजरें कबीर के उस उभरे हुए निचले हिस्से पर जा टिकीं। उनका गला सूख गया, आँखें उस भारी मर्दाना उभार से हट ही नहीं रही थीं। उन्होंने हड़बड़ाहट में अलमारी से एक भारी, सफ़ेद तौलिया निकाला और कांपते हाथों से कबीर की ओर बढ़ाया।

"य... यह ले कबीर," रेखा की आवाज़ में एक कंपकंपी थी।
कबीर ने तौलिया लेने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन जानबूझकर या अनजाने में, उसकी उंगलियां तौलिए को पकड़ने के बजाय रेखा के भारी, गोरे हाथों को छू गईं और तौलिया नीचे फर्श पर गिर गया।

"ओह, सॉरी मॉम!" कबीर ने फौरन नीचे झुककर तौलिया उठाया। जब कबीर नीचे झुका, तो उसका चौड़ा, नग्न कंधा रेखा की जामुनी मैक्सी से ढके घुटनों और भारी जांघों से बुरी तरह रगड़ खा गया।

रेखा के मुंह से एक दबी हुई सी सिसकारी निकली—*"अह्ह्ह..."*—और उन्होंने पीछे हटने की बजाय अनजाने में कबीर के कड़े नग्न कंधे पर हाथ टिका दिया। कबीर ने ऊपर देखा। उसकी आँखें सीधे रेखा की मैक्सी के ढीले गले में झांक रही थीं, जहाँ से ३६ साइज के कड़े, गोरे स्तनों का ऊपरी उभार और उनके बीच की रसीली दरार साफ दिख रही थी।

कबीर की आँखों में एक तीखी, कामुक लालसा कौंध गई। उसने पहली बार अपनी माँ के इस ४९ साल के बदन को एक माँ के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहद सम्मोहक, रसीली और भारी देसी औरत के रूप में देखा। माहौल में एक भारी, दम घोटने वाली कामुकता तैरने लगी थी।

"मॉम... आप सच में बहुत... बहुत खूबसूरत हैं," कबीर की भारी आवाज़ बाथरूम की दीवारों से टकराकर गूंजी।

file-00000000c2848211b91c87a1bde3e365
रेखा का दिल किसी बागी घोड़े की तरह धड़क रहा था। उन्होंने अपनी आँखें नीची कर लीं और शरमाते हुए कांपती आवाज़ में कहा, "त... तू बहुत शैतान हो गया है कबीर... जा, जाकर नहा ले। शाम को हमें स्मिता मौसी के घर डिनर पर भी जाना है।"

file-0000000031848207a02700c67af63293
कबीर मुस्कुराया, उसने रेखा के गाल पर एक हल्का सा गीला चुंबन दिया और बाथरूम के भीतर चला गया। शावर के चालू होने की आवाज़ के साथ ही रेखा तेजी से कमरे से बाहर निकल आईं। उन्होंने बाहर आते ही अपने भारी स्तनों पर हाथ रखा, जहाँ कबीर के हाथों की और उसकी नज़र की तपन अभी भी महसूस हो रही थी। उनकी सांसें उखड़ रही थीं और मैक्सी के भीतर उनकी पैंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी।

file-00000000622482119067d7bf417bc251
 

pussylover1

Milf lover.
2,064
2,860
143
स्मिता ने मुस्कुराते हुए रेखा को गले लगाया और उनके कान में फुसफुसाया, "जा रेखा... अपनी इस जवानी का जादू आज से ही उस जवान मर्द पर चलाना शुरू कर दे।" रेखा ने शरमाते हुए स्मिता को देखा, अर्जुन से विदा ली और तुरंत अपनी गाड़ी से अपने आलीशान पेंटहाउस की तरफ रवाना हो गईं।

रेखा का पेंटहाउस शहर के एक बेहद पॉश और रईस इलाके की २2वीं मंजिल पर था। आधुनिक इंटीरियर, कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियां और आलीशान सजावट रेखा के हाई-क्लास स्टेटस को साफ बयां करती थी। उनके पति हमेशा की तरह एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के सिलसिले में देश से बाहर थे, इसलिए पूरा घर खाली और शांत था।

रेखा जैसे ही अपने घर पहुंचीं, उन्होंने जल्दी से लिविंग रूम को सलीके से व्यवस्थित किया। दोपहर की धूप कांच की खिड़कियों से छनकर फर्श पर तैर रही थी। रेखा के दिल की धड़कन बढ़ रही थी। कबीर... उनका जवान बेटा, २८ साल का पूरा मर्द, सालों बाद हमेशा के लिए अपनी माँ के पास लौट रहा था।

ठीक बीस मिनट बाद, पेंटहाउस की मुख्य घंटी बजी। रेखा ने गहरी सांस ली, अपनी जामुनी स्लीवलेस मैक्सी के गले को हल्का सा ठीक किया और भारी दरवाज़ा खोल दिया।

दरवाज़े पर २८ साल का कबीर खड़ा था। छह फीट का लंबा कद, चौड़े और कड़े कसरती कंधे, सांवला-रफ रंग रूप, और चेहरे पर ट्रिम की हुई हल्की सी दाढ़ी—कबीर अपनी माँ रेखा की तरह ही बेहद आकर्षक, मॉडर्न और एक मुकम्मल रसूखदार जवान मर्द लग रहा था। उसने नीले रंग की जींस और एक कसी हुई काले रंग की टी-शर्ट पहनी थी, जिससे उसकी छाती और बाइसेप्स के कड़े मसल्स साफ उभर कर दिख रहे थे। उसके साथ उसके दो बड़े ट्रॉली बैग्स थे।

"मॉम!" कबीर के चेहरे पर एक बड़ी सी, चमकीला मुस्कान आ गई। उसने बिना एक पल गंवाए अपने बैग्स को वहीं छोड़ा और आगे बढ़कर रेखा को अपनी कसी हुई, मजबूत बाहों में भर लिया।

जैसे ही कबीर के कड़े, कसरती सीने ने रेखा के ४९ साल के उस भरे-पूरे, रसीले बदन को भींचे लिया, रेखा के मुंह से एक मद्धम सी सिसकारी निकलने को हुई जिसे उन्होंने बहुत मुश्किल से भीतर ही रोक लिया। कबीर के बदन की वो मर्दाना कड़वाहट, उसकी गर्म सांसें जो रेखा के नग्न गोरे कंधे पर पड़ रही थीं, और उसके हाथों का वो भारी दबाव—रेखा को अंदर तक हिला गया। कबीर ने रेखा को इतने ज़ोर से भींचा कि उन्हें ज़मीन से एक इंच ऊपर उठा दिया, जिससे रेखा की भारी जांघें और उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा अनजाना में कबीर की जींस से कड़े हो चुके जांघों के हिस्से से बुरी तरह रगड़ खा गया।

file-000000003ef082118bc7b0fc50cb4d07
"ओह गॉड, मॉम! आई मिस्ड यू सो मच!" कबीर ने रेखा को वापस नीचे उतारते हुए कहा। उसके दोनों बड़े, गर्म हाथ अभी भी रेखा के दोनों गोरे, नग्न कंधों पर टिके हुए थे।

कबीर ने पिछले पांच सालों में अपनी माँ को सिर्फ वीडियो कॉल्स पर देखा था, जहाँ कैमरे के एंगल्स हकीकत को छुपा देते हैं। लेकिन आज, जब वह अपनी माँ के ठीक सामने खड़ा था, तो उनके इस भारी, रसीले और सम्मोहक देसी बदन को देखकर कबीर की आँखों में एक पल के लिए एक अजीब सी मर्दाना हैरानी और कशिश कौंध गई। उसकी नजरें एक सेकंड के लिए रेखा की मैक्सी के गहरे गले से झांकते उनके उरोजों के भारी उभार पर टिकीं और फिर बहुत ही स्वाभाविक रूप से हट गईं।

"विश्वास नहीं होता मॉम... आप वीडियो कॉल से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और हॉट लग रही हैं," कबीर ने बहुत ही बेबाकी और विदेशी तारीफ भरे अंदाज़ में कहा। "डैड सच में बहुत लक्की और अनलकी दोनों हैं, आप जैसी खूबसूरत बीवी मिली पर हमेशा काम के चक्कर में इस खूबसूरत घर और आपसे दूर रहते हैं।"

विदेश में रहने के कारण कबीर का बातचीत का तरीका बहुत खुला था, लेकिन रेखा के लिए एक जवान मर्द के मुंह से, जो उनका अपना बेटा था, अपने बदन और खूबसूरती की ऐसी बेबाक तारीफ सुनना उनके खून की रवानी को अचानक तेज कर गया।

"चलो-चलो, अब अंदर आओ। थके होगे," रेखा ने अपनी धड़कनों को संभालते हुए कहा। उन्होंने कबीर के गाल को चूमा, लेकिन चूमते वक्त उनके हाथ कबीर के टी-शर्ट के नीचे छिपे कड़े बाइसेप्स पर हल्के से कांप गए।

कबीर अपना सामान खींचते हुए आलीशान लिविंग रूम के भीतर आया और वहाँ रखे मखमली सोफे पर आराम से अपनी लंबी टांगें फैलाकर बैठ गया। रेखा किचन की तरफ बढ़ीं ताकि उसके लिए पानी और जूस ला सकें। जब वह चल रही थीं, तो मैक्सी के भीतर से उनके चूतड़ों का भारी, रसीला मटकना कबीर की नजरों के सामने था। कबीर सोफे पर बैठा अनजाने में अपनी माँ के उस परिपक्व और सम्मोहक बदन के पीछे के हिस्से को निहार रहा था, और उसके दिमाग में एक अनजानी सी, धुंधली कामुक कशिश का पहला बीज बिना उसकी मर्जी के बोया जा चुका था।

खेल की शुरुआत रेखा के अपने इसी एकांत पेंटहाउस से हो चुकी थी, जहाँ पति के न होने का सन्नाटा और कबीर की यह जवान मर्दानगी , रेखा का हुस्न माहौल में नशा घोल रहा था।

कबीर ने सामने मेज से पानी का ग्लास हाथ में लिया और आँखें बंद करके सोफे पर सिर टिका दिया, जबकि रेखा कमरे के कोने से उसकी उस कसरती काया को देखकर अंदर ही अंदर सिहर रही थीं।

file-0000000022d88206aa92f297b696bb2c
पानी का खाली गिलास मेज पर रखते हुए कबीर ने एक लंबी, राहत भरी सांस ली। सोफे पर सिर टिकाए हुए उसकी आँखें आधी मुंदी थीं, जिससे उसकी घनी पलकों के नीचे की सांवली रंगत और उभरी हुई जॉ-लाइन और भी ज़्यादा आकर्षक लग रही थी। विदेश की लंबी और थकाऊ फ्लाइट के बाद इस आलीशान पेंटहाउस का सन्नाटा और घर की जानी-पहचानी खुशबू उसके बदन को ढीला कर रही थी। लेकिन वहीं, किचन के संगमरमरी काउंटर के सहारे खड़ी रेखा की हालत बिल्कुल अलग थी।

रेखा के ४९ साल के रसीले और परिपक्व बदन के भीतर एक अनजानी सी तपन धीरे-धीरे सुलगने लगी थी।
स्मिता की कही हुई हर एक बेबाक बात उनके कानों में किसी मंत्र की तरह गूंज रही थी—*"तू अभी भी इतनी हॉट और सम्मोहक है... क्या तेरे मन में कभी कबीर के लिए कोई तरंग नहीं उठी?"*
और अभी बेटे कबीर ने भी *"आप वीडियो कॉल से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और हॉट लग रही हैं"* कहकर आग में घी डालने का काम किया था।

रेखा ने अपनी नज़रों को सोफे पर फैले अपने २८ साल के जवान बेटे के बदन पर टिका दिया। कबीर की कसी हुई काले रंग की टी-शर्ट उसकी चौड़ी छाती से इतनी चिपकी हुई थी कि उसकी छाती के कड़े मसल्स और टी-शर्ट के ऊपर से झलकते दो छोटे, सख्त उभार रेखा की आँखों में सीधे चुभ रहे थे। कबीर ने जब अपनी लंबी, कसरती टांगों को थोड़ा फैलाया, तो उसकी नीले रंग की जींस का अगला हिस्सा उसकी मर्दानगी के भारीपन के कारण हल्का सा तन गया।

रेखा की सांसें अचानक भारी होने लगीं। उनकी जामुनी मैक्सी के भीतर ढके उनके दोनों भारी उरोज अपनी जगह पर जोर-जोर से धड़कने लगे। उन्होंने अपनी कांपती हुई उंगलियों से मैक्सी के पतले स्ट्रैप को संभाला और दबे पैरों से सोफे के करीब आईं।

"कबीर..." रेखा की आवाज़ में एक अजीब सा गीलापन और अलसायापन था, जैसे कोई कामुक सुरा उनकी जुबान पर तैर गई हो।

कबीर ने आँखें खोलीं और अपनी माँ को देखा। धूप की सुनहरी किरणें रेखा के गोरे, सुडौल कंधों और उनकी मैक्सी के गहरे गले से झलकती क्लीवेज की गहरी घाटी पर पड़ रही थीं।

"हम्म, मॉम?" कबीर की भारी, रसीली आवाज़ ने माहौल के सन्नाटे को तोड़ा।

"बेटा, तू बहुत थका हुआ होगा। सामान वैसे ही रहने दे... चल, मैं तुझे तेरे कमरे तक छोड़ देती हूँ। तू थोड़ा शावर ले ले और आराम कर," रेखा ने एक बेहद मीठी, मादक मुस्कान के साथ कहा।

कबीर मुस्कुराया और धीरे से सोफे से उठ खड़ा हुआ। छह फीट का वह कड़ा, कसरती जवान बदन जब रेखा के ठीक सामने खड़ा हुआ, तो रेखा की आँखें कबीर के कंधे तक ही पहुँच पाईं। कबीर ने एक अनजाने अधिकार भाव से रेखा के नग्न गोरे कंधे पर अपना भारी, गर्म हाथ रखा। कबीर की उंगलियों की तपन रेखा के मखमली बदन में सीधे उतर गई। रेखा का पूरा वजूद एक पल के लिए कांप उठा; उनकी भारी जांघों के बीच एक हल्की सी नमी की बूँद रसातल की ओर सरक गई।

"आप सही कह रही हैं मॉम, मुझे सच में एक हॉट शावर की ज़रूरत है," कबीर ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी सांसें रेखा की गर्दन के पास से गुजरती हुई उनके कान की लौ को छुईं।

रेखा उसे मास्टर बेडरूम की तरफ ले गईं। कमरा पूरी तरह से वातानुकूलित था और उसकी बड़ी कांच की खिड़की से पूरे शहर का नजारा दिखता था। कबीर ने अपनी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ा और एक ही झटके में उसे सिर के ऊपर से उतारकर बेडरूम की कुर्सी पर फेंक दिया।

जैसे ही कबीर का ऊपरी बदन नग्न हुआ, रेखा की आँखें फटी की फटी रह गईं। चौड़ा, सांवला और सुगठित सीना, जिस पर बहुत हल्के सांवले बाल थे, छः पैक्स में बँटा हुआ पेट, और बाइसेप्स की कड़ी नसें... कबीर की जवानी का यह नग्न प्रदर्शन रेखा के दिमाग में एक तीखा नशा घोल गया।

कबीर ने बिना किसी झिझक के अपनी जींस का बटन भी खोल दिया और ज़िपर की तीखी 'ज़िप' की आवाज़ से सन्नाटा टूट गया।

"मॉम, टॉवल?" कबीर ने अपनी जींस को नीचे सरकाते हुए पूछा, वह नीचे सिर्फ एक काले रंग के बॉक्सर अंडरवेयर में खड़ा था, जो उसकी भारी मर्दानगी और कड़े चूतड़ों को पूरी तरह से उभार रहा था।

file-000000002a1882119b54a45d120128aa
रेखा की नजरें कबीर के उस उभरे हुए निचले हिस्से पर जा टिकीं। उनका गला सूख गया, आँखें उस भारी मर्दाना उभार से हट ही नहीं रही थीं। उन्होंने हड़बड़ाहट में अलमारी से एक भारी, सफ़ेद तौलिया निकाला और कांपते हाथों से कबीर की ओर बढ़ाया।

"य... यह ले कबीर," रेखा की आवाज़ में एक कंपकंपी थी।
कबीर ने तौलिया लेने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन जानबूझकर या अनजाने में, उसकी उंगलियां तौलिए को पकड़ने के बजाय रेखा के भारी, गोरे हाथों को छू गईं और तौलिया नीचे फर्श पर गिर गया।

"ओह, सॉरी मॉम!" कबीर ने फौरन नीचे झुककर तौलिया उठाया। जब कबीर नीचे झुका, तो उसका चौड़ा, नग्न कंधा रेखा की जामुनी मैक्सी से ढके घुटनों और भारी जांघों से बुरी तरह रगड़ खा गया।

रेखा के मुंह से एक दबी हुई सी सिसकारी निकली—*"अह्ह्ह..."*—और उन्होंने पीछे हटने की बजाय अनजाने में कबीर के कड़े नग्न कंधे पर हाथ टिका दिया। कबीर ने ऊपर देखा। उसकी आँखें सीधे रेखा की मैक्सी के ढीले गले में झांक रही थीं, जहाँ से ३६ साइज के कड़े, गोरे स्तनों का ऊपरी उभार और उनके बीच की रसीली दरार साफ दिख रही थी।

कबीर की आँखों में एक तीखी, कामुक लालसा कौंध गई। उसने पहली बार अपनी माँ के इस ४९ साल के बदन को एक माँ के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहद सम्मोहक, रसीली और भारी देसी औरत के रूप में देखा। माहौल में एक भारी, दम घोटने वाली कामुकता तैरने लगी थी।

"मॉम... आप सच में बहुत... बहुत खूबसूरत हैं," कबीर की भारी आवाज़ बाथरूम की दीवारों से टकराकर गूंजी।

file-00000000c2848211b91c87a1bde3e365
रेखा का दिल किसी बागी घोड़े की तरह धड़क रहा था। उन्होंने अपनी आँखें नीची कर लीं और शरमाते हुए कांपती आवाज़ में कहा, "त... तू बहुत शैतान हो गया है कबीर... जा, जाकर नहा ले। शाम को हमें स्मिता मौसी के घर डिनर पर भी जाना है।"

file-0000000031848207a02700c67af63293
कबीर मुस्कुराया, उसने रेखा के गाल पर एक हल्का सा गीला चुंबन दिया और बाथरूम के भीतर चला गया। शावर के चालू होने की आवाज़ के साथ ही रेखा तेजी से कमरे से बाहर निकल आईं। उन्होंने बाहर आते ही अपने भारी स्तनों पर हाथ रखा, जहाँ कबीर के हाथों की और उसकी नज़र की तपन अभी भी महसूस हो रही थी। उनकी सांसें उखड़ रही थीं और मैक्सी के भीतर उनकी पैंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी।


file-00000000622482119067d7bf417bc251
What a hot update
Great bro
 
  • Like
Reactions: Napster
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top