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Incest Sagar (Completed)

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AaRYaN8380

Kaal
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Update 23 Continue.


" क्या टाईम हुआ है ?"

चाची के पहलू में लेटा कुछ देर पहले हुई अभिसार सुखों के कल्पनाओं में खोया हुआ था कि चाची के आवाज ने मुझे चेतना में ला दिया । मैंने लेटे लेटे ही टाईम देखने के लिए अपनी मोबाइल ढुंढने के लिए हाथ अगल बगल दौड़ाया । तभी मुझे याद आया कि मोबाइल तो मेरे पैंट में हैं । मैं हड़बड़ा कर बिस्तर से उठा ।

" क्या हुआ ?" - चाची मुझे इस तरह हड़बड़ा कर उठते हुए देख कर बोली ।

" मेरा मोबाइल तो पैंट में हैं.... कहीं पानी में भीगने से खराब न हो गया हो "- मैं नंगे बदन ही उठा और पैंट से मोबाइल निकालते हुए कहा ।

मैंने वहीं बगल में पड़े हुए एक सुखे कपड़े से मोबाइल पोंछा । शुक्र था कि मोबाइल खराब नहीं हुआ था । मगर उसमें माॅम के पांच , रीतु के दो और रमणीक लाल के दो मिस काॅल थे । इतने मिस काॅल देखकर मैं चौंका । मैं मोबाइल लेकर वापस बिस्तर पर आकर बैठ गया ।

" मोबाइल ठीक है ना ?"- चाची उठ कर मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।

हम दोनों के शरीर पर अभी भी कपड़े का नामोनिशान तक नहीं था ।

" हां । मोबाइल तो ठीक है लेकिन माॅम , रीतु के ‌कई मिस काॅल है ।"

" क्या बात है ?"- वो मेरे लिंग को अपने हाथों से पकड़ कर सहलाते हुए बोली ।

" पता नहीं । फोन करता हूं " - मैंने भी उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबाते हुए कहा ।

मैंने माॅम को फोन लगाया ।

" अरे कहां पर है ? कब से फोन कर रही हूं , फोन क्यों नहीं उठाता ?" - रिंग होते ही माॅम गुस्से से बोली ।

" कैसे फोन उठाऊं ? देख नहीं रही हो कितनी जोर से बारिश हो रही है ।"

" तो बारिश होने से फोन उठाने या नहीं उठाने का क्या मतलब है ?"

" बारिश से फोन भींग कर खराब नहीं हो जायेगी ?"

" वाह ! क्या सुन्दर जबाव दे रहा है । यदि बारिश हो तो फोन का इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए । कहीं उस कमीनी ज्योत्सना के साथ तो नहीं है ?"

अब उन्हें क्या बताऊं कि मैं ज्योत्सना के साथ नहीं बल्कि चाची के साथ नंग धडंग बैठा उनसे बातें कर रहा हूं ।

" अरे नहीं माॅम मैं ज्योत्सना के साथ नहीं हूं । मैं कहीं और ही जगह पर हूं । एक्चुअल में मेरी बाइक भी तो खराब हो गई है ।"

" क्या ? बाइक खराब हो गई है ?" - अब वो पहले के अपेक्षाकृत नरम स्वर में बोली ।

" हां । पहले ये बताओ ना कि फोन किसलिए किया था ?"

" रीतु के लिए ।"

" रीतु के लिए ?" - मैं घबड़ाते हुए बोला - " क्या हुआ रीतु को ?"

" अरे कुछ नहीं हुआ है । वो कल काजल के साथ उसके शहर जाने के लिए बोल रही है । काजल की कजन सिस्टर की शादी है तो वो रीतु को साथ ले जाने के लिए बोल रही है ।"

" क्या ?" - मैं आश्चर्यचकित हुआ ।

लेकिन काजल ने तो मुझे कहा था कि सिर्फ उसके मां बाप जाने वाले हैं और वो यही रहेगी । और उसके मां बाप के जाने के बाद कल पुरा दिन और पुरी रात मेरे साथ पलंग कबड्डी खेलेंगी ।

मैंने माॅम से कहा -" और रीतु क्या बोल रही है ? क्या वो जाना चाहती है ?"

" हां । उसकी भी इच्छा है जाने के लिए ।"

" वो घर पर ही है ?

" नहीं , काजल के घर गई है ।"

" ठीक है । मैं रीतु से बात करता हूं ।"

" लेकिन तु है कहां अभी ? और कब तक आयेगा ?"

" मैने बताया न मैं कहीं और जगह पर फंसा हुआ हूं । मैं आधे घंटे में आ रहा हूं ।"

" और मुझे लगा तु उस कलमूही के साथ होगा ।"

" यही तो गलती कर दिया जो उसके पास नहीं गया । अभी में घर आता हूं फिर वहां से उस कलमूही के घर जाता हूं ।"

चाची मुझे हैरत से देख रही थी । उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने उनकी सहेली ज्योत्सना को भी पटा रखा है ।

" उससे पहले मैं तेरी पांव तोड़ दुंगी " - माॅम गुस्से से बोली ।

मैंने हंसते हुए फोन काट दिया ।

चाची मेरे लन्ड को दबाते हुए बोली -" ये ज्योत्सना वाला क्या चक्कर है ?"

" जैसा तुम्हारे साथ वाला चक्कर है " - कहते हुए मैंने उनकी चूत में अपनी उंगली पेल दी ।

" तुम सच में बहुत नालायक हो । बड़ी बड़ी उमर की औरतों के पीछे पड़ रहते हो । ये सब तुम्हारी गन्दी गन्दी किताबें पढ़ने का नतीजा है " - वो मेरे लन्ड को पकड़ कर मूठ मारते हुए बोली ।

मैं चौंका ।

इसका मतलब मेरी अलमारी से जो किताबें गायब हो रही थी , वो चाची कर रही थी ।

" मैंने उनकी चूची की बड़ी निप्पल को उंगलियों से मसलते हुए कहा - " आपको कैसे पता कि मैं गन्दी गन्दी किताबें पढ़ता हूं ।"

" अपने आलमारी में जो किताबें छुपा कर रखा है क्या वो तेरे बाप का है ?"

" है तो मेरा ही लेकिन आप को कैसे पता ?"

" बस पता है ।"

" कहीं वो आप ही नहीं तो जो मेरे आलमारी से किताबें गायब करती थी ?"

" तुझे मालूम था कि वहां से कोई कोई किताब गायब हो जाती थी ?"

" क्यों नहीं पता होगा ? आखिर मेरा किताब था तो कोई किताब न होने से मालूम पड़ ही जायेगा । अब आप बताओ वो किताबें आप ही निकालती थी न ?"

" मैं नहीं , तेरी मम्मी निकालती थी ।"

" क्या ?"

मैं आश्चर्य से मूंह फाड़े उनको देखता रहा ।

वो मुझे आश्चर्यचकित होते देखकर मुस्कराई और मुझे अपने ऊपर खींच ली । और मेरे लन्ड को पकड़ कर अपने चूत के छिद्र पर रख कर नीचे से धक्का दी जिससे मेरा लन्ड का सुपाड़ा उनके चूत में घुस गया ।

" चाची , सच सच बताओ ? क्या माॅम वहां से किताबें निकालती थी ?" मैं अभी भी श्योर नहीं था ।

" हां । तेरी माॅम ही तेरे रूम के आलमारी से किताबें गायब करती थी और हम दोनों बारी बारी से उसे पढ़ती थी । क्या करें ! आखिर हम भी तो हाड़ मांस की ही बनी है । हमारी भी इच्छा होती है कि कोई हमें भी रगड़ कर प्यार करे । तेरे डैड ने तेरी मम्मी के साथ और तेरे चाचा ने मेरे साथ करीब आठ दस सालों से सेक्स करना ही छोड़ दिया है । उनका खड़ा ही नहीं होता । हम दोनों बरसों से प्यासी है । एक दिन तेरी माॅम तेरी कमरे की सफाई कर रही थी । सफाई करते हुए तेरी बिस्तर के नीचे से उन्हें आलमारी की चाबी मिली । उन्होंने सोचा क्यों न आलमारी भी साफ करके उसके अंदर की सामान सजा दूं , तभी उन्हें तेरी ये गन्दी गन्दी किताबें दिखाई पड़ी । पहले तो वो बहुत गुस्सा हुई । तुम्हें उसी वक्त डांटना चाहती थी । और संयोग से उस दिन मैं भी वहां पहुंच गई । उन्होंने मुझे दिखाया । मुझे भी खराब लगा । लेकिन संयोगवश उसी दिन तुम अपने दोस्तों के साथ बंगलूरू घुमने चले गए । तुम पुरे छः दिन बाद आए थे तब तक यहां की कहानी कुछ और ही हो गई थी । इन छः दिनों में हमने सारी किताबें पढ़ ली और वो भी एक बार नहीं बल्कि कई बार और फिर अब तुम्हें क्या फटकारें हम दोनों खूद ही उन गन्दी कहानियों के दिवाने बन चुके थे । हमारी दबी हुई लालशा फिर परवान चढ़ने लगी । हमारी सेक्स की भुख पहले से भी ज्यादा बढ़ गई । लेकिन परिवार के मान सम्मान हमारी मजबूरी , संस्कृति हमारी पांव में बेड़ियां डाले पहले ही की तरह जकड़ी रही ।

मेरा तो आश्चर्य के मारे बूरा हाल था । माॅम किताबें मेरे रूम से गायब करती थी और उसे पहले खुद पढ़ती थी फिर चाची को पढ़ाती थी और जब फिर पढ़ने के बाद मेरे आलमारी में रख देती थी ।

वो सारी गन्दी गन्दी किताबें जिसमें मां बेटे , बाप बेटी , भाई बहन , चाची भतीजा , देवर भाभी की चुदाई की कहानियां भरी पड़ी थी । ये सोचकर मेरा लन्ड खुशी के मारे उछलने लगा जिसे चाची अपने चूत में साफ महसूस कर रही थी ।

मैं पुरी तरह से उत्तेजित हो गया और चाची को हुमच हुमच कर चोदने लगा । वो भी मेरा भरपूर साथ देने लगी ।

थोड़ी देर बाद वो अपने कपड़े पहनने लगी । मेरा पैंट शर्ट गंजी जांघिया अभी भी भींगा हुआ ही था । फिर भी मैंने सारे भींगे हुए कपड़े दुबारा पहन लिये ।

कपड़े पहनने के बाद मैने रीतु को फोन किया ।

उसके हैलो कहते ही मैंने कहा - " किसलिए फोन कर रही थी ?"

" भाई , मैं काजल के साथ उसकी कजन की शादी में जाना चाहती हूं । क्या जाऊं ?"- उधर से रीतु बहुत ही मीठे स्वर में बोली ।

" अरे , तु क्या करेगी शादी में जाकर ? उनलोगो का अपना समाज होगा , अपना माहौल होगा । तु वहां जाकर परेशान ही होगी ।"

" कोई परेशानी नहीं होगी । शादी जयपुर में है । वहां उन्होंने होटल बूक किया हुआ है । शादी के बहाने जयपुर भी घुम लुंगी ।"

" कितने दिन का ट्रिप है ?"

" चार दिनों का ।"

" लेकिन मैंने तो सुना था कि सिर्फ काजल के मम्मी पापा ही जा रहे हैं । काजल के जाने का प्लान नहीं था ।"

" पहले काजल के जाने का प्लान नहीं था लेकिन उसकी कजन उसके न आने की खबर सुनकर बहुत नाराज़ हूई ।उस ने जोर देकर उसे आने को कहा । और फिर काजल के मम्मी डैडी ने भी फोर्स किया तो फिर तैयार हो गई ।"

" ओह ?"

" वैसे आपको कैसे पता कि काजल नहीं जाने वाली थी । मैंने तो आपको कभी कहा नहीं " - वो मजाक करते हुए बोली ।

मैं हड़बड़ाया ।

" अरे वो... वो... वो काजल एक दिन रास्ते में मिल गई थी , तभी कहा था उसने ।"

" कहीं कुछ छुपा तो नहीं रहे हो मुझसे ? कोई चक्कर वक्कर तों नहीं है ?" - वो शरारती अंदाज में बोली ।

" अरे बकवास मत कर । ऐसा कुछ नहीं है ।"

" तो फिर बताओ मैं क्या करूं ? शादी में जाऊं या नहीं ?"

" तु श्योर जाना चाहती है ?"

" हम्म ।"

" तो एक काम कर , राहुल को भी अपने साथ ले जा । तेरे साथ एक मर्द रहेगा तो अच्छा होगा ।"

" क्या ?"

" हां । अब तु काजल और उसके मम्मी डैडी से पुछ ले । अगर तुझे जाना है तो राहुल भी तेरे साथ जायेगा ।"

" ओके । राहुल हमारे साथ जायेगा ।"

" अरे , पहले पुछ तो ले ।"

" काजल बगल में ही है । मैंने उससे पुछ लिया है । वो राजी है ।"

" ठीक है फिर । वैसे कल निकलना कैसे हैं ?

" सुबह सात बजे के बस से निकलना है । अंकल जा रहे हैं टिकट बूक करने ।"

" बस से ?"

" अरे भाई , शानदार बस है । उसका भाड़ा ए सी ट्रेन से भी ज्यादा है ।"

" ठीक है फिर । तु शाम को कब तक घर आयेगी ?

" छः बजे आ जाऊंगी । तैयारी भी तो करनी है ।"

" जल्दी आना । यदि कोई सामान वगैरह लाना होगा तो खरिदने के लिए समय चाहिए न ।"

" मैं पक्का छः बजे तक आ जाऊंगी ।"

मैंने फोन काट दिया । चाची को सारी बातें बताया । और राहुल को जयपुर जाने के लिए और उसके कपड़े वगैरह भी तैयार रखने को कहा ।

फिर वहां से अपने घर चला आया ।

जब घर पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ पाया । मैंने सोचा कहीं डैड तो नहीं आ गए हैं । मैं घर में प्रवेश कर के मेन दरवाजा बंद किया और माॅम को आवाज लगाई ।

माॅम चिल्ला कर बोली कि वो किचन में है तो मैं ये कहते हुए अपने कमरे की तरफ चला गया कि मैं नहा कर , फ्रेश होकर नीचे आता हूं ।

मैं अपने कमरे में गया । सारे भींगे हुए कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया । नहा धो कर जब मैं अपनी गंजी और जांघिया पहनने के लिए ढुढने लगा तो देखा कि वो भी पुरी तरह से भीगी हुई है । सुबह से बरसात होने के कारण वो सुख नहीं पाई थी ।

मैं अपने कमरे में आलमारी से एक तौलिया निकाल कर लपेट लिया । और उपर एक शर्ट पहन लिया । और फिर नीचे हाॅल में आ गया । माॅम शायद अभी भी किचन में ही थी ।

मैं किचन में गया । और माॅम को देखकर बुरी तरह से चौंक गया ।

नेक्स्ट कल रात तक.....
Nice update
 

Incestlala

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Update 23 Continue.


" क्या टाईम हुआ है ?"

चाची के पहलू में लेटा कुछ देर पहले हुई अभिसार सुखों के कल्पनाओं में खोया हुआ था कि चाची के आवाज ने मुझे चेतना में ला दिया । मैंने लेटे लेटे ही टाईम देखने के लिए अपनी मोबाइल ढुंढने के लिए हाथ अगल बगल दौड़ाया । तभी मुझे याद आया कि मोबाइल तो मेरे पैंट में हैं । मैं हड़बड़ा कर बिस्तर से उठा ।

" क्या हुआ ?" - चाची मुझे इस तरह हड़बड़ा कर उठते हुए देख कर बोली ।

" मेरा मोबाइल तो पैंट में हैं.... कहीं पानी में भीगने से खराब न हो गया हो "- मैं नंगे बदन ही उठा और पैंट से मोबाइल निकालते हुए कहा ।

मैंने वहीं बगल में पड़े हुए एक सुखे कपड़े से मोबाइल पोंछा । शुक्र था कि मोबाइल खराब नहीं हुआ था । मगर उसमें माॅम के पांच , रीतु के दो और रमणीक लाल के दो मिस काॅल थे । इतने मिस काॅल देखकर मैं चौंका । मैं मोबाइल लेकर वापस बिस्तर पर आकर बैठ गया ।

" मोबाइल ठीक है ना ?"- चाची उठ कर मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।

हम दोनों के शरीर पर अभी भी कपड़े का नामोनिशान तक नहीं था ।

" हां । मोबाइल तो ठीक है लेकिन माॅम , रीतु के ‌कई मिस काॅल है ।"

" क्या बात है ?"- वो मेरे लिंग को अपने हाथों से पकड़ कर सहलाते हुए बोली ।

" पता नहीं । फोन करता हूं " - मैंने भी उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबाते हुए कहा ।

मैंने माॅम को फोन लगाया ।

" अरे कहां पर है ? कब से फोन कर रही हूं , फोन क्यों नहीं उठाता ?" - रिंग होते ही माॅम गुस्से से बोली ।

" कैसे फोन उठाऊं ? देख नहीं रही हो कितनी जोर से बारिश हो रही है ।"

" तो बारिश होने से फोन उठाने या नहीं उठाने का क्या मतलब है ?"

" बारिश से फोन भींग कर खराब नहीं हो जायेगी ?"

" वाह ! क्या सुन्दर जबाव दे रहा है । यदि बारिश हो तो फोन का इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए । कहीं उस कमीनी ज्योत्सना के साथ तो नहीं है ?"

अब उन्हें क्या बताऊं कि मैं ज्योत्सना के साथ नहीं बल्कि चाची के साथ नंग धडंग बैठा उनसे बातें कर रहा हूं ।

" अरे नहीं माॅम मैं ज्योत्सना के साथ नहीं हूं । मैं कहीं और ही जगह पर हूं । एक्चुअल में मेरी बाइक भी तो खराब हो गई है ।"

" क्या ? बाइक खराब हो गई है ?" - अब वो पहले के अपेक्षाकृत नरम स्वर में बोली ।

" हां । पहले ये बताओ ना कि फोन किसलिए किया था ?"

" रीतु के लिए ।"

" रीतु के लिए ?" - मैं घबड़ाते हुए बोला - " क्या हुआ रीतु को ?"

" अरे कुछ नहीं हुआ है । वो कल काजल के साथ उसके शहर जाने के लिए बोल रही है । काजल की कजन सिस्टर की शादी है तो वो रीतु को साथ ले जाने के लिए बोल रही है ।"

" क्या ?" - मैं आश्चर्यचकित हुआ ।

लेकिन काजल ने तो मुझे कहा था कि सिर्फ उसके मां बाप जाने वाले हैं और वो यही रहेगी । और उसके मां बाप के जाने के बाद कल पुरा दिन और पुरी रात मेरे साथ पलंग कबड्डी खेलेंगी ।

मैंने माॅम से कहा -" और रीतु क्या बोल रही है ? क्या वो जाना चाहती है ?"

" हां । उसकी भी इच्छा है जाने के लिए ।"

" वो घर पर ही है ?

" नहीं , काजल के घर गई है ।"

" ठीक है । मैं रीतु से बात करता हूं ।"

" लेकिन तु है कहां अभी ? और कब तक आयेगा ?"

" मैने बताया न मैं कहीं और जगह पर फंसा हुआ हूं । मैं आधे घंटे में आ रहा हूं ।"

" और मुझे लगा तु उस कलमूही के साथ होगा ।"

" यही तो गलती कर दिया जो उसके पास नहीं गया । अभी में घर आता हूं फिर वहां से उस कलमूही के घर जाता हूं ।"

चाची मुझे हैरत से देख रही थी । उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने उनकी सहेली ज्योत्सना को भी पटा रखा है ।

" उससे पहले मैं तेरी पांव तोड़ दुंगी " - माॅम गुस्से से बोली ।

मैंने हंसते हुए फोन काट दिया ।

चाची मेरे लन्ड को दबाते हुए बोली -" ये ज्योत्सना वाला क्या चक्कर है ?"

" जैसा तुम्हारे साथ वाला चक्कर है " - कहते हुए मैंने उनकी चूत में अपनी उंगली पेल दी ।

" तुम सच में बहुत नालायक हो । बड़ी बड़ी उमर की औरतों के पीछे पड़ रहते हो । ये सब तुम्हारी गन्दी गन्दी किताबें पढ़ने का नतीजा है " - वो मेरे लन्ड को पकड़ कर मूठ मारते हुए बोली ।

मैं चौंका ।

इसका मतलब मेरी अलमारी से जो किताबें गायब हो रही थी , वो चाची कर रही थी ।

" मैंने उनकी चूची की बड़ी निप्पल को उंगलियों से मसलते हुए कहा - " आपको कैसे पता कि मैं गन्दी गन्दी किताबें पढ़ता हूं ।"

" अपने आलमारी में जो किताबें छुपा कर रखा है क्या वो तेरे बाप का है ?"

" है तो मेरा ही लेकिन आप को कैसे पता ?"

" बस पता है ।"

" कहीं वो आप ही नहीं तो जो मेरे आलमारी से किताबें गायब करती थी ?"

" तुझे मालूम था कि वहां से कोई कोई किताब गायब हो जाती थी ?"

" क्यों नहीं पता होगा ? आखिर मेरा किताब था तो कोई किताब न होने से मालूम पड़ ही जायेगा । अब आप बताओ वो किताबें आप ही निकालती थी न ?"

" मैं नहीं , तेरी मम्मी निकालती थी ।"

" क्या ?"

मैं आश्चर्य से मूंह फाड़े उनको देखता रहा ।

वो मुझे आश्चर्यचकित होते देखकर मुस्कराई और मुझे अपने ऊपर खींच ली । और मेरे लन्ड को पकड़ कर अपने चूत के छिद्र पर रख कर नीचे से धक्का दी जिससे मेरा लन्ड का सुपाड़ा उनके चूत में घुस गया ।

" चाची , सच सच बताओ ? क्या माॅम वहां से किताबें निकालती थी ?" मैं अभी भी श्योर नहीं था ।

" हां । तेरी माॅम ही तेरे रूम के आलमारी से किताबें गायब करती थी और हम दोनों बारी बारी से उसे पढ़ती थी । क्या करें ! आखिर हम भी तो हाड़ मांस की ही बनी है । हमारी भी इच्छा होती है कि कोई हमें भी रगड़ कर प्यार करे । तेरे डैड ने तेरी मम्मी के साथ और तेरे चाचा ने मेरे साथ करीब आठ दस सालों से सेक्स करना ही छोड़ दिया है । उनका खड़ा ही नहीं होता । हम दोनों बरसों से प्यासी है । एक दिन तेरी माॅम तेरी कमरे की सफाई कर रही थी । सफाई करते हुए तेरी बिस्तर के नीचे से उन्हें आलमारी की चाबी मिली । उन्होंने सोचा क्यों न आलमारी भी साफ करके उसके अंदर की सामान सजा दूं , तभी उन्हें तेरी ये गन्दी गन्दी किताबें दिखाई पड़ी । पहले तो वो बहुत गुस्सा हुई । तुम्हें उसी वक्त डांटना चाहती थी । और संयोग से उस दिन मैं भी वहां पहुंच गई । उन्होंने मुझे दिखाया । मुझे भी खराब लगा । लेकिन संयोगवश उसी दिन तुम अपने दोस्तों के साथ बंगलूरू घुमने चले गए । तुम पुरे छः दिन बाद आए थे तब तक यहां की कहानी कुछ और ही हो गई थी । इन छः दिनों में हमने सारी किताबें पढ़ ली और वो भी एक बार नहीं बल्कि कई बार और फिर अब तुम्हें क्या फटकारें हम दोनों खूद ही उन गन्दी कहानियों के दिवाने बन चुके थे । हमारी दबी हुई लालशा फिर परवान चढ़ने लगी । हमारी सेक्स की भुख पहले से भी ज्यादा बढ़ गई । लेकिन परिवार के मान सम्मान हमारी मजबूरी , संस्कृति हमारी पांव में बेड़ियां डाले पहले ही की तरह जकड़ी रही ।

मेरा तो आश्चर्य के मारे बूरा हाल था । माॅम किताबें मेरे रूम से गायब करती थी और उसे पहले खुद पढ़ती थी फिर चाची को पढ़ाती थी और जब फिर पढ़ने के बाद मेरे आलमारी में रख देती थी ।

वो सारी गन्दी गन्दी किताबें जिसमें मां बेटे , बाप बेटी , भाई बहन , चाची भतीजा , देवर भाभी की चुदाई की कहानियां भरी पड़ी थी । ये सोचकर मेरा लन्ड खुशी के मारे उछलने लगा जिसे चाची अपने चूत में साफ महसूस कर रही थी ।

मैं पुरी तरह से उत्तेजित हो गया और चाची को हुमच हुमच कर चोदने लगा । वो भी मेरा भरपूर साथ देने लगी ।

थोड़ी देर बाद वो अपने कपड़े पहनने लगी । मेरा पैंट शर्ट गंजी जांघिया अभी भी भींगा हुआ ही था । फिर भी मैंने सारे भींगे हुए कपड़े दुबारा पहन लिये ।

कपड़े पहनने के बाद मैने रीतु को फोन किया ।

उसके हैलो कहते ही मैंने कहा - " किसलिए फोन कर रही थी ?"

" भाई , मैं काजल के साथ उसकी कजन की शादी में जाना चाहती हूं । क्या जाऊं ?"- उधर से रीतु बहुत ही मीठे स्वर में बोली ।

" अरे , तु क्या करेगी शादी में जाकर ? उनलोगो का अपना समाज होगा , अपना माहौल होगा । तु वहां जाकर परेशान ही होगी ।"

" कोई परेशानी नहीं होगी । शादी जयपुर में है । वहां उन्होंने होटल बूक किया हुआ है । शादी के बहाने जयपुर भी घुम लुंगी ।"

" कितने दिन का ट्रिप है ?"

" चार दिनों का ।"

" लेकिन मैंने तो सुना था कि सिर्फ काजल के मम्मी पापा ही जा रहे हैं । काजल के जाने का प्लान नहीं था ।"

" पहले काजल के जाने का प्लान नहीं था लेकिन उसकी कजन उसके न आने की खबर सुनकर बहुत नाराज़ हूई ।उस ने जोर देकर उसे आने को कहा । और फिर काजल के मम्मी डैडी ने भी फोर्स किया तो फिर तैयार हो गई ।"

" ओह ?"

" वैसे आपको कैसे पता कि काजल नहीं जाने वाली थी । मैंने तो आपको कभी कहा नहीं " - वो मजाक करते हुए बोली ।

मैं हड़बड़ाया ।

" अरे वो... वो... वो काजल एक दिन रास्ते में मिल गई थी , तभी कहा था उसने ।"

" कहीं कुछ छुपा तो नहीं रहे हो मुझसे ? कोई चक्कर वक्कर तों नहीं है ?" - वो शरारती अंदाज में बोली ।

" अरे बकवास मत कर । ऐसा कुछ नहीं है ।"

" तो फिर बताओ मैं क्या करूं ? शादी में जाऊं या नहीं ?"

" तु श्योर जाना चाहती है ?"

" हम्म ।"

" तो एक काम कर , राहुल को भी अपने साथ ले जा । तेरे साथ एक मर्द रहेगा तो अच्छा होगा ।"

" क्या ?"

" हां । अब तु काजल और उसके मम्मी डैडी से पुछ ले । अगर तुझे जाना है तो राहुल भी तेरे साथ जायेगा ।"

" ओके । राहुल हमारे साथ जायेगा ।"

" अरे , पहले पुछ तो ले ।"

" काजल बगल में ही है । मैंने उससे पुछ लिया है । वो राजी है ।"

" ठीक है फिर । वैसे कल निकलना कैसे हैं ?

" सुबह सात बजे के बस से निकलना है । अंकल जा रहे हैं टिकट बूक करने ।"

" बस से ?"

" अरे भाई , शानदार बस है । उसका भाड़ा ए सी ट्रेन से भी ज्यादा है ।"

" ठीक है फिर । तु शाम को कब तक घर आयेगी ?

" छः बजे आ जाऊंगी । तैयारी भी तो करनी है ।"

" जल्दी आना । यदि कोई सामान वगैरह लाना होगा तो खरिदने के लिए समय चाहिए न ।"

" मैं पक्का छः बजे तक आ जाऊंगी ।"

मैंने फोन काट दिया । चाची को सारी बातें बताया । और राहुल को जयपुर जाने के लिए और उसके कपड़े वगैरह भी तैयार रखने को कहा ।

फिर वहां से अपने घर चला आया ।

जब घर पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ पाया । मैंने सोचा कहीं डैड तो नहीं आ गए हैं । मैं घर में प्रवेश कर के मेन दरवाजा बंद किया और माॅम को आवाज लगाई ।

माॅम चिल्ला कर बोली कि वो किचन में है तो मैं ये कहते हुए अपने कमरे की तरफ चला गया कि मैं नहा कर , फ्रेश होकर नीचे आता हूं ।

मैं अपने कमरे में गया । सारे भींगे हुए कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया । नहा धो कर जब मैं अपनी गंजी और जांघिया पहनने के लिए ढुढने लगा तो देखा कि वो भी पुरी तरह से भीगी हुई है । सुबह से बरसात होने के कारण वो सुख नहीं पाई थी ।

मैं अपने कमरे में आलमारी से एक तौलिया निकाल कर लपेट लिया । और उपर एक शर्ट पहन लिया । और फिर नीचे हाॅल में आ गया । माॅम शायद अभी भी किचन में ही थी ।

मैं किचन में गया । और माॅम को देखकर बुरी तरह से चौंक गया ।

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माॅम की पीठ मेरी तरफ थी । वो किचन स्लैब के सामने खड़ी खाना बना रही थी । मैं उनके वस्त्र को देखकर बुरी तरह चौंक गया । उन्होंने वो नाइटी पहन रखी थी जो मैंने श्वेता दी के लिए लाया था । वो नाइटी उनके भरे बदन पर घुटने से थोड़ी ही उपर थी । पीछे से उनकी पीठ का साठ प्रतिशत हिस्सा खुला हुआ था । मैं उनकी गोरी अधनंगी पीठ और घुटने से नीचे नंगी पिंडलियों को देखकर भौंचक्का रह गया । इस रूप में मैंने उन्हें पहले कभी देखा नहीं था । लगता था कि जैसे कोई सेक्स की देवी खड़ी हो कर अपने जलवे बिखेर रही हो ।

वो पलटी और मुझे देखकर मुस्कराई । सामने का सीन देखकर तो मेरा कलेजा हलक तक आ पहुंचा । मेरे मुंह के साथ साथ लिंग में भी पानी आ गया ।

उनके दोनों कन्धों पर एक बारिकी सा स्ट्रिप था जो उनके दोनों बड़े बड़े सीना ताने वक्ष को बड़ी मुश्किल से सम्हाले हुए रखा था । सीने का लगभग पचास प्रतिशत उपरी हिस्सा नंगा था । मेरी आंखें जड़ हो गई । मेरी नजरें उनकी छाती से चुम्बक की तरह चिपक गई । और मेरा लन्ड खड़ा हो गया जबकि में चाची को तीन तीन बार चोद कर आया था । मैंने अपनी जिंदगी में इतनी खूबसूरत और सेक्सी गोलाईयां नहीं देखी थी ।

मैं मंत्र मुग्ध हो कर उनकी सेक्सी काया को निहारते जा रहा था ।

" खाना निकालूं ?"

उनकी आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।

मैं उनकी आंखों में देखते हुए कहा -" वाओ ! क्या लग रही हो माॅम ।'

उन्होंने शरमाते हुए कहा -" खराब लग रही हूं ना ?"

" अरे नहीं माॅम बहुत बहुत अच्छी लग रही हो । एकदम हाॅट । क्या बोलूं , निशब्द ।"

" मजाक मत कर । एक दम गन्दी लग रही हूं , मुझे पता है ।"

" मजाक नहीं कर रहा हूं । सच बोल रहा हूं । अगर इस रूप में आपको मूवी वाले देख लें तो हिरोइन का आफर कर दें । डैड तो पागल हो जायेंगे ।"

" बकवास बंद कर । मैं खाना निकालती हूं । चल , बाहर हाॅल में बैठ । मैं खाना लेकर आ रही हूं ।"

" हाॅल में छोड़ो । यहीं नीचे बैठ कर खा लेता हूं ।"

मैं दरवाजे से अन्दर गया । हमारा किचन काफी बड़ा था । नीचे जमीन पर दो लकड़ी के छोटे छोटे तख्त थे । उनमें से एक लेकर दरवाजे के दाहिने तरफ दिवाल से सट कर बैठ गया ।

माॅम ने खाना निकाल कर मेरे आगे रख दिया और खुद भी मेरे अपोजिट एक तख्त लेकर अपना खाना लेकर नीचे बैठ गई । मेरा चेहरा किचन के अन्दर की तरफ था जबकि माॅम का चेहरा मेरी और किचन के दरवाजे की तरफ था । वो पालथी मारे बैठी थी जबकि मैं अपने दोनों घुटने खोले बैठा था ।

खाना खाते हुए ही हम बातें भी करते जा रहे थे । मैंने रीतु वाली बात बताई और ये भी बताया कि उसके साथ राहुल भी जयपुर जायेगा । वो ये खबर सुनकर खुश और निश्चित हो गई कि राहुल भी साथ में जा रहा है ।

खाना खाते समय मैं उनके खुले अंगों को चुपके चुपके निहार भी रहा था । खाने के उपरांत जब मैं हाथ धोने के लिए खड़ा होने लगा तभी मेरी नजर अपने पहने हुए तौलिए पर पड़ी । दोनों घुटने अलग करके बैठने के कारण तौलिया में एक छोटा सा गैप हो गया था । जिससे तौलिया के अन्दर मेरा लन्ड ओपन हो गया था ।

मैं हड़बड़ा कर उठा और तौलिया को एडजस्ट करते हुए वाश बेसिन भागा और जल्दी से हाथ मूंह धोकर अपने कमरे चला गया ।

मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था । माॅम ने तौलिया के अन्दर से मेरे झांकते हुए लन्ड को जरूर देखा होगा । भले ही मेरा लन्ड पुरी तरह से खड़ा नहीं हुआ हो लेकिन माॅम के सेक्सी अवतार को देखकर थोड़ा कठोर तो हो ही गया था ।

उन्होंने शर्तिया मेरा लन्ड देखा था । भले ही मैंने जानबूझ कर नहीं देखाया हो । लेकिन उन्होंने देख तो लिया ही , फिर भी उन्होंने मुझे टोका क्यों नहीं ? और यदि टोकती भी तो क्या टोकती ? कि मेरा लन्ड तौलिया के गैप से दिख रहा है । ऐसा तो वह कह ही नहीं सकती ।

और उन्होंने आज ये रिविलिंग नाइटी क्यों पहन रखी है ? उन्होंने कहा था कि मुझे ये वाहियात नाइटी पसन्द ही नहीं है । ऐसी नाइटी तो औरतें सिर्फ अपने पति या ब्वायफ़्रेंड के समक्ष पहनती हैं । फिर मेरे सामने क्यों पहनी ?

आज जो बातें चाची ने बताई थी उससे ये बात तो क्लियर हो गई थी कि मेरी गन्दी किताबें माॅम ही गायब करती थी । और गायब ही नहीं बल्कि पढ़ती भी थी । और पढ़ने के बाद उसे चाची को सौंप देती थी । चाची ने ये भी बताई थी कि उन्हीं की तरह माॅम का भी सेक्सुअल रिलेशनशिप दस सालों से नहीं हुआ है । डैड की सेक्सुअल क्षमता खत्म हो चुकी थी । उन्होंने माॅम के साथ दस सालों से सेक्स नहीं किया है ।

और जैसी किताबें वो पढ़ती थी उसमें तो वो कामाग्नि के ज्वाला से जल भुन जाती होंगी । अपनी सेक्सुअल भूख को कैसे शांत करती होंगी ? क्या हस्त मैथुन करती होंगी ? या गाजर , मूली , केले आदि का इस्तेमाल करती होंगी ।

सुन्दर और हसीं तो इतनी है कि उनके एक इशारे पर लाखों मर्द उनको पाने के लिए पागल तक हो जाएं ।

दुसरी कोई औरत होती तो मैं कब का ट्राई कर चुका होता । मगर वो मेरी माॅम है । माॅम को भले ही मैं लाख फैंटेसी करूं लेकिन हकीकत में सेक्सुअल रिलेशन बनाना आसान थोड़ी न था । माॅम के साथ सेक्स करना हवाई किले बनाने जैसा था ।

लेकिन आज जो कुछ भी हुआ था , उसमें मुझे आशा की एक किरण दिखाई देने लगी थी ।

फिर मैंने अपना दिमाग इन सब बातों से हटा कर रमणीक लाल की तरफ लगाया । मैंने उसे फ़ोन किया । उसने मुझे अभी तुरंत मिलने के लिए कहा ।

मैंने कमरे से बाहर देखा । बारिश अभी भी हो रही थी लेकिन उसकी रफ़्तार अब धिमी हो गई थी । मैंने उससे मिलने को सोचा । मगर मेरा जांघिया और गंजी दोनों अभी तक भींगा हुआ था ।

मैंने बिना जांघिया और गंजी के ही पैंट शर्ट पहन लिया और माॅम को बोलकर घर से बाहर निकल गया । बाइक तो खराब पड़ी थी और डैड अभी तक आये नहीं थे । इसलिए मैंने बस पकड़ी और रमणीक लाल से मिलने चला गया ।

रमणीक लाल से मिलने और बातें करने में काफी वक्त लग गया । जब मैं घर पहुंचा तब शाम के पांच बज गए थे । रीतु भी घर आ गई थी । माॅम ने अपनी नाइटी चेंज कर ली थी । अब वो पहली वाली पुरे शरीर को ढकने वाली नाइटी पहन रखी थी ।

बारिश बंद हो गई थी । मैं आज क्लब नहीं जाना चाहता था क्योंकि रीतु और राहुल को शोपिंग करवाना था । मैंने क्लब फोन करके आज नहीं आने की सूचना दे दी ।

छः बजे तक डैड आ गए । डैड के आने के बाद मैं रीतु और राहुल को लेकर कार से मार्केट चला गया ।

मार्केट में भी बहुत समय लग गया । नौ बजे हम लोग घर पहुंचे । फिर सभी ने खाना खाया पिया और रीतु माॅम को लेकर अपनी पैकिंग में लग गई । डैड अपने कमरे में चले गए । मैं भी ऊपर अपने कमरे में चला गया ।

मैंने अपने कपड़े चेंज किए।

एक सिगरेट सुलगाया और काजल को फोन लगाया । चार रिंग होने के बाद उसने फोन उठाया ।

" हैलो !" - काजल की आवाज आई ।

" हैलो । क्या कर रही है ?"

" खास कुछ नहीं । पैकिंग कर रही थी ।"

" हो गई पैकिंग ?"

" हूं ।"

" तुमने तो अच्छा उल्लू बनाया मुझे ?"

" मैं क्या करती भैया , मेरा जाने का एक परसेंट भी मन नहीं था लेकिन मेरी कजिन ने इतना प्रेशर किया कि क्या बोलूं ।"

" कोई बात नहीं । कजन की शादी में तुम्हें जरूर जाना चाहिए था । तुमने अच्छा डिसिजन लिया ।"

" हम्म । लेकिन हमने इतने दिनों से ' वो ' प्लानिंग किया था , वो सब गुण गोबर हो गया न ।"

" अच्छा ! हमने ' वो ' प्लानिंग किया था । वैसे क्या ' वो ' प्लानिंग किया था ?" - मैंने उसे छेड़ते हुए कहा ।

" वही " - वो खिलखिलाती हुई बोली ।

" क्या वही ? बोल न मेरी प्यारी चहेती बहन ?"

" मेरी मुनिया से तुम्हारे मुन्ने की दोस्ती ।"

" क्या बोल रही है ? ऐसे कोड भाषा में मुझे समझ नहीं आएगा ।"

वो फुसफुसा कर कामुक स्वर में बोली -" मेरी मुनिया मतलब तुम्हारी काजल की चूत और तुम्हारा मुन्ना मतलब तुम्हारा लन्ड । समझे मेरे चोदू भाई ।"

" समझ गया मेरी चुदक्कड़ बहन । जयपुर से लौट कर आ फिर तेरी चूत फाड़ता हूं " - मैंने अपना लन्ड सहलाते हुए कहा ।

" जरूर मेरे चोदू भाई । तुम्हारी बहन की चूत चोदू भाई के लन्ड का इंतजार करेगी । "

" मैं भी इन्तजार करूंगा । चल अब फोन रख , कल बस स्टैंड पर मुलाकात होगी ।"

" जानते हो आज रीतु ने एक जोक सुनाई थी ।"

" कैसा जोक ?"

" सुनाऊं ?"

" सुना ।"

" एक लड़का आगरा रेलवे स्टेशन से फरीदाबाद अपने घर आने के लिए दिल्ली तक आने वाली ट्रेन में बैठा । जब वह अपने रिजर्वेशन कोच में आया तो वहां उसने एक बहुत ही सुन्दर लड़की को खिड़की के पास बैठे हुए पाया । उसका सीट उस लड़की के ठीक अपोजिट था । वो लड़की भी उसी की तरह अकेले जर्नी कर रही थी । वहां कुछ और लोग भी बैठे हुए थे । लड़का उस हसीना की खुबसूरती देखकर सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी गर्लफ्रेंड होती । वो उस लड़की से बातें करना चाहता था लेकिन वहां और भी कई लोग थे इसलिए वो हिम्मत नहीं जुटा पाता था । जब ट्रेन में बैठे हुए बहुत समय हो गया तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा रिस्क ले ही लूं । वो उस लड़की का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बहुत सारी हरकतें करने लगा लेकिन ऐसे जैसे सिर्फ लड़की ही देख पाए । लड़की भी उस की सारी हरकतें देख रही थी और मन ही मन कुढ़ रही थी । ऐसे करते करते फरीदाबाद स्टेशन आ गया । लेकिन बेचारा वो लड़की से बात नहीं ही कर पाया । उसे अब वहीं उतरना था । लेकिन लड़की को अभी आगे दिल्ली तक जाना था । लड़का मन मसोस कर ट्रेन से उतर गया । वो प्लेटफार्म पर आ गया । उसने देखा वो लड़की उसी की तरफ देख रही है । लड़के ने एक बार और हिम्मत की और उस लड़की के पास जो खिड़की से बाहर देख रही थी , गया । लड़की ने उसे खिड़की से घूर कर देखा । लड़का उसके खिड़की के पास गया और बोला - " मैडम , क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं ?" लड़की ने गुस्से से उस लड़के को देखा और बोली - " मेरा नाम बहन जी है ।" लड़का बेचारा दुखी हो गया । तब तक ट्रेन भी खूल चुकी थी । लड़का ट्रेन के साथ साथ चलते हुए कहा -" मैडम , आपने मेरा नाम तो पुछा ही नहीं ।" लड़की क्रोधित होकर बोली -" क्या नाम है तुम्हारा ? तो लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा - " मेरा नाम बहनचोद है ।" लड़की गुस्से में कुछ कहती इससे पहले ही ट्रेन की गति काफी तेज हो गई ।"

मैं सुनकर भौंचक्का रह गया । रीतु ने ऐसा जोक काजल को सुनाया था । अभी मैं उसे कुछ बोलता तभी ' मम्मी बुला रही है ' कहकर उसने फोन काट दिया ।
 
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nice update ....mom kya kar rahi hai kitchen me ? jo sagar chownk gaya ... lagta hai mom ko bhi shant karna padega ,,kitabe padhke chachi ki tarah mom bhi garam hoti hogi na ??
Thank you Mahadev Ji for reading and supporting.. posts updated...Mom bhi shant hogi.
 
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