भाग -10
आज कॉलेज में बींए फाइनल ईयर का परीक्षा होने के वजह से लौटने में , मुझे बहुत देर हो गई शाम ढलने को था मैं जल्द से जल्द घर वापस पुहंचना चाहती थी
यही सोचते हुए मैं तेजी से, बस स्टॉप की ओर बढ़ने लगी क्योंकि शाम के वक्त वैसे भी बस बहुत भीड़ रहती है और ये एग्जाम के दिन तो कहना ही क्या
मेरे कॉलेज में दो दो कॉलेज का सेंटर पड़ा है सो बस स्टॉप पर पुहंच कर देखा तो भारी भीड़ थी छात्रों की
करीब 10 मिनट बाद मेरे रूट की बस आयी पर मैं तो चढ़ ही नहीं पाई
मैं अपने आप में बोली कैसे जाऊ कोई अॉटो भी नहीं मिल रहा और दूसरी बस कब अायेगी पता नहीं
खैर अब भीड़ कुछ कम हो गया था
बस का इंतजार करते करते यहीं आधा घंटा बीत चूका और सूरज भी ढल चुका था सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें जल चुकी थी
मेरी नजरें बार बार घडी की ओर जा रही थी
अचानक मुझे ऑफिस का चपरासी कमल चौधरी दिखा, वो अपनी मोटरसाइकिल में पार हुआ
मैं जोर से चिल्लाई कमल वो कमल....
कुछ दूर पर जाकर वो मोटरसाइकिल रूकी
कमल ने पलट कर देखा, पर शायद कम लाईट की वजह से उसे मै साफ साफ नही दिख रही थी
तो मैं ही उसकी तरफ बढने लगी,
कमल की उम्र लगभग 25 -26 के आस पास थी मेरे से 4/5साल छोटा रहा होगा, वह बहुत ही सुशील स्वभाव का लडका है उसकी जॉब उसके पिता के निधन पर अनुकंपा के आधार पर हुई ,पांच महीने पहले ही लगी है
मैं जब सामने आई, तो पहले उसी ने टोका
कमल - अरे मैडम, आप अभी तक बस स्टॉप पर ही
मैं - हॉं कमल, मैं तो 45 मिनट से यहां पर हूं 1 बस आई भी पर भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मैं चढ़ नहीं सकी ,क्या तुम मुझे कुछ दूर तक मेरा मतलब है आगे मालबजार तक छोड़ सकते हो क्योंकि आधे घंटे हो गये बस भी नहीं आ रही है, वहां से मुझे ऑटो मिल ही जायेगी
मैनें एक ही सांस में बोल डाला सारी परेशानी
कमल - हां मैडम जी क्यों नहीं, जरूर
मैं -धन्यवाद ,
कमल - इसमें धन्यवाद की क्या बात है, मैडम जी बैठ जाइये
मैं भी हां बोलकर उसके मोटरसाइकिल पर पीछे बैठ गयी ,और चले हम
मैं -कहां रहते हो तुम
कमल -जी मैं मालबजार के पास ही गौतमनगर में रहता हूं ,मैडम आपका घर कहां है
मैं -बाइपास लिंक रोड पर जो मेनॉन कॉलोनी है न उसमे रोड नं -3 पर दूसरा मकान
कमल - अच्छा, मालबजार से करीब 15 मिनट का रास्ता है यही कोई 6-7 किलोमिटर होगा
मैं -हां, और शादी हो गई तुम्हारी
कमल -जी मैडम, अभी 2 महीने पहले ही हुई है, आपकी ज्वनिंग थोड़ी पहले होती तो आप मेरे शादी में आ पाती
कमल बहुत आराम से गाडी चला रहा था, शायद उसे कोई जल्दी नहीं थी कभी कभी ब्रेक लगने से मैं उसके पीठ पर लद जा रही थी जिसके कारण मेरे सीने उसके पीठ में दब रहे थे, कमल को भी मजा आ रहा था शायद
मालबजार पुहचने पर मैं बोली रोक दो, मैं चली जाउंगी यहां से
कमल - चलिए न मैं घर तक पुहंचा देता हूँ
मैं -नहीं तुम्हें देर हो जाएगा और ऑटो तो मिल ही जायेगा
कमल-ठीक है मैडम आप बैठ जाइये तब मैं यहां से जाऊंगा
दो चार ऑटो को बोला पर कोई मेनॉन कॉलोनी जाने को राजी नहीं था,कह रहा की वापसी में सवारी नहीं मिलेगी, देर भी हो रही थी
सो कमल से बोली चलो पुहंचा दो
कमल - हां मैडम मैं तो पुहंचा रहा हूँ और वापसी में मुझे कोई सवारी की भी जरूरत नहीं है
बोलकर हंसने लगा
मैं भी उसकी बाते सुनकर मुस्कुराहते हुए कहा चलो अब
थोडी देर में हम पुहंच गए ,कमल ने मोटरसाइकिल घुमा ली
कमल -चलता हूं मैडम
मैं -चाय पी कर, चले जाना आओ अंदर
कमल -देर हो जाएगा, और घर पर मां और वाईफ राह देख रहे होगें
मैं - हां ठीक है, तुरंत हो जाएगा
कमल -ओके, मैडम जी
मैंनें बेल बजाई, अंदर से कुछ लोगो की बाते और हंसने की आवाज़ आ रही थी
मां ने गेट खोला
मैं -कोई आया है क्या
मां- हां, कुछ पुराने गेस्ट है
मैं -कौन
मां -पहले अंदर तो आ
कमल ने मां को नमस्ते किया
मां- आयो बेटा
कमल -जी
मेरे कमरे में जाने का दो रास्ता है एक हॉल होकर दूसरा गली से मैनें मां से कहा की गली तरफ का गेट खोल दो मेरे कमरे का क्योंकि मैं हॉल से नहीं जाना चाह रही थी अभी फिलहाल और कमल को भी जल्दी वापस जाना है हॉल में बैठने का मतलब देर हो जायेगा मैं मां से बोली
मां- अच्छा ,तुमलोग पीछे से आओ मैं दरवाजा खोल देती हूँ
हां बोलकर मैं और कमल गली की ओर से कमरे में
मैं -मां, कमल और हमारे लिए चाय और पानी यहीं ला दो
चाय पीने के बाद
कमल -जा रहा हूँ, मैडम
मैं -ठीक है, और आते रहना अब तो घर देख लिए हो
कमल -जी
और कमल चला गया उसके बाद मै चेंज कर हॉल में आई ,मां ने सबसे परिचय कराया मैंनें भी नमस्ते किया और सोफे पर बैठे गई

मां ने बताया की, ये तुम्हारे मामा जी के बचपन के मित्र मोहित मामा है और ये विक्की है इनका बेटा मामा जी के दोस्त मोहित मामा मां से करीब 3 साल छोटे थे क्योंकि मामा जी और उनके दोस्त बचपन के मित्र थे
विक्की की उम्र कमल के लगभग लग रहा था
पता चला की विक्की का यहां जॉब तबादला हुआ है
पहले अपने शहर में ही था
मेरा ऑचल मेरे सीने से जरा सरक गया था और मेरे बडे बडे बूब्स एक तरफ के नजर आ रहा था
गौर किया की विक्की मेरे सीने की घाटियों में बार बार नजरे घुमा रहा था ,1 बार हमारी नजरें मिली तो वो झेंप गया
एैसा लग रहा था की वो चूचियों की दरार में डूब जाना चाहता है शायद मेरा गदराया जवानी देख कर अपने आप में काबू नहीं कर पा रहा था
मैं अब कूकिंग के लिए किचन में चली आई
सब लोग बाते कर रहे थे, मैं यहीं से सुन रही थी
मां- अरे कोई बात नहीं मोहित, विक्की क्यों होटल में रूकेगा मैं तुम्हारी दीदी नहीं हूं क्या
मोहित - नहीं, दीदी मैं आपलोगो को परेशान नहीं करना चाहता और 1/2 हफ्ते में उसे कंपनी के ओर से प्लैट मिल ही जायेगा
मां- नहीं नहीं, जबतक प्लैट नहीं मिलता तबतक वो यहीं रहेगा और कमरे की कमी थोडी है 2 कमरा तो खाली ही पड़ा है
मोहित - जैसी आपकी मर्ज़ी दीदी, अच्छा कल मैं सुबह ही चला जाऊगा मेरा भी आफिस है 10 बजे तक पुहंच जाऊंगा
मां- ठीक है, और अंजू के मामा से कहना की भई दीदी गुस्सा कर रही थी वो क्यों नहीं आया जब घर के कार से आ रहे हो तब
मोहित -जी दीदी मैंने बहुत कहा पर कह रहा था कि अगली बार साथ में चलेंगे, अब तो आना जाना लगा रहेगा
मैं किचन से ही बोली खाना लगा दूं
मां ने कहा हां
फिर हम सब डिनर करके सब अपने अपने कमरे में सोने की तैयारी करने लगे
मां ने मोहित और विक्की को उनका कमरा दिखा दिया
मां भी अपने कमरे में चली गई
मैं रात में हमेशा जालीदार नाइटी या कभी कभी केवल ब्रा पैंटी में सो जाती हूं
पर आज 1गुलाबी रंग की सॉट गाउन
पहन ली

रात में बहुत ज्यादा गरमी लगने लगा तो गाऊन भी निकाल दिया और मैं पूरी तरह से नंगी अवस्था में बेड पर सो गई

करीब रात 3 बजे बहुत जोर की प्यास लगी तो मैंनें उठकर केवल ब्रा पैंटी पहन के किचन में चली गई पानी पीने
पानी पी कर जैसे ही निकली उसी समय शायद प्यास के मारे मोहित मामा जी भी किचन की ओर आ रहे थे और हम आपस में टकरा गये
मैं तो गिरने वाली ही थी मोहित मामा ने पकड़ कर गिरने बचा लिया

मैं भी मामा जी के कंधो के कस कर जकड़ लिया
मामा जी हाथ पीछे मांसल गांड पर था
मेरा चूची मोहित मामा के सीने में धंस गया
मैं संभलने के बाद अलग हुई
मोहित मामा -सॉरी वो प्यास लगी थी बहुत जोर की
मोहित मामा जी मेरे अंगो को प्यासी निगाहो से देखने लगे
मैं शरमा गई और जाने के लिए मुडी ही थी कि, अचानक मामा के दोस्त ने मुझे अपनी कंधो पर उठा लिया साथ ही मेरी पैंटी उतार कर फेंक दिया और कॉमन बाथरूम की ओर चल दिये मैं -ये कर रहे हो, छोडो मुझे
पर वो नहीं माने
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मैं मिन्नतें करती रह गयी पर वो बाथटब में मे लिटा दिया फिर तबाडतोड किस करते रहे
मेरा दिल जोर से धडक रहा था क्योंकि मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा मन नहीं था चुदने का
पर वो जल्दबाजी में जबरदस्ती बाथटब में चोद रहे थे क्योंकि सुबह होने वाली थी और कोई उठ सकता था

मामा जी के दोस्त ने लंड को बूर से सटाया और जोर से धक्का दिया
मेरी तो जान ही निकल गया
आईईईईई.........
उफ्....
सूखे बूर में मोटा लंड चीरता हुआ अंदर समा गया
मोहित मामा जी मेरे बूर को भरपूर चोद रहे थे
समय ज्यादा नहीं था
15 मिनट तक चोदने के बाद वे सारा माल मेरे चूची पर गिरा कर तुरंत निकल गया

पर मुझे कोई संतुष्टी नहीं मिली
घर पर ही मेरा रेप हो गया था, मैं,भी चुपचाप कमरे चली गई...
To be continued.