• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest Sagar (Completed)

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 5 A.


घर पहुंचने के बाद खाना खाया फिर छत पर चला गया । अपना favorite brand classic का कश लगाया और कमरे में थोड़ी देर आराम किया ।

जब क्लब जाने का समय हुआ तो तैयार हो कर माॅम को बोलकर निकल गया । लड़के और लड़कियों को करीब डेढ़ घंटे ट्रेनिंग देने के बाद मैं क्लब के मैनेजर कुलभूषण खन्ना के आफिस गया और उनसे जाने की इजाजत मांगी ।

" अरे आओ, आओ सागर साहब । थोड़ी देर रेस्ट भी कर लिया करो ।" मैनेजर ने अपनी कनपटी सहलाते हुए कहा ।

" जी । शुक्रिया ।" मैं उसके मेज के आगे रखे हुए आरामदायक कुर्सी पर बैठ गया ।

" क्या पियोगे । चाय या कॉफी ।"

" जी चाय ।" मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

उसने अपने स्टाफ को चाय लाने का आर्डर दिया । फिर मेरी तरफ मुखातिब हुआ ।

" और सुनाइए । आपका क्लास कैसा चल रहा है ।"

" बढ़िया । सब ठीक चल रहा है । सभी लोग काफी agressive है ।"
थोड़ी देर ठहर कर अपनी छोटी छोटी आंखों से मुझे घुरता हुआ बोला ।

" मैंने सुना है कि आप के जीजा मिस्टर राजीव सोलंकी के गाजियाबाद वाले फ्लेट में किसी का कत्ल हो गया था ।" उसने अपने कनपटी को खिंचते हुए कहा ।

मैं हैरान हुआ । " आप को कैसे पता ।"

" ऐसी खबरें अखबार वालों की नजर से कहा छुपती है ।"

" जी । आपने सही कहा । कत्ल मेरे दोस्त का हुआ था ।" मैंने धीरे से कहा ।

" क़ातिल पकड़ा गया या नहीं ।"

" नहीं । अभी पुलिस की तहकीकात चल रही है । मुझे पुरा विश्वास है क़ातिल देर सबेर पकड़ा ही जायेगा ।"

तभी स्टाफ चाय लेकर आ गया । हम चुप हो गए । चाय देने के बाद स्टाफ चला गया ।

मैं चाय की चुस्की ले ही रहा था कि तभी मैंने नोट किया मैनेजर की निगाह मेरी पीठ पीछे कहीं थी । मुझे अनुभव हुआ कि वहां तभी किसी ने कदम रखा था ।

" ओह ! सारी " -" मुझे अपने पीछे से एक मधुर लड़की स्वर सुनाई दिया -"मैंने समझा आप अकेले बैठे हैं तो ..."

" आओ आओ । सागर साहब अपने ही आदमी है । सागर साहब मेरी बीवी से मिलिए । और अनुष्का , ये सागर साहब है । क्लब के मार्शल आर्ट्स ट्रेनर ।'

होंठों पर एक मशीनी मुस्कराहट लिए मैं वापिस घुमा । मेरे दोनो हाथ अपने आप उपर उठ गये लेकिन इससे पहले कि वे नमस्कार की मुद्रा में जुड़ पाते , वे रास्ते में ही फ्रीज हो गये । मेरे चेहरे से मुस्कराहट उड़ गई और उसका स्थान गहरी हैरानी ने ले लिया ।

मेरे सामने वही कटे बालों वाली लड़की खड़ी थी जिसे मैंने जीजा के फ्लेट में देखा था जो एकदम से वहां से गायब हो गई थी ।

युवती की हालत भी मेरे जैसे ही थी । उसका शरीर जड़ हो गया था और चेहरे का रंग एकाएक उड़ गया था ।

मुझे लगा जैसे कि मैनेजर जान बुझ कर अपनी बीवी से मेरा सामना करवा रहा है । यदि इसे अखबारों से कतल का पता चला होगा तो जरूर उसमें उस संदिग्ध कटे बालों वाली लड़की का खबर भी छपी होगी । और शायद उसे अपनी आधे से भी कम उम्र वाली बीबी पर कोई शक वगैरह हो ।

मुझे उस वक्त युवती की हालत बड़ी दयनीय लगी ।

" नमस्ते ।" मैं बोला ।

" वेलकम मिस्टर सागर ।" उसने बड़ी कठिनाई से कहा ।

" आप लोग बातें कीजिए " वह अपने पति से बोली " मुझे जरा शोपिंग को जाना है ।"

और अपने पति के गाल पर किस करके निकल गई । मैंने सतर्क भाव से मैनेजर को देखा । वो अपलक बीबी को जाते देख रहा था ।

मैं भी चेयर से उठा और मैनेजर से जाने की अनुमति मांगी ।

मैं अभी क्लब के गेट के बाहर कदम रखा ही था कि मैनेजर की बीबी अनुष्का लपक कर मेरे सामने आई ।

" शुक्रिया ' वह बोली ।

" किस बात का" ?

" तुम जानते हो "

" एक बात बताइए "

" जल्दी पुछो "

" क्या कत्ल आपने किया है "

" ओह माई गॉड ! नो "

" तो क्या लाश वहां पहले से मौजूद थी "

" हां " । और अगर मैं बाथरूम नहीं जाती तो मुझे न जाने कब तक लाश के बारे में पता ही नहीं चलता । मैं वहां एक लाश के साथ ! " उसके शरीर ने जोर से झुरझुरी ली ।

" लाश को देखकर आपने क्या किया "

" मैंने क्या करना था । मैं तो वहां से निकलने ही वाली थी कि तुम आ गए थे "

" एक बात बताओ क्या आप के पति को आप पर शक है '

वो कुछ नहीं बोली ।

" क्या आपके राजीव सोलंकी से अफेयर है "

वो फिर चुप रही ।

" अगर आप अपने आप को एक कत्ल के केश में फंसा हुआ नहीं देखना चाहती है तो सच बोलिए "

" क्या हम बाद में हम बातें नहीं कर सकते हैं " वो जैसे याचना करते हुए बोली ।

" क्यों नहीं । जरुर "

" तुम अपना मोबाइल नंबर दो । मैं तुम्हें बाद में contact करती हूं " वो बोली ।

मैंने उसे अपना नम्बर दिया और वो जल्दी से वहां से निकल गई । मैंने भी अपनी बाइक घर की तरफ मोड़ ली ।
Nice update bro....
 
  • Like
Reactions: SANJU ( V. R. )

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 6.


अगली सुबह जब मैं हाल में पहुंचा तब नाश्ते की तैयारी हो रही थी । मेरे कुर्सी पर बैठने के बाद माॅम ने नाश्ता लगाया ।


" तुम्हारी चाची आईं थी । श्वेता को गाजियाबाद छोड़ने को बोल रही थी " माॅम थाली में परांठे डालती बोली ।

" इतनी जल्दी ! अभी तो उसे आये हुए दो हफ्ते भी नहीं हुए " में खाते हुए बोला ।

" बोल रही थी राजीव जी ने बुलाया है "

" कब जाना है "

" आज ही । और जाना कितने बजे हैं ये नहीं बतायी "

" ठीक है । मैं फोन करने पुछ लेता हूं "

नाश्ते के बाद रीतु कालेज चली गई । मैंने डैड से अपनी बाइक के बदले कार exchange किया । डैड के जाने के पश्चात मैं अपने रूम जा कर श्वेता दी को फोन लगाया ।

" हैलो ! " उधर और श्वेता दी को आवाज आई ।

" हैलो ! गुले गुलजार , कैसी हो "

" मस्त , तु अपनी सुना "

" मैं भी मस्त "

" तो चल रहे हो न "

" क्या श्वेता दी । इतनी जल्दी क्यों जा रही है " - मैंने शिकायत भरें और में कहा ।

" मैं नहीं जाना चाहती थी लेकिन क्या करूं उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है "

" क्या हुआ "

" सीजनल बुखार , सर्दी खांसी "

" निकलना कब तक है "

" अभी साढ़े नौ बजे हैं , तुम एक घंटे में आ जाओ "

" ओके एक घंटे बाद आ रहा हूं " कहकर फोन काट दिया और मैं जाने के लिए तैयार होने लगा ।

तैयार हो कर आईने के सामने कंघी करने लगा तभी अचानक मुझे कुछ याद आया और मैं उन स्पेशल किताबों को एक बार फिर से चेक करने लगा । आज भी सेम वही रिजल्ट । गायब हुई किताब मौजूद थी लेकिन एक दुसरी किताब गायब थी ।

मैं सोचने लगा कौन है जो रोज एक किताब पढ़ कर उसे वापस रख जाता है और फिर दुसरी किताब ले जाता है । जो भी हो , है तो कोई घर का मेम्बर ही । घर में मेरी फेमिली के अलावा श्वेता दी और उनका परिवार ही है जो बेखटक मेरे कमरे में आ सकता है । सिर्फ डैड और चाचा को छोड़कर । कैसे पता करूं । सभी का कमरा भी तभी चेक कर सकता हूं जब वो घर में नहीं रहे । माॅम , चाची , श्वेता दी , रीतु सभी एक से बढ़कर एक थी । चारों की चारों मेरी fantasy थी ।

लेकिन मैं इतना तो श्योर था कि इन चारों में से कोई एक है जो ये अश्लील कहानियां पढ़ रहा है और यदि पढ़ रहा है तो इस का मतलब उस औरत या लड़की की फैंटेसी भी वही है जो कि मेरी है । मतलब नाजायज संबंध ।

मैं बाद में इसकी पड़ताल करने की सोच कर माॅम को बाय बोल कर श्वेता दी के पास कार लेकर चला गया ।

श्वेता दी ने दरवाजा खोला ।

" नमस्ते ..नुरे नज़र " मैं बोला - " तैयार हो " ।

" नहीं " - वह मुस्कराते हुए बोली - " आओ " ।

मेरे घर में प्रवेश करने के बाद उसने दरवाजा बंद कर लिया । चाचा ड्यूटी गये थे । राहुल स्कूल में था ।

" चाची नहीं दिख रही है "

" यहीं पड़ोस में है , अभी आ जाएगी "

" मुझे बहुत खराब लग रहा है , अभी तो हमने मस्ती भी नहीं की , न ही कोई पिक्चर देखी और ना ही पार्क में हाथों में हाथ डाल कर घुमने गये और तुम अपने मियां के पास जा रही हो "

" बड़े आये हाथों में हाथ डाल कर घुमाने वाले । मैं कोई तुम्हारी बीवी नहीं हूं । अपनी बीवी को घुमाना "

" अभी शादी ही नहीं हुई है तो बीबी कहा से आयेगी । गर्लफ्रेंड को तो घूमा सकता हूं "

" मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूं "

" बहन कम गर्लफ्रेंड । तुम बोलो क्या नहीं है "

" अच्छा , अच्छा । अब चुपचाप वहां बैठो उधर " - मुस्कराते हुए बोली ।

मैं जाकर सोफे पर बैठ गया ।

" मैं कपड़े बदल कर आती हूं " - वह बोली ।

" मुझे भी मदद करने दो ना "

" किस काम में "

" कपड़े बदलने में "

" शट अप '

" ब्लाउज के बटन खुद कैसे बंद करोगी "

" मैं ब्लाउज पहनुगी ही नहीं "

" वाह । यह अच्छी बात है "

" मेरा मतलब है मैं शर्ट पहनुगी "

" ओह ! "

" अब हिलना मत यहां से "

मैंने यूं सहमति में सिर हिलाया जैसे मेरा कलेजा फटा जा रहा हो ।

वह चली गई । मैंने क्लासिक का पैकेट निकाला और एक सिगरेट सुलगा लिया । मेरी नजर सामने कैबिनेट पर रखे एक खंजर पर पड़ी । मैंने उसे उठा लिया और देखने लगा । वो एक एंटीक जापानी खंजर मालूम पड़ती थी ।

" जापानी है " -

मैंने सिर उठाया ।

वह कपड़े बदल कर आ चुकी थी । वह एक बेहद टाइट जींस और मर्दाना कमीज पहनी थी और उस लिबास में निहायत ही हसीन और कमसिन लग रहा थी ।

" जबाव नहीं कारीगरी और खुबसूरती का "

" खंजर की "

" तुम्हारी "

" शट अप । मैं जापानी खंजर की बात कर रही थी "

" और मैं उस गुडिया की बात कर रहा हूं जो इस वक्त मेरे सामने खड़ी है "

" गुड़िया ! कहां है गुड़िया "

" मेरे सामने तो खड़ी है । साक्षात "

" ओफफ ! छोड़ो कुछ पियोगे "

" तुम कुछ पिलाओगी तो क्यों नहीं पीऊंगा मैं " - उसके बड़े बड़े बूब्स को देखते हुए कहा ।

" मैं तो हो सकता है जहर पिला दूं " - मेरे नज़रों का पीछा करते हुए बोली ।

" मुझे वो भी कबूल होगा "

" तुम न बातें काफी दिलचस्प करते हो "

" करामातें भी काफी अच्छी करता हूं "

" करामातें ! कैसी करामातें "

" इजाजत हो तो पेश करूं एकाध "

" हां हां "

मैं उसकी तरफ बढ़ा तो वो फ़ौरन समझ गई और वहां से से हट गई ।
" बदमाश । एक नम्बर के कमीने हो "

" शुक्रिया " - मैं उसके सामने सिर झुकाते हुए कहा ।

" चलो । देर हो रही है " - कहते हुए मेरे पीठ पर एक हल्का सा धक्का दिया ।

हम कार में सवार हो कर गाजियाबाद के लिए निकल पड़े ।
Mast update ? hai....
 
  • Like
Reactions: SANJU ( V. R. )

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 6 A.


भीड़ भाड़ तक मैंने कार ठीक चलाईं फिर मैंने अपनी बांई बांह उसके कन्धे के पीछे लपेटी और उसे अपनी तरफ खींचने की कोशिश की ।

" गाड़ी चलाने की तरफ तवज्जो दो " - वह मेरी बांह परे करते हुए बोली " एक्सीडेंट हो जाएगा ।"

" तुम तो दिल तोड़ रही हो "

" ऐसे ही हरकतों के कारण ट्रेन से ज्यादा रोड एक्सीडेंट्स होते हैं "

" अच्छा ।" मैं मायूसी से बोला ।

" एक बात बताओ "

" पुछो "

" ऐसी हरकतों से कितनी लड़कियां पटा चुके हो "

" एक भी नहीं "

" झुठ मत बोलो । इतने हैंडसम हो , सुन्दर हो , पढ़ें लिखे हो और उससे भी बड़ी बात लच्छेदार बातें करते हो ।"

" शुक्रिया । मुझे नहीं पता था कि मेरे में इतने सारे गुण है । "

" बोलो ना "

" अरे बोला न । कोई नहीं है । ....वैसे एक है जिस पर मैं ट्राई कर रहा हूं लेकिन वो तो मेरी बांह ही झटक देती है "

" सो सैड ।" मुस्करा कर बोली - " कौन है वो " ।

" हमारे रोहिणी की ही है । बेचारी की शादी गाजियाबाद में एक खुसट से हुई है "

" च..च..च... बेचारी ।" - अफसोस भरे स्वर में बोली ।

" एक बात कहूं ! "

" हां.. हां.. बोलो ।"

" अगर उसकी शादी नहीं हुई होती न तो मैं उसे जबरदस्ती उड़ा ले गया होता ।"

" और वो नहीं जाना चाहती तो ।"

" बोला न जबरदस्ती उड़ा ले गया होता ।"

" जबरदस्ती ! "

" हां , जबरदस्ती ।"

" उसका हसबैंड तुम्हें गोली मार देता ।"

" मैंने कहा अगर उसकी शादी नहीं हुई होती तो ...। वैसे भी मैं ब्लैक बेल्ट हूं , उसके हसबैंड जैसे तीन चार लोगों को तो मैं दो मिनट में छठी का दूध याद दिला दूं ।" - मैंने उसे अपना मसल दिखाते हुए कहा ।

" बड़ा घमंड है अपनी ताकत पर ।"

" घमंड नहीं विश्वास है ।....कभी आजमा लेना ।"

" मैं क्यों आजमाऊ । जिसे आजमानी है वो आजमाएं ।"

" सच कहूं तो मुझे उसके पति से बड़ी जलन होती है ।"

" वो क्यों भला ।"

" इतनी शानदार रसमलाई का रोज रोज भोग लगाता होगा ।"

उसने मेरे भुजाओं में एक जोरदार का पंच मारा ।

" आउच " - मैं अपनी भुजाएं सहलाने लगा ।

" क्या जोर से लगी ।" - उसने संवेदना प्रकट करते हुए कहा ।

" नहीं नहीं । ठीक हूं ।" - मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा ।

थोड़ी देर बाद हम गाजियाबाद उसके फ्लेट के नीचे पहुंचे । कार से उतरकर मैंने कहा - " श्वेता दी ! आप अन्दर चलो , मैं थोड़ी देर में आ रहा हूं ।"

" कहां जा रहे हो ।" उसने पूछा ।

" यहीं बगल में । आप चलो मैं दस मिनट में आया ।"

" अच्छा ।" कहकर जैसे ही वह पलटी कि मैंने उसे रोकते हुए कहा - " श्वेता दी । एक मिनट , रुकना जरा ।"

" क्या हुआ ।" - वह रूकते हुए बोली ।

" मुझे राजीव जीजू से कुछ personal बातें करनी थी , इसलिए आप हम दोनों को कुछ देर के लिए अकेला छोड़ देंगी ? "

" क्यों ! क्या बात है ।" - वह संशय भरे स्वर में बोली ।

" है कूछ बात जो मैं आपको अभी नहीं बता सकता । "

" नहीं । पहले मुझे बताओ बात क्या है ।"

" जब तक उनसे बात नहीं हो जाती तब तक आप को नहीं बता सकता । हां उनसे बात होने के बाद मैं आप को बता दूंगा , वादा करता हूं आपसे ।" - मैंने उनके दोनों हथेलियों को अपने हाथों से सहलाते हुए कहा ।

" कोई गड़बड़ वाली बात नहीं है न ।"

" नहीं । ऐसी बात नहीं है ।" मैंने उन्हें विश्वास दिलाते हुए कहा ।

" ठीक है फिर ।" कहकर वो अपने फ्लैट की तरफ चली गई ।

उनके जाने के पश्चात मैं भी एक तरफ चला गया । थोड़ी पुछताछ करने पर मैं उस PCO में प्रवेश किया जहां से किसी अज्ञात व्यक्ति ने पुलिस को अजय के मर्डर की सूचना दी थी ।

PCO वाला कोई साठ पैंसठ साल का बुजुर्ग था जो आंखों में चस्मा लगाए हुआ था । मैं वहां इस मकसद से आया था कि शायद वो उस अज्ञात मुखबिर के बारे में कुछ जानकारी दे दे । पहले तो बुड्ढा बड़ा ना नुकुर किया । फिर काफी समझाने के बाद बोला कि उस दिन सुबह दस बजे से ही काफी बारिश हो रही थी । और इस कारण PCO में भीड़ नहीं थी । सिर्फ पांच या छः लोग ही उस दिन आये थे जो सभी के सभी मर्द थे । वो उनमें से किसी को भी पहचानता नहीं था । और जो लोग आये थे उन्हें दुबारा देखने पर पहचान भी नहीं पाएगा । ये सारी बातें तो पुलिस के द्वारा मुझे पहले से ही मालूम थी ।

मैं निराश हो कर श्वेता दी के फ्लेट के तरह चला गया ।

जब मैं जीजा के घर पहुंचा तब श्वेता दी ने अपने कपड़े चेंज कर ली थी और जीजू कमरे में blanket से ढके टीबी देख रहे थे । मुझे देखते ही उनके चेहरे पर मुस्कान आई ।

" आओ सागर । बैठो ।" उन्होंने बैठते हुए कहा ।

मैंने उनको नमस्कार करते हुए कहा - " अरे ! अरे ! आप लेटे रहो । कैसी तबीयत है अभी ।"

" ठीक हूं । पहले से बेहतर हूं ।"

मैंने उनका नब्ज छुआ । बुखार नहीं था । मैं उनके बगल में बिस्तर पर बैठ गया । तभी श्वेता दी ने चाय लाई और वो बिस्तर के पास लगे सोफे पर बैठ गई ।

चाय पीते हुए जीजा ने कहा - " तुम्हारे दोस्त अमर के क़ातिल का कुछ पता चला ?"

" अभी तक तो नहीं " मैं चाय की चुस्की लेते हुए कहा ।

" मेरे तो समझ में नहीं आ रहा है कि वह यहां कर क्या रहा था ? किसी ने आखिर उसे क्यों मारा ।"

" ये तो मुझे भी नहीं पता लेकिन वो जो भी हो आखिर में कब तक कानून के नजरों से छुपा रहेगा, कभी ना कभी तो पकड़ा जाएगा ही ।" - कहते हुए मैंने श्वेता दी को इशारा किया तो वो आंखों ही आंखों से हामी भरी ।

" मैं जरा किराने की दुकान से आ रही हूं " श्वेता दी ‌ने जीजू से कहा । और फिर मुझसे बोली - " तुम बैठो । खाना खा कर ही जाना । मैं बस थोड़ी देर में आईं ।"

मैंने सहमति में सिर हिलाया । वह चली गई ।

चाय खतम हो गई थी । मैंने क्लासिक का पैकेट निकाला और जीजा को आफर किया । उन्होंने सिगरेट निकाली लेकिन पीने का उपक्रम नहीं किया । मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई , एक गहरा कश लगाया फिर जीजा की तरफ देखते हुए कहा ।

" जीजू , मुझे आप से कूछ बातें पुछनी थी ।"

" पुछो ।"

" मुझे पुरा विश्वास है कि मैं आप से जो कुछ पूछूंगा उसका जवाब आप सच सच देंगे ।"

" क्या बात है ! क्या पुछना चाहते हो ।" उन्होंने संशय भरे स्वर में कहा ।

" क्या आप ने अमर का खून किया ।" - मैंने स्पष्ट शब्दों में कहा ।

" क्या बकवास करते हो । मैं क्यों भला उसका खून करूंगा । मैं तो उसे ढंग से जानता तक नहीं ।"

" ओके । मान लिया । " - मैं उनके आंखों पर अपनी नजरें टिकाए बोला - " आप के फ्लेट में उस दिन जो लड़की थी , वो कौन थी ।"

" म.. मुझे क्या पता । होगी कोई । शायद कोई चोर होगी ।"

" आप उस लड़की को नहीं जानते ।"

" नहीं । मैं नहीं जानता ।"

" आप की जानकारी के लिए बता दूं कि मैं उस लड़की , उस कटे बालों वाली लड़की से मिल चुका हूं ।"

" क्या ! " अब जीजा कुछ बेचैन सा हो गया । उसने पहलु बदलते हुए कहा - " क. कौन है वो ।"

" ये तो आप मुझे बताइए कि वो कौन है जो आप के फ्लेट में आप का इन्तजार कर रही थी । और अगर .... अगर उसने लाश नहीं देखी होती तो वो वहां से भागती नहीं बल्कि आप के आने तक आप का इन्तजार कर रही होती ।"

अब जीजा के सर पर हवाइयां उड़ने लगा। वो बैचैन हुआ । इस बार उसने सिगरेट सुलगाई और उसके लम्बे लम्बे कश लगाया लगा |

वो बड़ी मुश्किल से बोला - " म. मैं तुम्हें सारी बातें बताता हूं लेकिन तुम्हें एक वादा करना होगा कि ये सब तुम श्वेता को नहीं बताओगे ।"

" जीजा ! ये एक कत्ल का मामला है । मेरे सबसे अजीज दोस्त अमर के कत्ल का । एक बुड्ढी औरत के एकलौते पुत्र का जिसकी जिन्दगी में उसके अलावा और कोई सहारा नहीं था । जिसकी जिन्दगी में अब दुःख और सिसकियों के अलावा कुछ नहीं बचा ।"

" वो अनुष्का थी । - " जीजा थके स्वर में बोला - " कालेज के दिनों में हम बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे । धीरे धीरे हममें प्यार हुआ । मैं उससे शादी करना चाहता था लेकिन..." ।

" लेकिन क्या ? " मैं उत्सुकता से बोला ।

" उसके सपने काफी ऊंचे थे । वो रईसी की जिन्दगी जीने में यकीन करती थी । उसका सपना था कि उसका पति काफी अमीर हो । उसके पास गाड़ी हो , शोपिंग करने के लिए अनाप-शनाप पैसे हों , सोसल स्टेटस हो । लेकिन मैं ठहरा एक मध्यम वर्गीय परिवार का । मैं भला कहां से उसे ये सब दे पाता । एक साल के अफेयर के बाद उसने मुझे छोड़ दिया । फिर ना जाने कहां वो गायब हो गई ।"

" फिर आप से दुबारा कब मुलाकात हुई ।"

" उसके छः साल बाद एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ पैराडाइज क्लब गया । वहां वो मिली । स्वीमिंगपूल में । फिर उसके बाद हम कई बार मिले । उसने बताया उसकी शादी हो चुकी है किसी कुलभूषण खन्ना से । वो उसी पैराडाइज क्लब का मैनेजर था । कहने को तो वो क्लब का मैनेजर था लेकिन असलियत में उस क्लब के पचास पर्सेंट का हिस्सेदार था । उस क्लब के अलावा वो एक नाइटक्लब का भी मालिक है जो पहाड़गंज में है ।"

जीजा थोड़ी देर रुका फिर बोला ।

" उसकी शादी एक अमीर व्यक्ति से हो तो गई थी , उसके सपने भी पुरे हो रहे थे लेकिन शारीरिक जरूरतें से वो महरुम हो गई थी । उसका पति उसके जरूरतों को पूरा करने में असक्षम था । और कहते हैं ना पहला प्यार भुलाए नहीं भूलता । हम मिलने लगे । और फिर काफी करीब हो गये ।" कहकर जीजा चुप हो गया ।

" तो उस दिन आप दोनों की डेटिंग थी ।"

" हां । इसीलिए आफिस से बहाना बना कर जल्दी घर आ गया था ।"

" आप को क्या लगता है ? क्या उसने खून किया होगा ? क्या वो हिंसक प्रवृत्ति की है ।"

" नहीं , नहीं । वो कुछ भी हो सकती है लेकिन खुनी नहीं हो सकती है ।"

मैं उनसे कुछ और पुछता तभी श्वेता दी आ गई और हमारी बातों पर विराम लग गया ।

उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ । खाना खाने के दौरान श्वेता दी ने जीजू से कहा - " उर्वशी और उसके हसबैंड ने हमें अपने घर बुलाया है । उनकी शादी की रिसेप्शन है परसों ।"

तभी मुझे याद आया कि जिस दिन अमर का खून हुआ था उसी दिन उनकी शादी थी ।

" मैं कैसे जा सकता हूं । अभी मुझे तो ठीक होने में कम से कम पांच सात दिन तक तो लग ही जायेंगे ।" - जीजा ने कहा ।

श्वेता दी उदास हो गई ।

" जाना कहां है ।" मैं खाते खाते पुछा ।

" आगरा ।" श्वेता दी गई कहा ।

" तुम सागर के साथ क्यों नहीं चली जाती " - श्वेता दी की उदासी देखकर जीजा ने कहा ।

" म..म.. मैं ।" मैं हड़बड़ा कर बोला ।

" हां । ये सही रहेगा । चलो न सागर । प्लीज़ ! एक ही तो सहेली है मेरी । मेरे नहीं जाने से वो बहुत गुस्सा करेगी ।" श्वेता दी ने कहा ।

" अरे ! मैं कैसे जा सकता हूं । कालेज जाना है फिर शाम को कराटे क्लास के लिए जाना है ।"

" प्लीज़ ! एक दिन की तो बात है । क्या एक दिन के लिए भी मेरे लिए तुम्हारे पास समय नहीं है ।" - उसने इमोशनल होते हुए कहा ।

" ओके ओके । चलूंगा ।" मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

तभी जीजा ने अपनी राय दी । " सागर , तुम दिल्ली से ट्रेन से ही आ जाना और यहां से मेरी कार से आगरा चले जाना ।"

" ठीक है ।" कहकर मैं खाने की थाली से उठा और मुंह धोकर वापस आया ।

फिर मैंने जीजा से जाने की अनुमति ले कर दरवाजे की तरफ चल दिया । श्वेता दी मुझे छोड़ने दरवाजे तक आई ।

" बातें हो गई ।" श्वेता दी ने पूछा ।

" हां । बातें हो गई ।"

" फिर बताओ ।"

" मैंने आपको बताया था न कि बताउंगा । थोड़ी सब्र करो ।" कहकर मैंने उनको हग किया और दरवाजे से बाहर निकल गया । तभी श्वेता दी बोली -

" रूको ।

मैं रूक गया ।

" यहां आओ ।"

मैं उनके पास गया ।

वो मेरे गले लगी और मेरे दाहिने गाल पर एक किस कर दी ।

" अब जाओ ।" उन्होंने मुस्करा कर कहा ।

मैंने अपने होंठ की तरफ इशारा किया तो मुस्कराते हुए मुझे धक्का दिया और बोली - " परसो सुबह आठ बजे तक आ जाना ।"

" जो आज्ञा तुफाने हमदम ।" - मैंने हल्के से सर को झुकाया और अपने घर को निकल गया ।
Nice update bro ????
 
  • Like
Reactions: SANJU ( V. R. )

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 7.


अगले दिन सुबह जब मैं सो कर उठा तब हल्की हल्की बारिश हो रही थी । मैंने खिड़की से झांक कर देखा तो आसमान में हल्के-हल्के बादल आंख मिचौली खेल रहे थे । अप्रैल का महीना बारिश का नहीं होता है लेकिन हमारे यहां मौसम कब पलट जाए कोई नहीं जानता । शायद इसीलिए भारतीय मानसून को जुए का खेल कहा जाता है । मैं नित्य कर्म से निवृत्त हो कर अपने बिस्तर पर बैठ गया और पिछले कुछ दिनों से चल रहे घटनाओं के बारे में सोचने लगा ।

तभी वहां रीतु आईं ।

" नाश्ता नहीं करना है क्या " रीतु बोली ।

मैंने उसे देखा । नहा धो कर वह किसी ताजा ताजा खिले कली के समान लग रही थी । उसके शरीर से किसी सुगन्धित सेंट की खुशबू आ रही थी । वैसे उसे किसी भी आर्टिफिशियल सेंट की कोई जरूरत नहीं थी। उसने लेगिंग्स और टाप पहना था जिसमें उसके शरीर के उतार चढ़ाव किसी भी भी विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए काफी था । कितनी खूबसूरत है मेरी बहन ।

मैंने एक लम्बी सांस ली और उसके साथ नीचे हाल में आ गया ।

" क्या बात है ! आज बड़ी देर कर दी ।" माॅम ने पूछा ।

" कोई खास बात नहीं है माॅम । चलो जल्दी से नाश्ता लगाओ ।" मैं कुर्सी पर बैठते हुए बोला ।

माॅम ने नाश्ता निकाला । हम दोनों भाई बहन नाश्ता करने लगे । डैड ड्यूटी चले गए थे । थोड़ी देर बाद माॅम भी अपना नाश्ता ले कर हमारे साथ ही बैठ गई ।

" माॅम ! कल मुझे श्वेता दी को लेकर आगरा जाना है ।" मैंने खाने के दौरान कहा ।

" क्यों । " माॅम ने प्रश्न सूचक दृष्टि से देखा ।

" उनकी सहेली उर्वशी की शादी की रिसेप्शन है ।"

" तो तुम क्यों जा रहे हो । जीजू नहीं है क्या ।" रीतु ने बीच में टोकते हुए कहा ।

" नहीं । उनकी तबीयत थोड़ी रिवर्स गियर में चल रही है ।" मैंने उसे देखकर मजाक करते हुए कहा ।

" तब कल तो आ नहीं पाओगे ? " माॅम ने पूछा ।

" पता नहीं । ये तो वहां जाने के बाद मालूम पड़ेगा ।"

अभी हम बातें कर ही रहे थे कि मेरा मोबाइल बजने लगा । मैंने देखा किसी अनजान नंबर से फोन था । मैंने फोन पिक अप किया ।

" हैलो ! सागर जी ? "

" हां जी । बोलिए ।" मैंने कहा

" मैं अनुष्का ।"

" जी , जी अनुष्का जी कहिए ।"

" यदि आज आप फ्री हो तो क्या हम मिल सकते हैं ।"

" क्यों नहीं । बोलिए कहा और कब आना होगा ।"

" निजामुद्दीन स्टेशन के पास दो बजे तक आ जाइए ।"

" ओके । मैं पहुंच जाऊंगा ।"

फिर ' बाय ' बोलकर उसने फोन काट दिया । अभी उस वक्त दस ही बजे थे मतलब चार घंटे बाद । नाश्ता भी हमारा हो गया था । फिर मैंने माॅम को कालेज जाने की बोलकर घर से निकल गया ।


कालेज से ही मैं निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचा । वहां अगल बगल नजरें दौड़ाई तभी किसी ने मेरा ‌नाम लेकर पुकारा । मैंने देखा अनुष्का कार में बैठे मुझे ईसारे से बुला रही थी । मैं उसके पास गया । उसने मुझे कार में बैठने को कहा । मैं उसके बगल बैठ गया ।कार में उसके सिवा और कोई नहीं था ।

" मुझे शक है कि मेरी निगरानी के लिए मेरे पति ने किसी को मेरे पिछे लगा रखा है । एक आदमी मुझे अपने पिछे लगा हुआ दिखा लेकिन मैं उसे डाज देने में कामयाब हो गई ।" अनुष्का ड्राइव करती हुई बोली ।

" अच्छा ! बहुत होशियार है आप ।"

" वो तो मैं हूं ।" वो मुदित मन से बोली ।

" अब हम कहां जा रहे हैं ।"

" जहां तुम कहो ।"

" जी ! किसी खास जगह चलें ।"

" कैसी खास जगह ।"

" जहां तन्हाई हो । नीम अंधेरा हो । रोमांटिक म्यूजिक हो । जहां जाम छलकते हों । शराब के भी और शवाव के भी ।"

" ऐसी कोई जगह है यहां

" एक नहीं कई है ।"

" कहां है ? " वह संशय भरे दृष्टि डाली ।

" होटल में ।"

" बीबी झाड़ू लेकर सर गंजी कर देगी ।"

" आप के खादिम के पास झाड़ू तो है लेकिन बीबी नहीं ।"

" क्यों । मायके गई है ।"

" है ही नहीं ।"

" इस बात का अफसोस है या खुशी ।"

" दोनों । कभी अफसोस कभी खुशी ।"

" मतलब ।"

" " सर्दियों की तन्हा रातों में अफसोस और बाकी खुशी ।"

" काफी रंगीन किस्म के आदमी हो ।"

" ऐसा ही है कुछ ।"

" बातें बढ़िया करते हो ।"

" मैं और भी कई काम बढ़िया करता हूं लेकिन वो फिर कभी । "

उसके बाद हम निजामुद्दीन में ही कनिष्क नामक बार एंड रेस्टोरेंट में गये । वहां एक कोने की टेबल पर आमने-सामने बैठने की जगह अगल बगल बैठ गये ।

" क्या लोगे " " उसने कहा ।

" जो आप कहो ।"

थोड़ी देर बाद हमारे टेबल पर काफी की ग्लास आई ।

" उस दिन मेरे पति के सामने मेरी पोल न खोलने के लिए शुक्रिया ।"

" वो सब छोड़ो , उस दिन मैंने जो सवाल पूछा था उसका जवाब दो ।"

" देखो ! मुझे राजीव ने बता दिया है कि उससे तुम्हारी बात हुई है । तुम सब कुछ तो जान ही चुके हो ।"

" सब कुछ नहीं । दी के आने से बात अधुरी रह गई थी । तुम अपने बारे में कुछ बताओ ।"

" मैं , मैं मेरठ की रहने वाली हूं । मेरे घर में मेरे अलावा सिर्फ एक बहन है जो वहीं रहती है । हमारे मां बाप बहुत पहले गुजर चुके थे ।हमारी जिंदगी काफी ग़रीबी में कटी है , हमने अपने जिन्दगी में इतने अभाव देखें है कि उन दिनों की याद करके आज भी हमारी रूह कांप जाती है ।" वो जैसे बिते दिनों में खो सी गई थी ।

" फिर । फिर क्या हुआ ।"

मेरे टोकने पर वह धरातल पर आई ।

" हमारे पास इतने पैसे भी नहीं थे कि हम अपर क्लास की शिक्षा पूरी कर पाते । वीणा की तो पढ़ाई में कोई खास रूचि नहीं थी लेकिन मैं पढ़ना चाहती थी । मैं कुछ करना चाहती थी । मैं कुछ बनना चाहती थी । मैंने , मां की कुछ जेवर थी , वो बेच कर दिल्ली आ गयी । यहां आकर कालेज में दाखिला लिया । यहीं राजीव से मुलाकात हुई । "

मैं चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था । थोड़ी देर बाद वो बोली ।

" वो मुझ से शादी करना चाहता था लेकिन मैंने जो कष्ट , जो जिल्लत , जो अभाव देखा था वो मुझे रह रह कर डरावने ख्वाब की तरह डसता था । राजीव एक अच्छा लड़का था लेकिन वो मेरे सपनों को पूरा करने में सक्षम नहीं था । करीब एक साल के बाद हमने आपसी रजामंदी से अलग अलग रास्ते चुन लिए । "


" तुम्हारी मुलाकात कुलभूषण खन्ना से कैसे हुई ? " मैंने पूछा ।

" वो हमारे कालेज के principal का दोस्त था । एक दिन वो कालेज principal से मिलने आया था , तभी उसने मुझे देखा था ।
वो मुझ पर फिदा हो गया और दो चार मुलाकात में ही शादी का प्रस्ताव रख दिया ।... मैंने बहुत सोचा । महिनों सोचा फिर लास्ट में उसे हां कर दी । "

मैं चुपचाप उसकी बातें सुनता रहा । मैं उसके दुबारा बोलने की प्रतीक्षा करता रहा ।

" आप उस दिन राजीव के फ्लेट में क्या कर रही थी ।" मैंने पुराना सवाल फिर दोहराया ।

थोड़ी देर बाद वो बोली ।
" राजीव से दुबारा छः महीने पहले मुलाकात हुई । वो अपने दोस्तों के साथ पैराडाइज क्लब आया था । मैं उस वक्त अपनी सहेलियों के साथ स्वीमिंगपूल में थी । हमारी बातें हुई ।उसने बताया उसकी शादी डेढ़ साल पहले हो चुकी है । मैंने भी अपने बारे में बताया । फिर कुछ और मुलाकातें हुईं और हम दुबारा दोस्त बन गए । ...उस दिन हमारी राजीव के फ्लेट पर डेट थी । मैं वहां सुबह के ग्यारह बजे पहुंची थी । राजीव ने अपने फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी मुझे पहले ही दे दी थी । जब मैं वहां पहुंची तब दरवाजा खुला था । मैंने सोचा वो फ्लेट में ही होगा लेकिन वो वहां नहीं था । मैंने उसे फ़ोन किया तो उसने बताया कि वह रास्ते में है । मैं थोड़ी देर बिस्तर पर लेट गई । थोड़ी देर बाद मैं हाथ मुंह धोने बाथरूम गई । वहां मैंने एक आदमी को बाथ-टब में पड़े हुए देखा । मैं डर गई फिर मैंने उसके पास जाकर देखा तो वह मरा पड़ा था । उसे गोली लगी थी । मेरे छक्के छूट गये ।मैं काफी भयभीत हो गयी । फिर जल्दी से वहां से भाग कर निकल ही रही थी कि तुम आ गए ।"

वो चुप हो गई ।

मैं कुछ समझ तक चुप रहा फिर मैंने सिगरेट निकाल कर उसे आफर की तो उसने पैकेट में से एक सिगरेट निकाल ली । फिर मैंने भी सिगरेट निकाली और उसकी सिगरेट सुलगाने के बाद अपनी सुलगाई ।

सिगरेट के चार पांच कश लगाने के बाद वो थोड़ी नार्मल हुई ।

" तुम्हारे पति को राजीव के साथ अफेयर की कोई खबर है ? " मैंने सिगरेट का धुआं छोड़ते हुए कहा ।

" पता नहीं..... मेरा पति बहुत ईष्र्या करने वाला आदमी है ।" उसने कहा ।

" कोई बड़ी बात नहीं । आप जैसी खुबसूरत औरत का पति जो कोई भी होगा , ऐसा ही होगा ।" मैंने मज़ाक कर कहा ।

" हर किसी पे शक करने वाला ? "

" वो हर किसी पे शक करता है ? "

" हां ।"

" फिर तो मुझे यूं आपके करीब नहीं बैठा होना चाहिए ।"

" अरे ! वो तुम पर शक नहीं करता ।"

" मैं इसे अपनी खुशकिस्मती समझु या तौहीन ।"

वह हंसी फिर बोली - " सुनो , मैं तुमसे एक वादा चाहती हूं ।"

" कैसा वादा ।'

" कि तुम मेरे राज को आगे भी राज रखोगे ।"

" लगता है आप अपने पति से बहुत डरती है ।"

" हां । बहुत ज्यादा ।"

" आप की बनती नहीं उनसे ।"

" नहीं ।"

" तो फिर छोड़ क्यों नहीं देती ।"

" मैं ऐसा नहीं कर सकती ।"

" क्योंकी वो अमीर है । क्योंकी दौलत के बिना आप नहीं रह सकती ।"

उसने आहत भाव से मेरी तरफ देखा ।

औरत ही ऐसा कर सकती है कि चित भी उसकी हो और पट भी उसकी । वो दो किशितयो में सवार होकर चाह सकती हैं कि मझधार में न गिरे । औरत के मन में क्या है , कौन माई का लाल बता सकता है । ( मैं मन ही मन सोचा )

" फिलहाल मुझे नहीं मालूम कि अमर की मौत से आपका कोई रिश्ता है या नहीं । और अभी तक आप के बारे में पुलिस को भी कुछ नहीं पता । अगर आप बेगुनाह है तो बेफिक्र होकर रहिए । ... लेकिन अगर आप गुनाहगार है तो अभी से पनाह तलाश करनी शुरू कर दीजिए ।" मैंने कहा ।

उसके चेहरे पर सख्त नाराजगी के भाव उभरे ‌। वो जोर से लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी ।

" मिस्टर सागर ।'

" यस मैडम ।"

" मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी ।"

" कैसी उम्मीद नहीं थी मैडम ! "

" कि तुम्हें मेरा जरा भी लिहाज नहीं होगा । मैं इतनी दूर से तुम्हारे पास आईं और तुम...."।

" इज्जत अफजाई का शुक्रिया । " मैंने हल्के से सिर झुका कर कहा ।

वो खड़ी हुई और अपना पर्स उठाते हुए बोली -" मैं तुम से फिर बात करूंगी ।"

" वैलकम मैडम ।"

फिर दनदनाते हुए रेस्टोरेंट से बाहर निकल गई । मैं कुछ देर तक वहीं बैठा सोचता रहा फिर मैं वहां से निकल गया ।














"
Nice update bro.....
 
  • Like
Reactions: SANJU ( V. R. )

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 8 A.


अभी हम होटल जाने के रास्ते पर ही थे कि मुझे एक ख्याल आया और मैंने श्वेता दी से कहा -

" मुझे ये 2 nd class वाली होटल पे बहुत डाउट रहता है । तुम न यहां तो बाथरूम जाओ मत ।"

" क्यों ? " वो रूकते हुए बोली ।

" ऐसे होटल में बाथरूम के अन्दर गुप्त कैमरा छिपे होते हैं जो औरतों को नहाते समय , टायलेट करते हुए , या पेशाब करने हुए रिकॉर्ड कर लेते हैं ।"

" क्या ?" वो चौंकते हुए बोली ।

" हां "

" तो अब क्या करें "

" यहां से चलते हैं आगे चलकर रास्ते में कहीं सुनसान जगह देखकर पेशाब कर लेना ।"

" ठीक है , जल्दी चलो ।"

उसने शायद पेशाब शब्द पर ज्यादा गौर नहीं किया था । हम वापस कार में सवार होकर वहां से निकल गये । अभी हम थोड़ी ही दूरी पर गये था तो वो कसमसाते हुए बोली - कहीं रूको न । मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है ।"

मैंने कार को मेन रोड से हटाकर साइड में एक कच्ची रोड पर रोक दिया । वहां अगल बगल जंगल तो नहीं था लेकिन पेड़ पौधे बहुत थी ।

" जाओ पेड़ के ओट में बैठ कर कर लो ।"

वो जल्दी से भागती हुए गई और एक पेड़ के पीछे जा कर बैठ गई । मगर ताज्जुब की बात ये है कि वो पेड़ कार से मात्र दसेक फुट दूर थी । जब की उस पेड़ के थोड़ी ही आगे बहुत सारे घने पेड़ थे । उसके सीटी की मनमोहनी आवाज मेरे कानों में अमृत घोल रही थी । मेरे नाभी के नीचे साढ़े सात बाई अढ़ाई का लिंग राज जोर से इन्कलाब जिंदाबाद का नारा लगाने लगा। मैं अभी उसको कन्ट्रोल करने में लगा ही था कि वो आई और कार के दरवाजे खोल कर बगल में बैठ गई ।

" चलें अब ? " उसने मुझे देखते हुए कहा ।

" तुम्हे करते देख अब मुझे भी लग गई है । मैं अभी आ रहा हूं ।"

बोलकर मैंने अपनी ओर के दरवाजे से बाहर निकला और उसी पेड़ के पीछे चला गया जहां उसने पेशाब किया था । जहां उसने पेशाब की थी वहां की जमीन पर उसके पेशाब जमा हो गए थे । मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मेरे लिंग राज ने पेशाब करने से मना कर दिया । बड़ी मुश्किल से उसे तैयार कराया और उसके पेशाब के उपर ही पेशाब कर दिया ।

वहां से निवृत्त हो कर कार में सवार हुआ और वहां से निकल गया ।

ड्राइव करते हुए कहा - " कल से बाथरूम नहीं की थी क्या "

" सुबह निकलने के पहले फ्रेश हुईं थी । क्यों ?"

" वहां देख कर लगा जैसे कई लोगों ने पेशाब किया है ।"

उसने फिर मेरी तरफ मारने के लिए हाथ उठाया तो मैं जल्दी से बोला -" sorry sorry मैं अब कुछ नहीं बोलुंगा । तुम हाथ वाथ फिर मत उठा देना वो पहले से ही तुम्हारे मारने से दर्द कर रहा है ।"

" तुम्हारी हरकतें ही ऐसी है । अब अगर फिर तुमने कुछ उल्टा पुल्टा कहा तो शर्तिया मैं तुम्हें गाड़ी से ढकेल दुंगी ।" - उसनेे आंखें तरेरते हुए कहा ।

मैं चुप हो गया । पन्द्रह बीस मिनट तक हम ऐसे ही चुप रहे । आखिर में उसने अपनी चुप्पी तोडते हुए कहा _

" उर्वशी के साथ तुम्हारा कोई अफेयर था ?"

मैं चुपचाप रहा और कार ड्राइव करता रहा । जब मैंने कुछ नहीं बोला तो वो दुबारा पुछी -

" बोलो ना । तुम दोनों रिलेशनशिप में थे ?"

" क्या बोलूं ? जब कुछ बोलने जाता हूं तब तब हाथ उठा देती हो । मैं अब कुछ नहीं बोलने वाला ।"- मैंने नकली नाराजगी जताते हुए कहा ।

" ओले ओले मेरा राजा भैया , अपनी ‌ श्वेता दी से नाराज हो गया । " - मेरे पेट पर गुदगुदी करती हुई बोली - " अच्छा , अब कुछ नहीं बोलुगी ।"

" नहीं नहीं मुझे तुम पर विश्वास नहीं है , तुम घड़ी घड़ी मुंह फुला लेती हो और हाथ पांव चलाने लगती हो । मैं अब तुम्हें कुछ नहीं बताने वाला ।"

" नौटंकी बाज कहीं का । बोलता है या नहीं ।"

" नहीं ।" मैंने मुंह फुलाते हुए कहा ।

" अच्छा । तेरी कसम । अब कुछ नहीं करूंगी ।" उसने अपने बाहों का हार मेरे गले में डालते हुए कहा ।

उसके ऐसा करने से उसका दायां वक्ष मेरे बगल से सट गया और मेरे शरीर में उत्तेजना हिलोरें मारने लगा । और कार हल्के से लहरा गई ।

" अरे ! क्या कर रही हो । एक्सीडेंट करवाना है क्या " मैंने स्टियरिंग सम्हालते हुए कहा ।

वो मुझे छोड़ कर जरा सी दुर होते हुए बोली - " बताओ ना , तुम दोनों का अफेयर था क्या ।"

" मुझसे क्यों पुछती हो ? वो तो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड थी । उसने तुम्हें कुछ नहीं बताया ? "- मैंने उसे देखकर कहा ।

" बोलो ना यार । क्यों लड़कियों जैसी नखरे करते हो । और हां उसने मुझे कुछ नहीं बताया ।"

" ओके । "- मैंने ठंडी सांस भरी -" हमारा अफेयर था ।"

मैंने उसे देखा वो मुझे बिना पलक झुकाए देख रही थी ।

" क्यों ? क्या हुआ ? ऐसे मुझे एक टक क्यों देख रही हो ?"

" कुछ नहीं । साली ।कमीनी । इतना बड़ा राज मुझे तक नहीं बताया । "- वो गुस्से से बोली -" और तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ?"

" मैं ... मुझे उसने अपनी कसम दिला कर किसी को भी बोलने से मना किया था इसलिए नहीं बोला ।"

" वाह । उसने तुम्हें बोला और तुमने मान लिया । मुझे अपनी बेस्ट फ्रेंड , नुरे नजर , हम प्याला , हम निवाला और ना जाने क्या क्या बोलते हो और सिक्रेट उर्वशी के साथ शेयर करते हो ।" - वो गुस्से से बोली ।

" देखो फिर गुस्सा हुई ना । इसीलिए नहीं बता रहा था । और कुछ बातें ऐसी होती हैं जो नहीं बताई जा सकती है अगर किसी लड़की के इज्जत का सवाल हो तो ।"

" ठीक है ठीक है ।" वो अभी भी मुंह फुलाए बैठी थी ।

" मेरी जानेमन तुम तो ऐसा रियेक्ट कर रही हो जैसे मैं तुम्हारा खसम हूं ।" मैंने उसके बांह पर चिकौटी काटते हुए कहा ।

" बकवास बंद करो ।" - वो पुर्ववत गुस्से से बोली ।

हम थोड़ी देर तक चुप रहे । वो शायद किसी सोच में डुबी हुई थी । फिर उसने खामोशी तोड़ी ।

" क्या तुम लोगों ने वो भी कर लिया है ?" वो धीरे से बोली ।

" वो ? वो क्या ? "

" वो ! वही जो एक लड़का लड़की करते हैं ।"

" हां । खुब घुरा फिरा हमलोगो ने । पार्क , सिनेमा , लांग ड्राइव ..."

" बेवकूफ मैं पार्क सिनेमा की बात नहीं कर रही हूं ।"

" फिर किसकी बात कर रही हो ?"

" म..म... मैं उसकी बात कर रही हूं जो लवर अकेले में करते हैं । जो पति-पत्नी बन्द कमरे में करते हैं ।" वो झिझकते हुए बोली ।

" अच्छा वो ।" - मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे अब बात समझ में आयी हो -" ऐसे बोलो ना चो.. मतलब सेक्स किया है या नहीं ।"

" हां वही ।" वो गुस्से से मुझे घुरते हुए बोली ।

" ज्यादा तो नहीं लेकिन सात आठ बार किया है ।" - मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे काफी शर्म आ रही हो ।

जब मैंने उसकी तरफ देखा तो मुझे लगा कि जैसे अब वह मुझ पर रासन पानी लेकर झपटने ही वाली है । मैंने तुरंत कार खड़ी कर दी और उससे कहा -

" देखो ! अभी तुमने मेरी कसम खाई है ।"

वो थोड़ी देर में शान्त हो गई । फिर मैंने कार आगे बढ़ा दी । मैंने थोड़ी देर बाद कहा - " वैसे तो मैं पटाना चाहता था उसके सहेली को लेकिन उसने तो मुझे घांस तक नहीं डाला बल्कि शादी करके फुर्र हो गई तो मैंने सोचा वो नहीं तो उसकी सहेली ही सही ।"

वो कुछ बोली नहीं , चुपचाप सुनती रही । उसे सब समझ में आ रहा था कि मैं किसके बारे में कह रहा हूं । वो एक बार मेरी तरफ देखी फिर सामने सीसे की तरफ देखने लगी ।

" तुमसे कभी झुठ नहीं बोलता ये बात तुम भी जानती हो । अगर तुम्हें बुरा लगा हो तो sorry ." - मैंने उसे मनाते हुए कहा ।

वो चुप बैठी रही ।

" मुझे एक जबरदस्त शायरी याद आ रही है , बोलूं ?" - मैंने कहा ।

वो मेरी तरफ पलटी और अपनी चौबीस कैरेट के मुस्कराहट से माहौल को तनावमुक्त कर दी ।

ये औरतें न , पल में तोला पल में माशा ।

" नहीं नहीं कोई जरूरत नहीं है । जैसे तुम वैसे ही तुम्हारी शायरी ।"- वो बोली ।


रास्ते में एक ढाबे में हल्का फुल्का नाश्ता किया और चाय सिगरेट पीने के बाद आगरा की ओर निकल पड़े । आगरा थोड़ी देर बाद पहुंचने ही वाले थे । रास्ते में मैंने श्वेता दी को मेरे और उर्वशी के रिश्तों के बारे में पुछताछ करने से मना किया ।

उर्वशी का पति संजय चोपड़ा एक बेहद ही रईस और दिल्ली शहर का जाना माना व्यापारी था । उसके दिल्ली में ही नहीं वल्कि आगरा , मुम्बई , हैदराबाद और जयपुर में भी होटल का बिजनेस था । मैंने तो यहां तक सुना था कि वो अगले इलेक्शन में रूलिंग पार्टी के तरह से m.p. के लिए खड़ा होने वाला है । पता नहीं सच है या झूठ ।

उर्वशी भी कोई साधारण घराने से नहीं थी । उसके पिता का गुड़गांव में आटोमोबाइल हार्डवेयर का इंपोर्ट एक्स्पोर्ट का काम था । उर्वशी अपने मां बाप की एकलौती लड़की थी । बहुत बहुत ही सुन्दर बिल्कुल उर्वशी ढोलकिया की तरह ।

उर्वशी की दोस्ती श्वेता दी से कालेज में हुई थी और जल्दी ही वे दोनों बेस्ट फ्रेंड बन गई थी । श्वेता दी ने ही उर्वशी से मेरी परीचय कराई थी जो बाद में चलकर उसके बिस्तर तक पहुंच गई ।

उन्होंने अपने शादी की रिसेप्शन आगरा के अपने ही होटल में रखी थी । जब हम होटल पहुंचे तब दोपहर के दो बज रहे थे । हम होटल के रिसेप्शन हाल में पहुंचे । वहां मेहमानों का जमघट लगा हुआ था । रिसेप्शन को बहुत ही अच्छी तरह से सजाया गया था । खाने में कई तरह की Verity थी । वेज और नान वेज दोनों ही तरह का व्यवस्था था । शराब का साईड में अलग काउंटर बना था जहां पर मेहमानों की भीड़ ज्यादा थी । वर्दी धारी वेटर हाल के चारों ओर मेहमानों के खातिरदारी में जुटे हुए थे । नये नये शादी के बंधन में बंधे हुए जोड़े के लिए एक शानदार मंच बना हुआ था जो अभी खाली पड़ा था । हाल के अन्दर जगह जगह मर्द और औरतें ग्रुप बनाकर स्नैक्स और तरल पेय का आनंद लेते हुए बातों में व्यस्त थे ।

जब हम हाल में प्रवेश किये तो हमारी नजरें मेजबान को ढूंढने लगी । हमने चारों तरफ देखा तो संजय को कुछ लोगों में घिरा हुआ पाया वहीं उर्वशी कुछ औरतों के बीच में । उर्वशी उन औरतों से हंस हंस कर बातें कर रही थी ।

" देखो ! उर्वशी वहां है । उन औरतों के बीच में । हंस हंस के बातें करते हुए ।" श्वेता दी ने उर्वशी की तरफ इशारा किया ।

" हां ।" मैंने देखा इस वक्त वो लाल साड़ी , लाल ब्लाउज , लाल सैंडल माने सर से पांव तक लाल ही लाल गेट अप में थी । गले में सोने का बड़ा हार , जुल्फें खुली हुई , होंठों पर लाली... कयामत लग रही थी ।

" देख कर कौन बोल सकता है कि ये साली इतनी चालु निकलेगी ।" उसने मेरी आंखों के आगे अपनी हथेली हिलाते हुए कहा ।

" तुम्हे एक बात कहूं ।" मैंने श्वेता दी को थोड़ा साईड में ले जाकर बोला ।

" क्या ?"

" A bad man is better than a bad name ."

" मतलब ?"

" बद बदनाम होने से अच्छा है ।"

" मैं समझी नहीं ।" उन्होंने मुझे प्रश्न भरी निगाहों से देखा ।

" मैं समझाता हूं ....मान लो ..एक लड़का राम , जिसने कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया हो, कभी शराब पी ना हो उसे यदि कोई शराब दुकान में या शराब दुकान के पास या पब में कोई देख ले तो वो यही समझेगा कि वो लड़का राम शराबी है । और एक लड़का जिसका नाम मोहन है वो डेली ड्रींकर है रोज शराब पीता है लेकिन उसे शराब पीते हुए कभी किसी ने भी नहीं देखा तो लोग उसके बारे में यही कहेंगे कि मोहन कितना अच्छा लड़का है , शराब को हाथ तक नहीं लगाता ।.... यहां राम बदनाम है लेकिन एक्चुअली बद आदमी मोहन है ।......समझी ।"

वो कुछ बोली तो नहीं लेकिन समझने का प्रयत्न कर रही थी ।

मैंने फिर कहा -" मान लो .... मैं कहता हूं मान लो कि मैं एक अय्याश छोकरी बाज लड़का हूं , मेरी कई लड़कियों से नाजायज ताल्लुकात है मगर किसी ने भी... किसी ने भी मुझे वो सब गन्दी हरकतें करते हुए नहीं देखा है, और ना ही सुना है इसका मतलब मै एक शरीफ बन्दा हूं । दुसरी तरफ वो उर्वशी का हसबैंड संजय एक बहुत ही शरीफ और पराई औरतों से दूर रहने वाला लड़का है लेकिन भुले भटके किसी कोठा या वैश्या के साथ दिख गया तो लोग यही समझेंगे कि वो एक रंडीबाज और चरित्रहीन लड़का है ।..... तुम गलत करो लेकिन पकड़े मत जाओ तो सब ठीक ठीक लेकिन अगर पकड़े जाओ तो सब खराब खराब ।.... इसीलिए कहते हैं कि बद आदमी बद नाम होने से अच्छा है ।"

" ठीक है ठीक है । समझ गई । तुम्हारी विद्या तुम्हे ही मुबारक । चलो उर्वशी के पास चलते हैं ।" उसने मेरी बांह पकड़ कर ले जाते हुए कहा ।

चलते-चलते वो अचानक रूकी और मुझसे पूछा " तुम भी कुछ gift लाए हो ?"

"हां । तुम क्या लाई हो ?"

" एक सोने की अंगूठी , चांदी का पायल और कपड़े का सेट । और तुम ?"


" मैं " -मैं उसके कान में फुसफुसाया -" Manforce Condoms "

उसने मेरे पेट एक जोर का मुक्का मारा और मुस्कराते हुए मेरी बांह पकड़ उर्वशी की तरफ चल पड़ी ।
Nice update......
 
  • Like
Reactions: SANJU ( V. R. )
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 9.


श्वेता दी के आवाज से मेरी नींद खुली । मैंने घड़ी में टाईम देखा शाम के सात बज रहे थे । मैं जम्हाई लेते हुए बोला - " बहुत देर तक सो लिया ।"

" हां , सात बज गए । चलो उठो जल्दी से तैयार हो जाओ उर्वशी नीचे हाल में बुला रही है ।"

मैंने श्वेता दी की तरफ देखा । वो नहा कर फ्रेश हो गई थी । उसने ब्लू कलर की साड़ी और ब्लाऊज़ पहन रखी थी । चेहरे पर हल्की सी मेकअप थी । मैं उसकी सुन्दरता को निहारते हुए सोच रहा था खुबसूरत लड़कियो को शादी ही नहीं करनी चाहिए । इनके शादी के बाद न जाने कितने लड़कों का दिल टुट जाता होगा । कितने बेचारे देवदास बन जाते होंगे ।

" क्या हुआ ? चलना नहीं है क्या ?" मुझे सोचते देख उसने कहा ।

" हां हां चलता हूं ।" कहकर मैं बिस्तर से नीचे उतरा ।

" सुनो ! मैं निचे जा रही हूं तुम जब आना तब कमरे को बंद कर देना ।'

श्वेता दी बोलकर कमरे से निकल गयी । मैं भी बाथरूम में चला गया ।

करीब आधा घंटा बाद नहा धो कर पैन्ट शर्ट पहन कर मैं भी तैयार हो गया । मैं कमरे से निकलने ही वाला था कि मेरा मोबाइल बजा ।
मैंने देखा माॅम का नम्बर था । मैंने फोन उठाया । माॅम मेरे वापस आने के प्रोग्राम के बारे में पुछ रही थी । मैंने उन्हें बताया कि मैं कल शाम को किसी वक्त आऊंगा । उन्हीं से ये भी मालूम हुआ कि रीतु की सहेली काजल भी घर आईं हुई है और वो आज रात मेरे घर पर ही रूकेगी ।

माॅम से बात कर मैं रूम से बाहर निकला और दरवाजे को बंद कर मैं लिफ्ट की तरफ बढ़ा कि फिर मेरा मोबाइल बजने लगा । मैंने देखा इस बार रीतु थी ।

" हां बोल ।"

" भैया , मां ने कहा आप कल शाम को आवोगे ।"

" हां कल शाम तक आ जाउंगा । कोई काम है क्या "

" आप आ जाओ फिर बोलती हूं ।" - रीतु बोली - " भैया आप की लाडो काजल आप से बात करना चाहती है ।"

" बोलो काजल " मैंने प्यार से बोला ।

" भैया आप आते समय वहां के पेठा लेते आईयेगा ।"

" लेते आऊंगा । और कुछ चाहिेए ? " मैंने कहा ।

" नहीं भैया । लीजिए ! रीतु आप से कुछ बोलना चाहती है ।"

फोन पर अब रीतु आ गयी ।

मैं उसके बोलने से पहले ही कहा -" तु क्यों काजल को परेशान करती है । न जाने मेरे बारे में क्या क्या सोचती होगी ।"

" आप एक नम्बर के बेवकूफ हो । आपको बताऊं वो थोड़ी देर पहले क्या कर रही थी ।'

" क्या कर रही थी ।"

" आपके रूम में आपके बिस्तर पर लेट कर गाना गा रही थी ।"

" गाना कौन सा गाना ?"

" मैं तो छोड़ चली बाबुल का देश पिया का घर प्यारा लगे ।'

" क्या ?"

" क्या बकवास करती है । भैया ये झुठ बोल रही है ।" - काजल हड़बड़ाते हुए बोली ।

दोनों को एक साथ बोलते हुए सुनकर मैं समझ गया कि मोबाइल स्पीकर पर है ।

" मैं झुठ नहीं बोल रही हूं बल्कि मैं तो झुठ बोलती ही नहीं हूं । सतयुग में राजा हरिश्चन्द्र के बाद कलयुग में सच बोलने वाला सिर्फ मैं ही हूं ।"

अभी उसकी बक बक जारी ही थी कि वहां मधुमिता पहुंच गई । मैंने रीतु को बाद में फोन करने को बोलकर फोन काट दी ।

" किससे बातें हो रही थी ।" मधुमिता ने मुस्कुराते हुए कहा ।

" मेरी बहन थी पर तुम यहां क्या कर रही हो ?"

" मैं भी इसी फ्लोर पर ठहरी हूं रूम नं ३०७ ।"

" अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है । तब तो रात अच्छी कटेगी ।"

" ज्यादा ख्याली पुलाव बनाओ मत । मेरे साथ मेरी दो सहेलियां भी है ।"

" ओह ।" मैंने बुरा मुंह बनाया ।

" और मेरे बगल वाला रुम ३०६ भैया और भाभी का है ।"

" अच्छा । और बाकी तुम्हारे फेमिली ?"

" सभी इसी फ्लोर पर ठहरे हैं । मेरे डैड और मम्मी और भाभी का भी परिवार सभी ।"

तब तक मधुमिता की सहेलियां आ गयी । मैं मधुमिता से फोन नंबर एक्सचेंज का के नीचे हाल में आ गया ।

मैं नीचे रिसेप्शन हाल में पहुंचा । वहां पहले से ज्यादा लोगों का जमावड़ा था । पार्टी पुरे शबाब पर थी । मैं टहलते हुए चाय के काउंटर पर पहुंचा और चाय लेकर धीरे धीरे पीने लगा । तभी श्वेता दी वहां आ गई और वो भी चाय लेकर मेरे बगल में खड़ी हो गई ।

" इतनी देर कैसे हो गई ?" श्वेता दी ने पूछा ।

" माॅम और रीतु का फोन आ गया था ।"

" सब ठीक है ना ।"

" सब ठीक है दरअसल वो आने के बारे में पुछ रही थी ।"

' ओह ।"

मैं चाय पीते हुए हाल के चारों ओर नजर दौडा रहा था । हाल में इस वक्त करीब सौ के आसपास मेहमान थे । उर्वशी और संजय जी दोनों स्टेज पर सिंहासन के समान चेयर पर बैठे थे । मेहमान वहां जाकर उनको शादी की मुबारकबाद दे रहे थे ।

" उर्वशी के शादी के बाद भी तुम्हारा सम्बन्ध रहा है क्या " - श्वेता दी ने कहा ।

मैंने चौंक कर श्वेता दी की तरफ देखा ।

" कहां से होता ? जिस दिन उसकी शादी थी उसी दिन तो अमर का खून हो गया था । फिर उसके बाद की सारी कहानी तुम्हें पता ही है ।"

" हूं .... तुम दोनों की लास्ट पिछली डेट कब हूई थी ?"

" मैं सच कहुंगा तो फिर गुस्सा करोगी ।"

" नहीं करूंगी । बोलो ना ।"

" तुम्हे याद है जब वो अपने शादी की कार्ड देने तुम्हारे घर आई थी ।"

" हां याद है । अपने शादी के चार दिन पहले आई थी ।"

" उसी दिन ।"

" क्या ?" वो मुंह बाये मुझे देख रही थी ।

" हां उसी दिन । उस दिन के बारे में याद करो ।"- मुस्कराते हुए मैंने कहा ।

" वो दोपहर में शायद आई थी ।" श्वेता दी बोली ।


" वो दोपहर नहीं ग्यारह बजे आई थी । तब चाचा चाची को लेकर राहुल के स्कूल गए थे । उस दिन राहुल के स्कूल में पैरेंट्स मीटिंग था ।"

" हां याद आ गया । जब वो आई थी उस समय हम दोनों तास खेल रहे थे । है ना ।"

" हां । हम तास खेल रहे थे । उर्वशी ने तुम्हें कार्ड बांटने के लिए साथ में चलने को कहा तब तुमने उससे कहा मैंने अभी नहाया नहीं है । तुम बैठो मैं अभी नहा कर तैयार हो कर आती हूं ।"

" हां याद आया । फिर मै नहाने चली गई ।"

" उसी समय ।"

श्वेता दी आश्चर्य से मुझे देखते हुए बोली -" क्या ? मतलब जब मैं नहाने गई तब तुम दोनों वो.. वो मेरा मतलब सेक्स किया ।"

" हां तुम्हारे रूम में और तुम्हारे ही बिस्तर पर और सेक्स के दौरान वो तुमसे बातें भी करती रही ।"

" तुम न सच में एक नम्बर के हरामी हो । और ये उर्वशी की बच्ची..."

" छोड़ो ना यार । क्यों खामखां की टेंशन पालती हो ।"

मैंने देखा वो नाखुश नजर आ रही थी । फिर उर्वशी ने हमें देख कर अपने पास बुला लिया । मैं श्वेता दी के साथ स्टेज पर चला गया । श्वेता दी उर्वशी के पास खड़ी हो गई । मैं संजय जी के सामने से गुजरा । संजय जी ने इस वक्त घी कलर की शेरवानी पहन रखी थी । वो काफी हैंडसम दिख रहे थे ।आंखों में शानदार गोगल्स ।

मैं उनके गोगल्स की तरफ देखते ही चौंक गया । गोगल्स के प्रति बिम्ब से मुझे एक रिवाल्वर की नाल को उनकी तरफ तानते हुए पाया । मैं बिना सोचे समझे संजय जी पर झपटा और उन्हें लिए जमीन पर गिर पड़ा । गोली मेरे शर्ट को छुते हुए पिछे की दिवार में घुस गई ।
Interesting mod....
 
  • Like
Reactions: SANJU ( V. R. )

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Nice update bro.... TE="SANJU ( Versha Ritu ), post: 1668314, member: 12292"]
Update 19.


सुबह नौ बजे नाश्ते के बाद मैं अपनी बाइक लिए चाचा के घर गया । चाची ने कल मुझे नया मोबाइल लाने के लिए कहा था । दरवाजा बंद था । मैंने बेल बजाईं ।

चाचा ने दरवाजा खोला । मैं आश्चर्यचकित हुआ । उन्हें तो ड्यूटी पर होना चाहिए था , ये अभी तक घर पर क्या कर रहे हैं ?

मेरे चाचा जिनका नाम रमेश था , अडतालीस वरषिय करीब दुबले-पतले शख्स जो कि एक नम्बर के खड़ूस और निहायत ही हाट टेम्पर माइंडेड आदमी । एक नम्बर के जेलेसी मैन । जहां मेरे डैड एक सोवर और मिलनसार व्यक्ति थे वहीं चाचा रिजर्व और जलनखोर टाइप के आदमी थे । मैंने शायद ही इन्हें कभी हंसते हुए देखा हो ।

चाचा ने मुझे घुरते हुए कहा -" क्या है ?"

" चाची ने बुलाया था ।" मैंने कहा ।

" किस लिए ?"

" डाइवोर्स के लिए ।"

" क्या मतलब "- वो चौंकते हुए बोले ।

तभी चाची आ गई । वो इस वक्त साड़ी पहनी हुई थी । वो मुझे देखते हैं बोली ।

" अरे सागर बेटा , आओ आओ ।"

" ये क्या कह रहा है ? किसका डाइवोर्स है ?"

" डाइवोर्स " चाची ने चौंकते हुए कहा -" किसका डाइवोर्स ?"

चाचा ने मुझे गुस्से से देखा -" किसका डाइवोर्स ?"

" चाचा मेरे एक दोस्त की मम्मी है , वो अपने पति के रोज के किच किच से परेशान होकर डाइवोर्स लेना चाहती है । वो मुझे किसी काबिल वकील के बारे में पुछ रही थी । मैंने चाची को कहा था इसके बारे में तो इन्होंने कहा था कि कल आना बात करेंगे ।"

चाचा ने मुड़कर चाची को देखा ।

" अरे हां , मैं तो भुल ही गयी थी । कल सागर ने बताया था "- चाची ने बात संभालते हुए कहा ।

मेरा तात श्री इतना भी अक्ल का कोल्हू नहीं था जो इस ब्यंग्य को समझ नहीं रहा था ।

मैं निकल रहा हूं " - चाचा ने मुझे अपने आंखों से भस्म करते हुए नजरों से देख कर बोला - " थोड़ा पढ़ाई-लिखाई पर भी ध्यान दो , ऐसी चीजें पर दिमाग लगाओगे तो जिन्दगी भर भीख मांगते फिरोगे ।"

बोलकर चाचा बाहर निकल गया ।

" उफ़ चाची ! क्या खा के पैदा की थी ऐसे हसबैंड को " - मैं लम्बी सांसें लेते हुए सोफे पर ढेर हो गया ।

" नालायक कहीं का.... मैंने पैदा किया था या तेरी दादी ने । और पैदा किया तो किया ले आके मेरे ही पल्लू से बांध दिया "- चाची ने मेन दरवाजा बंद करते हुए कहा ।

" तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हारी जबरदस्ती शादी करवा दी गई हो । हंटर मार के लग्न मंडप पे बैठा दिया गया हो । कोई प्यार मोहब्बत था ही नही । तो फिर ये आपके प्यारे प्यारे टाबरे ( लड़के और लड़कियां ) कहां से आ गए ।"

" जिस दिन तुम्हारी शादी होगी उस दिन तुम खुद जान जाओगे । जब तुम्हारी शादी भी हमारे जैसे , पुराने जमाने की तरह होगी " - चाची मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।

" मेरी शादी आप जैसे किसी हसीना से होती तो मैं अपनी बीवी को चौबिसों घंटा इतना मीठा मीठा बोलता न कि.... इतना मीठा मीठा बोलता न..."

" तो क्या होता ?"

" उसे शुगर हो जाता ।"

" नालायक । हर घड़ी मसखरी करता है "- चाची ने हंसते हुए कहा -" चाय लाऊं ?"

" नहीं । अभी तो नाश्ता किया है । आप ये बताओ कि चाचा ने मोबाइल लाया है कि नहीं ?"

" कहां लाया है । बोलते हैं कि समय नहीं मिला , भुल गया , कल पक्का ही ले आऊंगा । रोज रोज वहीं बहाना ।"

" ओह ! अच्छा चाची क्या चाचा शुरू से ही ऐसे थे न बाद में हुए ।"

" अरे वो शुरू से ही ऐसे थे । तु तो देख ही रहा है ।"

" मैंने तो जब से होश संभाला है तब से ही मैं उन्हें ऐसे ही कठोर और किसी से कोई मतलब नहीं रखने वाला देखा है लेकिन जब आपकी शादी हुई थी तब भी क्या वो ऐसे ही थे ।"

" वो शुरू से ही ऐसे थे । ज्यादा किसी से मतलब नहीं । अपने में ही खोया रहना "- चाची अपने शादी के समय को याद करते हुए बोली " कालेज में खेल कुद में बहुत ही माहिर थे और उन्हें खेलकूद के चलते ही नौकरी भी मिली थी । उन्होंने कई प्रतियोगिताएं भी जीती थी । मेरे मां बाप ने सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा और फिर
Thanks for supporting friend ?
[/QUOTE]
 

Yamraaj

Put your Attitude on my Dick......
2,249
7,148
159
Update 19. Continue.


" वो शुरू से ही ऐसे थे । ज्यादा किसी से मतलब नहीं । अपने में ही खोया रहना " - चाची अपने शादी के समय को याद करते हुए बोली -" कालेज में खेलकूद में बहुत माहिर थे और खेलकूद के चलते ही नौकरी भी मिली थी । उन्होंने कई प्रतियोगिताएं भी जीती थी । मेरे मां बाप ने सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा और फिर हमारी शादी हो गई । हमारे जमाने में लड़का लड़की देखने का रिवाज नहीं था । मां बाप अपने लड़के और लड़कियों की शादी फिक्स करते थे और शादी हो जाती थी ।"

" और यदि किसी को लड़का या किसी को लड़की पसंद ना आए तो ?"

" तो भी कुछ नहीं हो सकता था । एक बार शादी हो गई तो हो गई । भले ही लड़का या लड़की एक दुसरे को पसंद आए या ना आए , वे जिन्दगी भर के लिए शादी के डोर से बंध जाते थे । तुम्हारे मम्मी और डैडी की शादी भी तो बिना देखे हुए ही हुई थी ।"

" डैड को तो मैंने माॅम के सामने कभी तेज आवाज में बातें करते या लड़ते झगड़ते नहीं देखा है लेकिन तात श्री को कई बार आपसे लड़ते झगड़ते देखा है । उनके खौफ से श्वेता दी भी उनके सामने नहीं जाती थी । मेरे पुछने का मतलब था कि क्या जब आप की शादी हुई थी तब भी क्या वो ऐसे ही थे ?"

" नहीं नहीं , शादी के शुरुआती कई सालों तक बहुत अच्छे थे लेकिन जब से उन्हें हार्ट की बिमारी हुई तब से थोड़े बदल गये और बची खुची बवासीर के रोग ने कर दिया ।"

" बवासीर ! ये कब हुआ ?"

" छः सात साल हो गए " - चाची अपने कमरे की तरफ जाती हुई बोली -" तु बैठ । मैं पैसे लेकर आती हूं ।"

मैं सोफे पर लेट गया।

थोड़ी देर में चाची आई और सोफे पर मेरे सर के बगल बैठने का प्रयास करी। मेरे लेटने के कारण सोफे पर जगह नहीं था इसलिए मैने उठने का प्रयत्न किया तो चाची ने मेरे सर को उठा कर अपने गोद यानी जांघों पर रख दिया और बोली - " लेटा रह । मैं बैठ जाऊंगी ।"

" आपको बैठने में दिक्कत होगी " - मैंने लेटे हुए उनको देखते हुए कहा ।

" कोई दिक्कत नहीं होगी " - कहकर चाची रूपए मेरे हाथ में पकड़ाई और मेरे सर के बालों को अपनी उंगलिया से सहलाने लगी ।

मैंने अपने सर को उनके मोटे और मांशल जांघों पर एडजस्ट करते हुए रूपए गिनने लगा । बीस हजार रुपए थे ।

" ये तो बहुत ज्यादा है । कौन सी मोबाइल लाना है ?" - कहते हुए रूपयों को अपने पैंट के अंदर रख दिया ।

" कोई भी अच्छी सी देख समझ के ले लेना ।"

" ठीक है । लेकिन चाइनीज मोबाइल नहीं लाऊंगा ।"

" जो तुझे समझ में आए वो ले लेना । "

चाची के जांघों पर सर रखकर लेटने से उनके जांघों का गुदाज पन महसूस हो रहा था जिससे मुझे कुछ कुछ हो रहा था । मैंने करवट ली और उनके पेट की तरफ मुंह करके लेट गया । उनकी साड़ी पेट पर से हट गई थी जिससे उनकी थोड़ी चर्बी युक्त और थोड़ी फुली हुई पेट नग्न हो गई थी । करवट ले कर पलटने से मेरा मुंह सीधे उनके नंगे पेट से सट गया । जिससे उनके बदन में हुई सिहरन को मैंने साफ महसूस किया ।

वो अभी भी मेरे सर के बालों को सहलाए जा रही थी । चाची अभी मात्र ४३ या ४४ साल की थी । इस उम्र में भी औरतों की सेक्स लाइफ पिक पीरियड में रहती है । जबकि चाचा की बिमारी देख कर मुझे नहीं लगता था कि वो अपनी सेक्स लाइफ इन्जवाय कर रही होगी। और शायद कई सालों से ऐसी ही जीवन जी रही होगी ।मुझे उन पर ना जाने क्यों बहुत दया आई और मैंने उनकी नंगे पेट को अपने होंठों से चुम लिया ।

" अरे ! क्या करता है , गुदगुदी होती है " - चाची अपने शरीर को झटके देते हुए बोली ।

" आप को अच्छा नहीं लगता है ? " - कहते हुए मैंने फिर से उनके पेट को चुम लिया ।

वो कुछ नहीं बोली । सिर्फ मेरे बालों पर उंगलियां फेरती रही । हम ऐसे ही अवस्था में कितनी देर तक पड़े रहे । तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी ।

मैं उठ कर बैठ गया । चाची अपने साड़ी को व्यवस्थित करते हुए दरवाजा खोलने चली गई ।

चाची के साथ चाचा ने हाॅल में प्रवेश किया ।

" तुम अभी यहीं हो , कालेज गए नहीं ? " - चाचा ने मुझे देख कर अपनी चिर-परिचित लहजे में कहा ।

" आज कालेज नहीं है । कल श्वेता दी और जीजू यहां शिफ्ट हो रहे हैं उसी के बारे में चाची से बातें चल रही थी ।"

" अच्छा ! थोड़ी देर पहले तो किसी के डाइवोर्स के बारे में बोल रहे थे ।"

" हां । उसके अलावा इसके बारे में भी बातें करनी थी ।"

" ठीक है ठीक है...मुझे भी पता है कि वो लोग ..यहां तुम्हारे उस दोस्त... क्या नाम था उसका.... हां , शायद अमर के घर शिफ्ट हो रहे हैं । तो इस के लिए तुम दोनों को क्या बातें करनी थी ?

" चाचा , वो लोग यहां काफी सारे सामान के साथ शिफ्ट कर रहे हैं । क्या आप ने कोई लेबर वगैरह से बात की है ? इतना सारा सामान जिसमें बड़े बड़े पलंग , आलमारी , बक्से , बर्तनों का कार्टून , बैग और न जाने क्या क्या सामान होगा , वो क्या आप खुद ही करोगे ।"

तात श्री ने मुझे घूर कर देखा और चाची से बोले -" मेरी मोबाइल यहां छुट गया है , देखो वो मेरे रूम में कहीं होगा ।"

चाची कमरे में चली गई । कुछ देर बाद वो चाचा का मोबाइल लिए हुए आई और उन्हें सौंप दी । चाचा मोबाइल लेकर बाहर चले गए ।

" तुमने मुझे ये सब बताया नहीं कि मजदूर देखने होंगे " - चाचा के बाहर निकलते ही चाची ने पूछा ।

" आप चिंता मत करो , मैंने लेबर पहले ही ठीक कर दिया है ।"

" ओह । " - चाची ने थोड़ी देर रूक कर कहा -" देखा न कैसा आदमी है... जहां काम दिखाई दिया , फट से ज़बान बन्द हो गई। कैसे लेबर जुगाड़ होगा... कैसे राजीव और श्वेता को यहां शिफ्ट करने में मदद करना है....उन को तो जैसे कोई मतलब नहीं है...सुना और भाग खड़े हुए ।"

" आप तो उनका स्वभाव जानती हो... छोड़ो उनको... मैं सब कर लुंगा " - मैंने चाची को आश्वासन दिया ।

" हां , कई साल हो गए उनको जानते हुए । अगर तु नहीं होता तो मेरे घर का एक रत्ती भर भी काम नहीं होता....मेरा काम , श्वेता का काम , राहुल का काम.... आज तक तुने ही तो किया है ।"

" मैंने तो जो भी किया है अपनी फेमिली के लिए किया है... छोड़ो वो सब । मैं चलता हूं " - कहकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा ।

" कहां जाओगे ?" - चाची भी मेरे साथ चलते हुए बोली ।

" अमर की मम्मी के पास । वहां रूम वगैरह की सफाई भी तो करवानी है ।"

" ठीक है " - चाची ने कहा ।

***********

मैं वहां से निकल कर अमर की मम्मी के घर चला गया ।

वहां मजदूर उपर वाले तल्ले की साफ सफाई कर रहे थे । आंटी ( अमर की मम्मी ) मजदूरों के साथ ही खड़ी थी ।

मैंने आंटी के चरण स्पर्श कर प्रणाम किया और कहा -" आंटी , एक बार नीचे चलो न , कुछ बात करनी थी ।"

" कैसी बातें ?" - आंटी ने मुझे सवालिए दृष्टि से देखते हुए कहा ।

" अमर के बारे में ।"

आंटी कुछ नहीं बोली ।

मैं आंटी के साथ उनके कमरे में आ गया ।

" क्या बात करनी है ? - वो बिस्तर पर बैठते हुए बोली ।

" आंटी , अमर का मोबाइल कहां है ?" - मैं भी उनके बगल में बैठते हुए कहा ।

" अमर का मोबाइल यहां पर नहीं है । पुलिस भी जब यहां आई थी तब उन्होंने भी मोबाइल के बारे में पुछा था । फिर उन्होंने पुरे घर की तलाशी ली थी । उपर नीचे दोनों तल्लों में । हर जगह लेकिन मोबाइल कहीं भी नहीं मिली ।"

" ओह ! " - मैंने निराश होते हुए कहा ।

" वैसे अमर के क़ातिल का कुछ अता पता लगा ?"

" नहीं आंटी , अभी तक तो नहीं । इसीलिए तो मोबाइल के बारे में आप से पुछ रहा था । उसके काॅल डिटेल से पता चलता कि उसने उस दिन या पिछले कुछ दिनों से किस किस के साथ बात की थी । या कुछ मैसेज वगैरह से पता चलता कि हाल फिलहाल किसके साथ ज्यादा टच में था ।"

" एक महिना से भी ऊपर हो गया लेकिन अभी तक मेरे बेटे के हत्यारे को पुलिस पकड़ नहीं पाई । मुझे तो पुलिस पर यकीन ही नही रहा । मेरा बेटा उपर से मुझे देख रहा होगा और बोल रहा होगा कि मां..मेरा हत्यारा अभी तक खुलेआम घूम रहा है ... क्या उसको सजा नहीं मिलेगी... क्या उसके हत्यारे ऐसे ही खुलेआम बेफिक्र होकर घुम रहे होंगे " - वो भावुक होते हुए रूंधे गले से बोली - " क्या मेरी आत्मा ऐसे ही भटकते रहेगी ।"

" सजा मिलेगी आंटी...जरूर मिलेगी । भगवान के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं । आप थोड़ी हिम्मत बनाएं रखें ।"

" मैंने तो हिम्मत ही बनाए रखा है बेटा.... मैं तो बस इसलिए जिन्दा हूं कि एक बार हत्यारे को फांसी पर चढ़ते हुए देख लूं वर्ना मैं तो उसी दिन अमर के साथ ही ऊपर चली गई होती ।"

आंटी फफक कर रो पड़ी । मेरी आंखें भी भर आई । मैंने उन्हें अपने बाहों में भर लिया और उन्हें दिलासा देते रहा ।

थोड़ी देर बाद वो नोर्मल हुई । वो मुझ से अलग हो गई ।

" बेटा , मैं अपनी सारी दौलत लुटा दुंगी अपने बेटे के हत्यारे को फांसी पर चढ़ाने के लिए । तु पुलिस को पैसे खिला । और यदि तुझे लगता है कि पुलिस हत्यारे को पकड़ने में कुछ नहीं कर पायेगी तो कोई डिटेक्टिव ढुंढ । उसे पैसा दे । वो जितना मांगे मैं उतना दुंगी लेकिन उस खूनी को ढुंढे और मेरे हवाले करे । उसे मै सजा दुंगी । अपने हाथों से उसका खून करूंगी ।" - आंटी क्रोधित होकर बोली ।

" आंटी , मैं कल इसी सिलसिले में गाजियाबाद जा रहा हूं पुलिस से मिलने । और प्राइवेट डिटेक्टिव के बारे में मुझे कोई खास जानकारी नहीं है । हां इतना मैंने सुना है कि वो भले ही काम का रिजल्ट दे पाए या ना दे पाए लेकिन अपना चार्ज ले ही लेंगे और उनके चार्ज भी काफी बड़ी रकम में होती है ।"

" कुछ भी कर पर उस हत्यारे को ढुंढ । रूपए पैसे की चिंता मत कर जितना लगेगा मैं दुंगी । मेरी ये सारी जमा पूंजी , सम्पत्ति किस काम की है...जब मेरा बच्चा ही नहीं रहा तो ये मेरे किस काम की ।"

" मैं कर रहा हूं आंटी । मैं पुरे जतन से खूनी का पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं । और अब तो उस खूनी का अगला टारगेट मैं हो गया हूं ।"

" क्या ?" - आंटी ने चौंकते हुए कहा ।

" हां आंटी ।"

मैंने उन्हें मेरे और रीतु के बीच में जो बातें हुई थी , वो कह सुनाई ।

वो सुनकर चिन्तित होते हुए बोली -" मेरा एक बेटा तो चला गया और अब मैं अपने दुसरे बेटे को खोना नहीं चाहती.... एक मिनट तु बैठ , मैं अभी आती हूं ।"

ये बोलकर वो बिस्तर से उठी और अपनी अलमारी से कुछ निकाल कर वापस बिस्तर पर आकर बैठ गई । मैंने देखा वो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का उनके नाम पर चेकबुक था । उन्होंने एक चेक पर अपना साइन किया और चेकबुक से फाड़ कर मुझे दे दिया ।

" बेटा , इसमें तीन लाख रुपए भर के बैंक से उठा ले । एक लाख मुझे दे देना और बाकी तु अपने पास रख लेना । तु इन पैसों को उस हत्यारे को खोजने में लगा ।"

" ये तो काफी बड़ी रकम है आन्टी ।"

" कोई बात नहीं । और भी यदि ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े तो मुझे बताना । "

मैंने चेक पाकेट में रख लिया ।

" बेटा , तुझसे एक बात और कहनी थी ।"

" हां आंटी बोलिए ।"

" कल तुम्हारे जीजा और बहन आ रही है तो मैं चाहती हूं कि इस बीच मैं चारों धाम दर्शन करके आ जाऊं ।"

" चारों धाम ! कौन सी चारों धाम ?" - मैं चौंक कर बोला ।

" बद्रीनाथ , केदारनाथ , गंगोत्री और यमुनोत्री ।"

" ओह ! कब जाएंगी ?"

" वो लोग कल यहां आ रहे हैं तो तु परसों की टीकट करवा दे ।"

" ठीक है आंटी.... मैं अब चलता हूं । वैसे आप को कुछ सामान वगैरह मंगवाना है ?"

" हां । कल आना , बता दुंगी ।"

मैं वहां से बाहर निकल गया ।

************

मैं बाहर निकल कर रमणीक लाल को फोन लगाया ।

रमणीक लाल करोलबाग थाने में हवलदार था । शायद ३५ से ४० के बीच उमर होगा । करप्ट पुलिसिया था । रिश्वतखोरी में फंस गया था , जिसकी वजह से काफी अरसे से सस्पेंशन में चल रहा था । एक बार उसकी कुछ लोगों के साथ पंगे के दौरान मैंने उसकी मदद की थी इसलिए वो मेरी इज्जत करता था । और मेरा दोस्त जैसा हो गया था । जबकि हमारे उम्र में काफी अंतर था । चूंकि अभी वो सस्पेंशन में चल रहा था इसलिए उसका हाथ तंग रहता था ।

" सागर बोल रहा हूं " - मैं बोला - " एक काम है , करेगा ?"

" कैसा काम ?" - रमणीक लाल ने कहा ।

" मामूली काम ।"

" अरे ! पहले काम तो बता ?"

" थोड़ा रूटीन काम है । थोड़ा लेग वर्क है , थोड़ा क्लैरिकल वर्क है । कुछ कमाई का भी जोगाड़ है ।"

" क्या बात है । लगता है कोई लाटरी लग गई है ?"

" वो सब छोड़ , काम करेगा तो हां बोल बरना..."

" अगर इल लैगल काम है तो सुन....मेरा सस्पेंशन का दौर खत्म हो गया है , मेरी नौकरी बहाल हो गई है ।"

" ये तो बहुत अच्छी खबर है । ठीक है मैं किसी और को देखता हूं ।"

" कितना देगा ?"

" रमणीक लाल , काम मेरी मर्जी का और उजरत तेरी मर्जी का ।"

" जरूर कोई मोटा बकरा काटा होगा ।"

मैं हंसा ।

" कुछ लोग की फुल बैक ग्राउंड टटोलनी है । उनके बारे में जितनी ज्यादा जानकारी हासिल हो सके , इकठ्ठा करनी है ।"

" कौन लोग ?"

" इस काम के लिए तुम्हें एक दो आदमी भी एंगेज करने पड़े तो उस की फीस भी मैं भरूंगा ।"

" जरूर , जरूर । कोई मोटा बकरा है ।"

" हां या ना बोल ।"

" हां ।"

" कागज कलम निकाल और जो बोलता हूं , उसे नोट कर ।"

" करा ।"

मैंने उन तमाम लोगों के नाम लिखाये जो इस केस से सम्बंधित थे ।

" सब नोट कर लिया ?" - फिर मैंने पूछा ।

" हां ।"

मैंने सम्बन्ध विच्छेद किया और बाइक पर बैठ कर पहाड़गंज चला गया ।
Nice update bro....
 

Enigma

Well-Known Member
4,125
58,095
173
Update 25. Continue.


दस बजे के आसपास मैं गोल्डन नाईट क्लब पहुंचा ।

बाहर से दिखने में साधारण सा ही लगा लेकिन अंदर की रौनक और रंगीनी देखने लायक थी । पुरे हाॅल में मध्यम रोशनी थी। डांस फ्लोर से डीजे की धुन आ रही थी । कुछ जोड़े वहां डांस करने के बहाने एक दूसरे से अभिसार रत में मशगूल थे । हाॅल के अन्दर कई टेबल दो चार कुर्सियों सहित थोड़ी थोड़ी दुरी पर लगे हुए थे । कुछ लोग जोड़े में बैठे हुए थे तो कुछ सिंगल । अभी हाॅल पुरा भरा हुआ नहीं था ।

मैं कोने में एक खाली टेबल देखकर बैठ गया । मैंने एक बार फिर पुरे हाॅल में नजरें दौड़ाई । वहां जितने भी Steward थे सभी जवान लड़कियां थी । वो पुरे हाॅल में घुम घुम कर अपने कस्टमर को वाइन और भोजन सर्व कर रही थी । सभी लड़कियों का एक ड्रेस कोड था । वे सभी स्कर्ट और टॉप पहने हुए थी । वे जो स्कर्ट पहनी थी वो उनके घुटनों से काफी ऊपर थी । उनकी जांघें दुधिया रोशनी में भी चमक रही थी और टाॅप उनके छातियों पर कसा हुआ था ।

मैं बैठे हुए उन बार बालाओं को ताड़ ही रहा था कि एक लड़की आई और बोली -" गुड इवनिंग सर ! आप को क्या सर्व करूं ?

मैंने उसे देखा । वो एक बीस बाइस साल की स्लिम फिगर की खुबसूरत लड़की थी ।

" सर्व तो आप बहुत कुछ कर सकती हो लेकिन उसके लिए आपको मुझे कम्पनी देनी होगी । मुझे अकेले अकेले वाइन पीने में मजा नहीं आता "- मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

" ह्वाई नाॅट सर ! "- वो भी अपने चेहरे पर गोल्डन जुबली मुस्कान लाते हुए बोली -" लेकिन बील आपको पे करनी होगी ।"

" जरूर । लेकिन आपका एम्पायर कहीं नाराज तो नहीं हो जायेगा आपको यहां बैठे देखकर ?"

" अभी नहीं होगा । अभी तो आधा हाॅल खाली है , हां ग्यारह बजे के बाद जब पुरा हाॅल भर जायेगा तब जरूर नाराज होगा ।"

" जब यहां का हाईलाइट प्रोग्राम शुरू होगा ?"

" हां । जब हाॅट लड़कियों का हाॅट डांस शुरू होगा ।"

" हाॅट तो तुम भी कोई कम नहीं हो ?"

" थैंक्यू लेकिन मेरा फिल्ड अलग है ।"

" ओके । मेरे लिए रेड वाइन विथ सोडा ऐंड वाटर और आपको जो पसंद हो ।"

" राइट सर ! मैं अभी आई ।"

वो चली गई । मैं फिर से पुरे हाॅल को सरसरी निगाह से मुआयना करने लगा ।

पांच मिनट बाद वो आई वाइन और चखने के साथ । सभी चीजें टेबल पर रख कर मेरे बाजू में बैठ गई । वो अपने लिए वोदका लाई थी ।

हमने चियर किया और ग्लास अपने अपने होंठों से लगा लिया ।

" तुमने अपना नाम तो बताया ही नहीं ?"

" आपने जो पुछा नहीं ।"

" अब पुछ लेता हूं । वैसे मेरा नाम सागर है ।"

" मैं श्रेया ।"

" ब्यूटीफुल नेम बिल्कुल तुम्हारी तरह ।"

" थैंक्यू सर । मैंने यहां पहले आपको कभी देखा नहीं ।"

" सही कहा । मैं यहां पहली बार ही आया हूं ।"

मैंने अपने पैंट से सिगरेट का पैकेट निकाला और उसे आफर किया । उसने इनकार कर दिया । मैंने सिगरेट सुलगाई और कहा - "श्रेया , मुझे तुमसे एक फैवर चाहिए !"

लड़की चौंक कर मुझे देखी और बोली -" माफ कीजिएगा सर , मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं ।"

" अरे तुम गलत सोच रही हो । मुझे किसी के बारे में जानकारी चाहिए और यदि सम्भव हो तो मिलना भी ।"

" किस के बारे में ?"- वो संदिग्ध स्वर में बोली ।

" एक वीणा नाम की लड़की है जो यहीं पर काम करती है । वो यहां के कैबरे डांसर लड़कियों में से ही कोई एक है । पर मेरी बदकिस्मती है कि मैं उसे चेहरे से भी नहीं पहचानता ।"

वो अब थोड़ा आश्वस्त हुई ।

" लेकिन इस नाम की कोई भी लड़की यहां काम नहीं करती ।"

" शायद यहां उसने अपना नाम चेंज कर लिया हो ?"

" हो सकता है । लेकिन आपको उससे काम क्या है ?"

" देखो तुम बुरा मत मानना । मै उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता । बस इतना ही कह सकता हूं कि वो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से विलोंग करती है । उसकी बड़ी बहन यहीं दिल्ली में एक करोड़पति की पत्नी है ।"

" ओह ! लेकिन वीणा नाम की लड़की यहां कोई नहीं है , मैं यहां काम करने वाली सारी लड़कियों को जानती हूं ।"

" वो इस ट्रेड में हाल फिलहाल महिने में ही आई है । शायद एकाध साल के भीतर । जब तुम सभी को जानती हो तो ये भी जानती होगी कि कौन कौन सी लड़की हाल के महीनों में यहां ज्वाइन की है ?"

" एक लड़की है तो जिसने आठ महीने पहले ज्वाइन किया है और आज के तारीख में वो यहां की सबसे बेस्ट परफार्मर है । बाकियों से उसकी डिमांड कहीं अधिक है ।"

" कौन ?"- मैंने आशा भरी नजरों से देखा ।

" नेहा ।"

" क्या तुम उससे अभी मिल सकती हो ?"

" अभी उनके परफोर्मेंस में टाईम है । मिल सकती हूं ।"

" तो प्लीज़ एक बार उससे मिलो और ये तस्दीक करो कि वो वीणा है या नहीं ।"

" ओके , मैं मालूम करती हूं वो कहां और किस पोजीशन में है ।"

" थैंक्यू ।"

" लेकिन अगर उसको तुमसे मिलना कबूल नहीं हुआ तो , मैं कुछ नहीं कर सकूंगी ।"

" कर सकोगी । थोड़ा प्यार से समझाना , कहना ये उसी के फायदे के लिए है ।"

" मैं... मैं देखती हूं ।"

उसने अपना ग्लास खत्म किया । फिर वो चली गई ।

मैं ड्रिंक्स और सिगरेट पीते हुए इन्तजार करने लगा ।

लगभग बीस मिनट बाद वो आई । उसके चेहरे के भाव से लग रहा था कि पोजीटिव न्यूज लाई है ।"

वो बैठते हुए एक कागज का परची मुझे पकड़ा दी ।

" क्या है ये ?"

" देखो ?"

मैंने परची खोला । वो किसी जगह का एड्रेस था ।

" ये तो एड्रेस है ।"

" हां । नेहा ही वीणा है । उसने तुम्हें इसी एड्रेस पे कल एक बजे दोपहर में बुलाया है ।"

" थैंक्यू सो मच श्रेया । "

" ओके । अब मुझे जाना होगा । अब भीड़ बढ़ती जा रही है "- वो हाॅल में बढ़ते हुए भीड़ को देखते हुए बोली ।

" अब नहीं लोगी ?"

" नहीं सर । ज्यादा पी लुंगी तो ड्यूटी कैसे करूंगी ।"

" कोई बात नहीं । बील ले आओ । "

" आप क्यों जा रहे हो । अभी तो यहां की असली रौनक बाकी है ।"

" मुझे ये सब पसंद नहीं है ।"

" ओके मैं बील लाती हूं ।"

जब घर पहुंचा तब साढ़े ग्यारह बज गए थे । डैड ने दरवाजा खोला था । माॅम शायद सो गई थी । मैं उपर अपने कमरे में गया और सोने की तैयारी करने लगा ।

***********

अगले दिन समय से पहले ही वीणा के पत्ते पर पहुंच गया । वो मुझे एक बजे बुलाई थी लेकिन मैं बारह बजे ही पहुंच गया ।

मैंने काॅलबेल बजाई ।

कोई जवाब नहीं मिला ।

मैंने दोबारा काॅलबेल बजाई तो भीतर से झुंझलाए से जनाना स्वर में पुछा गया -" कौन है ?"

" मैं ।"- मैंने बोला -" दरवाजा खोलिए ।"

" मैं क्या होता है ? कौन हो ?"

" मैं सागर । कल रात आपने गोल्डन नाईट क्लब में अपने फ्लैट का पता दिया था श्रेया के थ्रू ।"

कुछ देर तक खामोशी छाई रही ।

" ओह ! ठहरो , खोलती हूं ।"

कुछ क्षण बाद दरवाजा खुला और एक बेहद ही खूबसूरत लड़की मुझे चौखट पर दिखाई दी ।

उसने एक तरफ हटकर मुझे भीतर आने दिया और फिर मेरे पीछे दरवाजा बंद कर दिया ।

मैंने देखा कि वो तभी... शायद काॅलबेल की आवाज सुनकर ही...सो के उठी मालूम होती थी । उस घड़ी उसने एक खुले गले की नाइटी पहनी हुई थी जिसमें देखने लायक जो थी... वो काफी दिलकश थी.... बड़ी बड़ी..गोल गोल ।

एकाएक वो घुमी और " अभी आई " कहकर पिछले कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर दी ।

मैं एक सोफे पर बैठ कर सिगरेट पीते हुए उसका इन्तजार करने लगा ।

वो आधे घंटे बाद वापिस लौटी । उस वक्त वो साधारण सलवार सूट पहनी हुई थी । मगर उस ड्रेस में भी वो बला की खूबसूरत लग रही थी । हाईट पांच फुट सात इंच , उम्र शायद तेईस चौबीस , जाफरानी रंगत जैसी त्वचा , बड़ी बड़ी आंखें , तीखे नैन-नक्श , भरे भरे गुलाबी होंठ , फुले हुए गाल , लंबे बाल , मोतियों जैसी दांत , असाधारण रूप से उन्नत वक्ष , उभरे हुए नितम्ब , मांशल जांघ....सब कुछ नम्बर वन...सब कुछ वाह वाह ।

" चाय पियोगे ?"- वो खड़े खड़े ही बोली ।

" जी नहीं शुक्रिया । मैं नाश्ता करके आया हूं ।"

" लेकिन मैंने नहीं किया है । मैं अभी अभी सो कर उठी हूं । "

" ओके ।"

वो फिर गई । थोड़ी देर बाद चाय और स्नैक्स लेकर आई ।

वो एक दूसरे सिंगल सोफे पर बैठ गई । उसने मुझे चाय दिया । मैंने " थैंक्स " कहकर चाय ले लिया ।

" तुम अमर के दोस्त हो ना ?"

मेरे हाथ से चाय की प्याली छलक गई । मैं चौंक कर उसे देखने लगा ।
Bhai totally Sudhir ki yaad dila di. Shuru se padh Raha hu aur har ek line me aadarniya Surendra Mohan Pathak ji ki lekhan shaili ki jhalak hai, siway kaam-krida wale hisse ke. Likha wo bhi bade atche andaaj me hai. Jaisa Network Sudhir (one and only) ka tha thik wahi andaaj yaha pramukh kirdaar ka hai. Ye wala drishya toh aisa Raha jaise unka he upanyaas padh Raha hu.
Bahot he romanchak Kahani hai Bhai aur aap kirdaro ka parichaya bhi ghatna par karwaye ho Jo ek badi khoobi hai.
 
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top