भाग -9
मेहता सर के जाने के बाद मैं कमरे में जाकर लेटकर कल रात की घटना के बारे में सोचने लगी
मुझे अब असहज महसूस हो रहा था कि ये सब क्या हो गया मैं अपने आप में ही शर्मिंदा हो रही थी
सोचते सोचते नींद आ गई
करीब दो घंटे के बाद मैं उठी अब थोडा फ्रेस महसूस होने लगा
मैं किचन में चली आई, देखा तो मां किचन में ही थी
मैं -अरे मां तुमने क्यों तकलीफ किया मैं उठकर खाना बना देती
मां- कोई बात नहीं बेटी, मैंने देखा तुम सो रही हो तो तुम्हें जगाना नहीं चाहती थी अब कैसा लग रहा है
मैं -अब ठीक है
मां- जाओ नहा लो, बाकी केवल दाल बनाना बचा है वो मैं कर लूंगी
मैं -ठीक है मॉम, लव यू कह कर मां को पकड कर उसके गाल पर 1 प्पपी दे दी
मां- चल पगली, जा अब
हंसते हुए मां ने कहा
मैं भी नहाने के लिए बाथरूम में आ गई और
मैं अपने सारे कपड़े उतारे बाथटब में नहाने लगी

ठंडे पानी में बहुत अच्छा लग रहा था
नहाते समय मैं ,हाथों में जैसे ही अपने चूची को ली और फिर धीरे से सहलाने लगी
धीरे धीरे मेरे सीने में गुलाबी निप्पल एकदम से खड़े हो गये
मैं निप्पल से छेड़छाड़ कर रही थी, और ख्यालों में खोती जा रही थी
एैसा लग रहा था की कोई जवान मर्द मेरे साथ बाथटब में है और मेरे चूची से खिलवाड़ कर रहा है
मैं -उफ्फ.......... आह आह... हह...
1 मीठी सी लहर दौड रही थी मेरे गोरे बदन पर
मेरा एक हाथ सरकता हुआ अपने आप ही मेरी जवानी (बूर) की खोज में जाने लगा
उईईई........ हम्म....... आह....
बडा प्यारा एहसास होने लगा
बूर में मेरी उंगलियों का स्पर्श होते ही लगा कि पानी में करंट दौड रहा है
ठंडे पानी में भी मेरा अंग अंग पूरा गरम हो रहा था
उंगलियों ने बूर को खुरेदना चालू किया और 1हाथ बारी बारी से बूब्स को सहलाना दबाना चालू रखा
मैं अपने बूर में अंगुली डाल कर अंदर बाहर तेजी से करने लगी
मेरा होश ठीकाना सब गुम हो गया था
उई...... आउ..........
आह....... ह..... हह....... हम्म.........
लगा कोई भरपूर चोद रहा है
बूर से जवानी का रस पूरी तरह से बह रहा था
मैं अब चरम पर पुहचने वाली हूं
आह....
उम्म....... मम....... आई.......
आ............ आह......
मेरे सिसकारी गूंजने लगा बाथरूम में
और उंगली के झटके के साथ
बूर से सारा माल की धार बहने लगा
20 मिनट तक हाथों से चुद कर मैं झड़ चुकी थी
नहा कर बाहर आने पर मां ने बोला
मां- बहुत देर लगा तुम्हें आज बाथरूम में
और ये क्या आवाज क्यों कि
(झडते समय मैं जोर चिल्लाई थी तो लगता है मां ने सुन लिया था)
मैं सहम गई, फिर संभल कर बोली
मैं-मां वो 1 छिपकली आ गया था बाथरूम में इसलिए मेरे मुंह से आवाज निकली
बोलकर कमरे में चली गई
लंच करने के बाद असमंजस में थी कि कॉलेज जाऊ या नहीं क्योंकि मेरा लेक्चर क्लास तो अब था नहीं
मैं सोच ही रही थी की मेहता सर का फोन आ गया
मैं -हलो, सर
सर- अंजू तुम कॉलेज नहीं पुहंची
मैं - मेरा मन नहीं कर रहा है सर और लेक्चर क्लास भी मेरा 11 बजे से होता है
सर- पर तुमने कहा था कि दोपहर के बाद आऊगी
मैं - पर अब जा कर क्या करूंगी
सर- एैसे ही, मैं तो इंतजार कर रहा हूँ
मैं - किसका
सर- तुम्हारा
मैं -क्यो सर
सर- मन नहीं लग रहा था, इसलिए
मैं - तो अब बाते कर रह रही हूं मन लग जायेगा आप का
सर- पर सामने बैठ कर बात करने का मजा ही अलग है
मैं - सर मैं अापकी बीबी तो हूं नहीं,बैठकर बातें गर्लफ्रेंड या बीबी से की जाती है सर
बोलकर मैं जोर से हंस पडी...
सर- (थोड़ा उदासी भरे लब्जो में कहा) हां क्या करू दुनिया में अकेला हो गया हूं
मैं -सॉरी सर, मुझे आपको एैसा नहीं बोलना चाहिए
सर- नहीं नहीं कोई बात नहीं, अच्छा लंच हुआ
मैं -हां, और आपका
सर- कैंटीन से मंगा लिया था
मैं -गुड बॉय
अचानक ही मेरे मुंह से बॉय शब्द निकल गया
सर- बदन का दर्द कैसा है
मैं - नहाने के बाद से अच्छा लग रहा है
सर- वो, शावर का पानी लगते ही दर्द दूर
मैं शरमा गई
सर- बहुत गरमी लग रही है
मैं - ए. सी खराब हो गया है क्या
सर- हां, तुम तो मजे में हो न
मैं -यहां,पर भी पंखा ही चल रहा है
सर- तो, हवा से तुम्हारी जुल्फ और साड़ी के आंचल लहरा रहे होगें
सर रोमांटिक मुंड में आने लगे
मैं - नहीं मैं घर पर साडी नहीं पहनती वो केवल बाहर के लिए
सर- तो क्या तुमने कुछ भी नहीं...........
मैं -छी....... कैसा बोल रहे हैं आप
सर- अच्छा क्या पहनी हो तुम
मैं -वो 1वनपीस शॉट ड्रेस में हूं
सर- विडियो कॉल करू
मैं -नहीं नहीं, मां ने देख लिया तो
सर- अच्छा अपना फोटो भेजो न
मैं -नो सर
सर- अंजू प्लीज
मैं -ओ. के सर पर आप उसे डिलिट कर देना
सर- कर दूंगा बाबा, पहले देख तो लू
मैं सर को नाराज नहीं करना चाहती थी सो क्लिक कर भेज दिया
इसमें मेरे गोरे गोरे टांगें और बूब्स के उभार साफ साफ नजर आ रहा था
सर- वाऊ, सो सेक्सी
मैं -क्या बोल रहे हैं सर
सर- सच्ची बहुत ही खूबसूरत लग रही हो
मैं -थैंक्स
सर- मन कर रहा की, तुम्हें चूम लू
मैं भी सर की बातो से रोमांचित होने लगी अब
कभी कभी पंखे के हवा से मेरी ड्रेस उड रही थी और मेरे गोरे मांसल जाघें दिखने लगती
एैसा लग रहा था कि वो सामने बैठे हैं
मैं -चूम लो सर जी
सर- कहां पर चूमू
मैं -जहां आपका दिल करे
सर- लो तेरे होठों को चूमुंगा और चूस रहा हूँ
मैं -उम्म......
मेरी पलकें बंद होने लगी
सर ने फिर कहा
अब मैं धीरे से तेरे ड्रेस की स्ट्रेप को हटा रहा हूँ
मैं (फोन पर ही)- हां निकाल दो
सर- आह.... क्या बडी बडी चूची है
सुनकर मैने ही स्ट्रेप को नीचे कर दिया लगा की सर ने किया जिससे मेरे बूब्स आजाद हो कर बाहर आये
मेरे निप्पल भी खड़े हो कर सासें लेने लगे
सर- मेरे होठ अब तेरे चूची को चूस रहा
जैसे पके आम को दबा दबा कर चूसा जाता है
मैं -आह्ह...... जी भर कर चूस लो हह... हह...
सर- अब तेरे बदन पर केवल 1 पारदर्शी पैंटी रह गयी और मैं तेरे पूरे गोरे गोरे बदन को चूमता हुआ
उफ्फ....... आह........
क्या संगमरमर सा बदन है
मेरे मुंह से सिसकारी निकलती जा रही थी
मैं -आऊच..... उईई.......... आ..... आह...
मैं अब वाकई में केवल पैंटी में ही थी पूरे कपड़े उतारे और फेंक दिया 1 कोने में

उधर मेहता सर ने भी शायद अपने कपड़े उतारे दिये थे

सर ने 1पिक भेजा देखा तो मेहता सर अपने लंड को पकडे हुए थे
बहुत मोटा लंड लग रहा था
मैं -हम्म उसके बाद...
सर- तेरी पैटीं को अपने दातों से पकडकर खींच रहा हूँ
मैं -उई मां....... मत खीचों पैंटी को
सर ने फोन पर ही मुझे नंगा कर दिया इघर मैने अपना पैंटी उतार दिया
मैं नंगी अवस्था में बेड पर थी और सारा ईमेंजिग कर रही थी
सर- अपना भी तस्वीर भेजो न डियर अंजू
मैंने तुरंत ही अपना नंगा बदन सर के मोबाइल पर भेज दिया

सर- मैं लंड को तेरे होठों में दे रहा हूँ
मैं -हूं, बोलकर चूसने लगी चप चप की आवाज सर सुन रहे थे
सर- आह... और चूसो.. बहुत सुंदर लग रहा है
आऊ.... वो... हह....... आह....
लगा की सच में चूस रही हूं क्योंकि मेरा मुह लार से भर गया
मेरे बूर से भी रस टपक रहा था अब
सर- तेरी बूर की सुगंध मेरे नाक में आ रही है, वाह अब अंजू मैं तेरा बूर चाट रहा हूँ
सुनकर लगा की चींटी रेंग रही है बूर में
उफ्..... आह...
हां और चूसो ,बूर को
सर- चपड चपड.......
मैं -ईई.... आ...... उई... मर गई
आह.........
बूरा मेरा पूरा चपचपा गया था कामरस में
सर- मेरा लंड तेरी निप्पल को चूमा रहा है और सुनकर मेरे गोरे गदराये बदन में सिरसिरी होने लगी
सर- इसके बाद तुम पैरो से लंड को सहला रही हो
अब तो मुझे कुछ एैसा फील होने लगा आप सभी देख लिजिए कैसे एहसास हुआ मुझे उस समय
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मैं -और उसके बाद....
सर- लंड का सुगंधित बूर से मिलन होने जा रहा है
कुछ एहसास हुआ बूर में
मैं -आह.... हम्म.
सर- क्या
मैं -लंड बूर को चूम लिया सर आई......... हूहू..... उम्म.....
सर- आह.... लंड पूरा समा गया बूर के अंदर आह... पूरा चोद रहा हूँ रानी तूझे
मैं -जोर जोर से आह...... ह........ हा.....
उम्म...........
मेरी और सर की सिसकारियां फोन पर टकरा रही थी
मौहल पूरा गरम हो गया क्योंकि सर जी भी उधर लंड को तेजी से हिलाकर मुठ मार रहे थे और मेैं यहां बूर में मोटा खीरा (पहले ही किचन से ले आई थी )डाल कर चुद रही थी
एकदम से लगता था कि सर ही चोद रहे हैं
दोनों एक साथ उु उ......... आ....... आ........
आह......... उईई.... ई... ई.... आऊ.....
हम्म ऊफ...................... ई
आह... आह..... आ...... हा......... आह
उफ्फ...
सर सामने रहते तो इसी तरह से चोदते
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थोडी देर बाद मैं झड चुकी उधर सर ने मुठ मार के सारा वीर्य अपने ऑफिस के टेबल पर गिरा दिया था
आज दो बार घर में ही मैं उंगलियों से झड़ चुकी थी, मेरी सांसे भी काफी तेज रफ्तार से चल रही थी
सर (हांफते हुए) - मजा आ गया
मैं (धीरे से) -हूं
सर- काश तुम सामने होती
मैं (हंसकर) -ललचाने के इरादे से बोली, हम्म तो आईये न शाम को रात में दूंगी
सर- सच में आ जाए क्या
मैं -नहीं मजाक कर रही थी
मैं -सर पता ही नहीं चला 3 घंटे हो गये रखती हूं मां जी के उठने से पहले सारा बिस्तर ठीक करना होगा
सर- चाट के साफ कर लो न
मैं (गुस्से से) -आप ही चाट कर साफ कर लिजिए
सर- अच्छा नाराज मत हो ,कब दोगी चोदने बहुत मन कर रहा है
मैं -कल रात में दी तो थी, सर प्लीज अब ये सब ठीक नहीं हुआ मेरी अभी शादी नहीं हुई और गलती से हो गया
सर- अरे मैं करवा दूंगा तेरी शादी, केवल बीच बीच में मुझसे चुदवाते रहना, तुम्हें 1साथ दो दो लंड का मजा मिलेगा
मैं- छी, बहुत कमीने है आप सर
मैं -रखती हूं मैं अब जाईये घर आप भी और हां रात में मेरी तस्वीर देखकर मुठकर मार लेना और सो जाना
सर- ठीक है
मैं -एक बात तो भूल गयी, डीलिट कर देना सर मेरी सारी फोटो
सर- हां ठीक है, बॉय
मैं -ओ. के बॉय
मां के उठने के पहले रूम साफ किया और 1बार नहाऩे चली गई मेरी बूर में झांटे उग आई थी 1 हफ्ते पहले साफ किया था
मैं बडबडाई आज नहीं दूसरे दिन बूर चिकना करूंगी फिर नंगे ही कमरे की ओर जाने लगी

मैं चेंज कर हॉल में पुहंची, थोडी देर में मां भी उठकर हॉल में आई
मैं टीवी शो देखरही थी
मां- आ गई कॉलेज से
मैं -नहीं गयी थी, सो गई थी
मां- फिर कपड़े कैसे बदल लिए, मैनें सोचा की तुम कॉलेज से अभी आई हो
मैं क्या बोलती फिरभी
मैं -बात घुमाते हुए कहा मां वो गरमी लग रही थी तो मैंऩे फिर से नहा लिया
मां- हां गरमी तो बहुत हैं ,एककाम कर तेरी पहली पगार से 1 ए. सी ले लो अपने कमरे के लिए
मैं -नहीं मां, पहले 1 लेकर हॉल में लगा दूंगी सारे गेस्ट भी आते रहते हैं
मां- हां वो भी ठीक कहा अंजू बेटी तूने
मां- मैं टहल कर आती हुं बेटा, बाहर का हवा में थोडा घूम लू
मैं -हां पर जल्दी आना ,बैठ मत जाना कविता आंटी के यहां
मां- हां हां जल्दी आ जाऊगी बाबा
बोलकर मां निकल गई और
मैनें सोचा की अभी बहुत समय है बाद में गरम गरम खाना बना लूंगी और मैं छत पर आकर रोड का नजारा देख कर मन बहलाने लगी
और सोचने लगी की आज रात में मेहता सर अपने सपने में मुझे ऐसे ही गोद में लेकर मेरी कामुक बुर
को चोदेंगे

मेरी चूत फिर से पनियानी लगी
To be continued.......