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Incest Sagar (Completed)

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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Sanju ji .. baaki sab to theek hai .. Ritu, रितु, रीतु .. ke vishay mein .. magar ye kamdev99008 bhaiya wali ऋतु ka mamla sabse jholam-jhol hai .. aur aakhir ho bhi kyon na .. jab lekhak he aise hai to paatr bhi to maasha-allah hi honge .. koi ni aap jyaada tension na lo ji .. apna to chalta rehta hai .. ab dekho bechare TheBlackBlood bhai ke to surr he badal gaye .. par jis ke badalne chahiye .. unke kaan par jun tak na rengti ... "ha nahi to"
Pariwartan prakrati ka niyam hai is liye khud me pariwartan lana bhi laazmi ho jata hai, aur itna to main samajhdaar hu ki prakrati ke is niyam ke anusaar khud me bhi pariwartan karu, isi liye to writer ka tag fir se laga liya maine aur ek new story bhi chhaap di. Itna hi nahi aaj ek aur new story ka thread open kar diya jisme abhi tak aapka aana nahi hua. Khair koi baat nahi ham to intzaar karene,,,,,,:lol:
 
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Update 25. Continue.

" तुम सोच रहे होगे कि मैं अमर को कैसे जानती हूं " - वो बोली ।

मैं सोफे पर बैठा अचरज से उसे देखे जा रहा था ।

वो अपनी चाय की कप टेबल पर रख कर खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए थोड़ी दुरी पर खिड़की के पास खड़ी हो गई । वो खिड़की की कपाट खोलकर बाहर आसमान की ओर उपर देखने लगी ।

मैं चुपचाप बैठे उसके बोलने की प्रतीक्षा कर रहा था ।

" हम छः महीने से रिलेशनशिप में थे । वो तुम्हारे और अपने मां की अक्सर चर्चा किया करता था । जब श्रेया ने तुम्हारा नाम लिया तभी मैं समझ गई थी कि तुम अमर के दोस्त सागर हो ।"

" लेकिन अमर ने तुम्हारे बारे में हमसे कभी जिक्र नहीं किया ।"

" मैंने ही मना किया था ।"

" लेकिन क्यों ?"

" अपने किस्मत पे एतबार नहीं था ।"

" मैं समझा नहीं ।"

" श्रेया बोली थी कि तुम मेरी बहन को जानते हो ?" - वो पलट कर मुझे देखते हुए बोली ।

उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया ।

" एकाध बार मिला था ।"

" कैसी है ?"

" तुम्हें नहीं पता ?"

" जब से अमेठी छोड़कर गई तब से नहीं ।"

" मतलब इतने सालों से तुम दोनों मिली नहीं ?"

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ ।

" मिलना तो दूर बात तक नहीं हुई ।"

" कोई फोन वगैरह भी नहीं ?"

" मुश्किल से तो दो वक्त के अनाज का जुगाड होता था तो भला फोन कहां से आता " - वो फिकी मुस्कान करती हुई बोली ।

" अनुष्का एक करोड़पति की पत्नी बन चुकी है । मजे में है ।"

" चलो अच्छा है , कम से कम उसकी लाइफ तो सेट हुई " - वो वापस खिड़की की तरफ पलटते हुए बोली -" अमर के क़ातिल का पता चला ?"

" अभी तक तो नहीं । उसी सिलसिले में तो तुम से बातें करना चाहता था ।"

" मुझे अखबार के जरिए पता चला था । मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वो अब इस दुनिया में नहीं है ।"

" तुम्हें किसी पर शक है ?"

" हमने अपने रिलेशन को सभी से छुपा कर रखा था । मैं किस पर शक करूंगी ?"

" जिस वक्त अमर का खून हुआ था उसी समय तुम्हारी बहन अनुष्का मौका-ए-वारदात पर पाई गई थी ।"

" क्या ?" - वो चौंक कर फिर पलटी ।

मैंने उसे अमर के केस से संबंधित सभी चीजें बताई ।

उसके हाव भाव से यही लगता था कि वो इन सारी बातों से अनजान हैं ।

" एंटरटेनमेंट के धंधे में कैसे आ गई ?"

" अनुष्का के जाने के बाद मैं अकेली पड़ गई । मैं ज्यादा पढ़ी लिखी भी तो नहीं थी कि कहीं काम करके दो वक्त की रोटी जुगाड कर सकूं । अनुष्का पढ़ने में तेज थी तो वो छोटे छोटे बच्चों को कोचिंग , ट्यूशन करके दो पैसे कमा लेती थी जिससे किसी भी तरह हो जिंदगी कट ही जा रही थी । लेकिन उसके जाने के बाद मैं क्या करती ? थोड़ी बहुत डांस जानती थी तो शादी ब्याहों में शो करने वाले एक ग्रुप में बतौर डांसर शामिल हो गई । फिर जो सफर वहां से शुरू हुई तो आकर गोल्डन नाईट क्लब में खतम हुई ।"

" क्या अमर से मुलाकात गोल्डन क्लब में हुई थी ?

" नहीं । उससे पहली बार मुलाकात इतफाकन हुईं थी । मेरी एक्सीडेंट हो गई थी । एक कार वाले ने धक्का दे दिया था । उसी ने मुझे हाॅस्पिटल पहुंचाया और इलाज भी करवाया था । फिर वो मुझे देखने हाॅस्पिटल रोज आने लगा । इसी तरह मिलते-जुलते हमारी भावनाएं कब उबलने लगी पता ही नहीं चला ।"

मुझे ताज्जुब हो रहा था कि इतनी बड़ी बात अमर ने मुझसे छुपाई थी ।

" तुमने अमर को अपने रिलेशनशिप के बारे में हमें बताने के लिए इसलिए मना किया था न कि हम तुम्हारे जाॅब को पसन्द नहीं करेंगे । तुम्हें अच्छी लड़की नहीं समझेंगे ?"

" जो काम मैं कर रही हूं उसे सभ्य समाज में अच्छा नहीं माना जाता । है तो ये बदनाम धंधा ही न । हमारी सोसायटी में कैबरे डांसर और काॅल गर्ल मे उन्नीस बीस का ही तो फर्क माना जाता है न ।"

" लेकिन आखिर में तुम दोनों को अपनी शादी के बारे में बताना तो पड़ता ही ?"

" मेरी एक साल की एग्रीमेंट अक्टूबर में खतम हो रही थी । उससे पहले मैं जाॅब नहीं छोड़ सकती थी । जाॅब छोड़ते ही हम बता देते ।"

मैं कुछ देर तक चुपचाप उसे निहारता रहा ।

" मैंने सुना है तुम्हारी एक मौसी भी है ?"

" लगता है अनुष्का ने एकाध मुलाकात में बहुत ही कुछ बता दिया तुम्हें " - वो कटाक्ष करते हुए बोली ।

मैं चुप रहा ।

" हां । एक मौसी है लेकिन हमें तो उसका चेहरा भी याद नहीं है ।"

" मैंने ये भी सुना है वो भी किसी करोड़पति से ब्याही गई थी ।"

" उनके बारे में जो भी हमने सुना था वो मां से ही सुना था । वो मां से बड़ी थी । अनुष्का की तरह उन्होंने भी शादी के बाद फिर कभी अपने मायके में कदम नहीं रखा । मां बोलती थी कि उसने प्रेम विवाह किया था और उसका पति अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था ।"

" तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?"

" जब तक मां बाप जिंदा थे किसी तरह की दिक्कत नहीं थी । पिता जी एक मील में काम करते थे लेकिन इतना पैसा कमा ही लेते थे कि चारों का गुजारा अच्छे से हो जाता था । जब दोनों की मृत्यु हुई उस वक्त मैं दस साल की और अनुष्का चौदह साल की थी । अनुष्का ने दसवीं कक्षा पास कर ली थी लेकिन मां बाप के मरने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो गई । कोई कमाने वाला नहीं था । मां बाप सम्पत्ति के नाम पर एक छोटा सा टाली का घर और थोड़ी गहने ही छोड़ गए थे , इससे हम क्या कर सकते थे ?"

" उसी गहने को बेचकर अनुष्का दिल्ली चली गई ?"

" हां । उसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर.....।"

मुझे अनुष्का पर सच में बहुत गुस्सा आ रहा था ।

" तुम्हारे मौसाजी और मौसी की कोई फोटो है क्या ?"

" एक फोटो थी लेकिन वो मिल नहीं रही है ?"

" ओह ।"

" वैसे एक हमारी फेमिली फोटो है लेकिन उसमें मौसाजी नहीं है "- बोलकर वो अपने कमरे में चली गई ।

थोड़ी देर बाद वो एक पुरानी सी फोटो जो गंदी भी हो गई थी ले आई ।

पांच लोगों का एक फेमिली ग्रुप फोटो था । दोनों बहनें बहुत छोटी थी । वे अपने माता-पिता के गोद में बैठी हुई थी और एक उनकी मौसी थी ।

मौसी की पिक्चर देखते ही मुझे लगा कि इसे मैंने कहीं देखा है । थोड़ी देर देखकर मैंने फोटो उसे वापस कर दिया । वो फोटो लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि मैंने पूछा -
" यहां अकेली रहती हो ?"

" नहीं । एक लड़की के साथ रहती हूं , वो भी मेरे साथ ही काम करती है " - वो जाते जाते बोली ।

मेरे दिमाग में बार बार उसके मौसी की तसबीर आ रही थी । इसे मैंने कहीं देखा तो जरूर है ।

वो कमरे से बाहर आई तो मैं भी खड़ा हो गया ।

" जाने से पहले एक बात पुछना चाहता हूं ?"

" क्या ?"

" अब क्या करोगी ? जाॅब करती रहोगी या छोड़ दोगी ?"

वो फिर से खिड़की के पास चली गई और बाहर की ओर देखने लगी । बहुत देर तक वो वैसे ही खड़ी रही । मुझे लगा वो जबाव नहीं देना चाहती है इसलिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ा ।

दरवाजे पे खड़े होकर उसकी और निगाह डाली। वहां से उसकी शक्ल दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें बंद थी और आंखो से दो बूंद आंसू छलक कर गालों पे पड़े हुए थे ।

मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया ।

" मां बाप ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया " - वो बहुत ही धीमी आवाज में बोल रही थी -" बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है......इसे छोड़ कहां जाउंगी ।"

उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुःख और वेदना से भर गया । मेरी आंखें बोझिल हो गई ।

मैं उसके पास गया और उसे पकड़ कर अपनी ओर घुमाया ।

वो सिर झुकाए चुपचाप खड़ी रही । मैंने उसके आंसुओं को अपने हथेली से पोंछा ।

" तुम एक बहादुर लड़की हो वीणा । जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों में तुमने अपने को संभाला है उससे मेरे दिल में तुम्हारे प्रति बहुत इज्जत है । मैं तुम्हें दिल से नमन करता हूं । तुम्हारे दिन भी पलटेंगे.... और बहुत जल्द पलटेंगे....मेरा पूरा विश्वास है ।"

मैं वहां से भारी मन और दिल में टिश लिए विदा हुआ ।
 
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firefox420

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Update 25. Continue.

" तुम सोच रहे होगे कि मैं अमर को कैसे जानती हूं " - वो बोली ।

मैं सोफे पर बैठा अचरज से उसे देखे जा रहा था ।

वो अपनी चाय की कप टेबल पर रख कर खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए थोड़ी दुरी पर खिड़की के पास खड़ी हो गई । वो खिड़की की कपाट खोलकर बाहर आसमान की ओर उपर देखने लगी ।

मैं चुपचाप बैठे उसके बोलने की प्रतीक्षा कर रहा था ।

" हम छः महीने से रिलेशनशिप में थे । वो तुम्हारे और अपने मां की अक्सर चर्चा किया करता था । जब श्रेया ने तुम्हारा नाम लिया तभी मैं समझ गई थी कि तुम अमर के दोस्त सागर हो ।"

" लेकिन अमर ने तुम्हारे बारे में हमसे कभी जिक्र नहीं किया ।"

" मैंने ही मना किया था ।"

" लेकिन क्यों ?"

" अपने किस्मत पे एतबार नहीं था ।"

" मैं समझा नहीं ।"

" श्रेया बोली थी कि तुम मेरी बहन को जानते हो ?" - वो पलट कर मुझे देखते हुए बोली ।

उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया ।

" एकाध बार मिला था ।"

" कैसी है ?"

" तुम्हें नहीं पता ?"

" जब से अमेठी छोड़कर गई तब से नहीं ।"

" मतलब इतने सालों से तुम दोनों मिली नहीं ?"

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ ।

" मिलना तो दूर बात तक नहीं हुई ।"

" कोई फोन वगैरह भी नहीं ?"

" मुश्किल से तो दो वक्त के अनाज का जुगाड होता था तो भला फोन कहां से आता " - वो फिकी मुस्कान करती हुई बोली ।

" अनुष्का एक करोड़पति की पत्नी बन चुकी है । मजे में है ।"

" चलो अच्छा है , कम से कम उसकी लाइफ तो सेट हुई " - वो वापस खिड़की की तरफ पलटते हुए बोली -" अमर के क़ातिल का पता चला ?"

" अभी तक तो नहीं । उसी सिलसिले में तो तुम से बातें करना चाहता था ।"

" मुझे अखबार के जरिए पता चला था । मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वो अब इस दुनिया में नहीं है ।"

" तुम्हें किसी पर शक है ?"

" हमने अपने रिलेशन को सभी से छुपा कर रखा था । मैं किस पर शक करूंगी ?"

" जिस वक्त अमर का खून हुआ था उसी समय तुम्हारी बहन अनुष्का मौका-ए-वारदात पर पाई गई थी ।"

" क्या ?" - वो चौंक कर फिर पलटी ।

मैंने उसे अमर के केस से संबंधित सभी चीजें बताई ।

उसके हाव भाव से यही लगता था कि वो इन सारी बातों से अनजान हैं ।

" एंटरटेनमेंट के धंधे में कैसे आ गई ?"

" अनुष्का के जाने के बाद मैं अकेली पड़ गई । मैं ज्यादा पढ़ी लिखी भी तो नहीं थी कि कहीं काम करके दो वक्त की रोटी जुगाड कर सकूं । अनुष्का पढ़ने में तेज थी तो वो छोटे छोटे बच्चों को कोचिंग , ट्यूशन करके दो पैसे कमा लेती थी जिससे किसी भी तरह हो जिंदगी कट ही जा रही थी । लेकिन उसके जाने के बाद मैं क्या करती ? थोड़ी बहुत डांस जानती थी तो शादी ब्याहों में शो करने वाले एक ग्रुप में बतौर डांसर शामिल हो गई । फिर जो सफर वहां से शुरू हुई तो आकर गोल्डन नाईट क्लब में खतम हुई ।"

" क्या अमर से मुलाकात गोल्डन क्लब में हुई थी ?

" नहीं । उससे पहली बार मुलाकात इतफाकन हुईं थी । मेरी एक्सीडेंट हो गई थी । एक कार वाले ने धक्का दे दिया था । उसी ने मुझे हाॅस्पिटल पहुंचाया और इलाज भी करवाया था । फिर वो मुझे देखने हाॅस्पिटल रोज आने लगा । इसी तरह मिलते-जुलते हमारी भावनाएं कब उबलने लगी पता ही नहीं चला ।"

मुझे ताज्जुब हो रहा था कि इतनी बड़ी बात अमर ने मुझसे छुपाई थी ।

" तुमने अमर को अपने रिलेशनशिप के बारे में हमें बताने के लिए इसलिए मना किया था न कि हम तुम्हारे जाॅब को पसन्द नहीं करेंगे । तुम्हें अच्छी लड़की नहीं समझेंगे ?"

" जो काम मैं कर रही हूं उसे सभ्य समाज में अच्छा नहीं माना जाता । है तो ये बदनाम धंधा ही न । हमारी सोसायटी में कैबरे डांसर और काॅल गर्ल मे उन्नीस बीस का ही तो फर्क माना जाता है न ।"

" लेकिन आखिर में तुम दोनों को अपनी शादी के बारे में बताना तो पड़ता ही ?"

" मेरी एक साल की एग्रीमेंट अक्टूबर में खतम हो रही थी । उससे पहले मैं जाॅब नहीं छोड़ सकती थी । जाॅब छोड़ते ही हम बता देते ।"

मैं कुछ देर तक चुपचाप उसे निहारता रहा ।

" मैंने सुना है तुम्हारी एक मौसी भी है ?"

" लगता है अनुष्का ने एकाध मुलाकात में बहुत ही कुछ बता दिया तुम्हें " - वो कटाक्ष करते हुए बोली ।

मैं चुप रहा ।

" हां । एक मौसी है लेकिन हमें तो उसका चेहरा भी याद नहीं है ।"

" मैंने ये भी सुना है वो भी किसी करोड़पति से ब्याही गई थी ।"

" उनके बारे में जो भी हमने सुना था वो मां से ही सुना था । वो मां से बड़ी थी । अनुष्का की तरह उन्होंने भी शादी के बाद फिर कभी अपने मायके में कदम नहीं रखा । मां बोलती थी कि उसने प्रेम विवाह किया था और उसका पति अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था ।"

" तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?"

" जब तक मां बाप जिंदा थे किसी तरह की दिक्कत नहीं थी । पिता जी एक मील में काम करते थे लेकिन इतना पैसा कमा ही लेते थे कि चारों का गुजारा अच्छे से हो जाता था । जब दोनों की मृत्यु हुई उस वक्त मैं दस साल की और अनुष्का चौदह साल की थी । अनुष्का ने दसवीं कक्षा पास कर ली थी लेकिन मां बाप के मरने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो गई । कोई कमाने वाला नहीं था । मां बाप सम्पत्ति के नाम पर एक छोटा सा टाली का घर और थोड़ी गहने ही छोड़ गए थे , इससे हम क्या कर सकते थे ?"

" उसी गहने को बेचकर अनुष्का दिल्ली चली गई ?"

" हां । उसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर.....।"

मुझे अनुष्का पर सच में बहुत गुस्सा आ रहा था ।

" तुम्हारे मौसाजी और मौसी की कोई फोटो है क्या ?"

" एक फोटो थी लेकिन वो मिल नहीं रही है ?"

" ओह ।"

" वैसे एक हमारी फेमिली फोटो है लेकिन उसमें मौसाजी नहीं है "- बोलकर वो अपने कमरे में चली गई ।

थोड़ी देर बाद वो एक पुरानी सी फोटो जो गंदी भी हो गई थी ले आई ।

पांच लोगों का एक फेमिली ग्रुप फोटो था । दोनों बहनें बहुत छोटी थी । वे अपने माता-पिता के गोद में बैठी हुई थी और एक उनकी मौसी थी ।

मौसी की पिक्चर देखते ही मुझे लगा कि इसे मैंने कहीं देखा है । थोड़ी देर देखकर मैंने फोटो उसे वापस कर दिया । वो फोटो लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि मैंने पूछा -
" यहां अकेली रहती हो ?"

" नहीं । एक लड़की के साथ रहती हूं , वो भी मेरे साथ ही काम करती है " - वो जाते जाते बोली ।

मेरे दिमाग में बार बार उसके मौसी की तसबीर आ रही थी । इसे मैंने कहीं देखा तो जरूर है ।

वो कमरे से बाहर आई तो मैं भी खड़ा हो गया ।

" जाने से पहले एक बात पुछना चाहता हूं ?"

" क्या ?"

" अब क्या करोगी ? जाॅब करती रहोगी या छोड़ दोगी ?"

वो फिर से खिड़की के पास चली गई और बाहर की ओर देखने लगी । बहुत देर तक वो वैसे ही खड़ी रही । मुझे लगा वो जबाव नहीं देना चाहती है इसलिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ा ।

दरवाजे पे खड़े होकर उसकी और निगाह डाली। वहां से उसकी शक्ल दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें बंद थी और आंखो से दो बूंद आंसू छलक कर गालों पे पड़े हुए थे ।

मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया ।

" मां बाप ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया " - वो बहुत ही धीमी आवाज में बोल रही थी -" बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है......इसे छोड़ कहां जाउंगी ।"

उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुःख और वेदना से भर गया । मेरी आंखें बोझिल हो गई ।

मैं उसके पास गया और उसे पकड़ कर अपनी ओर घुमाया ।

वो सिर झुकाए चुपचाप खड़ी रही । मैंने उसके आंसुओं को अपने हथेली से पोंछा ।

" तुम एक बहादुर लड़की हो वीणा । जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों में तुमने अपने को संभाला है उससे मेरे दिल में तुम्हारे प्रति बहुत इज्जत है । मैं तुम्हें दिल से नमन करता हूं । तुम्हारे दिन भी पलटेंगे.... और बहुत जल्द पलटेंगे....मेरा पूरा विश्वास है ।"

मैं वहां से भारी मन और दिल में टिश लिए विदा हुआ ।

Sanju bhai aaj to aapne wakai mein hila diya .. kya gazab ka turn diya hai kahani mein .. aur emotions ki to aisi daiya-maiyya kar di ki ek baar ko to meri bhi aanke dab-dabane ki kagaar par pahuch chuki thi ...

waise kahi Veena ki behen aur mausi ek he ghar mein to nahi bihayi .. abhi tak to 2 he paise wali party se hum ru-b-ru ho paaye hai ...

aur ek baat .. Versha-Ritu bhai aap update itne chupke se kyon dete ho .. koi chorri thode he karte ho .. ki update post karne ke baad hum readers aapse ladenge ki update late kyon post kiya ...
 

Pta nhi

♥️🖤❤️🖤
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Update 25. Continue.

" तुम सोच रहे होगे कि मैं अमर को कैसे जानती हूं " - वो बोली ।

मैं सोफे पर बैठा अचरज से उसे देखे जा रहा था ।

वो अपनी चाय की कप टेबल पर रख कर खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए थोड़ी दुरी पर खिड़की के पास खड़ी हो गई । वो खिड़की की कपाट खोलकर बाहर आसमान की ओर उपर देखने लगी ।

मैं चुपचाप बैठे उसके बोलने की प्रतीक्षा कर रहा था ।

" हम छः महीने से रिलेशनशिप में थे । वो तुम्हारे और अपने मां की अक्सर चर्चा किया करता था । जब श्रेया ने तुम्हारा नाम लिया तभी मैं समझ गई थी कि तुम अमर के दोस्त सागर हो ।"

" लेकिन अमर ने तुम्हारे बारे में हमसे कभी जिक्र नहीं किया ।"

" मैंने ही मना किया था ।"

" लेकिन क्यों ?"

" अपने किस्मत पे एतबार नहीं था ।"

" मैं समझा नहीं ।"

" श्रेया बोली थी कि तुम मेरी बहन को जानते हो ?" - वो पलट कर मुझे देखते हुए बोली ।

उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया ।

" एकाध बार मिला था ।"

" कैसी है ?"

" तुम्हें नहीं पता ?"

" जब से अमेठी छोड़कर गई तब से नहीं ।"

" मतलब इतने सालों से तुम दोनों मिली नहीं ?"

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ ।

" मिलना तो दूर बात तक नहीं हुई ।"

" कोई फोन वगैरह भी नहीं ?"

" मुश्किल से तो दो वक्त के अनाज का जुगाड होता था तो भला फोन कहां से आता " - वो फिकी मुस्कान करती हुई बोली ।

" अनुष्का एक करोड़पति की पत्नी बन चुकी है । मजे में है ।"

" चलो अच्छा है , कम से कम उसकी लाइफ तो सेट हुई " - वो वापस खिड़की की तरफ पलटते हुए बोली -" अमर के क़ातिल का पता चला ?"

" अभी तक तो नहीं । उसी सिलसिले में तो तुम से बातें करना चाहता था ।"

" मुझे अखबार के जरिए पता चला था । मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वो अब इस दुनिया में नहीं है ।"

" तुम्हें किसी पर शक है ?"

" हमने अपने रिलेशन को सभी से छुपा कर रखा था । मैं किस पर शक करूंगी ?"

" जिस वक्त अमर का खून हुआ था उसी समय तुम्हारी बहन अनुष्का मौका-ए-वारदात पर पाई गई थी ।"

" क्या ?" - वो चौंक कर फिर पलटी ।

मैंने उसे अमर के केस से संबंधित सभी चीजें बताई ।

उसके हाव भाव से यही लगता था कि वो इन सारी बातों से अनजान हैं ।

" एंटरटेनमेंट के धंधे में कैसे आ गई ?"

" अनुष्का के जाने के बाद मैं अकेली पड़ गई । मैं ज्यादा पढ़ी लिखी भी तो नहीं थी कि कहीं काम करके दो वक्त की रोटी जुगाड कर सकूं । अनुष्का पढ़ने में तेज थी तो वो छोटे छोटे बच्चों को कोचिंग , ट्यूशन करके दो पैसे कमा लेती थी जिससे किसी भी तरह हो जिंदगी कट ही जा रही थी । लेकिन उसके जाने के बाद मैं क्या करती ? थोड़ी बहुत डांस जानती थी तो शादी ब्याहों में शो करने वाले एक ग्रुप में बतौर डांसर शामिल हो गई । फिर जो सफर वहां से शुरू हुई तो आकर गोल्डन नाईट क्लब में खतम हुई ।"

" क्या अमर से मुलाकात गोल्डन क्लब में हुई थी ?

" नहीं । उससे पहली बार मुलाकात इतफाकन हुईं थी । मेरी एक्सीडेंट हो गई थी । एक कार वाले ने धक्का दे दिया था । उसी ने मुझे हाॅस्पिटल पहुंचाया और इलाज भी करवाया था । फिर वो मुझे देखने हाॅस्पिटल रोज आने लगा । इसी तरह मिलते-जुलते हमारी भावनाएं कब उबलने लगी पता ही नहीं चला ।"

मुझे ताज्जुब हो रहा था कि इतनी बड़ी बात अमर ने मुझसे छुपाई थी ।

" तुमने अमर को अपने रिलेशनशिप के बारे में हमें बताने के लिए इसलिए मना किया था न कि हम तुम्हारे जाॅब को पसन्द नहीं करेंगे । तुम्हें अच्छी लड़की नहीं समझेंगे ?"

" जो काम मैं कर रही हूं उसे सभ्य समाज में अच्छा नहीं माना जाता । है तो ये बदनाम धंधा ही न । हमारी सोसायटी में कैबरे डांसर और काॅल गर्ल मे उन्नीस बीस का ही तो फर्क माना जाता है न ।"

" लेकिन आखिर में तुम दोनों को अपनी शादी के बारे में बताना तो पड़ता ही ?"

" मेरी एक साल की एग्रीमेंट अक्टूबर में खतम हो रही थी । उससे पहले मैं जाॅब नहीं छोड़ सकती थी । जाॅब छोड़ते ही हम बता देते ।"

मैं कुछ देर तक चुपचाप उसे निहारता रहा ।

" मैंने सुना है तुम्हारी एक मौसी भी है ?"

" लगता है अनुष्का ने एकाध मुलाकात में बहुत ही कुछ बता दिया तुम्हें " - वो कटाक्ष करते हुए बोली ।

मैं चुप रहा ।

" हां । एक मौसी है लेकिन हमें तो उसका चेहरा भी याद नहीं है ।"

" मैंने ये भी सुना है वो भी किसी करोड़पति से ब्याही गई थी ।"

" उनके बारे में जो भी हमने सुना था वो मां से ही सुना था । वो मां से बड़ी थी । अनुष्का की तरह उन्होंने भी शादी के बाद फिर कभी अपने मायके में कदम नहीं रखा । मां बोलती थी कि उसने प्रेम विवाह किया था और उसका पति अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था ।"

" तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?"

" जब तक मां बाप जिंदा थे किसी तरह की दिक्कत नहीं थी । पिता जी एक मील में काम करते थे लेकिन इतना पैसा कमा ही लेते थे कि चारों का गुजारा अच्छे से हो जाता था । जब दोनों की मृत्यु हुई उस वक्त मैं दस साल की और अनुष्का चौदह साल की थी । अनुष्का ने दसवीं कक्षा पास कर ली थी लेकिन मां बाप के मरने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो गई । कोई कमाने वाला नहीं था । मां बाप सम्पत्ति के नाम पर एक छोटा सा टाली का घर और थोड़ी गहने ही छोड़ गए थे , इससे हम क्या कर सकते थे ?"

" उसी गहने को बेचकर अनुष्का दिल्ली चली गई ?"

" हां । उसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर.....।"

मुझे अनुष्का पर सच में बहुत गुस्सा आ रहा था ।

" तुम्हारे मौसाजी और मौसी की कोई फोटो है क्या ?"

" एक फोटो थी लेकिन वो मिल नहीं रही है ?"

" ओह ।"

" वैसे एक हमारी फेमिली फोटो है लेकिन उसमें मौसाजी नहीं है "- बोलकर वो अपने कमरे में चली गई ।

थोड़ी देर बाद वो एक पुरानी सी फोटो जो गंदी भी हो गई थी ले आई ।

पांच लोगों का एक फेमिली ग्रुप फोटो था । दोनों बहनें बहुत छोटी थी । वे अपने माता-पिता के गोद में बैठी हुई थी और एक उनकी मौसी थी ।

मौसी की पिक्चर देखते ही मुझे लगा कि इसे मैंने कहीं देखा है । थोड़ी देर देखकर मैंने फोटो उसे वापस कर दिया । वो फोटो लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि मैंने पूछा -
" यहां अकेली रहती हो ?"

" नहीं । एक लड़की के साथ रहती हूं , वो भी मेरे साथ ही काम करती है " - वो जाते जाते बोली ।

मेरे दिमाग में बार बार उसके मौसी की तसबीर आ रही थी । इसे मैंने कहीं देखा तो जरूर है ।

वो कमरे से बाहर आई तो मैं भी खड़ा हो गया ।

" जाने से पहले एक बात पुछना चाहता हूं ?"

" क्या ?"

" अब क्या करोगी ? जाॅब करती रहोगी या छोड़ दोगी ?"

वो फिर से खिड़की के पास चली गई और बाहर की ओर देखने लगी । बहुत देर तक वो वैसे ही खड़ी रही । मुझे लगा वो जबाव नहीं देना चाहती है इसलिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ा ।

दरवाजे पे खड़े होकर उसकी और निगाह डाली। वहां से उसकी शक्ल दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें बंद थी और आंखो से दो बूंद आंसू छलक कर गालों पे पड़े हुए थे ।

मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया ।

" मां बाप ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया " - वो बहुत ही धीमी आवाज में बोल रही थी -" बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है......इसे छोड़ कहां जाउंगी ।"

उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुःख और वेदना से भर गया । मेरी आंखें बोझिल हो गई ।

मैं उसके पास गया और उसे पकड़ कर अपनी ओर घुमाया ।

वो सिर झुकाए चुपचाप खड़ी रही । मैंने उसके आंसुओं को अपने हथेली से पोंछा ।

" तुम एक बहादुर लड़की हो वीणा । जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों में तुमने अपने को संभाला है उससे मेरे दिल में तुम्हारे प्रति बहुत इज्जत है । मैं तुम्हें दिल से नमन करता हूं । तुम्हारे दिन भी पलटेंगे.... और बहुत जल्द पलटेंगे....मेरा पूरा विश्वास है ।"

मैं वहां से भारी मन और दिल में टिश लिए विदा हुआ ।
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