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रेखा का वो तीखा-नमकीन अंदाज़ और स्मिता की वो रहस्यमयी मुस्कान पूरे कमरे में एक नशीली ख़ामोशी छोड़ गई। हवा में वासना की गर्मी अभी भी तैर रही थी, लेकिन कहानी में एकदम से कोई बड़ा तूफ़ान आने से पहले रेखा ने माहौल का रुख़ बदल दिया।
रेखा ने मुस्कुराते हुए अपनी पर्स से एक सुनहरे रंग का लिफ़ाफ़ा निकाला और उसे टी-टेबल पर रख दिया।
"चलो अर्जुन, और मेरी प्यारी दीदी... इस रहस्यमयी मुस्कान का जवाब ढूँढने के लिए मेरे पास अभी और वक़्त नहीं है। मुझे एक ज़रूरी काम से अभी निकलना होगा। लेकिन हाँ, यह एक ख़ास पार्टी का न्योता है। शनिवार रात में हम सब वहाँ मिल रहे हैं, और दीदी... अपना यह जवाब वहीं संभाल कर रखना।"
इतना कहकर रेखा ने अर्जुन को एक आख़िरी तिरछी नज़र से देखा, अपने पल्लू को संभाला और कमरे से बाहर निकल गई।
उसके जाने के बाद कमरे में कोई भड़कता हुआ हंगामा या थ्रिलिंग मोड़ नहीं आया। दोनों मां और बेटे के बीच बस एक अनकही-सी सिहरन शांत हो गई। स्मिता ने एक गहरी सांस ली, लिफ़ाफ़े को उठाया और अर्जुन की तरफ़ देखते हुए अपने कपड़ों को ठीक करने लगी। जो गर्मी रेखा के होने से चरम पर पहुँच रही थी, वो अब एक ठहर चुके सस्पेंस में बदल गई थी—एक ऐसी ख़ामोशी, जो आने वाले तूफ़ान की आहट दे रही थी।
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होटल के विशाल कंवेंशन हॉल की मद्धम, सुनहरी रोशनी में एक अलग ही रसूख और रईसी तैर रही थी। शहर के बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स, बिजनेसमैन और हाई-सोसाइटी के लोग वहाँ जमा थे। कांच के झूमरों से छनकर आती रोशनी सीधे हॉल के फर्श पर बिछे मखमली कालीनों पर बिखर रही थी। लेकिन इस पूरी महफिल की चकाचौंध को मात दे रहा था कंवेंशन हॉल के प्रवेश द्वार पर खड़ा एक जोड़ा, जिसे देखते ही वहाँ मौजूद कई लोगों की बातचीत एक पल के लिए थम गई।
स्मिता आज किसी मल्लिका की तरह अर्जुन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं। उनके बदन पर इस बार कोई पारंपरिक बनारसी साड़ी नहीं थी, बल्कि उन्होंने एक बेहद आलीशान, मॉडर्न और एलीगेंट डिज़ाइनर साड़ी पहनी थी। गहरे आधी रात के नीले रंग (Midnight Blue) की यह शिफॉन-सैटिन ब्लेंड साड़ी उनके बदन पर इस कदर लिपटी थी जैसे पानी उनके जिस्म से बह रहा हो। साड़ी का फैब्रिक इतना महीन और मक्खन जैसा था कि स्मिता का हर एक कर्व, उनकी हर एक हरकत के साथ उभर कर सामने आ रहा था। ५४ साल की उम्र में स्मिता का बदन एक परिपक्व, रसीली और प्लस-साइज़ काया का सबसे मुकम्मल उदाहरण था। उनके भारी चूतड़ और चौड़े कूल्हे उस महीन साड़ी के भीतर अपनी पूरी गोलाई के साथ मटक रहे थे।
साड़ी को नाभि से काफी नीचे, पेल्विक बोन के ठीक पास बांधा गया था, जिससे उनकी मांसल, गोरी और चिकनी कमर का एक बड़ा हिस्सा नग्न होकर चमक रहा था। पेट पर जमी हल्की सी चर्बी की तह उस एलीगेंट साड़ी के घेरे से झांक रही थी, जो उनकी परिपक्व कामुकता को और भी ज्यादा भड़काऊ बना रही थी। साड़ी के पल्लू को उन्होंने एक पतली सी पट्टी के रूप में कंधे पर पिन किया हुआ था, जिससे उनके ३६D के भारी और भरे हुए स्तनों का आधा हिस्सा, उनका गहरा क्लीवेज महफिल की रोशनी में साफ नुमायां हो रहा था। स्तनों का भारीपन ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहा था।
ब्लाउज का डिज़ाइन तो और भी ज्यादा कातिलाना था। साड़ी के मैचिंग का ही स्लीवलेस और पूरी तरह से बैकलेस (बिना पीठ वाला) ब्लाउज था, जो पीछे सिर्फ दो बारीक डोरियों के सहारे टिका हुआ था। स्मिता की पूरी गोरी, थलथलाती हुई चिकनी पीठ पूरी तरह नग्न थी, जिस पर रीढ़ की हड्डी के पास का उभार और कमर की तरफ जाता ढलान किसी भी मर्द के होश उड़ाने के लिए काफी था। उनके गले में हीरों का एक बारीक, चमकीला हार था जो सीधे उनके उरोजों के गहरे उतार-चढ़ाव के मुहाने पर जाकर टिक गया था। अर्जुन के साथ रहने के बाद उनके चेहरे पर जो निखार और आत्मविश्वास आया था, उसने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे।
उनके बगल में खड़ा अर्जुन एक मुकम्मल, गठीला और बेहद रसूखदार मर्द लग रहा था। काले रंग के टक्सीडो सूट, सफेद कड़क शर्ट और सलीके से सेट किए गए बालों में उसका चौड़ा कंधा और मर्दाना कद-काठी स्मिता की परिपक्वता को एक सुरक्षात्मक घेरा दे रही थी। अर्जुन की गहरी, तेज आँखें महफिल में घूम रही थीं, लेकिन उसका पूरा ध्यान, उसकी पूरी चेतना उसके बगल में चल रही अपनी माँ के इस बेहद सम्मोक अवतार पर टिकी हुई थी।
हॉल के एक कोने में, जहाँ मद्धम संगीत बज रहा था, अर्जुन ने हल्के से झुककर स्मिता के कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ीं।
"आज तुम इस महफिल में आग लगाने के इरादे से आई हो क्या, स्मिता?" अर्जुन की भारी और रसीली आवाज़ स्मिता के कानों से होती हुई सीधे उनकी नाभि के नीचे एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई। अर्जुन जब अकेले में या इस तरह के माहौल में होता था, तो वह उन्हें नाम से पुकार कर उस रोमांच को दस गुना बढ़ा देता था।
स्मिता ने अपनी बड़ी-बड़ी, कजरारी आँखों को धीरे से उठाया और अर्जुन की तरफ देखा। उनके होठों पर एक मदहोश करने वाली मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को जानबूझकर थोड़ा और खिसका दिया, जिससे उनके स्तनों का ऊपरी गोरा हिस्सा और भी ज्यादा साफ दिखने लगा।
"क्यों? मेरा यह रूप सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो है, अर्जुन। क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?" स्मिता ने बहुत ही मद्धम और कामुक आवाज़ में कहा, उनकी सांसों की गर्मी अर्जुन के गालों ने महसूस की।
"अच्छा?" अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसका हाथ बहुत ही स्वाभाविक अंदाज़ में स्मिता की खुली, गोरी पीठ पर गया। महफिल की भीड़ से बचते हुए, उसने अपनी बड़ी, गर्म हथेलियों को स्मिता की चिकनी कमर के उस मांसल हिस्से पर रख दिया जहाँ साड़ी बंधी थी।
उसकी उंगलियों ने स्मिता की कमर के मांस को हल्के से भींचा। "मेरा बस चले तो मैं इस भीड़ को यहीं छोड़ दूं और तुम्हें अपनी बाहों में भरकर उस कोने वाले कमरे में ले जाऊं। यह जो तुम्हारी पीठ पूरी नग्न घूम रही है ना, इस पर पूरे शहर के मर्दों की नजरें हैं, और मुझे इस बात से जितनी जलन हो रही है, उतना ही नशा चढ़ रहा है।"
स्मिता के बदन में अर्जुन के इस खुले स्पर्श से एक बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा और अर्जुन की तरफ ढीला छोड़ दिया, जिससे उनका भारी चूतड़ अर्जुन की जांघ से जाकर सट गया। उस महीन साड़ी के आर-पार अर्जुन को अपनी माँ के नितम्बों का भारीपन साफ महसूस हो रहा था। स्मिता ने हल्के से हांफते हुए कहा, "तो फिर रोके किसने रखा है तुम्हें? अपनी इस जागीर पर अपना हक जताओ..."
अभी दोनों के बीच यह साइलेंट कामुक तनाव चल ही रहा था कि अचानक महफिल का माहौल बदल गया।
हॉल के दूसरे छोर से कुछ लोग हंसते-बात करते हुए उनकी तरफ बढ़ रहे थे। अर्जुन की नजरें जैसे ही उन पर पड़ीं, उसकी पकड़ स्मिता की कमर पर थोड़ी और मजबूत हो गई। स्मिता ने अर्जुन की आँखों में अचानक आए उस सख्त बदलाव को भांप लिया। उन्होंने उस दिशा में देखा, और देखते ही उनके चेहरे का खून जैसे जम गया। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके हाथ में पकड़ा हुआ वाइन का ग्लास हल्का सा कांप गया।
सामने स्मिता का एक्स-हस्बैंड (पूर्व पति) खड़ा था। ५८ साल की उम्र का वह शख्स, जो कुछ रईस क्लाइंट्स के साथ हाथ में ड्रिंक लिए बात कर रहा था, अचानक रुक गया। उसकी नज़र जैसे ही स्मिता पर पड़ी, उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई।
वह स्मिता को पहचान ही नहीं पा रहा था। उसने स्मिता को हमेशा एक दबी-कुचली, ढीले-ढाले सूट पहनने वाली और आत्मविश्वास से हीन औरत के रूप में देखा था। वह स्मिता को एक बोझ समझता था, जिसकी वजह से उसने उसे बेसहारा छोड़ दिया था। लेकिन आज... आज उसके सामने जो औरत खड़ी थी, वह किसी रईस घराने की सबसे वांछनीय और कामुक कामिनी लग रही थी। आधी रात के नीले रंग की उस डिज़ाइनर साड़ी में स्मिता का वह भारी, सम्मोहक बदन, वह पूरी खुली गोरी पीठ, हार, और सबसे बढ़कर—वह बेबाक आत्मविश्वास, जो किसी अप्सरा जैसा था।
एक्स-हस्बैंड के भीतर का पुरुष अहंकार और लालच एक साथ जाग उठा। उसने अपने साथ खड़े लोगों को वहीं छोड़ा और बड़े-बड़े कदम बढ़ाता हुआ सीधे स्मिता की तरफ आने लगा।
स्मिता के पैर एक पल के लिए पीछे हटने को हुए। अतीत का वह पुराना डर, वह कमज़ोरी एक सेकंड के लिए उनके ज़हन पर हावी होने लगी। उनका सांस लेना थोड़ा भारी हो गया, जिससे उनके स्तन ब्लाउज के भीतर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगे, जो उनकी घबराहट को साफ बयां कर रहा था।
लेकिन इससे पहले कि अतीत का वो साया स्मिता को छू पाता, अर्जुन एक अभेद्य चट्टान की तरह स्मिता के ठीक आगे आकर खड़ा हो गया। उसका चौड़ा, गठीला बदन स्मिता के सामने एक ढाल बन गया। अर्जुन ने पीछे हाथ ले जाकर स्मिता के दोनों भारी चूतड़ों पर अपना पूरा हाथ रख दिया और उन्हें खींचकर पीछे से अपने टक्सीडो सूट से सटा लिया। इस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर के सारे डर को एक झटके में गायब कर दिया और उसकी जगह एक अजीब सी कामुक उत्तेजना ने ले ली।
एक्स-हस्बैंड अर्जुन के सामने आकर रुका। उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा, और फिर अर्जुन के पीछे से झांक रही स्मिता पर अपनी नजरें गड़ाईं। उसकी आँखों में वासना और हैरानी का एक गंदा मिश्रण था।
"स्मिता? तुम... यहाँ?" एक्स-हस्बैंड की आवाज़ में एक नकली सा अधिकार था। "विश्वास नहीं होता। यह कैसा रूप बना रखा है तुमने? इस उम्र में ऐसी साड़ी... और यह बैकलेस ब्लाउज? तुम इस तरह..."
इससे पहले कि वह अपना वाक्य पूरा कर पाता, अर्जुन ने अपनी गहरी, भारी और रौबदार मर्दाना आवाज़ में उसे टोक दिया। हॉल के उस कोने में अर्जुन का रसूख साफ महसूस हो रहा था।
"अपनी ज़बान को लगाम दो, मिस्टर," अर्जुन की आँखों में एक ठंडी आग थी, जिसने एक्स-हस्बैंड को एक कदम पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। "अपनी हैसियत में रहकर बात करो। अब तुम्हारी उस घटिया सोच और उस अतीत से हम बहुत आगे निकल चुके हैं, जहाँ तुम मां को कमज़ोर समझते थे।"
अर्जुन के पिता का चेहरा गुस्से और अपमान से लाल हो गया। उसने स्मिता की तरफ देखकर चिल्लाने की कोशिश की, "स्मिता! यह अर्जुन क्या कह रहा है और तुम इसके दम पर उड़ रही हो? भूल गई कि तुम क्या थीं? मेरे छोड़ने के बाद तुम्हारी क्या हैसियत रह गई थी?"
स्मिता, जो अर्जुन के ठीक पीछे खड़ी थीं, उन्होंने अर्जुन की चौड़ी पीठ पर अपना एक गोरा हाथ रखा। अर्जुन की शर्ट के कपड़े के नीचे से उन्हें उसके कड़े मसल्स महसूस हो रहे थे। स्मिता ने अपनी साड़ी के पल्लू को और सलीके से संभाला, अपने भारी उरोजों को तानकर अर्जुन के पीछे से थोड़ा आगे आईं। अब उनके चेहरे पर कोई डर नहीं था, सिर्फ एक विजेता की मुस्कान थी।
"हैसियत?" स्मिता की आवाज़ पूरी महफिल में मद्धम लेकिन इतनी साफ थी कि एक्स-हस्बैंड के कान बजने लगे। "मेरी हैसियत यह है कि आज मैं उस मुकाम पर हूँ जहाँ तुम जैसे लोग सिर्फ अपॉइंटमेंट लेकर आ सकते हैं। तुमने मुझे अपनी कमज़ोरी समझा था ना? लेकिन मेरे बेटे ने..." उन्होंने बड़े गर्व से अर्जुन की तरफ देखा, "...इस मर्द ने मुझे मेरी असली ताकत का अहसास कराया है। अब तुम मेरे लिए सिर्फ एक बीता हुआ कल हो, जिसकी कोई कीमत नहीं है।"
इसी बीच रेखा, जो कुछ दूर खड़े होकर यह सारा तमाशा देख रही थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए बेहद मटकती हुई वहाँ पहुंच गईं।
रेखा हमेशा की तरह बोल्ड, चुलबुली और हाई-क्लास लग रही थीं।
"अरे... तुम अभी तक यहीं मँडरा रहे हो?" रेखा ने एक्स-हस्बैंड को ऊपर से नीचे देखते हुए एक तीखा तंज कसा। "देखो भाई, अपनी औकात के हिसाब से किसी कोने में जाकर मुफ्त की ड्रिंक एंजॉय करो। हमारी स्मिता और अर्जुन का वक्त बहुत कीमती है। और वैसे भी, आज स्मिता का यह रूप देखने के लिए तुम्हारी आँखें बहुत छोटी हैं।" उन्होंने हंसते हुए अर्जुन की तरफ देखा।
एक्स-हस्बैंड के पास अब वहाँ रुकने का कोई बहाना नहीं था। आसपास के कुछ और लोगों की नजरें भी अब उनकी तरफ मुड़ने लगी थीं। अपनी पूरी बेइज्जती महसूस करते हुए, वह पैर पटकता हुआ महफिल के दूसरे छोर की तरफ भाग गया।
उसके जाते ही स्मिता ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उनका पूरा बदन उत्तेजना और एक अजीब सी जीत के अहसास से कांप रहा था। उनके स्तन ब्लाउज के भीतर इतनी ज़ोर से धड़क रहे थे कि उनके बीच का क्लीवेज तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था। पूर्व पति के सामने अर्जुन के इस मर्दाना रसूख, उसकी पजेसिवनेस और उस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर कामुकता की एक ऐसी आग लगा दी थी जो अब शांत होने वाली नहीं थी।
अर्जुन ने मुड़कर स्मिता की तरफ देखा। स्मिता की आँखों में छलकती हुई दीवानगी और उनके हांफते हुए होठों को देखकर वह समझ गया कि अब यहाँ एक पल भी रुकना मुमकिन नहीं है। उसने रेखा मौसी की तरफ देखा, जिन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ उन्हें आँख मारी।
"चलो अर्जुन... इसे यहाँ से ले जाओ," रेखा ने स्मिता की नग्न, गोरी पीठ पर हल्के से थपकी देते हुए मद्धम आवाज़ में कहा। "इसकी छाती की यह धड़कन और बदन की यह गर्मी सिर्फ तुम्हारे कमरे में ही शांत हो सकती है।"
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता का हाथ अपने मजबूत हाथ में थाम लिया। स्मिता की साड़ी का पल्लू हल्का सा लहराया, और वे दोनों महफिल की चकाचौंध को पीछे छोड़ते हुए, होटल के अपने कमरे की तरफ बढ़ गए, जहाँ उनकी तीव्र इच्छा का एक नया और बेहद raw इतिहास लिखा जाने वाला था।
होटल के शोर-शराबे और कंवेंशन हॉल की तीखी रोशनी को पीछे छोड़ते हुए जब अर्जुन और स्मिता लिफ्ट से होते हुए २४वें माले के रूम की तरफ बढ़ रहे थे, तो कॉरिडोर के सन्नाटे में स्मिता की सैंडल की खट-खट और उनकी भारी साड़ियों की सरसराहट साफ गूंज रही थी। स्मिता की सांसें अभी भी तेज थीं। कंवेंशन हॉल में एक्स-हस्बैंड का वह अचानक सामना और उसके बाद अर्जुन का एक खूंखार, रसूखदार मर्द की तरह उनके सामने तनकर खड़े हो जाना—इस पूरे वाकये ने स्मिता के भीतर एक ऐसा रोमांच भर दिया था जिसकी तपिश उनके पूरे बदन में महसूस हो रही थी।
अर्जुन ने सुइट का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड स्वैप किया और भारी नक्काशीदार दरवाज़ा एक हल्के से क्लिक के साथ खुल गया। भीतर की दुनिया पूरी तरह से मद्धम, सुनहरी और मखमली रोशनी में डूबी हुई थी। किंग-साइज़ बेड पर रेशमी चादरें बिछी थीं और खिड़की से बाहर मुंबई की गगनचुंबी इमारतों की रोशनियां किसी मुकम्मल पेंटिंग जैसी लग रही थीं। रेखा मौसी पहले ही अपने हाथ में वाइन की बोतल लिए सुइट के आलीशान लिविंग एरिया में दाखिल हो चुकी थीं।
स्मिता जैसे ही कमरे के भीतर आईं, उन्होंने एक लंबी और गहरी सांस ली। उत्तेजना के मारे उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा हल्का सा संकुचित हो रहा था, और आधी रात के नीले रंग की उस महीन सैटिन-शिफॉन साड़ी के भीतर उनके भारी उरोज ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। ब्लाउज की बैकलेस डिज़ाइन की वजह से उनकी पूरी गोरी, मांसल पीठ पर पसीने की कुछ बारीक बूंदें चमक रही थीं, जो कंवेंशन हॉल के उस दिमागी तनाव और दबी हुई कामुकता का नतीजा थीं।
अर्जुन ने कोट के बटन खोले और टक्सीडो जैकेट को उतारकर सोफे पर फेंक दिया। उसकी सफेद कड़क शर्ट के ऊपर के दो बटन पहले ही खुले थे, जिससे उसकी चौड़ी मर्दाना छाती के घने बाल साफ झांक रहे थे। उसकी भूखी और दीवानी नजरें अपनी माँ की उस भारी, ललचाती हुई काया पर टिक गईं।
तब तक रेखा मौसी आई और उसने मेज पर कांच के तीन क्रिस्टल ग्लास रखे और वाइन उड़ेलते हुए एक गहरी, रसभरी हंसी हंसी। वह स्मिता के करीब आईं, जिनकी पीठ पूरी तरह नग्न थी। रेखा ने अपनी ठंडी उंगलियों को स्मिता की उस थलथलाती हुई, गोरी और चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे तक फेरा। स्मिता के मुंह से एक ठंडी सी सिसकारी निकल गई।
"ओह स्मिता... सच कहूं तो आज उस बुड्ढे की शक्ल देखने लायक थी!" रेखा ने वाइन का ग्लास स्मिता के हाथ में थामते हुए कहा।
"जिस औरत को उसने अपनी जिंदगी का सबसे बेकार हिस्सा समझकर छोड़ दिया था, आज उसे इतने आलीशान लिबास में, फिर से चढ़ी हुई जवानी के साथ देखकर उसकी छाती पर जो सांप लोटा है ना... आहा! मुझे तो मजा ही आ गया।"
स्मिता ने वाइन का एक घूंट लिया, जिससे उनके लाल होठों पर वाइन की एक चमकीली परत जम गई। उन्होंने अर्जुन की तरफ देखा, जो अपनी गहरी आँखों से उन्हें लगभग निगल जाने वाली निगाहों से घूर रहा था।
"सब अर्जुन और तेरी बदौलत है, रेखा..." स्मिता की आवाज़ में एक अजीब सी लचक और गीलापन था। "अगर आज यह मेरे आगे न खड़ा होता, तो शायद अतीत का वो डर मुझे फिर से कमज़ोर कर देता। लेकिन इसके स्पर्श ने..."
"मुझे पता है, मुझे सब पता है," रेखा ने चुलबुले अंदाज़ में स्मिता की बात काटी और अर्जुन के पास जाकर उसकी चौड़ी छाती पर हाथ रखा। "अर्जुन, तेरी यह माँ ना... आज सच में किसी रसीली जागीर जैसी लग रही है। इसकी यह नाभि के नीचे बंधी साड़ी, यह पूरी खुली हुई गोरी पीठ, और यह भारी मटकर चलते कूल्हे... कसम से, हॉल में जितने मर्द थे, सबकी राल टपक रही थी। लेकिन मैं जानती हूँ कि इस ३६D के खजाने पर सिर्फ और सिर्फ मेरे इस शेर का हक है।"
रेखा ने आगे बढ़कर स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी दो बारीक डोरियों में से ऊपर वाली डोरी को हल्के से खींचकर खोल दिया।
डोरियां खुलते ही स्मिता का बैकलेस ब्लाउज कंधों के पास से हल्का सा ढीला हो गया, जिससे उनके भारी स्तनों का ऊपरी उभार और क्लीवेज और भी ज्यादा बेपर्दा हो गया। स्मिता ने शर्म और उत्तेजना के मारे अपने हाथ से पल्लू को छाती पर भींच लिया।
"रेखा... यह तुम क्या कर रही हो?" स्मिता ने लजाते हुए कहा।
"अरे, तुम्हें आराम दे रही हूँ मेरी जान," रेखा ने हंसते हुए अपनी पर्स उठाई और दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ा दिए। "और वैसे भी, अब मेरा काम यहाँ खत्म होता है। इस शेर की आँखों की भूख मुझसे देखी नहीं जा रही। तुम दोनों इस मुकम्मल जीत का जश्न मनाओ। मैं आज रात अपने उस जुहू वाले फ्लैट पर रुक रही हूँ, वहाँ एक जरूरी क्लाइंट मीटिंग भी है सुबह। इसलिए यह पूरा सुइट, यह मद्धम रोशनी और तुम्हारी यह रसीली माँ... सब सिर्फ तुम्हारे हवाले है, अर्जुन। पूरा समय लो, और आज इसे घुटनों पर ला दो।"
रेखा ने अर्जुन को एक शरारती लुक दिया, स्मिता के गाल को हल्के से चूमा और बड़े ही सलीके से सुइट का भारी दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया।
कमरे में अब सिर्फ एक गहरा, भारी सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ दो इंसानों की तेज होती सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।
दरवाज़ा बंद होते ही कमरे का तापमान जैसे अचानक कई डिग्री बढ़ गया। अर्जुन सोफे के पास स्थिर खड़ा था, उसकी बाजुओं की नसें कड़क शर्ट के भीतर उभर आई थीं। स्मिता कमरे के बीचों-बीच खड़ी थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए। उनके ब्लाउज की ऊपरी डोरी खुली होने के कारण नीली सैटिन की पतली पट्टी उनके गोरे, गोल कंधे से फिसलकर बाजू पर आ गिरी थी। ३६D के दोनों भारी, मांसल स्तन उस ढीले पड़ चुके ब्लाउज के भीतर कड़े हो चुके निप्पलों के साथ साफ मटक रहे थे।
अर्जुन ने बिना एक शब्द बोले अपनी शर्ट के बाकी बचे बटन भी झटके से खोल दिए और उसे उतारकर फेंक दिया। उसका कड़ा, सांवला और गठीला मर्दाना बदन, जिस पर छह-फिट के कद की धमक थी, स्मिता के सामने पूरी तरह नग्न-अर्धशग्न खड़ा था। वह बड़े, धीमे लेकिन भारी कदमों से स्मिता की तरफ बढ़ा।
स्मिता का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उनके गले की नसें साफ फड़कती हुई दिख रही थीं। जैसे ही अर्जुन उनके बिल्कुल करीब आया, स्मिता ने डर से नहीं, बल्कि असीम इच्छा के मारे अपनी आँखें मूंद लीं। अर्जुन ने उनके हाथ से वाइन का ग्लास लिया और उसे साइड टेबल पर रख दिया।
अगले ही पल, अर्जुन के दोनों बड़े और खुरदरे हाथों ने स्मिता की उस आधी खुली, गोरी और मखमली पीठ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने स्मिता को अपनी तरफ खींचा और एक झटके में उन्हें पीछे की दीवार से सटा दिया। स्मिता के मुंह से एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली—"अह्ह्... अर्जुन!"
अर्जुन की मर्दाना सांसों की गरमाहट स्मिता के पूरे चेहरे पर फैल गई। अर्जुन ने अपनी एक जांघ को स्मिता की दोनों टांगों के बीच, उनकी साड़ी के घेरे को चीरते हुए अंदर घुसा दिया। शिफॉन की वह महीन साड़ी दोनों के बदन के बीच एक बारीक परत मात्र रह गई थी। अर्जुन की कड़ी जांघ जैसे ही स्मिता के पेटीकोट के अंदर छिपी हुई उनकी रसीली, भारी जांघों और उनके संवेदनशील ऊंचे मुहाने (योनि) से टकराई, स्मिता का पूरा बदन धनुष की तरह मुड़ गया। उन्होंने अपने दोनों गोरे हाथ अर्जुन के कड़े कंधों पर टिका दिए।
"अर्जुन... प्लीज... अब और तड़पाओ मत... आज मैं अंदर से पूरी जल रही हूँ..." स्मिता ने अपनी आँखें खोलकर बेहद कामुक, गीली निगाहों से अपने जवान बेटे के चेहरे को देखा। उनकी आँखों में केवल और केवल असीम समर्पण और तीव्र वासना का नशा था।
अर्जुन ने जवाब में स्मिता के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भींचा और उनके रसीले, लिपस्टिक से सने होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई धीमा चुंबन नहीं था, बल्कि एक भूखे मर्द का अपनी पसंदीदा जागीर पर किया गया पहला हमला था। अर्जुन स्मिता के निचले होंठ को अपने दांतों के बीच दबाकर चूसने लगा, और उसकी जीभ स्मिता के मुंह के भीतर जाकर उनकी लार के रस को पीने लगी। स्मिता के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां अर्जुन के मुंह के भीतर ही घुट कर रह गईं—"उम्मम्... आह्... अर्जुन... मेरे बच्चे..."
चूमते हुए ही अर्जुन का दायां हाथ स्मिता के कंधे से सरकते हुए उनकी छाती पर आया। उसने साड़ी के उस पतले पल्लू को एक ही झटके में कंधे से नीचे गिरा दिया। अब स्मिता का क्लीवेज और उनके भारी स्तनों का दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह आज़ाद हो चुका था। अर्जुन ने अपने बड़े, मजबूत हाथ से स्मिता के बाएं स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ही पूरा अपनी मुट्ठी में भर लिया और उसे बुरी तरह से भींचने लगा।
स्मिता का भारी स्तन अर्जुन की उंगलियों के बीच दबकर अपनी गोलाई बदलने लगा। ५४ साल की परिपक्वता के कारण उनके स्तनों में जो एक भारी, थलथलाता हुआ मांसल खिंचाव था, वह अर्जुन की मर्दाना ताकत के सामने पूरी तरह पिघल रहा था।
"आह्ह्ह्... अर्जुन... धीरे... उफ्फ्... बहुत कसकर भींच रहे हो..." स्मिता ने सिसकते हुए अपने सिर को पीछे दीवार पर टिका दिया, उनकी गर्दन की सुराहीदार नसें तन गईं।
अर्जुन ने उनके होठों को छोड़ा और नीचे की तरफ बढ़ा। उसने स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी नीचे वाली आखिरी डोरी को भी एक झटके में खींचकर खोल दिया। डोरियां खुलते ही वह आधी रात के नीले रंग का डिज़ाइनर ब्लाउज आगे से पूरी तरह खुल गया। अर्जुन ने ब्लाउज के दोनों पल्लों को दोनों तरफ से हटा दिया।
कमरे की मद्धम पीली रोशनी में स्मिता का ३६D का वो आलीशान, गोरा और बेहद रसीला सीना पूरी तरह से नग्न होकर अर्जुन के सामने आ गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके स्तनों का भारीपन और उनकी गोलाई किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थी।
स्तनों के नीचे का हिस्सा भारी होने के कारण थोड़ा झुका हुआ था, लेकिन उनके कड़े, बड़े और भूरे रंग के निप्पल उत्तेजना के मारे पूरी तरह से कड़े होकर तीर की तरह बाहर की ओर तने हुए थे। उरोजों की त्वचा इतनी साफ और गोरी थी कि उन पर नीली नसें साफ दिखाई दे रही थीं।
अर्जुन इस असीम खजाने को देखकर एक पल के लिए थमा, उसकी सांसें और भारी हो गईं। उसने अपने दोनों हाथों से स्मिता की उन भारी छातियों को नीचे से थामा, जैसे कोई पुजारी किसी कीमती मूर्ति को संभालता है। उसने अपने मुंह को आगे बढ़ाया और स्मिता के बाएं स्तन के उस बड़े, भूरे निप्पल को पूरा का पूरा अपने मुंह के भीतर भर लिया।
"ओह्ह्ह्... माई गॉड... अर्जुन!... आहाहा..." स्मिता के पैर हवा में डगमगाए। उन्होंने अर्जुन के घने बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसकी खोपड़ी को अपनी छाती पर और कसकर भींच लिया।
अर्जुन अपनी जीभ से उस कड़े निप्पल को चारों तरफ से चाटने लगा और फिर उसे अपने दांतों के बीच हल्का सा दबाकर चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा दूध पी रहा हो। उसका दूसरा हाथ स्मिता के दाएं स्तन को लगातार गोल-गोल घुमाते हुए मसल रहा था, जिससे स्मिता की पूरी काया कामुकता के चरम पर पहुंचने लगी। स्मिता के मुंह से ठेठ देसी अंदाज़ में बेबाक आवाजें निकलने लगीं—"अह्ह्... हां... वैसे ही चूसा करो... पूरा मुंह में भर लो... अपनी इस माँ को आज पूरा खत्म कर दो अर्जुन..."
स्तनों को बुरी तरह से तृप्त करने के बाद, अर्जुन नीचे की तरफ झुका। उसकी उंगलियां स्मिता की नाभि के पास गईं, जहाँ डिज़ाइनर साड़ी का सिल्क-सैटिन फैब्रिक बंधा हुआ था। अर्जुन ने साड़ी के उस पिन को खोला और एक ही झटके में साड़ी को खींच दिया। नीले रंग की वह महंगी साड़ी स्मिता के बदन से सरकती हुई फर्श पर एक ढेर बनकर गिर गई।
अब स्मिता के बदन पर सिर्फ एक गहरे नीले रंग का साटन का पेटीकोट बचा था। नाभि से नीचे बंधे होने के कारण उनकी चिकनी, भारी और थलथलाती हुई पेट की चर्बी और उनकी चौड़ी कमर का उभार पूरी तरह से अर्जुन की नजरों के सामने था। अर्जुन ने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ा और उसे एक झटके में ढीला कर दिया। पेटीकोट भी सरसराता हुआ नीचे गिर गया। स्मिता ने रेखा की सलाह मानकर नीचे पेंटि नहीं पहनी था।
जैसे ही पेटीकोट नीचे गिरा, ५४ साल की स्मिता की वह मुकम्मल, नग्न, प्लस-साइज़ काया कनवेंशन सुइट की रोशनी में पूरी तरह बेपर्दा हो गई। उनकी भारी, गोरी और आपस में रगड़ खाती हुई मांसल जांघें, उनके चौड़े और भारी चूतड़ों का वो विशाल ढलान, और उनकी दोनों जांघों के बीच छिपा हुआ वो घने, सलीके से ट्रिम किए हुए बालों से ढका हुआ उनका सबसे संवेदनशील और गीला हो चुकी यौनि —सब कुछ अर्जुन के सामने था। स्मिता की जांघों के बीच से कामुक रस की कुछ बूंदें रिसकर उनकी चिकनी त्वचा पर चमक रही थीं, जो यह साबित करने के लिए काफी थीं कि वह अंदर से कितनी बुरी तरह से तैयार थीं।
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता को दोनों बगलों से उठाया और उन्हें सीधे उस किंग-साइज़ बेड के बीचों-बीच ले जाकर लिटा दिया। स्मिता जैसे ही रेशमी चादर पर लेटीं, उनके भारी स्तन दोनों तरफ थोड़े फैल गए, जिससे उनकी काया और भी ज्यादा कामुक और ललचाती हुई दिखने लगी।
अर्जुन ने अपने पैंट और कच्छा को भी एक झटके में लात मारकर उतार दिया। उसका ६-इंच का लंबा, कड़ा और लोहे जैसा सख्त हो चुका मर्दाना लंड पूरी तरह से तानकर बाहर आ गया, जो उसकी नसों के उभार के साथ ज़ोर-ज़ोर से फड़क रहा था।
वह घुटनों के बल स्मिता के ऊपर आया। स्मिता ने जैसे ही अर्जुन के उस बड़े और भयानक रूप से कड़े हो चुके लंड को देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सा नशा छा गया। उन्होंने अपनी दोनों भारी, मांसल जांघों को पूरा का पूरा बाहर की तरफ फैला दिया और अपने घुटनों को मोड़ लिया, जिससे उनकी योनि का वो गुलाबी, गीला और सूजा हुआ मुहाना अर्जुन के सामने पूरी तरह से खुल गया।
अर्जुन ने स्मिता की दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ा और उन्हें उनके कंधों की तरफ थोड़ा और भींच दिया। उसका कड़ा, गर्म औजार स्मिता की योनि के बाहरी होंठों पर जाकर टिक गया, जहाँ पहले से ही कामुक रस का गीलापन मौजूद था। अर्जुन ने अपने औजार के सुपारी वाले हिस्से को स्मिता के उस गीले मुहाने पर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा।
"अह्ह्... अर्जुन... अब बर्दाश्त नहीं होता बाबा... डाल दो... पूरा का पूरा अंदर ले लो..." स्मिता ने बेड की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर मुट्ठी में भींच लिया, उनका पूरा बदन काम के मारे कांप रहा था।
"तैयार रहो मां... आज तुम्हें चीरते हुए मैं तुम्हारे अतीत के हर दर्द को मिटा दूंगा," अर्जुन ने कहा और अपनी कमर को एक बेहद धीमे, मध्यम लेकिन पूरी ताकत के साथ आगे की तरफ धकेल दिया।
उस कड़े, मोटे और लोहे जैसे सख्त औजार का अगला हिस्सा जैसे ही स्मिता की ५४ साल की उस तंग, रसीली और बेहद गीली चुत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर दाखिल हुआ, स्मिता के मुंह से एक लंबी, चीख जैसी सिसकारी निकली—"ओह्ह्ह्ह्... आहाहा... अर्जुन!... उफ्फ्... मम्मा रे... पूरा भर गया..."
अर्जुन ने जल्दबाजी नहीं की। आपकी पसंदीदा शैली के मुताबिक, प्रवाह बेहद धीमा और मध्यम था। उसने अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। स्मिता की चुत की गर्म, मांसल दीवारें अर्जुन के उस कड़े मूसल को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थीं। जैसे-जैसे वह अंदर जा रहा था, स्मिता की आँखों से सुख और असीम आनंद के दो बूंद आंसू निकलकर उनके गालों पर ढलक गए। यह उनके जीवन की सबसे मुकम्मल जीत थी—अपने ही जवान बेटे के नीचे, उसकी पूरी मर्दानगी को अपने भीतर समाते हुए।
जब अर्जुन का पूरा का पूरा ६-इंच का मूसल स्मिता के गर्भाशय के मुहाने से जाकर टकरा गया, तो दोनों के बदन एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। अर्जुन के अंडकोष स्मिता के भारी चूतड़ों के निचले हिस्से से जाकर सट गए।
अर्जुन ने कुछ सेकंड के लिए खुद को रोका, और फिर उसने एक धीमा लेकिन बेहद गहरा देसी धक्के लगाना शुरू किया।
*छपक... छपक... छपक...*
कमरे के सन्नाटे में दोनों के बदन के आपस में टकराने की और योनि के भीतर रिसते हुए रसीले पानी की 'चप-चप' की आवाज़ गूंजने लगी। अर्जुन जब अपनी कमर पीछे खींचता, तो स्मिता का पूरा मुहाना बाहर की तरफ खिंच जाता, और जब वह पूरी ताकत से अंदर धकेलता, तो स्मिता के ३६D के दोनों भारी स्तन हवा में ज़ोर-ज़ोर से उछलते। अर्जुन ने ऊपर झुककर उनके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में दबोच लिया और उन्हें बुरी तरह मसलते हुए अपने धक्के की रफ्तार को थोड़ा और गहरा कर दिया।
"आह... हां... अर्जुन... मेरे राजा... वैसे ही... उफ्फ्... तुम्हारे लंड की मोटाई मुझे पागल कर रही है... मारो... और गहरे धक्के मारो..."
स्मिता अब पूरी तरह से होश खो चुकी थीं। उनका परिपक्व बदन अर्जुन के हर एक धक्के को अपनी गहराइयों में सोख रहा था। उनकी भारी जांघें अर्जुन की कमर के दोनों तरफ कसती जा रही थीं।
अर्जुन की सांसें अब घोड़ों जैसी चलने लगी थीं। उसकी पीठ पर पसीने की धाराएं बह रही थीं जो स्मिता की छाती पर गिर रही थीं।
दोनों का यह समागम वासना से परे, एक-दूसरे के प्रति असीम आदर, सुरक्षा और उस असीम प्रेम का प्रतीक था, जिसने स्मिता को एक नई जिंदगी दी थी। अर्जुन ने धक्कों की रफ्तार को थोड़ा और मध्यम लेकिन बेहद भारी कर दिया। हर एक स्ट्रोक स्मिता के भीतर तक तहलका मचा रहा था।
लगभग २० मिनट के इस बेहद raw और सेंसुअल समागम के बाद, स्मिता का पूरा बदन अचानक अकड़ने लगा। उनकी योनि के भीतर की दीवारें अर्जुन के औजार को पागलों की तरह भींचने लगीं। उनका चरम Orgasm बिल्कुल करीब था।
"अर्जुन... मेरा पानी छूट रहा है... ओहोहो... मैं टूट रही हूँ... अर्जुन!... मुझे अपने पानी से भर दो..." स्मिता ने चिल्लाते हुए अर्जुन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
अर्जुन को भी अहसास हो गया कि उसका भी बांध अब टूटने वाला है। उसने आखिरी तीन बेहद गहरे और खूंखार धक्के लगाए, और उसका लंड मां की चुत के बिल्कुल आखिरी छोर तक धंस गया।
अर्जुन ने एक गहरी, मर्दाना दहाड़ मारी—"अह्ह्ह्ह्ह्..."
और उसका कड़ा औजार स्मिता की योनि के भीतर ही फड़कते हुए अपने गर्म, गाढ़े और सफेद मर्दाना वीर्य की पिचकारियां छोड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य की एक-एक बूंद स्मिता के गर्भाशय की दीवारों पर ज्वालामुखी की तरह बरसने लगी। स्मिता ने अपनी आँखें ऊपर की तरफ मूंद लीं और उनका पूरा बदन झटके लेता हुआ चादर पर पूरी तरह से ढीला पड़ गया।
समागम खत्म होने के बाद भी अर्जुन अलग नहीं हुआ। वह स्मिता के उस भारी, रसीले बदन के ऊपर ही लेट गया, उसका औजार अभी भी स्मिता की योनि के भीतर ही फंसा हुआ था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे, हांफते हुए, आँखों में आँखे डाल एक दूजे को चूमते हुए उस मद्धम रोशनी में उस मुकम्मल जीत और असीम प्यार के नशे में पूरी तरह डूब चुके थे।
रेखा का वो तीखा-नमकीन अंदाज़ और स्मिता की वो रहस्यमयी मुस्कान पूरे कमरे में एक नशीली ख़ामोशी छोड़ गई। हवा में वासना की गर्मी अभी भी तैर रही थी, लेकिन कहानी में एकदम से कोई बड़ा तूफ़ान आने से पहले रेखा ने माहौल का रुख़ बदल दिया।
रेखा ने मुस्कुराते हुए अपनी पर्स से एक सुनहरे रंग का लिफ़ाफ़ा निकाला और उसे टी-टेबल पर रख दिया।
"चलो अर्जुन, और मेरी प्यारी दीदी... इस रहस्यमयी मुस्कान का जवाब ढूँढने के लिए मेरे पास अभी और वक़्त नहीं है। मुझे एक ज़रूरी काम से अभी निकलना होगा। लेकिन हाँ, यह एक ख़ास पार्टी का न्योता है। शनिवार रात में हम सब वहाँ मिल रहे हैं, और दीदी... अपना यह जवाब वहीं संभाल कर रखना।"
इतना कहकर रेखा ने अर्जुन को एक आख़िरी तिरछी नज़र से देखा, अपने पल्लू को संभाला और कमरे से बाहर निकल गई।
उसके जाने के बाद कमरे में कोई भड़कता हुआ हंगामा या थ्रिलिंग मोड़ नहीं आया। दोनों मां और बेटे के बीच बस एक अनकही-सी सिहरन शांत हो गई। स्मिता ने एक गहरी सांस ली, लिफ़ाफ़े को उठाया और अर्जुन की तरफ़ देखते हुए अपने कपड़ों को ठीक करने लगी। जो गर्मी रेखा के होने से चरम पर पहुँच रही थी, वो अब एक ठहर चुके सस्पेंस में बदल गई थी—एक ऐसी ख़ामोशी, जो आने वाले तूफ़ान की आहट दे रही थी।
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होटल के विशाल कंवेंशन हॉल की मद्धम, सुनहरी रोशनी में एक अलग ही रसूख और रईसी तैर रही थी। शहर के बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स, बिजनेसमैन और हाई-सोसाइटी के लोग वहाँ जमा थे। कांच के झूमरों से छनकर आती रोशनी सीधे हॉल के फर्श पर बिछे मखमली कालीनों पर बिखर रही थी। लेकिन इस पूरी महफिल की चकाचौंध को मात दे रहा था कंवेंशन हॉल के प्रवेश द्वार पर खड़ा एक जोड़ा, जिसे देखते ही वहाँ मौजूद कई लोगों की बातचीत एक पल के लिए थम गई।
स्मिता आज किसी मल्लिका की तरह अर्जुन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं। उनके बदन पर इस बार कोई पारंपरिक बनारसी साड़ी नहीं थी, बल्कि उन्होंने एक बेहद आलीशान, मॉडर्न और एलीगेंट डिज़ाइनर साड़ी पहनी थी। गहरे आधी रात के नीले रंग (Midnight Blue) की यह शिफॉन-सैटिन ब्लेंड साड़ी उनके बदन पर इस कदर लिपटी थी जैसे पानी उनके जिस्म से बह रहा हो। साड़ी का फैब्रिक इतना महीन और मक्खन जैसा था कि स्मिता का हर एक कर्व, उनकी हर एक हरकत के साथ उभर कर सामने आ रहा था। ५४ साल की उम्र में स्मिता का बदन एक परिपक्व, रसीली और प्लस-साइज़ काया का सबसे मुकम्मल उदाहरण था। उनके भारी चूतड़ और चौड़े कूल्हे उस महीन साड़ी के भीतर अपनी पूरी गोलाई के साथ मटक रहे थे।
साड़ी को नाभि से काफी नीचे, पेल्विक बोन के ठीक पास बांधा गया था, जिससे उनकी मांसल, गोरी और चिकनी कमर का एक बड़ा हिस्सा नग्न होकर चमक रहा था। पेट पर जमी हल्की सी चर्बी की तह उस एलीगेंट साड़ी के घेरे से झांक रही थी, जो उनकी परिपक्व कामुकता को और भी ज्यादा भड़काऊ बना रही थी। साड़ी के पल्लू को उन्होंने एक पतली सी पट्टी के रूप में कंधे पर पिन किया हुआ था, जिससे उनके ३६D के भारी और भरे हुए स्तनों का आधा हिस्सा, उनका गहरा क्लीवेज महफिल की रोशनी में साफ नुमायां हो रहा था। स्तनों का भारीपन ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहा था।
ब्लाउज का डिज़ाइन तो और भी ज्यादा कातिलाना था। साड़ी के मैचिंग का ही स्लीवलेस और पूरी तरह से बैकलेस (बिना पीठ वाला) ब्लाउज था, जो पीछे सिर्फ दो बारीक डोरियों के सहारे टिका हुआ था। स्मिता की पूरी गोरी, थलथलाती हुई चिकनी पीठ पूरी तरह नग्न थी, जिस पर रीढ़ की हड्डी के पास का उभार और कमर की तरफ जाता ढलान किसी भी मर्द के होश उड़ाने के लिए काफी था। उनके गले में हीरों का एक बारीक, चमकीला हार था जो सीधे उनके उरोजों के गहरे उतार-चढ़ाव के मुहाने पर जाकर टिक गया था। अर्जुन के साथ रहने के बाद उनके चेहरे पर जो निखार और आत्मविश्वास आया था, उसने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे।
उनके बगल में खड़ा अर्जुन एक मुकम्मल, गठीला और बेहद रसूखदार मर्द लग रहा था। काले रंग के टक्सीडो सूट, सफेद कड़क शर्ट और सलीके से सेट किए गए बालों में उसका चौड़ा कंधा और मर्दाना कद-काठी स्मिता की परिपक्वता को एक सुरक्षात्मक घेरा दे रही थी। अर्जुन की गहरी, तेज आँखें महफिल में घूम रही थीं, लेकिन उसका पूरा ध्यान, उसकी पूरी चेतना उसके बगल में चल रही अपनी माँ के इस बेहद सम्मोक अवतार पर टिकी हुई थी।
हॉल के एक कोने में, जहाँ मद्धम संगीत बज रहा था, अर्जुन ने हल्के से झुककर स्मिता के कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ीं।
"आज तुम इस महफिल में आग लगाने के इरादे से आई हो क्या, स्मिता?" अर्जुन की भारी और रसीली आवाज़ स्मिता के कानों से होती हुई सीधे उनकी नाभि के नीचे एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई। अर्जुन जब अकेले में या इस तरह के माहौल में होता था, तो वह उन्हें नाम से पुकार कर उस रोमांच को दस गुना बढ़ा देता था।
स्मिता ने अपनी बड़ी-बड़ी, कजरारी आँखों को धीरे से उठाया और अर्जुन की तरफ देखा। उनके होठों पर एक मदहोश करने वाली मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को जानबूझकर थोड़ा और खिसका दिया, जिससे उनके स्तनों का ऊपरी गोरा हिस्सा और भी ज्यादा साफ दिखने लगा।
"क्यों? मेरा यह रूप सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो है, अर्जुन। क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?" स्मिता ने बहुत ही मद्धम और कामुक आवाज़ में कहा, उनकी सांसों की गर्मी अर्जुन के गालों ने महसूस की।
"अच्छा?" अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसका हाथ बहुत ही स्वाभाविक अंदाज़ में स्मिता की खुली, गोरी पीठ पर गया। महफिल की भीड़ से बचते हुए, उसने अपनी बड़ी, गर्म हथेलियों को स्मिता की चिकनी कमर के उस मांसल हिस्से पर रख दिया जहाँ साड़ी बंधी थी।
उसकी उंगलियों ने स्मिता की कमर के मांस को हल्के से भींचा। "मेरा बस चले तो मैं इस भीड़ को यहीं छोड़ दूं और तुम्हें अपनी बाहों में भरकर उस कोने वाले कमरे में ले जाऊं। यह जो तुम्हारी पीठ पूरी नग्न घूम रही है ना, इस पर पूरे शहर के मर्दों की नजरें हैं, और मुझे इस बात से जितनी जलन हो रही है, उतना ही नशा चढ़ रहा है।"
स्मिता के बदन में अर्जुन के इस खुले स्पर्श से एक बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा और अर्जुन की तरफ ढीला छोड़ दिया, जिससे उनका भारी चूतड़ अर्जुन की जांघ से जाकर सट गया। उस महीन साड़ी के आर-पार अर्जुन को अपनी माँ के नितम्बों का भारीपन साफ महसूस हो रहा था। स्मिता ने हल्के से हांफते हुए कहा, "तो फिर रोके किसने रखा है तुम्हें? अपनी इस जागीर पर अपना हक जताओ..."
अभी दोनों के बीच यह साइलेंट कामुक तनाव चल ही रहा था कि अचानक महफिल का माहौल बदल गया।
हॉल के दूसरे छोर से कुछ लोग हंसते-बात करते हुए उनकी तरफ बढ़ रहे थे। अर्जुन की नजरें जैसे ही उन पर पड़ीं, उसकी पकड़ स्मिता की कमर पर थोड़ी और मजबूत हो गई। स्मिता ने अर्जुन की आँखों में अचानक आए उस सख्त बदलाव को भांप लिया। उन्होंने उस दिशा में देखा, और देखते ही उनके चेहरे का खून जैसे जम गया। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके हाथ में पकड़ा हुआ वाइन का ग्लास हल्का सा कांप गया।
सामने स्मिता का एक्स-हस्बैंड (पूर्व पति) खड़ा था। ५८ साल की उम्र का वह शख्स, जो कुछ रईस क्लाइंट्स के साथ हाथ में ड्रिंक लिए बात कर रहा था, अचानक रुक गया। उसकी नज़र जैसे ही स्मिता पर पड़ी, उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई।
वह स्मिता को पहचान ही नहीं पा रहा था। उसने स्मिता को हमेशा एक दबी-कुचली, ढीले-ढाले सूट पहनने वाली और आत्मविश्वास से हीन औरत के रूप में देखा था। वह स्मिता को एक बोझ समझता था, जिसकी वजह से उसने उसे बेसहारा छोड़ दिया था। लेकिन आज... आज उसके सामने जो औरत खड़ी थी, वह किसी रईस घराने की सबसे वांछनीय और कामुक कामिनी लग रही थी। आधी रात के नीले रंग की उस डिज़ाइनर साड़ी में स्मिता का वह भारी, सम्मोहक बदन, वह पूरी खुली गोरी पीठ, हार, और सबसे बढ़कर—वह बेबाक आत्मविश्वास, जो किसी अप्सरा जैसा था।
एक्स-हस्बैंड के भीतर का पुरुष अहंकार और लालच एक साथ जाग उठा। उसने अपने साथ खड़े लोगों को वहीं छोड़ा और बड़े-बड़े कदम बढ़ाता हुआ सीधे स्मिता की तरफ आने लगा।
स्मिता के पैर एक पल के लिए पीछे हटने को हुए। अतीत का वह पुराना डर, वह कमज़ोरी एक सेकंड के लिए उनके ज़हन पर हावी होने लगी। उनका सांस लेना थोड़ा भारी हो गया, जिससे उनके स्तन ब्लाउज के भीतर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगे, जो उनकी घबराहट को साफ बयां कर रहा था।
लेकिन इससे पहले कि अतीत का वो साया स्मिता को छू पाता, अर्जुन एक अभेद्य चट्टान की तरह स्मिता के ठीक आगे आकर खड़ा हो गया। उसका चौड़ा, गठीला बदन स्मिता के सामने एक ढाल बन गया। अर्जुन ने पीछे हाथ ले जाकर स्मिता के दोनों भारी चूतड़ों पर अपना पूरा हाथ रख दिया और उन्हें खींचकर पीछे से अपने टक्सीडो सूट से सटा लिया। इस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर के सारे डर को एक झटके में गायब कर दिया और उसकी जगह एक अजीब सी कामुक उत्तेजना ने ले ली।
एक्स-हस्बैंड अर्जुन के सामने आकर रुका। उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा, और फिर अर्जुन के पीछे से झांक रही स्मिता पर अपनी नजरें गड़ाईं। उसकी आँखों में वासना और हैरानी का एक गंदा मिश्रण था।
"स्मिता? तुम... यहाँ?" एक्स-हस्बैंड की आवाज़ में एक नकली सा अधिकार था। "विश्वास नहीं होता। यह कैसा रूप बना रखा है तुमने? इस उम्र में ऐसी साड़ी... और यह बैकलेस ब्लाउज? तुम इस तरह..."
इससे पहले कि वह अपना वाक्य पूरा कर पाता, अर्जुन ने अपनी गहरी, भारी और रौबदार मर्दाना आवाज़ में उसे टोक दिया। हॉल के उस कोने में अर्जुन का रसूख साफ महसूस हो रहा था।
"अपनी ज़बान को लगाम दो, मिस्टर," अर्जुन की आँखों में एक ठंडी आग थी, जिसने एक्स-हस्बैंड को एक कदम पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। "अपनी हैसियत में रहकर बात करो। अब तुम्हारी उस घटिया सोच और उस अतीत से हम बहुत आगे निकल चुके हैं, जहाँ तुम मां को कमज़ोर समझते थे।"
अर्जुन के पिता का चेहरा गुस्से और अपमान से लाल हो गया। उसने स्मिता की तरफ देखकर चिल्लाने की कोशिश की, "स्मिता! यह अर्जुन क्या कह रहा है और तुम इसके दम पर उड़ रही हो? भूल गई कि तुम क्या थीं? मेरे छोड़ने के बाद तुम्हारी क्या हैसियत रह गई थी?"
स्मिता, जो अर्जुन के ठीक पीछे खड़ी थीं, उन्होंने अर्जुन की चौड़ी पीठ पर अपना एक गोरा हाथ रखा। अर्जुन की शर्ट के कपड़े के नीचे से उन्हें उसके कड़े मसल्स महसूस हो रहे थे। स्मिता ने अपनी साड़ी के पल्लू को और सलीके से संभाला, अपने भारी उरोजों को तानकर अर्जुन के पीछे से थोड़ा आगे आईं। अब उनके चेहरे पर कोई डर नहीं था, सिर्फ एक विजेता की मुस्कान थी।
"हैसियत?" स्मिता की आवाज़ पूरी महफिल में मद्धम लेकिन इतनी साफ थी कि एक्स-हस्बैंड के कान बजने लगे। "मेरी हैसियत यह है कि आज मैं उस मुकाम पर हूँ जहाँ तुम जैसे लोग सिर्फ अपॉइंटमेंट लेकर आ सकते हैं। तुमने मुझे अपनी कमज़ोरी समझा था ना? लेकिन मेरे बेटे ने..." उन्होंने बड़े गर्व से अर्जुन की तरफ देखा, "...इस मर्द ने मुझे मेरी असली ताकत का अहसास कराया है। अब तुम मेरे लिए सिर्फ एक बीता हुआ कल हो, जिसकी कोई कीमत नहीं है।"
इसी बीच रेखा, जो कुछ दूर खड़े होकर यह सारा तमाशा देख रही थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए बेहद मटकती हुई वहाँ पहुंच गईं।
रेखा हमेशा की तरह बोल्ड, चुलबुली और हाई-क्लास लग रही थीं।
"अरे... तुम अभी तक यहीं मँडरा रहे हो?" रेखा ने एक्स-हस्बैंड को ऊपर से नीचे देखते हुए एक तीखा तंज कसा। "देखो भाई, अपनी औकात के हिसाब से किसी कोने में जाकर मुफ्त की ड्रिंक एंजॉय करो। हमारी स्मिता और अर्जुन का वक्त बहुत कीमती है। और वैसे भी, आज स्मिता का यह रूप देखने के लिए तुम्हारी आँखें बहुत छोटी हैं।" उन्होंने हंसते हुए अर्जुन की तरफ देखा।
एक्स-हस्बैंड के पास अब वहाँ रुकने का कोई बहाना नहीं था। आसपास के कुछ और लोगों की नजरें भी अब उनकी तरफ मुड़ने लगी थीं। अपनी पूरी बेइज्जती महसूस करते हुए, वह पैर पटकता हुआ महफिल के दूसरे छोर की तरफ भाग गया।
उसके जाते ही स्मिता ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उनका पूरा बदन उत्तेजना और एक अजीब सी जीत के अहसास से कांप रहा था। उनके स्तन ब्लाउज के भीतर इतनी ज़ोर से धड़क रहे थे कि उनके बीच का क्लीवेज तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था। पूर्व पति के सामने अर्जुन के इस मर्दाना रसूख, उसकी पजेसिवनेस और उस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर कामुकता की एक ऐसी आग लगा दी थी जो अब शांत होने वाली नहीं थी।
अर्जुन ने मुड़कर स्मिता की तरफ देखा। स्मिता की आँखों में छलकती हुई दीवानगी और उनके हांफते हुए होठों को देखकर वह समझ गया कि अब यहाँ एक पल भी रुकना मुमकिन नहीं है। उसने रेखा मौसी की तरफ देखा, जिन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ उन्हें आँख मारी।
"चलो अर्जुन... इसे यहाँ से ले जाओ," रेखा ने स्मिता की नग्न, गोरी पीठ पर हल्के से थपकी देते हुए मद्धम आवाज़ में कहा। "इसकी छाती की यह धड़कन और बदन की यह गर्मी सिर्फ तुम्हारे कमरे में ही शांत हो सकती है।"
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता का हाथ अपने मजबूत हाथ में थाम लिया। स्मिता की साड़ी का पल्लू हल्का सा लहराया, और वे दोनों महफिल की चकाचौंध को पीछे छोड़ते हुए, होटल के अपने कमरे की तरफ बढ़ गए, जहाँ उनकी तीव्र इच्छा का एक नया और बेहद raw इतिहास लिखा जाने वाला था।
होटल के शोर-शराबे और कंवेंशन हॉल की तीखी रोशनी को पीछे छोड़ते हुए जब अर्जुन और स्मिता लिफ्ट से होते हुए २४वें माले के रूम की तरफ बढ़ रहे थे, तो कॉरिडोर के सन्नाटे में स्मिता की सैंडल की खट-खट और उनकी भारी साड़ियों की सरसराहट साफ गूंज रही थी। स्मिता की सांसें अभी भी तेज थीं। कंवेंशन हॉल में एक्स-हस्बैंड का वह अचानक सामना और उसके बाद अर्जुन का एक खूंखार, रसूखदार मर्द की तरह उनके सामने तनकर खड़े हो जाना—इस पूरे वाकये ने स्मिता के भीतर एक ऐसा रोमांच भर दिया था जिसकी तपिश उनके पूरे बदन में महसूस हो रही थी।
अर्जुन ने सुइट का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड स्वैप किया और भारी नक्काशीदार दरवाज़ा एक हल्के से क्लिक के साथ खुल गया। भीतर की दुनिया पूरी तरह से मद्धम, सुनहरी और मखमली रोशनी में डूबी हुई थी। किंग-साइज़ बेड पर रेशमी चादरें बिछी थीं और खिड़की से बाहर मुंबई की गगनचुंबी इमारतों की रोशनियां किसी मुकम्मल पेंटिंग जैसी लग रही थीं। रेखा मौसी पहले ही अपने हाथ में वाइन की बोतल लिए सुइट के आलीशान लिविंग एरिया में दाखिल हो चुकी थीं।
स्मिता जैसे ही कमरे के भीतर आईं, उन्होंने एक लंबी और गहरी सांस ली। उत्तेजना के मारे उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा हल्का सा संकुचित हो रहा था, और आधी रात के नीले रंग की उस महीन सैटिन-शिफॉन साड़ी के भीतर उनके भारी उरोज ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। ब्लाउज की बैकलेस डिज़ाइन की वजह से उनकी पूरी गोरी, मांसल पीठ पर पसीने की कुछ बारीक बूंदें चमक रही थीं, जो कंवेंशन हॉल के उस दिमागी तनाव और दबी हुई कामुकता का नतीजा थीं।
अर्जुन ने कोट के बटन खोले और टक्सीडो जैकेट को उतारकर सोफे पर फेंक दिया। उसकी सफेद कड़क शर्ट के ऊपर के दो बटन पहले ही खुले थे, जिससे उसकी चौड़ी मर्दाना छाती के घने बाल साफ झांक रहे थे। उसकी भूखी और दीवानी नजरें अपनी माँ की उस भारी, ललचाती हुई काया पर टिक गईं।
तब तक रेखा मौसी आई और उसने मेज पर कांच के तीन क्रिस्टल ग्लास रखे और वाइन उड़ेलते हुए एक गहरी, रसभरी हंसी हंसी। वह स्मिता के करीब आईं, जिनकी पीठ पूरी तरह नग्न थी। रेखा ने अपनी ठंडी उंगलियों को स्मिता की उस थलथलाती हुई, गोरी और चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे तक फेरा। स्मिता के मुंह से एक ठंडी सी सिसकारी निकल गई।
"ओह स्मिता... सच कहूं तो आज उस बुड्ढे की शक्ल देखने लायक थी!" रेखा ने वाइन का ग्लास स्मिता के हाथ में थामते हुए कहा।
"जिस औरत को उसने अपनी जिंदगी का सबसे बेकार हिस्सा समझकर छोड़ दिया था, आज उसे इतने आलीशान लिबास में, फिर से चढ़ी हुई जवानी के साथ देखकर उसकी छाती पर जो सांप लोटा है ना... आहा! मुझे तो मजा ही आ गया।"
स्मिता ने वाइन का एक घूंट लिया, जिससे उनके लाल होठों पर वाइन की एक चमकीली परत जम गई। उन्होंने अर्जुन की तरफ देखा, जो अपनी गहरी आँखों से उन्हें लगभग निगल जाने वाली निगाहों से घूर रहा था।
"सब अर्जुन और तेरी बदौलत है, रेखा..." स्मिता की आवाज़ में एक अजीब सी लचक और गीलापन था। "अगर आज यह मेरे आगे न खड़ा होता, तो शायद अतीत का वो डर मुझे फिर से कमज़ोर कर देता। लेकिन इसके स्पर्श ने..."
"मुझे पता है, मुझे सब पता है," रेखा ने चुलबुले अंदाज़ में स्मिता की बात काटी और अर्जुन के पास जाकर उसकी चौड़ी छाती पर हाथ रखा। "अर्जुन, तेरी यह माँ ना... आज सच में किसी रसीली जागीर जैसी लग रही है। इसकी यह नाभि के नीचे बंधी साड़ी, यह पूरी खुली हुई गोरी पीठ, और यह भारी मटकर चलते कूल्हे... कसम से, हॉल में जितने मर्द थे, सबकी राल टपक रही थी। लेकिन मैं जानती हूँ कि इस ३६D के खजाने पर सिर्फ और सिर्फ मेरे इस शेर का हक है।"
रेखा ने आगे बढ़कर स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी दो बारीक डोरियों में से ऊपर वाली डोरी को हल्के से खींचकर खोल दिया।
डोरियां खुलते ही स्मिता का बैकलेस ब्लाउज कंधों के पास से हल्का सा ढीला हो गया, जिससे उनके भारी स्तनों का ऊपरी उभार और क्लीवेज और भी ज्यादा बेपर्दा हो गया। स्मिता ने शर्म और उत्तेजना के मारे अपने हाथ से पल्लू को छाती पर भींच लिया।
"रेखा... यह तुम क्या कर रही हो?" स्मिता ने लजाते हुए कहा।
"अरे, तुम्हें आराम दे रही हूँ मेरी जान," रेखा ने हंसते हुए अपनी पर्स उठाई और दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ा दिए। "और वैसे भी, अब मेरा काम यहाँ खत्म होता है। इस शेर की आँखों की भूख मुझसे देखी नहीं जा रही। तुम दोनों इस मुकम्मल जीत का जश्न मनाओ। मैं आज रात अपने उस जुहू वाले फ्लैट पर रुक रही हूँ, वहाँ एक जरूरी क्लाइंट मीटिंग भी है सुबह। इसलिए यह पूरा सुइट, यह मद्धम रोशनी और तुम्हारी यह रसीली माँ... सब सिर्फ तुम्हारे हवाले है, अर्जुन। पूरा समय लो, और आज इसे घुटनों पर ला दो।"
रेखा ने अर्जुन को एक शरारती लुक दिया, स्मिता के गाल को हल्के से चूमा और बड़े ही सलीके से सुइट का भारी दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया।
कमरे में अब सिर्फ एक गहरा, भारी सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ दो इंसानों की तेज होती सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।
दरवाज़ा बंद होते ही कमरे का तापमान जैसे अचानक कई डिग्री बढ़ गया। अर्जुन सोफे के पास स्थिर खड़ा था, उसकी बाजुओं की नसें कड़क शर्ट के भीतर उभर आई थीं। स्मिता कमरे के बीचों-बीच खड़ी थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए। उनके ब्लाउज की ऊपरी डोरी खुली होने के कारण नीली सैटिन की पतली पट्टी उनके गोरे, गोल कंधे से फिसलकर बाजू पर आ गिरी थी। ३६D के दोनों भारी, मांसल स्तन उस ढीले पड़ चुके ब्लाउज के भीतर कड़े हो चुके निप्पलों के साथ साफ मटक रहे थे।
अर्जुन ने बिना एक शब्द बोले अपनी शर्ट के बाकी बचे बटन भी झटके से खोल दिए और उसे उतारकर फेंक दिया। उसका कड़ा, सांवला और गठीला मर्दाना बदन, जिस पर छह-फिट के कद की धमक थी, स्मिता के सामने पूरी तरह नग्न-अर्धशग्न खड़ा था। वह बड़े, धीमे लेकिन भारी कदमों से स्मिता की तरफ बढ़ा।
स्मिता का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उनके गले की नसें साफ फड़कती हुई दिख रही थीं। जैसे ही अर्जुन उनके बिल्कुल करीब आया, स्मिता ने डर से नहीं, बल्कि असीम इच्छा के मारे अपनी आँखें मूंद लीं। अर्जुन ने उनके हाथ से वाइन का ग्लास लिया और उसे साइड टेबल पर रख दिया।
अगले ही पल, अर्जुन के दोनों बड़े और खुरदरे हाथों ने स्मिता की उस आधी खुली, गोरी और मखमली पीठ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने स्मिता को अपनी तरफ खींचा और एक झटके में उन्हें पीछे की दीवार से सटा दिया। स्मिता के मुंह से एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली—"अह्ह्... अर्जुन!"
अर्जुन की मर्दाना सांसों की गरमाहट स्मिता के पूरे चेहरे पर फैल गई। अर्जुन ने अपनी एक जांघ को स्मिता की दोनों टांगों के बीच, उनकी साड़ी के घेरे को चीरते हुए अंदर घुसा दिया। शिफॉन की वह महीन साड़ी दोनों के बदन के बीच एक बारीक परत मात्र रह गई थी। अर्जुन की कड़ी जांघ जैसे ही स्मिता के पेटीकोट के अंदर छिपी हुई उनकी रसीली, भारी जांघों और उनके संवेदनशील ऊंचे मुहाने (योनि) से टकराई, स्मिता का पूरा बदन धनुष की तरह मुड़ गया। उन्होंने अपने दोनों गोरे हाथ अर्जुन के कड़े कंधों पर टिका दिए।
"अर्जुन... प्लीज... अब और तड़पाओ मत... आज मैं अंदर से पूरी जल रही हूँ..." स्मिता ने अपनी आँखें खोलकर बेहद कामुक, गीली निगाहों से अपने जवान बेटे के चेहरे को देखा। उनकी आँखों में केवल और केवल असीम समर्पण और तीव्र वासना का नशा था।
अर्जुन ने जवाब में स्मिता के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भींचा और उनके रसीले, लिपस्टिक से सने होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई धीमा चुंबन नहीं था, बल्कि एक भूखे मर्द का अपनी पसंदीदा जागीर पर किया गया पहला हमला था। अर्जुन स्मिता के निचले होंठ को अपने दांतों के बीच दबाकर चूसने लगा, और उसकी जीभ स्मिता के मुंह के भीतर जाकर उनकी लार के रस को पीने लगी। स्मिता के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां अर्जुन के मुंह के भीतर ही घुट कर रह गईं—"उम्मम्... आह्... अर्जुन... मेरे बच्चे..."
चूमते हुए ही अर्जुन का दायां हाथ स्मिता के कंधे से सरकते हुए उनकी छाती पर आया। उसने साड़ी के उस पतले पल्लू को एक ही झटके में कंधे से नीचे गिरा दिया। अब स्मिता का क्लीवेज और उनके भारी स्तनों का दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह आज़ाद हो चुका था। अर्जुन ने अपने बड़े, मजबूत हाथ से स्मिता के बाएं स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ही पूरा अपनी मुट्ठी में भर लिया और उसे बुरी तरह से भींचने लगा।
स्मिता का भारी स्तन अर्जुन की उंगलियों के बीच दबकर अपनी गोलाई बदलने लगा। ५४ साल की परिपक्वता के कारण उनके स्तनों में जो एक भारी, थलथलाता हुआ मांसल खिंचाव था, वह अर्जुन की मर्दाना ताकत के सामने पूरी तरह पिघल रहा था।
"आह्ह्ह्... अर्जुन... धीरे... उफ्फ्... बहुत कसकर भींच रहे हो..." स्मिता ने सिसकते हुए अपने सिर को पीछे दीवार पर टिका दिया, उनकी गर्दन की सुराहीदार नसें तन गईं।
अर्जुन ने उनके होठों को छोड़ा और नीचे की तरफ बढ़ा। उसने स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी नीचे वाली आखिरी डोरी को भी एक झटके में खींचकर खोल दिया। डोरियां खुलते ही वह आधी रात के नीले रंग का डिज़ाइनर ब्लाउज आगे से पूरी तरह खुल गया। अर्जुन ने ब्लाउज के दोनों पल्लों को दोनों तरफ से हटा दिया।
कमरे की मद्धम पीली रोशनी में स्मिता का ३६D का वो आलीशान, गोरा और बेहद रसीला सीना पूरी तरह से नग्न होकर अर्जुन के सामने आ गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके स्तनों का भारीपन और उनकी गोलाई किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थी।
स्तनों के नीचे का हिस्सा भारी होने के कारण थोड़ा झुका हुआ था, लेकिन उनके कड़े, बड़े और भूरे रंग के निप्पल उत्तेजना के मारे पूरी तरह से कड़े होकर तीर की तरह बाहर की ओर तने हुए थे। उरोजों की त्वचा इतनी साफ और गोरी थी कि उन पर नीली नसें साफ दिखाई दे रही थीं।
अर्जुन इस असीम खजाने को देखकर एक पल के लिए थमा, उसकी सांसें और भारी हो गईं। उसने अपने दोनों हाथों से स्मिता की उन भारी छातियों को नीचे से थामा, जैसे कोई पुजारी किसी कीमती मूर्ति को संभालता है। उसने अपने मुंह को आगे बढ़ाया और स्मिता के बाएं स्तन के उस बड़े, भूरे निप्पल को पूरा का पूरा अपने मुंह के भीतर भर लिया।
"ओह्ह्ह्... माई गॉड... अर्जुन!... आहाहा..." स्मिता के पैर हवा में डगमगाए। उन्होंने अर्जुन के घने बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसकी खोपड़ी को अपनी छाती पर और कसकर भींच लिया।
अर्जुन अपनी जीभ से उस कड़े निप्पल को चारों तरफ से चाटने लगा और फिर उसे अपने दांतों के बीच हल्का सा दबाकर चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा दूध पी रहा हो। उसका दूसरा हाथ स्मिता के दाएं स्तन को लगातार गोल-गोल घुमाते हुए मसल रहा था, जिससे स्मिता की पूरी काया कामुकता के चरम पर पहुंचने लगी। स्मिता के मुंह से ठेठ देसी अंदाज़ में बेबाक आवाजें निकलने लगीं—"अह्ह्... हां... वैसे ही चूसा करो... पूरा मुंह में भर लो... अपनी इस माँ को आज पूरा खत्म कर दो अर्जुन..."
स्तनों को बुरी तरह से तृप्त करने के बाद, अर्जुन नीचे की तरफ झुका। उसकी उंगलियां स्मिता की नाभि के पास गईं, जहाँ डिज़ाइनर साड़ी का सिल्क-सैटिन फैब्रिक बंधा हुआ था। अर्जुन ने साड़ी के उस पिन को खोला और एक ही झटके में साड़ी को खींच दिया। नीले रंग की वह महंगी साड़ी स्मिता के बदन से सरकती हुई फर्श पर एक ढेर बनकर गिर गई।
अब स्मिता के बदन पर सिर्फ एक गहरे नीले रंग का साटन का पेटीकोट बचा था। नाभि से नीचे बंधे होने के कारण उनकी चिकनी, भारी और थलथलाती हुई पेट की चर्बी और उनकी चौड़ी कमर का उभार पूरी तरह से अर्जुन की नजरों के सामने था। अर्जुन ने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ा और उसे एक झटके में ढीला कर दिया। पेटीकोट भी सरसराता हुआ नीचे गिर गया। स्मिता ने रेखा की सलाह मानकर नीचे पेंटि नहीं पहनी था।
जैसे ही पेटीकोट नीचे गिरा, ५४ साल की स्मिता की वह मुकम्मल, नग्न, प्लस-साइज़ काया कनवेंशन सुइट की रोशनी में पूरी तरह बेपर्दा हो गई। उनकी भारी, गोरी और आपस में रगड़ खाती हुई मांसल जांघें, उनके चौड़े और भारी चूतड़ों का वो विशाल ढलान, और उनकी दोनों जांघों के बीच छिपा हुआ वो घने, सलीके से ट्रिम किए हुए बालों से ढका हुआ उनका सबसे संवेदनशील और गीला हो चुकी यौनि —सब कुछ अर्जुन के सामने था। स्मिता की जांघों के बीच से कामुक रस की कुछ बूंदें रिसकर उनकी चिकनी त्वचा पर चमक रही थीं, जो यह साबित करने के लिए काफी थीं कि वह अंदर से कितनी बुरी तरह से तैयार थीं।
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता को दोनों बगलों से उठाया और उन्हें सीधे उस किंग-साइज़ बेड के बीचों-बीच ले जाकर लिटा दिया। स्मिता जैसे ही रेशमी चादर पर लेटीं, उनके भारी स्तन दोनों तरफ थोड़े फैल गए, जिससे उनकी काया और भी ज्यादा कामुक और ललचाती हुई दिखने लगी।
अर्जुन ने अपने पैंट और कच्छा को भी एक झटके में लात मारकर उतार दिया। उसका ६-इंच का लंबा, कड़ा और लोहे जैसा सख्त हो चुका मर्दाना लंड पूरी तरह से तानकर बाहर आ गया, जो उसकी नसों के उभार के साथ ज़ोर-ज़ोर से फड़क रहा था।
वह घुटनों के बल स्मिता के ऊपर आया। स्मिता ने जैसे ही अर्जुन के उस बड़े और भयानक रूप से कड़े हो चुके लंड को देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सा नशा छा गया। उन्होंने अपनी दोनों भारी, मांसल जांघों को पूरा का पूरा बाहर की तरफ फैला दिया और अपने घुटनों को मोड़ लिया, जिससे उनकी योनि का वो गुलाबी, गीला और सूजा हुआ मुहाना अर्जुन के सामने पूरी तरह से खुल गया।
अर्जुन ने स्मिता की दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ा और उन्हें उनके कंधों की तरफ थोड़ा और भींच दिया। उसका कड़ा, गर्म औजार स्मिता की योनि के बाहरी होंठों पर जाकर टिक गया, जहाँ पहले से ही कामुक रस का गीलापन मौजूद था। अर्जुन ने अपने औजार के सुपारी वाले हिस्से को स्मिता के उस गीले मुहाने पर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा।
"अह्ह्... अर्जुन... अब बर्दाश्त नहीं होता बाबा... डाल दो... पूरा का पूरा अंदर ले लो..." स्मिता ने बेड की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर मुट्ठी में भींच लिया, उनका पूरा बदन काम के मारे कांप रहा था।
"तैयार रहो मां... आज तुम्हें चीरते हुए मैं तुम्हारे अतीत के हर दर्द को मिटा दूंगा," अर्जुन ने कहा और अपनी कमर को एक बेहद धीमे, मध्यम लेकिन पूरी ताकत के साथ आगे की तरफ धकेल दिया।
उस कड़े, मोटे और लोहे जैसे सख्त औजार का अगला हिस्सा जैसे ही स्मिता की ५४ साल की उस तंग, रसीली और बेहद गीली चुत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर दाखिल हुआ, स्मिता के मुंह से एक लंबी, चीख जैसी सिसकारी निकली—"ओह्ह्ह्ह्... आहाहा... अर्जुन!... उफ्फ्... मम्मा रे... पूरा भर गया..."
अर्जुन ने जल्दबाजी नहीं की। आपकी पसंदीदा शैली के मुताबिक, प्रवाह बेहद धीमा और मध्यम था। उसने अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। स्मिता की चुत की गर्म, मांसल दीवारें अर्जुन के उस कड़े मूसल को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थीं। जैसे-जैसे वह अंदर जा रहा था, स्मिता की आँखों से सुख और असीम आनंद के दो बूंद आंसू निकलकर उनके गालों पर ढलक गए। यह उनके जीवन की सबसे मुकम्मल जीत थी—अपने ही जवान बेटे के नीचे, उसकी पूरी मर्दानगी को अपने भीतर समाते हुए।
जब अर्जुन का पूरा का पूरा ६-इंच का मूसल स्मिता के गर्भाशय के मुहाने से जाकर टकरा गया, तो दोनों के बदन एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। अर्जुन के अंडकोष स्मिता के भारी चूतड़ों के निचले हिस्से से जाकर सट गए।
अर्जुन ने कुछ सेकंड के लिए खुद को रोका, और फिर उसने एक धीमा लेकिन बेहद गहरा देसी धक्के लगाना शुरू किया।
*छपक... छपक... छपक...*
कमरे के सन्नाटे में दोनों के बदन के आपस में टकराने की और योनि के भीतर रिसते हुए रसीले पानी की 'चप-चप' की आवाज़ गूंजने लगी। अर्जुन जब अपनी कमर पीछे खींचता, तो स्मिता का पूरा मुहाना बाहर की तरफ खिंच जाता, और जब वह पूरी ताकत से अंदर धकेलता, तो स्मिता के ३६D के दोनों भारी स्तन हवा में ज़ोर-ज़ोर से उछलते। अर्जुन ने ऊपर झुककर उनके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में दबोच लिया और उन्हें बुरी तरह मसलते हुए अपने धक्के की रफ्तार को थोड़ा और गहरा कर दिया।
"आह... हां... अर्जुन... मेरे राजा... वैसे ही... उफ्फ्... तुम्हारे लंड की मोटाई मुझे पागल कर रही है... मारो... और गहरे धक्के मारो..."
स्मिता अब पूरी तरह से होश खो चुकी थीं। उनका परिपक्व बदन अर्जुन के हर एक धक्के को अपनी गहराइयों में सोख रहा था। उनकी भारी जांघें अर्जुन की कमर के दोनों तरफ कसती जा रही थीं।
अर्जुन की सांसें अब घोड़ों जैसी चलने लगी थीं। उसकी पीठ पर पसीने की धाराएं बह रही थीं जो स्मिता की छाती पर गिर रही थीं।
दोनों का यह समागम वासना से परे, एक-दूसरे के प्रति असीम आदर, सुरक्षा और उस असीम प्रेम का प्रतीक था, जिसने स्मिता को एक नई जिंदगी दी थी। अर्जुन ने धक्कों की रफ्तार को थोड़ा और मध्यम लेकिन बेहद भारी कर दिया। हर एक स्ट्रोक स्मिता के भीतर तक तहलका मचा रहा था।
लगभग २० मिनट के इस बेहद raw और सेंसुअल समागम के बाद, स्मिता का पूरा बदन अचानक अकड़ने लगा। उनकी योनि के भीतर की दीवारें अर्जुन के औजार को पागलों की तरह भींचने लगीं। उनका चरम Orgasm बिल्कुल करीब था।
"अर्जुन... मेरा पानी छूट रहा है... ओहोहो... मैं टूट रही हूँ... अर्जुन!... मुझे अपने पानी से भर दो..." स्मिता ने चिल्लाते हुए अर्जुन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
अर्जुन को भी अहसास हो गया कि उसका भी बांध अब टूटने वाला है। उसने आखिरी तीन बेहद गहरे और खूंखार धक्के लगाए, और उसका लंड मां की चुत के बिल्कुल आखिरी छोर तक धंस गया।
अर्जुन ने एक गहरी, मर्दाना दहाड़ मारी—"अह्ह्ह्ह्ह्..."
और उसका कड़ा औजार स्मिता की योनि के भीतर ही फड़कते हुए अपने गर्म, गाढ़े और सफेद मर्दाना वीर्य की पिचकारियां छोड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य की एक-एक बूंद स्मिता के गर्भाशय की दीवारों पर ज्वालामुखी की तरह बरसने लगी। स्मिता ने अपनी आँखें ऊपर की तरफ मूंद लीं और उनका पूरा बदन झटके लेता हुआ चादर पर पूरी तरह से ढीला पड़ गया।
समागम खत्म होने के बाद भी अर्जुन अलग नहीं हुआ। वह स्मिता के उस भारी, रसीले बदन के ऊपर ही लेट गया, उसका औजार अभी भी स्मिता की योनि के भीतर ही फंसा हुआ था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे, हांफते हुए, आँखों में आँखे डाल एक दूजे को चूमते हुए उस मद्धम रोशनी में उस मुकम्मल जीत और असीम प्यार के नशे में पूरी तरह डूब चुके थे।
रेखा का वो तीखा-नमकीन अंदाज़ और स्मिता की वो रहस्यमयी मुस्कान पूरे कमरे में एक नशीली ख़ामोशी छोड़ गई। हवा में वासना की गर्मी अभी भी तैर रही थी, लेकिन कहानी में एकदम से कोई बड़ा तूफ़ान आने से पहले रेखा ने माहौल का रुख़ बदल दिया।
रेखा ने मुस्कुराते हुए अपनी पर्स से एक सुनहरे रंग का लिफ़ाफ़ा निकाला और उसे टी-टेबल पर रख दिया।
"चलो अर्जुन, और मेरी प्यारी दीदी... इस रहस्यमयी मुस्कान का जवाब ढूँढने के लिए मेरे पास अभी और वक़्त नहीं है। मुझे एक ज़रूरी काम से अभी निकलना होगा। लेकिन हाँ, यह एक ख़ास पार्टी का न्योता है। शनिवार रात में हम सब वहाँ मिल रहे हैं, और दीदी... अपना यह जवाब वहीं संभाल कर रखना।"
इतना कहकर रेखा ने अर्जुन को एक आख़िरी तिरछी नज़र से देखा, अपने पल्लू को संभाला और कमरे से बाहर निकल गई।
उसके जाने के बाद कमरे में कोई भड़कता हुआ हंगामा या थ्रिलिंग मोड़ नहीं आया। दोनों मां और बेटे के बीच बस एक अनकही-सी सिहरन शांत हो गई। स्मिता ने एक गहरी सांस ली, लिफ़ाफ़े को उठाया और अर्जुन की तरफ़ देखते हुए अपने कपड़ों को ठीक करने लगी। जो गर्मी रेखा के होने से चरम पर पहुँच रही थी, वो अब एक ठहर चुके सस्पेंस में बदल गई थी—एक ऐसी ख़ामोशी, जो आने वाले तूफ़ान की आहट दे रही थी।
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होटल के विशाल कंवेंशन हॉल की मद्धम, सुनहरी रोशनी में एक अलग ही रसूख और रईसी तैर रही थी। शहर के बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स, बिजनेसमैन और हाई-सोसाइटी के लोग वहाँ जमा थे। कांच के झूमरों से छनकर आती रोशनी सीधे हॉल के फर्श पर बिछे मखमली कालीनों पर बिखर रही थी। लेकिन इस पूरी महफिल की चकाचौंध को मात दे रहा था कंवेंशन हॉल के प्रवेश द्वार पर खड़ा एक जोड़ा, जिसे देखते ही वहाँ मौजूद कई लोगों की बातचीत एक पल के लिए थम गई।
स्मिता आज किसी मल्लिका की तरह अर्जुन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं। उनके बदन पर इस बार कोई पारंपरिक बनारसी साड़ी नहीं थी, बल्कि उन्होंने एक बेहद आलीशान, मॉडर्न और एलीगेंट डिज़ाइनर साड़ी पहनी थी। गहरे आधी रात के नीले रंग (Midnight Blue) की यह शिफॉन-सैटिन ब्लेंड साड़ी उनके बदन पर इस कदर लिपटी थी जैसे पानी उनके जिस्म से बह रहा हो। साड़ी का फैब्रिक इतना महीन और मक्खन जैसा था कि स्मिता का हर एक कर्व, उनकी हर एक हरकत के साथ उभर कर सामने आ रहा था। ५४ साल की उम्र में स्मिता का बदन एक परिपक्व, रसीली और प्लस-साइज़ काया का सबसे मुकम्मल उदाहरण था। उनके भारी चूतड़ और चौड़े कूल्हे उस महीन साड़ी के भीतर अपनी पूरी गोलाई के साथ मटक रहे थे।
साड़ी को नाभि से काफी नीचे, पेल्विक बोन के ठीक पास बांधा गया था, जिससे उनकी मांसल, गोरी और चिकनी कमर का एक बड़ा हिस्सा नग्न होकर चमक रहा था। पेट पर जमी हल्की सी चर्बी की तह उस एलीगेंट साड़ी के घेरे से झांक रही थी, जो उनकी परिपक्व कामुकता को और भी ज्यादा भड़काऊ बना रही थी। साड़ी के पल्लू को उन्होंने एक पतली सी पट्टी के रूप में कंधे पर पिन किया हुआ था, जिससे उनके ३६D के भारी और भरे हुए स्तनों का आधा हिस्सा, उनका गहरा क्लीवेज महफिल की रोशनी में साफ नुमायां हो रहा था। स्तनों का भारीपन ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहा था।
ब्लाउज का डिज़ाइन तो और भी ज्यादा कातिलाना था। साड़ी के मैचिंग का ही स्लीवलेस और पूरी तरह से बैकलेस (बिना पीठ वाला) ब्लाउज था, जो पीछे सिर्फ दो बारीक डोरियों के सहारे टिका हुआ था। स्मिता की पूरी गोरी, थलथलाती हुई चिकनी पीठ पूरी तरह नग्न थी, जिस पर रीढ़ की हड्डी के पास का उभार और कमर की तरफ जाता ढलान किसी भी मर्द के होश उड़ाने के लिए काफी था। उनके गले में हीरों का एक बारीक, चमकीला हार था जो सीधे उनके उरोजों के गहरे उतार-चढ़ाव के मुहाने पर जाकर टिक गया था। अर्जुन के साथ रहने के बाद उनके चेहरे पर जो निखार और आत्मविश्वास आया था, उसने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे।
उनके बगल में खड़ा अर्जुन एक मुकम्मल, गठीला और बेहद रसूखदार मर्द लग रहा था। काले रंग के टक्सीडो सूट, सफेद कड़क शर्ट और सलीके से सेट किए गए बालों में उसका चौड़ा कंधा और मर्दाना कद-काठी स्मिता की परिपक्वता को एक सुरक्षात्मक घेरा दे रही थी। अर्जुन की गहरी, तेज आँखें महफिल में घूम रही थीं, लेकिन उसका पूरा ध्यान, उसकी पूरी चेतना उसके बगल में चल रही अपनी माँ के इस बेहद सम्मोक अवतार पर टिकी हुई थी।
हॉल के एक कोने में, जहाँ मद्धम संगीत बज रहा था, अर्जुन ने हल्के से झुककर स्मिता के कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ीं।
"आज तुम इस महफिल में आग लगाने के इरादे से आई हो क्या, स्मिता?" अर्जुन की भारी और रसीली आवाज़ स्मिता के कानों से होती हुई सीधे उनकी नाभि के नीचे एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई। अर्जुन जब अकेले में या इस तरह के माहौल में होता था, तो वह उन्हें नाम से पुकार कर उस रोमांच को दस गुना बढ़ा देता था।
स्मिता ने अपनी बड़ी-बड़ी, कजरारी आँखों को धीरे से उठाया और अर्जुन की तरफ देखा। उनके होठों पर एक मदहोश करने वाली मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को जानबूझकर थोड़ा और खिसका दिया, जिससे उनके स्तनों का ऊपरी गोरा हिस्सा और भी ज्यादा साफ दिखने लगा।
"क्यों? मेरा यह रूप सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो है, अर्जुन। क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?" स्मिता ने बहुत ही मद्धम और कामुक आवाज़ में कहा, उनकी सांसों की गर्मी अर्जुन के गालों ने महसूस की।
"अच्छा?" अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसका हाथ बहुत ही स्वाभाविक अंदाज़ में स्मिता की खुली, गोरी पीठ पर गया। महफिल की भीड़ से बचते हुए, उसने अपनी बड़ी, गर्म हथेलियों को स्मिता की चिकनी कमर के उस मांसल हिस्से पर रख दिया जहाँ साड़ी बंधी थी।
उसकी उंगलियों ने स्मिता की कमर के मांस को हल्के से भींचा। "मेरा बस चले तो मैं इस भीड़ को यहीं छोड़ दूं और तुम्हें अपनी बाहों में भरकर उस कोने वाले कमरे में ले जाऊं। यह जो तुम्हारी पीठ पूरी नग्न घूम रही है ना, इस पर पूरे शहर के मर्दों की नजरें हैं, और मुझे इस बात से जितनी जलन हो रही है, उतना ही नशा चढ़ रहा है।"
स्मिता के बदन में अर्जुन के इस खुले स्पर्श से एक बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा और अर्जुन की तरफ ढीला छोड़ दिया, जिससे उनका भारी चूतड़ अर्जुन की जांघ से जाकर सट गया। उस महीन साड़ी के आर-पार अर्जुन को अपनी माँ के नितम्बों का भारीपन साफ महसूस हो रहा था। स्मिता ने हल्के से हांफते हुए कहा, "तो फिर रोके किसने रखा है तुम्हें? अपनी इस जागीर पर अपना हक जताओ..."
अभी दोनों के बीच यह साइलेंट कामुक तनाव चल ही रहा था कि अचानक महफिल का माहौल बदल गया।
हॉल के दूसरे छोर से कुछ लोग हंसते-बात करते हुए उनकी तरफ बढ़ रहे थे। अर्जुन की नजरें जैसे ही उन पर पड़ीं, उसकी पकड़ स्मिता की कमर पर थोड़ी और मजबूत हो गई। स्मिता ने अर्जुन की आँखों में अचानक आए उस सख्त बदलाव को भांप लिया। उन्होंने उस दिशा में देखा, और देखते ही उनके चेहरे का खून जैसे जम गया। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके हाथ में पकड़ा हुआ वाइन का ग्लास हल्का सा कांप गया।
सामने स्मिता का एक्स-हस्बैंड (पूर्व पति) खड़ा था। ५८ साल की उम्र का वह शख्स, जो कुछ रईस क्लाइंट्स के साथ हाथ में ड्रिंक लिए बात कर रहा था, अचानक रुक गया। उसकी नज़र जैसे ही स्मिता पर पड़ी, उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई।
वह स्मिता को पहचान ही नहीं पा रहा था। उसने स्मिता को हमेशा एक दबी-कुचली, ढीले-ढाले सूट पहनने वाली और आत्मविश्वास से हीन औरत के रूप में देखा था। वह स्मिता को एक बोझ समझता था, जिसकी वजह से उसने उसे बेसहारा छोड़ दिया था। लेकिन आज... आज उसके सामने जो औरत खड़ी थी, वह किसी रईस घराने की सबसे वांछनीय और कामुक कामिनी लग रही थी। आधी रात के नीले रंग की उस डिज़ाइनर साड़ी में स्मिता का वह भारी, सम्मोहक बदन, वह पूरी खुली गोरी पीठ, हार, और सबसे बढ़कर—वह बेबाक आत्मविश्वास, जो किसी अप्सरा जैसा था।
एक्स-हस्बैंड के भीतर का पुरुष अहंकार और लालच एक साथ जाग उठा। उसने अपने साथ खड़े लोगों को वहीं छोड़ा और बड़े-बड़े कदम बढ़ाता हुआ सीधे स्मिता की तरफ आने लगा।
स्मिता के पैर एक पल के लिए पीछे हटने को हुए। अतीत का वह पुराना डर, वह कमज़ोरी एक सेकंड के लिए उनके ज़हन पर हावी होने लगी। उनका सांस लेना थोड़ा भारी हो गया, जिससे उनके स्तन ब्लाउज के भीतर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगे, जो उनकी घबराहट को साफ बयां कर रहा था।
लेकिन इससे पहले कि अतीत का वो साया स्मिता को छू पाता, अर्जुन एक अभेद्य चट्टान की तरह स्मिता के ठीक आगे आकर खड़ा हो गया। उसका चौड़ा, गठीला बदन स्मिता के सामने एक ढाल बन गया। अर्जुन ने पीछे हाथ ले जाकर स्मिता के दोनों भारी चूतड़ों पर अपना पूरा हाथ रख दिया और उन्हें खींचकर पीछे से अपने टक्सीडो सूट से सटा लिया। इस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर के सारे डर को एक झटके में गायब कर दिया और उसकी जगह एक अजीब सी कामुक उत्तेजना ने ले ली।
एक्स-हस्बैंड अर्जुन के सामने आकर रुका। उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा, और फिर अर्जुन के पीछे से झांक रही स्मिता पर अपनी नजरें गड़ाईं। उसकी आँखों में वासना और हैरानी का एक गंदा मिश्रण था।
"स्मिता? तुम... यहाँ?" एक्स-हस्बैंड की आवाज़ में एक नकली सा अधिकार था। "विश्वास नहीं होता। यह कैसा रूप बना रखा है तुमने? इस उम्र में ऐसी साड़ी... और यह बैकलेस ब्लाउज? तुम इस तरह..."
इससे पहले कि वह अपना वाक्य पूरा कर पाता, अर्जुन ने अपनी गहरी, भारी और रौबदार मर्दाना आवाज़ में उसे टोक दिया। हॉल के उस कोने में अर्जुन का रसूख साफ महसूस हो रहा था।
"अपनी ज़बान को लगाम दो, मिस्टर," अर्जुन की आँखों में एक ठंडी आग थी, जिसने एक्स-हस्बैंड को एक कदम पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। "अपनी हैसियत में रहकर बात करो। अब तुम्हारी उस घटिया सोच और उस अतीत से हम बहुत आगे निकल चुके हैं, जहाँ तुम मां को कमज़ोर समझते थे।"
अर्जुन के पिता का चेहरा गुस्से और अपमान से लाल हो गया। उसने स्मिता की तरफ देखकर चिल्लाने की कोशिश की, "स्मिता! यह अर्जुन क्या कह रहा है और तुम इसके दम पर उड़ रही हो? भूल गई कि तुम क्या थीं? मेरे छोड़ने के बाद तुम्हारी क्या हैसियत रह गई थी?"
स्मिता, जो अर्जुन के ठीक पीछे खड़ी थीं, उन्होंने अर्जुन की चौड़ी पीठ पर अपना एक गोरा हाथ रखा। अर्जुन की शर्ट के कपड़े के नीचे से उन्हें उसके कड़े मसल्स महसूस हो रहे थे। स्मिता ने अपनी साड़ी के पल्लू को और सलीके से संभाला, अपने भारी उरोजों को तानकर अर्जुन के पीछे से थोड़ा आगे आईं। अब उनके चेहरे पर कोई डर नहीं था, सिर्फ एक विजेता की मुस्कान थी।
"हैसियत?" स्मिता की आवाज़ पूरी महफिल में मद्धम लेकिन इतनी साफ थी कि एक्स-हस्बैंड के कान बजने लगे। "मेरी हैसियत यह है कि आज मैं उस मुकाम पर हूँ जहाँ तुम जैसे लोग सिर्फ अपॉइंटमेंट लेकर आ सकते हैं। तुमने मुझे अपनी कमज़ोरी समझा था ना? लेकिन मेरे बेटे ने..." उन्होंने बड़े गर्व से अर्जुन की तरफ देखा, "...इस मर्द ने मुझे मेरी असली ताकत का अहसास कराया है। अब तुम मेरे लिए सिर्फ एक बीता हुआ कल हो, जिसकी कोई कीमत नहीं है।"
इसी बीच रेखा, जो कुछ दूर खड़े होकर यह सारा तमाशा देख रही थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए बेहद मटकती हुई वहाँ पहुंच गईं।
रेखा हमेशा की तरह बोल्ड, चुलबुली और हाई-क्लास लग रही थीं।
"अरे... तुम अभी तक यहीं मँडरा रहे हो?" रेखा ने एक्स-हस्बैंड को ऊपर से नीचे देखते हुए एक तीखा तंज कसा। "देखो भाई, अपनी औकात के हिसाब से किसी कोने में जाकर मुफ्त की ड्रिंक एंजॉय करो। हमारी स्मिता और अर्जुन का वक्त बहुत कीमती है। और वैसे भी, आज स्मिता का यह रूप देखने के लिए तुम्हारी आँखें बहुत छोटी हैं।" उन्होंने हंसते हुए अर्जुन की तरफ देखा।
एक्स-हस्बैंड के पास अब वहाँ रुकने का कोई बहाना नहीं था। आसपास के कुछ और लोगों की नजरें भी अब उनकी तरफ मुड़ने लगी थीं। अपनी पूरी बेइज्जती महसूस करते हुए, वह पैर पटकता हुआ महफिल के दूसरे छोर की तरफ भाग गया।
उसके जाते ही स्मिता ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उनका पूरा बदन उत्तेजना और एक अजीब सी जीत के अहसास से कांप रहा था। उनके स्तन ब्लाउज के भीतर इतनी ज़ोर से धड़क रहे थे कि उनके बीच का क्लीवेज तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था। पूर्व पति के सामने अर्जुन के इस मर्दाना रसूख, उसकी पजेसिवनेस और उस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर कामुकता की एक ऐसी आग लगा दी थी जो अब शांत होने वाली नहीं थी।
अर्जुन ने मुड़कर स्मिता की तरफ देखा। स्मिता की आँखों में छलकती हुई दीवानगी और उनके हांफते हुए होठों को देखकर वह समझ गया कि अब यहाँ एक पल भी रुकना मुमकिन नहीं है। उसने रेखा मौसी की तरफ देखा, जिन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ उन्हें आँख मारी।
"चलो अर्जुन... इसे यहाँ से ले जाओ," रेखा ने स्मिता की नग्न, गोरी पीठ पर हल्के से थपकी देते हुए मद्धम आवाज़ में कहा। "इसकी छाती की यह धड़कन और बदन की यह गर्मी सिर्फ तुम्हारे कमरे में ही शांत हो सकती है।"
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता का हाथ अपने मजबूत हाथ में थाम लिया। स्मिता की साड़ी का पल्लू हल्का सा लहराया, और वे दोनों महफिल की चकाचौंध को पीछे छोड़ते हुए, होटल के अपने कमरे की तरफ बढ़ गए, जहाँ उनकी तीव्र इच्छा का एक नया और बेहद raw इतिहास लिखा जाने वाला था।
होटल के शोर-शराबे और कंवेंशन हॉल की तीखी रोशनी को पीछे छोड़ते हुए जब अर्जुन और स्मिता लिफ्ट से होते हुए २४वें माले के रूम की तरफ बढ़ रहे थे, तो कॉरिडोर के सन्नाटे में स्मिता की सैंडल की खट-खट और उनकी भारी साड़ियों की सरसराहट साफ गूंज रही थी। स्मिता की सांसें अभी भी तेज थीं। कंवेंशन हॉल में एक्स-हस्बैंड का वह अचानक सामना और उसके बाद अर्जुन का एक खूंखार, रसूखदार मर्द की तरह उनके सामने तनकर खड़े हो जाना—इस पूरे वाकये ने स्मिता के भीतर एक ऐसा रोमांच भर दिया था जिसकी तपिश उनके पूरे बदन में महसूस हो रही थी।
अर्जुन ने सुइट का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड स्वैप किया और भारी नक्काशीदार दरवाज़ा एक हल्के से क्लिक के साथ खुल गया। भीतर की दुनिया पूरी तरह से मद्धम, सुनहरी और मखमली रोशनी में डूबी हुई थी। किंग-साइज़ बेड पर रेशमी चादरें बिछी थीं और खिड़की से बाहर मुंबई की गगनचुंबी इमारतों की रोशनियां किसी मुकम्मल पेंटिंग जैसी लग रही थीं। रेखा मौसी पहले ही अपने हाथ में वाइन की बोतल लिए सुइट के आलीशान लिविंग एरिया में दाखिल हो चुकी थीं।
स्मिता जैसे ही कमरे के भीतर आईं, उन्होंने एक लंबी और गहरी सांस ली। उत्तेजना के मारे उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा हल्का सा संकुचित हो रहा था, और आधी रात के नीले रंग की उस महीन सैटिन-शिफॉन साड़ी के भीतर उनके भारी उरोज ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। ब्लाउज की बैकलेस डिज़ाइन की वजह से उनकी पूरी गोरी, मांसल पीठ पर पसीने की कुछ बारीक बूंदें चमक रही थीं, जो कंवेंशन हॉल के उस दिमागी तनाव और दबी हुई कामुकता का नतीजा थीं।
अर्जुन ने कोट के बटन खोले और टक्सीडो जैकेट को उतारकर सोफे पर फेंक दिया। उसकी सफेद कड़क शर्ट के ऊपर के दो बटन पहले ही खुले थे, जिससे उसकी चौड़ी मर्दाना छाती के घने बाल साफ झांक रहे थे। उसकी भूखी और दीवानी नजरें अपनी माँ की उस भारी, ललचाती हुई काया पर टिक गईं।
तब तक रेखा मौसी आई और उसने मेज पर कांच के तीन क्रिस्टल ग्लास रखे और वाइन उड़ेलते हुए एक गहरी, रसभरी हंसी हंसी। वह स्मिता के करीब आईं, जिनकी पीठ पूरी तरह नग्न थी। रेखा ने अपनी ठंडी उंगलियों को स्मिता की उस थलथलाती हुई, गोरी और चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे तक फेरा। स्मिता के मुंह से एक ठंडी सी सिसकारी निकल गई।
"ओह स्मिता... सच कहूं तो आज उस बुड्ढे की शक्ल देखने लायक थी!" रेखा ने वाइन का ग्लास स्मिता के हाथ में थामते हुए कहा।
"जिस औरत को उसने अपनी जिंदगी का सबसे बेकार हिस्सा समझकर छोड़ दिया था, आज उसे इतने आलीशान लिबास में, फिर से चढ़ी हुई जवानी के साथ देखकर उसकी छाती पर जो सांप लोटा है ना... आहा! मुझे तो मजा ही आ गया।"
स्मिता ने वाइन का एक घूंट लिया, जिससे उनके लाल होठों पर वाइन की एक चमकीली परत जम गई। उन्होंने अर्जुन की तरफ देखा, जो अपनी गहरी आँखों से उन्हें लगभग निगल जाने वाली निगाहों से घूर रहा था।
"सब अर्जुन और तेरी बदौलत है, रेखा..." स्मिता की आवाज़ में एक अजीब सी लचक और गीलापन था। "अगर आज यह मेरे आगे न खड़ा होता, तो शायद अतीत का वो डर मुझे फिर से कमज़ोर कर देता। लेकिन इसके स्पर्श ने..."
"मुझे पता है, मुझे सब पता है," रेखा ने चुलबुले अंदाज़ में स्मिता की बात काटी और अर्जुन के पास जाकर उसकी चौड़ी छाती पर हाथ रखा। "अर्जुन, तेरी यह माँ ना... आज सच में किसी रसीली जागीर जैसी लग रही है। इसकी यह नाभि के नीचे बंधी साड़ी, यह पूरी खुली हुई गोरी पीठ, और यह भारी मटकर चलते कूल्हे... कसम से, हॉल में जितने मर्द थे, सबकी राल टपक रही थी। लेकिन मैं जानती हूँ कि इस ३६D के खजाने पर सिर्फ और सिर्फ मेरे इस शेर का हक है।"
रेखा ने आगे बढ़कर स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी दो बारीक डोरियों में से ऊपर वाली डोरी को हल्के से खींचकर खोल दिया।
डोरियां खुलते ही स्मिता का बैकलेस ब्लाउज कंधों के पास से हल्का सा ढीला हो गया, जिससे उनके भारी स्तनों का ऊपरी उभार और क्लीवेज और भी ज्यादा बेपर्दा हो गया। स्मिता ने शर्म और उत्तेजना के मारे अपने हाथ से पल्लू को छाती पर भींच लिया।
"रेखा... यह तुम क्या कर रही हो?" स्मिता ने लजाते हुए कहा।
"अरे, तुम्हें आराम दे रही हूँ मेरी जान," रेखा ने हंसते हुए अपनी पर्स उठाई और दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ा दिए। "और वैसे भी, अब मेरा काम यहाँ खत्म होता है। इस शेर की आँखों की भूख मुझसे देखी नहीं जा रही। तुम दोनों इस मुकम्मल जीत का जश्न मनाओ। मैं आज रात अपने उस जुहू वाले फ्लैट पर रुक रही हूँ, वहाँ एक जरूरी क्लाइंट मीटिंग भी है सुबह। इसलिए यह पूरा सुइट, यह मद्धम रोशनी और तुम्हारी यह रसीली माँ... सब सिर्फ तुम्हारे हवाले है, अर्जुन। पूरा समय लो, और आज इसे घुटनों पर ला दो।"
रेखा ने अर्जुन को एक शरारती लुक दिया, स्मिता के गाल को हल्के से चूमा और बड़े ही सलीके से सुइट का भारी दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया।
कमरे में अब सिर्फ एक गहरा, भारी सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ दो इंसानों की तेज होती सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।
दरवाज़ा बंद होते ही कमरे का तापमान जैसे अचानक कई डिग्री बढ़ गया। अर्जुन सोफे के पास स्थिर खड़ा था, उसकी बाजुओं की नसें कड़क शर्ट के भीतर उभर आई थीं। स्मिता कमरे के बीचों-बीच खड़ी थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए। उनके ब्लाउज की ऊपरी डोरी खुली होने के कारण नीली सैटिन की पतली पट्टी उनके गोरे, गोल कंधे से फिसलकर बाजू पर आ गिरी थी। ३६D के दोनों भारी, मांसल स्तन उस ढीले पड़ चुके ब्लाउज के भीतर कड़े हो चुके निप्पलों के साथ साफ मटक रहे थे।
अर्जुन ने बिना एक शब्द बोले अपनी शर्ट के बाकी बचे बटन भी झटके से खोल दिए और उसे उतारकर फेंक दिया। उसका कड़ा, सांवला और गठीला मर्दाना बदन, जिस पर छह-फिट के कद की धमक थी, स्मिता के सामने पूरी तरह नग्न-अर्धशग्न खड़ा था। वह बड़े, धीमे लेकिन भारी कदमों से स्मिता की तरफ बढ़ा।
स्मिता का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उनके गले की नसें साफ फड़कती हुई दिख रही थीं। जैसे ही अर्जुन उनके बिल्कुल करीब आया, स्मिता ने डर से नहीं, बल्कि असीम इच्छा के मारे अपनी आँखें मूंद लीं। अर्जुन ने उनके हाथ से वाइन का ग्लास लिया और उसे साइड टेबल पर रख दिया।
अगले ही पल, अर्जुन के दोनों बड़े और खुरदरे हाथों ने स्मिता की उस आधी खुली, गोरी और मखमली पीठ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने स्मिता को अपनी तरफ खींचा और एक झटके में उन्हें पीछे की दीवार से सटा दिया। स्मिता के मुंह से एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली—"अह्ह्... अर्जुन!"
अर्जुन की मर्दाना सांसों की गरमाहट स्मिता के पूरे चेहरे पर फैल गई। अर्जुन ने अपनी एक जांघ को स्मिता की दोनों टांगों के बीच, उनकी साड़ी के घेरे को चीरते हुए अंदर घुसा दिया। शिफॉन की वह महीन साड़ी दोनों के बदन के बीच एक बारीक परत मात्र रह गई थी। अर्जुन की कड़ी जांघ जैसे ही स्मिता के पेटीकोट के अंदर छिपी हुई उनकी रसीली, भारी जांघों और उनके संवेदनशील ऊंचे मुहाने (योनि) से टकराई, स्मिता का पूरा बदन धनुष की तरह मुड़ गया। उन्होंने अपने दोनों गोरे हाथ अर्जुन के कड़े कंधों पर टिका दिए।
"अर्जुन... प्लीज... अब और तड़पाओ मत... आज मैं अंदर से पूरी जल रही हूँ..." स्मिता ने अपनी आँखें खोलकर बेहद कामुक, गीली निगाहों से अपने जवान बेटे के चेहरे को देखा। उनकी आँखों में केवल और केवल असीम समर्पण और तीव्र वासना का नशा था।
अर्जुन ने जवाब में स्मिता के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भींचा और उनके रसीले, लिपस्टिक से सने होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई धीमा चुंबन नहीं था, बल्कि एक भूखे मर्द का अपनी पसंदीदा जागीर पर किया गया पहला हमला था। अर्जुन स्मिता के निचले होंठ को अपने दांतों के बीच दबाकर चूसने लगा, और उसकी जीभ स्मिता के मुंह के भीतर जाकर उनकी लार के रस को पीने लगी। स्मिता के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां अर्जुन के मुंह के भीतर ही घुट कर रह गईं—"उम्मम्... आह्... अर्जुन... मेरे बच्चे..."
चूमते हुए ही अर्जुन का दायां हाथ स्मिता के कंधे से सरकते हुए उनकी छाती पर आया। उसने साड़ी के उस पतले पल्लू को एक ही झटके में कंधे से नीचे गिरा दिया। अब स्मिता का क्लीवेज और उनके भारी स्तनों का दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह आज़ाद हो चुका था। अर्जुन ने अपने बड़े, मजबूत हाथ से स्मिता के बाएं स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ही पूरा अपनी मुट्ठी में भर लिया और उसे बुरी तरह से भींचने लगा।
स्मिता का भारी स्तन अर्जुन की उंगलियों के बीच दबकर अपनी गोलाई बदलने लगा। ५४ साल की परिपक्वता के कारण उनके स्तनों में जो एक भारी, थलथलाता हुआ मांसल खिंचाव था, वह अर्जुन की मर्दाना ताकत के सामने पूरी तरह पिघल रहा था।
"आह्ह्ह्... अर्जुन... धीरे... उफ्फ्... बहुत कसकर भींच रहे हो..." स्मिता ने सिसकते हुए अपने सिर को पीछे दीवार पर टिका दिया, उनकी गर्दन की सुराहीदार नसें तन गईं।
अर्जुन ने उनके होठों को छोड़ा और नीचे की तरफ बढ़ा। उसने स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी नीचे वाली आखिरी डोरी को भी एक झटके में खींचकर खोल दिया। डोरियां खुलते ही वह आधी रात के नीले रंग का डिज़ाइनर ब्लाउज आगे से पूरी तरह खुल गया। अर्जुन ने ब्लाउज के दोनों पल्लों को दोनों तरफ से हटा दिया।
कमरे की मद्धम पीली रोशनी में स्मिता का ३६D का वो आलीशान, गोरा और बेहद रसीला सीना पूरी तरह से नग्न होकर अर्जुन के सामने आ गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके स्तनों का भारीपन और उनकी गोलाई किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थी।
स्तनों के नीचे का हिस्सा भारी होने के कारण थोड़ा झुका हुआ था, लेकिन उनके कड़े, बड़े और भूरे रंग के निप्पल उत्तेजना के मारे पूरी तरह से कड़े होकर तीर की तरह बाहर की ओर तने हुए थे। उरोजों की त्वचा इतनी साफ और गोरी थी कि उन पर नीली नसें साफ दिखाई दे रही थीं।
अर्जुन इस असीम खजाने को देखकर एक पल के लिए थमा, उसकी सांसें और भारी हो गईं। उसने अपने दोनों हाथों से स्मिता की उन भारी छातियों को नीचे से थामा, जैसे कोई पुजारी किसी कीमती मूर्ति को संभालता है। उसने अपने मुंह को आगे बढ़ाया और स्मिता के बाएं स्तन के उस बड़े, भूरे निप्पल को पूरा का पूरा अपने मुंह के भीतर भर लिया।
"ओह्ह्ह्... माई गॉड... अर्जुन!... आहाहा..." स्मिता के पैर हवा में डगमगाए। उन्होंने अर्जुन के घने बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसकी खोपड़ी को अपनी छाती पर और कसकर भींच लिया।
अर्जुन अपनी जीभ से उस कड़े निप्पल को चारों तरफ से चाटने लगा और फिर उसे अपने दांतों के बीच हल्का सा दबाकर चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा दूध पी रहा हो। उसका दूसरा हाथ स्मिता के दाएं स्तन को लगातार गोल-गोल घुमाते हुए मसल रहा था, जिससे स्मिता की पूरी काया कामुकता के चरम पर पहुंचने लगी। स्मिता के मुंह से ठेठ देसी अंदाज़ में बेबाक आवाजें निकलने लगीं—"अह्ह्... हां... वैसे ही चूसा करो... पूरा मुंह में भर लो... अपनी इस माँ को आज पूरा खत्म कर दो अर्जुन..."
स्तनों को बुरी तरह से तृप्त करने के बाद, अर्जुन नीचे की तरफ झुका। उसकी उंगलियां स्मिता की नाभि के पास गईं, जहाँ डिज़ाइनर साड़ी का सिल्क-सैटिन फैब्रिक बंधा हुआ था। अर्जुन ने साड़ी के उस पिन को खोला और एक ही झटके में साड़ी को खींच दिया। नीले रंग की वह महंगी साड़ी स्मिता के बदन से सरकती हुई फर्श पर एक ढेर बनकर गिर गई।
अब स्मिता के बदन पर सिर्फ एक गहरे नीले रंग का साटन का पेटीकोट बचा था। नाभि से नीचे बंधे होने के कारण उनकी चिकनी, भारी और थलथलाती हुई पेट की चर्बी और उनकी चौड़ी कमर का उभार पूरी तरह से अर्जुन की नजरों के सामने था। अर्जुन ने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ा और उसे एक झटके में ढीला कर दिया। पेटीकोट भी सरसराता हुआ नीचे गिर गया। स्मिता ने रेखा की सलाह मानकर नीचे पेंटि नहीं पहनी था।
जैसे ही पेटीकोट नीचे गिरा, ५४ साल की स्मिता की वह मुकम्मल, नग्न, प्लस-साइज़ काया कनवेंशन सुइट की रोशनी में पूरी तरह बेपर्दा हो गई। उनकी भारी, गोरी और आपस में रगड़ खाती हुई मांसल जांघें, उनके चौड़े और भारी चूतड़ों का वो विशाल ढलान, और उनकी दोनों जांघों के बीच छिपा हुआ वो घने, सलीके से ट्रिम किए हुए बालों से ढका हुआ उनका सबसे संवेदनशील और गीला हो चुकी यौनि —सब कुछ अर्जुन के सामने था। स्मिता की जांघों के बीच से कामुक रस की कुछ बूंदें रिसकर उनकी चिकनी त्वचा पर चमक रही थीं, जो यह साबित करने के लिए काफी थीं कि वह अंदर से कितनी बुरी तरह से तैयार थीं।
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता को दोनों बगलों से उठाया और उन्हें सीधे उस किंग-साइज़ बेड के बीचों-बीच ले जाकर लिटा दिया। स्मिता जैसे ही रेशमी चादर पर लेटीं, उनके भारी स्तन दोनों तरफ थोड़े फैल गए, जिससे उनकी काया और भी ज्यादा कामुक और ललचाती हुई दिखने लगी।
अर्जुन ने अपने पैंट और कच्छा को भी एक झटके में लात मारकर उतार दिया। उसका ६-इंच का लंबा, कड़ा और लोहे जैसा सख्त हो चुका मर्दाना लंड पूरी तरह से तानकर बाहर आ गया, जो उसकी नसों के उभार के साथ ज़ोर-ज़ोर से फड़क रहा था।
वह घुटनों के बल स्मिता के ऊपर आया। स्मिता ने जैसे ही अर्जुन के उस बड़े और भयानक रूप से कड़े हो चुके लंड को देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सा नशा छा गया। उन्होंने अपनी दोनों भारी, मांसल जांघों को पूरा का पूरा बाहर की तरफ फैला दिया और अपने घुटनों को मोड़ लिया, जिससे उनकी योनि का वो गुलाबी, गीला और सूजा हुआ मुहाना अर्जुन के सामने पूरी तरह से खुल गया।
अर्जुन ने स्मिता की दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ा और उन्हें उनके कंधों की तरफ थोड़ा और भींच दिया। उसका कड़ा, गर्म औजार स्मिता की योनि के बाहरी होंठों पर जाकर टिक गया, जहाँ पहले से ही कामुक रस का गीलापन मौजूद था। अर्जुन ने अपने औजार के सुपारी वाले हिस्से को स्मिता के उस गीले मुहाने पर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा।
"अह्ह्... अर्जुन... अब बर्दाश्त नहीं होता बाबा... डाल दो... पूरा का पूरा अंदर ले लो..." स्मिता ने बेड की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर मुट्ठी में भींच लिया, उनका पूरा बदन काम के मारे कांप रहा था।
"तैयार रहो मां... आज तुम्हें चीरते हुए मैं तुम्हारे अतीत के हर दर्द को मिटा दूंगा," अर्जुन ने कहा और अपनी कमर को एक बेहद धीमे, मध्यम लेकिन पूरी ताकत के साथ आगे की तरफ धकेल दिया।
उस कड़े, मोटे और लोहे जैसे सख्त औजार का अगला हिस्सा जैसे ही स्मिता की ५४ साल की उस तंग, रसीली और बेहद गीली चुत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर दाखिल हुआ, स्मिता के मुंह से एक लंबी, चीख जैसी सिसकारी निकली—"ओह्ह्ह्ह्... आहाहा... अर्जुन!... उफ्फ्... मम्मा रे... पूरा भर गया..."
अर्जुन ने जल्दबाजी नहीं की। आपकी पसंदीदा शैली के मुताबिक, प्रवाह बेहद धीमा और मध्यम था। उसने अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। स्मिता की चुत की गर्म, मांसल दीवारें अर्जुन के उस कड़े मूसल को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थीं। जैसे-जैसे वह अंदर जा रहा था, स्मिता की आँखों से सुख और असीम आनंद के दो बूंद आंसू निकलकर उनके गालों पर ढलक गए। यह उनके जीवन की सबसे मुकम्मल जीत थी—अपने ही जवान बेटे के नीचे, उसकी पूरी मर्दानगी को अपने भीतर समाते हुए।
जब अर्जुन का पूरा का पूरा ६-इंच का मूसल स्मिता के गर्भाशय के मुहाने से जाकर टकरा गया, तो दोनों के बदन एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। अर्जुन के अंडकोष स्मिता के भारी चूतड़ों के निचले हिस्से से जाकर सट गए।
अर्जुन ने कुछ सेकंड के लिए खुद को रोका, और फिर उसने एक धीमा लेकिन बेहद गहरा देसी धक्के लगाना शुरू किया।
*छपक... छपक... छपक...*
कमरे के सन्नाटे में दोनों के बदन के आपस में टकराने की और योनि के भीतर रिसते हुए रसीले पानी की 'चप-चप' की आवाज़ गूंजने लगी। अर्जुन जब अपनी कमर पीछे खींचता, तो स्मिता का पूरा मुहाना बाहर की तरफ खिंच जाता, और जब वह पूरी ताकत से अंदर धकेलता, तो स्मिता के ३६D के दोनों भारी स्तन हवा में ज़ोर-ज़ोर से उछलते। अर्जुन ने ऊपर झुककर उनके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में दबोच लिया और उन्हें बुरी तरह मसलते हुए अपने धक्के की रफ्तार को थोड़ा और गहरा कर दिया।
"आह... हां... अर्जुन... मेरे राजा... वैसे ही... उफ्फ्... तुम्हारे लंड की मोटाई मुझे पागल कर रही है... मारो... और गहरे धक्के मारो..."
स्मिता अब पूरी तरह से होश खो चुकी थीं। उनका परिपक्व बदन अर्जुन के हर एक धक्के को अपनी गहराइयों में सोख रहा था। उनकी भारी जांघें अर्जुन की कमर के दोनों तरफ कसती जा रही थीं।
अर्जुन की सांसें अब घोड़ों जैसी चलने लगी थीं। उसकी पीठ पर पसीने की धाराएं बह रही थीं जो स्मिता की छाती पर गिर रही थीं।
दोनों का यह समागम वासना से परे, एक-दूसरे के प्रति असीम आदर, सुरक्षा और उस असीम प्रेम का प्रतीक था, जिसने स्मिता को एक नई जिंदगी दी थी। अर्जुन ने धक्कों की रफ्तार को थोड़ा और मध्यम लेकिन बेहद भारी कर दिया। हर एक स्ट्रोक स्मिता के भीतर तक तहलका मचा रहा था।
लगभग २० मिनट के इस बेहद raw और सेंसुअल समागम के बाद, स्मिता का पूरा बदन अचानक अकड़ने लगा। उनकी योनि के भीतर की दीवारें अर्जुन के औजार को पागलों की तरह भींचने लगीं। उनका चरम Orgasm बिल्कुल करीब था।
"अर्जुन... मेरा पानी छूट रहा है... ओहोहो... मैं टूट रही हूँ... अर्जुन!... मुझे अपने पानी से भर दो..." स्मिता ने चिल्लाते हुए अर्जुन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
अर्जुन को भी अहसास हो गया कि उसका भी बांध अब टूटने वाला है। उसने आखिरी तीन बेहद गहरे और खूंखार धक्के लगाए, और उसका लंड मां की चुत के बिल्कुल आखिरी छोर तक धंस गया।
अर्जुन ने एक गहरी, मर्दाना दहाड़ मारी—"अह्ह्ह्ह्ह्..."
और उसका कड़ा औजार स्मिता की योनि के भीतर ही फड़कते हुए अपने गर्म, गाढ़े और सफेद मर्दाना वीर्य की पिचकारियां छोड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य की एक-एक बूंद स्मिता के गर्भाशय की दीवारों पर ज्वालामुखी की तरह बरसने लगी। स्मिता ने अपनी आँखें ऊपर की तरफ मूंद लीं और उनका पूरा बदन झटके लेता हुआ चादर पर पूरी तरह से ढीला पड़ गया।
समागम खत्म होने के बाद भी अर्जुन अलग नहीं हुआ। वह स्मिता के उस भारी, रसीले बदन के ऊपर ही लेट गया, उसका औजार अभी भी स्मिता की योनि के भीतर ही फंसा हुआ था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे, हांफते हुए, आँखों में आँखे डाल एक दूजे को चूमते हुए उस मद्धम रोशनी में उस मुकम्मल जीत और असीम प्यार के नशे में पूरी तरह डूब चुके थे।
रेखा का वो तीखा-नमकीन अंदाज़ और स्मिता की वो रहस्यमयी मुस्कान पूरे कमरे में एक नशीली ख़ामोशी छोड़ गई। हवा में वासना की गर्मी अभी भी तैर रही थी, लेकिन कहानी में एकदम से कोई बड़ा तूफ़ान आने से पहले रेखा ने माहौल का रुख़ बदल दिया।
रेखा ने मुस्कुराते हुए अपनी पर्स से एक सुनहरे रंग का लिफ़ाफ़ा निकाला और उसे टी-टेबल पर रख दिया।
"चलो अर्जुन, और मेरी प्यारी दीदी... इस रहस्यमयी मुस्कान का जवाब ढूँढने के लिए मेरे पास अभी और वक़्त नहीं है। मुझे एक ज़रूरी काम से अभी निकलना होगा। लेकिन हाँ, यह एक ख़ास पार्टी का न्योता है। शनिवार रात में हम सब वहाँ मिल रहे हैं, और दीदी... अपना यह जवाब वहीं संभाल कर रखना।"
इतना कहकर रेखा ने अर्जुन को एक आख़िरी तिरछी नज़र से देखा, अपने पल्लू को संभाला और कमरे से बाहर निकल गई।
उसके जाने के बाद कमरे में कोई भड़कता हुआ हंगामा या थ्रिलिंग मोड़ नहीं आया। दोनों मां और बेटे के बीच बस एक अनकही-सी सिहरन शांत हो गई। स्मिता ने एक गहरी सांस ली, लिफ़ाफ़े को उठाया और अर्जुन की तरफ़ देखते हुए अपने कपड़ों को ठीक करने लगी। जो गर्मी रेखा के होने से चरम पर पहुँच रही थी, वो अब एक ठहर चुके सस्पेंस में बदल गई थी—एक ऐसी ख़ामोशी, जो आने वाले तूफ़ान की आहट दे रही थी।
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होटल के विशाल कंवेंशन हॉल की मद्धम, सुनहरी रोशनी में एक अलग ही रसूख और रईसी तैर रही थी। शहर के बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स, बिजनेसमैन और हाई-सोसाइटी के लोग वहाँ जमा थे। कांच के झूमरों से छनकर आती रोशनी सीधे हॉल के फर्श पर बिछे मखमली कालीनों पर बिखर रही थी। लेकिन इस पूरी महफिल की चकाचौंध को मात दे रहा था कंवेंशन हॉल के प्रवेश द्वार पर खड़ा एक जोड़ा, जिसे देखते ही वहाँ मौजूद कई लोगों की बातचीत एक पल के लिए थम गई।
स्मिता आज किसी मल्लिका की तरह अर्जुन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं। उनके बदन पर इस बार कोई पारंपरिक बनारसी साड़ी नहीं थी, बल्कि उन्होंने एक बेहद आलीशान, मॉडर्न और एलीगेंट डिज़ाइनर साड़ी पहनी थी। गहरे आधी रात के नीले रंग (Midnight Blue) की यह शिफॉन-सैटिन ब्लेंड साड़ी उनके बदन पर इस कदर लिपटी थी जैसे पानी उनके जिस्म से बह रहा हो। साड़ी का फैब्रिक इतना महीन और मक्खन जैसा था कि स्मिता का हर एक कर्व, उनकी हर एक हरकत के साथ उभर कर सामने आ रहा था। ५४ साल की उम्र में स्मिता का बदन एक परिपक्व, रसीली और प्लस-साइज़ काया का सबसे मुकम्मल उदाहरण था। उनके भारी चूतड़ और चौड़े कूल्हे उस महीन साड़ी के भीतर अपनी पूरी गोलाई के साथ मटक रहे थे।
साड़ी को नाभि से काफी नीचे, पेल्विक बोन के ठीक पास बांधा गया था, जिससे उनकी मांसल, गोरी और चिकनी कमर का एक बड़ा हिस्सा नग्न होकर चमक रहा था। पेट पर जमी हल्की सी चर्बी की तह उस एलीगेंट साड़ी के घेरे से झांक रही थी, जो उनकी परिपक्व कामुकता को और भी ज्यादा भड़काऊ बना रही थी। साड़ी के पल्लू को उन्होंने एक पतली सी पट्टी के रूप में कंधे पर पिन किया हुआ था, जिससे उनके ३६D के भारी और भरे हुए स्तनों का आधा हिस्सा, उनका गहरा क्लीवेज महफिल की रोशनी में साफ नुमायां हो रहा था। स्तनों का भारीपन ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहा था।
ब्लाउज का डिज़ाइन तो और भी ज्यादा कातिलाना था। साड़ी के मैचिंग का ही स्लीवलेस और पूरी तरह से बैकलेस (बिना पीठ वाला) ब्लाउज था, जो पीछे सिर्फ दो बारीक डोरियों के सहारे टिका हुआ था। स्मिता की पूरी गोरी, थलथलाती हुई चिकनी पीठ पूरी तरह नग्न थी, जिस पर रीढ़ की हड्डी के पास का उभार और कमर की तरफ जाता ढलान किसी भी मर्द के होश उड़ाने के लिए काफी था। उनके गले में हीरों का एक बारीक, चमकीला हार था जो सीधे उनके उरोजों के गहरे उतार-चढ़ाव के मुहाने पर जाकर टिक गया था। अर्जुन के साथ रहने के बाद उनके चेहरे पर जो निखार और आत्मविश्वास आया था, उसने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे।
उनके बगल में खड़ा अर्जुन एक मुकम्मल, गठीला और बेहद रसूखदार मर्द लग रहा था। काले रंग के टक्सीडो सूट, सफेद कड़क शर्ट और सलीके से सेट किए गए बालों में उसका चौड़ा कंधा और मर्दाना कद-काठी स्मिता की परिपक्वता को एक सुरक्षात्मक घेरा दे रही थी। अर्जुन की गहरी, तेज आँखें महफिल में घूम रही थीं, लेकिन उसका पूरा ध्यान, उसकी पूरी चेतना उसके बगल में चल रही अपनी माँ के इस बेहद सम्मोक अवतार पर टिकी हुई थी।
हॉल के एक कोने में, जहाँ मद्धम संगीत बज रहा था, अर्जुन ने हल्के से झुककर स्मिता के कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ीं।
"आज तुम इस महफिल में आग लगाने के इरादे से आई हो क्या, स्मिता?" अर्जुन की भारी और रसीली आवाज़ स्मिता के कानों से होती हुई सीधे उनकी नाभि के नीचे एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई। अर्जुन जब अकेले में या इस तरह के माहौल में होता था, तो वह उन्हें नाम से पुकार कर उस रोमांच को दस गुना बढ़ा देता था।
स्मिता ने अपनी बड़ी-बड़ी, कजरारी आँखों को धीरे से उठाया और अर्जुन की तरफ देखा। उनके होठों पर एक मदहोश करने वाली मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू को जानबूझकर थोड़ा और खिसका दिया, जिससे उनके स्तनों का ऊपरी गोरा हिस्सा और भी ज्यादा साफ दिखने लगा।
"क्यों? मेरा यह रूप सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो है, अर्जुन। क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?" स्मिता ने बहुत ही मद्धम और कामुक आवाज़ में कहा, उनकी सांसों की गर्मी अर्जुन के गालों ने महसूस की।
"अच्छा?" अर्जुन ने एक गहरी सांस ली। उसका हाथ बहुत ही स्वाभाविक अंदाज़ में स्मिता की खुली, गोरी पीठ पर गया। महफिल की भीड़ से बचते हुए, उसने अपनी बड़ी, गर्म हथेलियों को स्मिता की चिकनी कमर के उस मांसल हिस्से पर रख दिया जहाँ साड़ी बंधी थी।
उसकी उंगलियों ने स्मिता की कमर के मांस को हल्के से भींचा। "मेरा बस चले तो मैं इस भीड़ को यहीं छोड़ दूं और तुम्हें अपनी बाहों में भरकर उस कोने वाले कमरे में ले जाऊं। यह जो तुम्हारी पीठ पूरी नग्न घूम रही है ना, इस पर पूरे शहर के मर्दों की नजरें हैं, और मुझे इस बात से जितनी जलन हो रही है, उतना ही नशा चढ़ रहा है।"
स्मिता के बदन में अर्जुन के इस खुले स्पर्श से एक बिजली सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा और अर्जुन की तरफ ढीला छोड़ दिया, जिससे उनका भारी चूतड़ अर्जुन की जांघ से जाकर सट गया। उस महीन साड़ी के आर-पार अर्जुन को अपनी माँ के नितम्बों का भारीपन साफ महसूस हो रहा था। स्मिता ने हल्के से हांफते हुए कहा, "तो फिर रोके किसने रखा है तुम्हें? अपनी इस जागीर पर अपना हक जताओ..."
अभी दोनों के बीच यह साइलेंट कामुक तनाव चल ही रहा था कि अचानक महफिल का माहौल बदल गया।
हॉल के दूसरे छोर से कुछ लोग हंसते-बात करते हुए उनकी तरफ बढ़ रहे थे। अर्जुन की नजरें जैसे ही उन पर पड़ीं, उसकी पकड़ स्मिता की कमर पर थोड़ी और मजबूत हो गई। स्मिता ने अर्जुन की आँखों में अचानक आए उस सख्त बदलाव को भांप लिया। उन्होंने उस दिशा में देखा, और देखते ही उनके चेहरे का खून जैसे जम गया। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके हाथ में पकड़ा हुआ वाइन का ग्लास हल्का सा कांप गया।
सामने स्मिता का एक्स-हस्बैंड (पूर्व पति) खड़ा था। ५८ साल की उम्र का वह शख्स, जो कुछ रईस क्लाइंट्स के साथ हाथ में ड्रिंक लिए बात कर रहा था, अचानक रुक गया। उसकी नज़र जैसे ही स्मिता पर पड़ी, उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई।
वह स्मिता को पहचान ही नहीं पा रहा था। उसने स्मिता को हमेशा एक दबी-कुचली, ढीले-ढाले सूट पहनने वाली और आत्मविश्वास से हीन औरत के रूप में देखा था। वह स्मिता को एक बोझ समझता था, जिसकी वजह से उसने उसे बेसहारा छोड़ दिया था। लेकिन आज... आज उसके सामने जो औरत खड़ी थी, वह किसी रईस घराने की सबसे वांछनीय और कामुक कामिनी लग रही थी। आधी रात के नीले रंग की उस डिज़ाइनर साड़ी में स्मिता का वह भारी, सम्मोहक बदन, वह पूरी खुली गोरी पीठ, हार, और सबसे बढ़कर—वह बेबाक आत्मविश्वास, जो किसी अप्सरा जैसा था।
एक्स-हस्बैंड के भीतर का पुरुष अहंकार और लालच एक साथ जाग उठा। उसने अपने साथ खड़े लोगों को वहीं छोड़ा और बड़े-बड़े कदम बढ़ाता हुआ सीधे स्मिता की तरफ आने लगा।
स्मिता के पैर एक पल के लिए पीछे हटने को हुए। अतीत का वह पुराना डर, वह कमज़ोरी एक सेकंड के लिए उनके ज़हन पर हावी होने लगी। उनका सांस लेना थोड़ा भारी हो गया, जिससे उनके स्तन ब्लाउज के भीतर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगे, जो उनकी घबराहट को साफ बयां कर रहा था।
लेकिन इससे पहले कि अतीत का वो साया स्मिता को छू पाता, अर्जुन एक अभेद्य चट्टान की तरह स्मिता के ठीक आगे आकर खड़ा हो गया। उसका चौड़ा, गठीला बदन स्मिता के सामने एक ढाल बन गया। अर्जुन ने पीछे हाथ ले जाकर स्मिता के दोनों भारी चूतड़ों पर अपना पूरा हाथ रख दिया और उन्हें खींचकर पीछे से अपने टक्सीडो सूट से सटा लिया। इस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर के सारे डर को एक झटके में गायब कर दिया और उसकी जगह एक अजीब सी कामुक उत्तेजना ने ले ली।
एक्स-हस्बैंड अर्जुन के सामने आकर रुका। उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा, और फिर अर्जुन के पीछे से झांक रही स्मिता पर अपनी नजरें गड़ाईं। उसकी आँखों में वासना और हैरानी का एक गंदा मिश्रण था।
"स्मिता? तुम... यहाँ?" एक्स-हस्बैंड की आवाज़ में एक नकली सा अधिकार था। "विश्वास नहीं होता। यह कैसा रूप बना रखा है तुमने? इस उम्र में ऐसी साड़ी... और यह बैकलेस ब्लाउज? तुम इस तरह..."
इससे पहले कि वह अपना वाक्य पूरा कर पाता, अर्जुन ने अपनी गहरी, भारी और रौबदार मर्दाना आवाज़ में उसे टोक दिया। हॉल के उस कोने में अर्जुन का रसूख साफ महसूस हो रहा था।
"अपनी ज़बान को लगाम दो, मिस्टर," अर्जुन की आँखों में एक ठंडी आग थी, जिसने एक्स-हस्बैंड को एक कदम पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। "अपनी हैसियत में रहकर बात करो। अब तुम्हारी उस घटिया सोच और उस अतीत से हम बहुत आगे निकल चुके हैं, जहाँ तुम मां को कमज़ोर समझते थे।"
अर्जुन के पिता का चेहरा गुस्से और अपमान से लाल हो गया। उसने स्मिता की तरफ देखकर चिल्लाने की कोशिश की, "स्मिता! यह अर्जुन क्या कह रहा है और तुम इसके दम पर उड़ रही हो? भूल गई कि तुम क्या थीं? मेरे छोड़ने के बाद तुम्हारी क्या हैसियत रह गई थी?"
स्मिता, जो अर्जुन के ठीक पीछे खड़ी थीं, उन्होंने अर्जुन की चौड़ी पीठ पर अपना एक गोरा हाथ रखा। अर्जुन की शर्ट के कपड़े के नीचे से उन्हें उसके कड़े मसल्स महसूस हो रहे थे। स्मिता ने अपनी साड़ी के पल्लू को और सलीके से संभाला, अपने भारी उरोजों को तानकर अर्जुन के पीछे से थोड़ा आगे आईं। अब उनके चेहरे पर कोई डर नहीं था, सिर्फ एक विजेता की मुस्कान थी।
"हैसियत?" स्मिता की आवाज़ पूरी महफिल में मद्धम लेकिन इतनी साफ थी कि एक्स-हस्बैंड के कान बजने लगे। "मेरी हैसियत यह है कि आज मैं उस मुकाम पर हूँ जहाँ तुम जैसे लोग सिर्फ अपॉइंटमेंट लेकर आ सकते हैं। तुमने मुझे अपनी कमज़ोरी समझा था ना? लेकिन मेरे बेटे ने..." उन्होंने बड़े गर्व से अर्जुन की तरफ देखा, "...इस मर्द ने मुझे मेरी असली ताकत का अहसास कराया है। अब तुम मेरे लिए सिर्फ एक बीता हुआ कल हो, जिसकी कोई कीमत नहीं है।"
इसी बीच रेखा, जो कुछ दूर खड़े होकर यह सारा तमाशा देख रही थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए बेहद मटकती हुई वहाँ पहुंच गईं।
रेखा हमेशा की तरह बोल्ड, चुलबुली और हाई-क्लास लग रही थीं।
"अरे... तुम अभी तक यहीं मँडरा रहे हो?" रेखा ने एक्स-हस्बैंड को ऊपर से नीचे देखते हुए एक तीखा तंज कसा। "देखो भाई, अपनी औकात के हिसाब से किसी कोने में जाकर मुफ्त की ड्रिंक एंजॉय करो। हमारी स्मिता और अर्जुन का वक्त बहुत कीमती है। और वैसे भी, आज स्मिता का यह रूप देखने के लिए तुम्हारी आँखें बहुत छोटी हैं।" उन्होंने हंसते हुए अर्जुन की तरफ देखा।
एक्स-हस्बैंड के पास अब वहाँ रुकने का कोई बहाना नहीं था। आसपास के कुछ और लोगों की नजरें भी अब उनकी तरफ मुड़ने लगी थीं। अपनी पूरी बेइज्जती महसूस करते हुए, वह पैर पटकता हुआ महफिल के दूसरे छोर की तरफ भाग गया।
उसके जाते ही स्मिता ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उनका पूरा बदन उत्तेजना और एक अजीब सी जीत के अहसास से कांप रहा था। उनके स्तन ब्लाउज के भीतर इतनी ज़ोर से धड़क रहे थे कि उनके बीच का क्लीवेज तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था। पूर्व पति के सामने अर्जुन के इस मर्दाना रसूख, उसकी पजेसिवनेस और उस सुरक्षात्मक स्पर्श ने स्मिता के भीतर कामुकता की एक ऐसी आग लगा दी थी जो अब शांत होने वाली नहीं थी।
अर्जुन ने मुड़कर स्मिता की तरफ देखा। स्मिता की आँखों में छलकती हुई दीवानगी और उनके हांफते हुए होठों को देखकर वह समझ गया कि अब यहाँ एक पल भी रुकना मुमकिन नहीं है। उसने रेखा मौसी की तरफ देखा, जिन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ उन्हें आँख मारी।
"चलो अर्जुन... इसे यहाँ से ले जाओ," रेखा ने स्मिता की नग्न, गोरी पीठ पर हल्के से थपकी देते हुए मद्धम आवाज़ में कहा। "इसकी छाती की यह धड़कन और बदन की यह गर्मी सिर्फ तुम्हारे कमरे में ही शांत हो सकती है।"
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता का हाथ अपने मजबूत हाथ में थाम लिया। स्मिता की साड़ी का पल्लू हल्का सा लहराया, और वे दोनों महफिल की चकाचौंध को पीछे छोड़ते हुए, होटल के अपने कमरे की तरफ बढ़ गए, जहाँ उनकी तीव्र इच्छा का एक नया और बेहद raw इतिहास लिखा जाने वाला था।
होटल के शोर-शराबे और कंवेंशन हॉल की तीखी रोशनी को पीछे छोड़ते हुए जब अर्जुन और स्मिता लिफ्ट से होते हुए २४वें माले के रूम की तरफ बढ़ रहे थे, तो कॉरिडोर के सन्नाटे में स्मिता की सैंडल की खट-खट और उनकी भारी साड़ियों की सरसराहट साफ गूंज रही थी। स्मिता की सांसें अभी भी तेज थीं। कंवेंशन हॉल में एक्स-हस्बैंड का वह अचानक सामना और उसके बाद अर्जुन का एक खूंखार, रसूखदार मर्द की तरह उनके सामने तनकर खड़े हो जाना—इस पूरे वाकये ने स्मिता के भीतर एक ऐसा रोमांच भर दिया था जिसकी तपिश उनके पूरे बदन में महसूस हो रही थी।
अर्जुन ने सुइट का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड स्वैप किया और भारी नक्काशीदार दरवाज़ा एक हल्के से क्लिक के साथ खुल गया। भीतर की दुनिया पूरी तरह से मद्धम, सुनहरी और मखमली रोशनी में डूबी हुई थी। किंग-साइज़ बेड पर रेशमी चादरें बिछी थीं और खिड़की से बाहर मुंबई की गगनचुंबी इमारतों की रोशनियां किसी मुकम्मल पेंटिंग जैसी लग रही थीं। रेखा मौसी पहले ही अपने हाथ में वाइन की बोतल लिए सुइट के आलीशान लिविंग एरिया में दाखिल हो चुकी थीं।
स्मिता जैसे ही कमरे के भीतर आईं, उन्होंने एक लंबी और गहरी सांस ली। उत्तेजना के मारे उनकी नाभि के नीचे का हिस्सा हल्का सा संकुचित हो रहा था, और आधी रात के नीले रंग की उस महीन सैटिन-शिफॉन साड़ी के भीतर उनके भारी उरोज ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। ब्लाउज की बैकलेस डिज़ाइन की वजह से उनकी पूरी गोरी, मांसल पीठ पर पसीने की कुछ बारीक बूंदें चमक रही थीं, जो कंवेंशन हॉल के उस दिमागी तनाव और दबी हुई कामुकता का नतीजा थीं।
अर्जुन ने कोट के बटन खोले और टक्सीडो जैकेट को उतारकर सोफे पर फेंक दिया। उसकी सफेद कड़क शर्ट के ऊपर के दो बटन पहले ही खुले थे, जिससे उसकी चौड़ी मर्दाना छाती के घने बाल साफ झांक रहे थे। उसकी भूखी और दीवानी नजरें अपनी माँ की उस भारी, ललचाती हुई काया पर टिक गईं।
तब तक रेखा मौसी आई और उसने मेज पर कांच के तीन क्रिस्टल ग्लास रखे और वाइन उड़ेलते हुए एक गहरी, रसभरी हंसी हंसी। वह स्मिता के करीब आईं, जिनकी पीठ पूरी तरह नग्न थी। रेखा ने अपनी ठंडी उंगलियों को स्मिता की उस थलथलाती हुई, गोरी और चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे तक फेरा। स्मिता के मुंह से एक ठंडी सी सिसकारी निकल गई।
"ओह स्मिता... सच कहूं तो आज उस बुड्ढे की शक्ल देखने लायक थी!" रेखा ने वाइन का ग्लास स्मिता के हाथ में थामते हुए कहा।
"जिस औरत को उसने अपनी जिंदगी का सबसे बेकार हिस्सा समझकर छोड़ दिया था, आज उसे इतने आलीशान लिबास में, फिर से चढ़ी हुई जवानी के साथ देखकर उसकी छाती पर जो सांप लोटा है ना... आहा! मुझे तो मजा ही आ गया।"
स्मिता ने वाइन का एक घूंट लिया, जिससे उनके लाल होठों पर वाइन की एक चमकीली परत जम गई। उन्होंने अर्जुन की तरफ देखा, जो अपनी गहरी आँखों से उन्हें लगभग निगल जाने वाली निगाहों से घूर रहा था।
"सब अर्जुन और तेरी बदौलत है, रेखा..." स्मिता की आवाज़ में एक अजीब सी लचक और गीलापन था। "अगर आज यह मेरे आगे न खड़ा होता, तो शायद अतीत का वो डर मुझे फिर से कमज़ोर कर देता। लेकिन इसके स्पर्श ने..."
"मुझे पता है, मुझे सब पता है," रेखा ने चुलबुले अंदाज़ में स्मिता की बात काटी और अर्जुन के पास जाकर उसकी चौड़ी छाती पर हाथ रखा। "अर्जुन, तेरी यह माँ ना... आज सच में किसी रसीली जागीर जैसी लग रही है। इसकी यह नाभि के नीचे बंधी साड़ी, यह पूरी खुली हुई गोरी पीठ, और यह भारी मटकर चलते कूल्हे... कसम से, हॉल में जितने मर्द थे, सबकी राल टपक रही थी। लेकिन मैं जानती हूँ कि इस ३६D के खजाने पर सिर्फ और सिर्फ मेरे इस शेर का हक है।"
रेखा ने आगे बढ़कर स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी दो बारीक डोरियों में से ऊपर वाली डोरी को हल्के से खींचकर खोल दिया।
डोरियां खुलते ही स्मिता का बैकलेस ब्लाउज कंधों के पास से हल्का सा ढीला हो गया, जिससे उनके भारी स्तनों का ऊपरी उभार और क्लीवेज और भी ज्यादा बेपर्दा हो गया। स्मिता ने शर्म और उत्तेजना के मारे अपने हाथ से पल्लू को छाती पर भींच लिया।
"रेखा... यह तुम क्या कर रही हो?" स्मिता ने लजाते हुए कहा।
"अरे, तुम्हें आराम दे रही हूँ मेरी जान," रेखा ने हंसते हुए अपनी पर्स उठाई और दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ा दिए। "और वैसे भी, अब मेरा काम यहाँ खत्म होता है। इस शेर की आँखों की भूख मुझसे देखी नहीं जा रही। तुम दोनों इस मुकम्मल जीत का जश्न मनाओ। मैं आज रात अपने उस जुहू वाले फ्लैट पर रुक रही हूँ, वहाँ एक जरूरी क्लाइंट मीटिंग भी है सुबह। इसलिए यह पूरा सुइट, यह मद्धम रोशनी और तुम्हारी यह रसीली माँ... सब सिर्फ तुम्हारे हवाले है, अर्जुन। पूरा समय लो, और आज इसे घुटनों पर ला दो।"
रेखा ने अर्जुन को एक शरारती लुक दिया, स्मिता के गाल को हल्के से चूमा और बड़े ही सलीके से सुइट का भारी दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया।
कमरे में अब सिर्फ एक गहरा, भारी सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ दो इंसानों की तेज होती सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।
दरवाज़ा बंद होते ही कमरे का तापमान जैसे अचानक कई डिग्री बढ़ गया। अर्जुन सोफे के पास स्थिर खड़ा था, उसकी बाजुओं की नसें कड़क शर्ट के भीतर उभर आई थीं। स्मिता कमरे के बीचों-बीच खड़ी थीं, हाथ में वाइन का ग्लास लिए। उनके ब्लाउज की ऊपरी डोरी खुली होने के कारण नीली सैटिन की पतली पट्टी उनके गोरे, गोल कंधे से फिसलकर बाजू पर आ गिरी थी। ३६D के दोनों भारी, मांसल स्तन उस ढीले पड़ चुके ब्लाउज के भीतर कड़े हो चुके निप्पलों के साथ साफ मटक रहे थे।
अर्जुन ने बिना एक शब्द बोले अपनी शर्ट के बाकी बचे बटन भी झटके से खोल दिए और उसे उतारकर फेंक दिया। उसका कड़ा, सांवला और गठीला मर्दाना बदन, जिस पर छह-फिट के कद की धमक थी, स्मिता के सामने पूरी तरह नग्न-अर्धशग्न खड़ा था। वह बड़े, धीमे लेकिन भारी कदमों से स्मिता की तरफ बढ़ा।
स्मिता का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उनके गले की नसें साफ फड़कती हुई दिख रही थीं। जैसे ही अर्जुन उनके बिल्कुल करीब आया, स्मिता ने डर से नहीं, बल्कि असीम इच्छा के मारे अपनी आँखें मूंद लीं। अर्जुन ने उनके हाथ से वाइन का ग्लास लिया और उसे साइड टेबल पर रख दिया।
अगले ही पल, अर्जुन के दोनों बड़े और खुरदरे हाथों ने स्मिता की उस आधी खुली, गोरी और मखमली पीठ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने स्मिता को अपनी तरफ खींचा और एक झटके में उन्हें पीछे की दीवार से सटा दिया। स्मिता के मुंह से एक तीखी, रसीली सिसकारी निकली—"अह्ह्... अर्जुन!"
अर्जुन की मर्दाना सांसों की गरमाहट स्मिता के पूरे चेहरे पर फैल गई। अर्जुन ने अपनी एक जांघ को स्मिता की दोनों टांगों के बीच, उनकी साड़ी के घेरे को चीरते हुए अंदर घुसा दिया। शिफॉन की वह महीन साड़ी दोनों के बदन के बीच एक बारीक परत मात्र रह गई थी। अर्जुन की कड़ी जांघ जैसे ही स्मिता के पेटीकोट के अंदर छिपी हुई उनकी रसीली, भारी जांघों और उनके संवेदनशील ऊंचे मुहाने (योनि) से टकराई, स्मिता का पूरा बदन धनुष की तरह मुड़ गया। उन्होंने अपने दोनों गोरे हाथ अर्जुन के कड़े कंधों पर टिका दिए।
"अर्जुन... प्लीज... अब और तड़पाओ मत... आज मैं अंदर से पूरी जल रही हूँ..." स्मिता ने अपनी आँखें खोलकर बेहद कामुक, गीली निगाहों से अपने जवान बेटे के चेहरे को देखा। उनकी आँखों में केवल और केवल असीम समर्पण और तीव्र वासना का नशा था।
अर्जुन ने जवाब में स्मिता के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भींचा और उनके रसीले, लिपस्टिक से सने होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई धीमा चुंबन नहीं था, बल्कि एक भूखे मर्द का अपनी पसंदीदा जागीर पर किया गया पहला हमला था। अर्जुन स्मिता के निचले होंठ को अपने दांतों के बीच दबाकर चूसने लगा, और उसकी जीभ स्मिता के मुंह के भीतर जाकर उनकी लार के रस को पीने लगी। स्मिता के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां अर्जुन के मुंह के भीतर ही घुट कर रह गईं—"उम्मम्... आह्... अर्जुन... मेरे बच्चे..."
चूमते हुए ही अर्जुन का दायां हाथ स्मिता के कंधे से सरकते हुए उनकी छाती पर आया। उसने साड़ी के उस पतले पल्लू को एक ही झटके में कंधे से नीचे गिरा दिया। अब स्मिता का क्लीवेज और उनके भारी स्तनों का दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह आज़ाद हो चुका था। अर्जुन ने अपने बड़े, मजबूत हाथ से स्मिता के बाएं स्तन को ब्लाउज के ऊपर से ही पूरा अपनी मुट्ठी में भर लिया और उसे बुरी तरह से भींचने लगा।
स्मिता का भारी स्तन अर्जुन की उंगलियों के बीच दबकर अपनी गोलाई बदलने लगा। ५४ साल की परिपक्वता के कारण उनके स्तनों में जो एक भारी, थलथलाता हुआ मांसल खिंचाव था, वह अर्जुन की मर्दाना ताकत के सामने पूरी तरह पिघल रहा था।
"आह्ह्ह्... अर्जुन... धीरे... उफ्फ्... बहुत कसकर भींच रहे हो..." स्मिता ने सिसकते हुए अपने सिर को पीछे दीवार पर टिका दिया, उनकी गर्दन की सुराहीदार नसें तन गईं।
अर्जुन ने उनके होठों को छोड़ा और नीचे की तरफ बढ़ा। उसने स्मिता के ब्लाउज के पीछे बंधी नीचे वाली आखिरी डोरी को भी एक झटके में खींचकर खोल दिया। डोरियां खुलते ही वह आधी रात के नीले रंग का डिज़ाइनर ब्लाउज आगे से पूरी तरह खुल गया। अर्जुन ने ब्लाउज के दोनों पल्लों को दोनों तरफ से हटा दिया।
कमरे की मद्धम पीली रोशनी में स्मिता का ३६D का वो आलीशान, गोरा और बेहद रसीला सीना पूरी तरह से नग्न होकर अर्जुन के सामने आ गया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके स्तनों का भारीपन और उनकी गोलाई किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थी।
स्तनों के नीचे का हिस्सा भारी होने के कारण थोड़ा झुका हुआ था, लेकिन उनके कड़े, बड़े और भूरे रंग के निप्पल उत्तेजना के मारे पूरी तरह से कड़े होकर तीर की तरह बाहर की ओर तने हुए थे। उरोजों की त्वचा इतनी साफ और गोरी थी कि उन पर नीली नसें साफ दिखाई दे रही थीं।
अर्जुन इस असीम खजाने को देखकर एक पल के लिए थमा, उसकी सांसें और भारी हो गईं। उसने अपने दोनों हाथों से स्मिता की उन भारी छातियों को नीचे से थामा, जैसे कोई पुजारी किसी कीमती मूर्ति को संभालता है। उसने अपने मुंह को आगे बढ़ाया और स्मिता के बाएं स्तन के उस बड़े, भूरे निप्पल को पूरा का पूरा अपने मुंह के भीतर भर लिया।
"ओह्ह्ह्... माई गॉड... अर्जुन!... आहाहा..." स्मिता के पैर हवा में डगमगाए। उन्होंने अर्जुन के घने बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसकी खोपड़ी को अपनी छाती पर और कसकर भींच लिया।
अर्जुन अपनी जीभ से उस कड़े निप्पल को चारों तरफ से चाटने लगा और फिर उसे अपने दांतों के बीच हल्का सा दबाकर चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा दूध पी रहा हो। उसका दूसरा हाथ स्मिता के दाएं स्तन को लगातार गोल-गोल घुमाते हुए मसल रहा था, जिससे स्मिता की पूरी काया कामुकता के चरम पर पहुंचने लगी। स्मिता के मुंह से ठेठ देसी अंदाज़ में बेबाक आवाजें निकलने लगीं—"अह्ह्... हां... वैसे ही चूसा करो... पूरा मुंह में भर लो... अपनी इस माँ को आज पूरा खत्म कर दो अर्जुन..."
स्तनों को बुरी तरह से तृप्त करने के बाद, अर्जुन नीचे की तरफ झुका। उसकी उंगलियां स्मिता की नाभि के पास गईं, जहाँ डिज़ाइनर साड़ी का सिल्क-सैटिन फैब्रिक बंधा हुआ था। अर्जुन ने साड़ी के उस पिन को खोला और एक ही झटके में साड़ी को खींच दिया। नीले रंग की वह महंगी साड़ी स्मिता के बदन से सरकती हुई फर्श पर एक ढेर बनकर गिर गई।
अब स्मिता के बदन पर सिर्फ एक गहरे नीले रंग का साटन का पेटीकोट बचा था। नाभि से नीचे बंधे होने के कारण उनकी चिकनी, भारी और थलथलाती हुई पेट की चर्बी और उनकी चौड़ी कमर का उभार पूरी तरह से अर्जुन की नजरों के सामने था। अर्जुन ने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ा और उसे एक झटके में ढीला कर दिया। पेटीकोट भी सरसराता हुआ नीचे गिर गया। स्मिता ने रेखा की सलाह मानकर नीचे पेंटि नहीं पहनी था।
जैसे ही पेटीकोट नीचे गिरा, ५४ साल की स्मिता की वह मुकम्मल, नग्न, प्लस-साइज़ काया कनवेंशन सुइट की रोशनी में पूरी तरह बेपर्दा हो गई। उनकी भारी, गोरी और आपस में रगड़ खाती हुई मांसल जांघें, उनके चौड़े और भारी चूतड़ों का वो विशाल ढलान, और उनकी दोनों जांघों के बीच छिपा हुआ वो घने, सलीके से ट्रिम किए हुए बालों से ढका हुआ उनका सबसे संवेदनशील और गीला हो चुकी यौनि —सब कुछ अर्जुन के सामने था। स्मिता की जांघों के बीच से कामुक रस की कुछ बूंदें रिसकर उनकी चिकनी त्वचा पर चमक रही थीं, जो यह साबित करने के लिए काफी थीं कि वह अंदर से कितनी बुरी तरह से तैयार थीं।
अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता को दोनों बगलों से उठाया और उन्हें सीधे उस किंग-साइज़ बेड के बीचों-बीच ले जाकर लिटा दिया। स्मिता जैसे ही रेशमी चादर पर लेटीं, उनके भारी स्तन दोनों तरफ थोड़े फैल गए, जिससे उनकी काया और भी ज्यादा कामुक और ललचाती हुई दिखने लगी।
अर्जुन ने अपने पैंट और कच्छा को भी एक झटके में लात मारकर उतार दिया। उसका ६-इंच का लंबा, कड़ा और लोहे जैसा सख्त हो चुका मर्दाना लंड पूरी तरह से तानकर बाहर आ गया, जो उसकी नसों के उभार के साथ ज़ोर-ज़ोर से फड़क रहा था।
वह घुटनों के बल स्मिता के ऊपर आया। स्मिता ने जैसे ही अर्जुन के उस बड़े और भयानक रूप से कड़े हो चुके लंड को देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सा नशा छा गया। उन्होंने अपनी दोनों भारी, मांसल जांघों को पूरा का पूरा बाहर की तरफ फैला दिया और अपने घुटनों को मोड़ लिया, जिससे उनकी योनि का वो गुलाबी, गीला और सूजा हुआ मुहाना अर्जुन के सामने पूरी तरह से खुल गया।
अर्जुन ने स्मिता की दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ा और उन्हें उनके कंधों की तरफ थोड़ा और भींच दिया। उसका कड़ा, गर्म औजार स्मिता की योनि के बाहरी होंठों पर जाकर टिक गया, जहाँ पहले से ही कामुक रस का गीलापन मौजूद था। अर्जुन ने अपने औजार के सुपारी वाले हिस्से को स्मिता के उस गीले मुहाने पर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा।
"अह्ह्... अर्जुन... अब बर्दाश्त नहीं होता बाबा... डाल दो... पूरा का पूरा अंदर ले लो..." स्मिता ने बेड की चादर को अपने दोनों हाथों से कसकर मुट्ठी में भींच लिया, उनका पूरा बदन काम के मारे कांप रहा था।
"तैयार रहो मां... आज तुम्हें चीरते हुए मैं तुम्हारे अतीत के हर दर्द को मिटा दूंगा," अर्जुन ने कहा और अपनी कमर को एक बेहद धीमे, मध्यम लेकिन पूरी ताकत के साथ आगे की तरफ धकेल दिया।
उस कड़े, मोटे और लोहे जैसे सख्त औजार का अगला हिस्सा जैसे ही स्मिता की ५४ साल की उस तंग, रसीली और बेहद गीली चुत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर दाखिल हुआ, स्मिता के मुंह से एक लंबी, चीख जैसी सिसकारी निकली—"ओह्ह्ह्ह्... आहाहा... अर्जुन!... उफ्फ्... मम्मा रे... पूरा भर गया..."
अर्जुन ने जल्दबाजी नहीं की। आपकी पसंदीदा शैली के मुताबिक, प्रवाह बेहद धीमा और मध्यम था। उसने अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। स्मिता की चुत की गर्म, मांसल दीवारें अर्जुन के उस कड़े मूसल को चारों तरफ से कसकर जकड़ रही थीं। जैसे-जैसे वह अंदर जा रहा था, स्मिता की आँखों से सुख और असीम आनंद के दो बूंद आंसू निकलकर उनके गालों पर ढलक गए। यह उनके जीवन की सबसे मुकम्मल जीत थी—अपने ही जवान बेटे के नीचे, उसकी पूरी मर्दानगी को अपने भीतर समाते हुए।
जब अर्जुन का पूरा का पूरा ६-इंच का मूसल स्मिता के गर्भाशय के मुहाने से जाकर टकरा गया, तो दोनों के बदन एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। अर्जुन के अंडकोष स्मिता के भारी चूतड़ों के निचले हिस्से से जाकर सट गए।
अर्जुन ने कुछ सेकंड के लिए खुद को रोका, और फिर उसने एक धीमा लेकिन बेहद गहरा देसी धक्के लगाना शुरू किया।
*छपक... छपक... छपक...*
कमरे के सन्नाटे में दोनों के बदन के आपस में टकराने की और योनि के भीतर रिसते हुए रसीले पानी की 'चप-चप' की आवाज़ गूंजने लगी। अर्जुन जब अपनी कमर पीछे खींचता, तो स्मिता का पूरा मुहाना बाहर की तरफ खिंच जाता, और जब वह पूरी ताकत से अंदर धकेलता, तो स्मिता के ३६D के दोनों भारी स्तन हवा में ज़ोर-ज़ोर से उछलते। अर्जुन ने ऊपर झुककर उनके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में दबोच लिया और उन्हें बुरी तरह मसलते हुए अपने धक्के की रफ्तार को थोड़ा और गहरा कर दिया।
"आह... हां... अर्जुन... मेरे राजा... वैसे ही... उफ्फ्... तुम्हारे लंड की मोटाई मुझे पागल कर रही है... मारो... और गहरे धक्के मारो..."
स्मिता अब पूरी तरह से होश खो चुकी थीं। उनका परिपक्व बदन अर्जुन के हर एक धक्के को अपनी गहराइयों में सोख रहा था। उनकी भारी जांघें अर्जुन की कमर के दोनों तरफ कसती जा रही थीं।
अर्जुन की सांसें अब घोड़ों जैसी चलने लगी थीं। उसकी पीठ पर पसीने की धाराएं बह रही थीं जो स्मिता की छाती पर गिर रही थीं।
दोनों का यह समागम वासना से परे, एक-दूसरे के प्रति असीम आदर, सुरक्षा और उस असीम प्रेम का प्रतीक था, जिसने स्मिता को एक नई जिंदगी दी थी। अर्जुन ने धक्कों की रफ्तार को थोड़ा और मध्यम लेकिन बेहद भारी कर दिया। हर एक स्ट्रोक स्मिता के भीतर तक तहलका मचा रहा था।
लगभग २० मिनट के इस बेहद raw और सेंसुअल समागम के बाद, स्मिता का पूरा बदन अचानक अकड़ने लगा। उनकी योनि के भीतर की दीवारें अर्जुन के औजार को पागलों की तरह भींचने लगीं। उनका चरम Orgasm बिल्कुल करीब था।
"अर्जुन... मेरा पानी छूट रहा है... ओहोहो... मैं टूट रही हूँ... अर्जुन!... मुझे अपने पानी से भर दो..." स्मिता ने चिल्लाते हुए अर्जुन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
अर्जुन को भी अहसास हो गया कि उसका भी बांध अब टूटने वाला है। उसने आखिरी तीन बेहद गहरे और खूंखार धक्के लगाए, और उसका लंड मां की चुत के बिल्कुल आखिरी छोर तक धंस गया।
अर्जुन ने एक गहरी, मर्दाना दहाड़ मारी—"अह्ह्ह्ह्ह्..."
और उसका कड़ा औजार स्मिता की योनि के भीतर ही फड़कते हुए अपने गर्म, गाढ़े और सफेद मर्दाना वीर्य की पिचकारियां छोड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य की एक-एक बूंद स्मिता के गर्भाशय की दीवारों पर ज्वालामुखी की तरह बरसने लगी। स्मिता ने अपनी आँखें ऊपर की तरफ मूंद लीं और उनका पूरा बदन झटके लेता हुआ चादर पर पूरी तरह से ढीला पड़ गया।
समागम खत्म होने के बाद भी अर्जुन अलग नहीं हुआ। वह स्मिता के उस भारी, रसीले बदन के ऊपर ही लेट गया, उसका औजार अभी भी स्मिता की योनि के भीतर ही फंसा हुआ था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे, हांफते हुए, आँखों में आँखे डाल एक दूजे को चूमते हुए उस मद्धम रोशनी में उस मुकम्मल जीत और असीम प्यार के नशे में पूरी तरह डूब चुके थे।
मज़ा नहीं आया, फॉर्मल सफेद महीन सिल्की शर्ट में सामने से झलकती ब्रा और उसमें दिखते कसे हुए बूब्स, जिसे देखते ही खड़ा हो जाए। अगर कोई पिक या gif है तो अपलोड करो
कमरे का तापमान अभी भी उन दोनों के जिस्मों की गरमाहट को समेटे हुए था। एसी की मद्धम सरसराहट के बीच, स्मिता बेड के सिरहाने से पीठ टिकाकर बैठी थी। उसकी छाती पर चादर आधी लिपटी हुई थी, जिससे उसके भारी, मांसल स्तनों की गोरी गोलाई का ऊपरी हिस्सा साफ झलक रहा था। अर्जुन उसके बिल्कुल करीब लेटा था, उसका एक हाथ स्मिता की चौड़ी, कामुक कमर पर था, जहाँ उसकी उंगलियां त्वचा पर बने हल्के लाल निशानों को सहला रही थीं।
"मां..." अर्जुन ने अपनी भारी, मर्दाना आवाज़ में सिसकते हुए कहा।
"आप इतनी समझदार हो, आपकी सोच इतनी परिपक्व है। जब आप बातें करती हो, तो मुझे लगता है कि आपके भीतर ज्ञान का एक समंदर छुपा है। रेखा मौसी भी अपनी जिंदगी संभाल रही हैं, अपना काम करती हैं। आप क्यों सिर्फ इस घर की चारदीवारी में खुद को कैद करके बैठी हो?"
स्मिता की आँखों में एक पल के लिए उदासी की एक पतली लकीर तैर गई। उसने एक ठंडी सांस ली और अर्जुन के घने बालों में अपनी उंगलियां फेरते हुए कहा, "बेटा... एक वक्त था जब मैं भी बहुत कुछ करना चाहती थी। कॉलेज के दिनों में सब मुझे सबसे ब्रिलियंट कहते थे। लेकिन... लेकिन जब तुम्हारे पिता ने मुझे वो धोखा दिया, जब वो किसी और के लिए मुझे और तुम्हें छोड़कर चले गए... मेरे भीतर की वो औरत वहीं मर गई थी। मेरा आत्मसम्मान, मेरा भरोसा... सब टूट गया था। मुझे लगा कि शायद मुझमें ही कोई कमी है।"
"नहीं मां!" अर्जुन ने उठकर स्मिता के दोनों गालों को अपने मजबूत हाथों में भर लिया। उसकी आँखों में एक अजीब सा गुस्सा और अगाध प्यार था। "कमी उनमें थी, आपमें नहीं। आपका यह बदन, आपकी यह बुद्धिमत्ता... मेरे लिए किसी वरदान जैसी है। अब वक्त आ गया है कि आप उस अतीत के मलबे से बाहर निकलो। मैं अपने नए प्रोजेक्ट्स और काम के सिलसिले में अकेला पड़ जाता हूँ। मुझे एक ऐसे साथी की ज़रूरत है जो मेरे फैसलों को सही दिशा दे सके। कल से आप मेरे साथ ऑफिस चलेंगी। पहले छोटे-मोटे काम जैसे फाइलों को संभालना, क्लाइंट्स के इनपुट्स देखना... आप कर सकती हैं मां।"
स्मिता ने अर्जुन की आँखों में देखा। उन आँखों में अपनी संतान की ममता तो थी ही, लेकिन साथ ही एक ऐसे मर्द का गहरा भरोसा भी था जिसने उसे एक मुकम्मल औरत का अहसास कराया था। उसके भीतर का सोया हुआ गौरव धीरे-धीरे जागने लगा।
"ठीक है अर्जुन... जैसा मेरा बच्चा चाहे," स्मिता ने मुस्कुराते हुए कहा।
अगली सुबह, स्मिता के भीतर एक अलग ही तरह की ऊर्जा थी। उसने अपनी अलमारी से एक बेहद खूबसूरत, कत्थई और गहरे सुनहरे रंग की कॉटन-सिल्क की साड़ी निकाली। यह साड़ी उसके प्लस-साइज बदन पर इस तरह कसी हुई थी कि उसके कूल्हों का चौड़ा घेरा और ३६D के विशाल स्तन अपनी पूरी मादकता के साथ उभर आए थे। उसने अंदर **गहरे लाल (Crimson Red) रंग की साटन की पैंटी और उसी मैचिंग रंग की लाइट-पैडेड ब्रा** पहन रखी थी, जो उसके स्तनों को ऊपर की तरफ उठा रही थी, जिससे उसकी शर्ट जैसी दिखने वाली ब्लाउज की गहरी घाटी (cleavage) साफ नुमाया हो रही थी।
ऑफिस के बंद, वातानुकूलित केबिन में जब दोनों साथ बैठे थे, तो अर्जुन उसे लैपटॉप पर कुछ दस्तावेज़ समझा रहा था। काम की बातें चल रही थीं, लेकिन दोनों के बीच का शारीरिक खिंचाव हवा को गाढ़ा कर रहा था।
"मां, इस फाइल को ज़रा देखिए..." अर्जुन ने कहा और वह फाइल दिखाने के बहाने स्मिता के बिल्कुल करीब आ गया। उसका नंगा सीना तो नहीं था, उसने एक फॉर्मल शर्ट पहन रखी थी, लेकिन उसकी मर्दाना परफ्यूम की खुशबू स्मिता की सांसों में समाने लगी।
अर्जुन का हाथ टेबल के नीचे गया और उसने साड़ी के सूती पल्लू को हटाकर सीधे स्मिता की उस चौड़ी, रेशमी जांघ पर अपनी मजबूत हथेली रख दी। साटन की लाल पैंटी के ऊपर से उसकी उंगलियां जब स्मिता के जांघों के जोड़ों को भींचने लगीं, तो स्मिता के मुंह से एक मद्धम सिसकारी निकली।
"उफ्फ... अर्जुन... कोई आ जाएगा बेटा... यह ऑफिस है..." स्मिता ने चारों तरफ देखते हुए कांपती आवाज़ में कहा, लेकिन उसने अपनी जांघों को थोड़ा और फैला दिया ताकि अर्जुन का हाथ और गहराई तक जा सके।
"केबिन बंद है मां... और आज आपकी इस नई शुरुआत की खुशी में मुझे अपनी इस मालकिन का थोड़ा सा रस चाहिए," अर्जुन ने कहा और फाइलों के पीछे छुपकर उसने अपना चेहरा सीधे स्मिता की गर्दन और छाती के बीच की उस गहरी घाटी में दे मारा। उसने अपनी जुबान से साड़ी के बॉर्डर को हटाकर उसके गोरे, भारी स्तनों के ऊपरी हिस्से को गहरे से चूस लिया। स्मिता ने अपनी आँखें बंद कर लीं। इस नए, कामकाजी माहौल में इस छुपे हुए रोमांस ने उनके भीतर वासना की एक ऐसी नई लहर पैदा कर दी थी जिसने स्मिता के आत्मविश्वास को १० गुना बढ़ा दिया था
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, स्मिता के व्यवहार और पहनावे में एक बड़ा कायापलट आने लगा।
अर्जुन उसके लिए एक से बढ़कर एक वेस्टर्न और इंडो-वेस्टर्न कपड़े लाने लगा। एक दिन अर्जुन ने उसे **एक बेहद टाइट, गहरे नीले रंग का ट्राउजर (trousers) और सफेद रंग की महीन सिल्क की शर्ट** गिफ्ट की।
जब स्मिता ने वो कपड़े पहने और आईने के सामने खड़ी हुई, तो वह खुद अपनी काया देखकर दंग रह गई। ५४ साल की उम्र में भी उस टाइट ट्राउजर ने उसके विशाल, वजनी पिछले हिस्से (heavy hips) को इस तरह कस दिया था कि उसके दोनों नितंबों की गोलाई किसी संगे-मरमर के पहाड़ों की तरह चमक रही थी। सिल्क की शर्ट से उसके भीतर पहनी हुई **सफेद रंग की लेस वाली ब्रा** और उसके ३६D स्तनों के कत्थई निपल्स का उभार साफ झलक रहा था।
"मां... आप इस रूप में किसी बड़ी कंपनी की मालकिन लग रही हो," अर्जुन ने पीछे से आकर उसके उन भारी कूल्हों को दोनों हाथों से भींचते हुए कहा। इस बार स्मिता के नीचे कोई पैंटी नहीं थी, अर्जुन ने ट्राउजर के ऊपर से ही उभरी हुई गाँड की उस गहरी दरार को अपनी उंगलियों से महसूस किया।
"चल बदमाश, गाड़ी निकाल... आज हमें उस नई साइट और क्लाइंट मीटिंग के लिए बाहर जाना है," स्मिता ने अपनी आँखों को चमकाते हुए, एक कॉर्पोरेट बॉस की तरह आदेश दिया। उसकी चाल में अब वो झिझक नहीं थी, बल्कि एक ऐसी मादक लचक थी जिसे देखकर सड़क पर चलते मर्द अपनी गर्दन घुमाने पर मजबूर हो जाएं।
उसी दोपहर, एक बेहद वीआईपी और महंगे होटल के लाउंज में उनकी एक बड़े क्लाइंट के साथ मीटिंग थी। स्मिता सोफे पर बैठी थी, उसके पैर के ऊपर दूसरा पैर चढ़ा हुआ था, जिससे उसका टाइट ट्राउजर उसकी गोरी, भारी जांघों पर और कस गया था। वह क्लाइंट के सामने अपनी परिपक्व बुद्धिमत्ता के साथ प्रोजेक्ट की बारीकियां समझा रही थी। क्लाइंट, जो खुद एक अधेड़ उम्र का संभ्रांत मर्द था, स्मिता की तीखी बुद्धि और उसके इस कयामत ढाते प्लस-साइज बदन को देखकर पूरी तरह सम्मोहित था।
मीटिंग के खत्म होने पर, क्लाइंट खड़ा हुआ और उसने अर्जुन और स्मिता की तरफ देखकर एक बेहद हैरान करने वाली बात कही।
"मिस्टर अर्जुन... आई मस्ट से, आपकी वाइफ न सिर्फ बेहद खूबसूरत हैं, बल्कि बिजनेस की उनकी समझ वाकई लाजवाब है। यू आर ए वैरी लकी मैन। ऐसी पार्टनर किस्मत वालों को मिलती है।"
यह सुनते ही एक पल के लिए पूरे लाउंज में सन्नाटा छा गया। अर्जुन की सांसें रुक गईं और स्मिता का दिल जोर से धड़का। क्लाइंट को लग रहा था कि स्मिता, अर्जुन की पत्नी या प्रेमिका है, क्योंकि दोनों के बीच का वो तालमेल और वो छुपा हुआ आकर्षण इतना गहरा था कि कोई सोच भी नहीं सकता था कि यह एक मां और बेटे का रिश्ता है।
अर्जुन ने स्मिता की तरफ देखा। स्मिता की आँखें झुकीं, लेकिन उसके गालों पर एक गुलाबी शर्म की परत चढ़ गई। किसी व्यावसायिक कारण से और उस वक्त चल रही बड़ी डील के सस्पेंस की वजह से, दोनों में से कोई भी उस क्लाइंट के सामने इस सच को स्पष्ट नहीं कर पाया। अर्जुन ने सिर्फ एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ अपना सिर हिला दिया, जैसे उसने उस बात को स्वीकार कर लिया हो।
जब क्लाइंट चला गया, तो दोनों कार की तरफ बढ़े। कार के भीतर का सन्नाटा इस वक्त वासना और एक नए तरह के रोमांच से लबालब था।
"मां... उसने आपको मेरी बीवी समझ लिया," अर्जुन ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए बेहद भारी आवाज़ में कहा। उसका अंग इस वक्त ट्राउजर के भीतर लोहे की छड़ की तरह सख्त हो चुका था।
"तो... तो तूने मना क्यों नहीं किया बदमाश?" स्मिता ने अपनी सिल्क की शर्ट के ऊपरी बटन को खोलते हुए, हांफती हुई आवाज़ में कहा। "लेकिन सच बताऊँ अर्जुन... जब उसने मुझे तेरी बीवी कहा... तो मेरे इस बदन के भीतर एक ऐसी आग लग गई जो कल रात भी नहीं लगी थी। मुझे लगा जैसे मैं सचमुच सिर्फ और सिर्फ तेरी हूँ।"
शाम ढल चुकी थी और वे शहर से काफी दूर एक सुनसान हाईवे से गुज़र रहे थे। चारों तरफ अंधेरा था और सिर्फ कार की हेडलाइट्स की रोशनी सड़क को चीर रही थी। कार के भीतर का sexual tension अब अपनी सारी हदें पार करने के लिए बेताब था। अर्जुन ने गाड़ी की रफ्तार धीमी की और उसे हाईवे के किनारे, घने पेड़ों के साए में एक पूरी तरह से अंधेरी जगह पर पार्क कर दिया। उसने कार के भीतर की लाइट्स बंद कर दीं।
"अर्जुन... गाड़ी क्यों रोकी बेटा?" स्मिता ने जानते हुए भी अपनी मादक, कांपती आवाज़ में पूछा।
"क्योंकि अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता मां... उस क्लाइंट की बात ने मेरे भीतर के मर्द को जानवर बना दिया है। मुझे अपनी इस बीवी को अभी और इसी वक्त भोगना है," अर्जुन ने कहा और वह ड्राइवर सीट से उठकर सीधे पैसेंजर सीट पर बैठी स्मिता के ऊपर आ गया।
कार की तंग जगह में दोनों के जिस्म एक-दूसरे में समाने लगे। अर्जुन ने बिना एक पल गंवाए स्मिता की उस सफेद सिल्क की शर्ट के सारे बटनों को तोड़ते हुए उसे दोनों तरफ फैला दिया। धूप और अंधेरे के इस खेल में स्मिता के ३६D के भारी स्तन उस सफेद रंग की लेस वाली ब्रा के भीतर से बाहर आने को बेताब थे। अर्जुन ने अपनी दोनों हथेलियों से उन दोनों भारी गोलों को ब्रा के कप्स से बाहर निकाला। ब्रा और स्मिता के गोरे बदन का वो कंट्रास्ट इस अंधेरे में कयामत लग रहा था। अर्जुन ने सीधे अपने होठों को उसके कड़क, कत्थई निपल्स पर रख दिया और उन्हें इतनी जंगली तरीके से चूसने लगा कि पूरी कार में स्मिता की सिसकारियां गूंजने लगीं।
"अहहह... अर्जुन... उफ्फ... कार में मत कर रे बाबा... कोई देख लेगा... आअह... कितना जंगली हो गया है तू..." स्मिता ने कार के डैशबोर्ड को अपनी उंगलियों से कसकर पकड़ लिया।
अर्जुन रुका नहीं। उसके हाथ नीचे गए और उसने स्मिता के उस टाइट नीले ट्राउजर के हुक और जिप को एक झटके में नीचे सरका दिया। ट्राउजर के नीचे सरकते ही उसकी वो चौड़ी, भारी और गोरी जांघें कार की लेदर सीट पर पूरी तरह से फैल गईं। उसकी योनि दोपहर की उस मीटिंग और क्लाइंट की उस बात के बाद से ही इतनी ज़्यादा गीली हो चुकी थी कि मां की पेंटि और कार की सीट पर उसके काम-रस की एक पूरी परत चमक रही थी।
अर्जुन घुटनों के बल कार के नीचे वाले हिस्से में आया, जहाँ जगह बहुत कम थी। उसने स्मिता के दोनों पैरों को उठाकर कार के फ्रंट शीशे (windshield) पर टिका दिया। इस पोजीशन में स्मिता का वह विशाल, भारी और मांसल पिछवाड़ा (heavy hips) सीट पर पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठ गया।
अर्जुन ने अपने ट्राउजर को नीचे किया। उसका ८ इंच लंबा और मोटा मूसल इस वक्त अपनी पूरी ताकत के साथ बाहर आ गया। उसने बिना किसी ओरल प्ले के, सीधे अपने उस गर्म और नसदार अंग की सुपारी को स्मिता की उस रसीली, प्यासी गुफा के मुहाने पर टिकाया।
"मां... आज अपनी इस बीवी की चीखें मुझे सुननी हैं," अर्जुन ने कहा और उसने अपने हाथों से स्मिता के भारी कूल्हों को पकड़ा।
उसने अपनी कमर को एक भयानक, जंगली झटका दिया और अपना पूरा ८ इंच का लोहा एक ही धक्के में स्मिता के भीतर उतार दिया।
स्मिता की एक ऐसी तीखी और दर्दभरी सिसकारी निकली जो कार के बंद शीशों से टकराकर अंदर ही गूंजने लगी। उसके पैर जो कार के शीशे पर थे, सीधे अर्जुन के कंधों पर कस गए।
कार की उस तंग सीट पर अर्जुन ने पूरी आक्रामकता से धक्के मारने शुरू किए।
*थप्प... थप्प... थप्प... थप्प...!!!*
लेदर की सीट और स्मिता के भारी पिछवाड़े के टकराने की और उनके रसों के घर्षण की 'चप-चप' की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि कार का पूरा सस्पेंशन हिलने लगा था। बाहर से अगर कोई देखता, तो उसे अंधेरे में सिर्फ एक कार जोर-जोर से हिलती हुई दिखाई देती। अर्जुन रुकने का नाम नहीं ले रहा था। वह स्मिता के उन भारी स्तनों को अपने हाथों से मरोड़ता, कभी उसके होठों को काटता, तो कभी अपनी उंगलियों को उसके भारी कूल्हों की गहराई में गड़ा देता।
"अहह... अर्जुन... मार डाल अपनी इस मां को... उफ्फ... कोई अपनी बीवी को ऐसे भोगेगा तो वह तो वहीं मर जाएगी... आअह... और गहरा डाल... हां... वहीं... उफ्फ मेरे बच्चे...!" स्मिता अब पूरी तरह से अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। उसके मुंह से निकलने वाले शब्द पूरी तरह से वासना और प्यार के उस महासागर में डूब चुके थे।
जब स्मिता का पूरा बदन कांपने लगा और उसकी योनि ने अपने रस की आखिरी बूंदें अर्जुन के अंग पर निचोड़ दीं, तो ठीक उसी पल अर्जुन ने भी एक आखिरी, गहरा धक्का मारा और अपने वीर्य का पूरा गर्म फव्वारा स्मिता के गर्भाशय के मुहाने पर छोड़ दिया। दोनों कार की सीट पर एक-दूसरे से लिपटे हुए हांफते रहे, जैसे उन्होंने बाहरी दुनिया के इस पहले खुले रोमांच को पूरी तरह फतह कर लिया हो।
कुछ हफ़्तों बाद, अर्जुन और स्मिता का यह नया रूप पूरी तरह से अपनी रंगत पकड़ चुका था। स्मिता अब सिर्फ घर की मां नहीं थी, वह अर्जुन के हर फैसले, हर मीटिंग की रीढ़ की हड्डी बन चुकी थी। उनके बीच के ये वाइल्ड और प्रयोगात्मक (experimental) सेशन्स कभी कार में, तो कभी किसी होटल के केबिन में लगातार चल रहे थे, जिसने स्मिता की काया में एक नया, चिर-यौवन भर दिया था।
एक शाम, जब वे ऑफिस से वापस लौटे, तो उन्होंने देखा कि रेखा मौसी पहले से ही उनके फ्लैट के हॉल में बैठी थीं। रेखा आज **एक गहरे हरे रंग की sleeveless ब्लाउज और पारदर्शी नेट की साड़ी** में थीं, जिसके भीतर से उनकी ४९ साल की गदराई पीठ और **कत्थई रंग की पैंटी की इलास्टिक की लकीर** साफ़ दिख रही थी।
रेखा ने जैसे ही स्मिता को अंदर आते देखा, वह अपनी जगह से खड़ी हो गईं। स्मिता ने आज एक बेहद टाइट सिल्क का कुर्ता और लेगिंग्स पहन रखी थी, जिसने उसके भारी स्तनों और उसके विशाल पिछले हिस्से (heavy hips) को पूरी तरह से उभार दिया था। स्मिता के चेहरे की वो चमक और उसकी आँखों की वो बेबाकी देखकर रेखा मौसी दंग रह गईं।
"अरे वाह दीदी! तुम तो सचमुच बदल गई हो," रेखा ने स्मिता के पास आकर उसके उन भारी कूल्हों पर एक हल्का सा थप्पड़ मारते हुए कहा। "तुम्हारी यह चाल... और यह जो बदन तुम्हारा अब किसी कॉर्पोरेट मालकिन की तरह चमक रहा है ना, यह साफ़ बता रहा है कि अर्जुन का वो ८ इंच का मूसल तुम्हारी इस काया पर रोज़ कमाल कर रहा है। अब तुम सचमुच अर्जुन की असली रानी लग रही हो।"
स्मिता ने मुस्कुराकर रेखा की तरफ देखा। उसकी आँखों में अब कोई संकोच नहीं था।
रेखा फिर अर्जुन की तरफ घूमी और उसने अर्जुन के कोट के कॉलर को ठीक करते हुए हंसते हुए अपनी पुरानी बात को एक बार फिर हवा दी।
"क्यों अर्जुन? अपनी इस मां को तो तुमने पूरी बाहरी दुनिया की सैर करा दी, इसे एक सफल औरत बना दिया। लेकिन अपनी इस मौसी की उस बात का क्या? मैंने तो पहले ही कहा था, जब दीदी थक जाएं, तो मुझे बुला लेना। हम दोनों बहनें मिलकर बेड पर लेटेंगी, और तुम बीच में रहकर हम दोनों की इस प्यास को एक साथ बुझाओगे। अब बताओ, कब आऊँ मैं तुम्हारी इस अदालत में?"
यह सुनकर अर्जुन ने अपनी मां की तरफ देखा। उसे लगा कि स्मिता शायद हमेशा की तरह इस बार भी रेखा को डांट देगी या शर्मा जाएगी।
लेकिन इस बार स्मिता ने रेखा को डांटा नहीं। उसने न तो हाँ कहा और न ही ना कहा। स्मिता ने सिर्फ अपने भारी स्तनों को थोड़ा और ऊपर की तरफ उचकाया, अपने उन विशाल, मांसल कूल्हों को एक मादक अंदाज़ में मटकाया और रेखा मौसी की आँखों में देखते हुए **एक बेहद रहस्यमयी, गहरी और मादक मुस्कान ** बिखेर दी।
उसकी इस मुस्कान ने कमरे में एक ऐसा सस्पेंस छोड़ दिया जिसने अर्जुन के अंग को एक बार फिर से कड़क कर दिया और आप पाठकों को इस कशमकश में डाल दिया कि आने वाली रात सिर्फ मां-बेटे की होगी या इसमें मौसी का भी वो रसीला तड़का लगने वाला है। दोनों बहनें अर्जुन के सामने खड़ी थीं, और हवा एक बार फिर से वासना, प्यार और एक नए रोमांच से लबालब हो चुकी थी।