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Bahut hi sundar updateUpdate 23 Continue.
माॅम की पीठ मेरी तरफ थी । वो किचन स्लैब के सामने खड़ी खाना बना रही थी । मैं उनके वस्त्र को देखकर बुरी तरह चौंक गया । उन्होंने वो नाइटी पहन रखी थी जो मैंने श्वेता दी के लिए लाया था । वो नाइटी उनके भरे बदन पर घुटने से थोड़ी ही उपर थी । पीछे से उनकी पीठ का साठ प्रतिशत हिस्सा खुला हुआ था । मैं उनकी गोरी अधनंगी पीठ और घुटने से नीचे नंगी पिंडलियों को देखकर भौंचक्का रह गया । इस रूप में मैंने उन्हें पहले कभी देखा नहीं था । लगता था कि जैसे कोई सेक्स की देवी खड़ी हो कर अपने जलवे बिखेर रही हो ।
वो पलटी और मुझे देखकर मुस्कराई । सामने का सीन देखकर तो मेरा कलेजा हलक तक आ पहुंचा । मेरे मुंह के साथ साथ लिंग में भी पानी आ गया ।
उनके दोनों कन्धों पर एक बारिकी सा स्ट्रिप था जो उनके दोनों बड़े बड़े सीना ताने वक्ष को बड़ी मुश्किल से सम्हाले हुए रखा था । सीने का लगभग पचास प्रतिशत उपरी हिस्सा नंगा था । मेरी आंखें जड़ हो गई । मेरी नजरें उनकी छाती से चुम्बक की तरह चिपक गई । और मेरा लन्ड खड़ा हो गया जबकि में चाची को तीन तीन बार चोद कर आया था । मैंने अपनी जिंदगी में इतनी खूबसूरत और सेक्सी गोलाईयां नहीं देखी थी ।
मैं मंत्र मुग्ध हो कर उनकी सेक्सी काया को निहारते जा रहा था ।
" खाना निकालूं ?"
उनकी आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।
मैं उनकी आंखों में देखते हुए कहा -" वाओ ! क्या लग रही हो माॅम ।'
उन्होंने शरमाते हुए कहा -" खराब लग रही हूं ना ?"
" अरे नहीं माॅम बहुत बहुत अच्छी लग रही हो । एकदम हाॅट । क्या बोलूं , निशब्द ।"
" मजाक मत कर । एक दम गन्दी लग रही हूं , मुझे पता है ।"
" मजाक नहीं कर रहा हूं । सच बोल रहा हूं । अगर इस रूप में आपको मूवी वाले देख लें तो हिरोइन का आफर कर दें । डैड तो पागल हो जायेंगे ।"
" बकवास बंद कर । मैं खाना निकालती हूं । चल , बाहर हाॅल में बैठ । मैं खाना लेकर आ रही हूं ।"
" हाॅल में छोड़ो । यहीं नीचे बैठ कर खा लेता हूं ।"
मैं दरवाजे से अन्दर गया । हमारा किचन काफी बड़ा था । नीचे जमीन पर दो लकड़ी के छोटे छोटे तख्त थे । उनमें से एक लेकर दरवाजे के दाहिने तरफ दिवाल से सट कर बैठ गया ।
माॅम ने खाना निकाल कर मेरे आगे रख दिया और खुद भी मेरे अपोजिट एक तख्त लेकर अपना खाना लेकर नीचे बैठ गई । मेरा चेहरा किचन के अन्दर की तरफ था जबकि माॅम का चेहरा मेरी और किचन के दरवाजे की तरफ था । वो पालथी मारे बैठी थी जबकि मैं अपने दोनों घुटने खोले बैठा था ।
खाना खाते हुए ही हम बातें भी करते जा रहे थे । मैंने रीतु वाली बात बताई और ये भी बताया कि उसके साथ राहुल भी जयपुर जायेगा । वो ये खबर सुनकर खुश और निश्चित हो गई कि राहुल भी साथ में जा रहा है ।
खाना खाते समय मैं उनके खुले अंगों को चुपके चुपके निहार भी रहा था । खाने के उपरांत जब मैं हाथ धोने के लिए खड़ा होने लगा तभी मेरी नजर अपने पहने हुए तौलिए पर पड़ी । दोनों घुटने अलग करके बैठने के कारण तौलिया में एक छोटा सा गैप हो गया था । जिससे तौलिया के अन्दर मेरा लन्ड ओपन हो गया था ।
मैं हड़बड़ा कर उठा और तौलिया को एडजस्ट करते हुए वाश बेसिन भागा और जल्दी से हाथ मूंह धोकर अपने कमरे चला गया ।
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था । माॅम ने तौलिया के अन्दर से मेरे झांकते हुए लन्ड को जरूर देखा होगा । भले ही मेरा लन्ड पुरी तरह से खड़ा नहीं हुआ हो लेकिन माॅम के सेक्सी अवतार को देखकर थोड़ा कठोर तो हो ही गया था ।
उन्होंने शर्तिया मेरा लन्ड देखा था । भले ही मैंने जानबूझ कर नहीं देखाया हो । लेकिन उन्होंने देख तो लिया ही , फिर भी उन्होंने मुझे टोका क्यों नहीं ? और यदि टोकती भी तो क्या टोकती ? कि मेरा लन्ड तौलिया के गैप से दिख रहा है । ऐसा तो वह कह ही नहीं सकती ।
और उन्होंने आज ये रिविलिंग नाइटी क्यों पहन रखी है ? उन्होंने कहा था कि मुझे ये वाहियात नाइटी पसन्द ही नहीं है । ऐसी नाइटी तो औरतें सिर्फ अपने पति या ब्वायफ़्रेंड के समक्ष पहनती हैं । फिर मेरे सामने क्यों पहनी ?
आज जो बातें चाची ने बताई थी उससे ये बात तो क्लियर हो गई थी कि मेरी गन्दी किताबें माॅम ही गायब करती थी । और गायब ही नहीं बल्कि पढ़ती भी थी । और पढ़ने के बाद उसे चाची को सौंप देती थी । चाची ने ये भी बताई थी कि उन्हीं की तरह माॅम का भी सेक्सुअल रिलेशनशिप दस सालों से नहीं हुआ है । डैड की सेक्सुअल क्षमता खत्म हो चुकी थी । उन्होंने माॅम के साथ दस सालों से सेक्स नहीं किया है ।
और जैसी किताबें वो पढ़ती थी उसमें तो वो कामाग्नि के ज्वाला से जल भुन जाती होंगी । अपनी सेक्सुअल भूख को कैसे शांत करती होंगी ? क्या हस्त मैथुन करती होंगी ? या गाजर , मूली , केले आदि का इस्तेमाल करती होंगी ।
सुन्दर और हसीं तो इतनी है कि उनके एक इशारे पर लाखों मर्द उनको पाने के लिए पागल तक हो जाएं ।
दुसरी कोई औरत होती तो मैं कब का ट्राई कर चुका होता । मगर वो मेरी माॅम है । माॅम को भले ही मैं लाख फैंटेसी करूं लेकिन हकीकत में सेक्सुअल रिलेशन बनाना आसान थोड़ी न था । माॅम के साथ सेक्स करना हवाई किले बनाने जैसा था ।
लेकिन आज जो कुछ भी हुआ था , उसमें मुझे आशा की एक किरण दिखाई देने लगी थी ।
फिर मैंने अपना दिमाग इन सब बातों से हटा कर रमणीक लाल की तरफ लगाया । मैंने उसे फ़ोन किया । उसने मुझे अभी तुरंत मिलने के लिए कहा ।
मैंने कमरे से बाहर देखा । बारिश अभी भी हो रही थी लेकिन उसकी रफ़्तार अब धिमी हो गई थी । मैंने उससे मिलने को सोचा । मगर मेरा जांघिया और गंजी दोनों अभी तक भींगा हुआ था ।
मैंने बिना जांघिया और गंजी के ही पैंट शर्ट पहन लिया और माॅम को बोलकर घर से बाहर निकल गया । बाइक तो खराब पड़ी थी और डैड अभी तक आये नहीं थे । इसलिए मैंने बस पकड़ी और रमणीक लाल से मिलने चला गया ।
रमणीक लाल से मिलने और बातें करने में काफी वक्त लग गया । जब मैं घर पहुंचा तब शाम के पांच बज गए थे । रीतु भी घर आ गई थी । माॅम ने अपनी नाइटी चेंज कर ली थी । अब वो पहली वाली पुरे शरीर को ढकने वाली नाइटी पहन रखी थी ।
बारिश बंद हो गई थी । मैं आज क्लब नहीं जाना चाहता था क्योंकि रीतु और राहुल को शोपिंग करवाना था । मैंने क्लब फोन करके आज नहीं आने की सूचना दे दी ।
छः बजे तक डैड आ गए । डैड के आने के बाद मैं रीतु और राहुल को लेकर कार से मार्केट चला गया ।
मार्केट में भी बहुत समय लग गया । नौ बजे हम लोग घर पहुंचे । फिर सभी ने खाना खाया पिया और रीतु माॅम को लेकर अपनी पैकिंग में लग गई । डैड अपने कमरे में चले गए । मैं भी ऊपर अपने कमरे में चला गया ।
मैंने अपने कपड़े चेंज किए।
एक सिगरेट सुलगाया और काजल को फोन लगाया । चार रिंग होने के बाद उसने फोन उठाया ।
" हैलो !" - काजल की आवाज आई ।
" हैलो । क्या कर रही है ?"
" खास कुछ नहीं । पैकिंग कर रही थी ।"
" हो गई पैकिंग ?"
" हूं ।"
" तुमने तो अच्छा उल्लू बनाया मुझे ?"
" मैं क्या करती भैया , मेरा जाने का एक परसेंट भी मन नहीं था लेकिन मेरी कजिन ने इतना प्रेशर किया कि क्या बोलूं ।"
" कोई बात नहीं । कजन की शादी में तुम्हें जरूर जाना चाहिए था । तुमने अच्छा डिसिजन लिया ।"
" हम्म । लेकिन हमने इतने दिनों से ' वो ' प्लानिंग किया था , वो सब गुण गोबर हो गया न ।"
" अच्छा ! हमने ' वो ' प्लानिंग किया था । वैसे क्या ' वो ' प्लानिंग किया था ?" - मैंने उसे छेड़ते हुए कहा ।
" वही " - वो खिलखिलाती हुई बोली ।
" क्या वही ? बोल न मेरी प्यारी चहेती बहन ?"
" मेरी मुनिया से तुम्हारे मुन्ने की दोस्ती ।"
" क्या बोल रही है ? ऐसे कोड भाषा में मुझे समझ नहीं आएगा ।"
वो फुसफुसा कर कामुक स्वर में बोली -" मेरी मुनिया मतलब तुम्हारी काजल की चूत और तुम्हारा मुन्ना मतलब तुम्हारा लन्ड । समझे मेरे चोदू भाई ।"
" समझ गया मेरी चुदक्कड़ बहन । जयपुर से लौट कर आ फिर तेरी चूत फाड़ता हूं " - मैंने अपना लन्ड सहलाते हुए कहा ।
" जरूर मेरे चोदू भाई । तुम्हारी बहन की चूत चोदू भाई के लन्ड का इंतजार करेगी । "
" मैं भी इन्तजार करूंगा । चल अब फोन रख , कल बस स्टैंड पर मुलाकात होगी ।"
" जानते हो आज रीतु ने एक जोक सुनाई थी ।"
" कैसा जोक ?"
" सुनाऊं ?"
" सुना ।"
" एक लड़का आगरा रेलवे स्टेशन से फरीदाबाद अपने घर आने के लिए दिल्ली तक आने वाली ट्रेन में बैठा । जब वह अपने रिजर्वेशन कोच में आया तो वहां उसने एक बहुत ही सुन्दर लड़की को खिड़की के पास बैठे हुए पाया । उसका सीट उस लड़की के ठीक अपोजिट था । वो लड़की भी उसी की तरह अकेले जर्नी कर रही थी । वहां कुछ और लोग भी बैठे हुए थे । लड़का उस हसीना की खुबसूरती देखकर सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी गर्लफ्रेंड होती । वो उस लड़की से बातें करना चाहता था लेकिन वहां और भी कई लोग थे इसलिए वो हिम्मत नहीं जुटा पाता था । जब ट्रेन में बैठे हुए बहुत समय हो गया तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा रिस्क ले ही लूं । वो उस लड़की का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बहुत सारी हरकतें करने लगा लेकिन ऐसे जैसे सिर्फ लड़की ही देख पाए । लड़की भी उस की सारी हरकतें देख रही थी और मन ही मन कुढ़ रही थी । ऐसे करते करते फरीदाबाद स्टेशन आ गया । लेकिन बेचारा वो लड़की से बात नहीं ही कर पाया । उसे अब वहीं उतरना था । लेकिन लड़की को अभी आगे दिल्ली तक जाना था । लड़का मन मसोस कर ट्रेन से उतर गया । वो प्लेटफार्म पर आ गया । उसने देखा वो लड़की उसी की तरफ देख रही है । लड़के ने एक बार और हिम्मत की और उस लड़की के पास जो खिड़की से बाहर देख रही थी , गया । लड़की ने उसे खिड़की से घूर कर देखा । लड़का उसके खिड़की के पास गया और बोला - " मैडम , क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं ?" लड़की ने गुस्से से उस लड़के को देखा और बोली - " मेरा नाम बहन जी है ।" लड़का बेचारा दुखी हो गया । तब तक ट्रेन भी खूल चुकी थी । लड़का ट्रेन के साथ साथ चलते हुए कहा -" मैडम , आपने मेरा नाम तो पुछा ही नहीं ।" लड़की क्रोधित होकर बोली -" क्या नाम है तुम्हारा ? तो लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा - " मेरा नाम बहनचोद है ।" लड़की गुस्से में कुछ कहती इससे पहले ही ट्रेन की गति काफी तेज हो गई ।"
मैं सुनकर भौंचक्का रह गया । रीतु ने ऐसा जोक काजल को सुनाया था । अभी मैं उसे कुछ बोलता तभी ' मम्मी बुला रही है ' कहकर उसने फोन काट दिया ।
Nice updateUpdate 23 Continue.
माॅम की पीठ मेरी तरफ थी । वो किचन स्लैब के सामने खड़ी खाना बना रही थी । मैं उनके वस्त्र को देखकर बुरी तरह चौंक गया । उन्होंने वो नाइटी पहन रखी थी जो मैंने श्वेता दी के लिए लाया था । वो नाइटी उनके भरे बदन पर घुटने से थोड़ी ही उपर थी । पीछे से उनकी पीठ का साठ प्रतिशत हिस्सा खुला हुआ था । मैं उनकी गोरी अधनंगी पीठ और घुटने से नीचे नंगी पिंडलियों को देखकर भौंचक्का रह गया । इस रूप में मैंने उन्हें पहले कभी देखा नहीं था । लगता था कि जैसे कोई सेक्स की देवी खड़ी हो कर अपने जलवे बिखेर रही हो ।
वो पलटी और मुझे देखकर मुस्कराई । सामने का सीन देखकर तो मेरा कलेजा हलक तक आ पहुंचा । मेरे मुंह के साथ साथ लिंग में भी पानी आ गया ।
उनके दोनों कन्धों पर एक बारिकी सा स्ट्रिप था जो उनके दोनों बड़े बड़े सीना ताने वक्ष को बड़ी मुश्किल से सम्हाले हुए रखा था । सीने का लगभग पचास प्रतिशत उपरी हिस्सा नंगा था । मेरी आंखें जड़ हो गई । मेरी नजरें उनकी छाती से चुम्बक की तरह चिपक गई । और मेरा लन्ड खड़ा हो गया जबकि में चाची को तीन तीन बार चोद कर आया था । मैंने अपनी जिंदगी में इतनी खूबसूरत और सेक्सी गोलाईयां नहीं देखी थी ।
मैं मंत्र मुग्ध हो कर उनकी सेक्सी काया को निहारते जा रहा था ।
" खाना निकालूं ?"
उनकी आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।
मैं उनकी आंखों में देखते हुए कहा -" वाओ ! क्या लग रही हो माॅम ।'
उन्होंने शरमाते हुए कहा -" खराब लग रही हूं ना ?"
" अरे नहीं माॅम बहुत बहुत अच्छी लग रही हो । एकदम हाॅट । क्या बोलूं , निशब्द ।"
" मजाक मत कर । एक दम गन्दी लग रही हूं , मुझे पता है ।"
" मजाक नहीं कर रहा हूं । सच बोल रहा हूं । अगर इस रूप में आपको मूवी वाले देख लें तो हिरोइन का आफर कर दें । डैड तो पागल हो जायेंगे ।"
" बकवास बंद कर । मैं खाना निकालती हूं । चल , बाहर हाॅल में बैठ । मैं खाना लेकर आ रही हूं ।"
" हाॅल में छोड़ो । यहीं नीचे बैठ कर खा लेता हूं ।"
मैं दरवाजे से अन्दर गया । हमारा किचन काफी बड़ा था । नीचे जमीन पर दो लकड़ी के छोटे छोटे तख्त थे । उनमें से एक लेकर दरवाजे के दाहिने तरफ दिवाल से सट कर बैठ गया ।
माॅम ने खाना निकाल कर मेरे आगे रख दिया और खुद भी मेरे अपोजिट एक तख्त लेकर अपना खाना लेकर नीचे बैठ गई । मेरा चेहरा किचन के अन्दर की तरफ था जबकि माॅम का चेहरा मेरी और किचन के दरवाजे की तरफ था । वो पालथी मारे बैठी थी जबकि मैं अपने दोनों घुटने खोले बैठा था ।
खाना खाते हुए ही हम बातें भी करते जा रहे थे । मैंने रीतु वाली बात बताई और ये भी बताया कि उसके साथ राहुल भी जयपुर जायेगा । वो ये खबर सुनकर खुश और निश्चित हो गई कि राहुल भी साथ में जा रहा है ।
खाना खाते समय मैं उनके खुले अंगों को चुपके चुपके निहार भी रहा था । खाने के उपरांत जब मैं हाथ धोने के लिए खड़ा होने लगा तभी मेरी नजर अपने पहने हुए तौलिए पर पड़ी । दोनों घुटने अलग करके बैठने के कारण तौलिया में एक छोटा सा गैप हो गया था । जिससे तौलिया के अन्दर मेरा लन्ड ओपन हो गया था ।
मैं हड़बड़ा कर उठा और तौलिया को एडजस्ट करते हुए वाश बेसिन भागा और जल्दी से हाथ मूंह धोकर अपने कमरे चला गया ।
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था । माॅम ने तौलिया के अन्दर से मेरे झांकते हुए लन्ड को जरूर देखा होगा । भले ही मेरा लन्ड पुरी तरह से खड़ा नहीं हुआ हो लेकिन माॅम के सेक्सी अवतार को देखकर थोड़ा कठोर तो हो ही गया था ।
उन्होंने शर्तिया मेरा लन्ड देखा था । भले ही मैंने जानबूझ कर नहीं देखाया हो । लेकिन उन्होंने देख तो लिया ही , फिर भी उन्होंने मुझे टोका क्यों नहीं ? और यदि टोकती भी तो क्या टोकती ? कि मेरा लन्ड तौलिया के गैप से दिख रहा है । ऐसा तो वह कह ही नहीं सकती ।
और उन्होंने आज ये रिविलिंग नाइटी क्यों पहन रखी है ? उन्होंने कहा था कि मुझे ये वाहियात नाइटी पसन्द ही नहीं है । ऐसी नाइटी तो औरतें सिर्फ अपने पति या ब्वायफ़्रेंड के समक्ष पहनती हैं । फिर मेरे सामने क्यों पहनी ?
आज जो बातें चाची ने बताई थी उससे ये बात तो क्लियर हो गई थी कि मेरी गन्दी किताबें माॅम ही गायब करती थी । और गायब ही नहीं बल्कि पढ़ती भी थी । और पढ़ने के बाद उसे चाची को सौंप देती थी । चाची ने ये भी बताई थी कि उन्हीं की तरह माॅम का भी सेक्सुअल रिलेशनशिप दस सालों से नहीं हुआ है । डैड की सेक्सुअल क्षमता खत्म हो चुकी थी । उन्होंने माॅम के साथ दस सालों से सेक्स नहीं किया है ।
और जैसी किताबें वो पढ़ती थी उसमें तो वो कामाग्नि के ज्वाला से जल भुन जाती होंगी । अपनी सेक्सुअल भूख को कैसे शांत करती होंगी ? क्या हस्त मैथुन करती होंगी ? या गाजर , मूली , केले आदि का इस्तेमाल करती होंगी ।
सुन्दर और हसीं तो इतनी है कि उनके एक इशारे पर लाखों मर्द उनको पाने के लिए पागल तक हो जाएं ।
दुसरी कोई औरत होती तो मैं कब का ट्राई कर चुका होता । मगर वो मेरी माॅम है । माॅम को भले ही मैं लाख फैंटेसी करूं लेकिन हकीकत में सेक्सुअल रिलेशन बनाना आसान थोड़ी न था । माॅम के साथ सेक्स करना हवाई किले बनाने जैसा था ।
लेकिन आज जो कुछ भी हुआ था , उसमें मुझे आशा की एक किरण दिखाई देने लगी थी ।
फिर मैंने अपना दिमाग इन सब बातों से हटा कर रमणीक लाल की तरफ लगाया । मैंने उसे फ़ोन किया । उसने मुझे अभी तुरंत मिलने के लिए कहा ।
मैंने कमरे से बाहर देखा । बारिश अभी भी हो रही थी लेकिन उसकी रफ़्तार अब धिमी हो गई थी । मैंने उससे मिलने को सोचा । मगर मेरा जांघिया और गंजी दोनों अभी तक भींगा हुआ था ।
मैंने बिना जांघिया और गंजी के ही पैंट शर्ट पहन लिया और माॅम को बोलकर घर से बाहर निकल गया । बाइक तो खराब पड़ी थी और डैड अभी तक आये नहीं थे । इसलिए मैंने बस पकड़ी और रमणीक लाल से मिलने चला गया ।
रमणीक लाल से मिलने और बातें करने में काफी वक्त लग गया । जब मैं घर पहुंचा तब शाम के पांच बज गए थे । रीतु भी घर आ गई थी । माॅम ने अपनी नाइटी चेंज कर ली थी । अब वो पहली वाली पुरे शरीर को ढकने वाली नाइटी पहन रखी थी ।
बारिश बंद हो गई थी । मैं आज क्लब नहीं जाना चाहता था क्योंकि रीतु और राहुल को शोपिंग करवाना था । मैंने क्लब फोन करके आज नहीं आने की सूचना दे दी ।
छः बजे तक डैड आ गए । डैड के आने के बाद मैं रीतु और राहुल को लेकर कार से मार्केट चला गया ।
मार्केट में भी बहुत समय लग गया । नौ बजे हम लोग घर पहुंचे । फिर सभी ने खाना खाया पिया और रीतु माॅम को लेकर अपनी पैकिंग में लग गई । डैड अपने कमरे में चले गए । मैं भी ऊपर अपने कमरे में चला गया ।
मैंने अपने कपड़े चेंज किए।
एक सिगरेट सुलगाया और काजल को फोन लगाया । चार रिंग होने के बाद उसने फोन उठाया ।
" हैलो !" - काजल की आवाज आई ।
" हैलो । क्या कर रही है ?"
" खास कुछ नहीं । पैकिंग कर रही थी ।"
" हो गई पैकिंग ?"
" हूं ।"
" तुमने तो अच्छा उल्लू बनाया मुझे ?"
" मैं क्या करती भैया , मेरा जाने का एक परसेंट भी मन नहीं था लेकिन मेरी कजिन ने इतना प्रेशर किया कि क्या बोलूं ।"
" कोई बात नहीं । कजन की शादी में तुम्हें जरूर जाना चाहिए था । तुमने अच्छा डिसिजन लिया ।"
" हम्म । लेकिन हमने इतने दिनों से ' वो ' प्लानिंग किया था , वो सब गुण गोबर हो गया न ।"
" अच्छा ! हमने ' वो ' प्लानिंग किया था । वैसे क्या ' वो ' प्लानिंग किया था ?" - मैंने उसे छेड़ते हुए कहा ।
" वही " - वो खिलखिलाती हुई बोली ।
" क्या वही ? बोल न मेरी प्यारी चहेती बहन ?"
" मेरी मुनिया से तुम्हारे मुन्ने की दोस्ती ।"
" क्या बोल रही है ? ऐसे कोड भाषा में मुझे समझ नहीं आएगा ।"
वो फुसफुसा कर कामुक स्वर में बोली -" मेरी मुनिया मतलब तुम्हारी काजल की चूत और तुम्हारा मुन्ना मतलब तुम्हारा लन्ड । समझे मेरे चोदू भाई ।"
" समझ गया मेरी चुदक्कड़ बहन । जयपुर से लौट कर आ फिर तेरी चूत फाड़ता हूं " - मैंने अपना लन्ड सहलाते हुए कहा ।
" जरूर मेरे चोदू भाई । तुम्हारी बहन की चूत चोदू भाई के लन्ड का इंतजार करेगी । "
" मैं भी इन्तजार करूंगा । चल अब फोन रख , कल बस स्टैंड पर मुलाकात होगी ।"
" जानते हो आज रीतु ने एक जोक सुनाई थी ।"
" कैसा जोक ?"
" सुनाऊं ?"
" सुना ।"
" एक लड़का आगरा रेलवे स्टेशन से फरीदाबाद अपने घर आने के लिए दिल्ली तक आने वाली ट्रेन में बैठा । जब वह अपने रिजर्वेशन कोच में आया तो वहां उसने एक बहुत ही सुन्दर लड़की को खिड़की के पास बैठे हुए पाया । उसका सीट उस लड़की के ठीक अपोजिट था । वो लड़की भी उसी की तरह अकेले जर्नी कर रही थी । वहां कुछ और लोग भी बैठे हुए थे । लड़का उस हसीना की खुबसूरती देखकर सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी गर्लफ्रेंड होती । वो उस लड़की से बातें करना चाहता था लेकिन वहां और भी कई लोग थे इसलिए वो हिम्मत नहीं जुटा पाता था । जब ट्रेन में बैठे हुए बहुत समय हो गया तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा रिस्क ले ही लूं । वो उस लड़की का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बहुत सारी हरकतें करने लगा लेकिन ऐसे जैसे सिर्फ लड़की ही देख पाए । लड़की भी उस की सारी हरकतें देख रही थी और मन ही मन कुढ़ रही थी । ऐसे करते करते फरीदाबाद स्टेशन आ गया । लेकिन बेचारा वो लड़की से बात नहीं ही कर पाया । उसे अब वहीं उतरना था । लेकिन लड़की को अभी आगे दिल्ली तक जाना था । लड़का मन मसोस कर ट्रेन से उतर गया । वो प्लेटफार्म पर आ गया । उसने देखा वो लड़की उसी की तरफ देख रही है । लड़के ने एक बार और हिम्मत की और उस लड़की के पास जो खिड़की से बाहर देख रही थी , गया । लड़की ने उसे खिड़की से घूर कर देखा । लड़का उसके खिड़की के पास गया और बोला - " मैडम , क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं ?" लड़की ने गुस्से से उस लड़के को देखा और बोली - " मेरा नाम बहन जी है ।" लड़का बेचारा दुखी हो गया । तब तक ट्रेन भी खूल चुकी थी । लड़का ट्रेन के साथ साथ चलते हुए कहा -" मैडम , आपने मेरा नाम तो पुछा ही नहीं ।" लड़की क्रोधित होकर बोली -" क्या नाम है तुम्हारा ? तो लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा - " मेरा नाम बहनचोद है ।" लड़की गुस्से में कुछ कहती इससे पहले ही ट्रेन की गति काफी तेज हो गई ।"
मैं सुनकर भौंचक्का रह गया । रीतु ने ऐसा जोक काजल को सुनाया था । अभी मैं उसे कुछ बोलता तभी ' मम्मी बुला रही है ' कहकर उसने फोन काट दिया ।
This is humorous.मैं - हैलो डार्लिंग ! कहां हो ?
मैसेज करते ही काजल का जवाब आ गया ।
काजल - घर पर हूं । और बहन से सीधे डार्लिंग ?
मैं - घर पर ? कालेज नहीं गयी ?
काजल - नहीं । मम्मी की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी इसलिए नहीं गई ।
मैं - क्या हुआ उन्हें ?
काजल - कमर का दर्द ।
मैं - ओह ! तब तो रीतु भी नहीं गई होगी , वो भी तेरे ही साथ होगी ।
काजल - नहीं । मैंने उसे बताया था कि मैं आज नहीं आऊंगी । वो कालेज
मैं -
जैसे कि मैंने पहले सोचा था मैं भी बड़े बड़े राइटरों की तरह ये कर सकता हूं... वो कर सकता हूं... फलां कर सकता हूं...ढिकड़ी कर सकता हूं...... लेकिन सच कहूं तो कुछ भी नहीं कर सकता हूं... यहां एक से बढ़कर एक धुरंधर खिलाड़ी हैं... मुझे तो बहुत पहले ही अपनी औकात समझ में आ गई थी । वो तो मैं उस मनहूस लाॅक डाउन घड़ी को कोसता हूं कि कहां आ के फंस गया... कितना अच्छा साइलेंट रीडर था... लेखनी का भुत सवार हो गया और लिखना शुरू कर दिया । खैर जब लिखना शुरू कर ही दिया है तो इतिश्री भी जरूर ही करूंगा । और आप मेरा खुन बाकी लेखकों की रचनाओं पर मेरे द्वारा किए गए कमेन्टस पर भी कर सकते हैं ?
शुक्रिया दोस्त ?