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Incest Sagar (Completed)

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NICE UPDATE BHAI

AGLA UPDATE JLDI DENE KI KOSHISH KRO
शुक्रिया राज भाई ?
हमारे यहां यानी बंगाल में शुक्रवार और शनिवार दो दिन लगातार लाॅक डॉउन है तो पुरा कोशिश करूंगा कि इस सप्ताह दो-तीन अपडेट दे सकूं ।
 

imdelta

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Update 25. Continue.


दस बजे के आसपास मैं गोल्डन नाईट क्लब पहुंचा ।

बाहर से दिखने में साधारण सा ही लगा लेकिन अंदर की रौनक और रंगीनी देखने लायक थी । पुरे हाॅल में मध्यम रोशनी थी। डांस फ्लोर से डीजे की धुन आ रही थी । कुछ जोड़े वहां डांस करने के बहाने एक दूसरे से अभिसार रत में मशगूल थे । हाॅल के अन्दर कई टेबल दो चार कुर्सियों सहित थोड़ी थोड़ी दुरी पर लगे हुए थे । कुछ लोग जोड़े में बैठे हुए थे तो कुछ सिंगल । अभी हाॅल पुरा भरा हुआ नहीं था ।

मैं कोने में एक खाली टेबल देखकर बैठ गया । मैंने एक बार फिर पुरे हाॅल में नजरें दौड़ाई । वहां जितने भी Steward थे सभी जवान लड़कियां थी । वो पुरे हाॅल में घुम घुम कर अपने कस्टमर को वाइन और भोजन सर्व कर रही थी । सभी लड़कियों का एक ड्रेस कोड था । वे सभी स्कर्ट और टॉप पहने हुए थी । वे जो स्कर्ट पहनी थी वो उनके घुटनों से काफी ऊपर थी । उनकी जांघें दुधिया रोशनी में भी चमक रही थी और टाॅप उनके छातियों पर कसा हुआ था ।

मैं बैठे हुए उन बार बालाओं को ताड़ ही रहा था कि एक लड़की आई और बोली -" गुड इवनिंग सर ! आप को क्या सर्व करूं ?

मैंने उसे देखा । वो एक बीस बाइस साल की स्लिम फिगर की खुबसूरत लड़की थी ।

" सर्व तो आप बहुत कुछ कर सकती हो लेकिन उसके लिए आपको मुझे कम्पनी देनी होगी । मुझे अकेले अकेले वाइन पीने में मजा नहीं आता "- मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

" ह्वाई नाॅट सर ! "- वो भी अपने चेहरे पर गोल्डन जुबली मुस्कान लाते हुए बोली -" लेकिन बील आपको पे करनी होगी ।"

" जरूर । लेकिन आपका एम्पायर कहीं नाराज तो नहीं हो जायेगा आपको यहां बैठे देखकर ?"

" अभी नहीं होगा । अभी तो आधा हाॅल खाली है , हां ग्यारह बजे के बाद जब पुरा हाॅल भर जायेगा तब जरूर नाराज होगा ।"

" जब यहां का हाईलाइट प्रोग्राम शुरू होगा ?"

" हां । जब हाॅट लड़कियों का हाॅट डांस शुरू होगा ।"

" हाॅट तो तुम भी कोई कम नहीं हो ?"

" थैंक्यू लेकिन मेरा फिल्ड अलग है ।"

" ओके । मेरे लिए रेड वाइन विथ सोडा ऐंड वाटर और आपको जो पसंद हो ।"

" राइट सर ! मैं अभी आई ।"

वो चली गई । मैं फिर से पुरे हाॅल को सरसरी निगाह से मुआयना करने लगा ।

पांच मिनट बाद वो आई वाइन और चखने के साथ । सभी चीजें टेबल पर रख कर मेरे बाजू में बैठ गई । वो अपने लिए वोदका लाई थी ।

हमने चियर किया और ग्लास अपने अपने होंठों से लगा लिया ।

" तुमने अपना नाम तो बताया ही नहीं ?"

" आपने जो पुछा नहीं ।"

" अब पुछ लेता हूं । वैसे मेरा नाम सागर है ।"

" मैं श्रेया ।"

" ब्यूटीफुल नेम बिल्कुल तुम्हारी तरह ।"

" थैंक्यू सर । मैंने यहां पहले आपको कभी देखा नहीं ।"

" सही कहा । मैं यहां पहली बार ही आया हूं ।"

मैंने अपने पैंट से सिगरेट का पैकेट निकाला और उसे आफर किया । उसने इनकार कर दिया । मैंने सिगरेट सुलगाई और कहा - "श्रेया , मुझे तुमसे एक फैवर चाहिए !"

लड़की चौंक कर मुझे देखी और बोली -" माफ कीजिएगा सर , मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं ।"

" अरे तुम गलत सोच रही हो । मुझे किसी के बारे में जानकारी चाहिए और यदि सम्भव हो तो मिलना भी ।"

" किस के बारे में ?"- वो संदिग्ध स्वर में बोली ।

" एक वीणा नाम की लड़की है जो यहीं पर काम करती है । वो यहां के कैबरे डांसर लड़कियों में से ही कोई एक है । पर मेरी बदकिस्मती है कि मैं उसे चेहरे से भी नहीं पहचानता ।"

वो अब थोड़ा आश्वस्त हुई ।

" लेकिन इस नाम की कोई भी लड़की यहां काम नहीं करती ।"

" शायद यहां उसने अपना नाम चेंज कर लिया हो ?"

" हो सकता है । लेकिन आपको उससे काम क्या है ?"

" देखो तुम बुरा मत मानना । मै उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता । बस इतना ही कह सकता हूं कि वो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से विलोंग करती है । उसकी बड़ी बहन यहीं दिल्ली में एक करोड़पति की पत्नी है ।"

" ओह ! लेकिन वीणा नाम की लड़की यहां कोई नहीं है , मैं यहां काम करने वाली सारी लड़कियों को जानती हूं ।"

" वो इस ट्रेड में हाल फिलहाल महिने में ही आई है । शायद एकाध साल के भीतर । जब तुम सभी को जानती हो तो ये भी जानती होगी कि कौन कौन सी लड़की हाल के महीनों में यहां ज्वाइन की है ?"

" एक लड़की है तो जिसने आठ महीने पहले ज्वाइन किया है और आज के तारीख में वो यहां की सबसे बेस्ट परफार्मर है । बाकियों से उसकी डिमांड कहीं अधिक है ।"

" कौन ?"- मैंने आशा भरी नजरों से देखा ।

" नेहा ।"

" क्या तुम उससे अभी मिल सकती हो ?"

" अभी उनके परफोर्मेंस में टाईम है । मिल सकती हूं ।"

" तो प्लीज़ एक बार उससे मिलो और ये तस्दीक करो कि वो वीणा है या नहीं ।"

" ओके , मैं मालूम करती हूं वो कहां और किस पोजीशन में है ।"

" थैंक्यू ।"

" लेकिन अगर उसको तुमसे मिलना कबूल नहीं हुआ तो , मैं कुछ नहीं कर सकूंगी ।"

" कर सकोगी । थोड़ा प्यार से समझाना , कहना ये उसी के फायदे के लिए है ।"

" मैं... मैं देखती हूं ।"

उसने अपना ग्लास खत्म किया । फिर वो चली गई ।

मैं ड्रिंक्स और सिगरेट पीते हुए इन्तजार करने लगा ।

लगभग बीस मिनट बाद वो आई । उसके चेहरे के भाव से लग रहा था कि पोजीटिव न्यूज लाई है ।"

वो बैठते हुए एक कागज का परची मुझे पकड़ा दी ।

" क्या है ये ?"

" देखो ?"

मैंने परची खोला । वो किसी जगह का एड्रेस था ।

" ये तो एड्रेस है ।"

" हां । नेहा ही वीणा है । उसने तुम्हें इसी एड्रेस पे कल एक बजे दोपहर में बुलाया है ।"

" थैंक्यू सो मच श्रेया । "

" ओके । अब मुझे जाना होगा । अब भीड़ बढ़ती जा रही है "- वो हाॅल में बढ़ते हुए भीड़ को देखते हुए बोली ।

" अब नहीं लोगी ?"

" नहीं सर । ज्यादा पी लुंगी तो ड्यूटी कैसे करूंगी ।"

" कोई बात नहीं । बील ले आओ । "

" आप क्यों जा रहे हो । अभी तो यहां की असली रौनक बाकी है ।"

" मुझे ये सब पसंद नहीं है ।"

" ओके मैं बील लाती हूं ।"

जब घर पहुंचा तब साढ़े ग्यारह बज गए थे । डैड ने दरवाजा खोला था । माॅम शायद सो गई थी । मैं उपर अपने कमरे में गया और सोने की तैयारी करने लगा ।

***********

अगले दिन समय से पहले ही वीणा के पत्ते पर पहुंच गया । वो मुझे एक बजे बुलाई थी लेकिन मैं बारह बजे ही पहुंच गया ।

मैंने काॅलबेल बजाई ।

कोई जवाब नहीं मिला ।

मैंने दोबारा काॅलबेल बजाई तो भीतर से झुंझलाए से जनाना स्वर में पुछा गया -" कौन है ?"

" मैं ।"- मैंने बोला -" दरवाजा खोलिए ।"

" मैं क्या होता है ? कौन हो ?"

" मैं सागर । कल रात आपने गोल्डन नाईट क्लब में अपने फ्लैट का पता दिया था श्रेया के थ्रू ।"

कुछ देर तक खामोशी छाई रही ।

" ओह ! ठहरो , खोलती हूं ।"

कुछ क्षण बाद दरवाजा खुला और एक बेहद ही खूबसूरत लड़की मुझे चौखट पर दिखाई दी ।

उसने एक तरफ हटकर मुझे भीतर आने दिया और फिर मेरे पीछे दरवाजा बंद कर दिया ।

मैंने देखा कि वो तभी... शायद काॅलबेल की आवाज सुनकर ही...सो के उठी मालूम होती थी । उस घड़ी उसने एक खुले गले की नाइटी पहनी हुई थी जिसमें देखने लायक जो थी... वो काफी दिलकश थी.... बड़ी बड़ी..गोल गोल ।

एकाएक वो घुमी और " अभी आई " कहकर पिछले कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर दी ।

मैं एक सोफे पर बैठ कर सिगरेट पीते हुए उसका इन्तजार करने लगा ।

वो आधे घंटे बाद वापिस लौटी । उस वक्त वो साधारण सलवार सूट पहनी हुई थी । मगर उस ड्रेस में भी वो बला की खूबसूरत लग रही थी । हाईट पांच फुट सात इंच , उम्र शायद तेईस चौबीस , जाफरानी रंगत जैसी त्वचा , बड़ी बड़ी आंखें , तीखे नैन-नक्श , भरे भरे गुलाबी होंठ , फुले हुए गाल , लंबे बाल , मोतियों जैसी दांत , असाधारण रूप से उन्नत वक्ष , उभरे हुए नितम्ब , मांशल जांघ....सब कुछ नम्बर वन...सब कुछ वाह वाह ।

" चाय पियोगे ?"- वो खड़े खड़े ही बोली ।

" जी नहीं शुक्रिया । मैं नाश्ता करके आया हूं ।"

" लेकिन मैंने नहीं किया है । मैं अभी अभी सो कर उठी हूं । "

" ओके ।"

वो फिर गई । थोड़ी देर बाद चाय और स्नैक्स लेकर आई ।

वो एक दूसरे सिंगल सोफे पर बैठ गई । उसने मुझे चाय दिया । मैंने " थैंक्स " कहकर चाय ले लिया ।

" तुम अमर के दोस्त हो ना ?"

मेरे हाथ से चाय की प्याली छलक गई । मैं चौंक कर उसे देखने लगा ।
*******
Ab ye kya twist h.
Dimag ki MBA ho gai h.
 
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Yamraaj

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Update 1 B.

Mom aur Sweta didi se mil kar main apne room jo ki upper talle pe tha gaya aur apne bistar par let gaya. Phir yaad aaya kal gaziabad jana hai to kyon na apne kapde nikal lun. Bistar se uth kar almirah ke taraf gaya aur apne kapde check karne laga. Maine jaise hi kapdon me se apne jeans ka pant aur ek shirt nikalne laga tabhi kuch kitabein sarak kar jamin par gir gayi. Maine niche jhuk kar kitabein uthae. Wo sari kitabein adults thi. Unme kuch to kahani ki thi to kuch picture wale thi. Main unhe samet kar almirah me rakhne hi ja raha tha ki mujhe kuch ajeeb sa laga. Mughe yaad tha ki maine kul 10 kitabein rakhi thi. Main unhe count kiya wo 9 kitabein thi. Main chaunk gaya ye kaise ho sakta hai. Sari almirah chhan li, wo 9 hi thi.1 kahani wali kitab gayab thi.

Maine bhi adults kitabein collage ke jamane se hi padhna shuru kar diya tha. Duniya ke baaki logon ki tarah main bhi incest story pasand karta tha. Baki logon ki tarah shuru shuru me mughe bhi kharab laga. Phir padha achha laga... phir padha aur achha laga...phir padha, ab to bahut hi jyada achha lagne laga. Phir to jaise aadat si ho gayi aur rat me masterbating ka ek jabardast sahara mil gaya.

Baki logon ki tarah main bhi apne mom bahno aur relative Ko kalpanao me apne bistar ka ankshaynee banane laga.
Ab to mobile aur internet ka jamana hai to ab mobile me hi sab kuch mil jata hai. Xossip aur Xforum pe ek se ek kahaniyan padhne ko mil jati hai. Lekin books jo maine kitne saalo se sambhal kar rakha tha wo meri kafi pasand dida kahaniyo se bhari hui thi, jise maine sab se chupa kar apne almirah me rakha tha.

Main sochne laga ki aakhir me 1 kitab kaha gaye. Kahi Dad ke hatho me to...... nahi .. nahi. Wo to mere room me aate hai nahi.... aur abhi to thori der pahle mulakat hui thi... yadi unke hath me kitab parti to ab tak meri khatia khare kar dete.

Phir kya Ritu......na..wo to abhi kitne achche se mili.
To kya mom... uske bhi haw bhaw se to lagta nahi hai. Sweta didi to kabhi kabhi aati hai....kuch samajh nahi aa raha tha.

Main bistar par aa kar baith gaya aur apne soch ka ghora edhar udhar daurane laga.
Meri mom Versha.....43 years ki ek household mahila... gajab ki sundar... figure- 38* 30 * 40.. bhare bhare sharir, height karib 5'3" bare bare mrignayani aankh, lambe baal, tamatar ki tarah gaal, komal ke Pankhuri ki tarah hoth.... kya bolu kabhi kabhi to mughe Dad se jalan si hone lagti hai.
Sweta didi meri cousin hai. Bahut hi sundar... mahilao ke bare mein kya bolu, mughe to wo mahilaye sundar lagti hai jinke bade bade dudh ho.. chehra aakarshak ho.. aur jinke teeth sahi sape me ho... kisi ne sach hi kaha hai agar mahilao ki chati nahi hoti to ham mardon ke samaj me enki pucha nahi hoti.

Main kalpanao se apne ko hataya aur abhi ke problem ke bare me sochna shuru kiya.
Akhir koi sirf 1 hi kitab kyon le gaya..pura hi kyon nahi le gaya... Shayad usne socha hoga ki puri kitabein gayab hone se mughe pata chal sakta hai. Aur sirf 1 kitab gayab hone se mughe andaza nahi hoga... kitabein to sari ashlil aur incest se bhari hai hai.. kya usne padha hoga...kaisa react kiya hoga..kaun hai mere ghar me jiske paas ye book padi hai..... main yahi sab sochta hua kab so gaya mughe pata hi nahi chala.
Nice update...
 
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Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
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Update 3 B.


घर पहुंचते पहुंचते 6.30 बज गए थे । राह भर मुझे अमर के साथ बिताए गए पुराने पल याद आ रहे थे । वो एक हंसमुख और जिंदादिल इंसान था । उसकी किसी से कोई खास अदावत भी नहीं थी । उसके पिता किसी सरकारी विभाग में कार्यरत थे और उसी दौरान उनकी मौत भी हो गयी थी । अमर का अपने मां के अलावा कोई भी नहीं था । उनका गुज़ारा पेंशन के पैसों से ही होता था । पेंशन की राशि अच्छी खासी थी ।

आखिर अमर यहां क्या कर रहा था । वो यहां गाजियाबाद में और उस पर भी जीजा के यहां । उसने ऐसा क्या किया होगा कि किसी ने उसकी कत्ल ही कर दी ।

और पुलिस वहां कैसे पहुंच गयी । पुलिस को कैसे पता चला कि वहां किसी का कत्ल हुआ है ।

जीजा का भी हाव भाव कुछ अलग ही था । कहीं जीजा ने ही तो कत्ल नहीं किया । लेकिन क्यों ? सारे सामान बिखरे हुए क्यों थे । और सबसे बड़ी बात वो कटे बालों वाली लड़की कौन थी । वो लड़की जीजा के फ्लेट में आई कैसे । और अगर आई भी तो क्यों आईं । क्या चोरी के इरादे से आई थी और शायद उसे अमर ने चोरी करते हुए पकड़ा होगा और लड़की ने उसे शुट कर दिया हो ।

लेकिन लाख का सवाल ये था कि अमर यहां आया क्यों ।

घर पहुंचने के बाद माॅम डैड और रीतु को ड्राइंगरुम में बैठा पाया । उन्हें इंस्पेक्टर कोठारी के द्वारा फोन पर पुछताछ के दौरान ही सारी बातें पता चल चुकी थी ।

मैंने वहां हुए सारे वारदात को संक्षिप्त में बताया और श्वेता दी का सामान देने उनके घर गया । वहां चाचा चाची श्वेता दी और राहुल सभी थे । उनके पुछने पर फिर से वही बातें दुहराया ।

श्वेता दी ने मुझे अपने सहेली के शादी में चलने को कहा तो मैंने इनकार कर दिया । मेरा खराब मुड देखकर उन्होंने भी जोर नहीं दिया ।

वहां से मैं अमर के घर चला गया । अमर का घर हमारे यहां से आधे घंटे की दूरी पर था । जब उसके घर पहुंचा तब कुछ पड़ोसी औरतें अमर की मां के पास बैठी हुई थी । वहां का माहौल काफी गमगीन था । शायद पुलिस ने खबर कर दी थी ।

मैं अमर की मां के पास पहुंचा तो उनकी नजर मुझ पर पड़ी । वो लगभग 55 साल की दुबली पतली महिला थी । उनका पूरा चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था । मैंने उन्हें अपने गले से लगाया तो वो फफक कर रो पड़ी । मेरी आंखें भी छलक पड़ी । बहुत देर तक हम ऐसे ही रोते रहे ।

" ब.. बेटा अमर ।" उन्होंने रोते हुए कुछ कहने की कोशिश की तो मैंने बीच में ही उन्हें अपने बाजुओं से कसते हुए भर्राये हुए स्वर में बोला ।

" कुछ मत बोलो मां । अमर का इतना ही समय तक हमारा साथ था । भगवान ने उसे अपने मे समाहित कर लिया । मौत पर किसी का भी वश नहीं चलता । अब से मैं ही तेरा अमर हूं । मैं ही तेरा बेटा हूं । आज से तु मेरे साथ मेरे घर पर रहेगी । आखिरी सांसों तक मैं तेरी सेवा करूंगा ।"

वो फुट फुट कर रोये जा रही थी । मैं उसे दिलासा देते रहा । थोड़ी देर बाद मैंने कहा ।

" चल मां । चल मेरे साथ ।"

मेरे कन्धों से सिर उठाकर मुझे देखा और सिसकियां लेते हुए बोली ।

" बेटा मैं जीना नहीं चाहती । काश ! भगवान अमर की जगह मुझे बुला लेता । म.. मैं मरना चाहती हूं बेटा ।" कहकर जोर जोर से रोने लगी ।

" नहीं मां । ऐसा मत बोल । क्या मैं तुम्हारा बेटा नहीं । तुम तो जानती हो अमर मेरा दोस्त कम भाई ज्यादा था । आप ही तो कहती थी मैं तुम्हारा दुसरा बेटा हूं । और अभी तो अमर के क़ातिल को सजा दिलवाना है । चल उठ । मेरे साथ चल ।"

काफी देर तक रोती रही । फिर अपने आंसुओं को पोछते हुए कही ।

" नहीं बेटा । ये घर छोड़ कर मैं कहीं नहीं जाउंगी । इस घर से अमर और उसके पिता की यादें जुड़ी हुई है । अब यही मैं अपनी बाकी बची खुची जिन्दगी भी काट लुंगी । जा । तु घर जा । कल अमर की दाह संस्कार भी करनी है ।"

थोड़ी देर बाद उनको गले लगा कर मैं वहां से भारी मन बिदा हो गया । घर आया किसी ने भी खाना नहीं खाया था । उस दिन मेरे घर खाना ही नहीं बना । सभी थोड़ी थोड़ी जुस पी कर अपने अपने कमरों में चले गए ।

नींद आ नहीं रही थी । दिन भर की घटनाक्रम के बारे में सोचता रहा । करवट बदलते बदलते कब सोया, याद नहीं ।

*****

Update 4.


सुबह जब मैं ड्राइंगरुम में पहुंचा तब माॅम breakfast की तैयारी कर रही थी । डैड टीबी के पास बैठे खबर देख रहे थे । रीतु आज सुबह ही कालेज चली गई थी ।

मैंने डैड को गुड मार्निंग वीश किया । माॅम को हग किया और डैड के बगल सोफे पर बैठ गया । कुछ औपचारिक बातें के दरमियान नाश्ता किया फिर मैं अपने बाइक से पुलिस चौकी चला गया ।

इंस्पेक्टर कोठारी वहां नहीं था । वहां अपनी हाजिरी दे और उनके बुलाये हुए स्कैच मैन की सहायता से कटे बालों वाली लड़की का स्कैच बनवा कर अजय के घर चला गया । रास्ते में मोबाइल रिचार्ज कराया । फिर पैराडाइज क्लब के मैनेजर को फोन कर के बताया कि मैं अगले दिन join करुंगा ।

पोस्टमार्टम के बाद डेड बॉडी शाम को चार बजे मिली । अन्तिम संस्कार करते करते आठ बज गए । फिर वापस घर आ गया ।

आज का दिन भी काफी भाग दौड़ करके बीता था इसलिए डीनर के पश्चात मैं जल्दी सो गया ।

अगले दिन सुबह उठकर फ्रेश होकर थोड़ा work out किया और ड्राइंगरुम में जा कर बैठ गया । पुलिस थाने की हाजिरी की । आज इंस्पेक्टर कोठारी मौजूद था । मेरे पुछने पर उसने बताया कि उन्हें कत्ल की सुचना किसी गुमनाम शहरी ने थाने के लैंड लाइन फोन पर दी थी । नम्बर ट्रैश करने पर मालूम हुआ कि वो एक PCO का नम्बर है जो तुम्हारे जीजा के घर से थोड़ी दूर पर है । फोन किस व्यक्ति ने किया ये PCO. वाला नहीं बता पाया ।

थोड़ी देर बाद मैं वहां से अमर के मां के पास चला गया । थोड़ी देर रुक कर मैं वहां से निकल गया ।

शाम को पांच बजे कनाटप्लेस पैराडाइज क्लब पहुंचा और मैनेजर से मिला । मैनेजर का नाम कुलभूषण खन्ना था । वो एक पचपन साल का गंजे सिर वाला भीमकाय व्यक्ति था । उसके आंख काफी छोटे-छोटे थे । उसकी एक आदत थी कि वह जब बोलता था तो अपनी कनपटी को सहलाने लगता था ।

उससे कुछ देर तक formal बातों के उपरांत मैं कराटे वाले कक्ष में गया । वहां कुछ तीस बत्तीस लड़के लड़कियां थी । लड़कियों की संख्या ज्यादा थी । आज देश में जिस तरह की हालात हैं उस लिहाज से तो लड़कियों को self protection बहुत ही जरूरी बनती है ।

वहां जितने भी student दिखे सभी हाई फाई फेमिली से belong लगते दिखे । और हो भी क्यों नहीं । क्लब जो काफी महंगा था ।

वहां मैंने दो घंटे ट्रेनिंग दी । फिर मैनेजर को अभिवादन कर घर चला आया ।

हफ्ते दस दिन तक यही रूटिन रहा । धीरे धीरे अमर के मौत का गम भी कुछ हल्का हुआ । दोनों टाईम आन्टी ( अमर की मां ) के पास जाता और उनकी ज़रुरी के कामों में मदद करता ।

पुलिस ने भी मेरे और जीजा को clean chit दे दिया । उनके पास हमारे खिलाफ न कोई सबूत था और ना कोई गवाह । जिस रिवाल्वर से मौत हुई थी वो भी बरामद नहीं हो पाई थी । हमारे पास मर्डर करने का कोई सटीक कारण भी नहीं था । और वो कटे बालों वाली लड़की भी गायब थी ।

लेकिन मैं एक आस में था कि क़ातिल को मैं ढुंढ निकालूंगा और उसके किये की सजा अवश्य दूंगा ।

रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में गया । नाइट ड्रेस पहनी और बिस्तर पर लेट गया । ये दस बारह दिन मेरे लिए काफी भारी पड़े थे । मन को divert करने के लिए सोचा क्यों न आज अपनी favourite books पढ़ी जाय । मैं उठा और आलमारी से incest कहानियों का बैग ले बिस्तर पर लेट गया ।

तभी मुझे ध्यान आया कि इस मे से कुछ दिन पहले एक किताब गायब थी । मैंने सारी किताबें चेक की । गायब वाली किताब इन किताबों के बीच मोजूद थी । मतलब जिसने भी ये किताब ली थी उसने पढ़ कर वापस रख दी थी ।

लेकिन इस बार एक दुसरी किताब गायब थी ।
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Yamraaj

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घर पहुंचते पहुंचते 6.30 बज गए थे । राह भर मुझे अमर के साथ बिताए गए पुराने पल याद आ रहे थे । वो एक हंसमुख और जिंदादिल इंसान था । उसकी किसी से कोई खास अदावत भी नहीं थी । उसके पिता किसी सरकारी विभाग में कार्यरत थे और उसी दौरान उनकी मौत भी हो गयी थी । अमर का अपने मां के अलावा कोई भी नहीं था । उनका गुज़ारा पेंशन के पैसों से ही होता था । पेंशन की राशि अच्छी खासी थी ।

आखिर अमर यहां क्या कर रहा था । वो यहां गाजियाबाद में और उस पर भी जीजा के यहां । उसने ऐसा क्या किया होगा कि किसी ने उसकी कत्ल ही कर दी ।

और पुलिस वहां कैसे पहुंच गयी । पुलिस को कैसे पता चला कि वहां किसी का कत्ल हुआ है ।

जीजा का भी हाव भाव कुछ अलग ही था । कहीं जीजा ने ही तो कत्ल नहीं किया । लेकिन क्यों ? सारे सामान बिखरे हुए क्यों थे । और सबसे बड़ी बात वो कटे बालों वाली लड़की कौन थी । वो लड़की जीजा के फ्लेट में आई कैसे । और अगर आई भी तो क्यों आईं । क्या चोरी के इरादे से आई थी और शायद उसे अमर ने चोरी करते हुए पकड़ा होगा और लड़की ने उसे शुट कर दिया हो ।

लेकिन लाख का सवाल ये था कि अमर यहां आया क्यों ।

घर पहुंचने के बाद माॅम डैड और रीतु को ड्राइंगरुम में बैठा पाया । उन्हें इंस्पेक्टर कोठारी के द्वारा फोन पर पुछताछ के दौरान ही सारी बातें पता चल चुकी थी ।

मैंने वहां हुए सारे वारदात को संक्षिप्त में बताया और श्वेता दी का सामान देने उनके घर गया । वहां चाचा चाची श्वेता दी और राहुल सभी थे । उनके पुछने पर फिर से वही बातें दुहराया ।

श्वेता दी ने मुझे अपने सहेली के शादी में चलने को कहा तो मैंने इनकार कर दिया । मेरा खराब मुड देखकर उन्होंने भी जोर नहीं दिया ।

वहां से मैं अमर के घर चला गया । अमर का घर हमारे यहां से आधे घंटे की दूरी पर था । जब उसके घर पहुंचा तब कुछ पड़ोसी औरतें अमर की मां के पास बैठी हुई थी । वहां का माहौल काफी गमगीन था । शायद पुलिस ने खबर कर दी थी ।

मैं अमर की मां के पास पहुंचा तो उनकी नजर मुझ पर पड़ी । वो लगभग 55 साल की दुबली पतली महिला थी । उनका पूरा चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था । मैंने उन्हें अपने गले से लगाया तो वो फफक कर रो पड़ी । मेरी आंखें भी छलक पड़ी । बहुत देर तक हम ऐसे ही रोते रहे ।

" ब.. बेटा अमर ।" उन्होंने रोते हुए कुछ कहने की कोशिश की तो मैंने बीच में ही उन्हें अपने बाजुओं से कसते हुए भर्राये हुए स्वर में बोला ।

" कुछ मत बोलो मां । अमर का इतना ही समय तक हमारा साथ था । भगवान ने उसे अपने मे समाहित कर लिया । मौत पर किसी का भी वश नहीं चलता । अब से मैं ही तेरा अमर हूं । मैं ही तेरा बेटा हूं । आज से तु मेरे साथ मेरे घर पर रहेगी । आखिरी सांसों तक मैं तेरी सेवा करूंगा ।"

वो फुट फुट कर रोये जा रही थी । मैं उसे दिलासा देते रहा । थोड़ी देर बाद मैंने कहा ।

" चल मां । चल मेरे साथ ।"

मेरे कन्धों से सिर उठाकर मुझे देखा और सिसकियां लेते हुए बोली ।

" बेटा मैं जीना नहीं चाहती । काश ! भगवान अमर की जगह मुझे बुला लेता । म.. मैं मरना चाहती हूं बेटा ।" कहकर जोर जोर से रोने लगी ।

" नहीं मां । ऐसा मत बोल । क्या मैं तुम्हारा बेटा नहीं । तुम तो जानती हो अमर मेरा दोस्त कम भाई ज्यादा था । आप ही तो कहती थी मैं तुम्हारा दुसरा बेटा हूं । और अभी तो अमर के क़ातिल को सजा दिलवाना है । चल उठ । मेरे साथ चल ।"

काफी देर तक रोती रही । फिर अपने आंसुओं को पोछते हुए कही ।

" नहीं बेटा । ये घर छोड़ कर मैं कहीं नहीं जाउंगी । इस घर से अमर और उसके पिता की यादें जुड़ी हुई है । अब यही मैं अपनी बाकी बची खुची जिन्दगी भी काट लुंगी । जा । तु घर जा । कल अमर की दाह संस्कार भी करनी है ।"

थोड़ी देर बाद उनको गले लगा कर मैं वहां से भारी मन बिदा हो गया । घर आया किसी ने भी खाना नहीं खाया था । उस दिन मेरे घर खाना ही नहीं बना । सभी थोड़ी थोड़ी जुस पी कर अपने अपने कमरों में चले गए ।

नींद आ नहीं रही थी । दिन भर की घटनाक्रम के बारे में सोचता रहा । करवट बदलते बदलते कब सोया, याद नहीं ।

*****

Update 4.


सुबह जब मैं ड्राइंगरुम में पहुंचा तब माॅम breakfast की तैयारी कर रही थी । डैड टीबी के पास बैठे खबर देख रहे थे । रीतु आज सुबह ही कालेज चली गई थी ।

मैंने डैड को गुड मार्निंग वीश किया । माॅम को हग किया और डैड के बगल सोफे पर बैठ गया । कुछ औपचारिक बातें के दरमियान नाश्ता किया फिर मैं अपने बाइक से पुलिस चौकी चला गया ।

इंस्पेक्टर कोठारी वहां नहीं था । वहां अपनी हाजिरी दे और उनके बुलाये हुए स्कैच मैन की सहायता से कटे बालों वाली लड़की का स्कैच बनवा कर अजय के घर चला गया । रास्ते में मोबाइल रिचार्ज कराया । फिर पैराडाइज क्लब के मैनेजर को फोन कर के बताया कि मैं अगले दिन join करुंगा ।

पोस्टमार्टम के बाद डेड बॉडी शाम को चार बजे मिली । अन्तिम संस्कार करते करते आठ बज गए । फिर वापस घर आ गया ।

आज का दिन भी काफी भाग दौड़ करके बीता था इसलिए डीनर के पश्चात मैं जल्दी सो गया ।

अगले दिन सुबह उठकर फ्रेश होकर थोड़ा work out किया और ड्राइंगरुम में जा कर बैठ गया । पुलिस थाने की हाजिरी की । आज इंस्पेक्टर कोठारी मौजूद था । मेरे पुछने पर उसने बताया कि उन्हें कत्ल की सुचना किसी गुमनाम शहरी ने थाने के लैंड लाइन फोन पर दी थी । नम्बर ट्रैश करने पर मालूम हुआ कि वो एक PCO का नम्बर है जो तुम्हारे जीजा के घर से थोड़ी दूर पर है । फोन किस व्यक्ति ने किया ये PCO. वाला नहीं बता पाया ।

थोड़ी देर बाद मैं वहां से अमर के मां के पास चला गया । थोड़ी देर रुक कर मैं वहां से निकल गया ।

शाम को पांच बजे कनाटप्लेस पैराडाइज क्लब पहुंचा और मैनेजर से मिला । मैनेजर का नाम कुलभूषण खन्ना था । वो एक पचपन साल का गंजे सिर वाला भीमकाय व्यक्ति था । उसके आंख काफी छोटे-छोटे थे । उसकी एक आदत थी कि वह जब बोलता था तो अपनी कनपटी को सहलाने लगता था ।

उससे कुछ देर तक formal बातों के उपरांत मैं कराटे वाले कक्ष में गया । वहां कुछ तीस बत्तीस लड़के लड़कियां थी । लड़कियों की संख्या ज्यादा थी । आज देश में जिस तरह की हालात हैं उस लिहाज से तो लड़कियों को self protection बहुत ही जरूरी बनती है ।

वहां जितने भी student दिखे सभी हाई फाई फेमिली से belong लगते दिखे । और हो भी क्यों नहीं । क्लब जो काफी महंगा था ।

वहां मैंने दो घंटे ट्रेनिंग दी । फिर मैनेजर को अभिवादन कर घर चला आया ।

हफ्ते दस दिन तक यही रूटिन रहा । धीरे धीरे अमर के मौत का गम भी कुछ हल्का हुआ । दोनों टाईम आन्टी ( अमर की मां ) के पास जाता और उनकी ज़रुरी के कामों में मदद करता ।

पुलिस ने भी मेरे और जीजा को clean chit दे दिया । उनके पास हमारे खिलाफ न कोई सबूत था और ना कोई गवाह । जिस रिवाल्वर से मौत हुई थी वो भी बरामद नहीं हो पाई थी । हमारे पास मर्डर करने का कोई सटीक कारण भी नहीं था । और वो कटे बालों वाली लड़की भी गायब थी ।

लेकिन मैं एक आस में था कि क़ातिल को मैं ढुंढ निकालूंगा और उसके किये की सजा अवश्य दूंगा ।

रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में गया । नाइट ड्रेस पहनी और बिस्तर पर लेट गया । ये दस बारह दिन मेरे लिए काफी भारी पड़े थे । मन को divert करने के लिए सोचा क्यों न आज अपनी favourite books पढ़ी जाय । मैं उठा और आलमारी से incest कहानियों का बैग ले बिस्तर पर लेट गया ।

तभी मुझे ध्यान आया कि इस मे से कुछ दिन पहले एक किताब गायब थी । मैंने सारी किताबें चेक की । गायब वाली किताब इन किताबों के बीच मोजूद थी । मतलब जिसने भी ये किताब ली थी उसने पढ़ कर वापस रख दी थी ।

लेकिन इस बार एक दुसरी किताब गायब थी ।
Nice update
 

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
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Update 5.


सुबह साढ़े नौ बजे मैं ड्राइंगरुम पहुंचा तब माॅम और रीतु सोफे पर बैठे टीबी देख रहे थे । उन्हें हग करने के बाद मैं भी उनके बगल बैठ गया । माॅम ने नाश्ता निकाला । नाश्ते के ही दौरान मैं चुपके से उनके हाव भाव को भी ताड़ रहा था ।

" माॅम, बहुत दिन हो गए कालेज नहीं गया । सोच रहा हूं आज चला जाऊं ।" मैंने कहा ।

" भाई, आप वहां से लौटोगे कब ।" रीतु बोली ।

" तीन चार बजे तक ।" मैं रीतु की तरफ पलटते हुए कहा ।" तुम्हें कोई काम है क्या ।"

" तीन बजे तक लौटोगे तो मुझे भी कालेज से पिक अप कर लेना । यदि तुम्हें कोई काम न हो तो ।"

" ठीक है ।" कहकर नाश्ते के बाद हाथ मुंह धोकर बाहर निकल गया ।

कालेज में अमर की यादें जब आती थी तो मन उद्वेलित हो जाता था । धीरे धीरे कालेज के वातावरण मे मैं ढलने लगा ।

तीन बजे रीतु का जब फोन आया तो मैं कालेज से अपनी बाइक लेकर उसके कालेज की ओर चल दिया । रीतु का कालेज मेरे कालेज से पन्द्रह मिनट की दूरी पर था ।

उसके कालेज के गेट के पास बाइक खड़ी कर मैं उसका इन्तज़ार करने लगा । थोड़ी ही देर बाद मुझे रीतु अपने सहेलियों के झुंड के साथ आती दिखी ।

रीतु ने भी मुझे देख लिया था । वो अपनी खास सहेली काजल की बांह पकड़े मेरे पास आई ।

काजल भी रीतु की ही तरह खुबसूरत थी बिल्कुल काजल अग्रवाल की तरह । दोनों लड़कियां मेरे पास आ कर खड़ी हो गई । काजल ने मुझे अभिवादन किया तो मैं धीरे से मुस्कुरा कर कहा ।

" कब आईं मामा के घर से ।"

" एक हफ्ते से उपर हो गया भाई ।" उसने मुस्कुराते हुए कहा ।

" कहती थी न तुझसे, भाई तेरे बारे में मुझसे बीसो बार पुछ चुका है ।" रीतु काजल को देख कर मेरी टांग खिंचती हुईं बोली - " कहां है काजल ! कब तक आयेगी काजल ! बहुत दिनों से देखा नहीं है काजल को ! फलां ! फलां ! फलां ।"

" क्या बक रही है । मैंने कब कहा ।" मैं हड़बड़ा कर बोला ।

काजल शर्म से अपनी नजरें नीचे कर धीरे से मुस्कराने लगी ।

" क्यों झूठ बोलते हो भाई । झूठ बोलना अच्छी बात नहीं । पाप लगता है ।" वो कुटिल मुस्कान भरी ।

" अच्छा पुछ भी लिया तो क्या ग़लत हो गया ।" मैं काजल से मुखातिब होते हुए कहा - " क्यों काजल ! क्या मैं तुम्हारे बारे में कुछ पुछ नहीं सकता । आखिर तुम भी तो मेरी बहन जैसी हो ।"

" हां सही कहा ! बहन जैसी हो । बहन नहीं ।"

मैं सकपका गया । लगता है ये लड़की काजल के सामने मेरा पुलंदा बंधवा कर ही रहेंगी ।

" क्या बक बक कर रही है । चुपचाप नहीं रह सकती क्या ।" काजल ने लजाते हुए कहा ।

" अरे बक बक नहीं कर रही । सच बोल रही हूं । " उसने काजल के कंधे पर हाथ रख कर कहा । - " जानती है काजल ! मेरा भाई का दिल न दरिया दिल है । बल्कि दरिया दिल भी नहीं, सागर दिल है ।
मेरे भाई का जैसा नाम वैसा ही उसका दिल । सागर जैसी गहराई वाली दिल । उसके दिल में सिर्फ प्यार ही प्यार है । तु न राज करेगी ।" दार्शनिक अंदाज में काजल को बोली ।

" क्यों अपने भाई को छेड़ रही है ।" काजल हंसते हुए बोली ।

मैं जो अपने आप को लड़कियों के मामले में सुरमा भोपाली समझता था, अभी स्तब्ध सा भौंचक्का खड़ा था । तभी काजल के डैड आ गये और रीतु के जबान पर ब्रेक लगा ।
काजल के डैड का चांदनी में पुराने एंटीक चीजों का बिजनेस था ।

जब वो हमारे पास पहुंचे तो मैंने और रीतु ने उनको हाथ जोड़कर अभिवादन किया । उन्होंने मुस्करा कर हमें आशिर्वाद दिया ‌और हमारी हाल चाल पुछ कर काजल के साथ अपने घर चले गए ।

" वैसे तो बड़े तीसमार खान बनते हो, लेकिन आज पता चला कि सिर्फ अपनी डेंगी हांक ते थे । अपना चेहरा देखा, हवा पंचर हो गई थी । रीतु ने हंसते हुए कहा ।

" वो तो मैं अब भी हूं ।" मैंने अपना सीना तान कर कहा - "लड़कियों के मामले में मुझे कम तर मत आंकना । वो तो तेरी सहेली थी इसलिए लिहाज कर गया ।"

" हां, हां वो देखी मैंने ।"

" तुने अभी तक देखा ही कहां है । जिस दिन देख लेगी उस दिन तेरे सारे भ्रम टुट जायेंगे ।"

" अच्छा ! इतना घमंड ।" वो कालेज के कैम्पस की तरफ देखते हुए बोली - "वो ! वो जो लड़की आ रही है , उसे prapose करके दिखाओ ।"


जिस लड़की के बारे में उसने इसारा किया था, उस तरफ देखा तो एक फैशनेबल हाॅट लड़की जींस और टाॅप पहने कालेज के गेट की तरफ आ रही थी ।

" उस को ।" मैंने उस लड़की की तरफ इसारा करते हुए पुछा ।

" हां । उस को ।"

"ठीक है फिर । अब मेरा टेलेंट तु देख ही ले ।" कहकर मैं उस लड़की की तरफ चल दिया ।

" एक्सक्यूज मी मिस ।" मैं लड़की के आगे खड़ा हो कर बोला ।

" मैं ! " लड़की चौंकते हुए बोली ।

" जी ! आप ।" मैंने मिश्री से भी मीठे आवाज में कहा ।

" जी । कहिए ।"

" क्या आप मेरी girlfriend बन सकती है ।"

" क्या मतलब ! " लड़की हड़बड़ाते हुए आंखें चौड़ी करते हुए कही ।

" जी । मेरा मतलब है कि क्या मैं आपका boyfriend बन सकता हूं ।"

" पागल हो क्या । कौन हो तुम । मैं तो तुम्हें जानती नहीं ।"

" जी ! नहीं । मैं पागल नहीं बल्कि आपके खुबसूरती का कदरदान हूं ।" मैंने अपने सीने पर हाथ रख कर कहा ।

" क्या तुम मुझे जानते हो ।" उसने संशय भरे हुए में कहा ।

" नहीं । जानता तो नहीं हूं लेकिन बाद में जान जाउंगा ।"

" क्या बकवास है । सनकी मालूम पड़ते हो । हटो, जाने दो मुझे ।" लड़की गुस्से से बोली ।

" मिस ! मेरी बात तो सुनिए । देखिए , मैं सागर चौहान दिल्ली युनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्यूनिकेशन के फाइनल ईयर का स्टुडेंट । और ठीक मेरे पीछे जो लड़की रेड कलर की सलवार सूट पहनी है, वो मेरी बहन है । लेकिन please उसकी तरफ Direct मत देखिएगा ।" मैंने जल्दी जल्दी एक सांस में ही कह दिया ।

लड़की ने कनखी से रीतु की तरफ देखा ।

" हो गई न मेरी परिचय ।" मैंने कहा ।

लड़की इस बार मुस्कराई । फिर मेरा पिछा छुड़ाने के मकसद से बोली ।

" But kind for your information I'm engaged. I have already booked. "

" कोई बात नहीं । आप फिर भी मुझे boyfriend बना सकती हैं ।"

" वो कैसे ? "

" मिस ! आप तो जानती है जमाना कितना फास्ट हो गया है । और लड़कियां तो फास्ट से भी ज्यादा फास्ट हो गई है ।"

" क्या मतलब ।"

" जैसे एक बार में लड़के कई लड़कियों से फ्रेंडशिप कर लेते हैं उसी तरह लड़कियां भी एक साथ कई कई लड़कों को boyfriend बना लेती हैं । मसलन जब वो सुबह घर से बाहर निकलती है तब , जब रास्ते में होती हैं तब , जब कालेज में होती है तब , कालेज की छुट्टी के बाद घर जाती है तब । और भी ऐसी कई जगहे है ।"

" तौबा तौबा । तुम्हारे कहने का मतलब है कि लड़कियों की इन सभी जगहों पर अलग-अलग boyfriend होती है ।"

" जी ! सही फरमाया ।"

" एक नम्बर के कमीने हो ।"

" शुक्रिया ।"

" किस बात की कि कमीने हो ।"

" नहीं । एक नम्बर का हूं इस बात के लिए । दिल्ली में अगर कोई व्यक्ति एक नम्बर का होता है वो उसकी तारीफ होती है ।" मैंने धीरे से उसके सामने सिर झुकाते हुए कहा ।

" बातें अच्छी कर लेते हो ।" अब लड़की मुस्कराई ।

" मैं और भी कई सारी चीज़ें अच्छी अच्छी कर लेता हूं ।"

" अच्छा ! "

" जी हां । तो मेरा application मंजूर हुआ ।" मैंने आशावादी नजरों से उसे देखा ।

" अभी तक तो नहीं । बाद की बाद में देखेंगे ।" कहकर मुस्कराते हुए चली गई ।

उसके जाते ही रीतु आईं । वो सारी बातें चुपके से सुन रही थी । और मेरे हाथों को पकड़ कर जोर जोर से हंसने लगी ।

" सच में तुम एक नम्बर के कमीने हो ।" हंसते हंसते बोली ।

मैं हंसा और बोला - " चल घर चलते हैं । काफी देर हो गई ।"

फिर हम बाइक पर बैठ घर की तरफ रवाना हो गए ।
Nice update
 
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