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गुड़िया सीधी होकर बाँहें फैलाए खटिया के निचे लेट गई..कल्लू समझ गया कि अब उसको क्या करना है।कल्लू ने गुड़िया का टॉप निकाल दिया।गुड़िया टॉप ने निचे कुछ नहीं पहनी थी।उसके ठोस चुचिया तनी हुई थी।कल्लू उसके पास लेट गया और उसके एक निप्पल को दबाने लगा.. उसके होंठों को चूसने लगा। अब दोनों एक-दूसरे को चूमने और चाटने में बिज़ी हो गए थे।
कल्लू अब ज़ोर-ज़ोर से उसके मम्मों को दबाने और चूसने लग गया।
गुड़िया- आह.. भइया उफ़.. आराम से आह.. चूसो.. आह.. सारा रस पी जाओ.. आह.. मज़ा आ रहा है भाई.. आह.. आह..काट डालो इन निप्पलों को बहुत परेसान करते है।
दस मिनट तक इनकी मस्ती चलती रही। अब दोनों ही वासना की आग में जलने लगे थे। कल्लू का लौड़ा टपकने लगा।
गुड़िया- आह.. भइया.. उफ़फ्फ़.. मेरी चूत जल रही है . आह.. आपके गर्म होंठों से इ..ससस्स.. इसकी मालिश कर दो न..
कल्लू- अभी लो मेरी गुड़िया रानी..अभी तो तेरी चूत की ओपनिंग हुई है.. उसकी मालिश ऐसे करूँगा कि लाइफ टाइम याद रखोगी.. अपने प्यारे भइया के लंड को..
कल्लू ने गुड़िया के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया। फिर कल्लू ने गुड़िया का स्कर्ट भी उतार दिया अब गुड़िया पूरी नंगी थी।गुड़िया बिना पेंटी पहने ही घर से आई थी।गुड़िया की डबल रोटी जैसी फूली हुई चूत पर उसने धीरे से अपनी जीभ रख दी।
गुड़िया- सस्सस्स आह.. भाई.. अब रहा नहीं जा रहा है आह.. प्यार से चाटना.. आह.. आपकी बहन हूँ आह.. उफफ्फ़..
कल्लू- पता है मेरी जान.. तू आँख बन्द करके मज़ा ले.. मैं प्यार से ही तेरी बुर की चुदाई करूँगा..
कल्लू अब बड़े प्यार से चूत को चाटने लगा था। अपनी जीभ की नोक धीरे-धीरे अन्दर घुसा रहा था.. जिससे गुड़िया की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, वो बस आनन्द की दुनिया में कहीं गोते लगा रही थी।
गुड़िया- आह.. उहह.. भइया मज़ा आ रहा है.. इससस्स.. आह.. खूब चूसो.. आह.. और दबा के.. ससस्स चूसो.. आह.. मज़ा आ गया।
कल्लू अब आइस्क्रीम की तरह चूत को चाट रहा था.. गुड़िया की चूत से रस टपकना शुरू हो गया था.. वो अब तड़पने लग गई थी।
गुड़िया- आह..ससस्स.. भाई.. आह.. मेरी चूत की आग बहुत बढ़ गई है.. आह.. अब उफफफ्फ़.. सस्सस्स.. भाई आह.. लौड़ा घुसा दो.. आह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह.. प्लीज़ भाई.. आह..पेल दो अपने मोटे लौड़ें को मेरी रसीली चूत में आह. आह…
कल्लू भी अब बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था। उसके लौड़े से भी रस की बूँदें टपकने लगी थीं.. वो बैठ गया और लौड़े को चूत पर टिका कर धीरे से दबाने लगा।
गुड़िया- आह.. पेलो मेरे राजा भइया.. आह.. उई घुसा दो आह.. पूरा डालो.. आह.. मेरी चूत को फाड़ दो आज.. आह.. आईई..।
कल्लू ने धीरे-धीरे अब कमर को हिलाना शुरू कर दिया था। हर झटके के साथ वो लौड़े को थोड़ा आगे सरका देता और गुड़िया की आह.. निकल जाती। कुछ ही देर में उसने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और गुड़िया के ऊपर लेटकर उसके निप्पल को चूसने लगा।
कल्लू अब ज़ोर-ज़ोर से उसके मम्मों को दबाने और चूसने लग गया।
गुड़िया- आह.. भइया उफ़.. आराम से आह.. चूसो.. आह.. सारा रस पी जाओ.. आह.. मज़ा आ रहा है भाई.. आह.. आह..काट डालो इन निप्पलों को बहुत परेसान करते है।
दस मिनट तक इनकी मस्ती चलती रही। अब दोनों ही वासना की आग में जलने लगे थे। कल्लू का लौड़ा टपकने लगा।
गुड़िया- आह.. भइया.. उफ़फ्फ़.. मेरी चूत जल रही है . आह.. आपके गर्म होंठों से इ..ससस्स.. इसकी मालिश कर दो न..
कल्लू- अभी लो मेरी गुड़िया रानी..अभी तो तेरी चूत की ओपनिंग हुई है.. उसकी मालिश ऐसे करूँगा कि लाइफ टाइम याद रखोगी.. अपने प्यारे भइया के लंड को..
कल्लू ने गुड़िया के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया। फिर कल्लू ने गुड़िया का स्कर्ट भी उतार दिया अब गुड़िया पूरी नंगी थी।गुड़िया बिना पेंटी पहने ही घर से आई थी।गुड़िया की डबल रोटी जैसी फूली हुई चूत पर उसने धीरे से अपनी जीभ रख दी।
गुड़िया- सस्सस्स आह.. भाई.. अब रहा नहीं जा रहा है आह.. प्यार से चाटना.. आह.. आपकी बहन हूँ आह.. उफफ्फ़..
कल्लू- पता है मेरी जान.. तू आँख बन्द करके मज़ा ले.. मैं प्यार से ही तेरी बुर की चुदाई करूँगा..
कल्लू अब बड़े प्यार से चूत को चाटने लगा था। अपनी जीभ की नोक धीरे-धीरे अन्दर घुसा रहा था.. जिससे गुड़िया की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, वो बस आनन्द की दुनिया में कहीं गोते लगा रही थी।
गुड़िया- आह.. उहह.. भइया मज़ा आ रहा है.. इससस्स.. आह.. खूब चूसो.. आह.. और दबा के.. ससस्स चूसो.. आह.. मज़ा आ गया।
कल्लू अब आइस्क्रीम की तरह चूत को चाट रहा था.. गुड़िया की चूत से रस टपकना शुरू हो गया था.. वो अब तड़पने लग गई थी।
गुड़िया- आह..ससस्स.. भाई.. आह.. मेरी चूत की आग बहुत बढ़ गई है.. आह.. अब उफफफ्फ़.. सस्सस्स.. भाई आह.. लौड़ा घुसा दो.. आह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह.. प्लीज़ भाई.. आह..पेल दो अपने मोटे लौड़ें को मेरी रसीली चूत में आह. आह…
कल्लू भी अब बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था। उसके लौड़े से भी रस की बूँदें टपकने लगी थीं.. वो बैठ गया और लौड़े को चूत पर टिका कर धीरे से दबाने लगा।
गुड़िया- आह.. पेलो मेरे राजा भइया.. आह.. उई घुसा दो आह.. पूरा डालो.. आह.. मेरी चूत को फाड़ दो आज.. आह.. आईई..।
कल्लू ने धीरे-धीरे अब कमर को हिलाना शुरू कर दिया था। हर झटके के साथ वो लौड़े को थोड़ा आगे सरका देता और गुड़िया की आह.. निकल जाती। कुछ ही देर में उसने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और गुड़िया के ऊपर लेटकर उसके निप्पल को चूसने लगा।